Friday, February 27, 2015

FUN-MAZA-MASTI सौतेला बाप--57

FUN-MAZA-MASTI

 सौतेला बाप--57

अब आगे
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 दोनो के शरीर पर पसीने की बूंदे चमक रही थी...और गहरी सांसो से पूरा कमरा गूँज रहा था..और ये सिर्फ़ उन दोनों की ही साँसे नही थी,उनमे छुपी हुई सी रश्मि की साँसे भी थी. जो उन्हे पागलो की तरहा चुदाई करते देखकर एक बार खुद ब खुद झड़ चुकी थी.

काव्या का तो मन ही नही कर रहा था उठकर अपनी चूत धोने का..वो ऐसे ही लिपट कर लेटी रही अपने पापा से...समीर ने इशारा करके रश्मि को भी बेड पर ही आने को कहा और वो भी आकर उसकी दूसरी बाजू पर लेट गयी. और समीर ने उन दोनो को अपनी तरफ करते हुए उन्हे अपने से लिपटा लिया .

ये था समीर के जीवन सबसे बड़ा और सुखद पल, जिसके बारे में उसने ना जाने कितनी बार सोचा था और जो आज पूरा हो चुका था...उसने काव्या की चूत उसकी ही माँ के सामने मारकर और अब उन दोनो माँ बेटियों के नंगे शरीर को अपने से लिपटा कर सुलाया हुआ था..एक अलग ही तरह का गर्व सा महसूस हो रहा था उसे अपने आप पर.

और कब उनके नंगे जिस्मों से लिपटे हुए उसे नींद आ गयी उसे भी पता नही चला.

सुबह जब उसकी नींद खुली तो सारे आसन बदल चुके थे...वो उकड़ू सा होकर काव्या की गांड से चिपका हुआ था और पीछे से हमेशा की तरह उसकी बीबी रश्मि अपनी मोटी छातियाँ उसकी पीठ पर गड़ा कर उससे लिपटी हुई सो रही थी..

समीर का लंड काव्या की गांड के बीच फँसा हुआ था..और वहाँ से मिल रही गर्मी से जल्द ही वो खड़ा भी हो गया..उसके हाथ भी हरकत में आ गये और आगे की तरफ लटक रहे फलों को उसने पकड़ लिया और होले -2 दबाने लगा..जल्द ही नींद में कसमसाती हुई सी काव्या उठ गयी..और धीरे-2 उसे रात की बात याद आई और अपने पीछे पापा और टाँगो के बीच पापा के बेटे को महसूस करते ही उसके चेहरे पर मुस्कान दौड़ गयी..

काव्या : "उम्म्म्मममममममम ... गुड मॉर्निंग पापा ...मुआााआअहह''

उसने पापा के हाथ पर ही चूम लिया, जो उसकी ब्रेस्ट को मसल रहे थे...

समीर : "ये भी कोई जगह होती है किस्स करने की...''

काव्या उसकी बात का मतलब समझ गयी और मुस्कुराती हुई वो उनकी तरफ मुँह करके पलट गयी और अपनी बाहें उनके गले मे डालकर अपने गरमा गरम होंठ उसके होंठो पर लगा दिए और ज़ोर से स्मूच करने के बाद बोली

"मुउआआआआआआअह्ह गुड मॉर्निंग पापा.... अब ठीक है ...''

जवाब में समीर ने भी उसके चेहरे पर चुंबनों की बारिश कर दी..कभी उसके होंठ और कभी उसके गाल, कभी उसकी आँखे और कभी उसकी गर्दन...वो हर किस्स से खिलखिलाकर हंस पड़ती...आज तो काव्या को ऐसा लग रहा था की उसकी शादी हो चुकी है और सुहागरात के बाद की पहली सुबह है उसकी जिंदगी की...

तभी पीछे से रश्मि की आवाज़ आई : "अब बेटी मिल गयी तो माँ को भूल गये हो तुम तो...''

रश्मि का लहज़ा भले ही शिकायत भरा था पर उसके चेहरे पर हँसी थी....समीर ने उसे अपने शरीर पर खींच लिया और उसका नंगा शरीर आधा समीर पर और आधा काव्या पर आकर टिक गया...और समीर ने उपर मुँह करते हुए उसके होंठों को भी ठीक वैसे ही चूमा और चूसा जैसे उसने काव्या के होंठों को चूमा था और जैसा वो रोज सुबह रश्मि के होंठों को चूमता ही था.

और उन दोनो की किस्स के बीच काव्या ने अपनी चोंच घुसा दी...यानी अपने होंठ भी उसने उन दोनो के बीच में घुसा दिए और अगले ही पल तीनो के होंठों के बीच गुत्थम गुत्था होने लगी..और समीर कभी रश्मि और कभी काव्या के होंठों को चूमने लगा..और काव्या भी कभी अपने पापा और कभी अपनी मम्मी के होंठों को चूमती...ऐसा काफ़ी देर तक चलता रहा और तीनो एक सुखी पारीवार की तरह हंसते-खेलते हुए बेड से उठे.

और बताने की ज़रूरत नही थी, तीनो एक साथ बाथरूम में घुस गये , तीनों एक दूसरे के शरीर पर साबुन लगा रहे थे, बेतहाशा चूम रहे थे...चाट रहे थे...चूस रहे थे...समीर के हाथ सीधा काव्या की नयी चुदी चूत के उपर पहुँच गये और उसने अपनी 2 उंगलियाँ एक ही बार में अंदर घुसेड दी...और पिछली रात जोरदार चुदाई की वजह से जो सूजन उसकी चूत पर आई थी,वो समीर की उंगलियाँ लगते ही उसे महसूस हुई और वो ज़ोर से चीख पड़ी

''आआआआआआआआईयईईईईईईईईईईईई मम्मी ....................... उन्हु दर्द हो रहा है..... प्लीज़ पापा ....निकालो अपनी फिंगर्स .....''


अपनी बेटी की करुण पुकार सुनकर रश्मि भी चिंतित हो गयी और वो काव्या से लिपट कर उसे दिलासा देने लगी और अपनी नर्म हथेलियों से बड़े ही प्यार से उसकी चूत को भी सहलाने लगी...

''समीर, आप भी ना, पता है ना आपको की कल इसका फर्स्ट टाइम था....अब 1-2 दिन के लिए प्लीज़ इसको कुछ मत करना ....''

समीर ने रश्मि को साइड में किया और खुद काव्या को अपने गले से लगाकर प्यार करने लगा...काव्या भी समीर के गले से लिपट कर एक ही पल मे अपना दर्द भूल गयी..

समीर का लंड अभी भी खड़ा था, और रश्मि की नज़रें उसपर ही लगी हुई थी...अब तो उसे पक्का विश्वास हो चुका था की आज सुबह की पहली चुदाई उसके नाम ही लिखी है...वो आगे बड़ी ही थी की मैन गेट की बेल बज उठी..रश्मि भी सोचने लगी की ऐसे मौके पर कौन आ मरा...

समीर ने रश्मि की तरफ देखा और बोला : "वो लोकेश आया होगा....हम दोनो ने आज एक साथ कोर्ट जाना है,हमारी नयी कंपनी का रेजिस्ट्रेशन करवाने के लिए, जो मैने काव्या के नाम से स्टार्ट की है..''

ये बात सुनकर दोनो माँ -बेटियाँ बहुत खुश हुई...रश्मि ये सोचकर की चलो अच्छा है, समीर ने काव्या को अपनी जिंदगी का हिस्सा बनाकर आगे बढ़ना शुरू कर दिया है और इस तरह से उसका भविश्ये भी सुरक्षित हो गया...और काव्या ये सोचकर ही खुश हो गयी की अब उसके नाम की भी कंपनी खुलेगी...अपनी सहेलियो पर वो इस बात का रोब दिखा सकेगी.

और काव्या ने भाव विभोर होकर समीर के लंड को हाथ में लेकर ज़ोर-2 से हिलाना शुरू कर दिया और अपने नर्म होंठों से उसके होंठों को चूमने लगी..


समीर ने मुस्कुराते हुए रश्मि से कहा : "तुम जाओ ज़रा...लोकेश की थोड़ी बहुत ''तिमारदारी'' करो ...तब तक मैं काव्या के साथ नहाकर आता हूँ ...''

शायद समीर को लग रहा था की अभी भी अगर थोड़ी बहुत मेहनत की जाए तो वो काव्या की चूत मार ही सकता है...पर इसके लिए वो उसकी माँ को बाहर भेजना चाहता था ताकि वो अपनी बेटी की ढाल बनकर उसे चुदाई से ना रोक दे...

और समीर ने जिस अंदाज में ''तिमारदारी'' कहा था उससे रश्मि समझ गयी की वो क्या कहना चाहता है...उसने अपना हाथ टॉवल की तरफ बढाया तो समीर फिर से बोला : "अब ऐसे ही चली जाओ....उसके लिए कुछ नया थोड़े ही होगा तुम्हे ऐसे देखना ...''

यानी वो खुलकर अपनी बीबी को अपने दोस्त से चुदाई के लिए परमिशन दे रहा था....और जो कुछ भी उनके घर में कल से चल रहा था, उसके बाद तो रश्मि भी थोड़ी बहुत बेशरम हो गयी थी...समीर ने कल भी उसकी और लोकेश की चुदाई देखी थी,और उसका ही फायदा उठा कर समीर ने काव्या को चोदा था..

रश्मि भी अपनी मोटी गांड मटकाती हुई बाहर की तरफ चल दी...और समीर और काव्या एक गहरी स्मूच में डूब गये.

रश्मि की चूत धड़क रही थी बाहर जाते हुए, अपने बाथरूम से निकल कर वो सीडियां उतरकर नंगी ही दरवाजे तक आई...और उसने धीरे से दरवाजा खोल दिया...और दरवाजे के पीछे छिप गयी.

बाहर लोकेश दत्त ही था...उसे सामने कोई नही दिखा जिसने दरवाजा खोला था..इसलिए वो थोड़ा हैरान हुआ..और बाहर ही खड़ा रहा.

तभी दरवाजे के पीछे से आवाज़ आई : "लोकेश जी...आप अंदर आइए ना जल्दी...मेरी हालत खराब हो रही है ऐसे खड़े हुए...''

रश्मि की थरथराती हुई आवाज़ सुनकर लोकेश भी चोंक गया और वो जल्दी से अंदर आया...और जैसे ही उसने दरवाजे के पीछे खड़ी हुई रश्मि को देखा तो उसके होश उड़ गये...वो एकदम नंगी थी...पानी की बूंदे उसके शरीर से फिसलकर नीचे गिर रही थी...उसके अंदर आते ही रश्मि ने झट से दरवाजा बंद कर लिया और धीरे-2 वो लोकेश की तरफ पलटी...उसकी नज़रें नीचे ज़मीन पर ही थी..


 और लोकेश ने उस सुंदरता की मूरत को ऐसे नंगा खड़े देखा तो उसके हाथ से ब्रीफ़केस छूटकर नीचे गिर गया और उसके मुँह से हकलाते हुए बस यही निकला : "अरे ....भ....भाभी....आप ऐसे....मेरा मतलब....समीर ...काव्या...घर नही है क्या....''

 रश्मि ने शरबती नज़रों से उसे देखा और उसकी तरफ चलना शुरू कर दिया..उसके हर कदम से पानी की बूंदे थिरक कर नीचे गिरती जा रही थी..और लोकेश के होंठ उन मोतियों को नीचे गिरते देखकर सूख रहे थे..

वो उसके बिल्कुल पास आ गयी और अपनी बाहें उसके गले मे डाल दी और बोली : "वो दोनो भी घर पर ही हैं...और दोनो अपने में मस्त हैं...और तुम्हारे दोस्त समीर ने ही मुझे भेजा है तुम्हारी ''तिमारदारी'' करने के लिए..वो दोनों ऊपर के बाथरूम में बिज़ी है...हम यहाँ हो जाते हैं...क्यों, क्या ख़याल है...??''

ये बात सुनते ही उसका वक़ील वाला दिमाग़ सब समझ गया... वो समझ गया की उनके घर में क्या चल रहा है...वैसे भी उसने और समीर ने मिलकर ना जाने कितनी रंडियाँ चोदी थी..इसलिए वो उसकी फ़ितरत जानता था, वो सेक्स के बारे में काफ़ी खुले विचारो वाला आदमी था, इसलिए ये बात भी उसे पता थी की एक ना एक दिन वो रश्मि की बेटी की चूत मारकर ही रहेगा...और आज उसने वो कर ही दिखाया था...और इसलिए उसने शायद रश्मि को भी ये छूट दे दी थी की वो भी खुलकर सेक्स के मज़े ले..

जब सामने से ही ऐसा ऑफर आ रहा हो तो वो भला क्यों मना करे...उसने भी अपनी बाहें रश्मि के नंगे जिस्म के चारों तरफ लपेटते हुए उसे दबोच लिया और अगले ही पल दोनो प्यासे जानवरों की तरह एक दूसरे को पी रहे थे...


एक दूसरे को अच्छी तरह से चूसने के बाद लोकेश ने उसे रिक्लाईनिंग चेयर पर लिटा दिया और उसकी दोनो टांगे दोनो दिशाओं में फेला कर उसकी नंगी चूत को कुछ देर तक देखा और फिर अपनी लपलपाती हुई जीभ उसकी चूत के अंदर डाल दी..



''आआआआआआआआआअहह....................उम्म्म्ममममममममममममममम. ..... याअआआआआआआ सक्क मिईई..............''

रश्मि ने लोकेश के सिर पर हाथ फेरते हुए उसे अपनी चूत के अंदर की तरफ और ज़ोर से धकेला..और वो भी बड़े ही चाव से अंदर की मलाई अपनी जीभ की चम्मच से लपेट कर ख़ाता चला गया...

लोकेश के लंड की तरह उसकी जीभ भी काफ़ी लंबी थी...और रश्मि को तो ऐसा लग रहा था की जैसे वो किसी छोटे-मोटे लंड से ही चुद रही है इस वक़्त...क्योंकि लोकेश काफ़ी तेज झटके मार रहा था उसकी चूत पर अपने मुँह से...जीभ तो उसके अंदर तक जा रही थी और उसकी नाक हर बार उसकी क्लिट से टकरा रही थी...और उसमें से निकल रही गर्म साँसे उसकी चूत पर जमे रस को पिघला कर और ज़्यादा मात्रा में बाहर निकाल रही थी...



''उम्म्म्ममममममममममममम..... .बड़ा मज़ा आ रहा है,.......अहह ...ऐसे ही चूसो...नाआ....अहह..... ऐसा मज़ा आज से पहले कभी नही आया.....''

लोकेश ने भी मन में सोचा ' ये मज़ा आज इसलिए भी आ रहा है क्योंकि इसमे वो रोमांच भी छुपा है जो रश्मि को अभी महसूस हो रहा है,उसके खुद के पति ने जब उसे अपने दोस्त से मरवाने की परमिशन दे डाली है तो ये खुशी कहीं ना कहीं से तो निकलेगी ही ना...'

और यही खुशी महसूस करते हुए वो अपनी चूत को और तेज़ी से उसकी जीभ पर रगड़ने लगी..

अब एक बार फिर से रश्मि का मुँह सूखने लगा...

और उसे पता था की उसका मुँह कैसे गीला होगा...


 उसने लोकेश को पकड़कर उपर की तरफ खींचा और चेयर पर लेटे -2 ही उसकी पेंट उतार दी और उसके लहराते हुए लंड को पकड़कर सीधा अपने मुँह का रास्ता दिखाया..

और ज़ोर-2 से चूसने लगी..


उसका गीला बदन देखते हुए और गीले मुँह का एहसास लेते हुए लोकेश भी उसका मुख चोदन करने लगा....

लोकेश का लंड काफ़ी लंबा था, और वैसे भी अपने दोस्त की बीबी की चूत मारने का मौका मिले तो अपनी औकात से ज़्यादा लंबा हो जाता है ये लंड ...वही हाल हो रहा था उसका अभी..

उसने अपना लंड उसे चुस्वाते-2 ही अपने बाकी के बचे कपड़े उतार कर नीचे फेंक दिए और एक मिनट में ही पूरी तरह से नंगा होकर वो अपना लंड चुस्वा रहा था रश्मि से..

और लगभग 5 मिनट तक उसके लंड की ''तिमारदारी'' करने के बाद रश्मि की चूत में खुरक होने लगी...और वो उठ खड़ी हुई और वो लोकेश के लंड को पकड़कर सोफे की तरफ चल दी और लेट गयी वहां जाकर ...और अपनी दोनो टांगे फेला कर अपनी सुरंग लोकेश को दिखाई और ज़ोर से चिल्लाई : "अब डाल दो अंदर लोकेश....बर्दाश्त नही हो रहा मुझसे....प्लीज़......''

लोकेश ने भी कोई बदमाशी नही की...और सीधा अपना लंड उसकी गर्म चूत के अंदर पेल कर उसके उपर ओंधा गिर गया..

और अच्छी तरह से अड्जस्ट होने के बाद वो अपनी स्पीड पर आ गया...और हुमच-2 कर उसकी चुदाई करने लगा..



''ओह ..... अहह ....उम्म्म्ममममममममममम ....येसस्स्स्स्स्स्स्सस्स.... ऐसे ही ................अहह ...और ज़ोर से .................. येसस्स्स्स्स्स्स्स्सस्स ...ऐसे ..... ही अहह ....उम्म्म्ममममममममम ......''

रश्मि की हमेशा से ही आदत रही थी की वो चुदाई के समय काफ़ी चिल्लाती थी...पर आज वो ज़्यादा ज़ोर से इसलिए भी चिल्ला रही थी की वो उपर के बाथरूम में नहा रहे अपने पति समीर को ये बता देना चाहती थी की उसकी दरियादिली की वजह से जो उसकी चुदाई हो रही है, वो उससे कितनी खुश है...

पर वो ये नही जानती थी की ऐसे चिल्ला कर वो किस मुसीबत को बुला रही है...

रश्मि के नीचे चले जाने के बाद समीर और काव्या काफ़ी देर तक एक दूसरे को चूमते रहे...नहाते रहे...पर जब एक बार फिर से समीर ने उसकी चूत में उंगली डाली तो वो फिर से चिल्ला पड़ी..और इस बार तो उसकी आँखो मे आँसू भी थे...वो बड़े ही प्यार से,रिक्वेस्ट भरे स्वर में बोली : ''पापा प्लीज़.....आज शायद नही कर पाऊँगी कुछ भी....काफ़ी पैन हो रहा है मुझे...पर मेरा यकीन मानिए,मन तो मेरा भी बहुत कर रहा है...और आपकी ये हालत मैं नही देख सकती...मैं आपको सक्क करके फ्री कर देती हूँ ...''

और इतना कहते-2 वो नीचे बैठ गयी और बड़े ही प्यार से अपने प्यारे पापा के लंड को मुँह में लेकर उसे चूसने लगी..उनकी बॉल्स को अपनी जीभ से सहलाने लगी




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