Saturday, March 8, 2014

FUN-MAZA-MASTI फागुन के दिन चार--82

FUN-MAZA-MASTI

   फागुन के दिन चार--82
गतांक से आगे ...........

 शिप

मेरा सिक्योर फोन बार बार वाइब्रेट कर रहा था। मैंने गुड्डी के जाते ही फोन निकाला तो चौक गया।
मुझे विश्वास नहीं हो रहा था .

रेड नाईट ...जिसका नाम हैकिंग की दुनिया में लोग आदर के साथ लेते थे।

बस एक दो बार क्लाउड सर्वर पर चैट में एक दो मिनट के लिए मुलाक़ात हुयी थी , लेकिन उसे इस आपरेशन के बारे में मालूम था।

रेड नाईट एलिट हैकर था और 'मास्टर आफ डिसेप्शन' का आखिरी मेंबर था। उसके साथ ही 'कल्ट आफ डेड काऊ ' का भी वो महत्वपूर्ण मेंबर था। उसके 'हैक्टिविस्ज्म ' के चलते चाइना से लेकर अमेरिका तक की सिक्योरिटी एजेंसी उसके पीछे पड़ी थीं,

उसकी दो मिस्ड काल थी और दो मेसेज थे।

मैंने मेसेज खोला तो बस इतना लिखा था ...कम टू क्लाउड सर्वर नाउ

मैं सरवर पर गया, और वहां से कितने रिले चैट से होते हुए , एक चैट बाक्स में पहुंचा ...वहां रेड नाईट मौजूद थे।

उन्होंने सिर्फ दो बातें कही ...उन्होंने एक साईट पर मेरे लिए एक रिपोर्ट रखी है और उसका पास वर्ड बताया और दूसरा की और उनका ग्रुप मेरी पूरी हेल्प करेगा.

मैंने रिपोर्ट खोली और मेरे दिमाग का रायता हो गया।

जेड के सेट लाईट फोन को ट्रेस कर के ये पता चल गया था की सीमा पार कहा से वो बात करता है। और मेरे हैकर फ्रेंड से ने जब वहां से काल ट्रेस की तो पता चला की मुम्बई और बडौदा से फ्रीक्वेंट बाते हो रही है और उन् दोनों टारगेट्स का भी पता चला .

लेकिन रेड नाईट ने जो बात बताई थी वो अत्यंत भयानक थी।

उन्होंने कुछ सोशल नेट वर्किंग के जरिये ये पता किया की उसी शहर में कोई एक और सेंटर है, जहां सिर्फ कूरियर के जरिये ही मेसेज भेजे जाते थे। और वहां से कोई भी साइबर कम्युनिकेशन मना था। लेकिन उस दूसरे सेंटर का इ मेल एड्रेस था।

जो नोट सर्क्युलेट किया गया था उसमें लिखा था की इस मेल एड्रेस पर कोई भी मेल भेजना, कापी देना या फारवर्ड करना मना है। बस उस के जरिये उन्होंने ये इन्फो पता की थी।

रेड नाईट ने खुद उस की अनिलिस की थी और उस के हिसाब से, इस हमले में एक शिप का भी इस्तेमाल होना है, लेकिन वो आप्रेशन मिडिल इस्ट से कहीं से कोआर्डिनेट किया जा रहा है। इस शिप के बारे में अभी तक तीन बाते पता चली हैं,

1 यह शिप 2012 में सोमालियन पाइरेट्स द्वारा हाइजेक किया गया था। जो पीरियड उन्होंने बताया था उसकी जब रेड नाईट ने जांच की तो सोमाली मैरिन एंड कोस्टल मानिटर के अनुसार 5 शिप्स हाइजेक हुए थे।

लेकिन रेड नाईट ने उसके साथ साथ लायड इंश्योरेंस के कंप्यूटर को हैक कर पता किया, तो ये मालूम चला की उसी पीरियड में चार और शिप्स ने इन्शुरेन्स क्लेम फाइल किया है।

रेड नाईट ने चारों शिप्स के डिटेल दिए थे और उन्हें शक था की ये इन्ही में से होंगे। वो उन कम्पनियों की और जांच कर रहे है , जिससे ये पता चल सके की इनमें से किसके इस हमले में इन्वाल्व होने के चांस ज्यादा हैं।

2. इस शिप की साइज क्यू -मैक्स है।

3. इस शिप में 4 क्रू इन्डियन हैं।

उन्होंने ये भी कहा था की मेरे इन्वेस्टिगेशन में अगर कुछ पता चले या मैं कुछ पूछना चाहूँ तो जिस सर्वर पर हम मिले थे वहां के गेट कीपर को वो इन्फो दे दूँ।

मैंने एक गहरी साँस ली और काम शुरू किया।

फिर सोचना शुरू किया ...अटैक कहाँ होगा।

अटैक , बडौदा में तो हो नहीं सकता। एक तो समुद्र उससे दूर है दूसरे कोई मेजर पोर्ट वहां आस पास नहीं है। हां दहेज़ हाल में खुला है लेकिन वहां सिर्फ कोयले की एक जेट्टी है ...

तो ये मुम्बई में ही होगा , लेकिन वहां भी कहाँ ...दो मेजर पोर्ट हैं , मुम्बई पोर्ट और जे एन पी टी ...या कही और किसी बीच पर जहां लोग हों या गेट वे आफ इण्डिया पर ...

तभी मेरी चमकी।

मैं इसरो का मैप अकेसेस कर सकता था।

मैंने उन चारों शिप्स की लोकेशन ढूंढी , एक ने अभी गल्फ आफ हार्मुज पार किया था तो वो तो नही पहुँच सकता था।

हाँ तीन नज्दीक थे। अब मैंने उन के डिटेल पता करने के लिए एक क्वेरी बना कर पोस्ट कर दी। इसमें बहोत से फैक्टर थे , जैसे उस शिप ने किस स्पीड से ट्रेवेल किया है, उसकी टाप स्पीड क्या है।

उसका डेस्टिनेशन पोर्ट क्या है।

उस पोर्ट पर कंजेशन की क्या हालात है . उस के कितने शिप बाहर वेट कर रहे हैं ...सबको फैक्टर कर के इन तीनो में से प्राबेलिटी निकालनी पड़ेगी।

फिर नेट पर उन शिप्स की ओनिंग कंपनी के बारे`में, पिछेले छ महीने में पोर्ट ऑफ़ काल के बारे में पता करना शुरू किया।

मामला बहोत कन्फुजिंग था।

लेकिन मुझे एक बात मालूम थी, बहोत जमाने से सिक्योरिटी एक्सपर्ट इस बात से चिंतित थे की अगर कोई शिप ख़ास तौर से एल न जी से भरा टेरर अटैक के लिए इस्तेमाल किया जाय तो बहोत भयावह दृश्य होगा।

यमन में 2002 में फ्रेंच टैंकर पर हमला हो चुका है।

यह माना जाता है की बस 3 मिनट में शिप का 2/3 कार्गो , शिप से 4-5 किलोमीटर दूर तक जा कर इग्नाईट हो सकता है। और जैसे 9/11 में हुआ , किसी के पास इस हालत से निबटने के लिए ना तो टाइम है ना एक्स्पर्टिज ...

बोस्ट्न हारबर ने एल एन जी टर्मिनल को हटा दिया है।

रैंड कारपोरेशन की एक स्टडी ने भी इस तरह के हमले की संभावना को माना है। उनके अनुसार जन धन की हानि के साथ आर्थिक नुक्सान भी बहोत अधिक होगा .

मेरे कुछ ज्यादा समझ में नहीं आ रहा था।

मैंने जो सवाल पूछे थे मुझे उसके जवाब का इन्तजार करना होगा।
और उसके बाद ठन्डे दिमाग से सोचना होगा।

मैंने सारे मामले को दिमाग के एक कोने में डाल दिया और कंप्यूटर बंद कर दिया।

तभी गुड्डी की आवाज आई ...खाना लग गया जल्दी आओ,
सामने दीवाल घडी ने 9 बजाये।


खाना और गाना

मैं बाहर निकला तो देखा की भाभी सीढी से अभी उतरी थीं और मंजू और शीला भाभी दोनों उनहे चिढा रही थीं .
उनकी शक्ल देख कर लग रहा था जैसे हचक के चुदवा के आ रही हों।

बिखरे हुए बाल, गालों पर दांत के निशान, सूजे हुए होंठ , जैसे किसी ने कस के काटा और चूसा हो, ब्लाउज के ऊपर के दो टूटे हुए हुक , जैसे कोई बेसबरा, जोबन मर्दन को बेताब इन्तजार न कर पाया हो ,

झाँकती हुयी दो बड़ी बड़ी गोरी गोलाइयां और उसके उपरी भाग पर जोश में कचकचा कर काटे गए दांत के निशान, लेकिन सबसे रसीली बात थी उनकी चाल, दोनों टाँगे हलकी सी फैली थी और वो धीमे धीमे चल रही थीं . "लगता है पीछे भी कुदाल हचक के चली है ..."
शीला भाभी ने चिढाया।

मानो स्वीकृति में भाभी ने बस हलके से मुस्करा दिया।

तब तक वो मेरे पास आ गयीं। गुड्डी भी थोड़ी ही दूर पर थी, खाने की टेबल सेट करती, मंजू के साथ लेकिन हम लोगों की बात सुन रही थी .

" क्यों भाभी लगता है,...खूब जम के ..., अभी इण्टरवल हुआ है या छुट्टी ..." मैंने भी छेड़ा .

" लगता है , तेरे लिए जल्द ही देवरानी लानी पड़ेगी, फिर पूछूंगी ..”

मेरे गाल पे उन्होंने कस के एक चिकोटी काटी लेकिन नजरें उनकी गुड्डी पे गडी थीं। फिर बोलीं, देवरानी लाऊंगी ना तो दिन रात चिपके रहोगे, चढ़े रहोगे उसके उपर, ...."
तब तक हम लोग खाने की टेबल पर पहुँच गए थे। मेरे एक ओर भाभी बैठी थीं और दूसरी ओर गुड्डी ..सामने शीला भाभी और मंजू ..गुड्डी ने निकाल कर एक गरमागरम , करारा मूली का पराठा , भाभी की थाली में परोसा।
" बहोत बढ़िया बनाया है तूने ...थोडा सा चख कर भाभी बोली और मेरी ओर इशारा करके कहा, ओर इसे तो नहीं पसंद है , लेकिन इनके भैया को तो बहोत अच्छा लगता है।"

" कैसी देवरानी चाहिए आपको ...." शीला भाभी ने मुस्कराते हुए पुछा .

" अरे ...बढ़िया खाना बनाने वाली हो, पराठा खाते हुए , कनखियों से गुड्डी की ओर देखते हुए वो बोलीं , फिर जोड़ा, गाना गाने वाली हो और ..."

" और जैम कर चुदवाने वाली हो।" मंजू ने बात पूरी की और शीला भाभी ने हामी भरी एकदम असली बात तो यही है ...."
वो तीनो कस के हंसने लगीं और भाभी मेरी ओर देख के मुस्कारने लगी।

गुड्डी भी कुछ खिसिया रही थी, कुछ मुस्करा रही थी और शीला भाभी और मंजू के थाली में पराठे डाल रही थी।
शीला भाभी ने गुड्डी के चूतड पे जोर से चिकोटी काट ली और बोली,

" अरे काहें शरमा रही हो, जिस दिन मिलेगा ना दिन रात टाँगे उठाये रहोगी, और वो भी ऐसा मस्त माल देख कर रगड़ता रहेगा।"

और फिर एक बार हंसी का दौर चालू हो गया। भाभी, मंजू और शीला भाभी ...तीनो
मैं बहोत मुश्किल से अपनी मुस्कराहट रोक पा रहा था।

भाभी ने एक बार कनखियों से एक बार गुड्डी को देखा फिर मुझसे कान में पूछा ,

' थोड़ी कमसिन उम्र की देवरानी चलेगी क्या।"

मैंने भी हलकी आवाज में जवाब दिया, " भाभी, चलेगी नहीं ...दौड़ेगी, अरे कली का मजा ही ओर है .”

तब तक भाभी को कुछ याद आ गया और मंजू से बोला अरे ज़रा गरम गरम गुझिया तो ला। मंजू उठ कर चलने लगी तो भाभी ने आँख से कुछ इशारा किया। और वो मुस्कराती अपने बड़े बड़े चूतड मटकाते हुए चल दी।


उधर गुड्डी भी उन लोगों की थाली में पराठे डाल कर मेरे बगल में बैठ गयी और अपनी थाली में पराठे निकाल कर रख लिए।

भाभी ने उससे पूछा , " हे मेरे देवर के लिए क्या बनाया है, इसे तो ये एकदम नहीं पसंद है .."

" मैं क्या जानू , मैंने रंजी से पूछा था की उसे क्या खाने में पसंद है तो वो बोली, मूली , गाजर, बैगन , खीरा ...तो मुझे लगा की इनको भी यही पसंद होगा। "
अपनी बड़ी बड़ी आँख नचाते , वो शैतान बड़ी अदा से बोली।

" अरे वो रंडी, उसने अपने निचले मुंह के लिए बोला होगा। " मंजू , जो गरम गरम गुझिया के आ गयी थी , उसने बोला।
" रंडी नहीं ...रंजी नाम है उसका। " मैंने करेक्ट किया।

लेकिन मेरी कौन सुनता,सब लोग गरमा गरमगुझिया खाने में मगन थे , सिवाय भाभी के जिन्होंने बोला की वो ऊपर ले जायेंगी और भैया के साथ ही खायेंगी।

अचानक मैंने नोटिस किया की , अरे तो वो गुझिया है, बिना डिजायन वाली मतलब ...डबल भांग की डोज। लेकिन तब तक मैं एक खा चुका था और गुड्डी दूसरी खा रही थी।

गुड्डी ने अपनी थाली में परेठा रखा और एक बड़ा सा कौर मुंह में ले के मुझसे , बड़ी अदा से पूछा,
" खाओगे , काटेगा नहीं। देखो मैं तो खा रही हूँ ....".

कोई नहीं होता तो ठीक था। लेकिन यहाँ सबके सामने ...
बनारस में तो होटल में मुझ शाकाहारी को इस दुष्ट ने , चिकेन, फिश, मटन ना जाने क्या क्या खिला दिया था।
लेकिन यहाँ ..

थोड़ा सा खा के उसने बाकी अधखाया, जूठा मूली के पराठे का टुकड़ा , मेरे होंठो की ओर बढ़ाया।
मैंने बगल में देखा। भाभी खाने में मगन थी।
एक पल के लिए सहम कर ...फिर मेरे होंठों ने उसे गपक लिया।

गुड्डी ने बिना देर किये फिर एक कौर अपने मुंह में लिया और खाते हुए , एक टुकडा , अपना जूठा , मुस्करा के मेरी और बढ़ा दिया और मेरे होंठो ने फिर लपक लिया।

तभी मैंने देखा की गुड्डी और भाभी की आँखे चार हुयी और दोनों की आँखे मुस्करा रही थीं
गुड्डी ने एक पराठा मेरी थाली में रखा, फिर शीला भाभी और मंजू को सुनाकर बोला,

" अब समझ में आया ये क्यों नहीं खा रहे हैं ...पसंद वसंद नहीं ...अरे बात ये है की ...तीन तीन भौजाइया बैठी हैं , और इनके बहन कम माल का हाल आप लोग सुना नहीं रही हैं ...तो बिना गारी वारी के सूखे सूखे कैसे खाएंगे ये,....”

शीला भाभी ने उलटा वार किया ,

"बात तो तेरी एकदम सही है लेकिन तू ही क्यों नहीं सूना देती एक दो अच्छी वाली ...मुंह में कुछ घोंट के बैठी हो क्या लम्बा मोटा ..."

मैं बहोत खूश हुआ।
अब मुझे भी मौक़ा मिला न ...वरना ये चारो मिल के मेरी तो ...मैंने तुरंत पलीता लगाया। मैं भाभी की ओर मुड के बोला

" अरे भाभी रहने दीजिये इस बिचारी को ...कहाँ ...कोई फिल्मी विल्मी ..डिस्को विसको छाप गाना सुनाने को बोल दीजिये तो वो अलग है , ये कहाँ गावं के गाने सूना पाएगी।"

भाभी ने मुड के गुड्डी की ओर देखा और बोलीं ..." इज्जत की बात है ...बोल है कबूल अच्छी तरह सुनाना। बनारस वाली।"


अब गुड्डी फँस गयी। सबके सामने ...लेकिन वो भी बिंदास बनारसी थी बोली,
" सुनाऊंगी ...तो पेंट ढीली हो जायेगी ...फिर मत रोने लगना ..."

" अरे जाओ जाओ ...गाना वाना तो आता नहीं ..बहाना बना लो ." मैंने उसे छेड़ा।

" सूना दूं ..." वो भाभी से बोली शायद इस उम्मीद से की वो मना कर दें या कोई और मैदान में आ जाए।
" सूना दे ...इन को भी तो मालूम पड जाय की किसी बनारस वाली से पाला पड़ा है ...." वो उसे ललकारते बोलीं

अब उसके पास कोई रास्ता नहीं था, वो चालू हो गयी ... मुझे लगा की मैंने किस मधुमख्खी के छत्ते में हाथ डाल दिया।

और बाकी तीनो भी ना सिर्फ गुड्डी के साथ गा रही थीं बल्कि ताल भी दे रही थीं। भाभी चम्मच से ग्लास पर और शीला भाभी मेज पर

गुड्डी की आवाज बड़ी सुरीली थी और ये छेड़छाड़ से भरी गाली बहोत ही रसीली लग रही थी ,
उसने शूरु किया ,

" अरे कामदानी दुपट्टा हमारा है , कामदानी ...
( वो एक मिनट मेरा नाम लेने में हिचकिचाई लेकिन भाभी ने इशारा किया और वो चालू हो गयी।)

" अरे कामदानी दुपट्टा हमारा है , कामदानी ...
अरे आनंद की बहना ने अरे आनंद की रंजी ने ...
एक किया दो किया ..साढे तीन किया

एक किया ,दो किया ..साढे तीन किया ( भाभी , शीला भाभी और मंजू साथ गा रही थीं)

हिन्दू मुसलमान किया , नाउ कोम्हार किया
हमरो भतार किया, भतरो के सार किया
अरे नौ सो ..ओह ..अरे नौ सौ ...
" अरे रंजी साल्ली ने , रंजी छिनार ने ....

( रंडी चूत मरानो ने ..मंजू ने जोड़ा)
( फिर गुड्डी एक मिनट के लिए रुकी , मेरी ओर देखा और मुस्कराकर बोली।)

अरे नौ सो ....नौ सौ पण्डे बनारस के कामदानी
अरे नौ सो छैले बनारस के कामदानी "


अरे यार बड़ी ताकत है उस साल्ली में , 1-2 नहीं पूरे 900, वो भी बनारस के मुस्टंडे पण्डे ..." शीला भाभी ने चिढाया।
" अरे हमारी ननद है कोई मजाक है , जो 2-4 में मन भर जाय उस का ."

हंसते हुए मेरी भाभी बोलीं।
"चलो इसी खुशी में एक पराठा और लो ."
कह के गुड्डी ने मेरी थाली में एक मूली का पराठा डाला और गाना आगे बढाया।

" अरे कामदानी दुपट्टा हमारा है, कामदानी ...
अरे आनंद साल्ले की बहिनी ने , इस भंडूए की बहिनी ने ...
एक किया , दो किया , साढे तीन किया , अरे नौ सो ...
अरे नौ सो ...अरे नौ सो ..( गुड्डी गा रही थी और भाभी, शीला भाभी, मंजू सब उस को फालो कर रही थीं मेरी ओर इशारा कर के)

अरे नौ सौ भंडुए ,कालीनगंज के अरे नौ सौ ...
अरे नौ सो ..( अब सब लोग देख रहे थे की गुड्डी किस के साथ रंजी का नाम जोड़ती है ,वो जोर से बोली।)
अरे नौ सो ...नौ सो ..गदहे ऐलवल के , नौ सो अरे नौ सौ ......गदहे ऐलवल के


( कालीन गंज मेरे शहर के रेड लाईट एरिया का नाम है , और ऐलवल उस मोहल्ले का जहाँ रंजी रहती थी।)

अब तो हंसी को वो फव्वारा छूटा और मुझे चिढाने का वो दौर ...और इसमें सबसे तेज मेरी भाभी शामिल थीं।

" अब मान गए ना इस बनारस वाली को अच्छी तरह ..तुम्हारी बहनों की ऐसी की तैसी कर सकती है ."

भाभी बोलीं और गुड्डी की पीठ थपथपाई और फिर कहा, " खाना बनाने में तो तुमने अपने को नंबर 1 साबित ही कर दिया था और अब ...गाना गाने में भी ."
गुड्डी खूब खुशी से मुस्करा रही थी .

शीला भाभी ने मेरी ओर इशारा कर अगला तीर छोड़ा ,

" काहो भैया ...बड़ी ताकत है तुम्हारी उस में का नाम है ..हाँ रंडी ...गदहो के साथ भी ..."

आज भाभी बहोत जोश में थी, शायद भैया के साथ जो अभी ताजा डबल राउंड हुआ था उस का नतीजा रहा हो ..उन्होने टुकड़ा लगाया ,

" अरे तो इसमें कौन सी बात है , उसके मोहल्ले के ही तो है , आते जाते नैन मटक्का हुआ होगा ...फिर मोहल्ले के रिश्ते से उसके भाई लगेगे ...और बचपन से ही वो अपने भाइयों से,...."

" भाइयों से चुदवाने के चक्कर में लगी रहती है ना ...मंजू ने बात आगे बढाई और फिर मेरी और मुड के कहने लगी "

अरे भैया अब एक दिन पटक के चोद दो साल्ली को , कहो तो हाथ पैर हम लोग पकड लेंगे वरना ऐसे गदहा घोडा के पास जा के घूमेगी।“

मैंने गुड्डी को जोर से घूरा।
वो बड़े भोलेपन से मुझे देख रही थी , जैसे उसने कुछ किया ही ना हो।

भाभी फिर उसके बचाव में आ गईं ,
" अरे ऐसे का देख रहे हो , तुम्हारा ही तो मन था इस के मुंह से कुछ अच्छा अच्छा सुनने का ...अपने माल का हाल सुनने का तो उसने सूना दिया ..."

अब तो वो सातवें असमान पे ...मुस्करा के उसने भाभी की ओर देखा और बोली,

" सच्ची मैंने तो जो देखा वो सूना दिया ...कोई अपने मन से थोड़ी कुछ कहा।'

अब तो चारो ओर से, क्या देखा ज़रा खोल के बोल ना ...बता ..सब बता ..पूरा हाल ..
शीला भाभी, मंजू और सबसे बढ़ कर मेरी भाभी

मेरी तो लग गयी। मैं समझ गया वो क्या बताएगी , और वही हुआ।

मुस्कराकर अपनी बड़ी बड़ी आँखे नचाकर मुझे देखा , फिर मुझसे पूछा,
" बोलो , बता दूं सब। बुरा तो नहीं मानोंगे ..."

मैंने कुछ किया भी नहीं था की भाभी ने मेरा कान पकड़ लिया और गुड्डी से बोली ,

" इससे डरने की कोई जरूरत नहीं है ना अभी ....ना कभी ...समझी। मैं हूँ ना ...झटपट इसका कान पकड़ने वाली ..बोल तू,”

बस इतना अभयदान पाने के बाद गुड्डी चालू हो गयी, पाव भर लाल मिर्च अपनी ओर से जोड़ के. वो चालू हो गयी .
" जब ये अपने उस माल को पिक्चर दिखा, के खिला पिला के , बाजार में घुमा के लौटा रहे थे और हम लोग रिक्शे में बैठे थे ..."

भाभी ने बात काट के पूछा ..." वो कहाँ बैठी थी , इनकी माल।"

" बीच में , और इनका हाथ सीधे उसके ..." गुड्डी बोली .

और वैसे उसकी ये बात सही भी थी . मेरा हाथ था तो रंजी के उभार पर ही, उसके उभार हैं ही इतने मस्त।

लेकिन शीला भाभी ने फ़ास्ट फारवर्ड करने की मांग की

" अरे वो गदहे वाले बात बताओ ना ..."
" इनके माल को हम लोग उस की गली के बाहर छोड़ दिए ..वहां गदहे बंधे रहते हैं ना ( असल में उस गली को धोबी वाली गली कहते हैं ), तो बस एक को उस ने देखा ,

और फिर उस गदहे का एकदम तुरन्ते खडा हो गया ...इनके माल की निगाह बस उसी से चिपकी थी ...पूरा तन्नाया था ...खूब मोटा और लंबा भी करीब डेढ़ दो फीट रहा होगा ....ह म लोगों से ना दुआ ना ना सलाम ...बस रिक्शे से उतर के सीधे उसी पास खड़ी हो गयी ..."

भाभी ने गुड्डी को तारीफ वाली नजर से देखा और थोड़ा आग में घी डाला .

." अरे तो उसने कहीं पकड़ वकड तो नहीं लिया ..."
आज भाभी भी पूरे जोश में थी।

" पकड़ ही लेती ऐसे ललचा रही थी , मुंह से पानी टपक रहा था उसके ...लेकिन कई लोग खड़े थे वहां ..बस उसके कान में कुछ कहा , उसका कंधा सहलाया ...और एक बार फिर से ललचा के उसके ..."

गुड्डी बोल रही थी लेकिन अब मंजू जोश में आ गयी और चालू हो गयीं,

" अरे का इ का उ का बोल रही है साफ साफ बोल ना गदहे का उ का देख रही थी , नाम लेने मैं कौनो शरम है का,..."

मैंने सोचा की गुड्डी अब फस गयी लेकिन ये बनारस वाली कन्नी काट के निकलने में बहूत माहिर होती हैं। और रास्ता भी मैने दिया मेरे मुंह से निकल गया ,

" अरे ऐसा कुछ भी नहीं था।"

बस क्या गुड्डी शेर हो गयी। मुझे आलमोस्ट डांटते हुए बोली

" तुम चुप ही रहो , वो जब जा रही थी , बेशर्मों की तरह खाली उसका पिछवाडा देख रहे थे और वो भी साल्ली ऐसे इन्हें दिखा के मटका रही थी .."

" गांड तो उसकी है जबर्दस्त मारने लायक ...." मंजू अब चालू हो गयी थी।
मैंने अब दूसरा रास्ता ढूंढा ...अटैक का .

भाभी आपकी इस बनारस वाली के पास स्टाक सिर्फ एक का था लगता है , और उसमें भी मिर्च तो बिलकुल नहीं था

आज भाभी पीछे हटने के मूड में बिलकुल नहीं थी। उन्होंने गुड्डी से कहा ,

" चल सुना दे उनको वो बनारस वाली, असल में इनका मन कर रहां है अपने बहन कम ,माल की ऐसी तैसी कराने का का, और इनका मन कर रहा है तो डाल दे मिर्चा , भले ही इनकी परपराये .."


"और गुड्डी भी चालू हो गयी

" चिट्ठी आइ गयी शहर बनारस से ..चिट्ठी आई गयी
एकदम मंजू और शीला भाभी की पसंद की . उन दोनों के साथ भाभी भी जम के साथ दे रही थीं गुड्डी का

चीठी आई गयी सहर बनारस से चिठ्ठी आई गयी ,
अरे आनंद बहनचोद , अरे हमरे देवर बहनचोद ( ये लाइन भाभी ने गई)...
चिट्ठी पढ़ला की ना , चिट्ठी बंचला की ना ,
तुहारी अम्मा छिनार, तुहरी बहना छिनार , तुहारी रंजी छिनार ....

कयली हमरो भतार कयालिं भतरो के सार,
अरे चोदे हमरो भतार , चोदे भैया हमार
चोदे टंगिया उठाय , चोदे चून्चिया दबाय
अरे आनंद बहनचोद , अरे हमरे देवर बहनचोद ( ये लाइन भाभी ने गई)...

चिट्ठी पढ़ला की ना , चिट्ठी बंचला की ना ,
चीठी आई गयी सहर बनारस से चिठ्ठी आई गयी ,
अरे बहनचोद तुहारी बहना छिनार ,, तुहारी रंजी छिनार ..

चूत मरावे , पेट रखावे ...अरे उनकी यही चलनिया रे।
चीठी आई गयी सहर बनारस से चिठ्ठी आई गयी ,



अबकी तो गुड्डी जब रुकी तो बस भाभी ने उसे गले से नहीं लगा लिया ( टेक्नीकल कारण ये था की बीच में मैं था ) , इस तरह तारीफ की नजर से देख रही थीं उसे वो।

और गुड्डी भी भाभी की ये नजर देख कर फूली नही समाई पड रही थी।

" क्यों आया मजा सुनलिया ना क्या क्या किया मेरे घर वालों ने तुम्हारी रंजी के साथ , अब तो मान गए गुड्डी को, "
भाभी ने जीत का डंका बजाते हुए मुझे सुनाया।

मेरे लिए हार मानने में ही भलाई थी लेकिन गुड्डी , दुष्ट ना ...वो मुझे रगड़ने का कोई भी मौका क्यों छोड़ती ख़ास कर भाभी के सामने

" अरे नहीं ...अभी तो मैं एक और सुना देती हूँ , वरना फिर कहोगे तुम्हारे स्टाक में खाली दो ही थे ..और कहो तो मिर्च ऊपर से डाल देती हूँ , अगर कम लग रही हो।"

भाभी ने एक बार फिर तारीफ वाली निगाह से उसे देखा और बोलीं ," सूना दे , इनकी मा बहन सब का हाल ...बल्कि इन्ही से जोड़ कर ...बिचारा ये भी खुश हो जाएगा।

शीला भाभी बोलीं , अरे सब साल्ली पूरे मोहल्ले में चुद्वाती फिरती हैं। तुम ही तो कह रही थी की रंडी छिनार , गदहे तक पे लाइन मार रही थी , उस गदहाचोद रंजी की चूत में इतने चींटे काटते हैं ...त इ बेचारा हमारा देवर ..."

" अरे काहो इ बात सच है का तुमको तो मालूम होगा की उसके चूत में चींटे कांटते है ."

अब मंजू मेरे पीछे पड गयी।

" अरे मीठी चीज हो तो चींटे लगते ही हैं ....कभी चटाई वटाई तो होगी तुमको।"

अब भाभी भी मैदान में आ गयी मैं क्या बोलता।

तो वो फिर बोलीं, अरे नहीं चटाई है , तभी तो चलो कोई बात नहीं ...कल आएगी ना ...बस तुम चाट लेना मनभर शहद ...हाँ अगर हाथ पैर चलाएगी तो हम चारो है ना ...
सब ने एक साथ हाँ भरी और सबसे जोर से गुड्डी ने ...

और गुड्डी ने अगली गारी शुरू कर दी ( और साथ में मेरी खाली थाली में एक पराठा और डाल दिया।)

आरिया आरिया सगवा लगाई , बिचवा लगाई चौरैय्या हो रे अरे बिचवा लगाई चौरैय्या हो

शीला भाभी, मेरी भाभी और मंजू सब गुड्डी का साथ दे रही थीं ...

आरिया आरिया सगवा लगाई , बिचवा लगाई चौरैय्या हो रे अरे बिचवा लगाई चौरैय्या हो
सगवा खोटन गयीं अरे सगवा खोटन गयीं आनंद क बहिनी , अरे सगवा खोटन गयीं रंजी छिनरो
अरे सगवा खोटन गयीं रंजी छिनरो, गिरी पडन बिछलायी हो

अरे बुरिया में धंसल लकडिया हो , अरे बुरिया में धंसल लकडिया हो
अरे दौड़ा दौड़ा आन्नद भैया , अरे तनी दौड़ा दौड़ा आन्नद भैया

अरे बुरिया से खींचा लकडिया हो , अरे`अपने मुंहवा से खींचा लकडिया हो ...
अरे एक कदम चलली , दुई कदम चलली , छिनरो गिरी पड़ी भहराई जी ...
अरे गंडिया में धंसल लकडिया हो , अरे गंडी या में फँस गेल लकडिया हो

अरे दौड़ा दौड़ा आन्नद भैया , अरे तनी दौड़ा दौड़ा आन्नद भैया
अरे गंडिया से खींचा लकडिया हो , अरे`अपने होंठवा से खींचा लकडिया हो ...


इस गाने से तो मंजू को भी जोश आ गया और उसके साथ शीला भाभी भी ..
एक से एक,,

गंगा जी तुम्हारा भला करे , गंगा जी
अरे आनंद की बहिनी की बुरिया पतिलिया ऐसी , बटुलवा ऐसी
उहमें 9 मन चावल पका करे ....
अरे उनकी बहिनी की बुरिया पोखरवा ऐसी ...
उहमें 900 गुंडे कूदा करे मजा लूटा करें ..

...

अरे चुदवाय लो रन्जी आई बहार
चुदवाय लो, चोदिये भैया हमार ,
चोदियें तेलवा लगाय , तनको नहीं दुखाय


और गुड्डी सारे गानों में साथ दे रही थी बल्कि शीला भाभी को याद भी दिला रही थी।

गनीमत था की तभी भाभी ने घडी देखी और चौंक पड़ी ,.अरे 9.40 हो गया , मुझे 930 तक ऊपर जाना था।
भाभी ने भैया के लिए मूली के पराठे रखे , गुझिया रखी और उठने के पहले गुड्डी से पूछा।

" क्यों बहूत बचे तो नहीं।"
" एकदम नहीं ...अरे चार तो आपके इस देवर ने खा लिए ..." हंसते हुए वो बोली , फिर मेरी थाली देख कर उसने करेकशन किया , नहीं , नहीं चार नहीं साढ़े तीन ...आधा अभी बचा है।"

फिर उसने मुझे हडकाया , अरे ख़तम करो इसको भी ..और फिर मेरी थाली से लेकर एक बड़ा सा कौर बनाया और फिर थोड़ा सा खुद खा के , बाकी अपना अधखाया , जूठा होंठ रस से लिथडा , अपने हाथ से सीधे .मेरे मुंह में ..
मैं खा गया

मैंने कनखियों से देखा भाभी गुड्डी को कैसे कैसे देख रही थीं, तारीफ , खुशी मजा सब कुछ मिला था उसमें.
'कल सोचती हूँ, केले की सब्जी बनाऊं और बैगन का भुरता, ...क्यों .." गुड्डी ने भाभी से कहा . ( दोनों मेरी स्ट्रांग ना पसंद थी और भाभी से ज्यादा ये किसको मालूम होता।)

" एकदम उठते हुए वो बोलीं ...और मुस्कराके मुझसे कहा,...इससे दोस्ती बना के रखना ... किचेन इसके हवाले है , अब से ...अभी भी और आगे भी . फिर शीला भाभी और गुड्डी से बोलीं , जरा मुझे ...आप लोग किचेन समेट लेना।

" एकदम ...एकदम ..आप जाओ ना ...हमें मालूम है , हम कर लेंगे ." शीला भाभी और मंजू मुस्कारते हुए एक साथ बोली और गुड्डी ने भी जोर से सर हिलाया।
तब तक उपर से भैया की आवाज आई, और भाभी दौड़ते भागते ऊपर की ओर बढ़ी, लेकिन मैंने , पूछ ही लिया , बड़े भोलेपन से ,
" भाभी जाइये ना आराम से किस बात की इत्ती जल्दी है,"

अबकी कान की जगह गाल की बारी थी। कस के उन्होंने चिकोटी काटी, और बोलीं , " बहूत बोलता है ना , जब मेरी देवरानी आयेगी ना , तो पूछूंगी ..किस बात की जल्दी लगी रहेगी ..."

और ऊपर चल दी। 


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