Thursday, December 26, 2013

मेरी मस्त दीदी--4

मेरी मस्त दीदी--4

 

थोड़ी देर बाद मैंने दीदी के बगल में लेट कर उनकी चूचियां मसलते हुए कहा ," वाह दीदी , कसम से ऐसा मज़ा ज़िंदगी में कभी नहीं मिला, तुम्हारा हुस्न लाज़बाब है मेरी दीदी"
" तू भी तो कुछ कम नहीं मेरे शैतान भाई और तेरा लंड तो वाकई बहुत ही शानदार है , ऐसा लंड तो अब्बू का भी नहीं है , मैंने एक बार चुपके से उनको अम्मी को चोदते देखा था"
दीदी अब पूरी तरह से मेरे साथ खुल के बात कर रही थी सो मैंने भी उनको चुदने के लिए तैयार करने की गरज से उनकी चूचियों को मसलते हुए कहा ," और क्या देखा तुमने दीदी ?" ..........
" कुछ नहीं मै रात को पेशाब करने के लिए उठी तो देखा कि अम्मी के कमरे की लाइट जल रही है व दरवाजा थोड़ा सा खुला है , मैंने जब झाँका तो देखा कि अब्बू अम्मी की सलवार का नाडा खोल रहे थे। मै चुपचाप देखती रही , उन्होंने फिर अम्मी का कुरता भी उतार कर उन्हें बिल्कुल नंगा कर दिया , अम्मी ने भी अब्बू की लुंगी और बाकी के कपडे उतार कर उन्हें नंगा कर दिया उस वक़्त मैंने अब्बू का लंड देखा था , इस उमर में भी बिल्कुल काले नाग की तरह फुँफकार रहा था उस वक़्त मुझे वो सबसे मस्त लंड लगा था क्योंकि मूतते हुए लोगों के लंड ढीले ढाले होते थे , ये सतर लंड मैंने पहली बार ही देखा था , उस वक़्त मुझे लगा कि अब्बू का ये छह इंची लंड ही सबसे मस्त है लेकिन तेरा लंड तो उनके भी लंड से कहीं ज्यादा मोटा और लम्बा है" नशे में टुन्न दीदी ने मेरे लंड को सहलाते हुए बताया
" और क्या देखा दीदी , पूरी बात बताओ ना" मैंने उनकी चूचियों को मसलते हुए पूछा
" अब्बू ने अम्मी को बेड पर घोड़ी की तरह खड़ा करके उनके पीछे से चूत पर अपना लंड टिका कर एक झटके में पेल दिया और अम्मी की कमर थाम के सटासट अपना लंड अम्मी की चूत में अन्दर बाहर करते हुए चोदने लगे। " दीदी फुल बेशर्मी के साथ अपनी अम्मी की चुदाई की दास्तान बताती बोली।
मैंने देखा कि मेरा लंड फिर से फनफनाने लगा था सो मैंने दीदी की चूत को सहला कर देखा कि वो भी पनीली हो रही है। अतः मैंने दीदी को चोदने की गरज से कहा ," इसका मतलब मामी को चुदने में बहुत मज़ा आ रहा होगा"
" और नहीं तो क्या , चूत को तो वैसे भी एक अदद लंड की हमेशा चाहत रहती है" दीदी मेरे चूत रगड़ने से मस्त होते हुए कमर हिलती हुयी बोली
" तो दीदी , इसका मतलब तुम्हारी चूत भी लंड की चाहत रखती होगी , अगर हाँ तो मेरा लंड क्या तुम्हे पसंद नहीं आया , कसम से दीदी एक बार आज़मा के तो देखो , मामू से भी ज्यादा ढंग से मस्त बना दूंगा" मैंने अपने लंड को दीदी की चूत पर कसके रगड़ते हुए कहा
" तूने तो मेरे मन की बात ही छीन ली पगले , जबसे तेरे लंड के मेरी चूत ने दीदार किये है वो चुदने के लिए बेकरार हुई जा रही है" दीदी मस्त होते हुए बोली " आज तू इसे ज़रा जम के चोद दे मेरे भैय्या , ये मेरी चूत पता नहीं कब से तेरे ही जैसे लंड के लिए तड़प रही है "
" क्यों नहीं दीदी , एक भाई का लंड अगर अपनी बहन की चूत की प्यास भी नहीं बुझा सकता तो लानत है ऐसे भाई और उसके लंड पर" मैंने दीदी की चूचियों को मसलते हुए कहा " पर एक बात सच सच बताओ दीदी , क्या पूरे लुधियाने में तुम्हे आजतक कोई ऐसा लंड नहीं मिला जो तुम्हारी चूत की खुजली मिटा सके "
" अब्बू के डर से आज तक सिर्फ उंगली से ही काम चलाया है मुन्ना , वो खुद तो रोज़ रोज़ अम्मी की चूत में अपना लंड पेल के पूरा मज़ा लेते है और मेरे बारे में बिलकुल भी नहीं सोचते कि आखिर ये भी एक चूतवाली है और इसका भी किसी लंड से चुदवाने का मन होता होगा " दीदी भुनभुनाते हुए बोली
" कोई बात नहीं दीदी , आज मै सारी कसर पूरी कर दूंगा , वो जम के तुम्हारी चूत को अपने इस लंड से चोदूंगा कि तुम ताउम्र याद रक्खोगी" मैंने दीदी के रसीले होंठो को चूमते हुए कहा। मैंने दीदी को टाँगे पेट की तरफ मोड़ कर पूरी तरह से फ़ैलाने को कहा , दीदी ने तुरंत आज्ञा का पालन करते हुए अपनी टाँगे फैला दी। अब जैसे दीदी की चूत मेरे लंड को चोदने का खुला निमंत्रण दे रही थी। मैंने दीदी की चूत पर अपने लंड का सुपाडा टिका कर कस के उनके कंधे पकड़ लिए और एक ही धक्के में अपना आधा लंड दीदी की चूत में ठांस दिया।
" हाय अल्ला , बहुत दर्द हो रहा है भैय्या , प्लीज अपना लंड बाहर निकल लो ना " दीदी ने गिडगिडाते हुए कहा " पता नहीं अम्मी कैसे अब्बू से मज़े ले ले के चुदवाती हैं "
" यह सिर्फ पहली बार होता है दीदी , उसके बाद तुम्हे भी मामी की तरह भरपूर मज़ा आयेगा , बस सिर्फ कुछ धक्के बर्दाश्त करलो मेरी प्यारी दीदी , फिर तुम देखना कितना मज़ा आता है " मै दीदी को सांत्वना देता हुआ बोला
" ठीक है भैय्या पर ज़रा आहिस्ते से चोदना , कहीं तुम्हारी इस बहन की चूत फट न जाये " दीदी कराहते हुए बोली
" तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो , ऐसा कभी हो सकता है

कि मै अपनी दीदी की चूत को फाड़ दूं , कभी नहीं , आखिर तुम्हारी चूत जीजा को भी तो चोदनी है ,तुम निश्चिन्त हो कर सिर्फ ये दो चार धक्के बर्दाश्त कर लो प्लीज " मै दीदी के निप्पलों को मसलते हुए बोला
मैंने अपने लंड को थोडा सा बाहर खींच कर एक झटके में ही पूरा का पूरा दीदी की चूत में ठांस दिया , मेरा पूरा लंड दीदी की चूत में चरचराता हुआ जड़ तक पहुँच गया। दीदी के मुंह से चीख निकल गयी मैंने कस कर दीदी का मुंह बंद करते हुए सटासट चार पांच धक्के उनकी चूत में ठोंक दिए फिर दीदी का मुंह धीरे से खोलते हुए पुछा " अब कैसा लग रहा है दीदी " मेरा लंड बराबर उनकी चूत को चोदे जा रहा था।
" अब तो कुछ ठीक है पर उस वक़्त तो ऐसा लगा कि जान ही निकल गयी , आ s s s s ह मेरे भैय्या और चोदो सही में अब तो बड़ा मज़ा आ रहा है" दीदी सिसकारियां लेते हुए बोली
" चिंता मत करो दीदी , आज मै तुम्हारी चूत की सारी की सारी खुजली मिटा दूंगा " ये कहते हुए मैंने चोदने की स्पीड और बढा दी। अब मै अपने लंड को दीदी की चूत में फुल स्पीड से अन्दर बाहर कर रहा था। दीदी भी पूरी मस्ती के साथ अपनी चूत उठा उठा के मेरे लंड से चुदाई का भरपूर मज़ा ले रही थी। अचानक दीदी का शरीर थोडा तन के ढीला पड़ गया और मुझे अपने लंड पर गरम गरम महसूस होने लगा , मै समझ गया कि दीदी झड गयी मैं भी उन्हें अब पूरी ताक़त से चोदने लगा और फिर मेरे लंड ने भी दीदी की चूत में अपना गाढ़ा गाढ़ा वीर्य छोड़ दिया। हम दोनों ही एक दूसरे की बांहों में हांफते हुए लाइट जलती हुई छोड़ कर नंगे ही कब सो गए हमें पता ही नहीं चला शायद यह व्हिस्की का भी असर था। अचानक .........
अचानक कमरे के दरवाजे पर खटका सा हुआ , चूँकि मै निश्चिंत होकर सो रहा था क्योंकि घर में कोई था ही नहीं सिर्फ रज़िया को छोड़ कर , वह भी ऊपर पढाई कर रही थी सो मैंने आँखों में हल्की सी झिर्री बना कर दरवाजे की तरफ देखा तो मेरी तो गांड ही फट गयी क्योंकि दरवाजे में रज़िया खड़ी हम लोगों को इस अवस्था में देख रही थी। हम दोनों ही पूरी तरह नंगे एक दूसरे से चिपके लेटे थे , दीदी ने एक हाथ से मेरा लंड थामा हुआ था और मेरे एक बाजू पर सर रख कर आराम से सो रही थीं और मेरा एक हाथ उनकी मस्त दूधिया चूचियों पर था। ऐसी हालत में रज़िया हम लोगों को दरवाजे में खडी देख रही थी। मै सोच रहा था कि अब यह सबको बता देगी कि रात में जब यह ऊपर पढाई कर रही थी तो नीचे मैंने दीदी को किस तरह से चोदा। मेरी अम्मी और अब्बू को ज़ब यह पता चलेगा तो वह बिना थूक लगाये ही मेरी गांड मार लेंगे।इन सारी बातों से बचने का सिर्फ एक ही रास्ता था कि मै रज़िया की कुंवारी चूत में भी अपना लंड पेल के उसको भी दीदी की तरह चोद देता लेकिन रज़िया को पटाना बहुत ही मुश्किल लग रहा था हालाँकि उसकी चूत पूरी तरह से चुदने के  लायक हो चुकी थी परन्तु उसकी किसी भी हरकत से ऐसा नहीं लग रहा था कि वह अपनी चूत को चुदवाने की इच्छा रखती है।
तभी रज़िया दरवाजे से हटकर किचिन में चली गयी और थोड़ी देर बाद उसके सीढियों से ऊपर जाने की आवाज़ आयी। मेरी आँखों से नींद कोसों दूर जा चुकी थी व कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि क्या किया जाय। आखिर में मैंने सब कुछ ऊपर वाले पर छोड़ दिया कि दीदी को तो मै चोद ही चुका हूँ अब जो कुछ भी होगा देखा जाएगा।
तभी दीदी ने सोते में मेरे लंड को अपनी मुठ्ठी में दो तीन बार ऊपर नीचे करके बडबडाया ," ओ मुन्ना ! ज़रा कस के चोदो ना , फाड़ के रख दो अपनी दीदी की चूत को , पता नहीं कब से ये तुम्हारे जैसे लंड के लिए तरस रही थी" यह कह कर दीदी ने अपनी एक टांग उठा कर मेरी टांग पर रख ली और दो तीन बार मेरी जांघ से अपनी चूत को रगड़ दिया। दीदी शायद सोते में भी अपनी चुदाई का सपना देख रहीं थीं। यह सब देख कर सारी टेंशन भूल कर मेरा लंड फिर से अंगड़ाई लेने लगा। मैंने धीरे से थोड़ी सी करवट लेकर अपने हाथ से दीदी की मक्खन मलाई जैसी गांड को मसलना शुरू कर दिया। अब मेरा लंड पूरी तरह खड़ा हो चुका था , मैंने दीदी का हाथ अपने लंड से हटा कर अपने गले में डाल लिया और पूरी तरह से करवट लेकर अपना लंड उनके दोनों जांघों के जोड़ पर टिका कर रगड़ना शुरू कर दिया। दीदी को भी हौले हौले मज़ा आने लगा था सो उन्होंने एक टांग उठा कर मेरी कमर पर चढ़ा ली। अब मेरे लंड को चूत के पूरी तरह से नज़ारे हो गए। मैंने अपने लंड को दीदी की चूत पर टिका कर सुपाडे को चूत में अन्दर बाहर करने लगा। मैंने दीदी के रसीले होंठो को चूसते हुए अपनी जीभ दीदी के मुंह में डाल दी , अब दीदी की चूत भी पनीली हो चुकी थी उन्होंने धीरे से आँखे खोलते हुए मेरी जीभ को लोलीपॉप की तरह चूसना शुरू कर दिया। मेरा लंड अब दीदी की चूत को फिर से चोदने के लिए पूरी तरह से तैयार था। दीदी भी अपनी चूत को चुदवाने के लिए बेताब नज़र आ रही थी। मैंने भी देर न करते हुए दीदी को अबकी बार घोड़ी बना कर खडा कर दिया और उनके पीछे की तरफ जाकर पनीली चूत पर लंड को टिका कर एक झटके में ठांस दिया।
" अरे बहनचोद ! आज तो मज़ा आ गया , चोद मेरे भैय्या और जम के चोद अपनी दीदी की चूत को, फाड़ के रख दे आज तू , अगर मुझे पता होता कि तू मेरी चूत में अपने इस शानदार लंड को ठांसना चाहता है तो मै पहले ही तुझसे चुदवा लेती , पता नहीं कबसे मेरी चूत लंड की प्यासी थी मेरे राजा ...... आआआह चोद खूब चोद आज तू" दीदी मस्ती में बडबडाई।
मेरा लंड दीदी की चूत को धकाधक चोद रहा था। फिर मैंने दीदी की चूत से लंड को बाहर खींच लिया
" क्या हुआ मादरचोद ! लंड क्यूं बहार निकाल लिया।" दीदी थोडा गुस्से से बोली
" अरे कुछ नहीं दीदी , ज़रा तुम्हारे दूसरे छेद को ट्राई करने का दिल कर रहा है , तुम बस चुपचाप मज़े लेती रहो। " मैंने दीदी की गांड को थूक से गीला करते हुए कहा
" क्या बोला भोसड़ी के ! तू मेरी गांड मारेगा , नहीं नहीं तेरा ये हलब्बी लंड मेरी गांड बर्दाश्त नहीं कर पायेगी , तू चूत में पेल ना , अब तुझे क्या मेरी चूत में मज़ा नहीं आ रहा है।" दीदी ने अपनी गांड को थोड़ा सा उंचा करके मेरे लंड को दोबारा अपनी चूत में लेने की कोशिश करते हुए कहा
" तुम बस चुपचाप घोड़ी बनी पिलवाती रहो दीदी और देखती जाओ मै तुम्हे कैसे कैसे मज़े दिलवाता हूँ " मैंने दीदी की गांड पर अपने लंड का सुपाडा टिकाते हुए कहा। मै जानता था कि चूत और गांड बिलकुल डिफरेंट होतीं है सो मैंने दीदी की कमर को कसके पकड़ के अपने  तकरीबन एक चौथाई लंड को गांड में ठांस दिया।
" हाय हाय मार डाला इस मादरचोद ने " यह कह कर दीदी बेड पर उल्टी ही लेट गयी। मैंने भी झट से दीदी की कमर को छोड़ कर उनकी बगल में हाथ डाल कर कंधे जकड लिए और अपने पैरों से उनकी टांगों को चौड़ा कर फैला दिया लेकिन इस उठापटक में मेरा लंड दीदी की गांड से बाहर निकल गया।

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