Monday, March 24, 2014

FUN-MAZA-MASTI दिलो की फरियाद--7

 FUN-MAZA-MASTI

 दिलो की फरियाद--7

 जीतू, “मेरी रानी तुम बहुत सेक्सी लग रही होजीतू संगीता के कपड़ो के ऊपर से चूमना लगता है। संगीता के उभरे के बीच चूमते चूमते टवेल को खिसकते जाता है। जीतू के दोनो हाथ संगीता के स्तानो को पकड़े रहता है और मूह से दोनो के बीच चूम चूम कर संगीता को बहाल करता देता है। संगीता के स्तानो पर जब जीतू के हांथो कर स्पर्श हॉट है, संगीता के शरीर में एक बिजली के करेंट की तरह झंझनाहट से उसका पूरा शरीर हिल जाता है। संगीता मदहोश हो जाती है, उसके शरीर पर से कपड़े कब अलग हो जाते है उसे पता भी नहीं चलता।
जीतू अपने हांथो से उसके स्तानो को साबुन लगाकर सहलाते रहता है, हांथो की उंगलियों को चुचियों के गोल गोल घुमा कर साबुन लगाने से संगीता की हालत अब खराब हो जाती है। जीतू के हांथो का जादू संगीता के स्तानो में चलता रहता है, संगीता मदहोशी में डूबे हुए अपनी आँखे मूंद कर इन सभ का आनंद लेती रहती है। संगीता का चुत अंदर से गीला हो चुका रहता है। संगीता अपने हांथो के लंड को पकड़ लेती है और अपने चूत के रगड़ने लगती है। संगीता लंड को चुट से रगड़ते रहती है, इससे संगीता को चरम सुख की प्राप्ति होती और जीतू को भी अच्छा लगता। संगीता अब बहुत जल्दी जल्दी लंड के चुत से रगड़ने लगती है। जीतू अब जाड़ा देर तक बर्दाश्त नहीं कर पाता और वह लंड अंदर घुसा देता है। जैसे से उसका लॅंड अंदर घुसता है उसे एक सुकून सा मिलता है, फिर वह संगीता को खड़े खड़े ही धकेलने लगता है, संगीता अब आँखे खोलकर जीतू के ओर देखकर कर मुस्करती है, जैसे वह जीतू को धन्यवाद दे रही हो। जीतू का धकेलना जारी रहता है, अपने चरम पर पहुचने से पहले जीतू की रफ़्तार और बाद जाती है जिसके कारण संगीता बीच बीच में करहने लगती है। और अंत में एक सूपरफास्ट ट्रेन की तरह ज़ोर ज़ोर से धक्के मार कर उसका लंड पिचकारी की तरह वीर्या को संगीता के अंदर फेंक देता है। शवर से पानी गिरते ही रहता उर संगीता जीतू को पकड़ कर एक दम शांत और रिलॅक्स हो जाती है;
संगीता जीतू के होंठ और गालो को चूमकर कर बोलती है, “आई लव यु मेरे राजा, मज़ा आ गया, ऐसा लगता है दुनिया में इससे अच्छा और बढ़िया कोई सुख नहीं है और सेक्स करने के बाद शरीर एक दम फ्रेश और हल्का लगता है।

जीतू “अभी जब तक हम लोग तौर में है तब तक ऐसा मज़ा आते रहेगा”
संगीता हंस देती है और बोली “अब हम दोनो शरीर से भी एक हो गये, सुबह के समय जल्दबाज़ी थी इसलिए शायद मज़ा नहीं आया था। लेकिन अभी की बात ही अलग थी। मैने जब तक एक बार भी सेक्स नहीं किए था टोआईसा लगता है की ये अच्छी चीज़ नहीं है, पर अब इसके लिए शादी तक इंतज़ार करना बहुत मुस्किल होगा।
जीतू संगीता को नहलाने लगता है, और संगीता शरद को। नहाने के बाद जब संगीता अपने कपड़े पहनने लगती तब जीतू बोलता है:
जीतू “अब हम दोनो के बीच किसी प्रकार की परदा मत डालो, इसे रहने दो रात को ऐसे ही नंगे सोए रहेंगे सीधे सुबह फ्रेश होने के बाद ही पहनेगे।”
संगीत “और अगर कोई आ गया तो,,,,,,,,कैसे करोगे”
जीतू “कोई नहीं आएगा,,,,,,,,,”
संगीता, “प्लीज़ पहन लेते है, ऐसे खुला खुला रहने अच्छा नहीं लगता है”
संगीता फिर भी नहीं मानी तो जीतू उसे बाथरूम से ऐसे ही बिना कपड़ो के उठाकर ले आया और उसे बेड में सूलाकर खुद भी बगल में लेट गया।
संगीता को खुल बदन, नंगा शरीर, तन पे एक भी कपड़ा नहीं है, ऐसे सोना थोडा अजीब लग रहा था, भले ही अभी तक 2 बार सेक्स कर चुकी है, ऐसे में उसने अपने बदन चादर से ओढ़ ली। जीतू भी उसी चादर के अंदर संगीता को अपने करीब खीचकर लेट गया। संगीता का अंग अब जीतू के स्पर्श में थे, उसके स्तन जीतू के सीने को छू रहे, चूत के पास लंड था, जीतू ने अपने जाँघो से उसके जाँघो को लपेट दिया।
संगीता को ऐसे में पिंकी के द्वारा बताई गयी वा कहानी याद आ गयी जिसमे पिंकी और सागर एक साथ नंगे सोए हुए थे, संगीता पलट कर जीतू के ऊपर आकर लेट जाती है, अब ऊपर से नीचे तक संगीता नंगा बंदन जीतू के नंगा बदन के लेटी हुई रहती है और संगीता पिंकी की कहानी की याद में खो जाती है।


जीतू अब बताओ ऐसे नंगे सोने में कैसा लग रहा है
संगीता बहुत अच्छा लग रहा है,,,,,”
संगीता पिंकी की बातों को सोच कर उसका मान तड़पने लगता है, संगीता जो अभी जीतू के सीने की ऊपर है जीतू के होंठो को चूमना शुरू कर देती है। चूमते चूमते कभी होंठो को चूमती है, कभी उसके गालो को या फिर उसके गर्दन को। संगीता अब थोड़ा नीचे उतार कर जीतू के सीने को सहलाते हुए, जीतू के छाती के दोनो निपल्स को अपने होंठो से मूह में भरकर चूमती है। जीतू ये सब बहुत अच्छा लगता है इसलिए वह अपने निपल्स को और चूमने के लिए बोलता है। संगीता जीतू के निपल्स को चूमते चाटते रहती है, फिर थोड़ा और नीचे उतार कर उसके लंड को ऊपर से चूमने लगती है। संगीता जब उसके लंड को चूमती सहलाती है तो जीतू का मान उत्तेजीत हो जाता है। संगीता अब जीतू के लंड अपने चूत के अंदर ले लेती है और जीतू के ऊपर चढ़कर ऊपर-नीचे करने लगती है, जीतू उसके नीचे से सहारा देता है। संगीता बहुत देर तक ऊपर में रहकर जीतू से अंदर-बाहर करवाती है, फिर संगीता नीचे उतार जाती है। जीतू अब संगीता के चूत में अपनी लंड को पीछे से घुसेड़ता है, पहले जीतू धीरे धीरे अपने लंड को अंदर बाहर करता है, संगीता अपने सिर को तकिये के सहारे रख लेता और उसका चूतड़ पीछे से उठा रहता है और जीतू अपने लंड से उसे छोड़ते रहते है। जीतू धीरे-धीरे अपनी रफ़्तार बदते हुए संगीता को धकेलने की स्पीड बदाता है। जीतू से ज़ोर से और धक्के से ढकालने के कारण कमरा पॅक,,,,पॅक,,,,की आवाज़ो से घूनज़ने लगता है। अंतिम समय में जीतू संगीता को खीचकर पीछे ले आता है और संगीता को फर्श में खड़ा कराकर फिर उल्टा लेता देता है और खुद भी फर्श में खड़े होकर उसके चुत को पीछ से धकेलने लगता है। अब जीतू के रफ़्तार रुकने का नाम नहीं लेती है, संगीता दर्द के मारे चिकने चिल्लाने लगती है।
संगीता जल्दी करो प्लीज़, उः,,,,,,आह,,आह,,आह,,आह,, आह,,आह,, आह,,आह,, अब और ज़ोर से अंदर धकेलो आह,,आह,,आह,,आह,, आह,,आह,, आह,,आह।
जीतूबस अब थोड़ा औरजीतू संगीत को कमर को सहारे के लिए पकड़ लेता है, और पॅक,,,पॅक की आवाज़ के साथ अपनी पूरी ताक़त लगाकर ज़ोर ज़ोर से धकेलटा। संगीता दर्द के मारे और ज़ोर से करहने लगती है। फिर संगीता एक निढाल हो जाती है, जीतू भी एक बार फिर अपने वीर्या को संगीता के योनि के अनादर छ्चोड़ा देता है, और तक कर संगीता के पीठ के ऊपर ही लेट जाता है।
करीब 5 मिनिट वैसी लेते रहने के बाद, जीतू बेड में आकर लेट जाता और संगीता उससे लिपट जाती है। संगीता आँखे बंद कर जीतू से लिपट कर सोई रहती है, वह तक चूक रहती है और कुछ बोलने की हालत में नहीं रहती है। रात जैसे जैसे आगे बदती है संगीता को जैसे ही थोड़ा ठीक लगता है जीतू उसको एक बार फिर चोद्त है, और उसके बाद एक बार और। इस प्रकार जीतू संगीता को शाम से उनके रात को नींद लगने तक करीब 4 बार चोदता है, संगीता और जीतू के हालत पतली हो जाती, एक ही रात में कई बार चूदनें के कारण संगीता के चुत सूज जाती है,4-4 बार चुदाई के बाद दोनो कब सोते है उनको पता ही नही चलता है।


इधर नेहा जो अभी तक अनछुई है उसके अंगो को शरद कपड़ो के ऊपर से ही सहलाते रहता है। पहली बार में किसी को व्याकुल करने के लिए सिर्फ़ स्पर्श ही काफ़ी रहता है यही हाल नेहा का था। शरद तो कई बार पिंकी के साथ संभोग कर चुका है, पिंकी शरद को छोड़ने कर एक्सपर्ट बना चुकी है, लेकिन नेहा के लिए अहसास नया है। शरद के हांथो के स्पर्श मात्र से ही नेहा मदहोश होने लगती है उसकी साँसे तेज होने लगती है। शरद के हांथ नेहा के कपड़ो को खोलने लगते है, तभी,,,,,,,,,
नेहा प्लीज़ बत्ती बुझा दीजिए, मुझे बत्ती में शर्म सी लग रहा है।
शरद नेहा की बातों को मानकर रूम के सभी बत्तियों को बंद कर देता है, अब कमरें में एकदम अंधेरा रहता है।
रात के अंधेरे में शरद नेहा के बदन उसके कपड़ो के ऊपर से ही च्छुने लगा, सिर से लेकर पावं तक शरद का हल्का स्पर्श ने ही नेहा को बेकाबू कर दिया। शरद ने आहिस्ते से नेहा के कपड़ो को उतरने लगा, पहले उसके कपड़ो को फिर बाद में उसके ब्रा और पेनटी, शरद ने भी अपने कडपो को निकालकर नेहा को बाँहो में लेकर लेट गया। अब दोनो नंगे, बिना किसी कपड़े के एक साथ लेते हुए है। कमरे में बिल्कुल अंधेरा था, ऐसे में नेहा का नंगा बदन शरद के बदन से स्पर्श कर रहा था और यह अजीब सा रोमांचित कर देने वाला अहसास नेहा को उत्तेजित कर रहा था। शरद नेहा के ऊपर चढ़ गया और नेहा सिर के होंठो को चूमना शुरू किया।
शरद ने अपने मूह से नेहा के होंटो को चूमने चाटने लगा, अपने जीब से उसके मूह के अंदर जाकर नेहा को तड़पा रहे थे, नेहा से ये सब सहन नही हो पाया उसने भी शरद के मूह, होन्ट को अपने मूह से चूमने लगी, दोनो पागलो की तरह एक दूसरे को चूमे जा रहे थे.
नेहा मेरे पूरे बदन में एक अजीब सी सिरहन हो रही है, मैं व्याकुल हो रही हूँ, प्लीज़ मुझे अपने सीने से लगा कर रखो
शरद ने नेहा के होंठो को चूमना बंद कर दिया और उसे अपने दोनो हंतो से जाकड़ कर खीच लिया. ऐसे करते ही नेहा के दोनो उभर शरद के च्चती से छिपात गया. दोनो नंगे बदन जब छिपककर लेते हुए थे,,,,
नेहा ऐसा लग रहा है जैसे मैं ऐसी ही बिना कपड़ो के जिंदगी भर आपके साथ चिपक कर लेती रहूं,,,,,,,और आप मेरे होंटो को चूमते रहे.


शरद अभी मैं तुमको इतना प्यार करूँगा की तुम्हे आज की रात जिंदगी भर याद रहेगी, अभी तो सिर्फ़ शुरुवत हुआ है
शरद ने ऐसा कहकर नेहा को सिर से पावं तक चूमने लगा, नेहा अपने आँखो को बंद कर लेती रही. शरद ने हंतो से उसके स्तानो को सहलाने लगा, जिससे नेहा के शरीर की झंझनाहट बादने लगी. अपने दोनो हंतो से स्तानो को अब मसालने लगा, नेहा से तड़प नही सहा जर आहा था.
नेहा प्लीज़ उसको धीरे से प्यार करो, मुझसे दर्द नही सहा जा रहा है, ऐसा लग रहा है की मैं दर्द के मारे मार जाऊंगी
शरद ने उसके स्तानो को छ्चोड़ दिया, शरद तोड़ा नीचे उत्तर कर उसके नाभि को चूमने लगा. नेहा के शरीर में बिजली की करेंट दौड़ गयी. उसका शरीर ऊपर की ओर टन गया. अब तक नेहा का छूट गीला हो गया था.
शरद ने और इंतेज़ार नही किया, उसने अपने लंड को नेहा के छूट के में घुसा दिया, एक धक्के के साथ शरद का लंड नेहा के अंदर पूरा घुस गया था. जैसे ही शरद का लंड अंदर गया नेहा दर्द के मारे चीख पड़ी, वा रोने लगी दर्द के कारण उसके अनकों में आँसू आ गये थे.
शरद ने धीरे धीरे से ही लंड को अंदर बाहर करने लगा, जब उसने देखा की नेहा को अब दर्द नही हो रहा है, शरद ने ज़ोर से उसे धक्का देने लगा. नेहा के मूह से दर्द से करहने की आवाज़े शुरू हो गयी थी.
नेहा उः,,,,,,आह,,आह,,आह,,आह,, आह,,आह,, आह,,आह,, शरद मुझे दर्द हो रहा है प्लीज़ आह,,आह,,आह,,आह,, आह,,आह,, आह,,आह तोड़ा धीरे करो
शरद बस तोड़ा दर्द सहो फिर मज़ा आने लगेगा
नेहा उः,,,,,,आह,,आह,,आह,,आह,, आह,,आह,, आह,,आहनेहा के मूह से लगातार कराहने के आवाज़े आ रही थी लेकिन थोड़ी देर बाद वही दर्द अब उसे मज़ा देने लगा था.
शरद ज़ोर ज़ोर से धक्के मार कर अब नेहा को छोड़ने रहा था, नेहा दर्द से उः,,,,,,आह,,आह,,आह,,आह,, आह,,आह,, आह,,आह कर रही थी, लेकिन नेहा अब और ज़ोर से धकेलने को कह रही थी.
शरद ने नेहा के पैरो को उठा कर पकड़ लिया और अब एक्सप्रेस की तरह जल्दी जल्दी करने लगा, कमरे में नेहा की सिसकिया और पाक . के आवाज़ गूँज़ रही थी. जब शरद अपने चरम पर पहुँच वा झाड़ गया, उसके वीर्या की धार नेहा के अंदर समा गयी. तब तक नेहा का बुरा हाल हो गया था दर्द के कारण उसे लग रहा था जैसे की वा मार जाएगी, उसके आँखों से आँसू की धार निकल गयी थी, लेकिन अब वाब भी शांत हो गयी थी. नेहा तक गयी थी, उसे रात को कब नींद लगी उसे पता भी नही चला.


अगले दिन,,,,,,
अगले दिन सुबह तीनो जोड़िया जब अपने कमरो से तैयार होकर बाहर निकले, उनके चेहरा खिले हुए दिख रहे थे. पिंकी, नेहा और संगीता, तीनो रात को खूब मज़े किए थे, और सुबह तैयार होने से पहले भी उन तीनो ने फिर से मस्ती कीट ही. पिंकी ने एक पतली सी पर बहुत ही खूबसूरत सदी पहन रखी थी, सदी में उसका सुगतित बदन चुस्त पहनावे के कारण मस्त दिख रहा था. नेहा और संगीता जीन्स और टॉप्स में थे. जैसे ही उनका गाइड राम आया सभी अपने आज के सफ़र के लिए चल पड़े. रास्ते में वे आपस में बात कर रहे थे,,,,,,,,,,,,.
मोहन राम आज तुम हम लोगो को कहाँ-कहाँ लेकर जाओगे?’
राम आज मई आप लोगो को एक-दो वॉटरफॉल दिखाऊंगा, उसके बाद यहाँ का एक मंदिर और फिर शाम को यहाँ के बेज़ार लेकर जाऊँगा, यहाँ के मार्केट में आप लोगो को बहुत को देखने खरीदने को मिलेगा.
राम उनको जंगल के अंदर एक बहुत ही बड़े झरने के पास लेकर गया, राम के पीछे पीछे सभी पहाड़ो के रास्तो होते हुए वहाँ तक पहुँचे फिर एक गहराई में उनसाभी में उतरना था, झरने के पास, ठंडी ठंडी पानी बूंदे के वहाँ पर बहुत अच्छा लग रहा था. और भी बहुत से लोग झरने के नीचे जाकर नहा रहे थे, जीतू ने शरद और मोहन से झरने में नहाने की बात कही, और तीनो मिलकर झरने के नीचे चले गये और नहाने लगे. तीनो को झरने के नीचे नहाते देख पिंकी के मान में भी झरने के नीचे नहाने का विचार आया, पर वहाँ पर उनके अलावा और भी लोग थे, इसलिए पिंकी नहाने का हिम्मत नही कर सकी.
पिंकी संगीता चलो हम लोग भी झरने के नीचे नहाएँगे
नेहा पर मुझे इतने लोगो के बीच कपड़े उतार के नहाना अच्छा नही लग रहा है, तुम कैसे नहोगी
संगीता देखो ना टीन कैसे झरने के नीचे मस्त नहा रहे है, और शायद हम लोगो को इशारे से बुला रहे है.पिंकी क्यों ना कपड़ो को पहने पहने ही नहयें,,,,,,,,,,,,,कैसा रहेगा
संगीता आइडिया तो ठीक है पर उसके बाद क्या पहनेंगे, और गीलो कपड़ो में घूम भी नही सकते, नही मुझसे ये नही हो पाएगा.
नेहा मैं भी नही नहा पाऊँगी
पिंकी चलो नहा नही सकते तो कम से कम पानी में जाकर खेल तो सकते है
नेहा ये ठीक  रहेगा,,,,,,,,,,,,,” 
 
 
 







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