Monday, March 24, 2014

FUN-MAZA-MASTI दिलो की फरियाद--2

FUN-MAZA-MASTI

 दिलो की फरियाद--2

 नेहा संगीता आज तो मज़ा आ गया, शरद की नज़ारे मुझसे हट ही नही थी, वह तो मुझे पढ़ा भी नही सका, ऐसा लगा की उसका मान मुझे पर आने लगा है
संगीता वेरी गुड, मैं जैसा बोलूँगी वैसा ही करना, देखा एक दिन शरद ही तुमको प्रपोज़ करेगा। मै तुम्हे और शरद को एक साथ छोड़ के बाहर में अपने जीतू से मोबाइल पर बात करते रहूंगी ऐसे में तेरा काम भी हो जाएगा और मेरा भी। अगर तुम दोनो को बोर लगे बाहर गार्डन में भी चले जाना।
नेहा एक दम ठीक
नेहा का शरद से इंग्लीश कोचिंग करना तो मात्र एक बहाना था, इस बहाने वह शरद के साथ वक़्त गुजरना चाहती थी। शरद अब रोज नहको पढ़ाने आया करता था, और हमेशा ही संगीता उन दोनो को छोड़कर बाहर मोबाइल पर बात करने लग जाती थी। नेहा डेली फ्रेश होकर तैयार रहती थी, उसकी खूबसूरती उसकी महक शरद का ध्यान पढ़ाई से नेहा की तरफ खीच लेती थी। कभी घर के अंदर तो कभी गार्डन में दोनो एक साथ अपना वक़्त गुज़ारा करते थे, धीरे धीरे दोनो एक दूसरे को समझने लगे, लेकिन वहाँ तक अभी भी बात नही पहुँची थी जहाँ तक नेहा को चाहत थी, शायद अभी उसमे वक़्त था।

पिंकी अपने 1 साल के नन्हा मुन्ना रोहित के साथ रहा करती थी, पिंकी का पति मोहन दूसरे शहर में कम किया करता था, दोनो के कामो ने उन दोनो को अलग रखा था। मोहन महीनो या हफ़्तो में उसके पास आता था, परंतु हफ्ते महीने पिंकी के लिए नही के बराबर थे। पिंकी अक्सर अकेले में उन रातों को याद किया करती थी जो उसने अपने पति मोहन के साथ गुज़रे थे। रोहित के पेट में रहने और उसके जन्म के बाद शायद पिंकी भूल गयी होगी की कब वह मोहन के साथ सोई थी।कई बार वह सोचा करती थी की काश उसके साथ वक़्त बिताने वहला कोई होता, इसी सोच मे डूब कर वह अक्षर अपने शरीर को आईने में देखकर निहारती रहती, कई बार रातों को वह आईने के सामने बिना किसी कपड़े के अपने अंगो को छू- छू कर देखा करती, और तड़पति रहती। लेकिन अपनी शारीरिक सुख की इच्छाओं कभी भी इज़हार ना होने दिया।
शरद अब रोज नेहा के घर उसको पढ़ाने जाया करता था इस कारण रात को देर तक जाग कर अपनी स्कूल की तैयारी किया करता था, और कभी-कभी बरामदे में रात तक टहला करता था। एक रात जब शरद अपने कमरे के सामने बरामदे में इधर उधर टहल रहा था, रात के करीब 1बज रहे थे, पिंकी के कमरे के सामने दरवाजे के पास शरद कुछ करहने सिसकयों की आवाजसुनाई दी, उसने गौर से सुना तो उसे लगा की जैसे ये आवाज पिंकी की हो। शरद पिंकी के दरवाजे की तरफ बढ़ा, शरद ने पाया के कमरे का दरवाजा पूरी तरह से बंद नही था बल्कि थोड़ा खुला हुआ था, अंदर लाइट जल रही थी। शरद ने बड़े गौर से आवाज सुनने की कोशिश की, ग़लती से दरवाजा और खुल गया और शरद की नज़र पिंकी पर पड़ी।


शरद ने देखा की पिंकी आईने के सामने खड़ी होकर अपने हाथो से दोनो स्तनो को पकड़ कर मसल रही थी। इश्स समय पिंकी ने केवल एक लोवर पहन रखी थी कमर के उपर उसके बाकी शरीर से बिल्कुल नंगी थी। 1 बच्चा होने के बावज़ूद पिंकी के स्तन बिल्कुल सुगठित मालूम हो रहे थे, शरद पिंकी को केवल एक किनारे से ही देखा पा रहा था इसलिए पिंकी एक ही स्तन दिख रहा था। शरद ने आज पहली बार किसी औरत को नंगा देख रहा था, उसका लिंग पिंकी को नंगी देखकर तुरंत तन गया था। पिंकी अपने ख़यालो में गुम थी उसे पता नही था की कोई उसे झाँक भी रहा है, वह अपने दोनो हथेलियो से अपने स्तनो को दबाए जा रही थी और आँखो को बंद कर कराह रही थी। शरद यह सब देख रहा था और उसका लिंग फड़फड़ा रहा था। पिंकी का सुंदर और सुगठित नंगा शरीर देखकर शरद की नज़रें उससे हट नही रही थी। थोड़ी देर बाद पिंकी ने अपनी लोवर भी उतार ली और अपने दाए हाथ की उंगली से योनि के पास मसलने लगी, इसके साथ ही पिंकी की सिसकिया तेज हो रही थी, अपने बदन को हिला हिला कर तेज साँसे ले रही थी, फिर थोड़ी देर में पिंकी निढाल होकर चेयर में लेट गयी। थोड़ी देर तक पिंकी में कोई हलचल नही थी, फिर अचाणक उसकी हाथों ने हरकत की और वह उस चेयर से उठने लगी, तुरंत शरद दरवाजे से पीछे हट गया। और पिंकी के कमरे का दरवाजा बंद हो गया।
शरद पिंकी को ऐसी हालत मे देखकर अपने कंट्रोल से बाहर हो गया था। शरद ने कमरे में आकर सोने की कोशिश की लेकिन उसकी आँखों के सामने पिंकी का नंगा बदन, और उसकी सेक्सी हरक़ते झूल रही थी, शरद का लिंग तना हुआ था, ऐसे में उसको नींदद कहा से आती, लेटे हुआ हर दृश्य को वो सोच रहा था। शरद से रहा ना गया और उसने अपने लिंग को पकड़कर हिलना सुरू किया, ऐसा करने पर उसको थोड़ा सुकुन मिला, तो उसने अपनी लिंग को हिलने की रफ़्तार बढ़ा दी। धीरे धीरे उसकी रफ़्तार उससे बेकाबू हो गयी और अंततः वीर्य की धार उसके लिंग से बाहर निकली, तब कहीं जाकर शरद को रहत मिला। शरद की कब नींदद पड़ी उसे पता ही नही चला, सुबह जब उसकी नींदद खुली तो उसने पाया की वह रात भर नंगा सोया हुआ था।  


 पिंकी को यह पता भी नही चला था की शरद इन उसे रात को नग्न अवस्था में देख लिया था। सुबह जब दोनो आमने सामने हुआ तब पिंकी तो सामान्य थी पर शरद की नज़रें बार बार पिंकी के वक्ष स्थल पर चली जाती थी।
सुबह से शाम हो गयी और फिर शाम से रात, आज शरद नेहा के यहाँ उसको पढ़ने नही गयी बल्कि वो रात की उस समय का इंतज़ार कर रहा था जब उसे वह नज़ारा फिर से देखने को मिल सके। रात के 11 से 12बज गये, 12 से 1 और 1 से 2बज गये लेकिन शरद को पिंकी का नंगा दर्शन ना हुआ क्योंकि आज दरवाजा अंदर से बंद था। ऐसे करते करते कई रातें गुजर गयीं शरद रात रात भर जाग उस वक़्त का इंतज़ार करता था की कुछ देखने को मिल जाए, लेकिन ऐसा वक़्त नही आया। इस चक्कर में शरद नेहा के यहाँ जाना छोड़ दिया।
इधर नेहा जो शरद से प्यार का इक़रार सुनना चाहती थी वह शरद कई दीनो से नही आने के कारण परेसान थी, नेहा अधीर हुए जा रही थी उससे समाज में नही आ रहा था की वह क्या करें। नेहा और अपने प्रेमी को पाने में देर नही करना चाहती थी इसलिए उसने तक हारकर संगीता से कहा;
नेहा संगीत कई दिन हो गया पता नही शरद क्यो नही आ रहा है, पता नही वह मुझे प्यार करता है भी के नही, मुझे समझ में नही आ रहा मैं क्या करूँ
संगीता तू चिंता मत शरद तुझसे ही प्यार करेगा, और अगर शरद का हाल चाल जानना है तो पिंकी से मिलने के बहाने तू शरद से भी मिल आना।
नेहा तेरा आइडिया तो अच्छा है।।।मै ऐसा ही करती हूँ। मै एक और बात सोच रही थी अगर तू हाँ बोले क्यों ना मै ही शरद सर से मेरे प्यार का इज़हार कर दूँ।
संगीता, “हूओन्न।।।।।।।कुछ देर सोच कर बोलती है लगता है तेरे प्यार का बुखार तुझ पर बहुत चढ गया है। ठीक है तू अच्छा समय देख कर, जब शरद तेरे साथ में हो और आस पास कोई ना हो उस समय तू शरद को प्रपोज़ कर देना

 नेहा संगीता का जवाब सुनकर खुश हो जाती है और शरद से प्यार का इज़हार करना है यह सोच सोचकर वह अंदर से बहुत खुश हो जाती है।
शाम के समय नेहा पिंकी के घर घूमने को जाती है। पिंकी से मिलकर नेहा शरद से मिलने जाती है। शरद उस समय अपने बिस्तर पर सोया हुआ रहता है।
नेहा सर क्या बात है आजकल आप मुझे पढ़ने नही आ रहे है, आपकी तबीयत तो ठीक है ना।
शरद नही बस ऐसे ही नही आ पा रहा था, बस थोड़ा सा माइंड को कॉन्सेंट्रेट नही कर पा रहा हूँ, पता नही मुझे क्या हो गया है।
नेहा क्या आप मेरे साथ अभी गार्डन तक घूमने के लिए चलेंगे?”
शरद नही प्लीज़ मेरे जाने की इच्छा नही है, मुझे यही रहने दो
नेहा ने मन ही मन में ये निश्चय किया वह आज शरद को घूमने के बहाने प्रपोज़ कर के ही रहेगी, तब उसने ज़िद करतें हुआ कहा।
नेहा चलिए ना सिर मै आप से रिक्वेस्ट कर रही हूँ, मुझे आप से कुछ ख़ास और बहुत ही पर्सनल बात बोलनी हैऐसा कहती हुई उसने शरद के हाथो को पकड़ लिया।
शरद चलो ठीक है मै चलता हूँ पर मुझे ठीक से कपड़े पहनेने दो, तुम प्लीज़ बाहर मेरे वेट करो
शरद और नेहा दोनो मिलकर गार्डन की तरफ घूमने के लिए चले गये, दोनो एक किनारे में ज़मीन पर बैठ गये और बातें करने लगे।
शरद अच्छा अब बताओ तुम मुझसे क्या कहना चाहती थी
नेहा ने अपने नज़रें नीची कर ली
नेहा आपके साथ यहाँ पर मुझे अच्छा लग रह है
शरद बस यही बात बोलनी थी।।।
नेहा नही नही ,,,,,,,,,,,, कुछ और बात है, पर डर लग रहा है।
शरद किस बात का डर लग रहा है, बोलो ना क्या है तुम्हारे मान में
नेहा आप मेरी बातों से नाराज़ तो ना होंगे
शरद नही नेहा अब तुम और मैं बहुत अच्च्चे दोस्त की तरह है, मैं तुम्हारे किसी भी बात पे नाराज़ नही हूँगा।
नेहा ने चिढते हुआ मुझ में आपको बस दोस्त ही नज़र आ रहा है, क्या मैं आपके जीवन में दोस्त से जायदा नही हूँ।
शरद मैं समझा नही प्लीज़ थोड़ा सॉफ सॉफ बोलो
नेहा ने अपना मुंह शरद की सामने से हटा ली, और धीरे से बोली, “मै आपसे प्यार करती हूँ
शरद ने जो सुना उस पर उसे यकीन नही हुआ, “फिर से बोलो लेकिन मेरी तरफ देख कर बोलना
नेहा ने शरद थोड़ा ऊपर करके कहा ई लव यु वेरी मच
शरद अब चुप हो गया, नेहा उसके तरफ उसे देख शरद के जवाब का इंतज़ार करने लगी।
शरद थोड़ी देर चुप रहने के बाद बोला मुझे पता नही मैं तुमसे प्यार करता हूँ के नही, पर तुम मेरे साथ रहती हो तब मुझे बहुत अच्छा लगता है। मैं तुम्हे पसंद भी करता हूँ लेकिन मै यह नही जनता की इसको प्यार कहता है के नही। मुझे थोड़ा सोचने का समय चाहिए
नेहा ने अपने हाथों से शरद के हांथ को पकड़ कर अपनी और खीच ली और उसके हाथ को अपने गाल के पास लाकर उसके हाथों को अपने होठों से चूमने लगी।
हाथों को चूमते हुये नेहा ने कहा शरद मै आपसे बहुत प्यार करती हूँ और शायद आपके बिना रह नही पाऊँगी, प्लीज़ आप मुझे ठुकराना मत
शरद नेहा तुम उदास मत हो, मुझे कुछ दिनो की मोहलत दे दो मैं तुम्हे कभी भी निराश नही करूँगा, मै तुम्हे रोते हुए नही देख सकता हूँ
नेहा और शरद आपने घरों की ओर चल दिए। अब शरद को समझ में नही आ रहा था की प्यार क्या होता है, वह भी नेहा को पसंद करता है फिर क्यों वह उसस्के प्यार को स्वीकार करने से डर रहा है। शरद उलझानो में और उलझता जा रहा था। शरद को नेहा का साथ भी अच्छा लगता था, नेहा की बातें भी, उसकी खुबसूरती फिर भी नेहा से पीछे हट रहा था। शायद उसे पिंकी था खुला बदन उसे आकर्षित कर रहा हो। शरद के इन उलझानो का जवाब शायद वक़्त के पास था।

शरद रात को नेहा की बातों को सोचता रहा, शरद नही चाहता था की नेहा किसी बात पर उससे नाराज़ हो, उससे लगा शायद वह भी नेहा से प्यार करता है क्योंकि अब वह नही की खुशी में अपनी खुशी देखने लगा है। इन बातों को सोचते हुआ उसकी नींदद लग गयी। अगले दिन शरद नेहा से मिलने के लिए उसके मकान जारहा था की उसके निकालने के पहले ही नेहा उसके पास पहुच गयी थी।
शरद नेहा मै तुम्हारे पास आ ही रहा था
नेहा मुझे लगा मुझे ही आप की पास चले जाना चाहिए
शरद अच्छा अब आ गयी हो तो बैठो मै तुम्हारे लिए चाय बनता हूँ
नेहा नही चाय बनाना मेरा काम है आप यहां पर बैठये मैं अभी चाय तैयार करती हूँ
और नेहा रसोई में चली गयी। शरद भी उसके पीछे रसोई में चला आता है।
शरद मै भी तुमसे कुछ कहना चाहता हूँ
नेहा चाय बनाते हुए उसे देखकर कहती है क्या बात है,,,,,,,,,,,,,,,। कही मेरे लिए जवाब तो नही है
शरद आई लव यु नेहा, मै भी तुम्हारे बिना शायद एक पल भी जी ना पाउंगा ।
शरद के ज़ुबान से आई लव यु सुनकर नेहा की खुशी का ठिकाना नही रहा, वह तुरंत ही शरद के सीने से लिपट गयी। नेहा ने अपने दोनो हाथो से शरद के पीठ को कस के पकड़ कर चिपक गयी, नेहा का सिर शरद के छाती के पास था।
नेहा आपको पता नही आज मैं कितनी खुश हूँऐसा कहकर नेहा शरद से लिपटे हुई थी।
शरद ने अपने हाथो को अब धीरे से नेहा के पीठ पर रखा और दोनो हांथो से उसके पीठ को फेरने लगा, नेहा अपनी हाथों की पकड़ को और मजबूत कर रही थी। शरद ने नेहा के चेहरे को अपने हांथो से उठाया और गौर से उसके होंटो को देखने लगा। नेहा की आँखें शरद की आँखों से एकटक मिले हुई थी, दोनो की नज़रें एक दूसरे को बस देखे ही जा रही थी। आज पहली बार एक लडकी के होंठ शरद के होंठ के पास थी, शरद के होंठ ने नेहा के होंठ को पहली बार स्पर्श किया और दोनो के शरीर में एक बिजली सी दौड़ पड़ी। नेहा ने झट से खुद को शरद से छुड़ाया और वह दूर भागने लगी, लेकिन इससे पहले की नेहा अपने आप को छुड़ा पाती शरद के हाथ नेहा के कलाइयो को जकड़े हुए था। शरद ने तुरंत नेहा को अपनींद और खीच लिया, शरद का एक हाथ में नेहा की कलाइयाँ थी तो दूसरे हाथ से उसने उसके कमर को थम लिया था। अब नेहा फिर से शरद की भाहों में समा गयी थी। शरद ने नेहा को रसोई कमरे के दीवार से सटाकर खड़ा किया और खुद झुक कर बैठ गया। शरद के होंठ नेहा के नाभि के सामने थे, उसने अपने होंटो से नेहा के नाभि का चुंबन लिया। नेहा से चुंबन बर्दाश्त ना हुआ, उसकी सांसी तेज हो गयी थी और बोलनी लगी;

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