FUN-MAZA-MASTI
फागुन के दिन चार--103
गतांक से आगे ...........
गुड्डी ने उस कच्ची कली का सर पकड के पह्ले तो खूब डामिनेटिंग किस उस ’समोसेवाली ’ के रसीले होंठो का लिया और ..फिर अपनी जुबान उस गदराती , किशोरी के मुंह मे ठेल दी और मस्त फ्रेंच , डीप किस ...
अब तक दो चार और भाभियां भी मैदान में आ गयी , शीला भाभी, रीतू भाभी कि वो समवय्स्क , जो मुझेजो मुझे छ्त से रीतू भाभी के साथ खींच के ले आयी थीं ..एक दो और ...
लेकिन वो सब दर्शक और उत्साह्वर्धक की भूमिका में हि थीं
लेकिन गुड्डी ..डीप किस करते हुये , एक दो पह्ले तो प्यार भरे चान्टे उस ’समोसे वाली ’ के रंगो से रंगीन गाल पे लगाये ...
फिर ..एक जरा जोर से ...और उसी के साथ ..अपने होंठ हटा के , एक हाथ से जोर से उसके प्यारे प्यारे गाल दबा दिये ...और उस गौरेया ने अपनी चोन्च खोल दी
और उसी के साथ ...गुड्डी ने कुछ चुभलाया, मुंह गोल किया , गौरेया के गाल पे प्यार कि चपत लगायी और
उस कि खुली चोन्च में ...स्पिट...गुड्डी के मुंह से थूक का गोला ...
झटके से ...अन्दर ...और जब तक वो सम्हले सम्ह्ले ..दुबारा ....स्पिट ..
अबकी निशाना कुछ गड्बड हुआ ...एक दो बून्द गालों पे पड गयी तो गुड्डी ने उसे भी रगड के फैला दिया , अच्छी तरह चेहरे पे, मसल दिया , गाल पे चिकोटी काट ली ...
और साथ में अपने होठों से गुड्डी ने उस के होंठ सील कर दिये. गुड्डी के हाथ खाली नही थे , वो जोर जोर से उन ’समोसों’ को मसल रही थी , पुल कर रही थी , निपल पिन्च कर रही थी ...
कयी भाभीयों ने स्पिटिंग की ये सीन अपने मोबाइल में कैद भी कर लिया था ..
और अब गुड्डी ने नीचे का रुख किया और रीतू भाभी ने उस 'समोसे वाली ' कच्ची कली , ननद के मुंह को कब्जे में किया ..गाल पे दो बार पिंच किया ...
लेकिन गुड्डी की शरारते , उसने थोड़ा उसे पलटा और उसके नितम्बो पे प्यार से एक दो चपत मुझे दिखाते हुए रसीद की ...और फिर एक जोर से सीधे उसकी गांड पे ...
और गुड्डी ने मुझे एक किस , उड़न किस दिया और उसकी गांड के छेद को अपने दोनों अंगूठो से पूरी ताकत से फैला के मुझे दिखाते हुए बोली ...
" बोल लेगा ... अपनी बहना की प्यारी प्यारी गांड ...आगे वाली के साथ पीछे वाली फ्री ...शरमा मत अभी सब के सामने यहीं हचक के राखी बान्धने वाली बडी बहन की मारी है ...बोल..."
दी मुझे देख के मीठा मीठा मुस्करा रही थीं और सर हिला के उन्होने ग्रीन सिग्नल दे दिया ..
लेकिन वो कच्ची कली , रीतू भाभी के चन्गुल से किसी तरह छुडा के बोली ...नहीं उधर का नही ...
जवाब गुड्डी के तमाचे ने दिया ..अबकी पूरे जोर से ...गांड पे ...फूल खिल गया ...
और गुड्डी बोली ...अभी तेरी बडी बहन चूतड उठा उठा के इसी आंगन में हुमच हुमच के गांड मरवा रही तौ तोहरे गांड में कौन से सुर्खाब के पर जडे हैं ...
तब तक मन्जू भी मैदान में पहुंच गयी थी वो बोली,
" हे बिन्नो , इ मत कहना कि तू उमरिया कि बारी हौ ...तोहरी उमर के लौन्डे , बान्ध के पीछे, गन्ने के खेत में , अरहरी में , जब देखो तब गांड मरवावत हैं ...
अब तक गांव मे होती त कब तक सील टूट चुकी होती .."
और जवाब ...उसकी ओर से रीतू भाभी ने दिया ...
" अरे हमारी इ छिनार ननद भी कौनो से कम नहि है ..आप देखना ..अगले होली तक अगवाडा पिछ्वाडा ...दोनो भोंसडा हो जायेगा ...सबको बांटेगी हमारी बांकी ननदिया ..
तब तक बाकी भाभियाँ चालू हो गयीं , गाना गा गा के चिढाने में ...
" लौण्डन में दीवानी ननदिया ...
अरे अरे हमरे तो एक पिया ,
ननदी के दस दस ...लौण्डन में दीवानी ननदिया ...
अरे ननदी को चोदें दस दस लौंडे ...अरे दस दस लौंडे
कोई चोदे आगे कोई चोदे पीछे ...
अरे लौंडन से मरवाए गांड हमारी ननदिया ..."
और उसी लाइन पे गुड्डी ने मुझे दिखा के उसके चूतड फैला के दो हाथ प्यार से लगा दिए ..
दी भी मुझे अपनी बांह में भींचती बोलीं ... देख उसके चूतड ...एकदम आठवी नौवीं के लौंडो तरह हैं ना ...
दी की निगाह ..भी सच में उसके चूतड एकदम ब्वॉयइश थे ...
दी ने मेरे गाल पिंच करते हुए कहा ...ली तो होगी तूने इस उमर के कमसिन लौंडो ...
मैंने न ना बोली ना हाँ ..और हम दोनों उधर ही देख रहे थे ...
गुड्डी ने फिर उसकी चियारी हुयी गांड में स्पिट का बड़ा सा गोला थूक दिया ..फिर दो उंगली से गांड की दरार पे फैलाने लगी ...
उधर रीतू भाभी ने जोर से उसके जस्ट आये हुए निपल खूब जोर से पिंच किये ...
वो बहुत जोर से चीखी ...
रीतू भाभी यही तो चाहती थीं ...उन्होंने एक झटके में अपनी चार उंगलियाँ ...उसके खुले मुंह में पेल दी
वो गों गों करती रही ...लेकिन रीतू भाभी ...उसे गोल गोल घुमाती रहीं ...
एक भाभी ने उसके रीतू भाभी ने जोर से उसके जस्ट आये हुए निपल खूब जोर से पिंच किये ...
वो बहुत जोर से चीखी ...
रीतू भाभी यही तो चाहती थीं ...उन्होंने एक झटके में अपनी चार उंगलियाँ ...उसके खुले मुंह में पेल दी
वो गों गों करती रही ...लेकिन रीतू भाभी ...उसे गोल गोल घुमाती रहीं ...
एक भाभी ने उसके ने उसके छोटे छोटे जोबन को दबाया और बोली ,
" सुन , तूझे अपनी रीतू भाभी का भला मानना चाहिये ...अरे तेरी प्रैक्टिस करवा दे रही हैं ...इसी मुंह से अपने यारों का मोटा मोटा औजार घोन्टेगी प्यार से ...चूसेगी खूब रस ले ले के ...
और तब तक रीतू भाभी ने उसके मुंह से अपनी चारो उंगलियां निकाल के उसके प्यारे गुलाबी गालों पे , उसका सेलाइवा थूक ...सब लिसेड दिया ...
गुड्डी भी नीचे...उसका एक हाथ पिछवाडे की हाल चाल ले रहा था ...तो दूसरा ...भरतपुर को रगड मसल कर वहां पानी निकाल रहा था ...राम पियारी तो गीली हो ही गयी थी ...उसकी फैली गोरी चिकनी जान्घों पे भी रस बह रहा था ...
देख देख के मेरा मन ललच रहा था
लेकिन तब तक देखना थोडा मुश्किल हो रहा था ...
और भाभीयों ने उसे घेर लिया था ...लेकिन तब भी उस की चीख पुकार, भाभियों की हंसी, छेड छाड , कमेन्ट्स से अन्दाजा लग रहा था ...और बीच बीच मे दिख भी जा रहा था ...
तब तक किसी एक भाभी ने रीतू भाभी की जेठानी लग रही थीं , उन्हे ललकारा .... अरे बिचारी इत्ती देर से पियासी है ...कईसन भौजायी हो रीतू जरा पिला दे इसे , शर्बत ...
शीला भाभी की आवाज आयी ...
अरे पिला दो ना न नमकीन शर्बत ...अपने शहर कि सबसे नमकीन लौन्डिया हो जायेगी ..एक्दम जिल्ला टाप...और मुंह ना खोले ना त ऐसन छिनरन का मुंह खोल्वाये का तरीका आता है मुझे ...
भाभीयों का झुरमुट कुछ हटा ...
और मैने देखा ...रीतू भाभी ...’समोसे वाली’ के उपर चढी दोनो जान्घो से कस के उस्के सर को भींचे , और बस उसके होन्ठो से कुछ उपर ..
.रीतू भाभी ...और शीला भाभी ने उसके दोनो नथुने जोर से पिन्च किये हुये उसका मुंह खुला ...
थोडी देर पहले जैसे मंजू ..दी के साथ ...जबरन उन्हें ..अपनी जांघो के बीच दबा के बिलकुल वैसे ...
भाभियों का झुरमुट फिर गहरा हो गया था ...लेकिन मैं अंदाज कर सकता था ...
खूब जोर का शोर हल्ला ..
दी ने शायद मेरे चेहरे को पढ लिया और गाल पे पिन्च करते हुये बोलीं..
"हे शरमा रहे हो क्या या बुरा लग रहा है अरे यार होली में सब चलता है , फिर जहां सिर्फ ननद भौजाइयां सब कुछ .."
मै तो दी के चक्कर मे शरमा रहा था कि उनके सामने ...ये सब ..और जब वो खुद मजा ले रही हैं तो मैं क्युं मुन्ह फुला के ...
दी ने मेरे कन्धे पे हाथ रख के मेरा ध्यान फिर उधर खींचा ...और बोली ...तू अभी भी ना शर्मिला ही है ...तेरी तो जबर्द्स्त र्रैगिंग होनी चाहिये ...अरे यार ...अगर ऐसी हैकड लड्कियों की जरा कस के रगडाय़ी ना हो ना तो गायेंगी ...की अरे भाभीयों कि तो हिम्मत ही नहीं पडी ....
और दूसरा फायदा ..होली का का मौका है ...इन नयी बछेडिय़ों की शरम लाज छुडाने का ...फिर ये भी खुल के खेलेंगी ...और शहर के लडकों का फायदा ..
भाभीयों का झुरमुट थोडा हट गया था और ...मैं और दी ...अब खेल तमाशा खुल के देख सकते थे ...
फिर से शोर हुआ और ...और ...
मैंने दी से बात टालने में भलाई समझी और बोला ...
" आप रैगिंग क्यों पूछ रही थीं ...मैंने रैगिंग दी भी है और ली भी है ...यहाँ तक की मेरी रैगिंग तो सीनियर लड़कियों ने भी ली है ..."
...
दी की निगाह अभी भी उधर थी ...बोली ...
" बुद्धू हो ना तुम ...बुद्धू ही रहोगे ...अरे मैं कालेज की रैगिंग की बात नहीं कर रही थी ...ससुराल की रैगिंग की बात कर रही थी ...जानते हो मेरी ससुराल की पहली होली में ...
मेरा सास ने खुद ... ...और मुझे उन्होंने मेरी ननदों के साथ ...उकसाया ...
तेरी तो गांव में शादी हो रही है ना ...तो जो कोहबर में रैगिंग होगी ना ...उसके आगे ये ... सब बच्चों का खेल है ...कालेज की रैगिंग तो इसके आगे कुछ भी नही ...
हां और सिर्फ साली सलहज नही असली रगडायी तो सास करती है ..वो भी अपनी सास के साथ ..मौसेरी , चचेरी , सब ..."
दी की बातों से मेरे मन में गुड्डी की मम्मी , मेरी सास की बात याद आ गयी ..
दी की बातों से मेरे मन में गुड्डी की मम्मी , मेरी सास की बात याद आ गयी ..कि खुल के गुड्डी से मैं उनके बारे मे मजाक करता था ...
और गुड्डी बोलती भी थी कि जब मै उनके पल्ले पडुन्गा ना ...तो वो मेरी कितनी ऐसी की तैसी करेंगी ...उसका कोयी ठिकाना नही ...और फिर बात सिर्फ कोहबर की नही थी ...गुड्डी को मैने प्रामिस कर दिया था कि जब तक मैं बनारस में रहुंगा , चाहे ट्रेनिंग ...चाहे पोस्टिंग ...मूझे अपने ससुराल मे ही रहना होगा ...तो इसका मतलब कि ये रैगिंग रोजाना होगी मेरी ...
लेकिन अब कुछ हो भी नही सकता था ...और कयी बार रगडे जाने में भी मजा आता है ...
तब तक रीतू भाभी की आवाज सुनायी पडी ...एकदम पास से ...
देख तेरे लिये कितना मस्त माल लायी हुं ...एक्दम कच्ची कली ..अब आयेगा कुश्ती क मजा
मैने देखा कि रीतू भाभी और शीला भाभी ...उस ’समोसे वाली ’ को पकडे ...और साथ में गुड्डी भी ...
सबसे मजेदार बात ये थी की उस ’कच्ची कली’ के चेहरे पे उस रगडाई के बाद ना कोयी गुस्सा था ना कोयी परेशानी ..बल्की ...वो हल्के हल्के मुस्करा रही थी ..
दी और गुड्डी ने मिल के मुझे खडा कर दिया और सामने उस को पकडे रीतू भाभी और शीला भाभी
'वो ' एकदम मस्त लग रही थी ... छोटे छोटे आते हुए उभार ,
सुबह के सूरज की ललछौंही आभा लिए ...जवानी की दस्तक के निशान,
वो 'समोसे ' जिन्हें देख के शहर में ना जाने कितने सीटियाँ गूँज जाती थीं ...
जिसके मटकते 'ब्वायिश ' चूतडो को देख के ना जाने कितनी बार मेरे तम्बू में बम्बू खड़ा हुआ ...
मेरे शहर की लोलिता ...
लतिका ( जी यही नाम था उस कम उम्र किशोरी का )
मुट्ठी मे आ जाये वो कमर ...
कितनी बार उसके पीछे, ...(मेरे सहित ) कितने लडको ने ये गाना गाया होगा ...
हमरे गउंवा वाली गोरिया जब जवान होइहै ...
तब हमरो अरे तब हमरो ...गंगा स्नान होइहै ...
आज मौका आ गया था गंगा स्नान का ...गंगा खुद आंगन मे थी ..
और ह्मारे जंग बहादुर बहुत देर से बेताब थे ...पहले रीतू भाभी के साथ चूंची चोदन...( जो अधुरा रह गया )
और फिर भाभियों ने जो इसके साथ छल कबड्डी खेली ...उस की आवाजों और दर्शन से ...हालत और ख्र्राब हो गयी ...
और अब
गुड्डी ने मेरे तन्नाये बेताब , बावरे औजार को सीधे , उस के सेन्टर पे लगा दिया ...
जैसे शादी में नाउन , दुल्हे दुल्हन की गान्ठ जोडती है
बिलकुल उसी तरह ...
उधर रीतू भाभी ने ...अपनी कुंवारी किशोर ननद के दोनो गुलाबी सन्तरे के फांक की तरह रसीले , भगोष्ठ ...पूरी ताकत से फैला रखे थे ...और गुड्डी ने मेरा तन्नाया मोटा सुपाडा ...सीधे सेन्टर पे रख के ...घुसेड दिया ...
मेरी हिम्मत नही थी की मैं नही पुश करता ...क्योंकी मेरे पीछे मंजू खडी थी ...और मुझसे ज्यादा जोर से उसने पुश किया ...और उधर से यही काम रीतू भाभी ने ...
आधे से ज्यादा सुपाडा चला गया ...
उसने चीख रोकने की बहुत कोशिश की लेकिन चीख निकल ही गयी ...
लेकिन मै रुकने वाला नही
...मैने पूरी ताकत से धक्का मारा ...और फिर दुबारा ...
मेरी हिम्मत भी नही थी , धक्को मे बेइमानी करने की ...पीछे से मंजू ने पकड रखा था और वो कान मे बोल रही थी ...
लाला , तनिको धीमे किहा ना ...ता इ मुट्ठी पूरी तोहरी गांड में ..दो उंगली तो उसने ठेल ही दी थी ...
और उससे भी बढ्कर ...गुड्डी ...उस की आंखे ...सात जनम तक तो मैं उन के हुकुम का गुलाम बन ही चुका था ..
गुड्डी गुनगुना रही थी ...
छोटी छोटी चुन्चियां , बुर बिना बाल की ...
चोदो मेरे राजा मेरी ननदी है कमाल कि ..
जो काम मन्जु मेरे साथ कर रही थीं वही रीतू भाभी उस के साथ कर रही थी ...और अभी कुछ देर पहले जो रीतू भाभी ने उसे ...कराया था ...उसके बाद तो उसकी हिम्मत भी नही पड सकती थी ( बाद मे मैने वो सारी फ़िल्म गुड्डी के मोबाइल
पे मैने देखी और रीतू भाभी उस के कान मे ये भी बोल रही थी कि शाम तक वो फिल्म यू ट्युब पे चल जायेगी )...
और साथ में रीतू भाभी ने भी उस के पिछवाडे ...एक उंगली ठेल रखी थी ..
अब सुपाडा अन्दर घुस चुका था ...इसलिये ...रीतू भाभी , और गुड्डी दोनो को मालुम था कि अब ये बान्की हिरनिया लाख चूतड पटके ...लन्ड बिना चोदे , मलाई अन्दर झाडे नही निकलने वाला था.
और मैने उसे अपने बाहों में भर लिया ...मेरे होंठ अब उसके होन्ठो पे थे , और हाथ उन समोसों पे जिन्होने सारे शहर को बेताब कर रखा था ...
छोटे जरूर थे ...लेकिन एक्दम रस गुल्ले
मैं कभी सहलाता , कभी दबाता तो कभी अपने होंठ वहां लगाता ...लेकिन उसने एक बात ये बोली कि ...बस मेरी चुदायी की रफ्तार दस गुनी हो गयी ...
मेरे कानो पे अपने रसीले होंठ लगा के वो बोली...तुम क्या सोचते हो देख के सिर्फ तुम्हारा ही मन करता था ...मेरे अन्दर तुझ से भी ज्यादा आग लगी थी ..."
अब मैं समझा ...ये बात कितनी सच है की लड़कियों की एड़ी में आँख होती है ...
और उन की झांटे बाद में आती हैं , चूत में खुजली पहले मचने लगती है ...
और उस आग का इलाज खडे खडे तो ठीक से हो नही सकता था ....तो मैने उसे वहीं रंगो से भरे आंगन में लिटा दिया ...लम्बी टांगे मेरे कन्धे पे ...
लेकिन गुड्डी के बिना कोयी काम हो सकता है क्या ...तो
गुड्डी ने आंगन मे फैले , ननदों के टाप, चिथडे हुये ब्रा और पैन्टी ...सब को इकट्ठा कर उस के चूतड के नीचे रख दिया ...अब चुदायी का इन्त्जाम पूरा था ...
और मैने जो उन ’समोसो’ को पकड के , हुमच के धक्का मारा ...आधे से ज्यादा लन्ड अन्दर था ...और साथ साथ ही उस कि सील भी टूट गयी ...
जोर से चीखी वो ...लेकिन गुड्डी और रीतू भाभी , कस के उस कि कलायी पकडे थी जिससे वो टस से मस नही हो पायी ..उसके बाद उस के उभार सहलाते गुड्डी बोली
" अरे यार ये चीज कभी ना कभी तो फटनी थी...जल्दी फट गयी तेरी. तो अब बिना डर यारों से मजा ले सकेगी ...दुबारा ये दर्द थोड़े ही होगा ...अब तो बस मजा ही मजा है ...और तेरी किस्मत की पहले बार में ही इतना मोटा मूसल मिला है वो भी भैया का ..."
तब तक रीतू भाभी की एक सहेली , पीछे से उसके गोल गोल नितम्ब सहलाती बोलीं ...
"तू लकी है यार ...जो कुँवारी , होली के दिन अपनी सील खुलवाती है ..ना ...होलिका देवी उससे इतना खुश रहती है की जिंदगी भर उसे मोटे और सख्त की कमी नहीं होती ...
एक मांगेगी , तीन मिलेंगे ..चल अब ले मजा खुल के .."
एक से एक कमेन्ट चल रहे थे ...
लेकिन उस का फायदा हुआ की कुछ तो उस का दर्द का अहसास कम हो गया और कुछ उस की धड़क खुल गयी ...और सबसे बड़ी बात अब उस का ध्यान उस की कच्ची कली में घुसे मोटे खूंटे से थोड़ा हट गया था ..
मैंने भी मौके का फायदा उठाया , उसके होंठों को चूसते हुए जीभ उसके मुंह में डाली ...अब वो चीख नहीं सकती थी ...
एक हाथ कमर पे रख के उसे अपनी ओर खिंचा , दूसरे हाथ से उसके बस उठ रहे जोबन को जोर से दबाया ...
गुड्डी समझ गयी थी ..उसने मुस्कराते हुए थम्स अप का सिग्नल दिया ...
और मैंने हुमच के पहले पूरी ताकत से एक धक्का , फिर दूसरा धक्का मारा ...
और रीतू भाभी ने भी उसी के साथ हचक के उस कुँवारी ननद की गांड में ...उंगली पेल दी ...और उसने खुद कमर मेरी ओर उचका दी ..
दो तिहाई ...यानी करीब छ इंच मेरा मोटा लंड अन्दर था ..
मेरे होंठ अभी भी उसके होंठ को सील किये हुए थे ....पीछे से रीतू भाभी भी उसे कस के दबोचे हुए थीं ...
धीमे धीमे मैंने मुसल उसकी नयी ओखली में चलाना शुरू किया ...आगे पीछे आगे पीछे ...
और साथ में उन छोटे छोटे समोसों का मजा ...कभी चूस लेता तो कभी बाईट ले लेता तो कभी जोर से दबा देता ...
और अब उस को भी मजा आना शुरू हो गया था वो भी मेरे कन्धों को पकड के अपनी ओर खींच रही थी , पुल कर रही थी , चूतड उचका रही थी ...
और गुड्डी कभी उसके गालों को कभी जोबन को सहला के गा गा के अपनी नयी , ननद को छेड़ रही थी ..
अरे छोट छोट ...अरे छोट छोट जोबना दाबे में मजा देय
ननदी हमारी चोदे में मजा देय ...
राजा चोद ले टंगिया उठाय के
अरे चूंची दबाय के ना
मैंने जिंदगी में गुड्डी की बात नहीं टाली थी ...
टाँगे उठा के चूंची दबा दबा के मैं उसे हचक हचक के चोद रहा था ...
तब तक पीछे से मंजू की आवाज सुनायी दी ..अरे लाला ...फागुन में कातिक का मजा दो हमरी छिनार ननदिया को , इसे कुतिया बना के चोदो ...फाड़ दो साल्ली की…
मेरे कुछ करने के पहले ही रीतू भाभी और गुड्डी की जुगल बंदी मैदान में आ गयी ..और दोनों ने उसे डागी पोज में कर दिया ..और मैं अब पीछे से उस कुँवारी कली के ऊपर चढ़ा हुआ था ...
और तभी रीतू भाभी ने जो मेरे पीछे थीं ...देख लिया और जबर्दस्त गाली दी ...
" साल्ले भोंसड़ी के ...तेरी सारी बहनों की फुद्दी मारू ...अपनी बहन के भंडुवे ...पेल पूरा ...बाकी किस के लिए बचा रखा है ..."
और जो काम गाली ने नहीं किया ...वो रीतू भाभी की उंगली ने किया ...पूरा पिछवाड़े अन्दर ..
और साथ में मेरा लंड भी आठ इंच अन्दर ...बाल्स तक ..
गुड्डी भी ...वो उसके उभार सहला रही थी छेड़ रही थी ...
" अरे ले ले यार ..ननदों के लिए कोई रोक टोक नहीं है ...ले ले सीधे ...मजा ले खुल के ...वरना ...आरेंज जूस और पीना है ...अभी तो सिर्फ रीतू भाभी ने ..." गुड्डी ने निपल पिंच कर के बोला
और मैंने सुपाडा बाहर तक निकाल कर के ठेल दिया , जड़ तक ..
रीतू भाभी की ऊँगली उसकी क्लिट भी सहला रही थी ...
और थोड़ी देर में वो झड़ने लगी ...
लेकिन मुझे तो टाइम लगना ही था ..एक बार छत पे गुड्डी की , फिर कुछ देर पहले दी की गांड ...और अब ये तीसरी बार ...
मैं अब रिमझिम बूंदी से मुसलाधार बारिश और तूफान की तरह चोद रहा था ..हर धक्का उसकी बच्चे दानी पे रुकता ....
वो सिहर उठती ...काँप उठती ...और थोड़ी देर में दुबारा ...आंधी में पत्ते की तरह वो कांपने लगी ..
वो दुबारा झड रही थी ...उसकी कच्ची चूत मेरे लंड को निचोड़ रही थी दबा रही थी ...
मैंने एक दो पल के लिए रुका ...लेकिन मैं भी अब ...
और उसकी चूंची पे जोर जोर से मैंने बाईट के मार्क बना दिए ...दोनों कंधे पकडे और , चूतड सहलाए ...और फिर पूरी तेजी से ...
हचक हचक कर ....हुमच हुमच कर चोदने लगा ...
बिना रुके ...लगातार ..
और फिर इस बार वो झड़ी ...तो साथ में मैं भी ...कटोरी भर मलाई अंदर ...बहुत देर तक हम दोनों डागी पोजीशन में ही पड़े रहे ...
और जब मैंने लंड बाहर निकाला ..और वो खड़ी हुयी ..
तो मेरे वीर्य की एक धार उसकी गुलाबी चूत से निकल के उसकी चिकनी रेशमी गोरी जांघ पे ...दो चार बूंदे ..सफेद ..गाढ़ा थक्का ....गुड्डी ने उसे अपनी एक ऊँगली में लपेटा और उसके होंठो पे लगा लिया ...
मुझे लगा की अब वो गुस्सा हो जायेगी ...लेकिन उसने जीभ निकाल के चाट लिया ...और मुझे देख के मुस्करा दी
मैं भी मुस्करा दिया ...फिर वो रेशम की डोर में बंधी चली आई सीधे मेरी बांह में ...
मैंने जोर से उसे भींच लिया ...और उससे भी ज्यादा जोर से उसने ...और मेरे इयर लोबस को किस करके बोली ...
बहुत दिन की साध पूरी हुयी मेरी ...
और उसके बाद गुड्डी का नम्बर था ...उसने गुड्डी को भी बांहों में ले के भींच लिया ...उन दोनों में पक्की दोस्ती हो गयी ...लग रहा था पता नहीं कब की बिछड़ी सहेलियाँ मिली है ...
तब तक एक गडबड हो गयी ...किसी भाभी ने घडी देख ली और घबडाने लगीं ...
अरे एक बजने वाला है ..अबहीं कालोनी में जाना है देर हो रही है ...
हर साल होली की शुरुआत के बाद सभी ननद भाभियाँ ...कालोनी में जहाँ से लडकियां औरतें नहीं आ पाती थीं वहां जाती थी ..और फिर उन सबकी ऐसी तैसी ...
बस क्या था ..पल भर में ...
साडी वालियों ने अपनी साडी लपेट ली ..कुछ के फटे ब्लाउज बचे थे वो भी पहन लिए ...साया , ब्रा पैंटी तो सबके खेत रहे थे ...
टाप और स्कर्ट वालियों ने बस फटे टाप को किसी तरह ऊपर बाँध लिया ...ब्रा पैंटी उनकी तो भाभियों ने चिथड़े चिथड़े कर दी थी ..
हाँ रंग से गीले होने से टाप और साड़ियाँ दोनों पारदर्शी हो गयी थीं और उभारों से एकदम चिपकी ..
लेकिन सबसे बुरी हालत मेरी थी ..मेरे तो सारे कपडे फाड़ दिए गए थे ...
मैंने बोला मैं क्या पहनूंगा ...तो एक लड़की बोली ...ऐसे ही चलिए ...
लेकिन भाभी ने गुड्डी की ओर देखा तो वो मेरी बचत में आ गयी ...
मेरा पिछवाडा सहलाते हुए बोली ...अरे नहीं अब ये मेरी जिम्मेदारी है ..बीस आने में मेरी मम्मी ने ख़रीदा है बोली लगा के ...अगर किसी लौंडेबाज की नजर पड गयी तो ....रात तक चार बच्चो के मा की तरह हो जायेगी ...लेकिन मेरे पास लड़कों के कपडे तो है नहीं ...जो है वो ..
और थोड़ी देर में मेरा श्रृंगार उन दुष्टों ने मिल के शुरू कर दिया ...और इसमें लडकियां और भाभियाँ दोनों मिली थी
रसिया को नार बनाउंगी रसिया को ...सारा माहौल इसी गाने से गूंज गया था ...
मिश्रायिन भाभी और मेरी भाभी , सारी भाभियों को ललकार रही थीं ...
और भाभियों के साथ लडकियां भी इस अभियान में जुट गयी थी ...
मैं बिचारा एक फटे पेटीकोट को , टावेल की तरह लपेट के ,अपनी बची खुची लाज सम्हालने में लगा था
और इस अभियान की पहल कर रही थी .....और कौन ...गुड्डी .
वो एक पैकेट ले के आई जिसमें एक साडी थी और भी बहुत कुछ ...
जिसके बारे में कल रात मैंने उससे पूछा था ...तो उसने मुझे घुड़क दिया था ...
" तुमसे मतलब ..."
और मेरी भाभी भी ...मुस्करा के आँख नचा के बोलीं ...अरे मालूम हो जायेगा कल ..
वो पैकेट जब खुला तो उसमे से क्या नहीं निकला ...
वो सब स्प्रिंग लोडेड गहने , आर्टिफिशयल ...जो कल गुड्डी ने मेरे पैसे से मुझसे ही खरीद्वाये थे ...चूड़ियाँ , मेकअप का सामान , ब्रा और एक और बंद पैकेट ...
गुड्डी के साथ उसकी ताजा बनी सहेली , लतिका ( वही समोसे वाली ) शामिल थीं ...और लतिका ने एक दो और लड़कियों को बुला लिया था की इसे नेल आर्ट्स बहुत अच्छी आती है ...गाइडेंस रीतू भाभी की थी ...
पैर के श्रृंगार में शीला भाभी ...और कालोनी की एक दो और भाभियाँ ...
शीला भाभी ने तो महावर की पूरी बोतल मेरे दोनों पैरों पे खाली कर दी
, खूब गाढा चौड़ा
उनके साथ एक भाभी रच रच के ऐसे डिजाइन बना रही थीं ....जैसे गौने की दुल्हन के बनाते हैं ( और अगले दिन उसकी ननदें चिढाती हैं , जब दुल्हे के माथे पे वही महावर लगी नजर आती है ...क्यों भाभी रात में भैया से पैर छुलवा रही थीं क्या )
पैरों पे सुहागरात के पहले एक ग्राम्या का जो श्रृंगार होता है वो चल रहा था ...तो मेरे हाथों पे लतिका और उस की हम उम्र सहेलियां हाथों में पूरा शहरी ब्यूटी पारलर खुल गया था ...एक हाथ में लतिका तो दूसरे में उसकी सहेली ...पिंक नेल पेंट डिजाइन बना के ..और साथ में कलाई तक वही डिजाइने
तब तक रीतू भाभी की निगाह मेरे तम्बू में बम्बू पे पड गयी ...और लतिका से वो बोलीं ...
अरे इसका इलाज तो कर ...
लतिका ने तने खड़े जंग बहादुर को देखा ...तो पहले तो वीर बहूटी हो गयी ...फिर कुछ शर्माते कुछ लजाते बोली ...
ये तो ..मैंने अभी तो किया ...लेकिन इस पे तो कुछ असर ही नहीं पड़ता ...
रीतू भाभी हँसते हँसते दुहरी हो गयीं बोली तू तो ना मेरी पक्की ननद है ...तूझे सपने में भी ना अपने भाइयों के खड़े औजार ही नजर आते हैं ....अरे मेरे देवर का हथियार है ऐसे थोड़े ही सोने वाला है ...मैं बताती हूँ ...
और उन्होंने लतिका की सहेली के बाल से उसके पिंक साटिन रिबन खोल लिए और लतिका को कुछ समझाया ...
फिर क्या था लतिका और उस के सहेली ने पहले तो फटे चिथड़े पेटीकोट का वो आवरण हटाया ...
दोनों के मुंह से एक साथ निकल गया वाउ ...सो हाट
रीतू भाभी ने प्यार से दोनों को हडकाया ...अरे साल्लियों ...छिनारों ...लार बाद में टपकाना ...तेरा भाई है जब चाहे तब घोंट लेना ...पहले जो बताया है वो काम करो
और वो दोनो किशोरियां , कच्ची कलियाँ काम पे लग गयी ...वो दोनों झुकी 'अपने काम ' में लगी थी ...
और मैं उनके फटे , टाप्स से झांकते ...बड़े बड़े टिकोरे निहार रहा था ..
( और तभी उन दोनों की बात से पता चला की ...दोनों नवीं में गयी थीं अभी ...और उनकी क्लास की चंडाल चौकड़ी ने ये तक किया था की ...जिसकी पहले फटेगी ...वही क्लास की हेड गर्ल बनेगी ...और लतिका की सबसे पहले फटी ...और भाभियों के साथ कित्ती उसकी सहेलियों के फोन पे उसका वीडियो सबूत था ...वो दोनों इसका मतलब गूंजा और गुड्डी की मझली बहन के बराबर उम्र की थी ...इसका मतलब उन दोनों साल्लियों पे भी मैं नंबर लगा सकता था )
लतिका जोर से मेरे जंगबहादुर को दबा के मेरे जांघ से चिपका के सटाए हुए थी ...और उसकी सहेली ( रीमा नाम था उसका ) उसे अपनी गुलाबी रिबन से मेरे जांघ से बाँध रही थी कस के ..रिबन ख़तम हो गया ...लेकिन मेरा आठ इंची ...का सुपाडा अभी भी खुला था .
लतिका की सहेली उस से भी एक हाथ आगे थी बोली यार एक आइडिया है ...और मेरे खुले सुपाडे से झांकते पी होल ( मूत्र छिद्र )के ठीक नीचे ...उसने गुलाबी लिपस्टिक से एक स्माइली बना दी ...
दोनों किशोरियां खुल के खिलखिला के हंसी अपने बाड़ी आर्ट को देख के ...
लेकिन लतिका बोली यार ये खुल सकता है कुछ और करना पड़ेगा
और उसकी निगाह रीमा की कमर की ओर पड़ी ...
रीमा ने मुस्कराते हुए ना ना कहा ...लेकिन लतिका कहाँ सुनाने वाली थी ..उसने दोनोहाथो से उसकी स्कर्ट उठायी और थांग खिंच दी ...
बस दो इंच की गुलाबी ...लेसी पट्टी की तरह ...
और रीमा का भरत पुर भी एकदम मस्त चिकन मक्खन ...गुलाबी ...बस दो चार ताजा निकले केसर के फूल की तरह सुनहली बस निकलती हुयी झांटे ...
उसे देख के जंग बहादुर एकदम विप्लव पे उतारू ...दोनों किशोरियों ने तुरंत ...थांग से उसे दुबारा रैप किया ...और तब तक गुड्डी आ गयी उन की सहायता करने को ...
आखिर जंग बहादुर की मालकिन तो वही थी ...
वो एक मेडिकल टेप का बण्डल लायी थी ...और अब तीनो ने मिल के उसे अच्छी तरह कस से टेप कर दिया ...
रीमा की निगाहें आँगन में कुछ ढूंढ रही थी ..और उस ने किसी ननद की पैंटी देख ली ...आँगन फटी चिथड़ी ब्रा पैंटी पेटीकोट से पटा पडा था ...
और वो एक पैंटी उठा के ले आई ...और तीनो ने मिल के मुझे पहना दिया और जोर से हाई फाइव कर के बोलीं ..अब ये बच्चू काबू में आ गए
और उस के बाद वो तीनो काम पे जुट गयीं ...
वही चूडियाँ जो कल गुड्डी ने मुझसे खरीदवाई थी ...लाल हरी ...
लतिका और रीमा तो चूड़ी पहनाने वालियों को भी मात कर रही थी ...
वही चिढाना , वही अदा , उसी तरह ..उंगलियो को मोड़ के एक के बाद एक चूड़ी ...
मैंने एक दो के बाद मना कर दिया ...तो गुड्डी ने चढ़ाया ..उन दोनों को
" अरे कल ये खुद ख़ुशी खुसी अपनी पसंद से खरीद के ले आये थे ...अब नखड़ा बना रहे है ..पहनाओ ..कुहनी तक "
उन दोनों को तो बस ..गाँव की नयी दुलहन की तरह ....सिरफ चूडिया ही नहीं कंगन , बाजूबंद ...
लतिका ( वही 'समोसे वाली' ) ने छेड़ा ..अरे रात भर चुरुमुर करेगी ये चूड़ियां
उधर आँगन में भाभियाँ लहक लहक के गा रही थीं ...
धर आँगन में भाभियाँ लहक लहक के गा रही थीं ...
रसिया को नार बनाओ जी , रसिया को ..
सिर पे उढ़ाय सुरंग रंग चुनरी ...
अरे सिर पे उढ़ाय सुरंग रंग चुनरी ...
उर चोली पहनाओ री
रसिया को नार बनाओ जी , रसिया को ..
साथ में रीमा , लतिका , गुड्डी और एक दो भाभिया कल जो गुड्डी आर्टिफिशियल ज्वेलरी खरीद के लायी थीं ..बस उसे पहनाने में जुटी थीं ...
चूड़ी , कंगन और बाजूबंद के बाद अब नाक और कान का नम्बर था , रीमा ने कान में बड़े बड़े झुमके पहनाये और लतिका ने छोटी सी नथुनी ..एकदम सोने की लग रही थी ...बीच में छोटा सा मोती ...
मुझे चिढाते हुए बोली ...आप ने मेरी नथ उतारी ...और मैं आप को नाथ पहना रही हूँ ...
लतिका और रीमा वास्तव में मेक अप में एक्सपर्ट थीं ..हाई चीक बोनस बना दी उन्होंने फिर रीमा ने आँखों का जिम्मा लिया ..मस्कारा , लाइनर काजल कुछ भी नहीं छोड़ा ...और लतिका ने होंठो पे लाइनर , लिपस्टिक , लिप ग्लास ..एकदम लड़की टाइप ...जैसे ब्राइडल मेकअप करते हैं ...वैसे ...
उधर रीतू भाभी ने पैरों में चौड़ी, एक हजार घुंघरु वाली पाजेब पहना दी ...
मैंने बिछुआ पहनने में जो कुछ नाटक किया ...तो डांट पड गयी ...और किसकी ...गुड्डी की ..
सुहागिन की निशानी है ये ...खबरदार ...और पांचो उँगलियों में घुँघर वाला बिछुआ ...
और उधर शीला भाभी ने मुझे चिढाते हुए गाना शुरू कर दिया ..मेरी भाभी भी साथ में और बाकी भी ..
यहाँ तक की रीमा और लतिका भी ..
अरे घुंघुर वाला बिछुआ अजबे बना ...अरे छोटे घुंघुर वाला ..
ये बिछुआ पहने हमार्रे आनंद की बहना अरे देवर की बहना ...
इ बिछुआ पहने रंजी छिनारी ..अरे साल्ली रंजी छिनारी
अरवट बाजे करवट बाजे ..अरे चौका पे रोटी बेलावत बाजे
अरे टंगिया उठाय ..चुदावत बाजे ..रेहन के संग चुदावत बाजे
लौंडा रोज पेलावत बाजे अरे छोटे घुंघुर वाला ..
किसी ने पुछा ..ये रेहन कौन है ....
मुझे तो मालूम ही था ..रीत की ठर्कियों की सेना का कमांडर ...रीत ने उसके औजार का फोटो एस एम् एस किया था और उस देख के रंजी पानी पानी हो गयी थी….
एकदम गीली ...
और वो फोटो मैंने भी देखी थी ....फोटो क्या बस उसके औजार की फोटो थी ...मेरे से बीस नहीं तो उन्नीस भी नहीं था ...और मोटा खूब तना हुआ ...किसी भी लड़की के मुंह में पानी आ जाय ...
लेकिन कई ने एक साथ सवाल पूछ लिया ...ये रेहन कौन है
और बिना हिचकिचाए ...गुड्डी ने जवाब भी दे दिया ...
" अरे वही ..जिसने इनकी बहन कम माल की बनारस में पहली बुकिंग दी है ...अब तक बारह लोगों की बुकिंग एडवांस में हो गयी है ...और वो रेहन तो कुछ भी रेट देने के लिए उतावला था ..."
अरे पठान है हचक के पेलेगा ...कोई भाभी बोलीं ...तो गुड्डी बोली ..वाही तो सब देख सुन के रंजी ने फैसला किया है ...
बात का ट्रैक इस तरह बदला की अब कपड़ों का नम्बर आया और शीला भाभी ने गुड्डी जो साडी लायी थी और आँगन से किसी भाभी का गिरा पेटीकोट उतार के पहना दिया ...
चोली पहनाने का काम गुड्डी ने किया लेकिन सब लोग चिल्लाये अरे पहले अन्दर वाला ...
गुड्डी हंस के बोली मुझे याद है बस नाप रही थी ....और फिर ब्रा ...वही जो दूकान पे सेल्स गर्ल ने मुझसे मेरी बनियाइन का नंबर पूछ के दिया था बस वही पैकेट ..
मेरी भाभी भी मैदान में पीछे नहीं थी ...गुड्डी से बोली ..अरे तूझे कल कुछ बोल था ना बाजार से लाने के लिए ...
गुड्डी बोली ...अरे आप घबड़ाए मत ..आपके देवर का श्रृंगार कम लिंग परिवर्तन पूरा होगा ..गारंटी कोई पहचान नहीं सकता .शाम को कालीन गंज ( मेरे शहर का रेड लाईट एरिया )...में इनको बैठा दीजियेगा ...तो सौ दो सौ कमा लायेंगे ...
उसने अपना बंद पैकेट खोल दो टेनिस की बाल निकाली उस पे दो बहोत छोटी छोटी कंचे की गोलिया चिपकाई ..उन्हें ब्रा के अंदर रख के टेप से चिपका दिया ..और अब वो हाफ कप पुश अप पैडेड ब्रा , के अनर जब चिपक गए तो लतिका के साथ मिल के मुझे पहले वो पहनाया फिर चोली ...
हे अभी एक चीज बची है ...दुल्हन का सिंदूरदान तो हुआ ही नहीं ...
उस काम के लिए और कौन आता ...गुड्डी ने ढेर सार सिन्दूर मेरी सीधी मांग में भर दिया ...कुछ ..क्या काफी कुछ मेरे नाक पे गिर गया ...
गुड्डी ने चिढाया ...फिर शीला भाभी ने ...अरे सास बहुत प्यार करेगी तोंहका ..जिस दुलहन की नाक पे सिन्दूर गिर जाता है ना ..उस की सास ..उस को हर तरह से प्यार करती है
गुड्डी ने सिन्दूर की डिबिया फिर लतिका और रीमा को भी पकड़ा दी ...बोली ..
चल चल मैं मिल बाँट के खाने में विश्वास रखती हूँ ..और जब तेरी शादी हो जायेगी न तो नंदोई पे पहले मैं नम्बर लगाउंगी ...
किसी भाभी ने बोल अरे शादी होने में तो बहोत दिन लगेगा इन दोनों के ...तो गुड्डी हंस के बोली ...
अरे यारों की तो लाइन लगी रहेगी ना ...तो टेम्पोरेरी नंदोई ही सही ...
रीमा और लतिका ने भी एक एक चुटकी सिन्दूर डाल ही दिया ..
रीमा के गाल पिंच कर के मैं बोला ...हे सिंदूर दान तो हो गया ...अब सुहाग रात ...
वो भी डरने वाली नहीं थी ...हंस के बोली ...जब चाहिए ...
हम लोगों की टोली घर से बाहर निकल कर के कालोनी में पहुंची ...
निकलने के पहले मुझे गुड्डी ने शीशा दिखाया ...मैं खुद को नहीं पहचान पाया ...
मुझे भाभियों की टीम में शामिल कर लिया गया था और ...मिश्रायिन भाभी ...सबसे ये बोलती थी की मैं भाभी के मायके की हूँ ...
हजारों कहानियाँ हैं फन मज़ा मस्ती पर !


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