Thursday, December 25, 2014

FUN-MAZA-MASTI बदलाव के बीज--82

 FUN-MAZA-MASTI
 बदलाव के बीज--82

अब आगे ....

 माँ वापस ड्राइंग रूम में आईं जहाँ हम बैठे हुए थे और बोलीं;

माँ: लो भई ...बहु नहीं जाना चाहती| उसका कहना है की वो यहाँ रूक के मानु का ध्यान रखेगी|

मैं: अरे...आप जाओ...मैं बच्चों के साथ हूँ ना|

भौजी: पर ये आपको सोने नहीं देंगे| छल कूद कर-कर के आपकी नाक में डीएम कर देंगे|

मैं: नहीं करेंगे...क्यों बच्चों आप तंग नहीं करोगे ना?

दोनों ने एक साथ हाँ भरी|

भौजी: और खाने का क्या?

मैं: मैं मैगी बना लूँगा..और हम तीनों वही खाएंगे?

पिताजी: ठीक है...तो बात पक्की| हम चारों जायेंगे और तुम तीनों घर में ऊधम मत मचाना! चन्दर बेटा जाओ और जल्दी से तैयार हो के आ जाओ|

दोनों निकल गए और बच्चे मेरे साथ कमरे में आ गए| मैंने दोनों को कंप्यूटर पे गेम लगा दी और दोनों खेलने लगे| दोनों बहिय शोर कर रहे थे पर मुझे इस शोर को सुन के मजा आ रहा था| फिर दोनों जिद्द करने लगे की मैं भी उनके साथ गेम खेलूं तो मैं भी उनके साथ बैठ गया| हालाँकि मेरे सर में दर्द हो रहा था पर...बच्चों की ख़ुशी के आगे सब काफूर हो गया| हम NFS Rivals खेल रहे थे| मैंने आवाज तेज कर दी और दोनों मुझे ही ड्राइव करने को कह रहे थे| जब मैं gadgets use करता और कोई गाडी थोक देता या उस पर gadgets use करता तो दोनों चिल्लाने लगते| इतने में माँ आ गईं;

माँ: हाँ तो ये आराम हो रहा है?

मैं: माँ दोनों जिद्द करने लगे तो....

माँ: ठीक है बेटा.....हम जा रहे हैं|

माँ: बाय

नेहा और आयुष: बाय-बाय दादी जी|

माँ: बाय बच्चों|

माँ चलीं गईं और हम तीनों फिर से खेलने लगे| घडी में चार बज रहे थे ...हम खेलते रहे..मैंने उन्हें frozen फिम दिखाई...घर पे पॉपकॉर्न थे वो बना के खिलाये...घर पे Thumsup पड़ी थी वो भी पी मतलब मैंने अपने कमरे को थिएटर बना दिया था, और फिर पता ही नहीं चला की शाम के आठ बज गए| माँ कह गई थीं की वो दस बजे तक आएँगी| कमरे में मूवी की आवाज बहुत तेज थी और अब भूख लगने लगी थी;


 मैं: तो बच्चों भूख लगी है?

नेहा और आयुष ने एक साथ हाँ में गर्दन हिलाई|

मैं: मुझे कुछ सुनाई नहीं दिया?

अब दोनों एक साथ चीखे "हाँ पापा"!!!

मैं: चलो फिर अब हम मिलके कुछ बनाते हैं?

तीनों किचन में आये और मैंने उन्हें 6 in 1 मैगी का पैकेट निकाल के दिया और उन्हें एक सेफ्टी scissor दी और पैकेट खोलने को कहा| (ये Recipe मेरी है ..कहीं से copy नहीं की है|) जब तक वो पैकेट खोल रहे थे मई फटा-फ़ट टमाटर-प्याज और मिर्च काटी| ये मेरा मैगी बनाने का नया ट्विस्ट था|

एक पतीले में मैगी उबाली और एक कढ़ाई में थोड़ा सा तेल डाला और फिर प्याज और मिर्च दाल दी...जब प्याज पाक गए तब उसमें टमाटर डाल के गैस की आंच कम की और ढक्कन ढक के पकने को छोड़ दिया| इधर मैगी उबाल गई थी, उसे छन के पानी निकाल दिया| इधर टमाटर गाल चुके थे, अब इसमें उबली हुई मैगी डाली और ऊपर से मैगी मसाला डाला और मिक्स किया..और my personal touch a hint of Sirka and one drop of soya sauce! Yummy!!! मैगी तैयार हुई...और मैंने तीन fork निकाले और कढ़ाई उठा के डाइनिंग टेबल पे ले आया ... नेहा और आयुष तो टेबल के ऊपर ही बैठ गए| तीनों ने कढ़ाई में ही खाया|

मैं: तो बच्चों कैसी लगी पापा की बनाई हुई मैगी?

नेहा: टेस्टी पापा!

आयुष: नहीं दीदी ...superb !!!

दोनों बहुत खुश थे! और उन्हें खुश देख के मैं भी खुश था| खेर खाना तो हो गया अब बाकी था सोना|

मैं: तो अब किस-किस को कहानी सुन्नी है?

दोनों ने हाथ उठा के एक साथ कहा; "मुझे...पापा"|

मैं: ठीक है..आप दोनों को सुनाऊँगा| चलो पहले ब्रश कर लो|

तीनों ने ब्रश किया और फिर हम बिस्तर पर लेट गए| पहले थोड़ी "पिलो फाइट" हुई.. आयुष और नेहा एक टीम में थे और मैं अकेला...दोनों ने मुझे गिरा दिया और तकिये से मुझे मारने लगे...मैं दोनों को गुदगुदी कर के हटा देता पर वो फिर मुझे खींच के गिरा देते....इसी मस्ती में हम तीनों खूब हँसे...मजे किये! घडी ने नौ बजाये और आख़िरकार मैं बेडपोस्ट का सहारा लेके बैठा गया और मेरी एक बगल नेहा थी और दूसरी बगल में आयुष| मैं दोनों के सर पे हाथ फेरते हुए कहानी सुनाने लगा|दोनों मुझे झप्पी डाल के सो गए| नींद तो मुझे भी आ रही थी...


 पर दिमाग ने कहा की थोड़ा self assessment करते हैं जो उस दिन भौजी ने मुझे कहा था| कुछ देर self assessment करने के बाद मैंने फैसला कर लिया और फिर बैठे-बैठे ही सो गया| सुबह छः नजी मेरी आँख खुल गई और मैंने दोनों बच्चों को प्यार से उठाया| दोनों कुनमुना रहे थे...फिर दोनों के गालों को Kiss किया और नेहा को पीठ पे और आयुष को गोद में उठा के मैं कमरे से बहार आया| बाहर बैठक में पिताजी और चन्दर भैया बैठे थे और मुझे इस तरह दोनों को उठाय हुए देख दोनों मुस्कुरा दिए| इतने में भौजी स्कूल यूनिफार्म और बैग्स ले के आ गईं| स्कूल घर के ज्यादा नज्दीक नहीं था..करीब आधा घंटा दूर इसलिए पिताजी ने मुझे प्राइवेट वैन लगाने को बोला था| मैं बच्चों को वैन में बैठा आया और फिर फ्रेश होने लगा| तैयार हो के बाहर निकला तो भौजी दिखीं..उनके हाथ में चाय की प्याली थी|

भौजी: So you guys had your fun right?

कमरे की हालत देखि तो तीनों ने कमरे की हालत ख़राब कर दी थी...बिस्तर तहस नहस हो गया था| टेबल पर पॉपकॉर्न बिखरे हुए थे...जगह-जगह कोल्ड ड्रिंक गिरी हुई थी....और रसोई तो मैं साफ़ करनी ही भूल गया था|

मैं: हाँ...

भौजी: तो मुझे क्यों भेज दिया? मैं होती तो और मजा आता?

मैं: यार .... after all these years I really needed sometime alone with kids. So….वैसे भी मुझे लगा की इसी बहाने आपके और दोस्त बनेंगे|

भौजी: पर मेरा मन नहीं था...आपकी वजह से गई| और दोस्त...वो तो मुझे बनाने आते ही नहीं| वहां तो बस Gossip ही चल रही थी! बोर हो गई.....

भौजी मुझे चाय दे के जाने लगीं तो मैं चाय का सुड़का लेते हुए बोला ;

मैं: Thanks !

भौजी: किस लिए?

मैं: For the advice ..... कल रात self assessment के बाद.... finally उस लड़की का भूत सर से उतर गया|

भौजी बस मुस्कुरा दीं और चलीं गईं| उस दीं पिताजी ने मुझे सप्लायर के पास भेजा था कुछ पेमेंट क्लियर करने को| उसके बाद मैं लंच के लिए घर जल्दी आ गया और अपने कंप्यूटर पे बैठ ये कहानी टाइप कर रहा था, की तभी माँ ने आवाज लगाईं|

मैं: जी माँ

माँ: बीटा कोई सब्जी नहीं है..जा के कुछ ले आ?

मैं: मैं? सब्जी? मजाक कर रहे हो? आजतक जब भी सब्जी लाया हूँ तब आप होते हो या दिषु....मुझे सब्जी लेनी कहाँ आती है?

तभी भौजी बीच में बोल पड़ीं;

भौजी: माँ...मैं सीखा देती हूँ इन्हें|

माँ: हाँ बहु...तुम दोनों जाओ पर जल्दी आना, बारह बज गए हैं|

मैंने थैला उठाया और हम बाजार पहुँच गए| बाजार करीब पंद्रह मिनट दूर था| भौजी ने घूँघट हटा लिया था...मतलब सर पे पल्लू था|तभी भौजी ने अचानक मेरा हाथ पकड़ लिया| उनके छूते ही मुझे करंट लगा....बड़ा अजीब सा एहसास हुआ... जैसे किसी पवित्र चीज के छूने पर होता है| मैंने अपना हाथ धीरे से छुड़ा लिया| भौजी को ये बात अटपटी लगी जो उनके चेहरे से झलक रही थी पर उन्होंने कुछ नहीं कहा ..ये सोच के की हम घर के आस-पास ही हैं और यहाँ लोग मुझे जानते हैं| शायद इस दर से मैं उन्हें स्पर्श नहीं कर रहा! खेर हम सब्जी ले के घर आ गए| मेरे जन्मदिन आने तक भौजी कई बार मुझे छूतीं... कभी अपने घर पे...कभी हमारे घर पे...अकेले में ...सब के सामने नजर बचा के...पर हर बार मैं खुद को उनके स्पर्श से बचाने की कोशिश करता| आखिरकर मेरा जन्म दीं आ ही गया|


 जन्मदिन से एक रात पहले, बारह बज के एक मिनट पे माँ-पिताजी मुझे B'day Wish करने आये| उनके जाने के बाद मैं लेट गया, की तभी दो मिनट बाद भौजी का फोन आया;

भौजी: Haapy B'day जानू!

मैं: Thanks !

भौजी: I Love You

मैं: (अब मुझे उन्हें I Love You बोलने में भी अजीब लगने लगा था| जुबान जैसे ये बोलना ही नहीं चाहती थी....दर रही थी कुछ कहने से!) हम्म्म्म ....

भौजी: ये क्या होता है "हम्म्म" say it properly

मैं कुछ नहीं बोला और उन्हें जूठ-मूठ के खर्राटें सुनाने लगा| हालाँकि वो जानती थी की मैं खरांटे नहीं मारता पर उन्होंने बिना कुछ कहे फोन रख दिया| कुछ देर बाद दिषु का फोन आया और उसने भी मुझे wish किया| फिर मैं सो गया...बरसों बाद आजकल मुझे चैन की नींद आ रही थी| All Thanks to her ! अगली सुबह surprises वाली थी| मैं सो रहा था की नेहा और आयुष कमरे में आये और मेरे ऊपर कूद पड़े और मेरे गालों को Kiss करते हुए बोले; "Happy B'day पापा !!!"

मैं: थैंक्स बच्चों!!! (फिर मैंने उन्हें चूमा और उठ के बैठ गया|)

पास ही भौजी भी खड़ीं थी और मुस्कुरा रहीं थी;

मैं: Good Morning !

भौजी: (नाराज होते हुए बोलीं) Good Morning !

मैं: अब मैंने क्या कर दिया की आपका मुँह उतरा हुआ है?

भौजी: कल रात में आपने मेरी बात का जवाब नहीं दिया?

मैं: वो मैं सो गया था....All thanks to you ...की मुझे आजकल चैन की नींद आ रही है|

भौजी: ठीक है...तो अब कह दो?

मैं: क्या? (मैंने अनजान बनते हुए कहा)

भौजी: I Love You

मैं: (सोच में पड़ गया) बाद में...अभी फ्रेश हो जाऊँ| (और मैंने जानबूझ के माँ को आवाज लगाईं) माँ....माँ...

माँ: हाँ बोल?

मैं: पिताजी चले गए?

भौजी: (बीच में बोल पड़ीं) मुझसे भी तो पूछ सकते थे...माँ को क्यों तंग किया?

मैं: ओह ! सॉरी !

भौजी समझ गईं की मैं बात घुमा रहा हूँ|

माँ: अरे बहु इसका तो ऐसा ही है| तू चल मेरे साथ...लाड-साहब का नाश्ता बनाना है|

मैं: नहीं..आप लोग रहने दो ....मैं आज अंडा खाऊंगा|

माँ: लो भई... सबसे आखिर में बना लिओ| पहले अपने भैया और पिताजी को जाने दे|

मैं उठ के बाथरूम में घुसने ही वाला था की नेहा ने मेरा हाथ पकड़ा और वापस पलंग पे बैठा दिया|

नेहा: पापा ..आज आप दो बजे आ जाना?

मैं: क्यों?

आयुष: वो तो सरप्राइज है|

मैं: ooh I love surprises ..और specially अगर वो आप दोनों ने प्लान किया है तो!

नेहा: हम दोनों ने नहीं...तीनों ने|

आयुष: हमने तो बस के....

आगे कुश भी बोलने से नेहा ने आयुष को रोक दिया|

नेहा: वो सब बाद में| दो बजे...पक्का...वरना हम आपसे बात नहीं करेंगे|

मैं: ठीक है बीटा...अब आप लोग स्कूल के लिए तैयार हो जाओ...!!!

दोनों को वैन में बैठा के मैं लौटा तो पिताजी और चन्दर भैया निकल रहे थे|

माँ: बेटा तेरी भौजी ने टमाटर-प्याज काट दिए हैं| अंडे ले आया तू?

मैं: हाँ..ये रहे| (मैंने अंडे एक कपडे के बैग में छुपा रखे थे, ताकि चन्दर भैया ना देख लें| पिताजी तो जानते थे की मैं अंडा खाता हूँ|)


 भौजी: क्या बनाओगे?

मैं: भुर्जी

भौजी; वो क्या होती है?

मैं: जब बनेगी तब देख लेना?

मैंने फटाफट भुर्जी बनाई और जब उसकी खुशबु भौजी की नाक में गईं तो वो मेरे पास आईं|

भौजी: तो इसे कहते हैं भुर्जी?

मैं: हाँ...खाओगे?

माँ: ओ लड़के क्यों सब का धर्म भ्रस्ट करने में लगा है!!!!

मैं: पूछ ही तो रहा हूँ?

भौजी: माँ खुशबु तो बहुत अच्छी है... चख के देखूं?

माँ: तेरी मर्जी बहु...

भौजी: पर आप किसी से बताना मत|

माँ: अरे नहीं बहु...खा ले..कोई बात नहीं.... यही उम्र तो है तुम लोगों की खाने पीने की.... अब ये टी बड़े बुजुर्गों ने नियम बना रखे हैं की ये नहीं खाना ..वो नहीं खाना...और एक आध बार खाने से कुछ नहीं होता ….ये भी तो खाता ही है|

माँ खाने-पीने के लिए कभी नहीं रोकती थी, बस ये कहती थी की खाना अच्छा खाओ| जहाँ तक Hardcore Non-Veg की बात है तो उसे खाने का मेरा मन कभी नहीं हुआ| मेरा ये मन्ना है की इक जीव की हत्या कर देना ...वो भी सिर्फ स्वाद के लिए? छी!!! हाँ अण्डों के बारे में मुझे ज्यादा डिटेल नहीं पता...अगर ये भी उसी श्रेणी में आता है तो मैं इसे भी खाना बंद कर दूँगा|

भौजी: आप खिला दो|

मैं: क्यों?

भौजी: मेरा हाथ लगाने को मन नहीं करता|

मैं: पर खाने का करता है?

फिर मैंने एक प्लेन परांठा जो माँ ने बनाया था उस के साथ भौजी को एक छोटा कौर भुर्जी के साथ खिलाया|

भौजी: उम्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म wow !!

माँ: कैसा लगा बहु?

भौजी: बहुत स्वादिष्ट माँ!

मैं: लो भई हो गया धर्म भ्रस्ट!

ये सुन के सब एक साथ हँस पड़े| फिर भौजी ने आखिर कर अंडा पहलीबार छुआ और अपने हाथ से खाया| नाश्ता खा के मैं बर्तन धोने जा रहा था की भौजी ने रोक दिया;

भौजी: रहने दो ..मैं धो लुंगी| धर्म तो भ्रस्ट हो ही गया! (और हम फिर से हँस पड़े)

मैं भौजी और माँ को बाय कह के निकल गया| जाते समय पिताजी ने मुझे काम समझा दिया था| अब बस देर थी दो बजने की और मुझे भौजी के घर पहुँचने की|


 पिताजी ने मुझे किसी से पेमेंट लेने भेजा था...तो मैं उसी के ऑफिस में बैठा था| उस आदमी को आने में देर हो गई| वो आया 01 : 45 pm ...देरी की सुइन क्षमा मांगी और मैंने फटाफट उससे पैसे लिए और बैंक भागा| बैंक पहुँचते-पहुँचते दो बज गए| लंच हो गया अब ढाई बजे बैंक खुलना था| मैं वहीँ बैठा था, की तभी भौजी का फोन आया;

नेहा: हेल्लो पापा...

मैं: हाँ बेटा

नेहा: आप कहाँ हो? कब आ रहे हो?

मैं: बेटा बस बैंक आया हूँ...लंच टाइम हो गया है....थोड़ा लेट हो जाऊँगा|

इतने में आयुष की आवाज आई;

आयुष: पापा अगर आप जल्दी से नहीं आये तो कट्टी!

मैं: बेटा...45 मिनट लगेंगे बस... आपके दादु ने पैसे जमा करनाए को बोला है..बस बैंक आधे घंटे में खुलेगा .... पैसे जमा करा के मैं आपके पास ही आ रहा हूँ|

फिर भौजी की आवाज आई;

भौजी: जानू...45 मिनट में नहीं आये ना तो हम में से कोई बात नहीं करेगा|

मैं: ठीक है बाबा!

मैंने कह तो दिया की मैं 45 मिनट में आ जाऊँगा पर घर से बैंक आधा घंटा दूर था| ना मेरे पास कार थी न बाइक... ऊपर से घर पे लंच तीन बजे होता था !!! खेर बैंक का लंच खत्म हुआ पर कॅश जमा कराने की लाइन बहुत बड़ी थी| जिस बन्दे को मैं जानता था वो आज छुट्टी पे था| फिर भी किसी तरह तिगड़म लगा के मैंने पैसे जमा करा दिए और बैंक से भागा| ऑटो किया...पर रास्ते में जाम था! इधर भौजी के फोन इ फोन आ रहे थे! घर पहुँचते-पहुँचते 03 : 15 pm हो गए| अब घर पहुंचा तो भौजी का मुँह फुला हुआ ...नेहा का मन फुला हुआ..और आयुष का भी मुँह फुला हुआ था| तीनों में से कोई मुझसे बात नहीं कर रहा था| मैं डाइनिंग टेबल के पास आके खड़ा हुआ... नेहा, आयुष और भौजी तीनों रसोई में खड़े थे और मुझे देख के अपना गुस्सा जाहिर कर रहे थे| मैंने इशारे से आयुष और नेहा को अपने पास बुलाया पर कोई नहीं आया| फिर मई कान पकडे और घुटनों पे बैठ गया| मैंने दोनों को गले लगाने का इशारा किया तो दोनों भागते हुए आये और मेरे गले लग गए|









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