Tuesday, March 3, 2015

FUN-MAZA-MASTI फागुन के दिन चार--142

FUN-MAZA-MASTI

   फागुन के दिन चार--142

 दिया , चढ़ गयी जिया पर






जिस तरह से दिया ललचाई नजर से जिया के चेहरे की तरफ देख़ रही थी , गुड्डी उसका इरादा भांप गयी और उसने जिया को दिया हवाले सौंप दिया।

हाथ तो उसका कब का दिया ने छोड़ दिया था , लेकिन अब जिया अपने को बचाने के लिए कुछ भी नहीं कर रही थी।

हाँ गाल जरूर गुड्डी ने दबाकर खुलवा रखा ,

दिया ने पहले किस किया बल्कि बहुत वायलेंट तरीके से उसके होंठो को अपने होंठो के बीच लेकर चबा लिया और साथ ही उसके एक निपल को जोर से मरोड दिया।

और उसके बाद ढेर सारा थूक लेकर एकसाथ , जिया के खुले मुंह में ,…

" इसी मुंह से तूने मेरे भाई को ना बोला था न , साल्ली , कुतिया , देख अब क्या क्या जाता है तेरे इस मुंह के अंदर , छिनार। अभी तेरा मुंह सुद्ध करती हूँ "


और उसके बाद दो , तीन , चार बार फिर वो बड़े प्यार से उसे उसके चेहरे पर फैला देती।


फिर दिया ने अचानक , एक साथ तीन ऊँगली जिया के मुंह में ठेल दी।

बिचारी जिया , गों गों करती रही लेकिन दिया कहाँ आसानी से छोड़ने वाली थी और साथ में गालियाँ ,

" छिनार इससे मोटे मोटे लंड तेरे इस मुंह में जाएंगे , कर ले प्रैक्टिस "


गुड्डी ने सोचा को हटाने का एक ही तरीका है , वो खुद मोर्चा सम्हाल ले।

और उसने वही किया।

"दिया जरा अपनी इस ननद का मुंह तो ठीक से चोदने दे न ,


और गुड्डी अब जिया के मुंह के ऊपर चढ़ गयी और , गुड्डी की चूत सीधे जिया के खुले मुंह पे।

और वो हलके हलके जिया की कच्ची अमिया रगड़ रही थी और बोल रही थी


साली , चूस ठीक से , खोल अपना मुंह।

दिया ये देख देख के बेचैन हो रही थी और थोड़ी देर में उसने गुड्डी की जगह ले ली।


और फिर तूफान मचा , किंक की हर सीमा टूट गयी।

दिया ने थोड़ी देर में में अपनी कमर उठायी और गांड का छेद सीधे जिया के मुंह पे।


और अबकी गुड्डी ने हेल्प की , जिया का मुंह खोलवाकर और दिया की गांड को सेंटर कर के।


"चाट गांड चट्टो चाट। जोर जोर से चाट। प्रैकिट्स कर ले " दिया जोर जोर से अपनी गांड रगड़ रही थी ,


और थोड़ी देर में जिया ने खुद चाटना शुरू कर दिया।

तब तक एक फोन बजा , मेसेज का.


जिया का मोबाइल था।

दिया उसके ऊपर से उठ गयी और जिया को मोबाइल मुस्कराते हुए उठाकर दे दिया।


और जब जिया ने मेसेज खोला तो उसकी आँखे फटी रह गयी।


एम एम एस




तब तक एक फोन बजा , मेसेज का.


जिया का मोबाइल था।

दिया उसके ऊपर से उठ गयी और जिया को मोबाइल मुस्कराते हुए उठाकर दे दिया।


और जब जिया ने मेसेज खोला तो उसकी आँखे फटी रह गयी।

एक जानदार शानदार एम एम एस , पूरे तीन मिनट का।

पहली सीन , जिया गुड्डी की जाँघों के बीच , उसकी चूत चटाई कर रही थी , एकदम पक्की चूत चटोरन की तरह।


कहने की बात नहीं , गुड्डी की चूत और जिया के फेस दोनों क्लोज अप में थे।
कैसे जिया के होंठ गुड्डी के चूत के पपोटों पे रगड़ रहे थे , कैसे उसकी जीभ , गुड्डी की क्लिट सहला रही थी , सब कुछ।

और फिर जिया गुड्डी के ऊपर चढ़ी हुयी अपनी चूत चटवा रही थी , उसमें जिया की पूरी देह , और फिर जो जिया गालियां दे रही थी , वो सब

और नीचे एक कैप्शन , जिया को लंड क्यों नहीं पसंद है ,

क्योंकि जिया लेस्बियन है , उसे सिर्फ चूत पसंद है।

और उसके बाद दिया का उसके ऊपर स्पिट करता हुआ ,

जिया फोन बंद करती , उसके पहले एक और एम एम एस , पहले से भी हॉट


और अबकी दिया ने जीया का मोबाइल उसके हाथ से ले लिया।

और रंजी , गुड्डी को दिखाती हंस के बोली , देख न क्या मस्त एम एम एस है , सुबह तक तो जिया एकदम यार पॉपुलर लेस्ब हो जायेगी , एक से एक भोंसड़ी वालों के पास से ऑफर आएंगे , चल मेरी चूत चूस।


दिया ने जिया से पुछा , हे बोल किस किस के पास भेजूं , तेरी सती सावित्री बहनजी मार्का सहेलियों के पास , या तेरे घरवालों के पास ,

जिया ने दिया के हाथ से मोबाइल छीनने की कोशिश की , लेकिन दिया के आगे कौन जीत सकता है।

और फिर यहाँ तो तीन तीन थीं , मोबाइल गुड्डी के हाथ में पहुँच गया तो गुड्डी ने , एक बार फिर एम एम एस चला के जिया को दूर से दिखाया और कहा ,

" सुन दिया , यार इसको उसको भेजने के चक्कर में कहाँ पड़ती हो , सेंड टू आल कर देते हैं , सब लोग अपनी प्यारी सीधी साधी जिया का जलवा देख लेंगे।

जिया पूरी ताकत से गुड्डी के हाथ से मोबाइल छीनने के लिए पिल पड़ी और जैसे ही वो आलमोस्ट कामयाब हो गयी , गुड्डी ने दूर खड़ी दिया के पास मोबाइल उछाल दिया।


दिया ने न सिर्फ मोबाइल कैच कर लिया , बल्कि जिया को दिखाते हुए मुस्करा के , तीन बार सेंड बटन दबा दिया।

अब बिचारी जिया की हालत ख़राब थी।

इस शैतान की चरखी दिया ने न जाने किसको किसको भेजा होगा ,

ऊपर से रंजी ने और आग लगायी , " यार ये एम एम एस तेरे अपने मोबाइल से गया है। तो कोई ट्रेस भी करेगा तो तेरे मोबाइल का नंबर ही दिखेगा। बस सब यही सोचेंगे , तूने सेल्फी बनाये है और खुद भेजे हैं "


बात रंजी की सेंट परसेंट सही थी।

जिया अब दिया के हाथ जोड़ रही थी , प्लीज किसके पास भेजे हैं बताओ न।

थोड़ी देर तंग करने के बाद दिया ने दिखा दिया , जो तीन उसने सेंड किये थे वो खुद दिया का , और गुड्डी , रंजी का मोबाइल था।

" अरे यार ,तुम्हे चिढ़ा रहे थे , चल डिलीट कर देती हूँ " मुस्करा के रंजी बोली और दिया के हाथ से जिया का मोबाइल ले के उसने डिलीट कर दिया और जिया को फोन वापस कर दिया।


"यार रंजी ने तेरा इतना भला किया , इस ख़ुशी के मौके पे कुछ मीठा हो जाए " गुड्डी बोली।

" एकदम ,… " जिया को धक्का देके फिर से पलंग पे लिटाती , दिया बोली और जोड़ा , " जिया की रस मलाई से मीठा कुछ नहीं हो सकता , चल रंजी साल्ली , तूही बची है करले चूत रस पान। "

"लेकिन नो फोटो सोटो " रंजी बोली।

एकदम दिया और गुड्डी दोनों ने प्रॉमिस किया ,और जिया के हाथ पैर उन दोनों के कब्जे में थे।


रंजी ने चूत चाटना शुरू कर दिया , लेकिन वो चूत चाटने के साथ अपनी ऊँगली भी इस्तेमाल कर रही थी।


जिया के हाथ पैर गुड्डी और दिया ने कस के दबोच रखे थे ,

लेकिन इसकी कोई ख़ास जरूरत नहीं थी।

थोड़ी देर में ही जिया खुद चूतड़ उछालने लगी , सिसकने लगी।

गुड्डी का गेस सही था। वो पक्की सबमिसिव थी और किंक उसे अच्छा लगता था , बस थोड़ी जबरदस्ती की जरुरत थी और वो और दिया ये काम कर रही थीं।


रंजी चूत चाटने , चूसने के साथ एक काम और कर रही थी। जिया का चूत एक्सप्लोरेशन।

जिया की चूत जम के पानी छोड़ रही थी और उस गीली चूत में रंजी , अपनी सबसे पतली उंगली घुसाने की कोशिश कर रही थी , लेकिन बहुत जोर लगाने पर भी उस गीली पनियाई चूत में ऊँगली नहीं घुस पा रही रही थी। पहले उसने घुमा घुमा के घुसेड़ने की कोशिश की लेकिन बहुत मुश्किल से थोड़ा सा घुस पाया , फिर उसने पूरी ताकत से ठेला , तो भी बहुत मुश्किल से पांच मिनट में एक पोर ही घुस पाया।


अब ये बात साफ थी की जिया थी , पूरी बहन जी। एकदम कोरी। कैंडलिंग तो छोड़िये , किसी होली में उसकी भाभी ने भी ऊँगली नही की थी , इतनी टाइट।

झिल्ली इंटैक्ट थी , और जो उसकी झिल्ली फाड़ेगा , जबरदस्त मेंहनत करनी पड़ेगी उसे। और खून खच्चर भी बहुत होगा।

और उसके बाद रंजी ने वो चूत चटाई शुरू की ,

चूत चटोरी तो वो पहले की थी , लेकिन पिछले २४ घंटों में गुड्डी ने जो उसकी कोचिंग ली थी , थ्योरी की भी और प्रैक्टिस करवा के भी , अब रंजी हर ओर से पक्की होगयी थी , चाटने में, तड़पाने में और झाड़ने के किनारे तक ले जाके , रोक देने में


और आज जिया के साथ वो यही कर रही थी।

गुड्डी और दिया दोनों दूर चली गयी थी , कंप्यूटर पे कुछ कर रही थीं।

लेकिन जिया आराम से चूत चटवा रही थी ,तड़प रही थी , सिसक रही और अंत में हार कर रंजी से विनती कर रही थी ,

प्लीज रंजी , प्लीज मेरी अच्छी सहेली झाड़ दो न , प्लीज और मत तड़पाओ ,

और रंजी उसकी क्लिट को जीभ से कभी जोर से फ्लिक कर के , कभी हलके से बाइट कर के हट जाती।

" साल्ली , तेरे हाथ पैर जोड़ रही हूँ , और इतना नखड़ा कर रही है , जोर से चूस के झाड़ दे न यार मेरी " झुंझला के जिया बोलती।

" अरे मेरी बिन्नो , अगर इतना चूत में आग लगी है , तो किसी मोटे लंड से चुदवा ले ना। तेरी ये हरामी चूत भी झड़ जायेगी और बिचारे लंड का भी भला हो जाएगा " रंजी आँख नचा कर उसे चिढ़ाती।

" अरे मेरी नानी यहाँ कहाँ लंड आएगा। मिलेगा तो बिना चुदवाये छोडूंगी नहीं , क्या तू सोचती है खाली तुम सालियो के फुद्दी में खुजली मचती है। लेकिन अभी तो तुम ही हो न , बस एक बार , ....' जिया गुस्से में बोलती और खुद रंजी का सर खिंच कर अपनी जाँघों के बीच में डाल लिया।

रंजी फिर जोर जोर से चूसने लगी और सबको सूना के बोला ,

" ये देख जिया क्या मांग रही है ,मोटा और कड़ा लंड। "


जिया मांगे , मोटा और सख्त







" अरे मेरी नानी यहाँ कहाँ लंड आएगा। मिलेगा तो बिना चुदवाये छोडूंगी नहीं , क्या तू सोचती है खाली तुम सालियो के फुद्दी में खुजली मचती है। लेकिन अभी तो तुम ही हो न , बस एक बार , ....' जिया गुस्से में बोलती और खुद रंजी का सर खिंच कर अपनी जाँघों के बीच में डाल लिया।

रंजी फिर जोर जोर से चूसने लगी और सबको सूना के बोला ,

" ये देख जिया क्या मांग रही है ,मोटा और कड़ा लंड। "

गुड्डी और दिया दोनों जिया की ओर देखने लगी।

"हाँ यार , चाहिए मुझे इसमें कौन सी बड़ी बात है। " जिया उन दोनों से बोली।

" क्या चाहिए साफ साफ बोल न , मैं नहीं समझी " दिया मुस्कराते बोली। चाटने


रंजी फुसफुसाते बोली , " बोल दे , जिया। तो अबकी मैं तुझे झाड़ दूंगी। कम आन , "

' लंड , और क्या मुझे लंड चाहिए मोटा और मस्त " जिया मुस्करा के बोली , और रंजी ने चूत चाटने की रफ्तार बढ़ा दी।

लेकिन अबकी जब जिया झड़ने के कगार पर पहुंची तो टीवी पर चल रही एक फ़िल्म की आवाज ने उन्हें रोक दिया।


जिया की ही फ़िल्म थी।

गुड्डी और दिया भी अब जिया के पास आ गयी थीं.

धांसू पिकचर थी।

पहले शॉट में जिया थी , एकदम सीधी साधी , ढीले ढाले सूती सलवार सूट में , जैसे खादी भंडार से निकली हो।

स्कूल के कई शाट , सब में एकदम बहनजी मार्का , सारी लड़कियों से अलग

फिर हर बात पे झिडकती मना करती मुझे ये नहीं पसंद वो नहीं पसंद , और एक लड़की ने कोला ऑफर किया तो उस पर बिफरती

और उस के बाद 'कट ' और बाइक ग्राउंड से जिया की आवाज ' लंड , और क्या मुझे लंड चाहिए मोटा और मस्त "

और फिर टाइटिल , जिया रानी की सच्ची कहानी

इसके बाद क्या नहीं था ,

गुड्डी और दिया , जिया की चूंची जोर जोर से चूस रही थी।

जिया खुद अपने आप अपने निपल मरोड़ रही थी सिसक रही थी।

एक से एक हाट लेस्बियन सीन्स ,

दिया ने जिया को कस के दबोच रखा था , जिससे वो हर सीन पूरी तरह देख ले।

करीब पौन घंटे की पिक्चर थी।



दिया , जिया के मोबाइल में कुछ ढूंढ रही थी। और जब मिल गया तो उसने जिया से पूछा ,

" हे ये मुन्ना कौन है , तेरे मोहल्ले का केबल वाला न , जो सब लड़कियों को लाइन मारता है "

" हाँ वही , उसी का नंबर है ये क्यों।

दिया उसे रिंग करने लगी तो जिया ने घबड़ा के पुछा ,

" हे इत्ती रात को उसे क्यों रिंग कर रही हो "

" क्यों , तेरा यार है न इसलिए। अरे रात में तेरा नंबर देख के खुश हो जाएगा वो। बस उससे पूछना है की , उसे अपने मोहल्ले की छमक छल्लो की ब्ल्यू चलानी है क्या। ये सी दी उसे सुबह घर जाते हुए दे दूंगी। " दिया ने मुस्करा के कहा।


घबड़ा के जिया की हालत खराब हो गयी।

रंजी ने दिया के हाथ से मोबाइल छीन लिया।

दिया ने सिर्फ एक बार रिंग दिया था लेकिन केबिल वाले का फोन उधर से आ गया।

" अरे जानू , इतनी रात को फोन क्या बात है ,कोई हॉट फ़िल्म देखने का मन है तो लगा दूँ '

रंजी ने स्पीकर फोन आन कर के जिया को फोन वापस कर दिया ,

" नहीं गलती से दब गया था ' जिया सहम के बोली।

" अरे जानू कभी हमको भी तो गलती से दबाने का मौका दे दो। नयी सी डी आई है , कल आना। "

" आउंगी " कह के जिया ने फोन काट दिया।


गुड्डी दिया को समझाने में जुट गयी।

सामने टीवी पे फ़िल्म अभी भी चल रही थी।

दिया मानने को तैयार नहीं , " एम एम एस पे मान गयी लेकिन इस फ़िल्म को तो चलना है , और सबसे पहले इस साली के मोहल्ले में , मेरे भाई की इतनी बेइज्जती की , वो तो रंजी बीच में आ गयी वरना , इस बात पे कोई कम्प्रोमाइज नहीं हो सकता। '


और कमरे के दूसरे कोने में रंजी जिया को पटा रही थी। जिया परेशान , हैरान।  


जिया और ,… भैया










और कमरे के दूसरे कोने में रंजी जिया को पटा रही थी। जिया परेशान , हैरान।

" यार तू कुछ कर , मुझे इस परेशानी से बचा। मैं तेरे हाथ जोड़ती हूँ , प्लीज। " जिया गिड़गिड़ा रही थी।

" यार तू दिया को जानती है न , वो अपने पे आ जाय न तो ,… बोल क्या करूँ मेरे तो कुछ समझ में नहीं आरहा , फिर गलती तो तेरी ही है ,जिस तरह तू उस के भाई से पेश आई। पूरा शहर कांपता है उससे " रंजी ने हाथ खड़े कर दिए।


जिया रुआंसी हो गयी और बोली , " यार बात तो तू ठीक ही कहती है , उस बिचारे ने तो सिर्फ कंधे पे हाथ रखा था और यहाँ तो खुलेआम लड़के जिस की देखो उस की चूंची दबाते रहते है , कोई चूं भी नहीं करती , बल्कि मजे लेती हैं। लेकिन गलती तो हो गयी , अब क्या करूँ। प्लीज उसके भाई से बोलो न मुझे माफ। सजा देगा कबूल है लेकिन सी दी नहीं प्लीज। "


" यार पहले तो दिया को पटाना पड़ेगा न वो साल्ली आग हो रही है . चल कुछ सोचती हूँ। "

और रंजी सोचने लगी।

टीवी पर फ़िल्म तो खत्म हो गयी थी लेकिन सी डी दिया के हाथ में थी। गुड्डी कुछ दिया को समझा रही थी , लेकिन वो ना ना में सर हिला रही थी।

अचानक रंजी को कुछ सुझा और उसने जाके जिया को चिपका लिया।

" सुन तू बहुत चुदवासी थी , न झड़ना चाहती थी न " जिया के गाल प्यार से चूमते रंजी बोली।

" अरे यार अभी अपनी फटी पड़ रही है और तुझे मजाक सूझ रहा है। ' जिया उदास हो के बोली।

" अरे यार वही तो , तू फटवा ले न , आखिर कभी न कभी कोई तो फाड़ेगा। बस इस मुसीबत में ये चेक कैश करा ले ' रंजी ने उसे समझाया।

" साफ साफ बोल यार तेरी हर बात मान लुंगी मैं " . जिया रंजी से बोली।

" अरे यार दिया क्यों गुस्सा है , क्योंकि उसका भाई गुस्सा है। बस तू उसके भाई को पटा ले। तू फड़वा ले उससे तो एक तो तेरी बुलबुल की चुदवास खत्म हो जायेगी और दूसरे एक बार जब तेरा नाम उसके साथ जुड़ जाएगा तो वो खुद ही तेरी सीडी , एम एम एस कुछ भी नहीं चलने देगा। "

" बात में तेरे दम है , लेकिन उसका भाई नहीं मानेगा। उसे कौन से लड़कियों की कमी है। बहुत गुस्सा है वो , मैं ही पागल थी , कुछ करो प्लीज " जिया उदास हो के बोली।


" यार तू तो हाँ कर न " रंजी ने कहा।

' तू जो भी बोलेगी मुझे मंजूर " जिया ने साफ साफ कह दिया। ' बस इस मुसीबत से निकाल। '

संधि प्रस्ताव ले के , रंजी दिया के पास गयी और एक बार फिर गुड्डी , रंजी मिल के दिया को समझाने लगी।

दिया न न में सर हिलाती रही ,

जिया का दिल डूबता रहा।

अंत में तय ये हुआ दिया , अपने भाई को मनाएगी की वो स्काइप पे जिया से बात कर ले और उसके बाद जिया जिम्मेदारी है की वो कैसे उसके भाई को मनाती है। अगर उसका भाई मान गया तो ठीक , वरना फ़िल्म की सीडी कल बंट जायेगी और दिया खुद अपने हाथ से उसे मुन्ना को दे के आएगी।


उसके बाद दो खेमों में काम बंट गया। दिया , अपने भाई को समझाती मनाती रही की वो एक बार बस जिया को एक चांस दे दे।


गुड्डी , रंजी जिया को सिखाती पढ़ाती रहीं की वो कैसे जिया के भाई को पटा सकती है।

अंत में बाजी रंजी ने पलटी।

दिया कमरे के दूसरे कोने में अपने भाई को मोबाइल पे दस मिनट से मना रही थी।

रंजी ने दिया के हाथ से फोन ले के फुसफुसाते हुए उसके भाई से कहा ,

" भैया मान जा यार , मैंने खुद चेक किया है। एकदम कसा माल है , ऊँगली तक नहीं जा पा रही थी। झिल्ली इंटैकट , पैकिंग दुरुस्त। आज कल ऐसी लड़की मिलना मुश्किल है। मैंने बोला था न ऐसा जुगाड़ लगाउंगी , खुद अपने पैरों पे चल के आएगी तुम्हारे पास। तो मैंने अपना वायदा पूरा किया। और तुम भी अपना वायदा पूरा करना। जब कमरे से निकले तो पूरे शहर को मालूम हो की क्सिके नीचे से हो के आ रही है। "

वो मान गया।

और रंजी ने वहीँ से खुशखबरी सुनाई।

जिया के चेहरे पे ख़ुशी नाच गयी और उसने बगल में बैठी गुड्डी को बाहों में बांध के चूम लिया।


लेकिन दिया ने शर्त भीअनाउंस कर दी।

पन्दरह मिनट बाद उसका भाई स्काइप पे आएगा। जिया के पास सात मिनट का टाइम होगा उसे मनाने का। अगर वो सात मिनट में नहीं माना या उसने कनेक्शनकाटा तो डील खलाश।


" हमारी सहेली हारने वाली नहीं " रंजी और गुड्डी एक साथ बोलीं और जिया को ट्रेन करने में लग गयीं।

साथ में उसका हॉट मेकअप और ड्रेस , रंजी अपनी शोल्डर लेस हालटर टॉप ला के उसे पहना दी और साथ में बस एक थांग।

पन्द्रह मिनट बाद रंजी के लैपटॉप पे स्काइप आन था , और दिया का भाई प्रकट हुआ।
 






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