Raj-Sharma-stories
जिस्म की प्यास
घर से इन्स्टिट्यूट और इन्स्टिट्यूट से घर , यही थी मेरी जिंदगी. अपने सपनो की ही दुनिया में खोई रहती थी. एक जानूँ सॉवॅर था मुज पे. बहुत बड़ी फॅशन डिज़ाइनर बनने का. मा और भाई भी मेरा पूरा साथ देते थे. भाई तो जब भी घर आता, घंटो मेरे साथ बैठ के मेरे डिज़ाइन डिसकस करता, कुछ को अच्छा कहता, कुछ को बहुत बाड़िया और कुछ में तो इतनी काम्यन निकलता के मूज़े हैरानी होती, उसे डिज़ाइन्स के बारे में इतनी पहचान कैसे है. वो मार्केटिंग में स्पेशलाइज़ कर रहा था.
म्बबस की पड़ाई में इतना ज़ोर होता है पर फिर भी मेरी छोटी बहन रिया सनडे को मेरे डिज़ाइन पकड़ के बैठ जाती और अपनी राई देती, कई बार तो उसकी राई बिल्कुल किसी प्रोफेशनल डिज़ाइनर की तरहा होती.
मा मुझे किचन में बिल्कुल काम नही करने देती थी, बस रोज सुबह की छाई बनाना मेरी ड्यूटी थी, क्यूंकी पापा सुबह मेरे हाथ की छाई पीना पसंद करते थे. कहते हैं दिन अच्छा निकलता है और मूज़े भी बहुत खुशी होती.
मेरी सारी फ्रेंड्स अपने बॉय फ्रेंड्स के साथ ज़यादा वक़्त गुज़रा करती थी, पर मैं लड़कों से हमेशा दूर रही. मूज़े इस बात से कोई फराक नही पड़ता था की मेरा कोई बॉय फ्रेंड नही. मुझे तो जो भी वक़्त मिलता नये नये डिज़ाइन्स सोचने में ही निकल जाता. घर से निकलती तो लड़कों की चुबती हुई नज़रें मेरा पीछा करती, मेरा जिस्म है ही इतना मस्त की देखनेवाले जलते रहते थे पर कोई मेरे पास फटकने की कोशिश नही करता था. मेरे पापा और भाई का दर सब के दिलों में रहता था. इन्सिटुते में भी लड़के मेरे आयेज पीछे रहते पर मैं कोई भाव नही देती.
बस अपनी दो फ्रेंड्स के साथ ही ज़यादा टाइम गुजरती. क्यूंकी ह्यूम ग्रूप प्रॉजेक्ट्स मिलते हैं तो ग्रूप में एक दो लड़के भी होते हैं. मैं उनसे सिर्फ़ प्रॉजेक्ट के बारे में ही बात करती थी और उनको बी पता था की अगर कोई ज़यादा आयेज बादने की कोशिश करेगा तो मैं ग्रूप ही छ्चोड़ दूँगी.. इस लिए इन दो लड़कों से मेरे दोस्ती बस काम तक ही थी,ना वो आयेज बड़े ना मैने कोई मोका दिया. धीरे धीरे गली के लड़के भी मेरी इज़्ज़त करने लगे और उनकी आँखों से वासना भारी नज़रें गायब हो गई. पर इन्स्टिट्यूट के लड़के मुझे देख कर आँहें भरते थे, बहुत कोशिश करते थे की मेरे से दोस्ती बदाएँ पर मेरा सकत रवईया उन्हे दूर ही रखता था.
मैं कभी किसी से ज़यादा बात नही करती थी बस दो टुक मतलब की बात. मेरी सहेलियाँ भी जब अपने बाय्फरेंड्स के बारे में बाते करती तो मैं उठ के चली जाती.
यूँही चल रही थी मेरी जिंदगी की एक तुफ्फान आया और मेरे जीने की रह बदल गयी.
मम्मी के कपड़े लगा रही थी एक बॉक्स दिखा जो बिल्कुल पीछे रक्खा हुआ था. मैने पहले ऐसा बॉक्स मम्मी के पास नही देखा था, अपनी जिगयसा शांत करने के लिए मैने वो बॉक्स खोल लिया तो देखा की दुनिया भर की द्वड पड़ी हुई हैं. मूज़े ताजुब हुआ की मम्मी ये द्वड अपनी अलमारी में क्यूँ रखती है. उनमे से एक द्वड पे गोआ लिखा हुआ था. मैने सोचा शायद गोआ की साइटसीयिंग के उप्पर होगी. मैने कपड़े लगाए और वो डVड ले कर अपने रूम में आ गई.
द्वड अपने लॅपटॉप पे लगाया और पहले सीन देखते ही मेरी आँखें फटी फटी रह गई. ये एक पॉर्न द्वड थी पर इस में जो दिख रहा था वो मेरे वजूद को हिला बैठा. ये डVड शायद उस वक़्त कीट ही जब हम पैदा भी नही हुए थे.
हन द्वड में मेरे पापा, मम्मी और चाचा चाची एक दूं नंगे एक दूसरे के जिस्म के साथ खेल रहे थे. मम्मी नीचे बैठ चाचा का लंड चूस रही थी और चाची मम्मी की चूत चूस रही थी और पापा चाची की चूत में अपना लंड दल के छोड़ रहे थे. मम्मी ने चूस चूस कर चाचा का लंड खड़ा कर दिया. फिर पापा ने अपना लंड चाची की चूत में से निकल लिया.
चाचा बिस्तर पे पीठ के बाल लेट गये और चाची उठ कर चाचा के लंड पे बैठती चली गई, जब चाचा का पूरा लंड चाची की चूत में समा गया तो चाची ने अपनी गॅंड इस तराहा उठाई की उसका छेड़ सॉफ सॉफ दिख रहा था, पापा चाची के पीछे चले गये और अपना लंड चाची की गंद में गुसा दिया. अब दोनो मिलके चाची को चोद रहे चाची की सिसकिया गूँज रही थी. मम्मी जो खाली हो गई थी वो चाचा के पास आ गई और चाची की तरफ मुंग करके चाचा मे मुँह पे बैठ गई.
चाच्चा नीचे से धक्के मार कर चाची की चूत में अपना लंड पेल रहे थे और मम्मी के अपने मुँह पे बैठने के बाद चाचा ने मम्मी की चूत को चाटना और चूसना शुरू कर दिया शायद अपनी जीब मम्मी की चूत में घुस्सा दी होगी क्यूंकी मम्मी ने ज़ोर की सिसकी मारी और चाची को पकड़ लिए.
मम्मी और चाची ने एक दूसरे के बूब्स पकड़े और दबाने लगी, दोनो के होंठ आपस में जुड़ गये. मम्मी की तो सिर्फ़ छूट चूसी जेया रही थी पर चाची की तो दोनो तरफ से चुदाई हो रही थी. पापा ज़ोर ज़ोर से चाची की गॅंड मार रहे थे. पापा के धक्के के साथ चाची आयेज होती और चाचा का लंड चाची की चूत में अंदर तक घुस्स जाता और जब पापा अपना लंड बाहर निकलते तो चाची अपनी गंद पीछे करती जिससे चाचा का लंड चाची की चूत से बाहर निकलता.
फिर पापा के धक्के के साथ चाचा का लंड चाची की चूत में घुस्स जाता. पापा ने अपनी स्पीड बड़ा दी और ज़ोर ज़ोर से चाची की गंद मरने लगे. नीचे से चाचा ने भी अपनी कमर उछालनी शुरू कर दी ऑरा ब तो मम्मी भी अपनी गंद चाचा के मुहन पे उप्पर नीचे करती हुई चाची की जीब को अपनी छूट में ले रही थी. पूरे कमरे में एक तुफ्फान आया हुआ था और ये तुफ्फान मेरे सर चाड रहा था. मैने पहले कभी कोई ब्लू फिल्म नही देखी थी और आज देखी भी तो उसमे सब मेरे घर के लोग ही थे. पापा केड हेक और तेज़ हो गये और थोड़ी देर में पापा अहह भरते हुए चाची की गंद में झड़ने लगे और चाचा भी तेज़ी से अपनी कमर उछलते हुए चाची की छूट में झड़ने लगे, चाची का तो बुरा हाल था, चक्का के लंड पे इतना रस छ्चोड़ रही थी जो चाचा के लंड से होता हुआ नीचे बिस्तर पे तालाब बना रहा था. इधर मम्मी भी चाचा के मुँह पे जहड़ गई और चाचा गपगाप मम्मी की चूत का सारा रस पी गये. चारों ही हानफते हुए बिस्तर पे निढाल पद गये और अपनी साँसे संभालने लगे.
अभी द्वड में और भी बहुत कुछ बाकी था. मैने वो द्वड अपनी अलमारी में छुपा दी और बातरूम भाग गई. अपने कपड़े उत्तरे और शवर के नीचे खड़ी हो गई. चारों की चुदाई का सीन अब भी मेरी आँखों के सामने घूम रहा था. मेरे जिस्म में एक आग सी लग गई थी. मेरी चूत में हज़ारों चिंतियाँ जैसे रेंग रही थी. मेरा बुरा हाल हो रहा था पर इस आग को कैसे शांत करूँ ये समझ में नही आ रहा था, मेरा हाथ अपने आप मेरी चूत पे चला गया और मैं उसपे ज़ुल्म धने लगी, मेरी उंगली मेरी चूत में घुस्स गई और मेरी एक चीख निकल पड़ी, पहली बार अपनी चूत में मेने उंगली डाली थी. फिर अपनी उंगली को अंदर बाहर करने लगी और तब तक करती रही जब तक मेरी चूत ने अपना रस नही छ्चोड़ दिया और मुझे तोड़ा सकूँ मिला.
बातरूम से आने के बाद सबसे पहले मैने वो डVड अपने लॅपटॉप पे डाउनलोड करी और फिर जल्दी से उसे उसकी जगह पे रख दिया.
बार बार वोही नज़ारे मेरी आँखों के सामने टायर रहे थे. मम्मी पापा ये सब सिर्फ़ चाचाचाची के साथ करते हैं या और लोग भी शामिल हैं? क्या ये एरफ़ एक बार हुआ था या अब भी होता है? अब मैं बच्ची तो थी नही की सेक्स के बारे मैं ना जानती हूँ.मैं अपनी सारी बातें मम्मी से किया करती थी, मम्मी मेरे लिए सबसे बड़ी दोस्त है.क्या मैं इस के बारे में भी मम्मी से पूछ सकती हूँ? शायद नही, मम्मी मेरे सामने लज्जित हो जाएगी.
फिर सचाई का कैसे पता करूँ. वो द्वड आयेज देखने की मेरी हिम्मत नही हो रही थी और अब तो मम्मी पापा किसी भी वक़्त आ सकते थे.
मैने किचन में जेया कर रात का खाना तयार किया, ताकि मम्मी वो आ कर किचन में कम ना करना पड़े. करीब एक घंटे बाद मम्मी पापा आ गये और मम्मी काफ़ी हैरान हुई की मैने खाना तयार कर रखा है और खुश भी बहुत हुई, क्यूंकी वो काफ़ी तक चुकी थी.
रात को खाना खा कर सब सोने चल दिए. मैने अपने कमरे में बिस्तर पे लेती सोचती रही की सच का कैसे पता करूँ और जो आग मेरे जिस्म में लग चुकी थी उसे कैसे शांत करूँ. दिल करा कोई ब/फ बना लेती हूँ, इतने तो पीछे पड़े हैं. पर बदनामी के दर से इस रास्ते पे जाने की हिम्मत ना हुई.
एक ही रास्ता दिख रहा था विमल मेरा बड़ा भाई. अगर मैं उसको पता लेती हूँ तो घर की बात घर में रहेगी. उसका भी कम हो जाएगा और मेरा भी. वो तो लड़का है क्या पता बाहर कितनी लड़कियाँ फसा रखी हो.
रात भर मैं सो ना सकी. अभी भाई के आने में 3 दिन बाकी पड़े थे , इन टीन दीनो में मूज़े कुछ ऐसा प्लान करना था की भाई मेरे पीछे पड़े और ये ना लगे की मैं भाई की पीछे पड़ी हूँ.
किसी भी लड़के को अपनी तरफ खींचना हो तो उसे अपने झलकियाँ दिखा कर तरसाओ वो पके आम की तरहा तुम्हाई गोध में आ गिरेगा.
मैने भी कुछ ऐसा ही सोचा. सोचते सोचते ना जाने कब मेरी आँख लग गई.
रात भर नींद तो नही आइी और सुबह मैं अपनी सवालों भारी नज़र से मा को नही देखना चाहती थी, मैं बिना कुछ खएपीए घर से चली गई. मेरी एक ही खास सहेली है कविता मैं उसके घर आ गई .
वहाँ पहुच कर पता चला की वो और उसके डॅड ही घर पे थे, उसकी मा और भाई दोनो मा के मैके गये हुए थे. दिन बातों बातों में कब गुजरा पता ही ना चला और रात को मैं उसके साथ ही उसके कमरे में सो गई.
थोड़ी देर बाद मेरी नीड खुली तो देखा कविता गायब है, सोचा बातरूम गई होगी आ जायगे जब कुछ देर और वो नही आई तो मैं कमरे से बाहर निकली और देखा की उसके डॅड के कमरे की लाइट जल रही है मेरे कदम उस तरफ बाद चले और जो देखा उसने मूज़े हिला के रख दिया.
कविता नीचे बैठी अपने डॅड का लंड चूस रही थी और उसके डॅड ने उसके चेहरे को पकड़ रखा था और अपनी कमर आयेज पीछे कर रहे थे.कविता फिर ज़ोर ज़ोर से अपने डॅड का लंड छूने लगी और थोड़ी देर में उसके डॅड झाड़ गये और कविता ने सारा रस पी लिया. फिर वो अपने डॅड के लंड को चॅट चॅट कर सॉफ करने लगी और उठ के खड़ी हो गई. उसे डॅड ने उसे अपने पास खींचा और उसके होंठों पे अपने होंठ रख दिए.
दोनो एक दूसरे के होंठों को चूसने लगे और उसके डॅड ने अपने हाथ कविता के बूब्स पर रख दिए और दबाने लगे. किटिनी ही देर दोनो एक दूसरे को चूमते रहे.फिर दोनो ने एक दूसरे के कपड़े उत्तरडाले और बिस्तर पे लेट गये. कविता अपने दाद के लंड को सहलाने लगी और वो उसके निपल को चूसने लगे,
कविता की सिसकियाँ निकालने लगी, आह आह उफ़ उफ़ ओह दाद पी जाओ मेरा दूध आह उफ़ एम्म है . वो कभी एक निपल को चूस्टे तो कभी दूसरे को और कविता सिसकती रही.
यह देख मेरा बुरा हाल हो रहा था मेरे आँखन के सामने वो द्वड घूमने लगा, अगर बाप बेटी चुदाई कर सकते हैं तो मम्मी पापा ने कौन सा पाप किया. पापा भी तो उस वक़्त चाची को चोद रहे थे चाचा के सामने.
मेरा गुस्सा मम्मी पापा के उप्पर से हट गया. कविता के ज़ोर से चिल्लाने की आवाज़ आइी तो मेरा ढयन फिर अंदर गया देखा कविता कुतिया बनी हुई है और उसके डॅड ने अपना लंड उसकी गंद मे डाल रखा है.
पहले तो कविता दर्द से चिल्ला रही थी फिर उसे मज़ा आने लगा आह आह फाड़ दो मेरी गंद आह आह छोड़ो और छोड़ो अफ अफ हाँ हाँ और ज़ोर से और ज़ोर से आह आह आह आह बेटीचोड़ छोड़ और छोड़ आह आह उम्म्म उफफफफफ्फ़ .
‘साली रंडी आज तेरा बुरा हाल कर दूँगा आह आह ले मेरा लंड ले ले साली कुटिया ले ‘
“चोद साले बहनचोड़ और चोद आाआईयईईई”
मैं हैरान खड़ी देख रही थी दोनो एक दूसरे को गलियाँ दे रहे थे.
‘मातरचोड़ मेरी चूत कौन चोदेग तेरा बाप’
उसके डॅड ने अपना लंड उसकी गॅंड से निकाला और एक झटके में उसकी चूत में घुस्सा दिया और ज़ोर ज़ोर से धक्के मरने लगे कविता भी उन्हे और उकसाती रही.
मुजसे और देखा ना गया, मैं कमरे में जेया कर अपनी चूत में उंगल करने लगी, मेरी आँखों के सामने मेरे भाई का चेहरा घूमने लगा, क्या हॅंडसम पर्सनॅलिटी है उसकी,जॉब ही उसकी ग/फ होगी वो तो मज़े लेती होगी.रात को पता नही कविता काभ मेरे पास आ कर सो गई.
सुबह मैने उस से कुछ नही कहा और अपने घर छल्ली आइी, मा ने मूज़े से बात करने की कोशिश करी पर मैं मा को अवाय्ड कर अपने कमरे मैं छल्ली गई.
अपने कमरे में आ कर मैं लेट गई और अपनी जिंदगी में आए इस तुफ्फान के बारे में सोचने लगी. इंसान ने चाहे किटिनी भी तरक्की कर ली है, रहा वोही जानवर का जानवर ही.बस कपड़े पहने शुरू कार्डिया, नये नये आविष्कार कर लिए, और एक समाज की स्थापना करली, पर जो पूर्वजों के जीन्स हुमारे अंदर कब से चले आ रहे हैं, वो कभी ना कभी कहीं ना कहीं तो सर उठाते ही हैं. फ़र्क बस इतना आ गया है, पहले कोई बंधन नही होता था, जिसको चाहा छोड़ लिया, और जिससे चाहा छुड़वा लिया. अब लोग बंद कमरों में अपनी दबी हुई इक्चाओं को पूरा करते हैं.
जैसे मेरे मा बाप और चाचा चाची कर रहे थे या अब भी कर रहे हैं. पर कल रात जो देखा वो अब तक मैं समझ नही पा रही हूँ एक बाप और बेटी अपनी वासना में लिप्त. अगर बाप बेटी इतना आयेज बड़े हुए हैं तो ज़रूर मा बेटे भी होंगे, ऐसा तो हो नही सकता की ये दोनो च्छूप कर ही करते होंगे और मा बêते को कुछ पता नही होगा. पता नही सच क्या है. पर मूज़े उनके सच से क्या लेना देना.
मुझे तो अपने घर का सच जानना है और उसके लिए मुझे मा के बहुत करीब जाना होगा.
यही सोच कर मैं नीचे गई और देखा की पापा नाश्ता कर रहे हैं, आज मैं उनके पास ही जा के बैठ गई,मैने बहुत टाइट टॉप पहना हुआ था, मेरे उरोज़ पहर की छोटी की तरहा खड़े थे.
पापा की नज़रें बार बार मेरे उरज़ोन पे आ के टिक जाती और सर झटक फिर अपना ध्यान खाने में लगा देते. मैं कनखियों से सब देख रही थी. पापा पहले भी शायद मेरे उरज़ोन को देखते होंगे पर मेरा ढयान कभी नही गया, शायद कल जो तुफ्फान आया उसने मेरी छठी इंद्री को जागृत कर दिया और मूज़े गडती हुई नज़रों को ज़यादा आभास होने लगा. मम्मी भी मेरे सामने आ के बैठ गई और बहुत रोकते हुए भी मेरे पैनी नज़रें मा पे गड़ गई.
पापा : तेरे कोर्स कैसा चल चल रहा है बेटा , कुछ चाहिए तो नही.
मैने अपने ख़यालों की दुनिया से वापस आइी ‘ हन पापा सब ठीक चल रहा है, पापा इस बार कहीं घूमने ले चलो, बहुत बोरियत हो रही है.’
पापा : ‘बेटा अपनी मा और भाई बहन के साथ मिल के प्रोग्राम फाइनल कर लो और मूज़े बता देना’
मैं : ‘भाई की छुट्टियाँ तो बहुत दूर हैं, हम सिर्फ़ वीकेंड पे क्यूँ नही चलते, बस दो दिन के लिए, तोड़ा चेंज हो जाएगा’
पापा : ठीक है, विमल और रिया इस बार जब आएँगे तो अगले हफ्ते का प्रोग्राम फाइनल कर लेना, मैं भी तब तक कुछ ज़रूरी काम निपटा लूँगा.
मैं : पापा के गले लगते हुए, ‘थॅंक योउ पापा आप बहुत अच्छे हो’ मैने जान भुज कर अपने उरोज़ पापा की बाँह पे रगडे, और उसका असर एकद्ूम हुआ.
पापा चिहुक पड़े और मूज़े अलग कर फटाफट बातरूम चले गये. मेरी नज़रों ने उनकी पंत के अंदर बने तंबू को देख लिया था. यानी पापा मेरे से गरम हो रहे थे.
अब मूज़े सोचना ये था किस के साथ आयेज बदुन, किसको अपने जाल में लपेटून पहले पापा या भाई. फॉर सोचा क्यूँ ना अपनी सील भाई से ही तुद्वौन – मज़ा आएगा इस चॅलेंज को पूरा करने मैं, हम दोनो जवान हैं, चुदाई भी ज़यादा दूं दर होगी, पापा को बाद में देखूँगी, बस अब उनको तोड़ा तोड़ा टीज़ करती रहूंगी.
बातरूम से निकल पापा बाइ करते हुए चले गये और घर में रह गये मैं और मा.
मैं जेया के मा के गले लग गई. ‘ मा चलो तोड़ा बाहर घूम की आते हैं, आज दोपहर को बाहर ही खाएँगे’
मा : मेरे सर पे हाथ फेरते हुए ‘ आज इन्स्टिट्यूट नही जाना क्या – तूने आज तक अपनी कोई क्लास नही मिस की, ये आज क्या हो रहा टुजे’
अब मा को क्या समझौं छूट में खुजली बाद गई है, उसका भी तो इंतेज़ाम करना है.
मैं : ‘ना मा आज कोई ज़रूरी क्लास नही है, चलो ना प्लीज़.’ मैं मा से और भी चिपक गई और अपने उरोज़ मा की पीठ में गाड़ने लगी.
मा : अच्छा मूज़े कुछ कम ख़तम करने दे फिर चलते हैं
मैं खुशी से चिल्लाते हुए ‘ ठीक है मा, एक घंटे मैं जो करना है कर लो, मैं तब तक तयार होती हूँ’ और मैं भागती हुई अपने कमरे में चली गई.
एक घंटे बाद हम लोग चाणकया पूरी के लिए निकल पड़े, वहाँ एक इंग्लीश फिल्म चल रही थी, मैने ज़िद करी तो मा मान गयी. फिल्म में कुछ उत्तेजक सीन्स ज़यादा थे, मेरी हालत बिगड़ने लगी मैं बार बार कनखियों से मा को देख रही थी, की उनपे क्या असर होता है, मूज़े लगा की मा भी कुछ गरम हो रही है, क्यूंकी वो बार बार अपनी सीट पे हिल रही थी और अपनी टाँगें बींच रखी थी.
मोविए के बाद हम लोग मौर्या शेरेटन में लंच के लिए चले गये. मैने हिम्मत करते हुए मा से पूछा. ‘मा कभी बियर पी है क्या’
मा चोणकटे हुए ‘ नही , ये क्या बक रही है तू, चुप छाप लंच करते हैं और घर चलते हैं’
मैं : ‘मा अब मैं बड़ी हो चुकी हूँ, और बड़ी लड़कियों के लिए मा सबसे अच्छी दोस्त होती है, और दोस्त से कुछ चुप्पाया नही जाता’ मेरा चेहरा उत्तर चक्का था.
मा कुछ पलों तक मुझे देखती रही फिर ‘ अरे तू उदास क्यूँ हो गई, ऐसा नही करते, चल आज से हम पक्के दोस्त’ और मा ने मेरे साथ शेक हॅंड किया, मेरे चेहरे पे मुस्कान दोध गयी.
मैने फिर सवालिया नज़रों से मा को देखा तो इस बार मा बोल पड़ी ‘ हन कभी कभी तेरे पापा के साथ पी लेती हूँ जब वो ज़यादा ज़िद करते हैं’
मैं : ‘मा मैं भी आज ट्राइ कर लूँ थोड़ी सी प्लीज़’
शायद मा चाहती थी की मैं उनसे और खुलून तो इसलिए मान गई. एक मा के दिल में हमेशा ये दर बना रहता है, की जवान बेटी कहीं ग़लत रास्ते पे ना निकल पड़े.
हुँने एक बियर की बॉटल मँगवाई मा ने आधी खुद ली और आधी मूज़े दी. मैं घुट भरा तो बहुत कड़वी लगी और मेरा मुँह बन गया, मा खिलखिला के हास पड़ी
मा : ‘शुरू शुरू में कड़वी ही लगती है, नही पी जेया रही तो रहने दे’
अब मैं पीछे कैसे रहती, मूज़े तो मा के और करीब जाना था. मान कड़ा करते हुए धीरे धीरे पी गई टीन चार घूँट लेने के बाद उतनी कड़वी नही लग रही थी.
फिर हुँने लंच ख़तम किया और घर आ गये. ये आधी बॉटल भी मेरे सर चाड रही थी, मैं अपने कमरे में जेया कर सो गई.
राम्या नीचे गई और मा के पास किचन में चली गई.
‘मा मैं कुछ मदद करूँ’
‘नही बेटा तुम टेबल पर बैठो- मैं बस अभी आइी, सब तयार हो चक्का है’
राम्या टेबल पर जेया के बैठी ही थी की उसका सेल बजता है. कॉल रिसीव करती है तो
‘ववओूऊऊऊओवव्वव सिमिरन कितने दीनो बाद फोन कर रही है’
सिमिरन : और तू जैसे मुझे फोन करती रहती है. अक्चा सुन मैं परसों आ रही हूँ, तेरे ही इन्स्टिट्यूट में अड्मिशन लेने. बाकी लोग भी कुछ दीनो में आ जाएँगे. पापा का ट्रान्स्फर देल्ही हो रहा है.
राम्या : अरे वा , फिर तो मज़ा आ जाएगा, अकेले बोर हो जाती हूँ मैं,तेरी कंपनी मिल जाएगी तो सच में बहुत मज़ा आएगा.
सिमिरन : अच्छा मैं रख रही हूँ, टुजे फ्लाइट डीटेल्स स्मस कर दूँगी, एरपोर्ट पर मिलना. बाइ त/सी
राम्या : त/सी
राम्या : मा ! मा!
मा : अरे क्यूँ चिल्ला रही है, आ रही हूँ बस
मा कने की प्लेट्स ले के टेबल तक आती है, राम्या प्लेट्स ले कर टेबल पे रखती है.
‘हन बोल क्यूँ चिल्ला रही थी’
‘सिमिरन आ रही है मा, मज़ा आ जाएगा’
मा : हन पता है तेरे मामा का देल्ही ट्रान्स्फर हो गया है. पहले सिमिरन आ रही है फिर कुछ दीनो में बाकी सब भी आ जाएँगे.
राम्या : कयययययययाआआअ आपको मालूम है और मुझे बताया भी नही.
मा : अरे बेटी कल रात ही तो फोन आया था तेरे मामा का. सारा दिन तू मुझे घूमती रही तो दिमाग़ से निकल गया.
दोनो खाना ख़तम कर के किचन संभालती हैं और सोने की तायारी करती हैं.
राम्या : मा आज मैं आपके पास सो जौन.
मा : जा कपड़े बदल के आजा.
राम्या भागती हुई जाती है और उसका ये अल्हाड़पन देख मा हास पड़ती है और अपने कमरे में जेया कर अपनी नाइट ड्रेस निकल के पह्न लेती है.
नाइट ड्रेस ज़यादा तो नही पर कुछ ट्रॅन्स्परेंट थी और मा का खूबसूरत जिस्म उसमे से झलक रहा था.
राम्या भी अपनी निघट्य पह्न के आ जाती है. और दोनो बिस्तर पे लेती हुई राम्या के मामा और उसके परिवार के बारे में बातें करती रहती हैं. राम्या की नींद तो कोसो दूर थी. बातें करते करते वो अपनी मा से चिपक जाती है और जब दोनो के उरोज़ आपस में टकराते हैं तो दोनो के जिस्म में एक लेहायर दोध जाती है.
राम्या अपने उरोज़ अपनी मा के उरज़ोन से रगड़ने लगती है और मा चाहते हुए भी उसे रोक नही पाती.
मा की बाँहें भी राम्या के इर्द गिर्द कस जाती हैं और वो राम्या की पीठ सहलाने लगती है. राम्या अपनी मा की गर्दन चूमे लगी और धीरे धीरे गॅलन को चूमने लगी.
दोनो के होंठ कब आपस में मिले पता ही ना चला और मा ने राम्या के होंठ चूसने शुरू कर दिए. राम्या के जिस्म में आग भड़क उठी और वो अपनी मा से अमरबेल की तरहा चिपक गई.
मा को जैसे कुछ होश आया और वो राम्या से अलग हो गई और सीधी हो कर लेट गई.
पर राम्या अब कहाँ रुकने वाली थी. राम्या अपनी मा के उप्पर आ गई और अपनी मा के चेहरे को हाथों में पकड़ उसके होंठों को अपने होंठों में जाकड़ लिया.
मा ने हिलने की ओशिश करी पर राम्या ने हिलने नही दिया और मा के होंठ चुस्ती रही. धीरे धीरे मा भी रंग में आने लगी और राम्या का साथ देने लगी.
राम्या अपनी मा के निपल ऐसे चूस रही थी जैसे बहुत दीनो के भूके बच्चे को मा का दूध नसीब हुआ हो. मा की आँखों में में राम्या का बचपन घूमने लगा ऐसे ही ज़ोर ज़ोर से उसके निपल चूसा करती थी.
अहह मा की सिसकी निकल जाती है और वो राम्या के सर को अपने उरोज़ पर दबा देती है. वो अपने देवरानी के साथ कई बार लेस्बियान कर चुकी थी पर आज बेटी का असर कुछ और ही पद रहा था, उसके जिस्म का पोर पोर मज़े की इंतेहा से खिल उठा था और उसकी उत्तेजना अपनी सारी सीमाएँ लंग रही थी.
राम्या अपनी मा के दोनो उरोज़ एक के बाद एक चुस्ती रहती है और साथ साथ हल्के हल्के दाँत भी लगा देती थी.
जब भी राम्या के दाँत निपल पे गाडते मा की चूत में साथ साथ खलबली मचना शुरू हो जाती और उसकी जोरदार सिसकी निकल पड़ती उफफफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़
अपने मा के उरोज़ अच्छी तरहा लाल सुर्ख कर राम्या अपनी मा के नेवेल को चूमने लगी और अपनी जीब बीच में दल कर गोल गोल घूमने लगी.
नेवेल शायद मा का सबसे वीक हिस्सा था, और उसे भी खुद आज ही पता चला क्यूंकी पहले किसी ने भी उसके नेवेल के साथ छेड़ खानी नही की थी. इधर राम्या की जीब्नावेल में घूमती उधर मा की चूत अपना रस छ्चोड़ने लगती. मा ने राम्या के सर को ज़ोर से दबा दिया ताकि उसकी हरकतें रुक जाएँ, पर राम्या लगी रही और मा उत्तेजना में अपनी टाँगें पताकने लगी.
राम्या धीरिरे चूमते चाहते हुए नीचे बदती है और अपनी मा की छूट पे अपनी ज़ुबान फेरने लगती है.
जैसे ही राम्या की ज़ुबान मा की चूत को छूटी है एक ट्रंग दोनो के जिस्म में दोध जाती है. राम्या आज पहली बार किसी छूट पे अपनी ज़ुबान चला रही थी वो भी अपने मा की और मा पहली बार अपनी बेटी की ज़ुबान का असर अपनी छूट पे महसूस कर रही थी.
मा राम्या को उप्पर खींचती है और दोनो 69 में आ जाती हैं. अब मा राम्या की चूत पे फिर से अपनी ज़ुबान का कहर बरसाने लगती है और उधर राम्या अपनी मा की छूट को पूरा मुँह में भर लेती है.
दोनो एक दूसरे के जिस्म को आपस में रगड़ते हुए एक दूसरे को अपनी टाँगों से बीच लेती है और ज़ोर ज़ोर से एक दूसरे की छूट चूसने लगती हैं.
राम्या की पूरी ज़ुबान मा की चूत में घुस्स जाती है जबकि राम्या की चूत टाइट थी तो मा की ज़ुबान तोड़ा ही अंदर घुस पाती है. दोनो एक दूसरे की चूत को चूस्ते हुए अपनी ज़ुबान से छोड़ने लग गई. दोनो की सिसकियाँ अंदर ही अंदर दम तोड़ने लगी. रूम में एक ज़लज़ला आ गया, एक ऐसा तूफान जो थमने का ना ही नही ले रहा था.
साँसे लेना दूभर होता जेया रहा था पर ज़ुबानो का चलना नही . ये मंज़र कोई आदमी देख लेता तो बस एक ही दुआ माँगता, एक और लंड , ताकि वो दोनो को एक साथ चोद सके.
दोनो एक दूसरे को ज़ुबान से चोद रही थी, बीच बीच में अपने दाँत भी गड़ रही थी, एक अपने दाँत गडती तो बदला लेने के लिए दूसरी भी अपने दाँत गड़ देती.
दोनो की चूत रस बहा रही थी और दोनो ही उसे पीते हुए रुकने का नाम नही ले रही थी.
अपनी मा की छूट को चूस्ते हुए राम्या सोच रही थी की जब एक औरत के साथ इतना मज़ा आता है तो एक मर्द के साथ कितना आएगा. उसकी आँखों के सामने उसके भाई का चेहरा घूमने लगा और उसकी पकड़ अपनी मा की चूत पे और भी सकत हो गई है.
आधे घंटे से दोनो एक दूसरे पे कहर ढा रही थी. और संवेदना सहती हुई दोनो छूट अपने चर्म पे पहुँच गई और दो बंद एक साथ टूट पड़े. अफ मा का ज़यादा बुरा हाल था इतना रस तो अपनी पूरी जिंदगी में नही बहाया था जितना आज बहा रही थी.
जिस्म से जान निकलती जेया रही थी और वो सातवें आसमान पे कहीं उड़ने लगी . राम्या भी पीछे नही रही और अपनी मा के साथ ताल में ताल मिलती हुई आनंद की गहराइयों में सराबोर हो गई.
दोनो ने एक बूँद भी बर्बाद नही होने दी. और दोनो का पेट इतना भर गया की सुबह नाश्ता करने की नौबत नही आने वाली.
हाँफती हुई दोनो अलग हुई और अपनी साँसे संभालने लगी.
रात भर दोनो एक दूसरे को नोचती ख़ास्टोती रही . मुस्किल से एक घंटा ही सोई होंगी. राम्या के नींद जैसे खुली वो फिर अपनी मा पे चाड गई.
जिस्म की प्यसस फिर भड़क गई और दोनो 69 पोज़ में आकर एक दूसरे की चूत चूसने लगी
आधे घंटे तक मा बेटी एक दूसरे की चूत चुस्ती रहती है आंड दोनो एक साथ झाड़ जाती हैं. राम्या आज फुल मस्ती के मूड में आ चुकी थी, वो अपनी मा को बातरूम में खींच के ले जाती है और दोनो बात्ट्च्ब में घुस्स एक एक दूसरे के जिस्म पर साबुन रगड़ने लगती हैं.
एक घंटे तक मा बेटी एक दूसरे को रग़ाद रग़ाद कर नहलाती हैं. ऐसे लग रहता जैसे जिंदगी में पहली बार नहा रही हों.
नहाने के बाद दोनो टायरर होती हैं और मा किचन में लग जाती है. नाश्ता करने के बाद राम्या थोड़ी देर के लिए बाहर जाती है और जब वापस आइी तो उसने अपनी नाक चिड़वा कर एक नोस रिंग पहनी हुई थी. इस रूप में राम्या और भी कातिलाना लग रही थी.
राम्या जब अपने नये रूप में घर पहुँची तो मा उसे देखती ही रह गयी. आस पास रहने वेल लड़कों और मर्दों की तो जान आफ़त में पड़ने वाली थी.
राम्या तब अपने कमरे में चली गई और अपने लिए नया डिज़ाइन तयार किया जो इस प्रकार का था . जिस्म की प्यसस जब बदती है तो इंसान क्या क्या रूप नही धारण करता.
अपनी ड्रेस का नया कलेक्षन करने के बाद राम्या अपने कमरे में वोही डVड लगा के बैठ गई जिसमें उसके मम्मी पापा और चाचा चाची थे. आवाज़ उसने बहुत धीमे रखी ताकि नीचे मा तक आवाज़ ना पहुँचे. चाची की दमदार चुदाई के बाद चारों ने कुछ देर आराम किया और फिर मम्मी ने चाचा का लंड चूस चूस कर खड़ा किया और चाचा के उप्पर आकर उनके लंड को अपनी चूत में डाल लिया.
चाची भी पापा के लंड को चूसने लग गई. पापा का लंड जब खड़ा हो गया तो पापा ने चाची के होंठों पे अपने होंठ सता दिए और दोनो एक दूसरे को चूमने लगे. पापा ने चाची की तंग को उप्पर उठाया और अपने लंड उनकी चूत में पेल दिया.
चाची दो बार झाड़ चुकी थी और उनमे हिम्मत नही बची थी और छुड़वाने की. पापा ने चाची की चूत से लंड निकल लिया और मम्मी के पीछे जेया कर उनकी गॅंड में एक ही झटके से अपना लंड घुस्सा दिया. मम्मी की चीखें निकालने लगी. अब चाचा और पापा मिलके मम्मी की जोरदार चुदाई करने लगे.
इनकी चुदाई देख कर राम्या की चूत भी रोने लग गई.
उससे और आयेज देखा नही गया.
लॅपटॉप बंद किया और बातरूम में घुस्स गई.
बात टब में लेती राम्या काफ़ी देर तक अपनी चूत में उंगली करती रहती है जब तक वो झाड़ नही जाती.
फिर नहा कर बाहर आती है और अपने सेल फोन से अपनी नग्न तस्वीरें खींचती है. सिरफ्स अपने बूब्स की अलग अलग आंगल्स से, सिर्फ़ अपनी चूत की और और अपना चेहरा छुपाते हुए बाकी जिस्म की . कुल 15 -20 फोटो अपनी खींच लेती है.
फिर कपड़े पह्न कर तयार होती है और अपने लॅप टॉप खोल कर अपनी एक फेम मैल ईद बनती है जिस्म की प्याससी (जकप).
और अपने बूब्स की एक फोटो अपने भाई विमल को मैल कर देती है.
साथ में एक रिमार्क डाल देती है
‘क्या तुम इन्हें चूसना चाहते हो? अगर हन तो जवाब देना.’
फिर राम्या नीचे आती है और अपनी मा को फिर खींच कर बाहर घूमने निकल पड़ती है.
राम्या मा को फिर मौर्या शेरेटन ले जाती है, दोनो फिर एक एक बियर पीते हैं, बैठ कर इधर उधर की बातें करतें हैं. राम्या की अभी हिम्मत नही पद रही थी की वो मा से फॅमिली चुदाई के बारे में पूछ ले.
बियर पीने के बाद दोनो दिली हाट चली जाती हैं, जहाँ राम्या कुछ शॉपिंग करती है. उसे सिमिरन के लिए कुछ गिफ्ट खरीदना था.
मौज मस्ती करते हुए दोनो सारा दिन निकल देती हैं और वापस घर आ जाती हैं.
शॉपिंग वगेरह के बाद राम्या और उसकी मा जैसे ही घर पहुँचते हैं. राम्या अपनी मा को बाँहों में भर लेती है और दोनो के होंठ फिर जुड़ जाते हैं. अब मा को भी राम्या के साथ मज़ा आने लगा था. पर लंड की कमी राम्या कहाँ पूरा कर पाती, वो तो खुद लंड की तलाश में थी और सारे राज जानने के लिए ही तो अपनी मा से चिपक रही थी. दोनो 10 मीं तक स्मूच करते हैं फिर दोनो मा के कमरे में चली जाती हैं
वहाँ विमल जैसे ही अपने हॉस्टिल में पहुँचता है और अपना लपटोपन ओं कर के अपनी मेल्स चेक करता है. एक मैल जकप से आइी हुई थी. विमल उसे खोलता है तो डांग रह जाता है. उसमें जकप ने अपने बूब्स की फोटो भेजी हुई थी. विमल की आँखें लॅप टॉप की स्क्रीन पे जाम जाती हैं.
सामने स्क्रीन पर जकप(राम्या) के बूब्स देख कर विमल के जिस्म का तापमान बादने लगता है. उसे गर्मी लगने लगती है और सारे कपड़े एक एक कर जिस्म का साथ छ्चोड़ देते हैं. जकप के बूब्स देख कर वो मूठ मरने लगता है. आधे घंटे तक अपने लंड की ऐसी तैसी करता है और लॅप टॉप पर जकप के बूब्स पर अपना माल गिरा कर ज़मीन पे लूड़क जाता है. उसकी साँसे ढोक्नी की तरहा चल रही थी.
दोनो मा बेटी एक दूसरे को छूटे हुए एक दूसरे के कपड़े उत्तर देती हैं और चूमते हुए ही मा के कमरे की तरफ बाद जाती हैं. आज मा जायद आक्रामक रूप ले रही थी. वो राम्या के पीछे आ कर उसके उरज़ोन का मर्दन करती हुई अपने उरोज़ उसकी पीठ से रगड़ने लगती है और उसके होंठ कुसने लगती है.
शायद मा आज खुल के मज़े लेना चाहती थी और देना चाहती थी.
थोड़ी देर बाद दोनो मा बेटी 69 पोज़ में आ जाती हैं और एक दूसरे की चूत को ज़ोर ज़ोर से चूसने लगती हैं. मा कुछ ज़यादा मज़े से राम्या के चूत को चूस रही थी. और राम्या भी अपना पूरा ज़ोर लगा रही थी मा को पूरा मज़ा देने के लिए.
राम्या अपनी मा की चूत को चूस्ते हुए अपनी दो उंगल छूट में डाल देती है और तेज़ी से अंदर बाहर करने लगती है. मस्ती के मारे मा राम्या की चूत को काट केटी है और अपनी ज़ुबान उसकी चूत में डाल देती है. आधे घाटे तक दोनो मा बेटी लगी रहती हैं और एक दूसरे का पानी निकल कर पी जाती हैं. दोनो ही हाँफ रही थी और एक दूसरे की बगल में लेट कर अपनी साँसे संभालने लगती हैं.
राम्या की जब साँसे संभालती हैं तो वो अपनी मा के उरोज़ चूसने लगती है. मा भी अपनी पोज़िशन बदलती है और राम्या के उरोज़ चूसने लग जाती है. सारी रात दोनो एक दूसरे के साथ मस्ती करती रहती हैं.
उधर विमल को जब अपने ओर्गसम से होश आता है तो बातरूम जेया कर खुद को सॉफ करता है और फिर अपने लॅप टॉप को सॉफ करता है. जकप(राम्या के बूब्स को स्क्रीन पर चूमता है और एक मैल उसे भेज देता है.
अगले दिन सुबह जब विमल सो के उठा तो उसे जकप की वो मैल याद आइी, उसने फिर अपना लॅपटॉप खोला और देखा की जकप की कोई और मैल नही आइी. वो फिर उसके बूब्स वाली फोटो खोल के बैठ गया और हसरत भारी नज़रों से उसे देखने लगा.
आह!!!! काश ये बूब्स इस वक़्त उसके हाथों में होते.
काश वो इन प्यारे से निपल्स को चूस पता.
कौन है ये जकप? उसे कैसे जानती है? उसने ये मैल क्यूँ भेजी? बहुत से सवाल उसके दिमाग़ में घूम रहे थे पर लंड महषाई का तो अपना ही दिमाग़ था वो सर उठा के खड़ा हो गया.
विमल को फिर गर्मी ने घेर लिया और वो सारे कड़े उत्तर कर जकप के बूब्स को अपने हाथों में अपने होंठों में महसूस करते हुए मूठ मरने लगा.
उसकी तड़प हर लम्हा बदती जेया रही थी. जकप ने उसके दिल-ओ-दिमाग़ को अपने क़ब्ज़े में कर लिया था.
उसकी उत्तेजना इतनी जायद बाद गई थी की 5 मीं में ही वो धराशाही हो गया और अपना पानी निकल बैठा.
उसे बेसब्री से जकप के जवाब का इंतेज़ार था. अपने लंड को ठंडा करने के बाद वो फ्रेश हो कर तयार हुआ और अपनी क्लासस के लिए चला गया. पर आज उसका दिल क्लासस में बिल्कुल नही लग रहा था.
वो जल्द से जल्द वापस हॉस्टिल जाना चाहता था जकप की मैल चेक करने.
इधर राम्या और उसकी मा जब सुबह उठते हैं तो दोनो का ही जिस्म टूट रहा था पर चेहरों पर रौनाक़ थी. राम्या तयार हो कर नाश्ता करती है और फिर अपने इन्स्टिट्यूट चली जाती है.
दोपहर में वो इन्स्टिट्यूट से वापस आती है और अपना लॅप टॉप खोल के देखती है, अपनी मैल चेक करती है, विमल की मैल आइी हुई थी, बड़ी बेसब्री से उसके बारे में पूछ रहा था.
राम्या फिर उसे जकप की ईद से एक मैल करती है. ‘ पहले अपने लंड की फोटो भेजो, मेरे काबिल भी हो या नही, फिर आयेज बात करूँगी’
और नीचे अपनी मा के पास चली जाती है. राम्या कब से ये सोच रही थी की मा से पूछे की क्या अभी वो सामूहिक चुदाई करती है चाचा चाची के साथ. पर उसकी हिम्मत नही पद रही थी. शायद अभी दोनो इतना आपस में नही खुली थी. अब भी एक गॅप था दोनो के बीच.
शाम को राम्या और उसकी मा तयार हो कर सिमिरन को लेने एरपोर्ट चले जाते हैं.
राम्या और उसकी मा सिमिरन को एरपोर्ट से पिक करती हैं और सीधे अपने घर आती हैं. राम्या सिमिरन का समान अपने कमरे में रख लेती है और उसका इंतेज़ाम उसने अपने साथ ही किया हुआ था. मा किचन में काम करने चली जाती है और दोनो एक दूसरे के गले लग जाती हैं.
राम्या : कितने टाइम बाद मिल रही है. याद नही आती थी क्या मेरी?
सिमिरन : तुझे कैसे भूल सकती हूँ मेरी जान, क्या करूँ अकेले आ नही सकती थी और पापा काम में बिज़ी होते थे. खैर अब सारी दूरियाँ ख़तम, अब तो हम यहीं रहेंगे मिलना जुलना तो अब होता ही रहेगा. ये बता तू इतनी बदल कैसे गई?
राम्या : क्यूँ क्या बदलाव नज़र आ रहा है तुझे?
सिमिरन : नाक में ये सेक्सी रिंग, कपड़ों का रंग धुंग सब कुछ तो बदला हुआ है. कोई पटा लिया क्या? या किसी से पाट गई?
राम्या : अरे नही यार. बाहर में मुँह मार्टी नही. बस कोशिश कर रही हूँ किसी को पाटने की. ये निगोडी जिस्म की प्यसस बदती ही जेया रही है. तू बता तूने क्या गुल खिलाए हैं वहाँ.
सिमिरन : यार बहुत तक गई हूँ. पहले नहा कर फ्रेश हो जाती हूँ. ( बात का रुख़ पलट ती है)
राम्या सिमिरन के कपड़े उत्तरने लगती है.
सिमिरन : अरे क्या कर रही है.
राम्या : क्यूँ कोई लड़का हूँ क्या जो तुझे छोड़ डालूंगी , जो तेरे पास है वोही मेरे पास है.
सिमिरन भी उसके कपड़े उत्तरने लगती है.
सिमिरन और राम्या
राम्या और सिमिरन एक दूसरे को नहलते हुए
दोनो नंगी हो कर बात रूम में घुस्स जाती हैं और एक दूसरे पे साबुन रगड़ने लगती हैं. अच्छी तरहा एक दूसरे के जिस्म को साबुन के साथ माल माल कर अपने हाथ साथ में फेरती हैं. दोनो के जिस्म की प्यसस बादने लगती है .
नहाते हुए दोनो स्मूच करने लगती हैं
प्यसस इतनी भड़का जाती है की दोनो के होंठ आपस में जुड़ जाते हैं. राम्या उसका निचला होंठ चूसने लगती है और सिमिरन उसका उप्पर वाला. दोनो की ज़ुबाने आपस में लड़ने लगती हैं. और दोनो ही अपने उरोज़ एक दूसरे से अच्छी तरहा रगड़ती है. दोनो के हाथ एक दूसरे की छूट को सहलाने लगते हैं और उंगलियाँ एक दूसरे की छूट में घुस्स जाती हैं.
शवर का ठंडा पानी भी इन दोनो की तपिश को कम नही कर पाता और होंठों की चूसा के साथ साथ उंगलियाँ भी तेज़ गति से एक दूसरे को छोड़ने लगती हैं. राम्या की छूट टाइट थी पर सिमिरन की खुली हुई थी. राम्या भाँप जाती है के सिमिरन छुड़वा चुकी है.
उंगलियों से ही दोनो एक दूसरे को झाड़ा देती हैं और फिर साबुन उत्तर कर बातरूम से बाहर निकलती हैं और अपने कपड़े पह्न लेती हैं. राम्या सवालिया नज़रों से सिमिरन को देख रही थी. सिमिरन नज़रें चुराती है और आंटी को मिलने का कह कर नीचे चली जाती है.
सिमिरन के नीचे जाने के बाद राम्या अपना लॅपटॉप खोलती है. विमल की मैल आइी हुई उसने अपने लंड की फोटोस भेजी थी. राम्या गौर से उसके लंड की फोटो देखती है और एक मैल उसे भेज देती है.
‘जानदार लंड लगता है तुम्हारा चूसने में मज़ा आएगा’
इसके बाद राम्या अपना लॅपटॉप बंद करती है और नीचे चली जाती है. हाल में सिमिरन उसकी मा के पास बैठ कर बातें कर रही थी. राम्या भी भी उनके साथ लग जाती है.
रात को मा को अकेले ही सोना पड़ा. वो सिमिरन के सामने नही खुलना चाहती थी. राम्या सिमिरन को अपने बेड रूम में ले गई और दोनो बिस्तर पे लेट आपस में बातें करने लगी.
राम्या : किस से छुड़वा रही है तू ?
सिमिरन : चुप क्या बकवास कर रही है.
राम्या : बन्नो हम से चालाकी नही चलेगे, तेरी चूत ने तेरा राज़ खोल दिया है. बता ना. कसम से ये राज़ सिर्फ़ मेरे पास रहेगा.
सिमिरन : नही नही. कहीं ग़लती से भी तेरे मुँह से कुछ निकल गया तो लेने के देने पद जाएँगे और बदनामी अलग.
राम्या : बता ना यार, तू मुझे अपना राज बता मैं तुझे अपना बतावुँगी. अब नखरे छ्चोड़ जल्दी बता किसने तेरी सील तोड़ी.
सिमिरन कुछ देर सोचती है फिर बोल पड़ती है ‘विक्रांत ने’
राम्या : ‘कयय्य्ाआआअ विक्रांत भाई ने, कब? कैसे हुआ ये?’
सिमिरन : दो साल हो गये हैं इस बात को. जब भी मोका मिलता है हम चुदाई कर लेते हैं.
राम्या : बड़ी तेज़ निकली तू, बड़े भाई को ही पटा लिया.
सिमिरन : अरे मैने नही, भाई ने ही मुझे पटाया था.
राम्या : शुरू से बता ना कैसे हुआ था, कैसे शुरू किया था.
सिमिरन : अब तू पहले अपना राज बता.
राम्या : कोई खास राज नही है, बस विमल को पाटने की कोशिश कर रही हूँ. अब ये जिस्म की प्यसस सही नही जाती और घर के बाहर मैं कुछ करना नही चाहती. एक ही रास्ता बचता है वो है विमल.
सिमिरन : कैसे पता रही है, अभी कुछ हुआ क्या.
राम्या : अरे कहाँ यार, अभी दो दिन ही तो हुए हैं, कोशिश करते हुए, सब बतावुँगी पहले तो बता विक्रांत ने कैसे पहल करी और तू कब राज़ी हुई चूड़ने के लिए.
सिमिरन : आधी रात को भाई मेरे बिस्तर में आ जाता था और मेरे बूब्स सहलाने लगता था. एक आध दिन तो मुझे पता नही चला. एक दिन मेरी नींद कच्ची थी और भाई आ कर मेरे बूब्स सहलाने लगा. मैं दर गई और चुप छाप पड़ी रही. मेरी तरफ से कोई हरकत होते ना देख भाई की हिम्मत बाद गई, और वो रोज रात को मेरे बिस्तर पे आता और कुछ देर मेरे बूब्स सहलाता फिर अपने बिस्तर पे चला जाता. धीरे धीरे मुझे भी मज़ा आने लगा और मैं इंतेज़ार करती कब भाई आएगा और मेरे बूब्स सहलाएगा.
राम्या : आयेज बताना ना सीमी, चुदाई तक कैसे पहुँचे तुम दोनो.
सीमी : कुछ दिन तो विक्की सिर्फ़ मेरे बूब्स ही सहलाता रहा फिर एक दिन उसने मेरा टॉप उप्पर किया और मेरा पेट सहलाने लगा. मेरी तो जान ही निकलती जेया रही. छूट से नदियाँ बहने लगी. बड़ी मुस्किल से अपनी आवाज़ को रोका.
राम्या : पूरा उत्तर दिया था क्या?
सीमी : टॉप तो नही मेरा लोवर पूरा उत्तर दिया था. अफ उसके हाथ जब मेरी जांघों को सहला रहे थे दिल कर रहा था उसे से लिपट जौन.
राम्या : हाईईईईई विमल मेरा साथ ऐसा कब करेगा? फिर क्या हुआ? चोडा क्या उसने टुजे?
सीमी : कोई रेप थोड़ी ना कर रहा था मेरा. बस उस दिन तो काफ़ी देर तक मेरी जंघे सहलाई और फिर मेरे साथ चिपक के मेरे बूब्स सहलाने लगा और अपना लंड मेरी गंद के साथ चिपका दिया. उसका लंड मेरी गॅंड के अंदर घुस्स रहा था. अगर वो नंगा होता तो ज़रूर मेरी पनटी फाड़ देता.
राम्या : मज़ा आया क्या टुजे?
सीमी : क्या बातौन यार छूट में इतनी ज़ोर की खुजली मचने लगी थी की मुजसे और सहन नही हुआ. मैं हिल पड़ी और वो भाग के अपने बिस्तर पे चला गया. मैने तो सोचा था मेरी पनटी उत्तर देगा और आयेज बाडेगा. पर उसने कुछ नही किया. थोड़ी देर बाद आया मेरा लोवर उप्पर किया और फिर अपने बिस्तर पे चला गया.
राम्या : तू ही खींच लेती ना उसको अपने उप्पर.
सीमी : आइी बड़ी , खींच लेती उसको, रंडी हूँ क्या मैं? मेरी तो समझ में ही नही आ रहा था क्या करूँ. रोज रात को आ कर छेड़ता और चला जाता. ना मैं उसे रोक पाती और ना ही आयेज बाद पाती.
राम्या : अच्छा फिर आयेज कब किया उसने तेरे साथ.
सीमी : अगले दो दिन तो कुछ नही हुआ. बस मुझे घूरता रहता था और मैं नज़रें बचाती रहती थी.
राम्या : फिर
सीमी : फिर की बच्ची अब सो जेया, मेरी हालत खराब हो रही है, पता नही कैसे नींद आएगी.
राम्या : मैं तेरी हालत सुधार दूँगी, तू बस आयेज बता
और राम्या सीमी के उरोज़ सहलाने लगती है.
सीमी : क्यूँ मेरी प्यसस भड़का रही है. तेरे पास लंड कहाँ है जो मेरी प्यसस भुजा सके.
राम्या सीमी के होंठों पे होंठ रख देती है. और चूसने लग जाती है.
सीमी भी राम्या का साथ देने लगती है, दोनो एक दूसरे के होंठ चूसने लगती हैं और अपनी ज़ुबाने एक दूसरे से लड़ने लगती हैं. दोनो ही एक दूसरे के उरज़ोन को बहरहमी से मसालने लगती हैं. कपड़े जिस्म का साथ छ्चोड़ देते हैं.
दोनो के जिस्म की प्यसस बाद जाती है और दोनो 69 पोज़ में आ कर सीधा अटॅक एक दूसरे की चूत पे करती हैं. सीमी की छूट में राम्या की पूरी ज़ुबान घुस्स जाती है और वो लपलप उसे चाटने और जीब से छोड़ने लग गई.
सीमी राम्या की छूट को अच्छे से चट्टी है और फिर जितना हो सका अपनी ज़ुबान उसकी चूत में घुस्सा देती है. राम्या को तोड़ा दर्द होता है और वो सीमी की छूट में दाँत गाड़ा देती है. जिसकी वजह से सीमी भी उसकी छूट को पूरा मुँह में ले कर ज़ोर से अपने दाँतों में दबा कर चुस्ती है और अपनी ज़ुबान से उसकी तेज़ी से चुदाई शुरू कर देती है.
थोड़ी देर बाद दोनो पोज़िशन बदलती हैं. अब सीमी उप्पर होती है और राम्या नीचे और एक दूसरे की चूत को चाटना, चूसना लगा रहता है, दोनो की ज़ुबाने भी एक दूसरे की चूत के अंदर बाहर होती रहती हैं.
आधे घंटे की मेहनत के बाद दोनो का जिस्म अकड़ने लगता है और दोनो ही अपना बंद एक साथ छ्चोड़ देती हैं. लपलप दोनो एक दूसरे का पानी पी जाती हैं और हाँफती हुई अलग लेट जाती हैं.
सीमी ने आज पहली बार किसी लड़की के साथ सेक्स किया था और वो आँखें बंद कर उस अनुभव को अपने अंदर समेत्टी रहती है.
राम्या की साँसे जैसे ही संभालती हैं वो फिर सीमी के चेहरे को चॅट कर अपने रस का स्वाद चकती है, सीमी भी उसका चेरा चट कर सॉफ कर देती है.
जब दोनो के चेहरे सॉफ हो जाते हैं तो राम्या उसे फिर सवाल करने लगती है.
राम्या : चल भुज गई तेरी प्यसस, अब बता आयेज क्या हुआ?
सीमी : यार आज रहने दे बाकी कल बतावुँगी. मुझ से और सहा नही जाएगा मैं फिर से गरम हो जवँगी और कल बहुत काम करने हैं.
राम्या मान मसोस के रह जाती है और दोनो चिपक के सो जाती हैं.
रात को सोने से पहले राम्या ने सीमी के बूब्स की फोटो खींच ली और सुबह वो जल्दी उठ गौ. सीमी अभी सो रही थी. राम्या ने अपना लाटॉप खोला और विमल को सीमी के बूब्स की फोटो भेज दी.
एक रिमार्क के साथ. “पहलेवले बूब्स चूसना चाहते हो या इन्हें, जवाब जल्दी देना”
इसके बाद वो सीमी को उठती है. दोनो तयार होती हैं नाश्ता करती हैं और अपने अपने काम पे निकल जाती हैं. कल रात मा को नींद नही आइी एक आदत सी पद गई थी राम्या के जिस्म की. दो रातों से लगातार राम्या के बदन के साथ खेलना और अपने बदन से खिलवाना मा को अब अच्छा लग रहा था. मा ने काबी लेज़्बीयन नही किया था सिर्फ़ दो बार को छ्चोड़ कर जब उसने अपने पति के ज़ोर देने पर देवर और देवरानी के साथ सामूहिक चुदाई करी थी. उसके बाद उसने ये बंद कर दिया. देवर उसका दीवाना हो गया था.
मा का दिल काम में बिल्कुल नही लग रहा था वो इंतेज़ार कर रही थी राम्या के आने का.
उधर विमल को जकप की जब मैल मिलती है तो वो बोखला जाता है. इस बार किसी और लड़की के बूब्स की फोटो भेजी गई थी. आकीर ये लड़की कौन है क्या चाहती है?. क्या ग़मे खेल रही है ? वो मैल का कोई जवाब नही देता और सोच में डूबा रहता है. आख़िर ये जकप कौन है, उसके पास मेरी मैल आइड कैसे आइी?
यहाँ विमल जकप को लेकर परेशन था जो उसे लगातार टीज़ कर रही थी. उधर उसके पिता को काम में बहुत बड़ा झटका लगा. एक बिल्डिंग जो उन्होने तयार कराई थी उसकी छत में दरार आ गई.
किसी ने उन्हें एक नामी पंडित के पास जाने के लिए कहा तो पंडित महाशय ने बच्चों का दोष बताया जो शत्रु घर में बैठे थे उपपाए ये बट्टाया की सबके नाम बदल दो.ख़ासकर लड़कियों के. और एक खास हवन करना होगा जिसके लिए उसने 25000 माँगे. 25000 देना कोई बड़ी बात नही थी, वो राम्या के पिता ने दे दिए.
अंदर ही अंदर वो बहुत पारेहन थे, कैसे समझाएँगे सबको की नाम क्यूँ बदलना है. और कितने झंझटों से गुज़रना पड़ेगा.
खैर अभी तो उन्होने अपना ढयान उस बिल्डिंग को सुधारने में लगाया.
यहाँ शाम को जब राम्या घर पहुँची तो सीधा मा के गले लग गई. सीमी अभी तक नही आइी थी.
मा ने रात के खाने की कोई तायारी नही करी थी, तो राम्या ने कहा कोई बात नही इस बहाने हम सीमी को बाहर ट्रीट दे देंगे. अब दोनो सीमी का इंतेज़ार कर रही थी.
रात को राम्या सीमी को अपने कमरे में ले गई और फिर शुरू हुई सीमी की दास्तान.
सीमी : कुछ दिन
तो विक्की मुझे सिर्फ़ सहलाता रहा मेरे बूब्स सहलाता, मेरी जंघे सहलाता अपना लंड मेरी गंद में रगड़ता. मैं बी रोज गरम हो जाती थी,पर मैं उसके आयेज बादने का इंतेज़ार कर रही थी. एक दिन मम्मी पापा कहीं गये थे और दो दिन बाद वापस आने का कह के गये. उस दिन दोपहर में मैं काफ़ी तक के आइी थी और आते ही सो गई. विक्की भी उस दिन दोपहर में आ गया, रोज देर से आतता पर उस्दीन जल्दी आ गया. उसके पास चाबी रहती है तो बिना बेल क्ये अपनी चाबी से टाला खोल के अंदर आ गया और सीधा मेरे रूम में आया. मैं सोई पड़ी थी, उसने अपनी शर्ट उत्तर और मेरे साथ चिपक गया.
राम्या : अच्छा फिर ?
सीमी : अरे बता रही हूँ ना.
सीमी : उसने मेरे बूब्स इतनी ज़ोर से मसले की मेरी चीख निकल गई और मैं उठ के बैठ गई. और उसे कुछ ना कह कर मैं पेट के बाल लेट गई. मेरी छुपी को उसने रज़ामंदी समझा और मेरी टॉप उठा कर मेरी कमर चूमने लगा. दिल तो मेरा कर रहा था की मैं उस से चिपक जौन और सारी हदें तोड़ दूं. पर मैं उसे तड़पाना चाहती थी. ताकि वो सिर्फ़ मेरा ही बन के रहे कहीं और मुँह ना मारे.
राम्या : लड़के कभी किसी के सगे नही बन के रहते, जब तक उन्हें छूट मिलती है तब तक चिपके रहते हैं और जैसे ही शादी की बात करो तो छ्चोड़ देते हैं किसी और छूट की तलाश में. और तूने कौन सी विक्की से शादी करनी है जो उसे बाँध के रखना चाहती थी.
सीमी : बाँध के तो उसे मैने रख लिया है. जब तक हमारी शादी नही होती वो बाहर किसी लड़की के पास नही जाएगा. शादी के बाद उसे छूट मिल जाएगी और मुझे लंड. फिर सोचेंगे हम अपने इस रिश्ते को आयेज कंटिन्यू रखे या नही.
राम्या : ओह हो गुलाम बना लिया है तूने विक्की को.
सीमी : गुलाम नही अपने जिस्म का यार, कभी कभी तो दिल करता है कहीं दूर चले जाएँ जहाँ हमे कोई जानता ना हो और शादी कर लें. खैर बाद में देखेंगे क्या करना है.
राम्या : आयेज बता ना.
सीमी : वो मेरी टॉप उठता गया कमर से लेकर पीठ पे चूमने लगा. फिर जब उसने मेरी ब्रा का हुक खोला तो मैं उठ के बैठ गई.
और हामी बात इस तरहा हुई :
सीमी : क्या कर रहा है विक्की, मेरी ब्रा क्यूँ खोल रहा है. तुझे शर्म नही आती मैं तेरी बहन हूँ. कितने दीनो से देख रही हूँ तू रोज रात को मुझे छेड़ता है, और अब तू इतना आयेज बादने लगा.
विक्की : सीमी मैं तुझसे प्यार करता हूँ.
सीमी : प्यार मयफूट, तू सिर्फ़ मेरा जिस्म चाहता है और भाई बहन में ये सब नही होता.
विक्की : नही सीमी अगर मैं सिर्फ़ तेरा जिस्म चाहता तो इतने दिन रुकता नही. मेरी आँखों में झाँक कर देख क्या तुझे इसमे वासना नज़र आती है. लड़कियों की कोई कमी नही है मुझे मैं सिर्फ़ तुझे पसंद करता हूँ.
सीमी : नही विक्की ये ग़लत है
विक्की : कुछ ग़लत नही है, तू लड़की है और मैं एक लड़का, हम दोनो को एक दूसरे की ज़रूरत है.
सीमी : आज तेरी ज़रूरत पूरी हो जाएगी तो फिर तू किसी और के साथ लग जाएगा, मेरा क्या होगा. और एक बार मेरी सील टूट गई तो शादी के बाद क्या मुँह दिखौँगी. क्या कहूँगी.
विक्की : आज कल कौन सी लड़की शादी तक कुँवारी रहती है. और मैं तुझ से वादा करता हूँ जिंदगी भर तुझे नही छ्चोड़ूँगा.
सीमी : सच. अगर मुझे पता चला तू किसी और लड़की के साथ …..तो जान से मार दूँगी तुझे भी और खुद को भी.
विक्की : नही मेरी जान, मेरी जिंदगी में और कोई लड़की नही आएगी.
और विक्की मेरे करीब आ गया.मैने अपनी नज़रें झुका ली . उसने मेरा चेहरा उप्पर किया और मेरे होंठों पे अपने होंठ रख दिए. अहह मेरा पूरा जिस्म कांप उठा और मेरी आँखें बंद हो गई. मैं उसकी बाँहों में खो गई. हमरे कपड़े कब उतरे पता ही नही चला.
मुझे लिटा कर वो मेरे उप्पर आ गया और मेरे होंठ चूसने लगा. मैं भी उसका साथ देने लगी और उसके सर को थम कर अपने होंठ खोल दिए. उसकी ज़ुबान मेरे मुँह में घुस्स गई और हम दोनो घेरे स्मूच में खो गये.
मेरे होंठों को चूस्ते हुए वो मेरे निपल को निचोड़ने लगा. उसका हाथ लगते ही मैं सिसक पड़ी उफफफफफफ्फ़ क्या बताओन सीधा तरंगे मेरी छूट तक जाने लगी और मेरी छूट में हज़ारों चईतियाँ रेंगने लगी.
राम्या : अच्छा फिर
सीमी : फिर की बच्ची तू चुस्कियाँ ले रही है और मुझे उसके लंड की याद आ रही है. अब सोने दे मुझे नही तो मेरी रात खराब हो जाएगी.
राम्या सीमी के उप्पर चाड जाती है और उसके होंठ चूसने लग जाती है.


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