Saturday, December 27, 2014

FUN-MAZA-MASTI सौरभ भैया से अपनी फड़वा ली

FUN-MAZA-MASTI


सौरभ भैया से अपनी फड़वा ली

यह कहानी उस समय की है जब मैं बारहवीं की परीक्षा देने के बाद इंजीनियरिंग के टैस्ट देने के लिए इलाहबाद अपनी मौसी के घर गई थी। वैसे मेरी मौसी के घर सिर्फ दो लोग रहते हैं, मेरी मौसी और उनका लड़का सौरभ... मेरे मौसा की मौत दो साल पहले कैंसर की वजह से हो गई थी इसलिए मेरी मौसी को जॉब करनी पड़ती है... वो बैंक में कैशियर हैं, उनका पूरा दिन बैंक के काम में बीत जाता है... और सौरभ जो मुझसे एक साल छोटा है वो अभी गयारहवीं पास करके बारहवीं में आया है।

मेरी मौसी का घर बहुत छोटा है, दो कमरे, एक रसोई और कमरे से ही जुड़ा बाथरूम है।

मैं पिछले साल वहाँ आई आई टी की परीक्षा देने गई थी मैं तीन दिन पहले ही वहाँ पहुँच गई थी।

तब मौसी ऑफिस के काम से आउट ऑफ़ स्टेशन थी और अगले दिन रात तक आने वाली थी। घर में सिर्फ सौरभ था। मैं सुबह सुबह वह पहुँच गई थी।

मौसी के कमरे में ही मैंने अपनी पढ़ाई शुरू कर दी... दोपहर में खाना खाने के बाद मैं और सौरभ थोड़ा घूमने चले गई और फिर रात का खाना बाहर ही खाकर आए। हमें वापस आने में रात के दस बज गए थे। मैं मौसी के कमरे में पढ़ाई करने चली गई और पढ़ाई करते करते सुबह के चार बज गए...

मुझे जोरों की प्यास लगी थी, मैं पानी पीने के लिए रसोई में गई, वापस आते समय देखा कि सौरभ के कमरे की लाइट जल रही थी और दरवाजा भी थोड़ा खुला था। मैं दरवाजे की तरफ बढ़ी और मैंने अंदर की तरफ देखा तो मुझे यकीन नहीं हो रहा था जो मैंने देखा। मानो कि आसमान नीचे और ज़मीन ऊपर चली गई हो !

मैंने देखा कि सौरभ अंदर बैठ कर ब्लू फिल्म देख रहा था.. इतना छोटा लड़का और ऐसी हरकतें.. और मैं भी बाहर से खड़े होकर उसकी हरकतें देखने लगी।लगभग आधा घंटा ब्लू फिल्म देखने के बाद वो उठकर बाथरूम में चला गया और उसने बाथरूम का दरवाज़ा नहीं बंद किया था, शायद वो ब्लू फिल्म देखने के बाद जोश में आ गया था और अपने अंदर की वासना को शांत करने गया था...

मैंने बाथरूम के अंदर देखना चाहा पर मैं अचानक दरवाजे पर बहक सी गई... और दरवाज़ा पूरा खुल गया, मैं वहाँ से जोर से भागी पर दरवाज़ा खुलने के शोर से सौरभ बाहर आ गया और शायद उसने मुझे वहाँ से जाते हुए देख लिया...

मैं अपने कमरे में चली गई और वहाँ से देख रही थी। सौरभ परेशान दिख रहा था, शायद उसे डर था कि मैंने जो देखा है वो मैं किसी को बता न दूँ। वह बेचारा डर के मारे एकदम पसीने-पसीने हुआ जा रहा था, मानो कि उसने शर्ट पानी में भिगो कर पहनी हो... उसकी इस हालत को देख कर मेरे भी अंदर आग लग रही थी और उसके ऊपर दया आ रही थी...

मैंने सौरभ को बुलाया, वह मेरे कमरे में आया, मैंने पूछा- क्या हुआ?

उसने कहा- कुछ नहीं...

"तो फिर इतने परेशान क्यों हो? क्या बात है?"

उसने फिर बोला- कुछ नहीं दीदी...

मैंने कहा- शर्माओ मत, बोलो...

उसने सर झुकाते हुए कहा- सॉरी दीदी..

"पर किस लिए?"

"प्लीज, जो भी आपने देखा, किसी को मत बताइएगा..."

"अरे पगले, यह भी कोई कहने की बात है क्या?"

उसने मुस्कुराते हुए कहा- मैं डर गया था...

मैंने उसके गाल पर हाथ फेरते हुए कहा- अब ठीक है न?

उसकी मुस्कराहट और बढ़ गई !

"कब से कर रहे हो ये सब?"

"दीदी आप भी ना !"

"अरे तू इतना शर्माता क्यों है? बता ना !"

"अरे छोड़िए इस बात को !

"ठीक है, पर ज्यादा मत कर ये सब ! तेरी सेहत पर असर पड़ेगा..."

वो मुस्कुराते हुए वहाँ से उठ कर नहाने चला गया।

मैंने पीछे से आवाज़ लगाई- अपना अधूरा काम पूरा कर लेना...

सब सोच सोच कर मेरे तन बदन में आग लग रही थी।

मैं उठी और उसके कमरे से उसकी वो पसीने से भीगी शर्ट ले आई जिसकी महक मेरी कामुकता को बढ़ाए जा रही थी... मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिए और उसकी शर्ट पहन ली।

उस भीगी शर्ट में मैं बहुत सेक्सी दिख रही थी, मेरी पूरे तन बदन में आग लग चुकी थी, मैंने अपनी एक उंगली अपनी चूत में डाल दी और अंदर-बाहर करने लगी। मुझे बहुत मजा आ रहा था। ऐसा ही करते करते मैं बिस्तर में ही झड़ गई... और न जाने कब वहीं सो गई। जब आँख खुली तो सुबह के दस बज चुके थे।

मैं उठी और बाथरूम में नहाने चली गई। जब नहा कर निकली और अपने कपड़े निकालने के लिए बैग खोला तो देखा कि मैं जल्दी जल्दी में अपनी ब्रा लाना भूल गई थी...

मैंने बिना ब्रा और पैंटी के बिना कपड़े पहन लिए। मैं सौरभ के पास गई और उसे बताया कि मैं अपनी ब्रा लाना भूल गई हूँ।

तो उसने कहा- चलो खरीद लाते हैं।

और हम दोनों उसकी बाइक पर बैठ कर बाज़ार चले गए। मैं पीछे बैठ कर अपनी छाती का दबाव उसकी पीठ पर दे रही थी जिसकी वजह से वो जोश में आ रहा था और वैसा ही मैं चाहती थी...

और ऐसा ही करते करते हमने ब्रा खरीद ली, मैंने घर आ कर ब्रा पहनी तो वो कुछ तंग थी पर एकदम फिट थी वो काले रंग की ब्रा !

मैंने ब्लू जीन्स के ऊपर एक चिकन का सफ़ेद टॉप पहन लिया जिसका गला बहुत गहरा था और वह चिकन का था जिसकी वजह से मेरे अंदर के पूरे सामान के दर्शन हो जाते थे।

टॉप पहनना सिर्फ एक दिखावा था, उसके पहनने और न पहनने से कुछ फर्क नहीं था...

मुझे सौरभ ने देखा तो वह मुह खोल कर देखता ही रह गया।

मैंने पूछा- क्या हुआ?

उसने कहा- आप बहुत अच्छी लग रही हैं...

मैंने उसके खड़े लंड को देखते हुए कहा- अच्छी लग रही हूँ या फिर सेक्सी...?

उसने कहा- सेक्सी भी छोटा पड़ रहा है...

मैं हंस पड़ी...

हम फिर खाना खाने बैठे...

उसने पूछा- दीदी, आपका कोई बॉयफ़्रेन्ड नहीं है?

मैंने कहा- नहीं...

"क्यों?"

मैंने कहा- लड़के पागल होते हैं, उनको समझ नहीं आता कि एक लड़की क्या चाहती है..!

"मतलब..?"

"मतलब कोई अच्छा मिला नहीं अभी तक...! सौरभ, मैंने कुछ पूछा था कल, तुमने बताया नहीं?"

"क्या?"

"यही कि कब से कर रहे हो?"

"यही कुछ एक साल से..."

"कभी असली में किया है... मतलब किसी लड़की के साथ?"

"नहीं दीदी ! और आपने?"

"मैंने भी कभी नहीं किया..."

तभी दरवाजे की घण्टी बजी, शायद मौसी आ गई थी। सौरभ दरवाज़ा खोलने के लिए उठा। मैंने कहा- एक मिनट रुको !

मैंने फट से अपना पारदर्शी टॉप उतार कर सुशील लडकियों वाला एक कपड़ा पहन लिया।

सौरभ ने कहा- यह क्या?

मैंने अपनी चूचियों को हाथ में लेते हुए कहा- ये मेरे मम्मे हैं, सबको नहीं दिखाती ! सिर्फ कुछ ख़ास लोग को दिखाती हूँ जैसे तुम...

वह मुस्कुराते हुए दरवाज़ा खोलने चला गया।
मौसी आ गई थी, मुझे लगा कि मेरा काम अधूरा ही रह गया। वैसे तो मेरा और मौसी का रिश्ता दो सहेलियों की तरह है लेकिन है तो वो मेरी मौसी...

मौसी ने मुझे प्यार से गले लगाते हुए कहा- कैसी हो पूजा बेटी !

फिर मौसी ने भी खाना खा लिया और मुझसे इधर उधर की बात करने लगी।

बात करने के बाद वह अपने कमरे में चली गई। वहाँ उन्होंने मेरा सारा सामान देखा, उन्होंने मुझे बुलाया और बोली- यह कमरा बहुत छोटा है, तू सौरभ के रूम में शिफ्ट हो जा..

मैंने इस बात पर फट से हामी भर दी आखिर हामी भरती भी क्यों न, आखिर मेरी मन मांगी मुराद मुझे बिना मेहनत के जो मिल गई थी..

मैंने अपना सारा सामान लेकर सौरभ के कमरे में रख दिया, यह देख सौरभ के मन में भी लड्डू फूटने लगे...

उस रात जो हुआ मैंने कभी अपने जीवन में नहीं सोचा था कि मैं सौरभ के साथ यह सब करुँगी...

मैं अपनी चिकन वाली पारदर्शी टॉप पहन कर तैयार हो गई थी वो भी बिना ब्रा के जिसकी वजह से मैं नंगी के समान ही थी। रात के लगभग 12 बज रहे थे, मैं बिस्तर पर बैठ कर पढ़ाई कर रही थी, मेरे बगल मैं सौरभ बैठ कर लैपटॉप में मूवी देख रहा था और तिरछी निगाहों से मेरी चूचियों को निहार रहा था।

मैंने उसे कहा- क्या हुआ? आज कैसे दूसरी मूवी देख रहे हो? उस दिन वाली मूवी नहीं है क्या जो रात में अकेले देख रहे थे...?

उसने बोला- वो अकेले देखने वाली है ना, इसलिए अभी नहीं देख रहा...

मैंने कहा- कभी मुझे भी दिखाना ब्लू फिल्म ! मैं भी देखूँ, ऐसा क्या होता है उसमें...

मेरा निशाना तो सौरभ था, यह सब कुछ तो मैं उस तक पहुँचने के लिए कह रही थी।

सौरभ बोला- कभी क्या, अभी देख लो !

और उसने एक ब्लू फिल्म चला दी... मैं अपनी ज़िन्दगी में पहली बार किसी लड़के के साथ बैठ कर ब्लू फिल्म देख रही थी... पहले एक लड़की और एक लड़का आए उन्होंने एक दूसरे को खूब चूमा, फिर एक एक कर के सारे कपड़े उतार दिए, फिर लड़का लड़की की चूत चाटने लगा, फिर लड़की ने भी लड़का का हथियार मुँह में लिया और मजे लेकर चूसने लगी.. फिर लड़के ने अपना लण्ड लड़की की चूत पर टिकाया और धक्के देने लगा, लड़की भी उसका खूब सहयोग कर रही थी...

सौरभ का लण्ड खड़ा हो चुका था, उसने लैपटॉप अपनी जाँघ पर रखा था, मैंने लैपटॉप सही करने के बहाने अपना हाथ उसकी जांघ पर रख दिया.. पैंट के तनाव से उसके लण्ड का कड़ापन साफ़ दिख रहा था। मैंने धीरे धीरे उसकी जांघ सहलाना शुरू किया।

कुछ देर तक सहलाने के बाद जब उसकी तरफ से कोई रेस्पोंस नहीं मिला तो मैंने सहलाना बंद कर दिया।

तभी उसनी कहा- प्लीज़ दीदी, रुकिए मत !

और मुझे चूमने लगा...

हम दोनों एक दूसरे को भूखे शेर की तरह चूमने लगे, उस समय हम दोनों के बदन एक दूसरे से ऐसे जुड़े थे कि बीच में से हवा भी नहीं गुजर सकती थी।

फिर सौरभ ने मुझे गर्दन के नीचे चूमना शुरू किया, कुछ ही देर मैं उसने मेरा टॉप उतारा और मेरी चूचियों को दबाने लगा और उन्हें पीने लगा। मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। उसने मेरा लोअर उतारा और फिर पैंटी ! अब मैं सौरभ के सामने नंगी लेटी हुई थी... और वह मेरे ऊपर लेट कर मेरे सारे बदन को चूमे जा रहा था...

मेरे बदन को चूमते चूमते उसका मुँह मेरी बुर पर चला गया और फिर उसने मेरी बुर चूमना-चूसना शुरू कर दिया। मेरे पूरे शरीर में मानो एक तरंग सी दौड़ गई हो, आखिर हो भी क्यूँ न ! आज ज़िन्दगी में पहली बार एक मर्द मिला था...

हम दोनों की सांसें तेज़ हो चुकी थी, मैंने कहा- सौरभ, अब मुझसे और नहीं रुका जा रहा...

उसने इतना ही सुनते फ़ौरन अपनी पैंट उतार दी और उसका खड़ा लण्ड मेरे सामने था, एक 6" का मोटा तगड़ा लण्ड !

उसका लण्ड देख कर मेरे दिल में एक प्यास सी जाग गई... मैंने अपने आप अपनी दोनों टाँगें फैला दी।

सौरभ मेरे ऊपर आया और अपना लण्ड मेरी चूत में डालने लगा। चूत काफी संकरी थी और लण्ड काफी मोटा ! जा नहीं पाया।

उसने दूसरा प्रयास किया लेकिन फिर लण्ड चटक गया... और मैं थोड़ी हंस सी पड़ी !

सौरभ मेरा मुँह देखने लगा और उठ कर तेल की शीशी ले आया.. उसने थोड़ा तेल मेरी चूत पर डाला और अपनी उंगली से उसे भीतर तक अच्छे से लगाने लगा। उसकी उंगली अंदर जाते ही मुझे मानो जन्नत सी मिल गई हो, मुझे बहुत मजा आ रहा था। फिर उसने थोड़ा तेल अपने लण्ड पर लगाया उसका लण्ड एकदम चमकने लगा और भी अच्छा दिखने लगा...

फिर से उसने अपना लौड़ा मेरी चूत पर टिकाया और एक जोरदार धक्का लगाया और उसका आधा लण्ड मेरी चूत में था। मेरी सांसें मानो अटक सी गई, पैर अकड़ने लगे और आँखों से आँसू छलक आए।

उसने पहले झटके के तुरंत बाद दूसरा झटका लगाया और मेरी चूत में से खून की धार फूट गई और दर्द से मैं कराह उठी...

और सौरभ धक्के पे धक्का लगाता गया, मुझे चक्कर सा आने लगा, मेरी आँखों के सामने अँधेरा सा छा गया और मैं बेहोश होने लगी। मेरी हालत देख सौरभ रुक गया, उसने अपना लण्ड बाहर निकाला जो मेरी चूत के खून से सन कर एकदम लाल हो गया था। उसने मुझे पानी दिया, मैंने पानी पिया तो थोड़ा होश आया।

मैं बाथरूम जाने के लिए उठी तो लड़खड़ा गई। सौरभ मुझे बाथरूम तक ले गया, मैंने अपनी खून से सनी योनि पर पानी डाला और साफ़ किया। बहुत दर्द हो रहा था, चिरमिराहट सी लग रही थी अभी तक !

फिर मैं नहाई और कपड़े पहन कर वापस आ गई। सौरभ वैसे ही नंगा बैठा हुआ था, उसने मुझसे पूछा- दीदी, आप ठीक तो हैं?

मैंने हंसते हुए कहा- हाँ यार... पर अभी और नहीं करेंगे ! दुख रही है !

और फ़िर सौरभ भी नहा लिया। उसके बाद हम दोनों सोने चले गए।

दूसरे दिन सुबह जब मेरी आँख खुली तो दस बज रहे थे, मौसी ऑफिस जा चुकी थी, तभी सौरभ चाय लेकर कमरे में आया और मुझे चाय दी... उसने कहा- दीदी, मैं तो कल डर ही गया था कि आप को क्या हो गया...

मैंने कहा- तुम्हें थोड़ा आराम से करना चाहिए था, तो ऐसा नहीं होता.. हम लोगों को सेक्स प्यार से मजे लेकर करना चाहिए, कोई मशीनी काम की तरह नहीं करना चाहिए कि लण्ड चूत में घुसा और एकदम हच-हचा-हच ! बेचारी लड़की तो मर ही जाएगी...

सौरभ एकदम चुप हो गया।

मैंने कहा- क्या हुआ? आज नहीं करोगे क्या...?

उसने कहा- क्यों नहीं !

और वो मेरे ऊपर चढ़ आया, थोड़ी चूमाचाटी की और दोनों नंगे हो गए ! उसने इस बार अपना लण्ड धीरे से अन्दर घुसाया और झटका मारा, मैं चीख पड़ी।

सौरभ रुक गया, फिर उसने धीरे धीरे अंदर बाहर करना शुरू किया। मुझे दर्द हो रहा था पर कुछ ही देर में मेरा सारा दर्द मजे में बदल गया, मैं बहुत उत्तेजित हो गई थी और मैं भी अपने चूतड़ और कमर उछाल उछाल कर उसका साथ देने लगी और कुछ ही देर में मैं झड़ गई और उसके तुरंत बाद सौरभ भी झड़ गया, उसने अपना सारा वीर्य मेरे पेट पर गिरा दिया और फिर मेरे ऊपर लेट गया।

और इसी तरह हम रोज नियम से अपना चुदाई खेल खलते रहे...

एक दिन रात में सेक्स करते समय सौरभ ने मुझसे गांड मरवाने के लिए कहा लेकिन मैंने पहले से सोच रखा था कि गाण्ड नहीं मरवाऊँगी, चाहे जो हो जाए क्योंकि मैंने सुना था कि गांड मरवाने में बहुत दर्द होता है।

हमने कई तरह से सेक्स किया, हम लोग रोज नेट पे सेक्स करने के नए नए पोज़ देखते और उन्हें करते, कभी टांग उठा के, कभी लेट के तो कभी खड़े होकर, कभी कंडोम लगा के, तो कभी तेल लगा कर, तो कभी विगोरा खाकर लेकिन मैंने कभी गाण्ड नहीं मरवाई और कुछ दिन के बाद मुझे घर वापस आना का हुआ तो उस दिन सौरभ ने मुझे छः बार चोदा और इतने दिन से सेक्स करते करते मुझे एक सम्पूर्ण औरत होना का अहसास होने लगा, मेरा शरीर काफी उभर आया था, जो नई ब्रा खरीदी थी, वो छोटी पड़ने लगी थी।

कूल्हे भी पीछे को उभर आए थे और बुर का तो भोंसड़ा बन गया था... मैं एक औरत बन कर अपनी बड़ी चूचियाँ, फटी चूत और एक अनोखा एहसास लिए घर को वापस चली आई...








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