Sunday, August 18, 2013

FUN-MAZA-MASTI परदेस से शुरू हुआ चुदाई का सिलसिला--1

FUN-MAZA-MASTI
 परदेस से शुरू हुआ चुदाई का सिलसिला--1

मैं अभिसार, या शॉर्ट में 'अभि', एक २४ वर्षीय लम्बा, चौड़ा, गोरा और अत्यंत ही आकर्षक नौजवान हूँ. (इस समय २८ का हो चूका हूं)

मैं मुंबई के बांद्रा बेन्ड-स्टेंड इलाके में एक बहुत ही पाश कम्पाउंड में पापा के एक दोस्त के मकान में अकेला रहता हूँ. अंकल-आंटी घर मेरे हवाले करके अपने बेटे के यहाँ अमेरिका चले गए.

पापा का ट्रान्सफर जब मुंबई से सूरत हुआ तो मेरे से १ साल छोटी बहन, ऋतू , मेरे चाचा के घर बोरीवली शिफ्ट हो गई क्योंकि मेरी कजिन, संजना , उसी के साथ पड़ती थी. मैं वीक-एंड पर ही उससे मिलने जा पाता था.

मेरे आकर्षक व्यक्तित्व से लड़कियां बहुत ही जल्दी प्रभावित हो जाती है. स्वाभाव से मैं एकदम सॉफ्ट और संकोची किस्म का हूं.

मैं एक बहु-राष्ट्रिय कम्पनी में अपनी मेहनत के बल पर सिर्फ १ साल में ही सीनियर एनालिस्ट के महत्वपूर्ण पद पर पहुँच गया था.

मेरे ऑफिस की रिसेप्शनिस्ट, प्रिया , बहुत ही आकर्षक और सेक्सी लड़की, जिस पर ऑफिस के सारे मर्द जान लुटाते थे परन्तु उसकी रूचि सिर्फ मुझमें थी.

फिर एक दिन वो घटना भी घट गई जिसके बाद हम दोनों के बीच कुछ भी पर्दा ना रहा और हम रेगुलर सेक्स करने लगे. प्रिया मुंबई में अपनी रूम पार्टनर, महकदीप , के साथ रहती थी.

प्रिया उससे सारी बातें शेयर करती थी. हम दोनों के अन्तरंग सबंधों का लाइव टेलीकास्ट सुन सुन कर आखिर वो भी कब तक कंट्रोल रख पाती. आखिरकर वो भी हमारे खेल में शामिल हो गई.

मेरी जिंदगी बहुत अच्छी चल रही थी.

प्रतिष्ठित नौकरी, दो दो छोकरी,,,,, आलिशान घर, ना किसी का डर,,,,,और क्या चाहिए. 

रात के दो बज चुके थे. मैं, याने कि ‘अभिसार’, मुंबई के इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर स्थित एमिरेट्स के लाउन्ज में प्रवेश कर रहा था.

मेरी दुबई जाने वाली फ्लाईट ४.३० बजे थी तो अभी मुझे डेड़-दो घंटे यहीं पर इंतज़ार करना था.

अन्दर एक सोफे पर सिर्फ दो युवतियां बैठी थी. मैं उनके सामने जाकर बैठ गया.

उनके चेहरे पर गौर किया तो पाया कि वे मशहूर हीरोइनें प्रियंका और परिणिति चोपड़ा हैं.

मैं बहुत खुश हो गया और जैसे ही उन्होंने मेरी तरफ देखा मैंने उन्हें हाथ हिलाकर हाय कहा.

लेकिन ये क्या, मुझे जवाब देना तो दूर, वे दोनों तो वहाँ से उठ कर ही चलती बनी और अंदर प्रायवेट केबिन की ओर चली गईं.

मुझे काटो तो खून नहीं. यार, इस तरह सीधे सीधे बेइज्जत नहीं करना चाहिए था. मुझे बहुत खराब लगा.

मुझे जब वहां घुटन सी होने लगी तो मैं सीधा बोर्डिंग गेट पर आ गया.

४ बजे मैं प्लेन के अन्दर अपनी बिजनेस क्लास की सीट पर था. गर्मियों के आफ-सीज़न के कारण हमारी श्रेणी में कोई भी मुसाफिर नहीं था.

एक बहुत ही हसीन अरबी एयर-होस्टेस मेरे पास आई और बड़े ही प्यार से मेरा अभिवादन किया. उसके कोट पर लगी पट्टी से पता चला कि उसका नाम 'ज़रीन' है.

वो मुझे इतनी आकर्षक और 'गर्ल नेक्स्ट डोर' लगी कि मैं उसके दुबारा आने का इंतजार करने लगा. जब वो लाइम ज्यूस लेकर आई तो मैं उससे कुछ कुछ पूछने लगा.

दरअसल मैं उसे बातों में लगाकर उसका सामीप्य पाना चाह रहा था और वो भी इरिटेट होने के बजाय पुरे इंटेरेस्ट के साथ मुझसे बात करने में लगी थी.

तभी गेट पर किसी के आने की आहट पाकर वो मुझे एक्सक्यूज़-मी कहकर उसे अटेंड करने चली गई.

तक़रीबन २ मिनट के बाद वो किसी आकर्षक युवती को मेरे पास की सीट पर छोड़ने आई और उससे हैण्ड बैग लेकर उसे ऊपर बाक्स में रख दिया और फिर धीरे धीरे उससे कुछ बातें करके वो चली गई.

हाँ जाते जाते एक बहुत ही मनमोहक मुस्कराहट मुझे पास कर गयी. मैं तो उसके अटेंशन से फूला नहीं समा रहा था.

फिर एक तिरछी निगाह पड़ोसन के चेहरे पर डाली तो मैं धक्क रह गया. मैंने अपने सीने पर हाथ रखकर चेक किया कि कहीं दिल ने धडकना बंद तो नहीं कर दिया. वो.............



..........वो मेरी सबसे फेवरेट हिरोइनों में से एक 'आयशा टाकिया' थी.

उसको देखते ही मेरे मन मैं बहुत सारे अरमान जागने लगे. हो सकता है ये मुझपे मोहित हो जाये हालांकि इसकी बहुत कम सम्भावना है परन्तु ट्राय करने में क्या हर्ज़ है. कुछ यही सब सोच रहा था कि अचानक प्रियंका चोपड़ा एपीसोड याद आ गया. उसकी बेरुखी तो चलो सहन कर ली, मगर कभी इसने भी वही व्यवहार किया तो.

मैं बहुत सोच में पड़ गया और फिर बहुत ही सख्त मन से फैसला लिया कि मैं उसे ऐसा जताऊंगा, जैसे मैं उसे जानता ही नहीं, और अपनी मस्ती में मस्त रहूँगा. ये सोच कर फिर मैं ऊपर बेग से कुछ सामान निकालने के लिए उठा तो हमारी निगाहें मिली. मैंने तक़रीबन उसे घूरते हुए देखा और ऐसा शो किया जैसे मैं उसे पहचानता ही नहीं, और फिर एक बड़े ही इगोइस्ट पर्सन जैसे बिहेव करके अपनी सीट पर बैठ कर आँखे बंद कर ली.

मेरा ऐसा व्यवहार उसे कदापि अपेक्षित नहीं था. अटेंशन के भूखे इन सितारों को इस तरह की उपेक्षा बिलकुल सहन नहीं होती है और अब यह बात उसकी बढती बेचेनी से साफ महसूस हो रही थी. मैं मन ही मन थोडा खुश हो गया, लगा कि जैसे रात का कुछ बदला ले लिया. वो एकदम रेस्टलेस हो उठी.

फिर उसने एयर-होस्टेस को तेज़ आवाज़ में बुलाया और कुछ बातें की जो मुझे कुछ भी समझ में नहीं आई. अंखियों के झरोखों से जरा सा देखा तो शायद वो मुझे इंगित करते हुए उसे कुछ बता रही थी. मैं थोडा डर सा गया कि पता नहीं क्या बात हो गई. मैं ऐसे ही आँख बंद किये पड़ा रहा.

कुछ देर बाद प्लेन उड़ा. मैं अभी भी आँख बंद किये पड़ा था. कुछ समय और ऐसे ही निकाल गया. तभी एक प्यारी सी आवाज़ मेरे कानो में घुली- 'सर'......देखा तो ज़रीन, वोही जानलेवा मुस्कान के साथ ब्रेक-फास्ट की ट्रे लिए झुकी हुई थी. मैं उठा तो वो थोडा खिलखिलाई और फिर ट्रे रखकर बड़े ही आहिस्ता, अपनी हथेली को मेरे हाथ पर रखा और धीरे से दबाव डालते हुए बोली - 'हेव अ नाईस ब्रेक-फास्ट,.....अभिसार.'

‘अरे, आपको मेरा नाम कैसे पता चला.’......मैंने एकदम से चौंकते हुए पूछा. मैंने ये भी नोटिस किया कि उसने अभिसार शब्द थोड़ा जोर से बोला था जिससे वो पास बैठी आयशा ने भी सुना और मुझे देखने लगी.

वो आपको देख कर मुझे आपका नामे जानने की क्युरिओसिटी हुई तो चार्ट से देख लिया......रियली यू हेव अ नाईस नेम.’

मैंने मुस्कुराते हुए उसे थेंक्स बोला.

फिर अगला आधा घंटा यूँ ही गुजर गया.

ज़रीन जब जब भी मेरे पास आई, हमेशा उसे मैंने अपनी नज़रों में झांकते हुए पाया.

जहाज की लाइट्स अब मद्धिम कर दी गई थी.

इस बीच मैंने आयशा को कई बार देखा पर हर बार बुरी तरह इग्नोर करता रहा. वो इस उपेक्षा से इतनी आहत हो गई कि खुद उसने पहल करते हुए मुझसे बात करनी शुरू करदी.

'एक्सक्यूज-मी, आप................दुबई जा रहे हैं या वहां से ट्रांसिट कर रहे हैं.'........थोड़े संकोच से पूछा उसने.

'दुबई जा रहा हूँ'.........मैंने बड़े ही ठन्डे स्वर में बोला.

जब मेरी और से उसे कोई गर्मजोशी महसूस नहीं हुई तो वो फिर चुप हो गई.

मैं आशंकित हो गया कि कहीं ऐसा न हो कि अब ये कोई बात ही ना करे. परन्तु अब मैं अकड़ ही गया हूँ तो पीछे थोड़े ही हट सकता हूँ इसलिए भाव खाते रहना मेरी मजबूरी थी.

देखा तो वो अपनी पीठ के ऊपर टॉप को मुट्ठी में दबाये हुए मेरी और असहाय होकर देख रही थी.

उसने याचना की....‘अरे यार थोड़ी हेल्प तो करो ना, शायद कोई बग है अंदर, बहुत जोर से काटा. मुठ्ठी में पकड़ा तो है. जरा पीछे टॉप के अन्दर चेक करके उसे बाहर निकाल दीजिये ना.......... प्लीज़.’

मैंने भाव खाना जारी रखा.......'क्या बोल रही हैं आप........ मैं ऐसा कैसे कर सकता हूँ........... हाँ रुकिए मैं एयर-होस्टेस को बुलवाता हूँ.'

'अरे एक सेकण्ड का तो काम है.......जल्दी ......जल्दी से आप अन्दर हाथ डालकर मुठ्ठी चेक कर लो. करके मुझे उससे मुक्ति दिलाओ............प्लीज़.'

अब दुबारा मना करने की तो बनती ही नहीं थी तो मैं बोला...........'चलो ठीक है, मैं कोशिश करता हूँ. बताओ, कैसे करना है.'

'एक हाथ पीछे से मेरे टॉप के अन्दर डालो और मुठ्ठी तक लाओ और फिर टॉप उठा कर मेरी मुठ्ठी को खोलो और उस कीड़े को निकाल दो........ सिम्पल.'

मेरे तो मज़े हो गए क्योंकि उसके शरीर को फ़ोकट ही छूने मिल रहा था.

मैंने अपना एक हाथ टॉप के अन्दर डाला. क्या मुलायम और चिकनी पीठ थी. धीरे धीरे मैं पीठ सहलाते हुए हथेली ऊपर बढाता रहा.

जैसे ही अहसास हुआ कि इस वक्त मैं बौलीवूड की एक नामचीन हॉट और सेक्सी अदाकारा की पीठ सहला रहा हूँ तो मेरे रोमांच की सीमा ना रही और मेरे पप्पू सेठ ने अन्दर ही अन्दर अपना मुंह उठाना शुरू कर दिया.

तभी मेरी उंगली किसी अवरोध से टकराई. ये उसके ब्रा का स्ट्रेप था. मैं थोड़ी देर तक तो उसी पर ही हाथ फेरता रहा. हीरोइन की ब्रा है.......मज़ा आ रहा था.

फिर सीधे सीधे उसकी मुठ्ठी को थामा और दुसरे हाथ से टॉप को थोड़ा ऊपर किया. अब उसकी गुदाज़ पीठ मेरे सामने चमकने लगी. चिकनी और सपाट; मांसल और मादक.

'चलिए, मुठ्ठी खोलिए धीरे से, देखता हूँ क्या है.’..........मैंने कहा. और फिर उसने अपनी मुठ्ठी खोल दी. मैंने ध्यान से चेक किया लेकिन उसमे कुछ भी नहीं था.

'कहाँ है वो कीड़ा, ये तो बिलकुल खाली है. '

'ऐसा कैसे हो सकता है, मुझे तो बहुत जोर से काटा था. तुम पीठ पर चेक तो करो जरा. '

ये तो मुझे लाइफ-लाइन मिलती ही चली जा रही थी. मैंने उसका टॉप थोड़ा नीचे खिसकाया और अपना हाथ पुन: टॉप में घुसा दिया.

वो थोडा सी टेड़ी होकर बैठ गई ताकि मेरा हाथ आसानी से अन्दर घुस सके.

अब मैंने नीचे से सहलाना शुरू किया.

बहुत ही धीरे धीरे उस निगोड़े अपराधी की खोज चल रही थी. मसलते मसलते मैं पुन: ब्रा स्ट्रेप पर आ गया.
'कहीं ब्रा की पट्टियों के अन्दर ना घुस गया हो. प्लीज़ हुक खोल कर अच्छे से पट्टियों को भी चेक करलो.'.......

ये सुनते ही टॉप को फिर ऊपर उठाया, एक बार इधर उधर देख कर जायजा लिया.

फिर सुन्दर और कीमती लाल रंग की ब्रा का हूक खोल दिया. जब खोल के उन्हें ढीला छोड़ रहा था तो बहुत वजन सा लगा. आगे लटके ढाई ढाई किलो के दो कबूतरों का वजन संभाल जो रखा था.

'अब क्या करूं'

'पीछे पीछे की जितनी भी एलास्टिक पट्टियाँ है उन्हें अल्टा पलटा कर अच्छे से चेक करो.'

क्रमशः.....











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