Thursday, February 5, 2015

FUN-MAZA-MASTI सौतेला बाप--51

FUN-MAZA-MASTI

 सौतेला बाप--51

अब आगे
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समीर सीधा नीचे वाले बेडरूम में गया जहाँ रश्मि सो रही थी...उसने सोने से पहले एक महीन सा गाउन पहन लिया था और अंदर उसने कुछ भी नही पहना हुआ था, क्योंकि सोते हुए वो हमेशा ही फ्री होकर सोती थी..

समीर उसके पीछे जाकर लेट गया, और उसकी पीछे की तरफ निकल रही मोटी गांड पर अपना लंड लगाकर उसके जिस्म से चिपक गया..स्पून स्टाइल में ..

और अपना हाथ उसकी कमर पर रख दिया, जहाँ से उसका कटाव शुरू होता था.

रश्मि गहरी नींद में थी,पर शायद उसे समीर के पीछे आने का एहसास हो चुका था, इसलिए उसकी गहरी साँसे थोड़ी देर के लिए रुक गयी थी.

समीर का लंड उसकी गुदाज गाण्ड की गर्मी पाकर हरा भरा होने लगा..अभी कुछ देर पहले ही उसकी बेटी ने मलाई निकाली थी और अब वो उसकी माँ के पास आ पहुँचा था..

आने से पहले उसका ऐसा वैसा कोई इरादा नही था, क्योंकि एक बार झड़ने के बाद जो फीलिंग आती है की अब तो शायद कल या परसो ही करूँगा, वो आने लगी थी समीर को..पर रश्मि थी ही इतनी सेक्सी की उसके पास जाते ही वो भूल गया की वो अभी-2 झड़ कर आया है..

उसके हाथ हरकत में आ गये..और उसने धीरे-2 अपने हाथ उपर करके उसके मुम्मों तक ले गया..बड़े-2 मुम्मे हाथ में आते ही उसने उनपर होले से हाथ फेरा..और फिर उनके मैन पॉइंट यानी निप्पल पर लेजाकर वहाँ घिसाई करने लगा, वो निप्पल बिल्कुल अंदर धंसा हुआ था..यानी वो भी सो रहा था.....पर कुछ ही देर की घिसाई में जिन्न की तरह उसके मुम्मों के चिराग से उसका निप्पल निकल कर बाहर आ गया....

और तभी बेडरूम का दरवाजा खुला और काव्या अंदर आ गयी...उसने नहाने के बाद एक निक्कर और टी शर्ट पहन ली थी..और बाल अभी तक गीले थे..समीर ने उसकी तरफ देखा, वो हँसती हुई उसके पास आई और धीरे से बोली : "मैं आपको डिस्टर्ब तो नही कर रही ना पापा .......''

समीर उसके शरारत भरे चेहरे को देखकर समझ गया की वो पंगे लेने के लिए जानबूझकर उनके बेडरूम में आई है..शायद वो जान चुकी थी समीर नीचे आकर उसकी माँ के साथ क्या करेगा..

और बात सही भी थी...नहाते हुए काव्या को अचानक वो सीन याद आ गया जब उसने और श्वेता ने छुपकर समीर और अपनी माँ की चुदाई देखी थी...और तब में और अब में उसके और समीर के बीच काफ़ी नज़दीकियाँ आ चुकी है, वो काम जो उसने उस दिन छुपकर किया था, उसे आज वो खुलकर करना चाहती थी...

समीर तो मना नही करेगा, बस माँ की फ़िक्र थी उसको...पर ट्राइ करने में क्या हर्ज है..इसलिए वो जल्दी-2 नहाई और कपड़े पहन कर नीचे भाग आई...अंदर के कपड़े तो उसने पहने ही नही थे..

समीर ने उसे चुपचाप अपने पीछे लेटने के लिए कहा..और काव्या ने ऐसा ही किया..वो समीर के पीछे लेट गयी और अपना शरीर चादर में छुपा लिया..कमरे में काफ़ी अंधेरा था...काव्या अंदर आते हुए बेडरूम का दरवाजा बंद करके आई थी..

और रश्मि को जैसे ही अपने शरीर पर रेंग रहे हाथों का एहसास हुआ, उसकी नींद टूट गयी..औरत चाहे जितनी भी गहरी नींद में हो,उसके शरीर के साथ जब खिलवाड़ होता है तो उसकी नींद खुल ही जाती है..रश्मि भी उठ गयी..और उसे अपने पीछे चिपके हुए समीर का एहसास होता है...

''उम्म्म्ममममममममममम...... सोने दो ना समीर.......आज बहुत थक गयी हूँ ...''

समीर ने मन मे सोचा 'थकोगी कैसे नही....सुबह से स्वीमिंग पूल में नहा के...और बाद मे लोकेश से चुद के यही हाल होगा ना...'

और काव्या ने सोचा 'एक ही दिन मे 2-3 बार चुदाई कारवाओगी तो ऐसे ही टूट कर नींद आएगी ना माँ ..'

पर उनके मन की बात भला रश्मि तक कैसे पहुँचती...वो तो अपनी गांड मटकाती हुई समीर के खड़े हुए लंड को पीछे धकेलने का प्रयास कर रही थी..

पर अंदर ही अंदर उसकी चूत की परतों में फिर से वही कंपन महसूस होने लगा,जिसने सुबह से 2-3 बार उसकी चुदाई करवा दी थी..

और वो ये भी नही जानती थी की उसकी बेटी भी उन्हीके बिस्तर में दुबक कर वो सब सुन रही है ..

समीर ने भी थोड़ा और मज़े लेने की सोची...एक तीर से दो शिकार करना चाहता था वो आज...इसलिए वो शुरू हो गया.

समीर : "डार्लिंग....सुबह से बड़ा मन कर रहा है...''

अपना लंड फिर से उसकी गांड की दरार में फँसा कर वो बोला

रश्मि : "उम्म्म्मम......क्या करने का....''

समीर ने उसके कान को मुँह में लेकर ज़ोर से चूस लिया और फुसफुसाया : "तेरी चूत मारने का...''



अब रश्मि भी मस्ताने लगी थी...वो सिसक उठी समीर के गीले होंठों को महसूस करके और बोली : "कैसे मारोगे....''

अपने माँ बाप को ऐसी गंदी बातें करते देखकर काव्या के दिल की धड़कन तेज हो उठी...उसने तो सोचा भी नही था की ये दोनो ऐसी बातें करते होंगे चुदाई से पहले...और वैसे भी उसने आज तक यही सोचा था की शादी शुदा लोग सीधा अपने काम पर लग जाते होंगे...एक दूसरे को नंगा किया, चूमा चाटी करी, चूसा और चुस्वाया और सीधा चूत में लंड पेल दिया..उन लोगो को ऐसी उत्तेजना से भरी बातें करने से भला क्या मिलेगा..

पर वो बेचारी अभी जवानी की दहलीज पर पहुँची थी...इसलिए वो नही समझ सकती थी की ये तरीका होता है एक दूसरे को उत्तेजना के उस शिखर पर पहुँचाने का , जहाँ की उँचाई पर पहुँचकर चुदाई करने का मज़ा दुगना हो जाता है..और यही शायद उसकी लाइफ का सबसे बड़ा सबक बन जाएगा आज..

रश्मि को जवाब देने के बदले समीर ने अपना पयज़ामा नीचे खिसका कर अपना लंड रश्मि के हाथ में पकड़ा दिया और बोला : "ये देख....ये है तेरा पालतू लंड ...इसे डालूँगा तेरी चूत में ...अंदर तक...और चुदाई करूँगा तेरी ....''

रश्मि : "म्*म्म्ममममममममम ........... ये तो बहुत लंबा है........ मुझे दर्द होगा.........''

समीर : "धीरे-2 जाएगा ना अंदर...तब नही होगा.....बड़े आराम से डालूँगा....''

रश्मि : "उम्म्म्मममममम....... आराम से तो मज़ा भी नही आता......ज़ोर से करोगे, तभी मज़ा मिलेगा...''

समीर : "साली......मज़े भी लेने है....लंबे लंड के दर्द से भी बचना है.....एक नंबर की चुद्दक्कड़ है तू....''

रश्मि : "चुद्दक्कड़ नही...रंडी हूँ मैं .....आपकी पर्सनल रंडी.....''

काव्या तो अपनी माँ के मुँह से ऐसी गंदी बातें करते देखकर हैरान होती जा रही थी...पर साथ ही साथ उसे अपनी चूत के अंदर भी चिंगारियाँ जलती महसूस हो रही थी...कमाल की बात थी, वो अभी-2 झड़ कर आई थी, फिर भी ऐसी बातें सुनकर ही उसकी फुददी फिर से भड़क उठी थी....उसे भी शायद ऐसी गंदी बातों का होने वाला असर समझ आ रहा था..

समीर ने रश्मि के गाउन को उपर कर दिया और उसके सिर से घुमा कर बाहर निकाल दिया...अब वो पूरी नंगी थी उसकी बाहों में ...

समीर ने भी अपनी टी शर्ट और पायजामा बड़ी फुर्ती से निकाल फेंका और नंगा हो गया....उसकी पीठ काव्या की तरफ थी, जो अपनी साँसे रोके अपने सौतेले बाप को नंगा होते देख रही थी...एक पल के लिए तो उसे यही लगा की समीर उसके लिए नंगा हो रहा है...और नंगा होते ही उसके भी कपड़े निकाल फेंकेगा और उसकी जबरदस्त चुदाई करेगा...

काव्या ने अपने हाथ आगे किए और समीर की नंगी पीठ से छुआ दिए...समीर सिहर उठा जब काव्या के हाथ रेंगते हुए उसके चूतड़ों तक आए और वो उन्हे बड़े ही प्यार से सहलाने लगी...

समीर ने रश्मि के शरीर को अपनी बगल में दबा रखा था..उसके दोनो हाथों को भी...ताकि वो उसकी पीठ की तरफ ना चले जाएँ, जहाँ उसकी बेटी काव्या चिपक कर मज़े ले रही थी..

ये तो समीर का सपना था , की एक साथ दोनो माँ बेटियों को एक ही पलंग पर नंगा करके चोदे ...

पर आज वो उस मूड में नही था, वो सिर्फ़ काव्या को ये सब दिखाकर उसे पूरी तरह उत्तेजित करना चाहता था, ताकि वो उसकी कलाकारी के जौहर देख कर खुलकर मज़े ले...वैसे भी पहली बार वो उसकी चुदाई आराम से और बिना किसी और की उपस्थिति के करना चाहता था...

समीर ने आगे बढ़कर रश्मि के एक स्तन के उपर अपने दाँत रखे और उन्हे चुभलाने लगा..

''आआआआआआआआआयईयुईीईईईईईई .... ओह मेरे राजा .............. चूस लो इन्हे ............... उम्म्म्मममममम....''


अपनी माँ की सेक्सी आवाज़ सुनकर काव्या को भी कुछ -2 होने लगा....उसने भी अपने होंठ गीले किए और उन्हे समीर की चिकनी पीठ से चिपका दिया और उसे चूम लिया...

अब सिसकने की बारी समीर की थी...गर्म होंठों से जख्म सा बन गया था उसकी पीठ पर...

और अपना निप्पल चुसवाने के बाद तो रश्मि बावली सी हो गयी...उसने समीर के सिर को पकड़ कर फिर से अपने दूध पर लगाया और उसके मुँह के अंदर ठूस दिया...

''ओह.....डार्लिंग ................... कितना तड़पाते हो तुम ................ अब और ना तरसाओ...............डाल दो अपना ये लंबा लंड मेरे अंदर.....''

और रश्मि ने अपने आप को आज़ाद कराया और एक ही झटके मे समीर के उपर सवार हो गयी......और समीर कुछ समझ पता, उससे पहले ही रश्मि ने समीर के लंड को अपने हाथ में पकड़ा और अपनी चूत पर लगाकर उसे अंदर निगल लिया..

और सीटियाँ मारती हुई वो उसके लंड पर फिसलती चली गयी...

''आआआआआआआआआआआआहह ....... उम्म्म्ममममममममममममममम .........''

एक ही पल में ये सब हुआ, ना तो समीर को और ना ही काव्या को संभलने का मौका मिला...पहले तो काव्या सोच रही थी की जब उनकी चुदाई शुरू होगी तो वो चुपके से खिसक कर बेड से नीचे उतर जाएगी...और अंधेरे में छुपकर उनकी चुदाई को देखेगी...पर अपनी माँ की फुर्ती देखकर वो दंग ही रह गयी...उसे कुछ सोचने समझने का मौका ही नही मिला...उसने झट से अपनी आँखे बंद कर ली और दम साधे सोने का नाटक करने लगी...

और समीर के लंड को अंदर निगलने के बाद जैसे ही रश्मि ने उसके उपर छलांगे लगानी शुरू की, तभी उसकी नज़र समीर की बगल में सो रही काव्या पर पड़ी...और वो चिल्लाई : "ये....ये कौन है....''

अंधेरा काफ़ी थी, पर फिर भी कोई वहाँ लेटा हुआ है इसका एहसास तो मिल ही रहा था रश्मि को....

उसने थोड़ा आगे होकर और घूरकर उस सोते हुए सांये के चेहरे को गौर से देखा और दबी हुई आवाज़ में चिल्लाई : "ये....ये तो काव्या है..... हे भगवान....ये यहाँ कैसे आ गयी....''

समीर और काव्या की सिट्टी पिट्टी गम हो गयी , ऐसे रश्मि के हाथों पकडे जाने पर



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