Saturday, March 8, 2014

FUN-MAZA-MASTI फागुन के दिन चार--84

FUN-MAZA-MASTI

   फागुन के दिन चार--84
गतांक से आगे ...........

8-10 मिनट हम लोग वैसे ही पड़े रहे फिर थक कर करवट होगये ...लेकिन अभी भी मेरा लिंग उसकी चुन्मुनिया दबोचे थी ...जैसे न जाने कितनी दिन बाद मिली हो,

बात उसी ने शुरु की ...

बल्कि मैंने ....
वो आँख खोल कर टुकुर टुकर मेरी ओर देख रही थी ...मुझसे नहीं रहा गया। और मैंने उसकी बड़ी बड़ी पलको को चूम लिया ..और फिर नदीदे होंठ ...पलकों के बाद गाल और फिर रस भरे होंठ ....

लेकिन बोली वो ही ...उसने अधखुली खिड़की के बाहर की ओर इशारा किया ...

फिर बोली ...मामा ...

मैंने गुड्डी को अपनी बाहों में कस के समेट लिया और खिड़की के बाहर इशारा कर के बोला ..झांको मत ..ये मेरा माल है , सिरफ मेरा ...नो शेयरिंग ...

लेकिन मुझे फिर शरारत सूझी ...उसके गदराये उभारों को चूम के मैंने पूछा ...
" हे ये तेरे मामा लगते है ..."

" और क्या ...खिलखिला के के वो किशोरी बोली और बाहर लगे हर सिंगार पर चांदनी झरने लगी ...चंदामामा ...उसने बात पूरी की . " चन्दा मामा मेरे मामा "

"तभी तेरी शकल उनसे मिलती है ..." मै हंस के बोला।

" और क्या ..." जैसे अपनी बात पर मुहर लगाने के लिए उसने मुझे किस कर लिया।

" तेरा चन्दा जैसा मुखड़ा ..." उसके गुलाबी गालों पे हाथ फेरेते मैं बोला ...और ये दो पूनम के चाँद मेरे हाथ में ....और मैंने उसके दोनों खिलते चाँद, रसीले जोबन अपने हाथ में ले के दबा दिया ..."

" और क्या मेरे मामा है ...तभी तो मेरी शकल उनसे इतनी मिलती है ..." इतरा के वो बोली।

" मतलब समझती हो इसका ...तेरी शकल तेरे मामा से मिलती ही, " उसकी नाक पकड़ के मैंने पूछा ..'
" हाँ ..उन्नुन्न्न " वो बोली।

" मतलब साफ है ...इसका मतलब है तेरे मामा ने तेरी माँ को हचक के चोदा ..."

" हे क्या बोलते हो,..." वो मुंह फुला के बोली ..

" अरे तो क्या हुआ, तुम्ही तो कह रही हो ....तेरी ही बात का मतलब बता रहा हूँ की ...अगर तेरी शकल तेरे मामा से मिलती है , तो इसका मतलब ...तेरी मम्मी ने तेरे मामा यानी अपने भैया से चुदवाया ...लेकिन

इसमें बुरा मानने की क्या बात है ..असली मतलब तो ये ही की उसमे से तेरा ऐसा मस्त माल निकला है ना, वरना सोचा मेरा क्या होता ...." मैंने चिढाया .

गुड्डी दना दन मेरे सीने पे बनावटी गुस्से से मुक्के पे मुक्के मारे जा रही थी ..लेकिन मैं कहा चुप होने वाला था।

" अरे यार सच्ची बात का क्या बुरा मानना ...तुम्ही ने कहा था की तेरी शकल ...तो इसके मतलब तेरे मामा बहनचोद है ....अरे यार तू अपनी बहनों में सबसे बड़ी है ...तो कही तेरे मामा ने अपनी बहन के ऊपर शादी से से पहले ही तो नहीं ..तुम्हारी ने भी सोचा होगा की चलो एक बार चुदवा लेती हूँ ...प्रकिट्स हो जायेगी ...भैया के साथ ..."

" हे मम्मी तक मत जाओ वरना मैं भी ..." मुंह फुला के वो बोली ..

" तेरी मम्मी की ...चूत का ...." मैं कहा रुकने वाला था ...

" क्याआआआआआआआ ..." वो चीखी और अपने लम्बे नाखून मेरे सीने में गडा दिए ...
" अरे यार लगता है ...बिल्ली थी क्या उस जनम में ...मैं तो सिर्फ ये कह रहा था की ...तेरी मम्मी की चूत का मैं ...आदर करता हूँ जिससे तेरी ऐसी मस्त लड़की निकली ..जिसने मुझ जैसे सीधे लड़के को चकर घिन्नी बना के रख दिया ..."

अब वो मुस्कराई और मेरा कान खीच के बोली , " चकर घिन्नी तो तुम हो ही ...किस्मत अच्छी है की मैं मिल गयी शुकर मनाओ ...बहोत मेरी मम्मी की खिंचाइ कर रहे थे ....ना ये बताओ ...." और अब उसने कस के जंगबहादुर को पकड़ के दबा दिया ...वैसे भी वो थे तो उसी के हाथ में ...

कुछ छेड़ छाड़ का असर ...और कुछ गुड्डी के नरम हाथों का ( वो पहला मौक़ा पाते ही उसे पकड़ लेती थी ..और इत्ती देर से गुड्डी उसे पकडे हुए थी ) वो एकदम तन्नाये हुए थे

उसकी लम्बी नरम उंगलिया , सुपाडे को सहला रही थीं , वो बोली ,
" ये इत्ता लम्बा मोटा है ...कहीं ...तुम्हारी ...किसी गधे घोड़े के पास तो नहीं ..." और खिलखिलाने लगी।

गुड्डी से पार पाना मुश्किल है।

मैंने बात बदलने में ही भलाई समझी

चाँद की ओर इशारा करते हुए मैंने कहा , " मुझे तुम्हे तुम्हारे मामा से बचा के रखना पडेगा ...क्या पता उन का दिल तेरे पर भी आ जाए ..पहले तो अपनी बहन को चोदा ...और फिर अब भांजी को ..."

और मैंने उसे कस के बांहों में भींच लिया,
" तुम भी ना ...कुछ भी ..." वो कुनमुनाई।
लेंकिन मैं अब छोड़ने वाला नहीं था ..मैंने एक बार कस के उसके निपल को काट लिया और फिर बोला ...

" मैं झूठ बोलता हूँ ...अच्छा सच सच बताओ ...वो जो तुम्हारी ममेरी बहन है नेहा,* तुमसे थोड़ी छोटी ही होगी ...उसका अगवाडा ..पिछवाडा सब ...उसके मामा ने ...बोलो ...और सब स्वाद भी चखा दिया ...अब तो सबको मालूम हो गया है ...एक एक बात ..." मैंने पूछा .

मेरे इयर लोबस पे किस करती हुयी वो बोली ...

" अच्छा जी तो जनाब की नजर अब नेहा पे पहुँच गयी ..."

" और क्या तेरी बहन है ...रिश्ता ही ऐसा है ..मैं तो छोटी बड़ी भी नहीं देखूंगा ...जितनी तेरी मायके वालियां है सब पे नंबर लगाउंगा ...किसी को भी नहीं छोडूंगा ..." मैं क्यों चुप रहता ,

गुड्डी पल में तोला पल में माशा ..अब उस ने फिर पलटी खायी ...

" और क्या क्यों छोडोगे ..और अगर छोड़ा तो मैं ..क्या छोडूंगी तुमको ..." और जैसे अपनी बात पे जोर देने के लिए मेरा लिंग कस के दबा दिया।

" तो क्या नेहा वाली सारी बातें,...." मैंने उससे राज जानना चाहा ..

" अरे जो तुमने पढ़ा है ...वो तो कुछ भी नहीं है ...गुड्डी बड़ी जोर से खिलखिलाई ....जाड़े की छुट्टियों में आई थी ना बनारस , रात में हम लोग एक ही रजाई में सोते थे ..सोते क्या थे रतजगा करते थे, सब बातें उसने बतायी ..पहले तो मुझे भी विशवास नहीं हुआ लेकिन उसके मामा ने उसका एक एम् एम् एस बनाया था

...सब कुछ था उसमें ...जो तुम नीली पीली पिक्चरें देखते हो ना वो कुछ भी नहीं है उसके आगे ..पहले तो उसके मामा ने सिखाया लेकिन जब एक बार उसको आदत लग गयी फिर तो खुद ही ..."

मैं चुपचाप सुन रहा था ...सिर्फ इसलिए की मेरे होंठ अब उसकी चूंची का रस लेने में बीजी थे और एक उंगली उसकी राम प्यारी के अन्दर ...

गुड्डी ने फिर पलटा खाया ...लेकिन उसके पहले उसने कचाक से मेरा गाल काटा ....और बोली ..

" अपनी बहन के यार ....नेहा नेहा कर रहे हो ...ना वो रंजी है ना तेरी ...बहन कम माल ( ये भाषा उसने भाभी से सीखी थी ) ...बनारस जब जायेगी ना तो नेहा के साथ तो कुछ भी नहीं हुआ

जो रंजी के साथ होने वाला है ...उससे भी दस गुना ज्यादा ..लेकिन बनारस क्यों ...तुम हो ना छ फिट के,....तो फिर पहले तुम्हारे साथ ही उसके मामा ने जो उसके साथ किया वो मैं तुमसे रंजी के साथ .... करवाउंगी ....सीधे से ना माने तो जबरदस्ती ... क्यों ..."

" रंजी की तो बाद में देखि जायेगी ..पहली तुम अपना नंबर लगवाओ ..." कह कर मैं उसकी ओर झपटा

 .....लेकिन ..वो शैतान ..ऐसे मछली की तरह फिसली ...की ऊपर ..लेकिन मैंने उसकी जांघो को पकड लिया ...और सीधे मेरे होंठ ..उसकी चिकनी चमेली पर ...

जंगबहादुर को तो घाटा हो गया लेकिन होंठों का फायदा हो गया।

वैसे भी मैं चूत चटोरा तो हूँ ही ...

गुड्डी के गुलाबी रसीले निचले होंठो पर मेरे होंठ ...पहले तो मैंने 10-20 बार उन्हें चूमा ...आखिर इतना मजा दिया था उन्होने मुझे ..और फिर दोनों हाथों से उसकी चिकनी गोरी जांघो को मैंने अलग कर दिया ...

और फिर अपनी लम्बी जीभ निकाल कर उसकी लम्बी पुत्तियो को जो जो प्रेम गली की पहरेदार थीं, ऊपर से नीचे दसो बार चाटा ..

मस्ती के मारे गुड्डी की हालत खराब थी लेकिन फिर भी वो बोले जा रही थी ...

" चाटो चाटो ....अभी तो तुमसे तुम्हारे बहन कम माल का पिछवाडा भी चटवाउंगी ...वो भी एकदम अन्दर तक ....और फिर सटा सट गांड भी मरवाउंगी ..चीखने देना साल्ल्ली को ..बहूत गांड मटका के चलती है ना ..."

मैं कहना चाहता था तेरे मुंह में घी शक्कर ...बात तो गुड्डी की सॉलहे आने सच थी ...रंजी कुछ ज्यादा ही चूतड मटकाती थी ...लेकिन चूतड है भी उसके बहोत मस्त ...

लेकिन मेरा मुंह कुछ और काम करने में बिजी था। गुड्डी की चूत चूसने का,

क्या रसीली चूत थी और आज शाम को जो पारलर में झांटे साफ हुयी थीं,...एदक्म चिकनी हो गयी थी,.... मक्खन ...

मैंने दोनोहाथो से उसकी चूत फैला दी ...एकदम कसी , संकरी ..मस्त
और अब जुबान की नोक उस संकरी गली में घुसा दी ...

क्या स्वाद था अमृत ...मेरे दोनों होंठ गुड्डी की गुलाबी पुत्तियों को कसे हुए थे और जीभ अन्दर से मजे ले रही थी , लपलपाती ...चन्दा भाभी से मैं सीख चुका था ...चूत की शुरुआत में ही सारे मजे होते हैं ...और मेरी जीभ घूम घूम कर काम अग्नि दहका रही थी .

मेरी उंगलिया क्यों पीछे रहती तो अंगूठे और तरजनी ने क्लिट दबाने मसलने का काम शरू किया ...थोड़ी देर में ही वो मजे से फूल कर कुप्पा हो गयी।

और फिर मैंने गुड्डी की क्लिट को से रगड़ दिया ...

आग लग गयी ...
वो किशोरी अपने मस्त चूतड पलंग पर पटकने लगी ...
मैंने चूसने और जीभ से उसकी कसी चूत चोदने की रफ्तार तेज कर दी ...

ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह क्याआआ करते हो प्लीज ...बस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स ...
मैं कहाँ रुकने वाला ...लेकिन एक बार फिर मैं उसे किनारे पे ले जाता और फिर वापस ले आता
वो एक दम पनिया गयी थी ..

और फिर मैंने अचानक जुबान बाहर निकाल ली ...

गुड्डी सांस लेने के लिए रुकी लेने उस बिचारी को क्या मालूम था की मेरे तरकश में कितने तीर है ...
जुबान अब सीधे उसकी सूजी मस्ताई क्लिट को सहलाने लगी ....फिर होंठों ने भी ..मैं क्लिट चूस भी रहा था और चाट भी रहा था ..

लेकिन चूत को भी आराम नहीं मिलने वाला था .

मेरी पहले एक फिर दो उंगली अन्दर घुस गयीं ..पिछली चुदाई की मलाई अभी भी अन्दर तक थी इसलिए ये हो पाया ...और कभी अन्दर बाहर ..कभी गोल गोल,...

और फिर मैंने चन्दा भाभी की एक और सीख इस्तेमाल में लायी,

जी प्वाइंट ...मैंने तरजनी को चम्मच की तरह मोड़ा और चूत की अन्दर की दीवारों को सहलाने लगा ...जैसे कोई अँधेरे में रास्ता ढूंढें ...और वो मिल गयी। मैंने हलके से रगडा ...गुड्डी पागल हो गयी,

एक बार फिर वो झडने के कगार पर थी, लेकिन अबकी मैं नहीं रुका ..बल्कि जोर जोर से उसकी क्लिट चूसने लगा और हलके से क्लिट को बाईट कर दिया ..और साथ में मेरी ऊँगली ने जी प्वाइंट को ...कस के रगड़ना शुरू किया ...

49 पवन एक साथ चलने लगे काम के झंझावात में हम दोनों डूब गए ...लेकिन मैं चूसता रहा,

गुड्डी झड के रुकती फिर झडने लगती ...कुछ देर में वो लथर पथर हो गयी ..उसकी आँखे बाहर निकली पड रही थी ...
उह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह आआआआआआआआ ओह्ह्ह्ह्ह ....

अब कुछ देर में वो रुकने की दुहाई देने लगी ..लेकिन मैं कहा मानता ...

प्लिज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज रुक जाओ ....एक पल के लिए प्लिज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज

मैं रुका लेकिन सिर्फ एक पल के लिए और अब जीभ चूत के अन्दर थी और ऊँगली क्लिट पे,

और वो दुबारा पागल हो गयी ...

लेकिन मेरे जंग बहादुर भी तो पागल हो रहे थे ...इसलिए मैंने होंठ हटाकर ..जब उन्हें मौक़ा देने की कोशिश की तो गुड्डी के शातिर होंठो ने उसे गपुच कर लिया …

और अब फिर 69 के मजे ...

लेकिन अब …
जंगबहादुर नीचे के होंठ के मजे के लिए बेचैन हो रहे थे .

और मैंने गुड्डी को पकड़ने की कोशिश की ....लेकिन वो मछली की तरह फिसल कर पलंग के दूसरे ओर ...
लेकिन मैं भी तो एक कुशल मछेरा था ...मैंने उसे धर दबोचा ..


 पर वो पेट के बल थी ...उसके बड़े उभरे किशोर नितम्ब छोटी सी पहाड़ियों की तरह दिख रहे थे ..

अपनी गरदन मेरी ओर उठा कर बड़ी कजरारी आँखों से उसने ललचाया और चैलेन्ज भी किया मानो कह रही हो ...

कर लो जो करना हो ...उसने अपनी दोनों जांघे भी एकदम समेट रखी थीं ...और उपरी हिस्सा दोनों कुहनियों के बल थोडा उठा ...जिससे उसके गदराये किशोर जोबन साफ दिख रहे थे ...

एक पल के लिए मैं ठिठका फिर मुझे उसकी भाषा , उसका दावतनामा समझ में आ गया ...

वो जब मेरी 'अच्छी वाली ' फिल्मो का कलेकशन देख रही थी टेबलेट में ...तो उसने पूछ ही लिया, ज्यादातर डागी पोज में थी ...लड़के कुहनी के बल ..और चूतड उठाये हुए और लड़का पीछे से,

" हे लगता है ये स्टाइल तुम्हे ज्यादा ही पसंद है "

" और क्या ..." और मैंने उसे पूरी काम सूत्रीय व्याख्या दे डाली ..इसमें दोनों को ज्यादा मजा आता है ..पीछे से जोबन का रगडन मसलन , और पूरी देह का मजा मिलता है ...पेंट्रेशन भी पूरा ...और लड़की भी पूरा साथ दे सकती है , उसपर वजन कम पड़ता है।"

तो ये बात मैडम जी को याद थी ...

मैंने दोनों हाथो से उसकी कमर को पकड़ के उठाया अब वो घुटनों के बल थी , अगला हिस्सा पहले ही कुहनियों के बल,

मैं किसी फोर वोर प्ले के चक्कर में ज्यादा नहीं पडा ...वैसे भी बहोत खेल तमाशा हो चुका था और हम दोनों बेताब थे .
और मैं पीछे से आ गया . एक बार हचक के गुड्डी चुद चुकी थी . मैंने मलाई की एक बूँद बाहर नहीं निकलने दी थी ....और अभी जो मैंने जबर्दस्त चूत चटाई की ....और उसके बाद 69 ..वो अच्छी तरह गीली थी। मैंने अपने दोनों पैर अन्दर कर उसकी टाँगे पूरी तरह फैला दी और बीच में अपनी टाँगे डाल दी ...अब वो चाह के भी टाँगे सिकोड़ नहीं सकती थी

गुड्डी अब एकदम 'कुतिया' वाली स्टाइल में ही थी ...उसके दोनों मस्त चूतड हवा में थे ...


मैंने पहले अपनी बीच वाली ऊँगली उस की किशोर कसी चूत में घुसेड दी ...और वो भी एकदम जड़ तक ...

गुड्डी की जोर से सिसकी निकल गयी ...लेकिन मैं रुकने वाला नहीं था,...उंगली पहले तो थोड़ी देर ..अन्दर बाहर हुयी और फिर मैंने उसे गोल गोल घुमाने लगा ...उसका 'जी प्वाइंट' तो मैंने ढूंढ ही लिया था बस अब उसे जरा सा रगड़ दिया ...

मस्ती से बस गुड्डी की जान नहीं निकली ...उसकी पूरी देह कड़ी हो गयी थी ..आँखे मुंदी जा रही थी
...चून्चिया पत्थर हो गयी थी ..मझली उंगली को मैंने थोड़ा सा निकाला और फिर वो अन्दर गयी तो उसके साथ तरजनी भी अन्दर थी ..
पहले एक पोर फिर दो पोर ...

गुड्डी की चूत में पड़ी मेरी मलाई मक्खन का काम कर रही थी ...

वो सिसकी फिर थोडी सी चीखी लेकिन मैं रुकने वाला नहीं था ...दोनों उंगलिया , फिर कुछ देर अन्दर बाहर . फिर गोल गोल ...और दूसरा हाथ उसकी चूंची पे ..कभी सहलाता कभी दबाता तो कभी निपल निचोड़ लेता ...

वो बार बार अपने चूतड प्रेस कर अपनी इच्छा जाहिर कर रही थी ...मैं कौन होता था उसके देह निमंत्रण को अस्वीकार करने वाला

मैंने दोनों उंगलिया बाहर निकाल ली और अपने खुले गुस्सैल मोटे सुपाडे को उसकी चूत के उपर रखतक कर थोड़ी देर तक रगडा ...वो अच्छी तरह पनिया गयी थी।

उस सारंग नयनी ने अपनी पतली गर्दन उठा के हिरणी सी अपनी आँखे उठा के देखा ...मानो कह रही हो करो भी ...

मैं जानता था मेरे इत्ते मोटे लंड की इंट्री इस पोज में इतनी आसान नहीं ..मैंने दोनों हाथों के अंगूठो से अब उसकी कोमल गुलाबी चूत को पूरे जोर से फैला के सुपाडे को सेंटर किया और थोड़ा सा कमर पेजोर लगा के उसे स्लाइड किया ..आधा सुपाडा अन्दर घुस गया ..

अब तक गुड्डी समझ गयी थी की आगे क्या होने वाला है। उसने कस के पलंग के सिरहाने को पकड़ लिया दोनों हाथो से , पूरे जोर से ...उस कमलनयनी की दोनों कमल सरीखी आँखे बंद थी ...होंठ भी उसने भीच रखे थे ...

मैंने भी उस के किशोर नितम्बो को पकड़ के जोर से ..धक्का लगाया ...अब तक मैं समझ चुका था की अगर एक बार किसी तरह सुपाडा घुस जाय बस ....फिर वो चाहे लाख गांड पटके , चीखे चिल्लाये ...बिना पूरा लंड घोंटे बच नहीं सकती और तीन धक्को में मेरा पूरा सुपाडा अन्दर था ..

लेकिन मैंने धक्को का ना जोर कम किया न रफ्तार ...और कुछ देर में आधा लंड अन्दर था

और मेरे दोनों हाथ गुड्डी के मस्त रसीले जोबन पर थे, वो उरोज जो दिन में ललचाते थे और सपनों में आके तंग करते थे मेरी मुट्ठी में थे ...पहले मैंने हलके से सहलाया , प्यार से दबाया ..फिर पागलों की तरह ..उसे मसलता रगड़ता , निपल्स को पिंच करता ,

वो प्यार ही क्या जो पागल ना बना दे .

.कुछ देर में एक हाथ ने नीचे की राह ली और गुड्डी की मस्ताई कड़ी खड़ी क्लिट , मेरी अंगूठे और तरजनी के बीच रगड़ी जा रही थी।

लंड अपने आप सूत सूत सरक रहा था ...और अब तीन चौथाई अन्दर था।

थोड़ी देर में ही तूफान तेज हो गया , कभी मैं जोबन का रस लूटता ...तो कभी उसकी पतली कमर पकड़ और कभी दोनों चूतडो को ...हचक हचक के उसे चोदता ... यही तो मजा है डागी पोज का ...हचक के चोदने के लिए फिट पोज है और फिर गुड्डी जैसा मस्त माल हो तो फिर पूछना ही क्या ...

गुड्डी भी उतना ही मजा ले रही थी। कभी वो मेरे धक्के के जवाब में अपने मस्त चूतड पीछे की ओर उचका देती तो कभी अपनी रसीली कसी चूत मेरे लंड पर भींच देती।

वो सिसक रही थी मचल रही थी ..
और अब मेरा लंड पूरा अन्दर पैबस्त हो गया था
मेरी निगाह उसके नितम्बो पर पड़ी , कसे भारी , जिन्हें जब वो मटकते हुए चलती , तो पूरेबनारस की नींद उड़ जाती।

और उसके बीच का छेद ..छेद क्या बस एक हलकी सी दरार ...बहोत ध्यान से देखने पर दिखती ...
मैंने अपने होंठो से तर्जनी गीली की और उस की टिप लगा के वहां दबाने लगा ..

गुड्डी ने बड़ी जोर से सिसकी भरी ..और गरदन मोड़ कर मेरी ओर देखा ...उसकी बड़ी बड़ी कजरारी आँखे बरज रही थीं लेकिन होंठ मुस्करा रहे थे.

" हे उधर नहीं ..." मुस्करा के वो बोली।

" क्यों ...क्या ये छेद मेरे स्सालों के लिए बचा के रखा है क्या ..." और ऊँगली के टिप को गांड के छेद में घुसेडने की कोशिश की।
" उयीईईईईईईईईईईइ .." वो झूठ मूठ की चीखी ..फिर बोली ...ना न अपने ननद के यार के लिए ..

उसकी केले के पत्ते ऐसी चिकनी पीठ पर नागिन सी उसकी लम्बी मोटी, चोटी लोट रही थी और उसमें लाल परंदा ...मैंने उसे पकड़ कर जोर से खिंचा ...न जाने मुझे क्या हो गया था शायद उसके मस्त नितम्बो का जादू ...

मैंने पहले हलके हलके ...फिर कुछ जोर जोर से ...हाथ उसके चूतड पर जमा दिए ...
और उन गोरे गुलाबी नितम्बो पर लाल लाल फूल खिल उठे ..
हलकी सी उसकी चीख निकल पड़ी गुड्डी की और अबकी ये असली थी ...

मैंने दो हाथ और दिए ...थोड़े और कस के और एकदम गांड के छेद के पास और उसकी चोटी खिंच कर पूछा ,

"बोल देगी या नहीं ..."

" दे दूंगी मेरे राज्जा ...लेकिन मेरी भी एक शर्त है मीठी सी ..." वो गर्दन मोड़कर अपनी नशीली आँखों से मुझे देखते बोली।
" शर्त बाद में बताना ..पहले खुल के बोल ना मेरी रानी क्या देगी " उंगली के टिप का प्रेशर बढाते मैंने पुछा।

" अरे अपनी ये गांड ...जिसका तू दीवाना है .."हलके से मस्त चूतड हिलाते हुए वो मीठी छुरी बोली और फिर जोड़ा " लेकिन रंजी की भी गांड मारनी पड़ेगी तुझे ...बहूत मटका के चलती है साल्ली ..."

बात गुड्डी की सोलह आना सही थी ..मुझे देख के कुछ ज्यादा ही गांड मटकाती है ...उसकी चून्चिया तो गुड्डी से भी बड़ी है ..मजा आयेगा हचक हचक के चूंची पकड़ के उसकी कसी अनचुदी गांड मारने में ...

" मार लूंगा उसकी भी यार अगर तू दिलवा देगी ...होली में किसी की चूत गांड को मना करना पाप है .."

मैं मुस्करा के बोला।

उसने मानो हां में अपइ चूत से मेरे पूरे घुसे लंड को दबोच लिया और बोली .."
"यार मार लेना गांड मेरी लेकिन पहले मेरी परी का तो कुछ करो इतना फुदक रही है .."

मैं कौन होता था अपनी इस प्यारी से जानेमन की बात को मना करने वाला , आज तक मैंने उसकी कोई बात मना नहीं की थी ...एक हाथ से मैंने उसकी पतली कमर पकड़ी और लंड धीमे धीमे बाहर निकला , सुपाडे तक ...एक पल रुका और हचक के पूरा पेल दिया ...पूरे जड़ तक मेरे बाल्स उससे लड़ रहे थे ...

गुड्डी चीख उठी ...लेकिन चुदाई के समय यही चीख तो कान को प्यारी लगती है ...
......और हचक कर चुदाई चालू होगई ..पूरी तेजी से ..मैं कभी कस के उस की मस्त चूंची मसलता तो कभी क्लिट दबा देता ..
लेकिन लंड लगातार किसी इंजन के पिस्टन की तरह उस किशोरी की चूत में सटासट... सटासट ...घचाघच ..घचाघच अन्दर घुस रहा था

गुड्डी भी पूरा साथ दे रही थी ...कभी वो चूतड पीछे कर के मेरे धक्के का जवाब धक्के से देती , तो कभी अपनी कसी प्रेम गली में , जंगबहादुर को भींच लेती ...जैसे गले मिल रही हो ...

कभी उसकी सिसकियाँ कभी उसके ताने और छेड़ छाड़ और आग में घी डालते.

" हे कोई तेरी रंजी की तरह का भोंसड़ा नहीं है जो इस बेरहमी से चोद रहे हो ...वो अपनी गली के गदहों से चुद्वाती होगी ..."

और कभी मैंने थोडा लिंग बाहर रख के अन्दर बाहर करता तो बोलती ,

" हे बाकी क्या अपने बहनों के लिए बचा रखा है , अरे उनकी चिंता मत करो ...हमारे भाई है ना उनके लिए और चींटे काटेंगे ना उन साल्लियों की चूत में ...तो सोनल के कोठे पे बिठा दूंगी दालमंडी पे ..."

और उसकी हर गाली का जवाब मैं उसके मुलायम किशोर गोरे गोर गाल पे काट के देता और वो भी इस तरह की होली के रंग भी मेरे दांत के निशानों को ना छुपा पायें ..और कभी मेरा मोटा मुस्टंडा लंड ...हचक के चोद के देता ..
दर कही दो बजे रात का घन्टा बजा

उसकी देह वीणा के तार मेरी उंगलिया, मेरे होंठ और सबसे बढकर मेरा प्यासा लिंग ...छेड़ रहे थे ...और अब द्रुत में झाला बज रहा था .

बाहर हरसिंगार के पेड़ो पर चाँदनी झर रही थी।

फागन की चांदनी रात सोने के तार की तरह लम्बी हो रही थी ...

आज सुहाग की रात सूरज जिन उगिहौ ...

समय बस थम गया था ...

और ना वो पीछे हट रही थी ना मैं ...
लेकिन कुछ देर में मेरे तिहरे हमले ने , उरोजों पर , क्लिट पर और रगड़कर हो रही चुदाई ने उसे किनारे पर जाने को मजबूर कर दिया ...
और अबकी जब वो झड़ी तो मैं रुका ही नहीं बल्कि मेरे नाखूनों ने उसके क्लिट को और जोर से रगड़ दिया ...और वो दुबारा ..

ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ...जैसे बारिश की झड़ी सावन में रुके और फिर चालू हो जाये ...

फागुन में सावन ...

और फिर उयीईईईईईईईईईईईई ओह्ह ...साथ में उसकी चूत , खूब कस के मेरे लंड को दबोचने लगती , निचोड़ने लगती ...और अब साथ में मैं भी .....

तूफान एकदम तेज हुआ और अपनी पराकाष्ठा पर पहुँच गया ..
और जब मेघ बरसे ...हरहराकर ...तो मैंने उसके चूतड को कस के उठा रखा था ...जिससे हर बूँद चू कर सीधे ...उसके अन्दर समा गयी ..

जैसे प्यासी धरती पर आषाढ़ के मेघ खुद उतर जाएँ और बूँद बूँद बो जाएँ ...

वो पलंग पर निढाल पड़ी थी और उसके ऊपर मैं ..
और थोड़ी देर में उसने करवट ली तो पीछे से मैं , स्पून की तरह चिपका , उसके शरीर से जुडा ...
जब मन दूध पानी की तरह मिल जायं तो देह की क्या बिसात

लिंग अभी भी पूरी तरह अन्दर धंसा हुआ था ...और उस हालत में नींद ने आके कब अपनी चादर हमें उढा दी ...पता नहीं।

मेरा हाथ भी गुड्डी के उरोजों पर था और होंठ उसके कानो पर ..जैसे सपने में भी ये राग अनुराग की गाथा चलती रहे ..

पता नहीं कितनी देर मैं सोया रहा होऊंगा शायद ज्यादा देर नहीं ...लेकिन मुझे लगा की फोन बज रहा है


 इत्ती रात को कौन होगा मैंने सोचा और फिर सोती गुड्डी को बांहों में भींच लिया ..

इस सोये जागे में,...लगा फिर घंटी बजी ...कुनमुनाकर मैं उठा और तकिये के नीचे से मोबाइल उठाया ..

और उसे देखते ही मेरी आँखों से नींद गायब ..

दो मिस्ड काल
दो मेसेज
दोनों रीत के ...

मैं दबे पाँव टेबल के पास गया जहाँ कंप्यूटर रखा था और घडी की और देखा ..2.40 ...यानी हमें सोये अभी 10-15 मिनट ही हुए होंगे


बनारस में तो टोटल कम्युनिकेशन शट डाउन था उसके बावजूद भी उसने मेसेज भेजा

और दोनों में सिर्फ ये लिखा था ...

काल मी नाउ ..

इसका मतलब कुछ गड़बड़ ...बल्कि ज्यादा गड़बड़


 रात अचानक बहोत काली हो गयी थी , मैंने खिड़की के बाहर देखा , अपशकुन से काले काले बादल , घने , चाँद के ऊपर छा गए थे।

हवा तेज हो गयी थी, सायं सायं करती ...बाहर हिलते पेड़ों की लम्बी काली परछाइयां मेज पर और बिस्तर पर पड़ रही थीं।

मेरे कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था।

सिर्फ घडी की टिक टिक सन्नाटे को तोड़ रही थी।
मैंने दो बार रीत के मेसेज को देखा ...कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था .

डी बी ने बताया था और रीत ने भी ...एक इनर रिंग आई बी के लोगों की होगी ...और उसके बाद चार पी सी आर की गाड़ियां ..
रीत के साथ खुद भी कार्लोस और रेहन को होना था ...

कुछ जरूर भयानक हुआ होगा ..वरना रीत इस तरह ...उसे भी मालुम था की इस समय 100% कम्युनिकेशन शट डाउन उस समय मेसेज ...

कहीं वो किसी ख़तरे में ना हो ...

मैं भी ना एक अच्छी प्यारी सी भोली भाली लड़की को मैंने किस मुसीबत में फंसा दिया ...
मेरा दिल जोर जोर से धड़क रहा था।

मैंने किसी तरह कम्पूयटर खोला , अपने क्लाउड सर्वर पर लाग आन किया और कुछ टूल और एप्स डाउनलोड कर फोन में ट्रांसफर किये ...

अब मेरे और रीत की होने वाली बातचीत पूरी तरह एनक्रिप्टेड होगी और ये एप्स स्क्रम्ब्लिंग का काम करते हैं। पाहले मैं इसे रीत के फोन पे पेस्ट करूंगा ...जिससे दोनों एंड पे स्करैम्ब्लिंग होगी , उसके साथ ही एक सिल्हुएट लोकशन भी जेनरेट करता है और बातचीत कई टावर से री रूट हो के आएगी , जिससे बेस्ट कम्प्यूटर को भी उन्हें ट्रेस करने में 3-4 घंटे का टाइम लगेगा ...जो काफी होगा।

अब जिस नम्बर से रीत का फोन आया था मैंने लगाया।

रीत की आवाज आई ...

मेरी जान में जान आई ...इतनी देर में सारे देवी देवता, पीर सब कुछ मना चुका था ..

उसी तरह नपी तुली , संयत लेकिन ..बहोत हलकी फुसफुसाती ....मैं समझ गया की वो स्पीक फोन से बोल रही है , जो कार्ड लेस ढंग से उसके बाड़ी सूट में लगे मोबाइल से जुडा होगा। थोड़ी भी दूर से देख के कोई नहीं समझ सकता था की वो फोन से बात कर रही है .

" सो गए थे क्या ..."

" नहीं हाँ ...बस थोड़ा सा ..झपकी लग गयी थी .." मैंने बात बनायी। सो तो गया ही था।

" दुष्ट , मूर्ख ...गुड्डी के रहते हुए ..एक जवान लड़की पास में हो और तुम्हे नींद आगई ..हो तुम बुद्धू ही ,,,आने दो गुड्डी को उसकी भी क्लास लेती हूँ ." वो बोली।

टिपिकल रीत ..

मैं समझ गया था की कितनी भी क्राइसिस हो लेकिन नार्मल रहना ..कहाँ से मिलता है इतना बैलेंस ....

" हुआ क्या,..." मैंने हिम्मत कर के पूछा।
" क्या नहीं हुआ ये कहो ..." अब उसकी आवाज में थोड़ी सी घबडाहट , हल्का सा कम्पन था।

फिर उसने संक्षेप में हाल खुलासा बताया ...

वो और रेहन उन हुजी आप्रेटिव्स का पीछा करते हुए उस जगह पहुंचे जहां जेड के वेयर हाउस थे ...वो तीन आप्रेटिव्स , उस वेयर हाउस के सामने की एक बिल्डिंग में घुसे और रीत भी उनके पीछे घुस गयी.

अन्दर जाकर एक तहखाने में वो घुसे और रीत ने के पीछे ..एक पतली सी सुरंग को पार कर, ये तहखाना जेड के वेयर हाउस के ही नीचे था। रीत ने चुपके से 4 कैमरे लगा दिए ...जो लगातार वहां के ऐक्शन को उसे बताते रहे। अपनी इन पुट यूनिट पर जो रीत ने देखा तो उसका दिल दहल गया।

अमोनियम नाइट्रेट, सल्फर और भी ना जाने क्या ..कम 40-45 बाम्ब का सामान रहा होगा , और उसके अलावा 8-10 बाम्ब , जो ज्यादा साफिसटिकेतेड लग रहे थे ..और जिसे बाम्ब मेकर ने डिजाइन किया होगा।

रीत दरवाजे के बाहर खड़ी थी और इनपुट यूनिट से अन्दर की हरकत के अलावा उन की आवाजे भी सुन रही थी। एक बात सुन कर उस का कण गरम हो गया , एक ने बोला ,

"अरे जल्दी कर ये लोकल वाले नारियल में भर कर दुकानों में दे देने है होलिका की सामग्री के साथ कन्सेशनल रेट पर, तो कल पूरे बनारस में होली की जगह दिवाली होगी।

दूसरा जो सॊफिस्टिकेटेड बाम्ब में टाइमर लगा रहा था , वो बोला अरे असली तो ये हैं ....300 से 400 मीटर तक कुछ बचेगा नहीं ...10 मीटर का तो गड्ढा हो जाएगा।

रीत ने बताया की वो ये सब सोच कर कांप गयी।

वो जेड के वेयर हाउस की दीवार से सट कर खड़ी थी , और रेहन उसे सामने से कवर कर रहा था।

तभी रीत ने अपने कैट वोमेन सूट पर एक लाल लाईट देखी ...उसे समझते देर नहीं लगी ...ये लेजर गाइडेड प्रिसीजन स्नाइपर राइफल है . और कैव्लार का बाड़ी प्रोटेक्शन आरमर भी उसको पूरी तरह रोक नहीं पायेगा .
तीन चीजें एक साथ हुयीं ..

रीत ने रेहन को इमरेज्न्सी सिगनल दिया और रेहन ने तुरंत लैम्पोस्ट की लाईट को पत्थर से तोड़ दिया .
स्नाइपर ने गोली चलाइ
और रीत तुरन्त घुटनों के बल बैठ गयी .

गोली उसके कंधो को ग्रेज करते हुए दीवाल में पैबस्त हो गयी।
अगर वो एक पल की भी देरी करती ...तो वो गोली उसके सीने में होती।

वह लाल रौशनी दीवाल पर अभी भी टहल रही थी , लेकिन अन्धेरा होने से स्नाइपर के लिए उसे देखना नामुमकिन था।

उसका कैट वोमेन सूट तो ब्लैक था ही , इस तरह बना था की थोड़ी बहोत रोशनी में भी वो ना दिखे और बाकी उसने कैमोफ़लाज पेंट लगा रखा था।

रीत कुहनीयों के बल क्राल करते हुए , थोड़ी दूर चलकर दो घरों के बीच बने रिसेस में खड़ी हो गयी, एकदम सांस साधे, चौकन्नी . हिरणी की तरह , चारो ओर कान खड़े कर देखती ...

और तभी उसने पाया उससे बस 50 मीटर दूरी पर एक साया उसकी ओर आ रहा है ..और उसने भी रीत की तरह नाईट विजन ग्लास पहन रखे हैं ...

लेकिन रीत तो रीत है ..
पूरी दनिया जानती है रीत से कोई जीत नहीं सकता

रीत को भी नहीं पता चला की कब ...नरसल निकल कर उसके मुंह में आ गयी ...नरसल या ब्लो गन, उस ने जान बूझ कर उसकी टिप को कम ताकत वाले लिक्विड से कोट किया था

अब वो साया 20 मीटर से भी कम दूरी पर था और ब्लो गन का तीर सीधे उस की कारटायड आरटरी पे, और वो चकरा कर गिरने लगा .

.लेकिन उसके गिरने के पहले रीत बिजली की तरह उछली और उस का घुटना सीधे उस के गुप्तांगो पे, हाथ का चाप गर्दन पे और दूसरा नेजल बोन पे। उसके गिरते ही वो पूरी ताकत से इस तरह कूदी की दोनों पैरों का पूरा जोर उसके घुटनों पे ...अब वो खडा होने के काबिल भी नहीं था ...और उसकी बेहोशी 2-3 घंटे तक रहने वाली थी।

रेहन भी वहां आ गया था। दोनों ने खींच कर उसे पास के गड्ढे में डाल दिया ..लेकिन अब रीत को एक नयी चिंता थी.

 अगर इस आदमी को रेगुलर कहीं फीड बैक देना हो और आधे घंटे में वो फोन ना करे तो हो सकता है कोई सेकेण्ड टीम आये ...और उसमें एक नहीं चार पांच आदमी हो तो वो और रेहन कैसे निपट पायेंगे ...

उसे अपने घायल होने की चिंता नहीं थी और उससे भी कम रेहन की ...

लेकिन इस अड्डे का पता सिर्फ उन दोनों के पास था ...और अगर वो लोग किसी तरह पुलिस को सूचना नहीं दे पाए ..तो बनारस में जो होगा उस को सोचना भी किसी के बस की नहीं ... की वो होलिका से तेज दहकेंगी ....नफरत की आग

अगर ये होली वाले बम्ब बन कर निकल गए ...तो फिर सैकड़ों होलिका में पुलिस कहाँ कहाँ छानेगी ...और अगर एक बार ये बात कही पब्लिक को पता चल गयी की होलिका में बम्ब है तो वो अफवाहे फैलेंगी ..की वो होलिका से तेज दहकेंगी ....नफरत की आग

और वो आतंकी हमले से कम खौफनाक नहीं होगी ..

रीत जिस तरह से बोल रही थी ...उस की आवाज से दर्द और और आंसू छलक रहे थे ..
रीत एक पल के लिए रुकी, अपने को कम्पोज किया ...और फिर बोला ..

इसलिए मैंने रेहन को भेज दिया ...की किसी तरह डी बी को खबर करें ...और सुबह होने के पहले जिससे ये सारा जखीरा पकड़ा जा सके ..

लेकिन आधे घंटे से ऊपर होगये हैं ना तो रेहन का पता है और ना कोई पुलिस या आई बी वाले ...

और वो आईबी वाले जो इनर सर्किल में जो थे चार मैंने हो के पूछा ...उनका क्या हुआ

कुछ रंज , कुछ उदास होके वो बोली ...

उनके बारे में तुम्हे नहीं बताया क्या ...उनको तो उन लोगो ने पहले ही न्युट्रलाइज कर दिया ...

जैसे ही हम लोग होटल के बाहर निकले तभी हम लोगो ने देखा की एक पान की गुमटी के नीचे दो टाँगे ...वो एक आई बी वाला ही था .. किसी ने उसके सर पर मार कर बेहोश कर दिया था।

रेहन ने दो और को ही इसी हालत में देखा ...लगता है चौथे को भी उन्होंने इसी तरह न्युट्रलाइज कर दिया ...बहोत चालाक और आर्ग्नाइजड हैं वो ...जिस होटल में मैं और कार्लोस थे उस पर भी उन की निगाह थी ....वो तो मैं अंडर कवर बन कर गयी थी,...

मैं रीत की बात सुन तो रहा था लेकिन मेरा ध्यान कही और था ...

इसका मतलब की बनारस की बर्बादी और उन आतंकियों के बीच कोई था तो बस रीत थी ...मेरा मन ग्लानि से भर उठा ...मैं यहाँ और वो लड़की वहां ..लेकिन ये समय दुखी होने का नहीं था सोचने का था। मेरा ध्यान फिर रीत की बातों की ओर गया ...

वो बोल रही थी ...

अभी जो कुछ उसने अपने इनपुट यूनिट पर सूना ...उससे उसका दिमाग और खौल गया ...जो आदमी बड़े बम्ब में टाइमर लगा रहा था ...उसने पूछा था एक आदमी से जो उनका लीडर लगता है ...की डिटोनेटर कब तक आयेगा ...क्योंकि उसे कम से कम 21/2 से तीन घंटे लगने वाले थे और सात बजे तक इन्हें सब तैयार कर के हैण्ड ओवर कर देना होगा तो उस आदमी ने जवाब दिया

तुम अपना काम करो ..चार सवा चार बजे तक पक्का डीटोनेटर मिल जाएगा ...

रीत परेशान थी ...

कार्लोस जेड के घर के बाहर था और वहां कोई एक्टिविटी नजर नहीं आ रही थी अब उसे समझ नहीं आ रहा था की डीटोनेटर कैसे आयेंगे ...उसकी चिंता सही थी ...

प्लान यही था की एक बार डीटोनेटर डिलीवर हो जायं उसके बाद ...उन्हें धर दबोचा जाय ...जिसे बमों का जखीरा पकड़ा जाया और आपरेटर भी ...

लेकिन कैसे ...अब सवाल कई थे ...

पहले तो जेड डीटोंनेटर कैसे डिलीवर करेगा ये सवाल टेढा था लेकिन इसका जवाब खोजना भी जरूरी था।

दूसरी बात सपोर्ट फोर्स ...रीत अकेले ये मोर्चा बहोत देर तक संभाल नहीं सकती थी। उसकी इस बात में दम था की स्नाइपर जिसे उसने टैकल कर लिया ...फिक्स्ड टाइम पर कही मेसेज करता होगा और उसका मेसेज ना मिलाने पे सेकेण्ड टीम आ सकती थी। फिर जैसे ही थोड़ी देर में भोर होगी रीत को जो ऐडवाण्टेज अँधेरे का मिल रहा है वो भी नहीं मिलेगा ..फिर


तीसरी बात ...डी बी , धुरंधर भाट्वडेकर , पुलिस सुपरिन्तेण्डेण्ट तक ये लोकेशन किसी हालत में पहुंचानी पड़ेगी। उन्होंने जो प्लान किया था वो परफेक्ट था लेकिन जब तक उन्हें लोकेशन ही नहीं पता होगी ....

एक पल के लिए मैं सिहर गया , सारी मेहनत, रीत की सारी अकल , जो रिस्क उसने लिया था ...उसपर पानी फिरने वाला था ....

आज मुझे वहां रहना चाहिए थे ...मैं भी ना ...और ये आई बी वाले भी दुश्मनों की प्लानिग का शिकार हो गए ...अब क्या करे ...थोड़ी देर तक हम दोनों शांत रहे ..

फिर मैं बोला ,

" अच्छा तुम मुझे उस कमरे का डिस्क्रिप्शन बताओ जिससे होके तुम तहखाने में गयी थी . जेड के वेयर हाउस के सामने का मकान का जिससे होकर वो लोग अन्दर गए थे ...

रीत एक पल के लिए रुकी और ...फिर उस कमरे की एक एक चीज ..सब कुछ ..दायें बाएं ...कहाँ क्या था सब कुछ ..
रीत की नजर और याददास्त दोनों गजब की थी ..

अभी भी मेरी समझ में कुछ नहीं आया ...क्या करूँ , क्या बोलूं ..इसे वहां होता तो ..

तब तक बाहर हवा की रफ्तार और तेज हो गयी ...आंधी शुरू हो गयी थी ...
और बाहर एक पेड़ ..शायद नीम वाला ...तेजी से अर्रराकर गिर पडा ...और लाईट चली गयी ...

पूरा घुप्प अँधेरा ...मेरे हाथ पैर पहली बार फूल रहे थे ...रीत ने इत्ता भरोसा किया मेरा और ...मैं

लेकिन कुछ तो करना होगा ..इत्ती दूर आके हम हार मानने वाले नहीं थे ...मैंने रीत से कार्लोस का नंबर लिया,

वो बोली ...लेकिन वो लिमिटेड काल वाला मोबाइल है ..

मैंने उसको समझाया ...कोई बात नहीं ...मैं जिस फोन से काल करूंगा ...उससे इन कमिंग वो अन लिमिटेड कर लेगा और वो अल्ट्रा सिक्योर है।
रीत ने नम्बर मेसेज कर दिया ...

मैंने रीत से पूछा की डीबी को उसने ट्राई किया था ...

" एकदम ...उन्होंने मना किया था तब भी ...लेकिन सारे फोन नम्बर पर या तो नो रिस्पांस था या कोई और उठाता ...और ये लोकेशन मैं किसी और से शेयर नहीं कर सकती थी ...क्या पता दस मिनट बाद ...बजाय पुलिस के वहां कोई और आ धमकता ..."

" ठीक है मैं तुम्हे 10 मिनट के अन्दर फोन करूंगा ...बस तुम एक दम दीवाल से सटी रहो और कुछ भी हो तो बस एक मिस्ड काल देना।"
और ये कह के मैंने फोन रख दिया।

मैंने रीत को अश्योर तो कर दिया था ...लेकिन मैं खुद भी अँधेरे में था,

बाहर आंधी की रफ्तार और तेज हो गयी थी ...दूर कहीं एक दो और पेड़ गिरे थे ...आसमान में पूरे बादल घिर आये थे रुक रुक कर बिजली भी चमक रही थी ...वो और डरावनी लगती ...

मैंने एक बार फिर से रीत ने जो डिटेल दिए थे उनके बारे में सोचना शुरू कर दिया

एक बात ये थी की ...भले ही जहां रीत थी और बम्ब का जखीरा था , वो जगह एक संकरी गली में थी और वहां पुलिस की पेट्रोल वेहिकल ना जा पायें , लेकिन जो भी डिटोनेटर लेकर जाएगा ( और मेरा पूरा विश्वास था ये काम जेड खुद करेगा ) , वो वहां कैसे जाएगा?

रीत ने ये तो बताया था की डिटोनेटर वहां 4 बजे के आसपास पहुँच जायेंगे ...तो वो कौन होगा जो इतनी सुबह चले और पुलिस को उसपर शक ना हो और तलाशी लेने पर भी पकड़ना मुश्किल हो?

रीत ने जो कमरे में रखी चीजों का डिस्क्रिप्शन दिया था , उससे मुझे एक क्ल्यु तो मिला ..और मैंने कार्लोस को फोन लगाया।

 कारलोस ने बताया की ...वहां एकदम सन्नाटा है।

कुछ दूर पर ही एक आई बी वाला भी एक रिक्शे वाला बन कर बैठा है।

हर आधे घंटे पर पुलिस कंट्रोल रूम ( पी सी आर ) की वान भी चक्कर लगाती है
अगले दो चौराहों पर रेहन के ठरकी भी है और वो लोग कारलोस के टच में हैं

इसका मतलब सब कुछ वहां सामान्य है , या अत्यंत कोशिश कर सामान्य बनाया गया है।

मैंने कार्लोस को अपना सिक्योर नम्बर दिया और बोला ,कुछ भी होने पर , कुछ भी दिखने पर मुझे तुरंत मिस्ड काल करें .

अब अगला मुददा था पुलिस को या डी बी को कान्टेक्ट कर , उन्हें रीत और बम्ब के जखीरे की लोकेशन बताने की ...और रेहन के बारे में पता करने की ...

डीबी ...को रीत ने कान्टेक्ट करने की कोशिश की थी लेकिन वो नाकामयाब रही ...उनके सारे फोन बंद थे या नो रिप्लाई हो रहे थे।

फिर मुझे याद आया डी बी का मेसेज ...सत्यजित राय , सोनार केला ...यस तो वो फेलु दा के यहाँ ही होंगे ...
और मैंने फेलु दा का नंबर लगाया ..पहली रिंग पर ही उन्होंने उठा लिया और तुरंत डी बी को फोन दिया।

बिना देरी के मैंने रीत की लोकेशन बताई ...
और उस के बाद सिच्युएसन ..


डी बी ने जो बताया ...उससे पता चला की हालत जो मैं सोच रहा था , उससे भी ज्यादा परेशानी वाली है ...

रेहन का पता चल गया था ...डी बी एक सिक्योर वाकी टाकी से पुलिस कंट्रोल रूम के टच में थे ..लेकिन किसी को उन्होंने अपनी फिजिकल लोकेशन नहीं बतायी थी।

रेहन के साथ हिट एंड रन हुआ था ..उसे एक ट्रक ने हिट किया था , और निश्चित रूप से वो कोई एक्सीडेंट नहीं था,

रेहन फुर्ती दिखा के एक डिच में लुढ़क गया था , लेकिन तब भी ब्लीडिंग काफी हुयी ...गनीमत थी की एक पी सी आर की गाडी पीछे थी उसने रेहन को डिच से निकाल लिया और ट्रक के बारे में कंट्रोल रूम को बता दिया।
आज रात पूरे शहर में नाकेबंदी थी।

इसलिए ट्रक तो मिल गया
लेकिन ट्रक के साथ कोई नहीं मिला।
आफ कोर्स ट्रक चोरी की थी और नंबर प्लेट नकली थी , फोरेंसिक वाले जांच कर रहे हैं।

रेहन का खून काफी निकल गया था, और वो बेहोश है ....लेकिन बेहोश होने के पहले वो आई बी वालों के बारे में पुलिस वालों को बता सका था .

लोकेशन के बारे में वो डी बी को ही बताने को बोल रहा था लेकिन उनसे मिलने के पहले ही बेहोश हो गया।

अभी वो बी एच यु में भरती है आई सी यु में ,खतरे के बाहर कोई फरक्चर नहीं है ...और 3-4 घंटे में होश में आ जाएगा .

आई बी वालों पुलिस ने कलेक्ट कर लिया है , वो भी हास्पिटल में है लेकिन होश में आ गए हैं।

करीब 20 मिनट पहले उन्होंने बताया की एक पी सी आर की गाडी उनके पास रुकी और उनसे बात करने की कोशिश की। उन्हें लगा शायद उनके लिए कोई अर्जेंट मेसेज हो और उसी समय पीछे से किसी ने उसके सर पर किसी भारी चीज से मारा और वो बेहोश होकर गिर गया . ये घटना 12 बजे के थोड़ी पहले हुयी। कमोबेश यही बात चारों ने बतायी।
डी बी ने ये बात मानी की उस इलाके में जो पी सी आर लगी थीं ...उनमे से एक कुछ रोग पुलिस वालों के साथ थी। उन्होंने सारे पी सी आर में जी पी एस लगवाया है लेकिन करीब 1/3 में वो खराब हो गए हैं और गाड़ियों की मानिटरिंग पुलिस कंट्रोल रूम से नहीं हो पाती सिवाय फोन के ...ये गाडी भी उन्ही में से थी और करीब 2 घंटे से 1 पी सी आर ने कंट्रोल रूम से कान्टेक्ट नहीं किया है और उनके ख्याल से ये वही गाडी होगी .
लेकिन सबसे खतरनाक बात डी बी ने अंत के लिए बचा रखी थी।

उन्होंने बताया की जब आई बी के लोगों से कांटेक्ट नहीं हुआ तो उन्होंने उस सारे इलाके की काम्बिंग और हाउस टू हाउस सर्च प्लान किया , लेकिन वो भी फेल हो गया।

ऊपर से क्लियरेंस नहीं मिली ...उन्होंने माँगा भी नहीं था , लेकिन पता नहीं कैसे ये बात वहां तक पहुँच गयी और स्प्सेफिक आर्डर आया ..सूरज निकलने के पहले वो लोग कार्डन कर सकते हैं लेकिन कोई सर्च नहीं कर सकते ...

एक बार डी बी शायद ये बात इग्नोर कर देते लेकिन एल आई यु ( लोकल इंटेलिजेंस यूनिट ) के लोगों ने थोड़ी देर पहले ये इन्फो दी की शहर में चार एरिया में कम्युनल टेंशन पीक पर पहुँच गया है ...

और ये इलाका भी उसमें से एक है ...तो अगर कहीं गलती से भी पुलिस ने कोई फायर कर दिया तो ये फूस के ढेर में आग लगने जैसा हो जाएगा .

उन्हें आप्रेटिव्स के बारे में साऱी जानकारी थी , स्लीपर जेड के बारे में मालूम था , ये भी मालूम था की शहर में कहीं बम्ब का जखीरा है लेकिन वो कुछ नहीं कर पा रहे थे ...

तब तक कार्लोस की मिस्ड काल आई और मैंने डीबी से बोला की मैं थोड़ी देर में फोन करता हूँ।

कार्लोस को फोन करते समय मैं सोच रहा था की जब तक आखिरी रन ना बन जाय या आखिर विकेट ना गिर जाय , तब तक कुछ कहा नहीं जा सकता , और ये बात सिर्फ क्रिकेट में ही सही नहीं है , हर जगह लागू होती है।

मैं सोच रहा था की बैटल ऑफ़ बनारस में अब कुछ खास नहीं बचा था लेकिन अब ...कल रात में ये लग रहा था की बस आई बी वाले उन हुजी आपरेटिव्स का पीछा कर जगह का पता कर` लेंगे ...फिर एक बार डिटोनेटर आ जाने पर ...सुबह पुलिस उन्हें धर दबोचेगी ...

लेकिन ...आई बी वालों को उन लोगों ने कैसे न्युट्रलाइज कर दिया ...किस तरह 9 से 12 के शो की भीड़ में ...वो अपने टार्गेट तक पहुँच गए ....वो तो गनीमत था की रीत थी ..

कार्लोस ने फोन उठाया, और बोला।

" एक दूध वाला अभी आया है और जेड के यहाँ दूध लेके गया है। वो एक बाइक पे है और उस की बाइक पे दूध के कई कैन लदे हैं। वैसे ये कोई ख़ास बात नहीं है , बनारस में आस पास के गाँवों से दूध वाले बाइक से दूध ले के आते है ."

ये बात तो मुझे भी मालुम थी , लेकिन मैं यही सोच रहा था ...अगर डिटोनेटर डिलीवर होंगे तो उसी तरह डिलीवर हो सकते हैं जिससे पुलिस उन पे शक ना करे ....और इतनी सुबह बनारस पे या तो घाट पे जाने वाले होते हैं या दूध वाले , साइकल पे या बाइक पे ...और रीत ने जो मुझे बताया था ...उस से मेरा पूरा शक दूध वाले पे ही था ..

" आपने उसे ध्यान से देखा तो होगा , अब जो वो बाहर निकले तो एक दम ध्यान से देखिएगा की कुछ फरक तो नहीं है , दूसरी बात रेहन के जो बन्दे चौराहे पर हैं, उन्हें भी आप बता दो , इस बाइक वाले के बारे में , वो जैसे चौराहे से टर्न करे वो आपको बता दे और रीत को आप फोन कर दें ...और वो आदमी जब बाहर निकले तो मुझे आप फिर मिस्ड काल कर देना।"

" तो आपको ये शक है की ...वो आदमी डिटोनेटर ले जा सकता है ." कार्लोस ने कुछ सोचते हुए पूछा .

" देखते हैं ..." कह कर मैंने फोन काट दिया

मुझे अभी भी डी बी से बात करनी थी और रीत भी इन्तजार कर रही होगी।


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