Saturday, January 4, 2014

FUN-MAZA-MASTI पंडित & शीला पार्ट--46

FUN-MAZA-MASTI
 पंडित &  शीला पार्ट--46

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गतांक से आगे ......................
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 गिरधर के घर से निकल कर पंडित जी ने नूरी को उसके घर के बाहर तक छोड़ा और फिर अपने घर की तरफ चल दिए ..

अगले दिन नूरी अपने शोहर के घर के लिए रवाना हो गयी .

पंडित जी भी जानते थे की अब उनकी दिनचर्या पहले जैसी व्यस्त नहीं रहेगी ..क्योंकि नूरी अपने ससुराल जा चुकी थी और माधवी और रितु को घर पर ही खुलकर चुदाई करने को मिल रही थी .

पंडित जी का अगला दिन बिना चूत मारे बीता ..जो इतने दिनों के बाद पहला मौका था ... पर इतने दिनों तक की लगातार चुदाई के बाद उनका जिस्म चूत मारने की एक मशीन बन चुका था, और चूत ना मिलने से उनके अन्दर एक अजीब सी बेचैनी होने लगी ..ये कैसा केमिकल रिएक्शन हुआ था उनके जिस्म का इतनी चूतें मारकर ..रात भर उन्हें नींद नहीं आई ...आखिरकार उन्हें अपना पहला शिकार शीला ही याद आई पर वो भी कई दिनों से मंदिर नहीं आई थी . उन्होंने निश्चय कर लिया की कल सुबह सब काम मिप्ता कर सबसे पहले उसके घर जायेंगे ..आखिर पता तो चले की वो इतने दिनों से आ क्यों नहीं रही .

सुबह मंदिर के काम निपटा कर पंडित जी शीला के घर की तरफ चल दिए. दरवाजा उसकी माँ ने खोला ..

माँ : "अरे पंडित जी ...आप ..हमारे अहोभाग्य ...आइये ..पधारिये ..''

पंडित जी अन्दर आ गए ..और बैठ गए , शीला कहीं भी दिखाई नहीं दे रही थी .

माँ : "पंडित जी ..आपने तो हमारी बेटी को एक नया जीवन दिया है ...पहले वो इतनी बुझी - २ सी रहती थी, पर जब से आपने पूजा - पाठ करके उसके अन्दर की सोयी हुई आत्मा को जगाया है, वो फिर से जीने लगी है ..आपका धन्यवाद देने के लिए मेरे पास शब्द ही नहीं है ..''

पंडित : "अरे नहीं मांजी ..आप ऐसा मत कहिये ..ये तो मेरा फ़र्ज़ था ..उसकी आत्मा का परमात्मा से मिलन करवाकर मैंने उसके अन्दर सिर्फ चेतना जगाई है ..बाकी तो उसकी खुद की करनी है ..वैसे कई दिनों से वो मंदिर भी नहीं आई ..उसको एक विधि बतानी थी मैंने ..बस उसी के लिए आया था ..''

माँ : "ओहो ...दरअसल ..उसकी तबीयत ठीक नहीं है दो दिनों से ..मैं भी रोज -२ छुट्टी नहीं ले सकती थी स्कूल से ..उसकी छोटी बहन को भी आना था गाँव से ..इसलिए नहीं आई वो ..''

पंडित : "छोटी बहन ...?? पर उसके बारे में कभी बताया नहीं पहले ..वो तो हमेशा कहती है की वो अकेली बेटी है आपकी ." पंडित जी हेरान थे ..

माँ : "अब क्या बताऊ पंडित जी ...वो ...वो ...दरअसल ...''

कहते -२ उसकी माँ का चेहरा लाल सुर्ख होने लगा ..

माँ : "दरअसल ...उसका जन्म शीला के जन्म के 9 सालों के बाद हुआ था ..और घर पर जवान बेटी के रहते हुए मैं फिर से माँ बनने जा रही थी ..इसलिए मैं अपने गाँव चली गयी थी और उसकी डिलीवरी वहीँ करवा कर, उसे अपनी बहन की झोली में डालकर आ गयी थी ..यहाँ शहर में कोई बातें न बनाए , इसलिए किसी को पता नहीं है ..आपसे भी विनती है की आप किसी को मत बताइयेगा ..आपसे तो मैं ये सब छुपा नहीं सकती ..आप तो मन की बातें भी जान लेते हैं ..''

शीला ने शायद पंडित जी की मन की बात जानने वाली बात बता रखी थी अपनी माँ को ..

पंडित जी मन ही मन उसकी उम्र की केलकुलेशन करने लगे ..

अभी शीला लगभग 25 साल की है ..और उसकी बहन 9 साल छोटी है ...यानी ...वाह ..जवानी की देहलीज पर पाँव रख रही योवना होगी वो ..उसको तो देखना ही पड़ेगा ..

पंडित : "अच्छा ...कोई बात नहीं ..आप निश्चिंत रहिये ..मैं किसी से भी इस बात का
नहीं करूँगा ..वैसे शीला है कहाँ ...क्या मैं उसको देख सकता हु ..''

माँ : "हाँ ..हाँ ...क्यों नहीं ..मैं अभी हु उसको ...तब तक मैं आपके लिए पानी भिजवाती हु ..''

और इतना कहकर वो उठी और जोर से आवाज देकर बोली : "अरी कोमल .....ओ कोमल ...जल्दी से एक ठंडा गिलास पानी लेकर आ ...पंडित जी आयें हैं ..''

पंडित मन ही मन उसका नाम सुनकर खुश होने लगे ...नाम कोमल है ..वो भी कोमल होगी ..शीला भी कम नहीं है ..उसकी छोटी बहन तो कमाल होनी चाहिए ..

वो सोच ही रहे थे की ऊपर से भागते हुए क़दमों की आहट सुनकर वो चोकन्ने हो गए ..और उधर ही देखने लगे ..उन्हें पक्का विशवास था की कोमल ही होगी ..

वो कोमल ही थी ..

और जैसे ही वो नीचे आई, पंडित जी की आँखें खुली की खुली रह गयी ...इतनी गोरी चिट्टी लड़की उन्होंने आज तक नहीं देखि थी ..टीके नैन नक्श ..छोटे- २ बूब्स ..टी शर्ट और जींस पहनी हुई थी उसने ...पतले होंठों पर हलकी लिपस्टिक ..शराबी आँखों में काला काजल ..

वो तो किसी भी एंगल से अपनी माँ की बेटी नहीं लग रही थी ..पर हां ...शीला की छोटी बहन जरुर लग रही थी ..

और उसके पीछे -२ शीला भी भागती हुई नीचे आई ..और उसने आते ही कोमल को वापिस ऊपर जाने को कहा ..वो बिना कुछ कहे ऊपर चली गयी .


 माँ : "अरे शीला ...तू क्यों आई नीचे ..कोमल को बुलाया था मैंने तो ..तेरी तबीयत ठीक नहीं है ...''

शीला पंडित जी को देखकर हडबडा सी रही थी ...
वो बोली : "जी ..जी ... माँ ...वो ...अब ठीक है ...इसलिए आई .....वो कोमल किचन के काम नहीं करती ...आपको तो पता ही है ..''

इतना कहकर वो जल्दी से किचन में गयी और पानी ले आई .

पंडित जी को उसका व्यवहार अजीब सा लगा ..उसके चेहरे को देखकर लग नहीं रहा था की वो बीमार है ..जरुर कुछ गड़बड़ है ...

माँ : "ये कोमल भी ना ...जैसे - २ जवान हो रही है, आलसी होती जा रही है ..पता नहीं क्या होगा इसका ..मैं देखती हु ..''

इतना कहकर वो ऊपर जाने लगी ..तो शीला ने टोक दिया : "अरे नहीं माँ ...तुम रहने दो ...मैं कर रही हु न ....''

पंडित जी को तो ऐसा प्रतीत हुआ जैसे शीला खुद ये नहीं चाहती की कोमल पंडित जी के सामने आये . पर वो ऐसा क्यों कर रही थी .

उसकी माँ बुदबुदाती हुई अन्दर चली गयी ..

उसके जाते ही शीला पंडित जी के पास आकर बैठ गयी ..वो पंडित जी से नजरें नहीं मिला रही थी ..

पंडित जी भी बड़े चालाक थे ..उन्होंने शीला से कहा : "क्या बात है शीला ..तुम इतने दिनों से आई नहीं मंदिर में ..तुम्हारी तबीयत तो ठीक लग रही है ...''

शीला : "वो ...बस ....ऐसे ही ....पंडित जी ....''

पंडित : "देखो ...मुझसे कोई बात छुपाने का कोई फायेदा नहीं है ..जलदो बताओ ...क्या चल रहा है तुम्हारे अन्दर ...''

पर शीला भी कम नहीं थी ...वो बोली : "कक्क ...कुछ नहीं पंडित जी ....वो मेरी तबीयत भी ठीक नहीं थी ..और वो छोटी भी आई हुई थी ..इसलिए ..''

पंडित : "ह्म्म्म ...पर इस छोटी के बारे में तुमने पहले कभी नहीं बताया ...मुझसे छुपा कर रखना चाहती हो क्या ...''

पंडित जी की बात सुनकर वो ऐसे चोंकी जैसे पंडित जी ने उसकी चोरी पकड़ ली हो ..वो फटी हुई आँखों से पंडित जी को देखती रह गयी, उसके मुंह से कुछ नहीं निकला ..

पंडित जी समझ गए उसकी दुविधा और उसके मंदिर ना आने का कारण ..वो अपनी बहन को पंडित जी के साए से भी बचा कर रखना चाहती थी ..और बचाए भी क्यों ना , वो पंडित जी को पूरी तरह से जान चुकी थी, उनकी चुदाई कई बार देख चुकी थी ..और उनके हुनर से वो अच्छी तरह से वाकीफ थी ..वो जानती थी की पंडित जी की नजरों में अगर उसकी बहन आ गयी तो कहीं पंडित जी उसके साथ भी .....इसलिए जब से कोमल आई थी, वो पंडित जी से मिलने भी नहीं गयी थी ..घर पर भी बीमारी का बहाना बना दिया था ..ताकि उसके घर पर भी कोई ना बोले की कहाँ तो रोज , दिन - रात मंदिर के चक्कर लगाती थी और कहाँ बहन के आते ही सब दिनचर्या बदल गयी .

पर उसे क्या पता था की पंडित जी घर ही आ जायेंगे ..और कोमल को देख भी लेंगे अचानक ..पर पंडित जी तो जैसे अपने मन में कोमल को चोदने का प्लान बना चुके थे ..

पंडित जी की आँखों में छिपे इरादों को भांपकर शीला एक दम से पंडित जी के पैरों में गिर पड़ी : "पंडित जी ....आप जो सोच रहे हैं ..वो भूल जाइये ...वो बच्ची है अभी ...उसे कुछ भी पता नहीं है इन चीजों के बारे में ..आप ....आप ...चिंता मत करिए ..मैं आउंगी अभी ...बस थोड़ी देर में ...आप चलिए ...मैं आती हु आपके कमरे में ....आप जो कहेंगे मैं करुँगी ..जिसके साथ कहेंगे मैं करुँगी ...पर ....पर आप ....कोमल ....के बारे में ....प्लीस ...कुछ न सोचिये ...''

अपनी बहन को बचाने के लिए शीला भावुक सी होकर रोने लगी ....उसके दिल में छुपे बहन के प्रति प्यार को देखकर पंडित जी भी जान गए की अगर जबरदस्ती करी तो शीला भी हाथ से निकल जायेगी ..

वो सोचने लगे ...अपने मन में योजनायें बनाने लगे ...बात अब उनकी आन पर आ गयी थी ..




 पंडित जी वहां से निकलकर अपने घर की तरफ चल दिए .

एक बात तो पंडित जी जान ही चुके थे की शीला अपनी छोटी बहन को उनसे बचाना चाहती है ..और उसकी हडबडाहट और रवैय्या देखकर वो सब साफ़ महसूस हो रहा था .

वो घर पहुंचकर नहा धोकर बैठ गए और शीला का इन्तजार करने लगे और उन्हें ज्यादा इन्तजार भी नहीं करना पड़ा शीला लगभग भागती हुई वहां पहुंची और जल्दी से दरवाजा बंद करके अपनी साडी खोलने लगी ..

पेटीकोट और कसे हुए ब्लाउस में वो कमाल की लग रही थी ..पर पंडित जी का इरादा कुछ और था ..वो आराम से बैठे रहे .

शीला ने उनकी तरफ देखा ..और धीरे-२ अपने ब्लाउस के बटन खोलने लगी ..पंडित जी किसी राजा की तरह से बैठकर उसे बेपर्दा होते हुए देख रहे थे ..

ब्लाउस के निकलते ही उसकी ब्लेक और रेड कलर की ब्रा सामने आ गयी ..ये कोई नयी ब्रा थी, पंडित जी ने आजतक नहीं देखि थी ..पर उसे देखकर भी पंडित जी अपनी जगह से हिले नहीं ..वो चुपचाप बैठकर देखते रहे .

उसके बाद जैसे ही शीला ने अपना पेटीकोट नीचे गिराया , पंडित जी खुद गिरते-२ बचे ..उसकी मेचिंग पेंटी थी ....उसकी चूत जिसे उन्होंने ना जाने कितनी बार चूसा था, मारा था ,उसकी पतली सी पेंटी के अन्दर से भी उभर कर ऐसे लश्कारे मार रही थी जैसे हीरे की खान हो अन्दर ..उसकी चूत के बोर्डर पर गाड़े पानी का झरना रुका हुआ सा प्रतीत हो रहा था ..पंडित का मन तो कर रहा था की जाए और उस झरने में नहा ले ..पर अभी उसे थोड़ी अकड़ दिखानी थी ..

सिर्फ ब्रा-पेंटी पहनी हुई शीला किसी सेक्स बम जैसी लग रही थी ...जब से वो आई थी, दोनों के बीच कोई बातचीत नहीं हुई थी ..और अब ये बात शीला को खटक रही थी ..वो लगभग नंगी होने के कगार पर थी और पंडित जी अपनी जगह से हिले भी नहीं थे ..उसे तो लगा था की पंडित जी उसे ऐसी हालत में देखकर भूखे शेर की तरह उसपर टूट पड़ेंगे ..पर ऐसा हुआ नहीं .

वो धीरे से मुस्कुराती हुई आई और पंडित जी के सामने बेड पर आकर बैठ गयी .


शीला : "क्या हुआ पंडित जी ..आज आप मुझे ऐसी हालत में देखकर भी आराम से बैठे हुए हैं ..''

उसने अपने मोटे-२ मुम्मों की तरफ इशारा करते हुए पंडित जी से कहा ..


 पंडित : "तुमने आते ही अपने कपडे उतारने शुरू कर दिए ..मैंने कब कहा की आज मैं तुम्हारी चूत मारने के मूड में हु ..''

पंडित जी ने अपनी ईगो दिखाई ..

शीला समझ गयी की पंडित जी कोमल वाली बात को लेकर अभी तक उससे नाराज है ..

शीला : "पंडित जी ..आप समझने की कोशिश करिए ..उसे मैंने अपनी बेटी की तरह पाला है .. और उसकी उम्र ही क्या है अभी ..इसलिए मैंने ये सब किया ...''

पंडित : "पर मैंने तो तुम्हारी बहन का जिक्र भी नहीं किया ..तुम अगर उसकी हिफाजत माँ बनकर करना चाहती हो तो मुझे क्या प्रॉब्लम हो सकती है ..मुझे तो बस इस बात की शिकायत है की तुम इतने दिनों तक आई नहीं मेरे पास ..''

पंडित जी ने बड़ी चालाकी से बात पलटी ..

शीला भी अब निश्चिन्त सी हो गयी ..और मुस्कुराते हुए बोली : "मुझे तो बस उसी बात की चिंता थी ..वर्ना जब से आपसे मिलन हुआ है, उस दिन से रोज मुझे आपका महाराज मेरी रानी के अन्दर चाहिए ..''

वो किसी रंडी की तरह से अपनी टांगो को फेला कर अपनी चूत को पेंटी के ऊपर से ही रगड़ने लगी ..

अब पंडित जी का मनोबल भी टूटता सा दिख रहा था ..

पंडित : "पर फिर भी ..तुम्हे आकर मुझे बताना तो चाहिए था ना ..''

पंडित अभी भी भाव खा रहा था .

शीला ने अपनी ब्रा के दोनों स्ट्रेप अपने कंधे से गिरा दिए ..और पंडित जी की तरफ खिसक आई ..और बोली : " तो मेरी गलती की सजा इन्हें क्यों दे रहे हो आप ...इनका क्या कसूर है इसमें ..''

उसके दोनों सफ़ेद और मोटे मुम्मे छलक कर बाहर निकल आये ..और उनपर लगे हुए भूरे निप्पल अपने हाथों में पकड़कर जैसे ही शीला ने मसला ..वो खुद ही कराह उठी ..शायद आवेश में आकर थोड़े जोर से मसल दिया था उन्हें ..

शीला ने अपनी पेंटी के कपडे को ऊपर से पकड़कर जोर से खींचा तो वो पतला सा होकर चूत की दरार के अन्दर घुस गया ..और चूत के दोनों होंठ पतले कपडे के दोनों तरफ फेलकर फुफकारने लगे ..और वो बोली : "और इसका भी क्या कसूर है ..मेरी नासमझी की सजा इसको पहले से ही मिल रही है ..अब तो ये बर्दाशत नहीं कर पाएगी ..देखिये ..देखिये न ...कैसे आपको देखते ही इसके मुंह में पानी आ गया है ..''

उसकी साँसे तेजी से चलने लगी ..चार दिन का गुबार अन्दर इकठ्ठा हुआ पड़ा था ..वो उसके मुंह की गर्म साँसों और चूत के गाड़े पानी के रूप में बाहर निकलने लगा ..

शीला : "ओह्ह्ह्ह्ह्ह .......उम्म्म्म्म ...पंडित जी ......अब और कितना तरसाओगे ....निकालो अपना नाग ...निकालो ना ....''

पंडित जी ने कुछ नहीं कहा और अपनी टाँगे फेला दी शीला के सामने ..

वो किसी बिल्ली की तरह वहां झपटी और आनन् फानन में उनकी धोती और कच्छे को निकाल फेंका ..और जैसे ही उसे सामने पंडित जी का नाग आया, वो उसे अपने मुंह के अन्दर ऐसे ले गयी जैसे ऑक्सीजन का पाईप हो ..और अन्दर लेते ही जोर-२ से साँसे लेते हुए वो उसे चूसने लगी ..

''उम्म्म्म्म्म। ....स्स्स्स्स्स्स ......कितना मिस्स किया है मैंने ये सब .....ये मुझे ही पता है ...पुच्च्छ्ह्ह ....''

पंडित जी की तो जैसे शामत आ गयी थी ..उत्तेजना के ज्वार भाटे में बहकर वो अपने दांतों का भी इस्तेमाल कर रही थी ..जिसकी वजह से पंडित जी को परेशानी हो रही थी ..









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