FUN-MAZA-MASTI
फागुन के दिन चार--102
गतांक से आगे ...........
सिर्फ बहन की ही लेते हो या भाभी की भी ...और उन्होंने अपना आरेंज जूस का कार्टन बढ़ा दिया ...
गुड्डी भी और आग लगाया उसने ..." अरे जो आदमी खुद अपनी शर्ट के पीछे अपना नाम बहनचोद ...लिख के घूमता फिर उस से पूछना क्या
मेरा दूसरा हाथ रीतू भाभी के गीली रंग से भीगी पारदर्शी साडी से झांकते उभार पे ...और मैंने उनके कार्टन से भी सिप ले ली ...
दोनों ने मिल के आधा कार्टन मेरे पेट में ...
बाकी रीतू भाभी और दी ...हाँ गुड्डी जो बहुत बोल रही थी उसको भी दोनों ने पकड कर दो चार पेग के बराबर पिला ही दिया ..
असर हम सब पे पांच मिनट में चालु हो गया ...
होली का रंग चारों ओर था ...
घर के बाहर से हुरियारों के होली के भोजपुरी गानों की आवाज ...
रँगे के बा घाघरा चोलिया हो ..घाघरा चोलिया
कोई दूसरी टोली गा रही थी ...
कच्चे कच्चे दू गो अनार बा ..रंगे के तैयार बा न ...
और साथ में कबीरा होली और जोगीडा की आवाजें ...आरेंज वोदका का जोश
और आंगन में भी अब वही गानों , गालियों के रंग ....भाभिया ननदों को पकड पकड के नचा रही थीं ...उनसे गालियाँ दिलवा रही थी ..वो भी मेरा नाम ले के ...
आरेंज वोदका का जोश गुड्डी पे भी चढ़ गया वो मेरे, दी और रीतू भाभी के साथ आँगन के किनारे बैठी थी ...
मैंने उस से कहा हे तेरे पे भी भी नशा चढ़ रहा है तो गुड्डी वहीँ से एक शेर बोली ..
फुद्दी का नशा प्यारे , नशा सब से नशीला है
जिसे देखो यहाँ चूत के पानी से गीला है ...*
पूरे आँगन से सब लड़कियों भाभियों ने एक साथ वाह वाह की ..तो गुड्डी फिर चालू हो गयी
होली का नशा छाया
सवार फुद्दी है बस सर पे
फरक पड़ता है क्या बेड पे
बहन है की बीबी है *
अबकी भाभियों ने जबर्दस्त वाह वाह की
उसके बाद आँगन में जबर्दस्त होली पैरोडियाँ शुरू हो गयीं ...
ड्डी को भाभियों ने बुला लिया अपनी ओर से गाने के लिए
और दी को लड़कियों ने खींच लिया ...
तालियाँ चालु हो गयी तो कई डिब्बे पे ही चम्मच से ताल दे रही थीं
लंड लंबा मोटा वाला
गंडिया में पूरा डाला
गधे जेसे लंड ने ले ली मेरी जान
हाय रे मैं तेरे क़ुरबान
मराई हो किससे गोरी
गांड में तेल ले के
चुदासी जवानी की ये
और खूब शोर के बाद गाना आगे बढा ...मैं और रीतू भाभी आंगन के में बैठे ताल दे रहे थे ...
सैय्याँ गांडु मेरे,
थोड़ी सी गांड मराई माँगूँ
गांड मार दे मेरी,
सील तोड़ दे मेरी
कर ले गांड चुदाई मेरी जान
हाय रे मैं तेरे क़ुरबान..
जब से है मारा तुझको,
हो गए गुलाम तेरे
गांड मरा ले गोरी,
आएंगे काम तेरे
अपना ये वीर्य सारा
गिरा देंगे नाम तेरे
जींस ये लो हिप वाला,
उसपर कोंडम की माला
जींस ने ले ली मेरी जान
हाय रे मैं तेरे...
शायद आँगन में सबके सामने हुमच के जो मैंने दी की गांड थी उसका असर था की शादीशुदा तो छोडिये ..कुंवारियां भी गांड मरवाने को बेताब थीं
उसके बाद आँगन में डांस ...भरतपुर लुट गयो से ले के फिल्मी गानों की पैरोडियों पे ...एक ननद लड़का बनती और भाभी उस की गर्ल फ्रेंड और फिर एक्शन सांग ...
क्या देखते हो?
चूचि तुम्हारी
क्या चाहते हो?
चुदाई तुम्हारी
न हम जो कह दें?
बिना चुदे रह न सकोगी
लगती नहीं ठीक नीयत तुम्हारी क्या देखते हो ...
रोज़-रोज़ देखूँ तुझे मस्त -मस्त लगे मुझे तेरे चूचियों में अमृत की धारा
चुने लगा लंड तेरा , देखे कोई चुदास तेरे, तेरी लंड का अन्दाज़ प्यारा *
साथ में मेरी भाभी , शीला भाभी , और एक दो लड़कियां ..भंग वाली गुझिया और ठंडाई की सप्लाई जारी किये थीं ...
किसी ने रंग फेंका ...किसी ने नाच्नेवालियों पे पिचकारी चलायी और होली फिर शुरू हो गयी
मैं और रीतु भाभी बैठे देख रहे थे
कुछ आरेंज वोदका का असर ...
कुछ आंगन में चल रहे मस्त गानों का सुरूर
और अब कुछ ननद भाभियों की होली की रगड़ाई मसलाई
रीतू भाभी पे भी फगुनाहट चढ़ गयी ...और उन्होंने आँगन में गिरे बह रहे , रंगों को अपने दोनों हाथ में लपेटा ..और सीधे मेरे चर्म दंड पे ...दोनों हाथों से ...
और जैसे ये काफी नहीं था ...उनकी एक जेठानी ने उन्हें देख के एक मोटी पेंट की ट्यूब उछाल दी ...( और कौन मेरी अपनी भाभी )
और बस कुछ देर जंग बहादुर लाल भभूका हो गए ..गाढ़ा पक्का लाल रंग ..
आँख नचा के , रीतू भाभी बोलीं ...' अब अपनी उस एलवल वाली छिनार बहन , रंजी से चुसवाना ...तो दस पन्दरह दिन में कुछ हल्का पड़ेगा '
लेकिन मैं तो रीतू भाभी को जवाब देने के लिए रंग ढूंढ रहा था ...और रीतू भाभी भी मेरे दिल की बात जान के बोली ,
" देवर जी रंग चाहिए ...ले लो ना ..."
और फिर पूरी पेंट की ट्यूब अपने हाथ पे खाली कर सीधे मेरे खूंटे पे ..और नीचे बाल्स पे भी ..यहाँ तक की पिछवाड़े भी ...
मुझे भी शरारत सूझी ..और मैंने धक्का देके रीतू भाभी को वही आँगन में गिरा दिया ...
और पल भर में उनके उपर ..
रीतू भाभी की चूंची ...रंग से सराबोर थी ..काही नीला बैंगनी ...कुछ उनकी ननदों ने लगाया था और बाकि मैंने ..बस लाल रंग नहीं था ...
वो कसर मैंने अब पूरी की ...
रीतू भाभी की चून्चियां जानमार थी ..एकदम डाकू ...
जब वो खूब टाईट , लो कट बैकलेस ब्लाउज में उन्हें झलकाती , उभारती निकलती थीं ...तो मेरी क्या सारे शहर के लड़कों की जान निकल जाती थी ...आज मौका था ...
अपनी पूरे आठ इंच की मोती लाल रंग से लिपटी पिचकारी मैंने रीतू भाभी के दोनों पहाड़ों के
बीच डाली ...और लगा चूंची चोदन करने ...
साथ में मेरे दोनों हाथ भी रीतू भाभी का जोबन भी पूरी तेजी से रगड़ रहे थे ...उन्हें मेरे तन्नाये लंड पे दबा रहे थे…
रीतू भाभी की चून्चियां गजब थीं एकदम ...मस्त माल
पूरी डी कप साइज , और उन के तन्वंगी देह पे सुरु के पेड़ की तरह छरहरे बदन पे वो और उभर के जान मारती थीं
देखने में मस्त , छूने में मस्त , पकड़ने में मस्त ,दबाने में मस्त और अब चोदने में मस्त ..
डी कप टिट फक के ये परफेक्ट होते हैं और उसपर उनका चुदास अंदाज ...
चूंची चोदन में वो भी अब खुल के साथ दे रही थीं ...
होली में भाभी हों तो रीतू भाभी ऐसी ...
अपने दोनों हाथॊ से अपने भरे भरे गदराये गद्दर उभारों को अपने दोनों हाथो से मेरे लंड के ऊपर दबा लिया ...और जो प्रेम गली सी बनी , सांकरी ...वो किसी कुँवारी की चूत से कम मस्त नहीं थी ...
दोनों जो बन रंगों से रंगे सतरंगे ,,,और उनके बीच ..सटा सटा ..फचा फच जाता मेरा मोटा लंड ..
और रीतू भाभी के रसीले होंठ भी ..कभी उनसे गालिया बरसती मेरे सारे मायकेवालियों के लिए मुझे और उक्सातीं ...
और कभी वो अपनी लम्बी मोटी रसीली जुबान निकाल के मेरे खुले मोटे सुपाडे को चाट लेतीं …और मैं मजे से गनगना जाता और फिर ...
और जोर से हुमच हुमच कर , हचक हचक कर रीतू भाभी की चूंची चोदने लगता ...
लेकिन इसका एक फायदा और हुआ ...
वो मिला मेरे मोहल्ले के रिश्ते से बहनों , कम कालोनी की लड़कियों कम मेरी भाभी की ननदों को ....
शायद पहली बार ऐसा हो रहा था ...की होली के दिन इस तरह से आँगन में भाभी को पटक कर , रगड़ कर ....
सारी ननदों ने हम दोनों को घेर लिया ...
और खूब जोर जोर से शोर मचा रही थीं भाभियों को हूट कर रही थीं ...
और उन को लीड कर थी ...वो अल्पवयस्क , कमसिन , लोलिता टाइप ..
वही जिसके टाप फाडू समोसे सबकी जान मारते थे ..एकदम चून्चिया उठान ..जिसके समोसे के बारे में सोच के मैं भी तीन चार बार मुट्ठ मार चूका था ...
साथ में कालोनी की और लडकियां ....
और जोर से ...और हचक कर ...वो समोसे वाली बोल रही थी ..और पीछे से बाकी लडकियाँ दुहरा रही थीं
और जोर से ...और हचक कर ..और चुदेंगी और चुदेंगी ...रीतू भाभी और चुदेंगी ..
और मैंने भी उन नारों की ताल पे लंड की रफ्तार बढ़ा दी ...
हुमच के रीतू भाभी की मस्त गदराई चूंचियां चोदने लगा
सारी लड़कियां उस 'समोसेवाली 'के साथ मिल के जोर जोर से चिल्ला रही थी
भाभी की ले लो ..रीतू भाभी की ले लो ...
और उस समोसे वाली ने मुझे देख के मुस्कराया ...और मेरी निगाहों ने भी उसे हाई फाइव किया ..
वो सीधे रीतु भाभी को चिढाने लगी ...
"क्यों भाभी मजा आया मेरे भैया से ...अभी एक का ले लो ..देखना मेरे सारे भाई बारी बारी से लाइन लगायेंगे ""...
तो दूसरी छुटकी और जहर बोली ,
" अरे हमारी रीतू भाभी को तूने समझा क्या है ...नैहर में खूब प्रैक्टिस कर के आयीं है ...
बारी बारी से क्यों ...एक साथ तीन तीन तो खूब आराम से ले लेंगी रीतू भाभी ...अपने भाइयों को नहीं मना करती थीं ...तो हमारे भाइयों को क्यों मना करेंगी ..."
एक एक पे तीन तीन ...एक एक पे तीन तीन ...पीछे से बाकी लड़कियां चिल्लाने लगीं ..
बिचारी रीतू भाभी को जोश भी आरहा था गुस्सा भी लेकिन कुछ कर नहीं सकती थीं ..न बोल सकती थीं ...
चूंची चोदते चोदते ..जोश में आके मैंने अपना मोटा मस्त सुपाडा भी रीतू भाभी के मुंह में ठेल दिया था ...
और उन का मुंह अब बंद था ..बिचारी सिर्फ गों गों कर रही थी ...कुनमुना रही थी ...ननदों की बात का जवाब देने के लिए बेताब हो रही थीं ...लेकिन मुंह तो बंद था
मैं खूब जोश में रीतू भाभी की बड़ी बड़ी चूंची चोदने के साथ ...अब मुंह भी चोद रहा था ...
रीतू भाभी ने इशारा किया एक मिनट ....और मैंने सुपाडा मुंह से निकाल लिया उनके थूक से लिपटा , लिथड़ा ...
वो पलट के उस छोटी ननद से बोलीं ...
" साल्ली छिनार बुर चोदी , गदहे की जनी , इसी आंगन में तुझे तेरे भाई से ना चुदवाया ..पटक पटक के तो कहना "
हंस के उस कच्ची कली , 'समोसे वाली ' ने जवाब दिया ..
" अरे भाभी ...पहले आप ले लो मेरे भैया का मोटा सख्त ...फिर देखा जाएगा ..."
वो भी सोच रही थी ..बिना झड़े ..मैं थोड़ी रीतू भाभी ऐसे मस्त माल को छोड़ने वाला हूँ ..
सोचना उसका बिलकुल सही था ...ऐसी मस्त डी साइज चून्चिया रोज रोज थोड़े ही चोदने को मिलती हैं ...मैंने चूंची चोदन की रफ्तार बढ़ा दी
सारी लड़कियां उस 'समोसेवाली 'के साथ मिल के जोर जोर से चिल्ला रही थी
भाभी की ले लो ..रीतू भाभी की ले लो ...
और उस समोसे वाली ने मुझे देख के मुस्कराया ...और मेरी निगाहों ने भी उसे हाई फाइव किया ..
वो सीधे रीतु भाभी को चिढाने लगी ...क्यों भाभी मजा आया मेरे भैया से ...अभी एक का ले लो ..देखना मेरे सारे भाई बारी बारी से लाइन लगायेंगे ...
तो दूसरी छुटकी और जहर बोली ,
" अरे हमारी रीतू भाभी को तूने समझा क्या है ...नैहर में खूब प्रैक्टिस कर के आयीं है ...बारी बारी से क्यों ...एक साथ तीन तीन तो खूब आराम से ले लेंगी रीतू भाभी ...अपने भाइयों को नहीं मना करती थीं ...तो हमारे भाइयों को क्यों मना करेंगी ..."
एक एक पे तीन तीन ...एक एक पे तीन तीन ...पीछे से बाकी लड़कियां चिल्लाने लगीं ..
बिचारी रीतू भाभी को जोश भी आरहा था गुस्सा भी लेकिन कुछ कर नहीं सकती थीं ..न बोल सकती थीं ...
चूंची चोदते चोदते ..जोश में आके मैंने अपना मोटा मस्त सुपाडा भी रीतू भाभी के मुंह में ठेल दिया था ...और उन का मुंह अब बंद था ..बिचारी सिर्फ गों गों कर रही थी ...कुनमुना रही थी ...ननदों की बात का जवाब देने के लिए बेताब हो रही थीं ...लेकिन मुंह तो बंद था
मैं खूब जोश में रीतू भाभी की बड़ी बड़ी चूंची चोदने के साथ ...अब मुंह भी चोद रहा था ...
रीतू भाभी ने इशारा किया एक मिनट ....और मैंने सुपाडा मुंह से निकाल लिया उनके थूक से लिपटा , लिथड़ा ...
वो पलट के उस छोटी ननद से बोलीं ...
" साल्ली छिनार बुर चोदी , गदहे की जनी , इसी आंगन में तुझे तेरे भाई से ना चुदवाया ..पटक पटक के तो कहना "
हंस के उस कच्ची कली , 'समोसे वाली ' ने जवाब दिया ..
" अरे भाभी ...पहले आप ले लो मेरे भैया का मोटा सख्त ...फिर देखा जाएगा ..."
वो भी सोच रही थी ..बिना झड़े ..मैं थोड़ी रीतू भाभी ऐसे मस्त माल को छोड़ने वाला हूँ ..
सोचना उसका बिलकुल सही था ...ऐसी मस्त डी साइज चून्चिया रोज रोज थोड़े ही चोदने को मिलती हैं ...मैंने चूंची चोदन की रफ्तार बढ़ा दी
लेकिन तभी वो हुआ जिसे ना मैं सोच सकता था न वो ...भाभियों में सबसे कम उम्र की ..सबसे छोटी ...जो अभी बल्कि भाभी थी भी नहीं ...लेकिन जिसे सारी लड़कियां , छुटकी भाभी , नयकी भाभी कह के छेड़ रही थीं ..उससे नहीं रहा गया ...वो मैदान में आ गयी ...और उसने पीछे से ...
जी आपने सही गेस किया ...गुड्डी से नहीं रहा गया ...'समोसे वाली ' की ये बाते सुन के ...
और वो पीछे से ..उसने अंकवार में ऐसे दबोचा की वो 'समोसे वाली ...'...हिल भी नही सकती थी ...गुड्डी ने फिर एक झटके में उसका बचा खुचा टाप फाड़ के मेरे ऊपर फ़ेंक दिया ...
ब्रा तो पहले राउंड में ही भाभियों ने सारी ननदों का चीथ के अलग कर दिया था ...
उसके छोटे छोटे निपल मरोड़ के गुड्डी उसके गाल पे जोर से बाईट कर के बोली ..
' अरे छिनरो , बहुत तेरी चूत में मिर्च लग रही है ...ना तो अभी सारी आग ठंडी करती हूँ "
गुड्डी के मैदान में आते ही रीतू भाभी भी तिलमिलाने लगीं ...मुझसे बोली
" बस थोड़ी देर छोड़ दे न बस इस रंडी के चूत का भूत झाड के आती हूँ ..."
...
" भाभी इस का क्या होगा ..." मैंने तन्नाये जंग बहादुर की ओर इशारा कर के पूछा .
" तुझसे ज्यादा इसका ख्याल मुझे है ...और भाभी देवर का फागुन तो साल भर चलता है ...' वो बोली ...
' न भाभी न इतना लम्बा इन्तजार मुझसे ना होने का' मैंने जोर से उनकी चूंची चोदते कहा .
' बस थोड़ी देर के लिए छोड़ दे ना पांच मिनट के लिए ...प्रामिस ...तेरे औजार का मस्त इंतजाम करवाउंगी अभी ...तुरंत ...और जहाँ तक मेरा सवाल है ...तू जब चाहे ...जैसे चाहे ..आगे पीछे ...उपर नीचे सब ..."
मेरी पकड़ थोड़ी ढीली पड़ी ...मैं शायद तब भी ना छोड़ता लेकिन गुड्डी ना उसे मेरी हर कमजोरी मालूम है और उसकी हर बात मेरे लिए आर्डर होती है ..और गुड्डी ने वो हरकत कर दी ...
गुड्डी ने 'समोसे वाली' के 'समोसे ' अपने हाथों पे पकड़ के उभार के मुझे दिखा के ललचाया ....बोली
" बहुत ललचाते थे ना दूर दूर से मौका है ले लो मजा चख लो स्वाद इन छोटे छोटे समोसों का ...'
सच में मुंह में पानी आ गया ..लाइफ टाइम आफर ...
और उस ने आँख से इशारा भी किया ...
मैंने रीतू भाभी को छोड़ दिया ...
बस पल भर में वो कच्ची कली ...गुड्डी और रीतू भाभी के बीच में सैंड विच बन गयी ...
मैच का रुख एक पल में बदल गया ...भाभियाँ फिर भारी ....
मैं आगन में बैठ गया ....और दी भी मेरे पास आके बैठ गयीं ...और जंग बहादुर उनकी कोमल कोमल मुट्ठी में ...
आठ इंच की तलवार तैयार थी लेकिन रीतू भाभी ऐन मौके पे…
"" क्यों भौजाई ने दी दिया ना धोखा ऐन मौके पे कर दिया के एल पी डी ..."
मैं सिर्फ मुस्करा दिया और ...कर भी क्या सकता था ...
लेकिन दी ही बोली लेकिन मुझसे नहीं ...मेरे तन्नाये ;उससे ....
' अरे मुन्ना ..घबडा मत मिलेगी जल्दी ही मिलेगी तब तक कुश्ती देख ...'
और हम लेस्बियन रेसलिंग देखने लगे ...
एक लड़की को देख के ही मुंह में पानी आने लगता है ...और लेस्बियन रेसलिंग में तो दो दो ...और यहाँ पे तो तीन थी ...मेरी सच में हालत खराब हो रही थी ...
उस कमसिन कच्ची कली ने बहुत कोशिश की ...लेकिन रीतू भाभी बहुत खायी खेली थीं ...और गुड्डी भी बनारस की सीखी पढ़ी
मुझे लग रहा था जैसे अभी मिश्रायिन भाभी और मेरी भाभी की जोड़ी के आगे ...ननदे बिना लडे सरेण्डर कर देती हैं ...जल्द ही जब गुड्डी आ जाएगी ...तो गुड्डी और रीतू भाभी की जोड़ी का यही हाल होगा ...
जैसे शेर चूहे को खिलाता है वही हालत वो दोनों उसकी कर रही थी
गुड्डी पूरे जोश मे थी. समोसे वाली के दोनो हाथ , रीतू भाभी की जबर्दस्त गिरफ्त मे थे वो बिचारी छट्पटा रही थी , चूतड पटक रही थी ...लेकिन रीतू भाभी और गुड्डी कि जुगल बन्दी के आगे उस कि क्या चलती.
गुड्डी ने उसकी दोनो जांघे जबरन फैलवायी और उसके छोटे से कसे छेद को पहले तो अपनी हथेली से रगडती रही ...और जब वो थोडी गीली हो गयी..तो अपनी मंझली उंगली , घचाक से ...वो भी पूरी स्टाइल से ...मुट्ठी मोड के सिर्फ ...मंझली उंगली निकली ...पूरी ताकत से उसकी कुँवारी कसी कच्ची चूत में पेल दी .
वो बहोत जोर से चीखी ...
लेकिन उसकी चीख भाभियों की हंसी और हुंकार में डूब गयी ...
फाड़ डालो साली छिनार की चूत , बहुत बोल रही थी ..सब एक साथ बोलीं ...
फाड़ दो पेल दो ...फाड़ दो ...चोद दो ...भाभिया नारा लगा रही थी ...
"अभी ऊँगली का एक पोर गयी है ...त़ा इ हाल है अभी तुम्हारे भैया का मोटा लंड यही घोटेगी ... तो कैसे लिलोगी ..मेरी प्यारी बन्नो ...और उसके बाद मेरे भैया ..फिर मोहल्ले के लौंडो का ..सीख लो गटागट घोंटना ..." गुड्डी ऊँगली गोल गोलघुमाते बोली ...
तब तक रीतू भाभी उसकी बस आती हुयी चूंची को पुल करते हुए बोली ...
' इ बिन्न्नो का आज निवान कराय दो बस देखना एतना लंड घोंटेंगी , अगले होली तक की कालीन गंज की रंडियों ( कालीन गंज हमारेशहर की मशहूर रेड लाईट एरिया है ) को भी मात करेंगी ...
तब तक गुड्डी ने उस कच्ची कलीकी बुर से उंगली निकाल के मेरी ओर ललचाते हुए दिखाया और बोली ...
' बोललेना है इस छमिया की कच्ची कोरी ...सील बंद है अभी ...तुम हाँ करो तो बोलो ...वरना ..उंगली से सील तोड़ दूंगी ...बोल एकदम फ्री ..."
मैं उहापोह में ...बोलूं तो फंसू ...मन तो कर रहा था लेकिन झिझक भी रहा था और ना हाँ करने पे भी ..सील तो उसकी गुड्डी अपनी उंगली से फाड़ देगी ...
मेरे मुंह से निकल गया ..नहीं ..लेकिन ...हाँ ..और सब भाभियाँ मेरे ऊपर पिल पड़ीं ....
एक साथ ...बहन चोद बहनचोद का नारा ..
गनीमत था की रीतू भाभी जोश में थी और गुड्डी से बोली ...यार पहले मैं तो इस कच्ची कली का मजा ले लूँ थोडा ...
और उसके बाद तो क्या कोई मर्द , लौंडिया चोदेगा ...जिस जोश और जोर से रीतू भाभी ने अपनी चूत से उसकी अनचुदी , कच्ची , कुँवारी चूत पे घिस्से लगाए ...दोनों टांगो को फैला के ...
और मेरी सोन चिरैया रीतू भाभी से उन्नीस थोड़े ही थी ...उसने 'समोसे वाली ' के छोटे छोटे समोसे का स्वाद लेना शुरू किया कभी ऊँगली से कभी अपने होंठो से ...और उसमें भी गुड्डी उसके कच्चे हरे मटर के दानो ऐसे निपल्स को बेसब्रे बालम की तरह से काट लेती ...और वो कच्ची कली जोर से चिल्लाती ...और भाभियाँ जवाब जोर के ठहाके लगाती ..
गुड्डी बीच बीच में उसके छोटे जोश में एकदम कड़े समोसे मुझे दिखा के और ललचाती ...लेकिन तभी रीतू भाभी ..उस लेस्बियन रेसलिंग के लेवल को अगले लेवल पे ले गयीं ...जो अल्टीमेट सरेंडर टाइप कुश्तियां दिखातें है ..उस के आखिरी लेवल में हारने वाली के साथ जो जीतने वाली करतीं है ...बल्कि उस से भी कुछ ज्यादा ...
रीतु भाभी उस कच्ची कली के सर की ओर जा के बैठ गयीं और गुड्डी को उन्होने इशारा किया भरतपूर का मोर्चा सम्हालने को ...लेकिन मेरी सोन चिरैया बोली ..जरा इस को स्वाद तो चखा दूं ..
गुड्डी का ये डामिनेन्ट लेज रूप मेरे लिये भी नया था ...लेकिन था खूब रसीला
हजारों कहानियाँ हैं फन मज़ा मस्ती पर !


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