Wednesday, March 9, 2011

हिंदी सेक्सी कहानियाँ पड़ोस वाली भाभी की मस्त चुदाई

हिंदी सेक्सी कहानियाँ
पड़ोस वाली भाभी की  मस्त चुदाई

वैसे मुझे हमेशा ही शादी शुदा औरतें ज्यादा आकर्षित करती है. और फ़िर अगर
वो सेक्सी हो तो. मै उसके बदन को कब नंगा कर के उसे मेरी बांहों में
लूँगा इसका इंतज़ार करने लगता हूँ. खैर मेरे बारे में थोड़ा बता दूँ. मै
४० साल का हूँ शादीशुदा हूँ.. मेरी ऊँचाई ५ फ़ुट ८ इंच है. बदन कसरती है.
मै मुंबई के पास ठाणे में एक हाऊसिंग सोसाइटी में रहता हूँ. ये सब इसी
सोसाइटी में रहने वाली एक पडोसन के साथ हुआ. उसका नाम है निशा.. मै पहले
दिन उससे मिला जब वो लिफ्ट बंद होने के कारण सीढियों से ऊपर आ रही थी.
साथ में उसका बेटा भी था. .वो दौड़ कर आ रहा था और मै नीचे उतर रहा था.
वो मुझसे टकराया.. और गिरा मैंने उसे उठाया.. तब नीचे से वो ऊपर आती हुई
दिखी. उफ़. उससे पहले उसके सीने के उभर ऊपर आ रहे थे.उसके सीने के उभार
उसकी कमर.. सभी कुछ एक पुरूष को विचलित करने वाले थे. उसकी ऊँचाई के
हिसाब से वो काफी बड़े लग रहे थे. ब्लाउज में कसे हुए और बाहर को निकलते
हुए. हालाँकि वो छुपे हुए थे. लेकिन ऐसा लगा जैसे वो बाहर निकलने को
बेताब है. . हाँ निशा की उमर होगी 32 और ऊँचाई 5 फीट १इन्च या उससे कम.
उसकी टाइट साडी में ऐसा लगा जैसे सिर्फ़ चुंचिया ही है. वैसे मैंने इसके
पहले उसे ध्यान से देखा ही नही था. "ओह्ह पप्पू.. कब से कह रही हूँ धीरे
चलो. देखो लग गया ना.." "पप्पू बेटा मम्मी की बात सूना करो". मैंने पप्पू
को उठाते हुए कहा. हालाँकि उसे कही चोट नही लगी थी. "देखिये ना बिल्कुल
नही सुनता है" "कोई बात नही.. बच्चा है " मैं ये कहते हुए उसके बाजू से
नीचे उतरा.. उसके बदन की वो खुशबू.. मेरा तो पूरा बदन सनसना गया मैंने
देखा उसकी आंखे प्यासी है.. उसे मैंने ऊपर से नीचे देखा.. साडी उसकी नाभि
से नीचे बंधी थी. और सपाट पेट.. गहरी नाभि.. चिकना बदन. दिल में आया उसे
अभी पकड़ लूँ.. लेकिन पहचान तो हुई नही थी. मैंने पूंछा "आप किस फ्लोर पर
रहती है." . उसने अपने लड़के का हाथ पकड़ा और रुक कर कहा "जी फोर्थ फ्लोर
में" . मैंने कहा "आपको पहली बार देखा है." फ़िर उसके बेटे से पूंछा
"क्या नाम है तुम्हारा ?" उसने तोतली जुबान में कहा "रा.जी..व्.." मैंने
उसकी माँ से पूंछा किस क्लास में है? उसने कहा अभी के जी-१ में है.""मेरा
लड़का भी तो केजी1 में है". "अच्छा बबलू आपका बेटा है.. वो तो इसका दोस्त
है.. शाम को दोनों गार्डन में खेलते है.. आपकी पत्नी के साथ आता है.. आप
सेकंड फ्लोर में रहते है ना?" "मैंने कहा हाँ." "आपकी पत्नी से मेरी
पहचान है.. मै उनसे मूविस की सीडी ले जाती हूँ. आपका कलेक्शन अच्छा है."
मैंने थँक्स कहा और बच्चे को पुचकारते हुए पूंछा "आप कहाँ की रहने वाली
है?" उसने कहा वैसे तो मै अहमदाबाद गुजरात की हूँ लेकिन मेरे पति पिछले
साल मुंबई में रहने आ गए है. और अब वो अमेरिका गए है पाँच साल के लिए.
इसलिए बच्चे की पढाई के लिए मुझे यही रहना है.. आपकी पत्नी से दोस्ती
होने के बाद समय कट जाता है" हम लोग सीढियों पर ही बात कर रहे थे. मैंने
कहा कभी घर आईये तो अच्छे से बात होगी." उसने कहा मै तो अति हूँ लेकिन उस
वक्त आप नही होते घर में" मैंने कहा जी मै शनिवार और रविवार को रहता हूँ
और शाम को ६ बजे के बाद." उसने कहा ठीक है कोशिश करुँगी की अब आपके घर आई
तो आपसे मुलाकात हो जाए." मैंने कहा ठीक है अब चलता हूँ और ये कह कर मै
नीचे उतर गया. लेकिन मेरे दिल में उसकी चुन्चिया, पतली कमर और चिकना पेट
देख कर हलचल मच गई थी उसका पति पाँच साल तक उससे दूर रहेगा और ये कैसे
बिना चुदाई के रहेगी? मेरे शैतानी दिमाग में उसे चोदने का ख्याल जोर
पकड़ने लगा. लेकिन उसे कैसे मेरे नीचे लाऊ ये सोच नही पा रहा था. मेरी
पत्नी से दोस्ती है.. मैंने कुछ किया और उसने मेरी पत्नी से कह दिया तो
मुसीबत खड़ी हो जायेगी. बाद में मैंने मेरी पत्नी से आज की बात कही..
उसने कहा हाँ वो जानती है उसे उसका नाम निशा शाह है और अभी वो अपनी सास
और बेटे के साथ रहती है. उसका पति अमेरिका गया है. और वो मेरे घर अक्सर
आती है पिक्चर की सीडी लेने. उस दिन के बाद मै रास्ता देखने लगा की कब वो
मेरे घर आयेगी जब मै घर पर रहूँगा.. अचानक एक दिन मै मेरे बेटे को स्कूल
बस में छोड़ने नीचे जा रहा था सुबह तो देखा की लाईट ना होने के कारण
लिफ्ट बंद है.. वैसे मै लिफ्ट से बहुत कम जाता हूँ. जैसे ही मै बाहर
निकला तो उसे मैंने ऊपर से नीचे आते देखा. उसने मुझे देखा तो कहा की उसकी
तबियत ठीक नही है इसलिए अगर मै उसके लड़के को भी छोड़ दूँ तो अच्छा
रहेगा. मैंने कहा ठीक है.. और मै दोनों बच्चों को ले कर नीचे उतर गया.
इसके बाद हमारी मुलाकात होने लगी. मै हर बार उसकी तनी हुई चुन्चियों को
देख कर जोश में आ जाता था. हम लोग कई बार लिफ्ट में भी मिलते थे (मै
जानबूझकर सुबह लिफ्ट से जाने लगा ताकि लड़के को छोड़ते जाते वक्त उससे
मुलाकात हो.) फ़िर वो मेरे रहते ही सीडी लेने मेरे घर आने लगी. मेरी
पत्नी मुझ से कहती आप ही निकाल कर दे दो.. इस तरह एक लंबा वक्त निकल गया.
मैंने उससे पूंछा की उसे कैसी मूवी पसंद है.. उसने कहा रोमांटिक.. और एक
दिन इसी मौके का फायदा उठा कर मैंने उसे एक ब्लू फ़िल्म की सीडी दे दी.
लेकिन दिल में डर लगा रहा. मालूम नही वो क्या सोचेगी मेरे बारे में..
दुसरे दिन रविवार था. करीब ११ बजे वो मेरे घर आई.. और दोनों सीडी वापिस
की. मैंने सीडी चेक की. उसकी तरफ़ देखा.. फ़िर मैंने देखा की ब्लू फ़िल्म
की सीडी के अन्दर एक कागज़ है.. उसे निकाला "मुझे ऐसी सीडी और दीजिये
प्लीज़". मै मुस्कुराया और फ़िर मैंने उसे ब्लू फ़िल्म की सीडी दी और कहा
ये मुझे ही वापिस करना.. उसने एक सेक्सी मुस्कराहट दी और कहा "आपको ही
दूंगी इंतज़ार कीजिये". मै उसकी इस बात पर सोचने लगा और समझ गया ये
चुदवाने के लिए तैयार है. इसके बाद मै उससे अकेले मिलते ही बहुत बातें
करता उसकी तारीफ़ करता. उसके फिगर की तारीफ करता.. और एक दिन मैंने उससे
कहा की मै उसे पाना चाहता हूँ. उसने भी धीरे से कहा " अगर किसी को पता चल
गया तो? आपकी पत्नी को या मेरी सास को?" मैंने पूंछा तुम चाहती हो?" उसने
सर नीचे झुका लिया.. मैंने कहा तुम्हारी जैसी बीवी को छोड़कर कैसे
तुम्हरे पति बाहर गए? उसने कहा उन्हें मुझ से ज्यादा काम और पैसा प्यारा
है.: उस दिन के बाद हम दोनों मौके का इंतज़ार करने लगे.एक दिन मेरी पत्नी
ने कहा की वो उसके किसी रिश्तेदार के घर भोपाल जाना चाहती है.. उनके
लड़के की सगाई है जाना तो मुझे भी था लेकिन मार्च का महिना था और काम
जोरो पर था. मेरा जाना मुश्किल था. मेरे बेटे के स्कूल में छुट्टियाँ लग
चुकी थी.मैंने कहा मेरा जाना नही हो पायेगा इसलिए मै बाद में उसे लेने आ
जाऊँगा. मैंने उन्हें लक्ज़री बस में बिठा दिया और घर वापस आ गया. करीब
एक घंटे के बाद मुझे निशा का फोन आया की आज वो फ्री है उसकी सास उसके ननद
के घर जा रही है कुछ दिनों के लिए.. इस बात ने मेरे दिल में गुदगदी पैदा
कर दी. मैंने उसे बताया की मै भी आज से अकेला हूँ क्योकि मेरी पत्नी भी
मेरे बेटे के साथ अपने रिश्तेदार के यहाँ पूना गई है. उसने कहा फ़िर तो
आज का दिन हमारा है. मैंने कहा दिन नही रात.. उसने कहा हां वोही. मै
बेकरारी से रात का इंतज़ार कर रहा था. करीब रात के 10 बजे मैंने मेरे
मोबाइल पर उसका कॉल देखा उसने कहा उसका बेटा सो गया है और अब मै उसके घर
आ सकता हूँ. मैंने पूंछा तुम्हारे घर ड्रिंक है उसने कहा हाँ थोडी सी जिन
है मैंने मेरा व्हिस्की का बोतल साथ में लिया और बाहर निकला..मैंने पजामा
पहना था लेकिन अंडरवियर नही पहना था. मै लिफ्ट से जल्दी से उसके घर के
दरवाजे पर पहुँचा लिफ्ट को बिना आवाज़ के बाद किया और दरवाजे की घंटी ना
बजा कर हलके से दस्तक दी. उसने दरवाजा खोला .. उसे देख कर लगा वो मेरा ही
इंतज़ार कर रही थी..मै अन्दर गया और सोफे पर बैठ गया. मैंने देखा उसने एक
नाईट ड्रेस पहना हुआ था. उसकी चुन्चिया उसमे उछल रही थी. नाईट ड्रेस की
डोर कमर पर कस कर बांधी थी.. जिससे उसके चूतड साफ़ नज़र आ रहे थे.. उभरे
हुए. और उनका मटकना दांये बांये. मै देखता रहा. सोफे पर बैठ कर मैंने
उसके पति और बच्चे के बारे में कुछ बातें की.. और भी कुछ बिषय निकले.
मैंने कुछ देर बात की.. और फ़िर मैंने मेरी जेब से एक सीडी निकाली और
उससे पूंछा ये सेक्स की सीडी है.. देखोगी.. उसने कहा हाँ. मै वही ड्राइंग
रूम में लगा रहा था.. उसने कहा यहाँ नही बेडरूम में. और मै बेडरूम में
गया.. बड़ा सा बेड.. और सामने फुल साइज़ आइना एलसीडी नीचे mp3 . मैंने
सीडी सेट किया तब तक वो अन्दर जा कर जिन , 2 ग्लास और फ्रिज से पानी ले
आई.. साथ में कुछ तले हुए काजू भी ..अब वो मेरे पास आ कर बैठ गई. उसका
बेटा दूसरे रूम में सो रहा था.. वो उसे देख कर आई और दरवाजा बंद कर दिया.
मैंने पूंछा वो उठेगा नही रात में.. उसने कहा नही वो बहुत गहरी नीद सोता
है. अब वो मेरे पास एक चेयर पर आ कर बैठ गई और अपने जिन का ग्लास हाथ में
लेकर चीअर्स किया हम दोनों सिप करने लगे . टीवी पर फ़िल्म शुरू थी.. मै
उसके करीब खिसक कर बैठा.. उसने अपना एक पैर दुसरे के ऊपर रखा तो गाउन एक
पैर से खिसक गया और मैंने देखा उसने अन्दर पेटीकोट नही पहना और उसकी
गदराई गोरी जांघ मेरी आंखों के सामने थी. मैंने एक हाथ पीछे से उसके कंधे
पर रखा और हलके से दबाने लगा.. साथ ही सहलाता भी जा रहा था.. फ़िर मैंने
उसके बालों से क्लिप निकाल कर उसके बालों को खोल कर फैला दिया.. उसका रूप
और निखर आया.. मैंने अब कंधे से हाथ को थोड़ा नीचे उसके चूंचियों की तरफ़
(बांये वाले) बढाया.. ओह्ह .. उसने अन्दर ब्रा नही पहनी थी. मेरा जोश उन
मख्खन जैसे चून्चियों पर लगते ही मेरे लंड ने फुफकार मारी. उसका छुपा हुआ
खजाना मेरे हथेली में था. चून्चिया जिन्हें देख कर मै मूठ मारता था .या
मेरी पत्नी की चून्चिया मसलता था.. आज मेरे हाथ में थी. . मुझे उसके पति
पर दया आई की ऐसी सेक्सी पत्नी को छोड़कर वो इतनी दूर कैसे रह पा रहा
होगा.. हम दोनों बेडरूम के चेयर पर बैठे थे. मै उठ कर उसके पीछे गया..
उसका गाउन कंधे से नीचे किया और बालों को हटा कर उसके कंधे और पीठ के
खुले हिस्से को पहले हलके हाथ से सहलाया और फ़िर.. मेरे होंठो को वह
रखा.. उसकी गर्दन. कानऔर गालों को होंठो से सिर्फ़ हलके हलके चूमता रहा..
मेरी गर्म सांसे उसके गालों पर वो महसूस कर रही थी.. मेरे दोनों हाथ गाउन
के अन्दर हो गए और पीछे से खड़े हो कर उसे चूमते हुए उसकी दोनों चूंचियों
को कभी हथेली से और कभी उँगलियों से गोलाई में सहलाने लगे.. उसकी साँस
तेज़ होने लगी. वो भी बेताब होने लगी.. मुंह मेरी तरफ़ घुमाते हुए उसने
अपने होंठ मेरी तरफ़ किए.. मैंने हलके से मेरी जीभ बाहर निकाल कर उसके
रसीले होंठो को गीला किया और फ़िर उन्हें अपने होंठो में कैद कर लिया..
मै पीछे से उस पर झुका हुआ था.. उसने मुंह ऊपर किया हुआ था और आंखे बंद..
उसके होंठ मेरे होंठो में थे और मुलायम चून्चियां मेरी हथेली में. मै
उन्हें अब दबा रहा था और उसके निपल जो की ज्यादा बड़े नही थे.. लेकिन
बड़े प्यारे थे .. और गुलाबी रंगत के थे.., उन्हें चुटकी में ले कर मसल
रहा था.. और उसके मुंह से सिसकारी निकलने लगी थी.. .

मैंने उसकी कमर पर हाथ रखा और धीरे से डोरी की गाँठ खींच दी.. गाउन खुल
गया.. उसके दोनों पल्ले खोल दिए.. और .. दोस्तों उसने नीचे पैंटी भी नही
पहनी थी.. पूरी नंगी.. गाउन के खुलते ही वो शर्मा गई.. और अपनी हथेली
अपनी जांघो के बीच रख दी.मै अब उसके सामने आ गया.. और सामने से किस करने
लगा.. और फ़िर सामने से उसके गले पर किस किया.. चून्चिया अभी भी मेरी
हथेली में थे.. और मै उन्हें अब जोर से मसल रहा था.. फ़िर मै थोड़ा नीचे
झुका और उसके दोनों चून्चियों के बीच मेरा चेहरा रखा और जीभ से चाता
..स्..स्..स्.स्.स्...स् करके उसने मेरा सर अपने चून्चियों पर दबा लिया..
मेरे बालों में उँगलियाँ डाल दी..फ़िर मैंने उसकी दाहिनी चूंची .को पकड़ा
और निपल को उँगलियों के बीच लिया और जीभ की सख्त नोंक से उसे ऊपर नीचे
गांए बांये और कभी गोलगोल ठोकर मारने लगा.. ऐसा ही बांये निपल के साथ भी
किया.. उसके निपल सख्त हो गए और .. फ़िर मैंने उसे खड़ा कर दिया.. उफ़..
क्या सांचे में ढला बदन.. सीने की गोलाई एकदम तनी हुयी.. कमर पतली.. और
उससे लहरा कर गोलाई में नीचे फैलते नितम्ब....मैंने अब उसके गाउन को उसके
बदन से निकाल दिया.. बदन से गाउन निकालते हुए मैंने देखा उसके बगल में भी
बाल नही है.. एकदम गोरे..और मैंने मेरा मुंह उसके बगल में डाल दिया.. हाथ
सर के पीछे कर दिए.और जीभ से चाटने लगा. और वो मचलने लगी.मेरे हाथ उसकी
चून्चियों को बुरी तरह मसल रहे थे.. दोनों बगल को चाटने से वो काफी गर्म
हो गई थी और कुझे अपने पास खींचने लगी.. उधर कद में चुदाई शुरू हो चुकी
थी.और निशा भी अब आह.. ओह्ह.. स्.स्.स्.. कर रही थी.. मैंने उसके उभरे
नरम नितम्बो को दबाते हुए उसे मेरी तरफ़ खींचा उसने मेरी पँट की बेल्ट
खोल दी..जल्दी से उसके हूक और जिप खोल कर उसे नीचे खींचा उसे शायद मालूम
नही था की मैंने अंडरवियर नही पहना है.. मेरा लंड उछल कर बाहर निकल आया..
और उसके नंगे पेट से टकराया.. और वो चौंक गई.. उसके होंठ मेरे होंठो में
थे.. और वो मुझसे चिपकी थी.. .उसने अपने होंठ छुडाये और नीचे देखा फ़िर
मेरे लंड को अपने एक हाथ में लिया. और बोल पड़ी.. "आपका तो बहुत बड़ा
है.. और कितना मोटा..." कहकर उसे मेरे लंड के चारों तरफ़ अपनी उँगलियों
से पकड़ना चाह.. लेकिन वो समा नही रहा था. और मैंने उसके चूंचियां से
लेकर पेट तक जीभसे चाटा..उसकी गहरी नाभि में जीभ डालते ही वो उई..ई..ई.
कर उठी.. मै नीचे घुटनों पर बैठ गया.. और उसके पैर थोड़े फैलाये.. और चूत
पर हथेली लगाई... ओह्ह.. उसकी चूत पूरी गीली हो चुकी थी. मैंने चूत के
दाने को ऊँगली से सहलाया.. तो वो उछल पड़ी. मैंने एक ऊँगली चूत के अन्दर
डाल दी...चूत रस से भरी हुयी थी.. ऊँगली आराम से अन्दर हो गई. मैंने उसे
अब बेड पर बिठाया. उसके पैर नीचे लटके थे. मैंने उसके दाहिने पैर को मेरे
हाथो में लिया..और उसके पैरों की उंगलिया मुंह में ले कर एक एक कर चूसने
लगा.उसकी हालत ख़राब हो रही थी...उसका बदन खिंच रहा था..उसने अपना सर
पीछे झुका लिया था..और मै करीब ५-७ मिनिट तक पैरों को चूमने के बाद..
उसके पैरों को पूरा फैलाया और मेरी जीभ उसके चूत के दाने पर लगाया.. दाने
को मेरे होंठो में लिया.. और जोर से पकड़ कर बाहर खींचा.. उईई..उई..
आह्ह.. करो.. करो.. अच्छा.. लग रहा है.. मैंने उसके चूत के बाहरी होंठो
को चूमा..जीभ से चाटना शुरू किया.. मै हैरान था उसकी चूत के होंठ चिपके
हुए थे.. एकदम किसी कुंवारी लड़की की तरह.. और उनमे अभी भी गुलाबी पन
था.. उसकी शादी को कम से कम ६ साल हो चुके थे. .मैंने उसकी चूत को अब जीभ
सख्त करके चाटना शुरू किया.उसने पैर और फैलाये.. उसकी गांड का चोकलेट कलर
का छोटा .छेद भी बहुत खुबसूरत था.. मै चूत से गांड तक जीभ फेर रहा था.
चूत के गुलाबी होंठ मेरे होंठो में ले कर चूस रहा था.. और
वो..उम्..उम्म्म..आह्ह.. इश..इश.. ओह्ह... मै मर जाउंगी..ई..ई..ई.. मै
धीरे धीरे उसकी चूत को जीभ से सहलाते हुए चाट रहा था.. उफ़.. ये क्या हो
रहा मुझे.. मै छूट जाउंगी..ओह्ह जोर से.. आप कितना अच्छा करते है.. हाँ..
हां.. और उसने अपनी गांड हिलाते हुए चूत को मेरे जीभ के साथ लगाने लगी
थी.. पुरी चूत पर मै जीभ फेर रहा था.. उसके चूत के दाने से लेकर चूत की
दरार तक.. कभी कभी गांड के छेद को भी कुरेद देता.. चूत से रस बह रहा
था..जब दाने पर जीभ रखता तो दाने के नीचे जीभ की नोक रह कर हलके हलके
थरथरा देता था.. इससे वो और उत्तेजित हो रही थी..उसने मेरे बालों में हाथ
डाल कर मेरे सर को जोर से चूत पर दबा लिया उसका पूरा बदन सख्त हो कर
ऐंठने लगा.और.. आह्ह.आ..आ..आ..संजय जी..ई.इ.ई..ई..ई.. मै
गयी..ई..ई..ई..ई..ई..ई..ई.... और दो तीन बार उसके चूतड जोर से उछल कर
मेरी जीभ से टकराए और.. फ़िर मेरे मुंह में गरम गरम रस गिरने लगा.. और
निशा.. बेड पर अपने हाथ फैला कर सर को एक तरफ़ लटका कर शांत लेट गई..मेरी
जीभ उसके दाने को कुरेद रही थी और वो सिहर उठती थी..फ़िर मैंने देखा उसकी
चूत का दाना एकदम सख्त हो चुका है और बाहर झांक रहा है..मैंने जैसे ही
उसे फ़िर से जीभ लगाई.. निशा ने अपने पैरों की कैंची मेरे गले में डाल
दी. "अब नही प्लीज़.. थोड़ा रुकिए.." लेकिन मै कहाँ रुकने वाला था.. मै
उसकी चूत में लंड डालने से पहले उसे एक बार और झडाना चाहता था.. अब मैंने
फ़िर से एक हाथ ऊपर ले जाकर उसके चून्चियों को पकड़ा और जोर से मसलना
शुरू किया..निपल उँगलियों में लिया.. वो अभी भी सख्त थे. मैंने उसकी चूत
के बहते हुए रस को अपने मुंह में लिया और सीधा उठ कर मैंने अपना मुंह
उसके मुंह के ऊपर रखा.. उसके होंठ खोले और मेरी जीभ के साथ उसकी चूत का
रस उसके मुंह में डाल दिया और फ़िर उसके होंठ चूसना शुरू कर दिया.. मेरे
हाथ उसके चिकने नंगे बदन को सहलाते.. उसके चूतड दबाते.. और फ़िर से मेरी
ऊँगली उसकी चूत पर आ गई.. अब उसने ख़ुद पैर फैला दिए था.. मैंने उसे वैसे
ही चाटते हुए उसकी चूत को अपना निशाना बनाया.. और इस बार थोडी देर दाने
को चटाने के बाद.. मैंने उसकी नाज़ुक चूत के होंठो को खोला और मेरी जीभ
अन्दर डाल दी.. ..और अन्दर.. और चूत के अन्दर गोलगोल घुमाते हुए.. एक एक
कोने का रस चाटना शुरू किया.. मै जानता था.. औरत पहली बार झड़ने में
कितना भी टाइम लगाए लेकिन दूसरी बार अगर ठीक से खेला जाए तो २-३ मिनिट
में उसकी चूत पानी छोड़ देती है.. और इसीलिए अब मै जीभ से उसकी चूत को
चोद रहा था.. और वोही हुआ.. सर ३ मिनिट में.. उसकी चूत ने पानी के
पिचकारी मारी.. इस बार उसने ज्यादा जोरदार तरीके से गांड को उछालकर मेरे
मुंह में अपना पानी छोड़ा और मेरा पुरा चेहरा भिगो दिया. वो बहुत जोर से
चिल्लाई.. आह्ह्ह..हो गया..आ..आ.आ... उफ़.. अपने पागल आकर दिया.. और वो
मेरे बालों से पाकर कर मेरे सर को ऊपर खींचने लगी मै भी उठा और मैंने
उससे कहा निशा रानी अब ये डालूँगा तुम्हारी चूत में.. उसने कहा "प्लीज़..
वो क्रीम लगा लीजिये.. और बहुत आहिस्ता डालिए." मैंने कहा एक बात पूंछू
उसने कहा हाँ.. मैंने कहा तुम्हारी चूत इतने दिनों बाद भी इतनी गुलाबी और
टाइट कैसे है.. तुम्हारा तो एक बच्चा भी है..." उसने मेरी तरफ़ देखा और
फ़िर मेरे लंड की तरफ़.. उसे हाथ से पकड़ा. मैंने क्रीम उसके हाथ में
पकडाया. तो वो मेरे लंड पर क्रीम लगाते हुए बोली.. मेरे पति ने ६ साल में
शायद मुझे ६० बार भी नही किया होगा.. और ये बच्चा तो सिजेरियन से हुआ
है.. ये देखो पेट का निशान.. मैंने देखा पेट पर बहुत छोटा सा ६ इंच लंबा
निशान है.. उसने आगे कहा रही बात मेरे चूत के गुलाबीपन की तो मेरे पति का
ये बहुत छोटा है और पतला है.. वो मेरे अन्दर आते तो कभी कभी मुझे पता ही
नही चलता.. दो मिनिट कमर हिलाने के बाद जब मेरी जांघो पर कुछ गरम गरम
बहता है तो मै समझ जाती हूँ की उनका हो गया...मै उन्हें उठा कर बाथरूम
जाती हूँ और जब लौट कर आती हूँ तो वो गहरी नीद में सो जाते है.. बस..
फ़िर एक दो महीने बाद .. कभी उनका मूड होता है.. और सच तो ये है.. की
अपने जो किया जीभ से वो मेरे लीये पुरा नया अनुभव है.. मैंने ब्लू फ़िल्म
में देखा था. लेकिन इसमे इतना मजा है ये नही जानती थी और इसीलिए शायद
ज़िन्दगी में मेरी चूत से इतना पानी निकला और मै दो दो बार झडी" मैंने
उसे अपनी बांहों में जकड लिया और कहा निशा रानी अभी तो और झडोगी.. जब मै
ये लंड चूत में डालूँगा.. .." तभी निशा ने मेरे लंड को अपने हाथ से पकड़ा
और उसके सुपाडे को जीभ से चाटा.. उसे मुंह के अन्दर लेने की कोशिश की..
लेकिन उसका मुंह उसके चूत की तरह बहुत छोटा था.. फ़िर उसने पूरे लंड को
चाटते हुए गीला कर दिया.. लंड चमक रहा था.. उसने फ़िर से सुपाडे पर क्रीम
लगाया.. और लेट गई.

मै उसके दोनों पैरों के बीच खड़ा हो गया.. क्रीम ले कर उसकी चूत के अन्दर
भी डाला और लंड को एक हाथ से पकड़ा दुसरे हाथ की ऊँगली से चूत के गुलाबी
होंठो को खोला चूत अभी भी पानी छोड़ रही थी. लंड को ऊपर नीचे रगडा दाने
पर दबाया और फ़िर उसके छोटे से चूत के मुहाने पर रखा और हलके से दबाया..
चूत गीली होने के कारण सुपाड़ा फिसल कर अन्दर गया और.. निशा के मुंह से
जोर की चीख निकली. "आआह्छ... निकालो.... बहुत मोटा है.. प्लीज़ .. निकाल
लो.." मैंने उसके होंठ मेरे होंठो से बंद कर दिए.. और रुक गया.. मेरा लंड
भी उसकी टाइट चूत में फंसा हुआ लग रहा था..मै उसे चूम रहा था.. और फ़िर
हलके से दबाते हुए लंड को अन्दर डालने की कोशिश की. वो बहुत हलके से
फिसलता हुआ थोड़ा थोड़ा अन्दर जा रहा था. करीब आधा लंड अन्दर करने के बाद
मैंने लंड को आगे पीछे करते हुए उसे चोदना शुरू किया.. उसकी गांड के नीचे
एक तकिया रख दिया. चूत और ऊपर उठ गई.. और उसके पैर मेरी कमर के दोनों
तरफ़ फैला के पकड़ा.. इस बार मैंने थोडी स्पीड बधाई.. वो
भी..आह्ह..आह्ह..उफ्फ्फ... अच्छा लग रहा है.. धीरे.. धीरे.. मेरी धक्को
से उसकी चुंचिया ऊपर नीचे डोल रहे थे..मैंने पूरा लंड सुपाडे तक बाहर
खींचा और इस बार उसकी जांघो को कस के पकड़ा और एक जोरदार धक्के में पूरा
लंड जड़ तक उसकी चूत में उतार दिया.. वो तड़प उठी.. मै उसके ऊपर आया तब
तक उसके मुंह से बहुत जोरदार चीख निकल चुकी थी..
ओह्ह.माँ..आ..आ..आ..आ..आ.. मर गयी ..ई..ई..ई..ई.. उफ़ कितना अन्दर घुसा
दिया.. आपने..मेरी चूत फैला गयी.. उफ़ इतना अन्दर आज तक कुछ नही गया,,,
मै उसे प्यार करने लगा.. लंड अन्दर डाले हुए करीब ५ मिनिट मैंने उसे
चूमा.. चुंचिया सहलाई.. उसकी गांड को दबाया.. मैंने धीरे से पूंछा.. निशा
अब दर्द कम हुआ अब करू मै..;उसने मुस्कुराकर मेरी तरफ़ देखा.. और मैंने
मेरे दोनों हाथ उसकी कमर के दोनों तरफ़ टिकाया और कमर को हलके हलके आगे
पीछे करते हुए चोदना शुरू किया.. उसके पैर घुटनों से मोड़ कर उसके सीने
तक कर दिए.. चूत लंड ले रही थी.. बस कुछ ही धक्को के बाद उसके चूतड भी
हिलने लगे.. मै पूरा लंड बहार खींच कर छोड़ने लगा था और इसी से मेरा लंड
अन्दर जाते हुए उसके दाने को दबाते हुए अंदर जाता और बाहर आते हुए उसकी
चूत के लाल होंठ भी बाहर निकल आते.. तभी मैंने देखा.. उसकी चूत से खून की
कुछ बूंदे निकल कर गिरी है.. शायद चूत के फैलने से निकली थी. .. ये देख
कर मेरा जोश बढ़ गया.. और मैंने अब धक्को की स्पीड बधाई.. और इसके साथ..
निशा.. हाँ.. और जोर से.. ओह्ह.. संजय .. मै फ़िर.. हाँ.. फ़िर से.. मेरा
निकलेगा.. ओह्ह.. आप ने ये क्या कर दिया.. उफ़.. उफ़.. और वो सर को इधर
उधर झटकती हुयी झड़ गई..मेरे लंड पर गरम गरम रस की बरसात हो गई .. चूत
में अब फच्च.. पच्च.. फचाक.. की आवाज़ आने लगी.. कमरे में मेरी तेज़
सांसे.. निशा.. की आह.. ओह्ह.. हम्म.. हम्म और चूत लंड की फच फच की आवाज़
आ रही थी..चूत अब बहुत गीली हो चुकी थी.. मेरी स्पीड भी तेज़ थी.. मैंने
उसका एक पैर नीचे कीया और उसे आधे करवट से लिटाया और दूसरा पैर मेरे हाथ
में पकड़ कर उठा रखा.. और कमर हिलाते हुए चोदने लगा.. निशा फ़िर
चिल्लायी.. आह्ह.. मै फ़िर गयी.. ..ओह्ह तुम सच में असली मर्द हो.. जैसी
चुदाई करते होवैसा ही सख्त लंड है.. ओह्ह मै तुम्हारी हो गई.. छोड़ो .. "
मै भी अब झड़ने के करीब था.. और निशा चुदाई का पूरा मजा ले रही थी..
चिल्लाते हुए.. और इसी में मैंने लंड को बाहर खिंच कर धक्के लगते हुए
पूरा लुंड चूत की गहराई में डाल कर दबा दिया.. और मेरा लावा उसकी चूत में
छोड़ दिया.. और मेरे इस लावे की पिचकारी की गर्मी से निशा फ़िर एक बार
झड़ गई.. बिना लंड बाहर निकाले मैं उसके ऊपर लेट गया.. दोनों हांफ रहे
थे.. फ़िर करीब १० मिनिट बाद मै उसके ऊपर से ऊठा.. लंड को बहार खींचा..
चूत का हुलिया बदल चुका था.. उसने में मेरा लावा और उसका रस बह कर नीचे
गांड की तरफ़ जा रहा था.. चोट के बाहरी होंठ एकदम लाल हो गए थे और खुल गए
थी..हम दोनों अब बेड पर ठीक से लेट गए.. वो मेरे हाथ पर अपना सर रखे लेट
गई.. थोडी देर हम बातें करते रहे .. मैंने फ़िर उसे छेड़ना शुरू किया..
धीरे धीरे वो भी गरम होने लगी.. और हम दूसरे दौर में लग गए.. हमारी चुदाई
का दूसरा दौर रात के ३ बजे ख़तम हुआ.. उसके बाद हम बाथरूम में गए.. और वह
मैंने उसे नीचे झुका कर पीछे से चोदा .. ये स्टाइल उसके लिए नया था..
इसलिए नहा कर आने के बाद .. बेड रूम में फ़िर से एक बार मैंने उसे उसी
स्टाइल और अच्छे से चोदा.. उसके बाद एक और नए तरीके से मैंने उस रात उसे
चोदा.. वो था उसके दोनों पैर मेरे कमर पर लपेट पर चूत में लंड डाल कर
उसकी बाँहे मेरे गले में दोनों के होंठ जुड़े हुए और मेरे हाथ उसके चूतड
को पकड़े हुए. इस स्टाइल में मजा इसलिए आया क्योकि निशा की ऊँचाई कम है
और उसे गोद में उठा कर चोदने में बहुत मजा आया. दोस्तों इन सारी चुदाई का
पूरा हाल मै लिखना चाहता था.. लेकिन सोचा कहानी लम्बी हो जायेगी. वैसे
अगर आप चाहे तो मै इसे दुसरे भाग में लिख कर आपके सामने रख सकता हूँ. आप
क्या चाहते है जरुर बताईयेगा... खैर इस तरह की घमासान चुदाई का दौर किसी
तरह रुका.. अब हम दोनों थक गए थे.. वैसे ही एक दूसरे की बांहों में नंगे
सो गए. सुबह ६ बजे मै उठा और बाथ रूम जा कर देखा निशा पेशाब कर रही थी
उसकी खुली चुत से सीटी जेसी आवाज सुन कर मेरा लड एकदम से सर उठाने लगा
किसी तरह अपने लंड को मना कर मेने मन ही मन में कहा लंड महाराज अब तो रोज
ही चुत मिलेगी बस अब कपड़े पहन और चल अपने फ्लैट में.. सुबह ११ बजे ऑफिस
जाते हुए मैंने उसे नीचे देखा.. उसका चेहरा बहुत खुश था और अलग ही चमक थी
.. वो मुझे देख कर शरमाते हुए मुस्कुरायी.. उसके बाद तो हमे जब मौका
मिलता हम चुदाई का मजा लेते है. वो भी बहुत खुश है.
समाप्त


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