FUN-MAZA-MASTI
भैया जब
परिक्षा के बीच में आ गए उस समय मई का महीना था भाभी ,मुन्नी और मेरी
परीक्षाये चालु होने वाली थी भैया के अचानक आ जाने से भाभी खुस नहीं हुई
बल्कि नाराज हो रही थी भैया के ऊपर सुबह करीब 10 बजे दोनों में वाद विवाद
होने लगा भाभी कह रही थी कि मेरा पेपर बिगड़ा तो टीक नहीं होगा तब भैया ने
समझाया कि एक ही पेपर तो फँस रहा है उसके बाद तो मैं चला ही जाउगा तो मैं
भी भाभी को समझाया कि भाभी नाराज नहीं पड़िये आप दादा इतनी दूर से आये है
और आप है कि नाराज हो रही है तो दादा मेरे ऊपर खुस हो गए बोले ये टीक तो
कहता है तब दोनों के बीच सुलह हुई, भाभी ने दिखावटी गुस्सा मेरे ऊपर किया
मैं समझ गया जब भैया बाथरूम गए तो भाभी मेरे पास आई कान में धीरे से कहा
कि नाराज तो नही हो तो मैंने बोला कि आपके ऊपर कभी नाराज नहीं हो सकता हु
तो भाभी कुछ नहीं बोली और इधर -उधर देख कर जब मुन्नी और दादा पास नहीं दिखे
तो मुझे किस कर लिया | दोपहर को सभी ने खाना खाया और दादा भाभी आगे के
कमरे में सो गए कूलर चलाकर बीच का दरवाजा लगाकर मैं और
मुन्नी बीच के कमरे में आपने -सामने चारपाई में लेट गए एक दूसरे को देखते
हुए , कुछ देर बाद दादा -भाभी के कमरे से खुसर -पुसर कि आबाजी आने लगी तो
मैं समझ गया कि दादा कई महीनो बाद भाभी से मिले है इस कारण दिन में ही
चुदाई का प्रोग्राम बना लिया तो मैं दरवाजे के बीच में गैप से झाकने लगा तो
देखा कि भाभी और दादा बिस्तर पर नंगे पड़े हुए थे दादा भाभी को किस कर रहे
थे मुन्नी मेरी ये हरकते देख रही थी मुन्नी ने धीरे से सी सी कि आवाज दिया
तो मैंने मुन्नी कि तरफ देखा तो हाथ से इसारा करके पूछती है कि क्या देख
रहे है तो मैंने मुन्नी को इसारे से बताया तो कुछ देर बाद मुन्नी भी पास
गई और दरबाजे के नीचे गैप से ओ भी झाकने लगी और मैं ऊपर के गैप से झाकने
लगा और हम दोनों ने [मुन्नी और मैं] 10 मिनट तक पूरी लाइव चुदाई देखी जब
दादा भाभी कपडे पहनने लगे तो हम दोनों अपने अपने बिस्तर पर लेट गए और गहरी
नीद में सोने का नाटक करने लगे दादा भाभी दबे पाँव निकलकर गए और पेसाब
करके वापस आ गए और दरवाजा बन्द कर लिया तब मैंने आँखे खोली तो देखा कि
मुन्नी मेरी तरफ देख रही थी पर मेरे नजर पड़ते ही मुन्नी दूसरे तरफ देखने
लगी तो मैं समझ गया कि मुन्नी सरमा रही है तो मैंने कागज कि गोली
बनाया और मुन्नी कि तरफ उछाल कर मारा जो मुन्नी के गर्दन में लगी तो मुन्नी
मेरी तरफ देखी पर कुछ बोली नहीं और करवट बदल कर सो गई मैं भी कुछ देर में
सो गया करीब 5 बजे नीद खुली तो दादा भाभी के कमरे से कुछ आवाज आ रही थी तब
मैं फिर झाकने लगा तो देखा कि चुदाई आखिरी स्टेज में थी मैंने मुन्नी का
कंधा पकड़ कर झकझोर दिया तो मुन्नी हड़बड़ा कर उठी और मेरे तरफ देखने लगी तो
मैंने मुन्नी को इसारा करके बताया तो मुन्नी जल्द से उठी और झाकने लगी
दरबाजे के गैप में से भाभी के मुह से उ उ उ उ आह आह आह आह आह सी सी सी सी
उग इफ उफ़ उफ़ अ आ आ आह कि आवाजे आ रही थी दादा जोर जोर से झटके मार रहे थी
फिर दोनों चिपक कर लेट गए मैं समझ गया कि दोनों स्खलित होचुके है इस बार
भाभी को जयादा मजा आया मुझे ऐसा लगा , मैं और मुन्नी वापस अपने अपने बिस्तर
में लेट गए कुछ देर में दरबाजा खुला और भाभी निकली और फिर से दरबाजा लगा
कर बाथरूम में घुस गई और जब वापस आई तो मेरे गालो पर हाथ घुमाया जब मैंने
आँखे खोली तो कान में धीरे से बोली कि उठिए कब तक सोयेगे तो मैं आलस का
नाटक करते हुए उठा और बैठ गया तब भाभी मुन्नी के बिस्तर पर बैठ गई और बोली
कब तक सोयेगी तू , पढ़ने आई है या सोने और फिर हाथ पकड़ कर उठाया और बोली चल
उठा पढ़ाई कर तेरा पहला ही साल है कालेज का फेल हो गई तो चाचा जी पढ़ाई बंद
करवा देगे तब मुन्नी भी उठ गई और भाभी किचेन में घुस गई चाय बनाया हम सभी
ने चाय पीया तब तक 6 बज गए दादा और भाभी दोनों मार्किट चले गये अब मैं और
मुन्नी बचे कमरे में अकेले मुन्नी बोली जीजू गर्मी बहुत है मैं नहा ल तो
मैंने वोला नहा लो गंगा मैया का पानी बहुत है पटना में कोई कमी नहीं है
तोमुन्नी बाथ् रूम में घुस गई नहाने के लिए तब तक मैंने मोका देख कर
मुन्नी कि बनियान [ब्रा नहीं लड़किया बनियान पहनती है नीचे ] को छिपा दिया
जीससे मुन्नी बिना बनियान के सूट पहन ले ऐसा ही हुआ मुन्नी जब नहा कर निकली
तो मुझे आवाज दिया और बोली जीजू आप किधर है मुझे कपडे पहनना है तो मैं
बोला कि टीक है आप पाहल लो कपडे मैं बाहर चला जाता हु तो मुनि कमरे के अंदर
आई और माइन बाहर चला गया जब मुन्नी ने कपडे पहन लिया तो आवाज लगाईं तो मैं
अंदर आ गया मेरी चाल कामयाब रही मुन्नी बिना बनियान के सूट पहन रखी थी इस
कारम मुन्नी कि चुचियो कि उठी हुई निप्पल साफ़ साफ़ दिख रही थी मैं एक टक
मुन्नी कि तरफ देखने लगा तो मुन्नी मेरे तरफ सरमाते हुए देख कर बोली
''क्या देख रहे है जीजू '' तो मैंने मुन्नी से कहा '' कि आप कितनी
खूबसूरत है '' तो मुन्नी ने कहा कि '' नहीं तो मैं तो सिंपल हु '' तो मैंने
कहा कि ये तो आपको लगता है कि आप सिंपल है पर है बहुत सुन्दर तो मुन्नी
फिर से सरमा गई कुछ नहीं बोली तब मैंने फिर से तारीफ किया तो बोली कि आब भी
बहुत सुन्दर लगते है जीजू तो मैंने तपाक से बोला कि सादी करोगी तो सरमाते
हुए बोली '' ये तो मम्मी पापा जाने '' तो मैं बोला कि ''आपकी क्या इच्छा है
'' तो मुन्नी बोली कि '' आप में क्या कमी है आपसे तो कोई भी लड़की सादी
करने से मना नहीं करेगी '' मैं फिर से बोला कि '' आप करोगी क्या सादी '' तो
बोली कि '' मम्मी पापा करेगे तो '' तो मैंने बोला कि यदि ममी पापा ने मन
क्या तो मुन्नी बोली '' नहीं करुँगी मम्मी पापा का दिल नहीं दुखाओगी '' तो
मैंने बोला कि मेरे में कोई कमी नहीं है तब भी आप ऐसा कह रही हो '' तो
मुन्नी बोली '' आप बहुत सुन्दर ,सुशील है अच्छे घर से है पर मम्मी पापा के
बिना कर सकती हु आप मम्मी पापा से बात करिये ना '' तो मैंने बोला ''टीक है
'' ये बाते अभी तक खड़े खड़े हो रही थी मैं बिस्तर पर बैठ गया तो मुन्नी भी
बैठ गई अपने बेड पर साम को 7 बज रहे थे अन्धेरा होने लगा मैंने लाइट जला
दिया इतने में मुन्नी एक किताब लेने के लिए झुकी तो सूट के गले से मुन्नी
कि चुचिया दिखाई लगी लगा कि मुन्नी कि चुचियो को दबा दू पर हिम्मत नहीं
जुटा पाया मुन्नी किताब लेकर बैठ गई और कुछ पढने लगी तब मैंने बात को छेड़
दिया मुन्नी से पूछा कि जो कल भैया भाभी कर रहे थे ओ देखकर कैसा लगा तो
मुन्नी ने पहले तो कुछ नहीं कहा बाद में समरमाते हुए बोली कि दीदी कैसा
कैसा मुह बना रही थी , दीदी ऐसा क्यों कर रही तो मैंने बताया कि भाभी को
अच्छा लगा होगा तो मुन्नी ने पूछा कि आपको कैसे पता कि अच्छा लगा होगा आपने
कभी किसी के है कभी तो मैंने मुन्नी को बोला कि नहीं किया नहीं है पर
किताब में पढ़ा है कि बहुत अच्छा लगता है ऐसा करना तो मुन्नी ने पूछा कौन से
किताब में आपने पढ़ा है मुझे भी बताये ना तो मैंने एक सेक्सी मनोहर कहानिया
कि पत्रिका दिया जो छिपा कर रखा था मुन्नी उस पत्रिका को पढने लगी बड़े चाव
के साथ और मुन्नी बिना पलक झपकाए 8 बजे साम तक पढ़ती रही तब मैए मुन्नी को
टोका और बोला कि रात के 8 बज गए है रख दो भाभी आती होगी तो मुन्नी मेरी तरफ
नशीली आँखों से देखते हुए जोर से लम्बी सास लिया तो मुन्नी कि चूची ऊपर कि
और उठी और फिर नीचे आई उस समय मुन्नी कि चूची बहुत ही सेक्सी लगी मुझे फिर
मुन्नी मुस्कुराते हुए पत्रिका को रख दिया गद्दे के नीचे साम को 9 बजे के
आस पास दादा -भाभी आ गए आते ही भाभी ने कपड़ा उतारा और किचेन में घुस गई
खाना बनाया 10 बजे तक हम सभी खाना खा लिया और दादा भाभी कमरे के अंदर हो
गए दरवाजा लगा लिया और मुस्किल से 15 मिनट बाद ही कमरे से आवाज आने लगी
मैंने दरबाजे कि दरार से झाकने लगा कुछ मिनट बाद मुन्नी को इसारा किया तो ओ
भी आ गई और देखने लगी सांसे थामकर आज पहली बार भाभी दादा को चोद रही थी
भाभी दादा के ऊपर चढ़ी थी और ऊपर -नीचे होकर बार बार कूद रही थी भाभी कि
चुचिया कूद कूद कर दादा को खूब मजे दे रही थी
दादा बार
बार भाभी कि बूब्स दबाते भाभी खूब मजे से चोद रही थी ये सब नजारा मुन्नी भी
बड़े चाव से देख रही थी अब मेरे से कंट्रोल नहीं हुआ तो मैंने मुन्नी कि
दाई चूची को दबा दिया तो मुन्नी पकड़ कर झटक दिया और कड़ी हो गई तो मैंने
फिर से मुन्नी कि चूची को दबा दिया मुन्नी ने फिर से हाथ झटक दिया फिर भी
मैं नहीं माना और मुन्नी से लिपट गया और होठो को किस कर लिया और सूट में
गले के पास से अंदर हाथ दाल कर चूची को फिर से दबाये रखा कुछ देर तक और
किस भी करता रहा मुन्नी ने दो तीन बाए हाथ निकालने कि कोशिश किया पर मैंने
हाथ नहीं निकाला और हलके हलके हाथ से चुचियो को दबता रहा होठो को किस करता
रहा अब मुन्नी का बिरोध ख़त्म हो गया और धीरे से कापती हुई आवाज में बोली ''
हो गया अब छोड़िये दीदी आ जायेगी '' तब मैंने मुन्नी को छोड़ दिया और फिर से
झाकरा देखा तो दादा और भाभी कपडे पहन रही थी मैं मुन्नी को इसारा किया और
जल्दी से लेट गया बिस्तर पर एक चादर ओढ़कर करीब 7 मिनट बाद दरबाजा खुला
भाभी मेरे तरफ देखते हुए निकल गई दादा तो सामने के तरफ खुले मैदान में चले
गए थे भाभी पेसाब कर के आई और फिर से कमरे में चली गई और दरबाजा लगा लिया
और लाइट भी बंद हो गई कमरे कि मैं भी सोने का प्रयास करने लगा पर गर्मी
बहुत थी तो मैं करीब 11 बजे अपना गद्दा ,तकिया और चादर लेकर छत पर जाने
लगा सोने के लिए तो जाते जाते मुन्नी को भी इसारा किया कि चलो छत में यहाँ
बहुत गर्मी है [छत में जाने का रास्ता किचेन के पास से आगन में से है] तो
मुन्नी ने कुछ नहीं कहा तो मैं छत पर चला गया और बिस्तर पर सोने का प्रयाश
करने लगा पर मुन्नी कि खूबसूरत चेहरा और सेक्सी और मुलायम चुचिया याद आने
लगी नीद नहीं आ रही थी मैं बार बार करवट बदलता करीब 12 बजे मैं फिर से नीचे
गया तो देखा कि मुन्नी जाग रही है तो मैंने मुन्नी का हाथ पकड़ा पर उठाया
और बोला चलो छत में सो जाओ गर्मी लग रही होगी तो मुन्नी बोली कि टीक है आप
जाओ मैं आती हु करीब 10 मिनट बाद मैंने देखा कि मुन्नी भी अपना बिस्तर
लेकर पास में ही बिछा लिया मैं तो जाग रहा था पर गहरी नीद में सोने का नाटक
करने लगा मुन्नी बिना चादर ओढ़े ही लेटी थी ,चांदनी रात में मुन्नी का
खुबसुरत गोरा सा चाँद से चेहरा स्पस्ट दिख रहा था मैं मुन्नी कि तरफ बीच
बीच में आँख खोलकर देखता एक बार मैंने देखा कि मुन्नी भी मेरी तरफ देख रही
है तो मैंने मुन्नी से बोला ''मुन्नी जी नीद नहीं आ रही है क्या '' तो
मुन्नी बोली ''हां जीजू नीद गायब हो गई '' तो मैं बोला ''चलो बाते करते है
बाते करते करते नीद आ जायेगी'' तो मुन्नी ने कहा कि '' क्या बात करू '' तो
मैंने बोला '' जो आपको अच्छा लगे ''तो पहले करीब 10 मिनट तक इधर उधर कि
बाते किया मुन्नी ने फिर अचानक बोलती है '' जीजू ये दीदी आवाज क्यों निकाल
रही थी '' तो मैं बोला कि '' उन्हें बहुत मजा आ रहा था इस कारण आवाज निकाल
रही थी '' तो मुन्नी ने फिर से कहा '' सच्ची -मुच्ची इतना मजा आता है '' तो
मैंने बोला ''आता होगा '' तो मुन्नी ने फिर से कहा कि ''जीजू आपने ये मजा
लिया कभी '' तो मैंने बोला ''नहीं '' तो मुन्नी ने फिर से कहा कि ''क्यों
'' तो मैंने बोला कि ''अभी तक सादी कहा हुई '' फिर मुन्नी ने कहा कि ''
सादी के बाद ही ये मजे लेने चाहिए '' तो मैंने तपाक से कहा '' कोई जरुरी
नहीं है '' तब मुन्नी ने कहा कि '' फिर आपने क्यों नहीं लिया ये मजा '' तो
मैंने तुरंत बोला '' ये मजा लेने के लिए कोई लड़की या ओरत चाहिए '' तो
मुन्नी कुछ नहीं बोली ओर चुपचाप मेरी तरफ देखने लगे तो मैंने बोला '' क्या
हुआ क्यों चुप होगई '' तो मुन्नी कहती है कि '' दीदी कितनी भगयसाली है ''
तो मैंने बोला '' क्यों '' तो मुन्नी कहती है कि '' दीदी को ये मजा मिलता
है '' तो मैने बोला ''इसमें भाग्य वाली बात कहा से आ गई ये तो मजे आप भी ले
सकती है '' तो मुन्नी फिर से चुप हो गई और मेरी तरफ देखने लगी तो मैं उठकर
मेरे बिस्तर को मुन्नी के बिस्तर से सटा लिया तो मुन्नी कुछ नहीं बोली तो
मैंने मुन्नी को अपने ओर खीच कर किस कर लिया और चूची को दबा दिया तब भी
मुन्नी कुछ नहीं कही मैं समझ गया कि आज मुन्नी कि चुदाई कि जा सकती है मैं
बार बार किस करने लगा तो मुन्नी ने कहा कि '' दीदी आ जायेगी '' तो मैंने
बोला कि ''ओ दोनों इतने थक गए है कि सुबह नीद खुलेगी दोनों की '' तो मुन्नी
ने कहा कि '' नहीं रहने दीजिये दीदी आ गई तो डाट पड़ेगी '' तो मैंने बोला
''टीक है मैं दरबाजा लगा देता हु बाहर से '' और तुरंत उठा और नीचे जाकर
किचेन का दरबाजा बाहर से लगा दिया और आँवले के तेल कि सीसी साथ लेता आया
छत पर ओर् मुन्नी के पास लेट गया और मुन्नी को किस करने लगा और हलके हलके
हाथ से चूची को सहलाने लगा सूट के अंदर हाथ डालकर मुन्नी ने कोई बिरोध
नहीं किया और कुछ देर बाद मुझे किस किया और मेरे कंधे पर हाथ रखकर कंधे को
दबाया मैं समझ गया कि मुन्नी अब धीरे धीरे गर्म पड़ेगी , अब मैं मुन्नी के
सलवार का नाडा खोलने लगा तो गाठ नहीं खुल रही थी तो मुन्नी को बोला कि
''आप खोल् दो ना नाडा '' तो मुन्नी ने फिर से मना किया और बोली '' जीजू
कही गड़बड़ ना हो जाए '' तो मैंने मुन्नी से पूछा कि ''महीना कब हुई थी ''तो
बोली ''बस दो तीन दिन में होने वाली हु '' तो मैंने बोला कि ''चिंता कि कोई
बात नहीं बच्चेदानी का मुह बंद हो
गया है '' तो मुन्नी बोली कि ''आपको कैसे पता ''तो मैंने जबाब दिया '' किताब में पढ़ा है महीन होने के बीस दिन बाद बच्चेदानी का मुह बन्द हो जाता है और गर्भ नहीं रुकता '' तो मुन्नी संतुष्ट हो गई और अपने सलबार का नाडा खोल दिया तो मैंने सलवार और पैंटी को अलग कर दिया और फिर सूट को भी उतार दिया अब मुन्नी मेरे सामने एक दम नंगी पडी थी मैंने भी अपनी लुंगी और बनियान उतार दिया और मुन्नी की बुर पर हाथ घुमाया तो देखा कि मुन्नी कि बुर पर बड़ी बड़ी झांठ उगी थी तब मैंने मुन्नी से पूछ लिया '' कभी सफाई नहीं करती हो क्या ' तो मुन्नी बोली '' कैसे करू '' तो मैंने बोला '' हेयर रिमूवर क्रीम से किया करो ना ''तो मुन्नी ने कहा कि '' ये क्या होता है '' तो मैंने बताया कि '' इसे लगा लो तो कुछ देर में सारे बाल साफ़ हो जायेगे '' तो मुन्नी बोली '' कल आप ला देना तो कर लुंगी '' ये बाते करते करते मैं मुन्नी कि जांघो को सहलाने लगा और चूची को जीभ से चाटने लगा मुन्नी भी अब मेरी होठो किस करने लगी और गाल पर गाठ घुमाने लगी ,मैं मुन्नी के बुर कि छेद को तलासने लगा जो बालो से ढकी हुई थी थोड़ा सा छेद दिखा चाँद के उजाले में तो मैंने बीच वाली ऊँगली को बुर में डालने लगा तो मुन्नी ने हाथ पकड़ लिया तो ऊँगली को हटा लिया और बुर को किस करने लगा और जीभ से चाटने भी लगा तो एक बाल मुह के अंदर चला गया तो उसको निकाल दिया और बुर को फिर से चाटने लगा मुन्नी जैसे जैसे गर्म पड़ रही थी वैसे वैसे उसका हाथ मेरे शरीर पर घूमने लगा और धीरे से मुन्नी ने मेरे लम्बे और मोटे लण्ड को पकड़ लिया और चढ्ढी को खिसकाने लगी तो मैंने चढ्ढी को उतार दिया तो मुन्नी ने लण्ड को देखा और बोली ये तो बहुत बड़ा और मोटा है और लण्ड कि किस कर लिया उधर मैं मुन्नी कि चूत चाटता रहा मुन्नी पूरी तरह से चुदाने के लिए तैयार हो गई तो मैं मुन्नी की चूची पर हलका सा तेल डाल दिया और चुचियो को सहलाने लगा जांघो पर हलके हलके तेल डालकर जांघो कि मालिस करने लगा फिर चूत में तील डालकर चूत को चिकनी कर लिया और अपने लण्ड पर भी तेल लगा कर चिकना कर लिया मुन्नी कि चुचियो कि निप्प्ल एकदम से टाइट पड़ गई, मुन्नी मुझे अपनी तरफ खीचने लगी तब मैं मुन्नी कि चूत के मुह पर लण्ड को रखा तो चूत कि मुह बहुत कम खुला था फिर भी मैंने लण्ड को धीरे धीरे घुसाने लगा तो मुन्नी को दर्द हुआ तो ओ मुझे ठेल कर किनारे कर दिया और उठ कर बैठ गई और बोली दर्द हो रहा है तो मैंने मुन्नी के फेरते हुए समझाया कि स्वर्ग के शैर और स्वर्ग के मजे लेने के लिए थोड़ा सा दर्द सहन कर लो सुरु होगा बाद आयेगा और झुककर मुनि कि चूत को फिर चाटने लगा इस बार पूरी कि पूरी जीभ को घुसा कर अंदर तक चाटने लगा तो मुन्नी कि चूत गीली पड़ गई और मुन्नी मेरे सर को हटाने लगी तो मैंने मुन्नी को फिर से बिस्तर पर लिटा दिया और एक ढक्कन तेल निकालकर मुन्नी कि चूत में डाल दिया और आधा ढक्कन तेल अपने लंड पर डालकर लण्ड को खूब चिकना कर लिया और धीरे धीरे मुनि कि चुचियो को सहलाते हुए मुन्नी के ऊपर झुक गया और इधर जीभ को चूसने लगा मुन्नी भी मेरे गालो पर हाथ ,कमर पर हाथ पीठ पर हाथ घुमाती और मेरी जीभ को मुह के अंदर लेकर चुस्ती उधर मैं धीरे धीरे लण्ड को डालने लगा और पूरा लण्ड तो नहीं घुसा पर आधे से ज्यादा घुस गया तो मैं लण्ड को धीरे धीर आगे -पीछे करने लगा मुन्नी भी अब निडर लग रही थी पर लण्ड ठेलता तो मुझे रोक लेती मैं समझ गया लण्ड को पूरा घुसने के लिए जगह नहीं मिल रही है तो मैंने मेरी तकिया लिया और मुन्नी के कमर व चूतड़ो के नीचे रख दिया ,और बड़े प्यार से मुन्नी को किस करते करते एक झटका मारा और पूरा क पूरा लण्ड अंदर घुस गया तो मुन्नी के मुह से हलकी सी चीख निकल गई तो मैंने जल्दी से मुह को दबाकर चीख को रोक लिया और मुन्नी के गाल पर हाथ घुमाते हुए किस करने लगा और मुन्नी को जोर से चिपका लिया
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भाभी की बहन मुन्नी
| मुन्नी से लिपटकर कुछ इस तरह से चूची को दबा दिया |
गया है '' तो मुन्नी बोली कि ''आपको कैसे पता ''तो मैंने जबाब दिया '' किताब में पढ़ा है महीन होने के बीस दिन बाद बच्चेदानी का मुह बन्द हो जाता है और गर्भ नहीं रुकता '' तो मुन्नी संतुष्ट हो गई और अपने सलबार का नाडा खोल दिया तो मैंने सलवार और पैंटी को अलग कर दिया और फिर सूट को भी उतार दिया अब मुन्नी मेरे सामने एक दम नंगी पडी थी मैंने भी अपनी लुंगी और बनियान उतार दिया और मुन्नी की बुर पर हाथ घुमाया तो देखा कि मुन्नी कि बुर पर बड़ी बड़ी झांठ उगी थी तब मैंने मुन्नी से पूछ लिया '' कभी सफाई नहीं करती हो क्या ' तो मुन्नी बोली '' कैसे करू '' तो मैंने बोला '' हेयर रिमूवर क्रीम से किया करो ना ''तो मुन्नी ने कहा कि '' ये क्या होता है '' तो मैंने बताया कि '' इसे लगा लो तो कुछ देर में सारे बाल साफ़ हो जायेगे '' तो मुन्नी बोली '' कल आप ला देना तो कर लुंगी '' ये बाते करते करते मैं मुन्नी कि जांघो को सहलाने लगा और चूची को जीभ से चाटने लगा मुन्नी भी अब मेरी होठो किस करने लगी और गाल पर गाठ घुमाने लगी ,मैं मुन्नी के बुर कि छेद को तलासने लगा जो बालो से ढकी हुई थी थोड़ा सा छेद दिखा चाँद के उजाले में तो मैंने बीच वाली ऊँगली को बुर में डालने लगा तो मुन्नी ने हाथ पकड़ लिया तो ऊँगली को हटा लिया और बुर को किस करने लगा और जीभ से चाटने भी लगा तो एक बाल मुह के अंदर चला गया तो उसको निकाल दिया और बुर को फिर से चाटने लगा मुन्नी जैसे जैसे गर्म पड़ रही थी वैसे वैसे उसका हाथ मेरे शरीर पर घूमने लगा और धीरे से मुन्नी ने मेरे लम्बे और मोटे लण्ड को पकड़ लिया और चढ्ढी को खिसकाने लगी तो मैंने चढ्ढी को उतार दिया तो मुन्नी ने लण्ड को देखा और बोली ये तो बहुत बड़ा और मोटा है और लण्ड कि किस कर लिया उधर मैं मुन्नी कि चूत चाटता रहा मुन्नी पूरी तरह से चुदाने के लिए तैयार हो गई तो मैं मुन्नी की चूची पर हलका सा तेल डाल दिया और चुचियो को सहलाने लगा जांघो पर हलके हलके तेल डालकर जांघो कि मालिस करने लगा फिर चूत में तील डालकर चूत को चिकनी कर लिया और अपने लण्ड पर भी तेल लगा कर चिकना कर लिया मुन्नी कि चुचियो कि निप्प्ल एकदम से टाइट पड़ गई, मुन्नी मुझे अपनी तरफ खीचने लगी तब मैं मुन्नी कि चूत के मुह पर लण्ड को रखा तो चूत कि मुह बहुत कम खुला था फिर भी मैंने लण्ड को धीरे धीरे घुसाने लगा तो मुन्नी को दर्द हुआ तो ओ मुझे ठेल कर किनारे कर दिया और उठ कर बैठ गई और बोली दर्द हो रहा है तो मैंने मुन्नी के फेरते हुए समझाया कि स्वर्ग के शैर और स्वर्ग के मजे लेने के लिए थोड़ा सा दर्द सहन कर लो सुरु होगा बाद आयेगा और झुककर मुनि कि चूत को फिर चाटने लगा इस बार पूरी कि पूरी जीभ को घुसा कर अंदर तक चाटने लगा तो मुन्नी कि चूत गीली पड़ गई और मुन्नी मेरे सर को हटाने लगी तो मैंने मुन्नी को फिर से बिस्तर पर लिटा दिया और एक ढक्कन तेल निकालकर मुन्नी कि चूत में डाल दिया और आधा ढक्कन तेल अपने लंड पर डालकर लण्ड को खूब चिकना कर लिया और धीरे धीरे मुनि कि चुचियो को सहलाते हुए मुन्नी के ऊपर झुक गया और इधर जीभ को चूसने लगा मुन्नी भी मेरे गालो पर हाथ ,कमर पर हाथ पीठ पर हाथ घुमाती और मेरी जीभ को मुह के अंदर लेकर चुस्ती उधर मैं धीरे धीरे लण्ड को डालने लगा और पूरा लण्ड तो नहीं घुसा पर आधे से ज्यादा घुस गया तो मैं लण्ड को धीरे धीर आगे -पीछे करने लगा मुन्नी भी अब निडर लग रही थी पर लण्ड ठेलता तो मुझे रोक लेती मैं समझ गया लण्ड को पूरा घुसने के लिए जगह नहीं मिल रही है तो मैंने मेरी तकिया लिया और मुन्नी के कमर व चूतड़ो के नीचे रख दिया ,और बड़े प्यार से मुन्नी को किस करते करते एक झटका मारा और पूरा क पूरा लण्ड अंदर घुस गया तो मुन्नी के मुह से हलकी सी चीख निकल गई तो मैंने जल्दी से मुह को दबाकर चीख को रोक लिया और मुन्नी के गाल पर हाथ घुमाते हुए किस करने लगा और मुन्नी को जोर से चिपका लिया
हजारों कहानियाँ हैं फन मज़ा मस्ती पर !


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