FUN-MAZA-MASTI
कभी न बुझने वाली प्यास--2
सुबह सब कुछ सामान्य सा प्रतीत हो रहा था | अक्सर मै और कामिनी जल्दी उठ जाते है मे कुछ देर बाहर जॉगिंग के लिए चला जाता हु और वो फ्लैट की बालकनी मे योग करती है |मे जॉगिंग से वापस लोटा तो कामिनी किचन मे नास्ता बना रही थी करीब 8:30 पर बंटी भी उठ गया और हम दोनों को विश करके चाय पीने लगा |उसके बॉडी लैंग्वेज से कही भी कुछ abnormal नहीं लग रहा था |फिर वो नहाने चला गया |कामिनी भी बिलकुल सहज ही लग रही थी |
मै भी बाथरूम की तरफ चला और ऑफिस जाने की तैयारी करने लगा लेकिन मेरे मस्तिष्क मे सब कुछ सामान्य नहीं था मुझे अब दाल मे कुछ काला नजर आ रहा था |शाम को मै ऑफिस से कुछ जल्दी आ गया और सोच रहा था की जरुर बंटी मुझे घर पर ही मिलेगा और हो सकता है की दोनों के बिच कुछ खिचड़ी पक रही हो |लेकिन एक बार फिर मेरा शक गलत साबित हो गया |कामिनी अकेली थी और हमेशा की तरह किचन मे डिनर की तैयारी कर रही थी |मुझे करीब 45 मिनट जल्दी देखकर बोली ,” क्या हुआ हनी तबियत तो ठीक है ना |” मैने कहा नहीं डियर मै बिलकुल ठीक हूँ बस सोचा तुम्हे सरप्राइज कर दू |वो हँसी और बोली जानू मे आपके लिए चाय बना कर लाती हु |मेरी नजर बार बार घडी की सुई की तरफ थी मुझे पक्का विश्वास था की आज जरुर बंटी कुछ जल्दी आ जायेगा कामिनी को अकेले मे पाकर कुछ और करीब आने की कोशिश के चलते |लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ |वो उल्टा 10 मिनट की देरी से आया और हमेशा के अपने रूटीन के हिसाब से ही आगे बढ़ने लगा |उसके और कामिनी के बिच की बाते भी वैसे ही सहज लग रही थी जैसे कुछ दिनों पहले थी |
इस घटना के करीब चार दिन बाद एक दिन जब मे जॉगिंग से लोटा तो आज ग़लती से फ्लैट के मेन डोर की चाबी मेरे पास रह गयी सो मैंने सोचा की कामिनी को डिस्टर्ब करने की बजाय क्यों न मे खुद ही दरवाजा खोल लेता हु |मैंने दरवाजा खोला तो मुझे अचानक बंटी एक तरफ खड़ा हुआ मिला जो की थोडा सा खुद को छुपा कर बालकनी की तरफ देख रहा था चोरी चोरी | मैंने भी खुद को एक परदे की औट मे छुपा लिया |वो एकटक कामिनी को निहार रहा था |कामिनी एक स्किन टाइड टीशर्ट जो की लम्बाई मे कुछ शोर्ट था और एक ¾ लेगी जो की घुटने से कुछ निचे तक थी पहन कर कुछ योगासन कर रही थी |जब भी वो कुछ यौगासन करती तो कभी उसकी शानदार शफ्फाक कमर तो कभी उसका संगमरमरी पेट टीशर्ट के ऊपर खीच जाने की बजह से नजर आने लगता |कामिनी पूरी तरह से असावधान थी क्युकी बंटी 8:30 से पहले कभी उठता नहीं था |अब कामिनी चक्रासन कर रही थी जैसे ही वह चक्रासन के लिए ऊपर उठी वैसे ही उसका टीशर्ट बिलकुल उपर की तरफ सरक गया और फिर कुछ वक्षो की तरफ भी उतर गया अब तो कामिनी का पूरा पेट और कमर साफ़ दिख रहे थे और पेट तो अब तन कर इस तरह लग रहा था की उसकी दृश्य लम्बाई भी बढ़ गयी थी और वो और अधिक उतेजक लग रहा था |पसलियों की दोनों हड्डियों के बिच के स्थान से बहता हुआ कामिनी का पसीना जैसे ही नाभि की तरफ बहने लगा तो लगा मानो हिमालय के ग्लेसियरो {बर्फ के पहाड़ो }से कोई ठंडी नदी धीरे धीरे बह रही हो और देखने वाले के मन को भी साथ साथ बर्फ के बड़े बड़े टुकडो की तरह हलके हलके से बहा कर ले जा रही हो |बंटी भी सांस रोके उस दृश्य को देख रहा था |
जैसे ही वो बुँदे कामिनी के नाभी मे उतरी तो लगा की वो बर्फीली नदी पुरे उफान के साथ समुन्दर मे समा गयी हो |बंटी का हाल भी काफी बुरा हो गया था |सांस के साथ हिलते कामिनी के तने हुए वक्ष उन हिमालय के बर्फ के सफ़ेद पहाडो की तरह ही लग रहे थे जिनका धरती जैसा वास्तविक रंग उसकी टीशर्ट और ब्रा के अन्दर छुपा हुआ था |
अब कामिनी पुन: पद्मासन मे सामान्य हो कर बैठ गयी |बंटी उसके पास गया और बोला _” गुड मोर्निग भाभीजी ,ओह तो ये हे आपकी खूबसूरती का राज |और एक हम है की गधे की तरह सोते रहते है 9 बजे तक |”कामिनी मुस्कुराते हुए बोली नहीं नहीं बंटी जी ऐसे कोई बात नहीं है |ये तो बस थोडा बहुत शरीर को मेन्टेन रखने के लिए करती हु कोई खास नहीं |बंटी-“जो भी हो भाभी पर इसकी वजह से आप पुरे परिवार मे सबसे खुबसूरत मानी जाती है |ये केवल मे नहीं कह रहा हु बल्कि पूरा परिवार कहता है गाँव में |कामिनी –“ रहने दीजिये क्यों चढ़ा रहे है ,ऐसे भी कोई बात नहीं है ,राकेश की पत्नी अंजलि मुझसे काफी सुन्दर है और फिट भी सुना है की वो जिम भी जाती है |बंटी ”ये किसने कह दिया आप से वो [अंजलि] तो आप के नाम से जली ही जाती है ,आपका और उसका कोई मुकाबला नहीं है सच मे , आप ही सोचिये की आखिर क्यों वो आपसे हमेंशा खिंची खिंची सी रहती है और रही बात जिम की तो उससे कुछ नही होता शेप तो आप का ही आइडल [आदर्श] है |
अपने शरीर की तारीफ सुनकर मन ही मन हर्षित हुई कामिनी नखरे दिखाती हुई बोली “, शेप तो ठीक है पर डियर मेरी बॉडी टोंड {टाईट }नहीं है |इसलिए कभी कभी लगता हे की जिम ज्वाइन करू |बंटी “ओह तो क्या अब सिक्स पैक एब्बस बनाने है आपको हा हा हा | “ नहीं ऐसा तो नहीं है पर हां कुछ मसल्स टाईट तो होने ही चाहिए |
“और अगर मे आपको बिना जिम जाए ही कुछ टिप्स दे दू तो ? बंटी बोला |कामिनी “तो क्या अब आप ये कहना चाहते है की आप एक fittness एक्सपर्ट भी है “| बंटी “नहीं ऐसा तो कुछ नहीं पर हा कुछ टिप्स तो जानता हु ,आजकल कौन नहीं चाहता शेप्ड एंड टाइड एब्बस |”कामिनी “अच्छा तो बताओ क्या है वो ? बंटी “ फिसिकल है , अगर आप इजाजत दे तो .....? “ |
बंटी ने उसे सीधा लेटने को कहा और दोनों घुटने मोडने को कहा , फिर दोनों हाथ सर के पीछे बाँधने को ,अब बंटी ने उसके दोनों पैरो पर अपने पैर रख दिए और बोला “ अब आप अपने बाकी शरीर को उठाकर अपने सर को मुड़े हुए घुटने के उपरी सिरे को छूने की कोशिश कीजिये ,इसे सिटअप्स कहते है |ये पेट के मसल्स को टाइड करने की बेस्ट एक्सरसाइज हे|”
कामिनी ऐसा ही करने लगी | बंटी –“ क्या आप इसके इफ़ेक्ट को कन्फर्म करना चाहेंगी ? इससे आपका विश्वास इस एक्सरसाइज पर हमेशा बना रहेगा |” बंटी ने उसके पेट को दबाते हुए कहा की देखिये अभी यहाँ कितना प्रेस हो पा रहा है इसे याद रखियेगा और अब ये स्टेप्स कीजिये |जैसे ही कामिनी ने ऐसा किया तो उसने फिर दोनों हांथो से उसका पेट दबाया और बोला देखिये इस पोसिशन मे पेट के मसल्स कितने टाइड होकर प्रतिरोध कर रहे है | कामिनी को भी इसका एहसास हो रहा था |उसे लगा की हां ये तो काफी इफेक्टिव है |अब बंटी ने मौका भापा और कामिनी का टीशर्ट पूरा ऊपर करते हुए बोला “ देखिये ये जो अपर एब्बस है ये और जो ये लोअर एब्बस है ये ,दोनों इस एक्सरसाइज से बिलकुल टोंड हो जायंगे |समझाते हुए उसने पूरी नजाकत के साथ कामिनी के बर्फीले रेगिस्थान पर स्पर्श की आंधी चला दी थी |वो फिर से कुछ सिहरने लगी आखिर परपुरुष का स्पर्श जो था |-“ अब रही बात मिडिल एब्बस की जो की मेन है पेट की फीचर का उसके लिए एक और टिप है जिससे आप का ये पोर्शन भी एकदम आइडल हो जाएगा कहते हुए उसका हाथ पेट के बिच के भाग पे गूजरा और नाभि को सहलाता हुआ निकल गया |उसने कहा की सेम एक्सरसाइज आपको घुटने मोड़कर और हवा मे उठाकर फिर करनी है जिसे सेल्फ सिटअप्स कहते है |और हा ये एक्सरसाइज बैक पैन [पीठ दर्द } के समय ना करे |
ओह तब तो मुझे आज भी नही करनी चाहिए थी ,क्युकी आज भी हल्का बैक पैन हो रहा है |” कामिनी बोली | बंटी –“ कोई बात नहीं इसका भी इलाज हे मेरे पास “| कामिनी “ ओह कम ऑन बंटी मजाक मत करो |
“नहीं भाभी सच मानिए ,अभी गायब कर दूंगा “- बंटी ने विश्वास दिलाते हुए कहा| बस आप उलटे लेट जाइये |
कामिनी ने कुछ सोचा घडी की तरफ देखा और उल्टा लेट गयी पेट के बल |
लगता है की उसे ये ही धयान होगा की अगर मे आऊंगा तो बेल बजाऊंगा और तब ही डोर खुलेगा |
बंटी ने फटाफट मोके का पूरा फायदा उठाते हुए कामिनी की कमर को मसाज करना शुरू कर दिया |उसके हाथ कामिनी के पीठ से होते हुए कमर की तरफ बॉर्डर के एरिया मे जाने लगे |कामिनी को रिलैक्स फील हो रहा था और बंटी exitation से पागल हुआ जा रहा था |उसके दोनों हाथ बारी बारी से कमर के निचले हिस्से पर मसाज कर रहे थे जिससे उसके हाथो को कामिनी के पेट का भी स्पर्श मिल रहा था |अब बंटी कभी कभी वक्षो के यथासंभव किनारों को भी छु पा रहा था |
अचानक बंटी उठा और बोला की 2 मिनट रुकिए मे एक अच्छा ओइन्मेनट भी लगा देता हु |वो फटाफट गया और एक ओर्थपेडीक ओइन्मेन्त ले आया |अब उसने बिना पूछे कामिनी का टीशर्ट ऊपर उठा दिया |कामिनी ने अपने ऊपर के क्षेत्र को सुरक्षित करते हुए उसे बाहों मे दबा लिया |लेकिन अब भी काफी हिस्सा नजर आ रहा था |बंटी नियंत्रण खो चूका लग रहा था |उसने क्रीम कमर पे डाली और जेंटली मसाज करने लगा |कामिनी की disigner ब्रा का पिछला हिस्सा देख कर वो फ्रीज हो गया |पूरी नंगी कमर को सहलाते हुए अब वो उतेजित हो चूका था |वो अब अपने हांथो को कमर के किनारों से होते हुए पेट पे आगे की तरफ ले जाने की कोशीश करने लगा |फिर भी वो सारी हरकत काफी संभलकर कर रहा था की कामिनी कुछ गलत न समझ बैठे |पर अब उन दोनों को रोक पाना दोनों के बस मे नहीं लग रहा था |बंटी ने ब्रा का हुक खोल दिया और अब बिलकुल फ्री मसाज करने लगा |अब ये मसाज कम इरोटिक लव मेकिंग लगने लगी थी |हालत मेरी भी ख़राब होने लगी थी |पसीने से मे भी तरबतर होने लगा था |अचानक मेरे दिमाग और मेरी बुद्धि ने सारा मामला अपने हाथो मे ले लिया और मे दबे पाँव पीछे की तरफ होते हुए वापस बाहर आगया |दरवाजा बंद करके चाबी निकलकर और मैंने बैल [घंटी } बजा दी |
कुछ देर बाद दरवाजा खुला जो की लाजिमी था |बंटी ड्राइंग रूम मे बैठा अखबार पढ़ रहा था |कामिनी भी खुद को नार्मल शो करती हुई बोली –“बहुत एक्सरसाइज करली आज आपने बिलकुल भीग गए है पसीने से | मै हंसा और बोला की नहीं ऐसा भी कुछ खास नही | बंटी आज तुम जल्दी उठ गए ?
बंटी “कहा भैया बस अभी ही उठा हु जस्ट |
“ये बाम की स्मेल कहा से आ रही है ? मैंने पूछा
“मेरी जरा पीठ मे दर्द था “ – कामिनी बोली |
“ओह अब कैसा है ,कुछ मदद करू “- मैंने कहा |
“नहीं अब ठीक है वैसे भी कुछ जयादा नहीं था “- कामिनी बोली|
बंटी अब उठकर वाशरूम की तरफ जा चूका था पर अख़बार से आ रही बाम [oinment] की स्मेल सबूत के रूप मे चीख रही थी की इस घटना मे उसका भी हाथ था या कहे की उसका ही हाथ था |
अब तक घटी घटनाये यदि आज के मॉडर्न नजरिये से देखि जाए तो कही से भी सीधे सीधे आपतिजनक नहीं लगती है| जो कुछ बंटी ने अबतक किया वो रोजाना कई प्रोफेशनल फोटोग्राफर ,फिटनेस कंसल्टेंट और डांस पार्टनर करते है बिना किसी दुर्भावना के साथ पुरे प्रोफेशनलिज्म के साथ |
तो क्या मेरे दिमागी शक की भूमि पर केवल ख्याली फसल थी ये सब घटनाएं |ऐसे ही कुछ न कुछ हमेशा दिमाग में चल रहा था रोज |इसी कारण कई दिनों से दाम्पत्य जीवन भी डिस्टर्ब चल रहा था फिर एक दिन हमेशा की तरह मे शनिवार को क्लब में काफी देर तक स्क्वेश खेल कर लोटा तो काफी थका हुआ था |बंटी लिविंग रुम मे टीवी देख रहा था और कामिनी डाइनिंग पर खाना सजा रही थी उसे मेरे शनिवार का रुटीन ध्यान मे था शायद |
हम तीनो ने खाना खाया ,सब कुछ फिर वही रह्स्यमय तरीके से बिलकुल सामान्य , न तो बंटी कामिनी को ललचाई दृष्टी से देख रहा था और न ही कामिनी की नजरो मे कोई त्रियाचरित्र परावर्तित हो रहा था |हां लेकिन एक रहस्यमय सन्नाटा जरुर था उसकी आँखों मे और एक खालीपन भी जो कई दिनों से प्रणय मिलन के अवकाश से उत्पन्न लग रहा था लेकिन वो इस दर्जे का तो नहीं था की किसी समझदार ,इज्जतदार और सन्तुष्ट पत्नी को किसी अमर्यादित कृत्य की और ले जाए इसलिए मुझे लगा की शायद मे रस्सी को सांप समझ रहा हु |खैर थके हुए दिमाग ने ज्यादा सोचने की जहमत भी नहीं उठाई |
शनिवार को थकन के कारण मै खाना खाते ही जल्दी ही सो जाता हु , सो मै अपने बेडरूम की तरफ चला और जाते जाते बोला “गुड नाईट “| और मै कमरे मे जाते ही सीधा बेड पर लेट गया |कुछ देर बाद अचानक जरा सी तन्द्रा टूटी तो देखा की हलकी रौशनी मे कामिनी अपने बालो को आकर्षक तरीके से सजा रही है और उसकी पीठ मेरी तरफ थी |अब जरा ध्यान से देखा तो दिल जोरो से धधकने लगा की उसने कई महीनो के बाद आज वो ब्लड रेड पारदर्शी साडी पहन रक्खी है जिसका ब्लाउज पीछे से backless है यांनी की गुजराती पेटर्न पर डोरियो वाला है जिसमे पूरी कमर दिखती है |
कामिनी सहसा उठी और मैंने अपनी आंखे बंद कर ली |रौशनी कम ही थी तो जब मैंने फिर थोड़ी सी चोर दृष्टि उस पर डाली तो देखा वो फिर ड्रेसिंग के कांच के सामने अपनी साडी को नाभि से नीचे सेट कर रही थी, उफ़ ! क्या लग रही थी वो एक बार तो लगा की उसे अभी बाहों मे भर कर उस खालीपन को ख़त्म कर दू जो कुछ देर पहले उसकी आँखों मे देखा था लेकिन कही कुछ खटका भी था जो कुछ इन्तजार का समर्थक था की दरअसल मेरे सोने के बाद ये तैयारी किसके लिए थी |आखिर मन के शक्की मंत्री की ही चली |
इस बार आँख तब खुली जब धीरे से दरवाजे के बंद होने की आहट सुनाई दी और साथ ही बाहर से कुण्डी लगाने की महीन आवाज भी |फिर दिल की धड़कन रोमांच की लय पर नाचने लगी |धीरे से उठा और जाकर देखा तो दरवाजा पक्का बंद था |दिमाग मे तूफान उठ खड़े हुए आखिर दरवाजा बंद करने की क्या जरुरत पढ़ गयी |धड़कन के साथ कभी कभी दिमाग भी तेज हो जाता है |वही पार्टेशन वाली खिड़की जो पहले की घटनाओ की साक्षी थी याद आ गई |फटाफट वहा गया तो देखा बंटी टीवी देख रहा था मर्डर मूवी का वही कामुक दृश्य और कामिनी उसके पीछे खड़ी उसे ऐसा करते हुए देख रही थी |
वो दृश्य गुजर गया और कामिनी फिर उसकी तरफ बढ़ने लगी और बोली क्या बात है आज नींद नहीं आ रही ,”मे सुन तो नहीं सकता था पर मुझे लगा की शायद ऐसा ही कुछ हुआ था |उसने अचानक कामिनी को देखा और चैनल बदल लिया |लगा कह रहा हो की नहीं ऐसे ही बस | लेकिन जब दूसरी बार ढंग से कामिनी की तरफ देखा तो उसे लगा की उसकी धड़कने भी काम के लय पर नाचने को उद्वेलित हो रही है |बरसो से तपस्यारत तपस्वियों के समक्ष इंद्र द्वारा अप्सराओ का प्रयोग क्यों सफल रहता था ,स्पस्ट था |
किसी तीसरे के अनुपस्थिति मे बंटी के संस्कार उसकी वासना के तूफ़ान के आगे खुली हुई खिडकियों की तरह अनिष्ट की आशंका से नियंत्रन्हीन हो कर अपना सर पिटते से लग रहे थे |उसने जी भरकर कामिनी की अप्सरा सी काया को निहारा और कामिनी ने उसे इसकी इजाजत देने के लिए अपनी नजरे टीवी की तरफ कर दी | उलटे ब्रैकेट ) , ( से कमर के curve और कोमा {,} सी नाभि उसकी सासों को भी अल्प विराम लगा रही थी | ऊपर से लाल रंग अपने रंग का प्रभाव दिखा रहा था “आकर्षण के अनियंत्रित बल का प्रतिक “|
लगा कामिनी ने कहा की ओह तो डिस्कवरी देख रहे हो |क्या कुछ interesting आ रहा है |अब वो बेचारा क्या कहता |नजरो को कुछ संयत करते हुए बोला की नहीं कोई खास नहीं ऐसे ही टाइम पास कर रहा था |आखिर पास के कमरे मे ही सही मै वहा था तो और मेरा भय भी कोई कम नहीं था उसे वो जानता था |वैसे भी मुझे वो मंझा हुआ खिलाडी लग रहा था आज कल |उसने भी लगा की दिमाग के घोड़ो को तेजी से दौड़ाना शुरू किया लेकिन तब तक उसे एक अनापेक्षित तोहफा सा मिल गया |कामिनी उसके पास से होती हुई बाहर उसी बालकनी मे चली गयी और मादकता के साथ अपने दोनों हाथो से अपने बालो से खेलने लगी |उसकी अदाओ मे भी कही न कही कुछ आमंत्रण सा लगा बंटी को लेकिन फिर भी उसे फूंक फूंक कर कदम रखना था एक जरा सी भी गलत फहमी उसे भारी पड़ सकती थी |उसने भी इन्तजार मे ही भलाई समझी हां लेकिन वो कामिनी के सभी शारीरिक सिग्नलों का पॉजिटिव जवाब अपनी नजरो से दे रहा था |
कामिनी फ़िल्मी हेरोइनो की तरह अपनी अदाओ के तीर उस पर चलाने लगी कभी हाथो को फैलाकर घोल घूमती तो कभी बाहर चल रही तेज हवाओ से उड़ती साडी को संभालने का ढोंग करती |बंटी भी इन मोको से उत्पन्न दृश्यों की मादकता को पूर्ण रूप से एन्जॉय कर रहा था हिंदी फिल्मो के रेप सोंग्स जैसा माहोल बन गया था |
जैसे ही कामिनी पलटी और उसकी नंगी कमर डोरों से खिंची हुई बंटी को दिखी तो मानो उस पर बिजली ही टूट पड़ी |उन डोरों का उसकी नर्म गुलाबी पीठ पर पड़ रहा दबाव ऐसे लग रहा था जैसे की साक्षात् कामदेव उन ताने हुए डोरों से बनी वीणा से “काम राग “ छेड़ रहे हो |और वो स्वर बंटी को मंत्रमुग्ध कर रहा था |
अब बंटी को शीघ्र ही कोई निर्णय लेना था |वो कामिनी के पास गया और कुछ कहा , कामिनी ने हंस कर उसकी बात को स्वीकार कर लिया |दोनों लीविंग रूम मे आ गए और बंटी ने टीवी बंद करके म्यूजिक प्लेयर को ऑन कर दिया और फिर वापस कामिनी के पास आ गया |दोनों डांस करने लगे | ओह तो ये तरीका लगाया था बंटी ने ,वाह ! वैसे भी कुछ हद तक उसने पहले भी इस उदेश्य को स्थापित करने मे सहायता दी थी |
बंटी का तीर ठीक निशाने पर लगा |उसे कामिनी को छूने और उत्तेजित करने का अवसर मिल गया |अब वो दोनों थोडा पास आ गये और बंटी ने अपना दांव खेलना शुरू कर दिया ,धुन के साथ और डांस के स्टेप्स के साथ कामिनी के शरीर पर वही तरंगे बजाने लगा जो मादकता को बढ़ाने का अचूक अस्त्र है |अब बंटी ने अपने इरादे भी जताने शुरू कर दिए |अब उसके हाथ डांस स्टेप्स नहीं प्ले कर रहे थे बल्कि सेक्सुअल फोरप्ले कर रहे थे |
उसने कामिनी को अपनी तरफ मोड़ा और उसकी कमर पे दबाव बनाते हुए खुद से सटा लिया और अपने एक हाथ से उसके कंधे से बालो को हटाते हुए किस कर दिया |कामिनी ने चौकने के साथ ही दूर जाने का अधुरा प्रयास किया जिसे बंटी ने कटोरता से निष्फल कर दिया और इस प्रयास में कामिनी के पलटने से दिखने लगी कमर के उपरी हिस्से को भी चूमने लगा ,कामिनी ने मदहोशी मे आँखे बंद कर ली |बंटी ने उसे अपने हाथो पे उठा लिया और अपने कमरे की तरफ बढ़ने लगा |कामिनी ने आँखे बंद कर ली और अपने दोनों हाथ बंटी के गले मे डाल दिए |
वो जैसे जैसे बंटी के कमरे की तरफ जा रहे थे मेरी धड़कने तेज होती जा रही थी |धीर धीरे वे मेरी नजरो से ओजल होने लगे |बंटी के कमरे के दरवाजे की आवाज ने जाहिर कर दिया की वो अन्दर चले गए |मेरे लिए वक्त रुक सा गया |मेरा वो दिमाग जिसने उस दिन जब बंटी कामिनी की मसाज कर रहा था ,बेल बजा कर कुछ भी अनिष्ट होने से बचा लिया था वो आज मौन भौचक सा खड़ा था बिलकुल वैसे जैसे की कोई कबूतर अचानक बिल्ली को अपने सामने देख कर हो जाता है |
उन्हें रोकने के लिए मुझे सिर्फ जरा सी खटपट करने की जरुरत थी पर न जाने वो कोनसी जादुई शक्ति थी जिसने मुझे फ्रीज कर रखा था |ऐसे मे आगे क्या हो रहा ये देखने के लिए मेरा मन एक क्रेजी दर्शक की तरह बैचेन होने लगा लेकिन कैसे ?????????????
जैसे सुमति अच्छे कामो की लिए भी सहसा कई जादुई विचार उत्पन्न कर देती है वैसे ही कुमति भी कई बार ऐसे ही पलक झपकते ही कोई आईडिया पैदा कर देती है |मुझे याद आ गई उन hi-defination कैमरा की जो मैंने दोनों बेडरूम मे लगा रखे थे जब मेरी नयी नयी शादी हुई थी तब ,कामिनी पर नजर रखने के लिए क्योकि वो बहुत सुन्दर थी और मुझे लगता था की वो मुझे धोखा दे सकती है |
आज वो ही कैमरे मेरे लिए एकमात्र विकल्प थे |मैंने अपना लैपटॉप चालू किया और उन्हें लाइव मोनिटरिंग मोड पर डाल दिया जैसे ही मैंने उसे बंटी के कमरे की तरफ स्विच किया तो देखा की दोनों बेड के पास खड़े है |बंटी ने उसे बाहों मे भरकर किस करने की कोशिस की तो कामिनी शरमा के पलट गयी |सब कुछ बिलकुल साफ़ नजर आ रहा था जैसे किसी फिल्म की शूटिंग चल रही हो |कामिनी के मुड़ने से बंटी को उसकी डोरों से बंधी backless कमर दिखी जो पोलिश कि हुई मूर्तियों की तरह चमक रही थी |उसने दोनों हाथो से दो डोरियो की गांठो को खोल दिया |कामिनी उन्माद से घबरा सी गयी और उसने अपनी आँखे बंद कर ली और आगे की और खिसकी लेकिन इससे डोरियो के खुलने मे और आसानी हो गयी |कामिनी ने फिर से शरमा के अपने दोनों हाथ इस तरह से अपनी आँखों पर रख लिए की उनके नीचे के हिस्से से चोली आगे की तरफ से उसके शरीर पर टिकी रहे |
मेरे लिए ये आखिरी मोका था इस खेल को यही पर रोक लेने का ,क्यूंकि आगे ये मेरी पूरी जिंदगी को बदल सकता था |लेकिन मै फिर उसी अदृश्य शक्ति से बंधा हुआ था जो मुझे जरा भी नेगेटिव डायरेक्शन मे सोचने नहीं देना चाहती थी |मे अपनी पत्नी को किसी और के साथ इस अवस्था मे देख रहा था और वो भी बिना कीसी fantecy या सिक मानसिकता के |तो आखिर क्यों ????? मैंने तो कभी ऐसा सोचा भी नहीं था ......... सवालो के जवाब सरकारी दफ्तरों मे बेंच दर बेंच ठोकर खाते हुए जनता जैसे लग रहे थे |मै बस सांस रोके सबकुछ देखता रहा |
बंटी ने एक बॉक्स खोला और उसमे से एक काला रेशमी लम्बा स्कार्फ निकाला और कामिनी की आँखों पर होले से बाँध दिया कामिनी ने अपने हाथ हटा लिए |बंटी ने उसे फिर से उठा लिया और बैड पर लिटा दिया फिर उसने दो स्कार्फ और निकाले और एक एक करके कामिनी के दोनों हाथ पलंग से बाँध दिए |रहस्य और रोमांच के साथ अदृश्य शारीरिक सरप्राइज से कामिनी उत्तेजित हो गयी |वो बेसब्री से बंटी के मूव का अंदाज और इन्तजार करने लगी |बंटी ने इस दोरान अपना टी शर्ट और बनियान एक झटके मे निकाल फैका ,उसने कामिनी की शर्म को अपना हथियार और कामिनी का seducing gun दोनों बना दिया एक साथ |
उसने उस बॉक्स से एक शीशी और एक हाथ मे एक पेंटिग ब्रश ले लिया |अपनी उंगलियों को कामिनी के होंतो पर उल्टा घुमाने लगा ,धीर धीरे गले के पास भी फिराने लगा |कामिनी उतेजित होने लगी |उसने ध्रीरे से साडी का पल्ला पूरा हटा दिया |गोरे गोरे वक्ष के उपरी क्षेत्र और गले से निचे का हिस्सा तडफता सा लग रहा था |गले की नसे लगातार उतेजना को ढोती सी लग रही थी |सपाट गुलाबी नर्म पेट के निचले सिरे के पास गहरी गंभीर नाभि बंटी को कामरस मे डुबाने को तैयार लग रही थी |
बंटी ने उस ब्रश को उस शीशी मे डुबोया और जेली जैसा गहरा लाल कोई द्रव्य उस ब्रश पर लगा हुआ बाहर निकला |उसने उसे धीरे धीरे कामिनी के होंटो पर लगाया फिर कुछ गले मे कंठ पर फिर उपरी वक्षो के बिच फिर कुछ पेट पर और कुछ नाभि पर लगा दिया |जैसे जैसे बंटी आगे बढ़ता गया कामिनी की उतेजना और हलचल बढती गयी |जब बंटी ने वो द्रव्य नाभि पर फिराया तो कामिनी ने दोनों हाथो से स्कार्फ को कस कर खिंच लिया |
अब बंटी ने कामिनी के होंठो को सरलता से धीरे धीरे चूमना शुरू किया |कामिनी ने भी अब किसी तरह का uncomfort या प्रतिरोध नहीं कीया , दोनों चुम्बन का आनंद लेने लगे लेकिन जैसे जैसे उनका मुखरस उस लाल द्रव्य को छूता तो दोनों को एक devine सा अहसास होता दिख रहा था |एक दुसरे के मुह से उठती भांप और उसकी स्पेसिफिक fregrance दोनों को लगातार चूमने को प्रेरित कर रही थी |दोनों की जीभ एक दुसरे के मुह मे घूम रही थी |बंटी ने धीरे धीरे निचले होंठ से होते हुए कामिनी की ठोढ़ी को चुसना शुरू किया ,कामिनी सिहरी | बंटी कंठ तक पहुँच गया कंठ को चुमते हुए होंटो से हलके से काटने लगा |कामिनी की बैचेनी बढ़ने लगी |धीरे धीरे वो cleavege पर आ गया कामिनी पैरो को आगे पीछे करने लगी |बंटी कामिनी के पेट के उपरी भाग को जो दोनों उभारो की बिच पहाड़ो से बहते हुए झरने के गिरने से बने खड्डे की तरह थोडा सा गहरा था वह जीभ से उस लाल द्रव्य को चांटने लगा |जीभ से वो उसे जहा भी फैलाता वहा कामिनी को तेज सिहरन और सनसनाहट महसूस होती और उसकी उत्तेजना और बैचनी बढती जाती |बंटी एक प्लेबॉय की तरह पूरी तैयारी की साथ था|
अब बंटी अपनी जीभ से पेट की लम्बाई को नापते हुए नाभि की गोलाइयो के किनारे पर फिराने लगा ,कामिनी चीख को नहीं रोक पाई ,पूरा शरीर उछलने लगा |बंटी ने जीभ नाभि मे उतार दी और इस तरह से उस लाल द्रव्य को जीभ के अगले सिरे से चाटने लगा की जैसे कोई हंस मानसरोवर की गहराइयो से मोती कुरेद के ला रहा हो |इस दोरान बंटी की लार से टपकी बूँद जैसे ही कामिनी की नाभि मे गिरी ,कामिनी के उभार अपनी पूर्णता से फूल गए |बंटी ने उसे फिर से चाट लिया|जैसे जैसे बंटी कामिनी की नाभि को चूमता वैसे वैसे ही कामिनी का पतला पेट और सिकुड़ता सा चला जाता जैसे की बंटी की जीभ से बचना चाह रहा हो इस असीम उत्तेजना से बचने के लिए जो कामिनी को मदमस्त करती जा रही थी |उसके सारे शरीर से कामरस फुहारों की तरह प्रस्फुटित हो रहा था और बंटी एक भँवरे की तरह से अपनी कली के हर अंग का पूरा रस पि रहा था |
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