FUN-MAZA-MASTI
ट्यूशन का मजा-8
गतांक से आगे..............................
क्रमशः। ...........................
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ट्यूशन का मजा-8
गतांक से आगे..............................
"क्या
हुआ लीना? दुख रहा है क्या, दुखना नहीं चाहिये, सिर्फ़ उंगली ही तो डाली
है, तू तो मोमबत्ती डालती है ना" कहकर सर उसकी चूत को उंगली से चोदते हुए
चूसने लगे. फ़िर उंगली निकालकर चाटी और दीदी की बुर उंगलियों से फ़ैलायी और
मुंह लगा दिया जैसे आम चूस रहे हों. "हा ऽ य ... आ ऽ ह ... सर ... बहुत
अच्छा लगता है सर ... प्लीज़ सर ऽ ... उई ऽ मां ऽ ..." कहकर दीदी अपनी कमर
हिलाने लगी. उसने सर का सिर पकड़ लिया था और उनके मुंह पर अपनी चूत रगड़ रही
थी.
देखकर मुझसे न रहा गया. उनका निपल मुंह से निकाल कर मैंने अपनी उंगली मैडम की बुर में से निकाली और चाट कर देखी "मैडम मैं आप की चूत चूसूं?"
"क्यों रे? चूसेगा कि चोदेगा? कल तूने बहुत अच्छा चोदा था. मजा आया. बहुत दिन में किसी ने ऐसे चोदा मुझे" मैडम मेरे गालों पर अपनी चूंचियां रगड़ती हुई बोलीं.
"मैडम, चोदूंगा भी पर पहले चूसने दीजिये ना, कल भी आप ने सिर्फ़ दीदी को चूत चटवायी, मुझे कुछ नहीं मिला" मैं बोला. मेरे मन में आया कि सर का इतना मस्त लंड है, उससे तो मैडम रोज चुदवाती होंगी, फ़िर ऐसा क्यों बोलीं कि बहुत दिन बाद कल चुदवाया. पर कुछ बोला नहीं.
"चल, चूस ले, वैसे तेरी दीदी ने भी बहुत प्यार से मेरी बुर का रस पिया था कल" कहकर मैडम ने पैर फ़ैला दिये. मैं झट से नीचे बैठा और उनकी बुर से मुंह लगा दिया.
"हां ऽ बस ऐसे ही ऽ ... जीभ लगा ... वो दाना है ना? ... वहां ... बस ऐसे ही ... बहुत अच्छे अनिल ... अच्छा लगा टेस्ट?"
"हां मैडम ..." मैं बोला और चूसता रहा. थोड़ी देर के बाद वे आगे पीछे होने लगीं और मेरे सिर को अपनी जांघों में कस कर मेरा चेहरा अपनी बुर पर सटा लिया.
"ओह ... ओह ... तुम दोनों बच्चे हो बड़े होशियार इन कामों में ... आह ऽ ... वो देख तेरी दीदी झड़ गयी ... छूटने की कोशिश कर रही है पर सर उसे नहीं छोड़ेंगे, रस का चस्का जो लग गया है ... अब तेरी दीदी की बुर को निचोड़ कर ही दम लेंगे ... ओह .. ओह .. ले ... तू भी पी मेरा रस ... हां ऽ हां अनिल .. ऐसे ही ...." कहते हुए मैडम का बदन कपकपाया और मेरे मुंह में पानी बहने लगा.
करीब दस मिनिट बाद मैडम फ़िर से झड़ीं और मुझे और थोड़ा बुर का पानी पिलाकर मुझे खींच कर उठा दिया. वे बड़ी तृप्त लग रही थीं. "बहुत अच्छा किया अनिल. तुझे स्वाद पसंद आया?"
"हां मैडम, बहुत ... गाढ़ा और .... शहद जैसा है मैडम" मैंने तारीफ़ की. मैडम खुश होकर बोलीं "शहद की कमी नहीं होगे तुझे कभी, जब चाहे, ले लिया कर अब अब जरा यहां देख ... तेरी दीदी कौनसा लेसन सीख रही है"
मैं मुंह पोंछता हुआ उठ बैठा. देखा तो दीदी सर के सामने नीचे बैठ कर उनका लंड मुंह में लेने की कोशिश कर रही थी. बस सुपाड़ा ही ले पायी थी, उसके गाल फ़ूल गये थे. सर अपना लंड उसके मुंह में पेलने की कोशिश कर रहे थे और कह रहे थे "लीना, ऐसे तो तूने कल भी चूसा था, अब नया कुछ सीखना है कि नहीं? और मुंह में ले, जाने दे गले में, रोक नहीं, पूरा ले आज ..."
लीना गों गों करने लगी. सर ने लंड उसके मुंह से खींचा और उठ खड़े हुए "कोई बात नहीं, तेरे लिये ये नया है, नयी नयी जवानी जो है. घबरा मत, आज तेरा ये लेसन मैं पूरा कर ही दूंगा. रुक, मैं अभी आया"
वे कमरे के बाहर गये और एक मिनिट में एक मोटा लंबा केला ले कर वापस आये. केला छीलते हुए बोले "इससे प्रैक्टिस करवाता हूं, देख लीना, पहली बात यह ध्यान में रख कि गले को ढीला छोड़, एकदम ढीला. दूसरे यह कि ऐसे समझ कि तू जो निगल रही है उसमें से तुझे बहुत सी मलाई मिलने वाली है, ठीक है ना? अब मुंह खोल"
लीना ने मुंडी हिलाई और पूरा मुंह बा दिया. चौधरी सर ने उसके मुंह में केला डाला और धीरे धीरे अंदर घुसेड़ने लगे. चार पांच इंच के बाद दीदी कसमसाई तो वे रुक गये "तू गला नहीं ढीला कर रही है लीना, बिलकुल ढीला कर" लीना दीदी ने पलकें झपकाईं और सर फ़िर से केला अंदर डालने लगे. इस बार दीदी पूरा निगल गयी.
"शाबास लीना, ये हुई ना बात! ये केला बड़ा वाला मद्रासी केला है, दस इंच का, मेरे लंड से दो इंच बड़ा, अब तो तू आराम से ले लेगी, बस अंदर बाहर करने की प्रैक्टिस कर. लंड चूसते समय जितना जरूरी पूरा मुंह में लेना है, उतना ही बार बार अंदर बाहर करना है, इससे जो मजा मिलता है उससे कोई भी मर्द तेरा गुलाम हो जायेगा. और देख, दांत नहीं लगाना, इस केले पर देख ये निशान बन गये हैं, अब बिना दांत लगाये अंदर बाहर कर, दांतों को अपने होंठों से ढक ले"
सर केले को लीना दीदी के मुंह से पूरा खींच कर फ़िर अंदर पेलने लगे. दीदी अब आसानी से कर रही थी. उसे मजा भी आ रहा था, वह सर का लंड अब हाथ में पकड़ कर बैठी थी. मैडम ने मुझसे कहा "तेरी दीदी तो एकदम एक्सपर्ट हो गयी अनिल? लगता है काफ़ी मतवाले स्वभाव की है. आ, मैं भी तुझे जरा मजा दूं इस बात का, पर झड़ना नहीं हं? नहीं तो सर मुझे डांटेंगे, बोले थे कि अनिल को इस लेसन में झड़ाना नहीं"
फ़िर मैडम ने झुक कर मेरा लंड मुंह में लिया और प्यार से चूसने लगीं. मैं उनके रेशमी बालों में उंगलियां फ़िराता हुआ मजा ले लकर फ़िर से सर और दीदी के कमरे में देखने लगा.
देखकर मुझसे न रहा गया. उनका निपल मुंह से निकाल कर मैंने अपनी उंगली मैडम की बुर में से निकाली और चाट कर देखी "मैडम मैं आप की चूत चूसूं?"
"क्यों रे? चूसेगा कि चोदेगा? कल तूने बहुत अच्छा चोदा था. मजा आया. बहुत दिन में किसी ने ऐसे चोदा मुझे" मैडम मेरे गालों पर अपनी चूंचियां रगड़ती हुई बोलीं.
"मैडम, चोदूंगा भी पर पहले चूसने दीजिये ना, कल भी आप ने सिर्फ़ दीदी को चूत चटवायी, मुझे कुछ नहीं मिला" मैं बोला. मेरे मन में आया कि सर का इतना मस्त लंड है, उससे तो मैडम रोज चुदवाती होंगी, फ़िर ऐसा क्यों बोलीं कि बहुत दिन बाद कल चुदवाया. पर कुछ बोला नहीं.
"चल, चूस ले, वैसे तेरी दीदी ने भी बहुत प्यार से मेरी बुर का रस पिया था कल" कहकर मैडम ने पैर फ़ैला दिये. मैं झट से नीचे बैठा और उनकी बुर से मुंह लगा दिया.
"हां ऽ बस ऐसे ही ऽ ... जीभ लगा ... वो दाना है ना? ... वहां ... बस ऐसे ही ... बहुत अच्छे अनिल ... अच्छा लगा टेस्ट?"
"हां मैडम ..." मैं बोला और चूसता रहा. थोड़ी देर के बाद वे आगे पीछे होने लगीं और मेरे सिर को अपनी जांघों में कस कर मेरा चेहरा अपनी बुर पर सटा लिया.
"ओह ... ओह ... तुम दोनों बच्चे हो बड़े होशियार इन कामों में ... आह ऽ ... वो देख तेरी दीदी झड़ गयी ... छूटने की कोशिश कर रही है पर सर उसे नहीं छोड़ेंगे, रस का चस्का जो लग गया है ... अब तेरी दीदी की बुर को निचोड़ कर ही दम लेंगे ... ओह .. ओह .. ले ... तू भी पी मेरा रस ... हां ऽ हां अनिल .. ऐसे ही ...." कहते हुए मैडम का बदन कपकपाया और मेरे मुंह में पानी बहने लगा.
करीब दस मिनिट बाद मैडम फ़िर से झड़ीं और मुझे और थोड़ा बुर का पानी पिलाकर मुझे खींच कर उठा दिया. वे बड़ी तृप्त लग रही थीं. "बहुत अच्छा किया अनिल. तुझे स्वाद पसंद आया?"
"हां मैडम, बहुत ... गाढ़ा और .... शहद जैसा है मैडम" मैंने तारीफ़ की. मैडम खुश होकर बोलीं "शहद की कमी नहीं होगे तुझे कभी, जब चाहे, ले लिया कर अब अब जरा यहां देख ... तेरी दीदी कौनसा लेसन सीख रही है"
मैं मुंह पोंछता हुआ उठ बैठा. देखा तो दीदी सर के सामने नीचे बैठ कर उनका लंड मुंह में लेने की कोशिश कर रही थी. बस सुपाड़ा ही ले पायी थी, उसके गाल फ़ूल गये थे. सर अपना लंड उसके मुंह में पेलने की कोशिश कर रहे थे और कह रहे थे "लीना, ऐसे तो तूने कल भी चूसा था, अब नया कुछ सीखना है कि नहीं? और मुंह में ले, जाने दे गले में, रोक नहीं, पूरा ले आज ..."
लीना गों गों करने लगी. सर ने लंड उसके मुंह से खींचा और उठ खड़े हुए "कोई बात नहीं, तेरे लिये ये नया है, नयी नयी जवानी जो है. घबरा मत, आज तेरा ये लेसन मैं पूरा कर ही दूंगा. रुक, मैं अभी आया"
वे कमरे के बाहर गये और एक मिनिट में एक मोटा लंबा केला ले कर वापस आये. केला छीलते हुए बोले "इससे प्रैक्टिस करवाता हूं, देख लीना, पहली बात यह ध्यान में रख कि गले को ढीला छोड़, एकदम ढीला. दूसरे यह कि ऐसे समझ कि तू जो निगल रही है उसमें से तुझे बहुत सी मलाई मिलने वाली है, ठीक है ना? अब मुंह खोल"
लीना ने मुंडी हिलाई और पूरा मुंह बा दिया. चौधरी सर ने उसके मुंह में केला डाला और धीरे धीरे अंदर घुसेड़ने लगे. चार पांच इंच के बाद दीदी कसमसाई तो वे रुक गये "तू गला नहीं ढीला कर रही है लीना, बिलकुल ढीला कर" लीना दीदी ने पलकें झपकाईं और सर फ़िर से केला अंदर डालने लगे. इस बार दीदी पूरा निगल गयी.
"शाबास लीना, ये हुई ना बात! ये केला बड़ा वाला मद्रासी केला है, दस इंच का, मेरे लंड से दो इंच बड़ा, अब तो तू आराम से ले लेगी, बस अंदर बाहर करने की प्रैक्टिस कर. लंड चूसते समय जितना जरूरी पूरा मुंह में लेना है, उतना ही बार बार अंदर बाहर करना है, इससे जो मजा मिलता है उससे कोई भी मर्द तेरा गुलाम हो जायेगा. और देख, दांत नहीं लगाना, इस केले पर देख ये निशान बन गये हैं, अब बिना दांत लगाये अंदर बाहर कर, दांतों को अपने होंठों से ढक ले"
सर केले को लीना दीदी के मुंह से पूरा खींच कर फ़िर अंदर पेलने लगे. दीदी अब आसानी से कर रही थी. उसे मजा भी आ रहा था, वह सर का लंड अब हाथ में पकड़ कर बैठी थी. मैडम ने मुझसे कहा "तेरी दीदी तो एकदम एक्सपर्ट हो गयी अनिल? लगता है काफ़ी मतवाले स्वभाव की है. आ, मैं भी तुझे जरा मजा दूं इस बात का, पर झड़ना नहीं हं? नहीं तो सर मुझे डांटेंगे, बोले थे कि अनिल को इस लेसन में झड़ाना नहीं"
फ़िर मैडम ने झुक कर मेरा लंड मुंह में लिया और प्यार से चूसने लगीं. मैं उनके रेशमी बालों में उंगलियां फ़िराता हुआ मजा ले लकर फ़िर से सर और दीदी के कमरे में देखने लगा.
सर ने
केला एक प्लेट पर रख दिया था और दीदी को सामने फ़र्श पर बिठाकर उसके मुंह
में लंड पेल रहे थे. आधा तो दीदी ने ले भी लिया था. सर प्यार से दीदी के
बाल सहला रहे थे "देख गया ना गले के नीचे? बस हो गया, अब पूरा ले ले" दीदी
ने सिर नीचे किया और सर की झांटें उसके होंठों पर आ टिकीं. दीदी के गाल ऐसे
फ़ूल गये थे जैसे बड़ा सेब मुंह में ले लिया हो.
"ये तो कमाल हो गया लीना रानी. अब मजा ले लकर चूस. मुंह में अंदर बाहर कर ... और सुन .. जीभ से लंड के नीचे रगड़, प्यार से ... आह ऽ आह ? बहुत अच्छी बच्ची है लीना तू .... बहुत प्यारी है ... बस ऐसे ही कर ... आराम से ... मजा ले ... कोई जल्दी नहीं है" और उन्होंने दीदी का सर पकड़ लिया और कमर हिला हिला कर लंड हौले हौले दीदी के मुंह में पेलने लगे.
दीदी अब बार बार सर का लंड पूरा मुंह से निकालती और फ़िर निगल लेती. उसे मजा आ रहा था जैसे बच्चों को आता है कोई नया काम सीख कर. मैं झड़ने को आ गया. मैडम को पता चल गया इसलिये मेरे लंड को मुंह से निकाल कर से फ़िर बैठ गयीं. "क्या बात है अनिल, मस्ती में है तू? अच्छा, दीदी के कारनामे देख रहा है. सोच रहा है कि तेरी दुबली पतली नाजुक गले वाली दीदी ने कैसे इतना बड़ा लंड निगल लिया? पर मुझे कोई अचरज नहीं हुआ, मैं तो तुम दोनों को देखते ही समझ गयी थी कि क्या मस्तीखोर हो तुम दोनों और खास कर तेरी दीदी. वो असली गरम लड़की है, जैसी मैं थी बचपन में! अब जरा तेरे इस लंड को थोड़ा ठंडा कर, मुझे चोदना है"
मैं बोला "हां मैडम" और उठने लगा तो वे बोलीं "अरे तू लेटा रह, मैं चोदूंगी, तेरा कोई भरोसा नहीं, झड़ जायेगा. तू लेट और वो सिनेमा देख, मैं करती हूं जो करना है"
मुझे लिटा कर मैडम मेरे ऊपर चढ़ गयीं और मेरे लंड को अपनी चूत में लेकर मेरे पेट पर बैठ गयीं. फ़िर चोदने लगीं. चुदाई का आनंद लेते हुए मैंने दूसरे कमरे में देखा तो सर दीदी से लंड चुसवाते हुए वो वाला केला खा रहे थे, जो दीदी के मुंह में अंदर बाहर हुआ था. मेरे चेहरे के भाव देखकर मैडम हंसने लगीं "अरे अचरज क्यों करता है, तेरी दीदी का चुम्मा इतना मीठा है, सर उसके मुंह का स्वाद ले रहे हैं"
"तेरे मुंह के स्वाद का जवाब नहीं लीना, अमरित है अमरित, अब जब किस करूं तो मेरे को ढेर सी चासनी पिलाना अपने मुंह की. ठीक है ना!" सर केला खतम करके बोले. दीदी ने पलक झपकाकर कहा कि समझ गयी.
सर अब आराम से पीछे टिक कर बैठ गये और लीना दीदी का सिर पकड़कर उसके बालों में उंगलियां चलाते हुए दीदी के सिर को आगे पीछे गाइड करने लगे. "हां लीना ... बस ऐसे ही ... हां ... हां मेरी रानी .... मेरी लाड़ली बच्ची ... चूस रानी चूस .... अपने सर का लौड़ा चूस ... उनका प्रसाद पा ले .... चल चूस"
थोड़ी ही देर में सर ने दीदी के सर को कस कर अपने पेट पर भींच लिया और झड़ गये "ओह .... हां .... लीना .... तू तो कमाल करती है री ... आह .... मजा आ गया"
तीन चार सांसों के बाद सर ने लंड करीब करीब पूरा दीदी के मुंह के बाहर खींचा और सिर्फ़ सुपाड़ा उसके मुंह में दे कर बोले "लीना, अब जीभ पर ले और चख ... मजे ले लेकर खा ... ये है सच्ची मलाई ... इतनी मेहनत की है तो अब उसका इनाम ले" उनका वीर्य उबल उबल कर दीदी की जीभ पर इकठ्ठा हो रहा था. जब लंड शांत हुआ तो दीदी ने मुंह बंद किया और आंखें बंद करके उसका स्वाद लेने लगी.
वीर्य निगलने के बाद दीदी ने फ़िर से लंड को मुंह में लेकर साफ़ किया और उठ कर खड़ी हो गयी. थोड़ा शरमा रही थी पर बड़े गर्व के साथ सर की ओर देख रही थी. सर ने उसे खींच कर वहां के सोफ़े पर लिटाया और उसका बदन जगह जगह चूमने लगे. "बहुत प्यारी है तू लीना, अब जरा आराम कर, मुझे अपने इस खूबसूरत बदन का स्वाद लेने दे"
वे दीदी को हर जगह चूम रहे थे, छाती, पेट, पीठ, कंधे, जांघें, पैर ... थोड़ी देर फ़िर से उन्होंने दीदी की बुर चूसी और दीदी जब गरमा कर सी सी करने लगी तो उसे पलट कर सोफ़े पर पेट के बल लिटा दिया और उसके चूतड़ों में मुंह गाड़ दिया. दीदी शरमा कर "सर ... सर ... वहां क्यों चूस रहे हैं सर? .... ओह ... ओह ...उई ऽ.. छी सर ... वहां गंदा है ...मत डालिये ना जीभ .... ओह ... आह" करने लगी पर सर ने उसके चूतड़ों को नहीं छोड़ा.
मैडम अब कस के मुझे चोद रही थीं. अपने मम्मे खुद दबा रही थीं. हांफ़ते हुए बोलीं "अरे यह लीना ... नहीं .... जानती कि वहां .... पीछे .... तेरे सर का खास ..... इंटरेस्ट है ... समझ जायेगी जल्दी ... ओह ऽ ओह ऽ अनिल ...." कहकर वे झड़ गयीं और मेरे पेट पर उनका पानी बह आया. मैं उठने लगा तो बोलीं "अरे ... रुक... एक बार और ... अभी मन नहीं भरा मेरा .... सर अब लीना को लेकर आते ही होंगे .... तब तक .... और देख ... झड़ना नहीं"
मैडम ने मुझे दस मिनिट और चोदा. उधर सर दीदी के बदन को प्यार करते रहे, वे बार बार दीदी की बुर या गांड से मुंह लगा देते थे. बीच में उन्होंने मैडम की ओर देखा और आंखों आंखों में पूछा कि हो गया क्या तो मैडम ने सिर हिलाकर ना बोल दिया. सर फिर से दीदी की गांड चूसने में जुट गये.
दूसरी बार जब मैडम झड़ीं तो उन्होंने सर की ओर देखा और मुस्करा दीं. सर ने लीना को उठाया और बोले "चल मेरी रानी, अब एक साथ लेसन लेंगे तुम दोनों का" दीदी एकदम मस्त थी, सर की गर्दन में बाहें डालकर बार बार उनको चूम रही थी.
"ये तो कमाल हो गया लीना रानी. अब मजा ले लकर चूस. मुंह में अंदर बाहर कर ... और सुन .. जीभ से लंड के नीचे रगड़, प्यार से ... आह ऽ आह ? बहुत अच्छी बच्ची है लीना तू .... बहुत प्यारी है ... बस ऐसे ही कर ... आराम से ... मजा ले ... कोई जल्दी नहीं है" और उन्होंने दीदी का सर पकड़ लिया और कमर हिला हिला कर लंड हौले हौले दीदी के मुंह में पेलने लगे.
दीदी अब बार बार सर का लंड पूरा मुंह से निकालती और फ़िर निगल लेती. उसे मजा आ रहा था जैसे बच्चों को आता है कोई नया काम सीख कर. मैं झड़ने को आ गया. मैडम को पता चल गया इसलिये मेरे लंड को मुंह से निकाल कर से फ़िर बैठ गयीं. "क्या बात है अनिल, मस्ती में है तू? अच्छा, दीदी के कारनामे देख रहा है. सोच रहा है कि तेरी दुबली पतली नाजुक गले वाली दीदी ने कैसे इतना बड़ा लंड निगल लिया? पर मुझे कोई अचरज नहीं हुआ, मैं तो तुम दोनों को देखते ही समझ गयी थी कि क्या मस्तीखोर हो तुम दोनों और खास कर तेरी दीदी. वो असली गरम लड़की है, जैसी मैं थी बचपन में! अब जरा तेरे इस लंड को थोड़ा ठंडा कर, मुझे चोदना है"
मैं बोला "हां मैडम" और उठने लगा तो वे बोलीं "अरे तू लेटा रह, मैं चोदूंगी, तेरा कोई भरोसा नहीं, झड़ जायेगा. तू लेट और वो सिनेमा देख, मैं करती हूं जो करना है"
मुझे लिटा कर मैडम मेरे ऊपर चढ़ गयीं और मेरे लंड को अपनी चूत में लेकर मेरे पेट पर बैठ गयीं. फ़िर चोदने लगीं. चुदाई का आनंद लेते हुए मैंने दूसरे कमरे में देखा तो सर दीदी से लंड चुसवाते हुए वो वाला केला खा रहे थे, जो दीदी के मुंह में अंदर बाहर हुआ था. मेरे चेहरे के भाव देखकर मैडम हंसने लगीं "अरे अचरज क्यों करता है, तेरी दीदी का चुम्मा इतना मीठा है, सर उसके मुंह का स्वाद ले रहे हैं"
"तेरे मुंह के स्वाद का जवाब नहीं लीना, अमरित है अमरित, अब जब किस करूं तो मेरे को ढेर सी चासनी पिलाना अपने मुंह की. ठीक है ना!" सर केला खतम करके बोले. दीदी ने पलक झपकाकर कहा कि समझ गयी.
सर अब आराम से पीछे टिक कर बैठ गये और लीना दीदी का सिर पकड़कर उसके बालों में उंगलियां चलाते हुए दीदी के सिर को आगे पीछे गाइड करने लगे. "हां लीना ... बस ऐसे ही ... हां ... हां मेरी रानी .... मेरी लाड़ली बच्ची ... चूस रानी चूस .... अपने सर का लौड़ा चूस ... उनका प्रसाद पा ले .... चल चूस"
थोड़ी ही देर में सर ने दीदी के सर को कस कर अपने पेट पर भींच लिया और झड़ गये "ओह .... हां .... लीना .... तू तो कमाल करती है री ... आह .... मजा आ गया"
तीन चार सांसों के बाद सर ने लंड करीब करीब पूरा दीदी के मुंह के बाहर खींचा और सिर्फ़ सुपाड़ा उसके मुंह में दे कर बोले "लीना, अब जीभ पर ले और चख ... मजे ले लेकर खा ... ये है सच्ची मलाई ... इतनी मेहनत की है तो अब उसका इनाम ले" उनका वीर्य उबल उबल कर दीदी की जीभ पर इकठ्ठा हो रहा था. जब लंड शांत हुआ तो दीदी ने मुंह बंद किया और आंखें बंद करके उसका स्वाद लेने लगी.
वीर्य निगलने के बाद दीदी ने फ़िर से लंड को मुंह में लेकर साफ़ किया और उठ कर खड़ी हो गयी. थोड़ा शरमा रही थी पर बड़े गर्व के साथ सर की ओर देख रही थी. सर ने उसे खींच कर वहां के सोफ़े पर लिटाया और उसका बदन जगह जगह चूमने लगे. "बहुत प्यारी है तू लीना, अब जरा आराम कर, मुझे अपने इस खूबसूरत बदन का स्वाद लेने दे"
वे दीदी को हर जगह चूम रहे थे, छाती, पेट, पीठ, कंधे, जांघें, पैर ... थोड़ी देर फ़िर से उन्होंने दीदी की बुर चूसी और दीदी जब गरमा कर सी सी करने लगी तो उसे पलट कर सोफ़े पर पेट के बल लिटा दिया और उसके चूतड़ों में मुंह गाड़ दिया. दीदी शरमा कर "सर ... सर ... वहां क्यों चूस रहे हैं सर? .... ओह ... ओह ...उई ऽ.. छी सर ... वहां गंदा है ...मत डालिये ना जीभ .... ओह ... आह" करने लगी पर सर ने उसके चूतड़ों को नहीं छोड़ा.
मैडम अब कस के मुझे चोद रही थीं. अपने मम्मे खुद दबा रही थीं. हांफ़ते हुए बोलीं "अरे यह लीना ... नहीं .... जानती कि वहां .... पीछे .... तेरे सर का खास ..... इंटरेस्ट है ... समझ जायेगी जल्दी ... ओह ऽ ओह ऽ अनिल ...." कहकर वे झड़ गयीं और मेरे पेट पर उनका पानी बह आया. मैं उठने लगा तो बोलीं "अरे ... रुक... एक बार और ... अभी मन नहीं भरा मेरा .... सर अब लीना को लेकर आते ही होंगे .... तब तक .... और देख ... झड़ना नहीं"
मैडम ने मुझे दस मिनिट और चोदा. उधर सर दीदी के बदन को प्यार करते रहे, वे बार बार दीदी की बुर या गांड से मुंह लगा देते थे. बीच में उन्होंने मैडम की ओर देखा और आंखों आंखों में पूछा कि हो गया क्या तो मैडम ने सिर हिलाकर ना बोल दिया. सर फिर से दीदी की गांड चूसने में जुट गये.
दूसरी बार जब मैडम झड़ीं तो उन्होंने सर की ओर देखा और मुस्करा दीं. सर ने लीना को उठाया और बोले "चल मेरी रानी, अब एक साथ लेसन लेंगे तुम दोनों का" दीदी एकदम मस्त थी, सर की गर्दन में बाहें डालकर बार बार उनको चूम रही थी.
हमारे
कमरे का दरवाजा खुला और सर दीदी को उठाये अंदर आये. "वा अनिल, मैडम अच्छा
लेसन दे रही है तुझे, तेरी इस दीदी ने तो आज बहुत कुछ सीखा, है ना लीना?"
लीना ने शरमा कर उनके सीने में मुंह छुपा लिया. सर ने उसे नीचे पलंग पर रखा और मैडम से पूछा "क्यों सुप्रिया मैडम, आप को कोई राहत मिली या नहीं?"
"हां, बहुत. ये लड़का कमाल का है, बहुत कंट्रोल है इसे. मैंने दो बार चोदा, यह आराम से सह गया" मैडम मुझपर से उतरती हुई बोलीं.
"चलिये ये अच्छा हुआ मैडम, अब आपकी चूत रानी कभी प्यासी नहीं रहेगी" सर बोले. मैडम देख कर मुस्करा दीं. मुझे ठीक से समझ में नहीं आया कि मेरे लंड की इतनी तारीफ़ क्यों हो रही है, सर के मतवाले मूसल के आगे तो ये कुछ भी नहीं है, और सर के लंड पर तो मैडम का ही हक है, चाहे जैसे चुदवायें.
लीना के बाजू में लेट कर मैडमने लीना दीदी की चूत में उंगली डाली और उसका मुंह चूमने लगीं. "ये लड़की तो एकदम गरमा गयी है सर. लगता है आप ने खूब अगन दी है इसकी टांगों के बीच, इसको ठंडा नहीं किया ठीक से"
"अभी कहां मैडम, इसकी अगन तो अभी बुझाना है, बहुत काम करना पड़ेगा, इसकी जो भट्टी है वो ऐसे वैसे नहीं ठंडी होने वाली"
"हां तो बच्चो, चूसने और चाटने में तो तुम दोनों एकदम होशियार हो. अब असल काम की शुरुवात करते हैं" चौधरी सर बोले. फ़िर मेरे लंड को पकड़कर पूछा "तकलीफ़ हो रही है अनिल? या मजा आ रहा है? मैडम ने बहुत खींच कर रखा है तुझे. अब चोदोगे किसी को?"
"हां सर, बहुत मस्ती लग रही है, रहा नहीं जा रहा है"
"किसे चोदोगे?" उन्होंने मेरे लंड को मुठ्ठी में कस के दबाकर पूछा.
"सर, मैडम को ..." कहकर मैं चुप हो गया.
"अरे मैडम को तो अब तक चोद रहे थे. कल भी चोदा था, मन नहीं भरा लगता है. अब और किसी को चोदो"
मैं उनकी ओर देखने लगा. वे बोले "अरे अपनी इस प्यारी दीदी को चोद लो. बेचारी देखो कैसी तरस रही है. ऐसे क्यों देख रहे हो? दीदी को चोदा नहीं है ना अब तक?"
"नहीं सर"
"फ़िर आज मौका है. और लीना तूने चुदवाया है कभी?" चौधरी सर ने लीना दीदी के जरा जरा से मम्मे दबाते हुए पूछा. दीदी की हालत खराब थी, मैडम उसकी बुर में ऐसी उंगली कर रही थीं कि दीदी बेचारी बस तड़प तड़प कर कमर हिला रही थी. मैडम उसका मुंह चूस रही थीं इसलिये वह चुप थी. जब मैडम ने दो मिनिट बाद उसका मुंह छोड़ा तो सिसक कर बोली "हां सर, प्लीज़ सर .... मैडम .... प्लीज़ आप ....."
मैडम दीदी के मुंह में अपनी चूंची ठूंस कर बोलीं. "अरे नहीं, अभी नहीं चूसूंगी तेरी बुर, वैसे बहुत रस निकल रहा है. अब तू चुदवा ले. बोल सर से चुदवायेगी?" दीदी ने मैडम की चूंची चूसते चूसते हुए पलक झपकाकर हां कहा. मैडम हंसने लगीं "क्यों सर, आप पाठ बहुत अच्छा पढ़ाते हैं लगता है? ये लड़की आप पर लट्टू है, देखो झट से हां कह दिया नहीं तो लड़कियां कितने नखरे करती हैं. अब आप चोदेंगे ना?"
सर बोले "हां चोदूंगा, इस फ़ूल सी नरम बुर में घुसने को के खयाल से ही देखो मेरा लंड कैसा फ़िर से मचलने लगा है. पर इसपर ज्यादती हो जायेगी. अभी मस्ती में चहक रही है, फ़िर चीखने चिल्लाने लगेगी. इसलिये कहता हूं इसे पहले अनिल से चुदवा दो और इसकी चूत खोल दो, फ़िर मेरा जाने में इसको तकलीफ़ नहीं होगी"
"हां भई, भाई बहन को चोदे इससे ज्यादा मस्ती की बात और क्या हो सकती है, है ना लीना? चल अनिल तू इधर आ जल्दी से" कहकर मैडम ने लीना दीदी को नीचे पलंग पर लिटा दिया. "लीना, ठीक से लेट और टांगें फ़ैला, अब जरा अपने भाई का लंड हाथ में लेकर देख, इसे लेगी ना अब अपनी चूत में?"
दीदी तो अब मछली जैसी तड़प रही थी. उसने झट से टांगें फ़ैलायीं और मेरा लंड पकड़कर बोली "अनिल, जल्दी कर ना ... हा ऽ य .. मैडम रहा नहीं जाता .... " उसकी नजर सर के फ़िर से खड़े लंड पर टिकी थी.
चौधरी सर बोले "अनिल बेटे, पहले लीना की चूत की पूजा करो, आखिर तुम्हारी बड़ी बहन है"
"कैसे सर? " मैं पूछ बैठा.
"अरे मूरख, चूत पूजा कैसे करते हैं? उसे प्यार करके, उसे चाट के, उसके रस को उसके प्रसाद को ग्रहण करके. मैडम की तब से कर रहा था ना, अब अपनी दीदी की कर" सर मुझे डांट कर बोले.
मैं जुट गया. दीदी की चूत में मुंह डाल दिया. वह मेरे सिर को भींच कर तड़पने लगी "सर .... सर ... रहा नहीं जाता सर ... बहुत अच्छा लगता है सर" मैं लपालप दीदी की बुर चाटने में जुटा था. आज लग रहा था जैसे वरदान पा लिया हो, जिस मिठाई की इतने दिन तमन्ना की थी, वो अब पा ली थी मैंने!
"असल में भाई से चुसवा रही है ना, इसलिये ज्यादा मजा आ रहा है, अब चुदा के देखना, और आनंद पायेगी. चलो अनिल बहुत हो गया, अब दीदी को चोदो" मैडम ने आदेश दिया.
मैंने झट से दीदी की बुर पर लंड रखा और पेलने लगा "अरे धीरे बेटे, हौले हौले, दीदी ने कभी लंड लिया नहीं है ना, ऐसे धसड़ पसड़ ना कर" मैडम ने समझाया.
लीना ने शरमा कर उनके सीने में मुंह छुपा लिया. सर ने उसे नीचे पलंग पर रखा और मैडम से पूछा "क्यों सुप्रिया मैडम, आप को कोई राहत मिली या नहीं?"
"हां, बहुत. ये लड़का कमाल का है, बहुत कंट्रोल है इसे. मैंने दो बार चोदा, यह आराम से सह गया" मैडम मुझपर से उतरती हुई बोलीं.
"चलिये ये अच्छा हुआ मैडम, अब आपकी चूत रानी कभी प्यासी नहीं रहेगी" सर बोले. मैडम देख कर मुस्करा दीं. मुझे ठीक से समझ में नहीं आया कि मेरे लंड की इतनी तारीफ़ क्यों हो रही है, सर के मतवाले मूसल के आगे तो ये कुछ भी नहीं है, और सर के लंड पर तो मैडम का ही हक है, चाहे जैसे चुदवायें.
लीना के बाजू में लेट कर मैडमने लीना दीदी की चूत में उंगली डाली और उसका मुंह चूमने लगीं. "ये लड़की तो एकदम गरमा गयी है सर. लगता है आप ने खूब अगन दी है इसकी टांगों के बीच, इसको ठंडा नहीं किया ठीक से"
"अभी कहां मैडम, इसकी अगन तो अभी बुझाना है, बहुत काम करना पड़ेगा, इसकी जो भट्टी है वो ऐसे वैसे नहीं ठंडी होने वाली"
"हां तो बच्चो, चूसने और चाटने में तो तुम दोनों एकदम होशियार हो. अब असल काम की शुरुवात करते हैं" चौधरी सर बोले. फ़िर मेरे लंड को पकड़कर पूछा "तकलीफ़ हो रही है अनिल? या मजा आ रहा है? मैडम ने बहुत खींच कर रखा है तुझे. अब चोदोगे किसी को?"
"हां सर, बहुत मस्ती लग रही है, रहा नहीं जा रहा है"
"किसे चोदोगे?" उन्होंने मेरे लंड को मुठ्ठी में कस के दबाकर पूछा.
"सर, मैडम को ..." कहकर मैं चुप हो गया.
"अरे मैडम को तो अब तक चोद रहे थे. कल भी चोदा था, मन नहीं भरा लगता है. अब और किसी को चोदो"
मैं उनकी ओर देखने लगा. वे बोले "अरे अपनी इस प्यारी दीदी को चोद लो. बेचारी देखो कैसी तरस रही है. ऐसे क्यों देख रहे हो? दीदी को चोदा नहीं है ना अब तक?"
"नहीं सर"
"फ़िर आज मौका है. और लीना तूने चुदवाया है कभी?" चौधरी सर ने लीना दीदी के जरा जरा से मम्मे दबाते हुए पूछा. दीदी की हालत खराब थी, मैडम उसकी बुर में ऐसी उंगली कर रही थीं कि दीदी बेचारी बस तड़प तड़प कर कमर हिला रही थी. मैडम उसका मुंह चूस रही थीं इसलिये वह चुप थी. जब मैडम ने दो मिनिट बाद उसका मुंह छोड़ा तो सिसक कर बोली "हां सर, प्लीज़ सर .... मैडम .... प्लीज़ आप ....."
मैडम दीदी के मुंह में अपनी चूंची ठूंस कर बोलीं. "अरे नहीं, अभी नहीं चूसूंगी तेरी बुर, वैसे बहुत रस निकल रहा है. अब तू चुदवा ले. बोल सर से चुदवायेगी?" दीदी ने मैडम की चूंची चूसते चूसते हुए पलक झपकाकर हां कहा. मैडम हंसने लगीं "क्यों सर, आप पाठ बहुत अच्छा पढ़ाते हैं लगता है? ये लड़की आप पर लट्टू है, देखो झट से हां कह दिया नहीं तो लड़कियां कितने नखरे करती हैं. अब आप चोदेंगे ना?"
सर बोले "हां चोदूंगा, इस फ़ूल सी नरम बुर में घुसने को के खयाल से ही देखो मेरा लंड कैसा फ़िर से मचलने लगा है. पर इसपर ज्यादती हो जायेगी. अभी मस्ती में चहक रही है, फ़िर चीखने चिल्लाने लगेगी. इसलिये कहता हूं इसे पहले अनिल से चुदवा दो और इसकी चूत खोल दो, फ़िर मेरा जाने में इसको तकलीफ़ नहीं होगी"
"हां भई, भाई बहन को चोदे इससे ज्यादा मस्ती की बात और क्या हो सकती है, है ना लीना? चल अनिल तू इधर आ जल्दी से" कहकर मैडम ने लीना दीदी को नीचे पलंग पर लिटा दिया. "लीना, ठीक से लेट और टांगें फ़ैला, अब जरा अपने भाई का लंड हाथ में लेकर देख, इसे लेगी ना अब अपनी चूत में?"
दीदी तो अब मछली जैसी तड़प रही थी. उसने झट से टांगें फ़ैलायीं और मेरा लंड पकड़कर बोली "अनिल, जल्दी कर ना ... हा ऽ य .. मैडम रहा नहीं जाता .... " उसकी नजर सर के फ़िर से खड़े लंड पर टिकी थी.
चौधरी सर बोले "अनिल बेटे, पहले लीना की चूत की पूजा करो, आखिर तुम्हारी बड़ी बहन है"
"कैसे सर? " मैं पूछ बैठा.
"अरे मूरख, चूत पूजा कैसे करते हैं? उसे प्यार करके, उसे चाट के, उसके रस को उसके प्रसाद को ग्रहण करके. मैडम की तब से कर रहा था ना, अब अपनी दीदी की कर" सर मुझे डांट कर बोले.
मैं जुट गया. दीदी की चूत में मुंह डाल दिया. वह मेरे सिर को भींच कर तड़पने लगी "सर .... सर ... रहा नहीं जाता सर ... बहुत अच्छा लगता है सर" मैं लपालप दीदी की बुर चाटने में जुटा था. आज लग रहा था जैसे वरदान पा लिया हो, जिस मिठाई की इतने दिन तमन्ना की थी, वो अब पा ली थी मैंने!
"असल में भाई से चुसवा रही है ना, इसलिये ज्यादा मजा आ रहा है, अब चुदा के देखना, और आनंद पायेगी. चलो अनिल बहुत हो गया, अब दीदी को चोदो" मैडम ने आदेश दिया.
मैंने झट से दीदी की बुर पर लंड रखा और पेलने लगा "अरे धीरे बेटे, हौले हौले, दीदी ने कभी लंड लिया नहीं है ना, ऐसे धसड़ पसड़ ना कर" मैडम ने समझाया.
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