Thursday, February 5, 2015

FUN-MAZA-MASTI पापा प्लीज........24

FUN-MAZA-MASTI

 पापा प्लीज........24


सुबह होते ही रूपा की बेचैनी और बढ़ गई.. वो हर पल यही सोच रही थी कि पता नहीं सीमा भाभी अब कौन सा बम गिराएगी जो रात में उसे उस लड़के ने उसे दिया था... वो किसी तरह फ्रेश हुई और चाय पी और बाहर निकल गई...

रूपा के कदम सीमा भाभी के फ्लैट की तरफ बढ़ गई...कुछ डर कुछ चिंता पर जाना जरूरी... किसी तरह रूपा सीमा भाभी के गेट पास पहुँची कि उसे अंदर से सीमा भाभी की आवाज टी.वी. न्यूज के साथ घुल मिल के आ रही थी...

रूपा कान लगा कर सुनने की कोशिश की... अंदर से सीमा भाभी बोल रही थी,"जी वो हमारी दोस्त सरदेई में रहती है ना मिनी..."

साथ में भैया की आवाज आई,"हाँ वो उल्टी पेटीकोट वाली.." भैया की बात पर दोनों जोर से हँस पड़े... मतलब दोनों अभी बैठ के चाय के साथ सुबह की ताजी न्यूज का आनंद ले रहे हैं...

सीमा भाभी,"धत् हाँ वही... आपको बेकार ही लेडिज पार्टी की बात बता दी.. उसका नाम ही रख दिए..."

भैया,"हा...हा...हा...हाँ तो क्या हुआ उसे.."

सीमा भाभी,"हुआ कुछ नहीं... दरअसल उसे आज कुछ शॉपिंग करनी है और आज शाम वो अपने मायके जा रही है... तो कुछ कपड़े खरीदने थे उसे तो मुझे कई बार कह चुकी आने के लिए..."

भैया,"तुम्हें कुछ नहीं लेनी..."

सीमा भाभी,"नहीं पिछले संडे को ही तो ली थी... पर कुछ अगर कहीं मिनी जिद कर दी तो लेनी तो पड़ ही सकती है ना...ही..ही.." सीमा भाभी जबरदस्ती हंसी हंस पड़ी... जिसे सुन भैया बोले,"ये लो, जितने लगेंगे निकाल लेना..."

रूपा के दिमाग में कुछ बार बार खटक रही थी...ये सीमा भाभी शॉपिंग के लिए क्यों? जब आज मिनी को मायके जाना था तो शॉपिंग कल ही कर लेती... रूपा कुछ सोचने लग गई...

सीमा भाभी,"लीजिए, बस तीन हजार में हो जाएंगे... कुछ लेनी ही नहीं तो..."

रूपा अगर ये सब नहीं सोच रही होती तो मजाक में ही दो चार गाली जरूर देती कि शाली तीन हजार में तो मैं महीने भर स्कूटी दौड़ा सकती हूँ और तुम्हें बस तीन हजार जब कुछ नहीं लेनी तब लगती...

खैर रूपा वापस आने की सोच ली और बिना आहट के वापस आ गई... अपने बरामदे के पास पहुँचते ही उसे कुछ याद आया... वो दौड़ती हुई अपने रूम में गई और अपनी डायरी निकाली...

चट.. चट... पन्ने पलटने लगी और तभी उसकी नजर एक नाम के पास जा रूकी... वो फुर्ती से फोन उठा लाई और नम्बर डायल कर दी... फोन रिसीव होते ही रूपा बोली...

रूपा,"हैलो रिया, मैं रूपा बोल रही हूँ..."

रिया रूपा की स्कूल वाली दोस्त थी... ज्यादा कुछ कहने लायक नहीं थी रिया के बारे में... बस अच्छी दोस्त थी... रिया कुछ देर के चौंक सी गई...

रिया,"वॉव रूपा,आज कैसे नम्बर गलत डायल कर दी यार...कॉलेज जब से चेंज हुई तुम तो भुला ही दी हमें..."

रूपा,"अरे नहीं रिया... मेरे पास फोन ही नहीं हैं तो कैसे याद करूँगी...और तुम रहती भी हो एकदम शहर के बाहर गाँव वाले इलाके में..."

रिया,"हे तुम ना कोई फोन ले लो...कम से कम बात तो होगी... भेंट मुलाकात ना भी हुई तो चलेगी पर बात होती रहेगी तो समझती है ना...मेरी समधन..."

रूपा,"हाँ समधन जी..." रूपा रिया की इस स्कूल वाली आदत से अच्छी तरह वाकिफ थी...वो अपनी सारी दोस्त को समधन जी ही कहती थी...रूपा हंसती हुई बात को आगे बढ़ाई...

रूपा,"रिया, एक बार स्कूल में तुम अपने किसी मिनी भाभी के साथ आई थी ना..."

रिया कुछ याद की पर याद नहीं आई तो पूछी,"किस फंक्शन में..."

रूपा,"गोली मार फंक्शन को...मिनी भाभी को जानती हो ना..."
रिया,"हाँ वो सामने ही तो रहती है मेरे...क्यों क्या बात है..."
रूपा,"हाँ जिनसे दोस्ती मेरी भाभी भी कर रखी है.." अचानक रिया को सब याद वापस आ गई और पटपट बोलने लगी...

रिया,"हाँ यार, वो टीचर्स डे पर...वहीं तो तुम्हारी भाभी और मिनी भाभी की मुलाकात हुई थी पहली बार... मेरी मम्मी नहीं थी उस दिन शहर में तो भाभी को ही पकड़ के ले गई थी..."

रूपा,"हाँ गूड न्यूज है अब... कुछ तो मेमोरी बची है तेरे अंदर में...ही..ही...ही..."

रिया भी हंस पड़ी...रूपा आगे बोली,"वो मिनी भाभी कहीं जाने वाली है क्या आज..."

रिया,"नहीं...वो तो परसों ही चली गई अपने मायके... पर तू ये सब क्यों पूछ कर रही है..."

रूपा,"क्या? मतलब वो इस वक्त यहाँ नहीं है..."रूपा के अंदर जो तब से कुनबुन कुनबुन हो रही थी वो अब रूपा को लहराते हुए बाहर निकल पड़ी... रूपा का सर चक्करघिन्नी बनता जा रहा था...

रिया,"कोई काम था क्या?" रिया के दुबारे पूछने पर रूपा हड़बड़ा सी गई और संभलती हुई बोली,"नहीं काम क्या रहेगा...काफी दिनों से जैसे हम दोनों नहीं मिलते हैं ना तो उन्हें भी नहीं देखती साथ...और रात सपने में कुछ गड़बड़ देख ली तो सुबह फोन कर दी तुम्हें..."

रिया हंसती हुई बोली "चल ठीक है, सपने के बहाने कम से कम याद तो की... पर हाँ तू फोन जरूर ले लो..."

रूपा,"ओके बाबा, इतना कह रही हो तो आज ही ले लूँगी...पापा अभी घर पर ही हैं... जाकर मनी-मैटेरिअल ले लेती हूँ और फोन ले कर पहले तुम्हें ही फोन करूँगी..."

रिया,"शुभ काम में देर नहीं...जल्दी जा मेरी समधन.. रखती हूँ बॉय...तू अब अपने नम्बर से फोन करना तभी बात करूँगी वर्ना नहीं.."

रूपा हंसती हुई "बॉय" बोली और फोन रख दी पर मिनी की बात याद आते ही वो सर पकड़ के बैठ गई... शाली इतनी टेंशन होती है जिंदगी में...आज पहली दफा किसी टेंशन को मम्मी पापा से छुपा रही हूँ...इसलिए इतनी प्रॉब्लम हो रही है... पहले तो मुझे मालूम भी नहीं पड़ती थी कि टेंशन भी कोई चीज होती है...



रूपा खाना पीना की और मम्मी से बोल फोन की मांग कर दी... थोड़ी सी ना नुकूर,पूछताछ के बाद पापा मान गए... पापा के जाते ही कनक आ धमकी... कनक को पैसे दिखाती रूपा बोली,"चल लेनी है..."

कनक तो ठहरी शैतान की नानी, वो भला मौके थोड़े ही चूकती... कनक,"रोहन की साइज क्या है जो इतनी जल्दी है लेने की.." और कनक की पीठ पर धौल जमते देर ना लगी... दोनों बाहर निकली स्कूटी से...

पहले तो दोनों ब्यूटी पॉर्लर गई जहाँ दो घंटों तक दोनों ने वैक्सीन करवाई... फिर स्कीन की चमक बरकरारी ठहरी रहे इसके उपाय... जब पॉर्लर से निकली तो हर किसी की आहें रूकने का नाम ही नहीं ले रही थी...

खिली धूप में भी किली मरकरी से कम नहीं चमक रही थी... उन पर कितनी नजरें पड़ रही थी वो अनुमान भी नहीं लगा सकती थी... शत प्रतिशत नजरें और जिसकी नजरें ना पड़ी वो तो समझो क्या चीज मिस कर दी...

फिर अपनी एक टीचर से मिलने गई जो कि कला की थी... और वो इस तरह के कॉन्टेस्ट में सहयोग भी खूब करती थी... खासकर रूपा को... वो टीचर अपने घर ही थी तो दोनों वहीं जा पहुँची...

डिंग-डांग...डिंग-डांग... कनक बेल बजाई...गेट खुलते ही टीचर की तो आश्चर्य से मुँह खुली की खुली रह गई... फिर वो बोली,"वॉव सुपर... रूपा अंदर आ जाओ... तुम तो अब और भी सुंदर होती जा रही हो..."

रूपा तो बस मुस्कुरा कर रह गई पर कनक,"मैम,कॉन्टेस्ट नजदीक हैं तो प्लीज मेरी दोस्त को नजर मत लगाइए..." और कनक हंस पड़ी... जवाब में मैम रूकी, पलटी और आँखों से हल्की काजल निकाल रूपा के कान के पास लगा दी...

मैम,"अब खुश...शैतान कहीं की...मुझ पर ही शक करने लग जाती है..." जिस पर तीनों हंस पड़ी...और कुछ ही पल में दोनों बैठक रूम में बैठी मैम से कुछ टिप्स ले रही थी...

कैसे कपड़े पहन के हर राउंड में इंट्री लेनी है... हर वक्त चेहरे पर खुशी झलकनी चाहिए... स्कीन पर किसी तरह की दाग, बाल नहीं दिखनी चाहिए... नजरें हमेशा सब जजों से मिलती रहनी चाहिए ताकि अंदर की सुंदरता,व्यक्तिव उन्हें दिखे... ये नहीं कहे कि ये कमजोर दिल वाली है....

और अपनी एक कला जैसे संगीत, लेखन, वगैरह को सरल और सहज तरीकों से दिखाना... साथ ही साक्षात्कार के पल उसी अनुरूप ड्रेस होनी चाहिए और जवाब देने में संकोच नहीं करना चाहिए...

इसी तरह काफी देर तक दोनों ध्यान से सुनती रही... फिर वो वहाँ से निकली तो कनक बोली,"हाँ तो रूपा, ये सब तो हुई...अब बता सीमा भाभी कुछ बोली सुबह..."

रूपा,"नहीं यार, सुबह गई थी कुछ और ही फिरकी हाथ लग गई..."

कनक,"साफ साफ बोल ना..."

रूपा,"अरे वो सीमा भाभी आज दो बजे किसी से मिलने जाने वाली है..." रूपा के बोलते ही कनक समय देखी तो अभी बारह बज रहे थे... फिर कनक बोली,"किससे.."

रूपा,"पता नहीं... सुबह जब उनसे मिलने गई तो मैं गेट पर ही रूक गई और अंदर सुनने लगी...भाभी भैया से कह रही थी कि मिनी भाभी के साथ मार्केटिंग जाना है..."

रूपा स्कूटी चलाती हुई बोली,"पर जब रिया से बात कर मिनी भाभी के बारे में पूछी तो वो तो परसों ही मायके चली गई हैं तो अब वो किससे मिलने जाएगी..."

रूपा की बात खत्म होते ही कनक बोली,"ऐ चल कॉफी पीते हैं पहले...फिर घर चलेंगे..."कनक तार से तार जोड़ने लग गई कि वो किससे मिलने जाएगी... बात तो साफ थी कि सीमा भाभी झूठ बोली मतलब इसी से जुड़ी है...दूसरी बात होती तो झूठ नहीं बोलती...

कॉफी शॉप पर कॉफी का ऑर्डर कर दोनों गुपचुप बैठ गई, मगर कब तक... कनक बोली,"मेरे ख्याल से ये देखना चाहिए कि आखिर वो किससे मिलती है...ये तो साफ है कि वो इसी बात के सिलसिले में किसी से मिलेगी..."

रूपा,"हाँ क्योंकि भैया कभी किसी बात को लेकर मना नहीं करते... सीमा भाभी के कई लड़के दोस्त तो घर भी मिलने आते हैं... पर यहाँ सीमा भाभी झूठ बोल रही हैं..."

शॉप में घुसते ही कनक ऑर्डर मार दी थी तो कॉफी आ पहुँची... कॉफी की सुगंध नाक में घुसाती कनक पहली चुस्की ली और बोली,"..और हम दोनों तो जा नहीं सकते उनके पीछे...कहीं पर भी उनकी नजर पड़ गई तो वो गुस्से में शुरू ना हो जाएं कहीं.."

रूपा भी कॉफी पीती हामी भर दी...कनक कुछ देर तक सोचती रही..फिर वो तेजी से फोन निकालती हुई बोली,"आइडिया...ये कान एक बंदा कर सकता है...अपने ही कॉलेज का है और वो लड़कियों की जासूसी का मास्टर है..."

रूपा कुछ समझी नहीं... वो नासमझ का मुखौटा अपने चेहरे पर चढ़ा कर कनक को देखने लगी... कनक रूपा की हालत देख मुस्कुराती हुई फोन लगाती हुई बोली,"तमाचा..." नाम सुनते ही रूपा चौंकती हुई मुस्कुरा दी...

"तमाचा" नाम अजीब जरूर है पर उस पर एकदम सटीक है... कॉलेज का वो अव्वल दर्जे का लौंडियाबाज था... और साथ ही तमाचा खाने में भी अव्वल... और इसी वजह से उसका नाम तमाचा पड़ गया...

दिखने नें वो हैंडसम भी था पर वो प्यार करने से कोसों दूर रहता था... उसे तो बस सेक्स की आदत थी... उसका कहना था जो लड़की थप्पड़ दी तो समझो वो चूत भी देगी... अब वो कैसे ये संभव करता था किसी को पता नहीं...

लड़की चोदने के चक्कर में वो तीन साल से एक ही क्लास में अटका था... बाप रईस नेता था तो पैसे की कोई थी नहीं... कॉलेज में सलाना कुछ रकम वो दान भी देते थे... अपनी क्लास के हर लड़की से पहले वो थप्पड़ खाने की फिराक में रहता था...

कनक भी उसे थप्पड़ दे चुकी थी और चूत भी... बात कॉलेज की पहली दिन ही हुई थी... कनक एक पीरीयड कर बाथरूम की ओर चल दी थी... बाथरूम से निकली ही कि तमाचा दांत निपोरता सामने आ गया...

तमाचा,"जानेमन, हाथ तो धोई पर वो धोई या नहीं..." फिर क्या, कनक की पांचों उंगली उसके गाल पर... वो तमाचे खाने के बाद बड़ी शालीनता से थैंक्यू कहा जिसे कनक समझ नहीं पाई और बास्टर्ड कहती निकल गई...

बात तुरंत फैल गई कि नई लड़की तमाचा को तमाचे दे दी... गुल गुल शुरू... सब लड़के तो कनक को देख आने वाली दिन को याद कर सपने देखने लग गए थे... तब क्लास की ही एक लड़की बोली,"इग्नोर कर उसे यार, उसे तो कई लड़की ने थप्पड़ दे चुकी है... उसकी तो आदत है थप्पड़ खाने की...मेरी सिस्टर जो सीनीसर है उसके साथ था वो, वो भी थप्पड़ लगाई थी इसे..."

"साला इस साल भी इसी क्लास में है और थप्पड़ खाता फिरता है...लगता है अब मेरे से भी पीटेगा... पर दीदी ही मना कर दी है... कहती है नेता का बेटा है...उसकी बात को इग्नोर कर देगी सुन के तो वो अच्छा रहेगा... इसका नाम भी इसी पर है "तमाचा".."लड़की छोटी सी कहानी बता दी कनक को जिसे सुन कनक मुस्कुराए बिना ना रह सकी कि बड़ा अजीब है... मार खाते शर्म भी नहीं लगता...


पर उसे ये नहीं मालूम थी कि दीदी मना क्यों की...वो भी नई थी पर दीदी बता चुकी थी इसलिए वो थप्पड़ नहीं मारी... और तमाचा अपने नियम से एक लड़की को ज्यादा तंग नहीं करता था...

अगले ही दिन से तमाचा अपने काम पर लग गया... हर वक्त मौका देख कनक से टकराता और प्यारी सी शरारत करते हुए अपने गाल ढ़क लेता था...जिससे कनक को हंसी भी लग जाती... पर असलियत तो ये थी कि वो कनक को इम्प्रेश कर रहा था...

कनक एक हफ्ते, दो हफ्ते बस देखती रह, मुस्कुराती रही और आखिर उसकी उससे दोस्ती करने की सोची... बस यहीं पर उसे मौका मिला...

अगले ही दिन उसने कनक को गेस्ट हाउस ले आया... पहले तो स्वागत भाव... फिर फलर्ट... फिर चिपक गया कनक से.... किस की बौछार कर दी...कनक भी जल्द ही रंगत में आ गई...

पलक झपकते ही दोनों नंग धड़ंग...हमले से पहले तमाचा साफ बता दिया कि मुझे प्यार व्यार करना नहीं...बस तुम चाहिए...कनक भी प्यार के लफड़े में क्यों पड़ती... नीचे से कमर उचका सटाक से सुपाड़े अंदर कर बोली,"मैं कौन सा तेरे से प्यार करने वाली..."

तमाचा,"वॉव, फिर तो अपने ग्रुप की हो यार..." और तमाचा कहते हुए कनक की चुची पकड़ एक धक्का दिया जिससे आधा लंड अंदर...

कनक,"पर हाँ साले, रूपा के सामने फटकना भी मत... तेरे थप्पड़ खाने का राज जान गई हूँ तो प्लीज जो अच्छी है उसे खराब मत करो..." कनक बात खत्म कर कमर उचकाई पर अब और अंदर नहीं ले पाई...

तमाचा,"प्रॉमिश बेबी, मेरा अपना उसूल है...जो थप्पड़ दी उसे चूत देनी होगी और थप्पड़ चूत देने वाली ही देती है... वैसे रूपा पर भी ट्राई कर चुका हूँ पर वो नहीं दी तो उसकी बात खत्म..." बोलने के साथ ही तमाचा एक करारा शॉट मारा जिससे जड़ तक समा गया कनक की चूत में उसका लंड...

कनक की चीख निकल पड़ी... फिर तमाचा स्पीड पकड़ दनादन पेलने लगा... कनक उचकती गई... गाड़ी की ईंधन तो समाप्त होनी ही थी और जब हुई तो दोनों थड़थड़ाकर कस लिए एक दूसरे को...

उस दिन के बाद कई बार दोनों इस गेस्ट हाउस पर मिले... फिर कनक अगले साल में गई पर तमाचा चूत के चक्कर में पिछले क्लास में ही रह गया...

तमाचा दूसरी लड़की के चक्कर में रह गया...कनक भी औरों लड़कों से टांका भिड़ाती रही...पर दोनों जब भी मिलते तो हाय हैल्लो जरूर होती...आज तो जरूरत आ गई है उसकी...

फोन रिसीव होते ही तमाचा बोला,"हाय बेबी, कैसी हो और तुम्हारी वो कैसी है..."

कनक,"मस्त हूँ और वो भी...कहाँ है तू..."

तमाचा,"बस एक कल एक छमिया साली दस उंगली जड़ दी है गाल पर और बोनस में पैर के अंगूठे सैंडल से कुचल दी कमीनी...उसी की जन्मकुंडली में लगा हूँ..."

उसकी बात सुनते ही कनक हंस पड़ी... उसकी हंसी सुन शॉप में बैठे लोग कनक की ओर घूरने लगे... कनक स्थिति को समझ रूपा को बाहर निकलने का इशारा कर उठ गई...

रूपा बिल पे की और कनक के पीछे हो ली...कनक आगे तमाचा को सुनाई,"साले, तू नहीं सुधरेगा... अबभी कह रही सुधर जा बेटा वर्ना कोई गुंडी टाइप टकरा गई ना तो एके47 डाल देगी तेरे पिछवाड़े में..."

तमाचा,"उसकी मां की चूत मारूं... किसी लौंडिया में इतनी मर्दानगी नहीं आई अभी... जब होगी तब देखी जाएगी...अच्छा ये बता कैसे याद किया..."

कनक,"अभी जरूरी है तुम्हारी...आ सकता है..."

तमाचा,"साली चूत में चींटे काटती है तो शादी क्यों नहीं कर लेती..."

कनक,"अबे भोसड़ी, वो बात नहीं है... लड़की की जासूसी में तू माहिर है तो सोची तू ही कर सकता है...इसलिए फोन की..."

तमाचा,"ओह, साली लौंडिया का चस्का लगा ली है क्या...चल कोई बात नहीं...नाम पता बता..." कनक की तो हंसी आ रही थी उसकी हर शरारती बातों पर...

कनक,"नहीं यार, पहले बात तो सुन...एक लड़की है जो तीन बजे किसी से मिलने जाएगी आज... बस तुम ये पता कर दो कि वो किससे मिलती है और हो सके तो क्या सब बात करती है..."

अबकी बार तमाचा थोड़ा सीरीयस हुआ... वो गंभीर मुद्रा में बोला,"ओह...काम हो जाएगा... पर बात कुछ समझ में नहीं आया कि ये चक्कर किस टाइप का है... लड़की की चूत है तो मरवाने जाएगी ही...पर तुम तो सिर्फ मिलने और बातचीत की बात कर रही हो..."

कनक,"सब समझा दूंगी और जरूरत पड़ी तो हेल्प भी करनी होगी तुम्हें...ठीक है.."

तमाचा,"ओके...कौन है और कहाँ की है..."

कनक,"रूपा..."
तमाचा,"क्या..." कनक बात बोली भी नहीं कि तमाचा टांग अड़ा दिया.. कनक झल्लाती हुई बोली,"पहले ठीक से सुन तो... रूपा की भाभी; सीमा नाम है...कभी देखे हो.. "

तमाचा,"देखा तो रूपा के सारे फैमिली को पर नाम क्या है पता नहीं..."

कनक,"देखे हो तो पहचान भी जाओगे...वो कुछ ज्यादा ही लहक चहक में रहती है... बाल की मोटी लट आगे से लटकी रहती है..."

तमाचा,"समझ गया...समझ गया...वो थ्री स्टेप वाली...शाली एक चुची हमेशा बाहर ही रखती है साड़ी से..."

कनक की जोर से हंसी निकल पड़ी उपनाम सुन के...थ्री स्टेप... बालों के स्टाइल से भी नाम रख देते हैं... वो भी चुन के...कनक हंसती हुई बोली,"हाँ वही...बस उन्हीं के पीछे थोड़ा टाइम देना है और प्लीज जरूरी है..."

तमाचा,"नो टेंशन बेबी...बस एक घंटे में मैं इधर से निकल रहा हूँ...शाम में फोन करता हूँ
ओके..."

कनक की खुशी से बाँछें खिल गई...वो चहकती हुई स्कूटी पर जम गई जहाँ रूपा कब से वेट कर रही थी... साथ ही वो कनक की हर बात पर मुस्कुरा भी रही थी कि अजीब तरीके से बात करती है...

कनक,"थैंक्यू तमाचा..."

तमाता,"ओए, थैंक्यू मैं नहीं लेता... देना ही है तो चूत देना..बड़ी दिन हो गए तेरी मारे..."

कनक,"ओके..ओके...दे दूँगी पर प्लीज पहले ये काम कर दो..."

तमाचा हंस पड़ा,"ठीक है, और हो सके तो अपने दोस्त की एक पप्पी भी कम से कम दिलवा देना यार..."

कनक रूपा की जिक्र सुनते ही आँखें गोल गोल करती शरारत से बोली,"जी नहीं...पर हाँ अगर तेरे नसीब अच्छी हुई तो अगली मुलाकात में रूपा भी रहेगी तो खुद मांग लेना...आगे तेरी किस्मत और रूपा का मन..."

रूपा कनक की बात सुन पीछे पलटी तो कनक पीछे होती हंस पड़ी जिससे रूपा भी हंस पड़ी...उधर तमाचा चार चार हाथ कूदने लग गया...चलो डूबते को तिनके का सहारा और क्या चाहिए...

फिर रूपा हैंडल पर पकड बनाई और बिना ब्रेक की स्कूटी दौड़ा दी... आखिर लड़की कभी ब्रेक लगाती है क्या जो कहूँ ब्रेक भी होती स्कूटी में....






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