बदनाम रिश्ते-
थोड़ी देर में पता लगा कि चोदू तो सचमुच बड़ी हिम्मत वाला चोदू है। थोड़ी देर में ही वो चोदू भैया के पास आया और कहने लगा- मैं एक होटल चलाता हूँ और आप अपनी पत्नी के साथ हमारे होटल में आइए। यह मेरा कार्ड है, आप इसको दिखा देना तो आपको रियायत भी मिलेगी।
भैया ने पूछा- इस मेहरबानी की वजह?
तो वो बोला- मेहरबानी तो आप करेंगे हमारे होटल में आकर ! आप जैसे अच्छे लोगों के आने से हमारे होटल का नाम बढ़ेगा।
भैया से अपने होटल आने की जिद करके और आने का वादा लेकर वो चला गया। मैं भी सोचने लगी बड़ा दिलेर है, यार बड़ा मजा आएगा इससे चुदने में। फिर दिल ने कहा 'कमला अपनी हद में रह। मुश्किल से तू अपने घर से बाहर निकली है ज्यादा सपने मत देख।'
मैंने भैया से पूछा- इसका नाम क्या है?
भैया ने कार्ड देख कर बताया- इसका नाम चंदू है।
ओह तो मेरे ही कान बज रहे थे। जब उसने अपना नाम चंदू बताया तो मुझे ‘चोदू’ सुनाई दिया। चुदने के लिए तरस गई थी, शायद इसीलिए मुझे चोदू सुनाई दिया। खाना खाकर हम घर लौट आए। अरे भई, मैं और मेरे भैया, वो चोदू नहीं।
घर आकर भैया ने कहा- यार, एक काफी मिल जाती तो मजा आ जाता।
यह भैया का नया रूप था, जो दीदी की जगह ‘यार’ कह कर बात कर रहा था। मुझे तो भैया का यह अवतार बहुत अच्छा लगा। मैंने तो दिल से उसे ‘यार’ मान ही लिया।
मैंने भी उसी लहजे में जवाब दिया- पिलाती हूँ यार, जरा कपड़े बदल लूँ।
भैया ने हाथ थाम कर कहा- अभी से क्यों बदल रही हो? सोते समय बदल लेना।
भाई के उतावलेपन को मैंने उसकी आँखों में देखा तो समझ आया कि जनाब का दिल अभी मेरा जिस्म देख कर भरा नहीं है।
मैंने अपने दिल से कहा इसे शीशे में उतार ले ! लोहा गर्म है, मार दे हथौड़ा या अपनी भाषा में कहूँ तो चूत गर्म है, चूस ले लौड़ा।
मैंने कहा- भैया ठीक है, चूल्हे पर साड़ी परेशान करती है तो सिर्फ़ साड़ी उतार देती हूँ।
अंधा क्या माँगे दो आँखें। या लौड़ क्या मांगे दो जांघें !
भैया की खुशी तो उछल कर बाहर आ रही थी, उसकी तो पूरी बांछें खिल गईं। मैंने भैया को इतना खुश कभी नहीं देखा।
मैंने सोचा कि इसकी खुशी को और बढ़ाया जाए। मैंने भीतर जा कर साड़ी उतारी और पेटीकोट को नाभि से बहुत नीचे बाँधा, बिल्कुल हड्डी के ऊपर जिससे चूत का उभार थोड़ा सा नजर आए और हड्डी और चूत के उभार के बीच की जगह खाली गढ्ढे की तरह नजर आए। बस नंगी सी ही नजर आ रही थी। थोड़ी सी ही कसर रह गई थी नंगी होने में।
मर्द अपने दिल की बात कह लेता है पर औरत को हिचकिचाहट होती है। इसीलिए भगवान ने औरत को मम्मे और चूत नाम के दो अस्त्र दिए हैं। वही दो अस्त्र लेकर मैं भैया को रिझाने जा रही थी।
कपड़ों के बीच से मम्मों को और चूत के उभार को जितना ज्यादा दिखा सकती थी, उतना खोल कर गई और भैया के पास जाकर बैठ गई।
बोली- भैया, बिना साड़ी के बुरी तो नहीं लग रही हूँ।
भैया ने मेरे कन्धों पर अपने हाथ रख कर कहा- अरे तू तो साड़ी से भी ज्यादा सुन्दर लग रही हो।
मैंने ब्लाउज तो पहना था मगर मेरे कन्धे तो नंगे थे और भाई का हाथ मेरे नंगे कंधों पर पड़ते ही मेरे जिस्म में कंपकपी सी दौड़ गई। बड़े समय के बाद मेरे नंगे जिस्म पर किसी मर्द के हाथ पड़े थे। मेरी तो साँसें फूल गईं। साँसों के फूलने का असर मम्मों पर साफ दिखाई दे रहा था। मम्मे हर साँस के साथ फूल कर उभरते और फिर वापिस जाते।
भैया मुझसे बात कर रहे थे और मुझे यह डर खा रहा था कि कही वो अपना हाथ मेरे नंगे कंधों से हाथ न हटा ले। मैंने अपना हाथ भैया के हाथों पर रख दिया और उसके हाथों को अपने कंधों पर दबा लिया।
मैंने कहा- भैया मैं बहुत डरा करती थी कि मैं तुम पर बोझ बन गई हूँ, कहीं तुम मुझे घर से ही ना निकाल दो।
भैय्य्या ने जोर से मेरा कंधा दबाया और कहा- हट पगली तूने ये कैसे सोच लिया?
भैया को कंधे दबाने में मजा आने लगा। वो बात बात पर मेरा कंधा दबाने लगे। मेरी साँसें और भी फूलने लगीं। मेरे कंधों में ‘कप’ तरह की एक गहरार्इ है। कंधे पर हाथ रखे-रखे भैया की एक उंगली उस ‘कप’ में हिलने लगी। उससे शरीर में एक करंट सा दौड़ गया, मेरी साँसें और तेज हो गईं, मेरे उरोज श्वास की गति के साथ और फूलने लगे।
अगर भाई इस तरह फूलते हुए मम्मों को देख ले तो जरूर मुझे चोद लेगा, पर भाई तो मेरी आँखों में आँखें डाल कर बात कर रहा था। वो तो मेरे मम्मे देख ही नहीं रहा था। कमला कुछ कर जिससे वो तेरे मम्मों की तरफ देखे।
मैंने कहा- भाई सच सच बताना, मैं तुम्हें सुन्दर नहीं लगती थी ना?
भाई ने कहा- नहीं, पहले मैंने कभी तुझे गौर से ही नहीं देखा। उस दिन तुम्हें बच्चे को मम्मे चुसवाते देखा तो अन्दाजा हुआ कि तू कितनी सुन्दर है।
मम्मों का नाम लेते ही भाई ने मम्मे देखे तो देखता ही रह गया। वो मम्मों पर से नजर ही नहीं हटा सका। उसकी आँखें मम्मों पर गड़ी की गड़ी ही रह गईं।
मैंने भी साँसें और गहरी भरनी शुरू कर दीं, जिससे मम्मे और ज्यदा उभरने लगे। मानो भैया से कह रहे हों- आओ, हमें चूस लो।
मैंने भैया से पूछा- अब तो अच्छी लगती हूँ ना?
भैया ने मम्मों से नजर उठाए बिना ही बोला- हाँ।
भैया की साँसें फूल रही थीं। फूलते हुए मम्मों का असर उनकी साँसों में साफ दिखाई दे रहा था।
मैंने पूछा- भैया मेरे मम्मे तो अच्छे हैं ना?
भैया ने मम्मों पर आँखें गड़ाए हुए 'हाँ' बोला।
मैंने कहा- ऐसे नहीं भैया, सच बताओ खाओ मेरी कसम !
जवाब मिला- तेरी कसम !
पर मम्मों से नजर नहीं हिली।
मैंने सोचा सही मौका है, मैंने भैया से कहा- ऐसे नहीं भैया, मेरे दिल की कसम खाओ।
और मैंने भैया का हाथ पकड़ कर अपने मम्मों पर रख लिया।
भैया ने कहा- सच, तेरे दिल की कसम।
और उसके यह कहते ही मैंने उसका हाथ जोर से अपने मम्मों पर दबा कर आँखें बन्द कर लीं और कहा- थैंक यू भैया।
मैंने अपना हाथ हटा लिया पर भाई ने अपना हाथ मेरे मम्मों से नहीं हटाया।
फिर मैंने पूछा- आज होटल की बात से लग रहा था, तुझे मेरी चूची अच्छी नहीं लगी।
'अरे नहीं बाबा ! वो मम्मे दबा कर बोला- तेरी चूची बहुत सुन्दर है। तेरे दिल की कसम तेरे दिल की कसम तेरे दिल की कसम।
भैया ने तीन बार कसम खाई और तीनों बार मेरा मम्मा दबाया। भाई को यह दिल की कसम का आइडिया बहुत पसंद आया और अब वो हर बात पर कहता 'तेरे दिल की कसम' और मेरा मम्मा दबा लेता।
मुझे भी बहुत मजा आ रहा था। छोटी-छोटी बात पर कसम खाने को कहती और वो मेरा मम्मा दबा कर कहता- तेरे दिल की कसम !
जैसे ही वो मम्मा दबाता, उसका हाथ फिसल कर थोड़ा नीचे खिसक जाता। ऐसा करते-करते उसका हाथ ब्लाउज के अन्दर जाने लगा। थोड़ी ही देर में उसकी एक उंगली मेरी चुचूक को छू गई, मेरे सारे शरीर में सनसनी छा गई।
मुझे जाने क्या हो गया, सोचने की शक्ति जाती रही। सोच-सोच कर कसमें खिला रही थी और मम्मे दबवा रही थी। अब कुछ नहीं सूझ रहा था कि किस बात की कसम खिलाऊँ।
बिना किसी बात के मैं बोली- खा कसम।
भैया ने भी बिना किसी बात के कहा- तेरे दिल की कसम ! और जोर से मेरा मम्मा दबाया।
शायद भैया का भी वही हाल था जो मेरा था। दोनों की बातें खत्म हो गईं। बस कसमें चलती रहीं और वो मेरा मम्मा दबाता रहा। थोड़ी देर में मैंने ये कहना भी बन्द कर दिया कि खा कसम। बस हम एक-दूसरे की आँख में आँख डाल कर देखते और वो मेरा मम्मा दबाता और हम दोनों मजा लेते रहे।
फिर अचानक जैसे नींद से उठे हों। हम दोनों एक साथ बोले- ‘काफी’
हम भूल ही गए थे कि मैंने साड़ी काफी बनाने के लिए उतारी थी ना कि मम्मे दबवाने के लिए और मैं काफी बनाने चली गई।
काफी बनाते-बनाते मैं सोच रही थी, लड़का तो पट गया है, मम्मे तो खूब दबा गया, अब चूत मरवाना मुश्किल नहीं होगा।
काफी बना कर मैं भाई के पास गई और काफी मेज पर रख दी और उसके सामने खड़ी हो गई। वो सोफे पर बैठा था और मैं उस के सामने खड़ी थी जिससे मेरी चूत का उभार ठीक उसके मुँह के सामने था। नंगी कमर भी खुल के उसके सामने थी। वहाँ खड़े रहने के लिए मैंने बात करनी शुरू की।
मैंने उसके कंधों पर हाथ रख कर कहा- भैया काफी बहुत गर्म है, जरा संभल कर पीना।
"अरे यह क्या ! कल की कॉफी का कप तो यहीं पड़ा है।" भैया पीछे मुड़ कर कप उठाने लगे तो मैंने कहा- रुको मैं उठा लेती हूँ।
और मैं भैया के पीछे पड़े कप को उठाने के लिए जैसे ही झुकी मेरी चूत भैया के मुँह पर दब गई।
अरे यह तो मैंने सोचा ही नहीं था, बिना सोचे ही रास्ता निकल आया। मैंने चूत को उसके मुँह पर अच्छी तरह दबाया और कप उठाया।
भैया ने अजीब सा मुँह बनाया तो मैंने कहा- इतनी भी भारी और खुरदरी नहीं हूँ, देखो नर्म सी हूँ और मैंने दोनों हाथों से पकड़ कर भैया का मुँह अच्छी तरह से अपनी चूत पर रगड़ लिया।
भैया मुस्कराए और बोले- वैसे तो तू पतली है पर जहाँ जहाँ मांस होना चाहिए वहाँ वहाँ है।
शायद भैया कहना चाहते थे कि मेरी चूत बहुत गद्देदार है, पर शरमा रहे थे।
मैंने पूछा- सच कह रहे हो?
तो उसने मेरे चूतड़ों पर हाथ रख कर जोर से अपने मुँह को मेरी चूत पर रगड़ा। मेरा पेटीकोट चूत से चिपक गया और पेटीकोट में से चूत का आकार साफ दिखाई देने लगा। ऐसे ही खड़े-खड़े मैं बहुत देर तक बातें करती रही।
बीच-बीच में भैया कुछ कसम खाना चाहते तो इशारा समझ कर मैं झुक जाती और वो मम्मा दबा कर कहते 'तेरे दिल की कसम।'
धीरे-धीरे भैया की हिम्मत बढ़ी और अब वो ब्लाउज के अंदर हाथ डाल कर पूरा मम्मा दबाते और कहते 'तेरे दिल की कसम !'
ऐसे बात करते-करते कॉफी खत्म हो गई और हम अपने-अपने कमरे में सोने को चले गए।
अपने कमरे में जाकर मैं खुद को कोसने लगी। सारा दिन मेहनत से उसको गर्म किया और अब उसे सोने को जाने दिया, 'कोई बहाना करके रोकती' यह सोचते-सोचते मैंने अपना ब्लाउज उतारना शुरू किया। ब्लाउज दो डोरियों से बंधा था।
मैंने ऊपर की रस्सी तो खोल ली, पर नीचे की रस्सी खोलने की बजाय उसमें दो गांठें और बांध दीं और सोचा भैया को कहूँगी खुल नहीं रही हैं। भैया के कमरे में जाने लगी तो देखा भैया तो खुद ही मेरे कमरे की ओर आ रहे हैं।
भैया बोले- अरे, मैं पूछने आया था कि वो तुम कह रही थी ना तुम्हारे मम्मों में दूध भर जाता है और दर्द होता है।
मैं बोली- हाँ भैया, बहुत दर्द हो रहा है, आज तो वो बाई भी नहीं आई।
भैया बोले- तो क्या अब उसे बुला कर लाऊँ?
"क्या बात कर रहे हो भैया?" मैं बोली- रात के 12 बजे हैं।
भैया बोले- तो क्या रात भर दर्द में रहोगी?
मैं मुस्करा कर बोली- भाई, एक और बच्चा है, जो इस वक्त मेरी चूची चूस सकता है, पर पता नहीं वो मानेगा नहीं !
भैया बोले- अरे तू उसकी चिन्ता न कर मुझे बता, मैं उस को मना लूंगा। तू मुझे बता वो है कौन?
मैंने पूछा- सच में उसे मना लोगे?
भैया बोले- हाँ तेरे दिल की कसम !
और उसने मेरा मम्मा दबा दिया।
ब्लाउज की ऊपर की रस्सी तो खुली ही थी पूरा मम्मा उछल के भाई के हाथ में आ गया। भाई कन्ट्रोल नहीं कर पाया और उसने मम्मे दबाते-दबाते मेरा मुँह चूम लिया। यही तो मैं चाहती थी कि भाई अपने आप पर काबू ना रख सके और कभी इसी तरह बेकाबू हो कर मेरी चूत ही मार ले।
भैया ने चुम्मा लेते ही कहा- सॉरी गलती हो गई, बुरा तो नहीं माना?
मैंने कहा- हाँ गलती की, तुमने जो सॉरी बोला। पागल तू प्यार करेगा तो मैं बुरा मानूंगी क्या? और अगर यह गलती है तो यह गलती रोज करना। करेगा ना? खा कसम !
और भैया ने मेरे दोनों मम्मे, जो इस समय पूरे नंगे थे, जोर-जोर से दबा कर कहा- तेरे दिल की कसम।
और मुझे बहुत चूमा। चूमते-चूमते भैया ने मेरे होंठ चूस लिए। फिर अपनी जीभ मेरे मुँह में डाल कर मेरा पूरा मुँह अन्दर से चाट लिया और साथ साथ मेरे मम्मे दबाता रहा। बहुत मजा आ रहा था जैसे मुँह की चुदाई हो गई हो।
फिर भैया ने कहा- बता ना वो लड़का कौन है जो इस समय तेरे मम्मे चूस सकता है।
मैंने कहा- पहले मेरे ब्लाउज की डोरी तो खोलो। पता नहीं कैसे इतनी कस गई है।
भाई ने रस्सी देखी तो बोला- अरे तुम्हारे शरीर पर तो रस्सी के निशान पड़ गए हैं। दर्द नहीं हो रहा?
मैंने बताया, "मुझे अक्सर ये निशान पड़ जाते हैं फिर खुद ही ठीक हो जाते हैं। परवाह मत करो।"
"अरे परवाह क्यों नहीं होगी? भाई ने कहा, "दवा लगा दूं?
मैंने कहा- नहीं जरूरत नहीं।
भाई ने वहाँ चाट लिया। शरीर में एक सनसनी सी हुई।
भाई ने पूछा- कुछ ठीक लगा?
मैंने कहा- बहुत अच्छा लगा।
उसने पूछा- और करूँ?
मैंने ‘हाँ’ कही और उसने चाटना शुरू कर दिया।
मैंने कहा- भैया मैं लेट जाऊँ, रस्सी खोलना आसान हो जाएगा।
और मैं बिस्तर पर उल्टी लेट गई। भैया भी बिस्तर पर बैठ कर मेरी कमर निहारने लगे। कमर पर हाथ फेरते और कहते, "अरे यहाँ भी कुछ है।" और वहाँ चाट लेते। इस तरह उसने मेरी सारी कमर पर हाथ फेरा और जगह-जगह चाटा बहुत मजा आ रहा था।
वो बस करने लगे तो मैंने कहा- यहाँ भी बहुत रस्सी चुभी थी और मैंने पेटीकोट के नाड़े की तरफ इशारा किया।
"अरे बाप रे ! ये तो बहुत ज्यादा है इतना कस कर क्यों बांधा?" भैया बोले, "नाड़ा थोड़ा ढीला करो तो कुछ करूँ।"
मैंने नाड़ा ढीला किया और पेटीकोट को थोड़ा नीचे किया। थोड़े से चूतड़ भी बाहर को आ गए। भैया ने कमर पर चूमा-चाटी की और बीच-बीच में चूतड़ों को भी सहला लेते।
फिर उसने कहा- ये घाव तो चारों तरफ होगा, आगे की तरफ भी होगा। जरा घूमो तो।
और मैं झट से घूमी, मैंने ये परवाह नहीं की कि पेटीकोट का नाड़ा खुला है। मेरे पलटते ही पेटीकोट सरका और दोनों टांगों के बीच चूत का उभार खुल के बाहर आ गया।
भाई ने मेरी कमर दोनों हाथों से पकड़ी और और कमर को हर तरफ से चाटने लगा। रस्सी का घाव तो एक बहाना था, असली मकसद तो चूत के आस पास चटवाना था।
भाई ने जैसे ही चूत के उभार को चाटा मैं उछल सी गई।
भैया ने पूछा- क्या हुआ?
मैंने कहा- कुछ नहीं।
कैसे बताती के तेरे दांत छूने से चूत में करंट दौड़ गया था। भाई ने कस कर चूतड़ों को पकड़ा और दबा-दबा कर चूत के उभार को चूस डाला। मुझे चूमने चटवाने में इतना मजा कभी नहीं आया।
मेरे बदन को चूमने चाटने के बाद भाई ने पूछा- अरे तूने बताया नहीं, इस समय वो कौन सा बच्चा है जो तेरी चूची चूस लेगा?
मैं घबरा सी गई। मैं तो इसी से चुसवाने की बात सोच रही थी। अब तक सारी चुम्मा-चाटी किसी बहाने से हो रही थी। अब साफ कहने में डर सा लग रहा था। कहीं सारा बना बनाया खेल ही न बिगड़ जाए।
मैंने कहा- छोड़ो अगर उसने मना कर दिया तो मन खराब हो जाएगा।
भैया बोले- अरे मैंने कहा था ना मैं उसे मना लूंगा। बोल न कौन है वो।
मैंने फिर कहा- छोड़ो।
तो भैया ने कहा- ऐसे कैसे छोड़ दें यार, तेरे मम्मों पर हाथ रख कर कसम खाई है, हम उसे मना लेंगे।
मैंने कहा- सिर्फ हाथ रख कर कसम खाई है ना ! कोई जुबान रख कर तो कसम नहीं खाई।
भैया ने कहा- क्या मतलब?
तो मैं भैया के गले से चिपक गई और बोली- तू चूस ले।
भैया बोले- सच में मुझ से चुसवाएगी।
अरे वाह भैया-2
वो समझ रहा था कि कमल मेरा पति है, मैंने भी नहीं बताया कि वो मेरा भाई है।मैंने उससे पूछा- तेरा नाम क्या है?उसने कहा- चोदू।मैंने सोचा यह कैसा नाम है। शायद वो अपना नाम नहीं बताना चाहता। जो
अपना नाम नहीं बताना चाहता, वो क्या चोदेगा? ऐसे ही हिम्मत दिखा रहा था।
मैं आकर भैया के पास अपनी जगह पर बैठ गई।
थोड़ी देर में पता लगा कि चोदू तो सचमुच बड़ी हिम्मत वाला चोदू है। थोड़ी देर में ही वो चोदू भैया के पास आया और कहने लगा- मैं एक होटल चलाता हूँ और आप अपनी पत्नी के साथ हमारे होटल में आइए। यह मेरा कार्ड है, आप इसको दिखा देना तो आपको रियायत भी मिलेगी।
भैया ने पूछा- इस मेहरबानी की वजह?
तो वो बोला- मेहरबानी तो आप करेंगे हमारे होटल में आकर ! आप जैसे अच्छे लोगों के आने से हमारे होटल का नाम बढ़ेगा।
भैया से अपने होटल आने की जिद करके और आने का वादा लेकर वो चला गया। मैं भी सोचने लगी बड़ा दिलेर है, यार बड़ा मजा आएगा इससे चुदने में। फिर दिल ने कहा 'कमला अपनी हद में रह। मुश्किल से तू अपने घर से बाहर निकली है ज्यादा सपने मत देख।'
मैंने भैया से पूछा- इसका नाम क्या है?
भैया ने कार्ड देख कर बताया- इसका नाम चंदू है।
ओह तो मेरे ही कान बज रहे थे। जब उसने अपना नाम चंदू बताया तो मुझे ‘चोदू’ सुनाई दिया। चुदने के लिए तरस गई थी, शायद इसीलिए मुझे चोदू सुनाई दिया। खाना खाकर हम घर लौट आए। अरे भई, मैं और मेरे भैया, वो चोदू नहीं।
घर आकर भैया ने कहा- यार, एक काफी मिल जाती तो मजा आ जाता।
यह भैया का नया रूप था, जो दीदी की जगह ‘यार’ कह कर बात कर रहा था। मुझे तो भैया का यह अवतार बहुत अच्छा लगा। मैंने तो दिल से उसे ‘यार’ मान ही लिया।
मैंने भी उसी लहजे में जवाब दिया- पिलाती हूँ यार, जरा कपड़े बदल लूँ।
भैया ने हाथ थाम कर कहा- अभी से क्यों बदल रही हो? सोते समय बदल लेना।
भाई के उतावलेपन को मैंने उसकी आँखों में देखा तो समझ आया कि जनाब का दिल अभी मेरा जिस्म देख कर भरा नहीं है।
मैंने अपने दिल से कहा इसे शीशे में उतार ले ! लोहा गर्म है, मार दे हथौड़ा या अपनी भाषा में कहूँ तो चूत गर्म है, चूस ले लौड़ा।
मैंने कहा- भैया ठीक है, चूल्हे पर साड़ी परेशान करती है तो सिर्फ़ साड़ी उतार देती हूँ।
अंधा क्या माँगे दो आँखें। या लौड़ क्या मांगे दो जांघें !
भैया की खुशी तो उछल कर बाहर आ रही थी, उसकी तो पूरी बांछें खिल गईं। मैंने भैया को इतना खुश कभी नहीं देखा।
मैंने सोचा कि इसकी खुशी को और बढ़ाया जाए। मैंने भीतर जा कर साड़ी उतारी और पेटीकोट को नाभि से बहुत नीचे बाँधा, बिल्कुल हड्डी के ऊपर जिससे चूत का उभार थोड़ा सा नजर आए और हड्डी और चूत के उभार के बीच की जगह खाली गढ्ढे की तरह नजर आए। बस नंगी सी ही नजर आ रही थी। थोड़ी सी ही कसर रह गई थी नंगी होने में।
मर्द अपने दिल की बात कह लेता है पर औरत को हिचकिचाहट होती है। इसीलिए भगवान ने औरत को मम्मे और चूत नाम के दो अस्त्र दिए हैं। वही दो अस्त्र लेकर मैं भैया को रिझाने जा रही थी।
कपड़ों के बीच से मम्मों को और चूत के उभार को जितना ज्यादा दिखा सकती थी, उतना खोल कर गई और भैया के पास जाकर बैठ गई।
बोली- भैया, बिना साड़ी के बुरी तो नहीं लग रही हूँ।
भैया ने मेरे कन्धों पर अपने हाथ रख कर कहा- अरे तू तो साड़ी से भी ज्यादा सुन्दर लग रही हो।
मैंने ब्लाउज तो पहना था मगर मेरे कन्धे तो नंगे थे और भाई का हाथ मेरे नंगे कंधों पर पड़ते ही मेरे जिस्म में कंपकपी सी दौड़ गई। बड़े समय के बाद मेरे नंगे जिस्म पर किसी मर्द के हाथ पड़े थे। मेरी तो साँसें फूल गईं। साँसों के फूलने का असर मम्मों पर साफ दिखाई दे रहा था। मम्मे हर साँस के साथ फूल कर उभरते और फिर वापिस जाते।
भैया मुझसे बात कर रहे थे और मुझे यह डर खा रहा था कि कही वो अपना हाथ मेरे नंगे कंधों से हाथ न हटा ले। मैंने अपना हाथ भैया के हाथों पर रख दिया और उसके हाथों को अपने कंधों पर दबा लिया।
मैंने कहा- भैया मैं बहुत डरा करती थी कि मैं तुम पर बोझ बन गई हूँ, कहीं तुम मुझे घर से ही ना निकाल दो।
भैय्य्या ने जोर से मेरा कंधा दबाया और कहा- हट पगली तूने ये कैसे सोच लिया?
भैया को कंधे दबाने में मजा आने लगा। वो बात बात पर मेरा कंधा दबाने लगे। मेरी साँसें और भी फूलने लगीं। मेरे कंधों में ‘कप’ तरह की एक गहरार्इ है। कंधे पर हाथ रखे-रखे भैया की एक उंगली उस ‘कप’ में हिलने लगी। उससे शरीर में एक करंट सा दौड़ गया, मेरी साँसें और तेज हो गईं, मेरे उरोज श्वास की गति के साथ और फूलने लगे।
अगर भाई इस तरह फूलते हुए मम्मों को देख ले तो जरूर मुझे चोद लेगा, पर भाई तो मेरी आँखों में आँखें डाल कर बात कर रहा था। वो तो मेरे मम्मे देख ही नहीं रहा था। कमला कुछ कर जिससे वो तेरे मम्मों की तरफ देखे।
मैंने कहा- भाई सच सच बताना, मैं तुम्हें सुन्दर नहीं लगती थी ना?
भाई ने कहा- नहीं, पहले मैंने कभी तुझे गौर से ही नहीं देखा। उस दिन तुम्हें बच्चे को मम्मे चुसवाते देखा तो अन्दाजा हुआ कि तू कितनी सुन्दर है।
मम्मों का नाम लेते ही भाई ने मम्मे देखे तो देखता ही रह गया। वो मम्मों पर से नजर ही नहीं हटा सका। उसकी आँखें मम्मों पर गड़ी की गड़ी ही रह गईं।
मैंने भी साँसें और गहरी भरनी शुरू कर दीं, जिससे मम्मे और ज्यदा उभरने लगे। मानो भैया से कह रहे हों- आओ, हमें चूस लो।
मैंने भैया से पूछा- अब तो अच्छी लगती हूँ ना?
भैया ने मम्मों से नजर उठाए बिना ही बोला- हाँ।
भैया की साँसें फूल रही थीं। फूलते हुए मम्मों का असर उनकी साँसों में साफ दिखाई दे रहा था।
मैंने पूछा- भैया मेरे मम्मे तो अच्छे हैं ना?
भैया ने मम्मों पर आँखें गड़ाए हुए 'हाँ' बोला।
मैंने कहा- ऐसे नहीं भैया, सच बताओ खाओ मेरी कसम !
जवाब मिला- तेरी कसम !
पर मम्मों से नजर नहीं हिली।
मैंने सोचा सही मौका है, मैंने भैया से कहा- ऐसे नहीं भैया, मेरे दिल की कसम खाओ।
और मैंने भैया का हाथ पकड़ कर अपने मम्मों पर रख लिया।
भैया ने कहा- सच, तेरे दिल की कसम।
और उसके यह कहते ही मैंने उसका हाथ जोर से अपने मम्मों पर दबा कर आँखें बन्द कर लीं और कहा- थैंक यू भैया।
मैंने अपना हाथ हटा लिया पर भाई ने अपना हाथ मेरे मम्मों से नहीं हटाया।
फिर मैंने पूछा- आज होटल की बात से लग रहा था, तुझे मेरी चूची अच्छी नहीं लगी।
'अरे नहीं बाबा ! वो मम्मे दबा कर बोला- तेरी चूची बहुत सुन्दर है। तेरे दिल की कसम तेरे दिल की कसम तेरे दिल की कसम।
भैया ने तीन बार कसम खाई और तीनों बार मेरा मम्मा दबाया। भाई को यह दिल की कसम का आइडिया बहुत पसंद आया और अब वो हर बात पर कहता 'तेरे दिल की कसम' और मेरा मम्मा दबा लेता।
मुझे भी बहुत मजा आ रहा था। छोटी-छोटी बात पर कसम खाने को कहती और वो मेरा मम्मा दबा कर कहता- तेरे दिल की कसम !
जैसे ही वो मम्मा दबाता, उसका हाथ फिसल कर थोड़ा नीचे खिसक जाता। ऐसा करते-करते उसका हाथ ब्लाउज के अन्दर जाने लगा। थोड़ी ही देर में उसकी एक उंगली मेरी चुचूक को छू गई, मेरे सारे शरीर में सनसनी छा गई।
मुझे जाने क्या हो गया, सोचने की शक्ति जाती रही। सोच-सोच कर कसमें खिला रही थी और मम्मे दबवा रही थी। अब कुछ नहीं सूझ रहा था कि किस बात की कसम खिलाऊँ।
बिना किसी बात के मैं बोली- खा कसम।
भैया ने भी बिना किसी बात के कहा- तेरे दिल की कसम ! और जोर से मेरा मम्मा दबाया।
शायद भैया का भी वही हाल था जो मेरा था। दोनों की बातें खत्म हो गईं। बस कसमें चलती रहीं और वो मेरा मम्मा दबाता रहा। थोड़ी देर में मैंने ये कहना भी बन्द कर दिया कि खा कसम। बस हम एक-दूसरे की आँख में आँख डाल कर देखते और वो मेरा मम्मा दबाता और हम दोनों मजा लेते रहे।
फिर अचानक जैसे नींद से उठे हों। हम दोनों एक साथ बोले- ‘काफी’
हम भूल ही गए थे कि मैंने साड़ी काफी बनाने के लिए उतारी थी ना कि मम्मे दबवाने के लिए और मैं काफी बनाने चली गई।
काफी बनाते-बनाते मैं सोच रही थी, लड़का तो पट गया है, मम्मे तो खूब दबा गया, अब चूत मरवाना मुश्किल नहीं होगा।
सोच कमला सोच, जैसे मम्मे दबवाए हैं वैसे ही चूत मरवाने का कोई तरीका सोच।
इतना आसान नहीं है, मम्मे तो उसने खुद खुलवा दिए नए ब्लाउज सिलवा कर अब चूत कैसे खोलेगी। कुछ तो करना पड़ेगा।काफी बना कर मैं भाई के पास गई और काफी मेज पर रख दी और उसके सामने खड़ी हो गई। वो सोफे पर बैठा था और मैं उस के सामने खड़ी थी जिससे मेरी चूत का उभार ठीक उसके मुँह के सामने था। नंगी कमर भी खुल के उसके सामने थी। वहाँ खड़े रहने के लिए मैंने बात करनी शुरू की।
मैंने उसके कंधों पर हाथ रख कर कहा- भैया काफी बहुत गर्म है, जरा संभल कर पीना।
"अरे यह क्या ! कल की कॉफी का कप तो यहीं पड़ा है।" भैया पीछे मुड़ कर कप उठाने लगे तो मैंने कहा- रुको मैं उठा लेती हूँ।
और मैं भैया के पीछे पड़े कप को उठाने के लिए जैसे ही झुकी मेरी चूत भैया के मुँह पर दब गई।
अरे यह तो मैंने सोचा ही नहीं था, बिना सोचे ही रास्ता निकल आया। मैंने चूत को उसके मुँह पर अच्छी तरह दबाया और कप उठाया।
भैया ने अजीब सा मुँह बनाया तो मैंने कहा- इतनी भी भारी और खुरदरी नहीं हूँ, देखो नर्म सी हूँ और मैंने दोनों हाथों से पकड़ कर भैया का मुँह अच्छी तरह से अपनी चूत पर रगड़ लिया।
भैया मुस्कराए और बोले- वैसे तो तू पतली है पर जहाँ जहाँ मांस होना चाहिए वहाँ वहाँ है।
शायद भैया कहना चाहते थे कि मेरी चूत बहुत गद्देदार है, पर शरमा रहे थे।
मैंने पूछा- सच कह रहे हो?
तो उसने मेरे चूतड़ों पर हाथ रख कर जोर से अपने मुँह को मेरी चूत पर रगड़ा। मेरा पेटीकोट चूत से चिपक गया और पेटीकोट में से चूत का आकार साफ दिखाई देने लगा। ऐसे ही खड़े-खड़े मैं बहुत देर तक बातें करती रही।
बीच-बीच में भैया कुछ कसम खाना चाहते तो इशारा समझ कर मैं झुक जाती और वो मम्मा दबा कर कहते 'तेरे दिल की कसम।'
धीरे-धीरे भैया की हिम्मत बढ़ी और अब वो ब्लाउज के अंदर हाथ डाल कर पूरा मम्मा दबाते और कहते 'तेरे दिल की कसम !'
ऐसे बात करते-करते कॉफी खत्म हो गई और हम अपने-अपने कमरे में सोने को चले गए।
अपने कमरे में जाकर मैं खुद को कोसने लगी। सारा दिन मेहनत से उसको गर्म किया और अब उसे सोने को जाने दिया, 'कोई बहाना करके रोकती' यह सोचते-सोचते मैंने अपना ब्लाउज उतारना शुरू किया। ब्लाउज दो डोरियों से बंधा था।
मैंने ऊपर की रस्सी तो खोल ली, पर नीचे की रस्सी खोलने की बजाय उसमें दो गांठें और बांध दीं और सोचा भैया को कहूँगी खुल नहीं रही हैं। भैया के कमरे में जाने लगी तो देखा भैया तो खुद ही मेरे कमरे की ओर आ रहे हैं।
भैया बोले- अरे, मैं पूछने आया था कि वो तुम कह रही थी ना तुम्हारे मम्मों में दूध भर जाता है और दर्द होता है।
मैं बोली- हाँ भैया, बहुत दर्द हो रहा है, आज तो वो बाई भी नहीं आई।
भैया बोले- तो क्या अब उसे बुला कर लाऊँ?
"क्या बात कर रहे हो भैया?" मैं बोली- रात के 12 बजे हैं।
भैया बोले- तो क्या रात भर दर्द में रहोगी?
मैं मुस्करा कर बोली- भाई, एक और बच्चा है, जो इस वक्त मेरी चूची चूस सकता है, पर पता नहीं वो मानेगा नहीं !
भैया बोले- अरे तू उसकी चिन्ता न कर मुझे बता, मैं उस को मना लूंगा। तू मुझे बता वो है कौन?
मैंने पूछा- सच में उसे मना लोगे?
भैया बोले- हाँ तेरे दिल की कसम !
और उसने मेरा मम्मा दबा दिया।
ब्लाउज की ऊपर की रस्सी तो खुली ही थी पूरा मम्मा उछल के भाई के हाथ में आ गया। भाई कन्ट्रोल नहीं कर पाया और उसने मम्मे दबाते-दबाते मेरा मुँह चूम लिया। यही तो मैं चाहती थी कि भाई अपने आप पर काबू ना रख सके और कभी इसी तरह बेकाबू हो कर मेरी चूत ही मार ले।
भैया ने चुम्मा लेते ही कहा- सॉरी गलती हो गई, बुरा तो नहीं माना?
मैंने कहा- हाँ गलती की, तुमने जो सॉरी बोला। पागल तू प्यार करेगा तो मैं बुरा मानूंगी क्या? और अगर यह गलती है तो यह गलती रोज करना। करेगा ना? खा कसम !
और भैया ने मेरे दोनों मम्मे, जो इस समय पूरे नंगे थे, जोर-जोर से दबा कर कहा- तेरे दिल की कसम।
और मुझे बहुत चूमा। चूमते-चूमते भैया ने मेरे होंठ चूस लिए। फिर अपनी जीभ मेरे मुँह में डाल कर मेरा पूरा मुँह अन्दर से चाट लिया और साथ साथ मेरे मम्मे दबाता रहा। बहुत मजा आ रहा था जैसे मुँह की चुदाई हो गई हो।
फिर भैया ने कहा- बता ना वो लड़का कौन है जो इस समय तेरे मम्मे चूस सकता है।
मैंने कहा- पहले मेरे ब्लाउज की डोरी तो खोलो। पता नहीं कैसे इतनी कस गई है।
भाई ने रस्सी देखी तो बोला- अरे तुम्हारे शरीर पर तो रस्सी के निशान पड़ गए हैं। दर्द नहीं हो रहा?
मैंने बताया, "मुझे अक्सर ये निशान पड़ जाते हैं फिर खुद ही ठीक हो जाते हैं। परवाह मत करो।"
"अरे परवाह क्यों नहीं होगी? भाई ने कहा, "दवा लगा दूं?
मैंने कहा- नहीं जरूरत नहीं।
भाई ने वहाँ चाट लिया। शरीर में एक सनसनी सी हुई।
भाई ने पूछा- कुछ ठीक लगा?
मैंने कहा- बहुत अच्छा लगा।
उसने पूछा- और करूँ?
मैंने ‘हाँ’ कही और उसने चाटना शुरू कर दिया।
मैंने कहा- भैया मैं लेट जाऊँ, रस्सी खोलना आसान हो जाएगा।
और मैं बिस्तर पर उल्टी लेट गई। भैया भी बिस्तर पर बैठ कर मेरी कमर निहारने लगे। कमर पर हाथ फेरते और कहते, "अरे यहाँ भी कुछ है।" और वहाँ चाट लेते। इस तरह उसने मेरी सारी कमर पर हाथ फेरा और जगह-जगह चाटा बहुत मजा आ रहा था।
वो बस करने लगे तो मैंने कहा- यहाँ भी बहुत रस्सी चुभी थी और मैंने पेटीकोट के नाड़े की तरफ इशारा किया।
"अरे बाप रे ! ये तो बहुत ज्यादा है इतना कस कर क्यों बांधा?" भैया बोले, "नाड़ा थोड़ा ढीला करो तो कुछ करूँ।"
मैंने नाड़ा ढीला किया और पेटीकोट को थोड़ा नीचे किया। थोड़े से चूतड़ भी बाहर को आ गए। भैया ने कमर पर चूमा-चाटी की और बीच-बीच में चूतड़ों को भी सहला लेते।
फिर उसने कहा- ये घाव तो चारों तरफ होगा, आगे की तरफ भी होगा। जरा घूमो तो।
और मैं झट से घूमी, मैंने ये परवाह नहीं की कि पेटीकोट का नाड़ा खुला है। मेरे पलटते ही पेटीकोट सरका और दोनों टांगों के बीच चूत का उभार खुल के बाहर आ गया।
भाई ने मेरी कमर दोनों हाथों से पकड़ी और और कमर को हर तरफ से चाटने लगा। रस्सी का घाव तो एक बहाना था, असली मकसद तो चूत के आस पास चटवाना था।
भाई ने जैसे ही चूत के उभार को चाटा मैं उछल सी गई।
भैया ने पूछा- क्या हुआ?
मैंने कहा- कुछ नहीं।
कैसे बताती के तेरे दांत छूने से चूत में करंट दौड़ गया था। भाई ने कस कर चूतड़ों को पकड़ा और दबा-दबा कर चूत के उभार को चूस डाला। मुझे चूमने चटवाने में इतना मजा कभी नहीं आया।
मेरे बदन को चूमने चाटने के बाद भाई ने पूछा- अरे तूने बताया नहीं, इस समय वो कौन सा बच्चा है जो तेरी चूची चूस लेगा?
मैं घबरा सी गई। मैं तो इसी से चुसवाने की बात सोच रही थी। अब तक सारी चुम्मा-चाटी किसी बहाने से हो रही थी। अब साफ कहने में डर सा लग रहा था। कहीं सारा बना बनाया खेल ही न बिगड़ जाए।
मैंने कहा- छोड़ो अगर उसने मना कर दिया तो मन खराब हो जाएगा।
भैया बोले- अरे मैंने कहा था ना मैं उसे मना लूंगा। बोल न कौन है वो।
मैंने फिर कहा- छोड़ो।
तो भैया ने कहा- ऐसे कैसे छोड़ दें यार, तेरे मम्मों पर हाथ रख कर कसम खाई है, हम उसे मना लेंगे।
मैंने कहा- सिर्फ हाथ रख कर कसम खाई है ना ! कोई जुबान रख कर तो कसम नहीं खाई।
भैया ने कहा- क्या मतलब?
तो मैं भैया के गले से चिपक गई और बोली- तू चूस ले।
भैया बोले- सच में मुझ से चुसवाएगी।
हजारों कहानियाँ हैं फन मज़ा मस्ती पर !


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