Sunday, March 9, 2014

FUN-MAZA-MASTI फागुन के दिन चार--88

FUN-MAZA-MASTI

   फागुन के दिन चार--88
गतांक से आगे ...........

 रंजी का जलवा

बस आग नहीं लगी शहर में और सब कुछ हो गया।
लेकिन लड़कों के दिलों में आग तूफान सब कुछ लग गया था।

रंजी बहुत दिनों बाद अपनी स्कूटी पे निकली थी।

अच्छी बात थी घर पे कोई था नहीं , चाभी उसने पड़ोस में दे दी ...उसको भी लग रहा था की ड्रेस कुछ ज्यादा ही हाट है ...लेकिन मन तो उसका भी यही करता था ...

फिल्मों में जो ऐक्ट्रेसेज पहनती हैं और फिर माडल्स भी कित्ते छोटे छोटे कपडे पहनती हैं ...और कई की तो फिगर भी एकदम बेकार है ..सब फर्जी ...और उस की तो इस उम्र में भी ...

सब की निगाह सीधे उस के सीने पे ..पहले तो उसे बुरा लगता था ..

लेकिन उस की सहेली के भाभी ने समझाया ..अरे यार यही तो उम्र है जलवे दिखाने की तडपाने की ..अगर कोई तुम्हारे सीने को देख के घूरता है तो इसका मतलब उसे अच्छा लगता है ..सबके सीने पे तो नहीं कोई देखता

...अरे जुबना पे उभार आया है ...जलवा दिखाओ , मजे लो।

और आज वास्तव में जलवा आग लगा रहा था ...कुछ तो जवानी का जलवा , कुछ उसके गदराये, मस्त उभरते जोबन का जलवा ...और भी बढ़ कर उसका टाप ...

जो जब वह दो साल पहले भी पहन के निकलती थी तब बस उसके नए आये उभारों को छिपाता कम था , झलकाता ज्यादा था ..और अब तो एकदम टाईट ..

एक ओर से तो वैसे ही शोल्डर लेस था ..गोर कंधे की गोलाई के साथ उभार की गोलाई भी खुल के दिख रही थी ...और टाईट होने से उसने आगे के दो बटन खोल दिए थे ...इसलिए पूरी गहराई भी ..देह से चिपके होने से पूरा कटाव ..सब कुछ दिखता है वाले अंदाज में ...

और रंजी को उसका अहसास गली से निकलते ही हो गया ..जब उसने जोर से आवाज सुनी ...

अरे लड़की चले जब सड़कों पे आई क़यामत लडको पे ..

ये उसका शांत आशिक था ..बस नयन मटक्का ..

वो जब भी गली से बाहर निकलती थी , अन्दर घुसती थी वो चाय की दूकान पे बैठा उसे देखता , लाइन मारता था और अगर कहीं उसने उसे एक बार देख भी लिया तो बस उसका चेहरा खिल उठता था ..

और जब उस की ये हालत थी तो बाकियों की क्या होगी ...

लड़की अगर निकले , और कोई कमेन्ट ना मारे ...तो ये उसके बहिन जी टाइप होने का पक्का सबूत है।

बल्कि वो और उसकी कौन सहेलियां तो आज कौन हिट है है और कौन फ्लाप ...कौन सी ड्रेस स्मार्ट है ये सब इसी मीटर से चेक करती थीं ...और हमेशा फाईट रंजी ...और उसके ग्रुप की लीडर के बीच रहती थी,

अरे वही .जो अपने सगे भाई के साथ फँसी थी ..और उसका वही भाई उसके पिछे पड़ा था की वो उसे रंजी की दिलवाए ... तो कभी उसे ज्यादा कमेन्ट मिलते कभी रंजी को।

ज्यादातर कमेन्ट मिलते थे जब वो पैदल चलती थीं या साइकिल से ...लेकिन आज तो वो अपनी स्कूटी पे थी और तब भी ये धांसू शुरुआत हो गयी।

और गली से मुड़ते हो वो उसका पुराना ...

कल जिसने गुड्डी के सामने बोल दिया था की ...उसने भी रंजी का पकड़ा है ...साइज भी उसको याद थी ...३ २ सी ...और रंजी ने भी उसका ..वो तो उसने गुड्डी से बहाना बना दिया की वो तो ब्रा की दूकान का सेल्समैन है इसलिए उसे , रंजी की साइज मालूम है ..

रंजी ने स्कूटी थोड़ी धीमी कर ली ...आगे आगे एक रिक्शा जा रहा था ...और वो लड़का उसे देख के बोला

" अरे लैला तेरी ले लेगी ...अरे लैला तेरी, ..."


और उस का साथी बोला बॉस अपने मुहल्ले की इस लैला के आगे तो सनी लियोन बेकार है

" अरे यार , अपनी लैला का जोबन एकदम मस्त मक्खन है असली देशी माल ...और उस सनी का कितना असली कितना प्लास्टिक क्या पता ..." फिर वो रंजी की स्कूटी के एकदम पास जा के खडा हुआ और बोला

" जानू अरे मुझे भी पीछे बैठा ले ना , आज आग लगा दी है तूने शहर ...तू अपनी गड्डी चलाना और मैं तेरी गड्डी चलाऊंगा , तू स्कूटी चलाना मैं हार्न बजाऊंगा .."

रंजी ने बस उस की ओर देख के ४ ४ ० वोल्ट की एक मुस्कान मार दी, थोड़ी सी झुकी ...उसकी गोलाइयां गहराइयाँ सब दिख गयीं ...और स्कूटी की स्पीड बढा के आगे ...

थोड़ी दूर ही वो निकली होगी कुछ लडके ,लड़कियों औरतों पर रंग फ़ेंक रहे थे.

अब ये तो होना ही था ..होली तो कल ही है ..और एक गुब्बारा सीधे उसके ऊपर ...उसे मालूम था निशाना कहाँ होगा ...आज इसके उभार कुछ ज्यादा ही उभर और छलक रहे थे ..लेकिन वो कम चालाक नहीं थी ..वो तेजी से झुकी और लाल रंग से भरा गुब्बारा सीधे उसके हेलमेट पे ..गुब्बारा फट के नीचे ...

रंजी ने अपनी स्कूटी रोक दी और वो लड़का एक पल के लिए सहम गया,

लेकिन वो मुस्करा के बोली ..." अरे जरा निशाने की प्रैक्टिस कर लो ..."

" एक मौक़ा और दो ना ...अबकी एक दम सही जगह मारूंगा ...रंग तो छोडो पूरी की पूरी पिचकारी अन्दर ..." वो जोश में बोला.

" दूसरा मौक़ा नहीं मिलता ..." वो हंसी और स्कूटी तेज ,,लेकिन पीछे से वो लड़का और उसके साथी ..फूल वाल्यूम में बालम पिचकारी गा रहे थे

तो बालम पिचकारी जो तूने मुझे मारी
तो सीधी साधी छोरी शराबी हो गयी
तेरी कलाई है , हाथों में आई है
मैंने मरोड़ा तो लगती मलाई है


रस्ते में जहाँ से वो गुजरी ..कुछ तो एकदम खुल्लम खुला , पैरोडी वाले और कुछ भोजपुरी में

...डलवा ला होली में स्कर्ट उठवा के ..

एक जगह तो वो लड़का मिला, जो पिछले ८ महीने से जब वो ट्यूशन जाती थी , बिना नागा उनके घर के सामने मिलता था ..और एक से एक हाट कमेन्ट ..आज भी वो रास्ते में था ( वो सारे उसके फेसबुक के फ्रेंड लिस्ट में थे) और एकदम स्कूटी के सामने आ के खडा होगया और अपनी जींस उचका के उसे अपना बल्ज दीखता बोला ...

अरे होली में ता दे दा ...पिचकारी हमार रेडी बा "


वो गाना रंजी ने भी सुन रखा था और उसी धुन में वो बोली उसे अपनी

" अरे पिचकारी तोहार छोट बा ..."

और स्कूटी मोड़ के चम्पत ..लेकिन उस के पहले मुड के वो उसे अपनी किलर स्माइल देना नहीं भूली

लेकिन जवाब उसने सबका दिया , कहीं नज़रे उठा के कहीं मुस्करा के तो कहीं कमेन्ट का जवाब कमेन्ट से ...

जो रास्ता स्कूटी से ६ मिनट में लगता था आज १ ५ मिनट में लगा।

लेकिन उसे कुल ग्यारह कमेन्ट मिले और चार तो एकदम ऐसे वाले ...

उसका और उसकी सहेली का पुराना रिकार्ड सात का था , ज्वाइंट ...और उसने तुरंत एस एम् एस किया .

घर पहुंचते ही वो दनदनाते हुए घुस गयी। उसे लगा की गुड्डी और 'वो'घर में होंगे ...भाभी मिलीं।

" आज तो तुमने शहर में आग लगा दी होगी ...तभी इतनी फायर ब्रिगेड की घंटिया बज रही थी " और भाभी ने उसे गले लगा लिया।

कोई और मिलने वाली आई थीं .
और भाभी उनसे बतिया रही थीं।
रंजी के पहुंचते ही वो उसे घूर घूर कर देखने लगीं .

भाभी ने उठकर रंजी से कहा , चल तूझे जरा ऊपर पहुंचा कर आती हूँ ..और उसे लेकर वो अपने कमरे में छत पर ले आई।
हँसते हुए भाभीने उसे समझाया ,

" अरे यार वो तुझसे लस लेती ना तो पीछा छुडाना मुश्किल हो जाता ...थोड़ी कन्या प्रेमी टाइप की हैं वो और तेरा ऐसा मस्त माल देख के किसका मन न फिसल जाएगा। तू यहीं बैठ , बस उनको टरका कर अभी आती हूँ ...गुड्डी भी उसको लेकर बाजार गयी थी यहीं पास में, बस आती होगी ."

तब तक पीछे से मंजू आगई एक प्लेट गुझिया से भरी और एक ग्लास ठंडाई ...

" ना ना भाभी मैं कुछ नहीं खाऊँगी ...अभी तो खाना खाया है " जोर से रंजी ने ना ना में सर हिलाया .
" अरे मेरे हाथ की है , एक तो ले ले ..." और भाभी ने एक हाथ से गुझिया उसके होंठों से लगाई और दूसरे हाथ से उसके मुलायम गाल दबाए . भाभी है तो बड़ी सुकुमार, एकदम लता ऐसी ...लेकिन उनके हाथों में ताकत बहुत है ...और गुझिया अन्दर .

" मना भी करोगी और मन भी करेगा ...अरे मन करे तो घोंट लो पूरा ..इ लाज शरम की उम्र नहीं है अब ." मंजू बोली

रंजी का मुंह भरा हुआ था तो वो क्या बोलती।

लेकिन जब भाभी ने दूसरी गुझिया खाने को बोला तो उसने विद्रोह कर दिया.

" अरे ननद रानी खाना तो पडेगा ही ..सीधे से नहीं लोगी अन्दर तो जबरदस्ती घोंटाएंगे .. ऊपर से नहीं तो नीचे से .." अब मंजू के हाथ में दूसरी गुझिया थी .

" तुम्हारा मतलब पीछे से है ..." हँसते हुए भाभी ने मतलब साफ किया ..

" और क्या जाएगा तो दोनों ओर से पेट में ही ..अब इ तय कर लें ..डालूंगी तो मैं है ही अन्दर .." हँसते हुए मंजू बोली।
और जब उसके गालों पर मंजू की उंगलिया पड़ीं ...वो तो और कड़ी थीं ..संड़सी ऐसी ..गौरेया ने चोंच खोल दी .और दूसरी गुझिया भी अन्दर।

उसका गाल सहलाते हुए मंजू बोली ..." अरे बड़ा मखन मलाई गाल है तुम्हारा ..एकदम मालपुआ ..छूने में जो इत्ता मजा अ रहा है तो चाटने और काटने में कितना मजा आयेगा ...
.
" इ ठंडाई पी लो सट्ट से अन्दर चला जाएगा ...और घबडाना नहीं इसमें भांग एकदम नहीं है ..." हँसते हुए भाभी बोली .
" नहीं नहीं भाभी ...ये नहीं बस ..." गुझिया ख़तम करते रंजी बोली
भाभी ने मंजू के आँख के इशारे से नीचे जाने को कहा

और रंजी से बोली , " सुन तू थोड़ी देर बैठ ...इस पेन ड्राइव में बहुत सी पिक्चर गाने वाने हैं ...टी वी आन करते उन्होंने बोला ..
ढेर सारे फोलडर नजर आ रहे थे आखिरी पर लिखा था ..." नाट फार गर्ल्स "

" और ये लास्ट वाला मत खोलना ...ये तेरी ऐसी सीधी साधी बच्चियों के लिए नहीं है ..हाँ और ये किताबे भी ...बच्चो वाली नहीं है ..उधर कामिक्स , पड़ी है चाहो तो ले ले ना . बस मैं अभी गयी अभी आई ...वो वैसे ही बड़ी देर से सर खा रही है ..." भाभी बोलीं

"अरे भाभी आप मेरी चिंता ज़रा सी भी ना करिए मैं एकदम बोर नहीं होउंगी ...आप आइये आराम से " रंजी सोफे पे बैठते आराम से मुसकरा के बोली

और भाभी ने निकल कर नीचे उतरते हुए हलके से दरवाजा भी बंद कर दिया।

नीचे वो पड़ोसन तो जाने के लिए उतावली बैठी थीं , लेकिन भाभी ने उन्हें बिठा के रखा , चाय भी पिलाई .
और जबी वो गयीं ...तो भाभी ने घडी की ओर देखा ...उन्हें रंजी को ऊपर छोड़ कर आये अभी आठ मिनट ही हुए थे.

मंजू की सवालिया नजरो को देख के भाभी हंस के बोलीं ,

" वही तो देख रही थी , दस मिनट तो लगेगा असर होने में ."

होली में मंजू और भाभी की जोड़ी मशहूर थी .

बड़ी खेली खायी , ससुराल और मायके दोनों का मजा लूटी ननदो का भी ...वो दोनों मिलके पानी निकाल देती थीं।
और रंजी तो खैर ...अभी बछेडी थी.

गुझिया ...भांग .की डबल डोज वाली थीं ...यानी चार गोली भांग की रंजी के अन्दर पहुँच चुकी थी ...और होली की ठंडाई तो बिना भांग के बनती नहीं.

दस मिनट में तो उसका मन और तन दोनों मथ जाता।

" जम कर रगड़ाई करना उसकी। होली है, छोटी ननद है ..." भाभी ने मंजू को चढाया .
" और कहीं हाथ पैर फेंके तो ..." मंजू ने शंका जतायी।

" तुमको बताना पड़ेगा ..अरे जो गाय दुहाने में हाथ पैर फेंकती है का करते हैं ...उनका . बिना दूहे छोड़ देते हैं का ? " भाभी बोलीं "
हंसते हुए मंजू बोली " उनका तो हाथ पैर छान के दुह ले लेते हैं ...वैसे दुहाने लायक हो गयी है इकदम ...गद्दर जोबन हैं लगता है खूब मिजवाती होगी ."

" ता हाथ पैर छान देंगे उसका अगर ज्यादा नखड़ा की ...और पहले हम तुम ...फिर वो हमारा देवर आ रहा होगा ..." भाभी बोलीं .

दस मिनट हो गए थे ...और वो ऊपर चल दी .


 हलके से उन्होंने दरवाजा खोला।

रंजी टीवी देखने में मगन थी . जो फोल्डर उन्होंने मना किया था वही ...उन्हें मालून था मना करने पे उसकी उत्सुकता आस्मां छुएगी और वो जरोर देखेगी ..

उस फोल्डर में लेस्बियन फिल्में थी ...खूब हाट लेकिन कुछ में एक मर्द भी था ...

और रंजी उस समय वही पिक्चर देख रही थी ...एक लड़की दूसरी लड़की की जाँघों के बीच झुकी हुयी चपड चपड चाट रही थी और जो लड़की चाट रही थी ..उसके पीछे सांड ऐसा मर्द ..सटासट अन्दर बाहर ...और ये सारे वीडयो हिंदी में थे .

रंजी की निगाहें टी वी पर एकदम चिपकी थीं ...उसके एक हाथ में ठंडाई का ग्लास था ...जिसे पीने के लिए वो इतना नखड़ा कर रही थी ..आलमोस्ट ख़तम था ..और दूसरा हाथ उसकी फैली खुली जांघ के बीच स्कर्ट के ऊपर से .

और दूसरी ओर वही किताब जिसे पढ़ने से उन्होंने मना किया था ..खुली थी।

मस्तराम भांग की पकौड़ी भाग ३ अध्याय ४ पृष्ठ संख्या ६१

.. भाभी ने रिमोट उठाया और टी वी बंद कर दिया।

अब रंजी झटके से उठी कुछ घबडाई , कुछ शरमाई , लजाई ..

भाभी की निगाहें बस रंजी पे टिकी थी ...क्या मस्त माल लग रही थी ...
लजाने शरमाने से उसके गोरे गुलाबी किशोर गाल कुछ ज्यादा ही लाल हो गए थे ...

कुछ जवानी का जोबन का जोर , कुछ भांग का नशा और कुछ उस फ़िल्म का असर ...

उस की बड़ी बड़ी कजरारी आँखों में भांग के नशे के गुलाबी डोरे साफ नजर आ रहे थे ..
चून्चिया मारे जोश के एकदम पत्थर हो गयी थीं ...
कड़े कड़े निपल साफ झलक रहे थे ...

और छोटे टाप से पान के पत्ते ऐसा चिकना पेट , मुट्ठी में समा जाय ऐसी पतली कमर साफ दिख रही थी

...और स्कर्ट भी दो बित्ते से बड़ी नहीं रही होगी ...ऊपर से साइड स्प्लिट ...गोरी गोरी जांघे साफ दिख रही थी , मुलायम मक्खन ..चिकनी नमकीन

भाभी मुस्करा दीं और उनकी मुस्कराहट देख कर रंजी भी मुस्करा दी ....और बोली
ऐसे क्या देख रही है ..

बस ये देख रही हूँ की सारे शहर के लडके झूठे ही नहीं पागल हो रहे हैं ...छेड़ते हुए भाभी बोलीं।
" धत्त ..आप भी ना ..." वो और शर्मा गयी

तब तक मंजू आई ..एक बड़ी प्लेट में अबीर गुलाल लेके ...

और उसे देखते ही रंजी बड़ी जोर से बिदकी ...
" नहीं भाभी रंग नहीं प्लीज ..मेरे कपडे ...और होली आज थोड़े ही ना है .."

" अरे ननद रानी बात सही कह रही हो ...अगर कपडे का डर है तो उतार दो ना कपडे ...या कहो तो हम ही उतार देन… अरे रंग ननद से खेलना है है उनके कपड़ो से थोड़े ही ...बोलो ..." मंजू ने और छेड़ा।
" ना न ..." रंजी उछली।

" अरी पगली ..कल तो तू आ नहीं पाएगी होली के हुडदंग में तो आज ही जरा सा ..." भाभी प्लेट ले के उसकी ओर बढीं .
" भाभी सुबह कैसे ..आप तो जानती हैं ..." रंजी ने अपनी मज़बूरी जाहिर कि.

" अरे इ निकरेंगी ता इनके मोहल्ले क ही लड़के ..अपनी अपनी चमड़े वाली पिचकारी से सफेद रंग का होली खेल देंगे ना ..नौ महीने बाद ढोलक बजेगी सोहर होगा ..." मंजू को मौका मिल गया।

" अरे मेरी ननद ऐसी नहीं है ...पिल लेती है ..कोई उसको डर वर नहीं है .." भाभी ने मंजू को समझाया और रंजी से पूछा
" अरे शाम को तो आओगी ?."
" हाँ भाभी ...शाम को पक्का .." मुस्करा के शोख अदा से रंजी बोली।

" ठीक है तो अभी बस बहुत थोडा सा सगुन के लिए बस एक छोटा सा गुलाल का टीका ...और भाभी ने गुलाल की प्लेट से चुटकी भर गुलाल निकाला तो रंजी फिर इतराने लगी ...बोली
" भाभी मैं आपसे छोटी हूँ ..पहले छोटों का हक़ होता है ..."

" ये बात तो तेरी ठीक है ...ले ...और तू चाहे जितना लगा ले , जहाँ लगा दे ...छोटी होने का फायदा तो है ही चाहे जहां मैं ना रोकूंगी ..ना टोकूगी .." और ये कह के भाभी ने अबीर गुलाल की प्लेट उसे पकड़ा दी ..और रंजी ने ख़ुशी खुशी प्लेट थाम लीं और बोली

" याद रखियेगा भाभी ...आपने बोला है मैं चाहे जहाँ लगा दूँ ...आप रोकेंगी नहीं ..." मुस्करा के अबीर निकालती वो शोख बोली .

" एकदम नहीं ...और ये ले मैं अपने हाथ भी पीछे कर लेती हूँ ...ननद भाभी में क्या शरम ."

और भाभी ने सचमुच अपने हाथ पीछे कर लिए ...

रंजी ने पहले तो थोडा सा माथे पे लगाया ...फिर भाभी के गोरे गोरे गालों पे कस कस के न सिर्फ लगाया बल्कि मन भर रगडा भी


भाभी सोच रही थी की देखे रंजी आगे हिम्मत करती है की नहीं।

रंजी की शरारती आँखों ने भाभी को देखा , चुटकी में थोडा सा गुलाल उठाया और अबकी गाल से गले पे ..और भुरभुराता हुआ गुलाल ..भाभी की लो कट ब्लाउज से झांकती गहराइयों के बीच ...

रंजी का मन तो ललचा रहा था।। लेकिन वो पहल करते झिझक रही थी ...

अभी गुड्डी होती या उसकी कोई और सहेली ...तो हाथ कब का ब्लाउज के अन्दर घुस कर गोलाइयों की नाप जोख कर रहा होता ...फिर भी उसने अब अबीर उठायी और भाभी के ब्लाउज से बाहर झांकते गोरे भरे भरे उरोजो पर टिके की तरह लगा ही दिया ...


भाभी ने अब उसके हाथ से प्लेट ले ली और उसके हाथ से प्लेट ले के बोला ..." हो गया "

" हाँ " हंसते हुए रंजी ने प्लेट तो दे दी लेकिन बोली ..." याद रखियेगा ...आप ने बोला था सिर्फ टीका ...वो भी सगुन के तौर पे "

" एकदम याद है .." भाभी ने चुटकी में ढेर सारा गुलाल निकाल के हंसते हुए कहा फिर बोली ...इत्ती मस्त ननद हो और मांग खाली रहे, बड़ी सख्त ना इंसाफी है " और चुटकी से ढेर सारा सिंदूरी गुलाल उसकी मांग में भर दिया।

" अरे सिंदूर दान हो गया तो सुहागरात भी होना चाहिए ..." पीछे से मंजू ने टुकड़ा लगाया ...

"एकदम होगा ..मेरी ननद कोई भागने वाली थोड़े है ...क्यों ..." भाभी ने बचा हुआ गुलाल उसके गालों पर लगाते हुए बोला।
रंजी थोड़ी डरी ...लेकिन जब भाभी ने बात पूरी की तो वो सिहर उठी, मन उसका पुलक उठा ..

" अभी मेरा देवर आ रहा होगा ...क्यों मनवा दूँ उसके साथ सुहाग रात तुम्हारा भी भला , उसका भी भला " भाभी ने प्रस्ताव रखा।

रंजी के आँखों के सामने अभी थोड़ी देर पहले जब वो वेब कैम पे उसे दिखा दिखा के मुठ मार रहा था ...वो तस्वीर घूम गयी ...एकदम पागल है वो उसके पीछे ..सुबह कैसे कैसे एस एम् एस भेजे थे ...और कितना लम्बा और मोटा है ...एकदम फ़िल्म में इस आदमी का जैसे है वैसे ही ....बल्कि मोटा ही होगा ..

धत्त भाभी आप भी ना ..बनते हुए वो बोली।

" और जबतक देवर नहीं है तो भाभी से ही मना लो ना ..." मंजू खिलखिलाते बोली। वो रंजी के ठीक पीछे पहुँच गयी थी .

और भाभी के हाथ अब खुल कर ननद के गोरे मुलायम गालों की मस्ती ले रहे थे

गाल पिंच करते वो बोलीं ..." मस्त मालपुआ है कचकचा के काटने लायक , बड़ा मजा आयेगा मेरे देवर को जब चूस चूस के काटेगा नन्द रानी "
और एक हाथ कर गले तक और फिर और नीचे ...उभारों के उपरी हिस्से तक पहुँच गया था ...अबीर गुलाल के रंग ...

रंजी सिहर रही थी , सहम रही थी सोच रही थी ...अब ..अब क्या होगा ...भाभी कहीं और नीचे तो नहीं ...और ये सोच सोच कर उसकी किशोर गोलाईयां और पथरा रही थीं ..टाप लग रहा था अब फट जाएगा , तब फट जाएगा ..

भाभी की उंगलियाँ रंजी ले उरोजों के उपरी भाग का रस ले रही थीं।

अबीर गुलाल उनकी उँगलियों से छन छन कर गहराइयों में गिर रहे थे ..

गोरे गोर दोनों उड़ने को बेताब कबूतरों के पंख , लाल हरे हो रहे थे।

रंजी के टाप के दो बटन तो पहले ही खुले थे ..उसके भरे भरे उरोज बाहर छलक रहे थे और क्लीवेज पूरा दिख रहा था ...और
अचानक भाभी ने एक हाथ पूरी तरह टाप , ब्रा के अन्दर डाल दिया और ...दबोच लिया .

" उयीईईईईईई ...रंजी बोली ...भाभी अन्दर नहीं ...प्लीज हाथ निकालिए न "

भाभी को मंजू को इशारा भी करने की जरुरत नही पड़ी ...वो इसी मौके के लिए तो पहले से ही पीछे खड़ी थी .

रंजी अपने हाथों से भाभी के हाथ को पकड़ के रोकने की कोशिश करे , उसके पहले उसकी दोनों नरम कलाइया , मंजू की पकड में ..और उसने रंजी के हाथों को क्रास कर दिया था जिससे वो छुड़ाने की कोशिश भी ना कर सके ...

मंजू की पकड़ से बड़ी बड़ी तगड़ी औरतें भी नहीं छूट पाती थी और ये तो कच्ची कली थी .


 भाभी के हाथ अब रंजी के किशोर मस्त उरोज को पूरी तरह पकडे , लेकिन वो ना मसल रही थी न रगड़ रही थी ...बस एक हलकी सी छुवन , एक दबाव ...उन की उँगलियों का उस किशोरी के उभरते गदराये जोबन के चारों ओर और हथेली से ..मटर के दाने के बराबर कड़ी , निपल ...

" कित्ती मस्त चुन्चिया है इसकी और जब एक बार लड़कों का हाथ पड़ना शुरू हो जाएगा तो फिर तो दिन दूना .." भाभी सोच रही थीं और अब उनका हाथ रंजी की गोरी गोरी चूंची , हलके हलके मसल रहा था रगड़ रहा था ...
भाभी का दूसरा हाथ अब रंजी के गोरे चिकने पेट पर अबीर गुलाल लगाते ऊपर आ रहा था .
और वह नीचे से ब्रा तक पहुंच गया था .

ब्रा क्या एकदम माडर्न लेसी डेमी कप ..पुश अप , फ्रंट ओपन बस चार अंगुल की पट्टी थी उसके जोबन को और उभारे ..

और उधर पीछे मंजू भी ना ...कुछ देर तक तो वो दोनों हाथ से कलाई पकडे रही फिर ...इतनी पतली सी ककड़ी सी कलाइयाँ ...उसने बाएं हाथ से ही दोनों कलाइयां जकड ली ...

उसका एक हाथ ही काफी था ..छुडाना तो दूर रंजी एक सूत भी नहीं हिला सकती थी ..

और रंजी के मन में बहोत उथल पुथल मच रही थी ...कोशिश तो कर रही थी छुडाने की , मचल रही थी बोल भी रही थी बार बार ...

इसके पहले उसकी कितनी सहेलियों का हाथ .'वहां ' पड़ा था ...लेकिन आज जो मस्ती आ रही थी ..

लग रहा था उसके पंख निकल आये हैं , सांसे खूब लम्बी हो रही थी , कभी मन कर रहा था भाभी छोड़ दें तो कभी मन करता की भाभी कस के रगड़ दे ..उसके जोबन को

मंजू ने तबतक अपने खाली हाथ से अबीर गुलाल की रंग भरी प्लेट उठाई , और सारा का सारा भरभरा कर रंजी के टाप के अन्दर ..और अब दोनों कबूतर अच्छी तरह लाल गुलाबी हो गये.

भाभी को तबतक खजाने की चाभी मिल गयी।

रंजी उंह , आंह कर रही थी , कुनमुना रही थी , बार बार बोलती ...भाभी ऊपर से हाथ निकल लीजिये ना ...

और भाभी ने खजाने की चाभी को ...उस फ्रंट ओपन ब्रा के हुक को खोल दिया। उन्होंने पहले ही समझ लिया था की शोल्डर लेस टाप है तो स्ट्रेप तो होंगे नहीं ब्रा के ...और जैसे ही हुक खुला ..उन्होंने मंजू को इशारा किया ..बस एक पल में ..

ब्रा खुली , मंजू ने पीछे से और भाभी ने आगे से टाप सरकाया , ब्रा मंजू के हाथों में और अब उसने , रंजी के दोनों हाथ अच्छी तरह खूब कस के पीछे उसी की ब्रा में बाँध दिए,...अब वो लाख उछल कूद कर ले , उसके हाथ खुलने वाले नहीं थे नहीं थे, और मंजू के भी दोनों हाथ अब फ्री हो गए थे ...

" चल बिन्नो बहोत कह रही थी ना की मैं ऊपर से हाथ हटा लूँ , चल तेरी बात मान ली , हटा लेती हूँ .." और भाभी ने टाप में से हाथ निकाल लिया .

आगे से भाभी और पीछे से मंजू , दोनों ने एक साथ नीचे से टाप पकड़ा ...और एक साथ ऊपर सीधे ...कंधे तक
और लाल हरे अबीर में लिपटे दोनों गोरे गोरे किशोर जोबन , जिसका पूरा शहर दीवाना था बाहर आ गए . भाभी , अपलक टुक टूकी लगाये देखती रहीं ...

क्या जोबन आया है इस छोरी पर ...ये कटाव , ये उभार , एकदम परफेक्ट सी कप , सिर्फ बड़े ही नहीं खूब कड़े भी ..

दो पल बाद उन किशोर उभारों के जादू से वो बाहर निकली और बोली ,

" लल्ली अब मान गए क्यों बिचारा मेरा देवर इस के पीछे दीवाना है ..और वो ही क्यों पूरा शहर ...लेकिन होली में भी तुम इसको दोहरे परदे में कैद रखती हो बड़ी न इंसाफी है अब चलो थोड़ी देर इसे भी हवा धूप देखने दो ना .."

लेकिन उन उभरते उरोजों की आजादी बस दो पल की थी.

अगले पल वो मंजू के हाथों में कैद होगए थे ...और अबकी सजा बामशक्कत थी सिर्फ यहीं नहीं ,

मंजू ने अपने दोनों पैर रंजी के दोनों पैरों के बीच में डाल कर फैला दिए ...और तब तक फैलाती गयी , जब तक दोनों पैरों के बीच का फासला ढाई फीट नहीं हो गया . और मंजू ने पैर ऐसे फंसा रखे थे की रंजी पैर सिकोड़ नहीं सकती थी .

हाथ में उसके पहले ही उसी की ब्रा से मुश्के बांध दी गयी थीं . अब वो जरा भी हिल डुल नहीं सकती थी।

भाभी तो हलके से सहला , मसल रही थीं लेकिन मंजू तो ...मंजू थी

" अरे लौण्डन में दीवानी ननदिया ...बहुत लौंडो से इ जोबना रगड़वाई , मसलवाई होगी , अब तनी भौजियो के हाथ का भी मजा ली ला .." और कस के दोनों हाथों से उसके उभार मंजू ने मसल दिए .

उयीईईईईईईईई ...वो चीखी ...कुछ दर्द से ...कुछ मजे से और मंजू से बोली ,

" नहीं , अभी तक किसी लड़के से नहीं दबवाया .सच्ची ..."
" झूठी ...बिना लड़कों का हाथ पड़े ये गद्दर जोबन हो रहे हैं ..." भाभी अबीर गुलाल का एक बड़ा पैकेट खोल कर फिर से प्लेट में डालती हुयीं बोली,

" और अगर नहीं द्बवायी हो तो इ तौ और ना इंसाफी है , बिचारे लड़कों को खाली जुबना उभार उभार ललचाती रहती हो " और अबकी मंजू ने रंजी के मटर के दाने ऐसे कड़े निपल को पुल कर दिया .

" उयीईईईईईइ ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ..नाआआआआआ ..."

रंजी फिर चीखी ..अबकी मजे से ज्यादा दर्द से कम ...और तब तक भाभी ने रंग का दूसरा पैकेट खोल कर ..सीधे अपनी मस्त ननद के किशोर उभारों पर गिरा दिया था और मंजू दूने जोर से मसलने लगी थी ...
भाभी अब नीचे का हाल चाल ले रही थीं .

प्लेट से रंग उठा के , वो उसकी गोरी चिकनी जांघो को लाल हरा करने में जुटी थीं ...और उनकी दुष्ट उंगलिया ननद की चुन्मुनिया की तलाश में थीं .

और वो बस दो अंगुल के स्ट्रिंग थांग में मुंह छिपाए थी ..
भाभी को भी कोई जल्दी नहीं थी , उनकी लम्बी उंगलिया , थांग के ऊपर से ही रगड़ने मसलने लगीं .

" भाभी छोड़ो ना ..." रंजी मंजू से बोली ...क्योंकि अबकी मंजू ने इक साथ दोनों निपल पिंच कर दिए थे .

“"अरे क्या छोड़े वो नाम तो बताओ , "भाभी ने थांग के उपर से उसकी चुन्मुनिया दबोचते हुए हंस कर पूछा।
" वही , जो वो पकडे हैं ..." रंजी भी खिलखिला पड़ी।

" अरे कुछ नाम वाम है ओकर ..." मंजू हंसी और अबकी उसने इत्ती कस के जोबन मर्दन किया की कोई मर्द भी क्या करेगा .
और रंजी चीख उट्ठी ....उयीईईईईईईईईईईईईई


" इ कहो मंजू सस्ते में छोड़ रही है तुमको ...खाली नाम बताने पे ...जीतनी जल्दी बता दोगी ..उतनी जल्दी छुट्टी मिल जायेगी "

भाभी ने एक उंगली से थांग सरकाते हुए हंस कर कहा और उसी समय मंजू ने कस कर रंजी के कड़े मस्त निपल फ्लिक कर दिए ...रंजी की सिसकी निकल पड़ी जोर से और अबकी मस्ती में ...

" मेरा सीना ..उभार वही ...रंजी रुकते रुकते बोली ...

जवाब मंजू ने दिया . उसने इत्ती कस के जोबन मर्दन किया की कोई मर्द भी क्या करेगा और दोनों हाथों से एक साथ रगड़ते बोली ..

" अरे ननद रानी , लौंडो में चूंची झलकाते नाही शरम , उभार उभार के चूंची ललचाते नहीं शरम , लौण्डन से चूंची दबवाते मिज्वाते नाहीं शरम ...ता इ नाम लेने में का शरम ..."

और उधर भाभी ने नीचे थांग सरका दी थी और और अबीर गुलाल से भरी मुट्ठी , अब सीधे चुनमुनिया से होली खेल रही थी .. वो बोली ,

" अरे ननद रानी ..इत्ता जबर्दस्त हिंट मंजू ने दे दिया अब क्या ...वरना सोच लो ..."


रंजी थोडा शरमाई, थोडा झिझकी , फिर थूक घोंट कर बड़ी हिम्मत से बोली चूं ...चूं

" इ चूं ..चूं का बोल रही हो ...कौनो चिड़िया हो का .." मंजू बोली और उसके दोनों निपल अब जोर से अपने अंगूठे और तर्जनी के बीच मसलने लगी।
दर्द और मस्ती दोनों से रंजी की हालत खराब थी ...

वो समझ गयी थी की कोई बचत नहीं है ...वैसे भी उसकी चंडाल चौकड़ी में जो उस की चार सहेलियों का ग्रुप था ...यही सब बोलना पड़ता था ...कुछ और बोला तो ...चूतड पर लात ...तुरंत ...और ट्रीट देनी पड़ती थी वो अलग

मंजू ने निपल पर प्रेशर बढ़ा दिया था
लजाते, झिझकते , हिम्मत कर के उसने बहोत धीरे से बोला

चूंची

हमने नहीं सुना ..भाभी और मंजू साथ साथ बोलीं

हंसते हुए अबकी रंजी ने कुछ जोर से बोला ... चूंची

खुश होकर भाभी ने उसके गाल चूम लिए ...और बोली ..ये हुयी न मेरी ननद वाली बात ...जल्द से जल्द तुम्हे खूब मोटे मोटे लंड मिलें ...किसी भी दिन ये भूखी ना रहे ..और उंगली की टिप से रंजी की गुलाबी परी का मुंह खोल दिया . और फिर बोलीं ...लेकिन एक बार और बोली ...पूरे जोर से ...

और मंजू और भाभी ने मिल कर रंजी से पूरे पांच बार चूंची बुलवाया .. लेकिन ये तो बस शुरूआत थी ...

भाभी का एक हाथ तो रंजी की कसी , अन चुदी , कच्ची चुन्मुनिया के साथ खेल रहा था और दूसरा थांग को सहला रहा था ..

और अचानक ब्रा की तरह थांग ने भी रंजी का साथ छोड़ दिया ..

थी तो वो स्ट्रिंग थांग ही दोनों साइड गाँठ बंधी और भाभी ने एक झटके में दोनों साइड की गांठे खोल दी और उसकी फैली टांगों से थांग निकाल कर सीधे मंजू के हवाले ..

मंजू ने उसकी चूंची तो छोड़ दी थी ..और अब सीधे थांग से , उसके ब्रा से बंधे हाथों को थांग से भी बाँध दिया
और अब मंजू ने प्लेट से गुलाल ले के ..उसके मस्त नितम्बो पर रगड़ रगड के लगाना शुरू किया ..

टाँगे तो फैली ही हुयी थीं अब थांग भी उतर गयी थी ..और सिर्फ नितम्ब ही नहीं कुछ ही देर में ..मंजू की उंगली पिछवाड़े के छेद पे पहुँच गयी और कस के उसने टिप वहां रगडने लगी ..

" नहीं नहीं ..भाभी वहां नहीं ..." रंजी की पूरी देह गिनगिना गयी थी।

जवाब में मंजू ने उंगली का जोर और बढ़ा दिया ...और बोली ..ता तू का समझ रही हो ...बिना गांड मारे लौंडे छोड़ेंगे तोहें ...अरे हचक हचक के गांड मारी जायेगी तुम्हारी ..इतने मस्त चूतड है ...ऐसे गांड मटका के चलती हो ..."

और सामने का इलाका भाभी के कब्जे में था ...वो उसकी पुत्तियाँ मसल रही थीं ...मस्ती के मारे रंजी पागल हो रही थी ...
और फिर दोनों भाभियों ने मिल के ..उससे चूत , चूतर , गांड लंड सब कहलवाया , जोर जोर से ...और पांच पांच बार ...और यहाँ तक कबूलना पड़ा की हाँ भाभी मैं आपके देवर के लंड से अपनी चूत चुदवाउंगी ...

और ये होली की शुरुआत थी ननद भाभी की ..उसके बाद तो देह की होली शुरू हो गई ...खुल्लम खुला
और साथ में खुल के गालियाँ ..

इतनी देर की रगड़ाई से रंजी भी मस्ती से पागल हो रही थी ...ऊपर से भांग का नशा ..पूरी की पूरी चार गोलियों का ...
और वो भी मंजू और भाभी की ही भाषा बोल रही थी।

 अब भाभी ने ऊपर का मोर्चा समभाल लिया था और मंजू ने नीचे का ...

वो अपनी ममेरी ननद की उभरती गद्दर जवानी को , उसके जोबन के उभार को मसल रही थी रगड़ रही थीं

...एक हाथ उनका चूंची कस के रगड ,दबा रहा था और दूसरे हाथ से वो अंगूठे और तरजनी के बीच कभी उसके किशोर निपल्स को पुल करतीं , कभी फ्लिक कर देती ...और रंजी गिनगिना उठती।

रंजी के गोरे गुलाबी गाल पे प्यार से एक किस लेके भाभी बोलीं ,

" हे तुझे एक टिप बताऊं अपनी इन मस्त चून्चियों को और मस्त करने का ...सारे लड़के तो वैसे है पागल है तेरे पीछे ...फिर तो सब दीवाने हो जायेंगे सारे शहर में बस तेरा ही नाम होगा ..."

" बताइए ना भाभी ...देखिये मैं आप की इकलौती ननद हूँ मुझे नहीं बताइयेगा तो किसे बताइयेगा ..." लाड से रंजी बोली।

भाभी ने खूब कस के रंजी की चूंची दबा दी और समझाया ,

" देख तेरी ऐसी जवानी की दहलीज पे खड़ी लड़की के लिए सबसे बड़ा दान क्या होता है ...जोबन दान ...तो जैसे दान करने से धन बढ़ता है ...वैसे जोबन दान करने से जोबन बढ़ता है ...

और अगर ये शुभ काम तू फागुन में शुरू कर दे ...तो बस चांदी ही चांदी ...पहले मेरे देवर से खुल के दबवा ...फिर अपने शहर के लौंडो से और जानती है तू बनारस तो जा रही है ना .."

" हाँ भाभी होली के दो तीन दिन बाद ...छुट्टियाँ तो चल ही रही हैं ८ -१० दिन वहां रह लुंगी ..."

रंजी बोली

" वहां तो एकदम खुला मौका है ..किस से चूंची मिज्वाती है , किससे चुद्वाती है यहाँ किसको पता चलेगा ...खुल के मजे लेना वहां ...और चन्दा भाभी और दूबे भाभी है ना वहां ..

बस पहुँचते ही तुम्हारी एकदम मस्त लड़कों से दोस्ती करवा देंगी ...बस दिन रात ..चक्की चलवाना .."

और ये कह के अबकी जब भाभी ने उसकी किस्सी ली तो सीधे लिप्स पे ...और उनकी ननद ने भी उसी गरमजोशी से जवाबी दिया .

इन मस्त रसीली बातों के साथ जिस तरह से उनकी उंगलिया रंजी के उभरते जोबन पर फिर रही थीं ...उसके निपल वो मसल रही थीं ...कोई भी लड़की पिघल जाती ...और रंजी की भी बुरी हालत थी . वो लम्बी साँसे ले रही थी , बार बार अपनी जांघे सिकोड़ रही थी ...

भाभी ही अकेले काफी थी लेकिन अभी तो डबल अटैक ..

मंजू तो भाभी से भी दो हाथ आगे ..

पहले वो दोनों नितम्बो को मसलती रही ..फिर दोनों हाथों से उसने उसके भारी भरी चूतडो को फैला दिया ..और रंग भरी मुट्ठी सीधे पिछवाड़े वाले सेंटर पे ..और यही नहीं अबकी अंगूठा उसके पिछवाड़े के छेद पे दबाता
...अन्दर पुश करता ...

और अब मंजू बोली

" तुझे एक काम की बात बताती हूँ ...तू जिस लौंडे से एक बार अपनी ये मस्त गांड मरवा लेगी ना ...वो तेरा दीवाना हो जाएगा ..नखड़े भले दिखाना ..लेकिन मना मत करना ..गांड मरवाने से ...खूब दर्द होगा लेकिन मस्त मजा आयेगा ..."

"भाभी ..ये भी कोई .."

अब शोख अदा से वो मंजू से बोली , बहूत नखड़े से ,

मंजू ने जवाब दिया उसकी चुन्मुनिया को दबोच के ..उसकी हथेली जोर जोर से उसकी कसी गुलाबी चूत को रगड़ रही थी ...और कभी कभी उसकी क्लिट भी छेड़ देती

रन्जी के तो जांघो के बीच आग लगा गयी .

तब तक भाभी ने मंजू से कुछ कान में कहा ...और मंजू ने समझ दारी में सर हिलाया .

और ऊँगली का सिर्फ टिप मंजू ने रंजी की चूत में पेल दिया ...

उंगली थी या जादू की छड़ी ...कभी गोल गोल , कभी आगे पीछे ..और कभी चम्मच की तरह मोड़ कर ...और साथ में अंगूठा क्लिट पर ...कभी दबाता कभी रगड़ता ..

रंजी बस पागल नहीं हुयी .
उसके चूतड अपने आप उंगली के साथ आगे पीछे हो रहे थे , आँखे मुंदी जा रही थी ...

और जब मंजू ने ऊँगली निकाली तो भाभी की उंगली अन्दर और मंजू ने ऊपर का मोर्चा ...जोबन की रगड़ाई का सम्हाला ..
भाभी की ऊँगली तो और जानलेवा ..

रंजी की चूत एकदम पनिया गयी थी ..

जोर जोर से ऊँगली करती भाभी ने फिर हलके से उसके गाल पे हलके से बाईट लेके कहा ...

" मेरी प्यारी ननद ..सोच जब एक ज़रा सी , पतली सी उंगली से इत्ता मजा आ रहा है ...तो जब एक मोटा लम्बा कड़ा लंड अन्दर बाहर होगा तो कितना मजा आयेगा ...इत्ती मस्त जवानी आई है तेरे पे ...अब नहीं मजा लेगी तो कब लेगी ..."

" हाँ हाँ ..सही ओह ओह कैसा लग रहा है ...भाभी प्लीज ..."

रंजी ठीक से बोल भी नहीं पा रही थी मस्ती के मारे ..

" सच सच बोल तूने मेरे देवर का कभी देखा है ...कैसा है .."

रंजी इस समय बात बनाने की हालत में नहीं थी सच बोल दिया ...

" हाँ देखा है ..मस्त है मोटा लम्बा ..." वो मुस्करा के बोली।

लेकिन मंजू गुस्सा हो गयी जोर से उसने अपने नाख़ून उसके निपल्स में पिंच कर दिए और बोली

" छिनाल , चूत मरानो , तेरे सारे खानदान की गांड मारू ..सारा सिखाया पढाया बेकार हो गया ..ऐसे बोलने को कहा था रंडी ..."

" गलती हो गयी ..मेरा मतलब भाभी आपके देवर का लंड बहुत मस्त है लम्बा और मोटा है ..देख के मेरी चूत गीली हो गयी।"

हँसते हुए रंजी बोली .

उसे मंजू की बात का ज़रा भी बुरा नहीं लगा था .बिना गाली के ननद भाभी की बात हो तो बड़ा फर्जी लगता है .

भाभी हंसती हुयी बोलीं ,

" तू सोच ले ...अगर फिर गलती हुयी तो चूतड पे हाथ लगेंगे ...लाल कर दूंगी तेरी गांड ...और ना सिर्फ हमारे सामने बल्कि तेरी जीतनी भी भौजाइयां है ...और हमारे देवर के सामने भी ..."

रंजी की हालत पतली हो रही थी ...तीन बार भाभी और मंजू उसे झडने के कगार पे ले गयीं फिर रोक दिया ..

भाभी प्लीज एक बार मेरी ,...बहोत मन कर रहा है वो बोली

मंजू और भाभी दोनों साथ साथ बोलीं ...क्या

ऊप्स ..रंजी को तुरंत गलती समझ में आ गयी और वो फिर से बोली ...

" दोनों भाभी ..प्लीज मेरी चूत में आग लगी है प्लीज बस एक बार झड़ जाने दीजिये ना ..."
मंजू और भाभी ने एक दूसरे को देखा ...
मंजू बोली ननद की बात
भाभी बोली और हम कैसे टाल सकते हैं ..

फिर तो तूफान आ गया ...

ननद की एक मस्त गोरी गदराई चूंची , मंजू के हाथ में तो दूसरी भाभी के हाथ ..
ननद की चूत के अन्दर ऊँगली मंजू की ...और क्लिट के ऊपर भाभी की ..

मंजू की उंगली इंजन के पिस्टन से भी तेज अन्दर बाहर हो रही थी ..
भाभी कभी क्लिट दबाती तो कभी कस के रगड़ देतीं ...

तीन चार मिनट के अन्दर ही रंजी झड़ने के कगार पे पहुँच गयी ..
लेकिन अबकी दोनों नहीं रुकी

और फिर चूत मंजू की उंगली दबाती दबोचती , सिकुड़ती, फैलती ..
और चूत से पानी निकलना शरू हो गया

जैसे गाढ़ी एक तार की चाशनी ..और निकलता ही गया ...
मंजू की ऊँगली हाथ ...
भाभी की हथेली सब रस में सराबोर

और जैसे ही रन्जी थोड़ी रिलैक्स हुयी भाभी ने उसके कान में कुछ कहा और बोला एक बार फिर से बोल ...

मुस्करा के रंजी बोली ..

"एक बार क्या भाभी मैं हजार बार बोल सकती हूँ ..आखिर आप की ननद हूँ।

आप के देवर का लंड बहुत मस्त है ...खूब लंबा और मोटा ...मेरी तो उसके बारे में सोच के गीली हो जाती है चूत बहुत मन करता है चुदवाने का ..बस मन करता है मेरी झिल्ली फटे तो उसके लंड से ..."

" अरे तो चुदवा काहे नहीं लेती छिनार मेरी चूत मरानो .."

उसका गाल सहलाते हुए मंजू खूब प्यार से बोली ..और उसका स्कर्ट और टाप ठीक कर दिया . हालाकिं अभी भी उसके हाथ , ब्रा और थांग से बंधे थे और दोनों पैर मंजू ने अपने पैरों से फैला रखे थे .

" अब उसके लिए तो आपको अपने देवर को तैयार करना पड़ेगा ...इतना शर्माता है वो क्या चोदेगा , लगता है मुझे ही उसे, ..."

तब तक बड़े जोर से फोन की घंटी बजी ...


 मैं वाइन की बाटल्स लेकर जब घर पहुंचा तो नीचे सन्नाटा था।

ये मेरे लिए अच्छा ही था की भाभी के सामने ये वाइन्स की बाटल्स ...मैं सीधे अपने कमरे में गया ...और अपनी अलमारी के अन्दर ...सम्हाल कर रख दिया ..

नीचे कोई नहीं था मैं समझ गया की रंजी आई होगी . उसकी पिंक स्कूटी बाहर खड़ी थी। और वो भाभी के साथ ऊपर उनके कमरे में होगी . दरवाजा उठंगा था, अन्दर से रंजी , मंजू और भाभी की आवाजें आ रही थीं।
रंजी बोल रही थी .....

"एक बार क्या भाभी मैं हजार बार बोल सकती हूँ ..आखिर आप की ननद हूँ। आप के देवर का लंड बहुत मस्त है ...खूब लंबा और मोटा ...मेरी तो उसके बारे में सोच के गीली हो जाती है चूत बहुत मन करता है चुदवाने का ..बस मन करता है मेरी झिल्ली फटे तो उसके लंड से ..."

मेरी तो हालत ख़राब हो गयी उसके मुंह से ये सुन के ...मेरे सामने ...आज वेबकैम पे देखे उसके मस्त उभार नाच उठे , क्या जोबन है और ये तो खद ही लुटाने को तैयार बैठी है ..और एक मैं

गुड्डी मुझे सही में बुद्धू कहती है . तब तक मंजू की आवाज आई

"" अरे तो चुदवा काहे नहीं लेती छिनार मेरी चूत मरानो .."

और बिना रुके रंजी की शहद घुली सेक्सी आवाज आयी

"" अब उसके लिए तो आपको अपने देवर को तैयार करना पड़ेगा ...इतना शर्माता है वो क्या चोदेगा , लगता है मुझे ही उसे, ..." तब तक बड़े जोर से फोन की घंटी बजी ...

मैंने सोचा पहले फोन ख़तम हो जाए तब मैंने अंदर एंट्री मारू पता नहीं किसका फोन हो ...

.मेरी भाभी की हंसी और डायलाग से पता चल गया की चन्दा भाभी का फोन है बनारस से ..

पहले भाभी ने पूछा , " क्या हाल चाल है बनारस का ..."
उधर से कुछ चन्दा भाभी ने बोला होगा ...इधर से भाभी की आवाज आई ..

" अरे भाभी मैं कहाँ आ पाउंगी रंग पंचमी में ...हाँ मेरी ओर से ...जैसे वहां दालमंडी है ना ...यहाँ कालीन गंज है ...बस वहां की सबसे मशहूर रंडी को भेज रही हूँ ...हाँ हाँ पक्का ...वो भी तैयार है , उसके घर से भी मेरी बात हो गयी है ...एकदम गुड्डी के साथ जायेगी ...अरे वो दालमंडी वालियों के भी कान काटेगी ..

आप ने एक दम सही टाइम फोन किया ...हाँ हाँ ...यही है मेरे पास बात कराऊँ ..एकदम लो रंजी ...मेरी भाभी ..बनारस वाली ..रस की खान है एकदम ..."

और भाभी ने स्पीकर फोन आन कर दिया था , जिससे वो भी चन्दा भाभी की बात सुन सकें

“ "भाभी मैं रंजी बोल रही हूँ आपकी ननद की ननद ..." रंजी की आवाज आई .

" क्या बोल रंडी ...तुम्हारा काम है की नाम .." चन्दा भाभी ने पहले बाल पे ही छक्का मार दिया।

शहद और चांदी के घुंघरूओ वाली आवाज में खिलखिलाती रंजी बोली ..." अरे नहीं भाभी ...ड नहीं ज ..रंजी "

" ज यानी ...ज से जोबन वाला ज न, रंजी ..." चन्दा भाभी भी कम नहीं थीं। फिर जोड़ा " तू आ रही है ना गुड्डी के साथ ...रंग पंचमी में ...तेरे जोबन के बहुत कदरदान है यहाँ पर .."

रंजी कुछ बोलती की मेरी भाभी ने टुकड़ा लगाया , " भाभी , इसका जोबन बहुत गद्दर है ."

" अरे यहाँ आके और गद्दर हो जाएगा ..सुनो रंजी ..."
हाँ भाभी ...वो बोली .
"आने के पहले एक तो तू कोई चोली वोली मत सिलवाना ...और जो पुरानी हों वो अपनी कोई छोटी बहन, सहेली की बहन को दे देना.”

चन्दा भाभी की ये बात न तो रंजी की समझ में आई और ना बाहर से कान पारे , मुझे।
" क्यों भाभी ..." उसने पूछने की गलती कर दी .

" अरे पहली बात तो की तुझे तो यहाँ ...कोई चोली पहनने देगा नहीं ...इत्ती लम्बी लाइन लगी रहेगी ...और जब तू अपने मायके लौटेगी ना ..तो यहाँ के लौंडे रगड रगड़ के मसल मसल के ...तेरी साइज ..अगर 3 2 सी है तो 3 4 डी हो जाएगी ...तेरी सारी चोली छोटी होजायेंगी इसलिए ..."

मेरी भाभी ने इशारे से रंजी को समझाया की ये चन्दा भाभी की मजाक का स्टाइल है.

रंजी को वैसे भी समझाने की कोई जरुरत वैसे भी नहीं थी

फिर चन्दा भाभी की ही आवाज आई ..." अरे तू डर तो नहीं गयी ..आना जरुर ."

हंसती हुयी रंजी की आवाज आई ..." अगर आप मेरी भाभी की भाभी है ...तो मैंने भी अपनी भाभी की एकलौती ननद हूँ ..डरूंगी क्यों . आखिर अपने भैया की ससुराल आ रही हूँ ...कोई इधर उधर तो नहीं ..मैं पक्का आउंगी ...और तब तक रहूंगी ...जब तक आप लोग हार कर भगा नहीं देंगी ."

भाभी ने ख़ुशी से रंजी को बांहों में भर लिया। चन्दा भाभी की पहले हंसी की आवाज आई फिर बोली
" बहुत रगड़ाई होगी तुम्हारी यहाँ ..."
" अरे मैं तो आ ही उसी लिए रही हूँ ...भाभी ...सारे बनारस वालों का रस निचोड़ लुंगी ...हाँ आपके देवर और मेरे भैया के साल्ले घबडा रहे हों तो बात अलग है ..."


चन्दा भाभी जवाब से लगता है खुश हुयीं और वो मेरी भाभी की तारीफ करती हुयीं बोली ...
" बिन्नो तूने अपनी ननद को ट्रेनिंग तो जबर्दस्त दी है ..."

ख़ुशी से भाभी ने फिर एक बार रंजी को अपनी ओर खीच लिया और बोली ..

" अरे भाभी आप ही की ननद हूँ ..सब आप से ही सीखा है ..अभी इस की ट्रेनिंग ही चल रही थी मैं और मंजू मिल कर लेकिन एक इस की ट्रेनिंग है जो सिर्फ आप और दूबे भाभी ही दे सकती है ...वो जरुर दीजियेगा

..ना माने तो हाथ पैर बांध कर मेरी ओर से पूरी छूट है .”

" कौन सी ट्रेनिंग अरे खुल के बोलो ना ...इसको तो पक्की छिनार बना के भेजूंगी ...देखना तुम ...अगवाडा पिछवाड़ा सब ट्रेन कर दूंगी .." चन्दा भाभी अब अपने रूप में आ रही थीं।

रंजी खिस्स खिस्स मुस्करा रही थी।

" अरे कोई ख़ास नहीं ..भाभी रंजी की ओर देखते मुस्करा के बोलीं ,

" बस जरा इसको खारा शर्बत पिला दीजिएगा ...नमकीन वाला ...वो भी चख ले ...एक बार जुबान पर नमक का स्वाद लग जाएगा तो ..."

भाभी की बात काटते चन्दा भाभी की हंसी सुनाई पड़ी ..

" अरे एकदम ...वो तो एक दम जरुरी है ..एक बार उस नमक का स्वाद लग गया ना तो फिर तो तेरे ससुराल क्या आस पास के जिलों की सबसे नमकीन लौंडिया हो जायेगी . सब लौंडे इसी का नाम ले के मुट्ठ मारेंगे

..आने दे उसको रोज सुबह भिनसारे , झांटो के छन्ने से छान कर , पीला शरबत ...क्या कहते हैं बीयर ...एक ग्लास पिला दूंगी तो चार बोतल बियर के बराबर नशा रहेगा उस चूत मरानो को। सुबह शाम दोनों टाइम बिना नागा ...अरे दुबे भाभी तो कह रही थीं इसको चटनी भी चटायेंगे ..रंग पंचमी के दिन .

रंजी के पल्ले कुछ नहीं पड रहा था लेकिन मुझे तो समझ में आ रहा था की किस 'खारे शरबत ' की बात हो रही है।
अब मेरी भाभी बोलीं बनावटी गुस्से से ..

" अरे भाभी ..मैं अपनी एकलौती ननद भेज रही हूँ ...तो सिर्फ चटनी चटा के छोड़ देंगी ..क्या मजा आयेगे बिचारी को ...ठीक से स्वाद भी नहीं लगेगा उसे तो नाश्ता खाना सब कराइयेगा ."

लेकिन प्रसंग भाभी ने ही बदला ,,," अरे भाभी , वो दूबे भाभी के सबसे छोटे देवर की क्या हालत है ..."

चन्दा भाभी समझ गयीं , बाहर खड़ा मैं भी समझ गया . उस का नाम ले के कीत्ती गालियाँ दी गयीं थी मुझे ..और चलते समय मुझे गुड्डी के सभी घरवालियों ने बोला था ,

" बोल देना , उस से भी नम्बर जरुर लगवाएंगे ..रीत ने तो यहाँ तक कहा था की अरे वो अपने भाई से नैन मटक्का करे और हमारे भाई मुंह देखे ...हमारी रक्षा करता है तो हमारा भाई ही तो हुआ ...

" एकदम मस्त है ...लाइन लगी रहती है ...और तेरी ननद का नम्बर तो उसके जरुर लगवाएंगे ...फागुन में कातिक का मजा लेगी ये ...एक बार घुस के फूल के नाट बना लेगा न तो घंटे भर की छुट्टी .अपने शहर के सारे लंड भूल जायेगी ."

चन्दा भाभी हंस के बोली

अब रंजी को कुछ तो अंदाजा लग गया था ...फूल के नाट बनाने से ..लेकिन मेरी भाभी ने और आग लगाई ..

" अरे भाभी मेरी ननद को कोई ऐसी वैसी मत समझिएगा ...उसकी गली के बाहर गधे खड़े रहते हैं ...उनसे नैन मटक्का करती है ..बड़ी कैपिसिटी है इसकी क्यों रंजी ..."

रंजी और इतराने लगी ..." आप भी भाभी ..ऐसा कुछ नहीं है ...मंजू ने लेकिन और जोड़ा ..

" कल गुड्डी कह रही थी ...की तोहें देख के तोहरे गली का एक गदहा का लंड खड़ा हो गया था ..तौ .."

गनीमत थी की चन्दा भाभी को अचानक मेरी याद आ गयी वो बोलीं ,

" अरे वो बहनचोद , तेरा देवर कम नंदोई कहाँ है ..."
मेरी भाभी , रंजी और मंजू तीनो हंसी ...
भाभी ने जवाब दिया ..." सही नाम रखा है आपने अब हम सब भी उसे इसी नाम से बुलायेंगे , बड़ा प्यार का नाम है ...बहनचोद ..वो बाजार गया है गुड्डी जरा ले गयी है बस आ ही रहा होगा।"

चन्दा भाभी बोलीं ..हम तो उसे इसी नाम से बुलाते हैं।

भाभी ने रंजी को दुलार से खींच के अपनी बांह में समेट लिया और उस का गाल सहलाते बोलीं ,

" एकदम अरे जिसकी बहन इतनी मस्त चोदने लायक होगी ...वो बहनचोद तो होगा ही. "

भाभी मेरी मस्त थीं ...गाली गाते हुए कित्ती बार उन्हें गाली देते मैंने सूना था ...मजाक भी प्योर से नान वेज कर लेती थीं ..लेकिन इस तरह बात चीत में खुल के गाली देना ...मैं चकित था लेकिन मुझे अच्छा लगा .

चन्दा भाभी के पास से किसी लड़की की आवाज आई।

मैं पहचान गया ,गुंजा थी। बनारस में जो मेरी छोटी साली बन गयी थी।

" चलती हूँ ज़रा गुंजा के लिए चाय बना दूँ ..." और ये बोल के चन्दा भाभी ने फोन रख दिया।

फोन बंद हुआ और मैंने एंट्री ले ली .

और मैं पत्थर का हो गया।
खासतौर से 'वो आठ इंच ' ....

इस टाप में उसे वेब कैम पे देखा था , फोटो भी ली थी ... लेकिन
असल की बात ही और है ...वो भी इत्ती नजदीक से की मैं जब चाहूँ हाथ बढ़ा कर छु लूँ ..

मेरी निगाहें उसके संगमरमर की पथरीली गोलाइयों से चिपकी थीं , जिनका उपरी भाग पूरी तरह खुला था .
टाप बस जैसे उसे हलके से छिपाए, संभाले था ...उरोजों के उपरी भाग तो खुल के दिख ही रहे थे ..खड़े कड़े निपल भी पूरी तरह झलक रहे थे ...

और वो दूधिया गोलाइयां अब पूरी तरह सफेद भी नहीं थी ...जैसे कोई बच्चा कबूतर के परों को रंगने की कोशिश करे ...लाल हरा रंग ..अबीर गुलाल का ..और जिससे झांकती उसकी गोराइयां और खिल रही थीं।

मुझे अपने को इस तरह देखता सबसे पहले रंजी मुस्कराई ...फिर भाभी और मंजू ...

मेरी चोरी पकड़ी गयी ..और मैने बात बदलने की कोशिश की ..

मंजू के एक उंगली में कुछ शीरे जैसा लगा था ..खूब गाढ़ा गाढ़ा ..

" आप लोग कुछ मिठाई खा रही थी क्या ...जो .." और मेरी बात ख़तम होने के पाहले ही मंजू बोल उठी ..

" हाँ रस मलाई खा रहे थे ...अब चासनी बची है लो चाट लो " हंसते हुए वो बोली
और उसने वो शीरे में डूबी ऊँगली मेरे होंठ पर रख दी ...और मैं गप कर गया।

क्या स्वाद था ...गजब।
पहले तो मैंने खूब चाटा , और फिर मंजू की उंगली को चूसने लगा।

एकदम अलग ही स्वाद था ...और जब मैंने सर उठाया तो मंजू और भाभी मुश्किल से अपनी हंसी रोक पा रही थीं और रंजी , मुस्करा भी रही थी , थोड़ी झेंप भी रही थी .

जब मंजू ने मुझे चिढाते हुए पूछा ...क्यों लाला पसंद आई रसमलाई की चाशनी .
अब मुझे लगा की मामला कुछ और है ..और जब मैंने एक बार फिर से जुबान मंजू की उंगली पर फिराई ...तो कुछ कुछ मामला साफ हुआ ..और उपर से भाभी बोली

" अरे इन्हें मिठाई का डिब्बा ही दिखा दो ना ...कुछ लगा होगा तो उसे ही चाट चुट कर साफ कर देंगे ..."
एकदम ..हंसते हुए मंजू बोली
और जब तक मैं कुछ समझ पाता , मेरा एक हाथ पकड़ कर उसने खींचा , रंजी की ओर और दूसरी हाथ से रंजी की छोटी सी बित्ते भर की स्कर्ट उठा दी ...और मेरी हालत एक दम खराब हो गयी ...

जांघो के बीच उसके मेरी निगाह चिपक गयी थी ...

एकदम गोरी गुलाबी मक्खन , चिकनी मुलायम ...

मुझे याद आया कल मैंने ही तो पार्लर वाली को इसकी ब्राजिलियन वैक्सिंग के लिए बोला था ...बस ऊपर, जन्नत के दरवाजे से कम से कम एक इंच ऊपर , केसर क्यारी की एक पतली सी लाइन जैसे इशारा कर रही हो

..किधर भटक रहे हो ...अगर दुनिया में कहीं स्वर्ग है , यही है यही यही है ..

दो रसीले पतले गुलाबी होंठ जोर से खजाने का दरवाजा बंद किये हुए , बस एक सी दरार ...कल तो थांग हटा के उसने बस एक झलक दिखायी थी पल भर के लिए ..और आज मंजू ने दीदार करा दिए ...

और सिर्फ दीदार ही नहीं बल्कि मेरे इस हाल का फायदा उठाकर मेरा हाथ उन्होंने ठीक वहीँ रख दिया ...

बस लग रहा था मैं साटिन पे हाथ फिरा रहा हूँ इत्ता चिकना .लेकिन खूब अच्छी तरह रस से भीगी , गीली ...

और जब मैं होश में आया तो मैंने हाथ हटाने की कोशिश की , लेकिन मंजू की पकड़ के आगे ...मंजू मेरा हाथ रंजी की चिकनी चूत पे जोर जोर से रगड़ रही थी ...

मेरी समझ में नहीं आ रहा था की रंजी कुछ कोशिश क्यों नहीं कर रही है ...अपनी स्कर्ट नीचे करने की
( वो बिचारी करती भी कैसे , उसके हाथ तो पीछे बंधे थे , उसी की ब्रा और पैंटी से . और फिर एक लडके का हाथ चिकनी चमेली पे पड़ने का मजा उसको भी तो आ रहा था )

और रस से भरा पूरा गीला ..मेरा हाथ लथपथ हो गया।

मंजू ने मेरा हाथ मेरे मुंह में वापस लगा दिया . अब भाभी हंस के बोली ,

" अरे मंजू की उंगली तो बड़े चाव से चाट रहे थे ..अब इत्ता रसमलाई का शीरा है चाट लो ना .
मैं झेंप गया लेकिन थोडा सा चाट लिया।

रंजी भी मुझे चाटते देख मुस्कराने लगी

"मंजू , जरा इनको रसमलाई का पैकेट दे दो ...हम तीनो की ओर से होली का गिफ्ट " भाभी हंसते हुए बोलीं .

मंजू ने मुझे दिखा के रंजी के ब्रा और पैंटी में बंधे हाथ खोले ..और रंजी की छोटी सी दो अंगुल की लेसी गुलाबी पैंटी सीधे मेरे मुंह में रगड़ दी ..
क्या स्वाद , क्या गंध
पसंद आया ..भाभी ने छेड़ा और अपने हाथ से रंजी की टीन लेसी ब्रा मेरे चेहरे पे लहराते हुए मुझे पकड़ा दी और फिर रंजी के पास जाके उसे प्यार से पकड़ के बोलीं

" और अगर रसमलाई मांगना है ...तो मेरी इस प्यारी सी ननद से मांगना पड़ेगा .." फिर रंजी से उन्होंने मुस्कराकर पूछा
" क्यों मना तो नहीं करेगी इसे .."

" अरे कोई मांग के तो देखे "

वो पलकों का गिरना , वो सीने का उठना , बो गुलाबी लबों की लरज ...वो आँखों की जुम्बिश ..

उस शोख ने जिस अदा से कहा बस मैं बेहोश नहीं हुआ और जंगबहादुर कपडे फाड़ के बाहर नहीं निकले बाकी सब कुछ हो गया

और ऊपर से भाभी ने और जोर से उसे दबोच लिया ..और प्यार से गाल सहलाते हुयें बोलीं ,

" लाला देखा ..मेरी एकलौती ननद है कोई मजाक नहीं। तुम लेते लेते थक जाओगे ...ये देते देते नहीं थकेगी ."

रंजी ने हाथ खुलने के बाद अपनी स्कर्ट और टाप ठीक कर लिए थे तब भीउसके अधखुले उरोज चैलेन्ज दे रहे थे ...हिम्मत हो तो आओ दबा दो ...
बात कुछ आगे बढती की सीढी से धडधडाते हुए गुड्डी कमरे में आई

और उसके पीछे शीला भाभी और फिर भरा हुआ शापिंग बैग ...

भाभी और रंजी को साथ साथ देख कर , शीला भाभी शिकायत से बोलीं ..

" अरे इतना मस्त माल कुठरिया में छिपाय के रखी हो .."


 लेकिन जवाब रंजी ने दिया ..आंखे नचाते हुए मुस्कराते .

"अरे भाभी मैं तो आप से ही मिलने आई थी , लेकिन पता चला की आप बाजार गयी हैं .यहाँ भी कोई बनिया यार फंसा लिया है क्या "

उसके जवाब से खुश होकर भाभी ने रंजी को , ( उनका हाथ अभी भी रंजी की पतली , खुली खुली कमर पे था ) और अपनी ओर चिपका लिया .

खुश तो शीला भाभी भी हुयी और बोलीं ...

" लगती हो पक्की छिनार ...चलो नीचे ..जब तक आँगन में ननद को नंगे ना नचाया तो होली का मजा क्या ...वहीँ चेक कर के देखूंगी ...तुम्हारी पोखरी में कितने यार डुबकी लगाये हैं , दर्जन भर से तो ज्यादा हो होंगे

...और जो इतना चूतड मटका मटका के चलती हो ..कितने लौंडो का धक्का गांड में खायी हो ...सब पता चल जायेगा।"

" अरे भाभी आपके मुंह में घी शक्कर ...लेकिन अभी तो दरजन कौन कहे ..इहाँ खाता भी नहीं खुला है ...अब आपके आशीर्वाद का असर हो जाय तो अच्छा ..चलिए अब यहाँ तक आप से मिलने आ गयी हूँ तो चाहे बेड रूम चाहे आँगन ..."

रंजी भी पीछे हटने वाली नहीं थी .

वो , शीला भाभी और मंजू के साथ नीचे चली गयी।
....
मैं भी उनके साथ जा रहा था की गुड्डी ने आँख के इशारे से मुझे बरज दिया ...और ऊपर भाभी के पास रुकने का इशारा किया .

" क्या बात है ..." भाभी ने मुझसे पूछा।
मैं हिचक रहा था की गुड्डी ही बोली ,

"इन्हें कुछ कहना है ..इसलिए "

" तू बड़ी वकील बन गयी है इसकी .." हंस के आँख तरेरते , भाभी गुड्डी से बोलीं और मुझसे बोलीं
" हाँ बोलो ना , क्या कहना है ..."

मैंने पहले थूक गटका , फिर सोचा कैसे शुरू करूँ और हिम्मत करके बोलने ही वाला था की भाभी ने ही रोक दिया और गुड्डी से पूछा

शापिंग हो गयी मिल गयी सब चीजें ..
" हाँ एकदम और इन की पसंद की ..जिससे बाद में ये नखड़ा ना करें ..."

गुड्डी मुझे देखते हुए मंद मंद मुस्कराकर बोली।

" और साइज ..." अब की भाभी ने बहोत धीमे से पुछा ...
" एकदम परफेक्ट नाप के लिया है ...आखिर आप ने मुझे जिम्मा सौपा था ..."

गुड्डी इतराकर बोली
जब तक मैं सन्दर्भ प्रसंग समझता , भाभी मेरी ओर मुड़ी और बोलीं ..

" हाँ अब बोलो क्या कह रहे थे .."

" भाभी बस मेरी समझ में नहीं आ रहा है ..कैसे बोलूं ...मुझसे बड़ी गलती हो गयी ..."
हिचकिचाते हुए मैं बोला
" भाभी वो खाने के समय मैंने ...आपने पूछा था ना की गर्मी में गांव में ...तो वही मैंने बोल दिया था ना ...की की ...छुट्टी नहीं मिल पाएगी तो ..."

"अरे तो इसमें इतना परेशान होने की कौन सी बात है ...छुट्टी नहीं मिलेगी गरमी में ...तो जाड़े में कर लेंगे ..और लड़की वालों से बात कर लेंगे की तुम्हे गाँव की शादी नहीं पसंद है ...तो उन्हें दिक्कत तो बहुत होगी लेकिन करेंगे कुछ वो जुगाड़ शहर से शादी करने का ...तुम मत परेशान हो .." और भाभी मुड गयीं।


गुड्डी मुझे घूरे जा रही थी ...और मेरे समझ में कुछ नहीं आ रहा था की क्या करूँ ...फिर मैंने डीबी का छुट्टी सैंक्शन वाला मेसेज खोल के मोबाइल भाभी की ओर बढ़ा दिया ...

उन्होंने उसको देखा , पढ़ा और फिर ...मुझे लौटा दिया ..

" मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा है ...तुम खुद साफसाफ क्यों नहीं बता देते " वो बोलीं .

" वो छुट्टी मेरी ..." मैंने बोला फिर रुक गया।
" क्या हुआ छुट्टी नहीं मिली ...तो कोई बात नहीं जाड़े में ...तुमने मुझसे पहले भी कहा था की नवम्बर दिसम्बर .." भाभी आराम से बोली .

गुड्डी दांत पीस रही थी .

" नहीं नहीं वही मैं कह रहा था की जब अभी हम लोग गए थे तो मैंने अपने बॉस से बात की सब बात समझाई . तो वो गरमी में छुट्टी के लिए मान गए हैं ..." मैं जल्दी जल्दी बोला.

अब भाभी रुक के ध्यान से सुनते हुए बोली ...
" ऐसे थोड़े ही ...ये तो लगन पे होगा ना ...और फिर २-४ दिन की छुट्टी से काम नहीं चलेगा मैंने तुम्हे बता दिया था ...तीन दिन की बरात , ४ दिन रसम रिवाज ...कब से छुट्टी मिलेगी ..."
" २ ० मई से ..." मैंने बताया .

उन्हह कुछ सोचा उन्होंने ...फिर बोलीं और कब तक ...

" २ ८ दिन की पूरी ...१ ८ जून तक की ...असल में मेरी ट्रेनिंग बनारस में लग गयी है ...करीब छ सात महीने की ...सत्रह मई से है उस मैं बनारस में ज्वाइन कर लूँगा ...बीस से छुट्टी ही है अगर आप कहेंगी ,

कोई बात होगी तो ...सतरह को शुक्रवार है ...तो अगले दो दिन तो वैसे भी ...अगर आप कहेंगी तो मैं २ ० से एक दो दिन पहले भी आ जाऊँगा ...तो इसलिए छुट्टी वाली परेशानी अब नहीं हैं ..."

अबकी मैं पूरी बात बोल कर ही रुका

भाभी ने कुछ सोचा फिर बोला मैं ने शीला भाभी से कहां था की पंडित जी से पूछ लें की लगन कब है ...

" पचीस मइ से पन्दरह जून तक उनको पंडित जी ने बताया था ...और ये भी कहा था की पच्चीस की लगन बहुत अच्छी है ..और फिर गाँव की बरात ..जीता देर होगा कही बारिश वारिश ...तो लड़की वालों को भी ..."

मेरी बात काट के भाभी मुस्करा के बोलीं ...

" अच्छा अभी से लड़की वालों की तरफदारी चालु हो गयी ...वैसे बात तुम्हारी सही है ...लेकिन एक बार मुझे उन से बात करनी पड़ेगी ना ..पर ...फिर कुछ उन्हें याद आया
खुल के मुस्करा के वो बोलीं ,

" छुट्टी के साथ ये बात भी तो थी , गाँव में तीन दिन की बरात , वो भी आम के बाग़ में ..तो उसमें तो कोई परेशानी नहीं है .."

गुड्डी मुझे देख के खिस्स खिस्स मुस्करा रही थी ..

" नहीं नहीं भाभी ऐसा कुछ नहीं है ...मुझे क्यों परेशानी होगी गाँव में बारात से ...गाँव की शादी में तो और .." मैंने बात बनाने की कोशिश की .

" यही तो ...खिलखिलाते हुए मेरी नाक पकड़ के जोर से हिलाते हुए भाभी बोली ...

"जबर्दस्त रगड़ाई होगी तुम्हारी ...तुम्हारे भैया के साथ तो कुच्छ मुर्रुवत हो गयी थी ..लेकिन तेरे साथ नहीं होने वाली ..डेढ़ दिन का कोहबर होता है हमारे गाँव में ...और गालियाँ वालियां तो छोटी बात हैं ...

वहां तुमसे गालियाँ गवाई जायेगीं तुम्हारे मायके वालो के लिए ...चलो खैर उसकी कोई चिंता नहीं ...मुझे एक से एक आती है ...तुम्हे सब सिखा दूंगी ..."

( सुना तो मैंने भी था इस कोहबर की शर्त के बारे में ...शादी के बाद लड़के को लड़की वाले के घर में ही रोक लिया जाता है ..और ससुराल की सभी औरतें सालियाँ ...सास , सलहज , उसके पास रहती है और दुलहन भी ...जब दुल्हन की विदाई होती है तब लड़का उस के साथ ही निकलता है . माना ये जाता है की इससे दुल्हा ससुराल में घुल मिल जाता है ..आखिर दुलहन तो जिंदगी भर के लिए जाती है अपनी ससुराल ...लेकिन मैंने ये भी सुना था की ये सब रस्म अब पुराने जमाने की बातें हो गयी .)


मेरी नाक अभी भी भाभी के हाथ में थी और गुड्डी खिलखिला के हंस रही थी .

भाभी चिढाते हुए बोलीं

'डर तो नहीं गए भैया ...वरना अभी मैंने बात नहीं की है ...फिर वही जाड़े वाली बात शहर की शादी की ..."

उनकी बात काट कर के मैं तुरंत बोला

" नहीं नहीं भाभी प्लीज ...ऐसा कुछ नहीं है। आप कोई चेंज वेंज की बात मत करिएगा . मुझे कोई दिक्कत नहीं है गरमी की शादी और गावं में ...आखिर हर जगह की अपनी रस्म रिवाज है मैं रैगिंग समझ लूँगा ...एक दो दिन की क्या बात है "

" जी नहीं ..." भाभी ने तुरंत समझाया ..

" उस कोहबर की के रगड़ाई के सामने , बड़ी से बड़ी रैगिंग बच्चो का खेल है ...और तुम्हारे साथ तुम्हारे मायके से कोई कजिन वजिन जो कुँवारी हो बस वही रह सकती है ..और उस की खूब रगड़ाई होगी खुल के ...बस यही है की मैं नहीं देख पाउंगी "

गुड्डी बड़ी देर से चुप थी। बोली

अरे ऐसा कुछ नहीं है ...वीडियो रिकार्डिंग करा लेंगे ना ...कोई इनकी साली वाली ही कर देगी ...फिर आप ही क्यों इनके सारे मायके वाले देखंगे बड़ी स्क्रीन पर .."

भाभी ने ख़ुशी से गुड्डी की पीठ थपथपाई ...और बोलीं ये हुयी ना बात आज जब मैं लड़की वालों से बात करुँगी ना ...तो ये भी बोल दूंगी ...फिर मेरी ओर मुड के बोलीं

" इसलिए मैं तुमसे कह रही थीं ना की शादी के ६-७ दिन पहले आजाओ ...तो अपने घर की तो रसम जो होगी सो होगी ...मैं तुम्हे तुम्हारे ससुराल के लिए भी ट्रेन कर दूंगी ..."

मेरी सांस वापस आई . मुझे मालुम था जाड़े में कोई लगन वगन है नहीं ..अगली लगन अप्रैल यानी साल भर से ज्यादा का इन्तजार ..और अगर २ ५ मई वाली बात बन गयी तो बस सवा दो महीने के बाद ...एकदम ...मैंने तुरंत भाभी की बात में हामी भरी ...

" आप एकदम सही सोच रही थीं ...मैंने कहा ना मैं ही बेवकूफ हूँ ...अगर २ ५ की बात पक्की होती है ना तो मैं १ ८ को ही आपके हवाले हो जाऊंगा ...पूरे सात दिन .जो भी रसम हो ट्रेनिंग हो सब आँख कान मुंद कर .."

" एकदम ...अबकी भाभी ने मेरा कान पकड़ा ..और २ ७ की रात को मैं तुम्हे अपनी देवरानी के हवाले कर दूंगी ...उसके बाद पूरा कब्ज़ा उसका "

मैंने सब कुछ मना डाला ..चलिए मेरी बात रह गयी।

लेकिन भाभी ने फिर एक सवाल दाग दिया

" हाँ और वो आम के बाग़ वाली बात ...गाँव में बारात तो वही रुकती है और वैसे भी बहुत बड़ी बाग़ है वो डेढ़ दो सौ पेड़ होंगे कम से कम ...खूब घने दसहरी , कलमी सब तरह के ...और उस समय तो लदा लद भरे होंगे ...और तुम्हे तो इतना परहेज है और अगर कही तुम्हारी साली सलहज को मालुम पड़ गया तो ..फिर तो ..."

मैंने उन की बात काट के कहा ..." भाभी चलेगा बल्कि दौड़ेगा ...अरे नेचुरल और आर्गेनिक का जमाना है ...तो मुझे आम के बाग़ से भी ऐसा कुछ नहीं ...फिर ससुराल में साली सलहज टांग तो खिचेंगी ही यही तो ससुराल का मजा है ..."

भाभी और गुड्डी मेरे इस धाराप्रवाह बात को सुन के , एक दूसरे को देख के आँखों ही आँखों में मुस्करायीं और फिर बोली ...तूने इतनी सब बाते बोल दी मैं कन्फुज हो गयी ...एक बार में सब साफ साफ समझा दो तो मैं अभी लड़की वालों से बात कर के डेट फाइनल कर दूँ ...

मैं समझ गया था की भाभी मुझे रगड़ रही है वो मेरे से सब सुनना चाहती हैं

मुझे मंजूर था ..मैंने सब बाते एक बार फिर से दिमाग में बिठाई और उन्हें पकड़ कर बोल दिया

" भाभी मेरी अच्छी भाभी, मुझे गरमी की गाँव में शादी , और आम के बाग़ में बारात सब मंजूर है ..सौ बार मंजूर है।

मुझे मई जून में पूरे अट्ठाईस दिन की छुट्टी मिल गयी है ..बीस मई से ..और अगर आप पच्चीस मई की शादी तय करती हैं तो मैं अट्ठारह को ही आपके पास आ जाऊँगा ..तो बस अब आप इसी गरमी में फाइनल कर दीजिये ना ...और बेस्ट होगा पच्चीस मई को ..."

भाभी मुस्करायीं और गुड्डी से बोली ,

" देखा ये आदमी अभी दो घंटे पहले क्या बोल रहा था था ये नहीं वो नहीं छुट्टी नहीं ...और अभी ...दुल्हन पाने के लिए आदमी कुछ भी करने को तैयार रहता है .."

गुड्डी ने खिलखिला कर जवाब दिया .

भाभी ने ख़ुशी से मुझे बांहों में भर लिया ...और बोली ..मैं आज ही सब पक्का कर दूंगी और तुम मेरी सारी बातें मान गए तो चलो एक बात तुम्हारे लिए ...फिर गुड्डी की और मुड के बोलीं ..

" हे तुम मत सुनना ...उधर मुंह करो ...कुछ सुना क्या .."

" नहीं आप कुछ बोल रही थीं क्या ...मुझे तो कुछ भी नहीं सुनाई दे रहा ..." गुड्डी भी उसी अंदाज में बोली

भाभी ने मेरे कान में कहा ..लेकिन पूरे जोर से ...

" चल तेरा फायदा करवा देती हूँ ..रोज रात में ठीक नौ बजे मेरी देवरानी तुम्हारे हवाले ..पूरे बारह घंटे के लिए ...बाहर से ताला बंद कर के चाभी मैं अपने पास रखूंगी जिससे मेरी कोई छिनाल ननद आके तंग ना करे ...और अगर तुमने मेरी सब बातें अच्छी तरह मानी ...और उसे ज्यादा तंग नहीं किया ना ..."

"ज्यादा तंग मतलब भाभी ..." मैंने पूछा और गुड्डी की ओर देखा ...वो मुस्करा रही थी और कान पारे सुन रही थी
" अरे ज्यादा मतलब ..तीन चार बार से ज्यादा ...अब नयी दुलहन है और वो भी इत्ती प्यारी तो , तीन चार बार तो बनता है .
" हाँ और जैसा मैं कह रही थी तुम मेरी बात मानोगे तो ...दिन में भी दो -तीन घंटे के लिए छोड़ दूंगी अपनी देवरानी को ..बाकी समय दूर दूर से ललचाना ..."

फिर भाभी ने मुस्करा के गुड्डी से पूछा ..." हे तूने तो कुछ नहीं सूना ..."
और बड़े भोलेपन से गुड्डी ने अपनी बड़ी बड़ी आँखे नचाते हुए कहा
" आपने कुछ कहा था क्या ...मैंने तो कुछ नहीं सूना ..."

" ठीक किया ...अच्छा चल नीचे जा के ,,,मंजू और शीला भाभी का हाथ बटा ना ...ननद की रगड़ाई करने में ..तेरा भी तो हक़ है ...बड़ी मुश्किल से होली में ऐसी ननद पकड़ में आती हैं ..."

और फिर वो मुझसे बोलीं ,

" तुम भी चलो ...तुमने मेरे लिए बहोत काम बढ़ा दिया है ...आज ही मुझे सब फाइनल करना है ...पहले पंडित जी से बात करके ...तुम कौन सी डेट बोल रहे थे ..पच्चीस मई ना ...हाँ तो पहले पंडित जी से तय करके फिर लड़की वालों से बात करनी होगी ...और एक बार उन्होंने हाँ कर दी तो बाकी इंतजाम .."
और भाभी ने अपनी फोन नम्बर की डायरी उठायी ...

ये हम दोनों के लिए इंडिकेशन था की अब हम चलें .
.....

बाहर निकलते ही मैंने और गुड्डी ने जोर से 'हाई फाईव ' किया ...एक बार नहीं तीन बार।

और उसके बाद मैंने कस के गुड्डी को बाहों में भींच लिया। मेरा एक हाथ कस के उस के नितम्ब को दबोचे था और दूसरा , पीठ पर ...और पुच पुच पुच .. पांच बार मैंने उसकी किस्सी ले ली खूब जोर जोर से ...

और हम लोग सीढी से नीचे उतरने लगे . लेकिन रास्ते में है उसे मैंने फिर रोक लिया ..और बाहों में दबोच कर ...बोला
" हे तुझसे एक बात कहनी है .."
"बोल ना " ...मुझे अपनी बांहों में भींचती वो बोली।

और अब की जो मैंने चूमना शुरू किया तो गिना नहीं ...और साथ में बोलता गया ..." तुम बहुत अच्छी हो सबसे अच्छी ...तुम बहुत अच्छी हो ...आई लव यू ...आई लव यू ...

कुछ देर बाद मुस्करा के वो बोली ...चलो चालीस बार हो गया ...बाकी रात में ..और हम लोगो ने आलिंगन छोड़ दिया लेकिन फिर मैं बोला

" तुम ना होती न तो मैं इत्ता कन्फुज हो रहा था झिजक भी लग रही थी की भाभी से कैसे बोलूं .."

" तभी तो मैं थी वहां मेरे प्यारे बुद्धू ..." गुड्डी ने नाक पकड कर कहा और बोली

" मुझे लग रहा था ..और आज तुम गड़बड़ कर देते न तो सम्हालना बहुत मुश्किल होता ..."

" और अब तो तुम हरदम मेरे पास जाड़ा , गर्मी बरसात ..रहोगी एकदम पास "

और ये कह के मैंने उसे फिर से बाहो में पकड़ने की कोशिश की लेकिन वो मछली की तरह फिसल कर अगली सीढी पर चली गयी और अपनी कजरारी आँखे नचाते , हाथों में परांदा घुमाते बोली ,

" हिम्मत है तुम्हारी दूर होने की ...लेकिन अभी ज्यादा इमोशनल मत होओं ..मुझे जल्दी है तुम्हारी बहन कम माल और अपनी उस नयी होने वाली ननद की ऐसी की तैसी करने की ...वर्ना सारा मजा तो शीला भाभी और मंजू अकेले अकेले लूट लेंगी ..."

और फिर मेरा हाथ पकड के धडधडाते हुए वो सीढ़ी से उतर गयी और खींचते हुए सीधे आँगन में ले गयी ...जहाँ रंजी , मंजू और शीला भाभी थे






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