FUN-MAZA-MASTI
ट्यूशन का मजा-7
गतांक से आगे.............................
दो मिनिट हम चुपचाप चलते रहे, आज के दिन जो हुआ था, वह इतना मस्ती वाला था कि विश्वास ही नहीं हो रहा था. मन में थोड़ा डर भी था कि हमने जो किया वो गलत तो नहीं किया.
थोड़ी देर बाद लीना दीदी बोली "क्या किया रे सर ने तेरे साथ अकेले में?"
"और तेरे साथ मैडम ने क्या किया दीदी?" मैंने पूछा. दीदी कुछ नहीं बोली.
मैंने कहा "दीदी, कल आना है क्या?"
"क्यों अनिल, क्यों पूछता है? अभी तो बड़ी खुशी से चहक रहा था" दीदी मुड़ कर बोली.
"ऐसे ही, दीदी, तुमने भी तो शनिवार रविवार की बात खुद ही छेड़ी थी, है ना?" मैंने कहा तो दीदी चुप हो गयी. दो मिनिट बाद मैं बोला "दीदी, यूं ही मेरे मन में आया, लगता है सर और मैडम ने मिलकर हमें फ़ंसाया है. मैडम ने जान बूझकर हम दोनों को मालिश के लिये कहा था. फ़िर आकर सर ने पकड़ लिया" मैंने कहा.
"हां अनिल, सच कहता है, वैसे ये गलत बात है. हमें शायद नहीं आना चाहिये है ना?" दीदी बोली और मेरी ओर देखने लगी.
मैं थोड़ा बिचक गया, सोचा कि फालतू ये कहा कि सर और मैडम ने हमें फंसाया. दीदी अब सोच रही थी कि ट्यूशन ही बंद कर दें. लीना को मनाने के लिये बोला "दीदी, वैसे मुझे पक्का नहीं मालूम, ऐसे ही कहा. पर सच बोलो, मजा आया कि नहीं?"
दीदी धीरे से बोली "उससे क्या फरक पड़ता है"
"वाह दीदी फरक क्यों नहीं पड़ता. तुम जो भी कहो, हम दोनों कुछ ऐसा ही हो इसकी फिराक में थे, है ना?"
"हां रे, मैडम कितनी खूबसूरत हैं? है ना?" दीदी आखिर थोड़ी खुलकर बोली.
मैं बोला. "और सर भी, उनका लंड देखा ना दीदी? क्या माल है! झूट मत बोल, तू कैसे चूस रही थी गन्ने जैसे" मैं बोला.
"हां, मजा तो आया. तू ही बोल क्या करें?" दीदी कनखियों से देखकर बोली.
"आयेंगे ना दीदी, प्लीज़" मैंने दीदी का हाथ पकड़कर कहा. "मजा आयेगा. सर और मैडम ने जान बूझकर भले किया हो पर हम ही तो देखते थे उन दोनों को, उनकी समझ में आ गया और उन्होंने हाथ साफ़ कर दिया. हमें भी तो यही चाहिये था ना दीदी? बोलो, आयेंगे ना दीदी?"
"हां आयेंगे. पर किसी को बताना नहीं, तेरा कोई भरोसा नहीं" दीदी मेरी ओर देखकर बोली.
"मेरा क्या दिमाग खराब हुआ है? पर दीदी अब मैडम और सर मिलकर हमको ... याने आज जैसे रोज ... याने चोदेंगे क्या?" मैंने पूछा.
"फ़िर क्या, पूजा करने को बुलाया है?" दीदी हंसने लगी.
"दीदी, तुम ... चुदवा लोगी सर से? मैं तो मैडम को रोज मस्त चोदा करूंगा आज की तरह!"
"हां रे, डर तो लगता है पर कितना मस्त लंड है उनका. और हंसता क्या है? सर तुझे भी चोदेंगे. छोड़ेंगे थोड़े" दीदी मुझे धक्का देते हुए बोली.
"पर दीदी, मैं तो मर्द हूं. मेरी ... याने मेरी चूत थोड़े है तेरे जैसी, फ़िर कैसे चोदेंगे" मैंने सकपकाकर पूछा.
"अरे इतना भोला मत बन, कल कैसी किताब पढ़कर सुना रहा था मस्तराम की. वो देवर भौजी की गांड मारता है तब की ..."
"याने दीदी, सर मेरी .... बाप रे, मैं नहीं आने वाला कल" मैं सहम कर बोला.
"मत आ, मैं तो जाऊंगी. वो मैडम के मम्मे कितने प्यारे थे, याद है ना? देखा था ना? मुझसे खूब चुसवाये आज उन्होंने. और उनकी चूत का स्वाद ... वो तो तूने लिया ही नहीं. और सर कल ही तेरे को ... ऐसा थोड़े ही है, वो तो मैं इस लिये कह रही थी कि मुझे लगता है कि मैडम और सर दोनों को हम दोनों से ये मस्ती का लगाव हो गया है" दीदी मुझे लुभाते हुए बोली.
"तो दीदी, मैं क्या सिर्फ़ मैडम के साथ मस्ती नहीं कर सकता, सर मना करेंगे क्या?" मैंने पूछा.
"और क्या, तुझे लगा खुश होंगे? पर तू डरता क्यों है, सर तुझे बहुत पसंद करते हैं. सर ने तुझे प्यार किया ना अकेले में? वैसे ही जैसे मैडम ने मुझे किया? तुझे अच्छा नहीं लगा क्या? मेरी कसम सच बता!"
"हां दीदी, पहले बहुत अजीब लगा, पर बाद में मेरा खड़ा होने के बाद अच्छा लगा. मैं तो बस थोड़ा इसलिये डर रहा था कि सर का बहुत बड़ा है. वैसे बहुत मस्त है दीदी, एकदम खूबसूरत है, जब मैं हाथ में ले कर ... तब बहुत मजा आ रहा था दीदी"
"और कुछ नहीं किया सर ने? मलाई नहीं खिलाई तेरे को? मुझे चुसवाने के पहले अकेले में नहीं चुसवाया था सर ने अपना गन्ना? और तूने भी कुछ किया होगा. देख बात मत बना, ऐसा भोला भाला मत बन" दीदी ने ताना दिया.
मैं शरमा कर नीचे देखने लगा. "हां दीदी"
"तो नाटक मत कर, अपन दोनों कल से चलेंगे तीन घंटे के लिये, ठीक है ना?" दीदी बोली.
"हां दीदी. बहुत मजा आयेगा दीदी, आज तो सर पहले डांट रहे थे इसलिये मैं घबरा गया था, बाद में कितना प्यार किया उन्होंने, है ना दीदी?" मैं खुद को समझाता हुआ बोला, कल के बारे में सोच सोच कर मेरा लंड फ़िर से खड़ा हो रहा था.
चलते चलते घर आने को था तब मैं बोला "दीदी, आज रात चोदने दो ना"
दीदी मेरा कान पकड़कर बोली "खबरदार बदमाश, नानी को बता दूंगी. अब जो करना है सर और मैडम के साथ करना"
"दीदी, तुम बहुत सुंदर हो, मेरा खड़ा हो जाता है" मैंने सफ़ायी दी.
"वो ठीक है रे. पर जब हम सर के यहां जायेंगे तो क्या थके हुए जायें? हमें पूरा आराम करके ताजे होकर जाना चाहिये, जिससे सर और मैडम को मजा आये. ऐसे रात को मजा करना शुरू कर दिया तो उनको जरूर पता चल जायेगा, फ़िर पढ़ाई की छुट्टी!"
"दीदी पर तेरी चूत कितनी प्यारी दिख रही थी आज? तुम तो दिखाती भी नहीं हो ठीक से. कम से कम चाटने दोगी दीदी आज रात? प्लीज़?" मैंने दीदी का हाथ पकड़कर कहा.
"मैंने मना किया ना, सुना नहीं? अब ऐसी रोनी सूरत मत बना. सर और मैडम के साथ जब साथ साथ लेसन होगा तो जरूर चांस मिलेगा तुझे देख"
हम दोनों घर की ओर चलने लगे
दूसरे दिन हम जल्दी पहुंच गये.
"आओ बच्चो, दस मिनिट जल्दी ही आ गये?" सर ने दरवाजा हमारे पीछे बंद करते हुए पूछा.
"हां सर, सोचा देर न हो जाये" मैं नीचे देखता हुआ बोला.
"बहुत अच्छा किया. ज्यादा टाइम मिलेगा हमें, है ना? लो ये मैडम भी आ गयीं" सर ने कहा. वे सिर्फ़ कुरता पजामा पहने हुए थे. लगता है अंदर और कुछ नहीं था क्योंकि हम दोनों को देखते ही उनके पाजामे में धीरे धीरे एक तंबू बनने लगा.
मैडम सिर्फ़ एक गाउन पहने हुए थीं. उन्होंने भी अंदर कुछ नहीं पहना था. उनके स्तनों का उभार तो गाउन में दिख ही रहा था, ऊपर से निपलों का शेप भी दिख रहा था.
हमारी नजर कभी मैडम के मम्मों पर जाती और कभी सर के पजामे में बने तंबू पर. सर मुस्कराये और बोले "चलो, अब आधा घंटा पढ़ लो. और खबरदार, ठीक से पढ़ना, पढ़ाई में कोई गलती नहीं होनी चाहिये. आज से अब पनिशमेंट भी मिलेगा समझे ना? चलो, तुम दोनों अब मैडम से पढ़ो, फ़िर मेरे पास आना"
सर दूसरे कमरे में चले गये. मैडम ने गणित पढ़ाना शुरू किया. पर हम दोनों का ध्यान नहीं था, दिमाग में और ही कुछ चल रहा था. बार बार नजर मैडम के गोरे बदन और उनके गाउन के ऊपर के खुले भाग में से दिखते मुलायम स्तनों पर जाती.
मैडम ने हमें एक सवाल करने को दिया. मैंने कर लिया पर दीदी को नहीं बना. वह मैडम की ओर देखकर बिना बात शरमाती और इधर उधर देखने लगती. मैं समझ गया कि दीदी की चूत गीली हो रही है कल की मैडम के साथ वाली बात सोच कर. मैडम कुछ नहीं बोलीं, फ़िर हमारी कॉपी चेक की. मुझे कुछ नहीं कहा पर दीदी को बोलीं "लीना, हाथ आगे कर" और स्केल उठा ली.
"क्यों मैडम?" लीना घबरा गयी.
"मैंने कहा ना आगे कर, .... ऐसे ..." फ़िर सट से खड़ी स्केल दीदी की हथेली पर जड़ दी.
"उई ऽ मैडम दुखता है ... प्लीज़ मैडम ... प्लीज़ .." वो रोने को आ गयी और हाथ पीछे खींच लिया.
मैडम ने उसका हाथ पकड़ा और एक के बाद एक तीन चार स्केल जड़ दीं. दीदी मुसमुसा कर रोने लगी.
मैडम कड़े स्वर में बोलीं "समझ नहीं है तुझ में? इतनी बड़ी हो गयी है. यहां पढ़ने आती है ना? अगर फ़ेल हो गयी तो तेरी नानी कहेगी कि मैडम तो कुछ पढ़ाती नहीं हैं, फ़िर तेरी ट्यूशन बंद हो जायेगी और यहां आना भी बंद हो जायेगा? यही चाहती है तू?"
लीना दीदी सिसकते हुए बोली "सॉरी मैडम, भूल हो गयी, अब याद रखूंगी"
उसके बाद वो भी बड़े ध्यान से पढ़ने लगी. आधा घंटे बाद मैडम ने शाबासी दी. "ऐसे पढ़ा करो अच्छे बच्चों जैसे. अब सर के पास जाओ, अनिल तुम लेसन खतम होने पर फ़िर मेरे पास आना, और लीना तू सर के कमरे में ही रहना, फ़िर हमारा अगला लेसन शुरू होगा, जिसके लिये तुम दोनों बेताब हो, ठीक है ना?"
"हां मैडम" कहकर हम दोनों सर के कमरे में गये. वे टेबल के पीछे बैठे थे, शायद जान बूझकर जिससे हमें उनका तंबू न दिखे और मन इधर उधर न भटके. शायद उन्होंने मैडम की बात सुन ली थी. हम इंग्लिश पढ़ने लगे. सर ने मन लगाकर पढ़ाया. बीच बीच में पूछते जाते. दीदी अब फ़टाफ़ट जवाब दे रही थी. पर मेरा ध्यान बार बार सर पर जाता. वे सच में काफ़ी हैंडसम थे, शेव किया हुआ उनका चेहरा एकदम चिकना लग रहा था. मैं बार बार कल के बारे में सोच रहा था, सर का लंड याद आ रहा था. इसी चक्क्कर में मुझसे गलती हुई तो उन्होंने मेरा कान पकड़ा और एक तमाचा जड़ दिया "अब तेरी बारी है मार खाने की, तुझे मुझसे पढ़ना है कि नहीं? या घर मैं बैठना है?"
मैंने रोनी आवाज में ’सॉरी’ कहा और ध्यान दे कर पढ़ने लगा. हम दोनों समझ गये थे कि अगली मस्ती वाली पढ़ाई के लिये इस पढ़ाई को सीरियसली लेने की जरूरत थी.
आधे घंटे बाद सर बोले "चलो, आज का ये लेसन खतम हुआ. लीना, तू बहुत ध्यान से पढ़ती है, बहुत अच्छी बच्ची है, तू यहीं रुक, अब तुझे अगला लेसन देता हूं. अनिल तुम मैडम के कमरे में जाओ."
क्रमशः। ...........................
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ट्यूशन का मजा-7
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दो मिनिट हम चुपचाप चलते रहे, आज के दिन जो हुआ था, वह इतना मस्ती वाला था कि विश्वास ही नहीं हो रहा था. मन में थोड़ा डर भी था कि हमने जो किया वो गलत तो नहीं किया.
थोड़ी देर बाद लीना दीदी बोली "क्या किया रे सर ने तेरे साथ अकेले में?"
"और तेरे साथ मैडम ने क्या किया दीदी?" मैंने पूछा. दीदी कुछ नहीं बोली.
मैंने कहा "दीदी, कल आना है क्या?"
"क्यों अनिल, क्यों पूछता है? अभी तो बड़ी खुशी से चहक रहा था" दीदी मुड़ कर बोली.
"ऐसे ही, दीदी, तुमने भी तो शनिवार रविवार की बात खुद ही छेड़ी थी, है ना?" मैंने कहा तो दीदी चुप हो गयी. दो मिनिट बाद मैं बोला "दीदी, यूं ही मेरे मन में आया, लगता है सर और मैडम ने मिलकर हमें फ़ंसाया है. मैडम ने जान बूझकर हम दोनों को मालिश के लिये कहा था. फ़िर आकर सर ने पकड़ लिया" मैंने कहा.
"हां अनिल, सच कहता है, वैसे ये गलत बात है. हमें शायद नहीं आना चाहिये है ना?" दीदी बोली और मेरी ओर देखने लगी.
मैं थोड़ा बिचक गया, सोचा कि फालतू ये कहा कि सर और मैडम ने हमें फंसाया. दीदी अब सोच रही थी कि ट्यूशन ही बंद कर दें. लीना को मनाने के लिये बोला "दीदी, वैसे मुझे पक्का नहीं मालूम, ऐसे ही कहा. पर सच बोलो, मजा आया कि नहीं?"
दीदी धीरे से बोली "उससे क्या फरक पड़ता है"
"वाह दीदी फरक क्यों नहीं पड़ता. तुम जो भी कहो, हम दोनों कुछ ऐसा ही हो इसकी फिराक में थे, है ना?"
"हां रे, मैडम कितनी खूबसूरत हैं? है ना?" दीदी आखिर थोड़ी खुलकर बोली.
मैं बोला. "और सर भी, उनका लंड देखा ना दीदी? क्या माल है! झूट मत बोल, तू कैसे चूस रही थी गन्ने जैसे" मैं बोला.
"हां, मजा तो आया. तू ही बोल क्या करें?" दीदी कनखियों से देखकर बोली.
"आयेंगे ना दीदी, प्लीज़" मैंने दीदी का हाथ पकड़कर कहा. "मजा आयेगा. सर और मैडम ने जान बूझकर भले किया हो पर हम ही तो देखते थे उन दोनों को, उनकी समझ में आ गया और उन्होंने हाथ साफ़ कर दिया. हमें भी तो यही चाहिये था ना दीदी? बोलो, आयेंगे ना दीदी?"
"हां आयेंगे. पर किसी को बताना नहीं, तेरा कोई भरोसा नहीं" दीदी मेरी ओर देखकर बोली.
"मेरा क्या दिमाग खराब हुआ है? पर दीदी अब मैडम और सर मिलकर हमको ... याने आज जैसे रोज ... याने चोदेंगे क्या?" मैंने पूछा.
"फ़िर क्या, पूजा करने को बुलाया है?" दीदी हंसने लगी.
"दीदी, तुम ... चुदवा लोगी सर से? मैं तो मैडम को रोज मस्त चोदा करूंगा आज की तरह!"
"हां रे, डर तो लगता है पर कितना मस्त लंड है उनका. और हंसता क्या है? सर तुझे भी चोदेंगे. छोड़ेंगे थोड़े" दीदी मुझे धक्का देते हुए बोली.
"पर दीदी, मैं तो मर्द हूं. मेरी ... याने मेरी चूत थोड़े है तेरे जैसी, फ़िर कैसे चोदेंगे" मैंने सकपकाकर पूछा.
"अरे इतना भोला मत बन, कल कैसी किताब पढ़कर सुना रहा था मस्तराम की. वो देवर भौजी की गांड मारता है तब की ..."
"याने दीदी, सर मेरी .... बाप रे, मैं नहीं आने वाला कल" मैं सहम कर बोला.
"मत आ, मैं तो जाऊंगी. वो मैडम के मम्मे कितने प्यारे थे, याद है ना? देखा था ना? मुझसे खूब चुसवाये आज उन्होंने. और उनकी चूत का स्वाद ... वो तो तूने लिया ही नहीं. और सर कल ही तेरे को ... ऐसा थोड़े ही है, वो तो मैं इस लिये कह रही थी कि मुझे लगता है कि मैडम और सर दोनों को हम दोनों से ये मस्ती का लगाव हो गया है" दीदी मुझे लुभाते हुए बोली.
"तो दीदी, मैं क्या सिर्फ़ मैडम के साथ मस्ती नहीं कर सकता, सर मना करेंगे क्या?" मैंने पूछा.
"और क्या, तुझे लगा खुश होंगे? पर तू डरता क्यों है, सर तुझे बहुत पसंद करते हैं. सर ने तुझे प्यार किया ना अकेले में? वैसे ही जैसे मैडम ने मुझे किया? तुझे अच्छा नहीं लगा क्या? मेरी कसम सच बता!"
"हां दीदी, पहले बहुत अजीब लगा, पर बाद में मेरा खड़ा होने के बाद अच्छा लगा. मैं तो बस थोड़ा इसलिये डर रहा था कि सर का बहुत बड़ा है. वैसे बहुत मस्त है दीदी, एकदम खूबसूरत है, जब मैं हाथ में ले कर ... तब बहुत मजा आ रहा था दीदी"
"और कुछ नहीं किया सर ने? मलाई नहीं खिलाई तेरे को? मुझे चुसवाने के पहले अकेले में नहीं चुसवाया था सर ने अपना गन्ना? और तूने भी कुछ किया होगा. देख बात मत बना, ऐसा भोला भाला मत बन" दीदी ने ताना दिया.
मैं शरमा कर नीचे देखने लगा. "हां दीदी"
"तो नाटक मत कर, अपन दोनों कल से चलेंगे तीन घंटे के लिये, ठीक है ना?" दीदी बोली.
"हां दीदी. बहुत मजा आयेगा दीदी, आज तो सर पहले डांट रहे थे इसलिये मैं घबरा गया था, बाद में कितना प्यार किया उन्होंने, है ना दीदी?" मैं खुद को समझाता हुआ बोला, कल के बारे में सोच सोच कर मेरा लंड फ़िर से खड़ा हो रहा था.
चलते चलते घर आने को था तब मैं बोला "दीदी, आज रात चोदने दो ना"
दीदी मेरा कान पकड़कर बोली "खबरदार बदमाश, नानी को बता दूंगी. अब जो करना है सर और मैडम के साथ करना"
"दीदी, तुम बहुत सुंदर हो, मेरा खड़ा हो जाता है" मैंने सफ़ायी दी.
"वो ठीक है रे. पर जब हम सर के यहां जायेंगे तो क्या थके हुए जायें? हमें पूरा आराम करके ताजे होकर जाना चाहिये, जिससे सर और मैडम को मजा आये. ऐसे रात को मजा करना शुरू कर दिया तो उनको जरूर पता चल जायेगा, फ़िर पढ़ाई की छुट्टी!"
"दीदी पर तेरी चूत कितनी प्यारी दिख रही थी आज? तुम तो दिखाती भी नहीं हो ठीक से. कम से कम चाटने दोगी दीदी आज रात? प्लीज़?" मैंने दीदी का हाथ पकड़कर कहा.
"मैंने मना किया ना, सुना नहीं? अब ऐसी रोनी सूरत मत बना. सर और मैडम के साथ जब साथ साथ लेसन होगा तो जरूर चांस मिलेगा तुझे देख"
हम दोनों घर की ओर चलने लगे
दूसरे दिन हम जल्दी पहुंच गये.
"आओ बच्चो, दस मिनिट जल्दी ही आ गये?" सर ने दरवाजा हमारे पीछे बंद करते हुए पूछा.
"हां सर, सोचा देर न हो जाये" मैं नीचे देखता हुआ बोला.
"बहुत अच्छा किया. ज्यादा टाइम मिलेगा हमें, है ना? लो ये मैडम भी आ गयीं" सर ने कहा. वे सिर्फ़ कुरता पजामा पहने हुए थे. लगता है अंदर और कुछ नहीं था क्योंकि हम दोनों को देखते ही उनके पाजामे में धीरे धीरे एक तंबू बनने लगा.
मैडम सिर्फ़ एक गाउन पहने हुए थीं. उन्होंने भी अंदर कुछ नहीं पहना था. उनके स्तनों का उभार तो गाउन में दिख ही रहा था, ऊपर से निपलों का शेप भी दिख रहा था.
हमारी नजर कभी मैडम के मम्मों पर जाती और कभी सर के पजामे में बने तंबू पर. सर मुस्कराये और बोले "चलो, अब आधा घंटा पढ़ लो. और खबरदार, ठीक से पढ़ना, पढ़ाई में कोई गलती नहीं होनी चाहिये. आज से अब पनिशमेंट भी मिलेगा समझे ना? चलो, तुम दोनों अब मैडम से पढ़ो, फ़िर मेरे पास आना"
सर दूसरे कमरे में चले गये. मैडम ने गणित पढ़ाना शुरू किया. पर हम दोनों का ध्यान नहीं था, दिमाग में और ही कुछ चल रहा था. बार बार नजर मैडम के गोरे बदन और उनके गाउन के ऊपर के खुले भाग में से दिखते मुलायम स्तनों पर जाती.
मैडम ने हमें एक सवाल करने को दिया. मैंने कर लिया पर दीदी को नहीं बना. वह मैडम की ओर देखकर बिना बात शरमाती और इधर उधर देखने लगती. मैं समझ गया कि दीदी की चूत गीली हो रही है कल की मैडम के साथ वाली बात सोच कर. मैडम कुछ नहीं बोलीं, फ़िर हमारी कॉपी चेक की. मुझे कुछ नहीं कहा पर दीदी को बोलीं "लीना, हाथ आगे कर" और स्केल उठा ली.
"क्यों मैडम?" लीना घबरा गयी.
"मैंने कहा ना आगे कर, .... ऐसे ..." फ़िर सट से खड़ी स्केल दीदी की हथेली पर जड़ दी.
"उई ऽ मैडम दुखता है ... प्लीज़ मैडम ... प्लीज़ .." वो रोने को आ गयी और हाथ पीछे खींच लिया.
मैडम ने उसका हाथ पकड़ा और एक के बाद एक तीन चार स्केल जड़ दीं. दीदी मुसमुसा कर रोने लगी.
मैडम कड़े स्वर में बोलीं "समझ नहीं है तुझ में? इतनी बड़ी हो गयी है. यहां पढ़ने आती है ना? अगर फ़ेल हो गयी तो तेरी नानी कहेगी कि मैडम तो कुछ पढ़ाती नहीं हैं, फ़िर तेरी ट्यूशन बंद हो जायेगी और यहां आना भी बंद हो जायेगा? यही चाहती है तू?"
लीना दीदी सिसकते हुए बोली "सॉरी मैडम, भूल हो गयी, अब याद रखूंगी"
उसके बाद वो भी बड़े ध्यान से पढ़ने लगी. आधा घंटे बाद मैडम ने शाबासी दी. "ऐसे पढ़ा करो अच्छे बच्चों जैसे. अब सर के पास जाओ, अनिल तुम लेसन खतम होने पर फ़िर मेरे पास आना, और लीना तू सर के कमरे में ही रहना, फ़िर हमारा अगला लेसन शुरू होगा, जिसके लिये तुम दोनों बेताब हो, ठीक है ना?"
"हां मैडम" कहकर हम दोनों सर के कमरे में गये. वे टेबल के पीछे बैठे थे, शायद जान बूझकर जिससे हमें उनका तंबू न दिखे और मन इधर उधर न भटके. शायद उन्होंने मैडम की बात सुन ली थी. हम इंग्लिश पढ़ने लगे. सर ने मन लगाकर पढ़ाया. बीच बीच में पूछते जाते. दीदी अब फ़टाफ़ट जवाब दे रही थी. पर मेरा ध्यान बार बार सर पर जाता. वे सच में काफ़ी हैंडसम थे, शेव किया हुआ उनका चेहरा एकदम चिकना लग रहा था. मैं बार बार कल के बारे में सोच रहा था, सर का लंड याद आ रहा था. इसी चक्क्कर में मुझसे गलती हुई तो उन्होंने मेरा कान पकड़ा और एक तमाचा जड़ दिया "अब तेरी बारी है मार खाने की, तुझे मुझसे पढ़ना है कि नहीं? या घर मैं बैठना है?"
मैंने रोनी आवाज में ’सॉरी’ कहा और ध्यान दे कर पढ़ने लगा. हम दोनों समझ गये थे कि अगली मस्ती वाली पढ़ाई के लिये इस पढ़ाई को सीरियसली लेने की जरूरत थी.
आधे घंटे बाद सर बोले "चलो, आज का ये लेसन खतम हुआ. लीना, तू बहुत ध्यान से पढ़ती है, बहुत अच्छी बच्ची है, तू यहीं रुक, अब तुझे अगला लेसन देता हूं. अनिल तुम मैडम के कमरे में जाओ."
मैं मैडम के कमरे में दाखिल हुआ, दिल धड़क रहा था. मैडम पूरी नंगी होकर सोफ़े पर बैठी मेरा इंतजार कर रही थीं.
"आओ अनिल, पहले अपने सब कपड़े उतारो, फ़िर मेरे पास आओ" अपने मम्मे एक हाथ से सहलाती हुई वे बोलीं. उनका दूसरा हाथ अपनी बुर से खेल रहा था. मैंने फ़टाफ़ट कपड़े उतारे और शरमाता हुआ उनके पास बैठ गया. मेरा लंड अभी बैठा था.
मैडम ने मुझे चूम लिया "अब घबराने की जरूरत नहीं है, अब पढ़ाई भूल जाओ और इस तरफ़ ध्यान दो. देखो, तेरी दीदी का लेसन कैसा चल रहा है"
मैंने देखा तो दोनों कमरों के बीच में एक खिड़की थी. मैं चकरा गया, कल तक तो यह नहीं थी.
खिड़की में से सर का कमरा दिख रहा था. सर ने अपने कपड़े उतार दिये थे और दीदी को गोद में बिठा कर चूम रहे थे. दीदी शरमा रही थी पर बड़ी खुशी खुशी चौधरी सर को चुम्मे दे रही थी. सर कुछ देर तक दीदी की चूंचियां ब्लाउज़ पर से दबाते रहे फ़िर अपना लंड दीदी के हाथ में दे दिया और उसके कपड़े उतारने लगे. सर का बदन एकदम गठीला और गोरा चिट्टा था. लंड के चारों ओर अच्छी घनी झांटें थीं.
मेरा लंड खड़ा हो गया. मैडम भी बड़े प्यार से उसे मुठिया रही थीं. अब मेरी झिझक जा चुकी थी, साहस करके मैंने मैडम की एक चूंची पकड़ ली और धीरे धीरे दबाने लगा. "ये निपल को उंगलियों में लो और घुमाओ, जरा मसलो, डरो मत, मुझे अच्छा लगता है" मैडम ने मुझे खींच कर सीने से लगाते हुए कहा. मैं मैडम के निपल मरोड़ते हुए दूसरे कमरे में देखने लगा. "मैडम, ये दो बेडरूम के बीच खिड़की ..." मैंने झिझकते हुए पूछा.
"हां पुराना घर है ना. वैसे यहां पर्दा रहता है पर आज से खास ट्यूशन है ना! इसलिये निकाल दिया है. दोनों कमरे वाले एक दूसरे को देख भी सकते हैं और कहने को अलग अलग कमरे में होने से बिना झिझक के मन की कर भी सकते हैं" मैडम ने कहा और फ़िर मुंह से ’सी’ ’सी’ करने लगीं क्योंकि चौधरी सर और दीदी के बीच का करम देखकर मैं उत्तेजित हो गया था और जोर से मैडम के निपल मसलने लगा था. मैंने सॉरी कहा तो मैडम बोलीं "अरे परेशान मत हो अनिल बेटे, मुझे अच्छा लगता है, जरा दबा भी ना जोर से मेरे मम्मे, मन में तो खूब सोचता होगा कि मैडम मिल जायें तो उनके भोंपू दबाऊंगा तो अब क्यों शरमा रहा है?"
"मैडम भोंपू ...?" मैंने कहा तो मैडम मेरा कान पकड़कर बोलीं "अब नादान ना बन, मैं जानता हूं कि तुम शरारती लड़के स्कूल की लेडी टीचर्स के बारे में क्या क्या कहते हो, चलो अब, बजाओ भोंपू"
मैडम ने नरम नरम भोंपू दबाता हुआ मैं देखने लगा. अब तक सर ने दीदी को नंगा कर दिया था और उससे कुछ कह रहे थे. दीदी शरमा रही थी. सर ने उसे गोद में लेकर अपने लंड पर साइकिल के डंडे जैसा बिठा लिया था और उनका तना हुआ लंड दीदी की दुबली पतली जांघों के बीच से बाहर निकल आया था. सर अब दीदी की चूंचियां दोनों हाथों से मसल रहे थे और कस के उसे चूम रहे थे. वे बार बार दीदी का मुंह अपने होंठों से खोलते और चूसने लगते. दीदी एक मिनिट शरमाती रही फ़िर उसने भी मुंह खोल कर अपनी जीभ सर को चूसने को दे दी और हथेली में उनका सुपाड़ा लड्डू जैसा पकड़ लिया.
उनकी चूमाचाटी देखकर मुझसे न रहा गया और मैंने मैडम की ओर देखा. उन्होंने मुस्कराकर मेरे होंठों पर अपने गुलाबी होंठ रख दिये और चूमने लगीं. उनकी जीभ मेरे मुंह पर लग रही थी. मैंने मुंह खोला और मैडम की रसीली जीभ चूसने लगा. साथ साथ मैं कमर हिला कर मैडम की मुठ्ठी में दबे मेरे लंड को आगे पीछे कर रहा था.
मैडम ने फ़िर मेरा सिर अपनी छाती पर दबाया और बोलीं "अनिल, अब मुंह में लो. अपनी मैडम के मम्मे चूसने का मन नहीं करता है क्या?" मेरा हाथ पकड़कर उन्होंने अपनी बुर पर रख दिया.
"हां मैडम, करता है" कहकर मैंने मैडम का निपल मुंह में ले लिया और चूसते चूसते मैडम की बुर को टटोलने लगा. एकदम गीली थी और चिकनी भी थी. "अरे ऐसे उंगली से कर मेरे बच्चे, जरा मजा दे मुझे, अब सीख ले यह कला, बहुत काम आयेगी तेरे. उधर देख, तेरे सर क्या कर रहे हैं .... आह ... हां ऐसे ही रगड़ अब ... अरे जरा धीरे ... प्यार से .. "
मैंने देखा तो अब चौधरी सर ने दीदी को एक कुरसी में बिठा दिया था और सामने बैठ कर उसकी चूत चाट रहे थे. बड़े प्यार से उसपर नीचे से ऊपर तक जीभ रगड़ रहे थे जैसे कैंडी चाट रहे हों. दीदी मेरी और मैडम की तरफ़ देख रही थी, उसका चेहरा लाल हो गया था पर एकदम खुश नजर आ रही थी. सर ने अब उसकी बुर की लकीर में एक उंगली डाली और घिसने लगे. दीदी ’सी’ ’सी’ करने लगी. थोड़ी देर से सर ने उंगली मोड़ी और धीरे से दीदी की बुर में घुसेड़ दी. लीना थोड़ी कसमसा सी गयी.
"आओ अनिल, पहले अपने सब कपड़े उतारो, फ़िर मेरे पास आओ" अपने मम्मे एक हाथ से सहलाती हुई वे बोलीं. उनका दूसरा हाथ अपनी बुर से खेल रहा था. मैंने फ़टाफ़ट कपड़े उतारे और शरमाता हुआ उनके पास बैठ गया. मेरा लंड अभी बैठा था.
मैडम ने मुझे चूम लिया "अब घबराने की जरूरत नहीं है, अब पढ़ाई भूल जाओ और इस तरफ़ ध्यान दो. देखो, तेरी दीदी का लेसन कैसा चल रहा है"
मैंने देखा तो दोनों कमरों के बीच में एक खिड़की थी. मैं चकरा गया, कल तक तो यह नहीं थी.
खिड़की में से सर का कमरा दिख रहा था. सर ने अपने कपड़े उतार दिये थे और दीदी को गोद में बिठा कर चूम रहे थे. दीदी शरमा रही थी पर बड़ी खुशी खुशी चौधरी सर को चुम्मे दे रही थी. सर कुछ देर तक दीदी की चूंचियां ब्लाउज़ पर से दबाते रहे फ़िर अपना लंड दीदी के हाथ में दे दिया और उसके कपड़े उतारने लगे. सर का बदन एकदम गठीला और गोरा चिट्टा था. लंड के चारों ओर अच्छी घनी झांटें थीं.
मेरा लंड खड़ा हो गया. मैडम भी बड़े प्यार से उसे मुठिया रही थीं. अब मेरी झिझक जा चुकी थी, साहस करके मैंने मैडम की एक चूंची पकड़ ली और धीरे धीरे दबाने लगा. "ये निपल को उंगलियों में लो और घुमाओ, जरा मसलो, डरो मत, मुझे अच्छा लगता है" मैडम ने मुझे खींच कर सीने से लगाते हुए कहा. मैं मैडम के निपल मरोड़ते हुए दूसरे कमरे में देखने लगा. "मैडम, ये दो बेडरूम के बीच खिड़की ..." मैंने झिझकते हुए पूछा.
"हां पुराना घर है ना. वैसे यहां पर्दा रहता है पर आज से खास ट्यूशन है ना! इसलिये निकाल दिया है. दोनों कमरे वाले एक दूसरे को देख भी सकते हैं और कहने को अलग अलग कमरे में होने से बिना झिझक के मन की कर भी सकते हैं" मैडम ने कहा और फ़िर मुंह से ’सी’ ’सी’ करने लगीं क्योंकि चौधरी सर और दीदी के बीच का करम देखकर मैं उत्तेजित हो गया था और जोर से मैडम के निपल मसलने लगा था. मैंने सॉरी कहा तो मैडम बोलीं "अरे परेशान मत हो अनिल बेटे, मुझे अच्छा लगता है, जरा दबा भी ना जोर से मेरे मम्मे, मन में तो खूब सोचता होगा कि मैडम मिल जायें तो उनके भोंपू दबाऊंगा तो अब क्यों शरमा रहा है?"
"मैडम भोंपू ...?" मैंने कहा तो मैडम मेरा कान पकड़कर बोलीं "अब नादान ना बन, मैं जानता हूं कि तुम शरारती लड़के स्कूल की लेडी टीचर्स के बारे में क्या क्या कहते हो, चलो अब, बजाओ भोंपू"
मैडम ने नरम नरम भोंपू दबाता हुआ मैं देखने लगा. अब तक सर ने दीदी को नंगा कर दिया था और उससे कुछ कह रहे थे. दीदी शरमा रही थी. सर ने उसे गोद में लेकर अपने लंड पर साइकिल के डंडे जैसा बिठा लिया था और उनका तना हुआ लंड दीदी की दुबली पतली जांघों के बीच से बाहर निकल आया था. सर अब दीदी की चूंचियां दोनों हाथों से मसल रहे थे और कस के उसे चूम रहे थे. वे बार बार दीदी का मुंह अपने होंठों से खोलते और चूसने लगते. दीदी एक मिनिट शरमाती रही फ़िर उसने भी मुंह खोल कर अपनी जीभ सर को चूसने को दे दी और हथेली में उनका सुपाड़ा लड्डू जैसा पकड़ लिया.
उनकी चूमाचाटी देखकर मुझसे न रहा गया और मैंने मैडम की ओर देखा. उन्होंने मुस्कराकर मेरे होंठों पर अपने गुलाबी होंठ रख दिये और चूमने लगीं. उनकी जीभ मेरे मुंह पर लग रही थी. मैंने मुंह खोला और मैडम की रसीली जीभ चूसने लगा. साथ साथ मैं कमर हिला कर मैडम की मुठ्ठी में दबे मेरे लंड को आगे पीछे कर रहा था.
मैडम ने फ़िर मेरा सिर अपनी छाती पर दबाया और बोलीं "अनिल, अब मुंह में लो. अपनी मैडम के मम्मे चूसने का मन नहीं करता है क्या?" मेरा हाथ पकड़कर उन्होंने अपनी बुर पर रख दिया.
"हां मैडम, करता है" कहकर मैंने मैडम का निपल मुंह में ले लिया और चूसते चूसते मैडम की बुर को टटोलने लगा. एकदम गीली थी और चिकनी भी थी. "अरे ऐसे उंगली से कर मेरे बच्चे, जरा मजा दे मुझे, अब सीख ले यह कला, बहुत काम आयेगी तेरे. उधर देख, तेरे सर क्या कर रहे हैं .... आह ... हां ऐसे ही रगड़ अब ... अरे जरा धीरे ... प्यार से .. "
मैंने देखा तो अब चौधरी सर ने दीदी को एक कुरसी में बिठा दिया था और सामने बैठ कर उसकी चूत चाट रहे थे. बड़े प्यार से उसपर नीचे से ऊपर तक जीभ रगड़ रहे थे जैसे कैंडी चाट रहे हों. दीदी मेरी और मैडम की तरफ़ देख रही थी, उसका चेहरा लाल हो गया था पर एकदम खुश नजर आ रही थी. सर ने अब उसकी बुर की लकीर में एक उंगली डाली और घिसने लगे. दीदी ’सी’ ’सी’ करने लगी. थोड़ी देर से सर ने उंगली मोड़ी और धीरे से दीदी की बुर में घुसेड़ दी. लीना थोड़ी कसमसा सी गयी.
क्रमशः। ...........................
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