Friday, September 25, 2015

FUN-MAZA-MASTI भाभी ने कराई मेरी चुदाई--2

FUN-MAZA-MASTI



भाभी ने कराई मेरी चुदाई--2




हमारे कॉलेज का वक़्त, सुबह 7 से दोपहर 1 बजे तक था।
उसके बाद, हम दो तीन घंटे कॉलेज में ही मटरगस्ती करते या कभी कभी कहीं बाहर चले जाते, घूमने फिरने या मूवी देखने।
शाम होने से पहले, मैं घर वापस चली जाती।
माही, मेरे घर आया जाया करती थी और मेरी मम्मी उसे पसंद भी करती थीं।
पापा, कभी कभी यूँही पढ़ाई को लेकर डांट दिया करते थे पर मम्मी उन्हें संभाल लेती थीं।
जय तो हर सही ग़लत में मेरे साथ, बचपन से ही था।
सितम्बर, 2009…
एक दिन कॉलेज ख़त्म होने के बाद, राहुल ने माही और मुझे रेस्टोरेंट में बुलाया।
हमेशा की तरह, हम दोनों वहाँ पहुँचे और देखा के आज राहुल के साथ एक और लड़का है।
हम दोनों, टेबल के पास पहुँचे।
राहुल ने हमारा परिचय करवाया ये मेरा दोस्त है, राज
हाय राजमाही ने कह के, उससे हाथ मिलाया और खुद का परिचय दिया।
बदले में, उसने हेलोकहा।
फिर, मैंने राज से हाथ मिलाया और खुद का परिचय दिया।
फिर, हम टेबल पर बैठ गये और हँसी मज़ाक करने लगे।
ऑर्डर भी दे दिया।
ऑर्डर आने के बाद, हम खाते रहे और हँसी मज़ाक चलती रही।
राज, मुझे एक अच्छा लड़का लगा.. उसकी लम्बाई 59 थी और दिखने में काफ़ी स्मार्ट था..
उसका सेन्स ऑफ ह्यूमरभी बहुत अच्छा था।
किसी भी बात में, वो एक मज़ाकिया एंगल निकाल लेता और हम सब हँसने लगते।
कुछ दिनों में, राज भी हमारे ग्रूप का हिस्सा बन गया।
राहुल, माही से ज़्यादा बातें किया करता था और राज, मुझसे।
मेरे अंदर राज के लिए, फीलिंग्स डेवलप होने लगी।
वो फीलिंग, जो मुझे महसूस हुई थी जब शब्दिता और जय, एक ही कमरे में थे!! !!

14 अक्टूबर, 2009…
मैं और माही, कॉलेज के बाद फिर उसी रेस्टोरेंट में गये.. जहाँ, अक्सर जाया करते थे.. मगर, आज कुछ अलग था..
राहुल, अलग टेबल पर बैठा और राज अलग टेबल पर।
माही, राहुल के सामने बैठ गई और मुझे राज के टेबल पर बैठने को कहा।
मैंने कारण पूछा तो उसने बोला अभी पता चल जाएगा, मेरी बिलो रानीतू जा तो
मैं राज के सामने बैठ गई।
राज मुझे आज, प्यार भरी नज़रों से देख रहा था।
उसकी नज़र से, मैं नज़र नहीं मिला पा रही थी।
मेरी नज़रें शरम से झुक गई।
आई लव युराज ने, धीरे से कहा..
मेरा दिल, ज़ोर ज़ोर से धड़क रहा था।
ऐसा लग रहा था, जैसे मेरा दिल, सीना चीर के बाहर आ जाएगा।
मैं कुछ ना बोल पाई।
मेरी तरफ तो देखोराज ने फिर, धीरे से कहा..
पर, मैं नज़रें नहीं उठा पा रही थी।
मेरा चेहरा, लाल हो चुका था।
मैं अपनी शरम को कंट्रोल करना चाहती थी, पर नहीं कर पाई।
राज ने एक बड़ा चॉकलेट पैक और एक लाल गुलाब टेबल पर रख दिया और बोला अगर, तुम्हारा जवाब हाँ है तो इसे चुप चाप उठा लो
मैं वो भी नहीं कर पा रही थी और काफ़ी देर तक खामोशी से बैठी रही।
जब जाने के लिए माही उठी तो मैंने धीरे से वो चॉकलेट पैक और गुलाब उठा लिया और बिना राज को देखे, वहाँ से चली गई।

22 अक्टूबर, 2008…
(लवरस पार्क)
अब तक हमारी, चार पाँच मुलाक़ाते हो चुकी थीं और आज कॉलेज के बाद, राज ने मुझे अकेले एक पार्क में बुलाया था।
ये एक बहुत फेमस गार्डेन था।
पेड़ और पौधे इतने थे के इसमें सीक्रेट प्लेससबहुत थे।
जिसका आनंद कपल्स किया करते थे और इसी लिए इसे लवरस पार्ककहा जाता था।
मैं पार्क में पहुँची तो राज, मेरा इंतेज़ार कर रहा था।
मुझे याद है, उस दिन मैंने लाल टी-शर्ट और नीली जीन्स पहनी थी।
अंदर मैंने काली ब्रा और काली ही थोंग (जीन्स के नीचे पहने जाने वाली, पैंटी) पहनी थी.. हालाकी, मुझे मालूम था की कम से कम आज तो वो राज को नहीं दिखने वाली थी।
खैर, राज मुझे ले के पार्क के कोने में गया और हम एक पेड़ के नीचे बैठ गये।
ये हिस्सा इतना घना था के आस पास का कुछ भी नज़र नहीं आ रहा था।
राज, मेरी गोद में सिर रख के लेट गया और हम बातें करने लगे।
मुझे बहुत अच्छा महसूस हो रहा थे।
ना जाने क्यूँ, मेरी चूत में उस दिन जैसा ही भारीपन था और निप्पल भी बेहद संवेदनशील हो गये थे।
बात करते करते, राज ने एक हाथ मेरे पीछे से कमर में लपेट लिया।
मैं उसके बालों में, हाथ घुमा रही थी।
थोड़ी देर बाद, वो उठ के बैठा और प्यार भरी नज़रों से मुझे देखने लगा।
मैं फिर शरमाने लगी और सन्नाटे में, मेरा दिल ज़ोर ज़ोर से धड़कने लगा।
मेरी चूत पे, दबाब सा महसूस होने लगा और निप्पल इतने कड़े हो गये की मैं अपनी ब्रा में उन्हें महसूस करने लगी!! !!
धीरे धीरे, राज मेरी तरफ बढ़ा।
जैसे ही, वो मेरे एक दम करीब आ गया, मैंने अपनी आँखे बंद कर लीं।
कुछ देर बाद, उसके होंठ मैं अपने होठों पर महसूस कर रही थी।
मैं अपनी लाइफ की पहली किसकर रही थी!! !!
ये किस बहुत लंबी थी..
उसने किस करते करते ही, मुझे ज़मीन पर लिटा दिया और खुद मेरे ऊपर आ गया।
अब उसने एक हाथ से मेरी टी-शर्ट ऊपर कर दी और पेट सहलाने लगा।
जैसे ही उसका हाथ, मेरे नंगे पेट और नाभि के पास पड़ा उसी दिन की तरह मेरी चूत से एक हल्की सी धार सी निकलती महसूस हुई..
मुझ पर, अब नशा पूरी तरह छा चुका था।

मेरे निप्पल और चूत कुलबुला रहे थे और राज को मेरी तरफ से कोई रुकावट नहीं थी।
फिर, राज धीरे धीरे टी-शर्ट के अंदर से हाथ ऊपर सरकाने लगा।
कुछ ही देर में, उसका हाथ मेरी ब्रा के अंदर था।
जैसे ही उसका हाथ मेरे नंगे दूध पर पड़ा और मेरी निप्पल उसकी उंगलियों से टकराई, एक बार फिर मेरी चूत से हल्की सी धार निकलती हुई महसूस हुई।
मुझे महसूस हुआ, मेरी थोंग गीली हो चुकी है और मेरी चूत के होंठों के बीच घुस गई है..
इधर, अब वो मेरे दूध दबा रहा था, सहला रहा था और मुझे चूमे जा रहा था।
कुछ 10-12 मिनट बाद, ये सब बंद हुआ।
सच कहूँ, जब राज उठा तो मुझे बहुत गुस्सा आया।
खैर, राज और मैं उठे और मैंने अपने कपड़े ठीक किए।
फिर, मैं घर चली गई पर पार्क का नशा मुझ पर छाया हुआ था।
मेरी चूत कुलबुला सी रही थी.. बस कुछ भी लेकर, अपनी चूत में घुसेड लेने का मन कर रहा था..
उस रात, मैं पहली बार रात को पूरी नंगी होकर सोई।
रात भर, मेरा एक हाथ मेरी चूत के आस पास ही था।
सुबह चादर पर, हल्के हल्के सफेद निशान थे.. ..
अभी तक, मैंने जय को अपने अफेयर के बारे में कुछ भी नहीं बताया था।
मैं चाहती थी के जो पार्क में हुआ, उससे कुछ ज़्यादा होना चाहिए था पर पार्क जैसी जगह में, इससे ज़्यादा हो भी क्या सकता था।

उस दिन के बाद से, मेरा और राज का मिलना और बढ़ गया।
हम ज़्यादातर पार्क में मिलते और कभी कभी, मूवी भी देखने जाया करते थे।
अब हमारे बीच में चुदाई और ब्लू फिल्म्स की बातें भी होने लगी थी, जिसे मैं बहुत एंजाय करती थी।
मैं अब ज़्यादातर, नंगी ही सोने लगी थी!! !!
चूत का सहलाना, अब रगड़ने में बदल गया था!! !!
मैं अक्सर पेन या पेन्सिल, अपने चूत के होंठों पर रगड़ने लगी थी।
नहाते वक़्त, कभी नल के ऊपर अपनी चूत रगड़ती तो कभी टूथ ब्रश अपनी चूत पर रगड़ती।
कुछ दिन तक, ऐसे ही चलता रहा।
जवानी का नशाक्या होता है और ये कैसे चढ़ता है, मुझे समझ आ गया था।
राज ने अब तक मेरी चूत एक बार भी नहीं देखी थी पर जब भी मैं उससे मिलती, “लो वेस्ट जीन्सपहनती।
ज़्यादातर, अंदर थोंग या पैंटी नहीं पहनती थी और अंदर नंगी रहती थी।
और एक दिन, राज ने फिर से मुझे उसी पार्क में बुलाया.. ..

24 नवंबर, 2008…
आज मैंने एक शर्ट पहनी, जिस पर चेक्स बने हुए थे और लो वेस्ट जीन्स पहनी।
शर्ट के अंदर, सिर्फ़ स्लिप पहनी।
ब्रा नहीं पहनी ताकि राज को हाथ अंदर डालने में आसानी हो।
थोंग या पैंटी भी नहीं पहनी.. जिससे, मेरी गाण्ड पर जीन्स की फिटिंग देख कर राज को मज़ा आए।
फिर, मैं कॉलेज के बाद पार्क में पहुँच गई जहाँ राज मेरा पहले से इंतेज़ार कर रहा था।
हम अपनी जगह पर जा कर, बैठ गये।
कुछ देर बातें करने के बाद, राज ने मुझे लीप किस किया और फिर राज पैर लंबे कर के बैठ गया।
मैं उसकी जांगों पर, सिर रख के लेट गई।
अरे वाह!! आज ब्रा नहीं पहनीराज ने मेरे शर्ट के ऊपर से, दूध पर हाथ रखा और बोला..
बोलो तो अगली बार से, पहन कर आऊँगीमैंने चिढ़ाते हुए, उसे जवाब दिया..
अरे नहीं, ऐसे ही आया कर यारराज, अब अपना हाथ मेरे मम्मे पर गोल गोल घुमा रहा था..
अच्छा पैंटी पहनी है या नहींउसने अब मेरी शर्ट के दो बटन खोल दिए।
हाँमैंने झूठ बोल दिया..
वो भी नहीं पहनती नामेरी स्लिप की स्लीव को, मेरे कंधे से हटाते हुए उसने बोला..
क्योंअब जीन्स भी उतारोगे क्या यहाँ परमैंने उसे देखते हुए पूछा..
क्योंनहीं उतारने देगीउसने कहा..

मेरी स्लिप की स्लीव कंधे से नीचे हो गई थी और राज ने मेरे नंगे दूध पर हाथ रख दिया।
उसका पंजा, मेरे पूरे मम्मे को कवर कर रहा था।
मेरे निपल्स, उसकी दो उंगलियों के बीच में थी।
उसने दूध को हल्का दबाया हुआ था और गोल गोल घुमा रहा था।
नहीं उतारने दूँगीजीन्स टाइट हैउतारुँगी और कोई आ गया तो, पहनने में तकलीफ़ होगीऔर मैंने अपनी स्लिप को और थोडा नीचे किया..
अरे, यहाँ सब कपल्स आते हैंकोई आया भी तो दूर से देख के दूसरी जगह चला जाएगाराज, अब तीसरा बटन खोल रहा था..
बस, पूरा मत खोलोमैंने उसका हाथ पकड़ लिया और बोली..
फिर राज ने मुझे बिठाया और नज़दीक आ के, होंठ पर किस करना लगा।
उसका हाथ, अभी भी मेरे दूध पर था।
अब वो किस करते करते, नीचे उतरने लगा।
कुछ देर तक गर्दन पर किस किया फिर दूध तक आ गया।
फिर निपल्स पर, ज़बान लगाने लगा।
अब मेरी चूत इतनी आसानी से धार नहीं छोड़ती थी.. लेकिन, मैं उसे पूरा सपोर्ट कर रही थी..
उसका सिर पकड़ के, अपनी तरफ खींच रही थी।
जब वो हटा तो मेरी स्लिप के स्लीव्स, दोनों कंधों से उतरे हुए थे और मेरी शर्ट भी कंधो से नीचे थी।
मैं पब्लिक पार्क में आधी नंगीथी!! !!
मैंने झट से अपने कपड़े और बाल ठीक किए, फिर नॉर्मल हो के बैठ गई।
फिर राज ने मुझे जीन्स खोलने के लिए कहा।
पागल हो क्यायहाँ नहीं खोलूँगीमैं थोड़ा गुस्से भरी आवाज़ में बोली।
मेरे फ्रेंड का एक घर है खाली, वहां चलेगी

ये सुनते ही, मेरा दिल धड़क गया और मन ही मन, मैं खुश हो गई पर ऊपर से दिखावे का नाटक करने लगी वहां क्या करने वाले हो, मेरे साथ
मैंने थोड़ी स्माइल के साथ, पूछा पर राज ने इसका जवाब नहीं दिया और बोला कल चलें
इस बार, मैंने कोई जवाब नहीं दिया और वो समझ गया।
फिर उसने मुझे जाने का रास्ता समझा दिया और मैं घर आ गई।
रात में, मैं अपने कमरे में पूरी नंगी लेटी थी और अपनी चूत सहलाते हुए आने वाले कल के बारे में, सोच रही थी।
तभी दरवाजे पर, खटखटाने की आवाज़ हुई।
मैंने झट से नाइटी पहनी और दरवाजा खोला।
क्या कर रही हैजय की आवाज़ आई।
मुझे थोड़ा सा गुस्सा आ गया।
क्या हुआ… – मैंने पूछा..
एक घंटा, मेरे रूम में लेट ना जा कर
उसने, कंप्यूटर चालू किया।
फिर ब्लू फिल्म ले के आया है
उसने इशारे में, हाँ कहा।
नाइटी के अंदर, मेरे पूरे नंगे बदन में आग लग गई और चूत मचल उठी..
एक शर्त पर जाउंगी… – मैंने जय से कहा..
वो मेरी तरफ पलटा क्याउसने झट से पूछा..
देखने के बाद पीसी में कॉपी कर देगा तो जाउंगीवो हैरत से, मेरी तरफ देखने लगा।
ऐसे क्या देख रहा हैसिर्फ़ तू ही देख सकता हैमैं नहीं देख सकती
थोड़ी देर सोचने के बाद, उसने भी हाँ कह दिया..
फिर मैं, जय के कमरे में चली गई।
जब जय वापस आया तो मैंने चिढ़ाते हुए पूछा कैसी थी, फिल्म
उसने कहा खुद ही देख लेऔर मुस्कुराते हुए, बाथरूम में घुस गया।
मैं भी हंसते हुए, अपने कमरे में आ गई और फिल्म देखने लगी।

फिल्म में, पाँच लड़के एक लड़की को चोदते हैं..
लड़की बड़ी आसानी से, एक लण्ड अपनी चूत में एक गाण्ड में और एक मुँह में लिए हुई थी।
बाकी दोनों लण्ड को वो अपने दोनों हाथों में लेकर, जोर जोर से मूठ मार रही थी और वो दोनों लड़की के एक एक चुचे को चूस रहे थे।
मुँह में लण्ड देने वाला लड़का, लड़की के मुँह को उसकी चूत और गाण्ड की ही तरह चोद रहा था।
मैंने अभी तक सेक्स स्टोरी तो बहुत पढ़ीं थीं पर ब्लू फिल्म पहली बार देख रही थी।
जब इतने बड़े बड़े लण्ड उस लड़की की चूत और गाण्ड में जा रहे थे तो वो ज़ोर ज़ोर से सिसकारियाँ ले रही थी।
देखते देखते, मैं काफ़ी उतेज्जित होने लगी और डरने भी लगी क्यूंकी लण्ड इतना बड़ा होता है, मुझे नहीं मालूम था।
मैं सोच रही थी, जब लण्ड मेरी चूत में जाएगा तो मेरी छोटी सी चूत का क्या होगा।
मैंने तो अभी तक, पेन्सिल या पेन भी चूत में घुसाने की हिम्मत नहीं की थी।
पर इस डर के बाद भी, मुझे फिल्म देखने में मज़ा आ रहा था।
मेरी चूत फटने पर आ गई थी!! !!
मैं बहुत ज़ोर ज़ोर से अपनी चूत रगड़ने लगी और इस बार हल्की की जगह, बहुत ज़ोर से धार मेरी चूत से निकली और मेरी नंगी जांघों पर बहने लगी।












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