Sunday, March 30, 2014

FUN-MAZA-MASTI भाई बहन की दोस्ती--2

FUN-MAZA-MASTI

 भाई बहन की दोस्ती--2 

अगले दिन मै लन्च के बाद भाभी के पास बैठ गयी और इधर उधर की बातें करने लगी और बातें करते करते मैने भाभी से पूछा की आज कल ज़िन्दगी भर किसी एक के साथ रहना काफ़ी मुश्किल होता है ना भाभी? क्या आप भैया से बोर नही हो जाती? वो मेरी यी बात सुन कर अजीब तरीके से मुसकुरा कर कहने लगी: इस के इलावा कर भी क्या सकते हैं. आखिर ज़िन्दगी भी तो गुज़ारनी है ना. मै: भाभी..... क्या भैया भी तुम से बोर नही होते? क्या तुमको यकीन है के उनका कोई बाहर चक्कर वक्कर नही है? भाभी: लगता तो नही है.....(फिर हंसते हुए बोली) अगर है भी तो मुझे क्या? वापस तो मेरे पास ही आना है ना. मैने फिर भाभी से सवाल किया: भाभी एक बात पूछूं?........... भाभी: हां पूछ क्या बात है? मै: अगर मेरा कोई चक्कर हो तो भैया क्या करेंगे? भाभी: बहुत गुस्सा करेंगे तुझे. अगर ऐसी कोई बात हो तो मुझ तक ही रहने देना. वैसे कोई चक्कर है क्या? मै: नही भाभी...अभी तक तो नही है............लेकिन एक लडका लाईन मार राहा है मुझ पर काफ़ी दिनों से. भाभी: कौन है वो और कैसा है? मै: मेरी क्लास मै पढता है और है भी हैन्ड्सम............. भाभी: तो तेरा क्या खयाल है........? पसन्द है क्या तुझे? मै: है भी और नही भी भाभी: म्म्म्म्म्*म्म ..........अगर तो तुम सीरिअस हो तो बात करूं घर वालों से? मै: नही नही भाभी...........इतना भी पसन्द नही है मुझे. भाभी: तो फिर टाईम पास कर और मज़ा ले के छोड देना. मै ये बात सुन कर हैरान हो गयी के भाभी मुझे क्या कह रही है और भाभी से पूछा: मज़ा लूं?.........इस का क्या मतलब? भाभी हंस्ते हुए आहिस्ता से बोली: अरे जवानी के मज़े ले और क्या. यही तो उमर है ऐश करने की. मै: भाभी अगर मैने कुछ किया तो मेरे होने वाले पती को पता नही चलेगा के मैने क्या कुछ किया हुआ है? भाभी: अरे नही पता चलता............(भाभी ने इधर उधर देखा और आहिस्ता से बोली) अब तुम्हारे भाई को पता चला है क्या मेरे बारे मे? मै: क्या मतलब भाभी? क्या आप भी? कब, कैसे और किस के साथ? भाभी: मै बहुत ही चालाक हूं. मैने एक काम किया की घर की बात घर मे ही रह जाये...................और किसी को शक भी ना हो............ मै: क्या किया आपने? भाभी: मै तो कसम खा सकती हूं के मैने आज तक तुम्हारे भाई के इलावा किसी के साथ सेक्स नही किया..............हां ये बात अलग है के वो सुनील के इलावा भी हो सकता है.............. मै: हे भगवान .भाभी.........समीर के साथ? कब? और कहां? भाभी: अब चुप ही रहो किसी से बात ना कर बैठना. मै: भाभी आप को मुझ पर यकीन नही है क्या? भाभी: है तभी तो इतनी बातें कर रही हूं ना..............वैसे तुम्हारे भाई समीर की क्या बात है..........बहुत ही सेक्सी है............. भाभी से बात करने के बाद मुझे पता चल गया के समीर की बात सच थी. फिर भाभी ने अपनी सारी कहानी सुनाई जो मै आप को किसी और दिन बताऊंगी. फिर मै ने इधर उधर की बातें करके बात खतम कर दी. उसी रात को जब मै और समीर टीवी देख रहे थे और बाकी सब सो चुके थे मैने समीर को बताया के आज मेरी भाभी से क्या बात हुई. वो मेरी बातें सुन कर सिर्फ़ मुसकुराता राहा. मैने समीर से एक सवाल किया : ऐसा करने के बारे मे तुम्हे खयाल कैसे आया? समीर: तुम को पता है मै कम्प्यूटर पर बहुत ज़्यादा टाईम बिताता हूं और नेट से बहुत कुछ पता करता हूं...बस वहीं से मेरा इन बातों पर ध्यान गया. मै: क्या ध्यान गया समीर: चलो अभी दिखाता हूं. वो ये कह कर मुझे कम्प्यूटर पर ले गया और नेट पर देसी सेक्स की कहानियों की एक साईट खोल दी और मुझे काहा लो तुम बैठ कर इन्हें पढो. मुझे अब शरम आ रही थी पर समीर मुझे कम्प्यूटर के समाने छोड कर चला गया. कुछ देर मै इधर उधर देखती रही फिर हिम्मत करके पढना शुरू कर दिया..........और जब मैने काहानियां पढनी शुरू की तो मेरी हैरानी की हद नही थी. इन काहानियों मे तो किसी किसम का भी रिश्ता माफ़ नही किया गया था. कोई अपनी भाभी या साली के साथ, कोई मां या बाप के साथ, कोई अपने कज़न और कोई अपने सगे भाई या बहन के साथ सेक्स की बातें बता राहा था.......मेरे अन्दर एक अजीब सी फ़ीलिन्ग हो रही थी. पता नही मुझे क्या हो राहा था. लेकिन जो भी था अच्छा लग राहा था और मै पढते ही जा रही थी. मुझे पता ही नही चला के कब सुबह के ४:०० बज गये. मैने जल्दी से कम्प्यूटर बन्द किया और सोने चली गयी. उस रात मैने एक सपना देखा की मै अपने बाथरूम में नाहा रही हूं और अचानक समीर बाथरूम मै आ गया और वो बिलकुल नंगा था लेकिन मै उसे देख कर खुश हो रही थी. समीर बाथरूम मै आते ही मुझे चूमने लगा और मुझे बहुत मज़ा आ राहा था. फिर मेरी आंख खुल गयी तो देखा की मेरा हाथ मेरे वैजाईना पर है..........और मै नीचे सी गीली हो चुकी थी. समीर जब नाश्ते पर मिला तो हंसते हुए आहिस्ता से मुझसे पूछा: कैसी रही रात की एन्टरटेनमेन्ट? मै:ठीक थी.........सिर्फ़ एक काहानी पढी और फिर सो गयी. कोई खास मज़ेदार नही थी...... मैने जान बूझ कर समीर से झूट बोला. पता नही क्यों मै उससे सच नही बोल पाई. वो मेरी बात सुन कर मुसकुराता हुआ चला गया. मुझे लग राहा था के मै अब समीर को किसी और नज़र से देख रही हूं पर किस नज़र से? इस का जवाब नही था मेरे पास. उस दिन जब समीर नही था मैने मौक देख कर फिर कम्प्यूटर ऒन किया और फिर से उसी साईट पर चली गयी और मज़े से कहानियां पढने लगी. एक अजीब मज़ा आ राहा था. हां उस काहानी को ज़रूर पढती थी जिस मै भाई और बहन का सेक्स होता था. मुझे वो अच्छी लगती थी. मै फिर से नीचे गीली हो चुकी थी. दो घन्टे तक काहानियां पढती रही. ऐसा कुछ दिनों तक चलता राहा और अब मै अक्सर भाई बहन के सेक्स के बारे में सोचती थी और मेरी पैन्टी गीली हो जाती थी. एक रात को जब मैने समीर से फिर से कम्प्यूटर पर बैठने की इजाज़त मंगी तो वो मुसकुराया और कहने लगा अभी नही.........जब सारे सो जायेंगे तब.........और आज मै भी तुम्हारे साथ बैठूंगा कम्प्यूटर पर. मै चुप हो गयी और टीवी देखने लगी. रात १०:०० बजे के करीब समीर ने काहा जाओ देख कर आओ सब सो गये हैं क्या? मै उठी और देखा के सब सो चुके थे. लेकिन सुनील भैया के रूम की लाईट ऒन थी. मैने समीर को ये बताया तो बोला: चलो आज मै तुम को कहानीयां नहीं बल्के असली चीज़ दिखाता हूं. मै बोली: वो कैसे समीर: जैसे मै कहूं वैसे करती जाओ. फिर देखो क्या होता है. ये कह कर वो मेरा हाथ पकड कर मुझे छत पर ले गया. छत पर सिर्फ़ एक ही कमरा है जिसमे सुनील भैया और रीना भाभी रेहते हैं. उसने जा कर उनके कमरे के दर्वाज़े को खटखटाया. रीना भाभी नाईटगाउन मे बाहर आयी और हमसे पूछा: क्या बात है? समीर ने ऊंची आवाज़ मे काहा: वो आज का अखबार चाहिये. हमे कुछ देखना था उसमे. अन्दर से सुनील भैया की अवाज़ आयी: रीना, यहां पर पडा है अखबार, आके ले जाओ और दे दो इसे. रीना भाभी अन्दर से अखबार लेकर आयीं तो समीर उन्हें खींच कर साईड पर ले गया और दबी ज़ुबान मे बोला: रीना, आज रात को सुनील के साथ सेक्स का प्रोग्रैम है क्या तुम्हारा? रीना बोली: हां, क्यों? समीर: तुम खिडकी पर से परदाआ थोडा हटा देना और थोडी सी लाईट भी आने देना रीन मुसकुराते हुए बोली: "क्यों, क्या करोगे तुम लोग देख कर" समीर: अरे कुछ नही, अदिती की बहुत इच्छा है सच मे सेक्स देखने की, इसकी उत्सुकता शान्त हो जायेगी रीना: समीर, तू इसको भी बिगाड रहा है समीर: अरे नही, इसको ग्यान दे रहा हूं. अच्छा शो दिखाना रीना: अच्छा मै देखती हूं क्या कर सकती हूं फिर भाभी अन्दर गयी और दर्वाज़ा बन्द करके चिटकनी लगा दी. उसने बडी लाईट बुझा कर एक छोटी लाईट ऒन कर दी और परदा खोल कर, खिडकी भी खोल दी. फिर उसने परदा किया, लेकिन पूरी तरह नही. फिर रीना अपने बेड पर बैठ गयी. सुनील भी बेड पर आकर लेट गया और रीना उसके साथ चिपक गयी. उसके दोनो मम्मे समीर के सीने से दबे थे. सुनील उसकी गान्ड को अपने हाथ से सहला राहा था और एक दूसरे को देख दोनो मुसकुरा रहे थे. तभी रीना ने झुक कर सुनील के होंठों पर किस किय. फिर सुनील ने उसके चेहरे को पकडा और उसके होंठों को अपने होंठों से कसकर चूसने लगा. अब वो दोनो एक दूसरे को किस कर रहे थे. ३-४ मिनट बाद रीना हांफ़ती हुई सुनील के ऊपर ढेर हो गयी और समीर ने भी उसे अपने बांहों में कस लिया. हमे कमरे की हल्की रोशनी मे ये सब कुछ साफ़ नज़र आ राहा था. हम चुपचाप खिडकी के पास खडे हो कर परदे की दरार मे से देख रहे थे. मुझे अजीब सा लग राहा था अपने भाई और भाभी को छुप छुप के देखना पर अन्दर ही अन्दर मज़ा भी आ राहा था. कुछ देर सुनील ने रीना की गान्ड को नाईटगाउन के ऊपर से सहलाया और फ़िर हाथ को नाईटगाउन के अन्दर डाल उसकी गान्ड को सहलाने लगा. फिर उसने नाईटगाउन को उठा कर निकाल दिया. अब वो सिर्फ़ पैन्टी और ब्रा में थी. फिर सुनील खडा हुआ और अपना शर्ट और पजामा उतार दिया और अपने अन्डरएयर मे रीना के सामने खडा हो गया. उसका लन्ड उसके अन्डर्वेयर मे तन के खडा था. मैं आंखें फाड फाड के ये नज़ारा देख रही थी. मेरी सांसें तेज़ी से चल रही थी. रीना ने खिडकी की तरफ़ देखते हुए अपने मम्मों को अपने हाथों मे पकड कर बोला: सुनील कैसी लग रही हूं आज? मै समझ गयी की वो असल मे हमे दिखा रही थी और ये सवाल समीर के लिये था. सुनील बोला: अरे तू तो है ही बहुत खूबसूरत यार. चल अब इनको बाहर निकाल. उसने भाभी के मम्मों की तरफ़ इशारा करके काहा. रीना ने अपनी ब्रा खोली और ब्रा हटाई तो मै देखकर दन्ग रह गयी. एकदम गोल और कसे कसे मम्मे थे. फिर वो लेटी और अपने मम्मों को उभार दिया. सुनील उसके ऊपर झुका और पहले दोनो निप्पल को चूमा और फ़िर जीभ निकल दोनो को १०-१५ बार चाटा. जीभ से चाटने के बाद दोनो मम्मों को हाथों से पकड मसला और फ़िर एक को मुंह में लेकर चूसने लगा. मै दोनो का खेल देख उत्तेजित हो गयी थी. मेरे से राहा नही गया और मै अपने मम्मों को पकड के हल्का सा दबाने लगी. मगर फिर मैने देखा की समीर मुझे ये करते हुए देख राहा है तो मैने अपना हाथ जलदी से हटा लिया. रीना सिसकियां ले रही थी और बार बार अपनी चूंचियों को ऊपर की ओर उचका के सुनील के मुंह में घुसेड रही थी. मै सोच रही थी की मम्मे चुसवाने और निप्पल चटवाने में कितना मज़ा आता होगा. सुनील कुछ देर तक मम्मे चूसने के बाद उठा और फ़िर रीना कि पैन्टी को खिसकाया. रीना ने अपनी गान्ड उठा के पैन्टी को उतरवाया और अब वो बिलकुल नंगी बेड पर लेती थी. सुनील ने अपना हाथ रीना की चिकनी टांगों पर रखा और सहलाते हुए चूत तक ले गया और पूरी चूत को हाथ से दबाया. फिर उसकी चूत पर हाथ फेरने लगा और उसकी क्लिट को अन्गूठे से मसलने लगा. रीना बोली: मुंह से करो ना. सुनील उसकी दोनो टांगों के बीच आया और अपने मुंह को झुका कर उसकी चूत पर रख दिया. चूत से जीभ लगते ही भाभी के मुंह से हल्की सी सिसकारी निकल गयी. भाभी इस पोस में लेटी थी की हमे सब कुछ साफ़ साफ़ दिखायी दे राहा था. भैया जीभ को पेलकर चाट रहे थे और हाथ से दोनो मम्मों को भी दबा रहे थे. भाभी मज़े से भर करे अपनी गान्ड उछाल रही थी और तेज़ तेज़ अवाज़ में सिसक रही थी. मुझे भी अपनी पैन्टी गीली होने का ऐहसास हुआ क्योंकी मेरी चूत से भी पानी निकलने लगा था. १०-१२ मिनट तक चटवाने के बाद रीना हांफ़्ते हुए बोली: आह बस अब बस करो नही तो मैं झड जाऊंगी. हाय रुको और अब मुझे अपना लन्ड दो. फ़िर वो उठी और सुनील को लिटाया और उसके अन्डर्वेयर को हाथ से निकाल दिया. मै भैया के लन्ड को देख कर दन्ग रह गयी. खूब मोटा और लम्बा था. लन्ड एक्दम सख्त और ऊपर को तना था. उसने झुककर लन्ड को अपने मुंह में लिया और चूसने लगी. वो पूरे लन्ड पर चारों तरफ़ जीभ चलाती फ़िर मुंह में लेकर चूसती. मैने देखा की समीर का लन्ड भी पैन्ट के अन्दर तन के खडा है और वो उसे अपने हाथ से हल्के हल्के सहला राहा है. समीर ने देख लिया की मै उसके लन्ड को देख रही हूं और मुसकुरा दिया पर रुका नही. बलकी उसने अपनी पैन्ट की ज़िप खोल दी और अब उसका लन्ड अन्डर्वेयर के अन्दर तन के दिखने लगा.


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