Friday, June 6, 2014

FUN-MAZA-MASTI मेरी भाभी लाजबाव--1

FUN-MAZA-MASTI

  मेरी भाभी लाजबाव--1
 मेरी भाभी बहुत ही ख़ूबसूरत व सेक्सी है। उसका नाम कोमल है। वह एक पंजाबी
है और उसकी उम्र २४ साल है। उसकी फ़िगर तो मस्त है ही साथ में गाँड भी
लाजबाव है। उसके मम्मे बिल्कुल बड़े-बड़े और भरे-भरे हैं और वे पहाड़ की
तरह कसे और खड़े रहते हैं। एक तरह से अब वह मेरी पत्नी है। यह घटना सात
महीने पहले घटी थी।

मेरे भैया काम पर हमेशा लम्बे समय के लिए जाते थे, क्योंकि वह एक बड़ी
कम्पनी के सेल्स मैनेजर थे, जिसकी वजह से उन्हें काफी यात्रा करनी पड़ती
थी। मैं भाभी के साथ बहुत सारा समय अकेले बिताता था। पहले तो मैंने उसे
कभी भी सेक्स के नज़रिये से नहीं देखा।

एक बार मेरे दोस्त रोहित, हमारे एक अन्य दोस्त मनीष से कह रहा था, "कोमल
ज़बरदस्त माल है यार। क्या गाँड है उसकी। उसका पति साला छक्का है।" मनीष
ने कहा, "उसे तो देखते ही मेरा लंड खड़ा हो जाता है। समझ में नहीं आता
सुनील ख़ुद को कैसे रोक पाता है। ऐसी गाँड के लिए तो मैं उसकी पाद भी
सूँघने को तैयार हूँ।"

उनकी ये अश्लील बातें सुनकर मैं थोड़ा बौखला भी गया, और थोड़ा उत्तेजित
भी हो गया। हाँलाकि मैं इस बात से सहमत था कि कोमल काफी सेक्सी औरत है।
उस दिन के बाद से मैं उसे चोदने के नज़रिये से देखना लगा।

जब भी वह झाड़ू लगा रही होती तो मैं साड़ी के अन्दर उसकी मस्त गाँड देखता
रहता और उसके साथ चुम्बन करते हुए नहाने की कल्पना कर रहा होता। जब वह
नीचे झुकती तो, मुझे उसकी चूचियों और उसके बीच की घाटी को भी देखने का
मौक़ा मिलता था। वे शानदार थे, और जब वह झाड़ू लगाती, या फर्श पर से कुछ
चीजें जमा कर रही होती तो वे हिलते और उछलते थे। ऐसा करते हुए जब वह मुझे
देखती तो मैं झेंप जाता...

धीरे-धीरे हम एक दूसरे से खुलने लगे। वह मेरी गर्लफ्रेण्ड वगैरह के बारे
में पूछती। फिर मैं उसे सेक्सी चुटकुलों वाले एस. एम. एस. सुनाता तो वह
दिल खोल कर हँसती। मैंने भी उससे कहा कि मुझे कुछ अश्लील चुटकुले सुनाओ,
तो उसने भी थोड़े चुटकुले सुनाए।

मैं अपनी भाभी के प्रति आकर्षित होता जा रहा था, उसके प्रति मेरी दीवानगी
बढ़ती जा रही थी और मैं उसके नाम से रात को मुट्ठ भी मारता था। पर वह अलग
कमरे में सोती थी।

एक दिन ऐसा हुआ कि मैं एक दोपहर उसके साथ लिविंग-रूम में बैठकर टीवी देख
रहा था। भैया शहर से बाहर गए हुए थे। अचानक एक सेक्सी और ज़ोरदार पादने
की आवाज़ ने शांति भंग कर दी। इसमें एक धमाके जैसी आवाज थी और गैस खत्म
होने के साथ ही आवाज़ भी धीरे-धीरे बन्द होती गई।

जैसे ही मैंने उसकी ओर देखा, वह शरमा गई। उसके बाद एक अजीब सी बू आई। पर
मैं उत्तेजित हो रहा था क्योंकि किसी ख़ूबसूरत औरत के हवा छोड़ने का
अनुभव असामान्य बात थी।

मैंने मज़ाक में कहा "आपकी तो पाद भी सेक्सी है"

उसने मुँह बनाकर कहा, "तो फिर सूँघो।"

वह मुझसे नज़रें नहीं मिला पा रही थी, फिर मैंने बात को सँभालने के लिए
उससे कहा, "कोई बात नहीं। क्यों तुम भैया के सामने कभी नहीं पादती?"

उसने कहा, "वह घर पर रहते ही कब हैं!"

मैंने मुँह बनाते हुए कहा, "भाभी, जब भी आपको भैया की ज़रूरत होती है, वह
घर पर ही नहीं होते हैं, क्या आपको बुरा नहीं लगता?"

वह मुस्कुराई और कहा, "तुम हो ना यहाँ पर, फिर मुझे क्या समस्या है?"

मैंने उत्तर दिया, "या तो अशोक भैया चूतिया है, या फिर उसके पास लण्ड ही
नहीं हैं"

वह ज़ोरों से हँस पड़ी फिर गम्भीर चेहरा बना लिया, "उसके पास वो चीज़ तो
ज़रूर है, पर उनके पास इसे इस्तेमाल करने का समय नहीं है।"

मुझे उसके मज़ाक का तरीका पसन्द आया, मैंने उससे कहा, "तुम्हारे जैसी
सुन्दर बीवी अगर किसी की हो तो वह तो घर छोड़कर ही न निकले। उसकी जगह अगर
मैं होता तो फिर तो मैं तुम्हें छोड़कर कहीं नहीं जाता। मेरा मतलब काम तो
महत्वपूर्ण है, पर फिर भी मैं तु्म्हारे साथ समय बिताता।"

उसने प्यार भरी नज़रों से मेरी ओर देखा और कहा, "काश! तुम्हारे भैया भी
तुम्हारी तरह होते।"

मैं उसके पास गया, उसके बालों और चेहरे को सहलाया और पूछा, "सप्ताह में
कितनी बार भैया तुम्हारे साथ सेक्स करते हैं?"

उसने उत्तर दिया, "पता नहीं। कभी एक बार तो कभी वह भी नहीं।"

मैंने अपना हाथ उसकी गर्दन से लेकर कंधे तक फिराया। मैंने कहा, "मैं तो
तुम्हे बेइन्तहा प्यार करता।"

फिर मैंने उसकी जाँघ को प्यार से सहलाया। उसकी जाँघें काफी बड़ी और
मुलायम थी, मेरा लंड खड़ा होने लगा था। मुझे पता था कि मैं इसे चोदना
चाहता हूँ, और वह भी सेक्सी मूड में थी। उसने मुझे नहीं रोका। मुझे पता
था कि उसकी शादीशुदा चूत में किसी बड़े लंड के लिए खुजली थी।

मैंने साड़ी के ऊपर से ही उसकी दाहिनी चूची को प्यार से दबाया, जैसे ही
मैंने दबाया, उसकी आँखें चौड़ी हो गईं। उसके साड़ी की पल्लू गिर गई और
मैंने देखा कि उसकी बड़ी-बड़ी चूचियाँ उसकी कसी हुई ब्लाऊज़ से बाहर आने
के लिए बेताब़ हो रहीं हैं। मेरी आँखों की तृप्ति मिल रही थी, और मैं
उसकी चूचियों को भूखी नज़रों से देख रहा था।

मैंने अपनी पैन्ट की ज़िप खोल दी, और उसने मेरे अन्डरवियर के अन्दर ही
मेरा फन खड़ा किया हुआ नाग देखा जिसका सिर मेरी नीली अन्डरिवयर से बाहर आ
रहा था। उसने देखते हुए कहा, "तेरा तो बहुत बड़ा लग रहा है।"

उसके कहते ही मैंने अपनी शर्ट, पैंट, और अन्डरवियार उतार दी और मैंने उसे
अपना हथियार दिखाया। वह उसे ऐसे देख रही थी जैसे कुछ मुआयना कर रही हो।
उसने मेरे लंड पर मुट्ठ मारी और प्यार से बोली, "यह वाकई में बहुत बड़ा
है - तेरा केला तो बहुत मोटा है रे।"

मैंने पूछा, "तेरी चूचियाँ भी बहुत स्वादिष्ट लग रहीं हैं, कोमल"

मैं उसके पास गया और उसके होठों पर चुम्बन लेना शुरू कर दिया। मैं उसकी
चूचियाँ ब्लाऊज़ के ऊपर से ही दबा रहा था, और हम साथ ही चुम्बन में भी
लिप्त थे।

तभी वह थोड़ा किनारे हटी, और अपनी ब्लाऊज उतार दी, और मैंने उसकी सफेद
ब्रा देखी। उसकी चूचियों के बीच की घाटी मानों ज़न्नत थी, और ब्रा को
फाड़े दे रही थी। मैंने उसकी ब्रा की हुक भी खोल दी, और उसकी चूचियाँ उछल
कर बाहर आ गई, जैसे उन्हें मेरा ही इन्तज़ार हो। उसकी चूचियाँ वाकई में
बहुत सुन्दर थी, जैसे दो शानदार आम हों।

मैंने उन नरम चूचियों को दबाना शुरू किया, और साथ ही मैं अपनी जीभ उसकी
गर्दन पर फिरा रहा था। उसने अपनी आँखें बन्द कर लीं और हल्की आहें भरने
लगी। फिर मैंने उसे बिस्तर पर लिटा दिया और उसकी दाईं चूची को दबाने लगा,
और बाईं चूची को चूसने लगा। फिर मैंने बारी-बारी से बाईं और दाईं चूचियाँ
बदल-बदल कर दबाईं और चूसीं।

कोमल आहें भर रही थी, "हम्म्म्म्म.... ऊम्म्म्म्म।" फिर मैंने उसकी बाईं
चूची दबाई और दाहिनी को हल्के से टटोलते हुए दबाया। वह अपना हाथ मेरे
लंड पर रखकर उसकी कठोरता का आभास कर रही थी। जैसे ही उसने यह हरक़त की,
मैंने उसकी दाईं चूची को पूरे ज़ोरों से चूसना शुरू कर दिया, मानों उसमें
से दूध निकाल कर ही छोड़ूँगा। मेरे उत्तेजित होकर चूसने से वह चिल्ला
पड़ी।

मैं उसकी चूचियाँ करीब 15 मिनटों तक दबाता और चूसता रहा। जब मैंने
चूचियों को छोड़ा तो वह मेरे थूक से चमक रहीं थीं। उनकी घुँडियाँ मेरे
मुख-प्रहार से सूज गईं थीं।

वह मुस्कुरा कर बोली, "ये मेरी चूचियाँ हैं, आटा नहीं... जो गूँथते जा
रहे हो।

मेरा चेहरा लटक गया। वह उठी, और मेरा चेहरा अपने हाथों में लिया और कहा,
"अरे क्या हुआ.." मैंने कहा, "हो सकता है, मुझे नहीं पता कि तुम्हें कैसे
खुश करूँ।" उसने उत्तर दिया, "अभी तक किसी ने मेरी चूचियों को इस तरह
चूसा और दबाया नहीं... ले और मज़ा ले इनके साथ" उसने फिर से अपनी चूचियाँ
मुझे पेश कीं।

मैंने उन्हें फिर से सहलाना शुरू कर दिया और बारी-बारी से चूसने लगा।

वह उत्तेजना में सिसकारियाँ लेते हुए बोली, "उईईईईईई, माँ... और दबा ना।"
मैं अभी तक अपना लंड उसके क़रीब नहीं ले गया था, ताकि उसे मैं सारा मज़ा
दे सकूँ। फिर मैंने उसके हाथों को ऊपर उठा दिया, और उसकी काँख की गंध
लेने लगा। मैंने उसकी चूचियों को दबाते हुए उसकी काँखों को चाटना शुरू कर
दिया। उस वक्त उसकी चूचियाँ ऊपर उठी हुईं थीं। मैं औरतों के शरीर के हर
भाग से उनको मज़ा देना जानता हूँ।

फिर मैं उसके ऊपर आ गया और उसके चेहरे और गर्दन को चाटने लगा। वह मेरे
होंठ चबाने के प्रयास में दिखी। जैसे ही मैंने उसकी चूचियों को बड़े ही
मादक अंदाज में सहलाया, उसने मेरे होठों को एक लम्बे चुम्बन में कैद कर
लिया। हम एक दूसरे को होंठों को चबाते हुए अपने लार का आदान-प्रदान भी कर
रहे थे...

उसके बाद मैं थोड़ा नीचे जाते हुए, उसके पेट पर चूमने लगा, फिर उसकी नाभि
में अपनी जीभ डाल दी। उसकी नाभि भी बहुत सुन्दर थी, उसकी गोलाई अच्छी थी,
और सेक्सी लग रही थी। मैंने उसकी नाभि को जी भरकर चाटा।

फिर मैंने उसकी पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया। कोमल ने अपनी गाँड थोड़ी ऊपर
उठाई और पेटकोट सरका दिया। उसकी जाँघें किसी को भी मदहोश बनाने के लिए
काफी थीं, गोरी-गोरी और चमकदार.. कोमल ने अपने बालों से क्लिप निकाल दी
थी, और वह और भी काफी सेक्सी लग रही थी खुले बालों में।

मैंने उसकी ब्लैक पैंटी भी नीचे खींच दी और उसकी चूत के दर्शन किए।

कोमल ने मुझे उसकी चूत को ध्यान से देखते हुए पाया तो पूछा, "बहुत बाल
हैं ना।"











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