Friday, March 14, 2014

FUN-MAZA-MASTI जालिम जवानिया

FUN-MAZA-MASTI

 जालिम जवानिया 
लास्ट मंत की बात है. मेरे मोहल्ले में बहुत रिच फॅमिली रहने के लिए आई. उनकी बेटी स्नेहा को मैं पसंद करने लगा था और शायद वो भी. उफ्फ क्या लड़की है, क्या फिगर है उसका. 34-26-36. उसके फिगर को देख किसी के भी मूह में पानी आजाए. मैं तो उसकी इस फिगर का दीवाना हूँ. हम दोनो पहले आपस में थोड़ी जान-पहचान हुई. फिर धीरे धीरे यह जान-पहचान बढ़ती गयी. आपस में थोड़ा बहुत हँसी मज़ाक चलता था. आपस की यह हँसी मज़ाक हमारे प्यार मे बदल गयी. लेकिन 5-10 मिनिट की रोज की मुलाकात के अलावा हम आपस मे ज़्यादा नही मिल पाए थे. मौका ही नही मिला. हमारे दोनो के बीच आग लगी हुई थी. इसीलिए मुलाकात का मौका ढूँढने मैं लगे हुए थे. स्नेहा की कज़िन, जिसे हम लोग शीतल के नाम से पुकारते थे, हमारी राजदार थी. शीतल भी स्नेहा की हम-उम्र और बहुत ही खूबसूरत है. स्नेहा और शीतल आपस में कोई बात छुपाती नही थी. इसी वजह से शीतल को मेरा राज (स्नेहा से प्यार का) मालूम चल गया. एक दिन मैं कॉलेज से घर आया तो स्नेहा मेरे घर में आई हुई थी. मेरे अंदर आते ही उसने मेरी मदर से बात करना छ्चोड़ कर मुझसे कहा, "रौनक, मुझे आपसे कुच्छ काम है. क्या कर देंगे." मेरे से वो इस प्रकार पेश आराही थी ताकि मेरी मदर को हमारे प्यार का राज नहीं मालूम पड़े. मैने भी हमारे प्यार को राज रखते हुए भोला बन कर कहा, "अगर करने लायक हुआ तो ज़रूर कर दूँगा." स्नेहा ने कहा, "मेरा कंप्यूटर खराब हो गया है. क्या आप ठीक कर देंगे." मैने कहा, "क्यों नही. अगर ज़्यादा खराब नही हुआ तो ज़रूर कर दूँगा." उसने मुस्करा कर कहा, "ठीक है. प्लीज़ आप 8.00 बजे के करीब आजाए." मैं ठीक 8.00PM को उसके घर पहुँच गया. उसके मम्मी, पापा और उसकी छ्होटी सिस्टर और ब्रदर कहीं बाहर मॅरेज पर जा रहे थे. स्नेहा के पापा ने मुझे देखते ही कहा, "बेटा स्नेहा का कंप्यूटर ठीक कर देना. वो और उसकी कज़िन अंदर तुम्हारा इंतेज़ार कर रहे हैं. हमारे आने तक उनके पास रहना." मैने कहा, "ओके अंकल." इसके साथ ही वो लोग घर से मॅरेज अटेंड करने निकल गये. मैं अंदर गया और स्नेहा को आवाज़ दी. वो आवाज़ सुनते ही बाहर आगाई. मुझे देखकर वो मुस्कराई और भागकर मेरे सीने से लग गई. मैने कहा, "यह क्या कर रही हो? अभी मम्मी-पापा वापस आसाकते हैं." तो स्नेहा ने कहा, "मुझे पता नही क्या हो जाता है तुम्हें देखकर." उसके भारी भारी बूब्स "बिग मेलान्स" मुझसे लग रहे थे. मुझे उसके बड़े बूब्स के स्पर्श का काफ़ी मज़ा आ रहा था.

मुझसे लिपटी हुई स्नेहा मुझे अपने कंप्यूटर वाले रूम में लेगई. वहाँ उसकी कज़िन शीतल पहले से ही मौजूद थी. शीतल को पहले कई बार देख चुका था लेकिन आज उसको देखकर मुझमे एक भयंकर आग लग गयी. वो इतनी खूबसूरत लग रही थी कि स्नेहा के साथ-साथ दिल चाह रहा था कि उसे भी अपनी बाहों में भर लूँ. ब्यूटिफुल ब्रेस्ट्स आंड फिगर. 36- 28-38. उपारसे उसने बड़े गले वाली टाइट टी-शर्ट पहनी हुई थी. मैं लगातार उसके मम्मे देख रहा था. स्नेहा और शीतल ने मेरी नज़रों की सनसनाहट और बढ़ती भूख को महसूष कर लिया. मैने तुरंत नज़रें झुका ली. मैने स्नेहा से कहा, "कहाँ है कंप्यूटर?" स्नेहा ने पलट कर जवाब दिया, "शीतल के मॅम से नज़रें हटाओ तो इधर पड़ा कंप्यूटर भी शायद नज़र आजाता!" उसका जवाब सुनकर मेरे होश उड़ गये. मेरे चेहरे पर बोखलाहट को देखकर दोनो ने हँसना शुरू कर दिया. मुझे कंप्यूटर पर बैठा कर वो दोनो बाहर दूसरे रूम में चली गयी. मैने कंप्यूटर देखना शुरू किया. कंप्यूटर आराम से बूट हो गया. वो बिल्कुल ठीक था. मैं समझ गया कि स्नेहा ने बहाना बनाकर मुझे अपने घर में बुलाया है. उसकी इस समझदारी का लोहा मैं मान गया. लेकिन मेरे दिमाग़ में एक सवाल लगातार गूँज रहा था कि उसने शीतल को आख़िर यहाँ क्यों बुलाकर रखा है. मिलना हम दोनो को था तो शीतल आख़िर यहाँ क्या कर रही है. जितना सोचता उतना ही दिमाग़ परेशान हो रहा था. आख़िर इसका जवाब मिल गया. जवाब मिला 10 मिनिट बाद जब वो दोनो वापस रूम में आई. जब वापस आई तो उउफ़फ्फ़ मैं मर जाऊं. दोनो शॉर्ट

नाइटी पहन कर वापस आई. आह क्या जलवा था दोनो की उफनती जवानी का. दोनो ही नाइटी के नीचे कोई ब्रा नही पहने रखी थी. बगैर ब्रा के ट्रॅन्स्परेंट नाइटी से उनके मम्मे शेल की तरह बाहर आने को तड़प रहे थे. यह देख कर मैं तो पत्थर की मूर्ति की तरह खड़ा खड़ा उनको देखता ही रहा. मेरे पूरे बदन में लहू ज़ोर-ज़ोर से दौड़ने लगा. मेरा लंड लोहे की तरह खड़ा हो गया. मेरा लंड अंडरवेर को फाड़ कर मेरी पॅंट की चैन से बाहर आने को उतावला हो रहा था. अपने बढ़ते हुए उभार को छिपाने की कोई जगह नही बची. फिर भी मैने भोले बनते हुए उस समय पूछा, "कंप्यूटर तो बिल्कुल ठीक है." स्नेहा मेरे पास आते हुए अपनी गरम सांसो को मेरे चेहरे पर छ्चोड़ती हुई धीमी आवाज़ में बोली, "कंप्यूटर तो ठीक ही था. लेकिन हम दोनो का सेट-अप बिगड़ा हुआ है. हम दोनो को ठीक कर दोना प्लीज़…" स्नेहा जहाँ मेरे पास आकर मुझसे यह कह रही थी वहीं शीतल ने मेरे बालों पर हाथ फेरते हुए मेरे गालों को सहलाना शुरू कर दिया. शीतल की उंगलियाँ मेरे शेव्ड चेहरे पर धीरे-धीरे रेंगने लगी. अपनी पतली अंगूलियों से मेरे कान, मेरी गर्दन को सहला रही थी. वहीं स्नेहा ने मेरे चेहरे से चिपकते हुए अपनी जीभ से चाटने लगी. दोनो जालिम जवानिया मेरे चेहरे से खिलवाड़ कर रही थी. उन दोनो की गरम सांसो को मैं एकदम नज़दीक से महसूष कर रहा था. दोनो की साँसे भारी हो चली थी. उनकी इन हर्कतो से मैं अब अपने काबू में नही रहा. अपना हाथ मैने शीतल की नाइटी के अंदर डाल उसके मम्मे टटोलने लगा. उफ्फ क्या मम्मे थे उसके. बड़े साइज़ के मम्मे कई बार कपड़े के बाहर से अच्छे लगते हैं लेकिन बगैर कपड़ों के इतने सुन्‍दर नही लगते लेकिन शीतल के मुम्मे कपड़ों के बाहर जितने सुन्दर थे उससे कई गुना ज़्यादा सुंदर इस समय नाइटी से झलकते हुए लग रहे थे. मेरा दिल तो उन्हे बगैर कपड़ों के देखने के लिए बैचैन हो रहा था.   स्नेहा ने अपने होठों से मेरे होठों को चूमना चालू कर दिया. उसके मदमस्त भीगे हुए होठ मेरे होंठो को ज़ोर ज़ोर से दबा रहे थे.

अपनी जीभ को मेरे मूह के अंदर डाल कर मेरी जीभ के साथ "होककी" खेलने लगी. मेरे हाथ शीतल के मम्मे और उसकी चुचियों को दबा और मसल रहे थे. तभी स्नेहा ने मेरे कपड़े उतारने शुरू कर दिया. मेरी शर्ट उतार कर मेरी चेस्ट के बालों को चाटने लगी और खींचने लगी. मेरे से लिपट कर फिश की तरह मचलने लगी. इतने में शीतल ने मेरी पॅंट भी उतार दी. अब मैं सिर्फ़ अंडरवेर में था. स्नेहा मेरी छाती, मेरे गाल और मेरे होठों से खेल रही थी वहीं शीतल मेरे अंडरवेर के उपर से ही मेरे लंड को चाटने लगी. मेरा लंड "कुतुब मीनार" की तरह अंडरवेर के अंदर खड़ा था. अपनी जीभ से शीतल मेरे चिकू को चाट रही थी तो कभी उनको अपने मूह मे गप्प्प्प्प से दबा लेती. मैं अपने होश में था. दिल कर रहा था की अपना अंडरवेर निकाल फेंकू और शीतल के मूह में अपना लंड पेल दूं. लेकिन दोनो स्नेहा और शीतल इतना कुच्छ कर रही थी आग भड़काने के लिए की मैने सिर्फ़ इसका आनंद उठाना ही मुनासिब समझा. मैं अपनी तरफ से कोई हरकत नही कर रहा था. सिर्फ़ उनकी उफनती जवानी को देख रहा था और उनकी मेरे बदन के साथ खिलवाड़ को देख रहा था. इतने में भी मेरे होश अपनी जगह पर नही थे. अब स्नेहा अपने कपड़े उतारने लगी. अपनी नाइटी को उतार कर फेंक दिया. उसके मम्मे बड़े मगर सख़्त थे. एकदम उपर की और तने हुए. लेकिन जब मेरी नज़र उसके मम्मे से उसकी कमर पर से होते हुए नीचे की और गयी मैं कांप उठा. मैं तो स्नेहा की चूत देख कर पागल हो गया. वाकई में उसने अपनी चूत को काफ़ी संभाल कर बड़े जतन से रख कर सफाचत करके रखा था. गोरी-गोरी मक्खन सी मुलायम उसकी चूत पर एक भी बाल नही था. इतनी देर की हरकतों से हल्का सा रूस उसकी चूत से बाहर निकल रहा था. उसकी चूत देखकर मुझसे अब रहा नही गया. मैं ज़मीन पर लेट कर स्नेहा की चूत को अपनी नाक की गरम सांसो से और गरम करने लगा. उसकी चूत की गुलाबी रंगत मेरी

गरम सांसो से और गुलाबी हो गयी. मेरी चाहत बढ़ने लगी और मैने अपनी जीभ निकाल कर उसकी चूत के मूह को छ्चोड़कर बाकी जगह को चाटने लगा. मेरा इरादा स्नेहा को ज़्यादा से ज़्यादा भड़काने का था. मैं डाइरेक्ट उसकी चूत को जानभुजकर टच नही कर रहा था. स्नेहा के मूह से सिसकारियाँ निकालने लगी. वहीं शीतल भी लेट कर मेरे लंड को अंडरवेर के उपर से ही मेरे लंड को ज़ोर-ज़ोर से चाट रही थी. शायद उसका इरादा भी मेरी तरह ही था. स्नेहा मेरी इस तरह की हरकत से एक दम बैचैन हो उठी. उसकी बैचैनी ने उसे हिला कर रख दिया और मेरे बाल को पकड़ते हुए बोली, "प्लीज़…. चतो ना मेरी चूत को… क्यों तडफा रहे हो मुझे…. अपनी जीभ को मेरी चूत में डाआलूऊ…" मैं उसकी तड़फ़ को समझ कर उसके जिस्म की आग को और भड़काने में लगा था. मैं फिर भी उसकी चूत को टच नही किया. अपनी जीभ से उसकी झंघों को चाट रहा था. उसकी चूत के उपर झांतो को सॉफ किए हुए जगह को चाट रहा था. वहाँ चॅम्डी एकदम कोमल थी. उसने झाँते थोड़ी देर पहले ही सॉफ की थी ऐसा लग रहा था. यानी उन दोनो ने अपने घर वालों के बाहर जाने का प्रोग्राम मालूम होते ही तायारी शुरू कर दी थी. तभी पहले मेरे घर पर आकर मुझे शाम को बुलाना और फिर शाम को अपनी झांते सॉफ करना. अब शीतल ने आगे बढ़ कर मेरा अंडरवेर उतारना चाहा. लेकिन स्नेहा, जो मेरी हर्कतो से पागल हुई थी, ने कहा, "एक मिनिट रूको." वो बाहर गयी और सिसर ले कर आई और मेरे अंडरवेर को काट काट कर चिथड़े-चिथड़े कर दिया. मेरा लंड अंडरवेर की क़ैद से छूट कर फड़फड़ने लगा. स्नेहा ने मेरा लंड थाम लिया. मेरा लंड देखकर दोनो के चेहरे की चमक बढ़ गयी. उनके दिमाग़ में मेरे लंड के बारे में जो विचार थे उससे बढ़कर उसको पाया. ऐसा मैं उनके चेहरे की चमक देख कर बोल रहा हूँ. स्नेहा की चूत को मैने अभी तक डाइरेक्ट अपनी जीभ से टच नही किया था लेकिन स्नेहा ने मेरा लंड सीधे अपने मूह मैं डाल लिया. मेरे मूह से "अहह" निकल गयी. उसकी गरम और उसके थूक से भीगी जीभ कयामत ढा रही थी मेरे लंड को चुसते हुए.

स्नेहा अपनी जीभ से मेरे लंड को चूस-चूस कर ऐसा उतावला कर दिया कि मुझे लगा कि मेरा वीर्य पिचकारी मार कर अभी उच्छालकर बाहर निकलने वाला है. मैने जबरन अपने लंड को उसके मूह से निकाला और कहा, "मेरी जानेमन. ज़रा सब्र करो. नहीं तो अभी मज़ा किरकारा हो जेएगा." स्नेहा समझ गयी की मेरा लंड च्छुतने वाला है. उसने मेरे लंड को हाथ से पकड़कर उसे पूछकर कर कहा, "आरे. अभी क्यों पानी निकाल रहा है, ज़ालिम. अभी तो शो शुरू ही हुवा है." यह सुनकर हम सब हंस पड़े. अब शीतल ने अपने मम्मे मेरे सीने से लगाकर रगड़ने लगी. उसके अंगूर जैसे निपल मेरे सीने पर हल्के- हल्के चुभ रहे थे. अपने मम्मे रगड़ते हुए उसके मूह से सिसकारी निकल रही थी. मेरे लंड को आराम देने के लिए स्नेहा ने अपना मूह शीतल की जांघों मे डाल दिया और अपनी जीभ निकाल कर उसकी जांघों और चूत पर लगानी शुरू कर दी. शीतल तड़फ़ उठी इस हरकत से. वो मुझे नीचे धक्का देकर मेरे सीने पर लेट कर अपने मम्मो का बोझ मेरे गालों पर डाल कर अपनी दोनो जांघों को फैला दिया. जिससे शीतल को और जगह मिल गयी और उसकी चूत को आराम से चाट रही थी. शीतल के मम्मे मेरी आँखों के सामने किसी फलदार पेड़ के एकदम ताज़े फ्रूट की तरह लहरा रहे थे. ज़रूरत थी किसी माली की जो इनको संभालकर इनका रस पी सके और मैं वो माली बन कर उनको बारी बारी से चूसने लगा. शीतल अपनी चूत और मम्मे की चुसाइ से उत्तेजित हो कर ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाने लगी, "उफ़फ्फ़… मार डाला तुम दोनो ने… है-है… चूसो मेरी चूत को… उफ़फ्फ़… तुम भी मेरे मम्मो को चतो…. वाउ… क्या मज़ा आ रहा है… मेरे निपल्स को मूह में लेकर दांतो से चुभलेओ…. उफ़फ्फ़…. क्या करूँ मैं…. बड़ा मज़ा आ रहा है…. " शीतल की बातें मुझे दीवाना बना रही थी. मैने उसके मम्मे और उसके निपल को हल्के-हल्के अपने दांतो से काट रहा था. ज़ोर ज़रा भी नहीं लगा रहा

था. स्नेहा भी अपनी जीभ से उसके चूत के दाने को रगड़ रही थी. शीतल इतने जोरदार मज़े की वज़ह से अपने बदन को बार-बार झटका दे रही थी. मैने उसके एक मम्मे को अपने हाथ से मसल्ने लगा और दूसरे मम्मे को अपने होठों के बीच दबाकर ज़ोर- ज़ोर से चूस रहा था. तभी लगने लगा कि अब शीतल ज़्यादा देर टिकने वाली नहीं है. उसकी चूत का पानी अब च्छुतने वाला ही है. क्योंकि जिस तरीके के वो चिल्ला रही थी उससे लगने लगा कि  उसकी चूत अब अपना फव्वारा छ्चोड़ने वाली ही है, "ऊओफफफफ्फ़… अहह…. मैं मर गैिईईईईईई…. मैं मर जाऊंगी…. ज़ोर से चूस …. चूसो…. चूवसो ज़ूऊर से…. चूऊसो हरमजड़ी चूवसू… मुझ … क्या कर रही हो…. मैं छूटने वाली हूओन…." और उस के साथ ही उसकी चूत पानी छ्चोड़ने लगी. पानी छ्चोड़ते- छ्चोड़ते उसका पूरा बदन थर्रा उठा. शीतल का शायद यह सबसे बड़ा क्लाइमॅक्स था. वो ज़ोर-ज़ोर से साँसे ले रही थी. उसका पूरा बदन काँप रहा था. मैने उसके मम्मे को अपने मूह निकाल दिया और अपनी बाहों को उसकी कमर पर लपेटे हुए उसके होठों को अपने होठों से लगा लिया और देने लगा उसको फ्रेंच किस. उधर स्नेहा ने उसकी चूत को छ्चोड़ कर मेरे लंड को अपने मूह में ले लिया. मेरा लंड उसके मूह में उछाल कूद मचाने लगा. अब उसने शीतल को उठने का इशारा किया. जैसे ही शीतल मेरे उपर से उठी वैसे ही स्नेहा ने अपनी झंघों को चोडा कर अपनी चूत को मेरे लंड से रगड़ने लगी. अब वो मेरे लंड के उपर अपनी चूत की सवारी करने की त्यारी कर रही थी. उसकी प्यासी चूत का मूह मेरे लंड के सुपरे को अपने अंदर समाने के लिए बैचैन था. स्नेहा ने झटके से अपनी चूत के अंदर मेरे लंड को अपने में समा लिया. मेरा आधा लंड उसकी प्यासी चूत में चला गया. अब वापस थोड़ा उपर उठते हुए उसने दूसरा बड़ा झटका दिया तो उसकी चूत मेरे पूरे लंड को खा गयी. "उूउउइईई" मेरे लंड के अंदर जाते ही उसके मूह से प्यार भरी चीख निकल पड़ी. उसे इतने बड़े लंड के अंदर जाने का शायद थोड़ा दर्द हुवा होगा लेकिन 8-10 धक्कों के बाद उसे अपनी चूत चुद्वाने में मज़ा आने लगा. अब वो बड़े आराम से अपनी चूत को चुद्वा रही थी या कहूँ कि मेरे लंड को अपनी

चूत से चोद रही थी. शीतल इतनी देर में वापस गरम हो चुकी थी. लेकिन उसकी चूत को शायद 5-10 मिनिट के आराम की ज़रूरत थी इसीलिए उसने साइड में बैठकर स्नेहा और मेरी चुदाई को देखना बेहतर समझा. स्नेहा अपने चूतड़ को उच्छालना बंद कर अपने चूत के दाने को मेरी झांतो से रगड़ते हुए चुद्वा रही थी. चूत-के दाने की रगड़ाई में उसको ज़्यादा मज़ा आरहा था. तभी शीतल उठी और अपनी चूत मेरे मूह पर रखकर चुसवाने लगी. साथ ही वो स्नेहा के मम्मो से अपने मम्मो रगड़ने लगी और अपने होठों को उसके होठों से किस करने लगी. अब हालत इस प्रकार थी कि मैं नीचे चित लेता हुवा शीतल की चूत को चूस रहा था और मेरे लंड पर बैठी स्नेहा अपनी चूत को चुद्वा रही थी जबकि शीतल अपने मम्मे स्नेहा के मम्मे से और अपने होठ से उसके होठ को किस कर रही थी. स्नेहा की चूत अब जूस से एकदम भीग चली थी. अपने होठों को उसने शीतल के मूह से आज़ाद किया. उसे अब जो मज़ा आ रहा था वो उसकी ज़बान से बाहर निकलने लगा, "रगड़ मेरे मम्मे साली…. बहुत दिनो बाद मुझे चुदाइ का मज़ा मिला है…. चोदो मेरे राजा…. अपने लंड का झटका नीचे से दो मेरी चूत में…. आज खूब चुद्वाउंगी अपनी चूत को…. शीतल…. तूने आज तक अपनी चूत को चटवा कर ही मज़ा लिया है…. आज इसके लंड को अपनी चूत में डलवाना…. देख क्या मज़ा आता है…. चुदवाने में…. देख कैसा मूसल लंड है इसका…. उफफफ्फ़…. क्या मज़ा आ रहा है….. चोद मुझे….. है-है…. चोदो राजा मुझे…..शीतल… . तू भी आज ऐसा ही मज़ा लेना…..' अब स्नेहा ने शीतल के मूह को थोड़ा नीचे किया और अपना एक मुम्मा उसके मूह में दे दिया. शीतल उसके दोनो मम्मो को बारी- बारी से चाटने और चूसने लगी. मेरा लंड स्नेहा की चूत

में तूफान ला चुका था. अब जिस तेज़ी से वो चुद्वा रही थी लगने लगा कि अब वो भी अपने चरम पर पहून्च चुकी है. अब मेरे लंड को अपनी चूत के बीच ज़ोर से दबा लिया और ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाने लगी, "मेरी चूत का पानी निकलने वाला है… अब मैं छूटने वाली हूँ…. आईईइ…. मेरा पानी निकला…. निकला….. यह निकला……" स्नेहा ने अपनी चूत का पानी निकलते ही शीतल के चेहरे को उपर उठा कर अपने होठ उसके होठ में दे दिए और उन्हे चूसने लगी. थोड़ी देर में वो मेरे उपर से उठ गयी. उसकी चूत की काफ़ी दिनो बाद तमन्ना पूरी हुई थी. अब मैने ज़्यादा देर ना करते हुए शीतल को घोड़ी बनने के लिए कहा. अब शीतल की अब तक केवल चूसी हुई अनचूडी चूत की चुदाइ के लिए मेरा लंड उतावला होये जा रहा था. मैने स्नेहा को कहा, "स्नेहा डार्लिंग, शीतल पहली बार चुद्वा रही है तो थोड़ा दर्द तो होगा. इसके मूह का चुम्मा लेते हुए इसके मम्मे को मसलती रहना." तभी शीतल ने कहा, "मैं घोड़ी बन कर नही रह सकती. मुझे लेटे लेटे ही चोदो." मैने कहा, "कोई बात नहीं. सीधी लेट जाओ." इसके बाद मैने उसकी टाँगे उठा कर अपने शोल्डर पर रख लिया और साथ ही स्नेहा से कहा की जा कर आयिल ले कर आओ. वो जल्दी से गयी और आयिल ले कर आगाई. उसने थोड़ा आयिल मेरे लॅंड की सुपारे पर लगाया और थोड़ा शीतल की चूत में लगाया और उसकी चूत में अंगूली डाल कर थोड़ा अंदर की ओर भी लगा दिया. अब मैने अपना लंड उउकी चूत के मुहाने पेर टिका दिया और आहिस्ता आहिस्ता अंदर करने लगा. अभी तक उसे दर्द का एहसश नहीं हुवा था. शायद चुसवाने के कारण. अब मैने अपने चूतड़ को पीछे किया और एक करारा शॉट अपने लंड का उसकी चूत में दिया. लंड आधा उसकी चूत में चला गया. शीतल लंड के अंदर घुसते ही दर्द से चिल्ला पड़ी, "मुझे छ्चोड़ दो…. बहुत दर्द हो रहा है… ऊओफफफफफ्फ़ डाआारर्ड हो रहा है… छ्छूऊद्ददड दो मुझे…. मुझे नहीं चुदवाना…. है …. " मैने स्नेहा को इशारा किया तो वो शीतल के मम्मो को चूसने लगी.

मैने भी अपनी और से कोई हरकत नहीं की. 2-3 मिनिट में शीतल का थोड़ा दर्द कम हुवा तो मैने अपने लंड को थोड़ा सा ही बाहर निकाला और वापस एक ज़ोर दार धक्का दिया. इस वक़्त मेरा लंड उसकी चूत में पूरा का पूरा का चला गया. जिससे शीतल दर्द से तड़फ़ उठी. शीतल चीख उठी, …. म्‍म्म्मम…. ऊऊऊ….मेरी म्माआ…. मैं मार गाययययीीई…. ….." उसकी आँखों से पानी निकलने लगा. शीतल तड़फ़ रही थी. अपने दोनो हाथों से मुझे अपने उपर से धक्का दे कर हटाना चाहा. लेकिन मैं मजबूती से उसपर चढ़ा रहा. अपने दोनो हाथों से उसके मम्मो को हल्के हल्के मसलता रहा. मैं जानता था कि एक बार मैं हट गया तो यह वापस अभी तो कई दिनो तक चुडवाएगी नही. स्नेहा भी अपने होठों से उसके होठों से किस करने लगी. जब वापस थोड़ा दर्द कम होने लगा तो मैने अब हल्के हल्के 5-6 झटके दिए. हालाँकि दर्द पहले जितना नहीं हुवा लेकिन दर्द फिर भी तो हो ही रहा था. स्नेहा उसको संभाल रही थी. अब मैने हल्का हल्का अपने लंड को हिलाना शुरू किया. फिर थोड़ा सा मैं तेज़ हो गया. अब शायद उसको मज़ा आ रहा था. स्नेहा उसके मम्मे को चूस रही थी. और मैं उसकी चूत में मीडियम स्पीड से धक्के दे रहा था. उसकी आँखें बंद थी. उसकी चीख बंद हो चुकी थी. 4-5 मिनिट की चुदाई के बाद उसने आँखें खोली और मेरी तरफ देखते हुए बोली, "धीरे धीरे क्या धक्के मार रहे हो…. थोड़ा ज़ोर ज़ोर तो लगाओ…. " यह सुनकर मेरी बन्छे खिल उठी. अब मैं समझ गया क़ी उसको अब चुदवाने में मज़ा आने लगा है. मैने अपने धक्को की स्पीड बढ़ानी शुरू कर दी. अब मेरा लंड उसकी चूत को सटा-सात चोद्ने लगा. रूम में फूच-फूच की आवाज़ें गूंजने लगी. शीतल भी उसके एक हाथ को पकड़ कर अपनी चूत से रगड़ ने लगी. साथ ही अपने मम्मो को अपने हाथ से पकड़कर मसल रही थी. दोनो लड़कियाँ सिसकारियाँ ले रही थी. पूरा रूम सिसकारियों की आवाज़ से गूँज उठा. एक और शीतल

चिल्ला रही थी, "उफ़फ्फ़… मेरी चूत में अंगूली डाल… और ज़ोर ज़ोर से अंगूली से चोद मुझे…. अपने अंघूठे से मेरा दाना मसल…. चोद मुझे अपनी अंगूली से…. उफफफ्फ़…." तो दूसरी और अपनी अंगूली की स्पीड बढ़ाते हुए स्नेहा मुझसे कह रही थी, "आआहह चूऊऊदो मुझे….. मज़ा आअराहहा है…. चोदो मुझे…. फक मी…. फक मी…. ज़ोर ज़ोर से चोदो मुझे….. उफफफ्फ़ फक मी…. फक मी….. " मैने अपने लंड की स्पीड बढ़ा दी. अब मैं अपने हाथ से स्नेहा के मम्मो को मसल्ने लगा तो स्नेहा अपने हाथ से शीतल के मम्मे मसल्ने लगी. साथ ही शीतल अपनी अंगूली से स्नेहा की चूत को चोद रही थी. शीतल आनंद से चीख रही थी, …. फक मी…. फक मी…. आइ लव यू…. चोदो मुझे…. फक मी…. क्या मज़ा….. हीईिइ .. मैं आसमान मैं उड़ रही हूँ…. फक मी….." तभी एक ज़ोर दार तूफान आया रूम में. हम तीनो एक-एक करके झड़ने लगे. पहले स्नेहा का फव्वारा च्छुटा. उसके बाद मेरा और शीतल का फव्वारा च्छुटा एक साथ, …. मज़ा ही मज़ा…. ." मेरे लंड का पानी अंदर छूटने लगा तो मैने अपना लंड बाहर निकाल कर शीतल के पेट पर बाकी का पानी छ्चोड़ने लगा. वाउ! क्या धार निकली मेरे लंड की. उफफफ्फ़! मज़ा आ गया. वहाँ से हम तीनो उठे तो पीछे थे हम तीनो का जूस और शीतल की चूत का लहू. इसके बाद स्नेहा और शीतल मुझे फिर से अपने बदन से चिपका लिया और हम लोग 15 मिनिट की किस्सिंग के बाद अपने अपने कपड़े पहन कर खड़े हो गये. तभी स्नेहा ने बताया कि शीतल ने यह प्लान बनाया था. उसने आज तक किसी से चुदवाया नही था. मेरी दोस्ती तुमसे है ऐसा सोचकर तुम्हे बहाने से यहाँ बुलाया था. अब मेरे पेरेंट्स के आने का वक़्त हो गया है. अब तुम निकल जाओ 
समाप्त








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