Saturday, March 26, 2011

हिंदी सेक्सी कहानियाँ होली पे चुदाई --2

हिंदी सेक्सी कहानियाँ

होली पे चुदाई --2
गतान्क से आगे..........
"ऊहह भैया अब आराम से करो ना. सहेली तैयार है. मनाओ हम्दोनो से
होली. अब जल्दी नही रमेश भैया. सहेली ने दरवाज़ा बंद कर दिया
है. जितना चोद सको चोदो." मीना मस्त निगाहो से अपनी दबाई जा रही
चूचियों को देखती सीना उभारती बोली तो रमेश ने उसको चूमते हुवे
कहा, "तुम्हारी सहेली ने कभी नही दबवाया है?" "नही भैया."
"पहले बताया होता तो इसकी भी तुम्हारी तरह दबा दबाकर मज़ा देकर
बड़ा कर देते. लड़कियों की यही उमर होती है मज़ा लेने की. एक बार
चुद जाए तो बार बार इसको खोलकर कहतीं हैं फिर चोदो मेरे राजा."
रमेश मीना की चूत को कपड़े के ऊपर से टटोलता बोला. "ठीक है
भैया मैं तो चुदववँगी ही पर साथ ही इस बेचारी को भी आज
ही…" "ठीक है पहले तुमको फिर इसको. अपने लंड मैं इतनी ताक़त है
की तुम्हारे जैसी 4 को चोद्कर खुश कर दूँ. पर यह तो शर्मा रही
है. मीना अपनी सहेली को समझाओ कि अगर मज़ा लेना है तो तुम्हारे
साथ आए. एक साथ दो मैं हमको भी ज़्यादा मज़ा आएगा और तुम लोगो
को भी."
"ठीक है भैया आज मेरे साथ सुनीता को भी. अगर इसे मज़ा आया तो
फिर बुलाएगी. आजकल इसका घर खाली है." "तो फिर आज पूरी नंगी
होकर मज़ा लो. कसम मीना जितना मज़ा हमसे पओगि किसी और से नही
मिलेगा." "ओ भैया मुझे क्या बता रहे हो मैं तो जानती हूँ. राजा
कितनी बार तो तुम चोद चुके हो अपनी इस बहन को. पर भैया आजकल
घर मैं मेहमान आने की वजह से जगह नही. वो तो भला हो मेरी
प्यारी सहेली का जिसकी वजह से तुम आज अपनी बहन के साथ ही उसकी
कुँवारी सहेली की भी चोद सकोगे." भैया इस बेचारी को भी…" "कह
तो दिया. पर इसे समझा दो कि शरमाये नही. एक साथ नंगी होकर आओ
तो तुम दोनो को एक साथ मज़ा दे. दो एक सहेलियों को और बुला लो तो
चारो को चोद्कर मस्त ना कर दूँ तो मेरा नाम रमेश नही." सहेली
के भाई की बात से मेरा पारा चढ़ता जा रहा था.
"ओह्ह मीना तुम कपड़े उतारो देर मत करो. तुम्हारी सहेली शर्मा रही
है तो इसे कहो की कमरे से बाहर चली जाए तो तुमसे होली का मज़ा
लूँ." इतना कह रमेश ने मीना की चूचियों से हाथ हटा अपनी पॅंट
उतारनी शुरू की तो मैने सनसनाकर मीना की ओर देखा तो वह मेरे
पास आ बोली, "इतना शर्मा क्यों रही हो? बड़ा मज़ा आएगा आओ मेरे
साथ."
अब मीना की बात से इनकार करना मेरे बस मैं नही था. चूत चड्डी
मैं गीली हो गयी थी. चूचियों के निपल मीना के निपल की तरह
खड़े हो गये थे. रमेश ने जिस तरह से मुझे बाहर जाने को कहा
था उससे मैं घबरा गयी थी. तभी मीना मेरा हाथ पकड़ मुझे
रमेश के पास ले जाकर बोली, "मैं बिस्तर लगाती हूँ भैया जब तक
तुम सुनीता को अपना दिखा दो."
मैं सहेली के भाई के पास आ शरमाने लगी. तभी रमेश बेताबी के
साथ अपनी पॅंट उतार खड़े लाल रंग के लंबे लंड को सामने कर मेरे
गाल पर हाथ लगा मुझे जन्नत का मज़ा देता बोला, "देखो कितना मस्त
लंड है. इसी लंड से अपनी बहन को चोद्ता हूँ. तुम्हारी चूत इससे
चुदवाकर मस्त हो जाएगी." मैं पहली बार इतनी पास से किसी मस्ताये
खड़े लंड को देख रही थी. नंगे लंड को देखने के साथ मुझे अपने
आप अजीब सी मस्ती का अनुभव हुवा. उसका लंड एकदम खड़ा था. मीना ने
जैसा बताया था, उसके भाई का वैसा ही था. लंबा मोटा और गोरा.
पहली बार जवान फँफनाए लंड को देख रही थी. रमेश पॅंट
खिसका प्यार से लंड दिखा रहा था. मीना चुदवाने के लिए नीचे
ज़मीन पर बिस्तर लगा रही थी. गुलाबी रंग के सूपदे वाले गोरे लंड
को करीब से देख मेरी कुँवारी चूत मैं चुदासी का कीड़ा बिलबिलाने
लगा और शर्ट मे दोनो अनार ज़ोर ज़ोर से धड़कने लगे.
लंड को मेरे सामने नंगा कर रमेश ने फ़ौरन शर्ट के उपर से दोनो
चूचियों को पकड़कर मसला. मसलवाकर मैं मज़े से भर गयी. सच
बड़ा ही मज़ा था. चूचियों को उसके हाथ मैं दे मैने उसकी ओर
देखा तो रमेश सीतकारी ले बोला, "बड़ा मज़ा आएगा. जवान हो गयी हो.
मीना के साथ आज इस पिचकारी से रंग खेलो. अगर मज़ा ना आता तो
मेरी बहन इतना बेचैन क्यों होती चुदवाने के लिए." एक हाथ को
लपलपते नंगे लंड पर लगा दूसरे हाथ की चूची को कसकर दबाते
कहा तो मैं होली की रंगिनी मैं डूबने की उतावली हो फिर उसके लंड को
देखने लगी. उसके नंगे लंड को देखते हुवे चूचियाँ दबवाने मैं
ग़ज़ब का मज़ा आ रहा था. चूचियाँ टटोलवाने मैं चड्डी के अंदर
गदराई चूत के मुँह मे अपने आप फैलाव हो रहा था. पहले केवल सुना
था पर करवाने मैं तो बड़ा मज़ा था.
तभी चूची को और ज़ोर ज़ोर से दबा हाथ के लंड को उभारते
बोला, "ऐसा जल्दी पाओगि नही. देखना आज तुम्हारी सहेली मीना को कैसे
चोद्ता हूँ. कभी मज़ा नही लिया तुमने इसीलिए शर्मा रही हो. तुमको
भी बड़ा मज़ा आएगा हमसे चुदवाने मे." रमेश चूची पर हाथ
लगाते अपने मस्त लंड को दिखाता जो होली की बहार की बाते कर रहा
था उससे हमें ग़ज़ब का मज़ा मिल रहा था. मस्ती के साथ अपने आप
शरम ख़तम हो रही थी. अब इनकार करना मेरे बस मैं नही था. अब
खुद शर्ट के बटन खोल दोनो गदराई चूचियों को उसके हाथ मैं
दे देने को बेचैन थी. बड़ा मज़ा आ रहा था. मेरी नज़रे हिनहिनाते
लंड पर जमी थी.

तभी मीना ज़मीन पर बिस्तर लगा पास आई और रमेश के लंड को हाथ
मैं पकड़ मेरी मसली जा रही चूचियों को देखती बोली, "भैया
हमसे छ्होटी हैं ना?" "हां मीना पर चुडवाएगी तो तुम्हारी तरह
इसको भी प्यार से दूँगा पर अभी तो तुम्हारी सहेली शर्मा रही है.
तुम तो जानती हो कि शरमाने वाली को मज़ा नही आता." और रमेश ने
मेरी चूचियों को मसलना बंद कर मीना की चूचियों को पकड़ा.
हाथ हट ते ही मज़ा किरकिरा हुवा. मीना अपने भाई के लंड को प्यार से
पकड़े थी. मैं बेताबी के साथ बोली, "हाए कहाँ शर्मा रही हूँ."
"नही शरमाएगी भैया इसको भी चोद्कर मज़ा देना." मीना ने कहा तो
रमेश बोला, "चोदने को हम तुम दोनो को तैय्यार हैं. घर खाली है
जब कहोगी यहाँ आकर चोद देंगे पर आज तुम दोनो को आपस मैं मज़ा
लेना भी सिखाएँगे." और एक हाथ मेरी चूची पर लगा दूसरे हाथ
से मीना की चूची को पकड़ लंड को मीना के हाथ मे दे एक साथ
हम दोनो की दबाने लगा. मेरा खोया मज़ा चूचियों पर हाथ आते ही
वापस मिल गया. तभी मीना उसके खड़े लंड पर हाथ फेर हमको
दिखाती बोली, "शरमाओ नही सुनीता मैं तो आज भैया से खूब
चुदवाउन्गि." अगर तुम शरमाओगी तो तुम्हे मज़ा नही मिलेगा
"नही शर्माउन्गि." "तो लो पाकड़ो भैया का और मज़ा लो." और मीना अपने
भाई के लंड को मेरे हाथ मैं पकड़ा खुद बगल हटकर दबवाने लगी.
रमेश के लंड को हाथ मैं लिया तो बदन का रोम रोम खड़ा हो
गया. सचमुच लंड पकड़ने मैं ग़ज़ब का मज़ा था. तभी रमेश
बोला, "हाए मीना बड़ा मज़ा आ रहा है तुम्हारी सहेली के
साथ." "हां भैया नया माल है ना." "कहो तो इसका एक पानी निकाल
दे." और मीना की चूचियों को छ्चोड़कर एक साथ मेरी दोनो चूचियाँ
दबाता लंड को मेरे हाथ मे कड़ा कर खड़ा हुवा.
तभी मीना मुझसे बोली, "सुनीता रानी इसका पानी निकाल दो तब चुदवाने
मैं मज़ा आएगा. अब हमलोग रमेश भैया की जवानी चूस्कर रहेंगे.
हाए तुम्हारे अनार मीस्थे भैया मस्त हो गये हैं." रमेश आँखे
बंदकर तमतमाए चेहरे के साथ मेरी चूचियों को शर्ट के ऊपर
से इतनी ज़ोर ज़ोर से मीस रहा था कि जैसे शर्ट फाड़ देगा. मेरी चूत
सनसना रही थी और लंड पकड़कर मीसवाने मैं ग़ज़ब का मज़ा मिल
रहा था. अब तो मीना से पहले उसकी पिचकारी से रंग खेलने का मंन
कर रहा था. रमेश ने लंड मेरी चड्डी से चिपका दिया था. अब
रमेश धीरे धीरे दबा रहा था. चड्डी से लगा मोटा गरम लंड
जन्नत का मज़ा दे रहा था. उसने एक तरह से मुझे अपने ऊपर लाद
लिया था. मीना धीरे से अपनी चड्डी खिसककर नंगी हो रही थी. मीना
ने अपनी चूत नंगी कर मस्ती मैं चार चाँद लगा दिया था. अब मैं
रमेश की गोद मे थी और ग़ज़ब का मज़ा आ रहा था.
मीना की चूत साँवली और फाँक दबे से थे पर मेरी फाँक से उसकी
फाँक बड़े थे. मैं सोच रही थी कि मीना चूत नंगी करके क्या
करेगी. मैं सहेली की नंगी चूत को प्यार से देखती अपने दोनो
अमरूदु को मीस्वा रही थी.
तभी मीना आगे आई और चूत को उचकाती बोली, "देखो सुनीता इसी
तरह से तुमको भी चटाना होगा." "ठीक है." फिर वह अपनी चूत को
अपने भाई के मुँह के पास ला तिर्छि होकर बोली, "ले बहन्चोद चाट
अपनी बहन की चूत." रमेश एक साथ हम दोनो सहेलियों का मज़ा लेने
लगा. मुझे सहेली का अपने ही भाई को बहन्चोद कहना बड़ा अच्छा
लगा. मीना बड़े प्यार से उंगली से अपनी साँवली सलोनी चूत की दरार
फैला फैलाकर चटवा रही थी. सहेली का चेहरा बता रहा था कि
चूत चटवाने मैं उसे बड़ा मज़ा मिल रहा था.
मीना की चूत को जीभ से चाटते ही रमेश का लंड मेरी चड्डी पर
चोट करने लगा. मैने मीना को चत्वाते देखा तो मेरा मॅन भी
चाटने को करने लगा. तभी उसने मेरे निपल को मीसा तो मैं मज़े से
भर उसकी गोद मैं उचकी तो वह अपनी बहन की चूत से जीभ हटा
मेरी चूचियों को दबा मुझसे बोला, "हाए अभी नही झारा सुनीता तुम
अपनी चताओ." "चॅटो." मैं मस्ती से भर मीना की तरह चूत
चटवाने को तैय्यार हुई.
तभी मीना अपनी चाती गयी चूत को उंगली से खोलकर देखती
बोली, "हाए रमेश भैया मेरा पानी तो निकल गया." "तुम्हारी सहेली
की नयी चूत चाटूँगा तो मेरा पानी निकलेगा." और मेरी कमर मैं
हाथ से दबाकर उठाया. अब मेरी गोरी गोरी चूचियाँ एकदम लाल थी.
तभी मीना मुझे बाँहो मैं भर अपने बदन से चिपकाती
बोली, "चटवाने मे चुदवाने से ज़्यादा मज़ा आता है. चताओ." "अच्छा
मीना चटवा दो अपने भैया से." "भैया सहेली की चॅटो."
"मैं तो तैय्यार हूँ. कहो मस्ती से चाताए. इसकी चाटते मेरा
निकलेगा. हाए इसकी तो खूब गोरी गोरी होगी." और बेताबी के साथ लंड
उच्छालते हुवे पोज़ बदला. अब वह बिस्तर पर पेट के बल लेटा था. उसका
लंड गद्दे मैं दबा था और चूतड़ ऊपर था. तभी मीना ने
कहा, "अपनी चटवाउ क्या?" "हां मीना अपनी चटवओ तो सुनीता को और
मज़ा आएगा."
तब मीना ने हमको रमेश के सामने डॉगी स्टाइल मैं होने को कहा. मैं
जन्नत की सैर कर रही थी. मज़ा पाकर तड़प गयी थी. मेरी कोशिश
थी कि मैं मीना से ज़्यादा मज़ा लूँ. उसकी बात सुन मैने
कहा, "चड्डी उतार दूँ मीना?" "तुम अपना चूतड़ सामने करो, भैया
चड्डी हटाकर चाट लेंगे. अभी तो यह हमलोगो का ब्रेकफास्ट है.
केवल चूत मैं लंड घुस्वकार कच कच चुदवाने मे मज़ा नही
आता. हमलोग अभी कुँवारी लौंडीयाँ हैं. असली मज़ा तो इन्ही सब मे
आता है. जैसे बताया है वैसे करो."
"अच्छा." और मैं रमेश के सामने चौपाया(डॉगी पोज़िशन) मैं आई
तो रमेश ने पीछे से मेरा स्कर्ट उठाकर मेरे चूतड़ पर हाथ
फेरा तो हमको बड़ा मज़ा आया. मेरी चूत इस पोज़ मे चड्डी के
नीचे कसी थी. मीना ने खड़े खड़े चटाइया था पर मुझे निहुरकर
चाटने को कह रही थी. अभी रमेश चूतड़ पर हाथ फेर रहा था.
मीना ने मेरे मुँह के सामने अपनी चूत की और बोली, "सुनीता पेट को
गद्दे मैं दबाकर पीछे से चूतड़ उभार दो. तुम्हारी भैया
चाटेंगे तुम मेरी चूत चॅटो और हाथ से मेरी चूचियाँ दबाओ फिर
देखना कितना मज़ा आता है."
इस पोज़ मे मीना की साँवली चूत पूरी तरह से दिख रही थी. उसकी
चूत मेरी चूत से बड़ी थी. दरार खुली हुई थी. मीना की चूत
देख मैने सोचा कि मेरा तो सब कुच्छ इससे अच्छा है. अगर मेरे साथ
रमेश को ज़्यादा मज़ा आया तो वह मीना से ज़्यादा हमको प्यार करेगा.
मैने चूचियों को गद्दे मे दबा पीछे से चूतड़ उभारा और मुँह
को मीना की चूत के पास ला प्यार से जीभ को उसकी चूत पर चलाया
तो मीना अपनी चूत को हाथ से खोलती बोली, "चूत के अंदर तक जीभ
डालकर तब तक चाटना जब तक भैया तुम्हारी चाटते रहें. मज़ा लेना
सीख लो तभी जवानी का मज़ा पाओगि."
मीना की चूत पर जीभ लगाने मे सचमुच हमको काफ़ी मज़ा आया.
तभी रमेश नीचे कसी चड्डी की चूत पर उंगली चला हमे मज़े के
सागर मे ले जाते बोला, "तुम्हारी चड्डी बड़ी कसी है. फाड़ कर
चाट लें?" "हाए फाड़ दीजिए ना." मैं मीना की झारी चूत के
फैले दरार मे जीभ चलाती दोनो हाथों से मर्द की तरह उसके
गदराए अनारो को दबाती वासना से भर बोली. तभी रमेश ने दोनो
हाथों को चड्डी के इधर उधर लगा ज़ोर्से खींचा तो मेरी पुरानी
चड्डी एक झटके मे ही छार्र से फॅट गयी. उसे पूरी तरह अलग कर
मेरी गदराई हसीन गुलाबी चूत को नंगी कर उंगली को दरार मे
चलाता बोला, "ज़रा सा चूतड़ उठाओ."
नंगी चूत को रमेश की उंगलियों से सहलवाने मे इतना मज़ा आया कि
मेरे अंदर जो थोड़ी बहुत झिझक थी, वह भी ख़तम हो गयी. मैने
चूतड़ उठाया तो वह बोला, "ज़रा मीना की चूत चाटना और चूची
दबाना बंद करो." मैने चूची से हाथ अलग कर चूत से जीभ
निकाली तो उसने मेरी चूत को उंगलकी से कुरेदते पूछा, "अब ज़्यादा
मज़ा आ रहा है कि मीना की चाटते हुवे?" "जी अब कम आ रहा
है." "ठीक है तुम मीना की चॅटो."
मैं फिर मीना की चूत चाटते हुवे उसकी चूचियाँ दबाने लगी तो
रमेश से नंगी चूत सहलवाने मे ग़ज़ब का मज़ा आने लगा. अभी
रमेश ने मेरी चाटना शुरू नही किया था पर उंगली से ही हल्का पानी
बाहर आया तो वह मेरी फटी चड्डी से मेरी चूत को पोछते पूरी
चूत को सहलाता अपनी बहन से बोला, "मीना इसकी अभी चुदी नही
है." "हां भैया मेरी सहेली को तुम ही चोद्कर जवान करना. अब तो
शर्मा भी नही रही है." "ठीक है रानी इसको भी तेरी तरह जवान
कर देंगे. वैसे चोदने लायक पूरी गदराई चूत है. क्यूँ सुनीता
कितने साल की हो?" "जी चौदह की." "बड़ी मस्त हो बोलो इसका मज़ा
हमसे लोगि या शादी के बाद अपने पति से?"
भाई लोगो आगे की कहानी अगले पार्ट मे आपका दोस्त राज शर्मा
क्रमशः.........

Holi pe Chudai --2
gataank se aage..........
"oohh bhayya ab aram se karo na. Saheli taiyyar hai. Manao hamdono se
holi. Ab jaldi nahi Ramesh bhayya. Saheli ne darwaza band kar diya
hai. Jitna chod sako chodo." Mina mast nigaho se apni dabayi ja rahi
choochiyon ko dekhti sina ubharti boli tu Ramesh ne usko chumte huwe
kaha, "tumhari saheli ne kabhi nahi dabwaya hai?" "nahi bhayya."
"pahle bataya hota tu iski bhi tumhari tarah daba dabakar maza dekar
bada kar dete. Ladkiyon ki yahi umar hoti hai maza lene ki. Ek baar
chud jaye tu baar baar isko kholkar kahtin hain fir chodo mere raja."
Ramesh Mina ki choot ko kapde ke oopar se tatolta bola. "theek hai
bhayya main tu chudwaongi hi par saath hi is bechari ko bhi aaj
hi…" "theek hai pahle tumko fir isko. Apne lund main itni takat hai
ki tumhare jaisi 4 ko chodkar khush kar doon. Par yah tu Sharma rahi
hai. Mina apni saheli ko samjhao ki agar maza lena hai tu tumhare
saath aye. Ek saath do main hamko bhi zyada maza ayega aur tum logo
ko bhi."
"theek hai bhayya aaj mere saath Sunita ko bhi. Agar ise maza aaya tu
fir bulayegi. Aajkal iska ghar khali hai." "tu fir aaj poori nangi
hokar maza lo. Kasam Mina jitna maza hamse paogi kisi aur se nahi
milega." "ohh bhayya mujhe kya bata rahe ho main tu janti hoon. Raja
kitni baar tu tum chod chuke ho apni is bahan ko. Par bhayya aajkal
ghar main mehmaan aane ki wajah se jagah nahi. Wo tu bhala ho meri
pyari saheli ka jiski wajah se tum aaj apni bahan ke saath hi uski
kunwari saheli ki bhi chod sakoge." Bhayya is bechari ko bhi…" "kah
tu diya. Par ise samjha do ki sharmaye nahi. Ek saath nangi hokar aao
tu tum dono ko ek saath maza de. Do ek saheliyon ko aur bula lo tu
charo ko chodkar mast na kar doon tu mera naam Ramesh nahi." Saheli
ke bhai ki baat se mera para charhta ja raha tha.
"ohh Mina tum kapde utaro der mat karo. Tumhari saheli Sharma rahi
hai tu ise kaho ki kamre se bahar chali jaye tu tumse holi ka maza
loon." Itna kah Ramesh ne Mina ki choochiyon se haath hata apni pant
utarni shuru ki tu maine sansanakar Mina ki oor dekha tu wah mere
paas aa boli, "itna Sharma kyon rahi ho? Bada maza ayega aao mere
saath."
Ab Mina ki baat se inkar karna mere bas main nahi tha. Choot chaddi
main gili ho gayi thi. Choochiyon ke nipple Mina ke nipple ki tarah
khade ho gaye the. Ramesh ne jis tarah se mujhe bahar jane ko kaha
tha usse main ghabra gayi thi. Tabhi Mina mera haath pakad mujhe
Ramesh ke paas le jakar boli, "main bistar lagati hoon bhayya jab tak
tum Sunita ko apna dikha do."
Main saheli ke bhai ke paas aa sharmane lagi. Tabhi Ramesh betabi ke
saath apni pant utar khade laal rang ke lambe lund ko saamne kar mere
gaal par haath laga mujhe jannat ka maza deta bola, "dekho kitna mast
lund hai. Isi lunb se apni bahan ko chodta hoon. Tumhari choot isse
chudwakar mast ho jayegi." Main pahli baar itni paas se kisi mastaye
khade lund ko dekh rahi thi. Nange lund ko dekhne ke saath mujhe apne
aap ajib si masti ka anubhaw huwa. Uska lund ekdam khada tha. Mina ne
jaisa bataya tha, uske bhai ka waisa hi tha. Lamba mota aur gora.
Pahli baar jawan phanphanaye lund ko dekh rahi thi. Ramesh pant
khiska pyaar se lund dikha raha tha. Mina chudwane ke liye niche
zameen par bistar laga rahi thi. Gulabi rang ke supade wale gore lund
ko karib se dekh meri kunwari choot main chudasi ka kida bilbilane
laga aur shirt ke dono anaar zor zor se dhadakne lage.
Lund ko mere samne nanga kar Ramesh ne fauran shirt ki dono
choochiyon ko pakadkar masla. Masalwate main maze se bhar gayi. Sach
bada hi maza tha. Choochiyon ko uske haath main de main uski oor
dekha tu Ramesh sitkari le bola, "bada maza ayega. Jawan ho gayi ho.
Mina ke saath aaj is pichkari se rang khelo. Agar maza na aata tu
meri bahan itna bechai kyon hoti chudwane ke liye." Ek haath ko
laplapate nange lund par laga dusre haath ki choochi ko kaskar dabate
kaha tu main holi ki rangini main dubne ki utawli ho fir uske lund ko
dekhne lagi. Uske nange lund ko dekhte huwe choochiyan dabwane main
gazab ka maza aa raha tha. Choochiyan tatolwane main chaddi ki
gadrayi choot ke munh main apne phailaw ho raha tha. Pahle kewal suna
tha par karwane main tu bada maza tha.
Tabhi choochi ko aur zor zor se daba haath ke lund ko ubharte
bola, "aisa jaldi paogi nahi. Dekhna aaj tumhari saheli Mina ko kaise
chodta hoon. Kabhi maza nahi liya tumne isiliye Sharma rahi ho. Tumko
bhi bada maza aayega hamse chudwane main." Ramesh choochi par haath
lagate apne mast lund ko dikhata jo holi ki bahar ki baate kar raha
tha usse hamen gazab ka maza mil raha tha. Masti ke saath apne app
sharam khatam ho rahi thi. Ab inkar karna mere bas main nahi tha. Ab
khud shirt ke button khol dono gadrayi choochiyon ko uske haath main
de dene ko bechain thi. Bada maza aa raha tha. Meri nazre hinhinate
lund por jami thi.

Tabhi Mina zamin par bistar laga paas ayi aur Ramesh ke lund ko haath
main pakad meri masli ja rahi choochiyon ko dekhti boli, "bhayya
hamse chhoti hain na?" "haan Mina par chudwayegi tu tumhari tarah
isko bhi pyar se doonga par abhi tu tumhari saheli Sharma rahi hai.
Tum tu janti ho ki sharmane wali ko maza nahi aata." Aur Ramesh ne
meri choochiyon ko masalna band kar Mina ki choochiyon ko pakda.
Haath hat te hi maza kirkira huwa. Mina apne bhai ke lund ko pyar se
pakde thi. Main betabi ke saath boli, "haye kahan Sharma rahi hoon."
"nahi sharmayegi bhayya isko bhi chodkar maza dena." Mina ne kaha tu
Ramesh bola, "chodne ko ham tum dono ko taiyyar hain. Ghar khali hai
jab kahogi yahan aakar chod denge par aaj tum dono ko aapas main maza
lena bhi sikhayenge." Aur ek haath meri choochi par laga dusre haath
se Mina ki choochi ko pakad lund ko Mina ke haath main de ek saath
ham dono ki dabane laga. Mera khoya maza choochiyon par haath aate hi
wapas mil gaya. Tabhi Mina uske khade lund par haath pher hamko
dikhati boli, "sharmao nahi Sunita main tu aaj bhayya se khoob
chudwaongi."
"Nahi sharmaungi." "tu lo pakdo bhayya ka aur maza lo." Aur Mina apne
bhai ke lund ko mere haath main pakda khud bagal hatkar dabwane lagi.
Ramesh ke lund ko haath main liya tu badan ka roan roan khada ho
gaya. Sachmuch lund pakadne main gazab ka maza tha. Tabhi Ramesh
bola, "haye Mina bada maza aa raha hai tumhari saheli ke
saath." "haan bhayya naya maal hai na." "kaho tu iska ek pani nikal
de." Aur Mina ke choochiyon ko chhodkar ek saath meri dono choochiyan
dabata lund ko mere haath main kada kar khada huwa.
Tabhi Mina mujhse boli, "Sunita rani iska pani nikal do tab chudwane
main maza aayega. Ab hamlog Ramesh bhayya ki jawani chooskar rahenge.
Haye tumhare anaar meeste bhayya mast ho gaye hain." Ramesh aankhe
bandkar tamtamaye chehre ke saath meri choochiyon ko shirt ke oopar
se itni zor zor se mees raha tha ki jaise shirt phad dega. Meri choot
sansana rahi thi aur lund pakadkar miswane main gazab ka maza mil
raha tha. Ab tu Mina se pahle uski pichkari se rang khelne ka mann
kar raha tha. Ramesh ne lund meri chaddi se chipka diya tha. Ab
Ramesh dhire dhire daba raha tha. Chaddi se laga mota garam lund
jannat ka maza de raha tha. Usne ek tarah se mujhe apne oopar laad
liya tha. Mina dhire se apni chaddi khiskakar nangi ho rahi thi. Mina
ne apni choot nangi kar masti main char chand laga diya tha. Ab main
Ramesh ki god main thi aur gazab ka maza aa raha tha.
Mina ki choot sanwali aur phaank dabe se the par meri phaank se uski
phaank bade the. Main soch rahi thi ki Mina choot nangi karke kya
karegi. Main saheli ki nangi choot ko pyar se dekhti apne dono
amroodu ko miswa rahi thi.
Tabhi Mina aage aayi aur choot ko uchkati boli, "dekho Sunita isi
tarah se tumko bhi chatana hoga." "theek hai." Fir wah apni choot ko
apne bhai ke munh ke paas laa tirchhi hokar boli, "le bahanchod chaat
apni bahan ki choot." Ramesh ek saath ham dono saheliyon ka maza lene
laga. Mujhe saheli ki apne hi bhai ko bahanchod kahna bada achha
laga. Mina bade pyar se ungli se apni sanwali saloni choot ke daraar
phaila phailakar chatwa rahi thi. Saheli ka chehra bata raha tha ki
choot chatwane main use bada maza mil raha tha.
Mina ki choot ko jeebh se chatate hi Ramesh ka lund meri chaddi par
chot karne laga. Maine Mina ko chatwate dekha tu mera mann bhi
chatane ko karne laga. Tabhi usne mere nipple ko misa tu main maze se
bhar uski god main uchki tu wah apni bahan ki choot se jeebh hata
meri choochiyon ko daba mujhse bola, "haye abhi nahi jhara Sunita tum
apni chatao." "chato." Main masti se bhar Mina ki tarah choot
chatwane ko taiyyar huyi.
Tabhi Mina apni chati gayi choot ko ungli se kholkar dekhti
boli, "haye Ramesh bhayya mera pani tu nikal gaya." "tumhari saheli
ki nayi choot chatunga tu mera pani niklega." Aur meri kamar main
haath se dabakar uthaya. Ab meri gori gori choochiyan ekdam laal thi.
Tabhi Mina mujhe baanho main bhar apne badan se chipkati
boli, "chatwane main chudwane se zyada maza aata hai. Chatao." "achha
Mina chatwa do apne bhayya se." "bhayya saheli ki chato."
"main tu taiyyar hoon. Kaho masti se chataye. Iski chatte mera
niklega. Haye iski tu khoob gori gori hogi." Aur betabi ke saath lund
uchhalte huwe pose badla. Ab wah bistar par pet ke bal leta tha. Uska
lund gadde main daba tha aur chutad oopar tha. Tabhi Mina ne
kaha, "apni chatwaun kya?" "haan Mina apni chatwao tu Sunita ko aur
maza aayega."
Tab Mina ne hamko Ramesh ke samne doggy style main hone ko kaha. Main
jannat ki sair kar rahi thi. Maza pakar tadap gayi thi. Meri koshish
thi ki main Mina se zyada maza loon. Uski baat sun maine
kaha, "chaddi utar doon Mina?" "tum apna chutad samne karo, bhayya
chaddi hatakar chaat lenge. Abhi tu yah hamlogo ka breakfast hai.
Kewal choot main lund ghuswakar kach kach chudwane main maza nahi
aata. Hamlog abhi kunwari laundiyan hain. Asli maza tu inhi sab main
aata hai. Jaise bataya hai waise karo."
"achha." Aur main Ramesh ke samne chaupaya(doggy position) main aayi
tu Ramesh ne peechhe se mera skirt uthakar mere chutad par haath
phera tu hamko bada maza aaya. Meri choot is pose main chaddi ke
niche kasi thi. Mina ne khade khade chataya tha par mujhe nihurakar
chatane ko kah rahi thi. Abhi Ramesh chutad par haath pher raha tha.
Mina ne mere munh ke samne apni choot ki aur boli, "Sunita pet ko
gadde main dabakar peechhe se chutad ubhar do. Tumhari bhayya
chatenge tum meri choot chato aur haath se meri choochiyan dabao fir
dekhna kitna maza aata hai."
Is pose main Mina ki sanwali choot poori tarah se dikh rahi thi. Uski
choot meri choot se badi thi. Daraar khuli huyi thi. Mina ki choot
dekh maine socha ki mera tu sab kuchh isse achha hai. Agar mere saath
Ramesh ko zyada maza aaya tu wah Mina se zyada hamko pyar karega.
Maine choochiyon ko gadde main daba peechhe se chutad ubhara aur munh
ko Mina ki choot ke paas la pyar se jeebh ko uski choot par chalaya
tu Mina apni choot ko haath se kholti boli, "choot ke andar tak jeebh
dalkar tab tak chatna jab tak bhayya tumhari chatte rahen. Maza lena
seekh lo tabhi jawani ka maza paogi."
Mina ki choot par jeebh lagane main sachmuch hamko kafi maza aaya.
Tabhi Ramesh niche kasi chaddi ki choot par ungli chala hame maze ke
saagar main le jate bola, "tumhari chaddi badi kasi hai. Phadkar
chaat len?" "haye phaad dijiye na." Main Mina ki jhari choot ke
phaile daraar main jeebh chalati dono haathon se mard ki tarah uske
gadraye anaaro ko dabati wasna se bhar boli. Tabhi Ramesh ne dono
haathon ko chaddi ke idhar udhar laga zorse khincha tu meri purani
chaddi ek jhatke main hi charr se phat gayi. Use poori tarah alag kar
meri gadrayi hasin gulabi choot ko nangi kar ungli ko daraar main
chalata bola, "zara sa chutad uthao."
Nangi choot ko Ramesh ki ungliyon se sahlawane main itna maza aaya ki
mere andar jo thodi bahut jhijhak thi, wah bhi khatam ho gayi. Maine
chutad uthaya tu wah bola, "zara Mina ki choot chatna aur choochi
dabana band karo." Main choochi se haath alag kar choot se jeebh
nikali tu usne meri choot ko unglki se kuredte poochha, "ab zyada
maza aa raha hai ki Mina ki chatte huwe?" "ji ab kam aa raha
hai." "theek hai tum Mina ki chato."
Main fir Mina ki choot chatte huwe uski choochiyan dabane lagi tu
Ramesh se nangi choot sahlawane main gazab ka maza aane laga. Abhi
Ramesh ne meri chatna shuru nahi kiya tha par ungli se hi halka pani
bahar aaya tu wah meri phati chaddi se meri choot ko pochhte poori
choot ko sahlata apni bahan se bola, "Mina iski abhi chudi nahi
hai." "haan bhayya meri saheli ko tum hi chodkar jawan karna. Ab tu
Sharma bhi nahi rahi hai." "theek hai rani isko bhi teri tarah jawan
kar denge. Waise chodne layak poori gadrayi choot hai. Kyun Sunita
kitne saal ki ho?" "ji chaudah ki." "badi mast ho bolo iska maza
hamse logi ya shadi ke baad apne pati se?"
kramashah.........

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