Sunday, February 22, 2015

FUN-MAZA-MASTI नई जिन्दगी--18

FUN-MAZA-MASTI

नई जिन्दगी--18

 सुनिल- तेरी कसम अब हस दे मेरी जान तुझे मै रोता नही देख सकता

सरला मुस्कुरा पडी

सुनिल- एक बात सच बताएगी

सरला- हममम

सुनिल- तुझे अपने बेटे के सामने नंगी होना पडा तुझे मेरे साथ नंगी हो कर चुदाने मे बुरा तो नही लगता था ना,

कही तु मजबूरी मे मेरे साथ नही करती थी ना । तु सच मे मुझे चाहती है ना । सच-सच बता तुझे मेरी कसम झुट

बोली तो मै मर जाउंगा ।

सरला झट से सुनिल के होटों पे हाथ रखती है ।

सरला- अरे ना ना पगले कैसी अनाप-क्षनाप बातें करता है । सच मे मै तुझे दील की गहराई से चाहती हूं । मै तो

जान छीडकती हूं तुझ पे मेरे लाल । ये मांग मे सिंदूर हर दीन तेरे नाम का लगाती हूं रे । हां ये सच है पहली बार

जब मुझे तेरे सामने नंगी होना पडा तब दील को बडी तकलिफ हुई आखिर कौन मां अपने ही बेटे के सामने नंगी हो

कर अपने बदन की नुमाईश करेगी । हम औरतो का दील बडा नाजूक होता है रे ममता से भरा होता है । ईसलिये

जब रवी रोता था और उसकी दुध की प्यास नही बुझा पाती थी तो मेरा दील तो उसकी हालत देख बीखर जाता था ।

और मुझे कोई रास्ता नही दीख पा रहा था । पर सच बतांउ तेरे साथ पहली रात बाद तो जैसे जादू ही हो गया, मेरे

बदन का कोना कोना तेरे बदन से मिलन के लिये तरसने लगा इतना मजा मुझे कभी नही आया ।

सुनिल- पर तू अपना अतित, बापू को नही भूल पाई होगी ना

सरला- सच बताउं तेरे बापू से मेरा रीश्ता कुछ सालों का रहा पर तू उनसे हर चिज मे अव्वल है और बीस्तर पर तो

तु मुझे निचोड ही देता है । तु तो मेरा सबकुछ है रे मै तो तेरी दासी हूं । तुने मुझे नई जिन्दगी दी है, एक विधवा

को फीर सुहागन होने का सुख दीया है । तेरी वजह से मै समाज मे तेरे नाम का सिंदूर लगाए मंगलसुञ पहने घुम

सकती हूं और सुहागन होने की क्या अहमियत होती है ये एक विधवा ही अच्छी तरह जानती है । पर....

सुनिल- पर क्या

सरला- बेटा मै तेरे जखम को फीर याद नही करवाना चाहती पर तु एक कालेज मे पढा लिखा जवान छोरा है और मै

ठहरी अनपढ पुराने जमाने वाली औरत, सरीता से तु प्यार करता था कही तुझे शरम तो नही आती ना मेरे साथ

घुमने मे मुझे तेरी बीवी कहलाने मे ।

सुनिल- अरे मेरी जान शरम आती तो तुझे शहर घुमाने ले चलता, थियटर मे पिक्चर दीखा के तेरे साथ चुम्मा-
चाटी करता,

गार्डन मे सब लोगों के बीच तुझे गोद मे बीठाये प्यार करता । उस सरीता चुडैल का नाम भी मत निकाल तेरे

गुलाब से होटों से वो चुडैल मेरी जान की बराबरी कर ही नही सकती । तुझे तो मै दीनभर नंगी करके प्यार कर

सकता हूं ।

सरला शरमाती है और मुंह पल्लू से ढक लेती है ।

सरला- सच तू मुझे इतना चाहता है । मै भी तुझे बहोत प्यार करती हूं रे । पता है जब मेरी नई शादी हुई थी ना

तभी रोज मै एक सपना देखती थी एक जवान लडका दरवाजे से मेरी तरफ आता था और मुझे नंगी करके मेरी

जबरदस्त चुदाई करता था पर वो तेरे बापू नही थे। अब मुझे समझ आ रहा है वो तुही था ।

सुनिल- चल-चल बस हुआ तु कहती तो खुब है पर जब प्यार करता हूं तब तो बडा नखरा दीखाती है ।

सरला- अरे क्या करू औरत हूं शरमाउंगी ही ना, नखरे करना तो हम औरतो का स्वभाव है । पर तुझे कभी रोका

तो नही मैने तुझे हर चिज करने दी । ठीक है आज से कम नखरे करूंगी बस ।

सुनिल- कोई जरूरत नही है तु जैसी है वैसी मुझे पसंद है ।

और सुनिल सरला के होटों पे होंट भीडाए चुमने लगता है । सरला भी अजिब सी बेहोशी मे गुम सी हो जाती है अब

हर बार जब वो सुनिल के होटों पे होंट भीडाती वो जवान हो उठती कीसी १८-२० साल की लडकी की तरह वो

अपने

दीवाने के साथ चुम्मा चाटी करते हुए खुद को पाती । जवानी तो शरम और समाज की बेडीयों मे ही बीत चुकी थी

उसकी पर शहर मे इस तरह जवान सुनिल के साथ ईस तरह बदन की प्यास बुझाते उसकी जवानी फीर भडक

उठती

थी । सुनिल ने अपनी लार सरला के मुंह मे छोडी तो सरला को जैसे नशा ही चढ गया ।

और फीर रातभर.........

वही जो हर रात की कहानी थी..


सरला रसोई मे खाना बना रही थी वो रवी के लिए दुध की बोतल भर के लाई तो उसे अंदर कमरे से कुछ हल्की

आवांजे सुनाई दी सरला ने जो देखा उससे सरला की हाथ की दुध की बोतल जमिन पर गीर पडी उसने देखा कमरे

मे खटीये पर सरीता पूरी नंगी लेटी थी । और सुनिल सरीता को कस कस कर झटके लगा रहा था ।

सुनिल- कमिनी चिनाल अब याद आई मेरी रंडी रवी की तक फीकर नही तुझे । आज तो तेरी चुत फाड कर रख दूंगा


सरीता- आहहहहह ई उमममम जानू गलती हो गई माफ करदो

सरला आंखें झुकाए बडी ही गहरी दर्द भरी आवाज मे कहती है ।

सरला- सससरीता तू आ गई

सरीता- हाय अम्माजी अरे जानू अम्माजी खडी है ।

सुनिल- तु चुप भोसडी , देखो तो मां ये चिनाल बेसरम औरत फीर आ गई आज ईसे छोडूंगा नही ।

सरला बेचारी आंसू घुट घुट पीती मन ही मन रो रही थी । उसकी आंखो से आंसू छलक पडे , नजरों के सामने

उसका मर्द उसकी पहली औरत के साथ बीस्तर पर लेटा था । भला कौन औरत यह सह पाती । रोते रवी को सरला

ने गोद उठा लिया । सारे सपने सारी उम्मिदे एक ही झटके मे तूट चुकी थी ।

सरीता- आहहहह उ जानू धधीरररररररे अम्मा जी आप जरा रवी को सांत करो मममममै आपपपके बेटटटटे को

सांततत करती हहहहूं

सरला- आ ओ ओ ललले मेरा बेटा ले पी दुध

रवी रोए जा रहा था ।

सरीता- उमममममह आहहहहह जानू जलललललल्दी करो रवी रो रहा है, बोततततल के दुधदददद से थोडडडडी सांत

होगगगगगा वो उससससे मां ककककका दूध चचचचचचाहीए ।

सरला ये सून कर रोने लगी । उसे यकीन नही हो रहा था कलतक उसके लिए पागल रहने वाला सुनिल आज मजे

से सरीता को गोद मे लिए बेतहा प्यार कर रहा था ।

सरला समझ नही पा रही थी सुनिल उसे सच मे चाहता था । या फीर औरत के बदन की चाह ने सुनिल को पागल

बना दीया था और इसलिए वो उसे प्यार का दीखावा कर रहा था ।

सरीता- लाओ मां जी रवी को मेरे पास दे दो अब उसकी मां आ चुकी है अब वो भुका नही रहेगा ।

सरीता ने उसकी चुंची रवी के मुह मे भर दी ।

रवी तेजी से चुचिं चुसते हुए दुध पीने लगा , बेचारी सरला रवी को दुध पीते देख बडी खुश थी पर कुछ महीनों से वो

उसे अपना खुदका बच्चा मानती थी तो बेचारी बडी दुखी हो गई क्यूंकी रवी के मुंह मे उसकी चुचि नही थी औरत के

मन को बडी ठेंच पहूंचती है जब कोई औरत अपने बच्चे की भुक तक ना मीटा सके । सरला रवी चाहती थी रवी

उसकी चुचिं को मुह मे भर कर अपनी नन्ही सी जीभ से उसके निप्पल को चुसे और सरला उसके मुह मे अमिरत

सा मिठा गाढा दुध भर दे । और फीर उसका दुसरा बेटा और नया पती उसे प्यार करे । पर अडचने, ठोकर से भरी

सरला की जिन्दगी मे उसके सपने सपने ही रह गए ।

सरीता- अरे अम्माजी ये मंगलसूञ आप क्यू पहनी है ।

सरला अचंभे मे पड जाती है ।

सरला- व ववव वो

अचानक उसे रोशनी दीखाई पडती है ।

कविता- अअअररररररे ददददददीदददददददी ,अरे दीदी उठो भी

सरला- हहहह ककककवीता तू

कविता- हां मै कबतक सोती रहेंगी उठो शाम के वक्त एसे सोना नही चाहीए

सरला- हहह क्या बात है कक्या चाहीए था ।

कविता- वो शक्कर दीजीए थोडी खत्म हो गई है ।

सरला बेचारी अपने बीखरे बाल सवार कर रसोई से थोडी शक्कर लाकर कविता को देती है ।

और फीर कविता के जाने पर दरवाजा लगाती है ।

और बस रवी का माथा चुम लेती है नम आखों से आंसू की बूंद रवी के माथे पर गीरती है ।















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