Sunday, March 9, 2014

FUN-MAZA-MASTI फागुन के दिन चार--101

FUN-MAZA-MASTI

   फागुन के दिन चार--101
गतांक से आगे ...........

 गुड्डी ने मुझे आँखों से उकसाया और ...मेरे दोनों हाथ दी की रसीली चून्चियों पे ...

एकदम मस्त ..लड्डू ...दो जैसे मेरे हाथ में आ गए हों ...कित्ती यादे और आगई साथ में उसे मीठा करने के लिए ....

पहले तोमैने हलके से छूया ...जैसे राखी वाले दिन दी ने छुलाया था ...फिर जोर से गपुच लिया ..

दोनों हाथों से ..हलके हलके कभी सहलाता तो कभी दबा देता ...और कभी उसके शिखर पर घुंडी जैसे निपल ...गोल गुलाबी ..उन्हें भी फ्लिक कर देता ..

द्दी भी चूसते हुए मेरी शरारतों को देख के वो दिन याद करतीं और आँखों आँखों में मुझे देख के मुस्करा देती ....

दी अब एक्सपीरियंस हो गयी थी ..इसलिए उस 'समोसे वाली 'की तरह घबडा नहीं रही ही ...

प्यार से धीरे धीरे उन्होंने करीब छ इंच गपक लिया ...मैं लगातार उनके जोबन का रस लेता हुआ अपने ग्यारहवीं -बारहवीं के दिनों की यादों में डूब उतरा रहा था ...

लेकिन रीतु भाभी ...इत्ते से संतुष्ट नहीं होने वाली थीं ...

"अरे मेरी बांकी छिनार ...इत्तना तो वो कच्ची कलि , कल की बच्छेड़ी घोंट गयी थी ...पूरा लेने की है वरना मेरे देवर बाकी का क्या तेरी ....की ...और जोर से उन्होंने ऊपर से दी का सर पुश कर दिया ...""

गों गो करते हुए दी आलमोस्ट पूरा घोंट गयी ...एकाध इंच बाहर रहा होगा ...लेकिन रीतू भाभी ने सर पर से दबाव हटाया नहीं ...

तब तक मंजू भी हम लोगों के पास आगई ..

और उसने दी की साडी को मोड़ कर कमर तक पहुंचा दिया ..बस एक पतले से छल्ले की तरह ..और वो दी की खुले हुते नितम्ब सहलाने लगी ...

पूरी तरह ना जाने कितने पेंट रंग वहां चुपड़े हुए थे ...लकिन उसकी मस्ती उससे बढ़ ही रही थी , उसके कटाव , कडापन , उभार ...एकदम ठोस ...बस देख के मन ...हाँ ..वही गांड मार लेने का कर रहा था ...

और बस ये सोचते हुए दी का मुंह अब मैं खूब जोर जोर से चोदने लगा जैसे ..उनकी गांड ही मार रहा हूँ ....

और उधर रीतू भाभी की छेड़खानी ..और दी के सर पे उनका दबाव ..एकदम पूरा आठ इंच अन्दर ...

दी के गाल पूरे तरह फूले फूले लंड से , आँखे भी चूसते हुए बस उबली पडी रही थीं ...सुपाडा उनके गले से बार बार रगड़ रहा था

और तभी मिश्रायिन भाभी की आवाज गूंजी ...

हे खाली मुंह में लेने की नहीं हुयी थी आगे या पीछे ..घोंटना होगा ...पूरा ..

दी ने जोर जोर से न में सर हिलाया ...मैं सोच सकता था क्यों ..अभी कुछ देर पहले तो उनकी रामप्यारी भाभी की पूरी मुट्ठी घोंट चुकी थी ..दर्द के मारे अभी भी बुरा हाल होगा वहां तो ...

लेकिन मंजू ने बात सम्हाल ली ...

दी के चूतड प्यार से सहलाते हुए वो बोली ...अरे सुन घबडा मत आगे नहीं तो पीछे से ले ले ना ..अरे हमरी नाही तो अपनी भाई की सोच ....बचपन से तेरे नाम पे मुट्ठ मारता होगा ..

मंजू का बात एकदम सही थी

तीन चीजें एक साथ हुयीं ...

मंजू की बात सुन के मरे ख़ुशी के मैंने जोर जोर से दी का मखमली मुंह चोदना शुरू कर दिया ..

दी के निपल जोर से पिंच करके मरोड़ते हुए रीतू भाभी बोलीं ..अरे लाल्ली ..खूब थूक लगा के चाटना ...यही चिकनाई मिलेगी ..हम कोई क्रीम वरिम नहीं लगाएंगी ..

( गुड्डी मुंह बना के बोली ..सरसों का तेल भी नही ...और रीतू भाभी ने साफ मना कर दिया )

और मंजू ने पूरी ताकत से अपनी तरजनी , दी की गांड में घुसेड दी लेकिन एक पोर ही जा पायी ...

मंजू दी से बोलीं ..

अरे का नंदोई जी तोहार पिछवाड़े ...एक दिन भी ना मरवाई हो का ..

दी ने मेरा लंड मुंह में घोंटे घोंटे , जोर से ना में सर हिलाया ..

मंजू अभी भी दी की गांड में ऊँगली गोल गोल घुमा रही थीं ....और उन के जोर और प्रैक्टिस के बावजूद
..सिर्फ दो पोर अन्दर घुस पाया था ..

मंजू ने फिर दी से पूछा ..." का तोहार इ अभी कोरी हौ "

दी ने जोर से हाँ में सर हिलाया ....और रीतु भाभी ने मुझे इशारा किया ...


मैंने दी के मुंह में से लंड बाहर खींच लिया ...

बिना बोले उन्होंने और मंजू ने पास पड़ी एक नीची मेज पे दी को झुका दिया ..

दी भी जानती थीं अब क्या होना है ...

मैं भी जानता था की मुझे क्या करना है ..

दी आलमोस्ट डागी पोजीशन में थी , मस्त चूतड हवा में उठे हुए ..और अपने दोनों पैर उन्होंने खुद फैला लिए थे ...

रीतु भाभी अब दी के नितम्ब सहला रही थीं ...फिर उन्होंने और मंजू ने मिल के उसे फैला दिया ...

पीछे से मिश्रायींन भाभी की आवाज आई .. लाला ....अगर एक बार में पूरा खूंटा अन्दर ना गया ...त सोच लो मैं आउंगी ..और मेरी मुट्ठी तेरी गांड के अंदर ..."

मैं सिहर गया ..

अभी कुछ देर पहले ही तो देख चूका था कैसे उन्होंने भाभी और मंजू के साथ मिल के दी की फिसटिंग की थी ...तो मेरी क्या औकात थी ...

दी स्टूल पे झुकी ..एकदम कुतिया वाले पोज में , दोनों टाँगे फैली ...गांड हवा में उठी ...मुझे देख के हलके से मुस्करा दी ...

मानो कह रही हो आ जाओ भैया हर साल राखी में जिस जिस 'मिठाई ' को देख के ललचाते थे ...आज सब तेरे हवाले ...मन भर के चखो ...


मुझे फिर अपने ग्यारहवीं बारहवी के क्लास के दिन याद आगये ..

आज कल जिस तरह रंजी से शहर में आग लगा रखी है न बिलकुल वही हालत दी की थी ...बल्कि ...ठीक ठीक बोलूं तो

दी के मस्त चूतडों की कसी पजामी में जब वो चूतड , मटकाते हुए निकलतीं ना ...खूब भारी भारी ...क्या कटाव ..देख के सारे लड़कों के खड़े हो जाते ...

और आज वाही पिछवाड़े का दरवाजा मेरे लिए खुला ..दावत देता ...

मैंने एक पल के लिए सोचा लेकिन बिना किसी लूब के ..वो भी दी की कोरी गांड ...

पर भाभिया किस मर्ज की दवा होती हैं ...मेरा काम काम रीतू भाभी और मंजू ने आसान कर दिया ..एक दांये ..दूसरा बांये ...

दोनों ने दी के छोटे से पिछवाड़े के छेद में अपना अंगूठा डाल के, फिर पूरी ताकत से अपनी अपनी ओर फैला के , छेद चौड़ा कर दिया ...जहाँ एक सिर्फ दरार सी दिख रही थी अब छोटा सा गोल गोल छेद साफ दिख रहा था ..

 बाकी का काम गुड्डी ने आसान कर दिया ..

उस ने अपने मुंह में खूब थूक का एक बड़ा सा गोला बनाया और ठीक ..दी की गांड के छेद पे निशाना लगा के जोर से ...सारा थूक अन्दर ...

.और मैं कुछ सोचता सोचता ...उसके पहले दी की गांड के छेद पे गुड्डी ने मेरा तन्नाया लंड सटा दीया ..सुपाडा एकदम सेंटर पे जहाँ गुड्डी के थूक का गोला गया था ...


कुछ मैंने जोर लगाया ...और उससे ज्यादा गुड्डी ने लंड पकड़ कर पुश किया ...और थोडा सा सुपाडा अन्दर ...

एक बार सुपाडे को गांड की महक मिल जाय ...फिर तो ...कमर पकड़ के मैंने अब खुद एक दो बार पुश किया ...

लेकिन गुड्डी अभी भी लंड के बेस पे पकड़ के ठेल रही थी पूरे जोर से ...

और रीतू भाभी , और मंजू अभी भी दी की गांड खूब जोर से चियारे खड़ी थीं ...

अब आधे से ज्यादा सुपाडा अन्दर था ...

गुड्डी एक हाथ से मेरा लंड पकडे थी दुसरे हाथ से मेरा नितम्ब दबाते ...हलके से किस कर के बोली

जैसे आज तेरी दी की तुझे दिलवा रही हूँ ना तेरी सारी ...बहनों की दिलवाउंगी ,,,चूत भी गांड भी ..सब ...चोदना सब की ... बहुत तडपते थे ना

रीतू भाभी तो और एक हाथ आगे ...बोलीं ..अरे गुड्डी सिर्फ बहनों की ....क्यों ...

ऊप्स गलती हो गयी ...गुड्डी बन के बोली ...

जो गुड्डी बोल रही थी ....मैं समझ रहा था ..और कुछ उसका असर ..और उस की उंगलिया अब जिस तरह से मेरे नितम्बों की दरार के बीच छेड़ रही थी ...उसका असर ...

ये हुआ की मैंने हचक के दी की गांड में तीन चार धक्के अब पूरी ताकत से मारे और मेरा मोटा सुपाडा अन्दर…

जोर से उनकी चीख निकल गयी ...लेकि उस होली की हुड़दंग मैं कौन चीख सुन रहां था ..

और अब हम सब समझ गए थे की दी लाख चूतड पटके ...एक बार जो ये हलब्बी ,मोटा सुपाडा अंदर धंस गया था तो लंड ..बाहर नहीं आ सकता था

और गुड्डी , मंजू और ...रीतु भाभी की छेड़ खानी और बढ़ गयी थी ...

" देखा ..जो इनके शर्ट पे लिखा था पिछवाड़े ...झूठ नहीं लिखा था ...देखो कितना रस ले ले के अपनी बहन की ..." गुड्डी मंजू से बोली ...और मंजू ने हड़का लिया ...साफ साफ काहें ना बोलती की की का लिखा था ...

' बहनचोद ...' गुड्डी भी पूरे होली के जोश में थी .... वो बोली
,...
"देखा भरे आँगन में सबके सामने अपनी बहन की चोद चोद के राखी की कीमत एडवांस में दे रहे हैं ..."


"ता खाली बहनचोदे बनंगे ..." मंजू ने और आग लगाई ...

" " नहीं नहीं ...ऐसा कैसे होगे ...इनके घर में माल की कमी है का ...अभी आगे आगे देखो ..." रीतू भाभी ने आग में घी छोड़ा ....

उन सबों की बातों का असर ये हुआ की दी के मस्त मम्मे पकड़ के ..अब मैं हचक के पेल रहा था ..सूत सूत कर के लंड आगे बढ़ रहा था ..दरेरता , रगड़ता , घिसटता ...

सिरफ गुड्डी ने दी की गांड में जो थूक का गोला दिया था ..बस वही चिकनाई थी ..इसलिए ...जोर से रगड़ रहा था ..और अब गांड के छल्ले ने भी लंड को जकड़ लिया था ...आगे घुसना ..मुश्किल हो रहा था ...


मंजू ने शायद मेरे मन की बात समझ ली थी ...वो बोली ...

अरे लाला एक धक्का और मारा , हचक के अपनी बहन की गांड में ..बस ....एकरे बाद तो चिकनाई की कौनो जरूरते नाहीं ..अंदर तो मक्खने मक्खन भरा हौ ..चिक्कन चिक्कन ...एक बार उ लग गया तो ...

मंजू की बात में दम था ...और मैंने फिर दी की चूंची पहले खूब मसली ..और फिर पूरी ताकत से उनकी कमर पकड के तीन चार धक्के मारे ...गांड का छल्ला पार ..

अब मेरे पीछे का मोर्चा रीतू भाभी ने सम्हाला था ...होली में अब उनका ब्लाउज भी खेत रहा ...और साडी उन्होंने सरका दी ...या सरक गयी पता नहीं ...

उनके खूब कड़े कड़े गद्दर रसीले जोबन ..सीधे मेरी पीठ पे रगड खा रहे थे ...बल्कि वो जान बूझ के रगड रही थी

..जीभ की नोक मेरे इयर लोबस को छु रही थी ...और एक हाथ मेरे सीने पे फिर से रंग लगा रहा था मेरे निपल को छेड़ रहा था ...

और दूसरा हाथ मेरे पैरोंके बीच से अन्दर मेरे बाल्स को छु रहा था , सहला रहा था रंग लगा रहा था ...

मेरा आधे से ज्यादा लंड अभी भी बाहर था ...और रीतू भाभी उस पे लाल गाढ़ा रंग लगा रही थीं ..

अब तक भाभियों ने ना जाने कितने कोट ...लाल नील काही रंग के वहां लागा दिए थे ...

गुड्डी और मंजू भी वहीं थे ...
रीतु भाभी गुड्डी से बोली ...

चल तूझे एक जादू दिखाती हूँ ...दी के गांड की और इशारा करते हुए वो गुड्डी से बोलीं ...

गुड्डी ने सर हिला के कहा ...बताइये ना ....

मेरे लंड की ओर इशारा कर के वो बोलीं ..बोल किस रंग का हैं अभी ...

चितकबरा ..हँसते हुए गुड्डी बोली ...लाल काही नीला ..लेकिन लाल ज्यादा ..

और अब इस जादू की पिटारी में से होके लौटेगा न ता बस एक रंग का हो जाएगा ...रीतु भाभी बोलीं ..


 गुड्डी नहीं समझी ...लेकिन मंजू समझ गयीं ...

और वो रीतू भाभी से हंस के बोलीं ...अरे एह को अभी इस पहेली का जवाब मत बताओ ...थोड़ी देर में खुदे देख लेगी ...
….

तब तक मंजू किसी भाभी की सहायता के लिए चली गयीं ...और बचीं गुड्डी और रीतू भाभी ...

अब गुड्डी ने आगे का मोर्चा सम्हाला था और रीतू भाभी ने पीछे का ...

गुड्डी दी के कड़े कड़े चूंचियों की मसलाई कर रही थी ...कोई मर्द भी क्या ऐसे करेगा ...

लेकिन आखिर दी गुड्डी की ननद तो लगती ही थीं भले बड़ी लगें ..और उस से भी बढ़कर अभी कुछ ही देर पहले तो रंगों के नाम पे ...गुड्डी के उभारों की इसी तरह रगड़ाई ..

दी और वो समोसेवाली कर रही थीं मिल के अप ने ननद के हक़ को पूरे जोर और जोश से निबाहते ..

और रीतू भाभी मुझे पीछे से दबोचे ...उन के रंग से डूबे उभार ...मेरे पीठ से होली खेलते ...उनका एक हाथ मेरी बाल्स को सहला रहा था और दूसरा नितम्बों की दरार्रों के बीच ...

उन्होंने दी को छेड़ा ...क्यों मजा मरवाते हुए अपने भैया से ...

गुड्डी ने तड़का लगाया ..

मजा तो आ ही रहा होगा ...पुराना याराना है लेकिन फिर बोली ...एक बात है ..इनकी बहनों का एक से मन नहीं भरता ...जब तक एक साथ साथ तीन तीन न हों ...वो जो रंडी ..मेरा मतलब रंजी है ना ...मैंने उससे बोला बनारस चलेगी तो तेरे ऊपर ऊपर एक साथ तीन तीन चढ़ेंगे ...और तीन लाइन लगा के इन्तजार करेंगे तो इतनी ..तो वो बोली ...

अरे तेरे मेरे मुंह में घी शक्कर ..

मैंने उसे चिढाया ..अरे घी शक्कर या ...तो वो बात सही कर के बोली ...

मेरा मतलब ...मोटे मोटे लंड ...मुझे तो मजा आ जाएगा .. दो के तो मजा ही नहीं आता

गुड्डी की बात एक दम सही थी ...वो और रंजी जब बात करती चल रही थीं ...तो मैं पीछे था ..ये सारी बात मैंने सुनी थी ...

लेकिन रीतू भाभी ने दी के क्लिट को रगड़ते हुए बोला ...

अरे तो तू क्या समझती है ...मेरी इस छिनार ननद के यार यहाँ कम है ...अरे मेरे जित्ते देवर हैं सब इस इस के यार हैं ...अभी जब यहाँ से होली कल के कालोनी में वापस चलेंगे ना तो देखना वहां ये लम्बी लाइन लगी होगी इसके जोबन मर्दन के लिए

गुड्डी ने भी साथ साथ दी के निपल पिंच किये और बोली ...

लेकिन इकलौते राखी बंधवाने वाली भाई का रिश्ता तो अलग ही है

" अरे तभी तो उसे अपनी कच्ची कुवारी गांड दे रही है ना ...अपने भैया के लिए ससुराल से कोरी बचा के ले आई ...

और इसी के साथ रीतू भाभी ने जो हरकत की वो ( उ न्होंने मेरी गांड में आधी तरजनी पेल दी ) या उन की बातो का हुआ की मैंने खूब जोर से धक्का मारा ...और अब आधे से ज्यादा लंड दी की गांड में था .


दी की एक चूंची अब गुड्डी के हाथ में थी दूसरी मेरे और मैं हचक के पेल रहा था उनकी गांड में ...लेकिन कुँवारी सीलबंद गांड बिना लूब के ...मैं सुपाडे तक निकाल के डाल रहा था लेकिन आधे लंड से ही ...

रीतू भाभी ने ये बात पकड़ ली ..और मेरे कान में बोली लाला ये बेईमानी नहीं चेलेगी पेल साल्ल्ली की गांड में पूरा हलब्बी लंड ...और साथ ही रीतू भाभी ने हचक के , अपनी पूरी ऊँगली मेरी कसी गांड में ठेल दी ...और फिर बोली ...बुलाऊं ...मिश्रायिन भाभी को पूरी मुट्ठी ठेल देंगी तेरी गांड में

कुछ उनकी बात का असर कुछ डर ...और मैंने अबकी सुपाडा तक निकाल के पूरी ताकत से पेला तो करीब सात इंच दी की गांड में घुस गया
दी बहूत जोर से चीखीं

मैं दी की गांड हुमच हुमच के मार रहा था और मेरे दोनों हाथ जोर जोर से उनकी चूंची मसल रहे थे ...

मेरी आँख के सामने बार बार वो नजारा घूम जाता था ... राखी के दिन दी झुक के , मुझे राखी बांधती थीं ...और कैसे मेरी निगाहें , उनके टाप फाड़ते किशोर उभारो को सहलाती रहती थीं ..उस समय भी दी के जोबन उन के क्लास की लड़कियों से बीस ही थे ...

दी जब मस्त चाल से चलती थीं उन की लम्बी चोटी उन के मोटे मोटे चूतड की दरार के बीच रगड़ खाती थी ...उस समय वो बारहवें में पढ़ती थीं ...तो लड़के पीछे से गाते थे ...

हमने माना हम पर साजन जोबनवा भरपूर है ...

और दी कभी उन्हें तिरछी नजरिया के बाण मारतीं तो कभी अपने मस्त भारी चूतड मटका के घायल कर देतीं ...

और राखी के दी दिन ने मेरे ललचाये हाथों को अपने टाप के ऊपर से जोबन छूने दिए थे ...खूब कड़े ...एकदम दहक गए थे मेरे हाथ ..

और ये सोच के मैंने एक बार फिर ..उनकी मस्त चूंची को दबा दिया ...अब तो और गद्दर हो गए थे शादी के बाद ..
दी ने शिकायत भरी कुछ ख़ुशी वाली निगाह से देखा मुझेऔर जवाब में सुपाडे तक लंड निकाल के एक हलब्बी धक्का दे मारा ..सीधे दी की गांड के पिछले हिस्से से जा के टकराया

दी की गांड में मेरा लंड सटासट जा रहा था और उससे भी ज्यादा जोश में मेरी गांड में ...रीतू भाभी की ऊँगली और साथ में मेरी पीठ पर उनकी मस्त चूंचियों की रगड़ाई ..

तभी मेरे लंड पे दी की गांड के ...गांड रस का एक छोटा सा टुकड़ा ...मक्खन ...नजर आया ...और मुझसे पहले जैसे रीतू भाभी की पैनी निगाह ने उसे देखा और मेरे कान में वो कुछ बुद्बुदायीं ...

मैं उनका इशारा समझ गया ...लेकिन रीतू भाभी भी ना ...

उन्होंने मेरे दी की गांड में धंसे लंड का बेस पकड़ा ...और उसे लगीं गोल गोल घुमाने ...पहले धीमे धीमे ...फिर तेजी से ...फिर उलटी दिशा में ...मेरा लंड अभी आधा बाहर था ...

उनकी देखा देखी अब मैंने वही काम शुरू किया और मेरा लंड मथानी बन दी की गांड मथने लगा ...

और मथने से जो होता है वही हुआ ...दी की गांड से मक्खन निकलने लगा ....


 मेरे लंड पे कुछ गिजगिजा सा , लसलसा सा महसूस हुआ ...गीला गीला ...लेकिन उसके असर से मेरे जंग बहादुर अब दूनी तेजी से दी की गांड मारने में लग गए ...

रीतू भाभी का भी एक हाथ अब अपनी प्यारी ननद की सेवा में लग गया था ...उनकी दो उँगलियाँ दी की बुर में आगे पीछे हो रही थी ..और गुड्डी अभी भी जोबन रगड़ाई में लगी थी ..

तभी रीतू भाभी ने गुड्डी को आवाज दी ...

' जरा चल इधर आ ..तूझे एक जादू दिखाती हूँ ...मैंने तुझसे कहा था न की मेरी इस छिनार नन्द के पास एक जादू की पिटारी है देख ..."

गुड्डी भी दी की गांड की ओर आगई ...और रीतू भाभी ने फिर पूछा ..हम लोगों ने इस की पिचकारी का रंग क्या क्या कर दिया था
गुड्डी हंस के बोली ...अरे एक रंग हो तो बताऊँ ...लाल काही नीला ...

और अब देख इस पिटारी का जादू ...हंस के रीतु भाभी बोलीं ...


और उसी समय दी की कसी अब तक कुंवारी , सटी सटी गांड से मेरा मोटा लंड निकला ...एकदम मक्खन ..दी की गांड के रंग में रंगा ...

सिर्फ एक रंग ..दी के गांड के गांड रस का रंग ....

गुड्डी और रीतू भाभी दोनों इतने जोश में आगयीं की ...दोनों ने एक साथ दी की चूत पे हमला बोल दिया ..

एक क्लिट दबाती तो दूसरी बुर में दो दो उंगली डाल के चोदती ..

थोड़ी ही देर में दी झड़ने लगीं ...

लेकिन वो दोनों रुकी नहीं ...रीतु भाभी तो खैर ..रीतू भाभी थीं ...लेकिन गुड्डी भी कम नहीं थी ...और दी का रिश्ता भी तो ननद भाभी वाला ही था

दी दुबारा झड़ने लगीं ...और जब वो झड़तीं तो साथ साथ ..उनकी मस्त गांड मेरा लंड एकदम दबोच लेती , निचोड़ लेती ...कस के जैसे कई पूरी ताकत से मुट्ठी में लंड दबा रहा हो ...

पागल हो के मैं भी मस्ती में तेजी से उनकी गांड मार रहा था ...

और जब वो तीसरी बार झड़ीं

तो साथ में मैं भी ...लेकिन इसमें बहुत कुछ हाथ रीतु भाभी का भी था ....उन्होंने अब मेरी गांड में दो ऊँगली हुमच के पेल दी थी और साथ साथ ही मेरे प्रोस्ट्रेट को जम के रगड दिया था ...


बस गिरते हुए मैंने बेहोश नहीं हुआ मजे से ..बाकी सब कुछ हो गया ...

मेरा लंड दी की गांड में पूरी तरह धंसा था ...और दोनों हाथ उन की चूंची पे ..

मुट्ठी भर गाढ़ी रबड़ी तो दी की गांड में गयी ही होगी ...

और एक बार फिर रीतू भाभी की मेरी गांड में धंसी ऊँगली ने दुबारा प्रोस्ट्रेट को दबाया ...तो फिर ...

और साथ में गुड्डी भी कभी मेरे पेल्हड़ ( बाल्स) सहलाती ...तो कभी उसे दबा देती ...


जब मैंने लंड बाहर निकाला ...तो उसपर पूरी तरह मक्खन मलाई ...लिपटी चिपटी ...

दी खड़ी हुयीं ...मुझे कुछ लजा के , कुछ मजे से देखा और कुछ दूर हट के खड़ी हो गयी ...और मुझे मीठी मीठी निगाहों से देख रही थीं .


तब तक मिश्रायिन भाभी मैदान में आ गयी ...और मुझसे पूछीं ..' हे अपनी बहना को मक्खन मलाई खिलाया की नहीं '


 उनकी बात समझ के मैंने मुस्कराते हुए ना में सर हिलाया तो वो हडकाते हुए
बोलीं
" लाला ...नौसिखिये हो अभी ...अरे गांड मारने के बाद जब तक गांड मरवाने वाली का मुंह जबरन ना खुलवा के ..उससे मक्खन मलाई न चटवाया ...तो गांड मारने का मजा पूरा नहीं होगा ...

गुड्डी मुझे नमकीन निगाहों से देख रही थी ..
मैंने उस की ओर देख के बोला ...भाभी ..आगे से पक्का याद रखूँगा ...

गुड्डी की नीम शहद निगाहों ने मुस्करा के बिना बोले कहा ..धत ...बीती रात की यादें ..और आने वाली रातों के सपने अभी भी उसमें तैर रहे थे ...

मिश्रायिन भाभी को कहाँ फुरसत थी इन चार आँखों के खेल देखने की ..वो और रीतू भाभी ..उन दोनों ने झपट के दी को फिर से पकड़ा , निहुराया ..और जब तक वो बिचारी समझें ...मिश्रायिन भाभी ने दी की गांड को दोनों हाथों से चियारा और

रीतू भाभी की दो उंगलिया ...जड़ तक गांड के अन्दर और उसे मोड़ कर चम्मच की तरह स्कूप बना के ...

और सबसे पहले वो 'समोसे वाली ' पकड़ी गयी ...रीतू भाभी ने गुड्डी को भी हंकार लगायी ...

और फिर उन दोनों ने मिल के ...गुड्डी ने गाल दबा के उस किशोरी का मुंह खुलवाया ...और रीतू भाभी ने दी की गांड से निकली दोनों ऊँगली सीधे उसके मुंह में

गुड्डी ने चिढाया ..बिचारी ने मंजन नहीं किया था ना सुबह ...जरा ठीक से मंजन करवाइयेगा ..इसके मोती के से दांतों पे ...

वो छटपटाती रही ...लेकिन गुड्डी की चंगुल से बच निकलना ...वो बिंदास बनारसी बाला ...और अब ये आंगन तो उसी का होना था ..हर साल ..होली में ननदों के साथ हुड़दंग ...

और गुड्डी - रीतू भाभी की देखादेखी ...बाकी भाभियों ने भी ...

बस ननदें ...पकड़ी जातीं , निहुराई जाती ...और ऊँगली पहले नीचे अन्दर ...और फिर मंजन ..

मैं बरामदे में बैठी दी के साथ जा के आँगन में हो रही होली का हुडदंग देखने लगा ...

दी ने खुद मेरे कंधे पे हाथ रख के कहा ...वास्तव में तू बड़ा हो गया था ...

और जैसे उन्होंने मेरे आँखों की भाषा समझ ली हो ..बोली मैंने तो तूझे पहले ही लिफ्ट दी थी लेकिन तू .ही

दी की बात काट के मैं खुद बोला ...बुद्धू था मैं ..

मेरे गाल पिंच करती ...वो बोली ...वो तो तू अब भी है ...फिर मेरे दोनों सर को पकड़ के सीधे होंठो पे कचकचा के किस करते बोलीं ...

"गलती मेरी है , बड़ी मैं हूँ उस दिन राखी के दिन जब तुम ना नुकुर कर रहे थे ...न वहीँ पकड़ के तुझे रेप कर देती ..अभी कब तक हो तुम .."
"
"चार पांच दिन तो हूँ ही ...हाँ रंगपंचमी के पहले बनारस जाना है ...रंग पंचमी वहीं ..." मैं बोला ..
दी का हाथ मेरे कंधे पे था ...और अब मैंने हाथ उनके कंधे पे रख लिया था ..उन्होंने अपनी साडी फिर लपेट ली थी , लेकिन उभार कुछ बाहर थे , कुछ झलक रहे थे ...मैंने भी अपना हाथ उनके कंधे पे रख दिया ..

मेरी उंगलिया फिर उनके उभारों को देख के ललचा रही थीं ...

और दी ने जैसे मेरे मन की बात समझ के मेरे हाथ खिंच के सीधे अपने मस्त उभारों के ऊपर और मेरे इयर लोबस को चूम के बोलीं ...

" फिर तो तेरे जाने के पहले ...एकाध बार कबड्डी हो सकती है ..."

मेरे मन की बरसों की साध ...

" एकदम दी सिर्पफ एकाध बार क्यों ..."
दी ने मेरा हाथ खिंच के अपने उभारों पे दबाते हुए बोला " तू अभी भी बहूत भोला है , शर्मीला ..ससुराल में नाक कटवाएगा हम लोगों की ..

और मेरे हाथों ने अपना काम शुरु कर दिया ...उभारों की नाप जोख का

उधर ननद भाभियों की धमाचौकड़ी ख़तम हो गयी थी ..एक बार फिर से इंटरवल सा था सब लोग फिर ठंडाई , गुलाब जामुन , गुझिया और कोल्ड ड्रिंक ( दारु से लेस्ड ) ख़तम करने में लगे थे .

तब तक गुड्डी आ के धमम से हम दोनों के पास बैठ गयी ...और दी को आरेंज जूस का एक कार्टन पकड़ा दिया और हँसते हुए बोली

"आपका बहुत आरेंज जूस दब दबा के हम लोगों ने निकाल लिया है ...थोडा भरपाई कर लीजिये "

दी ने सील बंद देख के बिना डर , जब तक मैं रोकूँ , कार्टन खोल के सीधे मुंह में गडक ...और फिर मेरी ओर इशारा कर के , गुड्डी के फटे टाप से बाहर झांकते , रंग लगे कबूतरों को मसल के चिढाया ..

" तेरा तो आरेंज जूस निकालने का परमानेंट इंतजाम कर दिया है हम लोगो ने ..."

गुड्डी कुछ शरमाई कुछ झिझकी ...लेकिन वो बिंदास बनारसी बाला ...बोली ..." आपके मुंह में घी शक्कर ..लेकिन चलिए आप भी क्या याद करिएगा ...होली के मौके पे वो जूसर आपको दिया ..."

मेरे हाथ भी भी दी की नारंगियों पे थे ...

दी ने चार पांच बड़े बड़े घूँट ले के आरेंज जूस का कार्टन मेरी ओर बढ़ा दिया ...

मैं उन्हें कैसे बताता की इसमें आरेंज जूस से ज्यादा आरेंज वोदका मिली है ...जो भांग मिली ठंडाई से दस गुना ज्यादा नशीली है ..
गुड्डी ने और चढ़ाया ...कैसे भाई हो बहन इत्ते प्यार से दे रही है और तुम नखड़ा दिखा रहे हो ...

मैंने ले लिया ...

तब तक रीतू भाभी भी मेरे दूसरी ओर आके बैठ गयीं ...उनके हाथ में भी वाही आरेंज वोदका मिली आरेंज जूस का कार्टन था और उसे पीते हुए वो बोलीं ...

सिर्फ बहन की ही लेते हो या भाभी की भी ...और उन्होंने अपना आरेंज जूस का कार्टन बढ़ा दिया ...





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