Thursday, June 5, 2014

FUN-MAZA-MASTI सीता --एक गाँव की लड़की--6

FUN-MAZA-MASTI

 सीता --एक गाँव की लड़की--6

अंकल पूजा की पीठ पर से हाथ हटाते हुए उसकी गाल पर ले गए और प्यार से उठाते हुए अपने चेहरे की तरफ कर लिए।
फिर अपने होंठ पूजा के होंठों के काफी निकट ले जाते हुए बोले,"मैं तो अपनी बेटी के प्यार से धन्य हो गया हूँ।मैं उनका सदा आभारी रहूँगा जिन्होंने मुझे इतनी प्यारी बेटियाँ दी है।" इतना कहने के साथ ही अंकल के होंठ पूजा की प्यारी होंठो से चिपक गए।
पूजा भी अपनी आँखें बंद कर अंकल को अपनी सहमति दे दी।
इधर मैं इन दोनों की स्थिति देख पसीने से भीँग सी गई थी। ना हटते बन रही थी और ना रहते। इतनी देर से लण्ड की ठोकरेँ खाते मैं वैसे ही पानी बहा रही थी। अब तो और भी बर्दाश्त से बाहर हो रही थी। अंकल एक तरफ से मुझे बाँहों में कसते हुए दूसरी कुंवारी कन्या की रस चुस रहे थे।
कुछ ही देर में दोनों के होंठ जुदा हो गए।
इतनी गहरी किस कर रहे थे कि अलग होना तो नामुमकिन थी पर मैं भी वहीं पर थी जिस वजह से छोड़नी पड़ी।
पूजा कुछ मायूस सी हो गई शायद वो अलग होना नहीं चाहती थी।
"अंकल आप अपना सारा प्यार मुझे ही देंगे क्या? ऐसे में तो भाभी कहीं नाराज हो गई तो...."तभी पूजा मेरी तरफ देख मुस्कुराती हुई अंकल से बोले। अपने बारे में सुन मेरे पसीने छूट पड़े।तभी अंकल मेरे गालोँ को सहलाते हुए चेहरे को ऊपर कर दिए। मेरी दिमाग सुन्न सी हो गई।मैं आँख खोलने की हिम्मत नहीं कर पा रही थी।मेरे होंठ अपने आप कांपने लगी अंकल के अगले वार को सोच के।
"अरे नहीं पूजा,ऐसा करने की भला मेरी कहाँ हिम्मत है कि मैं अपनी सीता बेटी को भूल जाऊँ।" कहते हुए अंकल मेरी गर्म होंठ पर अपने होंठ रख दिए।
मैं तो एक बारगी बिल्कुल ही सिहर गई।
अंकल मेरी निचले होंठ के हिस्से को अपने होंठों से दबा के जीभ चलाने लगे।मैं तो इतनी सी ही में आनंद में खो गई।
अंकल अब पूरी होंठों को अपने कब्जे में लेते हुए जोर से किस करने लगे।मैं उनका साथ तो नहीं दे पा रही थी और ना ही विरोध कर रही थी।
अगले ही पल अंकल अपनी जीभ मेरी मुँह के अंदर डालने की कोशिश करने लगे।मैं ज्यादा रोकने की हिम्मत नहीं कर पाई और एक घायल हिरण की तरह खुद को सौंप दी।
अब उनकी जीभ मेरी जीभ से मिलाप कर रही थी।कुछ देर तक इसी तरह लगातार चुसते रहे।
तभी मेरी बगल से पूजा धीरे से अंकल की बाँहे से छूटते हुए बाहर हो गई। अब मैं अकेली अंकल की बाँहों में कैद मजे के सागर में गोते लगा रही थी। उनका एक हाथ मेरे सर पे और दूसरी हाथ मेरी कमर को सहला रही थी।
कोई 5 मिनट तक चुसने के बाद मेरी होंठ अंकल के होंठ से अलग हुई। मुझ में अब थोड़ी सी भी ताकत नहीं रह गई थी।मैं बेसुध सी अंकल के बाँहों में पड़ी लम्बी लम्बी साँसें ले रही थी।अंकल अब मेरी गालोँ को हौले से सहलाने लगे।
कुछ देर सहलाने के पश्चात।
"सीता बेटा,क्या हुआ?"अंकल धीरे से पूछे।
मैं यूँ ही आँखें बंद किए कुछ नहीं बोली।
तभी पीछे से पूजा सट गई और मेरे गालोँ को चूमते हुए बोली,"भाभी, अंकल के प्यार को आप बुरा मान गई क्या?"
पूजा की बातें सुनते ही मेरे अंदर गुस्से की आग भड़कने सी लग गई।इतना कुछ होने के बाद कमीनी पूछती है कि बुरा मान गई क्या?
अगर बुरा मानती तो मैं कब का यहाँ से चली गई होती।
फिर भी खुद पर नियंत्रण करते हुए ना में सिर हिला कर जवाब दे दी। जवाब पाते ही पूजा हँसती हुई मुझे थैंक्स भाभी बोली और लिपट सी गई।अंकल भी मुस्कुराते हुए एक बार फिर मेरी होंठ पर चुम्बन जड़ दिए।
"बेटा,अब मैं जा रहा हूँ।कुछ लोग मेरा इंतजार कर रहे हैं।मौका मिलते ही मैं आप लोगों से मिलने आ जाऊँगा। जाऊँ बेटा?"अंकल अपनी बाँहेँ हटाते हुए मेरी गालोँ को सहलाते हुए पूछे।
मैं भी अब थोड़ा फ्रेश होना चाहती थी। इतनी देर से मेरी चूत की पानी घुटने से नीचे आ गई थी बह के।मैं "हूँउँऊँऊँउँ" कह के अंकल के जाने की सहमति दे दी। अंकल थैंक्स कहते हुए मुझे अपने से अलग किए और बाहर निकल गए।
मेरी नजर पूजा पर पड़ते ही शर्म से अपने रूम की दौड़ गई। पूजा भी हँसती हुई पीछे से आई।
तब तक मैं बेड पर मुँह छिपा के लेट चुकी थी।पूजा आते ही मुझसे लिपट के चढ़ गई।
कुछ देर यूँ ही पड़ी रहने के बाद पूजा मुझे सीधी कर दी। मैं अभी भी अपने हाथ से आँखों को ढँक मंद मंद मुस्कुरा रही थी।
अगले ही क्षण पूजा मेरे सीने से साड़ी हटा दी। मेरी तनी हुई चुची पूजा के सामने थी। मेरी हर एक साँस के साथ मेरी चुची भी ऊपर नीचे कर रही थी। तभी पूजा मेरी कमर पर अपनी एक पैर चढ़ाती हुई मेरी एक चुची को दाँतो से पकड़ ली।मैं दर्द से उछल पड़ी।
पूजा हँसती हुई बोली," डॉर्लिँग, अंकल ऐसे ही और बेरहमी से तुझे मजा देंगे। थोड़ी सी बर्दाश्त करना सीख लो।"
"चुप कर बेशर्म। मैं नहीं करवाती।" मैंने पूजा के मुँह को ऊपर की तरफ धकेलते हुए बोली।
"हाँ वो तो मैं जानती ही हूँ कि आप करवाओगी या नहीं। मैं थी इसीलिए वर्ना अभी तक तो तुम अंकल से चुदी होती। कितनी मजे से अंकल का लण्ड अपनी चूत में सटा के खड़ी थी।"ताने देते हुए पूजा बोली।
"प्लीज पूजा,कुछ मत कहो।शर्म आती है।"
मेरी बात सुनते ही पूजा हँस पड़ी और बोली,"ओके भाभी, अब नहीं कहती।अच्छा ये तो बताओ अंकल का पसंद आया कि नहीं।"
मैं हँसती हुई हाँ में सिर हिला दी।पूजा भी मेरी जवाब से इतनी खुश हो गई कि एक बार फिर मेरी चुची पर अपने दाँत लगा दी। मैं उसकी बाल पकड़ जोर से चीख पड़ी।
शुक्र है कि घर में इस वक्त और कोई नहीं थी। पूजा हँसती हुई छोड़ दी।
फिर मेरी साड़ी के ऊपर से ही चूत पर हाथ रखती हुई बोली,"सीता मैडम! जरा इन्हें मजबूत कर के रखना। बहुत जल्द ही इसमें मुसल जाने वाली है।"
मैं चिहुँक के उठ बैठी और हाथ हटाते हुए हँसती हुई बोली," तुम किस दिन काम आएगी।"
पूजा कुछ बोलती, इससे पहले ही मम्मी जी की आवाज सुनाई दी।
"पूजा,किचन का काम नहीं होगा क्या? जल्दी आओ।"
मम्मी की आवाज सुनते ही हम दोनों जल्दी से अपने कपड़े ठीक किए और किचन की तरफ चल दी।

रात का खाना बन चुकी थी। करीब 9 बज रहे थे। चूँकि गाँव में सब ज्यादा देर तक नहीं जगे रहते। श्याम भी आ चुके थे।आते ही उन्होंने मेरी गालोँ को चूमते हुए खाना खाने की इच्छा व्यक्त की। मैं भी जल्दी से खाना लाई और श्याम खाना खाने बैठ गए।
मैं वहीं पास में बैठ मोबाइल निकाल छेड़छाड़ करने लगी। मोबाइल पर नजर पड़ते ही श्याम बोले,"अरे वाह नई फोन! और क्या सब दिए हैं अंकल मुँह दिखाई में। जरा हमें भी तो दिखाईए।"
मैं मुस्कुरा पड़ी। मेरी अंदर से तो जवाब आ रही थी कि ये सब मुँह दिखाई में नहीं बल्कि चूत चुदाई की अग्रिम रकम मिली है।फिर भी थोड़ी सी शर्माती हुई बोली,"आप पहले खाना खा लीजिए। फिर दिखा देती हूँ।"
"खाना के साथ ही दिखा दो वर्ना खाना पचेगी नहीं।बुरी आदत है मेरी। कुछ भी बर्दाश्त नहीं कर पाता हूँ। प्लीज..." श्याम अपनी अंदर की कमी बताते हुए दिखाने की आग्रह किए।
मैं भी हँसती हुई बोली,"अच्छा दिखाती हूँ ला कर। पूजा जी ले गए थे देखने के लिए"
"तो अब तक खड़ी क्यों हो? जल्दी जाओ ना।" श्याम जल्दी देखने की उत्सुकता में कहे।
मैं भी मुस्काती हुई पूजा के रूम की तरफ चल दी।मम्मी पापा दोनों खाना खा कर सोने चले गए थे। पूजा देर रात जगती है शायद पढ़ने या फिर फोन से बात करने।
मैं पूजा के गेट को नॉक की पर गेट खुली ही थी। नॉक करने के क्रम में ही खुल गई। मैं अंदर आते ही पूजा को श्याम द्वारा अंकल का उपहार देखने की बात बताई।
पूजा हँसती हुई दोनों पैकेट देने के लिए मेरी तरफ बढ़ी। अचानक अगले ही पल पूजा के कदम रुक गए और वो हँसते हुए बोली,"भाभी, ऐसे दिखाने से क्या फायदा? अगर इसे पहन के दिखाओगी तो और झक्कास लगोगी और भैया तो मर मिटेँगे आप पर"
मेरी भी हँसी निकल गई।
"चल रहने दे अभी। वो जल्दी देखने के लिए इंतजार कर रहे हैं।अगर नहीं गई जल्दी तो गुस्सा हो जाएँगे।"
"आप तो बेकार ही टेँशन लेती हो। वो कुछ नाराज नहीं होंगे अगर इसे पहन के जाओगी तो।देखते ही उनका सारा गुस्सा रफ्फू-चक्कर हो जाएगा।"
पूजा तो लगभग सही ही कह रही थी। ऐसे दिखाने और पहन के दिखाने में एक अलग ही रोमांच होगी।
कहावत है कि अगर जिंदगी को मजे से जीना है तो प्रत्येक दिन कुछ-ना-कुछ नया करना चाहिए। बस यही सोच मैं हामी भर दी।
मैं कपड़े चेँज करने बाथरुम की मुड़ी कि पूजा मेरी कलाई पकड़ ली।
"क्यों डॉर्लिँग, अब भी आप हमसे शर्मा रही हो कपड़े चेँज करने बाथरुम जा रही। चंद दिनों बाद तो मेरे सामने ही अपनी चूत उछल उछल के चुदवा रही होगी।"
मुझे भी कुछ शरारत सुझी।
"हाँ,अभी भी कुछ देर में उछल उछल के चुदवाने वाली हूँ। चलो तुम अभी ही देख लेना।"
मेरी बात सुनते ही पूजा तेजी से मेरी निप्पल पकड़ जोर से रगड़ दी। मैं दर्द से कराह उठी। पर पूजा मेरी निप्पल छोड़ी नहीं थी, ऐसे ही मेरे निकट आते हुए बोली,"कुतिया, अब और बोलेगी ऐसी बातें।"
मैं दर्द से तड़प रही थी तो जल्दी से ना कह दी।
मेरी निप्पल छोड़ते हुए पूजा मुस्कुराती हुई बोली," अब जल्दी जाओ वर्ना सच में भैया नाराज हो जाएँगे।"
"कमीनी कितना
दर्द हुआ, कुछ पता है।"
पूजा हँस दी और सॉरी कहते हुए बोली," भैया को बीच में क्यों लाई जो दर्द हुआ।अब जाओ भी बाद में बाद करेंगे।"
मैं भी अब ज्यादा देर नहीं करना चाहती थी। इसीलिए बिना कुछ कहे वहीं पर कपड़े चेँज करने लगी। पूजा ये देख हल्की सी मुस्कुरा दी।
कुछ ही क्षण में सारे कपड़े और गहने अलग पड़े थे। शरीर पर सिर्फ पेन्टी और ब्रॉ थी।मैंने पैकेट से साड़ी निकल कर पहनने लगी।पूजा भी मेरी सहायता कर रही थी।
फिर पूजा के कहने पर मैंने ब्रॉ निकाल दी और बिना ब्रॉ के ही Off-Shoulder वाली ब्लाउज पहनने लगी।
फिर एक एक कर सारे जेवर भी चढ़ा ली। कोई 20 मिनट लगे इन सब चीज करने में।
नीचे तो श्याम खाना खा कर पता नहीं कितने गुस्से में होंगे। जब मैं पूरी तरह तैयार हो गई तो पूजा पीछे से पकड़ बड़ी सी शीशे के सामने ले गई।
मैं तो खुद को देखते ही शर्मा गई।ब्लाउज से मेरी Cleavage काफी हद तक दिख रही थी।ठीक उसके ऊपर लटकी मंगल-सूत्र और नेकलेस काफी सेक्सी बना रही थी। पूजा तो देखते ही हाय कर बैठी।
होंठों पर हल्की गुलाबी रंग की लिपिस्टिक,आँखों में काजल और शरीर पर बेहद सेक्सी सुगंध वाली परफ्यूम पूरे माहौल को सेक्सी बना रही थी। पूजा अपने होंठ आगे कर मेरी उभारोँ पर किस करते हुए बोली,"भाभी,आप तो सेक्स की देवी लग रही हो। सच भैया तो पागल सा हो जाएँगे इस रूप में देख कर।"
मैं सिर्फ हँस कर रह गई।
"भाभी,अब प्लीज जाओ वर्ना अगर मैं नहीं जाने दी तो मनाते रहना भैया को फिर।"पूजा मुझे गेट तक लाते हुए बोली।
मैं भी अब और ज्यादा देर नहीं करना चाहती थी। पर जाते हुए सवाल कर गई।
"पूजा आज तो अंकल के पास जाने वाली थी ना फिर अभी तक यहीं हो?"
"बड़ी ख्याल करती है अंकल को।कहो तो अंकल को ही बुलवा दूँ।"
पूजा के शरारती जवाब सुन मैं मुस्कुरा कर रह गई।
फिर पूजा बोलती है," मैडम, आप चिंता ना करें।आप यहाँ रूम में लण्ड ले रही होगी ठीक उसी समय मैं भी अंकल के रूम में अपनी चूत में लण्ड लेती नजर आ जाऊंगी। अगर देखने की इच्छा हो तो ऊपर छत पर आ जाना, आज लाइट ऑन ही रखने अंकल को कहूंगी।"
मैं उसकी बात सुन हँसती हुई पागल कहती हुई नीचे उतर गई।
अंकल के घर ठीक बगल में ही थी। हमारे छत पर तो सिर्फ पूजा के लिए रूम बनी थी।बाकी छत तो खुली ही थी पर अंकल के छत पूरी तरह बनी हुई थी।दो मंजिला था अंकल का घर।चाहते ते और बना सकते थे पर कोई रहने वाला भी तो चाहिए। उनके बेटे-बेटियाँ सब बाहर रहती हैं। अंकल के घर के हर रूम में काँच की खिड़की लगी हुई थी जिससे अंधेरी रात में अगर लाइट जला कोई हरकत की जाए तो लगभग यह तो मालूम पड़ ही जाती है कि अंदर क्या चल रही है। भले ही कौन कर रहा है ये नहीं दिख पाती हो।
कुछ ही क्षण में मैं अपने रूम के पास पहुँच गई।


पायल की छन छन के साथ रूम में जैसे ही प्रवेश की, श्याम देखते ही रह गए। उनके नजरें ना तो हट रही थी और ना कुछ बोल ही रहे थे।बस लगातार वो कभी मेरी आँखों में देखते तो कभी मेरी होंठों को। कभी मेरी आधी नंगी पेट को देखते तो कभी मेरी उभारोँ को।
मैं तो खुद ही हैरान रह गई कि आखिर श्याम इतने हैरान क्यों हो रहे हैं मुझे ऐसी भेष में देख के।फिर कुछ देर यूँ ही गेट के पास खड़ी रहने के बाद धीरे से श्याम की तरफ बढ़ने लगी।
श्याम के निकट पहुँच कर जब प्यार से उनके गालोँ पर हाथ रखी तो वो ऐसे हड़बड़ा गए मानो नींद से जगे हो।
मेरी तो हँसी छूट पड़ी।फिर प्यार भरी लब्जोँ में पूछी,"ऐसे क्या देख रहे हैं?"
तभी वो मुझे अपनी बाँहों में कसते हुए बोले," मुझे तो विश्वास ही नहीं हो रहा है कि मेरे सामने सीता खड़ी है। कसम से बिल्कुल अप्सरा जैसी दिख रही हो आज।"
मैं हँसते हुए बोली,"मुझे तो बस आपकी पत्नी ही रहने दीजिए। ज्यादा सर पर मत चढ़ाइए वर्ना कभी नहीं उतर पाऊंगी।"
"हा.हा.हा..आप जैसी बीबी अगर सर पर भी चढ़ जाए तो मस्ती ही मिलेगी।" मेरी गालोँ को चूमते हुए बोले।
मैं भी अगले ही पल मुस्काती हुई अपने उनके होंठों पर रखते हुए किस करने लगी।
श्याम भी इसी पल का इंतजार कर रहे थे। वे भी मुझे अपनी तरफ जोर से भीँचते हुए मेरी लब को पीने लगे।
मैं तो शाम से गर्म थी ही, जिससे तुरंत ही व्याकुल हो गई।मेरे मुँह से लगातार आहेँ निकल रही थी।मैं खुद ब खुद श्याम से जोर से लिपट गई।
वो अब मेरी होंठ के साथ साथ मेरी गाल,गर्दन,उभारोँ हर जगह चूमे जा रहे थे। मैं तीव्र गति से सेक्स की आग में जलने लगी।
अगले ही क्षण उन्होंने मेरी ब्लॉउज को नीचे सरका मेरी चुची को मुट्ठी में कैद कर लिए। अब वो लगातार मेरी चुची को मसलते हुए लगातार चूमे जा रहे थे। वे भी अब रुकने के ख्याल में नहीं थे। अब और बर्दाश्त कर पाना मेरे लिए असंभव थी।
अगले ही कुछ क्षण में मैं जोर से चिल्ला पड़ी।मेरे दाँत श्याम के कंधे में गड़ चुके थे और मेरे नाखून उनकी पीठ को खरोँच रही थी।
मेरी चूत लगातार मेरी पेन्टी को भीँगोँ रही थी।श्याम भी मेरी पीठ को धीमे धीमे सहला रहे थे।कुछ देर यूँ ही रहने के बाद जब थोड़ी होश में आई तो श्याम बोले,"आज तो मेरी रानी कुछ ज्यादा ही गर्म है। तबीयत से सेवा करनी पड़ेगी आज।"
मैं हल्की सी मुस्कुरा दी पर बोली कुछ नहीं।
"जान, आपके इस रूप को मैं कैद करना चाहता हूँ सो मेरी मदद करो।जब कभी भी काम के वक्त अकेला महसूस करूँगा तो आपकी ये तस्वीर देखते ही मैं अपना अकेलापन भूल जाऊँगा।"
मैं भला कभी मना करने की सोच भी सकती थी क्या?
अगले ही क्षण पूरा कमरा तेज रोशनी से नहा गई जो कि अब तक हल्की रोशनी में थी।
वे एक अच्छी गुणवत्ता वाले कैमरे से मेरी अलग अलग पर नॉर्मल फोटो लेने लगे। अचानक वे रुके और बोले,"डॉर्लिँग, अंकल से उपहार में ये फोन भी मिली है। इसे भी अपने हाथों में रख बात करती हुई पोजीशन बनाओ।"
मैं भी मुस्कुराती हुई फोन ले पोजीशन देने लगी।वे लगातार मेरी हर एक पल को कैमरे में कैद किए जा रहे थे।
"सीता,अब कुछ सेक्सी सी पोज दो।कुछ हॉट भी रहनी चाहिए।"
मैं तो एक बार चौंक के ना कह दी, पर वे जल्द ही हाँ करवा लिए। पर मैं तो ऐसी पोज से बिल्कुल अनजान थी।मेरी तरफ से कोई हरकत ना देख वो तुरंत ही समझ गए कि मुझे नहीं आती ऐसी पोज देने।
फिर वो एक एक कर बताने लगे।मुझे तो शर्म भी आ रही थी।
कभी अंगड़ाई लेने कहते,कभी Cleavage दिखाने कहते,कभी आगे झुकने कहते,कभी साड़ी का पल्लू ब्लॉउज से हटाने कहते,कभी होंठों को दबाते हुए चुची पर हाथ रखने कहते।
ऐसी ही ढेर सारी पोजीशन में फोटो लिए। मैं अब धीरे धीरे एक बार फिर गर्म होने लगी थी।कुछ ही देर में मैं आपा खो बैठी और दौड़ती हुई श्याम के गले लग गई।
"क्या हुआ सीता?"
मैंने अपने हाथ श्याम के लण्ड पर ले जाते हुए बोली,"पहले मुझे ये चाहिए फिर जितनी चाहे फोटो ले लेना।"
श्याम हँसते हुए कैमरे को एक ओर रखते हुए ओके कह दिए।लण्ड को पकड़ते ही मेरे मन में अंकल के लण्ड की लम्बाई घूमने लगी।मैंने उनसे लिपटे ही लण्ड को अपने कमर के तरफ मापने की कोशिश की।
जहाँ अंकल का लण्ड कमर से भी करीब 2 इंच बाहर जा रही थी, वहीं इनका लण्ड 1-1.5 इंच अंदर ही रह गई। मैं थोड़ी सी मायूस जरूर हुई पर अंकल का लण्ड भी अपना समझ हल्की सी मुस्कुरा दी।
श्याम मेरी ब्लॉउज खोलने की कोशिश करने लगे।अगले ही क्षण मेरी चुची खुली हवा खा रही थी और ब्लॉउज सोफे पर पड़ी थी।साड़ी भी चंद सेकंड में ही पूरी खुल गई थी। अब मैं सिर्फ पेन्टी में सारे गहनोँ में सजी थी। श्याम मुस्कुराते हुए एक बार बार मुझ पर टूट पड़े।ऊपर से चूमते हुए धीरे धीरे नीचे की तरफ बढ़ने लगे।मेरी चुची के पास आते ही उन्होंने निप्पल को अपने दाँतों से काटने लगे।मैं तड़प के उनके बाल नोँचने लगी पर वो रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे।
तभी उनका एक हाथ नीचे बढ़ कर मेरी जांघोँ को सहलाने लगी। मैं तो रोमांच से सिहर सी गई और जोर जोर से आहेँ भरने लगी।मेरी आँखें अब बंद हो चली थी और पूरी शरीर कांप सी रही थी। अब वो मेरी दोनों चुची को बारी बारी से चूसे और काटे जा रहे थे।
तभी उनका हाथ जांघोँ से ऊपर सरक मेरी गीली पेन्टी पर चली गई।पेन्टी के ऊपर से ही वो मेरी चूत सहलाने लगे।मैं अब लगभग बेहोश सी होती हुई पूरी शरीर को उनके ऊपर छोड़ दी।
वे मेरी हालात समझ मुझे बेड के पास ले जाकर सुलाने की कोशिश किए।पर मैं तो उनको एक क्षण के लिए छोड़ने के मूड में नहीं थी।
तब मुझे बेड पर आधी ही सुला दिए।मेरी कमर से नीचे बेड से बाहर लटक रही थी और कमर से ऊपर बेड पर थी। ऐसी अवस्था में मेरी चूत ऊपर की तरफ निकल गई थी जिस पर श्याम अपना लण्ड चिपकाए मुझ पर लेटे थे। 

कहानी जारी है...



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