Wednesday, December 17, 2014

FUN-MAZA-MASTI मैं एक रंडी बुन चुकी हूँ--7

FUN-MAZA-MASTI
 मैं एक रंडी बुन चुकी हूँ--7

 रानी मुझे सहारा देकर बाथरूम ले गई। और उसने मेरी गाण्ड को अच्छी तरह से धोया। उसने मुझ शिट करने का कहा। जब मैंने जोर लगाया तो वो तेजी से बड़े आराम से बाहर निकल आई। जबकि पहले जरा जोर लगाना पड़ता था और वो फँस-फँस कर बाहर निकलती थी।

मुझे अच्छी तरह साफ करने के बाद वो बाहर लेकर आई।

बाहर उन्होंने खाना लगा दिया जमीन पर। दो बजे का टाइम था उस वक्त। और सब इकट्ठे बैठ गए। बाकी सबने कपड़े पहन रखे थे जबकि मैं बिल्कुल नंगी उन लोगों के बीच बैठी थी। अब इतने लोगों के सामने नंगी रह-रहकर मुझे अब इतनी शरम नहीं आ रही थी। रूम में मेरे एलावा कुल 8 लोग थे। (कामीचाचा, रानी, सन्नो, और बाकी 5 आदमी जिन्होंने मुझे चोदा था) हमने बड़े आराम से बैठकर खाना खाया जैसे कि सब नार्मल हो। कामीचाचा बार-बार मुझे हसरत भरी निगाहों से देख रहे थे। जिसे सन्नो और रानी ने भी ताड़ लिया था। आखिर वो बड़ी मझी हुई औरतें थी इस धंधे में।

करीब 4:00 बजे तक हम सब बैठकर इधर-उधर की बातें करते रहे। मैं कामीचाचा, सन्नो और रानी बाई। वो सब मेरे बारे में ज्यादा से ज्यादा पूछा रहे थे और साथ ही साथ हँसी मजाक भी कर रहे थे। मैंने 2-3 बार उनसे भावना का पूछा लेकिन वो बात गोल कर गए। मैंने भी ज्यादा जोर नहीं दिया। मुझे उन्होंने नंगा ही रखा। ताकि मेरी रही सही शरम भी बाकी ना रहे और कभी भी किसी से चुदाई करवाते वक्त मैं ना शरमाऊँ बल्कि दूसरे को इतना तड़पाऊँ कि वो मुझे चोदने के लिए बेकरार हो जाए।

4:00 बजते ही रानी ने कहा कि अब तुम इन तीनों के लण्ड चूसो और इनको बेस्ट ब्लो जाब देकर इनकी मनी निकालो।

कामीचाचा- प्लीज़्ज़ मुझे भी चोदने दो इसको। आखिर मैं इसको लाया हूँ इस धंधे में।

रानी ने साफ-साफ मना कर दिया कि अब ऐसे नहीं होगा। हम तुम्हें तुम्हारा कमीशन देंगे। अगर तुमको भी चोदना है तो पैसे देकर चोदना होगा।

कामी चाचा सिर झुका कर खामोश हो गए।

मुझे इस तरह उनको देखा नहीं गया। मैं आगे बढ़कर उनसे लिपट गई और बोली- “कामीचाचा… आप क्यों टेंशन लेते हो। आप जब चाहे मुझे फ्री में चोद सकते हो। आखिर मुझे तो रंडी आपने बनाया है। अगर आप मुझे नहीं चोदते तो मुझे चुदाई का असल मजा कहाँ मिल पाता…”

वो हैरान होकर मुझे देखने लगे। मैंने आगे बढ़कर उनके होंठों पे अपने होंठ रख दिए और उनको चूमने लगी। मैंने उनसे अलग होकर उनके कपड़े उतार दिए। सन्नो-बाई और रानी ने एतराज नहीं किया क्योंकि मैं जिससे चाहूं अपनी मर्ज़ी से चुदाई करवा सकती हूँ।

कामीचाचा को मैंने नीचे जमीन पर लेटने का इशारा किया और आहिस्ता-आहिस्ता उनका लण्ड चूसने लगी। मेरे आस-पास वो तीनों आदमी (आदमी1, आदमी2 और आदमी3) घेरा बनाकर खड़े हो गए। और मैं उन सबके लण्ड बारी-बारी चूसने और हाथों से सहलाने लगी। आदमी3 और आदमी4 मेरी कमर और चूतड़ों पर हाथ फेर रहे थे और जबकि आदमी2 और कामीचाचा मेरी चूचियां को हाथ में पकड़कर दबा रहे थे।

मैं पूरे जोश से सबके लण्ड को चूस चाट रही थी। कभी किसी का लण्ड गले में ले लेती जिससे मुझे खाँसी हो जाती लेकिन मैं जैसे दीवानी हो चुकी थी और अपने आस-पास के माहौल को बिल्कुल भूलकर सब कर रही थी। बल्कि इस सबमें मेरी चूत भी गीली होती जा रही थी।

आप लोगों को ऐसे लग रहा होगा कि जैसे ये कोई फिल्म है या कोई फँटेसी है जो लिखी जा रही है। लेकिन ये एक हकीकत है। मेरी ट्रैनिंग इसी तरह की गई। आप किसी रंडी के पास भी जाते हैं तो वो बिल्कुल शरम नहीं करती। उसकी वजह येई है कि वो इस माहौल से गुजरती है। जिसके बाद कोई शरम उसमें बाकी नहीं रहती। ये अलग बात है कि कोई भी रंडी आपसे ऐसे राज नहीं बताती क्योंकि आप उसके लिए एक ग्राहक होते हो। अपनी ज़िंदगी के राज वो किसी भी वजह से अपने अंदर दबा लेती है।


मैंने कामीचाचा के लण्ड को अच्छी तरह से चिकना कर लिया था। अब मैं आहिस्ता-आहिस्ता उनके ऊपर आई। जबकि मेरा मुँह उनकी टांगों की तरफ था। मैंने उनका लण्ड अपनी चूत पर रगड़ना शुरू कर दिया। इससे बड़ा मजा आ रहा था मुझे।

फिर उनके लण्ड को अपनी चूत पर सेट करके आहिस्ता-आहिस्ता उसको अपने अंदर ले लिया। हर बार उनका लण्ड सबसे हटकर एक अजीब से मजा देता है। मैं उसकी वजह आज तक समझ नहीं पाई। शायद उन्होंने मुझे सबसे पहले चोदा इसलिए। मैं हल्के-हल्के उनके लण्ड पर कूद रही थी और मेरे सीधे तरफ आदमी1 था और उल्टे तरफ आदमी3 था और सामने आदमी2, मैं तीनों के लण्ड बारी-बारी चूस रही थी और हाथ से मूठ मार रही थी।

कामीचाचा मेरी कमर को सहलाते हुये अपनी कमर उठाते हुये मुझे चोद रहे थे। मैं जब ऊपर होती तो वो वो भी नीचे हो जाते और जब मैं नीचे होने लगती तो वो भी नीचे से धक्का मारते। एक जबरदस्त लय से हमारी चुदाई जारी थी। आधा घंटा इस तरह चोदने के बाद वो तीनों मेरे मुँह में झड़ गए। उनका इतना पानी निकला कि मैं वो सारा ना पी सकी। और काफी पानी मेरी चूचियां पर बहते हुये नीचे जाने लगा।

तभी कामीचाचा ने मुझे नीचे लिटा दिया और जोर-जोर से मुझे चोदने लगे।

मैं चेहरे पे मुश्कुराहट सजाए उनके गले में बाजू डाले उनकी आँखों में देख रही थी। 5 मिनट जबरदस्त चुदाई के बाद वो मेरे अंदर झड़ गए। साथ ही मैं भी झड़ गई। कामीचाचा से चुदाई करवाते हुये मैं दो बार झड़ी। मैं नीचे लेटी हुई लंबी-लंबी सांसें ले रही थी। दिल कर रहा था कि अब गहरी नींद सो जाऊँ। 5 मिनट में ही मेरी आँख लग गई।

अभी मैं सोई ही थी कि रानी ने मुझे झकझोर के उठा दिया और मुझे नहाकर तैयार होने का कहा। मैंने घड़ी देखी तो उसपर 4:45 बजे हो रहे थे। यानी सिर्फ़ 15 मिनट बाकी था मेरे घर जाने में। मैं जल्दी-जल्दी नहाने लगी। अपने आपको अच्छी तरह साफ किया। और अपनी चूत और गाण्ड को भी अच्छे से धोया। और ठीक 5:10 बजे कपड़े पहनकर बाहर निकली।

रानी- धंधे में आमद की मुबारक। आज से तू एक प्रोफेशनल रंडी बन गई है।

मैंने हँसते हुये अपना सिर हिला दिया। रानी ने मुझे एक फोन दिया जिसमें सिर्फ़ उसका नंबर था। उसने कहा कि जिस दिन धंधे पे जाना हुआ वो मुझे मेसेझ किया करेगी। मुझे कामीचाचा उस ग्राहक के पास या उनके अड्डे पे ले जाया करेंगे। मोबाइल को साइलेंट पे लगा दिया ताकि किसी को पता ना चले और वैसे भी किसी की काल आने का डर तो था नहीं।

मैंने अपनी दायां चूची पर उसका दिया मोबाइल रख लिया।

वो हँस दी और कहने लगी- “रंडियों वाले काम तू सीख रही है जल्दी-जल्दी…”

निकलने से पहले उसने मुझे ₹5000 दिए। मैंने उसकी तरफ देखा तो कहने लगी- “आज तेरी जो चुदाई हुई है और गाण्ड की सील खुली है, उसके पैसे हैं। और ये सी॰डी॰ घर जाकर देख लेना कि तेरी सहेली भावना के साथ क्या-क्या हुआ?

मैंने वो पैसे और सी॰डी॰ अपने पास संभाल के रख लिए। और कामीचाचा के साथ अपने घर चली गई। उसके बाद मैंने अपनी खुशी और रजामंदी से लोगों से चुदाई करवाना शुरू कर दिया। मुझे पैसे भी बहुत मिलते। अक्सर लोग मुझे अपनी खुशी से भी अलग से पैसे दे जाते। मैंने अपना बैंक अकाउंट खुलवा लिया। जिसमें मैं पैसे जमा करवाती हूँ।

रानी के साथ भी कई बार मैंने सेक्स किया और कई बार ग्रूप सेक्स भी लेकिन एक साथ दो लण्ड चूत या गाण्ड में लेने की मेरी हिम्मत नहीं हुई। मैं कामीचाचा को अक्सर मोका देती हूँ। 5 साल गुजरने के बाद मेरे पास काफी पैसा जमा हो चुका है। अब मेरा रेट भी कम हो गया है। मैं अब ₹1000 या ₹2000 पर ग्राहक लेती हूँ। मेरे घर वालों को आज तक इस बात का नहीं पता चला कि मैं क्या करती हूँ। मैंने ग्रेजुयेशन के बाद कई कोर्सेस किए हैं। जिसके बहाने मैं घर से निकलती हूँ और चुदाई का मजा लेती हूँ।

एक आखिरी बात कि मैंने कामीचाचा से निकाह कर लिया है। वो और मैं अब प्लान कर रहे हैं कि हम दिल्ली चले जाएँ। उनको मेरे चुदाई करवाते रहने पे कोई एतराज नहीं है। वो भी इसको एंजाय करते हैं। जल्द ही मैं उनके साथ घर से भाग जाऊँगी।

दोस्तों ये थी ऋतु की कहानी… उम्मीद है आपको पसंद आई होगी।
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