Friday, December 19, 2014

FUN-MAZA-MASTI भिखारी की हवस-10

FUN-MAZA-MASTI


 भिखारी की हवस-10
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अब आगे
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 भूरे को अपनी किस्मत पर विश्वास ही नही हो रहा था...वो जानता था की इस डील मे अगर कोई ग़लती हो जाती, यानी गंगू अगर आज पुलिस के हाथो पकड़ा जाता तो नेहाल भाई ने उसकी गांड मार लेनी थी..वो आज काफ़ी खुश था..

उसने कल्लन को वो पकेट लेकर नेहाल भाई को देने के लिए भेज दिया और खुद गंगू को लेकर एक होटल मे चल दिया...आख़िर उसने आज उसके करोड़ो रूपए के पेकेट की सही सलामत डेलिवरी जो ली थी और अपनी जान बचने की खुशी भी थी भूरे को..इसलिए वो अपनी खुशी को सेलेब्रेट करना चाहता था.

गंगू को लेकर भूरे एक 4 स्टार होटल मे पहुँचा, जहा वो अक्सर मज़े लेने के लिए जाया करता था..गंगू के लिए ये पहला अवसर था किसी बड़े होटेल मे जाने का, वो घबरा भी रहा था..और अंदर ही अंदर उसे नेहा की भी चिंता सता रही थी..पर भूरे ने जब कहा की उसे आज हर तरह की मस्ती करवाएगा तो शराब की बोतलें और नंगी लड़किया उसकी आँखो के सामने नाचने लगी..

गंगू तो था ही एक नंबर का ठरकी और उपर से फ्री की अँग्रेज़ी दारू पीने का अवसर भी वो खोना नही चाहता था, वो चुपचाप उसके साथ अंदर आ गया..

पर गंगू की हालत तो वही थी ना, भिखारी वाली..भूरे उसे सीधा होटेल के अंदर बने स्पा एंड मसाज सेंटर मे लेकर गया..और वहां के मेनेज़र के हाथ मे नोट पकड़ा कर उसे धीरे से सब समझा दिया..वो मॅनेजर भी भूरे को जानता था इसलिए उसने चुपचाप वो पैसे जेब मे रखे और गंगू को अपने साथ अंदर ले गया..वैसे तो उसकी भिखारी वाली हालत देखकर वो भी अपनी नाक भो सिकोड रहा था, पर भूरे के बारे मे वो जानता था की वो अंडरवर्ल्ड का बंदा है, इसलिए उसको वो मना नही कर सकता था.

भूरे उसके लिए कुछ नये कपड़े लेने के लिए पास ही बने एक शोरूम की तरफ चल दिया..और साथ ही उसने होटल मॅनेजर को बोलकर अपने और गंगू के लिए कुछ विदेशी ''माल'' का भी इंतज़ाम करने के लिए कह दिया.

गंगू तो स्पा के अंदर आते ही वहां की लड़कियों को देखकर पागल सा हो गया..इतनी सुंदर-2 लड़किया थी वहां ..ज़्यादातर चींकी टाइप की थी और कुछ मोटी छातियों वाली नॉर्थ साइड की भी..

ग्राहक को देखकर मुस्कुराना उनकी ड्यूटी थी...पर ऐसे भिखारी जैसे ग्राहक को देखकर सभी एक दूसरे को ताक रही थी...उनके मॅनेजर ने जब जाकर उन्हे समझाया की वो किसके साथ आया है और उन्हे कितने सारे पैसे मिले है तो उनके सामने मना करने का सवाल ही नही था.

उनमे से दो सुंदर सी दिखने वाली लड़किया गंगू के पास आई और उसे अपने साथ लेकर एक कमरे मे चली गयी.

गंगू के पेट मे गुदगुदी सी हो रही थी, जो भी हो रहा था उसके लिए किसी सपने जैसा ही था..

अंदर पहुँचकर उन लड़कियो ने गंगू को कपड़े उतारने के लिए कहा, उसने कपड़े उतार कर अलमारी मे टाँग दिए..अब उसके शरीर पर सिर्फ़ एक पुराना सा कच्छा था ..जो कई जगह से फटा भी हुआ था..और लड़कियो को देखकर वैसे भी उसका लंड खड़ा हो चुका था पूरा का पूरा..

उसकी शक्ल तो वैसे भी भिखारियो जैसी थी..पर उसके गठीले शरीर और उसके उफनते लंड को देखकर वो दोनो लड़कियो के अंदर कुछ-2 होने लगा..

उनके नाम थे दिया और प्राची..

दिया तो शक्ल से ही बंगालन लग रही थी..उसकी बड़ी-2 आँखे और मोटे होंठ, हल्का सांवला रंग और मोटे-2 चुच्चे और उतनी ही मोटी गांड ..

प्राची शायद आसाम की होगी..उसका गोरा रंग और छोटे-2 मुम्मे बड़े ही गज़ब के लग रहे थे..

गंगू के शरीर पर काफ़ी मैल सी थी..इसलिए उन्होने पहले उसको नहलाने की सोची..उन दोनो लड़कियो ने भी अपने कपड़े उतार दिए और वो सिर्फ़ ब्रा-पेंटी मे खड़ी थी..उनके जिस्म को देखकर उसके लंड का साइज़ पूरे आकार मे आ गया...

वो दोनो गंगू को लेकर एक आलीशान से बाथरूम मे आ गयी और शावर चला दिया..

प्राची ने गंगू के शरीर पर साबुन लगाना शुरू किया और दिया ने अपने हाथ मे एक स्क्रबर लेकर उसके शरीर को रगड़ना शुरू कर दिया...गंगू तो अपने आप को आसमान पर उड़ता हुआ महसूस कर रहा था...उसने तो सोचा भी नही था की उसके जैसे भिखारी को ऐसे दिन भी देखने को मिलेंगे..

प्राची ने उसके सिर पर शेंपू लगाया, और पूरे शरीर को बॉडी वॉश से दोबारा से रगड़ा...



 उसको नहलाते -2 वो दोनो भी पूरी तरह से भीग चुकी थी..पर ये तो उनका रोज का काम था..उसी काम के तो उन्हे पैसे मिलते थे..

अचानक प्राची ने गंगू के कच्छे को पकड़कर नीचे खींच दिया..गंगू ने अपने लंड को छुपाने की कोई कोशिश नही की पर उसे आश्चर्य ज़रूर हुआ की कितनी बेशर्मी से उसने वो कर दिया...शायद यही काम होगा इनका रोज का..

वो दोनों उसके लंड के साइज पलकें झपकना भूल गयी

उसे अच्छी तरह से नहलाने के बाद वो उसे बाहर ले आई...गंगू ने शीशे मे अपना पूरा अक्स देखा तो अपनी सफाई देखकर वो भी हैरान रह गया...पर चेहरे पर घनी दाढ़ी और लंड के चारों तरफ घना जंगल उसे अभी भी जंगली लुक दे रहा था..

दिया ने गंगू को एक बड़े से टेबल पर लिटाया और अगले ही पल दोनो ने अपने-2 बचे हुए कपड़े भी निकाल फेंके..

अपने सामने दोनो को एकदम से नंगा देखकर गंगू के सब्र का बाँध टूट गया और वो एकदम से उठा और प्राची के रसीले बदन से लिपट गया..

वो एकदम से चिल्लाई : "स्टॉप सर ....आप ये क्या कर रहे हैं...''

गंगू बेचारा एकदम से रुक गया...वो तो समझ रहा था की पहले उसको नंगा करके और फिर खुद नंगा होकर वो उसे चुदाई का निमंत्रण दे रही हैं..पर फिर उन्होने समझाया की वो दोनो मिलकर उसे स्पेशल मसाज देने वाली हैं..और उसके लिए वो बिना कपड़ो के ही अपने कस्टमर के सामने आती हैं..

वो समझ गया, उसे अपनी ग़लती का एहसास हुआ..वैसे तो वो इस तरह से मानने वालो मे से नही था, पर उँचे लोगो की उँची बातें , ये सोचकर वो कुछ ना बोला और चुपचाप टेबल पर लेट गया.

प्राची ने अपने हाथ मे एक तेल की बोतल ली, उसमे से अलग ही तरह की खुश्बू आ रही थी..और उसके गठीले शरीर पर मलने लगी..उसकी छातियो और कंधो को वो अपने नाज़ुक हाथों से सहलाने लगी..वो उसके सिर के उपर खड़ी हुई थी, जिसकी वजह से उसके लटके हुए मुम्मे उसके चेहरे पर टच कर रहे थे..वो आगे झुकती तो उसके दोनों मुम्मे उसके चेहरे पर दब जाते..पर गंगू अपनी तरफ से कोई भी पहल करके फिर से लज्जित नही होना चाहता था.

दिया ने उसके पैरों की मालिश करनी शुरू कर दी..और धीरे-2 उसकी जाँघो से होती हुई ,लंड को छोड़कर, पेट पर भी वही तेल मलने लगी..वो भी जब आगे झुकती तो उसके मुम्मे गंगू के पैरों के पंजों के उपर दब जाते..और धीरे-2 दिया ने अपनी लंबी उंगलियाँ उसके लंड के चारों तरफ भी घुमानी शुरू कर दी...उसकी बड़ी-२ गोटियों को जैसे ही दिया ने अपने हाथों मे पकड़ा ,गंगू के पंजों के उपर लटक रहे मुम्मों पर गंगू के पैरों की उंगलियों ने अपनी पकड़ बना ली और उसके निप्पल को गंगू ने अपने अंगूठे और साथ वाली उंगली के बीच फँसा कर ज़ोर से दबा दिया...

''आआययययययययययययययययीीईईईईईईईईईईईईईईई .... सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स ....''

दिया ने भी एक जोरदार सिसकारी मारते हुए उसके लंड को एकदम से पकड़ा और ज़ोर से दबा लिया...गंगू को एकबार तो ऐसा लगा की वो उसे उखाड़ कर अपने घर ही ले जाएगी..उसकी गांड अपनी जगह से उपर उठ गयी..और उसका लाभ उठाते हुए दिया ने अपने तेल से सने हाथ उसकी गांड के नीचे लगा कर वहाँ भी तेल मल दिया.

उपर की तरफ मालिश कर रही प्राची भी अब अपने असली रंग मे आने लगी थी..वो जान बूझकर अपने मोटे मुम्मे उसके होंठों के उपर लटका रही थी, जैसे कोई दासी अपने राजा को अंगूर खिलाती है, गंगू ने भी बड़े ही राजसी अंदाज मे अपना मुँह खोला और उसकी छाती पर लगे अंगूर को अपने मुँह के अंदर लेकर ज़ोर से चुभला दिया..

उसके मुँह से भी एक जोरदार सिसकारी निकल आई..

''आआआाागगगगगगगगगगगगघह ...... उम्म्म्ममममममममम ''


अब गंगू का कब्जा दोनो के निप्पल्स पर था..नीचे उसने अपने दोनो पैरों की उंगलियों के बीच दिया के निप्पल फँसा रखे थे और उपर अपने मुँह के अंदर प्राची का और अपने हाथ से उसके दूसरे निप्पल को..

कुल मिलाकर माहौल अब काफ़ी गर्म हो चुका था..

गंगू ने फिर से पहल करने की सोची और दिया को अपने उपर खींचकर अपने लंड पर बिठाने की कोशिश करने लगा...

वो एक बार फिर से चीखी : "नही सर ...आप ऐसा नही कर सकते...ये एलाउ नही है...''

गंगू को बहुत गुस्सा आया...साली ये कैसी लड़कियाँ है...उसके सामने पूरी नंगी खड़ी है, उसके शरीर से खेल रही है, अपने शरीर से खेलने दे रही है, पर चुदाई का टाइम आते ही कहती है की ये एलाउ नही है...

पर उसका तो ये पहला टाइम था, शायद इन लड़कियो की लिमिट यहीं तक ही है..

वो अपने मन पर काबू करते हुए फिर से लेट गया.

प्राची बोली : "सॉरी सर ...पर फ़किंग एलाउ नही है...बाकी जो भी करना चाहे आप कर सकते हैं...''

भागते भूत की लंगोटी ही सही...ये सोचकर उसने चबर-2 बोल रही प्राची के मुँह के अंदर अपना लंड ठूस कर उसे चुप करा दिया...और दिया को अपने पास बुलाकर उसकी छोटी सी चूत के अंदर अपनी मोटी उंगली घुसेड दी..

दोनो सी-सी करती हुई मचलने लगी...

प्राची ने आजतक इतने बड़े लंड के दर्शन नही किए थे...उसे हेंडल करना उसके लिए काफ़ी मुश्किल हो रहा था..वो सही तरह से उसे अपने मुँह मे भी नही ले पा रही थी..

और दूसरी तरफ अपनी चूत के अंदर गंगू की उंगलियों की थिरकन से दिया किसी नर्तकी की तरह नाचने लगी...और गंगू के हल्के से झटके ने उसके चेहरे को उसके एकदम पास कर दिया...और अगले ही पल गंगू के खूंखार होंठों ने उस हिरनी के होंठों को अपने मुँह मे दबोचकर उसे चूसना शुरू कर दिया...



 गंगू के दुर्गंध भरे मुँह से वो पीछा छुड़वाना चाहती थी, पर उसकी मजबूत पकड़ और अपनी चूत पर मिल रही मसाज की वजह से वो ऐसा नही कर पाई..और वहीं खड़ी होकर उसका साथ देने लगी.

गंगू ने आज तक एक साथ दो-2 लड़कियो से मज़े नही लिए थे...पर आज उसे ये एहसास हो गया था की ऐसी अय्याशी का भी अपना ही मज़ा है..

दिया भी अब गंगू से अलग हुई और वो भी उसके सामने बैठ कर प्राची की हेल्प करने लगी...दोनो बारी -2 से गंगू का लंड चूसने लगी...गंगू के लिए ये एहसास ऐसा था जैसे वो पूरी दुनिया का राजा है..और अपनी दासियों से वो अपने लंड को चुस्वा रहा है..

वो आराम से बैठकर अपने लंड को चुसवाने का मज़ा लेने लगा..

और उसे जल्द ही ये एहसास हो गया की उसके अंदर एक तूफान बनने लगा है, उसकी खिंच रही मांसपेशियो को देखकर वो दोनो भी समझ गयी की सावन की बारिश कभी भी हो सकती है..

प्राची ने अपने हाथ मे गंगू के लंड को पकड़कर जोरों से हिलाना शुरू कर दिया, और दोनो ने अपने-2 मुँह उसके सामने भूखी कुतिया की तरह खोल लिए..

और एक तेज गड़गड़ाहट के साथ गंगू लंड का बादल फट गया और उसके बीच से तेज बारिश की बूंदे निकलकर उनके चेहरे पर गिरने लगी और वो उसके मीठे रस को अपने -2 मुँह मे कैच करने की कोशिश करने लगी..

गंगू तब रुका जब उन दोनो के चेहरे पर अपने सफेद रस की पूरी परत बिछा चुका था वो...बारिश के साथ-2 स्नो फाल का एहसास हो रहा था उन दोनो को अब..

वो दोनो गंगू को लेकर फिर से बाथरूम मे चली गयी और उसे दोबारा रगड़ -2 कर नहलाया..वैसे तो कुछ ही देर मे गंगू का लंड दोबारा खड़ा हो गया, पर उसके बाद भी वो चुदवाने के लिए तैयार नही हुई..

उसको अच्छी तरह से नहलाने के बाद वो तीनो बाहर आ गये, और गंगू को वहीं छोड़कर दोनो ने अपने-2 कपड़े पहने और बाहर निकल गयी...

गंगू ने अपने निचले हिस्से पर टावल लपेटा और वहीं बैठा रहा ..

कुछ ही देर मे भूरे अंदर आया...

उसके चेहरे पर अजीब सी मुस्कान थी , वो बोला : "क्यो गंगू..कैसा लगा...''

गंगू भी मुस्कुरा दिया : "सही था भाई...ऐसा मज़ा तो आज तक नही मिला..''

भूरे भी मन ही मन सोचने लगा की साले छक्के से घर पर अपनी बीबी की गर्मी तो शांत नही की जाती और यहा पर डींगे हांक रहा है...इसने तो कुछ भी नही किया होगा..

पर बेचारा असलियत नही जानता था..जो जल्द ही उसके सामने आने वाली थी..

क्योंकि भूरे ने एक विदेशी लड़की का इंतज़ाम करवा लिया था..और दोनो एक ही कमरे मे मिलकर उसे चोदने वाले थे..

भूरे के हिसाब से तो गंगू के बस का कुछ नही था...इसलिए वो मन ही मन खुश हो रहा था की वो अकेला ही उस रशियन लड़की की चूत मारेगा...पर वो ग़लतफहमी भी जल्द ही दूर होने वाली थी उसकी.

भूरे अपने साथ गंगू के लिए नये कपड़े लेकर आया था...वो उसे देकर बाहर उसका इंतजार करने लगा.

जब नये कपड़े पहन कर गंगू बाहर निकला तो भूरे भी उसको पहचान नही सका..वो काफ़ी अच्छा लग रहा था..

कमी थी तो उसकी घनी दाढ़ी र उसकी लंगड़ाती चाल की...वरना वो किसी फिल्मी हीरो जैसा ही लगता..

वो उसे लेकर होटेल के कमरे की तरफ चल दिया...और साथ ही साथ ये भी बता दिया की अब असली मज़ा लेने की बारी है...और वो भी एक विदेशी चूत की..

गंगू सोच रहा था की कितना अच्छा दिन है उसकी जिंदगी का आज..पहली बार उसकी जेब मे बीस हज़ार रुपय थे, उसके बाद उसने मुम्मेथ ख़ान की भी अच्छी तरह से बजाई और फिर स्पा सेंटर मे उन दोनो लड़कियो ने उसे जन्नत का एहसास दिलाया और अब एक विदेशी लड़की की चूत भी मिलेगी..और उससे पहले महंगी शराब भी पीने को मिलेगी

वो भी जानता था की अभी-2 झड़ने के बाद जब वो चोदने पर आएगा तो उसका लंड कितनी दूर तक उसका साथ देगा..

एक तरफ गंगू मज़े ले रहा था और दूसरी तरफ बेचारी नेहा अपने जिस्म की आग मे सुलगकर गंगू का इंतजार कर रही थी..

पर उसे क्या पता था की गंगू आज किस दुनिया मे मगन है.


 गंगू और भूरे एक आलीशान कमरे मे पहुँचे, दो कमरे थे वहाँ, एक मे तो सोफा ,टेबल और बार बनी हुई थी, दूसरे कमरे मे आलीशान बेड और बाल्कनी थी..जिसमे खड़े होकर पूरा शहर दिख रहा था.

गंगू और भूरे सोफे पर बैठ गये..तभी अंदर के कमरे से निकल कर एक रशियन लड़की बाहर आई..उसको देखकर एक पल के लिए गंगू तो अपनी पलकें झपकना भी भूल गया, इतनी गोरी लड़की, इतने मोटे मुम्मे , सुनहरे बाल, लाल सुर्ख होंठ..टी शर्ट और मिनी स्कर्ट , टी शर्ट मे से उसके मुम्मे बाहर निकलने के लिए जैसे मरे जा रहे थे, उसने अंदर ब्रा भी नही पहनी थी..जिसकी वजह से उसके दूधिया स्तनों के उपर लगे लाल निप्पल साफ़ दिख रहे थे..गंगू तो पागल हुए जा रहा था उसको देखकर..

भूरे : "कैसी लगी..."

गंगू बेचारा क्या बोलता, आज तो उसकी जिंदगी का ऐसा दिन था,जिसमे उसको ये पता चला था की खूबसूरत औरतें कैसी होती है...और अब ये विदेशी लड़की को देखकर और ये सोचकर की थोड़ी ही देर मे उसकी मारने को मिलेगी, उसका लंड फटा जा रहा था..और भूरे के प्रश्न का वो कोई जवाब भी नही दे पाया..

भूरे को उसकी हालत देखकर हँसी आ गयी..वो बोला : "हा हा ... देख ले गंगू, ये होती है असली जिंदगी...तुझे पता है, मैने इस लड़की की पहले भी दो बार बजाई है...साली को अँग्रेज़ी के सिवा कुछ समझ नही आता और हमे अँग्रेज़ी आती नही...पर चुदाई के मामले मे ये सब बातें समझती है...अब देखता जा तू, कैसे मज़े दिलवाता हू मैं तुझे..''

उस रशियन लड़की का नाम था मालविना, उम्र होगी सिर्फ़ 19 के आस पास ...कयामत थी सच मे..

इतना कहकर वो मालविना की तरफ मुड़ा और बोला : "मालविना....ड्रिंक ...ड्रिंक ....''

वो दारू की बोतलों की तरफ इशारा करते हुए उस लड़की से बोला...वो प्रोफेशनल थी..मुस्कुराते हुए वो मूडी और बार मे से एक 100 पाइपर की बोतल निकाल कर ले आई..

भूरे ने उसे पेग बनाने का इशारा किया...अब उसको अँग्रेज़ी तो आती नही थी..इसलिए टूटी फूटी अँग्रेज़ी और इशारों से काम चला रहा था..और कमाल की बात ये थी की वो सब समझ भी रही थी..

मालविना ने दो लार्ज ड्रिंक बना कर दिए..

भूरे ने उसको फिर से कहा : "नो ..नो ...ऐसे मत दो ....डिप ..डिप ..''

गंगू की समझ मे नही आया की ये क्या डिप करने के लिए कह रहा है..पर वो शायद पहले भी भूरे के साथ आई थी और वो सब कर चुकी थी, इसलिए उसका अर्थ वो फ़ौरन समझ गयी...और उसने एक झटके मे अपनी टी शर्ट उतार फेंकी..और उपर से नंगी हो गयी..उसके मोटे-2 सफेद खरबूजे दोनो की वहशी आँखों के सामने झूल गये..

गंगू तो उसका बेबाकपन देखकर हैरान था...और फिर जो उसने किया, उसे देखकर तो गंगू ने अपने लंड पर हाथ रखकर सहलाना शुरू कर दिया..

मालविना ने दोनो पेग उठाए...और थोड़ा झुक कर अपनी चुचियों को दोनो ग्लास मे डिप करा दिया...और फिर उन दोनो के सामने पहुँच कर उनके हाथ मे वो ग्लास थमा दिए..

दोनो ने चियर्स किया और एक ही घूँट मे दोनो ने पूरे ग्लास खाली कर दिए..





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