Monday, March 24, 2014

FUN-MAZA-MASTI दिलो की फरियाद--5

 FUN-MAZA-MASTI

 दिलो की फरियाद--5

 जीतू “हम दोनो के बीच की बात कोई तीसरा कैसे जानेगा” संगीता “चलो लेकिन मेरे साथ को बदमाशी मत करना,,,,,,” जीतू संगीता के साथ ही बाथरूम के अंदर चला गया। पिंकी और मोहन भी तब तक एक साथ नहाने के लिए बाथरूम में घुस चुके थे। होटेल के कमरो की निर्माण ऐसा था की, दो अलग कमरो के बाथरूम एक ही दीवार से लगकर बने हुए थे। पहले और दूसरे के कमरो के बाथरूम एक ही दीवार के आर पार थे। पिंकी और मोहन बाथरूम के अंदर शावर के नीचे दोनो एक दूसरे से लिपट कर नहा रहे थे। नेहा शरद का बाथरूम के अंदर थी। मोहन “जानेमन ना जाने कितनो अरसे तुम्हारे साथ इस प्रकार नहाने को मील रहा है” मोहन पिंकी के पीठ की तरफ से उससे लिपट कर स्तनो में साबुन लगते हुए दबा रहा था। मोहन का लंड तनकार पिंकी को पीछे से दबा रहा था। मोहन पिंकी के स्तनो को तब तक मसलता रहा जब पिंकी उत्तेजित नो जाए। पिंकी ऊह,,,ओह,,,,आह, करने लगी। मोहन ने पिंकी को नल की तरफ मुंह करके झुका दिया और पिंकी के पीछे से अपने लंड को घुसा दिया। पिंकी नल को पकड़ी हुई थी और मोहन उसे ज़ोर ज़ोर से ढकेले जा रहा था। पिंकी के मुंह से ऊह,,,,आह,,,आआआआ,,,,,,ही की आवाज़ निकल रही थी। मोहन ये पिंकी के मुंह से ऊह,,,,आह,,,आआआआ,,,,,,सुनकर और उत्तेजित होता है, वह और ज़ोर ज़ोर पिंकी को छोदने लगता है। पिंकी की आवाज़ तेज हो जाती है। बगल के बाथरूम में नहाती हुई नेहा इन आवाज़ो को सुनती है, आवाज़ को नेहा पहचान लेती है और उत्सुकतावास वह बाथरूम के झरोखे से उस पार देखने की कोशिश करती है, बड़ी मुस्किल से एक स्टूल के सहारे वह देख पति है की मोहन और पिंकी बाथरूम में दोनो नंगे और मोहन पिंकी को ज़ोर ज़ोर से ढकेले जा रहा है पिंकी दर्द के मारे करहा रही है। नेहा दोनो को पीछवाड़ा ही देख पति है। नेहा एक मर्द और एक औरत के बीच चल सेक्स को देखकर उसको तन बदन में एक आग सी महसूस होती है। नेहा देखती है की मोहन पिंकी को बहुत देर तक लंड को अंदर बाहर कर रह है, और अंततः मोहन पिंकी से अलग हो जाता है और फिर दोनो नहाकर बाहर आ जाते है। जब नेहा स्टूल से नीचे उतरती है तब नेहा अपने चूत के पास गीलापन महसूस करती है। थोड़ी देर नेहा भी बाथरूम से एक सुंदर सी ड्रेस पहनकर बाहर आती है। शरद नेहा को जब इस ड्रेस में देखता है;

 शरद “तुम इस ड्रेस में बहुत सुंदर लग रही हो, ऐसे लग रही हो जासे कोई परी आसमान से धरती पर उतार आई हो।” ऐसा कहते हुए शरद पिंकी के माथे को बड़े प्यार से चूमता है। शरद “वैसे तुमने नहाने में देर कैसे लगा दी, अब मुझे भी नहाने दो” नेहा शरद के सवाल को जब सुनती है तब नेहा थोडी घबरा जाती है और कुछ नही कह पाती है: नेहा “बस ऐसे ही लेट हो गया।” अब शरद नहाने के लिए अंदर चल जाता है। उधर संगीता और जीतू भी नहाने की लिए बाथरूम में घुसे हुए है। जीतू संगीता के कपड़ो को उतरने लगता है; संगीता “जीतू नहीं मुझे निकालने दो, मुझे शर्म आ रही है,” जीतू “आज तक मैने तुम्हे बिना कपड़ो के नहीं देखा है, कई बार ऊपर से ही इन उभरो को चूहा है, हांथो से महसूस किया है, आज मैं इनको देखना चाहता हूँ।” संगीता अपने चेहरे को लाज के मारे दूसरी तरफ मोड़ लेती है। जीतू संगीता के ऊपर के शर्ट को उसके बदन से अलग कर नीचे रख देता है। संगीता लाज के मारे अपने स्तनो की चुचियों को हांथो से पकड़ कर छिपा लेती है और अपनी आँखे बंद कर लेती है। जीतू भी अपनी शर्ट और जीन्स को उत्तरकर हॅंगर में टांग देता है। संगीता अभी भी अपने स्तनो की चुचियों को हाथों से पकड़ कर खड़ी रहती है “जीतू मुझे लाज आ रही है।” जीतू “आज के बाद तुमको मुझसे लाज नहीं आएगी, इतना मैं तुमको प्यार करूँगा” जीतू संगीता के लोंग स्कर्ट को भी खोल देता है, स्कर्ट जैसे ही खुलता है ज़मीन पर गिर पड़ता है।जीतू नीच बैठ जाता है अपने होंठो को संगीता के नाभि के पास लेजाकर, नाभि को गोले चारो और जीब से चाटने लगता है। संगीता के हांथ अब स्तन को छोड़ कर जीतू को बालो को दोनो हांथो से ज़ोर पकड़ लेती है। जीतू संगीता के बदन को चूमते हुए आहिस्ता आहिस्ता ऊपर की ओर बढ़ता है। होंठो को होंठो के पास लेजाकर, उसके होंठो को बड़े प्यार से चूमने लगता है, संगीता के होंठ भी शरद के होंठो का साथ देती है। संगीता इस आनंद की मदहोशी में चूर हो कर मस्त हो जाती है। अब उसे नहीं पता की वह क्या कर रही रही, संगीता हिज़ मदहोशी में अपना पूरा वजन जीतू पर डाल देती है। जीतू संगीता को दोनो हांथो से उठाकर बाथरूम से बेड में ले आकर लेटा देता है।

 जीतू संगीता स्तनो को अपने दोनो हांथो से मस्त मालिश करता है, संगीत बस आँखों को बंद सुख के सागर में डूबते चले जा रही है, आगे जीतू उसके चूंचियों को चूसने लगता है। संगीता की मुंह से आवाज़ आती है। संगीत “और,,,,,और,,,,,हुं,,,,,और,,,जीतू बहुत अच्छा लग रही, और करो” जीतू नीच चुत के पास आ जाता है, संगीता की चुत गीली हो चुकी रहती है, जीतू उसके गीले चुत को छूकर देखता है। संगीता के टांगो को ऊपर उठाकर जीतू लंड को घुसने का कोशिश करता है, एक दो कोशिश में अपनी सही जगह पा जाता है। गीले चुत में जीतू का लंड सुगमता से चुत के अंदर घुसजाता है। एक ज़ोर का धक्का और लंड चुत के अंदर पूरी तरह समा जाता है। इस धक्के के कारण एक असहनीया दर्द के कारण संगीता चीख पड़ती है, और खून की धार उसके चुत बाहर निकल पड़ती है। संगीता आँखे खोल लेती है “लगता है मैं मर जाऊंगी” जीतू उसको गॅलो को किस कर बोलता है “नहीं स्वीटहार्ट मैं तुम्हारे साथ हूँ और तुमको कोई दर्द नहीं होगा” जीतू अब धीरे धीरे अपने लंड को अंदर बाहर करने लगता है, बहुत देर तक जीतू अपने लंड को अंदर बाहर करने लगता है। संगीता को अब मज़ा आने लगता है। संगीता “और करो और करो, ऐसे ही करो जब तक मैं तक ना जाओं।” संगीता “उः,,,,आ,,,उः,,आह,,,आ,,,, आह,,,आ,,, आह,,,आ, प्लीज़ करते रहो” जीतू अंततः अपनी चरम पर पहुँच जाता है और झाड़ झाता है, वीर्य की धार संगीता के अंदर चली जाती है, जीतू तब तक पसीना पसीना हो चुका रहता है, संगीता जीतू को अपने सीने से लिपटा लेती है, और बाहों में भरकर रखती है। कुछ देर बाद दोनो उठते है और बाथरूम में जाकर संगीता अपने चुत के ब्लड को साफ करती है, फिर दोनो मिलकर एक दूसरे को अच्छी तरह साबुन लगाकर नहलाते है, जब दोनो फ्रेश हो जाते है तब बाथरूम के बाहर आतें है। संगीता और जीतू के फ्रेश होकर बाहर आने से पहले ही बाकी लोग तैयार हो कर होटेल के रिसेप्न में बैठे रहते है।

 लंच का समय हो चुका रहता है, लंच के बाद वे अपनी सैर पर निकल चलते है। राम नाम का एक स्थानिया आदमी मिलता है जो गाइड रहता है, वह उनको गाइड करने को तैयार हो जाता है। राम (गाइड) बोलता है “यहां के हरे भरे घने जंगल, नादिया, खूबसूरत झरने, बड़े-बड़े पहाड़ और गहरे घटियाँ, यहां आने वाले हर किसी को रोमांचित कर देती है।” मोहन “राम हम लोग बड़ी दूर से आए है, तुम हम सभी को यहाँ की सभी अच्छी जगह देखाना” जीतू “वैसे आज हम शाम तक कहाँ कहाँ घूम सकते है” राम “सर, ऐसे तो यहाँ की हर चीज़ देखने लायक है पर मैं आप सभी को बहुत ही रोमॅंटिक जगह ले चलता हूँ” नेहा “रोमॅंटिक जगह! बिल्कुल” संगीता और पिंकी “तब तो सैर करने में मज़ा आएगा” राम उन सभी को उस जगह के पीक पॉइंट पर लेजाता है, पूरे शहर का नज़ारा उस चोटी से अति सुंदर दिखता है। शरद “सच में बहुत ही अच्छी जगह है” शरद अपने कैमरा से सब की फोटो खीचता है, सब वहा खूब मस्ती करतें है, इस मौज मस्ती कब शाम हो जाती बिल्कुल पता नहीं चलता, और सभी वापस अपने होटेल में आ जाते है। मोहन “क्यों ना फ्रेश होने के बाद हम किसी के कमरे में बैठ जाते और डिनर तक खूब मस्ती करतें है” बाकी लोगो को मोहन का आइडिया पसंद आ जाता है, और इसके लिए सहमत हो जाते है। पिंकी फ्रेश होने के लिए अपना ड्रेस बदल रही है, मोहन वही बेड में बैठ था, पीछे से पिंकी को पकड़ लेता है; मोहन “आज तुम इस ड्रेस में बहुत सुंदर लग रही थी,,,,,,” मोहन के हांथ आहिस्ता से कमर से होते हुए पिंकी के स्तनो की ओर बदते है। “क्या तुमको मेरी याद नहीं आती है?” पिंकी “आप याद करना किया होता, इंतज़ार क्या होता है, नहीं समझेंगे” मोहन “मैं भी तुमको बहुत मिस करता हूँ डार्लिंग” मोहन के हांथ अब तक पिंकी के स्तनो को ढंख लिए रहता है। मोहन “तुम अपनी नौकरी छोड़ दो, हम तीनो फिर एक साथ रहेंगे, वैसे भी उस छोटी सी जगह में कुछ नहीं रखा है”

 पिंकी मोहन के हांथो को अपने स्तनो से हटाती है, और दूसरा ड्रेस पहनती हुई कहती है “नहीं मुझे अपनी नौकरी नहीं छोड़नी, मैं भी काम करना चाहती हूँ।” मोहन “तो फिर हम ऐसे कब तक रहेंगे” पिंकी “जब तक मेरे ट्रान्स्फर ना हो जाए, या फिर दूसरी नौकरी ना लग जाए।” तभी दरवाजे पर खट खट होती है; मोहन “कौन है” “रूम सर्विस सर” पिंकी का ड्रेस चेंज हो चुका रहता है, मोहन दरवाजा खोलता है, एक लड़का पीने का पानी लाकर रखता है। अगर और कुछ चाहिए तो घंटी बजाने को कहकर वह लड़का चला जाता है। पिंकी “अब कैसी लग रही हूँ” मोहन “बहुत अच्छी लग रही हो” अपने हांथो को उठाकर पिंकी को अपने बाहों में आने के लिए कहता है। पिंकी मोहन के बाहों में आकर समा जाती है। पिंकी “मैं आपसे बहुत प्यार करती हूँ, पति के बिना जीना कैसा होता है वह मैं ही जानती हूँ” पिंकी मोहन के सीने से लिपटी रही है तब फिर से दरवाजे पर खट खट होती है; मोहन “अब कौन है” संगीता “हम है, संगीता और नेहा” पिंकी जाकर दरवाजा खोलती है, संगीता और नेहा फ्रेश होकर आए रहते है, दोनो पिंकी और मोहन के साथ बैठ जाते है। मोहन “वो दोनो कहा है” नेहा “आते ही होंगे” मोहन “संगीता, नेहा यहां आकर कैसा महसूस हो रहा है” संगीता और नेहा “बहुत अच्छा” इतने में जीतू और शरद आ जाते है। दोनो आकर जैसे ही बैठते है मोहन दोनो से एक बात पुछ डालता है। मोहन “मैं एक बात कहना चाहता हूँ, जीतू और संगीता आप लोग शादी कब कर रहे है” जीतू संगीता की ओर देखकर कर कहता है “बस बहुत जल्दी ही” पिंकी “शरद और नेहा से भी पूछ लीजिए वे कब इस बंधन में बंधेंगे” मोहन “शरद और आप,,,,,,” नेहा के निगाहें शरद के ओर रहती है “अबी मैने घरवालो को इस बारे में नहीं बताया है, पर मुझे भरोसा है की मेरे घरवाले मेरी पसंद की लड़की से ही मेरी शादी करेंगे” नेहा शर्मा जाती है, और संगीता के पीछे छुपने का प्रयास करती है। पिंकी “आप सभी लड़के लोग बाहर जाकर घूमिये, तब तक हम भी कुछ बातें कर लेंगे” मोहन “आप का हुक्म कैसे टाल सकते है” यह कहकर तीनो कमरे से बाहर आकर होटेल के कॉंपाउंड में टहलने लगते हैं। संगीता “आप ने ठीक किया जो उन लोगो को बाहर भेज दिया, मैं तो नर्वस होने लगी थी”

 नेहा “मुझे तो समझ में नहीं आ रहा था की मैं क्या बोलू।” पिंकी “लेकिन सवाल तो सही है,,,,,,,,की तुम लोग शादी कब करोगे” बाहर में मोहन ने अपना सवाल जारी रखा; मोहन “अगर तुम दोनो बुरा ना माने तो मैं एक बात कहूँ” शरद “पुछिए” मोहन “अभी तक तुम में से किसी ने कुछ करने को मिला है भी की नहीं, मेरा मतलब है कुछ सेक्स,,,,,जैसा, की अब तक ऐसे ही हो,,,,,” जीतू “अभी तक ठीक से चान्स नहीं मिला” जीतू ने आज की बात नहीं बताई। शरद ने मन में सोचा उसने अभी नेहा से कुछ नहीं किया है पर वह तो पिंकी के साथ पिछले एक हफ्ते में कई बार सो चुका था। शरद ने इन सब बातों को छुपाते हुए कहा, “नहीं,,,,,अभी तक नहीं, अबी तक मेरे नेहा अनछुई है” मोहन “अरे यार टूर में आए हो इससे अच्छा और सुनहरा अवसर नहीं मिलेगा, अभी हम 2-3 रात यहां रुकेंगे, मेरी मानो तो कुछ शादी से पहले कामसुख भोग लो” जीतू “पर उसके लिए रात को एक कमरे में सोना पड़ेगा, पता नहीं रात को संगीता आएगी की नहीं,,,,,,,,,” शरद जीतू की बातों को सुनकर मुस्कुराता है। मोहन “एक बार कोशिश कर के तो देख क्या पता वा राज़ी हो जाए, ये लड़कियाँ होती ही ऐसी है, मन में तो इच्छा रहती है पर ज़ुबान पे ना रहता है।” इधर तीनो औरते अपनी बातों में मसगुल रहती है। पिंकी संगीता और नेहा को चिड़ाते हुए कहती है,,,,,,,,, पिंकी “इस होटेल के कमरो में जहाँ को भी डिस्टर्ब नहीं करेगा, एक कुँवारा और एक कुँवारी अगर एक कमरे में सिर्फ़ दो लोग हो तो क्या तुमको कुछ करने का मॅन नहीं करता” पिंकी “अरे यार तुम दोनो शादी से पहले एक साथ सोने का गोलडेन चान्स मिला है,” संगीता “तुम तो ऐसे बोल रही हो जैसे तुम भी शादी से पहले बहुत कुछ कर चुकी थी” पिंकी चुप हो गयी।


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