Thursday, February 5, 2015

FUN-MAZA-MASTI सौतेला बाप--53

FUN-MAZA-MASTI

 सौतेला बाप--53

अब आगे
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 पर समीर के दिमाग़ मे एक और शरारत जन्म ले चुकी थी...उसने रश्मि की कमर पकड़ कर उसे घुमा दिया...रश्मि भी समझ गयी की समीर उसकी डोगी स्टाइल में मारना चाहता है...वैसे तो ये पोज़ उसका भी फेवरेट था, इसलिए वो भी बिना आना कानी के पलटी और अपनी गांड उपर की तरफ उभार कर लेट गयी...और बोली : "जल्दी डालो ना....अब सहन नही होता मुझसे......''

समीर ने अपना लंड ठीक निशाने पर लगाया और उसकी चौड़ी गांड के स्टेयरिंग को पकड़ कर अपना ट्रक उसके फिसलन भरे हाइवे में पहुँचा दिया..


और फिर एक्सीलेटर देकर अपनी स्पीड एक बार फिर से बड़ा दी...

एक बार फिर से उसके झटकों से पलंग और उन दोनो के शरीर हिचकोले खाने लगे..

और अब वक़्त था समीर के दिमाग़ में आई खुराफात का..

उसने एक-2 झटके ऐसे मारे की रश्मि का सिर आगे की तरफ खिसक आया और वो पलंग की बेक से आ टकराया..

रश्मि ने चुदाई करवाते हुए गुज़ारिश की : "रूको समीर, मुझे सिर के उपर ये पलंग का हिस्सा लग रहा है, मुझे थोड़ा पीछे होने दो बस...''

और समीर ने उसे पीछे होने की जगह तो दी नही बल्कि धक्के मारकर उसका स्टेयरिंग काव्या की तरफ घुमा दिया...और अब रश्मि का चेहरा उसकी बेटी की तरफ घूम गया..और फिर एक-2 और झटके मारकर उसने रश्मि को अपनी ही बेटी के चेहरे के बिल्कुल करीब पहुँचा दिया..

अपनी चूत में लंड ले रही रश्मि के लिए ये पहला मौका था की जब वो किसी की उपस्थिति में चुदाई करवा रही थी...और वो भी अपनी जवान हो चुकी बेटी के सामने...

रश्मि का चेहरा हर झटके से खिसक कर काव्या के चेहरे के और नज़दीक जा रहा था, और ये काम समीर जान बूझकर ही कर रहा था...

रश्मि अब बार-2 शिकायत करके समीर की तंद्रा नही तोड़ना चाहती थी...उसे भी पता था की ऐसे चुदाई मे बार-2 टोकने से मर्द को कितना गुस्सा चड़ता है..इसलिए वो चुप रही...और एक वक़्त ऐसा आया जब उसके मुँह से निकल रही गर्म साँसे सीधा उसकी बेटी काव्या के चेहरे से टकराने लगी..

रश्मि तो सोच रही थी की उसकी बेटी गहरी नींद में सो रही है...और ऐसे में उसे महसूस हो रहे झटकों से वो उठने वाली तो है नही, और वैसे भी अब उनका खेल 5 मिनट का ही रह गया था...अपनी चूत के अंदर से मिल रही तरंगो से ये एहसास हो चुका था उसे,वो अब 1-2 मिनट में ही झड़ने वाली थी ..और समीर की स्पीड भी बता रही थी की वो भी अब कभी भी झड़ सकता है..

रश्मि का चेहरा काव्या के उपर था और रश्मि के सामने उसकी बेटी के लरज रहे होंठ थे...जिन्हे अभी कुछ देर पहले ही काव्या ने अपनी जीभ से गीला किया था...आज रश्मि ने इतने गोर से और इतने करीब से उन्हे पहली बार देखा था..वो बड़े ही टेंप्टिंग से लग रहे थे...उन्हे देखकर वो मंत्रमुग्ध सी हो गयी...उन दोनो के होंठ में सिर्फ़ 2 इंच का फासला था..और तभी समीर के और और झटके ने उस 2 इंच के फ़ासले को भी ख़त्म कर दिया और रश्मि के खुले हुए होंठ अपनी बेटी के रस भरे होंठों से जा चिपके..

रश्मि ने पीछे होना चाहा पर समीर ने थोड़ा और आगे होकर उसके सिर को और दबा दिया, बेचारी अपना सिर ना तो पीछे कर पाई और ना ही उपर...उसे लग रहा था की समीर को शायद पता नही है की उसके और काव्या के होंठ मिल चुके हैं, वो अपनी ही मस्ती में उसकी चूत मारता हुआ उसके बालों को घोड़ी की लगाम समझ कर उसकी चूत मार रहा है..पर उसे क्या पता था की ये तो समीर की चाल थी, उसने जान बूझकर उसे ऐसी पोज़िशन में पहुँचाया और धीरे-2 ख्सिका कर उसे काव्या के होंठो तक भी...

अब वैसे भी सिर्फ़ एक मिनट का खेल रह गया था...इसलिए रश्मि ने भी पीछे की तरफ वापिस जाने का दबाव बनाना छोड़ दिया..और वैसे भी काव्या के होंठों पर रगड़ खा रहे उसके होंठ उसे एक अलग ही एहसास दे रहे थे...और ना जाने क्या कशिश थी काव्या के रसीले होंठों मे, रश्मि ने उसके होंठ चूसने शुरू कर दिए...पहले तो धीरे-2 और फिर अपने हाथ से उसके चेहरे को पकड़ कर ज़ोर -2 से स्मूच..

ऐसा लग रहा था की जैसे बरसों से बिछड़े दो प्रेमी आपस में स्मूच कर रहे हैं...



 और काव्या का तो शॉक के मारे बुरा हाल था...जब उसे पहली बार अपनी माँ की गर्म साँसे अपने चेहरे पर महसूस हुई तो उसके सारे शरीर के रोंगटे खड़े हो गये...और फिर धीरे-2 जब उनके होंठ उससे टकराए और फिर उन्होने उसे चूसना शुरू किया तो वो पागल सी हो गयी...अपनी माँ के हिसाब से तो उसकी नींद इतनी पक्की थी की ऐसा सब करने के बाद भी वो उठने वाली नही थी...पर वो उठी तो पहले से हुई थी और अब अपने उपर ऐसे हमले होते देखकर पहले से ज़्यादा बहने लगी थी उसकी चूत ....

रश्मि ने आवेश में आकर उसके स्तनों पर अपना हाथ रख दिया और उन्हे भी दबाने लगी...अब तो काव्या से रहा नही गया और उसने अपने हाथ उपर करते हुए अपनी माँ के सिर को दबोचा और अपनी तरफ करते हुए उन्हे ज़ोर-2 से किस्स और स्मूच करने लगी..

और उसके हरकत में आते ही रश्मि की गांड फट कर हाथ में आ गयी...क्योंकि वो जिस हालत में थी उसे देखकर काव्या उसके बारे मे क्या सोचेगी यही उसके जहन में एकदम से आ गया..

पर काव्या भी बड़ी चालाक निकली, उसने सोते हुए होने का दिखावा करते हुए धीरे से कहा : "ओह विक्की ...... मुआआअह ...... आई लव यु ...... करो ना ....ऐसे ही ... क़िस्स्स मी ....''

और उसे ऐसे बोलता देखकर रश्मि की जान मे जान आई और वो बुदबुदाई : "शुक्र है....नींद मे है अभी तक....बेचारी सोच रही है की विक्की उसके साथ ये सब कर रहा है....ही ही .......''

और फिर उसने अपने होंठों को एक बार फिर से काव्या के हवाले कर दिया और वो अब दुगने जोश के साथ अपनी माँ को स्मूच करने लगी..

काव्या ने आज से पहले अपनी सहेली श्वेता के साथ कई बार स्मूच किया था पर आज जो मज़ा और नरमपन उसे महसूस हो रहा था वो अलग ही था....एक अलग ही रस निकल रहा था रश्मि के होंठों से...और रश्मि भी अपनी जवान बेटी के नर्म होंठ चूसते हुए यही सोच रही थी की इन जवान लड़कियों के होंठों में ये अलग ही तरह की मिठास आती कहाँ से है...

और उन दोनो को ऐसे एक दूसरे के होंठ चूसता देखकर समीर को अपना मिशन पूरा होता दिखाई दिया और उसके लंड का पारा उपर तक चढ़ गया और आख़िरी के 2-4 झटके ज़ोर से लगाता हुआ वो चिल्ला-चिल्लाकर झड़ने लगा..

''अहह ...... ओह रश्मि ........... ओह ...... मज़ा आ गया............ आआआआहह ......''

और अपनी चूत की सुरंग में गर्म पानी का बहाव महसूस करते हुए और रश्मि भी भरभराकर झड़ने लगी...और झड़ते हुए उसने इतनी ज़ोर-2 से काव्या के होंठ चूसे की उसे भी दर्द होने लगा...पर बेचारी काव्या कोई शिकायत भी नही कर सकती थी...वो तो गहरी नींद में सो रही थी ना...

पर एक करिश्मा हुआ काव्या के साथ भी...आज पहली बार वो भी बिना अपनी चूत पर हाथ लगे बिना झड़ चुकी थी...जिस वक़्त उसका सोतेला बाप चीख रहा था और अपना माल उसकी माँ की चूत में उडेल रहा था उसी वक़्त उसे ये एहसास हुआ की जैसे वो रश्मि की चूत में नही बल्कि उसकी चूत में झड़ रहा है...और यही एहसास बहुत था उसके रुके हुए बाँध को निकालने के लिए...ऐसा आज से पहले कभी नही हुआ था, वो हमेशा किसी के हाथों या मुँह से या फिर खुद मास्टरबेट करके झड़ी थी...आज तो बिना हाथ लगाए ही वो झड़ गयी थी...

शायद जो एरॉटिक सीन इतनी देर से उसकी बंद आँखो के सामने चल रहा था उसका ही असर था ये..

और धीरे-2 घोड़ी बनी रश्मि का शरीर उसके उपर से हट गया और वो उसकी बगल मे लेटकर गहरी साँसे लेने लगी...

समीर भी उसके दूसरी तरफ गहरी साँसे लेता हुआ आ गिरा और उसके चेहरे को अपनी तरफ करके उसके नंगे जिस्म से लिपट गया...

आज जो एहसास इन तीनो ने महसूस किया था वो आगे चलकर क्या रंग लेगा, ये उनमे से किसी ने भी नही सोचा था..



 कुछ ही देर में काव्या को वहीं सोता छोड़कर रश्मि और समीर एक साथ नहाने के लिए बाथरूम में चले गये..एक बार और चुदाई की हिम्मत तो अब उन दोनो में ही नही थी...पर फिर भी एक दूसरे के नंगे जिस्मों पर साबुन लगाते हुए जो चूमा चाटी उन लोगो ने की थी,वो भी किसी चुदाई से कम नही थी..

नहाने के बाद रश्मि ने सिर्फ़ एक गाउन ही पहन लिया और किचन में जाकर वहाँ का काम देखने लगी..समीर भी अपनी सोफे पर व्हिस्की का ग्लास लेकर बैठ गया और क्रिकेट मैच देखते हुए दारू पीने लगा..

काव्या से भी ज़्यादा देर तक वहाँ लेटा नही गया...उसकी चूत बुरी तरह से भीगी पड़ी थी...वो भी उठकर बाथरूम में गयी और नहाकर ही बाहर निकली, और एक केप्री और टी शर्ट पहन कर वो समीर के पास जाकर बैठ गयी.

समीर ने उसे अपने से चिपका कर बिठा लिया और वो भी थोड़ा झुककर उसके कंधे पर सर रखकर टीवी देखने लगी.

समीर : "आज का दिन तो शायद तुम कभी नही भूलोगी...इतना एडवेंचर पहले कभी फील किया है क्या तुमने..?''

जवाब में काव्या मुस्कुरा दी और उसने अपना मुँह उपर करते हुए समीर के होंठों को चूम लिया और धीरे से बोली : "सच में पापा, ये दिन मुझे हमेशा याद रहेगा...आज जो मैने देखा है और फील किया है ऐसा कभी नही किया...बस एक ही चीज़ की कमी रह गयी वरना सब कुछ हो चुका है मेरे साथ...''

समीर समझ गया की वो एक चीज़ उसकी चुदाई है..वो भी अपनी ''भोली'' सी बेटी की बात सुनकर मुस्कुरा दिया और उसने भी अपना मुँह नीचे करके उसके होंठों को होले से चूम लिया...

तभी उन्हे रश्मि के कदमों की आहट उनकी तरफ आती सुनाई दी...समीर ने झट से अपना सिर सीधा कर लिया और ग्लास उठाकर सीप करने लगा..पर उसकी आशा के विपरीत काव्या वैसे ही अधलेटी अवस्था में उसके सीने पर सिर रखकर लेटी रही..समीर कुछ नही कर पाया क्योंकि तब तक रश्मि वहाँ पहुँच चुकी थी...उसके हाथ मे स्नैक्स आइटम थे जो वो समीर के लिए लाई थी...काव्या को ऐसे समीर के पहलू में बैठा देखकर उसे थोड़ा अजीब ज़रूर लगा पर उसने टोकना सही नही समझा...वैसे भी पिछले कुछ दिनों से जिस तरह से दोनो के रिश्तों में सुधार आया है वो कोई टोका टाकी करके उसे बिगाड़ना नही चाहती थी.

रश्मि भी समीर के दूसरी तरफ आकर बैठ गयी और उससे बातें करने लगी...समीर का एक हाथ रश्मि की जाँघ पर रेंग रहा था और दूसरे से वो काव्या की लचीली कमर को सहला रहा था...उसकी टी शर्ट और केप्री के बीच वाला हिस्सा नंगा था जिसपर समीर के हाथ फिसल रहे थे...

थोड़ी देर बाद ही खाना लग गया और सबने मिलकर खाना खाया..फिर काव्या उठकर अपने रूम में चली गयी...आज उसने श्वेता को भी वो सब बताना था जो उसके साथ हुआ था दिन भर.

फोन लगाकर उसने जब एक-2 करके सारी बातें श्वेता को बतानी शुरू की तो दोनो तरफ की चूतों पर उंगलियाँ थिरकने लगी..वैसे भी काव्या कुछ ज़्यादा ही मसाला लगा-लगाकर हर बात उसे बता रही थी...श्वेता के साथ उस व्क़्त नितिन नही था, वरना वो वहीं के वहीं उसके लंड को अंदर लेकर चुदवा लेती..पर फिर भी काव्या की रसीली बातों को सुनकर वो जल्द ही झड़ गयी ..... और शायद वो यही सोच रही थी की आज वो काव्या की जगह क्यों नही थी.

उन्हे ये बातें करते-2 एक घंटा हो चुका था, तभी काव्या के रूम का दरवाजा खुला...काव्या ने समझा की शायद समीर उसे गुड नाइट किस्स करने आया है, इसलिए उसने जल्दी से फोन को डिसकनेक्ट करके साइड में रख दिया..पर आने वाला उसके प्यारे पापा नही बल्कि उसकी माँ रश्मि थी..जो शायद ये देखने आई थी की काव्या सही से सो गयी है या नही..

काव्या ने उन्हे देखकर झट से आँख बंद कर ली...और एक बार फिर से सोने का नाटक करने लगी.रश्मि हमेशा से ही काव्या को जल्दी सोने की सलाह देती थी, इसलिए उनके सामने जागते रहकर वो इस समय उनका कोई भाषण नही सुनना चाहती थी.

रश्मि बेड के करीब आई...और इधर-उधर बिखरे पिल्लो को उठाकर सही से लगा दिया...उसकी बुक्स को सही किया...और फिर वो उसकी बगल मे बैठकर उसे निहारने लगी.


 काव्या की आँखे बंद थी पर फिर भी उसे महसूस हो रहा था की रश्मि की नज़रें उसके चेहरे पर ही है...वो चुपचाप सोने का नाटक करती रही..

रश्मि भी बैठकर अपनी जवान हो चुकी बेटी की सुंदरता को निहार रही थी..वो कितनी ''पक'' चुकी है उसका अंदाज़ा तो रश्मि ने शाम को ही लगा लिया था..उसके रसीले होंठों की मिठास को महसूस करके..ऐसी मिठास लड़की के अंदर तभी आती है जब वो चुदने के लिए तैयार हो चुकी होती है..रश्मि ये भी नोट कर रही थी की पिछले कुछ महीनो में उसकी बेटी के शरीर मे कितने बदलाव आए हैं,उसके कूल्हे भी भर गये थे और उसकी ब्रेस्ट भी अब पहले से काफ़ी बड़ी और दिलकश हो गयी थी..

शायद अपनी बेटी की उस सुंदरता को नंगा देखने का लालच ही उसे वहां ले आया था, जो उसने आधी अधूरी महसूस की थी शाम को.

वो धीरे-2 उसके सिर पर हाथ रखकर उसे सहलाने लगी..पर आज उसके सहलाने में एक माँ का स्नेह भरा अंदाज नही बल्कि एक कामुकता थी , एक ऐसी लिप्सा जो उसे ऐसा करने का आदेश दे रही थी .रश्मि की उंगलियाँ फिसलकर उसके पूरे चेहरे को महसूस करने लगी..

ऐसा आज से पहले कभी नही किया था रश्मि ने इसलिए काव्या को भी थोड़ा अजीब लग रहा था.शाम की बात और थी, उस वक़्त तो उसकी माँ चुदाई के मूड में थी और इसलिए उसने उसे सोता हुआ समझकर अपने होंठ उसपर रख दिए थे...पर अब क्या प्राब्लम है माँ को जो वो ऐसा बर्ताव कर रही है उसके साथ...

और अचानक रश्मि ने झुककर उसके माथे को चूम लिया...शायद कुछ ज़्यादा ही लाड आ रहा था उसे अपनी बेटी पर आज...और ऐसा करते हुए रश्मि के गाउन के अंदर लटक रही ब्रेस्ट उसके चेहरे पर आकर टिक गयी..एक पल के लिए तो काव्या को लगा की उसकी साँसे रुक सी गयी है, इतनी बड़ी और भारी जो थी उसकी माँ की ब्रेस्ट...और जब रश्मि ने धीरे-2 नीचे खिसकर उसके गालों को चूमा तब जाकर उसकी साँस में साँस आई..पर तभी काव्या को एक और शॉक मिला, उसकी माँ वहीं पर नही रुकी और उसने चूमते-2 अपने होंठ काव्या के होंठो पर रख दिए और उन्हे चूसने लगी.

अब काव्या की समझ में आया की वो वहाँ क्या करने आई थी...शायद उसकी माँ को उसके रसीले होंठो का चस्का लग गया था इसलिए उन्हे एक बार फिर से उन्हें टेस्ट करने के लिए वो उसके कमरे में आई थी.

एक बेटी के लिए ये सब फील करना किसी शॉक से कम नही था.. और दूसरी तरफ रश्मि को भी ये समझ नही आ रहा था की वो ऐसा क्यों कर रही है...समीर के सोने के बाद पता नही किस सम्मोहन में बँधकर वो वहाँ तक चली आई और अपनी बेटी को ऐसे चूमना शुरू कर दिया...और फिर ऐसा करते-2 वो अजीब-2 सी आवाज़ें भी निकालने लगी अपने मुँह से..

''अहह ..... पुच्चहssssssssssssss ....उम्म्म्मममम ...मेरी बेटी .....मेरी जान. ....... अहह ....ओह''

काव्या भी आज देखना चाहती थी की उसकी माँ किस हद तक जा सकती है...इसलिए वो भी ढीठ बनकर सोने का नाटक करती रही.

और जल्द ही काव्या को ये एहसास हो गया की ये जो उसकी माँ उसके साथ कर रही है वो कुछ ज़्यादा ही हो रहा है..क्योंकि रश्मि ने उसकी दोनो ब्रेस्ट को भी पकड़कर मसलना शुरू कर दिया था..

 और फिर उसने एक ही झटके मे काव्या की टी शर्ट को उपर खिसका के उसे नंगा कर दिया और उसकी कसी हुई चुचियों को भी उतना ही प्यार करने लगी जितना उसने उसके होंठों पर किया था..उसकी बड़ी हो चुकी चूचियों की सुंदरता देखकर वो दंग रह गयी, वो ठीक वैसी ही थी जैसी उसकी खुद की थी उस उम्र में,रश्मि ने अपनी सो रही बेटी के उभरे हुए निप्पल को पकड़ कर जोर से दबा दिया , काव्य ने बड़ी मुश्किल से अपने मुंह से आह निकलने से बचाई


अपने गीले और नर्म होंठों से उसने काव्या की छातियों को तर कर दिया..ऐसा लग रहा था जैसे रश्मि अपनी जीभ के ब्रश से उसकी छातियों को पैंट कर रही है..कभी वो उन्हे चाटती और कभी उन्हे मुँह में लेकर चुभलाती..उसके बड़े-2 निप्पलों को मुँह में लेकर वो ऐसे चूस रही थी जैसे अपनी ममता का कर्ज़ वसूल कर रही हो और उसे पिलाया हुआ दूध उसकी छातियों से वापिस निकलवा रही हो.


काव्या का मन तो बहुत कर रहा था की अपनी आँखे खोल दे और वो भी डूब जाए इस खेल में , पर अभी वो कोई रिस्क नही लेना चाहती थी,क्योंकि अब तक वो भी काफ़ी गर्म हो चुकी थी..और पूरे मज़े लेने के मूड में थी वो..उसे उठता देखकर कहीं ऐसा ना हो की उसकी माँ घबरा कर उसे छोड़कर बाहर निकल जाए...इसलिए वो सही वक़्त का इंतजार कर रही थी.

और रश्मि तो अपनी बेटी के गहरी नींद में सोने का पूरा फायदा उठा रही थी...उसके बूब्स चूसते-2 अचानक उसका एक हाथ काव्या की चूत पर चला गया..और वहाँ से निकल रही नमी को महसूस करते ही उसके हाथ जल से गये...किसी भट्टी की तरह सुलग रही थी वो जगह...एक पल के लिए वो रुक सी गयी और काव्या के चेहरे को गोर से देखने लगी, उसे शायद ये लग रहा था की कहीं वो उठ तो नही गयी क्योंकि इस तरह से चूत के गर्म होने का सॉफ मतलब था की वो भी पूरी तरह से गर्म थी इस वक़्त...पर शायद उसके शरीर के साथ जो हो रहा है उसकी वजह से वो फिर से अपने बाय्फ्रेंड विक्की के बारे में सोचकर ऐसे अपनी चूत का रस निकाल रही होगी..

पर उसकी चूत से निकल रहे खट्टे-मीठे रस की सुगंध उसे बड़ा ही ललचा रही थी...इसलिए वो उसे चूमते-2 नीचे तक आई और उसकी केप्री को खींचकर उसने घुटनों से नीचे खिसका दिया..

ये शायद पहला मौका था जब जवान होने के बाद काव्या इस तरह से नंगी सी होकर अपनी माँ की आँखो के सामने थी...और कोई मौका होता तो वो ऐसा कभी ना करती..पर अभी तो वो अपनी नींद मे होने के नाटक को ऐसे एकदम से ख़त्म नही करना चाहती थी..और वैसे भी अब उसने भी सोच लिया था की कुछ ही देर की बात है,बाद में तो वो खुद भी उसी खेल में उतरने वाली है..




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