Wednesday, March 5, 2014

FUN-MAZA-MASTI भूखी किस्म की औरत -2

FUN-MAZA-MASTI

 भूखी किस्म की औरत -2

 जब मैं कमरे में लौटी, फिर से उनको बुलाया। शायद थोड़ा घबरा गए थे लेकिन फिर पहले इक आया, मैं बिस्तर पर फैली पड़ी थी, उठकर उसका स्वागत किया !
अभय नाम था उसका !
"क्यूँ इतना घबरा रहे थे आने को?"
"नहीं तो !"
मैंने अचानक से उसके लौड़े को पकड़ लिया- या फिर यह खड़ा नहीं होता?
"ऐसी बात नहीं है !"
मैंने नाईटी उतार फेंकी, ब्रा खोलकर बोली- मेरे लाल, दूध पियोगे?
वो पागलों की तरह मेरे मम्मे चूसने लगा, अब खुलने लगा। मैंने इतने में उसकी निक्कर खोल लौड़ा बाहर निकाल लिया और सहलाने लगी। उसका लौड़ा था तो ठीक ठाक लंबा, लेकिन अभी बच्चा सा था, मैंने उसको प्यार करते हुए कहा- अभी, लगता है, अभी हाथ से ही हिलाते होगे !"
"हाँ भाभी, कोई ऐसी नहीं मिलती जो इसको जवान कर दे !"
"क्यूँ? लड़कियों की तुम जैसे युवक को कैसी कमी?"
"भाभी, लेकिन कोई वो करने नहीं देती !"
वो शरमा सा गया।
"आज से तुम दोनों की यह भाभी सब मजे देगी ! लोगे ना?"
उसने मुझे बाँहों में कसते हुए मेरे होंठ चूमे- भाभी, आप जैसी भाभी को कौन छोड़ेगा ! लगता है भैया कुछ करते नहीं !
इतने में राहुल भी वहाँ आ गया, अंदर घुसा मैंने दरवाज़े को पूरी तरह लॉक किया और बड़ी लाईट बुझा दी, छोटी लाईट जला दी, परदे आगे किये, बिस्तर पर टांगें फैला पसर गई, उनको दिखा दिखा उंगली मुँह से निकालती, फिर फ़ुद्दी में डालती !
यह देख राहुल ज्यादा दीवाना बन गया।
"दोनों ऊपर आ जाओ, मेहमान हो मेरे, फिर कहोगे भाभी ने बैठने को नहीं कहा।"
राहुल बोला- साली, हम तो तेरे साथ लेटना चाहते हैं !
"यह हुई मर्द वाली बात, तुम दोनों कुत्ते हो और मैं तुम दोनों की कुतिया हूँ !'
मैंने पैंटी भी उतार फेंकी, एकदम चिकनी फ़ुद्दी देख राहुल ने कपड़े उतार दिए। उसका लौड़ा बहुत बड़ा निकला।
"तेरा बहुत बड़ा है ! लेकिन अभी है बच्चा !"


 "दोनों ऊपर आ जाओ, मेहमान हो मेरे, फिर कहोगे भाभी ने बैठने को नहीं कहा।"
राहुल बोला- साली, हम तो तेरे साथ लेटना चाहते हैं !
"यह हुई मर्द वाली बात, तुम दोनों कुत्ते हो और मैं तुम दोनों की कुतिया हूँ !'
मैंने पैंटी भी उतार फेंकी, एकदम चिकनी फ़ुद्दी देख राहुल ने कपड़े उतार दिए। उसका लौड़ा बहुत बड़ा निकला।
"तेरा बहुत बड़ा है ! लेकिन अभी है बच्चा !"
"हैं? क्या बच्चा? बच्चा कहो तो आपको बच्चा दे देगा !'
"आकर मेरी फ़ुद्दी को जुबान से चाट !"
राहुल मेरी फ़ुद्दी चाटने लगा, अभय मेरे मम्मे सहला रहा था, हम तीनो नंगे होकर कामसूत्र के खेल खेलने को तैयार थे।
मैंने राहुल के लौड़े को प्यार से सहलाया और चूसने लगी, कभी उसका चूसती, कभी अभय का !
राहुल का लौड़ा सच में बहुत बड़ा था, मोटा भी था, हाँ मनोज जैसा नहीं था, लेकिन हो जाने वाला था।
मैंने सोचा कि आज ब्लू फिल्म की तरह सब करवाऊँ, आज मेरा दिल गांड मरवाने को भी बेताब था। इसी मकसद से मैंने दोनों को अपनी तरफ खींचा था।
"कैसी लगी नंगी भाभी?"
"साली, कुतिया ! तुमने तो रोज़ हमें मस्त किया है कपड़े बदलने के बहाने !"
"राहुल, तू बहुत कुत्ता-कमीना है, यह अभय कितना शर्मीला सा है ! तुमसे ज्यादा अभय मुझे पसंद है।"
मैं उनके सामने घोड़ी बन गई, चूतड़ हिलाने लगी, तभी अभय ने मेरे कूल्हों को सहलाया, चूमने लगा।
"हाँ मेरे लाल, चाट मेरी गांड कुत्ते की तरह !"
"दारु पीती हो?" राहुल बोला।
"पिला दे !"
"रुक !"
वो उठा, अपने लोयर की जेब से पव्वा निकाला, बोला- मार ले दो घूँट !
मैंने मुँह से लगाई, काफी सारी नीट ही पी ली, मेरे लिए वही बहुत थी, बाकी उसने पी ली।
"दोनों मेरे जिस्म को सूंघो, चूमो, चाटो ! हाय। बहुत मस्त हो तुम दोनों !"
अभय ने खुलकर मेरी गाण्ड चाटी, राहुल ने मेरे निप्पल लाल कर दिए, फ़ुद्दी चाटी।
"अभय, गांड मार मेरी !"
मैं घोड़ी बन गई, राहुल सामने आया और लौड़ा मेरे मुँह में दे दिया। अभय ने थूक लगाया और लौड़ा गाण्ड में पेल दिया, दर्द हुआ लेकिन मुझे बहुत मजा आया। उसने दबा कर मेरी गाण्ड मारी, अपना पानी मेरी गाण्ड को पिलाया। मैंने पहली बार गांड मरवाई थी।
राहुल ने कहा- चल कुतिया, लेट जा, टांगें उठा !
मैंने टाँगें फैला दी, उसने अपना नौ इंच का लौड़ा मेरे अन्दर घुसा दिया।
"हाय मेरे शेर ! राहुल, जोर जोर से पेल अपनी इस रंडी भाभी को !"
"कुतिया तू कहे तो तुझे रंडी बना देंगे ! बहुत लौड़े हैं तेरे लिए !"
अभय मेरे मम्मे चाटने लगा।
"लगता है अभय के बच्चे की प्यास बुझी !"
"जी नहीं !"
"ला इसको मुँह में घुसा दे, खड़ा कर दूँगी, फिर एक साथ दोनों मेरी लेना !""लोगे ना?"
"हाँ भाभी, आप कहो तो आपका हर छेद भर जाएगा !"
राहुल काफी मास्टर निकला, उधर उकसा उकसा मैंने उसका पानी निकलवा दिया दोनों हांफने लगे पर जल्दी दोनों दुबारा तैयार हो गए, दोनों ने एक साथ, मेरी गांड में अभय का, फ़ुद्दी में राहुल का, दोनों तरफ से मस्त कर दिया मिलकर !
मुझे ससुराल में प्यास बुझाने का साधन मिल गया, पति तो था ही नाकारा ! वो मेरे पास रात के सिवा कम ही आता, वो जानता था उसमें कुछ नहीं है।
सासू माँ मेरे पीछे पड़ गई कि पोता का मुँह दिखा !
पोते का मुँह कहाँ से दिखाती ! पति जानता था उसने कभी वहाँ तक पहुँचाया नहीं था जहाँ से मेरे पेट में उसका बीज रुके !
लेकिन अपने बेटे में दोष नहीं बोलती थी, दोष मेरे में है यह था उनका कहना !
राहुल और अभय के साथ करते समय मैं माला-डी का इस्तेमाल करती थी।

मुझे ससुराल में प्यास बुझाने का साधन मिल गया, पति तो था ही नाकारा ! वो मेरे पास रात के सिवा कम ही आता, वो जानता था उसमें कुछ नहीं है।
सासू माँ मेरे पीछे पड़ गई कि पोता का मुँह दिखा !
पोते का मुँह कहाँ से दिखाती ! पति जानता था उसने कभी वहाँ तक पहुँचाया नहीं था जहाँ से मेरे पेट में उसका बीज रुके !
लेकिन अपने बेटे में दोष नहीं बोलती थी, दोष मेरे में है यह था उनका कहना !
राहुल और अभय के साथ करते समय मैं माला-डी का इस्तेमाल करती थी।
मैंने सोच लिया था कि मैं राहुल के बच्चे की माँ बनूँगी।
एक दिन सासू माँ मुझे एक बाबे के पास ले गई, दिखने में ही वो एक नंबर का हरामी नज़र आया मुझे।
मेरी सास बोली- बाबा, इसके बच्चा नहीं होता, देखो क्या दोष है, कोई उपाय बताओ।
"इसके तो माथे में दोष दिख रहा है, एक विशेष पूजा रखनी होगी !"
बाबा काफी हट्टाकट्टा था, मैंने नशीली आँखों से उसकी तरफ देखा, अपना निचला होंठ चबाते हुए बोली- कैसी पूजा बाबा?
सासू माँ मेरे पीछे बैठी थी।
"चलो, अन्दर चलो, ध्यान लगाना होगा मेरे साथ एकांत में !"
सासू माँ बोली- हाँ बाबा, कैसे भी करके दोष मुक्त कर दो इसको।
मैं मटकती हुई अंदर गई बाबा के साथ मेरा गुंदाज जिस्म देख देख बाबा पागल होने लगा था, एक तरफ बाबा ने बिस्तर लगा रखा था।
"तुम बहुत सुंदर हो लेकिन तेरी सास तुझमें दोष निकालने आई है !"
"कुछ करो ना बाबा !"
नशीली आवाज़ थी मेरी।
वहाँ हवन चल रहा था, जाकर वहाँ लेटो, पहले देखना पड़ेगा।
मैंने अपनी चुन्नी उतार कर एक तरफ़ रख दी, मेरे मम्मे बाहर कूदने को बेताब थे, बाबा के माथे पर पसीना आ गया था।
मैं लेट गई, मेरी पहाड़ जैसी छाती उभर कर सामने आ गई, बाबा ने सिर्फ धोती पहनी थी, उसका मरदाना जिस्म किसी औरत को पिंघला देने वाला था।
उसने मेरे पेट पर हाथ फेरा, मैं कसमसा गई, बदन कांप गया, उसके हाथ ऊपर मेरे मम्मों की तरफ चलने लगा। मैं उठी, अपना कमीज उतार दिया।
"आपको दिक्कत आ रही थी चेक करने में, इसलिए उतार दी !"
काली ब्रा में कैद गोरे मम्मे देख बाबा पागल हो गया।
"ओह हो ! काफी समझदार हो ! लगता है पति को ज्यादा कष्ट नहीं करना पड़ता होगा?"
"कष्ट करने के लायक ही नहीं है आपकी भगतनी का बेटा !"
"तुम मेरी भगतनी नहीं हो?"
"अभी देख रही हूँ, आपकी नीयत खराब है, देखना होगा कि आप भगतनी बनवाने के लायक हो?"
"मुझे तो बच्चा चाहिए गुरु जी बस !"
उसने मेरी नाभि में उंगली घूमाते हुए मेरे निचले होंठ को चूमते हुए कहा- हड्डी से हड्डी बजा दूंगा तेरी ! तू खुद भगतनी बनेगी !
"यह क्या कर दिया? होंठ क्यूँ चूमा? शोर मचा दूँगी !"
"कुछ नहीं होगा, तुझ पर अपने सेवक छोड़ दूँगा !"
उसने नाभि पर चूमा, मैं सिसकने लगी।
"मचा शोर !"
उसने कहते हुए मेरी ब्रा खोल मेरे मम्मे को चूमा, जुबान को निप्पल पर फेरा, फिर धीरे से निप्पल चूसने लगा।
मैं उसके बालों में हाथ फेर फेर उसका साथ देने लगी, मैंने पाँव को उसकी धोती में घुसा उसके लौड़े को रगड़ा।
"हाय मेरी जान ! ऐसी भगतनी आज तक नहीं मिली जो इतनी जल्दी अपनी मर्ज़ी से तैयार होकर चिपकने लगेगी !"
उसका तो बहुत बड़ा मालूम पड़ा, महसूस किया मैंने कि बहुत बड़ा औज़ार है गुरूजी का, मैं भी लालच में आ गई एक मोटे लंबे लौड़े के।
वो लगतार मेरे होंठ चूस रहे थे, मैं अंगूठे से उनके लौड़े को सहला रही थी।
"बहुत मस्त औरत है बालिका !"
"अब अगर सासू माँ आपके पास ले आई है और आपको जो करना था, इसलिए सोच लिया क्यूँ न दिल से आपका साथ दूँ !"
"तू, कसम से, बहुत बड़ा खजाना है, बहुत सेक्सी है।"
"आप भी ज़बरदस्त मर्द दीखते हैं !"
बोले- मैं तेरी सास को कहूँगा कि इसको शाम को पूजा की सामग्री के साथ भेजना, शाम को ध्यान ज्यादा लगता है।
लेकिन मैं थी कि चाहती थी कि वो मुझे ना छोड़ें, मैंने अपनी सलवार का नाड़ा खोल दिया।
बोले- भगतनी, अभी इतना समय नहीं है, और कई भगत आये होंगे।
मैंने सलवार बाँधी, लेकिन खड़ी हुई घुटनों के बल वहीं बैठ उसकी लुंगी को साइड पर किया, अंडरवीयर को खिसकाया, उनका लौड़ा देखने के लिए उतावली थी।
वाह, कितना बड़ा लौड़ा था, नौ दस इंच का होगा !
मैं उसका सुपारा चूसने लगी, गुरूजी मेरी इस हरक़त से पागल हो गए खुद लौड़ा आगे धकेला, मैंने मजे से चूप्पे लिए, उनको बाहर के भगत भूलने गए और मैं भी चाहती थी कि एक बार जाते जाते उनका अमृत पी लूँ। मैं तेज़ी से चूसने लगी, वो बराबर मेरे बालों में हाथ फेर रहे थे, मैंने निप्पल की तरह चूसा, साथ साथ मुठ मारती रही।
बोले- पी लोगी क्या?
"वैसे तो कम पीती हूँ, आप गुरु जी हैं, आपका अमृत है रोकना मत !"
और चूसने लगी, जल्दी उनका जिस्म अकड़ने लगा, उन्होंने लौड़ा हाथ में लिया, मुठ मारते मारते अपना पानी निकालने लगे, इतना पानी मैंने किसी लौड़े से निकलता नहीं  देखा था। उस अमृत की एक एक बूँद मैंने चाट चाट कर साफ़ कर दी और हम दोनों कपड़े पहन बाहर निकल आये।
बाबा मेरी सासू मां को एक पर्चा देकर बोले- भगतनी, यह सामग्री इसके हाथों शाम को सात बजे भेजना होगा, उस वक़्त ध्यान ज्यादा लगता है।
"कोई राह दिखी है क्या स्वामी जी? क्या मैं पोते का मुँह देख पाऊँगी?"
"हाँ भगतनी, मेरी सेविकाओं ने इसका मुआयना किया, पूरी पूरी आस है बच्चा होने की ! बस जब जब कहूँ पूजा करवाने भेजती रहना !"
शाम को सासू माँ बोली- जा !
मैंने कहा- मुझे यह सब पाखंड लगते हैं, वो पाखंडी है, मुझे नहीं जाना वहाँ।
"तेरी माँ भी जायेगी कुतिया ! चल उठ, यह थाल पकड़ और निकल जा !"


 "हाँ भगतनी, मेरी सेविकाओं ने इसका मुआयना किया, पूरी पूरी आस है बच्चा होने की ! बस जब जब कहूँ पूजा करवाने भेजती रहना !"
शाम को सासू माँ बोली- जा !
मैंने कहा- मुझे यह सब पाखंड लगते हैं, वो पाखंडी है, मुझे नहीं जाना वहाँ।
"तेरी माँ भी जायेगी कुतिया ! चल उठ, यह थाल पकड़ और निकल जा !"
जब मैं पहुँची वहाँ कोई भगत नहीं था, उनके दरवाज़े के बाहर गनमैन थे, वो मेरी तरफ नशीली आँखों से देखने लगे।
"स्वामी जी हैं क्या?"
बोले- हाँ हाँ ! जा तेरा इंतज़ार हो रहा है !
जैसे वो जानते हों कि मेरी किस चीज़ की पूजा स्वामी करेगा।
स्वामी अपने बेडरूम में था, उसके हाथ में दारु का पैग था- आ गई भगतनी !
"हाँ !"
वो बड़ी सी कुर्सी पर बैठा था, झूल रहा था। मैं उसके करीब गई, उसका जाम पकड़ा, पूरा जाम दो घूँट में खींच गई, चुन्नी उतार दी, टाँगें फैला कर उसकी जांघों पर बैठ गई। मेरे दोनों उभारों का दबाव स्वामी के गले और होंठों के पास था, उसके बिना कहे कमीज़ उतार दी, ब्रा खोल दी।
वो मेरे दोनों मम्मे दबाने लगा, फिर निप्पल चूसने लगा। मैं उसके लौड़े को खड़ा होते महसूस करने लगी।
मैंने सलवार उतार दी और बिस्तर पर नागिन की तरह बल डाल लेट गई, काली चड्डी में मेरी गोरी जांघें देख स्वामी ने लुंगी उतार दी और बिस्तर पर आ गया।
मैंने उसका अंडरवीयर उतारा और लौड़ा चूसने लगी। स्वामी ने मेरी चड्डी भी उतार दी।
"हाय ! क्या फ़ुद्दी है कमीनी तेरी !"
वो चाटने लगा, मैं पगलाने लगी, मचलने लगी, वो और जोर जोर से चाटने लगा तो मैंने उसके लौड़े को हाथ में कस लिया और बोली- स्वामी जी, अब मत तड़पाओ, गुफा में घुसा डालो !
उसका लौड़ा नौ-दस इंच था। जैसे ही वो घुसाने लगा, इतनी चुदी होने के बावजूद मैं तकलीफ महसूस कर रही थी, लंबाई में ज्यादा था, मेरी बच्चेदानी से रगड़ रहा था, मैं मदहोश होकर स्वामी का साथ देने लगी।
"हाय मेरी जान ! तू साली गश्ती है ! पक्की रंडी बोले तो ! तेरी गांड मार सकता हूँ !"
स्वामी जी गांड तो मरवा लेती हूँ लेकिन आपका लौड़ा बहुत बड़ा है, उसमें दर्द देगा !"
"प्यार से डालूँगा !"
"अगली बार घुसा लेना !"
बोला- घोड़ी बन जा, उससे मेरा माल अच्छे से तेरी फ़ुद्दी में निकलेगा और बच्चेदानी तक जाएगा जिससे तेरा पेट बढ़ने के आसार होंगे। घोड़ी बना कर स्वामी ने फ़ुद्दी में घुसा दिया पूरा लौड़ा ! बच्चेदानी के मुँह पर रगड़ा मार रहा था। वो तेज़ हो गया, पौने घंटे से वो मुझे रगड रहा था तब जाकर उसने अपना अमृत मेरी बच्चेदानी के द्वार पर निकाला, उसके लौड़े से पानी बहुत निकलता था।
स्वामी मुझे आये दिन बुलाता, मेरी फ़ुद्दी का सत्यानाश कर दिया। उधर पति पर मेरा कोई ध्यान नहीं था, मुझे छोटे लौड़े बिल्कुल पसंद नहीं आते थे, अभेय का तो मुझे बच्चे की लूली लगने लगा था। मेरा दिल था कि एक साथ चार-पांच मर्द मुझे एक साथ एक बिस्तर पर ठोकें, सभी के लौड़े बड़े हों।
वो भी हुआ, स्वामी को दिल्ली जाना था, वहाँ उसने शिविर लगाना था, मैं उसकी ख़ास भगतनी बन गई थी, वो मुझे बोल कर गया कि पीछे से आश्रम का सारा कामकाज तुम देखोगी।
उसको तीन दिन के लिए जाना था, मेरी मदद के लिए उसके हटटे कटे सेवादार मौजूद थे जिनकी बाँहों में मैं पिसना चाहती थी।
उसके जितने सेवादार थे, सभी तो मानो पहलवान थे।
सासू माँ ने जब यह सुना कि स्वामी ने मुझे आश्रम सौंप दिया बहुत खुश थी, बोली- तू वहीं रुकना और दिल से आश्रम संभालना ताकि स्वामी लौट कर खुश हो कर तुझे वर दे डाले बच्चे का !
दिन में मैं देखती रही कि कौन सा सेवक कहाँ है और किस किस को चुन कर मैं एक साथ कई मर्दों के साथ चुदने का अपना सपना पूरा करूँ।
शाम हुई, मैं बिना बताये पूरे आश्रम का चक्कर लगाने निकली सेवकों के कमरों की तरफ। एक कमरे में मुझे हंसने की आवाजें सुनाई दी। जब उधर गई तो कमरे में बैठे चार सेवादार दारु पी रहे थे। मुझे देख सभी सीधे हो गए।
"यह क्या हो रहा है?"
"कुछ नहीं जी ! गलती हो गई।"
"क्या गलती हो गई? यह आश्रम है या बियर बार?"
एक बोला- आपके लिहाज से देखा जाए तो यह रंडीखाना भी है, रोज़ स्वामी आपको लेकर घुस जाते हैं तो बस या आगे बोलूँ?"
"मादरचोद, जुबां कैंची सी चलती है तेरी ! तुम भी मर्द हो ! तुम भी मुझे लेकर घुस जाओ ना !" अपना होंठ काटती हुई मैंने होंठों पर जुबां फेरी, आँख मारी, बोली- दारु लेकर थोड़ी देर में मेरे कमरे में आ जाना, तुम्हें भी सब को रंडीखाना दिखा दूँ, !
"यहाँ क्या है?"
"नहीं, कोई स्टेंडर्ड भी रखना चाहिए !"
मैं नाईटी लेकर बाथरूम में घुस गई, दरवाज़ा बंद किये बिना साफा लपेट नहाने लगी। मुझे पता था कि वो आने वाले हैं, पानी की आवाज़ सुनते हुए वो इधर आ गए, मुझे नहाती देख सबकी आँखें फटी रह गई।
"आ जाओ कमीनो ! मुझे नहलाने में मदद करो !"
"साफा भी उतार दे साली ! खुलकर नहा !"
चारों ने कपड़े उतार दिए, एक बोला- यहीं पैग पियोगी क्या?"हाँ, यहीं ले आओ !"
पैग खींच कर मैं बोली- बाकी सब तो ठीक है पर सबके कच्छे मैं एक एक कर उतारूंगी ! समझे?
"पहले तुम आओ राजा, क्या नाम है?
बोला- बिरजू लाल !
"हाय मेरे लाल !" उसका कच्छा खिसकाया तो काले रंग का हब्शी जैसा लौड़ा निकल हिलने लगा। मैंने उस पर पानी डाला और उसका सुपारा चूमा।
दूसरे को बुलाया- तेरा नाम?
बोला- बिश्नोई !
"मैं तेरे साथ सोई !"
उसकी इलास्टिक खिसकाई, एक और सांवला लौड़ा था, उसको धोकर चूमा।
तीसरा बोला- मैं विनोद हूँ !
उसका लौड़ा बहुत बड़ा था, मैंने चूमा।
चौथा बोला- मैं हूँ सरजू ! उसका लौड़ा भी हब्शी जैसा था।
शावर चला कर मैं बैठ गई, चारों के लौड़े बारी बारी चूसने लगी।
इतने में पांचवा भी आ गया, बोला- मैं कीमती लाल !
उसका बहुत बड़ा था।
"मुझे उठाओ और बिस्तर पर ले जाओ !"
कीमती ने मुझे उठाया और बिस्तर पर पटक दिया।
"एक फ़ुद्दी चाटो, दूसरा गांड चाटो, बाकी अपने लौड़े मेरे मुँह में बारी बारी से दो, मजे लो !"
विनोद बोला- साली तेरी गांड भी कोई गंगा से कम नहीं ! इसको चाटकर मैं धन्य हो जाऊँगा।
विनोद के बाद बिरजू बोला- तेरी चूत किसी धार्मिक गुफा से कम ना है ! इसको चाट अमृत मिलेगा।
बाकी तीनों के लौड़े चूस मेरा जबड़ा दुखने लगा, घोड़ी बन कर बोली- कीमती मेरी गांड में उतार दे !
जोर से झटका देकर उसने मेरी गांड फाड़ डाली।
"जोर जोर से पटको मुझे !"
कोई मेरा मम्मा चूसने लगा, कोई जाँघें !
सच में स्वाद आ रहा था पांचों से मुझे !
पूरी रात पेला सबने मुझे, सुबह मैं चलने लायक नहीं बची थी, फ़ुद्दी का मुँह खुला हुआ था, पाँच पाँच हब्शियों ने दो दो बार मुझे इस कदर चोदा कि क्या बताऊँ।
दोस्तो, इन दिनों मैं पेट से हूँ, ना जाने बच्चा किसका है, गिनती-मिनती करके देखा है तो लगता यही है कि यह स्वामी का है, सौ में से नब्बे परसेंट चांस स्वामी का है, जब बच्चा होगा उसके बाद जब चुदने लगूंगी।
तब फिर से आपके संग जुड़ जाऊँगी। मेरी यह पाँच किश्तों की चुदाई एकदम सच्ची सुच्ची है !
मेरे बच्चा देने तक सबको टाटा !




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