बदनाम रिश्ते
खानदानी चुदाई का सिलसिला--20
गतान्क से आगे..............दोस्तो मैं यानी आपका दोस्त राज शर्मा इस कहानी का बीसवाँ पार्ट लेकर हाजिर हूँ
राजू ने भी बिना कोई देर किए उसके मूह को चूसना शुरू कर दिया और साथ ही साथ बेरेहमी से उसकी ब्रा को आगे से खींचते हुए नीचे किया और उसके दोनो नंगे मम्मे मसल डाले. अपनी 34ब की चूचिओ पे हाथ पड़ते ही मुन्नी कसमसा उठी और राजू से अलग होती हुई उसको धक्का मार दिया. मुन्नी की चूत में आग लगी हुई थी और उससे सहन नही हो रहा था. उसकी चूत के धारे बह रहे थे. राजू बिस्तर के किनारे पे टांगे लटकाए पीठ के बल लेटा हुआ था. मुन्नी ने एक झटके में चादर हटा दी और झट से बिस्तर पे चढ़ गई. 2 सेकेंड में उसकी चूत की खुली हुई फांके राजू के 10 इंच के लंड को निगलने लगी. देखते ही देखते उसने एक ही शॉट में धीरे धीरे गांद को गोल गोल घुमाते हुए पूरा लंड अंदर ले लिया. राजू के टटटे जब उसकी गांद से टकराए तो उसने एक गहरी साँस ली.
'''ऊऊऊऊ माआआआ..भर गई भैया जी ...अंदर तक भर गई.....क्या लोडा है भैया जी ...ऊऊओह ...मज़ाअ आ गया......मेरी छिनाल सहेली का शुक्रियाअ.जिसने आपके लंड को देख लिया और मुझे बता दिया...भैयाआ जी मेरे सैयाँ जीइ...ऊऊहह चोद्द डाअल...मरी जा रही हूओ...धक्के मार इतने मार की मर जाउ.....ऊओह...अजाआअ तू भी आजा ..कममू..देख ना कितना बड़ा है....ऊूउउम्म्म्म....'' मुन्नी गांद गोल गोल घुमा रही थी. राजू उसके दोनो निपल खींच रहा था. कम्मो ने कमरे में दाखिल होते हुए अपने सारे कपड़े उतार दिए थे. उसके मोटे मोटे मम्मे झूल रहे थे. कम्मो से भी रहा नही जा रहा था. उसकी चूत की प्यास भी ज़बरदस्त थी. पर मुन्नी ने उससे बाजी मार ली थी.
''साली हरामजादि बताया मैने और पहले तू चढ़ गई मेरे भैया के लंड पे ..कुत्ति छिनाअल....तुझसे बड़ी रंडी नही देखी मैने आज तक..भैया ये ग़लत है..पहले केला मुझे खाना था ..मैने तो आपको तरबूज खिलाने थे और आप इसके संतरे निच्चोड़ने में लग गए...बहुत ग़लत है ..ऊहह माआ.. भैया जी ऐसे ना करो ...चूत में उंगली ना दो....आग और भड़क जाएगी...'' कम्मो चूत में उंगलियाँ घुसने से कसमसा रही थी. मुन्नी के बाल पकड़ के उसने मुन्नी को एक ज़बरदस्त चुम्मा दिया.
''आआओ मेरी रंडी बहनो...अपने बेहेन्चोद सैयाँ के पास ...आज दोनो को केला खिलाउँगा.....आजा मेरे लंड की रानी ..इधर ला अपनी चूत...मेरे मूह पे...ऊऊउउउउउम्म्म्म्म....पुच्छ पुच उउम्म्म्म..स्लूउर्र्र्र्प...अच्छा नमकीन स्वाद है री तेरा...उउम्म्म्म....फूली फूली...ऊऊहहमम्म...उउउम्म्म्म...हान्न्न ऐसे ही मचका अपनी मोटी गांद..अभी इसमे लोडा दूँगा....ऊऊहह....मुन्न्नी ...आराम से कूद कुतिया.....टटटे टूट गए तो रस कहाँ से मिलेगा...ऊहह..उूउउंम्म...स्लुउउर्रप्प्प्प...स्सल्लुउर्रप्प्प्प....उउंम्म..पुचह पुकचह...'''' राजू ने कम्मो को अपने मूह पे बिठाया. कम्मो की पीठ मुन्नी की तरफ थी. मुन्नी पागलों की तरह लंड की सवारी में जुटी थी. जैसे कि उसको पहले कभी लंड मिला ही ना हो. उसकी छोटी चूचियाँ ब्रा के बाहर बुरी तरीके से झूल रही थी और उच्छल रही थी. कभी वो लंड पे उपर नीचे होती और कभी लंड की जड़ तक अपनी चूत लगा के आगे पीछे होके अपनी चूत के दाने को घिसती. उससे रहा नही गया और 10 - 15 घस्से और लेने के बाद वो झरने लगी. उसके मूह से सिर्फ़ सिसकारियाँ निकल रही थी और झरते हुए उसके बदन में झुरजूरियाँ दौड़ रही थी. उसके दोनो हाथ भज्नाशे को दबाए हुए थे. उसकी सिसकारियाँ सुनते ही कम्मो राजू के मूह से उठ गई और बिस्तर से उतर के मुन्नी के पिछे जाके खड़ी हो गई. उसने मुन्नी के दोनो चूचे मसल दिए और उसका मूह खींच के चुम्मि ली. मुन्नी की सिसकारीओं के बीच जैसे ही उसके मूह खुला तो कम्मो ने उसमे थूक दिया.
''साली रांड़....भैया जी देखो कैसी कुत्ति चीज़ है ...इतनी थर्कि औरत नही मिलेगी भैया जी...सिर्फ़ 1 मिनट में झाड़ गई....ऊओह '' कम्मो उसकी चूची को मसल्ते हुए अपने मोटे मम्मे मुन्नी की पीठ पे रगड़ रही थी. मुन्नी का कांपना जारी था पर अब वो शांत होने लगी थी. फिर अचानक ही वो निढाल हो के कम्मो की बाहों में झूल गई. कम्मो ने भी आव ना देखा ताव और उसे खींचते हुए राजू के लंड से जुदा कर दिया. लड़खड़ाती टाँगो से अपना दुबला पतला बदन लेके मुन्नी वही बिस्तर पे राजू की बगल में ढेर हो गई. राजू एक दम शॉक्ड था. 5 मिनट में ही उसके लंड पे एक चूत का रस चमक रहा था और एक चूत का रस उसके होंठो पे था. पिच्छले 15 मिनट में ही घर की एक नौकरानी ने उसे सिड्यूस किया और दूसरी ने उसे चोद डाला था. ऐसी किस्मत किसकी होती है और इससे पहले कि वो कुच्छ और सोच पाता उसके लंड पे कम्मो की चूत विराजमान हो गई.
''भैया जी अगर ये छिनाल है तो मैं भी कम नही हूँ...आओ तुम्हे तरबूज खिलाऊ तस्सली से. फिर सवारी करूँगी अपने घोड़े की...ऊहह भैया जी काट लो इनको..आज तो मज़ा आ जाएगा आपके साथ...ऊहहमाआ......ऊहहा..माआअ....काश छोटू के बापू देख पाते कि मुझे मोटे लंबे लंड कितने पसंद हैं....ऊओह...बाबूजजिि आप कहाँ हूओ...मेरी सूनी गांद में अपना लोडा डाल दो.....ऊओ भैयाअ..चूदो..चूदो..चूदू..ऊहह हां चूदू..ठोको मुझे ऊओ ऊहह ऊहह माआ..........मैं गई भोइयाआआ..............'' अपने चूचों पे राजू की जीभ के प्रहार होते ही कम्मो पग्ला गई. 1 हफ्ते से प्यासी चूत के सारे बाँध खुल गए और बाबूजी के लंड को याद करते हुए उसने राजू के लंड पे अपनी चूत की फुहार कर दी.
उसके मोटे मोटे मम्मो को चूस्ते हुए राजू को उसकी चूत का खिंचाव महसूस हुआ और उससे भी और ज़ियादा सहन नही हुआ. ''ये ले बहना....साली रांड़.....लेले भाई के केले का रस अपनी इस प्यासी चूत में ...एलीईई...ऊओह...उउउर्गघह.........ऊहह...उउम्म्म्म सुऊर्रप्प्प्प...स्लुउउर्रप्प्प....ऊहह...एस्स...ऊओह फुक्ककककक..व्हाट ...फुक्ककक मॅन....'' राजू उसके मोटे मम्मे भींचे हुए झरने लगा और अपनी गांद मचकाने लगा. कम्मो एक बार फिर से हल्के हल्के झरने लगी. राजू के लंड ने बहुत बारिश की थी. उसकी चूत अंदर तक गीली हो गई. ऐसा लगा जैसे कि जवालामुखी फूट पड़ा हो. लंड ना हो के लोहे का रोड हो. इतना कड़ा लोडा उसने आज तक नही खाया था. रमेश का भी इतना कड़क नही होता था. कम्मो से रहा नही गया और वो निढाल होके राजू पे गिर पड़ी और दोनो एक दूसरे को बेतहाशा चूमने लगे. तभी मुन्नी ने करवट बदली और अपनी जीभ निकाल के राजू के होंठो पे लपलपाना शुरू कर दिया. राजू, कम्मो और मुन्नी की लप्लपाति हुई जीभें उनकी पहली सामूहिक चुदाई का अंत थी पर अभी बहुत कुच्छ और भी बाकी था.
दोस्तो यहाँ राजू का काम तो हो गया अरे ये क्या भाई हम लोग सुजीत और सरला को तो भूल ही गये वो भी अकेले थे
चलो देखते है कही कुछ उल्टा सीधा तो नही होगया अरे ये क्या........................................
'''म्म्म्मममम.....स्लुउउर्र्ररप्प्प्प...स्लुउउर्र्रप्प्प्प्प...उउम्म्म्मम...कितना बड़ा है....ऊऊऊम्म्म्ममम...उउउम्म्म्म...स्लुउउर्र्रप्प्प..तूऊ.त्हूऊओ.....एम्म्म पूछ पूछ स्लुउउर्र्रप्प्प...मज़ाआ आ गया....उउंम्म कितने दिन के बाद मिला है....इतना बड़ा ...उफफफफ्फ़ और इतना मोटाआ....चूस लेने दो...रोको नही ....उउम्म्म्ममम सूपड़ा बहुत ही मस्त है...ऊऊहह जल गई मैं तो ........आअरर्रघह उंगली धीरे से करो...ऊऊहह उंगली पे मत झारवाना ....इस्पे झरना है ...उउम्म्म्म स्लुउउर्र्रप्प्प..स्ल्लुउर्र्रप्प्प......ऊओह..माआ......!!!!!''
'''हाआअंन्न ऐसे ही हल्के से ..बसस्स...बहुत मज़ा आ रहा है...तुमसे लंड चुसवाने में...ऊओह आंटीयीईयी......मूह में ना झर जाउ...''
''उम्म्म पूछ पूछ पूछ..पूछ..स्लूऊर्रप्प्प...आंटी नही....जान बोलो ..वो भी यही कहते थे...जाआअन्न कहते थे और झरते थे....मेरे अंदर...तुम भी वहीं झरना...मूह में बाद में..ऊओ ये उंगलियाँ कितनी गर्मी दे रही हैं...कोई थर्मॉमीटर से चेक करो देखो मेरे छेद का टेंप्रेचर....ऊऊहह माआ....110 डिग्री निकलेगा....जल रही हूँ जानू..अब गोद में ले ले, डंडे पे बिठा ले...''
झाड़ियो के छुपाव में खड़ी गाड़ी वैसे सड़क से किसी को नही दिखती अनलेस कोई साइकल पे या पैदल हो. वैसे भी अंधेरा ढल चुका था और रूट पे इक्का दुक्का गाडियो के सिवाए किसी भी पैदल चलने वाले की उम्मीद करना ही बेकार था. पर अगर कोई होता और गाड़ी के नज़दीक आ के देखता तो कसम से उसका लंड या चूत अंदर का नज़ारा देख के ज़रूर पनिया जाती. ड्राइवर सीट में सुजीत आधी खुली शर्ट और बनियान में बैठा था. पॅंट और अंडरवेर पैरों में थे. सीट पिछे को हुई पड़ी थी और आधी लेटी अवस्था में उसके राइट हॅंड्ज़ की उंगलियाँ सरला के मोटे चुतडो से खेल रही थी. कभी चूत तो कभी गांद में घुसती. कभी चूत का रस लेके सुजीत के मूह में चली जाती. सुजीत के लंड का हाल बुरा था. पिच्छले 10 मिनट से लगतार उसपे सरला के मूह के हमले हो रहे थे. इतना थूक किसी औरत के मूह से पहली बार उसके लंड और टट्टों पे लगा था. क्या कमाल का लोडा चूस्ति थी. 20 मिनट पहले उसकी पॅंट के उभार को देख के सरला मचल गई थी. उसके बाद पहले हाथों से पॅंट के उपर से मसल के और फिर चलती गाड़ी में ज़िप खोल के जो उसने चूसना शुरू किया था कि पुछो मत.
सुजीत भी कम नही था. चलती गाड़ी में लंड चुस्वाते हुए ही सरला की चोली की डोरी खींच दी थी. गियर बदलने की ज़रूरत नही थी तो खाली हाथ बगल से होते हुए खुली चोली में नीचे से मम्मे निचोड़ने में बिज़ी हो गया. निपल का पहला एहसास आते ही लंड ने मूह में एक झटका लिया था. गाड़ी 1 सेकेंड के लिए आउट ऑफ कंट्रोल हुई तो जगह देख के यहाँ झारीओं में पार्क कर दी. सीट पिछे की और मस्ती में घाघरा उठा के पॅंटी साइड में करके उंगली चलाने लगा. सरला की चूत का नशा अजीब था. हल्की झाटों वाली चूत ऐसे लिसलिसाई हुई थी कि पुछो नही. पॅंटी तो पहले से ही गीली थी. थाइस पे भी काफ़ी जूसज़ लगे हुए थे.
''हाआँ जाआं...आंटी नही कहूँगा..अब से अकेले में तू मेरी जाअँ ही हुई...आंटी सबके सामने....ऊऊहह आराम से जान....चूत में भी डालना है अभी तो...चल आजा थोड़ा ब्रेक ले ले ..मूह दुख गया होगा...मोटा है ना ...थोड़ा आराम करले और मम्मे चुस्वा ले...फिर पिच्छली सीट पे लूँगा तेरी....आआर्र्घह...'' सुजीत के सुपादे पे जैसे ही सरला के नमकीन होंठो का आख़िरी चुप्पा पड़ा तो वो काँप उठा.
''हां जानू...मूह थक गया तेरा मोटा डंडा लेके पर सच्ची नीयत नही भरी...अगर इस निगोडी चूत का ख़याल नही होता तो पहले तेरे लंड का रास्पान करती...हाए क्या जालिम चीज़ है....उउंम्म ...चल अब आजा और आंटी के मम्मे चूस ले......उउम्म्म्मम...हाआआन्न्नणणन्..ऊओह....मर्द के होंठ मर्द के ही होते हैं...कोई औरत वो एहसास नही दे सकती....ऊऊहह चाहे फिर वो तेरी छिनाल बीवी ही क्यों ना हो........''' अपनी चूत को पॅंटी के उपर से रगर्ते हुए सरला मम्मे चुस्वाते हुए गांद को सीट पे गोल गोल रगड़ रही थी. चोली उसकी गर्दन के आस पास थी और दोनो भारी भरकम चूचे नीचे से बाहर लटके हुए थे. लेफ्ट चूचा सुजीत के मूह में था और राइट वाले को वो मस्त तरीके से भींच रहा था. राखी के मोटे मम्मो पे की हुई प्रॅक्टीस आज सही काम आ रही थी. वैसे भी दोनो के मम्मो के साइज़ में तो फरक था नही..40सी...बस फरक था तो शेप में. जहाँ राखी के अभी भी गोल गोल थे वहीं सरले के थोड़े लंबे नीचे को झुके हुए. पर उमर के हिसाब से अभी भी मस्त थे. उसके स्किन में अभी अभी बहुत कसाव था.
''ह्म्म्म्मम.....मेरी आंटी जान...सब समझता हूँ....तेरे चूचे को जब पहली बार छ्छू के उंगली मूह में ली थी तभी राखी की लिप ग्लॉस की महक और स्वाद आ गया था. और जब तू ट्राइयल रूम से महकती हुई चूत ले के बाहर आई थी तो तेरी ये तीव्र गंध मेरी नाक से बची नही थी. मैं तो तभी से तेरे को चोद्ने का मन बना चुका था..पर मुझे क्या पता था कि हालात और तेरा छिनाल पन मुझे इतनी जल्दी तेरी चूत की गहराइयो में घुसने का मौका दे देंगे....सच्ची बहुत बढ़िया चूचे हैं जान...मस्सस्त एक दम...पर तेरी बेटी तेरे पे नही है...उसके इतने छ्होटे क्यों हैं....?? '' सुजीत मम्मे मूह में भर भर के लंबे लंबे चूसे ले रहा था. निपल्स की लंबाई काफ़ी अच्छी थी. उसे बहुत मज़ा आ रहा था.
''हां बेटा...तेरी आंटी जान को तेरी रंडी बीवी ने थर्का दिया और फिर तेरे बाबूजी का वापिस आने से मना कर देना...उफ़फ्फ़ ऐसा मौका कैसे छोड़ती जानू जब क़ि पिक्निक से ही तेरे लंड को तरस रही हूँ. तुझे तो कैसे ना कैसे मैने आज अंदर लेना ही था....ऊओहमाआआअ.......कितना अच्छे से चूस्ता है मेरे मम्मे....पसंद आए मेरे बेटे को....ऊओ....??? बता ना...मेरे जानू बेटे.......तेरे रंडी आंटी जान पसंद आई कि नही....??? जितनी तेरे लंड की भूखी हूँ उतनी ही तेरी नज़रों और गंदी तारीफ़ की भी....बता ना...मुझे अपनी छिनाल बनाएगा....???''' दोनो हाथों से पकड़ पकड़ के अपने मम्मे चुस्वाते हुए सरला ने पुछा.
''हाआँ बहुत सेक्सी जान है तू आंटी...सच्ची तेरी चूत के दर्शन होते ही मेरे लंड को अजीब सा सुकून मिल गया....और क्या बोलूं...तेरे मम्मे चूसे तो राखी की याद आ गई....मेरी राखी नही...वो मोटे मम्मो वाली राखी सावंत....उम्म्म्मम.....जान चल अब पिछे चलते हैं....अब जब बाबूजी की बदौलत इतना अच्छा मौका मिल ही गया है तो तस्सली से नंगे होके एक दूसरे को मस्ती दे दें...सच्ची में तुझे नंगी करने का बहुत मन है....बस ये राजस्थानी जूती पहने रखना.....चल ना खोल दे अब ये सब ....अब डंडा डाल के साथ में दूध पीऊंगा'' सुजीत ने चोली खोलते हुए सरला की कमर की तरफ हाथ बढ़ाया. सुजीत के बड़े बड़े हाथों का स्पर्श अपने नंगे पेट पे महसूस कर सरला ने एक अंगड़ाई ली और अपने चूतर उपर को किए. उसका एक हाथ अभी भी अपने मम्मो से खेल रहा था और दूसरा सुजीत के सिर और कंधों को सहला रहा था.
''हां जानू...आग लगी पड़ी है...डंडा डालने से ही ख़तम होगी..और दूध तो क्या तू कहे तो चूत का रस भी पिलाउन्गि तुझे..आज भी पी और आगे पिछे घर में जब भी मौका मिलेगा तो भी पी लेना...और हां सखी की चूचियाँ इसलिए छोटी हैं क्योंकि वो बचपन से ही शरीफ थी...मम्मे सही उमर में पुटवाए होते तो मेरे जैसी निकलती..पर तू भी देखना बच्चा हो गया तो उसके भी बाद बड़े हो जाएँगे.....ऊहह ना कर ना...उतार दे कछि और ले चल पिछे ...यहाँ बैठ के उंगली करेगा तो झर जाउन्गि...जाअनुउऊउ....मत कार्रर्र्र्ररर...ऊऊहह...'' घाघरा और चोली तो उतार चुके थे और पॅंटी को साइड में कर के 2 उंगलियाँ अंदर बाहर हो रही थी. सुजीत चाहता था कि पहला राउंड जल्दी ख़तम हो. उसको पता था कि वो खुद बहुत जल्दी झरेगा. इतनी चुसाई में तो कोई भी मर्द खल्लास हो जाए. उसने कितना कंट्रोल किया था ये उसे ही पता था. सो इसलिए सरला आंटी को भी चरम सीमा तक पहुँचना ज़रूरी था.
करीब 2 - 3 मिनट तक अच्छे से उसने चूत और उसके आस पास के हिस्से की अपने हाथ, उंगली और हथेलिओं से मालिश की. मालिश करते हुए सुजीत अपने भाग्य पे खुश था. दोस्तो हमने वो सीन मिस कर दिया कि सरला और सुजीत यहाँ तक पहुँचे कैसे चलो कोई बात नही पीछे चल कर देख लेते हैं कि आख़िर इन दोनो के बीच हुआ क्या था .................... माल पार्किंग में संजय की गाड़ी चले जाने पे बाबूजी ने उसे कहा था कि वो थोड़ी देर में माल आएँगे. वापिस कॉफी शॉप में जाके सरला के साथ एक और कॉफी ख़तम ही की थी कि बाबूजी का फोन आया. उसे जल्दी से मेन रोड पे आने को कहा आज ट्रॅफिक ज़ियादा था और गाड़ी देर तक पार्क नही कर सकते थे. सुजीत फटाफट सरला को बोल के भागा. पीछे पीछे सरला भी तेज़ी से चल पड़ी. जब सुजीत मेन रोड पे पहुँचा तो बाबूजी एक बड़ी गाड़ी की पिच्छली सीट पे बैठे थे. अगली सीट पे उनके दोस्त और उनकी वाइफ बैठी थी. सुजीत उन्हे पहचानता था तो नमस्ते कही और फिर बाबूजी से पुछा कि क्या हुआ. बाबूजी ने कहा कि आज उनके दोस्त ने देल्ही के लिए जाना था. पर अब प्रोग्राम चेंज हो गया है और कल दोपहर की ट्रेन से बाबूजी और उनका दोस्त दोनो देल्ही जाएँगे. 3 दिन बाद वापिसी होगी और बाबूजी रात दोस्त के घर पे ही रुकेंगे. अभी वो लोग एक काम ख़तम करके बाबूजी के लिए थोड़ी शॉपिंग करेंगे. बाबूजी ये सब समझा ही रहे थे कि अचानक एक पोलीस वाला आ गया और गाड़ी हटाने को कहने लगा. जल्दी जल्दी बाबूजी को अलविदा कहने के बाद सुजीत वापिस माल की तरफ मुड़ा और उसे मेन गेट पे खड़ी सरला नज़र आई. सरला की नज़रें उसको ढूँढ रही थी. उसके चेहरे पे थोड़ी परेशानी के भाव थे. चोली घाघरे में वो बहुत ही सेक्सी लग रही थी और सुजीत के लंड नेएक दम से करवट ली.
शाम के 6 बज चुके थे और हल्का अंधेरा हो चला था. सुजीत 2 सेकेंड वही खड़ा सरला को देखता रहा और फिर अचानक से सरला ने उसे देखा और हाथ हिलाने लगी. हाथ हिलाने से उसके मम्मे और चूतर दोनो हिल रहे थे और ये नज़ारा सुजीत के लिए और भी सेक्सी था. उसका लोडा पूरा सलामी देने लगा और उसने अपने को कंट्रोल करने के लिए इशारे से सरला को पार्किंग में गाड़ी के पास पहुँचने को कहा. खुद वो दूरे रास्ते से पार्किंग में पहुँचा और गाड़ी में बैठ गया. शर्ट से किसी तरह से लंड के उभार को ढका. एसी ऑन किया और रुमाल निकाल के पसीना पोन्छा. इतने में सरला आ गई. दरवाज़ा खोलते हुए जब वो बैठने लगी तो पहले अपने घाघरे को अच्छे से समेटा. अन्यास ही सुजीत की नज़र उसके चुतडो पे चली गई. जो लंड थोड़ा सा शांत हुआ था वो फिर मचल उठा. तंबू में बॅमबू एक बार फिर दिखने लगा. इतने में सरला दरवाज़ा बंद करने के लए मूडी तो आधी धकि हुई और आधी नंगी साँवली चिकनी पीठ देख के तो प्री कम की बूँदें निकल आई. फटाफट सुजीत ने गाड़ी स्टार्ट की और 10 मिनट में ही शहेर के बाहर निकल आया. अब रास्ता सुनसान था पर घबराहट बहुत थी. इतनी सेक्सी औरत साथ में थी और लंड और मन दोनो में खलबली मची हुई थी. सरला ने उससे पुछा कि क्या प्रोग्राम है पर सिर्फ़ इतना ही कह पाया कि बताता हूँ लेट हो रहा है.
शहेर के बाहर आते ही सरला ने एक बार फिर पुछा कि बेटा बात क्या है बताओगे. इतनी जल्दी में क्यों हो. तब सुजीत ने गाड़ी धीमी करके बाबूजी के प्रोग्राम की बात बताई. सरला बात सुन के चिहुनकि और फिर उसकी आँखों में एक चमक उतर आई.
''तो ठीक है इसमे इतना घबराने वाली बात क्या थी बेटा..तुम इतनी स्पीड में गाड़ी चला के लाए....आराम से चलो कोई जल्दी नही है....घर ही तो जाना है...''
''नही आंटी आप नही समझोगे...जल्दी है...वैसे भी बाकी सब भी घर पहुँचने वाले होंगे....मुझे भी बहुत से काम है और फिर सड़क खाली है तो स्पीड से चलने में क्या है...'' सुजीत का हाथ अनायास ही अपने चेहरे पे चला गया. उसके माथे पे हल्का पसीना था.
''तुम तो ऐसे कर रहे हो जैसे पता नही तुम्हे कितना ज़रूरी काम है...आराम से चलो थोड़े मौसम का मज़ा लेते हुए...'' सरला समझ चुकी थी. लंड का उभार उसकी आँखों से बचा नही था. सुजीत को किस बात की जल्दी है ये उसे महसूस हो गया था. एक शादी शुदा मर्द और वो भी उससे उमर में छ्होटा और उपर से रिश्तेदार....मेरी चूत को लेके घर जाके मूठ मारेगा...ऐसे ख़याल मन में आते ही सरला की चूत पनिया गई थी.
जैसे ही सुजीत ने 5थ गियर में डालने के लए हाथ बढ़ाया तो सरला ने उसके हाथ पे अपना हाथ रख दिया. सुजीत हड़बड़ाया और उसकी तरफ देखा. सरला मुस्कुराइ और फिर हाथ को बढ़ाते हुए पॅंट के उपर ले गई. उभार पे हाथ फेरते ही सरला की आँखे फॅट गई और सुजीत तो जैसे स्टॅच्यू बॅन गया था. खुला मूह और चेहरे पे आश्चर्या के भाव. सोच समझ सब ख़तम हो गई थी. दिमाग़ सुन्न पड़ गया था. झटका तो तब लगा जब सरला ने पॅंट को पकड़ के ज़ोर से भींचा और एक सिसकी निकाली.
''ऊओह माआआअ.....तो इसस्स बड़े मोटे डंडे को शांत करने की जल्दी है बेटे को....ऊओह इतनी तेज़ गाड़ी ना चलाओ ...धीरे चलाओ और इसको शांति मैं देती हूँ ...यही अभी.....और इसको कहो कि ये मुझे भी शांति दे.....ख्हाअर्रच्छ की आवाज़ के साथ ज़िप खुल गई और हाथ अंडरवेर में से लंड को पकड़ के बाहर खींचने लगा. उसके बाद होंठ, जीभ, थूक और गालों से चूमते और सहलाते हुए सरला ने अपना रांड़पन दिखा ही दिया...और अब ये......ये खूबसूरत चुदी चुदाई चुड़क्कड़ चूत सुजीत की उंगलिओ के जादू से खिली जा रही थी.
''ऊऊऊओह बस कर जानू...चल पिछे हट...मुझे लंड पे झरना है...उंगली पे नही...ऊओह..'' सरला ने तेज़ी से सुजीत को धक्का मारा और फटाफट से घाघरे में से टांगे निकाल के दरवाज़ा खोला और नंगी बाहर निकल गई. पिच्छली सीट का दरवाज़ा खोल के वो झट से नंगी लेट गई और दोनो टांगे अगली और पिच्छली सीट्स के बॅक रेस्ट पे टिका के खोल दी. उसका उतावलापन देख के सुजीत को हल्की सी हँसी भी आई और उसका जोश भी दुगना हो गया. आराम से अपनी पॅंट निकाल के उसने दरवाज़ा खोला और फिर अपनी शर्ट और बनियान को धीरे धीरे उतारने लगा. उसे सरला को थोड़े तरसाना था.
''अबे कुत्ते...भोसड़ी के...क्या मस्ती ले रहा है...साले हरामी डाल ना जल्दी...उउफ़फ्फ़.. दे मुझे अपना गधे का लंड ...घोड़े का नही ...टत्तूओ का लंड ...घोड़ा तो तेरा सबसे बड़ा भाई है और ..वो मेरा हरामी दामाद है घोड़ा....तुम तीनो भाई एक ही नसल के हो...ऊओम्मा...मैं जल रही हूँ और तुझे मज़ा आ रहा है हरामी...आजाअ नाअ.. जानुउऊ...पेल ना मुझी...प्लेआासी...'' सुजीत की सुस्ती को देख के सरला की आग और भड़क रही थी और अब उसके मूह से भद्दी भद्दी बातें सुन के सुजीत और भी उत्तेजित हो गया. आआव ना देखा ताव और सुजीत ने झट से जगह बनाते हुए सरला की कमर पकड़ ली और अपना फनफनाता हुआ लोडा उसकी चूत के मुख्य द्वार पे लगा दिया. सुजीत का लंड आगे से थोड़े पतला और बीच से बहुत मॉटा था. उसका लोडा मोटाई में सखी की कलाई के बराबर था. सरला के चहरे पे उत्तेजना के भाव देख के सुजीत से रहा नही गया. फुउूऊच की आवाज़ के साथ एक ही झटके में भीगी हुई मुनिया ने 9 इंच का मॉटा लंड निगल लिया.
''ऊओहमाआआअ.....मर गेयीईयियी........''' सरला काफ़ी ज़ोर से चिल्लाई.
''ऐसे थोड़े मरने दूँगा जान...अभी तो तुझे बहुत चुदना है...मेरे और मेरे गधे भाई से और फिर मेरे घोड़े भाई से भी...सबके लंड खाने हैं तेरी इस रंडी चूत ने...और सबका बीज लेना है तूने..जहाँ तू एक तरफ दादी बनेगी वही हम तीनो भाई तुझे मा भी बनाएँगे इस उमर में...'' सुजीत ने उसके मम्मे निच्चोड़े और 2 - 3 लंबे धक्के लगाए. चूत पूरी खुल चुकी थी और सरला दर्द और सुकून के मारे अपना सिर दोनो तरफ हिला रही थी.
''साले मदर्चोद ..तेरे लंड से बचूंगी तभी तो बाकी दोनो के लूँगी ....जालिम कैसे पेल रहा है...तेरी मा जैसी आंटी हूँ...जन्न्नुऊऊउ...ऊहह धीरे हां ऐसे ..ऊहह माआ....इतना सुख...इतना सुकूओन.....सखी मैके क्यों नही आती अब समझ में आता है...जिस घर में ऐसे घोड़े गधे हों वहाँ से कौन जाना चाहेगा.....और उसका घोड़ा तो सबसे शानदार लंबा है...ऊओ हां चोद और कस के..ज़ाआण्णूऊउ...ऊओ सुजीत बेटा चूड्दद..मस्स्टटत्...ऊहह..एस्स.....फक मी.. यू बस्टर्ड..यस ...अँग्रेज़ी में बोलूँगी तुझे...फक मी ..क्या कहते हैन्न...चोद मदर्चोद ज़ियादा बढ़िया है...या आंटी चोद...ऊहह एस्स...चूस साले हरामी और चूस मेरे मम्मे भी चूस...एस्स....लगा रह ऊहह माआ.....झरँगिइइ...ऊओह हाआंन्णणन् ली झर गई .......सखी तेरे जेठ ने तेरी माआ चोद दी........ऊऊआहह..आअनन्नह....''' सरला इतना ज़ोर ज़ोर से चिल्ला रही थी कि अगर दिन होता तो पक्का भीड़ इकट्ठी हो जाती.
''हां आंटी...तेरी जैसी आंटी हो तो कौन छोड़ेगा...सभी पेलेंगे...और तू मा जैसी है तो मदर्चोद तो हो ही गया.....ऊओह जनन्न मैं भी आया.....लेले....ऊओ ईससस्स.......'' दोनो मम्मे निचोड़ते हुए सुजीत भी धक्के लगाने बंद करके अपने लंड की धारें चूत में डालने लगा. अपनी गांद को टाइट करके उसने काफ़ी सारी पिचकारियाँ छोड़ी और हर पिचकारी पे उसको चूत का सिकुड़ना महसूस होता रहा. निगोडी चूत कोई भी रस छोड़ना नही चाहती थी. ऊफ्फ इतनी उमर में भी चूत में इतना कसाव था. पर क्या ये कसाव ज़ियादा दिन तक रहेगा अब जबकि 3 - 3 मुश्टंडे लंड इस चूत को बजाएँगे.......?? जो भी हो अभी तो मेरी है और अब इसको चाटना भी है....ऊओह क्या खींचती है लंड को अंदर..
क्रमशः.........................................
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