FUN-MAZA-MASTI
फागुन के दिन चार--87
गतांक से आगे ...........
दोनों मुस्करा रही थीं। भाभी ने गुड्डी के कंधे पे सहेलियों की तरह हाथ रखा हुआ था।
और मुझे देख के भाभी और जोर से मुस्कराने लगी ...और साथ में गुड्डी भी ..
भाभी ने गुड्डी की ओर देखा जैसे पूछ रही हों बता दें और गुड्डी ने आँखों ही आँखों में हामी भर दी।
भाभी ने मुझे देखा , कुछ पल रुकीं और बोला , तुम्हारे लिए खुशखबरी है ...
मैं इन्तजार कर रहा था उसनके बोलने का ..एक पल रुक के वो बोलीं ...
" मैंने , तुम्हारे लिए ...अपनी देवरानी सेलेक्ट कर ली है ..."
मैंने गुड्डी की ओर देखा उसकी आँखों में ख़ुशी छलक रही थी।
मैं एक पल के लिए रुका फिर कुछ हिम्मत कर कुछ सोच कर बोला ..
' जी ...लेकिन ...कौन ...नाम क्या है ..."
दोनों , भाभी और गुड्डी, एक साथ शेक्सपियर की तरह बोलीं ..
" नाम , नाम में क्या रखा है . क्या करोगे नाम जानकर?
और मैं चुप हो गया .
" देवरानी मेरी है की तुम्हारी, तुम क्या करोगे नाम जानकर ?"
भाभी , मुस्कराते हुए मेरी नाक पकड कर बोलीं।
गुड्डी किसी गुरु ज्ञानी की तरह , गंभीरता पूर्वक, सहमती में सर हिला रही थी।
भाभी ने नाक छोड़ दी , फिर बोलीं ,
" लेकिन अभी बहोत खुश होने की जरुरत नहीं है , मैंने चुन लिया है , लेकिन वो तो माने। उसकी भी शर्ते हैं ...अगर तुम मानोगे तभी बात पक्की हो सकती है।"
मैं फिर सकते में आ गया। ये क्या बात हुयी ...मैं कुछ बोलता इसके पहले भाभी ने गुड्डी से कहा ...
" सुना दो ना इसको शर्ते ...अब अगर ये मान गए तो बात बन जायेगी ...वरना सिर्फ मेरे चुनने से थोड़ी ही कुछ होता है ..."
गुड्डी ने एक पल सीधे मेरी आँखों में देखा ...जैसे पूछ रही हो ...बोलो है हिम्मत ..और फिर उस ने शर्त सूना दी .
" पहली शर्त है ..जोरू का गुलाम बनना होगा ...पूरा ."
भाभी ने संगत दी ...बोलो है मंजूर वर्ना रिश्ता कैंसल .
मैंने धीमे से कहा ..हाँ ...और वो दोनों एक साथ बोलीं ...हमने नहीं सूना ..
मैंने अबकी जोर से और पूरा कहा ...हाँ मंजूर है।
और वो दोनों खिलखिला पड़ीं ...लेकिन गुड्डी ने फिर एक्सप्लेन किया ...
और जोरू का मतलब सिर्फ जोरू का नहीं , ससुराल में सबका ..साली, सलहज सास ...सबकी हर बात बिना सोचे मानने होगी।
मैंने फिर हाँ बोल दिया ..
.
भाभी बोलीं , तलवें चटवायेंगी सब तुमसे ..गुड्डी अकेले में बोलती तो मैं उसे करारा जवाब देता लेकिन ..भाभी थीं।
मैंने मुस्करा के हाँ बोल दिया।
भाभी बड़ी जोर से मुस्करायीं और गुड्डी से बोली ...
( मैं देख रहा था की गुड्डी का हाथ तेजी से मोबाइल पे चल रहा था।)
" सुन वैसे तो कोई भी हाँ हाँ कर देगा ...एकाध टेस्ट तो लेके देख "
और गुड्डी ने जैसे पहले से सोच रखा था तुरन्त बोली ...उट्ठक बैठक ... कान पकड़ के 100 तक ...
और मैं तुरन्त चालु हो गया .. कान पकड़ के ..1, 2, 3, 6,
भाभी हंसते हुए गुड्डी से बोली ...तू भी इसका साथ दे रही है क्या ..इत्ता आसान टेस्ट ले रही है ...मैं होती तो सैन्डल पे नाक तो रगड़वाती ही ...
और उधर मैं चालू था 21, 22, 23, 24 ...लेकिन गुड्डी ने बोला चलो मान गए हम लोग की तुम बन सकते हो जोरू के गुलाम ...और भाभी ने जोड़ा ..चलो अब मैं बोल दूंगी उसको ...और अब उसने कर दी दया तो रिश्ता पक्का ...
गुड्डी ने भी हामी भरी और वो दोनों लोग किचेन की ओर मुड ली ...और अचानक जैसे उन्हें कुछ याद आया ...और मुड के बोली ..
" तुमसे दूबे भाभी ने कहा था ना रंजी को साथ ले जाने के लिए ...जब तुम जाओगे ...और तुम भूल गए
...तुमने बात किया रंजी और उसके घर वालों से ...वो कह रही थी कोई कोचिंग है वहां ..छूट्टी में कुछ सीख लेगी और ...फिर 10-12 दिन में मैं जाउंगी , कुछ जर्रोरी काम है ...तो वो आजायेगी मेरे साथ ...खैर मैंने उसके घर बात कर ली है ...और आज वो आयेगी ना तो तुम भी समझा देना .."
गुड्डी उनके साथ ही थी लेकिन उसने इशारा किया की 5-10 मिनट में वो कमरे में आ रही है ...मैं कमरे की ओर मुड गया ...
तब तक मेरे फोन पे एक मेसेज आया ...गुड्डी का ही था लम्बा
.... गुड्डी का मेसेज पढ़ते ही मैं समझ गया ...
मेरी और रंजी की ओ फेसबुक पे जो चैट हुयी थी उसने पढ़ ली ...मेरे पासवर्ड तो उसके पास था ही ..मेरे सारे पासवर्ड और कार्ड्स के पिन ..उसके बर्थ डेट पर ही थे ...
मेसेज में था ...
" रंजी ऊपर जैसे पहुचे ...उससे तुम वेब कैम पे चैट करो ...और उससे बोलो की तुम्हे वो 'अपने ' दिखाए ...और तुम भी ना सिर्फ उसे जंगबहादुर का दर्शन कराओ ...बल्कि हिला डुला कर दिखाओ ..शेक इट वेल बेबी ..आगे तुम खुद समझदार हो ..मैं भी पांच मिनट में पहुँच रही हूँ ..दरवाजा बंद मत करना।"
मेरी तो लग गयी।
कहीं रंजी बुरा मान जाय तो ...आज .वो अभी आनेवाली है .थोड़े ही देर में ...कहीं ..लेकिन दूसरी ओर दिमाग में आता ...गुड्डी ने अभी भाभी के सामने उट्ठक बैठक लगवाई है ...उसका बुरा मानना तो और खतरनाक है।
कमरे में घुसते ही मैंने फेस बुक आन किया ...रंजी आन लाइन थी।
गुड्डी की बात मुझे तुरंत याद आई।
'हाय " मैंने उसे मेसेज दिया 'क्या कर रही हो '
गुड्डी की बात मुझे तुरंत याद आई।
'हाय " मैंने उसे मेसेज दिया 'क्या कर रही हो '
" कपड़ा बदल रही थी , ऊपर अपने कमरे में हूँ , तैयार हो रही हूँ तुम्हारे पास आने के लिए ..."
उसका मेसेज तुरंत आया।
" कपड़ा चेंज कर रही हो ...तो आ जाऊं तेरे पास ..."
पहले लोट पोट वाली स्माइली ...फिर मेसेज ..मैंने तो कल भी आफर दिया था तुम्ही शर्मा गए ...लेकिन अब लेट हो गये कपडे मैंने चेंज कर लिए हैं ..." रंजी का मेसेज आया।
" हे कैसी लग रही हो जरा दिखाओ तो ..." मैंने इसरार किया।
" अच्छा आइडिया दिया तूने बस एक सेकेण्ड ...और एक मिनट में उसकी तीन नयी फोटुयें फेस बुक पे ...
आग लग रही थी ...वो टाप एक साइड से शोल्डर लेस था , उसके गोल गोर कंधे साफ दिख रहे थे ..लेकिन असली चीज तो दूसरी गोलाइयां थी ..ये टाप साल भर पहले भी उसे बहूत टाईट होता था ...और अब तो उसके उभार और गदरा गए थे ...शेप साइज क्लीवेज सब एकदम साफ दिख रहा था।
और स्कर्ट जो मैंने उसे कल गिफ्ट की थी ...वो वैसे ही
मिनी क्या माइक्रो स्कर्ट थी ..घुटनों से कम से का डेढ़ बित्ते ऊपर और कूल्हों पे टंगी ...और जो उसे सबसे ज्यादा हाट बनाती थी वो थी साइड स्प्लिट ...
पहली फोटो ..पे उसे के टाप की पिक्चर बल्कि सच कहूँ तो छलकते उभारों की फोटो थी। नीचे उसने जो कैप्शन दिया था ...बोलो मैं कैसी लगती हूँ ...
दूसरे में उसकी स्कर्ट थी ...मेरी नयी स्कर्ट कैप्शन था और तीसरी में उसकी पूरी फोटो ...
तब तक चैट पे उसका मेसेज आया ..बोलो कैसी लगती है मेरी नयी प्रोफाइल फोटो ...
मैंने तुरंत लाइक किया था तब भी 11 वां था।
मेरे तारीफ करने से पहले वो बोली ...क्रेडिट तुम्हारी है ..इस टैब से जबर्दस्त फोटो आती है ...और मैंने मौक़ा पकड लिया।
इस का वेब कैम भी बहोत अच्छा है कभी किसी के साथ कैम चैट की है इस टैब से ...मैंने पूछा ..
वो हिचकिचाई और बोली अभी नहीं।
" तो करो ना " मैंने उसे चढ़ाया ...मैंने वेब कैम पहले ही आन कर दिया था।
मेरे डेस्क टाप पे जो वेब कैम था उससे पिक्चर एकदम साफ आती थी और वो ज़ूम भी कर सकता था और 360 डिग्री भी
एक पल रुक के उसने फेस बुक पे मेसेज दिया ओके ...मैंने फेसबुक बंद कर दिया ...
और मेरे डेस्क टाप पे रंजी अवतरित हुयी ...और मैंने उसकी फोटो फ्रिज कर ली।
हाट , सुपर हाट ...और ऊपर से उसकी सिडक्टिव स्माइल ...और आज उसने मेक अप भी पूरा किया रसीले होंठों पर स्पर्क्लिंग पिंक लिपस्टिक ...बस मानो कह रही हों ..
.आओ चूस लो मुझे ...और मैंने वही किया ..एक जबर्दस्त फ्लाईंग किस ...और वो मेरी सेक्सी टीन चुलबुली ...वो एक हाथ और आगे निकली ..
उसने झुक कर सीधे आलमोस्ट कैमरे पे किस कर लिया ...और मुझे लगा की मेरे गाल दहक़ गए हों ...
मैने जोर से सीने पे हाथ मारा ...और वो खिलखिला पड़ी ..
उसके झुकने से मुझे हाट किस के साथ एक और चीज मिली ...आइडिया ..
झुकते ही उसकी गोरी गोलाइयां अपनी झलक दिखा गयी थीं ...
बस मैंने उससे वही कहा ..रंजी तू ज़रा और पास आ ना हां थोड़ा झुक के बस जरा सा और ..
वो झुक गयी और अब पूरा क्लीवेज दिख रहा था ...और जोबन का उभार भी ...क्या मस्त उभार आये थे उसपर ..तभी पूरे शहर में आग लगा रही थी ...
मेरी निगाहें वहां चिपक गयी थीं ...
उसको मेरी हरकत का अंदाजा हो गया था ...वो अदा से मुस्करा के बोली ...कुछ देखना हो तो साफ साफ बोल दो ना ..
दिखा देगी तू ..मैंने भी हंस के कहा फिर पूछा ..कमरा अंदर से बंद है ना ..
अबकी वो जोर से हंसी ..
तो क्या बिना कमरा बंद किये कपड़ा बदलूंगी ...वैसे भी मेरे कमरे में ऊपर कोई नहीं आता ...कभी भी ...उसने ग्रीन सिग्नल दे दिया।
अन्दर ब्रा कौन सी पहनी है ..मैंने हिम्मत कर पूछा ...
तुम भी ना ये कोई बात हुयी ...फिर रुक कर बोली ...तुम खुद सोच लो ..शोल्डर लेस टाप पे स्ट्रैप वाली ब्रा थोड़े ही पहनूंगी ...वही कल जो तुमने खरीदवाई थी ...बिना स्ट्रैप वाली ...वो रुकते रुकते बोली ..विक्टोरिया सीक्रेट वाली ...
मैंने हिम्मत कर के हिमाकत की ...जरा सा दिखाओ ना ...
तुम भी ना वो .बोली ...जब मैंने कुछ जवाब नहीं दिया तो उसे लगा की कही मैं बुरा तो नहीं मान गया ...
वो मुस्करा के बोली ...लेकिन मैं टाप नहीं उतारूंगी ...
इतनी जगह घुसने के लिए काफी थी ...मैंने तुरन्त बोला ...
कोई बात नहीं टाप ऊपर पुश कर लो मुझे बस देखना है की फिटिंग कैसी है।
तुम भी ना उसने मुंह बनाया फिर बोली ...आंख बंद कर लो ...
हे आंख बंद कर लूंगा तो देखूंगा कैसे ...मैंने समझाया ...
उसने टाप ऊपर सरकाया , बस थोड़ा सा
उसके उभारों की झलक मिल रही थी बेस से एक दो इञ्च ऊपर तक ..
रहने दो तुमसे नहीं होगा ...कमरा भी बंद है ..सिर्फ हम तुम वेब कैम पे और इत्ता जरा सा ...तुमसे नहीं होगा ...तुम अभी बच्ची हो ...मैंने बुरा सा मुंह बनाया ...टाप वापस ठीक कर लो ..
अब वो चढ़ गयी ...
करती हूँ ना ...तुम भी इत्ती जल्दी ..और अबकी उसने टाप आलमोस्ट ऊपर कर लिया ..
मैंने सपोर्ट किया ...ये हुयी ना न स्वीट टीन वाली ..बस ज़रा सा और ऊपर ...
और उसने ऊपर कर लिया ...
ब्रा क्या थी 4 अंगुल की पट्टी ..वो भी सफेद लेसी ...और फ्रंट ओपन , डेमी कप ...क्लीवेज उभारती ...छिपा कुछ भी नहीं रही थी ..लेकिन असली बात थी वो जबर्दस्त पुश अप थी ,
रंजी की कप साइज वैसे भी 'सी' थी ..
अपने स्कूल में तभी उसे होली पर बिग बी की टाइटिल मिली थी और ये ब्रा उस को एक डेढ़ कप साइज और बढ़ा दे रही थी। ब्रा निपल के ठीक नीचे ख़तम हो जा रही थी , निप्स को और उभारती ...
जिससे वो टाप में न सिर्फ लगातार रगड़ खाते बल्कि खुलकर झलकते .....
उभार एक दम साफ दिख रहा था ..छलकता ...
स्नैप स्नैप ...मैंने चार फोटुए खींच ली ...
खुश ...वो मुस्करा के बोली।
जवाब में मैंने एक फ्लाईंग किस दिया सीधे जोबन के बीच और उसने कैच कर के ब्रा थोडा सा उठा के उसके अन्दर रख दिया।
तुमने हालत ख़राब कर दी मेरी और उसकी भी ...बन कर मैं बोला,
ब्रा अभी भी टाप से बाहर थी मैंने वेब कैम को सीधे उभारों पे ज़ूम किया ...
और अब उसे रसीले रसभरी से रंजी के निप्स एकदम साफ साफ दिख रहे थे, कभी मन कर रहा था चूस लूं कचाक से ...तो कभी मन कर रहा था की बस पिंच कर लूँ ...
उस सुनयना को मेरी हालत अच्छी तरह मालुम थी फिर भी मुस्करा के बोली ...
क्या हुआ किसकी हालत ख़राब है ..
इसलिए तो कहा है ना ..की वो क़त्ल भी करते हैं तो चर्चा नहीं होती ...किसी की जान जाय तेरी अदा ठहरी ..
वो मुस्करा रही थी ..और टाप उसने अभी भी नीचे नहीं सरकाई थी,
दिखाऊं मैंने पूछा की किसकी हालत खराब है ...मुस्कराकर उसने बिना बोले हामी भर दी।
और मैंने वेब कैम का फोकस नीचे कर दिया ...
जंगबहादुर की हालत वास्तव में खराब थी।
पूरा 8 इंच तना हुआ , शार्ट फाड़ता , और शार्ट थोडा नीचे सरक गया था ...लिंग का बेस साफ साफ दिख रहा था .
अब रंजी की हालत खराब हो गयी थी ...उसकी आँखे एकदम वहीँ चिपकी थीं ...दो पल मैं भी चुप रहा फिर मैंने उसे दिखाते हुए हुए शार्ट के ऊपर से उसे पुचकारना मसलना शुरू कर दिया,
रंजी के निपल जिस तरह पत्थर हो रहे थे वो उसकी मादक उत्तेजना के गवाह थे
.मैंने ही चुप्पी ही तोड़ी ..
अभी तो वो पिंजरे में बंद है सिर्फ झाँक रहे हैं तब ये हालत है ...अगर कही दिख गए तो ...मैंने हंस के बोला।
तो क्या होगा ...आँख नचा के वो शोख बोली।
अपने खड़े लिंग को थपथपाते रगड़ते मैं बोला ...ये शार्ट फाड़ के बाहर आ जाएगा।
तब तक गुड्डी दबे पाँव आ गयी और मेरे पीछे आ गयी ...वो वेब कैम से बाहर थी।मैंने डेस्क टाप एडजस्ट किया ..अब वो रंजी को अच्छी तरह देख सकती थी , उसने मुस्करा के मुझे थम्स अप का साइन दिखाया और इशारे से बताया की मैं रंजी की ब्रा उतरवा दूँ
मैंने आँख के इशारे से गुड्डी को हामी भरी और रंजी से बोला ..
" है हिम्मत ...रहने दो .."
वो कुछ बुदबुदाई ...फिर हिम्मत कर के मेरी ओर देख कर बोली ..तुम भी ना ..उस के हाथ फ्रंट ओपन ब्रा के हुक पर था ...
एक साथ मैं बोला ...तुम बस एक पल के लिए दिखा के बंद कर लेना ...और मैंने अपने दोनों हाथ शार्ट में फंसा दिए .
एक साथ ...
पिंजड़ा खुला और दो दूधिये कबूतर फडफडाते, मचलते निकले ...
और डलिया खुली ...और कडियल नाग , फुफकारता, फन काढ़े बाहर निकला।
रंजी की बड़ी बड़ी लजीली शर्मीली पलकें बंद हो गयीं थी ...फिर कुछ रुक कर बहोत धीरे धीरे हौले हौले उसने पलकों को ऊपर उठाया ...
और अपनी नीम निगाहों से जब मेरे खुले पगलाए बौराए जंगबहादुर को देखा तो ...वो बौरा गयी।
और बौरा मैं भी गया उसके उन्नत कड़े पत्थर से सख्त , किशोर उरोजो को देख के ...बस मन कर रहा था उन्हें मसल दूँ दबा दूं चूस लू ...जैसे दो उलटे कप रखे हों ...बस उस तरह के ...टिट फक के लिए आइडियल ...
गुड्डी बार बार इशारा कर रही थी ..मैं उसकी टाप लेस एक दो स्नैप खीँच लूं ..एक दो पल मैं झिझका ..लेकिन फिर स्नैप स्नैप
मुझे याद आया की गुड्डी ने बोला था की मैं सिर्फ उसे दर्शन ना कराउं बल्कि ...हाथ से आगे पीछे कर के 61-62 कर के उसे इन ऐक्शन दिखाऊं ..
.हाथ से लिंग उठा के मैंने उसे दिखाया ...फिर धीरे धीरे चमडा खोल के मेरा सुपाडा बाहर ..
मोटा पहाड़ी आलू ऐसा बड़ा लाल ...और मैंने वेब कैम को उसी पर ज़ूम किया ...
रन्जी की आँखे मस्ती से पगला उठीं ...
मैंने अपनी उंगली से उसे रगडा और मुस्काराते हुए रंजी से बोला ..
तुमने ये हालत की है बिचारे की ..
वो शरमा के मुस्करा के बोली ..धत्त
गुड्डी पीछे से इशारा कर रही थी की मैं रंजी को दिखा के मुट्ठ मारू,...
मैंने रंजी से बात आगे बढाई ..देखो तुम्ही ने इसकी ये बुरी हालत की है बहोत भूखा है बिचारा ...
और सुपाडे को आलमोस्ट वेब कैम के लेंस से सटा दिया ..रंजी की स्क्रीन पे लगा जैसे वो उसके होंठो के एकदम पास आ गया है ...
हे एक किस्सी दे दो ना इसको छोटी सी ही सही मैंने फिर गुहार लगाई
धत्त ...वो बोली लेकिन एक नदीदी लड़की की तरह उसे देख रही थी ...उसकी आँखे मेरे तन्नाये लंड से चिपकी थीं ...
मैंने फिर बोला ...
प्लीज ..एक बस एक ..दे दो ना
और उसने एक किस लिया ..उसके गुलाबी होंठ आलमोस्ट उसके वैब कैम से चिपके थे ..होंठ उसने ऐसे खोले थे ...मानो गप्प से सुपाड़ा गड़प लेगी।
अब मैंने पूरी मुट्ठी में उसे पकड़ा लेकिन अभी भी आधा बाहर निकला था ...रंजी की ओर देखता ...
और रंजी भी बस मन्त्र मुग्ध से उसे देख रही थी।
लेकिन मेरी निगाहें बार बार रंजी के ब्रा से आजाद जोबन की और लौट रही थीं ...
गुड्डी बार बार पीछे से इशारा कर रही थी ..मैं उसके उन्मुक्त उभारों के और स्नैप्स ले लूँ ...
मेरी हिम्मत नहीं थी ...की गुड्डी की बात टालूँ ...स्नैप स्नैप ...फिर मैंने अपने सीने को एक बार छुआ और फिर सुपाडे को ..
मैं इशारा कर रहा था की जैसे मैं अपने सुपाडे को छू रहा हूँ , मसल रहा हूँ ...वो अपने निपल्स को छूए .
उसने जोर जोर से सर हिलाया ...ना ना में ..
अबकी मैंने बोल के अर्जी लगाई हे रंजी प्लीज बस एक बार ..
मैं विश्वास नहीं कर सकता था ...उसने ना सिर्फ अपना निपल छुआ , बल्कि तरजनी से फ्लिक भी कर दिया ...
और अब मेरी हालत खराब हो गयी बिना किसी के कहे ...मैंने तेजी से मुट्ठ मारना शुरू कर दिया ...२३, २४,२५,२६,...३१,३२ ,३३ ...बिना किसी के कहे
रंजी पहले तो मुस्कराई ...फिर खिलखिलाने लगी ..
" बहोत बेताब हो रहे हो।'
" तुमने कर दिया है ..देखो क्या हालत बना दी है ..." मैंने उदास मुंह बना के कहा।
" मैंने तुम्हे कभी मना तो नहीं किया ..." बहोत धीमे से वो बोली।
" एक बार हाँ तो बोल दो ना ..देखो पागल हो रहा है तेरे लिए " उसे दिखाते हुए तेजी से मुट्ठ मारते हुए मैं बोला।
" हाँ ...लेकिन किस चीज के लिए .." रंजी फिर खिलखिलाई।
मैंने रंजी के होंठो की ओर इशारा किया ...फिर जांघो के बीच ...
एक बार वो फिर शरमाई ..फिर धत्त बोला ...
कल से यही हालत है उसकी जब से तूने छूया है उसको ..दे दो ना ..एक बार ..बोल दो न हां ...मैंने अब हाथ हटा के पूरा लिंग उसे दिखाते कहा ...
वो शोख , नाजनीन ...मुस्करायी , खिलखिलाई ...फिर बोली ..
" चलो तुम्ही खुश ...हाँ हाँ हाँ ..,आ रही हूँ ना तेरे पास अभी ...अब इसको बोलो परेशान होना बंद करे "
वो बोली।
पीछे से गुड्डी ने इशारा किया ...मैं उसकी चुनमुनिया भी खुलवा दूँ ..मैंने इशारे से मना किया ...लेकिन गुड्डी और मान जाए ...वो पीछे पड़ी रही ...
और मैंने हिम्मत की ...
" अच्छा एक बार इसको इसकी सहेली को दिखा दो ना ...शायद इसके दिल को कुछ ठंडक पहुंचे .'
रंजी ने मना नहीं किया लेकिन हडका लिया ...
" तुम भी ना एक दम बदमाश हो गए दुष्ट ...कैसे कैसे बोलते हो ...पहले कैसे सीधे बच्चे थे ...लडकियों से भी ज्यादा शर्माते थे ...और अब ..एकदम बर्बाद ..."
मैं मुस्कराया और एक बार फिर हाथ से अपने शेर को पुचकारते , उसे दिखाते पूछा
" तुम्हे कौन ज्यादा पसंद है ...बदमाश वाला या सीधे बच्चे वाला ."
अबकी वो खुल कर हंसी और बिना एक पल सोचे बोली ...
" बदमाश वाला ...लेकिन तुम कुछ ज्यादा ही बदमाश हो ..लालची भी "
" तुम चीज है ऐसी हो मस्त मस्त ...प्लीज ज़रा सा इसकी सहेली का मुखड़ा दिखा दो ना ...मेरे लिए नहीं तो इसके लिए .."
वो कुछ सोच रही थी ...और मैंने मुट्ठ मारना फिर शुरू कर दिया ...फिर एक ट्रिक चली ..
" अच्छा ज़रा सा स्कर्ट उठा के कम से कम अपनी पैंटी ही दिखा दो ..."
उसने जोर जोर से सर हिलाया ...ना ना में ..
अबकी मैंने बोल के अर्जी लगाई हे रंजी प्लीज बस एक बार ..
और उसने हलके से अपनी रेशमी जाँघों पर से स्कर्ट इस तरह सरकाना शुरू किया की ...कोई स्ट्रिप टीज गर्ल भी मात खा जाय। और साथ ही सटी हुयी जांघो को हलके हलके फैलाना शुरू किया .
उसकी इसी अदा से तो पूरा शहर दीवाना था उसके पीछे ...और अब बनारस में भी आग लग गयी थी ...ये सुन के की वो आने वाली है ...
ज़रा सी पैंटी दिखी की ..उसने हाथ से ढँक लिया और जोर और से ना ना में सर हिलाया ...
मैंने बहुत इसरार किया प्लीज थोडा सा और ...पैंटी तो कम से कम ...बस एक मिनट के लिए ..
स्कर्ट और ऊपर सरकी ...मखमली जांघे थोड़ी और फैली ..
मेरे दिल की धड़कन बस बंद नहीं हुयी ...
एकदम चिकनी , मुलायम ...जैसे किसी बच्चे के गाल हों और पैंटी ...
पैंटी क्या थांग थी ..एकदम दो अंगुल की पिंक कलर की लेसी ...बस निचले होंठो को ढकी ..ढकी क्या ..
सहलाती दबोचे ...
अबकी बिना गुड्डी के कहे मैंने ५-६ स्नैप ले लिए ..
उसने एक उंगली थांग में फंसाई ...
मेरी धड़कन बढ़ गयी थी ...खोलेगी नहीं खोलेगी ..खोलेगी नहीं खोलेगी ...और
उसने थांग ज़रा सा सरका दिया
मेरी धड़कन , सांस सब रुक गयी ..
एकदम कसे भींचे हुए गुलाबी दोनों होंठ , मखन से भी चिकने ...
उसने तुरंत पर्दा गिरा दिया ..( लेकिन उसके पहले दो स्नैप खिंच गए )
और उठ गयी ..फिर ब्रा और टाप भी ठीक कर ली।
मैंने सीने पे जोर से हाथ मारा और फिल्मी ढंग से बोला ..
अब कैसे जिऊँगा ..
वो अबकी सीरियस गुस्से में बोली ..." ऐसे मत बोलना कभी "
मैंने अपने खड़े लिंग की ओर इशारा किया .." इसका क्या करूँ ..."
अबकी वो खुल के हंसी बोली ...
" क्यों चिंता करते हो आ रहीं हूँ ...अब तुम क्या करोगे ...जो करुँगी मैं करुँगी ...देख लुंगी तुमको और तुम्हारे उसको भी "
और फिर वही पुराना बहाना ...नीचे से आवाज दी गयी है जल्दी आओ
वो मुड़ी और मेरी हालत और खराब हो गयी ..
रंजी का पिछवाड़ा ..उफ ...
और जैसे ये काफी नहीं था ...जोर से उसने अपने मस्त किशोर गदराये भारी भारी नितम्ब मटका दिए ..जोर से ..और पीछे से अपनी स्कर्ट उठा दी ..पूरी कमर तक ...
थांग पीछे से और पतला था , एक पतली रस्सी ऐसा उसकी दरार में फंसा ...
गोरे गोरे बड़े बड़े चूतड साफ दिख रहे थे ..
और बिना मुड़े सिर्फ अपनी गर्दन मेरी ओर कर के उसने एक फ्लाइंग किस मेरी ओर उछाल दिया ...और एक उसकी ओर ..
मुझे कुछ याद आया और मैंने जोर से बोला ...हे निकलते समय एक मिस्ड काल मार देना ...
श्योर वो बोली और चली गयी ...
मैंने वेब कैम बंद कर दिया .
.................................
मैंने पीछे मुड़ कर देखा ...गुड्डी मेरे कपडे निकाल रही थी ...एक दो निकालती , कुछ सोचती फिर रख देती, फिर उसने मेरी एक टी शर्ट निकाली और जींस दोनों मेरी फेवरिट ...और बनयान भी ..और पलंग पर रख दिया ...
जब से वो आई थी मेरी वार्डरोब पे उसका कब्ज़ा हो चुका था ..कपडे तय करना उसका काम था ..एकाध बार मैंने बोलने की कोशिश की तो डांट पड़ गयी ...जोर से ...गुड्डी की ...
लेकिन अब मैं समझ गया था अगर मुझसे ज्यादा मेरी पसंद कोई जानता था तो वो ...गुड्डी थी .
बस मैं उसकी और देख रहा था ...और सोच रहा था ...की भाभी ने ये तो ऐलान कर दिया की उन्होंने देवरानी चुन ली ..काश ...काश ..वो मेरी पसंद हो ये ...बस ये लड़की ..
अब जिंदगी भर मेरे कपडे निकालने का काम इसके जिम्मे हो ..मैं एक बार सब देवी देवता मन रहा था ...मैंने शीला भाभी से भी सिफारिश लगवाई थी ..
गुड्डी ने एक बार मेरी ओर देखा और मीठा मीठा मुस्करा दी।
फिर वो मेरे पास आई मुझे देखा और ...मुस्करा के मेरी नाक पकड़ के बोली ..
" तुम ना बुध्दू हो पूरे पागल ..."
मेरा दिल तो उसी के पास था ...इसलिए वो झट से मेरे दिल की बात समझ जाती थी।
" हे कही चलना है जरा जल्दी से तैयार हो जाओ ...मैंने कपडे निकाल दिए हैं ..." वो बोली.
मैंने दरवाजे की ओर इशारा किया की वो निकले तो मैं कपडे चेंज करूँ .
वो दरवाजे के पास गयी और दरवाजा अंदर से बंद कर दिया और ठसके से बोली ...
“क्या तुम समझते हो तुम्हारे चेंज करने के लिए मैं बाहर जाउंगी ...”
और जैसे इतना काफी नहीं था ...उसने मेरी शार्ट खींच कर नीचे कर दी।
तब तक उसकी निगाह कम्प्यूटर स्क्रीन पर पड़ी ...मैंने रंजी के जो स्नैप खींचे थे उन्हें एक फोल्डर में सेव कर दिया था डेस्क टाप पे रंजी हाट के नाम से ..
वो मुस्कराई और मुझसे बोली ...तुम थोडा बहुत हैक कर लेते हो ...
मैंने सीना फुलाकर ये बात मान ली।
फेसबुक पे किसी का पासवर्ड ...उसने पूछा
" कैसी छोटी छोटी बाते करती हो ...किसका करना है मैंने ऐसे कहा जैसे ये बच्चों का काम हो ...
" रंजी का .."आँख नचा के वो बोली .
मैं असमंजस में पड गया ..रुकते रुकते पूछा क्यों ..
आँख तरेर कर वो बोली ...सवाल बहूत पूछते हो।
अब नो च्वायस वाली बात थी ...मैंने फेस बुक खोला ...कुछ किया और थोड़ी देर में रंजी का फेसबुक पेज खुल गया था।
वो अभी आन लाइन नहीं थी।
रंजी का पासवर्ड मैंने एक कागज़ पर लिख कर गुड्डी के हवाले कर दिया।
" देर नहीं हो रही है तुम्हे कपडे निकाल के रख दिए हैं ...पहन तो सकते है ...अभी शीला भाभी की आवाज आएगी " वो मुझे हडकाते हुए बोली .
मैं तु्रंत पलंग के पास गया और कपडे पहनने लगा ...लेकिन मेरी निगाह गुड्डी से ही चिपकी थी।
जब करने पे आ जाय तो वो चालाक भी कम नहीं थी आखिर बनारस की थी।
उसने पहले रंजी का पासवर्ड चेंज किया और उसका फेसबुक पेज फिर खोला ...जिससे रंजी अभी आन लाइन ना हो सके ...हालंकि उसके सारे फ्रेंडस बाकी दुनिया उसका पेज देख सकती थी। और उसके फेसबुक पेज पे कुछ करने लगी ...
गुड्डी के दस आँखे थी।
उसने मुझे देखते हुए देख लिया और हडकाया ...पीछे देखो ..जल्दी कपडे पहनो।
जब तक मैंने कपडे पहने वो मेरे पास आगई और मेरे बालों से खेलते बोली ..मेरे सोना मोना चल तेरे बाल झाड देती हूँ अच्छे बच्चे बन जाओ ...और वो भी काम उस ने कर दिया.
" हे तुम रंजी के पेज पे क्या कर रही थी .."
वो खिलखिलाने लगी और उसने रंजी का फेस बुक पेज खोल दिया ...बात करते हुए जो मैंने उसकी वेब कैम से फोटुए खींची थी ..उसमे से ४ उसने उसकी प्रोफाइल पे लगा दी थी ...
और सब में उसका फेस साफ था ..
सब में उसके उभार , क्लीवेज खुल के दिख रहे थे ..
एक में जब उसने टाप थोड़ा सा उठाया था ...और लेसी व्हाईट ब्रा दिख रही थी अन्दर से जोबन झाँक रहे थे ...गनीमत थी उसमें उसका फेस पूरा नहीं था ...
और सब के नीचे उसने टाइटिल भी जबर्दस्त लिख दी थी ...मेरे जुबना का देखो उभार ‘, ‘मेरी चोली छोटी हो गयी’, ‘होली का उपहार मेरे ये मस्त उभार ..."
आज देखना ये तेरी बहन कम माल एक झटके से पूरे शहर में फेमस हो जायेगी . वो हंसते हुए बोली
आलरेडी ५० से ज्यादा लोग उन पिक्चरों को लाइक कर चुके थे . गुड्डी ने उसके कान्टेक्ट में उसका मोबाइल नम्बर भी लिख दिया था।
तब तक शीला भाभी ने आवाज दी और गुड्डी मुझे खीचं कर बाहर लायी . शीला भाभी फ्रेश साडी वाडी पहन के तैयार खड़ी थीं ...और अब मैंने ध्यान से देखा तो ...
गुड्डी भी आज बहोत ही ट्रेडिशनल ड्रेस में , शलवार सूट में तैयार खड़ी थी , यहाँ तक की उसने चुन्नी भी डाल रखी थी .
लेकिन उससे ना उसका जोबन छुप रहा था और रूप ...बल्कि टाईट कुर्ती में और छलक रहा था ..चुन्नी भी उसने एकदम गले से चिपका रखी थी।
लेकिन उसकी कोहनी तक भरी भरी चूड़ियां, कंगन, आँखों में शोख काजल , और नितम्बो तक लहराती चोटी में लाल परांदा ...मेरी निगाहें उस से एकदम चिपकी थीं और मेरी चोरी शीला भाभी ने पकड ली ,
" हे मेरी बिन्नो को क्यों नजर लगा रहे हो , अभी डीठोना लगाती हू।"
मैं झेंप गया और उन्होंने बात बदल कर मुझसे बोला ,
" मंदिर चलना है पैसा वैसा लिया है की नहीं ."
मैंने गुड्डी की ओर देखा, मेरा पर्स , कार्ड
सब कुछ उसी के पास था .
गुड्डी ने मेरी ओर देखा और बोला
"तुम्हारा पर्स कहाँ है , मैं अपना तो सम्हाल के रखती हूँ और अपने झोले ऐसे लेडीज पर्स में से उसने पर्स निकाला , काल वैलेट फूला ..ढेर सारे कार्ड ..मेरा पर्स मुझी को दिखाती वो बोली ,
" ये देखो मैंने अपना पर्स कित्ता संभाल कर रखा है और एक तुम हो ..चलो १० रुपये ले लो चलो जल्दी "
और पर्स से निकाल के उसने मुझे पकड़ा दिया और चल पड़ा मैं उस सारंग नयनी के पीछे पीछे ...
मैं सोच रहा था ...
मेरा पर्स इसके पास ...
मेरे कपडे वार्डरोब इसके पास ..
मेरा दिल इसके पास ..
मैं सोचने लगा की ...और उसके बदले में तब तक वो शोख मुड़ी और मेरी ओर देख के मुस्कराने लगी ..
अगर ये सब दे कर भी ये नाजनीन मिल जाय ...हमेशा के लिए तो घाटे का सौदा नहीं मैंने सोचा ...
बस मेरे मन में हमेशा यही डर नाच रहा था की पता नहीं भाभी ने क्या फैसला किया गुड्डी लेकिन जिस तरह देख रही थी मेरी ओर ..मीठी निगाहों से ..
" अचानक मंदिर जाने का प्रोग्राम ..क्यों किस लिए लिए .." मैंने शीला भाभी से पुछा।
" क्यों ...हर चीज जानना जरुरी है क्या ..." गुड्डी ने घूर कर कहा।
लेकिन शीला भाभी बोल रही थीं , गुड्डी की ओर इशारा करके ,
" अरे इसकी मन की इच्छा पूरी हुयी, पुरानी मनौती ...इसलिए ."
मैं कुछ और पूछता की गुड्डी ने शीला भाभी को भी चुप करा दिया.
" भाभी ..आप भी ना ..'
तब तक हम लोग बाजार में पहुँच गए थे और एक दूकान में , जहां लड़कियों की चीजें मिलती हैं , चुडिया , इमिटेशन ज्वेलरी , अंडर गारमेंट्स , कास्मेटिक्स ...यही सब ...मैंने मना किया की इस दूकान पर मैं जा के क्या करूंगा ...पर गुड्डी हँसते हुए बोली ...फिर तुम्हे लाये क्यों हैं चलो ना ...
और वो हाथ खिंच कर मुझे अन्दर ले गयी.
दूकान में बस एक सेल्स गर्ल थी लड़की सी , गुड्डी से थोड़ी ही बड़ी उम्र की रही होगी ..गुड्डी ने उससे कुछ खुसुर पुसुर की ...दोनों मेरे ही ओर देख रही थीं फिर वो सेल्स गर्ल मेरी ओर देख के मुस्कराई ..
.फिर मेरी ओर आई और बोली ...जरा अपने हाथ दिखाइयेगा ...और जैसे ही मैंने हाथ दिखाए उस ने मेरी कलाई पकड़ ली ...फिर गुड्डी और शीला भाभी के पास जाके कुछ फुसफुसाई
फिर वो तीनो मेरे पास आयीं और सेल्सगर्ल गुड्डी से बोली ,
" गोरी कलाई पे लाल और नीले रंग की चूड़ी बहूत अच्छी लगेंगी , वैसे हरी भी ..."और ढेर सी डिजायन लाके पसंद करने के लिए दे दी। और गुड्डी ने सब मेरी ओर बढ़ा दीं ..आज तुम्हारी पसंद की ...मैंने लाख ना नुकुर किया ...लेकिन और अब शीला भाभी भी गुड्डी का साथ दे रही थीं और आखिर मुझे ही चूज करनी पड़ीं
...तीन डिजाइने , तीनो की दो दो दर्जन।"
" खाली चूड़ी अच्छी नहीं लगेगी ..इन के साथ के मैचिंग कंगन भी है एक नीचे एक ऊपर के लिए ...ज्यादा महंगे नहीं है ..." सेल्स गर्ल ने सलाह दी और, और किसी के बोलने के पहले मैं बोल पडा,
" आप दाम की चिंता मत करिए , दिखाइये ना ..."
वो भी मुझे ही पसंद करने पड़े ..अब मुझे भी मजा आने लगा था. ६ इमिटेशन वाले कंगन भी ले लिये.
फिर गुड्डी बोली , आप के पास वैसी वाली ज्वेलरी है जो , जिनके कान नाक नहीं छिदे होते .."
सेल्स गर्ल ने मुस्करा कर कहा , " आपका मतलब नान पियर्स्ड इयर्स के लिए क्लिप वाली , है ना हर डिजायन की है दिखाती हूँ "
मेरे कुछ समझ में नहीं आया गुड्डी की नाक कान छिदी है , भाभी की भी तो फिर ...मैंने धीरे से गुड्डी से पूछा तो फिर डांट पड गयी .
" अरे यार तुहारे भाभी जी ने कहा है चाहो तो रिंग कर के पूछ लो " वो बोली .
मेरी ये हिम्मत नही थी .
तब तक वो सेल्स गर्ल ढेर सारी आर्टिफिसियल ज्वेलरी ले के आ गयी थी ..कान के लिए बड़े बड़े हुप्स , झुमके , नाक के लिए नथ , रिंग्स ...
और अबकी ना मुझे सिर्फ पसंद करनी पड़ी बल्कि गुड्डी ने इस नाम पे की उन लोगों की तो नाक कान छिदे हैं , मेरे ऊपर ट्राई भी करवा लिया .
साथ में कुछ गले के लिए , एक जोड़ी पायल ...और फिर शीला भाभी ने जोड़ा अरे सुहागन का श्रृंगार तो बिछुए के बिना पूरा नहीं होता ...तो वो भी . फिर शीला भाभी ने महावर की भी एक शीशी ली।
जब सब समान पैक हो गया ...तो गुड्डी ने बोला एक चीज तो रही गयी और ..धीमे से सेल्स गर्ल से कहा आप वो क्वीन साइज वाली ब्रा रखती हैं क्या ..बड़ी साइज की ...
हाँ मुस्करा के वो बोली और जब गुड्डी ने उससे कुछ और बोलने की कोशिश की तो उसने हाथ के इशारे से मना कर दिया. और मेरे पास आ गयी और मुस्करा के मुझसे कहा
" हम लोग जेंट्स के लिए भी सामान रखते हैं ...आपने इतना समान लिया है तो डिस्काउंट भी हो जाएगा ..बनयान ब्रीफ ..वैसे आप बनयान पहनते किस साइज की हैं ."
" पहनता तो ३८ की हूँ लेकिन मुझे चाहिए नहीं .' मैंने साफ साफ मना कर दिया.’
" कोई बात नहीं ...फिर कभी ..." और वो मुस्कराते हुए अन्दर गयी और एक पैकेट अखबार में रैप करके गुड्डी को देते हुए बोली ..
" दो हैं ..और ये शाप की और से हैं ...'
गुड्डी भी मुस्करायी और बोली थैंक्स फिर कहा और वो चूड़ी की साइज ..
सेल्स गर्ल बोली वो भी मैंने चेक कर ली थी ...कलाई पे ढाई और ऊपर की ओर तीन ...उसी तरह से रखी हैं ...
पेमेंट के लिए मेरा कार्ड था ही।
मंदिर पास में था हम लोग घुस ही रहे थी की मेरे फोन पे डीबी का मेसेज आया .
मैंने उन लोगों को बोला की वो हो आयें मैं यहाँ तब तक कुछ बात कर लेता हूँ ...
लेकिन गुड्डी हाथ पकड़ कर खींचते हुए अन्दर ले गयी और शीला भाभी भी बोलीं हे नखड़ा ना करो लाला इसके साथ क्या पता तोहरो इच्छा पूरी हो रही हो चलो दो मिनट हाथ जोड़ लो ..
और वहाँ हम लोगों के कुछ बोलने से पहले शीला भाभी पंडित जी से ना जाने क्या बाते कररही थीं
हम लोगों के पहुंचते ही हंस कर बोली
" पंडत जी जरा इन लोगों की जोड़े से पूजा कराइयेगा ."
गुड्डी ने अपनी चुन्नी , जैसे ही वो मंदिर में घुसी थी सर पर ओढ़ ली थी ...पूरी तरह ढँक कर जैसे दुल्हन ...
हम दोनों साथ साथ मंदिर में बैठे थे , वो मेरे बांये ...और उसके बगल में शीला भाभी।
और जैसे ही शीला भाभी ने कहा इन दोनों की जोड़े से पूजा कराईयेगा , मेरे तो कुछ समझ में नहीं आया लेकिन गुड्डी बिना सकपकाए , मुझसे धीरे से बोली , "रुमाल है तुम्हारे पास,सर पर रख लो।"
रुमाल तो था नहीं ...लेकिन गुड्डी ने अपनी चुन्नी मेरे सर पर डाल दी , और मुझे कनखियों से देख के हलके से मुस्करा दी।
शीला भाभी मेरी ओर आयीं और हलके से हडका के बोलीं , सट के बैठो एकदम ...हाँ और फिर उन्होंने चुन्नी मेरे ऊपर एडजस्ट कर दी, जिससे वो सरके नहीं और पंडित जी से मुस्कराकर कहा,
" बस गाँठ जोड़ने की कसर है ."
पंडित जी भी मुस्कराकर बोले ,
" अरे ये चुन्नी है ना बस इनके शर्ट में फंसा दीजिये और इनकी कुर्ती में ...हाँ बस हो गयी गाँठ ."
शीला भाभी मेरे कान में बोली , अब ये गाँठ खुलनी नहीं चाहिए और मांग लो इसको .
एकदम भाभी ...मैं मुस्का के बोला. अपनी दिल की बात तो मैं उनसे कह ही चुका था ...और भाभी से मेरी अर्जी लगाने का काम उन्ही के जिम्मे था ..इसलिए उनसे क्या पर्दा ..
चुन्नी ना हिले इसलिए हम दोनों अब एकदम सट कर बैठे थे हम दोनों की देह तो सटी थी ही , गाल तक छु जा रहे थे। गुड्डी के चूड़ियों और कंगन की खनखन, कान के झुमकों की रन झुन , मेरे कानो में पड रही थी
...इत्ती प्यारी लग रही थी वो ...की ..और जब वो चोरी चोरी मुझे उसे देखते देखती ..तो वो भी मीठी मीठी निगाहों में मुस्करा देती .
पंडित जी की हिदायतें चालू हो गयीं ..पूरी पूजा में ऐसे ही बैठे रहना , गाँठ हिलनी भी नहीं चाहिए ...और उन्होंने पहले गुड्डी के हाथ में कलावा बांधा , फिर उसी के बचे हिस्से से मुझे भी बाँध दिया.
गुड्डी का हाथ उन्होंने नीचे रखवाया, उसके उपर मेरा हाथ और फिर सबसे ऊपर गुड्डी का बायाँ हाथ ...और फिर कहा आज ये सारी पूजा तुम लोग जुड़े हुए हाथ से ही करोगे .
पूजा लम्बी चली लेकिन जल छिडकने से लेकर सारे काम जुड़े हुए हाथ से हुए।
फिर उन्होंने मन्त्र पढ़ा , गुड्डी से कहा अपना नाम गोत्र सब बोलो और जो मन में हो वो मांग लो ...तुम्हारी इच्छा अवश्य पूरी होगी।
गुड्डी ने आँखे बंद कर ली पर पंडित जी बोले नहीं आँखे खोल कर ...और जो चीज चाहिए वो अगर कहीं आसपास में हो तो उसकी ओर देख लेने मात्र से ...इच्छा बहुत जल्द पूरी होती है.
गुड्डी की लजीली शर्मीली आँखे मेरी ओर मुड़ी, पल भर के लिए उसने मुझे देखा ..और पलकें झुका लीं .
और जब मेरा नंबर आया तो मैंने गुड्डी को मांग लिया ...और खुल कर उसे नदीदे लालचियों की तरह देखा
...वो कनखियों से मीठी मीठी मुस्करा रही थी। भगवान जी तो अंतर्यामी होते हैं लेकिन जिस तरह से मैं देख रहा था को कुछ ना समझता हो वो भी समझ गया होगा की मुझे क्या चाहिये
जब पंडित जी ने प्रसाद दिया लड्डू का तो मुझे बोला ...की मैं गुड्डी को अपने हाथ से खिलाऊं ...शीला भाभी ने गुड्डी के कान में कुछ कहा और वो मुस्कराई।
जैसे ही मैंने लड्डू गुड्डी के मुंह में डाला, शर्माते लजाते थोडा सा मुंह खोला था उसने ...लड्डू तो उसने बाद में खाया मेरी उंगली पहले काट ली।
फिर पंडित जी ने गुड्डी से कहा की वो बचा हुआ लड्डू अपने हाथ से मुझे खिला दे।
और अबकी फिर गुड्डी ने अपने हाथ में लगा हुआ लड्डू मेरे गाल में पोत दिया.
तुम लोगों की जोड़ी इस लड्डू से भी मीठी होगी पंडित जी ने आशीर्वाद दिया।
उनके पैर भी हम लोगो ने अपने हाथ साथ साथ जोड़ के छूए ...
उन्होंने आशीर्वाद दिया ..अब तुम लोग हर काम इसी तरह जोड़े से करना ..
शीला भाभी ने जब चुन्नी अलग की तो वो गुड्डी से बोलीं
" आज मैं नाउन का काम कर रही हूँ ...गाँठ बांधने और छोड़ने का बड़ा तगड़ा नेग होता है "
" अरे एकदम ..इनसे ले लीजियेगा ना ...मैं बोल दूंगी ..." मेरी ओर देखते हुए आँख नचा के वो बोली।
हम तीनो समझ रहे थे किस लेन देन की बात हो रही है.
शीला भाभी पंडित जी से कुछ और बात करने के लिए रुक गयी थी हम दोनों बाहर की ओर निकल आये .
मंदिर के बाहरी हिस्से में एक बड़ा सा शीशा लगा था।
मैं और गुड्डी उसी के सामने रुक कर देखने लगे ...
मैंने उस की पतली कमर में हाथ डालकर अपनी ओर खिंच लिया और शीशे में देखते हुए पूछा ,
" हे ये जोड़ी कैसी लग रही है "
" बहोत अच्छी " गुड्डी बोली।
उसने अभी भी चुन्नी अपने सर पे घूँघट की तरह डाल रखी थी। उसे दुलहन की तरह पकड़ , शीशे में देखती वो बोली ,
" और ये दुल्हन ..."
" दुनिया की सबसे प्यारी सबसे सुन्दर ..दुलहन ..." मैंने बोला .
फिर कुछ रुक कर मैंने धीरे से कहा ...लेकिन ये दुल्हन मुझे मिल जाए .."
" मिल जाएगी ,मिल जाएगी . चिंता मत करो ..अब तो भगवान् जी ने भी आशीर्वाद दे दिया है ." वो हंस के बोली .
गुड्डी ने फिर सीरियस हो के पूछा
" क्या तुमको सच में जून में छुट्टी नहीं मिल पाएगी'
" नहीं असल में ...असल में मैं ..बेवकूफ हूँ ...वो जाड़े की लालच में ..." मैंने अपनी गलती कबूली।
" वो कोई नयी बात नहीं है ...लेकिन तुम मेरी बात का जवाब दो ..छुट्टी मिल पाएगी की नहीं तुम ट्रेनिंग की बात कर रहे थे " गुड्डी ने फिर पूछा।
" हाँ ...नहीं ...असल में उस समय से तो मेरी फील्ड ट्रेनिंग स्टार्ट हो जायेगी ...मोस्ट प्राबेबली बनारस में ही ...डी बी के ही अंडर में ...और फील्ड ट्रेनिंग में तो सब कुछ उन्ही के ऊपर रहेगा ...फिर ..इसलिए छुट्टी का ऐसा कुछ वो नहीं है ...मैंने बोला ना ...जाड़े "
मेरी बात गुड्डी ने बीच में काट दी . उसकी आँखे चमक उठी। वो बोली,
"बनारस में , तब तो घर में ही रहना , हम लोगों के पास ...कोई रेस्ट हाउस वाउस नहीं ...समझ लो ...वैसे कित्ते दिन की ट्रेनिंग होगी वहां ..."
" मैं सब वहीँ कर लूंगा तो ७-८ महीने की तो होगी ही ...." मैंने समझाया।
वो फिर मुद्दे पे आगई
" तो इस का मतलब ...छुट्टी का ऐसा कुछ नहीं है १४ -१ ५ दिन की मिल जायेगी ना ..."
" हाँ कर लूंगा जुगाड़ ..." मैंने सर हिलाया.
" और उसके बाद भी तो तुम बनारस में ही रहोगे ना ...फिर क्या ...तो तुम गावं से डर गए या आम के बाग़ से ..." हंस के वो सारंग नयनी बोली।
फिर बिना मेरे जवाब के इंतजार के वो बोली
"तुम भी ना जाड़े की रात के इन्तजार में ...नवम्बर में लगन आती है जाड़े में ...पूरे ६ महीने का घाटा हो जाता तुमको ...तुम भी ना ...सच में बुद्धू राम हो ..."
बात उसकी सही थी मैं क्या बोलता ..
फिर वही बोली ..." तुम जानते हो बिचारी तुम्हारी भाभी ...कुछ सोच के उन्होंने बोला होगा ..कित्ता तुम्हारा ख्याल रखती हैं ..वो "
बात तो गुड्डी की सोलहो आना सही थी . लेकिन अब तो तीर छूट चुका था .
बिगड़ी बात बनाना अगर किसी को आता था तो वो गुड्डी को आता था।
वो मेरे कंधे पे हाथ रख के मुस्करा के बोली ,
" अब हम जैसे ही लौटेंगे ना ...मेरे साथ ...तुम बोल देना की तुम्हारी छूट्टी की बात हो गयी है ...मिल जायेगी जून में आराम से छुट्टी ...और तुमको कोई ऐतराज नहीं है जून में .. शादी से ..."
गुड्डी से मैंने कहा, "लेकिन तुम भी चलना मेरे साथ जब भाभी से मैं ये कहूंगा ..कुछ बात होगी तो तुम् सम्हाल लेना ...अकेले मैं मैफिर कुछ गड़बड़ ना कर दूँ ..."
" और क्या , " मुस्कराते हुए वो सुमंगली बोली , तुम्हारे भरोसे मैं इतनी इम्पार्टेंट चीज नहीं छोड़ने वाली ...करा लिया ना था तुमने अपना ६ महीने का घाटा ...और गरमी के बाद सावन भी तो आता है ...सावन सूना चला जाता ना ...".
तब तक शीला भाभी आती दिख गयीं ..और मैंने उन्हें छेड़ा
" क्यों भाभी कहीं पंडित जी से कुछ स्पेशल प्रसाद तो नहीं लेने लग गयीं थीं आप."
" तुम्हारा ही काम करवा रही थी ...कुंडली दी थी भाभी ने तुम्हारी मिलवाने के लिए ...और सगुन ..."
उनकी बात काटते मैं बोला
" मेरी कुंडली तो भाभी के पास थी लेकिन वो लड़की की ..."
" तुम्हे आम खाने से मतलब है या ..." अबकी गुड्डी ने बात काटी।
" आम और ये ...'अब शीला भाभी चौंकी ...
" अरे गरमी का सीजन आने दीजिये ...कैसे नहीं खायेंगे ...खायेंगे ये और खिलाउङ्गि मैं ..लेकिन कुंडली का क्या हुआ ...मिली की नहीं ..." गुड्डी उतावली हो रही थी।
" मिल गयी बहुत अच्छी मिली ..पंडित जी तो कह रहे थे ते ये जोड़ी ऊपर से बन के आई है ...दुनिया में कोई ताकत नहीं जो रोक सके इन दोनों का मिलन. सोलह के सोलह गुण मिल गए हैं ..."
शीला भाभी बहुत खुश हो रही थीं ...लेकिन जब तक हम दोनों कुछ बोलते एक खतरनाक बात बोल दी .
" लेकिन , लडकी के लिए एक मुसीबत है ..."
वो बड़ी सीरियसली बोलीं और पंडित जी ने बताया है की इसका कोई उपाय भी नहीं है ..."
" मतलब ..." मैं और गुड्डी साथ साथ बोले .
" अरे इसका शुक्र बहुत ही उच्च स्थान का है ...पंडित जी बोले की इतना ऊँचा शुक्र उन्होंने आज तक नहीं देखा " वो बोलीं
" मतलब " हम दोनों फिर साथ साथ बोले।
अब वो मुस्कराई और मेरी ओर मुंह कर के बोलीं
" मतलब ये की ...तुम दुल्हिन के ऊपर चढ़े रहोगे हरदम ...ना दिन देखोगे ना रात ...बिना नागा।"
मैं और शीला भाभी दोनों गुड्डी की ओर देख के मुस्कराए ...और
गुड्डी बीर बहूटी हो गयी।
अब शीला भाभी फिर मेरी ओर मुखातिब हुयीं और बोलीं , " लेकिन असली अच्छी खबर तुम्हारे लिए है ...पंडित जी ने कहा है ..लडकी रूप में अप्सरा है , भाग्य में लक्ष्मी है ...जिस घर में उसका प्रवेश होगा उस घर की भाग्य लक्ष्मी उदित हो जायेगी ...वहां किसी चीज की कमी नहीं रहेगी और सबसे बड़ी बात ...भाग्य तो तुम्हारा वैसे ही बली है लेकिन जिस दिन से उस का साथ होगा ..वह महा बली हो जाएगा , तुम्हारी सारी मन की बातें बिना मांगे पूरी होंगी , नौकरी, पोस्टिंग ..."
गुड्डी ये सब बातें सुनके कभी खुश होती तो कभी ब्लश करती ...फिर बात बदलते हुए मुझसे बोली ...
" इत्ती देर से तुम्हरा दो दो मोबाइल लादे फिर रही हूँ लो ..."
और उसने अपना पर्स खोलकर मेरे मोबाइल मुझे पकड़ा दिये.
पूजा के समय , उसने मेरे मोबाइल ले के साइलेंट पे कर के अपने पर्स में रख लिए थे
लेकिन शीला भाभी चालू थीं।
" एक बात और तोहार भाभी कहें थी पंडित जी से पूछे की ...लेकिन ओहामें कुछ गड़बड़ निकल गया. "
अब मैं परेशान , गुड्डी के चेहरे पे भी हवाइयां ...हम दोनों शीला भाभी की ओर देख रहे थे ...और वो चुप.
आखिर मैंने पूछा ... "क्या बात है भाभी बताइए ना ".
" अरे लगन की तारीख ...एह साल २५ मई से १ ५ जून तक जबर्दस्त लगन है ...लेकिन जाड़ा में शुक्र डूबे हैं ..एह लिए अब ओकरे बाद अगले साल अप्रैल के बाद लगन शुरू होई ...और जून त तू मना के दिहे हया ...त लम्बा इन्तजार कराय के पड़े दुल्हिन के लिए ."
इतना इंतज़ार तो खैर मुझसे नहीं होने वाला था.
मैं और गुड्डी ..एक दूसरे की ओर देख कर मुस्कराए गुड्डी ने आँखों में मुझे बरज दिया की मैं अभी कुछ ना बोलूं।
वो सीधे मुझे भाभी के पास ले जाती ...और मैं उन्हें बताता की मुझे छुट्टी गरमी में मिल जायेगी।
मैं सिर्फ शीला भाभी की ओर देख के मुस्करा दिया और मोबाइल खोलने लगा
मोबाइल खोल के जैसे मैंने देखा मेरी तो लग गयी .
चार चार मेसेज रंजी के
पहला मेसेज २० मिनट पहले का था ...जब हम पूजा पे बैठे ही थे ..." मैं घर से निकल रही हूँ "
और आखिरी २ मिनट पहले का ...बस मैं तुम्हारे यहाँ पहुँचने वाली हूँ .."
" वो तो घर पे पहुँच भी गयी होगी ...और हम लोग ..." घबडा के मैंने बोला।
" कौन घर पहुँच गयी होगी ...जो इत्ता घबडा रहे हो ..." बड़ी बड़ी आंख नचाते , मुस्करा के वो शोख अदा से बोली।
मालुम सब था उसको .
" रंजी ...वो आने वाली था ना ... उस का मेसेज था "
" त चिड़िया खुदे चारा खाय ...आय गयी बहुत चीटा काट रहे हैं ससुरी की बुर में , जब्बर छिनार है ."
शीला भाभी अपने रूप में आ गयीं।
" अरे भाभी , का अकेले उस को बोल रही हैं,... इन के मायके वाली सब वैसे ही हैं फिर चींटा काट रहे हैं तो काटने दो ना ..ज्यादा पनीयाई रहेगी तो तुम को आसानी होगी ना ...और वैसे भी तुम्हारी भाभी और मंजू है न वहां खूब खातिरदारी हो रही होगी उस की।" गुड्डी भी ना ...
तब तक मैंने सिक्योर फ़ोन खोल लिया था डी बी का मेसेज देखने के लिए
" टाक टू मी व्हेन अलोन "
और इन सब के ख़ास तौर से शीला भाभी के सामने तो बात नहीं हो सकती।
इस फोन का मतलब गुड्डी भी समझती थी।
मुझे चलना होगा ...मैंने बुदबुदाया
और गुड्डी ने आँखों से हामी भर दी। और वो शीला भाभी से बोली ,
" जाने देते हैं भाभी ...रहेंगे हम लोगो के साथ और मन वहां लगा रहेगा ."
मैं थोड़ी दूर ही निकला थी की गुड्डी ने जोर की हांक लगा कर मुझे रोक लिया और मेरे पास आके मुझे एक , एक हजार की नोट पकड़ा दी और बोली ...
" रास्ते में एक दूकान दिखी थी ना .."
मैं समझ गया वो किस दूकान की बात कर रही थी .
" जैसे बनारस में किया था तुमने ...हाँ यहाँ लोग तिगुने चौगुने होंगे ." धीमे से मुस्करा के वो बोली .
वो वाइन की शाप थी ...बनारस में मैंने गुड्डी के साथ ही बियर की बाटल्स ली थीं और बाकी चंदा भाभी के पास जो हार्ड ड्रिंक्स थी वो मैंने कोल्ड ड्रिंक में मिला के ...सब को टुन्न कर दिया था। और फिर जबर्दस्त होली हुयी थी ..
यही प्लान उसका कल होली वाले दिन के लिए यहाँ भी था ..
मैंने वाइन शाप पे जा के ६ कैन बीयर, एक लीटर वाली दो बोतल ओल्ड मांक रम , एक बोतल डार्क रम , दो दो बड़ी बाटल्स जिन और वोदका की ...आर्डर कर दी। कोला के साथ रम और , लिम्का स्प्राईट और सेवेन अप के साथ वोदका और जिन ...जल्दी कोई पहचान नहीं सकता ...
एक कोने में उस दूकान में एक केबिन बना था।
मैंने सेल्समैन से पूछा ...वो क्या है . वो आँख मार के बोला ...प्राइवेट केबिन किसी को कभी ...
उसके ज्यादा बोलने के पहले सौ रुपये मैंने उसे पकडाए ...और बोला की तूम पैक करो तब तक मैं उधर ...
डीबी का तब तक दूसरा मेसेज आ गया था ...
काल मी ..नाउ।
केबिन में जा के अन्दर से बंद कर के ...मैंने डीबी को काल किया ...
और डीबी ने जो बोला ...मेरा चेहरा सफेद हो गया। बस फोन गिरा नहीं मेरे हाथ से
Z IS DEAD.
He has been killed half an hour back.
जेड ...बनारस की तो सारी कहानी उसके चारो ओर घूम रही थी।
सारी बातें पिक्चर की रील की तरह घूम गयी। कैसे सबसे पहले रीत को शक हुआ और काशी चाट भण्डार में , टमाटर चाट खाते हुये , कैसे डीबी के सामने ...
रीत ने एक बड़े टेरर प्लाट का शक जाहिर किया और फिर सेटलाईट फोन को ट्रेस करके ...कार्लोस और रीत ने उस नाव का पता लगाया जिसमें जेड एक दालमंडी की गानेवाली ( जो बनारस की पुरानी देह बाजार है जैसे हमारे शहर में कालीन गंज) सोनल के साथ जाता था .
सोनल सिर्फ एक बहाना थी ..वो उस नाव से सिर्फ सेट फोन पे अपने आकाओं से सम्पर्क कायम करता था , रेकी करता था और फोटुए सीमापार भेजता था। रीत ने ही फिर कार्लोस के साथ एक हाई क्लास काल गर्ल बन कर नाव वाले से मिल कर उस के फोन ,सिम सब ढूंढे ...
और आपरेशन “ओल्ड बूब्स ओन फायर “का पता लगाया ..उसने सोनल को भी दालमंडी में ढूंढ़ निकाला . जिसने जेड की तस्वीर पुलिस आर्टिस्ट से बनावाई ...
और फिर जेड का पता चला .
.वो एक महत्वपूर्ण धुरी था ...काशी साड़ी भण्डार का करता धरता . जो आर डी एक्स बनारस से मुम्बई और बडोदा भेजा गया था वो काशी साडी भण्डार के पैकेट में ही गया था।
आज सुबह जो बाम्ब और आर्म्स का जखीरा पकड़ा गया था वो भी उसी के वेयर हाउस में था और फिर रीत के बिना वो भी टेढा काम था. जिन डिटोनेटर्स को पकड़ने के लिए हिन्दुस्तान की सारी डिटेक्टिव अजेंसिज परेशान थीं ...वो भी जेड ने ही डिलीवर किया था।
" कैसे ...कब ..." बस मैं यही बोल पाया।
" अभी शाम को ...आधे घंटे पहले . गोदौलिया के पास ...उसका घर हम लोगों ने घेर रखा था।
हमारे आदमी थे , आई बी के थे ..हम ने ये चेक कर लिया था की उसने काठमांडू जाने वाली दो फ्लाइट्स में बुकिंग करा रखी थी एक सवा छ की थी, एक साढ़े सात की ...एक में उसने अपने नाम से बुकिंग करा रखी थी और एक में फर्जी नाम से ..."
मैंने सोचा बनारस में बाम्ब ब्लास्ट का समय होलिका जलने का था ...यानी ८ .२ ० का ...उस समय तक वो हिन्दुस्तान की सीमा के बाहर होता ..एकदम मुम्बई ब्लास्ट की तरह और नेपाल जाने के लिए कोयी पासपोर्ट भी नहीं चाहिए ..
डीबी ने कुछ रुक कर बात आगे बढाई ...
" तो वो अपने घर से कार से निकला .आगे पीछे ...हमारी अन मार्क्ड कारें थी ...लेकिन गौदौलिया के कुछ दूर पहले ..बहुत जाम था ...और वो उसमे फँस गया। थोड़ी देर बाद वो निकल कर भीड़ में पैदल चलने लगा ...प्लेन क्लोथ्स वाले उसके चारों ओर थे .."
" वो शायद रिक्शा पकड़ कर लहुराबीर तक पहुँच जाता " मैंने दिमाग लड़ाया ...लेकिन शायद डीबी को पसंद नहीं आया .."
"हाँ वही बात रही होगी लेकिन तुम बीच में मत बोलो " वो बोले और फिर चालू हो गए ..
" वो बहोत देर तक पैदल चलता रहा ...और जहां से घाट के लिए पतली सी गली मुड़ती है ...वहीं , शाम के समय तुम्हे तो मालुम है की वहां कितनी भीड़ होती है ...उसे चाक़ू लगा गले के पास ठीक में आर्टरी पे ..और वो वहीँ ढेर हो गया।
गनीमत है फेलु दा वहीँ थे ...उन्होंने उसे गिरने से रोक लिया और आस पास के लोगों से कहा की इसे मिर्गी का तेज दौरा पड़ा उस चाक़ू के ऊपर रुमाल रखा और उसे हमारे लोगों को सौंप दिया. वो तब तक मर चुका था ."
डीबी एक मिनट ले लिए रुके और मुझे बोलने का मौका मिल गया।
" मारा किसने किसी ने देखा क्या ...आसपास तो इत्ते पुलिस के लोग रहे होंगे सादी वर्दी में ..."
" वही तो किसी ने नहीं देखा ...यहाँ तक की चाक़ू लगते भी किसी ने नहीं देखा ...और उसके बाद भी सिर्फ फेलु दा ने ही नोटिस किया ...खून भी बस दो चार बूँद ही गिरा होगा। चाक़ू भी कुछ अलग किस्म का था ..सूजे ऐसा ...लम्बा बहूत पतला और प्वाइण्टेड ...फेलू दा के हिसाब से वो कालिया था।
उन्होंने पीछा किया था उसका ...गली में तेजी से मुड़ते उन्होंने उसे देखा लेकिन जब तक वो उस तक पहुँच पाते ...उन्होंने देखा की वो एक मोटर बोट में बैठ के जा रहा था। "
" कुछ पता चला ..." मुझसे नहीं रहा गया।
" नहीं आधे घंटे बाद वो बोट तुलसी घाट पे मिली ...फोरेंसिक वाले छान रहे हैं उसे ..एक फिंगर प्रिंट तक नहीं मिला ...और उसी घाट से एक मोटर बाइक भी चोरी हो गयी है। फेलु दा का कहना है कोई फायदा नहीं अगर वो कालिया है ..
.वो किसी ट्रेन के जनरल डिब्बे में बैठ गया होगा और मुगलसराय से पटना और फिर नेपाल .. या .किसी ट्रेन से गोरखपुर फिर वहां से नेपाल ...उसकी शकल तो किसी ने देखी नहीं तो पकड़ेंगे किसको ...मैंने बाद में कई सीनियर से बात की कुछ कहते हैं की वो एक मिथ है ...
और कुछ मानते हैं की वर्ड का हाइयेस्ट पेड अस्सेन है ..७ -८ केसेज में इंटरपोल को उसकी तलाश है ...बस उसकी पहचान वही स्पेशल चाक़ू है ...और जब उसकी हैंडल हम लोगो ने चेक की ...जो इन्फो इंटरपोल से मिली थी हैंडल हाथी दांत की है और उसपर एक माइकोस्कोपिक' के' कार्व्ड है ...उसके किये चार असेसिनेशन में ऐसे ही चाक़ू मिले थे।“
डीबी एक पल के लिए रुके और मुझे बोलने का मौका मिल गया।
" लेकिन जेड को आज दिन में क्यों नहीं पकड़ लिया गया ...एक बार जब सुबह सारे बाम्ब , डिटोनेटर पकड़ लिए गए थे ...तो उसके बाद तो मैं सोच रहा था की उसे भी पकड लिया गया होगा ..मदनपुरा में भी तो आपने कर्फुय लगा ही रखा था ..."
अब उनकी बात काटने की बारी थी ...
"सोच तो मैं भी यही रहा था लेकिन सब कुछ हमारे तुम्हारे सोचने से ही नहीं होता ..भैया . और भी लोग हैं ...मैं तुमसे शेयर तो नहीं कर सकता था ..लेकिन अब वो नहीं रहा तो ...
तुमने और रीत ने जिसे पकड़ा था ...वो जहरीला सांप ही नहीं था ...हजार सर वाला महानाग था ...
स्लीपर होने के साथ ..उसके पासपोर्ट के डिटेल जब रा ने चेक किये तो पता चला की जब वो विदेश गया था तो वहां एक बड़े टेररिस्ट ग्रुप की मीटिंग थी ...और ऐसा तीन चार बार हुआ .
खैर आई बी की प्लानिंग ये थी की ये अगर नेपाल जाता है तो उसे ट्रेस कर हम नेपाल के टेरर हब के बारे में पता कर सकते हैं . तुम्हे तो मालूम है इस आपरेशन के लिए आर डी एक्स नेपाल से आया।"
मैंने सोचा मुझसे ज्यादा कौन जानता होगा ...और क्या प्लानिंग थी ...
नेपाल बार्डर पर एक ड्रग हाल की लीक हुयी ..और सारे कस्टम वाले पुलिस वाले वही लग गए थे ...और ड्रग्स पकड़ी भी गयीं एक बहूत बड़ा हाल था ..लेकिन ठीक .उसी समय एक खेत से ..आर डी एक्स ...बहुत बड़ा कन्साइन्मेण्ट ...और वहां से कचरे के ट्रक में रख कर ...जिससे कोई भी स्निफिंग उसे पकड़ ना पाए और वही बनारस , मुम्बई और बडौदा ..."
डी बी ने अपनी बात आगे बढाई ...
" पिछले तीन महीनो में नेपाल से फर्जी नोटों का भी बहोत बड़ा जखीरा भारत आया है ...समझौता एक्सप्रेस की चेकिंग के बाद अब उधर से आना बंद हो गया तो इधर से ...और ये पूरी इकोनामी को सैबोटेज कर रहा है।
रा और आई बी ने ये कनफर्म किया है की वो सेंटर नेपाल में पश्चिमी इलाके में कहीं है लेकिन सही पता नहीं चला पा रहा है. पिछले साल सत्रह करोड़ फेक करेंसी नोट्स सीज हुए थे। इस साल आल रेडी बाइस करोड़ से ऊपर सीज हो चुका है ...
नार्मली सीजर कुल पम्प किये रुपय्यों का १० % से ज्यादा नहीं होता तो ये मान सकते हो की करीब दो सौ करोड़ से ऊपर की फेक मनी इकोनामी में घुस गयी है ...ये इकोनामिक टेररिज्म , बम वाले टेरऱ से कम खतरनाक नहीं हैं।
इस पैसे का करीब सत्तर से अस्सी फीसदी नेपाल से ही होके आता है। एक अलग से एफ आइ सी एन ( फेक इन्डियन करेंसी नोट्स) विङ्ग बनाई गयी है और नेपाल सरकार से हम लोग हमेशा सपोर्ट के लिए बोलते हैं ...लेकिन वहां जो पोलिटिकल चेंजेस हुए हैं वो सरकार अब उतनी इन्डियन फ्रेंडली नहीं है .”
डी बी की बात सही थी।
पहले तो साइकिल से रिक्शा से , सुनौली बार्डर से जो चाहे वो ...कितने तो कुरियर थे और अब जबसे कंटेनर का धंधा चालू हुआ है , कस्टम वाले सारे कंटेनर तो खोल नहीं सकते ...और अगर उनमे से कुछ मिले हों ...कितने फेक नोट एक साथ आजायेंगे मैंने सोचा .
डी बी ने गाडी इतिहास की ओर मोड़ दी थी .
" कंधार की याद है फ्लाईट 8 1 4 की ..." उन्होंने पूछा ..
" कौन भूल सकता है , काठमांडू से ही हाइजैक वाले चढ़े थे ." मैंने बोला .
" लेकिन सिर्फ २-३ लोग ऐसे प्लेन नहीं हाइजेक कर सकते उनके पीछे पूरा सपोर्ट सिस्टम रहता है " वो बोले। फिर बात आगे बढाई ,
" हम लोगों की बात पे तो कोई यकीं करता नहीं है , ये सबूत दो वो सबूत दो ..लेकिन अमेरिकन एम्बसी ने आठ जुलाई 1 9 9 7 को एक केबल भेजा था जिसे खुद उस समय के राजदूत , फ्रांक विस्नर ने साइन किया था ...
साफ साफ लिखा था की उस हाइजेकिंग के पहले आई एस आई ने नेपाल में एक टेरर हब खोला था ...उससे कई आर्गनाइजेशन चलते थे . उसमे से एक आर्गनाइजेशन था जे के आई अफ ( जम्मू कश्मीर इस्लामिक फ्रंट). उस केबल में ये साफ साफ लिखा था की जे के आई एफ का जो किंग पिन था जावेद करवाह ...उसका काठमांडू में कारपेट का बड़ा बिजनेस था।
आक्युपाइएड कश्मीर में बिलाल बेग उनका एजेंट था जो मुजफराबाद में कैम्प चलाता था. हाइजैक के अलावा , उस केबल में ये भी जिक्र था की काठमांडू बेस्ड इस ग्रुप का इस्तेमाल लोकसभा चुनाव के पहले दिल्ली में बम्ब ब्लास्ट के लिए भी किया गया .
उस केबल के अनुसार आई एस आई के एक कर्नल फारूक ने ये काम बिलाल बेग और टाइगर मेमन को सौंपा था, जिन्होंने काठमांडू बेस्ड लतीफ और जावेद कार्वाह को इस काम के लिए निर्देशित किया. इस मामले में इस्तेमाल किया आर डी एक्स भी काठमांडू से ही आया था।
इसी तरह दौसा ( राजस्थान) के पास 2 2 मई को बस में किये गए बम ब्लास्ट में भी यही ग्रुप सक्रिय था। इतनी बात तो उस अमेरिकन केबल ने कबुली है , असलियत इससे कम से कम बीस गुना ज्यादा है। " डी बी बोले. *
लेकिन ये बात थोड़ी पहले की नहीं हो गयी। मैंने शंका जतायी
" हाँ ...और नहीं "
वो बोले ...फिर उन्होंने सिचुएशन साफ की .
थ्रेट परसेप्शन इस समय पहले से सात गुना ज्यादा है उस दिशा से खतरे का और ये सिर्फ हमारी नहीं कई विदेशी सिक्योरिटी एजेंसीज का निष्कर्ष है ...लेकिन ज्यादा बड़ा डर है भविष्य का ...अफगानिस्तान , ईराक में हालत सुधरने के बाद ये लग रहा की कही साउथ एशीया टार्गेट ना हो ..
.इसलिए जब तीन शहरों पर एक साथ हमले की खबर पता चली तो सेंटर ने इसे कुछ फारेन एजेंसीज से भी शेयर किया ...और क्योंकि सारा आर डी एक्स नेपाल से आया था और फेक करेंसी में भी अचानक इतनी बढ़त हो गयी .. तो नेपाल के उस टेरर हब को ट्रेस करना फर्स्ट टार्गेट हो गया ..
आई बी का भी मेन इंटरेस्ट वही था ...टेरर की जड़ तक पहुँचने का ...
बनारस उन्होंने मेरे भरोसे छोड़ा था ...हालांकि अपनी और से उन्होंने हेल्प भी की थी ...और बनारस सच पूछो तो मुझसे ज्यादा बनारस वालियों और बनारस वालों के भरोसे था ...रीत , रेहन , कार्लोस सिद्दीकी ...
खैर ...तो इसलिए ये डिसिजन लिया गया था की ...वि शुड गिव अ लॉन्ग रोप टू जेड ...और उसको फालो कर के नेपाल के अन्दर पहुंचे ..अब वो कहानी ही ख़तम हो गयी .
उन्होंने सांस ली .
मैंने भी सांस ली ...ये पहलू मेरे दिमाग में आया ही नहीं था .
तब तक फोन पर फोन की घंटी की आवाज आई ...मैं होल्ड किये हुए था ...लैंड लाइन पे कोई डी बी के लिए फोन था ...
उनकी आवाज सुनाई पड रही थी।
" हाँ ..ओ के ...नो ...माय ..डैम बैड ..." और
उन्होंने वो फोन रखा की दो तीन फोन एक साथ ..बजे और वो बारी बारी से सबसे बात कर आरहे थे ...
" आर यू श्योर ..एल आई यु ...इन्फारमर से पता ..सेम थिंग ...चलो ..अब तो खैर ..."
फिर वो वापस मेरे फोन पर आये ....
" मार्चुरी से रिपोर्ट थी ...जेड के ठीक सामने के दो दांत नकली और खोखले थे और उनमें सायनाइड था।
इसका मतलब उसको ज़िंदा पकड़ना लगभग असंभव था। जीभ के एक पुश से वो सायनाइड रिलीज कर सकता था ..और सेकेंडो में उसकी डेथ हो जाती।
अगर हमारी कस्टडी में उसकी डेथ होती ....तो अभी जो एल आई यु ( लोकल इंटेलिजेंस यूनिट ) की रिपोर्ट है ....उसके हिसाब से बवाल होने की पूरी तैयारी थी . कई इलाकों के खबरी ने भी यही इन्फो दिया है ...यानी सांप छछुंदर वाली हालत ..."
फिर उन्होंने बोला
" असल में तुमसे कुछ जरुरी बात करनी थी , तुम्हारे बारे में थी इन सब चीजों के बारे में नही ....लेकिन मैं एकदम भूल गया ...दो प्लेट समोसे ले आओ गरम हाँ उसी दूकान से ...( मुझसे नहीं , अपने चपरासी से बोला होगा )...हाँ तो ...
मैंने बात काट कर पूछा ...कोई और बैठा है क्या आपके पास ...( मैंने जासूसी बुद्धि लगाई).
" क्यों ..." वो बोले।
" वो दो प्लेट समोसे " मैंने अपने निष्कर्ष का आधार बताया।
" तो क्या मैं अकेले दो प्लेट समोसे नहीं खा सकता ...वाह ...अच्छा अब तुम दस पन्द्र्ह मिनट बाद फोन करना तब तक मुझे याद आजायेगा की तुम्हारी क्या बात थी ..."
और ये कह के उन्होंने फोन रख दिया .
दस मिनट में तो घर पहुंचना मुश्किल था ...इसलिए मैंने सोचा यहीं वेट करते हैं।
सेल्समैन बियर, रम , वोदका और जिन की बोतलें दे गया था।
फिर मैंने सोचा की तब तक कालिया के बारे में कुछ पता लगाया जाय. सबसे पहले मैंने फेलू दा से बात की ...वो वहां थे जब जेड का मर्डर हुआ और ये महज संयोग नहीं था , उन्हें कुछ जरुर आशंका रही होगी।
और पुलिस को भी उन्होंने ही कालिया का नाम बताया .
उनसे बात करके फिर मैंने कार्लोस से पता किया ...इंटरनेशल टेरर के बारे उनकी जानकारी सबसे ज्यादा थी
..अपने हैकर मित्रों को भी मैंने इस नई घटना की जानकारी दी ...और उन्होंने भी बोला की वो चेक कर के बतायेंगे।
पता ये चला की किसी को कुछ ज्यादा पता नहीं है लेकिन जो भी था डराने वाला था .
और मैंने कालिया के बारे में सोचना शुरू किया।
मर्डर इनकार्पोरेटेड , यही तो नाम था उस साईट का।
साईट पे जा के भी मैंने सर्च किया ..एक बड़ा सा चाकू बना था ...खून टपकता ...और एक बंद दरवाजा था ...जिसपर लिखा था ओपन एट योर ओन रिस्क ...मैंने क्लिक किया तो एक अट्टहास हुआ ...
चर चर खुलता हुआ दरवाजा खुला और ढेर सारे चमगादड़ उड़े ...फिर पूरे स्क्रीन पे जैसे खून की बारिश ...
फिर आया उसने मेरा कान्टेक्ट डिटेल मांगे ..मैंने साईट बंद कर दी ..तो बड़े जोर के अट्टहास की आवाज हुयी और मेरा आई पी नम्बर और शहर का नाम लिख कर आ गया.
कुछ लोगों का कहना है की जो लोग कालिया से किसी मर्डर के लिए कान्टेक्ट करना चाहते हैं इसी साईट का इस्तेमाल करते हैं ...
तो कुछ का कहना था की ये मात्र एक जोक है , एक प्रैंक ...और कुछ का कहना था दोनों ...वो उसे स्क्रीन की तरह इस्तेमाल करता है।
लेकिन एक बात जो साफ हुयी की ...वो है।
अब तक उसने यूरोप एशिया और दक्षिण अमेरिका में ७-८ मर्डर किये हैं , पिछले चार सालों में ...लेकिन वो गन्स का इस्तेमाल नहीं करता ना ही एक्सप्लोसिव्स का। अपने पहले मर्डर में उसने क्रास बो का इस्तेमाल किया था , रशियन माफिया के एक बड़े बॉस को स्विस आल्प्स पे मारा था ..
.उसके बाद कोलम्बियन ड्रग लार्ड को रियो में जब पहली बार उसने वो स्पेशल चाक़ू का इस्तेमाल किया।
तीसरी किलिंग अमेरिका के एक बड़े खरबपति , जिनके पास काफी डिफेंस कांट्रेक्ट थे ...ये अकेला मर्डर था जब वो विक्टिम के पास आया था और उसने कोई फ़ेंक कर मारने वाला अस्त्र इस्तेमाल नहीं किया। अस्त्र तो नहीं मिला लेकिन चोट से पता चला की उसने कटाना ( एक जापानी तलवार ) इस्तेमाल की थी . और यही अकेला मौका था जब कुछ लोगो ने उसका पीछा किया था।।
और उन पर भी उसने हिरा शुरिकें का इस्तेमाल किया था।
तभी से कुछ लोग उसे निन्जा मानने लगे थे।
लेकिन ये चीज पता थी की वो मंगोलायड नहीं है ..( सी सी टी वि कैमरों से ) और उसकी चाल ढाल साऊथ एशियन है ...इसलिए कुछ लोग उसे ब्लैक निन्जा भी कहते हैं .
आज तक किसी भी प्लेस से ना तो उसका फिंगर प्रिंट मिला ना डी एन ए ...
उसके पेमेंट का सिस्टम भी अलग है। ७० % पैसा वो कैश में लेता है जो केमैन आईलेंड ऐसे बैंक अकाउंट्स के जरिये प्रासेस होता है और आधे घंटे में अन ट्रेसेबल हो जाता है. बाकी पैसा वो स्टाक के रूप में लेता है ...जो उसी दिन ट्रेडिंग में चला जाता है।
दो तिहाई पैसा कम होने के पहले और बाकी बाद में ...
उसका इस्तेमाल माफिया, ड्रग लार्ड्स और यहाँ तक की कुछ कंट्रीज ने भी किया है।
उसकी फीस कितनी है इसके बारे में अलग अलग राय है ...लेकिन वह बहुत कुछ काम के उपर है ...
उसके फेंके गए हथियारों पर माइक्रोस्कोपिक 'के' कारव रहता है और वो ( जब सीसी टीवी में उसकी पिक्चर कैद हुयी थी ) काले कपडे पहने रहता है , साउथ एशियन होने के कारण किसी ने उसे ब्लैक निन्जा तो किसी ने कालिया नाम दे दिया है।
कार्लोस ने बोला था की ऐसी हालत में हमें आज हुए बड़े ट्रांजैक्शन ट्रैक करने चाहिये ..शायद फाइनेन्सियल इन्टेलिजेन्स यूनिट इसे ट्रैक कर भी रही है ...
मुझे लगा की इस पर और ज्यादा दिमाग खपाने का मतलब नहीं।
हमारी अब पहली प्रायारिटि ...मुम्बई और बडौदा में होने वाले हमले को रोकने की होनी चाहिए और दो घंटे बाद जो मीटिंग होने वाली है मुझे उसके बारे में सोचना चहिये।
मैं उठने ही वाला था की मुझे याद आया १ ० मिनट बाद डी बी को फोन करना था ...उन्हें मेरे बारे में कुछ बताना था ...क्या हो सकती है ये बात ...
तभी डी बी का खुद फोन आ गया
तभी डी बी का खुद फोन आ गया
मैंने उन्हें पहले बधाई दी ...अब तो बनारस की जंग आपने जीत ली , कुछ सुकून होगा.
वो लेकिन सीरियस हो के बोले ..." अभी कहाँ ...पहले ये बारात विदा हो ..आई बी ..नॅशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी और भी सब ...रा वाला भी एक आने वाला है , उस मीटिंग में शरीक होगा ...फिर आज के होलिका दहन के बाद कल होली भी शान्ति से गुजर जाय तब थोड़ी चैन की सांस मिलेगी ...बल्कि ..तब भी नहीं।"
" तब भी नहीं ...मतलब " मेरे समझ में कुछ नहीं आया.
" अरे यार रायता समेटने वाला काम ...जो तुम लोगों ने फैलाया है ...जेड की कहानी तो मैंने तुम्हे सुनाई ही था ना अभी चलो मर गया ...और उसको किसने मारा ये सब नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी वाले झेलेंगे ...लेकिन वो आउटर सर्किल का सर दर्द तो मेरा ही है ना ..." वो बोले .
मैं चुप रहा. अज्ञानता प्रदर्शित करना मुर्खता होती।
वही बोले ,
" तुमसे तो कई बार डिस्कस हुयी थी ये बात ...जेड एक स्लीपर था ...और वो इनर सर्किल आपरेट कर रहा था. यानी स्ट्रेटजी प्लानिंग , आपरेशन , कमुनिकेशन ये सब उसके जिम्मे था . तो जेड मर गया .
तुम्हारे और रीत के सौजन्य से वो सारे आपरेटिव गए, बाम्ब का जखीरा , डिटोनेटर मिल गया , और हमला बच गया।
लेकिन इसके अलावा एक बड़ा नेटवर्क है ...जो इन को सपोर्ट करता है , लाजिस्टिक सपोर्ट, पैसे का सपोर्ट , फुट सोल्जर जो की पूरी तरह डिस्पोजेबल होते हैं , वो मुहैया कराता है ...वो तो सारे लोकल होंगे ...जो यहाँ के गली मोहल्ले को जानते होंगे ...उनको समेटना तो मुझे ही पडेगा ना।
रीत पर जिन दो लोगों ने हमला किया और जिसका उसने तियां पान्चा कर दिया था ...अब सिद्दीकी उनसे गाना गवा रहा है और वो बहुत सुर में गा रहे हैं। वो लोग हायरारकी में बीच के थे इसलिए उन्हें काफी मालूम है. और उन्ही के बताने पर जिन लोगों ने रेहन पर ट्रक से हमला किया था वो भी पकडे गए हैं। बाई द वे , रेहन अब ठीक है।
मैं उससे मिलने गया था ..और शाम तक डिस्चार्ज भी हो जाएगा ...उसने मुझसे बोला था की मैं तुम्हे बता दूँ की अब वो हर तरह से ठीक है ..रात में अपने घर पहुँच जाएगा। हाँ मैं कया कह रहा था ..."
उन्हें मुझे ट्रैक पर लाना पडा ...
" आप आउटर सर्किल के बारे में बता रहे थे की ...क्यों लोगों को आपने पकड़ हैं .."
" हाँ वही ...वो फिर शुरू हुए ...वो जो तुम्हारा चाहने वाला था ...कथई सूट वाला ...जिसने तुम्हारा बनारस से आजमगढ़ तक पीछा किया ...फिर पिक्चर हाल में तुम्हारी जेब कटवा दी ...तुम्हारा मोबाइल गायब करवा दिया ..."
अब मेरे चौंकने के बारी थी ...हाँ क्या हुआ उसका मैंने पूछा .
" पकड़ा गया ...वो हँसते हुए बोले ...जानते हो वो गरीब नहीं था ...उसके पास १ १ कथई सूट थे ...खैर ...वो मारा गया तुम्हारे मोबाइल के चक्कर में ...उसी के जरिये हम लोगो ने उसको ट्रेस किया ... कडियल है थोड़ा लेकिन सिद्दीकी बुलावा लेगा उसको भी ..
उसके अलावा लोकल गुंडे बदमाश हैं जिसको उन लोगों ने हायर किया था ...उन को भी हम लोग समेट रहे हैं ...कर्फ्यू का एक फायदा ये भी था ...वो कहीं भाग नहीं पाए ...और उनके साथ वो रोग पुलिस वाले सबसे बड़े सरदर्द .."
अब मुझे समझ में आया ..क्या क्या झंझट है ...मैंने टुकड़ा लगाया ...
" आपने सही कहा ...आई बी वालों पर हमला करने वाले तो वही थे ...उन्ही के चक्कर में .."
मेरी बात काट कर बोले ..." यही बेवकूफी की उन्होंने ...बड़ी मुश्किल से सुबह गोरखपुर के बार्डर से वो पकडे गए ..और तब से उनके बाप दादा के सौ फोन ...किसी के बाड़ी गार्ड थे तो किसी के ...अब लेकिन आई बी के चक्कर में अब मैं साफ बोल देता हूँ की होम मिनिस्ट्री सेंटर इन्वोल्व है. लेकिन ये सब कुछ भी नही है ..."
ठंडी सांस ले के वो बोले।
मतलब इतना वो बता ले गए और ये कुछ भी नहीं है।
" अब और क्या बचा है ..." मैंने पुछा ...
वो हँसे , टिपिकल धुरंधर भाटवडेकर ...हंसी और बोले
' ये जासूसी किताब नहीं है की आखिरी में सब कुछ एकदम साफ ...और ये एक मकड़ जाल है ...और हम लोग किनारे पे टहल रहे हैं ....और ..आखिर कोई तो होगा जो इन सब को जोड़ता होगा ...और वो कहीं सीमापार नहीं है हमारे बीच में है ...
सिर्फ पैसे और पावर के लालच में वो खेल रहा है ...ये तो तुम लोगो ने ही बताया था की सेट फोन से सिर्फ जेड ही बात कर रहा था ...मैं एक सवाल पूछता हूँ तुम दिमाग लगाओ ..."
मेरे दिमाग में ताकत बची नहीं थी ...लेकिन उन्होंने पूछ लिया ...
"जेड के मारने के बारे में सोचो ...तीन सिचुएशन थीं ...एक उन लोगों का आपरेशन सफल हो जाता और जेड काठमांडू निकल जाता।
दूसरी हम लोग जेड को पकड़ लेते ...वो अपने सायनाइड वाले दांत से सुसाइड कर लेता और पुलिस कस्टडी में डेथ के नाम पे कुछ लोग दंगा भड़काते ...
और तीसरा उनका आपरेशन फेल होने के बाद भी हम जेड को जाने देते ...तो अगला ये समझता की हम जेड को ट्रैक कर रहे हैं और ...
जेड को मारने का फैसला ... मारने वाला भी बाहर से आया ...यानी वो तीनो सिचुएशन के लिए तैयार थे ...और कोई यही था ...कोई जरुरी नहीं बनारस में हो लेकिन वो यूपी या आसपास ही होगा ...जिसने ये फैसला लिया ...तो अब मुझे उसे पकड़ना है ...मकड़े को .."
वो बोले.
हम दोनों ने साथ साथ ठंडी सांस ली।
नौकरी आसान नहीं है ये ...मैंने खुद से बोला।
" खैर तुम ये सब चिंता मत करो ...मैं दो चार दिन में समेट लूँगा ...बस तुम अब बडोदा और मुम्बई वाली जो तुम्हारी बाते हैं ...उन को लाजिकली और फोर्सफुली रखना ..."
मैंने अपनी सोच शेयर की ...
" मुझे लगता है शायद रीत को बड़ोदा ...आज सुबह भी उसने ...उसका भी रोल ..."
मेरी बात काट कर वो जोर से हँसे ..
" उसका भी रोल ...मजाक करते हो ...वो नहीं होती तो हम लोग सात सौ होलिका छानते फिरते ...और बम फूटने का इंतजार करते ...बात तो तुम्हारी सही है ...गुजरात पुलिस और बड़ोदा के लोग भी तो होंगे वीडयो कान्फेंस में ...
लेकिन दो बाते हैं ...एक तो गुजरात के पुलिस वाले थोड़े तुर्रम खां , सोचते है सब वो कर लेंगे ...दूसरे रीत ..थकी थोड़ी चोट भी लगी थी उसको ...हम लोग कुछ ज्यादा हो शोषण करते हैं उसका ...ऑफ तुम भी ना ..."
लगता है उन्हें कुछ बात याद आगयी थी ...
" तुम भी ना सब भुलवा देते हो ...मैंने फोन तुम्हे दूसरे काम के लिए किया था .."
वो याद कर के बोले
मेरा मन धड़कने लगा कौन सी बात हो सकती है।
" तुम्हारी फील्ड ट्रेनिंग का प्रोग्राम आ गया है , २८ हफ्ते का ...मैंने तुमसे बिना पूछे , बनारस के लिए बोल दिया था , कोई प्राबलम तो नहीं है ...सत्रह मई से शुरू हो रही है। डिटेल तुम्हे मेल कर दिया है , तुम्हारे यहाँ के पुलिस आफिस में फैक्स भी कर दिया है , तुम्हारे घर पे भी डिलीवर कर देंगे वो .."
मैं सोच रहा था बोलूं ...ना बोलूं ...बोलूं ...फिर बोल दिया
" कुछ छुट्टी मिल सकती है ट्रेनिंग में ..."
" कब ..कही शादी वादी तो नहीं कर रहे हो ..." हंस के वो बोले ...
" हाँ ..वही ..." हिम्मत कर के मैंने बोल दिया।
" किससे वही जिसके हास्टेल में दिन में तीन चिट्ठी आती थी ..मिलवाया तो था तुमने ..वही ना जिसने तुम्हे होस्टेज वाली सिचुएशन में ऊपर भेजा था ..."
मैंने हाँ बोला ...
" लड़की अच्छी है ..एक तो उसे खाने का टेस्ट है ...उस दिन तुम समोसे खाते चले गए ...लेकिन उसने तारीफ भी की ...टेस्ट है उसमें ...कितने दिन की छुट्टी चाहिये अब एक महीने की मत मांग लेना ...कब से चाहिए .." वो बोले
मेरे दिमाग में शीला भाभी ने पंडित जी से जो लगन की तारीखें पूछीं थी , तुरंत कौंध गयी। २ ५ मई से १ ५ जून तक , उसके बाद अप्रेल में अगले साल ..तक सन्नाटा तो सबसे अच्छी तो २ ५ मई ही है ...और मैं भाभी को समझा दूंगा की ...जितना देर करेंगी ...उता बारिश का खतरा ..मैंने झट से बोल दिया ...
"सर ...बीस मई से ..."
( मैंने ये भी सोच लिया था की मुझे बनारस में ज्वाइन सतरह मई को करना है ...सुबह कर लूंगा ..१८ , १ ९ , वैसे भी शनिवार , रविवार है ...और छूट्टी तो सोमवार से ही शरू होगी ...तो भाभी जो हम लोगो के घर के रसम रिवाज की बात कर रही थीं तो वो भी निपट जाएगा ...वो जब कहेंगी मैं आ जाउंगा ...सात दिन पूरे मिलेंगे ).
वो लगता है दूसरे फोन पे किसी से बात कर रहे थे ...फिर बोले
" बीस मई ..ओ के कब तक ..."
" वो ...अट्ठारह जून तक सर ..." मैंने बहुत हिम्मत कर के बोल ही दिया।
उनका दूसरा फोन बज रहा था .
" ओके ...बीस मई से अट्ठारह जून ...और कुछ " उन्होंने पूछा।
" बस एक बात ..असल में मुझे घर पे बताना होगा ...फिर वो लड़की वालों से बात करेंगे और सब अरेंजमेंट ...तो अगर आप छुट्टी का सैंक्शन एस एम् एस कर देते तो ..." मैंने और हिम्मत कर ली।
" एक मिनट ज़रा रुको ..मुझे नोट कर लेने दो ...ओके अभी एस एम् एस कर दूंगा और तुम छुट्टी की अर्जी मेल कर देना मुझे।"
उन्होंने फोन रखा और मैंने तुरंत छुट्टी की अर्जी उन्हें मेल की।
दो मिनट में एस एम् एस आया , उनके आफिस से मेरी २८ हफ्ते की फील्ड ट्रेनिंग बनारस में है सत्रह मई से डिटेल प्रोग्राम मेल और फैक्स किया जा रहा है।
मैं फोन को घूर रहा था। और ठीक दो मिनट बाद दूसरा एस एम् एस ..योर इल हैज बीन सैङ्क्श्नड फ्राम ट्वेंटी में टू एट्टीन जून।
बड़ी देर तक मैं उसे देखता रहा ...मुझे विशवास नहीं हो रहा था ...
और मैंने तुरंत उसे गुड्डी को फारवर्ड किया। दोनों मेसेज ...
बीस जून से उसका कालेज खुल रहा था ...तो इसका मतलब ..की तबतक तो वो बनारस उसे लौट ही आना है ...और मेरी छुट्टी भी तभी ख़तम हो रही थी ..मतलब हम दोनों साथ साथ लौटेंगे ...और उस ने ये भी बोला था की पूरी ट्रेनिंग ...मैं बजाय रेस्ट हाउस में रहने के उसके घर पे ही रहूँ ...इसका मतलब की ...
बियर, रम वोदका और जिन की बाटल्स का बैग मेरे सामने था.
मैं सोच से बाहर आया ..और उसे उठाकर दूकान से बाहर निकला।
सडक पर पहुंचा ही था की ..गुड्डी का एस एम् एस आया ..बहोत खुश दोनों मेसेज उसे मिल गए थे ..उसने मेसेज में सिर्फ हाई फाइव किया था और जवाब में मैंने भी हाई फाइव किया .
मैंने घडी देखी। ऊप्स पूरे बीस मिनट लग गए थे यहाँ ...और रंजी को घर पहुंचे कम से कम आधे घन्टे हो गए होंगे, और मुझे अभी भी ५-७ मिनट तो लगने ही थे.
घर मैं पहुँचने वाला था की गुड्डी का दुसरा एस एम् एम् ..किस की साइन और साथ में ...
" हम लोगों को आने में अभी भी दस पंद्रह मिनट और लगेंगे ..शीला भाभी .की कुछ शापिंग बाकी है और हाँ ....आज तूने सच्च में मेरा दिल खुश कर दिया ..इस ख़ुशी में तेरी माल और तुम्हारे शहर की बेस्ट रंडी ऊप्स रंजी का अगवाडा ...पिछवाड़ा दोनों फ्री ...मेरी ओर से गारंटी ..."
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फागुन के दिन चार--87
गतांक से आगे ...........
दोनों मुस्करा रही थीं। भाभी ने गुड्डी के कंधे पे सहेलियों की तरह हाथ रखा हुआ था।
और मुझे देख के भाभी और जोर से मुस्कराने लगी ...और साथ में गुड्डी भी ..
भाभी ने गुड्डी की ओर देखा जैसे पूछ रही हों बता दें और गुड्डी ने आँखों ही आँखों में हामी भर दी।
भाभी ने मुझे देखा , कुछ पल रुकीं और बोला , तुम्हारे लिए खुशखबरी है ...
मैं इन्तजार कर रहा था उसनके बोलने का ..एक पल रुक के वो बोलीं ...
" मैंने , तुम्हारे लिए ...अपनी देवरानी सेलेक्ट कर ली है ..."
मैंने गुड्डी की ओर देखा उसकी आँखों में ख़ुशी छलक रही थी।
मैं एक पल के लिए रुका फिर कुछ हिम्मत कर कुछ सोच कर बोला ..
' जी ...लेकिन ...कौन ...नाम क्या है ..."
दोनों , भाभी और गुड्डी, एक साथ शेक्सपियर की तरह बोलीं ..
" नाम , नाम में क्या रखा है . क्या करोगे नाम जानकर?
और मैं चुप हो गया .
" देवरानी मेरी है की तुम्हारी, तुम क्या करोगे नाम जानकर ?"
भाभी , मुस्कराते हुए मेरी नाक पकड कर बोलीं।
गुड्डी किसी गुरु ज्ञानी की तरह , गंभीरता पूर्वक, सहमती में सर हिला रही थी।
भाभी ने नाक छोड़ दी , फिर बोलीं ,
" लेकिन अभी बहोत खुश होने की जरुरत नहीं है , मैंने चुन लिया है , लेकिन वो तो माने। उसकी भी शर्ते हैं ...अगर तुम मानोगे तभी बात पक्की हो सकती है।"
मैं फिर सकते में आ गया। ये क्या बात हुयी ...मैं कुछ बोलता इसके पहले भाभी ने गुड्डी से कहा ...
" सुना दो ना इसको शर्ते ...अब अगर ये मान गए तो बात बन जायेगी ...वरना सिर्फ मेरे चुनने से थोड़ी ही कुछ होता है ..."
गुड्डी ने एक पल सीधे मेरी आँखों में देखा ...जैसे पूछ रही हो ...बोलो है हिम्मत ..और फिर उस ने शर्त सूना दी .
" पहली शर्त है ..जोरू का गुलाम बनना होगा ...पूरा ."
भाभी ने संगत दी ...बोलो है मंजूर वर्ना रिश्ता कैंसल .
मैंने धीमे से कहा ..हाँ ...और वो दोनों एक साथ बोलीं ...हमने नहीं सूना ..
मैंने अबकी जोर से और पूरा कहा ...हाँ मंजूर है।
और वो दोनों खिलखिला पड़ीं ...लेकिन गुड्डी ने फिर एक्सप्लेन किया ...
और जोरू का मतलब सिर्फ जोरू का नहीं , ससुराल में सबका ..साली, सलहज सास ...सबकी हर बात बिना सोचे मानने होगी।
मैंने फिर हाँ बोल दिया ..
.
भाभी बोलीं , तलवें चटवायेंगी सब तुमसे ..गुड्डी अकेले में बोलती तो मैं उसे करारा जवाब देता लेकिन ..भाभी थीं।
मैंने मुस्करा के हाँ बोल दिया।
भाभी बड़ी जोर से मुस्करायीं और गुड्डी से बोली ...
( मैं देख रहा था की गुड्डी का हाथ तेजी से मोबाइल पे चल रहा था।)
" सुन वैसे तो कोई भी हाँ हाँ कर देगा ...एकाध टेस्ट तो लेके देख "
और गुड्डी ने जैसे पहले से सोच रखा था तुरन्त बोली ...उट्ठक बैठक ... कान पकड़ के 100 तक ...
और मैं तुरन्त चालु हो गया .. कान पकड़ के ..1, 2, 3, 6,
भाभी हंसते हुए गुड्डी से बोली ...तू भी इसका साथ दे रही है क्या ..इत्ता आसान टेस्ट ले रही है ...मैं होती तो सैन्डल पे नाक तो रगड़वाती ही ...
और उधर मैं चालू था 21, 22, 23, 24 ...लेकिन गुड्डी ने बोला चलो मान गए हम लोग की तुम बन सकते हो जोरू के गुलाम ...और भाभी ने जोड़ा ..चलो अब मैं बोल दूंगी उसको ...और अब उसने कर दी दया तो रिश्ता पक्का ...
गुड्डी ने भी हामी भरी और वो दोनों लोग किचेन की ओर मुड ली ...और अचानक जैसे उन्हें कुछ याद आया ...और मुड के बोली ..
" तुमसे दूबे भाभी ने कहा था ना रंजी को साथ ले जाने के लिए ...जब तुम जाओगे ...और तुम भूल गए
...तुमने बात किया रंजी और उसके घर वालों से ...वो कह रही थी कोई कोचिंग है वहां ..छूट्टी में कुछ सीख लेगी और ...फिर 10-12 दिन में मैं जाउंगी , कुछ जर्रोरी काम है ...तो वो आजायेगी मेरे साथ ...खैर मैंने उसके घर बात कर ली है ...और आज वो आयेगी ना तो तुम भी समझा देना .."
गुड्डी उनके साथ ही थी लेकिन उसने इशारा किया की 5-10 मिनट में वो कमरे में आ रही है ...मैं कमरे की ओर मुड गया ...
तब तक मेरे फोन पे एक मेसेज आया ...गुड्डी का ही था लम्बा
.... गुड्डी का मेसेज पढ़ते ही मैं समझ गया ...
मेरी और रंजी की ओ फेसबुक पे जो चैट हुयी थी उसने पढ़ ली ...मेरे पासवर्ड तो उसके पास था ही ..मेरे सारे पासवर्ड और कार्ड्स के पिन ..उसके बर्थ डेट पर ही थे ...
मेसेज में था ...
" रंजी ऊपर जैसे पहुचे ...उससे तुम वेब कैम पे चैट करो ...और उससे बोलो की तुम्हे वो 'अपने ' दिखाए ...और तुम भी ना सिर्फ उसे जंगबहादुर का दर्शन कराओ ...बल्कि हिला डुला कर दिखाओ ..शेक इट वेल बेबी ..आगे तुम खुद समझदार हो ..मैं भी पांच मिनट में पहुँच रही हूँ ..दरवाजा बंद मत करना।"
मेरी तो लग गयी।
कहीं रंजी बुरा मान जाय तो ...आज .वो अभी आनेवाली है .थोड़े ही देर में ...कहीं ..लेकिन दूसरी ओर दिमाग में आता ...गुड्डी ने अभी भाभी के सामने उट्ठक बैठक लगवाई है ...उसका बुरा मानना तो और खतरनाक है।
कमरे में घुसते ही मैंने फेस बुक आन किया ...रंजी आन लाइन थी।
गुड्डी की बात मुझे तुरंत याद आई।
'हाय " मैंने उसे मेसेज दिया 'क्या कर रही हो '
गुड्डी की बात मुझे तुरंत याद आई।
'हाय " मैंने उसे मेसेज दिया 'क्या कर रही हो '
" कपड़ा बदल रही थी , ऊपर अपने कमरे में हूँ , तैयार हो रही हूँ तुम्हारे पास आने के लिए ..."
उसका मेसेज तुरंत आया।
" कपड़ा चेंज कर रही हो ...तो आ जाऊं तेरे पास ..."
पहले लोट पोट वाली स्माइली ...फिर मेसेज ..मैंने तो कल भी आफर दिया था तुम्ही शर्मा गए ...लेकिन अब लेट हो गये कपडे मैंने चेंज कर लिए हैं ..." रंजी का मेसेज आया।
" हे कैसी लग रही हो जरा दिखाओ तो ..." मैंने इसरार किया।
" अच्छा आइडिया दिया तूने बस एक सेकेण्ड ...और एक मिनट में उसकी तीन नयी फोटुयें फेस बुक पे ...
आग लग रही थी ...वो टाप एक साइड से शोल्डर लेस था , उसके गोल गोर कंधे साफ दिख रहे थे ..लेकिन असली चीज तो दूसरी गोलाइयां थी ..ये टाप साल भर पहले भी उसे बहूत टाईट होता था ...और अब तो उसके उभार और गदरा गए थे ...शेप साइज क्लीवेज सब एकदम साफ दिख रहा था।
और स्कर्ट जो मैंने उसे कल गिफ्ट की थी ...वो वैसे ही
मिनी क्या माइक्रो स्कर्ट थी ..घुटनों से कम से का डेढ़ बित्ते ऊपर और कूल्हों पे टंगी ...और जो उसे सबसे ज्यादा हाट बनाती थी वो थी साइड स्प्लिट ...
पहली फोटो ..पे उसे के टाप की पिक्चर बल्कि सच कहूँ तो छलकते उभारों की फोटो थी। नीचे उसने जो कैप्शन दिया था ...बोलो मैं कैसी लगती हूँ ...
दूसरे में उसकी स्कर्ट थी ...मेरी नयी स्कर्ट कैप्शन था और तीसरी में उसकी पूरी फोटो ...
तब तक चैट पे उसका मेसेज आया ..बोलो कैसी लगती है मेरी नयी प्रोफाइल फोटो ...
मैंने तुरंत लाइक किया था तब भी 11 वां था।
मेरे तारीफ करने से पहले वो बोली ...क्रेडिट तुम्हारी है ..इस टैब से जबर्दस्त फोटो आती है ...और मैंने मौक़ा पकड लिया।
इस का वेब कैम भी बहोत अच्छा है कभी किसी के साथ कैम चैट की है इस टैब से ...मैंने पूछा ..
वो हिचकिचाई और बोली अभी नहीं।
" तो करो ना " मैंने उसे चढ़ाया ...मैंने वेब कैम पहले ही आन कर दिया था।
मेरे डेस्क टाप पे जो वेब कैम था उससे पिक्चर एकदम साफ आती थी और वो ज़ूम भी कर सकता था और 360 डिग्री भी
एक पल रुक के उसने फेस बुक पे मेसेज दिया ओके ...मैंने फेसबुक बंद कर दिया ...
और मेरे डेस्क टाप पे रंजी अवतरित हुयी ...और मैंने उसकी फोटो फ्रिज कर ली।
हाट , सुपर हाट ...और ऊपर से उसकी सिडक्टिव स्माइल ...और आज उसने मेक अप भी पूरा किया रसीले होंठों पर स्पर्क्लिंग पिंक लिपस्टिक ...बस मानो कह रही हों ..
.आओ चूस लो मुझे ...और मैंने वही किया ..एक जबर्दस्त फ्लाईंग किस ...और वो मेरी सेक्सी टीन चुलबुली ...वो एक हाथ और आगे निकली ..
उसने झुक कर सीधे आलमोस्ट कैमरे पे किस कर लिया ...और मुझे लगा की मेरे गाल दहक़ गए हों ...
मैने जोर से सीने पे हाथ मारा ...और वो खिलखिला पड़ी ..
उसके झुकने से मुझे हाट किस के साथ एक और चीज मिली ...आइडिया ..
झुकते ही उसकी गोरी गोलाइयां अपनी झलक दिखा गयी थीं ...
बस मैंने उससे वही कहा ..रंजी तू ज़रा और पास आ ना हां थोड़ा झुक के बस जरा सा और ..
वो झुक गयी और अब पूरा क्लीवेज दिख रहा था ...और जोबन का उभार भी ...क्या मस्त उभार आये थे उसपर ..तभी पूरे शहर में आग लगा रही थी ...
मेरी निगाहें वहां चिपक गयी थीं ...
उसको मेरी हरकत का अंदाजा हो गया था ...वो अदा से मुस्करा के बोली ...कुछ देखना हो तो साफ साफ बोल दो ना ..
दिखा देगी तू ..मैंने भी हंस के कहा फिर पूछा ..कमरा अंदर से बंद है ना ..
अबकी वो जोर से हंसी ..
तो क्या बिना कमरा बंद किये कपड़ा बदलूंगी ...वैसे भी मेरे कमरे में ऊपर कोई नहीं आता ...कभी भी ...उसने ग्रीन सिग्नल दे दिया।
अन्दर ब्रा कौन सी पहनी है ..मैंने हिम्मत कर पूछा ...
तुम भी ना ये कोई बात हुयी ...फिर रुक कर बोली ...तुम खुद सोच लो ..शोल्डर लेस टाप पे स्ट्रैप वाली ब्रा थोड़े ही पहनूंगी ...वही कल जो तुमने खरीदवाई थी ...बिना स्ट्रैप वाली ...वो रुकते रुकते बोली ..विक्टोरिया सीक्रेट वाली ...
मैंने हिम्मत कर के हिमाकत की ...जरा सा दिखाओ ना ...
तुम भी ना वो .बोली ...जब मैंने कुछ जवाब नहीं दिया तो उसे लगा की कही मैं बुरा तो नहीं मान गया ...
वो मुस्करा के बोली ...लेकिन मैं टाप नहीं उतारूंगी ...
इतनी जगह घुसने के लिए काफी थी ...मैंने तुरन्त बोला ...
कोई बात नहीं टाप ऊपर पुश कर लो मुझे बस देखना है की फिटिंग कैसी है।
तुम भी ना उसने मुंह बनाया फिर बोली ...आंख बंद कर लो ...
हे आंख बंद कर लूंगा तो देखूंगा कैसे ...मैंने समझाया ...
उसने टाप ऊपर सरकाया , बस थोड़ा सा
उसके उभारों की झलक मिल रही थी बेस से एक दो इञ्च ऊपर तक ..
रहने दो तुमसे नहीं होगा ...कमरा भी बंद है ..सिर्फ हम तुम वेब कैम पे और इत्ता जरा सा ...तुमसे नहीं होगा ...तुम अभी बच्ची हो ...मैंने बुरा सा मुंह बनाया ...टाप वापस ठीक कर लो ..
अब वो चढ़ गयी ...
करती हूँ ना ...तुम भी इत्ती जल्दी ..और अबकी उसने टाप आलमोस्ट ऊपर कर लिया ..
मैंने सपोर्ट किया ...ये हुयी ना न स्वीट टीन वाली ..बस ज़रा सा और ऊपर ...
और उसने ऊपर कर लिया ...
ब्रा क्या थी 4 अंगुल की पट्टी ..वो भी सफेद लेसी ...और फ्रंट ओपन , डेमी कप ...क्लीवेज उभारती ...छिपा कुछ भी नहीं रही थी ..लेकिन असली बात थी वो जबर्दस्त पुश अप थी ,
रंजी की कप साइज वैसे भी 'सी' थी ..
अपने स्कूल में तभी उसे होली पर बिग बी की टाइटिल मिली थी और ये ब्रा उस को एक डेढ़ कप साइज और बढ़ा दे रही थी। ब्रा निपल के ठीक नीचे ख़तम हो जा रही थी , निप्स को और उभारती ...
जिससे वो टाप में न सिर्फ लगातार रगड़ खाते बल्कि खुलकर झलकते .....
उभार एक दम साफ दिख रहा था ..छलकता ...
स्नैप स्नैप ...मैंने चार फोटुए खींच ली ...
खुश ...वो मुस्करा के बोली।
जवाब में मैंने एक फ्लाईंग किस दिया सीधे जोबन के बीच और उसने कैच कर के ब्रा थोडा सा उठा के उसके अन्दर रख दिया।
तुमने हालत ख़राब कर दी मेरी और उसकी भी ...बन कर मैं बोला,
ब्रा अभी भी टाप से बाहर थी मैंने वेब कैम को सीधे उभारों पे ज़ूम किया ...
और अब उसे रसीले रसभरी से रंजी के निप्स एकदम साफ साफ दिख रहे थे, कभी मन कर रहा था चूस लूं कचाक से ...तो कभी मन कर रहा था की बस पिंच कर लूँ ...
उस सुनयना को मेरी हालत अच्छी तरह मालुम थी फिर भी मुस्करा के बोली ...
क्या हुआ किसकी हालत ख़राब है ..
इसलिए तो कहा है ना ..की वो क़त्ल भी करते हैं तो चर्चा नहीं होती ...किसी की जान जाय तेरी अदा ठहरी ..
वो मुस्करा रही थी ..और टाप उसने अभी भी नीचे नहीं सरकाई थी,
दिखाऊं मैंने पूछा की किसकी हालत खराब है ...मुस्कराकर उसने बिना बोले हामी भर दी।
और मैंने वेब कैम का फोकस नीचे कर दिया ...
जंगबहादुर की हालत वास्तव में खराब थी।
पूरा 8 इंच तना हुआ , शार्ट फाड़ता , और शार्ट थोडा नीचे सरक गया था ...लिंग का बेस साफ साफ दिख रहा था .
अब रंजी की हालत खराब हो गयी थी ...उसकी आँखे एकदम वहीँ चिपकी थीं ...दो पल मैं भी चुप रहा फिर मैंने उसे दिखाते हुए हुए शार्ट के ऊपर से उसे पुचकारना मसलना शुरू कर दिया,
रंजी के निपल जिस तरह पत्थर हो रहे थे वो उसकी मादक उत्तेजना के गवाह थे
.मैंने ही चुप्पी ही तोड़ी ..
अभी तो वो पिंजरे में बंद है सिर्फ झाँक रहे हैं तब ये हालत है ...अगर कही दिख गए तो ...मैंने हंस के बोला।
तो क्या होगा ...आँख नचा के वो शोख बोली।
अपने खड़े लिंग को थपथपाते रगड़ते मैं बोला ...ये शार्ट फाड़ के बाहर आ जाएगा।
तब तक गुड्डी दबे पाँव आ गयी और मेरे पीछे आ गयी ...वो वेब कैम से बाहर थी।मैंने डेस्क टाप एडजस्ट किया ..अब वो रंजी को अच्छी तरह देख सकती थी , उसने मुस्करा के मुझे थम्स अप का साइन दिखाया और इशारे से बताया की मैं रंजी की ब्रा उतरवा दूँ
मैंने आँख के इशारे से गुड्डी को हामी भरी और रंजी से बोला ..
" है हिम्मत ...रहने दो .."
वो कुछ बुदबुदाई ...फिर हिम्मत कर के मेरी ओर देख कर बोली ..तुम भी ना ..उस के हाथ फ्रंट ओपन ब्रा के हुक पर था ...
एक साथ मैं बोला ...तुम बस एक पल के लिए दिखा के बंद कर लेना ...और मैंने अपने दोनों हाथ शार्ट में फंसा दिए .
एक साथ ...
पिंजड़ा खुला और दो दूधिये कबूतर फडफडाते, मचलते निकले ...
और डलिया खुली ...और कडियल नाग , फुफकारता, फन काढ़े बाहर निकला।
रंजी की बड़ी बड़ी लजीली शर्मीली पलकें बंद हो गयीं थी ...फिर कुछ रुक कर बहोत धीरे धीरे हौले हौले उसने पलकों को ऊपर उठाया ...
और अपनी नीम निगाहों से जब मेरे खुले पगलाए बौराए जंगबहादुर को देखा तो ...वो बौरा गयी।
और बौरा मैं भी गया उसके उन्नत कड़े पत्थर से सख्त , किशोर उरोजो को देख के ...बस मन कर रहा था उन्हें मसल दूँ दबा दूं चूस लू ...जैसे दो उलटे कप रखे हों ...बस उस तरह के ...टिट फक के लिए आइडियल ...
गुड्डी बार बार इशारा कर रही थी ..मैं उसकी टाप लेस एक दो स्नैप खीँच लूं ..एक दो पल मैं झिझका ..लेकिन फिर स्नैप स्नैप
मुझे याद आया की गुड्डी ने बोला था की मैं सिर्फ उसे दर्शन ना कराउं बल्कि ...हाथ से आगे पीछे कर के 61-62 कर के उसे इन ऐक्शन दिखाऊं ..
.हाथ से लिंग उठा के मैंने उसे दिखाया ...फिर धीरे धीरे चमडा खोल के मेरा सुपाडा बाहर ..
मोटा पहाड़ी आलू ऐसा बड़ा लाल ...और मैंने वेब कैम को उसी पर ज़ूम किया ...
रन्जी की आँखे मस्ती से पगला उठीं ...
मैंने अपनी उंगली से उसे रगडा और मुस्काराते हुए रंजी से बोला ..
तुमने ये हालत की है बिचारे की ..
वो शरमा के मुस्करा के बोली ..धत्त
गुड्डी पीछे से इशारा कर रही थी की मैं रंजी को दिखा के मुट्ठ मारू,...
मैंने रंजी से बात आगे बढाई ..देखो तुम्ही ने इसकी ये बुरी हालत की है बहोत भूखा है बिचारा ...
और सुपाडे को आलमोस्ट वेब कैम के लेंस से सटा दिया ..रंजी की स्क्रीन पे लगा जैसे वो उसके होंठो के एकदम पास आ गया है ...
हे एक किस्सी दे दो ना इसको छोटी सी ही सही मैंने फिर गुहार लगाई
धत्त ...वो बोली लेकिन एक नदीदी लड़की की तरह उसे देख रही थी ...उसकी आँखे मेरे तन्नाये लंड से चिपकी थीं ...
मैंने फिर बोला ...
प्लीज ..एक बस एक ..दे दो ना
और उसने एक किस लिया ..उसके गुलाबी होंठ आलमोस्ट उसके वैब कैम से चिपके थे ..होंठ उसने ऐसे खोले थे ...मानो गप्प से सुपाड़ा गड़प लेगी।
अब मैंने पूरी मुट्ठी में उसे पकड़ा लेकिन अभी भी आधा बाहर निकला था ...रंजी की ओर देखता ...
और रंजी भी बस मन्त्र मुग्ध से उसे देख रही थी।
लेकिन मेरी निगाहें बार बार रंजी के ब्रा से आजाद जोबन की और लौट रही थीं ...
गुड्डी बार बार पीछे से इशारा कर रही थी ..मैं उसके उन्मुक्त उभारों के और स्नैप्स ले लूँ ...
मेरी हिम्मत नहीं थी ...की गुड्डी की बात टालूँ ...स्नैप स्नैप ...फिर मैंने अपने सीने को एक बार छुआ और फिर सुपाडे को ..
मैं इशारा कर रहा था की जैसे मैं अपने सुपाडे को छू रहा हूँ , मसल रहा हूँ ...वो अपने निपल्स को छूए .
उसने जोर जोर से सर हिलाया ...ना ना में ..
अबकी मैंने बोल के अर्जी लगाई हे रंजी प्लीज बस एक बार ..
मैं विश्वास नहीं कर सकता था ...उसने ना सिर्फ अपना निपल छुआ , बल्कि तरजनी से फ्लिक भी कर दिया ...
और अब मेरी हालत खराब हो गयी बिना किसी के कहे ...मैंने तेजी से मुट्ठ मारना शुरू कर दिया ...२३, २४,२५,२६,...३१,३२ ,३३ ...बिना किसी के कहे
रंजी पहले तो मुस्कराई ...फिर खिलखिलाने लगी ..
" बहोत बेताब हो रहे हो।'
" तुमने कर दिया है ..देखो क्या हालत बना दी है ..." मैंने उदास मुंह बना के कहा।
" मैंने तुम्हे कभी मना तो नहीं किया ..." बहोत धीमे से वो बोली।
" एक बार हाँ तो बोल दो ना ..देखो पागल हो रहा है तेरे लिए " उसे दिखाते हुए तेजी से मुट्ठ मारते हुए मैं बोला।
" हाँ ...लेकिन किस चीज के लिए .." रंजी फिर खिलखिलाई।
मैंने रंजी के होंठो की ओर इशारा किया ...फिर जांघो के बीच ...
एक बार वो फिर शरमाई ..फिर धत्त बोला ...
कल से यही हालत है उसकी जब से तूने छूया है उसको ..दे दो ना ..एक बार ..बोल दो न हां ...मैंने अब हाथ हटा के पूरा लिंग उसे दिखाते कहा ...
वो शोख , नाजनीन ...मुस्करायी , खिलखिलाई ...फिर बोली ..
" चलो तुम्ही खुश ...हाँ हाँ हाँ ..,आ रही हूँ ना तेरे पास अभी ...अब इसको बोलो परेशान होना बंद करे "
वो बोली।
पीछे से गुड्डी ने इशारा किया ...मैं उसकी चुनमुनिया भी खुलवा दूँ ..मैंने इशारे से मना किया ...लेकिन गुड्डी और मान जाए ...वो पीछे पड़ी रही ...
और मैंने हिम्मत की ...
" अच्छा एक बार इसको इसकी सहेली को दिखा दो ना ...शायद इसके दिल को कुछ ठंडक पहुंचे .'
रंजी ने मना नहीं किया लेकिन हडका लिया ...
" तुम भी ना एक दम बदमाश हो गए दुष्ट ...कैसे कैसे बोलते हो ...पहले कैसे सीधे बच्चे थे ...लडकियों से भी ज्यादा शर्माते थे ...और अब ..एकदम बर्बाद ..."
मैं मुस्कराया और एक बार फिर हाथ से अपने शेर को पुचकारते , उसे दिखाते पूछा
" तुम्हे कौन ज्यादा पसंद है ...बदमाश वाला या सीधे बच्चे वाला ."
अबकी वो खुल कर हंसी और बिना एक पल सोचे बोली ...
" बदमाश वाला ...लेकिन तुम कुछ ज्यादा ही बदमाश हो ..लालची भी "
" तुम चीज है ऐसी हो मस्त मस्त ...प्लीज ज़रा सा इसकी सहेली का मुखड़ा दिखा दो ना ...मेरे लिए नहीं तो इसके लिए .."
वो कुछ सोच रही थी ...और मैंने मुट्ठ मारना फिर शुरू कर दिया ...फिर एक ट्रिक चली ..
" अच्छा ज़रा सा स्कर्ट उठा के कम से कम अपनी पैंटी ही दिखा दो ..."
उसने जोर जोर से सर हिलाया ...ना ना में ..
अबकी मैंने बोल के अर्जी लगाई हे रंजी प्लीज बस एक बार ..
और उसने हलके से अपनी रेशमी जाँघों पर से स्कर्ट इस तरह सरकाना शुरू किया की ...कोई स्ट्रिप टीज गर्ल भी मात खा जाय। और साथ ही सटी हुयी जांघो को हलके हलके फैलाना शुरू किया .
उसकी इसी अदा से तो पूरा शहर दीवाना था उसके पीछे ...और अब बनारस में भी आग लग गयी थी ...ये सुन के की वो आने वाली है ...
ज़रा सी पैंटी दिखी की ..उसने हाथ से ढँक लिया और जोर और से ना ना में सर हिलाया ...
मैंने बहुत इसरार किया प्लीज थोडा सा और ...पैंटी तो कम से कम ...बस एक मिनट के लिए ..
स्कर्ट और ऊपर सरकी ...मखमली जांघे थोड़ी और फैली ..
मेरे दिल की धड़कन बस बंद नहीं हुयी ...
एकदम चिकनी , मुलायम ...जैसे किसी बच्चे के गाल हों और पैंटी ...
पैंटी क्या थांग थी ..एकदम दो अंगुल की पिंक कलर की लेसी ...बस निचले होंठो को ढकी ..ढकी क्या ..
सहलाती दबोचे ...
अबकी बिना गुड्डी के कहे मैंने ५-६ स्नैप ले लिए ..
उसने एक उंगली थांग में फंसाई ...
मेरी धड़कन बढ़ गयी थी ...खोलेगी नहीं खोलेगी ..खोलेगी नहीं खोलेगी ...और
उसने थांग ज़रा सा सरका दिया
मेरी धड़कन , सांस सब रुक गयी ..
एकदम कसे भींचे हुए गुलाबी दोनों होंठ , मखन से भी चिकने ...
उसने तुरंत पर्दा गिरा दिया ..( लेकिन उसके पहले दो स्नैप खिंच गए )
और उठ गयी ..फिर ब्रा और टाप भी ठीक कर ली।
मैंने सीने पे जोर से हाथ मारा और फिल्मी ढंग से बोला ..
अब कैसे जिऊँगा ..
वो अबकी सीरियस गुस्से में बोली ..." ऐसे मत बोलना कभी "
मैंने अपने खड़े लिंग की ओर इशारा किया .." इसका क्या करूँ ..."
अबकी वो खुल के हंसी बोली ...
" क्यों चिंता करते हो आ रहीं हूँ ...अब तुम क्या करोगे ...जो करुँगी मैं करुँगी ...देख लुंगी तुमको और तुम्हारे उसको भी "
और फिर वही पुराना बहाना ...नीचे से आवाज दी गयी है जल्दी आओ
वो मुड़ी और मेरी हालत और खराब हो गयी ..
रंजी का पिछवाड़ा ..उफ ...
और जैसे ये काफी नहीं था ...जोर से उसने अपने मस्त किशोर गदराये भारी भारी नितम्ब मटका दिए ..जोर से ..और पीछे से अपनी स्कर्ट उठा दी ..पूरी कमर तक ...
थांग पीछे से और पतला था , एक पतली रस्सी ऐसा उसकी दरार में फंसा ...
गोरे गोरे बड़े बड़े चूतड साफ दिख रहे थे ..
और बिना मुड़े सिर्फ अपनी गर्दन मेरी ओर कर के उसने एक फ्लाइंग किस मेरी ओर उछाल दिया ...और एक उसकी ओर ..
मुझे कुछ याद आया और मैंने जोर से बोला ...हे निकलते समय एक मिस्ड काल मार देना ...
श्योर वो बोली और चली गयी ...
मैंने वेब कैम बंद कर दिया .
.................................
मैंने पीछे मुड़ कर देखा ...गुड्डी मेरे कपडे निकाल रही थी ...एक दो निकालती , कुछ सोचती फिर रख देती, फिर उसने मेरी एक टी शर्ट निकाली और जींस दोनों मेरी फेवरिट ...और बनयान भी ..और पलंग पर रख दिया ...
जब से वो आई थी मेरी वार्डरोब पे उसका कब्ज़ा हो चुका था ..कपडे तय करना उसका काम था ..एकाध बार मैंने बोलने की कोशिश की तो डांट पड़ गयी ...जोर से ...गुड्डी की ...
लेकिन अब मैं समझ गया था अगर मुझसे ज्यादा मेरी पसंद कोई जानता था तो वो ...गुड्डी थी .
बस मैं उसकी और देख रहा था ...और सोच रहा था ...की भाभी ने ये तो ऐलान कर दिया की उन्होंने देवरानी चुन ली ..काश ...काश ..वो मेरी पसंद हो ये ...बस ये लड़की ..
अब जिंदगी भर मेरे कपडे निकालने का काम इसके जिम्मे हो ..मैं एक बार सब देवी देवता मन रहा था ...मैंने शीला भाभी से भी सिफारिश लगवाई थी ..
गुड्डी ने एक बार मेरी ओर देखा और मीठा मीठा मुस्करा दी।
फिर वो मेरे पास आई मुझे देखा और ...मुस्करा के मेरी नाक पकड़ के बोली ..
" तुम ना बुध्दू हो पूरे पागल ..."
मेरा दिल तो उसी के पास था ...इसलिए वो झट से मेरे दिल की बात समझ जाती थी।
" हे कही चलना है जरा जल्दी से तैयार हो जाओ ...मैंने कपडे निकाल दिए हैं ..." वो बोली.
मैंने दरवाजे की ओर इशारा किया की वो निकले तो मैं कपडे चेंज करूँ .
वो दरवाजे के पास गयी और दरवाजा अंदर से बंद कर दिया और ठसके से बोली ...
“क्या तुम समझते हो तुम्हारे चेंज करने के लिए मैं बाहर जाउंगी ...”
और जैसे इतना काफी नहीं था ...उसने मेरी शार्ट खींच कर नीचे कर दी।
तब तक उसकी निगाह कम्प्यूटर स्क्रीन पर पड़ी ...मैंने रंजी के जो स्नैप खींचे थे उन्हें एक फोल्डर में सेव कर दिया था डेस्क टाप पे रंजी हाट के नाम से ..
वो मुस्कराई और मुझसे बोली ...तुम थोडा बहुत हैक कर लेते हो ...
मैंने सीना फुलाकर ये बात मान ली।
फेसबुक पे किसी का पासवर्ड ...उसने पूछा
" कैसी छोटी छोटी बाते करती हो ...किसका करना है मैंने ऐसे कहा जैसे ये बच्चों का काम हो ...
" रंजी का .."आँख नचा के वो बोली .
मैं असमंजस में पड गया ..रुकते रुकते पूछा क्यों ..
आँख तरेर कर वो बोली ...सवाल बहूत पूछते हो।
अब नो च्वायस वाली बात थी ...मैंने फेस बुक खोला ...कुछ किया और थोड़ी देर में रंजी का फेसबुक पेज खुल गया था।
वो अभी आन लाइन नहीं थी।
रंजी का पासवर्ड मैंने एक कागज़ पर लिख कर गुड्डी के हवाले कर दिया।
" देर नहीं हो रही है तुम्हे कपडे निकाल के रख दिए हैं ...पहन तो सकते है ...अभी शीला भाभी की आवाज आएगी " वो मुझे हडकाते हुए बोली .
मैं तु्रंत पलंग के पास गया और कपडे पहनने लगा ...लेकिन मेरी निगाह गुड्डी से ही चिपकी थी।
जब करने पे आ जाय तो वो चालाक भी कम नहीं थी आखिर बनारस की थी।
उसने पहले रंजी का पासवर्ड चेंज किया और उसका फेसबुक पेज फिर खोला ...जिससे रंजी अभी आन लाइन ना हो सके ...हालंकि उसके सारे फ्रेंडस बाकी दुनिया उसका पेज देख सकती थी। और उसके फेसबुक पेज पे कुछ करने लगी ...
गुड्डी के दस आँखे थी।
उसने मुझे देखते हुए देख लिया और हडकाया ...पीछे देखो ..जल्दी कपडे पहनो।
जब तक मैंने कपडे पहने वो मेरे पास आगई और मेरे बालों से खेलते बोली ..मेरे सोना मोना चल तेरे बाल झाड देती हूँ अच्छे बच्चे बन जाओ ...और वो भी काम उस ने कर दिया.
" हे तुम रंजी के पेज पे क्या कर रही थी .."
वो खिलखिलाने लगी और उसने रंजी का फेस बुक पेज खोल दिया ...बात करते हुए जो मैंने उसकी वेब कैम से फोटुए खींची थी ..उसमे से ४ उसने उसकी प्रोफाइल पे लगा दी थी ...
और सब में उसका फेस साफ था ..
सब में उसके उभार , क्लीवेज खुल के दिख रहे थे ..
एक में जब उसने टाप थोड़ा सा उठाया था ...और लेसी व्हाईट ब्रा दिख रही थी अन्दर से जोबन झाँक रहे थे ...गनीमत थी उसमें उसका फेस पूरा नहीं था ...
और सब के नीचे उसने टाइटिल भी जबर्दस्त लिख दी थी ...मेरे जुबना का देखो उभार ‘, ‘मेरी चोली छोटी हो गयी’, ‘होली का उपहार मेरे ये मस्त उभार ..."
आज देखना ये तेरी बहन कम माल एक झटके से पूरे शहर में फेमस हो जायेगी . वो हंसते हुए बोली
आलरेडी ५० से ज्यादा लोग उन पिक्चरों को लाइक कर चुके थे . गुड्डी ने उसके कान्टेक्ट में उसका मोबाइल नम्बर भी लिख दिया था।
तब तक शीला भाभी ने आवाज दी और गुड्डी मुझे खीचं कर बाहर लायी . शीला भाभी फ्रेश साडी वाडी पहन के तैयार खड़ी थीं ...और अब मैंने ध्यान से देखा तो ...
गुड्डी भी आज बहोत ही ट्रेडिशनल ड्रेस में , शलवार सूट में तैयार खड़ी थी , यहाँ तक की उसने चुन्नी भी डाल रखी थी .
लेकिन उससे ना उसका जोबन छुप रहा था और रूप ...बल्कि टाईट कुर्ती में और छलक रहा था ..चुन्नी भी उसने एकदम गले से चिपका रखी थी।
लेकिन उसकी कोहनी तक भरी भरी चूड़ियां, कंगन, आँखों में शोख काजल , और नितम्बो तक लहराती चोटी में लाल परांदा ...मेरी निगाहें उस से एकदम चिपकी थीं और मेरी चोरी शीला भाभी ने पकड ली ,
" हे मेरी बिन्नो को क्यों नजर लगा रहे हो , अभी डीठोना लगाती हू।"
मैं झेंप गया और उन्होंने बात बदल कर मुझसे बोला ,
" मंदिर चलना है पैसा वैसा लिया है की नहीं ."
मैंने गुड्डी की ओर देखा, मेरा पर्स , कार्ड
सब कुछ उसी के पास था .
गुड्डी ने मेरी ओर देखा और बोला
"तुम्हारा पर्स कहाँ है , मैं अपना तो सम्हाल के रखती हूँ और अपने झोले ऐसे लेडीज पर्स में से उसने पर्स निकाला , काल वैलेट फूला ..ढेर सारे कार्ड ..मेरा पर्स मुझी को दिखाती वो बोली ,
" ये देखो मैंने अपना पर्स कित्ता संभाल कर रखा है और एक तुम हो ..चलो १० रुपये ले लो चलो जल्दी "
और पर्स से निकाल के उसने मुझे पकड़ा दिया और चल पड़ा मैं उस सारंग नयनी के पीछे पीछे ...
मैं सोच रहा था ...
मेरा पर्स इसके पास ...
मेरे कपडे वार्डरोब इसके पास ..
मेरा दिल इसके पास ..
मैं सोचने लगा की ...और उसके बदले में तब तक वो शोख मुड़ी और मेरी ओर देख के मुस्कराने लगी ..
अगर ये सब दे कर भी ये नाजनीन मिल जाय ...हमेशा के लिए तो घाटे का सौदा नहीं मैंने सोचा ...
बस मेरे मन में हमेशा यही डर नाच रहा था की पता नहीं भाभी ने क्या फैसला किया गुड्डी लेकिन जिस तरह देख रही थी मेरी ओर ..मीठी निगाहों से ..
" अचानक मंदिर जाने का प्रोग्राम ..क्यों किस लिए लिए .." मैंने शीला भाभी से पुछा।
" क्यों ...हर चीज जानना जरुरी है क्या ..." गुड्डी ने घूर कर कहा।
लेकिन शीला भाभी बोल रही थीं , गुड्डी की ओर इशारा करके ,
" अरे इसकी मन की इच्छा पूरी हुयी, पुरानी मनौती ...इसलिए ."
मैं कुछ और पूछता की गुड्डी ने शीला भाभी को भी चुप करा दिया.
" भाभी ..आप भी ना ..'
तब तक हम लोग बाजार में पहुँच गए थे और एक दूकान में , जहां लड़कियों की चीजें मिलती हैं , चुडिया , इमिटेशन ज्वेलरी , अंडर गारमेंट्स , कास्मेटिक्स ...यही सब ...मैंने मना किया की इस दूकान पर मैं जा के क्या करूंगा ...पर गुड्डी हँसते हुए बोली ...फिर तुम्हे लाये क्यों हैं चलो ना ...
और वो हाथ खिंच कर मुझे अन्दर ले गयी.
दूकान में बस एक सेल्स गर्ल थी लड़की सी , गुड्डी से थोड़ी ही बड़ी उम्र की रही होगी ..गुड्डी ने उससे कुछ खुसुर पुसुर की ...दोनों मेरे ही ओर देख रही थीं फिर वो सेल्स गर्ल मेरी ओर देख के मुस्कराई ..
.फिर मेरी ओर आई और बोली ...जरा अपने हाथ दिखाइयेगा ...और जैसे ही मैंने हाथ दिखाए उस ने मेरी कलाई पकड़ ली ...फिर गुड्डी और शीला भाभी के पास जाके कुछ फुसफुसाई
फिर वो तीनो मेरे पास आयीं और सेल्सगर्ल गुड्डी से बोली ,
" गोरी कलाई पे लाल और नीले रंग की चूड़ी बहूत अच्छी लगेंगी , वैसे हरी भी ..."और ढेर सी डिजायन लाके पसंद करने के लिए दे दी। और गुड्डी ने सब मेरी ओर बढ़ा दीं ..आज तुम्हारी पसंद की ...मैंने लाख ना नुकुर किया ...लेकिन और अब शीला भाभी भी गुड्डी का साथ दे रही थीं और आखिर मुझे ही चूज करनी पड़ीं
...तीन डिजाइने , तीनो की दो दो दर्जन।"
" खाली चूड़ी अच्छी नहीं लगेगी ..इन के साथ के मैचिंग कंगन भी है एक नीचे एक ऊपर के लिए ...ज्यादा महंगे नहीं है ..." सेल्स गर्ल ने सलाह दी और, और किसी के बोलने के पहले मैं बोल पडा,
" आप दाम की चिंता मत करिए , दिखाइये ना ..."
वो भी मुझे ही पसंद करने पड़े ..अब मुझे भी मजा आने लगा था. ६ इमिटेशन वाले कंगन भी ले लिये.
फिर गुड्डी बोली , आप के पास वैसी वाली ज्वेलरी है जो , जिनके कान नाक नहीं छिदे होते .."
सेल्स गर्ल ने मुस्करा कर कहा , " आपका मतलब नान पियर्स्ड इयर्स के लिए क्लिप वाली , है ना हर डिजायन की है दिखाती हूँ "
मेरे कुछ समझ में नहीं आया गुड्डी की नाक कान छिदी है , भाभी की भी तो फिर ...मैंने धीरे से गुड्डी से पूछा तो फिर डांट पड गयी .
" अरे यार तुहारे भाभी जी ने कहा है चाहो तो रिंग कर के पूछ लो " वो बोली .
मेरी ये हिम्मत नही थी .
तब तक वो सेल्स गर्ल ढेर सारी आर्टिफिसियल ज्वेलरी ले के आ गयी थी ..कान के लिए बड़े बड़े हुप्स , झुमके , नाक के लिए नथ , रिंग्स ...
और अबकी ना मुझे सिर्फ पसंद करनी पड़ी बल्कि गुड्डी ने इस नाम पे की उन लोगों की तो नाक कान छिदे हैं , मेरे ऊपर ट्राई भी करवा लिया .
साथ में कुछ गले के लिए , एक जोड़ी पायल ...और फिर शीला भाभी ने जोड़ा अरे सुहागन का श्रृंगार तो बिछुए के बिना पूरा नहीं होता ...तो वो भी . फिर शीला भाभी ने महावर की भी एक शीशी ली।
जब सब समान पैक हो गया ...तो गुड्डी ने बोला एक चीज तो रही गयी और ..धीमे से सेल्स गर्ल से कहा आप वो क्वीन साइज वाली ब्रा रखती हैं क्या ..बड़ी साइज की ...
हाँ मुस्करा के वो बोली और जब गुड्डी ने उससे कुछ और बोलने की कोशिश की तो उसने हाथ के इशारे से मना कर दिया. और मेरे पास आ गयी और मुस्करा के मुझसे कहा
" हम लोग जेंट्स के लिए भी सामान रखते हैं ...आपने इतना समान लिया है तो डिस्काउंट भी हो जाएगा ..बनयान ब्रीफ ..वैसे आप बनयान पहनते किस साइज की हैं ."
" पहनता तो ३८ की हूँ लेकिन मुझे चाहिए नहीं .' मैंने साफ साफ मना कर दिया.’
" कोई बात नहीं ...फिर कभी ..." और वो मुस्कराते हुए अन्दर गयी और एक पैकेट अखबार में रैप करके गुड्डी को देते हुए बोली ..
" दो हैं ..और ये शाप की और से हैं ...'
गुड्डी भी मुस्करायी और बोली थैंक्स फिर कहा और वो चूड़ी की साइज ..
सेल्स गर्ल बोली वो भी मैंने चेक कर ली थी ...कलाई पे ढाई और ऊपर की ओर तीन ...उसी तरह से रखी हैं ...
पेमेंट के लिए मेरा कार्ड था ही।
मंदिर पास में था हम लोग घुस ही रहे थी की मेरे फोन पे डीबी का मेसेज आया .
मैंने उन लोगों को बोला की वो हो आयें मैं यहाँ तब तक कुछ बात कर लेता हूँ ...
लेकिन गुड्डी हाथ पकड़ कर खींचते हुए अन्दर ले गयी और शीला भाभी भी बोलीं हे नखड़ा ना करो लाला इसके साथ क्या पता तोहरो इच्छा पूरी हो रही हो चलो दो मिनट हाथ जोड़ लो ..
और वहाँ हम लोगों के कुछ बोलने से पहले शीला भाभी पंडित जी से ना जाने क्या बाते कररही थीं
हम लोगों के पहुंचते ही हंस कर बोली
" पंडत जी जरा इन लोगों की जोड़े से पूजा कराइयेगा ."
गुड्डी ने अपनी चुन्नी , जैसे ही वो मंदिर में घुसी थी सर पर ओढ़ ली थी ...पूरी तरह ढँक कर जैसे दुल्हन ...
हम दोनों साथ साथ मंदिर में बैठे थे , वो मेरे बांये ...और उसके बगल में शीला भाभी।
और जैसे ही शीला भाभी ने कहा इन दोनों की जोड़े से पूजा कराईयेगा , मेरे तो कुछ समझ में नहीं आया लेकिन गुड्डी बिना सकपकाए , मुझसे धीरे से बोली , "रुमाल है तुम्हारे पास,सर पर रख लो।"
रुमाल तो था नहीं ...लेकिन गुड्डी ने अपनी चुन्नी मेरे सर पर डाल दी , और मुझे कनखियों से देख के हलके से मुस्करा दी।
शीला भाभी मेरी ओर आयीं और हलके से हडका के बोलीं , सट के बैठो एकदम ...हाँ और फिर उन्होंने चुन्नी मेरे ऊपर एडजस्ट कर दी, जिससे वो सरके नहीं और पंडित जी से मुस्कराकर कहा,
" बस गाँठ जोड़ने की कसर है ."
पंडित जी भी मुस्कराकर बोले ,
" अरे ये चुन्नी है ना बस इनके शर्ट में फंसा दीजिये और इनकी कुर्ती में ...हाँ बस हो गयी गाँठ ."
शीला भाभी मेरे कान में बोली , अब ये गाँठ खुलनी नहीं चाहिए और मांग लो इसको .
एकदम भाभी ...मैं मुस्का के बोला. अपनी दिल की बात तो मैं उनसे कह ही चुका था ...और भाभी से मेरी अर्जी लगाने का काम उन्ही के जिम्मे था ..इसलिए उनसे क्या पर्दा ..
चुन्नी ना हिले इसलिए हम दोनों अब एकदम सट कर बैठे थे हम दोनों की देह तो सटी थी ही , गाल तक छु जा रहे थे। गुड्डी के चूड़ियों और कंगन की खनखन, कान के झुमकों की रन झुन , मेरे कानो में पड रही थी
...इत्ती प्यारी लग रही थी वो ...की ..और जब वो चोरी चोरी मुझे उसे देखते देखती ..तो वो भी मीठी मीठी निगाहों में मुस्करा देती .
पंडित जी की हिदायतें चालू हो गयीं ..पूरी पूजा में ऐसे ही बैठे रहना , गाँठ हिलनी भी नहीं चाहिए ...और उन्होंने पहले गुड्डी के हाथ में कलावा बांधा , फिर उसी के बचे हिस्से से मुझे भी बाँध दिया.
गुड्डी का हाथ उन्होंने नीचे रखवाया, उसके उपर मेरा हाथ और फिर सबसे ऊपर गुड्डी का बायाँ हाथ ...और फिर कहा आज ये सारी पूजा तुम लोग जुड़े हुए हाथ से ही करोगे .
पूजा लम्बी चली लेकिन जल छिडकने से लेकर सारे काम जुड़े हुए हाथ से हुए।
फिर उन्होंने मन्त्र पढ़ा , गुड्डी से कहा अपना नाम गोत्र सब बोलो और जो मन में हो वो मांग लो ...तुम्हारी इच्छा अवश्य पूरी होगी।
गुड्डी ने आँखे बंद कर ली पर पंडित जी बोले नहीं आँखे खोल कर ...और जो चीज चाहिए वो अगर कहीं आसपास में हो तो उसकी ओर देख लेने मात्र से ...इच्छा बहुत जल्द पूरी होती है.
गुड्डी की लजीली शर्मीली आँखे मेरी ओर मुड़ी, पल भर के लिए उसने मुझे देखा ..और पलकें झुका लीं .
और जब मेरा नंबर आया तो मैंने गुड्डी को मांग लिया ...और खुल कर उसे नदीदे लालचियों की तरह देखा
...वो कनखियों से मीठी मीठी मुस्करा रही थी। भगवान जी तो अंतर्यामी होते हैं लेकिन जिस तरह से मैं देख रहा था को कुछ ना समझता हो वो भी समझ गया होगा की मुझे क्या चाहिये
जब पंडित जी ने प्रसाद दिया लड्डू का तो मुझे बोला ...की मैं गुड्डी को अपने हाथ से खिलाऊं ...शीला भाभी ने गुड्डी के कान में कुछ कहा और वो मुस्कराई।
जैसे ही मैंने लड्डू गुड्डी के मुंह में डाला, शर्माते लजाते थोडा सा मुंह खोला था उसने ...लड्डू तो उसने बाद में खाया मेरी उंगली पहले काट ली।
फिर पंडित जी ने गुड्डी से कहा की वो बचा हुआ लड्डू अपने हाथ से मुझे खिला दे।
और अबकी फिर गुड्डी ने अपने हाथ में लगा हुआ लड्डू मेरे गाल में पोत दिया.
तुम लोगों की जोड़ी इस लड्डू से भी मीठी होगी पंडित जी ने आशीर्वाद दिया।
उनके पैर भी हम लोगो ने अपने हाथ साथ साथ जोड़ के छूए ...
उन्होंने आशीर्वाद दिया ..अब तुम लोग हर काम इसी तरह जोड़े से करना ..
शीला भाभी ने जब चुन्नी अलग की तो वो गुड्डी से बोलीं
" आज मैं नाउन का काम कर रही हूँ ...गाँठ बांधने और छोड़ने का बड़ा तगड़ा नेग होता है "
" अरे एकदम ..इनसे ले लीजियेगा ना ...मैं बोल दूंगी ..." मेरी ओर देखते हुए आँख नचा के वो बोली।
हम तीनो समझ रहे थे किस लेन देन की बात हो रही है.
शीला भाभी पंडित जी से कुछ और बात करने के लिए रुक गयी थी हम दोनों बाहर की ओर निकल आये .
मंदिर के बाहरी हिस्से में एक बड़ा सा शीशा लगा था।
मैं और गुड्डी उसी के सामने रुक कर देखने लगे ...
मैंने उस की पतली कमर में हाथ डालकर अपनी ओर खिंच लिया और शीशे में देखते हुए पूछा ,
" हे ये जोड़ी कैसी लग रही है "
" बहोत अच्छी " गुड्डी बोली।
उसने अभी भी चुन्नी अपने सर पे घूँघट की तरह डाल रखी थी। उसे दुलहन की तरह पकड़ , शीशे में देखती वो बोली ,
" और ये दुल्हन ..."
" दुनिया की सबसे प्यारी सबसे सुन्दर ..दुलहन ..." मैंने बोला .
फिर कुछ रुक कर मैंने धीरे से कहा ...लेकिन ये दुल्हन मुझे मिल जाए .."
" मिल जाएगी ,मिल जाएगी . चिंता मत करो ..अब तो भगवान् जी ने भी आशीर्वाद दे दिया है ." वो हंस के बोली .
गुड्डी ने फिर सीरियस हो के पूछा
" क्या तुमको सच में जून में छुट्टी नहीं मिल पाएगी'
" नहीं असल में ...असल में मैं ..बेवकूफ हूँ ...वो जाड़े की लालच में ..." मैंने अपनी गलती कबूली।
" वो कोई नयी बात नहीं है ...लेकिन तुम मेरी बात का जवाब दो ..छुट्टी मिल पाएगी की नहीं तुम ट्रेनिंग की बात कर रहे थे " गुड्डी ने फिर पूछा।
" हाँ ...नहीं ...असल में उस समय से तो मेरी फील्ड ट्रेनिंग स्टार्ट हो जायेगी ...मोस्ट प्राबेबली बनारस में ही ...डी बी के ही अंडर में ...और फील्ड ट्रेनिंग में तो सब कुछ उन्ही के ऊपर रहेगा ...फिर ..इसलिए छुट्टी का ऐसा कुछ वो नहीं है ...मैंने बोला ना ...जाड़े "
मेरी बात गुड्डी ने बीच में काट दी . उसकी आँखे चमक उठी। वो बोली,
"बनारस में , तब तो घर में ही रहना , हम लोगों के पास ...कोई रेस्ट हाउस वाउस नहीं ...समझ लो ...वैसे कित्ते दिन की ट्रेनिंग होगी वहां ..."
" मैं सब वहीँ कर लूंगा तो ७-८ महीने की तो होगी ही ...." मैंने समझाया।
वो फिर मुद्दे पे आगई
" तो इस का मतलब ...छुट्टी का ऐसा कुछ नहीं है १४ -१ ५ दिन की मिल जायेगी ना ..."
" हाँ कर लूंगा जुगाड़ ..." मैंने सर हिलाया.
" और उसके बाद भी तो तुम बनारस में ही रहोगे ना ...फिर क्या ...तो तुम गावं से डर गए या आम के बाग़ से ..." हंस के वो सारंग नयनी बोली।
फिर बिना मेरे जवाब के इंतजार के वो बोली
"तुम भी ना जाड़े की रात के इन्तजार में ...नवम्बर में लगन आती है जाड़े में ...पूरे ६ महीने का घाटा हो जाता तुमको ...तुम भी ना ...सच में बुद्धू राम हो ..."
बात उसकी सही थी मैं क्या बोलता ..
फिर वही बोली ..." तुम जानते हो बिचारी तुम्हारी भाभी ...कुछ सोच के उन्होंने बोला होगा ..कित्ता तुम्हारा ख्याल रखती हैं ..वो "
बात तो गुड्डी की सोलहो आना सही थी . लेकिन अब तो तीर छूट चुका था .
बिगड़ी बात बनाना अगर किसी को आता था तो वो गुड्डी को आता था।
वो मेरे कंधे पे हाथ रख के मुस्करा के बोली ,
" अब हम जैसे ही लौटेंगे ना ...मेरे साथ ...तुम बोल देना की तुम्हारी छूट्टी की बात हो गयी है ...मिल जायेगी जून में आराम से छुट्टी ...और तुमको कोई ऐतराज नहीं है जून में .. शादी से ..."
गुड्डी से मैंने कहा, "लेकिन तुम भी चलना मेरे साथ जब भाभी से मैं ये कहूंगा ..कुछ बात होगी तो तुम् सम्हाल लेना ...अकेले मैं मैफिर कुछ गड़बड़ ना कर दूँ ..."
" और क्या , " मुस्कराते हुए वो सुमंगली बोली , तुम्हारे भरोसे मैं इतनी इम्पार्टेंट चीज नहीं छोड़ने वाली ...करा लिया ना था तुमने अपना ६ महीने का घाटा ...और गरमी के बाद सावन भी तो आता है ...सावन सूना चला जाता ना ...".
तब तक शीला भाभी आती दिख गयीं ..और मैंने उन्हें छेड़ा
" क्यों भाभी कहीं पंडित जी से कुछ स्पेशल प्रसाद तो नहीं लेने लग गयीं थीं आप."
" तुम्हारा ही काम करवा रही थी ...कुंडली दी थी भाभी ने तुम्हारी मिलवाने के लिए ...और सगुन ..."
उनकी बात काटते मैं बोला
" मेरी कुंडली तो भाभी के पास थी लेकिन वो लड़की की ..."
" तुम्हे आम खाने से मतलब है या ..." अबकी गुड्डी ने बात काटी।
" आम और ये ...'अब शीला भाभी चौंकी ...
" अरे गरमी का सीजन आने दीजिये ...कैसे नहीं खायेंगे ...खायेंगे ये और खिलाउङ्गि मैं ..लेकिन कुंडली का क्या हुआ ...मिली की नहीं ..." गुड्डी उतावली हो रही थी।
" मिल गयी बहुत अच्छी मिली ..पंडित जी तो कह रहे थे ते ये जोड़ी ऊपर से बन के आई है ...दुनिया में कोई ताकत नहीं जो रोक सके इन दोनों का मिलन. सोलह के सोलह गुण मिल गए हैं ..."
शीला भाभी बहुत खुश हो रही थीं ...लेकिन जब तक हम दोनों कुछ बोलते एक खतरनाक बात बोल दी .
" लेकिन , लडकी के लिए एक मुसीबत है ..."
वो बड़ी सीरियसली बोलीं और पंडित जी ने बताया है की इसका कोई उपाय भी नहीं है ..."
" मतलब ..." मैं और गुड्डी साथ साथ बोले .
" अरे इसका शुक्र बहुत ही उच्च स्थान का है ...पंडित जी बोले की इतना ऊँचा शुक्र उन्होंने आज तक नहीं देखा " वो बोलीं
" मतलब " हम दोनों फिर साथ साथ बोले।
अब वो मुस्कराई और मेरी ओर मुंह कर के बोलीं
" मतलब ये की ...तुम दुल्हिन के ऊपर चढ़े रहोगे हरदम ...ना दिन देखोगे ना रात ...बिना नागा।"
मैं और शीला भाभी दोनों गुड्डी की ओर देख के मुस्कराए ...और
गुड्डी बीर बहूटी हो गयी।
अब शीला भाभी फिर मेरी ओर मुखातिब हुयीं और बोलीं , " लेकिन असली अच्छी खबर तुम्हारे लिए है ...पंडित जी ने कहा है ..लडकी रूप में अप्सरा है , भाग्य में लक्ष्मी है ...जिस घर में उसका प्रवेश होगा उस घर की भाग्य लक्ष्मी उदित हो जायेगी ...वहां किसी चीज की कमी नहीं रहेगी और सबसे बड़ी बात ...भाग्य तो तुम्हारा वैसे ही बली है लेकिन जिस दिन से उस का साथ होगा ..वह महा बली हो जाएगा , तुम्हारी सारी मन की बातें बिना मांगे पूरी होंगी , नौकरी, पोस्टिंग ..."
गुड्डी ये सब बातें सुनके कभी खुश होती तो कभी ब्लश करती ...फिर बात बदलते हुए मुझसे बोली ...
" इत्ती देर से तुम्हरा दो दो मोबाइल लादे फिर रही हूँ लो ..."
और उसने अपना पर्स खोलकर मेरे मोबाइल मुझे पकड़ा दिये.
पूजा के समय , उसने मेरे मोबाइल ले के साइलेंट पे कर के अपने पर्स में रख लिए थे
लेकिन शीला भाभी चालू थीं।
" एक बात और तोहार भाभी कहें थी पंडित जी से पूछे की ...लेकिन ओहामें कुछ गड़बड़ निकल गया. "
अब मैं परेशान , गुड्डी के चेहरे पे भी हवाइयां ...हम दोनों शीला भाभी की ओर देख रहे थे ...और वो चुप.
आखिर मैंने पूछा ... "क्या बात है भाभी बताइए ना ".
" अरे लगन की तारीख ...एह साल २५ मई से १ ५ जून तक जबर्दस्त लगन है ...लेकिन जाड़ा में शुक्र डूबे हैं ..एह लिए अब ओकरे बाद अगले साल अप्रैल के बाद लगन शुरू होई ...और जून त तू मना के दिहे हया ...त लम्बा इन्तजार कराय के पड़े दुल्हिन के लिए ."
इतना इंतज़ार तो खैर मुझसे नहीं होने वाला था.
मैं और गुड्डी ..एक दूसरे की ओर देख कर मुस्कराए गुड्डी ने आँखों में मुझे बरज दिया की मैं अभी कुछ ना बोलूं।
वो सीधे मुझे भाभी के पास ले जाती ...और मैं उन्हें बताता की मुझे छुट्टी गरमी में मिल जायेगी।
मैं सिर्फ शीला भाभी की ओर देख के मुस्करा दिया और मोबाइल खोलने लगा
मोबाइल खोल के जैसे मैंने देखा मेरी तो लग गयी .
चार चार मेसेज रंजी के
पहला मेसेज २० मिनट पहले का था ...जब हम पूजा पे बैठे ही थे ..." मैं घर से निकल रही हूँ "
और आखिरी २ मिनट पहले का ...बस मैं तुम्हारे यहाँ पहुँचने वाली हूँ .."
" वो तो घर पे पहुँच भी गयी होगी ...और हम लोग ..." घबडा के मैंने बोला।
" कौन घर पहुँच गयी होगी ...जो इत्ता घबडा रहे हो ..." बड़ी बड़ी आंख नचाते , मुस्करा के वो शोख अदा से बोली।
मालुम सब था उसको .
" रंजी ...वो आने वाली था ना ... उस का मेसेज था "
" त चिड़िया खुदे चारा खाय ...आय गयी बहुत चीटा काट रहे हैं ससुरी की बुर में , जब्बर छिनार है ."
शीला भाभी अपने रूप में आ गयीं।
" अरे भाभी , का अकेले उस को बोल रही हैं,... इन के मायके वाली सब वैसे ही हैं फिर चींटा काट रहे हैं तो काटने दो ना ..ज्यादा पनीयाई रहेगी तो तुम को आसानी होगी ना ...और वैसे भी तुम्हारी भाभी और मंजू है न वहां खूब खातिरदारी हो रही होगी उस की।" गुड्डी भी ना ...
तब तक मैंने सिक्योर फ़ोन खोल लिया था डी बी का मेसेज देखने के लिए
" टाक टू मी व्हेन अलोन "
और इन सब के ख़ास तौर से शीला भाभी के सामने तो बात नहीं हो सकती।
इस फोन का मतलब गुड्डी भी समझती थी।
मुझे चलना होगा ...मैंने बुदबुदाया
और गुड्डी ने आँखों से हामी भर दी। और वो शीला भाभी से बोली ,
" जाने देते हैं भाभी ...रहेंगे हम लोगो के साथ और मन वहां लगा रहेगा ."
मैं थोड़ी दूर ही निकला थी की गुड्डी ने जोर की हांक लगा कर मुझे रोक लिया और मेरे पास आके मुझे एक , एक हजार की नोट पकड़ा दी और बोली ...
" रास्ते में एक दूकान दिखी थी ना .."
मैं समझ गया वो किस दूकान की बात कर रही थी .
" जैसे बनारस में किया था तुमने ...हाँ यहाँ लोग तिगुने चौगुने होंगे ." धीमे से मुस्करा के वो बोली .
वो वाइन की शाप थी ...बनारस में मैंने गुड्डी के साथ ही बियर की बाटल्स ली थीं और बाकी चंदा भाभी के पास जो हार्ड ड्रिंक्स थी वो मैंने कोल्ड ड्रिंक में मिला के ...सब को टुन्न कर दिया था। और फिर जबर्दस्त होली हुयी थी ..
यही प्लान उसका कल होली वाले दिन के लिए यहाँ भी था ..
मैंने वाइन शाप पे जा के ६ कैन बीयर, एक लीटर वाली दो बोतल ओल्ड मांक रम , एक बोतल डार्क रम , दो दो बड़ी बाटल्स जिन और वोदका की ...आर्डर कर दी। कोला के साथ रम और , लिम्का स्प्राईट और सेवेन अप के साथ वोदका और जिन ...जल्दी कोई पहचान नहीं सकता ...
एक कोने में उस दूकान में एक केबिन बना था।
मैंने सेल्समैन से पूछा ...वो क्या है . वो आँख मार के बोला ...प्राइवेट केबिन किसी को कभी ...
उसके ज्यादा बोलने के पहले सौ रुपये मैंने उसे पकडाए ...और बोला की तूम पैक करो तब तक मैं उधर ...
डीबी का तब तक दूसरा मेसेज आ गया था ...
काल मी ..नाउ।
केबिन में जा के अन्दर से बंद कर के ...मैंने डीबी को काल किया ...
और डीबी ने जो बोला ...मेरा चेहरा सफेद हो गया। बस फोन गिरा नहीं मेरे हाथ से
Z IS DEAD.
He has been killed half an hour back.
जेड ...बनारस की तो सारी कहानी उसके चारो ओर घूम रही थी।
सारी बातें पिक्चर की रील की तरह घूम गयी। कैसे सबसे पहले रीत को शक हुआ और काशी चाट भण्डार में , टमाटर चाट खाते हुये , कैसे डीबी के सामने ...
रीत ने एक बड़े टेरर प्लाट का शक जाहिर किया और फिर सेटलाईट फोन को ट्रेस करके ...कार्लोस और रीत ने उस नाव का पता लगाया जिसमें जेड एक दालमंडी की गानेवाली ( जो बनारस की पुरानी देह बाजार है जैसे हमारे शहर में कालीन गंज) सोनल के साथ जाता था .
सोनल सिर्फ एक बहाना थी ..वो उस नाव से सिर्फ सेट फोन पे अपने आकाओं से सम्पर्क कायम करता था , रेकी करता था और फोटुए सीमापार भेजता था। रीत ने ही फिर कार्लोस के साथ एक हाई क्लास काल गर्ल बन कर नाव वाले से मिल कर उस के फोन ,सिम सब ढूंढे ...
और आपरेशन “ओल्ड बूब्स ओन फायर “का पता लगाया ..उसने सोनल को भी दालमंडी में ढूंढ़ निकाला . जिसने जेड की तस्वीर पुलिस आर्टिस्ट से बनावाई ...
और फिर जेड का पता चला .
.वो एक महत्वपूर्ण धुरी था ...काशी साड़ी भण्डार का करता धरता . जो आर डी एक्स बनारस से मुम्बई और बडोदा भेजा गया था वो काशी साडी भण्डार के पैकेट में ही गया था।
आज सुबह जो बाम्ब और आर्म्स का जखीरा पकड़ा गया था वो भी उसी के वेयर हाउस में था और फिर रीत के बिना वो भी टेढा काम था. जिन डिटोनेटर्स को पकड़ने के लिए हिन्दुस्तान की सारी डिटेक्टिव अजेंसिज परेशान थीं ...वो भी जेड ने ही डिलीवर किया था।
" कैसे ...कब ..." बस मैं यही बोल पाया।
" अभी शाम को ...आधे घंटे पहले . गोदौलिया के पास ...उसका घर हम लोगों ने घेर रखा था।
हमारे आदमी थे , आई बी के थे ..हम ने ये चेक कर लिया था की उसने काठमांडू जाने वाली दो फ्लाइट्स में बुकिंग करा रखी थी एक सवा छ की थी, एक साढ़े सात की ...एक में उसने अपने नाम से बुकिंग करा रखी थी और एक में फर्जी नाम से ..."
मैंने सोचा बनारस में बाम्ब ब्लास्ट का समय होलिका जलने का था ...यानी ८ .२ ० का ...उस समय तक वो हिन्दुस्तान की सीमा के बाहर होता ..एकदम मुम्बई ब्लास्ट की तरह और नेपाल जाने के लिए कोयी पासपोर्ट भी नहीं चाहिए ..
डीबी ने कुछ रुक कर बात आगे बढाई ...
" तो वो अपने घर से कार से निकला .आगे पीछे ...हमारी अन मार्क्ड कारें थी ...लेकिन गौदौलिया के कुछ दूर पहले ..बहुत जाम था ...और वो उसमे फँस गया। थोड़ी देर बाद वो निकल कर भीड़ में पैदल चलने लगा ...प्लेन क्लोथ्स वाले उसके चारों ओर थे .."
" वो शायद रिक्शा पकड़ कर लहुराबीर तक पहुँच जाता " मैंने दिमाग लड़ाया ...लेकिन शायद डीबी को पसंद नहीं आया .."
"हाँ वही बात रही होगी लेकिन तुम बीच में मत बोलो " वो बोले और फिर चालू हो गए ..
" वो बहोत देर तक पैदल चलता रहा ...और जहां से घाट के लिए पतली सी गली मुड़ती है ...वहीं , शाम के समय तुम्हे तो मालुम है की वहां कितनी भीड़ होती है ...उसे चाक़ू लगा गले के पास ठीक में आर्टरी पे ..और वो वहीँ ढेर हो गया।
गनीमत है फेलु दा वहीँ थे ...उन्होंने उसे गिरने से रोक लिया और आस पास के लोगों से कहा की इसे मिर्गी का तेज दौरा पड़ा उस चाक़ू के ऊपर रुमाल रखा और उसे हमारे लोगों को सौंप दिया. वो तब तक मर चुका था ."
डीबी एक मिनट ले लिए रुके और मुझे बोलने का मौका मिल गया।
" मारा किसने किसी ने देखा क्या ...आसपास तो इत्ते पुलिस के लोग रहे होंगे सादी वर्दी में ..."
" वही तो किसी ने नहीं देखा ...यहाँ तक की चाक़ू लगते भी किसी ने नहीं देखा ...और उसके बाद भी सिर्फ फेलु दा ने ही नोटिस किया ...खून भी बस दो चार बूँद ही गिरा होगा। चाक़ू भी कुछ अलग किस्म का था ..सूजे ऐसा ...लम्बा बहूत पतला और प्वाइण्टेड ...फेलू दा के हिसाब से वो कालिया था।
उन्होंने पीछा किया था उसका ...गली में तेजी से मुड़ते उन्होंने उसे देखा लेकिन जब तक वो उस तक पहुँच पाते ...उन्होंने देखा की वो एक मोटर बोट में बैठ के जा रहा था। "
" कुछ पता चला ..." मुझसे नहीं रहा गया।
" नहीं आधे घंटे बाद वो बोट तुलसी घाट पे मिली ...फोरेंसिक वाले छान रहे हैं उसे ..एक फिंगर प्रिंट तक नहीं मिला ...और उसी घाट से एक मोटर बाइक भी चोरी हो गयी है। फेलु दा का कहना है कोई फायदा नहीं अगर वो कालिया है ..
.वो किसी ट्रेन के जनरल डिब्बे में बैठ गया होगा और मुगलसराय से पटना और फिर नेपाल .. या .किसी ट्रेन से गोरखपुर फिर वहां से नेपाल ...उसकी शकल तो किसी ने देखी नहीं तो पकड़ेंगे किसको ...मैंने बाद में कई सीनियर से बात की कुछ कहते हैं की वो एक मिथ है ...
और कुछ मानते हैं की वर्ड का हाइयेस्ट पेड अस्सेन है ..७ -८ केसेज में इंटरपोल को उसकी तलाश है ...बस उसकी पहचान वही स्पेशल चाक़ू है ...और जब उसकी हैंडल हम लोगो ने चेक की ...जो इन्फो इंटरपोल से मिली थी हैंडल हाथी दांत की है और उसपर एक माइकोस्कोपिक' के' कार्व्ड है ...उसके किये चार असेसिनेशन में ऐसे ही चाक़ू मिले थे।“
डीबी एक पल के लिए रुके और मुझे बोलने का मौका मिल गया।
" लेकिन जेड को आज दिन में क्यों नहीं पकड़ लिया गया ...एक बार जब सुबह सारे बाम्ब , डिटोनेटर पकड़ लिए गए थे ...तो उसके बाद तो मैं सोच रहा था की उसे भी पकड लिया गया होगा ..मदनपुरा में भी तो आपने कर्फुय लगा ही रखा था ..."
अब उनकी बात काटने की बारी थी ...
"सोच तो मैं भी यही रहा था लेकिन सब कुछ हमारे तुम्हारे सोचने से ही नहीं होता ..भैया . और भी लोग हैं ...मैं तुमसे शेयर तो नहीं कर सकता था ..लेकिन अब वो नहीं रहा तो ...
तुमने और रीत ने जिसे पकड़ा था ...वो जहरीला सांप ही नहीं था ...हजार सर वाला महानाग था ...
स्लीपर होने के साथ ..उसके पासपोर्ट के डिटेल जब रा ने चेक किये तो पता चला की जब वो विदेश गया था तो वहां एक बड़े टेररिस्ट ग्रुप की मीटिंग थी ...और ऐसा तीन चार बार हुआ .
खैर आई बी की प्लानिंग ये थी की ये अगर नेपाल जाता है तो उसे ट्रेस कर हम नेपाल के टेरर हब के बारे में पता कर सकते हैं . तुम्हे तो मालूम है इस आपरेशन के लिए आर डी एक्स नेपाल से आया।"
मैंने सोचा मुझसे ज्यादा कौन जानता होगा ...और क्या प्लानिंग थी ...
नेपाल बार्डर पर एक ड्रग हाल की लीक हुयी ..और सारे कस्टम वाले पुलिस वाले वही लग गए थे ...और ड्रग्स पकड़ी भी गयीं एक बहूत बड़ा हाल था ..लेकिन ठीक .उसी समय एक खेत से ..आर डी एक्स ...बहुत बड़ा कन्साइन्मेण्ट ...और वहां से कचरे के ट्रक में रख कर ...जिससे कोई भी स्निफिंग उसे पकड़ ना पाए और वही बनारस , मुम्बई और बडौदा ..."
डी बी ने अपनी बात आगे बढाई ...
" पिछले तीन महीनो में नेपाल से फर्जी नोटों का भी बहोत बड़ा जखीरा भारत आया है ...समझौता एक्सप्रेस की चेकिंग के बाद अब उधर से आना बंद हो गया तो इधर से ...और ये पूरी इकोनामी को सैबोटेज कर रहा है।
रा और आई बी ने ये कनफर्म किया है की वो सेंटर नेपाल में पश्चिमी इलाके में कहीं है लेकिन सही पता नहीं चला पा रहा है. पिछले साल सत्रह करोड़ फेक करेंसी नोट्स सीज हुए थे। इस साल आल रेडी बाइस करोड़ से ऊपर सीज हो चुका है ...
नार्मली सीजर कुल पम्प किये रुपय्यों का १० % से ज्यादा नहीं होता तो ये मान सकते हो की करीब दो सौ करोड़ से ऊपर की फेक मनी इकोनामी में घुस गयी है ...ये इकोनामिक टेररिज्म , बम वाले टेरऱ से कम खतरनाक नहीं हैं।
इस पैसे का करीब सत्तर से अस्सी फीसदी नेपाल से ही होके आता है। एक अलग से एफ आइ सी एन ( फेक इन्डियन करेंसी नोट्स) विङ्ग बनाई गयी है और नेपाल सरकार से हम लोग हमेशा सपोर्ट के लिए बोलते हैं ...लेकिन वहां जो पोलिटिकल चेंजेस हुए हैं वो सरकार अब उतनी इन्डियन फ्रेंडली नहीं है .”
डी बी की बात सही थी।
पहले तो साइकिल से रिक्शा से , सुनौली बार्डर से जो चाहे वो ...कितने तो कुरियर थे और अब जबसे कंटेनर का धंधा चालू हुआ है , कस्टम वाले सारे कंटेनर तो खोल नहीं सकते ...और अगर उनमे से कुछ मिले हों ...कितने फेक नोट एक साथ आजायेंगे मैंने सोचा .
डी बी ने गाडी इतिहास की ओर मोड़ दी थी .
" कंधार की याद है फ्लाईट 8 1 4 की ..." उन्होंने पूछा ..
" कौन भूल सकता है , काठमांडू से ही हाइजैक वाले चढ़े थे ." मैंने बोला .
" लेकिन सिर्फ २-३ लोग ऐसे प्लेन नहीं हाइजेक कर सकते उनके पीछे पूरा सपोर्ट सिस्टम रहता है " वो बोले। फिर बात आगे बढाई ,
" हम लोगों की बात पे तो कोई यकीं करता नहीं है , ये सबूत दो वो सबूत दो ..लेकिन अमेरिकन एम्बसी ने आठ जुलाई 1 9 9 7 को एक केबल भेजा था जिसे खुद उस समय के राजदूत , फ्रांक विस्नर ने साइन किया था ...
साफ साफ लिखा था की उस हाइजेकिंग के पहले आई एस आई ने नेपाल में एक टेरर हब खोला था ...उससे कई आर्गनाइजेशन चलते थे . उसमे से एक आर्गनाइजेशन था जे के आई अफ ( जम्मू कश्मीर इस्लामिक फ्रंट). उस केबल में ये साफ साफ लिखा था की जे के आई एफ का जो किंग पिन था जावेद करवाह ...उसका काठमांडू में कारपेट का बड़ा बिजनेस था।
आक्युपाइएड कश्मीर में बिलाल बेग उनका एजेंट था जो मुजफराबाद में कैम्प चलाता था. हाइजैक के अलावा , उस केबल में ये भी जिक्र था की काठमांडू बेस्ड इस ग्रुप का इस्तेमाल लोकसभा चुनाव के पहले दिल्ली में बम्ब ब्लास्ट के लिए भी किया गया .
उस केबल के अनुसार आई एस आई के एक कर्नल फारूक ने ये काम बिलाल बेग और टाइगर मेमन को सौंपा था, जिन्होंने काठमांडू बेस्ड लतीफ और जावेद कार्वाह को इस काम के लिए निर्देशित किया. इस मामले में इस्तेमाल किया आर डी एक्स भी काठमांडू से ही आया था।
इसी तरह दौसा ( राजस्थान) के पास 2 2 मई को बस में किये गए बम ब्लास्ट में भी यही ग्रुप सक्रिय था। इतनी बात तो उस अमेरिकन केबल ने कबुली है , असलियत इससे कम से कम बीस गुना ज्यादा है। " डी बी बोले. *
लेकिन ये बात थोड़ी पहले की नहीं हो गयी। मैंने शंका जतायी
" हाँ ...और नहीं "
वो बोले ...फिर उन्होंने सिचुएशन साफ की .
थ्रेट परसेप्शन इस समय पहले से सात गुना ज्यादा है उस दिशा से खतरे का और ये सिर्फ हमारी नहीं कई विदेशी सिक्योरिटी एजेंसीज का निष्कर्ष है ...लेकिन ज्यादा बड़ा डर है भविष्य का ...अफगानिस्तान , ईराक में हालत सुधरने के बाद ये लग रहा की कही साउथ एशीया टार्गेट ना हो ..
.इसलिए जब तीन शहरों पर एक साथ हमले की खबर पता चली तो सेंटर ने इसे कुछ फारेन एजेंसीज से भी शेयर किया ...और क्योंकि सारा आर डी एक्स नेपाल से आया था और फेक करेंसी में भी अचानक इतनी बढ़त हो गयी .. तो नेपाल के उस टेरर हब को ट्रेस करना फर्स्ट टार्गेट हो गया ..
आई बी का भी मेन इंटरेस्ट वही था ...टेरर की जड़ तक पहुँचने का ...
बनारस उन्होंने मेरे भरोसे छोड़ा था ...हालांकि अपनी और से उन्होंने हेल्प भी की थी ...और बनारस सच पूछो तो मुझसे ज्यादा बनारस वालियों और बनारस वालों के भरोसे था ...रीत , रेहन , कार्लोस सिद्दीकी ...
खैर ...तो इसलिए ये डिसिजन लिया गया था की ...वि शुड गिव अ लॉन्ग रोप टू जेड ...और उसको फालो कर के नेपाल के अन्दर पहुंचे ..अब वो कहानी ही ख़तम हो गयी .
उन्होंने सांस ली .
मैंने भी सांस ली ...ये पहलू मेरे दिमाग में आया ही नहीं था .
तब तक फोन पर फोन की घंटी की आवाज आई ...मैं होल्ड किये हुए था ...लैंड लाइन पे कोई डी बी के लिए फोन था ...
उनकी आवाज सुनाई पड रही थी।
" हाँ ..ओ के ...नो ...माय ..डैम बैड ..." और
उन्होंने वो फोन रखा की दो तीन फोन एक साथ ..बजे और वो बारी बारी से सबसे बात कर आरहे थे ...
" आर यू श्योर ..एल आई यु ...इन्फारमर से पता ..सेम थिंग ...चलो ..अब तो खैर ..."
फिर वो वापस मेरे फोन पर आये ....
" मार्चुरी से रिपोर्ट थी ...जेड के ठीक सामने के दो दांत नकली और खोखले थे और उनमें सायनाइड था।
इसका मतलब उसको ज़िंदा पकड़ना लगभग असंभव था। जीभ के एक पुश से वो सायनाइड रिलीज कर सकता था ..और सेकेंडो में उसकी डेथ हो जाती।
अगर हमारी कस्टडी में उसकी डेथ होती ....तो अभी जो एल आई यु ( लोकल इंटेलिजेंस यूनिट ) की रिपोर्ट है ....उसके हिसाब से बवाल होने की पूरी तैयारी थी . कई इलाकों के खबरी ने भी यही इन्फो दिया है ...यानी सांप छछुंदर वाली हालत ..."
फिर उन्होंने बोला
" असल में तुमसे कुछ जरुरी बात करनी थी , तुम्हारे बारे में थी इन सब चीजों के बारे में नही ....लेकिन मैं एकदम भूल गया ...दो प्लेट समोसे ले आओ गरम हाँ उसी दूकान से ...( मुझसे नहीं , अपने चपरासी से बोला होगा )...हाँ तो ...
मैंने बात काट कर पूछा ...कोई और बैठा है क्या आपके पास ...( मैंने जासूसी बुद्धि लगाई).
" क्यों ..." वो बोले।
" वो दो प्लेट समोसे " मैंने अपने निष्कर्ष का आधार बताया।
" तो क्या मैं अकेले दो प्लेट समोसे नहीं खा सकता ...वाह ...अच्छा अब तुम दस पन्द्र्ह मिनट बाद फोन करना तब तक मुझे याद आजायेगा की तुम्हारी क्या बात थी ..."
और ये कह के उन्होंने फोन रख दिया .
दस मिनट में तो घर पहुंचना मुश्किल था ...इसलिए मैंने सोचा यहीं वेट करते हैं।
सेल्समैन बियर, रम , वोदका और जिन की बोतलें दे गया था।
फिर मैंने सोचा की तब तक कालिया के बारे में कुछ पता लगाया जाय. सबसे पहले मैंने फेलू दा से बात की ...वो वहां थे जब जेड का मर्डर हुआ और ये महज संयोग नहीं था , उन्हें कुछ जरुर आशंका रही होगी।
और पुलिस को भी उन्होंने ही कालिया का नाम बताया .
उनसे बात करके फिर मैंने कार्लोस से पता किया ...इंटरनेशल टेरर के बारे उनकी जानकारी सबसे ज्यादा थी
..अपने हैकर मित्रों को भी मैंने इस नई घटना की जानकारी दी ...और उन्होंने भी बोला की वो चेक कर के बतायेंगे।
पता ये चला की किसी को कुछ ज्यादा पता नहीं है लेकिन जो भी था डराने वाला था .
और मैंने कालिया के बारे में सोचना शुरू किया।
मर्डर इनकार्पोरेटेड , यही तो नाम था उस साईट का।
साईट पे जा के भी मैंने सर्च किया ..एक बड़ा सा चाकू बना था ...खून टपकता ...और एक बंद दरवाजा था ...जिसपर लिखा था ओपन एट योर ओन रिस्क ...मैंने क्लिक किया तो एक अट्टहास हुआ ...
चर चर खुलता हुआ दरवाजा खुला और ढेर सारे चमगादड़ उड़े ...फिर पूरे स्क्रीन पे जैसे खून की बारिश ...
फिर आया उसने मेरा कान्टेक्ट डिटेल मांगे ..मैंने साईट बंद कर दी ..तो बड़े जोर के अट्टहास की आवाज हुयी और मेरा आई पी नम्बर और शहर का नाम लिख कर आ गया.
कुछ लोगों का कहना है की जो लोग कालिया से किसी मर्डर के लिए कान्टेक्ट करना चाहते हैं इसी साईट का इस्तेमाल करते हैं ...
तो कुछ का कहना था की ये मात्र एक जोक है , एक प्रैंक ...और कुछ का कहना था दोनों ...वो उसे स्क्रीन की तरह इस्तेमाल करता है।
लेकिन एक बात जो साफ हुयी की ...वो है।
अब तक उसने यूरोप एशिया और दक्षिण अमेरिका में ७-८ मर्डर किये हैं , पिछले चार सालों में ...लेकिन वो गन्स का इस्तेमाल नहीं करता ना ही एक्सप्लोसिव्स का। अपने पहले मर्डर में उसने क्रास बो का इस्तेमाल किया था , रशियन माफिया के एक बड़े बॉस को स्विस आल्प्स पे मारा था ..
.उसके बाद कोलम्बियन ड्रग लार्ड को रियो में जब पहली बार उसने वो स्पेशल चाक़ू का इस्तेमाल किया।
तीसरी किलिंग अमेरिका के एक बड़े खरबपति , जिनके पास काफी डिफेंस कांट्रेक्ट थे ...ये अकेला मर्डर था जब वो विक्टिम के पास आया था और उसने कोई फ़ेंक कर मारने वाला अस्त्र इस्तेमाल नहीं किया। अस्त्र तो नहीं मिला लेकिन चोट से पता चला की उसने कटाना ( एक जापानी तलवार ) इस्तेमाल की थी . और यही अकेला मौका था जब कुछ लोगो ने उसका पीछा किया था।।
और उन पर भी उसने हिरा शुरिकें का इस्तेमाल किया था।
तभी से कुछ लोग उसे निन्जा मानने लगे थे।
लेकिन ये चीज पता थी की वो मंगोलायड नहीं है ..( सी सी टी वि कैमरों से ) और उसकी चाल ढाल साऊथ एशियन है ...इसलिए कुछ लोग उसे ब्लैक निन्जा भी कहते हैं .
आज तक किसी भी प्लेस से ना तो उसका फिंगर प्रिंट मिला ना डी एन ए ...
उसके पेमेंट का सिस्टम भी अलग है। ७० % पैसा वो कैश में लेता है जो केमैन आईलेंड ऐसे बैंक अकाउंट्स के जरिये प्रासेस होता है और आधे घंटे में अन ट्रेसेबल हो जाता है. बाकी पैसा वो स्टाक के रूप में लेता है ...जो उसी दिन ट्रेडिंग में चला जाता है।
दो तिहाई पैसा कम होने के पहले और बाकी बाद में ...
उसका इस्तेमाल माफिया, ड्रग लार्ड्स और यहाँ तक की कुछ कंट्रीज ने भी किया है।
उसकी फीस कितनी है इसके बारे में अलग अलग राय है ...लेकिन वह बहुत कुछ काम के उपर है ...
उसके फेंके गए हथियारों पर माइक्रोस्कोपिक 'के' कारव रहता है और वो ( जब सीसी टीवी में उसकी पिक्चर कैद हुयी थी ) काले कपडे पहने रहता है , साउथ एशियन होने के कारण किसी ने उसे ब्लैक निन्जा तो किसी ने कालिया नाम दे दिया है।
कार्लोस ने बोला था की ऐसी हालत में हमें आज हुए बड़े ट्रांजैक्शन ट्रैक करने चाहिये ..शायद फाइनेन्सियल इन्टेलिजेन्स यूनिट इसे ट्रैक कर भी रही है ...
मुझे लगा की इस पर और ज्यादा दिमाग खपाने का मतलब नहीं।
हमारी अब पहली प्रायारिटि ...मुम्बई और बडौदा में होने वाले हमले को रोकने की होनी चाहिए और दो घंटे बाद जो मीटिंग होने वाली है मुझे उसके बारे में सोचना चहिये।
मैं उठने ही वाला था की मुझे याद आया १ ० मिनट बाद डी बी को फोन करना था ...उन्हें मेरे बारे में कुछ बताना था ...क्या हो सकती है ये बात ...
तभी डी बी का खुद फोन आ गया
तभी डी बी का खुद फोन आ गया
मैंने उन्हें पहले बधाई दी ...अब तो बनारस की जंग आपने जीत ली , कुछ सुकून होगा.
वो लेकिन सीरियस हो के बोले ..." अभी कहाँ ...पहले ये बारात विदा हो ..आई बी ..नॅशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी और भी सब ...रा वाला भी एक आने वाला है , उस मीटिंग में शरीक होगा ...फिर आज के होलिका दहन के बाद कल होली भी शान्ति से गुजर जाय तब थोड़ी चैन की सांस मिलेगी ...बल्कि ..तब भी नहीं।"
" तब भी नहीं ...मतलब " मेरे समझ में कुछ नहीं आया.
" अरे यार रायता समेटने वाला काम ...जो तुम लोगों ने फैलाया है ...जेड की कहानी तो मैंने तुम्हे सुनाई ही था ना अभी चलो मर गया ...और उसको किसने मारा ये सब नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी वाले झेलेंगे ...लेकिन वो आउटर सर्किल का सर दर्द तो मेरा ही है ना ..." वो बोले .
मैं चुप रहा. अज्ञानता प्रदर्शित करना मुर्खता होती।
वही बोले ,
" तुमसे तो कई बार डिस्कस हुयी थी ये बात ...जेड एक स्लीपर था ...और वो इनर सर्किल आपरेट कर रहा था. यानी स्ट्रेटजी प्लानिंग , आपरेशन , कमुनिकेशन ये सब उसके जिम्मे था . तो जेड मर गया .
तुम्हारे और रीत के सौजन्य से वो सारे आपरेटिव गए, बाम्ब का जखीरा , डिटोनेटर मिल गया , और हमला बच गया।
लेकिन इसके अलावा एक बड़ा नेटवर्क है ...जो इन को सपोर्ट करता है , लाजिस्टिक सपोर्ट, पैसे का सपोर्ट , फुट सोल्जर जो की पूरी तरह डिस्पोजेबल होते हैं , वो मुहैया कराता है ...वो तो सारे लोकल होंगे ...जो यहाँ के गली मोहल्ले को जानते होंगे ...उनको समेटना तो मुझे ही पडेगा ना।
रीत पर जिन दो लोगों ने हमला किया और जिसका उसने तियां पान्चा कर दिया था ...अब सिद्दीकी उनसे गाना गवा रहा है और वो बहुत सुर में गा रहे हैं। वो लोग हायरारकी में बीच के थे इसलिए उन्हें काफी मालूम है. और उन्ही के बताने पर जिन लोगों ने रेहन पर ट्रक से हमला किया था वो भी पकडे गए हैं। बाई द वे , रेहन अब ठीक है।
मैं उससे मिलने गया था ..और शाम तक डिस्चार्ज भी हो जाएगा ...उसने मुझसे बोला था की मैं तुम्हे बता दूँ की अब वो हर तरह से ठीक है ..रात में अपने घर पहुँच जाएगा। हाँ मैं कया कह रहा था ..."
उन्हें मुझे ट्रैक पर लाना पडा ...
" आप आउटर सर्किल के बारे में बता रहे थे की ...क्यों लोगों को आपने पकड़ हैं .."
" हाँ वही ...वो फिर शुरू हुए ...वो जो तुम्हारा चाहने वाला था ...कथई सूट वाला ...जिसने तुम्हारा बनारस से आजमगढ़ तक पीछा किया ...फिर पिक्चर हाल में तुम्हारी जेब कटवा दी ...तुम्हारा मोबाइल गायब करवा दिया ..."
अब मेरे चौंकने के बारी थी ...हाँ क्या हुआ उसका मैंने पूछा .
" पकड़ा गया ...वो हँसते हुए बोले ...जानते हो वो गरीब नहीं था ...उसके पास १ १ कथई सूट थे ...खैर ...वो मारा गया तुम्हारे मोबाइल के चक्कर में ...उसी के जरिये हम लोगो ने उसको ट्रेस किया ... कडियल है थोड़ा लेकिन सिद्दीकी बुलावा लेगा उसको भी ..
उसके अलावा लोकल गुंडे बदमाश हैं जिसको उन लोगों ने हायर किया था ...उन को भी हम लोग समेट रहे हैं ...कर्फ्यू का एक फायदा ये भी था ...वो कहीं भाग नहीं पाए ...और उनके साथ वो रोग पुलिस वाले सबसे बड़े सरदर्द .."
अब मुझे समझ में आया ..क्या क्या झंझट है ...मैंने टुकड़ा लगाया ...
" आपने सही कहा ...आई बी वालों पर हमला करने वाले तो वही थे ...उन्ही के चक्कर में .."
मेरी बात काट कर बोले ..." यही बेवकूफी की उन्होंने ...बड़ी मुश्किल से सुबह गोरखपुर के बार्डर से वो पकडे गए ..और तब से उनके बाप दादा के सौ फोन ...किसी के बाड़ी गार्ड थे तो किसी के ...अब लेकिन आई बी के चक्कर में अब मैं साफ बोल देता हूँ की होम मिनिस्ट्री सेंटर इन्वोल्व है. लेकिन ये सब कुछ भी नही है ..."
ठंडी सांस ले के वो बोले।
मतलब इतना वो बता ले गए और ये कुछ भी नहीं है।
" अब और क्या बचा है ..." मैंने पुछा ...
वो हँसे , टिपिकल धुरंधर भाटवडेकर ...हंसी और बोले
' ये जासूसी किताब नहीं है की आखिरी में सब कुछ एकदम साफ ...और ये एक मकड़ जाल है ...और हम लोग किनारे पे टहल रहे हैं ....और ..आखिर कोई तो होगा जो इन सब को जोड़ता होगा ...और वो कहीं सीमापार नहीं है हमारे बीच में है ...
सिर्फ पैसे और पावर के लालच में वो खेल रहा है ...ये तो तुम लोगो ने ही बताया था की सेट फोन से सिर्फ जेड ही बात कर रहा था ...मैं एक सवाल पूछता हूँ तुम दिमाग लगाओ ..."
मेरे दिमाग में ताकत बची नहीं थी ...लेकिन उन्होंने पूछ लिया ...
"जेड के मारने के बारे में सोचो ...तीन सिचुएशन थीं ...एक उन लोगों का आपरेशन सफल हो जाता और जेड काठमांडू निकल जाता।
दूसरी हम लोग जेड को पकड़ लेते ...वो अपने सायनाइड वाले दांत से सुसाइड कर लेता और पुलिस कस्टडी में डेथ के नाम पे कुछ लोग दंगा भड़काते ...
और तीसरा उनका आपरेशन फेल होने के बाद भी हम जेड को जाने देते ...तो अगला ये समझता की हम जेड को ट्रैक कर रहे हैं और ...
जेड को मारने का फैसला ... मारने वाला भी बाहर से आया ...यानी वो तीनो सिचुएशन के लिए तैयार थे ...और कोई यही था ...कोई जरुरी नहीं बनारस में हो लेकिन वो यूपी या आसपास ही होगा ...जिसने ये फैसला लिया ...तो अब मुझे उसे पकड़ना है ...मकड़े को .."
वो बोले.
हम दोनों ने साथ साथ ठंडी सांस ली।
नौकरी आसान नहीं है ये ...मैंने खुद से बोला।
" खैर तुम ये सब चिंता मत करो ...मैं दो चार दिन में समेट लूँगा ...बस तुम अब बडोदा और मुम्बई वाली जो तुम्हारी बाते हैं ...उन को लाजिकली और फोर्सफुली रखना ..."
मैंने अपनी सोच शेयर की ...
" मुझे लगता है शायद रीत को बड़ोदा ...आज सुबह भी उसने ...उसका भी रोल ..."
मेरी बात काट कर वो जोर से हँसे ..
" उसका भी रोल ...मजाक करते हो ...वो नहीं होती तो हम लोग सात सौ होलिका छानते फिरते ...और बम फूटने का इंतजार करते ...बात तो तुम्हारी सही है ...गुजरात पुलिस और बड़ोदा के लोग भी तो होंगे वीडयो कान्फेंस में ...
लेकिन दो बाते हैं ...एक तो गुजरात के पुलिस वाले थोड़े तुर्रम खां , सोचते है सब वो कर लेंगे ...दूसरे रीत ..थकी थोड़ी चोट भी लगी थी उसको ...हम लोग कुछ ज्यादा हो शोषण करते हैं उसका ...ऑफ तुम भी ना ..."
लगता है उन्हें कुछ बात याद आगयी थी ...
" तुम भी ना सब भुलवा देते हो ...मैंने फोन तुम्हे दूसरे काम के लिए किया था .."
वो याद कर के बोले
मेरा मन धड़कने लगा कौन सी बात हो सकती है।
" तुम्हारी फील्ड ट्रेनिंग का प्रोग्राम आ गया है , २८ हफ्ते का ...मैंने तुमसे बिना पूछे , बनारस के लिए बोल दिया था , कोई प्राबलम तो नहीं है ...सत्रह मई से शुरू हो रही है। डिटेल तुम्हे मेल कर दिया है , तुम्हारे यहाँ के पुलिस आफिस में फैक्स भी कर दिया है , तुम्हारे घर पे भी डिलीवर कर देंगे वो .."
मैं सोच रहा था बोलूं ...ना बोलूं ...बोलूं ...फिर बोल दिया
" कुछ छुट्टी मिल सकती है ट्रेनिंग में ..."
" कब ..कही शादी वादी तो नहीं कर रहे हो ..." हंस के वो बोले ...
" हाँ ..वही ..." हिम्मत कर के मैंने बोल दिया।
" किससे वही जिसके हास्टेल में दिन में तीन चिट्ठी आती थी ..मिलवाया तो था तुमने ..वही ना जिसने तुम्हे होस्टेज वाली सिचुएशन में ऊपर भेजा था ..."
मैंने हाँ बोला ...
" लड़की अच्छी है ..एक तो उसे खाने का टेस्ट है ...उस दिन तुम समोसे खाते चले गए ...लेकिन उसने तारीफ भी की ...टेस्ट है उसमें ...कितने दिन की छुट्टी चाहिये अब एक महीने की मत मांग लेना ...कब से चाहिए .." वो बोले
मेरे दिमाग में शीला भाभी ने पंडित जी से जो लगन की तारीखें पूछीं थी , तुरंत कौंध गयी। २ ५ मई से १ ५ जून तक , उसके बाद अप्रेल में अगले साल ..तक सन्नाटा तो सबसे अच्छी तो २ ५ मई ही है ...और मैं भाभी को समझा दूंगा की ...जितना देर करेंगी ...उता बारिश का खतरा ..मैंने झट से बोल दिया ...
"सर ...बीस मई से ..."
( मैंने ये भी सोच लिया था की मुझे बनारस में ज्वाइन सतरह मई को करना है ...सुबह कर लूंगा ..१८ , १ ९ , वैसे भी शनिवार , रविवार है ...और छूट्टी तो सोमवार से ही शरू होगी ...तो भाभी जो हम लोगो के घर के रसम रिवाज की बात कर रही थीं तो वो भी निपट जाएगा ...वो जब कहेंगी मैं आ जाउंगा ...सात दिन पूरे मिलेंगे ).
वो लगता है दूसरे फोन पे किसी से बात कर रहे थे ...फिर बोले
" बीस मई ..ओ के कब तक ..."
" वो ...अट्ठारह जून तक सर ..." मैंने बहुत हिम्मत कर के बोल ही दिया।
उनका दूसरा फोन बज रहा था .
" ओके ...बीस मई से अट्ठारह जून ...और कुछ " उन्होंने पूछा।
" बस एक बात ..असल में मुझे घर पे बताना होगा ...फिर वो लड़की वालों से बात करेंगे और सब अरेंजमेंट ...तो अगर आप छुट्टी का सैंक्शन एस एम् एस कर देते तो ..." मैंने और हिम्मत कर ली।
" एक मिनट ज़रा रुको ..मुझे नोट कर लेने दो ...ओके अभी एस एम् एस कर दूंगा और तुम छुट्टी की अर्जी मेल कर देना मुझे।"
उन्होंने फोन रखा और मैंने तुरंत छुट्टी की अर्जी उन्हें मेल की।
दो मिनट में एस एम् एस आया , उनके आफिस से मेरी २८ हफ्ते की फील्ड ट्रेनिंग बनारस में है सत्रह मई से डिटेल प्रोग्राम मेल और फैक्स किया जा रहा है।
मैं फोन को घूर रहा था। और ठीक दो मिनट बाद दूसरा एस एम् एस ..योर इल हैज बीन सैङ्क्श्नड फ्राम ट्वेंटी में टू एट्टीन जून।
बड़ी देर तक मैं उसे देखता रहा ...मुझे विशवास नहीं हो रहा था ...
और मैंने तुरंत उसे गुड्डी को फारवर्ड किया। दोनों मेसेज ...
बीस जून से उसका कालेज खुल रहा था ...तो इसका मतलब ..की तबतक तो वो बनारस उसे लौट ही आना है ...और मेरी छुट्टी भी तभी ख़तम हो रही थी ..मतलब हम दोनों साथ साथ लौटेंगे ...और उस ने ये भी बोला था की पूरी ट्रेनिंग ...मैं बजाय रेस्ट हाउस में रहने के उसके घर पे ही रहूँ ...इसका मतलब की ...
बियर, रम वोदका और जिन की बाटल्स का बैग मेरे सामने था.
मैं सोच से बाहर आया ..और उसे उठाकर दूकान से बाहर निकला।
सडक पर पहुंचा ही था की ..गुड्डी का एस एम् एस आया ..बहोत खुश दोनों मेसेज उसे मिल गए थे ..उसने मेसेज में सिर्फ हाई फाइव किया था और जवाब में मैंने भी हाई फाइव किया .
मैंने घडी देखी। ऊप्स पूरे बीस मिनट लग गए थे यहाँ ...और रंजी को घर पहुंचे कम से कम आधे घन्टे हो गए होंगे, और मुझे अभी भी ५-७ मिनट तो लगने ही थे.
घर मैं पहुँचने वाला था की गुड्डी का दुसरा एस एम् एम् ..किस की साइन और साथ में ...
" हम लोगों को आने में अभी भी दस पंद्रह मिनट और लगेंगे ..शीला भाभी .की कुछ शापिंग बाकी है और हाँ ....आज तूने सच्च में मेरा दिल खुश कर दिया ..इस ख़ुशी में तेरी माल और तुम्हारे शहर की बेस्ट रंडी ऊप्स रंजी का अगवाडा ...पिछवाड़ा दोनों फ्री ...मेरी ओर से गारंटी ..."
हजारों कहानियाँ हैं फन मज़ा मस्ती पर !


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