Friday, February 11, 2011

मस्तानी हसीना पार्ट--5


कामुक-कहानियाँ.ब्लॉगस्पोट.कॉम

मस्तानी हसीना पार्ट--5
गतान्क से आगे ......
मायके में भाभी ने मेरी बहुत खातिरदारी की. दस दिन के बाद हम वापस लॉट आए. वापसी में मुझे भाभी के साथ लेटने का मोका नही लगा. भैया भाभी को देख कर बहुत खुश हुए और मैं समझ गया कि आज रात भाभी की चुदाई निश्चित है. उस रात को मैं पहले की तरह भाभी के दरवाज़े से कान लगा कर खड़ा हो गया.भैया कुच्छ ज़्यादा ही जोश में थे . अंडर से आवाज़े सॉफ सुनाई दे रही थी.

" कंचन मेरी जान, तुमने तो हमें बहुत सताया. देखो ना हमारा लंड तुम्हारी चूत के लिए कैसे तड़प रहा है. अब तो इनका मिलन करवा दो."

" हाई राम, आज तो यह कुच्छ ज़्यादा ही बड़ा दिख रहा है. ओह हो! ठहरिए भी, सारी तो उतारने दीजिए."

"ब्रा क्यों नही उतारी मेरी जान, पूरी तरह नंगी करके ही तो चोदने में मज़ा आता है. तुम्हारे जैसी खूबसूरत औरत को चोदना हर आदमी की किस्मत में नहीं होता."

"झूट! ऐसी बात है तो आप तो महीने में सिर्फ़ दो तीन बार ही …….."

" दो तीन बार ही क्या?"

" ओह हो, मेरे मुँह से गंदी बात बुलवाना चाहते हैं"

" बोलो ना मेरी जान, दो तीन बार क्या."

" अच्छा बाबा, बोलती हूँ; महीने में दो तीन बार ही तो चोद्ते हो. बस!!"

" कंचन, तुम्हारे मुँह से चुदाई की बात सुन कर मेरा लंड अब और इंतज़ार नहीं कर सकता. थोड़ा अपनी टाँगें और चौड़ी करो. मुझे तुम्हारी चूत बहुत अच्छी लगती है, मेरी जान."

" मुझे भी आपका बहुत……. अयाया…..मर गयी….ऊवू….आ…ऊफ़..वी मा, बहुत अच्छा लग रहा है….थोड़ा धीरे…हाँ ठीक है….थोडा ज़ोर से…आ..आह..आह ."

अंडर से भाभी के करहाने की आवाज़ के साथ साथ फूच..फूच..फूच जैसी आवाज़ भी आ रही थी जो मैं समझ नहीं सका.बाहर खड़े हुए मैं अपने आप को कंट्रोल नहीं कर सका और मेरा लंड झाड़ गया. मैं जल्दी से वापस आ कर अपने बिस्तर पर लेट गया. अब तो मैं रात दिन भाभी को चोदने के सपने देखने लगा. मैने आज तक किसी लड़की को नहीं चोदा था लेकिन चुदाई की कला से भली भाँति परिचित था. मैने इंग्लीश की बहुत सी गंदी वीडियो फिल्म्स देख रखी थी और हिन्दी तथा इंग्लीश के काई गंदे नॉवेल भी पढ़े थे. मैं अक्सर कल्पना करने लगा की भाभी बिल्कुल नंगी होकर कैसी लगती होगी. जितने लंबे और घने बाल उनके सिर पर थे ज़रूर उतने ही घने बाल उनकी चूत पर भी होंगे. भैया भाभी को कॉन कॉन सी मुद्राओं में चोद्ते होंगे. एकदम नंगी भाभी टाँगें फैलाई हुए चुदवाने की मुद्रा में बहुत ही सेक्सी लगती होगी. यह सूब सोच कर मेरी भाभी के लिए काम वासना दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही थी.

मैं भी लंबा तगड़ा आदमी हूँ. कद करीब 6 फुट है. अपने कॉलेज का बॉडी बिल्डिंग का चॅंपियन हूँ. रोज़ दो घंटे कसरत और मालिश करता हूँ. लेकिन सुबसे खास चीज़ है मेरा लंड. ढीली अवस्था में भी 8 इंच लंबा और 3 इंच मोटा किसी हथोदे के माफिक लटकता रहता है. यदि मैं अंडरवेर ना पहनूं तो पॅंट के उपर से भी उसका आकर साफ दिखाई देता है. खड़ा हो कर तो उसकी लंबाई करीब 10 इंच और मोटाई 4इंच हो जाती है. एक डॉक्टर ने मुझे बताया था कि इतना लंबा और मोटा लंड बहुत कम लोगों का होता है. मैं अक्सर वरांडे में अपनी लूँगी को घुटनों तक उठा कर बैठ जाता था और न्यूसपेपर पढ़ने का नाटक करता था. जब भी कोई लड़की घर के सामने से निकलती, मैं अपनी टाँगों को थोड़ा सा इस प्रकार से चौड़ा करता कि उस लड़की को लूँगी के अंडर से झँकता हुआ लंड नज़र आ जाए. मैने न्यूसपेपर में छ्होटा सा च्छेद कर रखा था. न्यूसपेपर से अपना चेहरा छुपा कर उस छेद में से लड़की की प्रतिक्रिया देखने में बहुत मज़ा आता था. लड़कियो को लगता था कि मैं अपने लंड की नुमाइश से बेख़बर हूँ. एक भी लड़की ऐसी ना थी जिसने मेरे लंड को देख कर मुँह फेर लिया हो. धीरे धीरे मैं शादीशुदा औरतों को भी लंड दिखाने लगा क्योंकि उन्हें ही लंबे ,मोटे लंड का महत्व पता था.

एक दिन मैं अपने कमरे में पढ़ रहा था की भाभी ने आवाज़ लगाई,

" रामू, ज़रा बाहर जो कपड़े सूख रहे हैं उन्हें अंडर ले आओ. बारिश आने वाली है."

" अच्छा भाभी!" मैं कापरे लेने बाहर चला गया. घने बादल छाए हुए थे, भाभी भी जल्दी से मेरी हेल्प करने आ गयी. डोरी पर से कपड़े उतारते समय मैने देखा कि भाभी की ब्रा और कछि भी तन्गि हुई थी. मैने भाभी की ब्रा को उतार कर साइज़ पढ़ लिया; साइज़ था 38सी. उसके बाद मैने भाभी की कछि को हाथ में लिया. गुलाबी रंग की वो कछि करीब करीब पारदर्शी थी और इतनी छ्होटी सी थी जैसे किसी दस साल की बच्ची की हो. भाभी की कच्ची का स्पर्श मुझे बहुत आनंद दे रहा था और मैं मन ही मन सोचने लगा कि इतनी छ्होटी सी कछि भाभी के विशाल नितंबों और चूत को कैसे ढकति होगी. शायद यह कछि भाभी भैया को रिझाने के लिए पहनती होगी. मैने उस छ्होटी सी कछि को सूंघना शुरू कर दिया ताकि भाभी की चूत की कुच्छ खुश्बू पा सकूँ. भाभी ने मुझे करते हुए देख लिया और बोली

" क्या सूंघ रहे हो रामू ? तुम्हारे हाथ में क्या है?"

मेरी चोरी पकड़ी गयी थी. बहाना बनाते हुए बोला

" देखो ना भाभी ये छ्होटी सी कछि पता नहीं किसकी है? यहाँ कैसे आ गयी."

भाभी मेरे हाथ में अपनी कछि देख कर झेंप गयी और छीनती हुई बोली
" लाओ इधेर दो."

"किसकी है भाभी ?" मैने अंजान बनते हुए पूछा.

" तुमसे क्या मतलब, तुम अपना काम करो" भाभी बनावटी गुस्सा दिखाते हुए बोली.

"बता दो ना . अगर पड़ोस वाली बच्ची की है तो लोटा दूं.

" जी नहीं, लेकिन तुम सूंघ क्या रहे थे?"

"अरे भाभी मैं तो इसको पहनने वाली की खुश्बू सूंघ रहा था. बरी मादक खुश्बू थी. बता दो ना किसकी है?'

भाभी का चेहरा ये सुन कर शर्म से लाल हो गया और वो जल्दी से अंडर भाग गयी.

उस रात जब वो मुझे पढ़ाने आई तो मैने देखा की उन्होनें एक सेक्सी सी नाइटी पहन रखी थी. नाइटी थोड़ी सी पारदर्शी थी. भाभी जब कुच्छ उठाने के लिए नीचे झुकी तो मुझे सॉफ नज़र आ रहा था की भाभी ने नाइटी के नीचे वोही गुलाबी रंग की कछि पहन रखी थी. झुकने की वजह से कछि की रूप रेखा सॉफ नज़र आ रही थी.मेरा अंदाज़ा सही था. कछि इतनी छ्होटी थी कि भाभी के भारी नितंबों के बीच की दरार में घुसी जा रही थी. मेरे लंड ने हरकत करनी शुरू कर दी. मुझसे ना रहा गया और मैं बोल ही पड़ा,

"भाभी अपने तो बताया नहीं लेकिन मुझे पता चल गया कि वो छ्होटी सी कछि किसकी थी."

" तुझे कैसे पता चल गया?" भाभी ने शरमाते हुए पूछा.

" क्योंकि वो कछि आपने इस वक़्त नाइटी के नीचे पहन रखी है."

" हट बदमाश! तू ये सब देखता रहता है?"

" भाभी एक बात पूछु? इतनी छ्होटी सी कछि में आप फिट कैसे होती हैं?" मैने हिम्मत जुटा कर पूच्छ ही लिया.

" क्यों मैं क्या तुझे मोटी लगती हूँ?"

" नहीं भाभी, आप तो बहुत ही सुंदर हैं. लेकिन आपका बदन इतना सुडोल और गाथा हुआ है, आपके नितंब इतने भारी और फैले हुए हैं की इस छ्होटी सी कछि में समा ही नहीं सकते. आप इसे क्यों पहनती हैं? यह तो आपकी जायदाद को च्छूपा ही नहीं सकती और फिर यह तो पारदर्शी है , इसमे से तो आपका सब कुच्छ दिखता होगा."

" चुप नलायक, तू कुच्छ ज़्यादा ही समझदार हो गया है. जब तेरी शादी होगी ना तो सब अपने आप पता लग जाएगा. लगता है तेरी शादी जल्दी ही करनी होगी, शैतान होता जा रहा है."

" जिसकी इतनी सुंदर भाभी हो वो किसी दूसरी लड़की के बारे में क्यों सोचने लगा?"






" ओह हो! अब तुझे कैसे समझाऊ? देख रामू, जिन बातों के बारे में तुझे अपनी बीवी से पता लग सकता है और जो चीज़ तेरी बीवी तुझे दे सकती है वो भाभी तो नहीं दे सकती ना? इसी लिए कह रही हूँ शादी कर ले."

" भाभी ऐसी क्या चीज़ है जो सिर्फ़ बीवी दे सकती है और आप नहीं दे सकती" मैने बहुत अंजान बनते हुए पूछा. अब तो मेरा लंड फंफनाने लगा था.

" मैं सब समझती हूँ चालाक कहीं का! तुझे सूब मालूम है फिर भी अंजान बनता है" भाभी लाजाते हुए बोली. " लगता है तुझे पढ़ना लिखना नहीं है, मैं सोने जा रही हूँ."

" लेकिन भैया ने तो आपको नहीं बुलाया" मैने शरारत भरे स्वर में पूछा. भाभी जबाब में सिर्फ़ मुस्कुराते हुए अपने कमरे की ओर चल दी. उनकी मस्तानी चाल, मटकते हुए भारी नितंब और दोनो चूतरो के बीच में पिस रही बेचारी कछि को देख कर मेरे लंड का बुरा हाल था.

अगले दिन भैया के ऑफीस जाने के बाद भाभी और मैं वरामदे में बैठे चाय पी रहे थे. इतने में सामने सड़क पर एक गाइ गुज़री. उसके पीछे पीछे एक भारी भरकम सांड़ हुंकार भरता हुआ आ रहा था. सांड़ का लंबा मोटा लंड नीचे झूल रहा था. सांड़ के लंड को देख कर भाभी के माथे पर पसीना छलक आया. वो उसके लंबे तगड़े लंड से नज़रें ना हटा सकी. इतने में सांड़ ने ज़ोर से हुंकार भरी और गाइ पर चढ़ कर उसकी योनि में पूरा का पूरा लंड उतार दिया. यह देख कर भाभी के मुँह से सिसकारी निकल गयी. वो सांड़ की रास लीला और ना देख सकी और शर्म के मारे अंडर भाग गयी. मैं भी पीछे पीछे अंडर गया. भाभी किचन में थी. मैने बहुत ही भोले स्वर में पूछा

" भाभी वो सांड़ क्या कर रहा था?"

" तुझे नहीं मालूम?" भाभी ने झूठा गुस्सा दिखाते हुए कहा.

" तुम्हारी कसम भाभी मुझे कैसे मालूम होगा ? बताइए ना." हालाँकि की भाभी को अच्छी तरह पता था कि मैं जान कर अंजान बन रहा हूँ लेकिन अब उसे भी मेरे साथ ऐसी बातें करने में मज़ा आने लगा था. वो मुझे समझाते हुए बोली

" देख रामू, सांड़ वोही काम कर रहा था जो एक मर्द अपनी बीवी के साथ शादी के बाद करता है."

" आपका मतलब है कि मर्द भी अपनी बीवी पर ऐसे ही चढ़ता है?"

" हाई राम! कैसे कैसे सवाल पूछता है. हां और क्या ऐसे ही चढ़ता है."

" ओह! अब समझा, भैया आपको रात में क्यों बुलाते हैं."

" चुप नालयक, ऐसा तो सभी शादीशुदा लोग करते हैं."

" जिनकी शादी नहीं हुई वो नहीं कर सकते?"

" क्यों नहीं कर सकते? वो भी कर सकते हैं, लेकिन….." मैं तपाक से बीच में ही बोल पड़ा

" वाह भाभी तब तो मैं भी आप पर चढ़…….." भाभी एकदम मेरे मुँह पर हाथ रख कर बोली " चुप, जा यहाँ से और मुझे काम करने दे." और यह कह कर उन्होनें मुझे किचन से बाहर धकेल दिया.
इस घटना के दो दिन के बाद की बात आयी. मैं छत पर पढ़ने जा रहा था. भाभी के कमरे के सामने से गुज़रते समय मैने उनके कमरे में झाँका. भाभी अपने बिस्तर पर लेटी हुई कोई नॉवेल पढ़ रही थी. उसकी नाइटी घुटनों तक उपर चढ़ि हुई थी. नाइटी इस प्रकार से उठी हुई थी कि भाभी की गोरी गोरी टाँगें, मोटी मांसल जंघें और जांघों के बीच में सफेद रंग की कछि सॉफ नज़र आ रही थी.मेरे कदम एकदम रुक गये और इस खूबसूरत नज़ारे को देखने के लिए मैं छुप कर खिरकी से झाँकेने लगा.यह कछि भी उतनी ही छ्होटी थी और बड़ी मुश्किल से भाभी की चूत को धक रही थी. भाभी की घनी काली झांटें दोनो तरफ से कछि के बाहर निकल रही थी. वो बेचारी छ्होटी सी कछि भाभी की फूली हुई चूत के उभार से बस किसी तरह चिपकी हुई थी. चूत की दोनो फांकों के बीच में दबी हुई कछि ऐसे लग रही थी जैसे हंसते वक़्त भाभी के गालों में डिंपल पड़ जातें हैं. अचानक भाभी की नज़र मुझ पर पढ़ गयी . उन्होनें झट से टाँगें नीचे करते हुए पूछा " क्या देख रहा है रामू"
क्रमशः.........

 Mastaani hasina  paart--5
Gataank se aage ......
Mayake mein bhabhi ne meri bahut khatirdari ki. Das din ke bad hum wapas lot aaye. Wapasi mein mujhe bhabhi ke saath laitne ka moka nahi laga. Bhaiya bhabhi ko dekh kar bahut khush hue aur main samajh gaya ki aaj raat bhabhi ki chudai nishchit hai. Us raat ko main pahale ki tarah bhabhi ke darwaze se kan laga kar khara ho gaya.bhaiya kuchh zyada hi josh mein the . under se awzen saaf sunai de rahi thi.

" kanchan meri jaan, tumne to hamen bahut sataya. Dekho na hamara lund tumhari choot ke liye kaise tarap raha hai. Ab to inka milan karva do."

" hai Ram, aaj to yeh kuchh zyada hi bara dhikh raha hai. Oh ho! Thahariye bhi, sari to utarne dijiye."

"bra kyon nahi utari meri jaan, poori tarah nangi karke hi to chodne mein maza aata hai. Tumhare jaisi khoobsoorat aurat ko chodna har admi ki kismat mein nahin hota."

"jhoot! Aisi baat hai to aap to maheene mein sirf do teen bar hi …….."

" do teen bar hi kya?"

" oh ho, mere munh se gandi baat bulvana chahate hain"

" bolo na meri jaan, do teen bar kya."

" achha baba, bolti hun; Maheene mein do teen bar hi to chodte ho. Bus!!"

" kanchan, tumhare munh se chudai ki baat sun kar mera lund ab aur intzar nahin kar sakta. Thora apni tangen aur chauri karo. Mujhe tumhari choot bahut achhi lagti hai, meri jaan."

" mujhe bhi apka bahut……. Aaaah…..mar gayi….oooh….aah…oof..oui ma, bahut achha lag raha hai….thora dheere…han theek hai….thora zor se…aah..ah..ah ."

under se bhabhi ke karhane ki awaz ke sath sath phuch..phuch..phuch jaisi awaz bhi aa rahi thi jo main samajh nahin saka.bahar khare hue main apne aap ko control nahin kar saka aur mera lund jhar gaya. Main jaldi se wapas aa kar apne bistar par lait gaya. Ab to main raat din bhabhi ko chodne ke sapne dekhne laga. Maine aaj tak kisi ladki ko nahin choda tha lekin chudai ki kala se bhali bhanti parichit tha. Maine English ki bahut si gandi video films dekh rakhi thi aur Hindi tatha English ke kayi gande novel bhi parhe the. Main aksar kalpna karne laga ki bhabhi bilkul nangi hokar kaisi lagti hogi. Jitne lumbe aur ghane baal unke sir par the zaroor utne hi ghane baal unhi choot par bhi honge. Bhaiya bhabhi ko kon kon si mudraon mein chodte honge. Ekdum nangi bhabhi tangen phailai hue chudwane ki mudra mein bahut hi sexy lagti hogi. Yah sub soch kar meri bhabhi ke liye kam vasna din pratidin barhti ja rahi thi.

Main bhi lumba tagra admi hun. Kad karib 6 foot hai. Apne college ka body building ka champion hun. Roz do ghante kasrat aur maalish karta hun. Lekin subse khas cheese hai mera lund. Dheeli avastha mein bhi 8 inch lumba aur 3 inch mota kisi hathore ke mafik latakta rehta hai. Yadi main underwear na pahnun to pant ke upar se bhi uska akar saaf dikhai deta hai. Khara ho kar to uski lumbai kareeb 10 inch aur motai 4inch ho jati hai. Ek doctor ne mujhe bataya tha ki itna lumba aur mota lund bahut kam logon ka hota hai. Main aksar varandah mein apni lungi ko ghutnon tak utha kar baith jata tha aur newspaper parhne ka natak karta tha. Jab bhi koi ladki ghar ke samne se nikalti, main apni tangon ko thora sa is prakar se chaura karta ki us ladki ko lungi ke under se jhankta hua lund nazar aa jaye. Maine newspaper mein chhota sa chhed kar rakha tha. Newspaper se apna chehra chhupa kar us chhed mein se ladki ki pratikriya dekhne mein bahut maza aata tha. Ladakion ko lagta tha ki main apne lund ki numaish se bekhabar hun. Ek bhi ladki aisi na thi jisne mere lund ko dekh kar munh pher liya ho. Dheere dheere main shadishuda auraton ko bhi lund dikhane laga kyonki unhen hi lumbe ,mote lund ka mahatva pata tha.

Ek din main apne kamare mein parh raha tha ki bhabhi ne awaz lagai,

" Ramu, zara bahar jo kapre sookh rahe hain unhen under le aao. Barish aane wali hai."

" Achha bhabhi!" main kapre lene bahar chala gaya. Ghane badal chhaye hue the, bhabhi bhi jaldi se meri help karne aa gayi. Dori par se kapre utarte samay maine dekha ki bhabhi ki bra aur kachhi bhi tangi hui thi. Maine bhabhi ki bra ko utar kar size parh liya; size tha 38c. uske baad maine bhabhi ki kachhi ko haath mein liya. Gulabi rang ki vo kachhi kareeb kareeb pardarshi thi aur itni chhoti si thi jaise kisi das saal ki bachhi ki ho. Bhabhi ki kachhi ka sparsh mujhe bahut anand de raha tha aur main man hi man sochne laga ki itni chhoti si kachhi bhabhi ke vishal nitambon aur choot ko kaise dhakti hogi. Shayad yeh kachhi bhabhi bhaiya ko rijhane ke liye pahanti hogi. Maine us chhoti si kachhi ko soonghna shuru kar diya taki bhabhi ki choot ki kuchh khushboo pa sakun. Bhabhi ne mujhe karte hue dekh liya aur boli

" kya soongh rahe ho Ramu ? tumhare haath mein kya hai?"

Meri chori pakri gayi thi. Bahana banate hue bola

" dekho na bhabhi ye chhoti si kachhi pata nahin kiski hai? Yehan kaise aa gayi."

Bhabhi mere haath mein apni kachhi dekh kar jhenp gayi aur chheenti hui boli
" laao idher do."

"kiski hai bhabhi ?" maine anjaan bante hue poocha.

" tumse kya matlab, tum apna kaam karo" bhabhi banavati gussa dikhate hue boli.

"bata do na . agar pados wali bachhi ki hai to lota dun.

" jee nahin, lekin tum soongh kya rahe the?"

"are bhabhi main to isko pahanane wali ki khushboo soongh raha tha. Bari madak khushboo thi. Bata do na kiski hai?'

Bhabhi ka chehra ye sun kar sharm se laal ho gaya aur voh jaldi se under bhaag gayi.

Us raat jab voh mujhe parhane aaee to maine dekha ki unhonen ek sexy si nightie pahan rakhi thi. Nightie thodi si pardarshi thi. Bhabhi jab kuchh uthane ke liye neeche jhuki to mujhe saaf nazar aa raha tha ki bhabhi ne nightie ke neeche vohi gulabi rang ki kachhi pahan rakhi thi. Jhukne ki vajah se kachhi ki roop rekha saaf nazar aa rahi thi.mera andaza sahi tha. Kachhi itni chhoti thi ki bhabhi ke bhari nitambon ke beech ki darar mein ghusi ja rahi thi. Mere lund ne harkat karni shuru kar di. Mujhse na raha gaya aur main bol hi para,

"bhabhi apne to bataya nahin lekin mujhe pata chal gaya ki vo chhoti si kachhi kiski thi."

" tujhe kaise pata chal gaya?" bhabhi ne sharmate hue poocha.

" kyonki voh kachhi aapne is waqt nightie ke neeche pahan rakhi hai."

" hut badmash! Tu ye sub dekhta rahata hai?"

" bhabhi ek baat poochhun? Itni chhoti si kachhi mein aap fit kaise hoti hain?" maine himmat juta kar poochh hi liya.

" kyon main kya tujhe moti lagti hun?"

" nahin bhabhi, aap to bahut hi sunder hain. Lekin aapka badan itna sudol aur gatha hua hai, aapke nitamb itne bhari aur phaile hue hain ki is chhoti si kachhi mein sama hi nahin sakte. Aap ise kyon pahanti hain? Yah to aapki jayadaad ko chhupa hi nahin sakti aur phir yah to pardarshi hai , isme se to aapka sub kuchh dikhta hoga."

" chup nalayak, tu kuchh zyada hi samajhdar ho gaya hai. Jab teri shaadi hogi na to sub apne aap pata lag jayega. Lagta hai teri shaadi jaldi hi karni hogi, shaitan hota ja raha hai."

" jiski itni sunder bhabhi ho voh kisi doosri ladki ke baare mein kyon sochne laga?"






" oh ho! Ab tujhe kaise samjhaon? dekh Ramu, jin baaton ke baare mein tujhe apni biwi se pata lag sakta hai aur jo cheese teri biwi tujhe de sakti hai voh bhabhi to nahin de sakti na? Isi liye kah rahi hun shaadi kar le."

" bhabhi aisi kya cheese hai jo sirf biwi de sakti hai aur aap nahin de sakti" maine bahut anjaan bante hue poocha. Ab to mera lund phanphanane laga tha.

" main sub samajhti hun chalaak kahin ka! Tujhe sub maloom hai phir bhi anjaan banta hai" bhabhi lajate hue boli. " lagta hai tujhe parhna likhna nahin hai, main sone ja rahi hun."

" lekin bhaiya ne to aapko nahin bulaya" Maine shararat bhare swar mein poocha. Bhabhi jabab mein sirf muskurate hue apne kamare ki or chal di. Unki mastani chaal, matakte hue bhari nitamb aur dono chutron ke beech mein pis rahi bechri kachhi ko dekh kar mere lund ka bura haal tha.

Agle din bhiya ke office jane ke baad bhabhi aur main varandah mein baithe chaay pee rahe the. Itne mein samne sarak par ek guy guzri. Uske peeche peeche ek bhari bharkum saand hunhar bharta hua aa raha tha. Saand ka lumba mota lund neeche jhool raha tha. Saand ke lund ko dekh kar bhabhi ke maathe par paseena chhalak aya. Voh uske lumbe tagre lund se nazaren na hata saki. Itne mein saand ne jor se hunkar bhari aur guy par charh kar uski yoni mein poora ka poora lund utar diya. Yah dekh kar bhabhi ke munh se siskari nikle gayi. Voh saand ki raas leela aur na dekh saki aur sharm ke maare under bhaag gayi. Main bhi peeche peeche under gaya. Bhabhi kitchen mein thi. Maine bahut hi bhole swar mein poocha

" bhabhi voh saand kya kar raha tha?"

" tujhe nahin maloom?" bhabhi ne jhoota gussa dikhate hue kaha.

" tumhari kasam bhabhi mujhe kaise maloom hoga ? bataiye na." Halanki ki bhabhi ko achhi tarah pata tha ki main jaan kar anjaan bun raha hun lekin ab use bhi mere saath aisi baaten karne mein maza aane laga tha. Voh mujhe samajhate hue boli

" dekh Ramu, saand vohi kaam kar raha tha jo ek mard apni biwi ke saath shaadi ke baad karta hai."

" aapka matlab hai ki mard bhi apni biwi par aise hi charhta hai?"

" hai Ram! Kaise kaise sawal poochta hai. Haan aur kya aise hi charhta hai."

" oh! Ab samjha, bhaiya aapko raat mein kyon bulate hain."

" chup nalayak, aisa to sabhi shaadishuda log karte hain."

" jinki shaadi nahin hui voh nahin kar sakte?"

" kyon nahin kar sakte? Voh bhi kar sakte hain, lekin….." main tapak se beech mein hi bol para

" vaah bhabhi tub to main bhi aap par chharh…….." bhabhi ekdum mere munh par haath rakh kar boli " chup, ja yehan se aur mujhe kaam karne de." Aur yah kah kar unhonen mujhe kitchen se bahar dhakel diya.
Is ghatna ke do din ke baad ki baat ahi. Main chhat par parhne ja raha tha. Bhabhi ke kamare ke samne se guzarte samay maine unke kamare mein jhanka. Bhabhi apne bistar par laitee hui koi novel parh rahi thi. Uski nightie ghutnon tak upar charhi hui thi. Nihgtie is prakar se uthi hui thi ki bhabhi ki gori gori tangen, moti mansal janghen aur janghon ke beech mein safed rang ki kachhi saaf nazar aa rahi thi.mere kadam ekdum ruk gaye aur is khoobsoorat nazare ko dekhne ke liye main chhup kar khirki se jhankene laga.yeh kachhi bhi utni hi chhoti thi aur bari mushkil se bhabhi ki choot ko dhak rahi thi. Bhabhi ki ghani kali jhanten dono taraf se kachhi ke bahar nikal rahi thi. Voh bechari chhoti si kachhi bhabhi ki phooli hui choot ke ubhar se bus kisi tarah chipki hui thi. Choot ki dono phankon ke beech mein dabi hui kachhi aise lag rahi thi jaise hanste waqt bhabhi ke gaalon mein dimple par jaten hain. Achanak bhabhi ki nazar mujh par parh gayi . unhonen jhat se tangen neeche karte hue poocha " kya dekh raha hai Ramu"
kramashah.........








आपका दोस्त राज शर्मा साधू सा आलाप कर लेता हूँ , मंदिर जाकर जाप भी कर लेता हूँ .. मानव से देव ना बन जाऊं कहीं,,,, बस यही सोचकर थोडा सा पाप भी कर लेता हूँ आपका दोस्त राज शर्मा (¨`·.·´¨) Always `·.¸(¨`·.·´¨) Keep Loving & (¨`·.·´¨)¸.·´ Keep Smiling ! `·.¸.·´ -- raj

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