Monday, March 24, 2014

FUN-MAZA-MASTI दिलो की फरियाद--4

 FUN-MAZA-MASTI

 दिलो की फरियाद--4

 पिंकी ने सबसे पहले टॉप्स को सिर्फ़ आधा निकाला, फिर उसने उसे धीरे धीरे पूरी तरह से अपने बदन से अलग कर दी, शरद कैमरा से फोटो लगातार लिए जा रहा था, अब बारी जीन्स की थी, पिंकी ने धीरे से उसे भी शरीर से अलग कर दी, पिंकी सिर्फ़ एक चड्डी और ब्रा में थी। शरद ने उसे भी उतरने को कहा, पहले एक स्तन को खुला किया फिर दूसरे स्तन को, जब दोनो स्तन ब्रा के क़ैद से आज़ाद हो गये तो बारी चड्डी की आ गयी। पिंकी ने अब उसके शरीर का एक मात्र कपड़े को अपने शरीर से दूर कर दी, शरद भी उसी क्रम में उन लम्हो को कैमरा में क़ैद कर रहा था। पिंकी अब निर्वस्त्र थी, अलग अलग पोज़ में खड़ी खोकर फोटो शूट करवा रही थी। करीब आधे घंटे तक पिंकी का फोटो शूट चलो, तब तक शरद का लिंग एक दम तन कर खड़ा हो गया था। पिंकी की भी चुत गीली हो गयी थी। शरद पिंकी की तरफ आगे बढ़ा, वह दीवार के पास खडी थी। शरद ने पिंकी को दीवार से सटाकर उसे चूमने लगा, सबसे पहले शरद ने उसके होंठों को चूमा, फिर गालो को और इसके बाद नीचे आते उतरते हुये उसके स्तनो के पास पहुँच गया। अब शरद ने पिंकी के स्तनो को अपने हांथो से पकड़ कर मसलने लगा, पिंकी मदहोश हो रही थी, पिंकी अपने हांथो से शरद के सिर को पकड़ ली और उसे सहला रही थी। इधर शरद स्तनो को चूमने में मसगूल हो गया, उसने पिंकी के निपल्स को बड़ी बेदर्दी से चूसना शुरू कर दिया, पिंकी तड़प उठी। पिंकी को यह तड़प बहुत अच्छी लग रही थी इसलिए उसे और ज़ोर से चूसने को कहा। शरद ने अपना काम जारी रखा, शरद उसके स्तन को, निपल्स को तब तक चूस्ते रहा जब तक पिंकी ने शरद को रोका नहीं। पिंकी का चुत गीली हो गयी थी, जब उसकी तड़प सहन से बाहर हो गयी तब उसने शरद से उसने लिंग को घुसने को कहा, शरद मानो जैसे इसी का ही इंतज़ार कर रहा हो उसने अपनी लिंग को अंडरवेर से निकल लिया। शरद ने अपने लंड को पिंकी की योनि द्वार पर रखकर उसने धक्का दिया, उसका लंड सट से अंदर चला गया। शरद ने पिंकी को दीवार से हटकर अब बिस्तर पे लेटा दिया, अब पिंकी नीचे और शरद उसके ऊपर था, पिंकी ने अपने टाँगे को सीधा खड़ा कर दी। शरद अब आराम से पिंकी को धकेल रहा था, शरद सहरे के लिए पिंकी के टॅंगो को पकड़ रखा था, शरद ने अपनी रफ़्तार बड़ा रही दी, शरद बड़े ज़ोर ज़ोर से अंदर बाहर कर रहा था और पिंकी तड़प रही थी, सिसकिया ले रही थी, कराह रही। अंततः शरद अपने चरम पर आ गया और झड़ गया और वह पिंकी के ऊपर निढाल होकर गिर गया। पिंकी ने शरद को अपने बाहों में लपेट लिया, और आपने होंठो से शरद गालो को धीरे धीरे से किस करने लगी और,,,,,,,,,,,,,,,।
पिंकी “काश ऐसा सुख मुझे हर रात मिलता तो मैं धन्य हो जाती, थॅंक यु”
शरद पिंकी के बगल में लेट गया, पिंकी शरद को अपने बाहों में भरकर रात । शरद के यहाँ सोई रही। पिंकी की नींदद जब खुली तब उसने देखा की सुबह के 4 बज रहे हैं, उसने सोचा की । पहले घर का कोई अन्य सदस्य उठ जाये और
उसे शरद के कमरे से जाते देख ले, पिंकी तुरंत अपने कपड़े पहने, अपने कमरे में चली आई।

पिंकी ने सबसे पहले टॉप्स को सिर्फ़ आधा निकाला, फिर उसने उसे धीरे धीरे पूरी तरह से अपने बदन से अलग कर दी, शरद कैमरा से फोटो लगातार लिए जा रहा था, अब बारी जीन्स की थी, पिंकी ने धीरे से उसे भी शरीर से अलग कर दी, पिंकी सिर्फ़ एक चड्डी और ब्रा में थी। शरद ने उसे भी उतरने को कहा, पहले एक स्तन को खुला किया फिर दूसरे स्तन को, जब दोनो स्तन ब्रा के क़ैद से आज़ाद हो गये तो बारी चड्डी की आ गयी। पिंकी ने अब उसके शरीर का एक मात्र कपड़े को अपने शरीर से दूर कर दी, शरद भी उसी क्रम में उन लम्हो को कैमरा में क़ैद कर रहा था। पिंकी अब निर्वस्त्र थी, अलग अलग पोज़ में खड़ी खोकर फोटो शूट करवा रही थी। करीब आधे घंटे तक पिंकी का फोटो शूट चलो, तब तक शरद का लिंग एक दम तन कर खड़ा हो गया था। पिंकी की भी चुत गीली हो गयी थी।
शरद पिंकी की तरफ आगे बढ़ा, वह दीवार के पास खडी थी। शरद ने पिंकी को दीवार से सटाकर उसे चूमने लगा, सबसे पहले शरद ने उसके होंठों को चूमा, फिर गालो को और इसके बाद नीचे आते उतरते हुये उसके स्तनो के पास पहुँच गया। अब शरद ने पिंकी के स्तनो को अपने हांथो से पकड़ कर मसलने लगा, पिंकी मदहोश हो रही थी, पिंकी अपने हांथो से शरद के सिर को पकड़ ली और उसे सहला रही थी। इधर शरद स्तनो को चूमने में मसगूल हो गया, उसने पिंकी के निपल्स को बड़ी बेदर्दी से चूसना शुरू कर दिया, पिंकी तड़प उठी। पिंकी को यह तड़प बहुत अच्छी लग रही थी इसलिए उसे और ज़ोर से चूसने को कहा। शरद ने अपना काम जारी रखा, शरद उसके स्तन को, निपल्स को तब तक चूस्ते रहा जब तक पिंकी ने शरद को रोका नहीं। पिंकी का चुत गीली हो गयी थी, जब उसकी तड़प सहन से बाहर हो गयी तब उसने शरद से उसने लिंग को घुसने को कहा, शरद मानो जैसे इसी का ही इंतज़ार कर रहा हो उसने अपनी लिंग को अंडरवेर से निकल लिया। शरद ने अपने लंड को पिंकी की योनि द्वार पर रखकर उसने धक्का दिया, उसका लंड सट से अंदर चला गया। शरद ने पिंकी को दीवार से हटकर अब बिस्तर पे लेटा दिया, अब पिंकी नीचे और शरद उसके ऊपर था, पिंकी ने अपने टाँगे को सीधा खड़ा कर दी। शरद अब आराम से पिंकी को धकेल रहा था, शरद सहरे के लिए पिंकी के टॅंगो को पकड़ रखा था, शरद ने अपनी रफ़्तार बड़ा रही दी, शरद बड़े ज़ोर ज़ोर से अंदर बाहर कर रहा था और पिंकी तड़प रही थी, सिसकिया ले रही थी, कराह रही। अंततः शरद अपने चरम पर आ गया और झड़ गया और वह पिंकी के ऊपर निढाल होकर गिर गया। पिंकी ने शरद को अपने बाहों में लपेट लिया, और आपने होंठो से शरद गालो को धीरे धीरे से किस करने लगी और,,,,,,,,,,,,,,,।
पिंकी “काश ऐसा सुख मुझे हर रात मिलता तो मैं धन्य हो जाती, थॅंक यु”
शरद पिंकी के बगल में लेट गया, पिंकी शरद को अपने बाहों में भरकर रात । शरद के यहाँ सोई रही। पिंकी की नींदद जब खुली तब उसने देखा की सुबह के 4 बज रहे हैं, उसने सोचा की । पहले घर का कोई अन्य सदस्य उठ जाये और
उसे शरद के कमरे से जाते देख ले, पिंकी तुरंत अपने कपड़े पहने, अपने कमरे में चली आई।

नेहा और संगीता का चेहरा खिला हुआ, मुस्करता हुआ है, पर पिंकी थोड़ी गंभीर मुद्रा में रहती है, कारण उसे डर है कहीं पिंकी ग़लती से कुछ ऐसा ना कर बैठे जिससे वह मोहन के सामने शर्मसार हो जाए। मोहन, शरद और जीतू,इनकी भी एक दूसरे से जान पहचान हो जाती है, तीनो काफ़ी घुल मिल जाते है। ट्रेन अपने समय से थोड़ा लेट आती है, सभी चढ़कर अपने मंज़िल की ओर बढ़ चलते है।
नेहा अपने जानू, शरद, का हाथ थाम कर उसके साथ बैठ जाती है, संगीत जीतू के संग और अंत में पिंकी और मोहन एक संग, कपल्स की तरह बैठ जाते है, इन 3 लव कपल्स की लव एक्सप्रेस चलना सुरु कर देती और अपनी रफ़्तार पकड़ती है। दिन के समय सभी मौज मस्ती करतें हुए, एक दूसरे के गोदी में सिर रखे हुए और अन्य तरह से वक़्त निकल जाता है। जैसे जैसे शाम से रात होती है, ट्रेन अन्य मुसाफिरो की तरह अपने बर्थ में में आराम करना सुरू कर देते है। धीरे धीरे रात गहरी होती और साथ ही ट्रेन में सभी मुसाफिर गहरी नींद की आगोश में रहतें है, ट्रेन अपने तेज रफ़्तार में रहती है। पर जीतू और संगीता की आँखों में नीं नहीं रहती है, दोनो एक दूसरे को निहारते रहते है। जीतू और संगीता दोनो ऊपर के बर्थ में आमने सामने रहती, संगीता के ठीक नीचे पिंकी और जीतू के ठीक नीचे मोहन सोया हुआ रहता है। जीतू संगीता को चेहरे को छूटे हुए कहता है;
जीतू बड़ी धीमी आवाज़ में “आई लव यु माई स्वीटहार्ट”
संगीता वह भी धीमी आवाज़ में “ आई लव यु टू” और एक चुम्मी हवा में ही जीतू को देती है।
जीतू अपने बर्थ से थोड़ा खिसककर संगीत को किस करना चाहा, पर दोनो बर्थ में दूरी होने के कारण वह नहीं कर पाया। संगीता इस बात में हंस देती है।
जीतू बोलता है, “रूको मैं तुमको बताता हूँ”
जीतू बर्थ से उठकर संगीता के बर्थ में चला जाता, और संगीत के होंठो को चूमता है। संगीता भी उसके इस चुम्मी का जवाब जीतू के होंठो को किस कर देती है।  



संगीता जीतू के कानो के पास मुंह ले जाकर फुशफूशायी “आई लव यु माई डार्लिंग”
जीतू और संगीता एक ही बर्थ में, एक चादर के अंदर में दोनो ऐसे समा जाते जैसे एक ही आदमी सोया हो।
जीतू संगीता के होंठो को बेहिसाब चूमने लगता है, और अपने हांथो को संगीता के स्तनो को कपड़ो के ऊपर से ही छुने लगा, तो संगीता ने जीतू के हांथ को हटा दिया, जीतू के हांथ संगीता के मुलायम, गोल स्तनो को मसालने के लिए फिर बढ़ने लगा।
संगीता “जीतू मेरे ब्रेस्ट को मत छुओ मेरे बदन में झंझनाहट होती है”
जीतू “जानेमन इसी को तो प्यार कहते है”
लेकिन जीतू के होंठ अपना काम किए जा रहे थे, संगीता के बर्थ के नीचे सोई पिंकी को लगा की ऊपर से कुछ आवाज़े आ रही है, पिंकी ने अपने सिर को थोड़ा ऊपर की ओर उठाकर सुनने लगी, पिंकी संगीत के तेज सांसो को सुन रही थी, बीच-बीच उनकी बातों को भी वह सुनने लगी। पिंकी को सारी चीज़ें समझने में देर नहीं लगी, लेकिन उसका धान अब ऊपर की तरफ चला गया।
संगीता “जीतू अब बस करो मेरे होंठ सूज जाएँगे उनको छोड़ दो, अगर कोई उठ गया तो बड़ी मुस्किल हो जाएगी”
जीतू “बस थोड़ा और, उसके बाद जैसा तुम कहो”
संगीता “बस अब जादा मत करो नहीं तो मुझे से कंट्रोल नहीं होगा”
जीतू रुक गया और थोड़ी देर में अपने बर्थ में आकर सो गया। संगीता जीतू को एक प्यारी स्माइल दी और सो गयी। पर तब तक पिंकी की नींद उड़ गयी थी। उन दोनो के हरकतो ने पिंकी को उत्तेजित कर दिया था। पिंकी को समझ नहीं आ रहा था वह क्या करे। पिंकी बर्थ से उतारकर बोगी के दरवाजे के पास आकर खड़ी हो गयी, ट्रेन फुल स्पीड में चल रही थी, हिम्मत करके वह थोड़ी देर वहां पर रही, फिर जब उसका ध्यान उन बातों से हटा वह वापस अपने बर्थ में आकर सो गयी।

 एक दिन और एक रात के सफ़र के बाद ट्रेन अगले दिन उनके मंज़िल को पहुँची। सब कोई बहुत खुश थे। उन्होने एक होटेल में 3 कमरे लिए, लेकिन एक दुविधा में वह फँस गये, पिंकी और मोहन तो शादीशुदा है लेकिन जीतू, संगीत, नेहा और शरद अभी तक इस बंधन में नहीं बँधे है तो हो फिर एक साथ कैसे रहे, और उन चारो ने सोचा की बिना शादी क एक साथ रहना उचित नहीं है। तीनो कमरे एक कतार में थी, पहले कमरे में पिंकी और मोहन ठहरेंगे, और दूसरे में नेहा और संगीता और अंतिम में शरद और जीतू। अपने-अपने कमरो सब तरो ताज़ा होने लगे। नेहा ने संगीता को बोली “मैं पहले नाहकार फ्रेश होती हूँ फिर आप मेरे बाद फ्रेश होना” और नेहा बाथरूम के अंदरछली गयी। संगीता ने सोचा अगर जीतू बाथरूम नहीं इस्तेमाल कर रहो हो तो वह क्यों ना वही जाकर नहा ले, तो वह शरद और जीतू के कमरे में आ गयी। संगीता “अगर आपका बाथरूम खाली हो तो मैं इस्तेमाल कर लू, फिर आप दोनो फ्रेश होते रहना” शरद “आप उसे कर लीजिए, हम दोनो बाद में नहा लेंगे, क्यों जीतू?”ऐसा बोलकर वह कमरे से बाहर आ गया। संगीत बाथरूम की ओर नहाने के लिए बादने लगी, जीतू अभी भी कमरे में बेड पर लेता हुआ था, तभी; जीतू ने संगीता को छेड़ते हुआ कहा “जानेमन अगर तुमको कोई प्राब्लम नहीं हो तो मैं भी तुम्हेरे साथ अंदर आ जाता हूँ ” संगीता जो बाथरूम के दरवाजे पास पहुँच चुकी थी वह वहां पर से वापस जीतू के करीब आ जाती है और अपने होंठो से जीतू के गालो को एक प्यारी सी चुम्मी देती है। संगीता “जानेमन आपको अभी उसके लिए इंतज़ार करना होगा, हमारी शादी तक” जीतू “हमारी शादी तो एक होगी ही, कम से कम आज एक साथ नहाकार उसकी शुरुवात कर दे” संगीता “नहीं किसी को पता चलेगा तो कोई क्या कहेगा,,,,,,,,,”







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