Thursday, December 25, 2014

FUN-MAZA-MASTI बदलाव के बीज--86

FUN-MAZA-MASTI
 बदलाव के बीज--86

अब आगे ....

 भौजी: (खुसफुसाते हुए) अब बताओ?

मैं: क्या बताऊँ?

भौजी: उखड़े-उखड़े क्यों हो?

मैं: नहीं ऐसा नहीं है... वो कल रात को...जो हुआ ...उसके लिए I'm Terribly Sorry ! मैं आपको समझा नहीं सकता की मुझे कितना बुरा लगा था....और किस तरह मैंने खुद को रोक|

भौजी: जानती हूँ.... और समझ सकती हूँ| पर मैं वो सब नहीं जानना चाहती .... मैं बस आपको चाहती हूँ! किसी भी कीमत पे!!!

मैं: पर मैं वो नहीं कर सकता| मुझे डर लगता है....की अगर आप प्रेग्नेंट हो गए तो?

भौजी: तो क्या होगा?

मैं: आप सब से क्या कहोगे...की ये किसका बच्चा है?

मेरी बात सुन के भौजी चुप हो गईं|

मैं: तब आप ये नहीं कह सकते की ये चन्दर भैया का है...क्योंकि उन्होंने तो आको सात सालों में छुआ नहीं| और हर बार आप तभी प्रेग्नेंट क्यों होते हो जब मैं आपके आस-पास होता हूँ? पिछली बार भी आप तभी प्रेग्नेंट हुए जब मैं गाँव में थे| और इस बारी भी...जब आप शहर में हो? है को जवाब इन सवालों का? इसी सब के चलते मैं वो सब नहीं कर सकता| कम से कम हम एक साथ तो हैं! इसलिए प्लीज...प्लीज मुझे उसके लिए मत कहो|

भौजी: आप जानते हो मुझे किस बात का सबसे ज्यादा बुरा लगा? की आपने मेरे अंदर जल रही आग को तो शांत कर दिया पर अपने अंदर की आग को दबा दिया|

मैं: किसने कहा? मैंने कल रात को (हाथ हिला के इशारा करते हुए) किया था...I was okay !

भौजी: क्यों जूठ बोल रहे हो? गाँव आने से पहले करते थे वो सब..गाँव से आने के बाद मैं शर्त लगा के कहती हूँ आपने वो कभी नहीं किया|

उनकी बात बिलकुल सही थी|

भौजी: और आज सुबह छत पे आपके दो अंडरवियर टंगे थे! मतलब कल रात को आप नहाये थे... इसी तरह खुद को ठंडा किया ना?

मेरी चोरी पकड़ी गई थी....तो मैंने सर झुका के हाँ कहा|

भौजी: इसलिए मेरे लिए ना सही...कम से कम आपके लिए तो एक बार..... let me help you? Let me relieve you!

मैं: ना यार... I'm alright ...और अगर ये सब एक बार शुरू हो गया तो.....फिर रुकेगा नहीं| its better we don’t involve in this physical relationship!

भौजी: तो अब आप मुझे गले भी नहीं लगाओगे? Kiss भी नहीं करोगे? मतलब मेरे आस-पास भी नहीं भटकोगे?

मैं: मैंने ऐसा कब कहा| मैं आपको दिल से अब भी उतना ही प्यार करता हूँ जितना पहले प्यार किया करता था| पर प्यार में ये जरूरी तो नहीं की इंसान physical भी हो? मैं आपको इस तरह गले लगाउँगा... (मैंने भौजी को अपने गले लगाया) ...और आपको Kiss भी करूँगा (मैंने भौजी के होठों को हलके से चूम लिया|) पर इसके आगे ....कभी नहीं बढूँगा|

भौजी: ठीक है .... मेरे लिए इतना ही काफी है|


 मैं दिल से नहीं चाहता था की ऐसी किसी दुविधा में खुद पडूँ या उन्हें डालूँ| पर भौजी के जवाब में ना जाने मुझे क्यों वो आश्वासन नजर नहीं आया जो आना चाहिए था! खेर दिन बीतने लगे...नए प्रोजेक्ट के चलते मुझे और भौजी को साथ बिताने के लिए समय कम मिलने लगा| पर हम एक दूसरे से कटे नहीं थे| फ़ोन पे चैट किया करते थे ... जब कभी समय मिलता तो मैं उन्हें गले लगा लेता...Kiss करता ...पर इसके आगे जाने की कभी हिम्मत नहीं हुई! करवाचौथ से एक हफ्ते पहले की बात थी| सुबह-सुयभ जब भौजी मेरे कमरे में चाय ले के आईं तो उनका मूड ऑफ था!

मैं: Good Morning जान!

भौजी: ह्म्म्म्म्म....

मैं: क्या बात है? मूड क्यों ऑफ है?

भौजी: कुछ नहीं...

मैं: यार बताओ तो सही ?

पर वो कुछ नहीं बोलीं और बाहर चली गईं| सुयभ-सुबह मुझे कुछ सामान लेने जाना था तो मैं वहाँ निकल गया और फिर समय नहीं मिला की उनसे कुछ और पूछ सकूँ| दोपहर को लंच तुम्हे मैं फ्री हो गया और उन्हें फोन किया पर उन्होंने फोन नहीं उठाया| मैंने फिर माँ को फोन किया तब पता चला की भौजी का मन बहुत दुखी है, क्यों ये वो बताती नहीं! मैंने माँ को फोन किया;

मैं: हेल्लो माँ...

माँ: हाँ बेटा...कब आ रहा है लंच के लिए?

मैं: मैं अभी फ्री हूँ और रास्ते में हूँ| आप ये बताओ की आखिर हुआ क्या है उनको? सुबह से उनका मुँह क्यों उतरा हुआ है? (मेरा तातपर्य भौजी से था|)

माँ: पता नहीं बेटा.... शायद तेरे भैया से कुछ कहा-सुनी हुई होगी|

मैं: माँ...आप अगर कहो तो मैं बच्चों को और उनका पिक्चर ले जाऊँ...शायद मूड बदल जाए|

माँ: ठीक है...कब जा रहे हो तुम?

मैं: मैं अभी आता हूँ...फिर पूछता हूँ उनसे|

मैं आधे घंटे बाद घर पहुँचा, भौजी उस समय किचन में चावल बना रहीं थीं| मैं अंदर घर में घुसा और बिना कुछ कहे उनका हाथ पकड़ के उन्हें कमरे में खींच लाया|


 मैं: Okay tell me what is it? Why are you so pissed off?

भौजी कुछ नहीं बोलीं|

मैं: okay ... get ready we're going for a movie .... get dressed !

भौजी: मूड नहीं है|

मैं: Hey I'm not asking you .... I'm ordering you ! (मैंने अपना वही डायलॉग मारा|)

भौजी: तो आप भी मुझे हुक्म दोगे? आप भी जबरदस्ती करोगे?

मैं: Hey ..Hey .... Hey .... I didn't mean that ! और जबरदस्ती..... did he?

भौजी कुछ नहीं बोलीं बस उनकी आँख से आँसूं का एक कटरा छलका और वो चली गईं| मेरे रोम-रोम में आग लग गई| आँखों में खून उतर आया.... I just wanted to punch that guy! मैंने अपना फोन उठाया और चन्दर भैया को फोन मिलाया....

मैं: (गरजते हुए) कहाँ हो?

चन्दर भैया: गुडगाँव ..पर हुआ क्या? इतने गुस्से में क्यों हो?

मैं: वहीँ रहना ....मैं आ रहा हूँ|

मैंने गाडी भगाई और घर से गुडगाँव का एक घंटे का रास्ता 39 मिनट में पूरा किया| जैसे ही मैं गाडी पार्क कर रहा था की तभी मुझे दूसरी साइट से फोन आया| फोन लेबर का था, उसने बताया की आपके चन्दर भैया ने defective fitting लगवाई थीं और अब मालिक गुस्से में आग-बबूला हो रखा है| पिताजी गाजियाबाद गए हुए थे और यहाँ सिर्फ मैं ही संभालने वाला था| अब इस फोन ने तो आग में घी का काम किया| अभी उसका फोन रखा ही था की उसी मालिक का फोन आगया|

सतीश जी: मानु...ये क्या ड्रामा है? तुमने किस आदमी को ठेका दिया है? साले ने साड़ी की साड़ी फिटिंग बकवास लगवाई है... कमोड लीक कर रह है...वाश बसिनस (washbasins) सारे गंदे मंगवाए हैं....कोई फिनिश नहीं...सब बकवास काम| हमने Faucets के लिए कहा था और तुम्हारे आदमी ने प्लास्टिक के नल लगा दिए! इसीलिए काम दिया था तुम्हें?

मैं: सर..सर..please listen to me ....

सतीश जी: क्या सुनूँ? आगे से कोई भी काम तुम लोगों को नहीं दूँगा| और पूरी कोशिश करूँगा की कोई काम न मिले तुम लोगों को!!!

मैं: सर देखिये...आपका गुस्सा जायज है...but please let me talk to the guy and don't worry I'll get it replaced at no extra cost! Please Sir gimme a chance!

सतीश जी: ठीक है..कल तक साड़ी चीजें रेप्लस हो जानी चाहिए वरना....

मैं: Sir I won't give you another chance!

सतीश जी: You Better Be!




अब मैंने फोन काटा और समय था गुस्से को बाहर निकालने का|


 मैं पाँव पटकते हुए पहुँचा और उन्हें इशारे से अलग बुलाया| अंदर एक कमरा था जिसमें सामान पड़ा हुआ था पर कोई लेबर नहीं थी .....उनसे मुझे शराब की बू आ रही थी|

मैं: शराब पी है?

चन्दर भैया: नहीं तो...

मैं: कसम खाई थी न तुमने ...वो भी अपनी माँ की...की तुम शराब को हाथ तक नहीं लगाओगे?

चन्दर भैया: वो मेरी माँ है... मैं चाहे कसम तोडूं या जो भी करूँ...तुझे उससे क्या?

मैंने चन्दर भैया को धक्का दिया और दिवार से लगा के खड़ा किया और उसकी कमीज के कालर पकड़ लिए;

मैं: वो मेरी भी बड़की अम्मा हैं...और क्यों परेशान करते हो अपनी पत्नी को?

चन्दर भैया: ओह! तो ये बात है! तो उसने भेजा है तुम्हें? और तुम्हें उससे क्या?

मैं: उन्होंने कुछ नहीं कहा...पर उनके बिना कहे ही मैं समझ गया की कौन सी आग लगी है तुझ में| वो मेरी दोस्त है..और अगर कोई भी उसे परेशान करे तो मैं ये भूल जाऊँगा की मेरे सामने कौन खड़ा है| I don't give a danm about who you are?

चन्दर भैया: अबे ओ ...दूर रह मेरे परिवार से!

उन्होंने अपना कालर छुड़ाया और मुझे धक्का देना चाहा पर मैंने उसे फिर से धक्का दिया और दिवार से उसका सर जा टकराया| मैंने एक घूसा उनके पेट मारा और सीधे हाथ से उन्हें लताड़ा फिर उन्हें दुबारा दिवार से टिका के खड़ा किया| अपनी कोहनी उनके गले पे रखी और कहा;

मैं: सुन...एक बार बोलूँगा.....दुबारा तूने उन्हें हाथ भी लगाया ना तो तेरी हड्डियां तोड़ दूँगा ...समझ गया?

उस समय चन्दर भैया नशे में धूत थे.... और मेरे एक धक्के से उनकी फट गई| अब चूँकि मैं शरीर में उनसे बलिष्ठ था तो वो मुझे कुछ डरे हुए से लगे| फिर अचानक कुछ बुदबुदाये;

चन्दर भैया: साल...न घर में बीवी छूने देती है...और यहाँ ये ...अपने शरीर का डर दिखा के मुझे डराता है| कुत्ते...कुत्ते जैसी हालत हो गई है|

मैं: तू इसी के लायक है! ना तू उनकी बहन पे बुरी नजर डालता और न आज तेरी ये हालत होती!

चन्दर भैया: तुझे...तुझे सब पता है?

मैं: हाँ... और ये भी पता है की तूने सतीश जी के यहाँ जो plumbing के काम में गबन किया है उसके बारे में भी|

चन्दर भैया: क...क...क्या...क्या किया मैंने?

मैं: सारा माल घटिया लगाया तूने...और वो फोन कर के मेरी मार रहा था| बताऊँ पिताजी को?

चन्दर भैया: मैंने कुछ ....कुछ नहीं किया....वो तो... (उनकी आवाज में घबराहट थी|)

मैं: Shut Up!!!

चन्दर भैया: (गिड़गिड़ाते हुए) नहीं भैया...प्लीज चाचा को कुछ मत कहना ....प्लीज... मैं हाथ जोड़ता हूँ| आप जो कहोगे वो करूँगा...कभी उसे हाथ नहीं लगाउँगा...वैसे भी वो कौन सा मुझे छूने देती है| कल कोशिश की तो साली ने मुझे धकेल दिया|

मैंने एक बार फिर उनका गाला पकड़ा और उन्हें दिवार से दे मारा;

मैं: (मैंने गुस्से में उन्हें तीन-चार थप्पड़ जड़ दिए) ओये ...तमीज से बात कर उनसे! समझा.... वरना मुँह तोड़ दूँगा तेरा!

चन्दर भैया: ओह सॉरी...सॉरी भैया...माफ़ कर दो....प्लीज मुझे जाने दो...मैं आगे से उसे कभी नहीं छूँगा.... कोई तकलीफ नहीं दूँगा...प्लीज...प्लीज ...प्लीज !


 मैंने उसका गाला छोड़ा और वहाँ से निकल के सतीश जी के यहाँ पहुँचा| वहाँ पहुँच के मैंने सारी तसवीरें खींचीं...इस आदमी ने सारा काम उल्टा कराया था| प्लास्टिक की पाइप की जगह लोहे की पाइप्स लगवाईं वो भी जंग लगी हुई| कमोड ...wash basins ....Faucets .... सब कुछ थर्ड क्वालिटी! अगर पिताजी देखते तो पक्का चन्दर को सुना देते... उसने तो सामान के Bill में भी घपला किया था| जहाँ से उसने सामान मंगवाया था वो whole seller था और हमारी अच्छी जान-पहचान थी| जब मैंने उसे फोन किया तो उसने इस घपले के बारे में बताया| मेरे कान खड़े हो गए, ये सुन के की उसने दस हजार का घपला किया था और जान-बुझ के ये सामान आर्डर किया था| जब दुकानदार ने उससे कहा की ऐसा सामान क्यों मंगवा रहे हो तो वो बोला की एक बार लग जाए तो घंटा कोई कुछ उखाड़ लेगा मेरा| मैंने उसकी साड़ी बातें रिकॉर्ड कर लीन और उससे नए सामान का आर्डर दिया और पुराने समानक बिल भी मँगवा लिया| मैं पिताजी को ये सब नहीं बताना चाहता था पर मैं जानता था की कभी न कभी ये बात खुलेगी जर्रूर| उस दिन मैं घर नहीं लौटा...लेबर से ओवरटाइम करा के सारा काम सुबह तक खत्म करा दिया| दोपहर बारह बजे सतीश जी आये और काम देख के खुश हुए| उन्होंने कल के व्यवहार के लिए अपनी तरफ से क्षमा मांगी....मैंने बात संभाल ली और उन्हें खुश कर दिया| अगले दिन दोपहर को घर आया तो पिताजी घर से निकलने वाले थे| जब उन्होंने कहा की मई कहाँ था तो मैंने कह दिया की सतीश जी का काम करवा रहा था| तब उन्होंने चन्दर भैया को डाँट लगवाई क्योंकि उन्होंने एक दिन पहले कहा था की काम लघभग खत्म हो गया है| पर जब मैंने एक पूरा दिन उसमें बर्बाद किया तो उन्हें गुस्सा आ गया| वो तो शुक्र था की मैंने उन्हें घपले वाली बात बताई नहीं वरना आज तो काण्ड हो जाता| पिताजी ने आज मुझे आराम करने को कहा और चन्दर भैया को अपने साथ ले के चले गए| मैं नहाया और फिर अपने कमरे में प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाने लगा| ये मेरी आदत थी की काम खत्म होने के बाद उसकी रिपोर्ट जर्रूर बनाता था| अब इसमें मैं घपले का जिक्र तो कर नहीं सकता था पर फिर भी मैंने उसकी एक अलग रिपोर्ट बनाई! इतने में भौजी खाना ले आईं;

भौजी: कल आप घर आये नहीं?

मैं: हाँ काम ज्यादा था...

भौजी: जानती हूँ...क्या काम था....तो सबक सीखा दिया आपने उन्हें?

मैं: बता दिया सब उसने?

भौजी: हाँ...कल रात को कह रहे थे की मैंने आप से शिकायत की ...और आपने उनकी पिटाई भी की!

मैं: He deserved that ! आपका ख़याल आगया इसलिए ज्यादा नहीं पीटा वरना कल धुलाई पक्की थी उसकी| साले ने अम्मा की जूठी कसम खाई और आपको छूने की कोशिश की| सजा तो मिलनी ही थी|

भौजी: पर आपने ऐसा क्यों किया? अगर उन्होंने पिताजी से शिकायत कर दी तो?

मैं: नहीं करेगा..और कर भी तो I don't give a fuck !!!

भौजी: ये क्या हो गया है आपको? क्यों ऐसी भाषा का प्रयोग कर रहे हो?

मैं: मेरा दिमाग खराब हो गया है... उस साले की हिम्मत कैसे हुई आपको हाथ लगाने की?

भौजी: देखिये अभी शांत हो जाइए और खाना खाइये|

मैं: आपने खाया?

भौजी: नहीं...

मैं: तो बैठो यहाँ और मेरे साथ खाओ|

हम खाना खाने लगे| भौजी मुझे अपने हाथों से खिला रहीं थीं और मैं उन्हें खिला रहा था| 



भौजी: आप गुस्से में अच्छे नहीं लगते|

मैं: और आप भी ....

भौजी: हम्म्म्म ...

मैं: आपने कभी बताया नहीं की भैया फिर से शराब पीने लगे हैं?

भौजी: वो.... गाँव में कभी-कभी रात को पी लिया करते थे..... पर किसी को पता नहीं था की...वो पीते हैं|

मैं: आप कब से उनकी गलतियों पे पर्दा डालने लगे?

भौजी: मुझे डर था की आप उनके साथ यही करोगे जो आपने आज किया|

मैं: उन्होंने अपनी माँ की कसम तोड़ी है...मैं क्या अगर पिताजी को पता चल गया की उन्होंने उनकी भाभी की कसम तोड़ी है तो...वो उन्हीने मारने से बिलकुल नहीं हिचकेंगे|

हम पलंग पे बैठे खाना खा रहे थे| पलंग पे फाइल्स और कागज़, bills वगैरह फैले हुए थे... इतने में उनकी नजर मेरी रिपोर्ट पर पढ़ी| उन्होंने उसे उठाया और पढ़ा;

भौजी: ये...ये क्या है?

मैं: चन्दर भैया की करनी!

भौजी: क्या? (वो हैरान थीं)

मैं: हाँ...उन्होंने दस हजार का घपला किया| मुझे पता नहीं चलता पर कल उस मालिक का फोन आया और उसने मुझे खरी-खोटी सुनाई ... साइट पे पहुँच के मैंने छन-बीन की तो ये सच सामने आया| इसीलिए कल सारा दिन उनका काम फाइनल कराया और घर नहीं आ पाया!

भौजी: मैंने कुछ दिन पहले उनके पास नोटों की गड्डी देखी थी...मुझे लगा की शायद पिताजी ने उन्हें दिए होंगे...पर ....ये .... OMG !!! आपने पिताजी को बताया?

मैं: नहीं....

भौजी: पर क्यों?

मैं: क्योंकि पिताजी ये सब बर्दाश्त नहीं करेंगे! काम के प्रति वो बहुत ही संवेदनशील हैं| वो बैमानि बर्दाश्त नहीं करते| अगर मैने ये गलती की हो तो वो मुझे घर से निकाल देते| और अगर उन्हें पता लग गया तो वो भैया को और आपको वापस भेज देंगे! और ये मैं नहीं चाहता! मैं आपको दुबारा खो नहीं सकता!

भौजी: तो ये नुक्सान कौन भरेगा?

मैं: मैं..और कौन.... वैसे भी खुदगर्ज़ी की कुछ तो सजा मिलनी ही चाहिए!

भौजी: नहीं...आप नहीं भरेंगे...मेरे पास कुछ....

मैं: Shut Up! खबरदार जो मेरे सामने दुबारा ऐसी बात कही तो|

हमारा खाना हो गया और वो बर्तन ले के चली गईं| मैं रिपोर्ट बनाने में लग गया और वो भी बिस्तर के दूसरी तरफ बैठ के कुछ सिलने लगीं|  


भौजी: अब सो जाइए....

मैं: आप की गोद में सर रखने की इज्जाजत है?

भौजी ने हाँ में सर हिलाया और मुस्कुराने लगीं| मैंने उनकी गोद में सर रखा और उन्होंने मेरे सर को सहलाना शुरू कर दिया| इतने में बच्चे आ गए और मेरे साथ लिपट के सो गए| भौजी की उँगलियाँ बालों में अपना जादू चला रहीं थीं| और अभी मेरी आँख बंद ही होने वाली थी की भौजी ने झुक के मेरे होठों को अपने मुंह में भर लिया और उन्हें चूसने लगीं| मैंने अपने दोनों हाथ ऊके सर पे पीछे से रखे और अपने ऊपर और झुका लिया और उनके होठों को चूसने लगा| मन तो नहीं था सोने का पर रात की थकावट के कारन नींद आने लगी और मैं सो गया| शाम को छः बजे उठा तो भौजी चाय लेके आ गईं|

मैं: यार ...(अंगड़ाई लेते हुए) क्या नींद आई....

भौजी: अच्छा जी?

मैं: हाँ यार.... आपकी Kiss में जादू है|

भौजी: हाय! जानू...आपने बड़ी प्यारी-प्यारी बातें करते हो|

मैं: सब आप की सौबत का असर है|

रात को खाना खाने के बाद भौजी कमरे में आईं;

भौजी: आप प्लीज रात को साइट पे मत रुका करो ...बच्चे आप के बिना सोते नहीं हैं|कल बड़ी मुश्किल से मैंने उन्हें सुलाया था|

आयुष: पापा...आपके बिना नीनी नहीं आती!

मैं: Awwwww ....बेटा वादा तो नहीं कर सकता ...पर कोशिश पूरी करूँगा|

भौजी: आपकी कोशिश ही मेरे लिए काफी है|

बस इतनी बात हुई, और भौजी अपने घर चली गईं और बच्चे मेरे पास सो गए| अगले दिन उठा तो एक और सियाप्पा खड़ा हो गया| मैं सो के लेट उठा था...सर दर्द से फ़ट रहा था ...और जैसे ही नजर भौजी पे पड़ी तो उनके चेहरे के भावों को मैं ठीक से पढ़ नहीं पाया...समझ नहीं आया की वो खुश हैं की दुखी?

मैं: क्या हुआ जान?

भौजी: आपके भैया आज सुबह ही गाँव चले गए?

मैं: फ़ट गई साले की?

भौजी: क्या मतलब?

मैं: उसे लगा की मं पिताजी को उसके घपले के बारे में बता दूँगा| इसलिए फ़ट गई उसकी! आपने पिताजी को कुछ बताया?

भौजी: माँ को बताया था...उन्होंने पिताजी को बता दिया| आठ बजे से पिताजी फोन मिला रहा हैं और वो उठाते नहीं|

मैं: और कितने बजे घर से निकला वो?

भौजी: सुबह पाँच बजे!

मैं: चलो देखें हुआ क्या है?

मैं बाहर आया तो भैया अब भी पिताजी का फोन नहीं उठा रहे थे| आखिर हार के पिताजी ने गाँव में बड़के दादा को फोन कर दिया की चन्दर गाँव आ रहा है...अकेला! वो हैरान तो हुए पर अभी किसी को पूरी बात पता नहीं थी|

पिताजी: आखिर कल इस लड़के को हुआ क्या> ये क्यों चला गया इस तरह? बहु तुझे कुछ कहा नहीं?

मैंने भौजी का हाथ पकड़ के दबा दिया और उन्हें कुछ भी कहने से रोक दिया|

इतने में सतीश जी का फोन आ गया| 

पिताजी: प्रणाम मालिक!

सतीश जी: प्रणाम भाईसाहब! दरअसल मैं आज आपसे मिलना चाहता था|

पिताजी: बोलो मालिक कब आऊँ?

सतीश जी: बारह बजे आजाईये और हाँ मानु को साथ ले आना|

पिताजी: क्यों उसका कोई ख़ास काम है आपको?

सतीश जी: देखो भाईसाहब आपको उसने तो सब बता ही दिया होगा| आज जो काम मैं आपको बताने वाला हूँ वो सिर्फ मानु ही करायेगा...नहीं तो मैं किसी और को बुला के करवा लूँगा|

पिताजी: अरे नहीं मालिक... वो ही देख लेगा सारा काम| मैं बारह बजे मिलता हूँ आपसे|

पिताजी ने फोन काटा|

माँ और भौजी नाश्ता बनाने में लगे थे|

पिताजी: हाँ तो अब तू बता?

मैं: क्या?

पिताजी: सतीश जी कह रहे थे की कल कुछ हुआ है!

मैं; कुछ भी तो नहीं!

पिताजी: देख जूठ मत बोल! बता क्या हुआ है?

मैं: सच में कुछ नहीं...बस वो काम थोड़ा ज्यादा खिंच गया था बस!

इतने में भौजी मेरे कमरे से मेरी रिपोर्ट वाली फाइल ले आईं और पिताजी के सामने रख दी|

भौजी: पिताजी...ये कारन है ...उनके जाने का और शायद सतीश जी भी यही कह रहे होंगे|

पिताजी ने फाइल खोली और सारे बिल देखे| उन्होंने अपना सर पीट लिया;

पिताजी: हे भगवान! ये लड़का हमारे साथ ही धोका-धडी कर रहा था| और मैं इसे अपना आध बिज़नेस सौंपना चाहता था! सच में किसी का विश्वास नहीं कर सकते|

भौजी: और एक बात है पिताजी|

पिताजी: बोलो बहु|

भौजी: ये शराब भी पीते हैं!

पिताजी: क्या? पर...इसने तो अपनी माँ की कसम खाई थी.....

मैं: कल जब मैं इनसे मिलने साइट पे पहुँचा तब ये नशे में धुत्त थे! उसी समय मुझे सतीश जी का फोन भी आया और वो आग-बबूला हो रखे थे| ऊपर से ये इन्हें (भौजी) को मारते-पीटते भी थे...और गुस्से में मैंने इनपे हाथ उठा दिया| जब मैंने इस घपले की बात की तो ये डर गए और मेरे आगे हाथ जोड़ने लगे की मैं आपको ना बताऊँ|

पिताजी: और तू उसके गुनाहों पे पर्दा डाल रहा था.....वो तो बहु ने साडी बात बताई.... हमारी बरसों की इज्जत ये मिटटी में मिलाने पे तुला है|

पिताजी ने फोरना बड़के दादा को फोन मिलाया और उन्हें साड़ी बात बता दी| ये भी कह दिया की चन्दर भैया के लिए अब इस घर के दरवाजे हमेशा के लिए बंद हैं| उधर बड़के दादा भी चन्दर भैया को गालियाँ निकाल रहे थे| उनके लाख बार पूछने पर भी पिताजी ने ये नहीं बताय की उन्होंने कितने पैसों का गबन किया है| बड़के दादा ने इतना जर्रूर कहा की वो आएगा तो यहाँ से जिन्दा नहीं जायेगा और साथ ही पिताजी को मिलने के लिए बुलाया|
 
 


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