Friday, March 7, 2014

FUN-MAZA-MASTI चट मंगनी चट ब्याह-5

FUN-MAZA-MASTI

  चट मंगनी चट ब्याह-5


उसने जल्दी से लैपटॉप की स्क्रीन नीचे कर दी, और सामने बिस्तर पर लेटी माँ के बगल धीरे से आकर बैठ गई। सामने लेती हुई स्त्री उसकी माँ और सबसे खास दोस्त थी, और, इस समय वो दुनिया की सबसे खूबसूरत स्त्री भी थी। पल्लवी की दृष्टि माला की योनि की तरफ गयी - सुन्दर, गुलाब की पंखुड़ी जैसी, रंग थोडा गहरा हो गया था, शायद अभी अभी सम्पन्न हुई काम-क्रिया के कारण। हाँलाकि भगोष्ठ पर बालों की अच्छी तादात थी - लम्बाई में मुश्किल से आधा इंच, लेकिन घने। माँ का शरीर एकदम मस्त है, पल्लवी ने सोचा। उसकी दृष्टि अब माला के स्तनों पर थी। उसको आज सुबह ही किया गया स्तन-पान याद आ गया, और माँ को ऐसी हालत में देख कर उसका मन पुनः स्तन-पान करने का हो गया। 

उधर, पल्लवी ने धीरे से माँ के दाहिने तरफ का निप्पल अपने मुँह में ले लिया और अपने होंठो से हल्का सा दबाव डाला। वो नहीं चाहती थी की माँ जाग जाए, इसलिए अगर वो थोड़ी देर उनके स्तनों को दुलार कर पाती, तो उतना ही उसके लिए काफी था। अब रूद्र से रहा नहीं जा रहा था - पल्लवी को माला का स्तनपान करते देख कर उसने सोच लिया की आज वो भी माला के स्तन पिएगा। वो भी माला के बगल आकर लेट गया, और माला के बाएँ स्तन को अपने हाथ में ले लिया। माला का स्तन उसके हाथ में पूरी तरह समां गया - माला के स्तन पल्लवी के मुकाबले काफी कोमल और मुलायम थे। उत्सुकतावश उसने अपना अंगूठा माला के स्तनाग्र पर फिराया। स्तनाग्र तुरंत जग कर उठ गया। ये रूद्र के लिए बहुत ही कामुक दृश्य था। उसने तुरंत अपना मुह खोल कर माला के स्तन को समाहित कर लिया। पल्लवी रूद्र को रोक कर कहना चाहती थी की रूद्र ऐसा कुछ न करे जिससे माँ जाग जाए, लेकिन उसका खुद का आनंद आड़े आ गया। 

उधर रूद्र माला के स्तन को ठीक उसी तरह से प्यार कर रहा था जैसे वो पल्लवी के स्तनों को करता था। माला के स्तनाग्र के चारो तरफ वो अपनी गर्म जीभ फिरा रहा था। माला की चेतना वापस आ रही थी और उसको अपने स्तनों पर होती हुई हरकते महसूस हो रही थी। रूद्र अब जोश में आ गया था, और वो जोर से माला के स्तन चूसने लगा। पल्लवी की शुरुआत हाँलाकि सावधानीपूर्ण था, लेकिन अब वो भी पूरे मनोयोग से माला के स्तन चूस रही थी। माला ने अधखुली आँखों से देखा की दोनों बच्चे उसके दोनों स्तनों पर टूट पड़े थे।

स्तन माला के शरीर में शीर्ष कामोद्दीपक अंगो में से थे। उसके मन में सदैव यह इच्छा रहती थी की विराट पहले उसके स्तनों का मर्दन करे और फिर काम-क्रिया करे। लेकिन विराट ने कभी ऐसे नहीं किया। आज सवेरे ही पल्लवी द्वारा उसका स्तन-पान करने की संवेदना माला के मन पर एकदम ताज़ी ताज़ी बसी हुई थी। लेकिन, अब उस संवेदना मे रूद्र की छुवन का मिश्रण हो गया था। 

एक मर्द का स्पर्श, जो उसके स्तनों में आकृष्ट था........। 

जैसे जैसे स्तन-पान का समय बढ़ता जा रहा था, माला की साँसे और गहरी होती जा रही थी, साथ ही साथ उसकी योनि से एक परिचित संवेदना आने लगी थी। माला की वापस आती चेतना पर कामुकता का बुखार चढ़ने लगा और उसकी आँखें वापस बंद हो गयी। पल्लवी और रूद्र, दोनों के ही स्तन चूसने का तरीका इतना अलग था की माला को दोनों स्तनों से भिन्न प्रकार की अनुभूति हो रही थी। लेकिन दोनों ही प्रकार की अनुभूति का सम्मिलित प्रभाव बहुत ही मादक था।

माला उन्माद में यह भूल गयी थी की वह उन दोनों के सामने पूर्णतः नंगी पड़ी हुई है। उसका हाथ उसकी नंगी योनि पर आ जमा और उसकी उंगलियाँ भगनासे की मालिश करने लगी। माला का शरीर उत्तेजना से पहले ही कांपने लग गया। इस बार स्तन-मर्दन और योनि-मर्दन दोनों के ही सम्मिलित प्रभाव से माला का चरमोत्कर्ष और भी बढ़ गया था। 

माला की साँसे उखड गयी और उसके गले से घुटी घुटी गहरी साँसों की आवाज़ आने लगी। पल्लवी और रूद्र दोनों ने ही देखा की माला का शरीर ऐंठने लग गया था - वो लोग समझ गए की माला इस समय उन्माद के सबसे शीर्ष पर है। आधे घंटे के भीतर ही माला को दूसरा चरम आनंद मिल गया। बिना कहे सुने वो पुनः निढाल हो कर अपने बिस्तर पर गिर गयी।


रूद्र ने ऐसा दृश्य पहले भी देखा था - जब पल्लवी स्खलित होकर निढाल हो जाती थी - लेकिन, माला को ऐसे करते हुए देखना बहुत ही मादक था। सामाजिक वर्जनाओं के कारण उसको यह समझ आ रहा था की अभी अभी यह जो भी कुछ हुआ था वह सही नहीं था, लेकिन फिर भी उसको बहुत मज़ा आया। रूद्र का शरीर माला के खूबसूरत शरीर की उत्तेजक गर्मी के जवाब में समुचित प्रतिक्रिया करने लगा। पल्लवी और रूद्र की आँखें छण भर को मिली, फिर पल्लवी की नज़र रूद्र के पजामे पर चली गयी। वहां पर फिर से एक तम्बू बन चुका था। 

पल्लवी ने माला को देखा - वो गहरी नींद में लग रही थी। "जनाब के क्या इरादे हैं?" पल्लवी ने धीमी आवाज़ में पूछा। जवाब में रूद्र सिर्फ मुस्कुरा कर रह गया।

"आई एम अ लिटिल सोर देअर। बट आई गेस आई कैन डू इट वन्स मोर।"

अब रूद्र पल्लवी को कैसे बताए की वो माला की योनि की नाप लेना चाहता है। लेकिन पल्लवी के साथ रति-क्रिया में उसको हमेशा रोमांच और मज़ा आता था - इसलिए उसको कोई आपत्ति नहीं थी।

"क्यों न हम लोग यही पर सेक्स करें?" रूद्र ने सुझाव दिया। "यहाँ? अगर माँ जाग गयी तो?"

"अरे! जाग गयी तो शी कैन ज्वाइन अस इन थे एक्ट!" रूद्र ने मुस्कुराते हुए कहा। 

"हाँ हाँ..... तुम तो चाहते ही यही हो। अच्छा, अब बाते कम, और काम ज्यादा....... उतारो न!" पल्लवी ने उसको एक इशारे से पजामा उतारने को कहा।

"यू डू द होनर्स!"

यह सुन कर पल्लवी का हाथ तुरंत रूद्र के जघन पर पहुच गया। पजामे के ऊपर से ही उसने रूद्र के लिंग को अपनी मुट्ठी में लेकर दबाया। लिंग इतना ज्यादा कड़ा था की दब ही नहीं सका। पल्लवी ने बिस्तर से उठ कर, रूद्र के पास जाकर उसके पजामे को नीचे सरका दिया। रूद्र का लिंग पूरे गौरव के साथ स्तंभित था। 

पल्लवी अभी अपना निकर उतार ही रही थी की रूद्र ने कुछ नया करने का सोचा। सामने माला की योनि खुली पड़ी थी। उसने शिश्नाग्रच्छाद को पीछे सरकाया और अपने गुलाबी शिश्नाग्र को माला की योनि से हल्का सा स्पर्श कराया। पल्लवी ने उसको यह करते हुए देखा। उसके मन के एक हिस्से ने तुरंत विरोध करने की सोची, लेकिन दूसरे हिस्से को यह बहुत ही उत्सुकतापूर्ण लगा। रूद्र ने पल्लवी को देखा, और फिर उसकी योनि को। 

दो-दो योनियाँ! इससे अधिक सौभाग्य क्या हो सकता है एक आदमी के लिए? लेकिन रूद्र थोडा ठिठक गया। माला के साथ ऐसा कुछ भी करना गलत होगा - रूद्र अभी भी शील-सिद्धांत को तोड़ नहीं पाया था। लेकिन उसका मन बहुत हो रहा था की एक बार माला के अन्दर जा कर देखा जाये की कैसा महसूस होता है। उसने पल्लवी को एक प्रश्नवाचक दृष्टि से देखा। पल्लवी पूरी तरह समझ रही थी की रूद्र क्या सोच रहा था और क्या चाहता था। 
 
 
'रूद्र का लिंग उसकी माँ की योनि के अन्दर कैसा लगेगा?' पल्लवी ने अन्दर ये विचार लहरों के सामान आ-जा रहा था। उधर रूद्र ने अपना लिंग-मुंड माला की योनि के ऊपर कुछ इस तरह टिकाया की उसकी योनि के दोनों होंठों ने रूद्र के गुलाबी शिश्नाग्र को घेरे में ले लिया। सामने जो कुछ भी हो रहा था वह रोचक और डरावना दोनों था। लेकिन पल्लवी कुछ भी रोकने में अपने को असमर्थ पा रही थी। बस बेबस होकर देख रही थी। उसकी खुद की योनि में एक आग सी लग गयी थी। 

रूद्र ने अब माला की दोनों जांघो को थोडा सा फैला दिया था, इस कारण उसकी योनि के होंठ खुल गए थे। अब उसका लिंग कोई एक सेंटीमीटर माला की योनि में जाने लग गया था। माला अभी तक सोई पड़ी थी। रूद्र ने बहुत सावधानीपूर्वक माला की जांघो को और फैला दिया, इससे उसकी योनि का मुह और खुल गया। उसका लिंग किसी योनि के अन्दर जाने के लिए बुरी तरह से तड़प रहा था। रूद्र ने अपने दोनों अंगूठों की सहायता से माला की योनि का मुख इतना खोल दिया की उसका लिंग अन्दर जा सके। उसने एक बार फिर से पल्लवी की ओर देखा। पल्लवी मंत्रमुग्ध होकर यह दृश्य देखे डाल रही थी। उसको लगा की रूद्र उसकी माँ के अन्दर जाने के लिए उसकी अनुमति मांग रहा था। पल्लवी ने बहुत धीरे से 'हाँ' में सर हिलाया।

अब रूद्र की झिझक थोड़ी कम हो गयी थी। उसने धीरे धीरे से जोर लगाना शुरू किया - माला की योनि पल्लवी के मुकाबले ढीली थी, इसलिए उसका लिंग आसानी से अन्दर जाने लगा। पल्लवी का मुंह आश्चर्य से खुला रह गया - रूद्र के लिंग की कम से कम एक तिहाई लम्बाई इस समय उसकी माँ की योनि में घुस चुका था। पल्लवी ने महसूस किया की उसकी योनि में से एक प्रकार का रिसाव होने लगा था, जो योनि से बाहर भी आने लग गया था। ऐसा उसने कभी नहीं महसूस किया था - कामोत्तेजना की एक इन्तहा थी। आज उसको अपनी कामुकता के बारे में न जाने क्या क्या मालूम पड़ने वाला था!

बिना प्रतिरोध के आगे बढ़ते हुए लिंग ने आधा सफ़र पूरा कर लिया था। रूद्र को ज्यादा मज़ा नहीं आया। उसको पल्लवी की योनि की पकड़ और जकड अच्छी लगती थी। रति के समय जिस प्रकार पल्लवी की योनि की दीवारें उसके लिंग की मालिश करती थी, वह एहसास यहाँ नहीं था। ऐसा संज्ञान होते ही रूद्र को माला के साथ ऐसा करना पाप लगने लगा। बुद्धि-विवेक ने तेज़ी से कामुकता पर विजय प्राप्त कर ली। रूद्र ने तुरंत ही अपना लिंग माला की योनि से बहार निकाल लिया।
 
 पल्लवी ने देखा की रूद्र का लिंग माला की योनि से बाहर आ गया है। जितना लिंग माला की योनि में गया था, वह उसके योनि-रस से भीग गया था, और एक चमक आ गयी थी लिंग पर। वह कुछ समझ पाती, उससे पहले ही रूद्र की मज़बूत बाँहों ने पल्लवी के कन्धों को पकड़ लिया और उसको बिस्तर पर हलके से धकेल दिया। पल्लवी का रक्त-चाप बढ़ गया था। उसकी योनि का मुह होने वाली घटनाओं के पूर्वानुमान से खुलने और बंद होने लग गया था। रूद्र के सामने अब वो स्त्री लेती हुई थी जिसको वह अपने जीवन में सबसे अधिक प्रेम करता था। अभी जो कुछ भी हुआ वह एक गलती थी और वह इस गलती को सुधारना चाहता था - पल्लवी को खूब प्यार करके।

"आई लव यू" पल्लवी को रूद्र की प्रेम-रस में डूबी आवाज़ आई। 

"ओह गॉड! आई लव यु द मोस्ट, रूद्र" ऐसा बोलते हुए उसने कामनापूर्ण होकर अपनी टाँगे खोल दी। 

रूद्र पल्लवी के ऊपर आकर झुक गया, उसके हाथ उसके बोझ को सम्हाल रहे थे। उसने अपना लिंग-मुंड ठीक उसी प्रकार पल्लवी की योनि-मुख पर रखा जैसे उसने अभी अभी माला की योनि पर रखा था। पल्लवी के गले से पूर्वानुमान के कारण एक हलकी सी आह निकल गयी। 

"आज मैं तुमको खूब प्यार करूंगा" रूद्र की वचन भरी आवाज़ आई।

रूद्र ने अपना लिंग पल्लवी की योनि में थोडा सा डाला, फिर निकाल लिया... पुनः थोडा सा डाला और पुनः निकाल लिया। ऐसा दो-तीन बार करने के बाद उसने अपने लिंग-मुंड को उसकी योनि की दरार पर कुछ देर फिराया, और फिर से अपना लिंग अन्दर डाल दिया। पल्लवी इस तरह की हरकतों से एकदम पागल हो गयी थी। रूद्र की हर हरकत से पल्लवी के गले से आनंद की कराह निकल जा रही थी। रूद्र ने अपना लिंग पल्लवी के अन्दर और घुस दिया और एक धीमी लय से काम-क्रिया आरम्भ कर दी। बीच बीच में वो रुक कर अपना लिंग बाहर निकाल लेता और अपने लिंग-मुंड को योनि की दरार पर कुछ देर फिराता और पुनः सम्भोग करना शुरू कर देता। ऐसा जब उसने तीसरी बार किया तो पल्लवी के शरीर में एक कंपकपी सी छूट गयी। रूद्र समझ गया की पल्लवी को चरम-आनंद आ गया। लेकिन, उसने पल्लवी को छोड़ा नहीं। 

उसने पुनः पल्लवी को भोगना शुरू कर दिया, इस बार गति थोड़ी तेज़ थी। पल्लवी उत्तेजना की अवस्था में जल्दी ही आ गयी। उसने रूद्र का चेहरा अपनी ओर खीचा और उसको भावावेश में उसको बेतहाशा चूमने लगी। चूमते हुए उसने रूद्र के गले, और कान की लोलकी को हलके हलके काट भी लिया। पल्लवी के उन्माद ने रूद्र की कामुकता और प्रेम दोनों को बढ़ा दिया - उसने अपने शरीर को थोडा समायोजित करके पल्लवी की टी-शर्ट के ऊपर से ही उसके स्तनाग्र को मुह में लेकर चूसना और चाटना शुरू कर दिया। उसको मालूम था की पल्लवी को अपना स्तन चूसे जाने से बहुत मज़ा आता है। पल्लवी का दूसरा चरम-आनंद तेज़ी से निकट आता जा रहा था - रूद्र को भी महसूस हुआ की उसका खुद का चरम-आनंद भी पास में है। सम्भोग की गति और तेज़ हो गई - पल्लवी की रस से भीगी योनि में रूद्र के लिंग के अन्दर बाहर जाने से 'पच-पच' की आवाज़ आने लग गई थी। कमरे में एक कामुक माहौल बन चला था। 

लगातार चूसे और चूमे जाने से पल्लवी की टी-शर्ट के उस हिस्से पर, जहाँ पर स्तानाग्र होते हैं, रूद्र की लार से गीला निशान पड़ गया था और वहां से पल्लवी के सुन्दर निप्पल दिखाई देने लग गए थे। उन्माद के कारण पल्लवी की योनि और कस गयी थी और रूद्र के लिंग को बुरी तरह से दुह रही थी। आखिरकार दोनों का चरम-आनंद आ ही गया। पल्लवी के गले से से एक चीख निकल गयी, और रूद्र के लिंग से वीर्य की एक मोटी धार छूट पड़ी। लेकिन रूद्र का लिंग पल्लवी के अन्दर बाहर तब तक होता रहा, जब तक उसके लिंग से वीर्य की आखिरी बूँद तक पल्लवी के अन्दर नहीं समां गयी। 

संतुष्ट होकर रूद्र ने पल्लवी के बगल लेटकर उसको अपनी बाहों में समां लिया। रूद्र ने पल्लवी की टी-शर्ट के अन्दर हाथ डाल कर उसके स्तन को चंचलता से छेड़ना शुरू कर दिया - चंचलता से, कामुकता से नहीं। पल्लवी प्रेम रस से सराबोर हो गयी। 

उसने मीठी आवाज़ में पूछा, "व्हाई डिड यु स्टॉप?" 

"बिकॉज़ आई लव यु द मोस्ट! आई कैन नॉट लिव बींग अनफैथ्फुल टू यु।"

"रूद्र, आई ऍम योर स्लेव। यु कैन डू व्हाटएवर यु वांट, एंड आई विल नॉट माइंड।"

"ह्म्म्म! देन इट इस इवन मोर रीज़न टू बी ऑनेस्ट विद यु।" रूद्र ने मुस्कुराते हुए बोला।

यह सुन कर पल्लवी जोर से रूद्र के शरीर से चिपक गयी। 
kramashah.................
 
 






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