Wednesday, September 17, 2014

FUN-MAZA-MASTI पिकनिक का प्रोग्राम-3

FUN-MAZA-MASTI

 पिकनिक का प्रोग्राम-3
 फिर किसीने किस किया। मैंने कहा- “जेबा…” फिर सही था।

फिर किसी ने किस किया। अब इसकी खुशबू और प्यारे अंदाज से मैंने कह दिया- “यह पिरी है…”

जीनत ने कहा- “तुम बिल्कुल सही बोले… अब तुम हमारे दूध यानी छाती को अपने हाथों से मसलोगे और बोलोगे किसका है। कंधा या चेहरे को नहीं छुओगे…”

किसी ने मेरे हाथ को अपनी छाती पर रखा। मैं सहलाने लगा और कह दिया- “पिरी है…” सही…

फिर कोई आया और मेरे हाथों को छाती पर रखा। मैंने कहा- “पिरी है…”

इस बार मैं गलत था, वो जीनत थी।

जीनत ने कहा- कितनी बार और मसलने से जानोगे।

फिर कोई आई। मैंने छातियों को मसलकर कहा- “पिरी है…” इस बार मैं सही था।

फिर कोई आई। मैंने इस बार कहा- “जीनत…” इस बार मैं सही था।

फिर कोई आई। मैंने कहा- “जेबा…” इस बार भी मैं सही था।

जीनत बोली- अब तुम सिर्फ़ हमारे चूचुकों को चूसोगे और कहोगे की किसका है हाथ नहीं लगाओगे… ठीक है…”
मैंने कहा- “हाँ ठीक है…”

फिर किसी ने मेरे होंठ पर अपने चूचुकों को रगड़ा तो मैंने उसे होंठ से पकड़ लिया। अब मेरे लिए मुश्किल था मैं चूसता रहा फिर बोला- “दूसरा दो…” उसने दूसरा दिया तो मैंने कहा- “जेबा…”

लेकिन वो जीनत थी। गलत…

फिर किसी ने चूचुकों को दिया। मैंने कहा- “जीनत…” अब भी गलत, वो जेबा थी।

फिर किसी ने दिया। उसके बदन की खुशबू मुझे बहुत पसंद थी। मैंने कहा- “पिरी…” जो सही था।

अब जीनत ने कहा- अब हम तुम्हारे हथियार को अपने मुट्ठी में लेंगे और तुम बताओगे किसका हाथ है।

फिर मेरे लण्ड को कोई मुट्ठी में लेकर सहलाने लगा। ऊपर से सहलाते हुए अंडों तक आती और वहाँ दबा देती। जब दो बार ऐसा ही हुआ तो मैं समझ गया यह पिरी है। मैंने कहा- “पिरी…”

फिर कोई आई और सहलाने लगी तो उसके कांपते हाथ से मैं समझ गया की वो जेबा है। मैंने कहा- “जेबा…” सही निकला।


 फिर किसी ने सहलाया और उसके बेतकल्लुफ अंदाज से मैं समझ गया की वो जीनत है। और वो भी सही था।

अब वो बोली- “इमरान तुम चित होकर लेट जाओ, हम तुम्हारा डंडा चूसेंगे और तुम बताओगे कौन है…”

पहले किसी ने चूसना शुरू किया। चूसने के अंदाज में अनाड़ीपन था मैंने फौरन कहा- “जेबा…”

फिर किसी ने चूसा उसके अंदाज में जाना पहचाना प्यरापन था। मैंने कह दिया- “पिरी…”

फिर जेबा को भेजा गया। मैंने कहा- “जीनत…” जो गलत था।

फिर कोई आया। मैंने कहा- “पिरी…” वो जीनत थी।

जीनत बोली- “अब तुम हमारी चूत चाटोगे और बताओगे की कौन है…”

एक ने चूत मुँह में रखा तो मैंने तुक्का मारा- “जेबा…” जो सही लग गया।

फिर किसी ने चूत दिया तो मैंने बड़ी आसानी से कह दिया- “पिरी है…”

फिर मैंने कहा- “जीनत…” लेकिन वो जेबा थी।

फिर जीनत आई। मैंने ठीक बता दिया।

जीनत ने कहा- “अब तुम्हारा लण्ड भी तैयार है और हमारी बुर भी। अब हम तुम्हारे लण्ड की सवारी करेंगे, और तुम बताओगे की किसने अपनी बुर में लण्ड लिया है…”

फिर कोई आई लण्ड की सवारी करने लगी और अंडों के पास जाकर बुर को कस लिया। फिर ऊपर किया और टट्टों के पास जाकर कस लिया। मैं इशारा समझ गया। मैंने कह दिया- “पिरी है…”

फिर कोई आई लण्ड की सवारी करने लगी। मैंने कहा- “जेबा…” जो ठीक निकला।

फिर कोई आई और लण्ड पर सवार होते ही दे दनादन… मैंने कहा- “जीनत…”

जीनत बोली- “मेरी चूत को ठीक पहचानते हो…”

जेबा ने कहा- “आज अगर सोनम और कोमल भी होती तो कितना मजा आता…”

जीनत बोली- “मैं तैयार हूँ… तू पिरी से पूछ, अगर वो चाहेगी तो फिर कल भी यह खेल खेला जा सकता है। कल भी मेरे अम्मी पापा नहीं रहेंगे…”
पिरी बोली- मुझे भी आज का यह खेल बड़ा अच्छा लगा। लेकिन रोज इमरान को अकेले चार पाँच लड़कियों को चोदना, क्या उसे तकलीफ नहीं होगी…”

जीनत- “तो ठीक है किसी और लड़के को बुला लेंगे। लड़कों की कमी है क्या…”

पिरी बोली- “खबरदार… जो किसी दूसरे लड़के को बताया भी। मैं तेरा खून कर दूँगी। सब लड़के इमरान के जैसे नहीं होते। जरा सा अगर कंधे से धक्का लगेगा तो बढ़ा चढ़ाकर दोस्तों को बताते फिरते हैं की मैंने धक्का मारा। मुझे किसी पर बिल्कुल भरोसा नहीं। कितनी बदनामी होगी जानती भी है…”

जीनत बैठकर चूत में लण्ड अंदर-बाहर करती रही।

तो पिरी ने कहा- “चोदती ही रहेगी क्या…”

जीनत ने कहा- तुम दोनों ने तो चुदवा लिया दिल भरके अब मेरी बारी है।

पिरी बोली- तू तो कहती थी की अपना हिस्सा जेबा को देगी।

जीनत हँसते हुए बोली- “कहने और करने में फर्क़ होता है…” फिर जीनत ने मेरे गले में बाहें डालकर मुझे ऊपर उठाया। मैं बैठ गया। वो मेरी गोद में बैठी थी, मेरा लण्ड उसकी बुर में घुसा हुआ था। यह एक नया अंदाज था। मैंने उसे पीठ से बाहें डालकर पकड़ लिया था। मेरा मुँह उसके एक चूचुक पर था, और मैं उसे चूस रहा था। वो मेरे सर को सहला रही थी।

पिरी बोली- “जेबा जरा देख कैसे माँ अपने बच्चे को दूध पिला रही है…”

जीनत बोली- “हाँ बेटा, तू दूध पी, इधर का भी पी…”

मुझे भी मजाक सूझी- “मुम्मी तुम उछल क्यों रही हो…”

जीनत बोली- क्या करूँ बेटा, तुम्हारे पापा नीचे से मेरे पेशाब-खाने में डंडा घुसा रहे है ना।

मैं बोला- मुम्मी, पापा बड़े गंदे हैं ना।

जीनत- नहीं बेटा, पापा को गंदा नहीं कहते। पापा ने डंडा-घुसा घुसाके रास्ता बड़ा किया, तभी तो तुम उधर से निकले ना।

मैं बोला- “अच्छा मुम्मी, मैं उधर से निकला हूँ…”

जीनत- हाँ बेटा, और जो तू अमृत पी रहा है ना। यह भी तेरे पापा की मेहनतों का नतीजा है। मैं 18 साल तक लटकाए घूमती रही, एक बूँद भी नहीं निकला। और तेरे पापा ने चूस-चूसकर 9 महीने में इस पत्थर से अमृत की धारा बहा दी। तू पी जी भरके।

पिरी बोली- वाह जीनत, तेरी हाजिर जवाबी का जवाब नहीं। कितनी गहरी बातें कितने गंदे अंदाज से समझा दी। मुझे चोद ना… जरा मुझे भी आक्टिंग करनी है।

मैं समझ गया की एक नया खेल शुरू हो गया है।

जीनत ने दो मिनट माँगा और पानी छोड़कर उतर गयी।

फिर मेरी गोद में पिरी बैठी। लण्ड को बुर में डालकर ऊपर-नीचे होने लगी। मुझे तो उसे गोद में बिठाते ही दिल खुशी से झूम उठा। उसके बड़े-बड़े दूध मेरे मुँह से रगड़ रहे थे। मैंने चूचुकों को चूसना चाहा। तो उसने कहा- “पहले मेरी होंठ को चूसो।

जीनत ने कहा- “तू दूसरी बीवी का रोल कर…”

पिरी बोली- “क्यों… पहली क्यों नहीं…”

जीनत बोली- “पहली में मजा नहीं आएगा। लोग दूसरी पर ज्यादा मरते हैं…”

पिरी बोली- “ठीक है…”

जीनत मन ही मन खुश हुई।

लेकिन पिरी के दिल में कुछ और ही था। वो बोली- “जानू मेरे होंठ कैसे है…”

मैंने कहा- “बहुत मीठे, रसीले…”

पिरी- मैं किस कैसा करती हूँ।

मैंने कहा- गरम बहुत खूब।

पिरी ने पूछा- जानू मैं लण्ड कैसा चूसती हूँ।

मैंने कहा- लाजवाब।

पिरी- “मेरे दूध कैसे दिखते हैं…”

मैंने कहा- गुंबद की तरह बहुत ही खूबसूरत।

पिरी- “तुम इन्हें दबाते हो तो तुम्हें कैसा लगता है…”

मैंने कहा- “बता नहीं सकता कितना मजा आता है।

पिरी- “मैंने तुम्हें जोर-जोर से दबाने से कभी रोका, कहीं लगता है या कुछ कहा…”

मैंने कहा- “नहीं तो…”

पिरी- “तुम इन्हें चूसो फिर बताओ चूसने में कैसे लगते हैं…”

मैंने चूसना शुरू किया वो सिसकारी भरने लगी।

पिरी बोली- “कुछ ज्यादा ही मस्ती में चुटकी में लेकर मसलो, दाँत लगाकर काटो, मैं कुछ नहीं कहूँगी…” उधर लण्ड बुर में अंदर-बाहर होता ही रहा। फिर कहा- “तुमने मुझे कितनी बार चोदा, तुम्हें कैसा लगा…”

मैंने कहा- “बहुत बहुत अच्छा… जितना सोचा था उससे भी अच्छा…”

पिरी बोली- “फिर तुमने आज मेरी गाण्ड भी मारी कैसा लगा…”

मैंने कहा- “बे-इंतेहा मजा आया। मेरे पास अल्फ़ाज नहीं हैं…”

पिरी- “तो फिर उस चुड़ैल के पास क्यों जाते हो, मुँह काला करने…”

अब जीनत की हालत देखने जैसी थी।
मैंने कहा- “तुम जानती हो वो चुड़ैल है। अगर मैं उसके पास ना जाऊँ तो वो हमें बदनाम कर देगी। मैं फँस गया हूँ। बचने का कोई रास्ता नहीं मिल रहा…”

मेरी बात पिरी समझ रही थी। उसने कहा- “तुम फिक्र ना करो मैं तुम्हें चुड़ैल से बचा लूँगी…” फिर उसने भी पानी छोड़ दिया और उतर गयी।


 फिर जेबा बैठी, लण्ड उसकी बुर में घुसा। वो पूछी- “जीनत मैं क्या रोल करूँ…”
जीनत ने कहा- तू बहन का रोल कर।
जेबा ने कहा- सुरुआत कैसे…
जीनत- “तुम दोनों को एक साथ स्कूल जाना है। इमरान तुम बोलो जेबा जल्दी आ। स्कूल बस चली जाएगी…”
मैंने कह दिया।
जीनत- जेबा तू बोल कि भैया मेरी शर्ट का बटन नहीं लग रहा।
मैंने कहा- आ इधर आ देखूं
जेबा- यह देखो भैया, इस तरह मैं स्कूल कैसे जा सकती हूँ।
मैंने कहा- ला मैं लगा देता हूँ। अरे यह तो नहीं लग रहा दूसरी पहन ले।
जेबा- सब धो दिए थे गीली हैं।
मैंने कहा- जेबा तू अपने दूध को दबा मैं कोशिश करता हूँ।
जेबा- भैया मेरी दूध को दबाओ मैं कोशिश करती हूँ।
मैंने कहा- ठीक है।
जेबा- “भैया जोर से दबाओ ना डरते हो क्या…”
मैंने कहा- जोर से दबाऊँ तुझे लगेगा नहीं। मैं उसकी दूध को दबाने लगा।
जेबा बोली- बटन लग गया।
मैंने कहा- तो मैं छोड़ दूँ।
जेबा- भैया दबाओ ना अच्छा लगता है।
मैंने कहा- “तू लड़कों से दबवाती है क्या… मैंने सुना है लड़कों के हाथ लगने से दूध जल्दी बड़े होते हैं…”
जेबा- छीः भैया, तुमने पहली बार छुआ है।
मैंने कहा- अब पता चला की लड़कों के दबाने से कितना अच्छा लगता है।
जेबा- भैया देखो बटन टूट गया। अब मैं स्कूल नहीं जा पाऊँगी।
मैंने कहा- मेरा भी दिल नहीं करता स्कूल जाने का।
जेबा बोली- “तो क्या करने का दिल करता है…”
मैंने कहा- “तेरा दूध दबने का…” और मैंने उसके दूध दबाने शुरू कर दिए। फिर कहा- “शर्ट निकाल ना…”
जेबा- तुम निकाल दो।
मैंने बटन खोले और शर्ट निकाल दिए, और कहा- “बाप रे बाप… जेबा तेरा इतना बड़ा हो गया… मैंने गौर ही नहीं किया। घर में तरबूज का पेड़, और मैं दूसरों के खेत में ताँक-झाँक करता रहा…” और मैं दूध दबाते-दबाते उसके चूचुकों को पीसने लगा।
जेबा सिसकारी भरने लगी- “भैया जल रही है चूसो…”
मैंने झट से चूचुकों में मुँह लगा दिया और बारी-बारी से दोनों चूचियों को चूसने लगा। वो मेरे पैंट के ऊपर से मेरे लण्ड को सहलाने लगी।
जेबा- भैया तुम्हारा केला भी तो बहुत बड़ा हो गया है।
मैंने कहा- “खाएगी क्या…”
जेबा- हाँ खाऊँगी। जानते हो भैया मेरी सभी सहेलियां अपने-अपने भाइयों का केला खा चुकी हैं।
मैंने कहा- मम्मी आ जाएंगी तो।
जेबा- भैया भूल जाओ मुम्मी को, मुम्मी खालू से चुदवाये बिना नहीं आती।
मैं- छीः मुम्मी के बारे में ऐसा बोलती है तुझे शरम नहीं आती।
जेबा- भैया तुम मुम्मी के बारे में नहीं जानते वो खालू, फूफा और दोनों चाचा से और कई बार मेरे ट्यूशन मास्टर से भी चुदवा चुकी हैं।
मैं- “क्या बकती है…”
जेबा- बकती नहीं मैंने देखा है। जब मैं 6 साल की थी, मुझे लेकर एक दिन खाला के घर गयी थी। रात में हम सोए थे पलंग अजीब तरह से हिलने लगा, तो मेरी आँख खुल गयी। मैंने पहले सोए-सोए देखा तो खालू मुम्मी के ऊपर चढ़े हुए थे और मुम्मी का दूध चूस रहे थे, कमर ऊपर-नीचे कर रहे थे। मैं उठकर बैठ गयी और खालू को धकेलने लगी।


 तो मुम्मी बोली- जेबा तुम सो जाओ।
मैंने कहा- मुम्मी, खालू तुम पर क्यों चढ़े हैं।
मुम्मी बोली- चढ़े नहीं हैं, मेरा बदन दर्द कर रहा था ना। इसलिए दबा रहे है।
जेबा- “दूध क्यों पी रहे हैं…”
मुम्मी- देख मेरे दुधू कितने बड़े-बड़े हैं। जब मैं चलती हूँ, काम करती हूँ तो हिल-हिल कर दर्द कर जाते हैं। इसलिए उसे दबाकर चूसने से दर्द भी चूस लेते हैं।
खालू बोले- जब तेरा दुधू बड़ा हो जायेगा तो तेरा दूल्हा भी इसी तरह दुधू दबाकर चूसेगा। तुझे बड़ा मजा आएगा। और जानती हो खाला को सब पता है।
मैंने कहा- मुझे पेशाब जाना है।
तो खाला दूसरे पलंग से उठकर आ गयी, बोली- “चल मैं ले जाती हूँ…” पेशाब करके आने के बाद उन्होंने मुझे अपने पास सुला लिया, और खालू के ऊपर चादर डाल लिया।
मैं- फिर फूफा से किस तरह चोदाया मुम्मी ने। वो तो दाढ़ी वाले पक्के मुसलमान हैं।
जेबा- तो क्या हुआ… मुम्मी के हुश्न के सामने वो भी बोल्ड हो गये। हाँ उन्हें मनाने के लिए मुम्मी को काफी मेहनत करनी पड़ी। एक बार फूफा दिन के दस बजे घर आए। मुम्मी देखते ही चहक उठी। उन्हें अंदर लाकर बिठाया।
फूफा बोले- “बेबी ने कुछ दिया है, आप लोगों के लिए। मैं एक काम के सिलसिले में आया था। काम हो गया बस दूसरी बस पकड़कर निकलूंगा…”
मुम्मी बोली- ऐसे कैसे निकल जाएंगे। इतनी गर्मी में बेबी क्या बोलेगी की हमने रोका नहीं… आप नहा लीजिए फिर आराम करिए खाना खाकर फिर चले जाइएगा।
फूफा नहीं नहीं कहते रहे।
पर मुम्मी तौलिया लेकर उनके पास खड़ी हो गयी- “आप कपड़े बदलिए, मुझे कुछ नहीं सुनना। आप खाना खाए बगैर नहीं जा सकते…”
फूफा मजबूरन कपड़े बदलकर तौलिया लपेट लिए। तौलिया भी बहुत छोटा था। जिससे उनके घुटनों के ऊपर तक ही छुपता था।
फिर मुम्मी एक क्रीम लेकर आईं और बोली- “आप स्टूल पर बैठिए। मैं क्रीम लगा देती हूँ। जब आप नहाकर आइएगा तो देखिएगा कितना आराम मिलता है। और क्रीम हथेलियों में मलकर फूफा को लगाने बढ़ीं।
तो फूफा बोले- मुझे दीजिए ना, मैं लगा लूँगा।
मुम्मी बोली- “आपका हाथ सारे बदन में नहीं पहुँचेगा। हम औरतों का काम है सेवा करना, करने दीजिए ना…” फिर मुम्मी ने उनकी पीठ पर क्रीम लगाई। उनके कंधों को मसाज करने लगीं और कमर तक आ गईं, और कहा भाई साहब कितने ऊपर से तौलिया बाँधे हो जरा ढीला तो करो।
फूफा को मजबूरन ढीला करना पड़ा। मुम्मी उनकी कमर और फिर उससे नीचे तक क्रीम लगाने लगीं। जिससे फूफा अब गरम होने लगे थे, फिर खड़ी होकर उनकी एक बाजू को अपने कंधे पर रखकर बाजू पर क्रीम लगाई। जब बाजू नीचे उतारा तो फूफा का हाथ उनकी चूचियां को छू गया। फिर दूसरा बाजू उठाया तो चूचियों को रगड़कर उठाया। फिर उसे भी क्रीम लगाकर चूचियां से रगड़कर उतारा।










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