Sunday, March 9, 2014

FUN-MAZA-MASTI फागुन के दिन चार--86

FUN-MAZA-MASTI

   फागुन के दिन चार--86
गतांक से आगे ...........


 थोड़ी देर बाद मैंने उसे खोला और फिर दो चार साइटों पर भटकने के बाद एक अडल्ट चैट सर्वर के एक चैट रूम में मैं से एन पी एस ( नो प्राब्लम सर ) के साथ था।

एन पी ने बहुत कुछ पता लगा लिया था।

लेकिन स्थिति उससे कुछ साफ हुयी थी तो कुछ और कन्फयूजिंग ...

सबसे बड़ी बात उसने बाम्ब मेकर का पता लगा लिया था . उसके अलावा हमारे पास मुम्बई में और कोई क्ल्यू था भी नहीं।

लेकिन जिस तरह उसने पता लगाया था वो और दिलचस्प था।

पार्सल आफिस से ये तो ट्रेस हो गया था की वो कालबा देवी के किस होटल में टिका था, लेकिन अगले दिन वो उस होटल से चला गया था। मुझे शक था की वो कोलाबा या सेन्ट्रल मुम्बई के किसी गेस्ट हाउस में होगा.

...लेकिन उस इलाके मैं सैकड़ो गेस्ट हाउस थे ...मेरे शक का आधार ये था की सेटलाईट फोन पर जो मुम्बई से बातें ट्रैक की गयी थीं ...उनमे जिन जगहों का जिक्र था और जिसे एन पी ने रेस्टोरेंट बताया था , अरेबिया , बगदादी, पेरिस कैफे अरेबियन नाइट्स ये सब इसी इलाके में थीं।

एन पी ने जो फोटो मैंने उसे भेजी थी , और जिसके बेसिस पे पार्सल आफिस वाले ने और कालबा देवी के होटल वाले ने पहचाना था ..उसे इस्तेमाल किया ...लेकिन कुछ पता नहीं चला। उसने टैक्सी वालों , स्ट्रीट वाकर्स, ऊपर बताये होटल के वेटर्स सबसे पूछताछ की

लेकिन किसी ने कुछ नहीं बताया।

फिर उसे याद आया हाई एंड बुक्स ( फर्जी पासपोर्ट ) की डिमांड के बारे में ...कल उसे जूस सेंटर पर किसी ने बताया था ...और ये 'बुक्स ' ( फर्जी पासपोर्ट ) एकदम असली होती हैं इसलिए उनेक दाम भी बहोत ज्यादा होते हैं और उन्हें पकड़ना भी बहोत मुश्किल ...

ये बुक्स ...जेब कतरे या होटल के वेटर पासपोर्ट उड़ा के बनती है ...और बजाय फर्जी फोटो लगाने के अक्सर इस्तेमाल करने वालेको इसी फोटो की तरह मेक अप आर्टिस्ट बना देते हैं ...फिर उस फोटो से उस की सेकेंडरी आई डी , जैसे ड्राइविंग लाइसेंस, क्रेडिट कार्ड, क्लब मेम्बरशिप कार्ड भी बनाते हैं ...

लेकिन इसमें भी दिक्कत होती है ..इसलिए सब्जेक्ट की फोटो के बेसिस पे 20-25 हाई एंड वाली बुक्स में से जो उससे मिलती जुलती फोटो होती है ...उसकी शकल के हिसाब से तैयारी की जाती है ...लेकिन मेकअप आर्टिस्ट के अलावा सब्जेक्ट किसी से नहीं मिलता ...जिससे दोनों साइड के लोगों की सिक्योरिटी कम्प्रोमाइज होने से बची रहती है ...

एन पी ने एक ऐसे ही मेकअप आर्टिस्ट को पकड़ा और उसका दाव सही लगा ...

" बॉस इस का कुछ जुगाड़ कर सकते हो इस ने मुझे चवन्नी का वादा किया है ...आप हेल्प कर दॊगे तो मेरा भी कुछ फायदा हो जाएगा .." और उस को फोटो दिखाई।

फोटो देखते ही वो हंसा और बोला ..." साल्ल्ला ..मादर चो ...तुमको भी पकड़ लिया उसने ...किस किस से ..अरे कल कर दिया मैंने उस का काम ..."

और जब एन पी ने थोड़ा सा चढ़ाया तो उस ने पूरा गाना गा दिया।

उस ने उस की आँखे , बाल , चीक बोन चेंज कर दिए हैं . उसने ग्रे कलर के कांटेक्ट लें लगाए हैं जो बहूत ही हाई क्वालिटी के होने के अलावा आसानी से निकलते भी नहीं है, यहाँ तक की उससे पुतली भी चेंज हो जाती है।

बाल उसने ब्लांड कर दिए हैं ...और वो भी जावेद हबीब के यहाँ करवाए हैं ..जड़ों तक वही रंग है ...तो अगर वो कंघे से झाडेगा और कुछ बाल गिरेंगे भी तो वो जड़ तक ब्लांड ही नजर आयेंगे ...बाल वो सीधे से काढता था अब उसने वेवी कर दिए हैं।

गाल उसके पाहले धंसे हुए थे अब उसने कुछ प्रासथेटिक गाल के अन्दर लगाकर , उसे हाई चीक् बोन वाला कर दिया है।

मेकअप वाले ने उस से फोटो लेकर प्रिंट निकाल कर ...उस का फोटो शाप से चेंज कर दिखाया ...अब बोलो तुम पहचान सकते हो ..

एन पी ने हामी में सर हिलाया।

वो फिर चालु हो गया ...लेकिन ये काम तो कोई चवन्नी छाप जासूसी किताब पढ़ने वाला लौंडा लिहाड़ी भी कर लेता ..अरे असली चीज है की कोई उसको पहचान ना पाए।

मैंने दो लौंडो को लगाया जो चार घंटे तक उस की कैंडीड कैमरे से फोटोग्राफी करते रहे , चलने की खाने की हर चीज की ...फिर उस को स्टडी कर के मैंने उस के 10 मैनरिज्म ढूंढें ...और उस की प्रेकटिस कराई ..दो घंटे में हो उसने 10 में से 8 बदल लिए ...उस्ताद आदमी है ...

मैने बहोत लोगों के भेष बदले लेकिन इतना स्मार्ट कम ही दिखा ...

फिर कई छोटी छोटी चीज ...वो अंगूठी नहीं पहनता था मैंने उस को बोल कम से कम चार पहनो ...हाथ का लुक बदल जाता है

आज कल जगह जगह कैमरे लगे रहते हैं ...पुलिस वाले साल्ले भी चालाक हो गए हैं शकल के साथ चाल ढाल भी नोटिस करते हैं ..ख़ास तौर से अगर किसी के पीछे पड़े हों ...इसलिए शकल के साथ ये भी बदलना बहुत जरुरी है ...

अरे मैं खुद ...मेरे यहाँ कोई भी काम कराने आता है ...तो बुरके में ...और जाता है तो बुर्के में ...वरना आये किसी शकल में और जाए किसी शकल में ...तो मेरी तो ...
कुछ रुक कर उन्होंने फिर बोलना शुरू किया और कहा ,
"
" तुम जानते हो सबसे मुश्किल था उस आदमी की जिसकी किताब ये यूज करेगा उस में उस का आइदिन्तिफिकेशन ये दिया था की उसका एक पैर छोटा है और वो लिम्प करता है ...ये एक अलग मुसीबत थी।
मैंने उसके लिए अलग से जूते बनवाये ...एक की हील भारी और उसमे पैड भी लगाया ..लेकिन उस उस्ताद ने आधे घंटे में प्रैकिट्स कर ली ."

एन पी ये समझ गया था की इससे अब और बात नहीं निकलवाई जा सकती ...नाम जो उसके नए पासपोर्ट पर है वो पूछना तो मुश्किल है ...क्योंकि अफीम के नशे में इतनी बात वो बता गया था यही काफी है .

उसने उसको धन्यवाद दिया , फोटोशाप की हुयी फोटो उठायी और चलता बना।


 उसका अगला पड़ाव कोलाबा थाना था बल्कि उनका विदेशियों वाला सेक्शन ...

यहाँ एक इन्स्पेक्टर से उसकी गाढ़ी छनती थी।

वहां उसने उसका फोटो दिखाया और अपनी कहानी सुनाई ...यार एक फिरंगन इस पर मर मिटी है ...यही लियोपोल्ड में मिली थी ...बस उसके पास यही फोटो थी ...मैंने सोचा की बॉस तो मालुम होगा उनके चरणों में अर्जी लगाता हूँ ...

वो हंसा और बोला की तुम्हे नाम वाम तो मालुम होगा नहीं ...लेकिन गनीमत मनाओ कंप्यूटर देवता की अब कौनो एक चीज आ गयी है की ससुरी फोटुवै से खोज देगी ...

उसने फोटो स्कैन की और 10 सेकेण्ड में कंप्यूटर ने सब जानकारी उगल दी ...होटल रूम नंबर , नाम और उस के आगे एक कोई मीडिया फाइल भी थी ...

इन्स्पेक्टर बोला इ देखो साइंस का चमत्कार ...और वो फाइल क्लिक कर दी ..और उस की एक 2 मिनट की मीडया फाइल ...जिस कमरे में विदेशियों का रजिस्ट्रेशन होता था उसी के बाहर ये कैमरा लगा था और उन के आने जाने को रिकार्ड कर लेता था

एन पी ने नोट किया की वो लिम्प कर रहा है , उस के एक हाथ में चार अंगूठियाँ है . ..और चीक बोन्स काफी हाई है ...पुरानी फोटो से कोई सिमिलरीटी नहीं ...तभी वह चौंक गया।

जैसे ही वो बाहर निकला ..एक अफ्रीकन उस से रगड़ता हुआ निकल गया।

उस का चेहरा तो वो कभी भूल नहीं सकता था ..शहर की कोई भी रेव पार्टी हो ..एक्सटेसी से लेकर हार्ड ड्रग तक सब कुछ वही सप्प्लाई करता था ...

फ़िल्म ख़तम हो गयी थी।

वो इन्सपेक्टर उसी की तरफ का था आजमगढ़ जिले में फूलपुर का ...उसने मजाक किया ...त कहिये टी एक दिन कौनो फिरंगन भिजवा देई हाथ पैर दबा देगी आपका ..

उन्होंने जोर से अट्टहास किया और बोले ...

"ठीक कह रहे हो ...और तुहार भौजी ...हमार तुहार दोनों का गटई दबाय देहियें ..."

फिर एन पी से पूछा उन्होंने होली में ता आओगे न ..

" अरे पूछने की बात है ..बम्बई में रहना है की नहीं ...भौजी के हाथ की ठंडाई .." एन पी ने उसी टोन में जवाब दिया।
इन्स्पेक्टर थोड़ा सीरियस हो गए थे ...फिर हलके से बोले ..

" इ जो हमारे नए नए ए सी पी साहब आये हैं , ना तानी उनके लिए कुछ इन्ज्जाम चाहो तो ...

हम जब देखते है तब उहे ससुरी मिड दे और मिरर में ...उहे एस्कोर्ट वाला पन्ना ....बात इ है की इ ता नया लौंडा है , दूसरी पोस्टिंग है बाकि ...

इनका बियहवा दहेज़ के लालच में लगता है हो गवा था ...उहो जल्दी ..मेहरारू एकदम करिया छछुंदर ...गंवार उज्जड ...ऊपर से साहब को हाथ भी नहीं रखने देती ...बहूत फ्रस्ट्रेट लगते हैं ..

ता अबही चैत में उ गाँव जाई कौनो बियाह उआह है ..महीना दो महिना के लिए ...ता कौनो इंतजाम एकाध दिन ..."
फिर कुछ रुक कर बोले .

."हम एक दिन हिम्मत कर साहब से पूछी लिए की साहब अरे आप कोलाबा थाना में है कहें तो कौनो इंतजाम ...उ बिचारे घबडाय गए बोले ..बहोत धीरे से ...क्यों हो सकता है क्या ...और हमहूँ तोहरे भरोसा पे हाँ बोल दिहे "

एन पी ने मौके का फायदा उठाया और तुरंत हामी भर दी ...

" अरे काहीं नहीं एक नहीं दो ...वो भी रशियन ...सैंडविच मसाज का मजा देगी साहब को ...बैंकाक फेल ...बस जैसे ही मेम साहब गाँव जायं बस बोल दिहा जाय ..और उही रात "


और थाने से निकल आया . एन ने बोला की उसके बाद तो बस सब चीजें बहोत फास्ट हुयीं ...उसने 10-11 जगह वो फोटो लिम्प और अंगूठी वाली बात मेसेज कर दी।

और खुद उस जगह आया जहां उस का होटल का पता थाने से मिला था .

ये कोई होटल नहीं था ...एक लाज था थर्ड फ्लोर पर ...फारियास होटल के पास।

लाज में जा कर उसने रूम ब्वाय को फोटो और 100 का नोट दिखाया ...और उसने बता दिया की वो आज ही इस होटल में आया है ...तीन दिन का किराया होटल में अडवांस जमा कराया है।

देर रात तक बहोत सी इन्फो आ गयी ...

वी टी स्टेशन के पास जो स्ट्रीट वाकर खड़ी रहती हैं ...स्टेशन और टाइम्स आफ इंडिया बिल्डिंग के सामने , बस स्टैंड के पास ...उन्होंने बताया की ...वो आधे घंटे तक बी एम् सी की बिल्डिंग और लोकल स्टेशन के बीच के सब वे का उसने चक्कर मारा चार बार सब वे में एक ओर से दूसरी ओर गया ...

यही बात चर्च गेट स्टेशन से भी पता चली। वहां वो बड़ी देर तक जिस जगह सब वे बंद होता है वहां खडा रहा।
सब वे के एक हाकर ने और सामने जय भारत स्कूल की एक स्टूडेंट ने बताया।

रात में बगदादी में उसने डिनर किया ...उस की टेबल रिजर्व थी उस से मिलने चार लोग आये थे जिनमें दो मिडल ईस्ट के और एक अफ्रीकन व्यक्ति था ....

देर रात वो पाइप वाला बिल्डिंग में बने डिस्को में गया ...वहां भी चार लोग उससे मिले ...उसने डांस नहीं किया सिर्फ टेबल पर बैठा रहा ...उससे मिलने वालों की फोटो एन पी के पास आने वाली थी। बाहर जो अशर बैठता था उसके पीछे सीक्रेट कैमरा था ..और कई बार एन पी ने उन्हें पुलिस से बचाया था।

एन पी ने बताया की वो सुबह पांच बजे अपने लाज में लौटा था।

मैं ये सब इन्फो पचाता की उसके पहले उसने बोला की जिस स्टाक ब्रोकर का मैंने नाम बताया था ...( वही जो उन शेल कम्पनियों के स्टाक को डील करता था ...उसके पास वो अपनी एक विश्वस्त लड़की भेजेगा ...जो कोशिश करेगी की उससे कुछ राज उगल वाये।

साढे पांच बजे बनारस में मीटिंग थी . इसका मतलब की अगर 3-4 बजे तक कुछ और पता चल जाय तो मैं उनका विश्लेषण कर कुछ रिपोर्ट मुम्बई और बडौदा के लिए बना कर शेयर कर सकता था।

मैंने एन पी को बोला की वो कल बगदादी में और बाद में डिस्को में जिन लोगों से मिला था ...अगर उन का नाम या कुछ भी उनके बारे में पता लगा सके तो मुझे तीन साढ़े तीन तक जरूर बता दे।

दूसरे हाई एंड की पांच बुक्स की डिमांड थी ..एक का इस्तेमाल का तो पता चल गया बाकी का भी अगर कुछ पता चल सके ..

और अंडर वर्ड में क्या सुनगुन है अगर उस का कुछ पता चल सके ...

उसने बोला की वो मुझे सब पता कर बतायेगा ...और अंतरध्यान हो गया।

और मैं और कन्फ्यूज हो गया

फाइनेन्सियल अनालिसिस और स्टाक एक्सचेंज की खबरों के आधार पर ये हमला पोर्ट, पेट्रोलियम,पावरहाउस या इनसे जुडी किसी चीज पर होना चाहिए ...लेकिन कल शाम जिस तरह बाम्ब मेकर ने रेकी की वो भी इवनिंग पीक के टाइम पर ..उससे लगता है की ये हमला सब वे में होना चाहिए ...

तो क्या इन में से कोई कैमोफ्लाज है ...हम एक जगह तैयारी करें और अटैक कही और हो जाय

या कोई डाइवर्जन है ...एन पी का कहना था की वहां की ड्रग रिंग चलाने वाले से भी उस का कान्टेक्ट है ...तो कहीं नार्को टेरर का भी पहलु तो नहीं है ....

मैंने गहरी सांस ली और फिर सोचने लगा ...तब तक फेस बुक पर एक बीप ....हुयी मीनल थी।


 बडौदा : मीनल


पिछली बार मीनल से मैं एक बी डी एस एम् साईट के प्राइवेट चैट रूम में मिला था लेकिन अबकी एक मेसेंजर के चैट रूम में ...
मीनल ने वाई को पहचान लिया था या ये कह सकते हैं आलमोस्ट ..

मीनल ने कल बहोत कम समय में बहोत इन्फो इकठ्ठा कर ली थीं।

मैंने शाम को तो उसे कल बताया था , जब हम गंगा स्टोर में रंजी और गुड्डी के साथ शापिंग कर रहे थे की एक आदमी जो सावरमती एक्सप्रेस के एस 6 कोच से बडौदा गया था और उसने लगेज से चिनंलाल के लिए साड़ियों का एक बण्डल बुक कराया था उसे ट्रेस करना है। उसने ये पता कर लिया की वो बडौदा में स्टेशन के पास अलकापुरी साइड के किस होटल में टिका था और बाद में वहां से शिफ्ट होकर स्टेशन के दूसरी ओर , एक लाज में चला गया था।

लेकिन सबसे गजब की दो बाते उससे पता की थी , एक की वो आदमी किस ट्रेन से कब बडौदा से मुम्बई गया ( जिससे एन पी को उसे ट्रेस करने में मदद मिली ) और दूसरी की लाज में उससे मिलने जो आदमी गया था उसका लाज वाले पूछ कर उसने स्केच बना लिया . आखिर वो फाइन आर्ट्स की स्टूडेंट थी , और वहीँ गरबा में मेरी मुलाकात हुयी थी।

मैंने उसको ये नहीं बताया की था ये आदमी 'बाम्ब मेकर ' है।

लेकिन अब असली लडाई उस आदमी को ट्रेस करने की जो बडौदा में 'स्लीपर' था और जिसे अब जागृत कर दिया गया था ...हमले के लिए।

उसे हमने वाई का नाम दिया था। सेट फोन की काल ट्रेस कर के उसका पता चला था। और मेरे हैकर दोस्तों ने एक स्पेसिफिक ग्रिड भी दी थी जहां से वो फोन करता था।

मीनल को मैंने जनरल सिचुएशन बतायी थी।
उस का हंच था ये आदमी रेलवे में काम करता होगा ...लेकिन जस्ट हंच और दिक्कत ये थी की बडौदा में रेलवे के 8,000 आदमी काम करते थे।

मिनल ने बताया की कल रात जब वाई ने सेट फोन से बात शुरू की ...तो वो उस ग्रिड में पहुंची ...वो इलाका रेलवे, पेट्रोलियम फर्त्लाइजर की कंपनियों से घिरा हुआ है, यानी बात करने वाला उनमे से कही का भी हो सकता है ...

मीनल ने बोला की वैसे तो चाँदनी रात थी ...लेकिन रेलवे यार्ड में सैकड़ो वैगन खड़े थे ...जिनकी शैडो में पूरा अधेरा सा था ..हालंकि यार्ड में जगह जगह लाइटें लगी थीं।

वैगनों की शंटिंग चल रही थी जगह जगह शंटिंग इंजनो की सीटियाँ गूँज रही थीं , यार्ड के केबिन से कुछ एनाउंस हो रहा था ...वह तो गनीमत था की उसकी सहेली के पिता जी जो रेलवे में थे उन्होंने एक आदमी को उसके साथ कर दिया था ...उसने ये बोला था की वो रेलवे की वर्किंग के बारे में एक फीचर लिख रही है की कैसे वो दिन रात काम करते हैं ...वरना उस इलाके में घुसना मुश्किल था ...

और वो भी एक लडकी के लिए फिर वो उस ग्रिड के सेंटर प्वाइंट पर पहुंची ...वहां कुछ गाड़ियों का उसे बताया गया एक्जामिनेशन चल रहा था ....ये सब माल गाडिया थी जिनसे पेट्रोल ले जाया जाता है ..टैंक वगन या बी टी पि एन उसे वो कह रहे थे ...

मीनल ने बहोत कोशिस की ...की उसे कोई सेट फोन से बात करता दिख जाय ...

लेकिन वहा बहूत से लोग वाकी टाकी से बाते कर रहे थे और उस कम रोशनी के इलाके में ये ढूंढ पाना मुश्किल था ...

और दूसरी बड़ी मुश्किल ये थी की जहां वो काम कर रहे थे उसके ठीक बगल में फ़र्टिलाइजर की भी फक्ट्री और पेट्रोलियम का लोडिंग प्वाइंट था ...जहाँ ये रेक जांचे जाने के बाद लोडिंग के लिए जाते थे ...

तो ये भी सम्भव था की सेट फोन वाला आदमी उधर हो ...इसके अलावा पास में ग्लास की और दवा की भी फैक्ट्री थी।

लेकिन मीनल ने ये पता कर लिया था की उस जगह कम करने वाले लोग किस डिपार्टमेंट से सम्बन्धित है और उन का ऐप्राक्सिमेट नंबर क्या है ...क्योंकि बाहर से एक दिखने वाली रेलवे में उसी तरह डिपार्टमेंट है , जैसे हिन्दुस्तान में जातियां हैं .
पता ये चला की जो लोग गाड़ियों को जांच रहे थे उन्हें टी एक्स आर ( ट्रेन एक्सामिनर) कहते है और दूसरे लोग यार्ड स्टाफ थे।
उनकी संख्या कुल मिला जुलाकर 200 के आस पास थी।

तो एक तो संख्या 8,000 से घटकर 200 हो गयी।

दूसरे मैंने उसे बताया था की वो आदमी थोडा पढ़ा लिखा होगा और उसकी जो प्रोफाइल मेरे दिमाग में थी ...तो वो कम से कम सुपरवाइजर लेवल का होगा।

उस लेवल के तीन चार लोग ही थे।

अगले दिन ...यानी आज सुबह मीनल ने उन फैक्ट्रियों से भी पता किया। उस शिफ्ट में उनके उस इलाके में 10-12 लोग ही रहते हैं लेकिन कोई सुपरवाइजर नहीं था।

मीनल ने एक दूसरी सहेली का सहारा लेकर एक ट्रेड युनियन नेता को पकड़ा ..रेलवे मजदूर संघ के ...नईम खान ..वो भी डी कालोनी में ही रहता था जहाँ मीनल की सहेली रहती थी।

फिर इनटरव्यू के नाम पर मीनल उनसे मिली ...मीनल ने उनसे डीसक्रितली उस आदमी के बारे में पता करने को कहा ...और बहाना ये बनाया की ये उसने बहोत पहले उसे देख कर स्केच बनाया था , रेलवे स्टेशन या यार्ड में याद नहीं ...अब वो एक एक्झिब्शन करना चाहती है तो उनका पता लगा रही है की ये कौन है ...लेकिन इसे पता नहीं चलना चाहिए ..

युनियन के नेता ने कुछ देर सोचा और फिर बोला मेरे ख्याल से ये एक हेड टी एक्स आर है ...करछिया यार्ड में काम करता है ...फिर उसने एक दो फोन लगाया और बोला की अभी तो ये लास्ट नाईट में है , आधी रात को आप कहाँ मिलोगी ...

कल यानी होली वाले दिन से इसकी फर्स्ट नाईट होगी तो आप मिल के एक बार खुद देख लीजिएगा और कन्प्फर्म कर लीजियेगा।

मीनल ने कुछ इधर उधर की बात कर उससे बात ख़तम की।

मीनल को लगा उसका रतजगा सफल हुआ ...कल जब वो यार्ड में थी ...तो वो आदमी वहीँ था और फिर उसी समय सेट फोन पर बात हुयी।

लेकिन मुझे अभी भी पक्का विशवास नहीं था। सिर्फ किसी के कहने पर न तो आप किसी को पकड़ सकते है

...और फिर ये आदमी अगर स्लीपर हुआ तो वेल ट्रेंड होगा और जरा भी शक होगा तो गायब हो जाएगा।

मीनल ने प्रामिस किया की आज रात वो फिर यार्ड में चक्कर लगाएगी ...और हो सका तो सस्पेक्ट वाई के घर के आस पास जायेगी ...और जैसा होगा रात में बताएगी ...

फिर वो अंतरध्यान हो गयी ...

मैं बड़े उहापोह में था ...ये इन्फो पुलिस से शेयर करूँ या नहीं ..अगर ज़रा भी इन्फार्मेशन लीक हुयी तो चिड़िया फुर्र हो जायेगी ...और बडौदा में हमारे पास और कोई थ्रेड था भी नहीं …

मैंने कुछ देर सोचकर पेट्रोलियम कम्पनी के सिक्योरिटी एक्सपर्ट से बात की।
मेरी उनसे कल भी बात बहुत डिटेल में हुयी थी।

थ्रेट के बारे में उन्हें आई बी से भी ऐडवाइजरी मिल चुकी थी और उन्होंने थ्रेट लेवल रेड कर दिया था।

मैंने उनसे सीधे पूछा की रिफाइनरी में रेलवे के जो लोग आते हैं क्या उनकी भी जांच होती है ...

" एकदम ...अब तो वो मुझे भी बिना चेक के घुसने नहीं देते ..." वो बोले।

" नहीं मेरा मतलब है ...यार्ड से ...जहां से वैगन लोडिंग के लिए आते हैं ...उसे रेलवे के स्टाफ ले आते होंगे ..." मैंने एक्सप्लेन किया .

वो एक पल के लिए हँसे फिर बोले ...

" तुमने बहोत सही पकड़ा ..कल डिफेंस के सेक्यिरिटी एक्सपर्ट्स के साथ जो हम लोगों ने ज्वाईट रिव्यू किया था और रात में सर्प्राइज चेक भी किया था ...उसमे यही एक कमजोरी मिली।

अब वहा हमने मेटल डिटेक्टर लगा दिए हैं और स्निफर डाग्स भी है ...और एक्स रे यूनिट भी ...रेलवे का स्टाफ ट्रेन छोड़ कर चेकिंग प्वाइंट पर आता है वहां उसकी थारो स्क्रीनिंग होती है , उसके सामान की भी ...हमारा एक आदमी इंजिन के कैब को भी चेक करता है .... ..इसलिए अब वो प्वाइंट प्लग हो गया ..

उसके अलावा पहले से भी ट्रेन स्टाफ वैगन को एक्सचेंज यार्ड में छोड़ देता है ...उसके बाद हमारा इंजन उसे लोडिंग प्वाइंट पे ले आता है ...जहां लोडिंग होती है ...वो जगह मोस्ट वल्नरेबल है ...

लेकिन वहां सिर्फ रिफाइनरी का स्टाफ होता है ...और वो अच्छी तरह स्क्रीन होता है ...और अब वहां हमारी सिक्युरिटी के अलावा एक स्टेट सिक्योरिटी का आदमी भी रहेगा …”

वो चुप हो गए और मैं सोचता रहा।

वो फिर बोले ...

" जानते हो मेरे ख्याल से सबसे ज्यादा खतरा ट्रक से है ..रोज करीब 1000 ट्रक लोडिंग के लिए आते है ...मैंने ये बोला ही की 1 हफ्ते के लिए पाइप्लाइन और रेल से डिस्पैच बढ़ा दें ...और ट्रक से डिस्पैच बंद कर दे ,

लेकिन प्रोडक्शन और मार्केटिंग वाले दोनों मेरे पीछे पड़ गए हैं।

फिर भी मैंने ट्रक से डिस्पैच आज से बंद कर दिया है ...लेकिन तब भी मान लो कोई ट्रक सेमेटेक्स भर कर आये और सीधे गेट पर हमला कर दे ..हमने उसके लिए भी तियारी हालांकि कर ली है ...

लेकिन यू नो सिक्युरिटी इस आलवेज गेम आफ परसेंटेज ....तुम्हारे पास कोई आइडिया है ...या कोई और विक नेस ..."

मेरे पास कोई और आइडिया नहीं था ..इसलिए उन्होंने फोन रख दिया।

ट्रक ...ये तो मैंने सोचा ही नहीं था।

मुझे 99.99 % अब विश्वास था की हमला कहाँ होगा ...
60 % संभावना थी की हमला किधर से होगा ...

लेकिन असली सवाल था कैसे होगा ..खास तौर से जो उन्होंने सिक्योरिटी के इंतजाम बताये थे उसके बाद ...
जब तक मोडस आप्रेण्डी का पता ना चले ..हमला रोकना बहोत मुश्किल होगा।

बनारस में हमने मोड्स आप्रेण्डी पता चल गया था क्योंकि वहां रीत और कार्लोस थे ...

वो नीड मोर आईज आन ग्राउंड ...

और हमारे पास समय बिलकुल नहीं था ...


क्या रीत वहां जा सकती थी

 कल मैंने कई लोगों से उस शिप के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए कहा था , जिसका इस्तेमाल मुम्बई पर हमले के लिए होने वाला था।

ये दो एल एन जी कैरियर थे ...अपरेटली ...इनका सोमालियन पाइरेट्स द्वारा अपहरण नहीं हुआ था लकिन जो मैने कल ऐनेलेसिस की थी ये अन रिपोर्टेड हाईजैकिंग के केसेस थे ...

ये बात साफ थी की ..इन शिप द्वारा टेरर वाले नहीं आने वाले थे बल्कि शायद शिप का ही इस्तेमाल किया जाय जैसे 9/11 में जहाजों का इस्तेमाल किया गया।

लेकिन ज्यादातर सोर्सेज से कुछ ख़ास इन्फो नहीं मिली और ये अपने आप में गंभीर चिंता की बात थी।

सिर्फ ये पता चला था की इसमें से एक शिप साइप्रस और दूसरा ग्रीस में रजिस्टर्ड है ...लेकिन ये फर्जी कंपनियों के सबसे बड़े अड्डे हैं और वो कही के हो सकते है .

दूसरी बात एक की कैपिसिटी 2,50,000 क्यूबिक मीटर और दूसरे की 2,55,000 क्यूबिक मीटर है। इस समय करीब 400 एल एन जी कैरियर है लेकिन इतनी कैपसिटी वाले मुश्किल से 20 हैं।

इन दोनों शिप्स के पोर्ट आफ काल की लिस्ट भी मुझे मिल गयी थी जहां 6 महीने में ये गए हैं और शाम तक इन दोनों की डीटेल डिजायन भी मिल जायेगी .

लेकिन असली सवाल ये था जिसका जवाब नहीं मिल पा रहा था ..इस हमले के पीछे कौन है ?

फिर इन दोनों शिप्स में से कौन विपन के तौर पर इस्तेमाल होगा , या दोनों होंगे।

दोनों के क्र्यू की लिस्ट मिल गयी थी और उनके बैक ग्राउंड भी चेक हो रहे थे। इस काम में आई बी के लोग भी लगे थे ..

तब तक अचानक एक अर्जेंट मेसेज आया ...उन्ही का जिन्होंने शिप के बारे में संकेत दिए थे ...

तुरंत चैट रूम में मिलने के लिए ...

मुझे क्या बोलना था वही बोलते रहे ...

उन लोगो ने सारा दम लगा दिया उस आफिस को हैक करने के लिए ...लेकिन ख़ास सफलता नहीं मिली

...इसका मतलब की वहां कुछ ख़ास ही सिक्योरिटी है और कुछ अलग काम हो रहा है ...हाँ एक कंप्यूटर के रजिस्टर से कुछ आईपी मिले है ...वो अफ्रीका और मिडल ईस्ट के हैं ....अब वो लोग उस के पीछे लगे हैं।

एक और बात ये पता चली है की इन दोनों शिप्स के असली मालिक और जिन लोगो ने रैनसम के लिए मेडियेट किया था ...उन के कम्पुय्टर अकाउंट भी पता कर लिए हैं और उसे आज रात हैक किया जा रहा है।

जब वो बोल चुके तो मैंने मुम्बई से मिली सूचनाये भी उन्होंने दी और अपनी आशंका भी बताई ... अब उनके चुप होने की बारी .

कुछ देर रुक कर वो बोले ...अपनी इस आशंका के बारे में किसी को भी मत बताना ...जब तक हम और एविडेंस ना ढूंढ ले ...तुम्हारी बात में दम है ...रात में मैं मेसेज दूंगा ...


और अदृश्य हो गए ...

मेरे पास सोचने के लिए बहोत सामग्री थी ....लेकिन मैं सोच नहीं पाया ...मेरे सिक्योर
मोबाइल पे कुच्छ पिक्चर्स आयीं ...और एक मेसेज एन पी ...

ये लोग है जिनसे 'वो' ( बाम्बमेकर ) रात में 1 बजे पाइप वाला बिल्डिंग , चौथी पास्ता लेन में डिस्को में मिला था।

उसमे वो अफ्रीकन भी था जो मुम्बई का ड्रग किंग था ...और दो लोग वो थे जो उससे बगदादी में मिले थे.

एक और काम की जानकारी उसने दी ...वो थोड़ी देर पहले लाज में गया था। बाम्ब मेकर वहां नहीं था। वेटर से मिलकर वो उसके कमरे में गया ..डस्टबिन में एक कागज के बहोत छोटे टुकडे पड़े थे, उसे जोड़कर भी पढ़ा नहीं जा सकता था ...कुछ टेलीफोन नंबर लग रहे थे ...

लेकिन जब उसने मेज पर देखा तो एक कागज़ पर वो नम्बर बहुत हलके से उभरे थे ...वो उसने नोट कर लिए थे ...वो नंबर भी उसने एस एम् एस कर दिए हैं ...

अब मैंने सारी बातों को समेट रहा था ...मैंने एक बार फिर से वो फाइनेन्सियल रिपोर्ट पढ़ी ...कई बातें साफ थी और कई और धुंधलके में थीं ..

मुझे अब ये इमकान करीब करीब हो गया था की बडौदा में हमला कहाँ होगा लेकिन इतनी सिक्योरिटी के बावजूद कैसे होगा ये समझ में नहीं आ रहा था ...

मुम्बई की तस्वीर और धुंधली थी ...जिस तरह से उसने रेकी की थी उससे तो हमले की जगह स्टेशन हो सकती है ...लेकिन ये स्टाक एक्सचेंज वाली रिपोर्ट से मेल नहीं खाता

और असली बात शिप की थी ...जिस के बारे में कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था ...वो अभी हाई सीज में थे

...बस एक बात मेरे दिमाग में आ रही थी ..टेरर की फंडिंग के लिए ..पहले नार्को टेरर फंड इस्तेमाल होता था ...फिर स्टाक एक्सचेंज में इन्वेस्टमेंट ...तो कही ये सोमालियन पाइरेट्स के साथ टेरर ग्रुप ...

और वो सीमा पार वाले हमारे मित्र ना हो बल्कि असली मामलों में अन्तर राष्ट्रीय ..

वो लोग घुस रहे ..अब अफगानिस्तान कुछ ठंडा पड रहा है , ईराक आलमोस्ट ठंडा हो गया है ...1989 में जब तालिबान ने अफगानिस्तान पे कब्जा कर लिया था ...और रूस वहां से हट गया था ..उसके बाद ही कश्मीर के हालत और खराब हुए थे ...तो कहीं फिर ...


सोमालियन पाइरेट्स हर साल 2008 से 120 मिलियन डालर पाइरेसी से कमा रहे हैं ...लेकिन शिपंग इंडस्ट्री लगभग 2 से 3 बिलियन डालर अतिरिक्त खर्च कर रही है ...तो कही कोई इस का फायदा तो नहीं उठाना चाह रहा है ...

मेरे दिमाग का रायता बन गया।

और और मैं ये सब बाते शाम की मीटिंग में बता भी नहीं सकता था , बिना किसी ठोस सबूत के ..सब मुझे पागल समझते ...

" पागल हो गए हो क्या ..इत्ती देर से कंप्यूटर में घूर रहे हो ...इत्ते प्यार से किसी लड़की को घूरते तो कब की पट जाती ...चलो खाना लगाने जा रही हूँ ...

कुछ खा पी लो ताकत आ जायेगी ...शाम को तेरा माल आ रहा है कुश्ती लड़ने के लिए तैयार हो जाओ .."


और कौन होगा गुड्डी थी।

 " अरे यार सर में धमाल हो रहा है ..." मैंने उसे बताया।

" कहो तो चन्दन का तेल मल दूं ..." मेरे बालों में उंगलिया घुमाते वो बोली ...कुछ दर्द उसकी मखमली उँगलियों ने और कुछ रेशमी बातों ने ले लिया।

मैंने एक झटके में उसे खिंच कर आगे अपनी गोद में बिठा लिया और किस कर लिया।

वो छुडाने की कोशिश करती बोली ..

" अरे जल्दी चलो यार अभी तेरी भाभी ..सुबह से दोपहर तक के पहले सेशन का मैच तुम्हारे भैया के साथ खेल कर थकी हारी आ रही होंगी ...और खाने के बाद उन्हें सेकेड इनिंग भी शुरू करनी होगी ...क्योंकि तुम्हारे भैया कहीं बाहर जा रहे हैं चार बजे और लेट नाईट लौटेंगे .."

मेरे हाथ उसका जोबन मर्दन करने में लगे थे ...उसके मस्त उरोजो की चमचा गिरी मैं इसलिए भी करता था की वो दिल के पास रहते है ...दिल के दोनों ओर दो पहाड़ों की तरह रक्षा करते है ...तो वो खुश रहेंगे तो गुड्डी के दिल में मेरी जगह पक्की करने में मदद करेंगे ना ..

उसके निपल जोर से पिंच करते मैं बोला ..." अगर एक बार तुम मेरी भाभी की देवरानी बन जाओ ना ...तेरे इन मस्त जोबन की कसम ...मैं तो इनिंग ब्रेक भी नहीं करूंगा ..अन्दर डाले डाले ..."

"मालूम है मुझे ...लेकिन इतना डिटेल में बोलना जरूरी है क्या ...पर पहले तुम्हारी भाभी माने तो सही ..." वो बोली।

मेरा जवाब का एक ही तरीका था। मैंने उसे फिर चूम लिया ..अबकी होंठों पर ..और उसे समझाया ..

" अरे यार भाभी के तो मैं पैर भी छू लूंगा मनाने के लिए ..."

" और मेरे ..." वो इतराकर , अपने पैरों में पहनी चांदी की घुंघुरू वाली पायल झनकाकर , बोली।

' जब चाहो तब ..अरे यार तेरे ये पैर उस समय मेरे माथे से तो लगे रहते हैं ना , जा तेरी ये लम्बी गोरी टाँगे उठी रहती है , ठसके से मेरे कंधे पे बैठी रहती है ...."

वो तुनक कर उठ गयी और बोली ...

" तुम भी न चलो खाने की देर हो रही है ... इत्ते तरह के तुम्हारे लिए सोच सोच कर व्यंजन बनाये चुपचाप खा लेना,... नो नखड़ा ,...वर्ना अपनी भाभी को सामने देख के बहोत तुम्हारे भाव चढ़ जाते है .."

मैं क्या करता मैं भी उठ गया

उसकी आखे मेरे टेंट पोल पे चिपकी थीं ..मैं तो खाने जा रहा था लेकिन श्रीमान श्री जंगबहादुर जी ...सुबह से भूखे थे ...और थाली सामने थी। एकदम अकुलाये ...तन्नाये , 90 डिग्री पर

मैंने गुड्डी का हाथ खींच कर सीधे वहीँ रख दिया .." हे इस का कुछ करो ना "

बिना हिचके उस ने प्यार से उसे पहले तो सहलाया, पुचकारा फिर मसल दिया और बोली ....

तुम भी ना अभी खाने की देरी हो रही है ...चलो ना ..उसे ही पकड़ के मुझे खींचते वो बाला बोली। फिर मेरी ओर मुड कर कहा ,

हे मुंह मत बनाओ ..मना थोड़ी किया है, खाने के बाद ..देखती हूँ ना ...भाभी तो तुरंत ऊपर जायेंगी सेकंड इनिंग के लिए ..घन्टे डेढ़ घंटे की छुट्टी ...कम से कम ..और शीला भाभी तो खाने के बाद कम से कम दो घंटे की खर्र खों ...और वैसे भी अब वो अपने गैंग की हो गयी है ... खुश इतना की इकदम छलकती रहती है ..जब से तुमने मेरी बात मानकर उनके साथ ...अब चल्लो भी ..."

गुड्डी किचेन की ओर मुड गयी और मैं डाइनिंग टेबल की ओर ...

शीला भाभी वहाँ थाली वाली लगा रही थीं ...

उनके बड़े बड़े मस्त नितम्ब साडी में एकदम चिपके ..बीच की दरार साफ दिख रही थी

मैंने पीछे से उन्हें दबोच लिया मेरे दोनों हाथ आँचल के अंदर सीधे मस्त जोबन पर ...और जंगबहादुर ...चूतड के बीच की दरार ...

शीला भाभी भी ..बजाय छुडाने की कोशिश किये, मुस्कराकर अपने नितम्ब मेरे खड़े लिंग पर रगड़ दी.

मैंने भी हचक के अपना खूंटा उनकी गांड के बीच रगड दिया और कान में बोला , " भौजी एक काम है तुमसे ..."
" अरे लाला बोलो ना भौजाई से कौन शरम ...कौनो लौंडिया वाला मामला है का ...तुम हमारे जो कर रहे हो ... जान हाजिर है ...हमारी इज्जत बच गयी गाँव जुआर में सीना तान के चल सकती हूँ ...बोलो ना .."

मैंने किचन में खाना लगा रही गुड्डी की ओर इशारा किया।

वो मुस्करा के बोलीं .."अरे उ ..जब चाहो लाला ...तुमही ढीले हो इतना मस्त हथियार ले के ...कहो तो आजे ..खाने के बाद तोहार भौजी तो ऊपर चल जहियें ...बस ..ससुरी नखड़ा ज्यादा करे ना ...तो मैंने हाथ पैर पकड लेती हु ओकरा ..एक बार जब तुम ठेल दोगे ना ...पूरा ..मजा मिल जाएगा इसका बस तुम्हारे आगे पीछे घूमेगी ."

मैं भी कनफ्यूज था कैसे उनसे दिल की बात कहूँ ...लेकिन मैंने बोल दिया ,

" भौजी असल में ..का बताऊं ...भाभी कहती है ना की उन्हें देवरानी चाहिए ...तो ठीक तो है ये ..लेकिन अगर उ और उसके घर वाले मान जाय और भाभी भी ..अब मैं भी सोचता हूँ की ...अगर ..."

शीला भाभी मेरी बात समझ गयीं , खुश भी हुयी और चकित भी ...

मुड कर उन्होंने मुझे कस कर बांहों में भर लिया और बोली ...

" लाला सच बोलो हमको बिस्वास नहीं हो रहा है ...त तुम उसके साथ ..सच बोलो ..सोच लिए हो ..."
" हाँ भौजी अगर आप जुगाड़ करवादो ...उसके बिना मेरा ..मैं फिर और किसी के साथ नहीं ..लेकिन उसके घर वाले अगर ना माने ..."

शीला भाभी को अभी भी एक मिनट लगा विश्वास करने में ....फिर तो वो अपने रूप में आ गयी .

अपने हाथ में ली हुयी दाल निकालने की कलछुल को मुझे दिखाती बोलीं ,

" लाला इ देख रहे हो ...तनिको नखड़ा करिहे एनकर महतारी ना ...त इहे उनकी गांडी में डार के पूरा ...निकाल लेब और सीधे उनके मुंह में ...हिम्मत है उनकी ...इतना बढ़िया लड़का , बढ़िया नौकरी घरबार ...और उहो सब एक दम चाक चौबंद ...कहाँ मिली और रहा तोहरे भौजाई क बात ...त उनकर त काम आसान हो गया ना ...फिर ये भी तो एक तरह से उन्ही के ओर की है " गुड्डी को देखते वो बोलीं ...और फिर बोलीं ..

" लाला एक बार तुम हाँ कह दिए हाउ ना ..बस देखना ..."

मुस्कारती हुए उन्होंने मुझे छोड़ दिया ...क्योंकि गुड्डी खाने के बाकी बर्तन लेके पास आ गयी थी।

गुड्डी उन्हें और वो गुड्डी को देख के मुस्करा रही थीं
लेकिन आज उन दोनों के मुस्कारने का राज अलग अलग था ...

गुड्डी मुस्करा रही थी की ..मैंने उसकी बात मानकर शीला भाभी को पटाने की दिशा में एक कदम और बढ़ाया।
और शीला भाभी अब गुड्डी को एक नयी नजर से देख रही थी ...और अब वो मेरी हम राज हो गयी थीं इस लिए मुस्करा रही थीं।

तब तक भाभी सीढ़ी से नीचे उतरी और पीछे पीछे भैया ...भैया वाश बेसिन की ओर चले गए ...और वो सीधे डाइनिंग टेबल की ओर ...

भाभी इस समय सुबह से भी ज्यादा ...उन के होंठ हलके सूजे से थे और बाइट्स के निशान एक दम साफ थे ...और सिर्फ होंठो पर ही नहीं गालों पर भी ..ब्लाउज उनका काफी खुला था शायद ऊपर के दो हुक्स टूट गए थे ..और वहां से उनके क्लीवेज के साथ नेल मार्क्स और बाइट्स नजर आ रहे थे ...

लेकिन सबसे बड़ी बात ये थी की ...उनके हाव भाव से, चाल ढाल से , आँखों से , चेहरे से ...सेक्स का रस छलक रहा था

 वो मुझे देख कर मुस्करायीं . जैसे उन्हें मालुम हो की , मुझे मालुम है ऊपर वो क्या कर .के आ रही हैं ...और फिर गुड्डी के साथ खाने के टेबल का उन्होंने पूरा मुआयना किया ...

कल तो सिर्फ मूली के पराठे थे ...लेकिन आज पूरी टेबल भरी पड़ी थी.

उन्होंने गुड्डी को बांहों में ले के हलके से दबा दिया और बोली ...

" तू ना ....तेरे हाथों में जादू है मैं साढ़े ग्यारह बजे तुझे किचेन में छोड़ के गयी थी और दो घन्टे में ...इत्ता सारा ...वो भी अकेले ..."
गुड्डी के चेहरे से भी ख़ुशी छलक रही थी लेकिन वो बोली ...

" अकेले नहीं ...शीला भाभी भी तो थीं ...”

" अरे मैं कहाँ ....मैंने तो सिप्ढ़ रोटी बेली थी ...क्योंकि बेलन पकड़ना अभी नहीं आता इसको "

शीला भाभी हंस के बोली.

ये द्विअर्थि डायलाग समझ के भाभी भी मुस्करायीं ...और प्यार से गुड्डी के चिकने गोर गाल सहलाते हए उसके उभारों को देखते बोलीं ,

" अरे सीख लेगी वो भी ....उमर तो अब हो ही गयी है बेलन पकड़ने की ...क्यों "

और गुड्डी को छेड़ते हुए उसके गाल पे कस के पिंच कर दिया ...
गुड्डी के गाल गुलाल हो गए।

लेकिन शीला भाभी कहाँ छोड़ने वाली थी ..बोलीं ...

" अरे बेलन पकड़ने को बोल रही है ..गावं में होती तो अब तक शादी हो गयी होती ...पेट फुलाए घुमती “..."

" सही कह रही हो आप ...अब इसके लिए भी लड़का ढूँढना चाहिए। वैसे मैंने तेरे मम्मी पापा को बोल दिया है की इसके लिए लड़का मैं खोजूंगी तो जो तेरे मन में हो बोल देना साफ साफ ..बता बता दे अभी से ...वरना कहेगी नाक छोटी है ...ये छोटा है ..."

भाभी गुड्डी को जम के छेड़ रही थी और वो शर्मा रही थी .

अब शीला भाभी का नंबर था गुड्डी को बांहों में दबोचने का ..और वो गुड्डी की ओर से बोली

" अरे मेरी इत्ती प्यारी ननद है ...गोरी चिकनी ...छोटा क्यों मिलेगा ...पहले मैं चेक कर के देखूंगी ना ...तब हाँ बोलूंगी ...लंबा भी होगा और खूब मोटा भी ...क्यों गुड्डी ..."

अब वो क्या बोलती वो भी भाभी के सामने ...सिर्फ धत्त बोल के रह गयी और एक बार फिर गोरे गालों पे गुलाब खिल उठे ...

आज भाभी जिस हालत में थी ...वो शीला भाभी से भी दो हाथ ज्यादा हाट मूड में थीं।

फुसफुसा के गुड्डी के कान में बोली ( लेकिन मुझे सब सुनाई पड रहा था ...)

“अरे शर्मा क्यों रही है ..शीला भाभी ठीक तो कह रही हैं ...कोई एक दो दिन की तो बात है नहीं पूरी जिन्दगी की बात है ...है कोई तेरे पसंद का तो बोल ...किस्मत खुल जायेगी उस की तेरी ऐसी लड़की पा कर ...मुझसे मत छिपाना बोल देना ...कान पकड़ कर तुम्हारे सामने हाजिर करुँगी .. चाहे जो हो .."

शीला भाभी को तो ओपनिंग मिल गयी। वो इशारा कर के भाभी को थोडा दूर ले गयीं और उन के कान में कुछ फुसफुसा के बोलती ..भाभी मुड मुड के कभी मेरी ओर देखतीं तो कभी गुड्डी की ओर ...और मुस्करातीं ...


मैं डाइनिंग टेबल पर अच्छे बच्चों की तरह चुपचाप बैठा हुआ था ..

गुड्डी बिना बात टेबल पर कुछ काम करने की कोशिश कर रही थी , और कभी जब कनखियों से मुझे देखती ...तो कभी मुस्करा देती तो कभी लजा जाती

तक भैया आके टेबल पर बैठ गए और भाभी भी उनके बायीं साइड बैठ गयीं।\
गुड्डी भी मेरे बायीं ओर बैठ गयी और शीला भाभी टेबल के साइड पे ...

बस एक बात मैं श्योर था ...आज मेरे ऊपर गालियों की बौछार नहीं होगी ...वरना रोज खाने के साथ ...मंजू शीला भाभी ...और कल तो गुड्डी खुद ...

भैया मुझसे 12 साल बड़े थे और थोड़े रिजर्व संजीदा भी ...इसलिए उनके सामने ज्यादा छेड़छाड़ नहीं होती थी ..सब लोग सीरियस से ही रहते थे ...

लेकिन भाभी की बात और थी ...वो भैया से 8-9 साल छोटी थीं ...मुझसे थोड़ी ही बड़ी ...और वैसे मैं भी पहले थोडा रिजर्व सा ही था इन्ट्रोवर्ट अपने कमरे में बंद ...पढाई में लगा ..

लेकिन भाभी से मेरी केमेस्ट्री पहले दिन से ही जम गयी ...फिर तो ...दुपहर में कैरम ...और उन्होंने मुझे ताश भी सिखा दिया ...और मैं उनसे कुछ भी छुपाता नहीं था ...

यहाँ तक की मेरे मस्तराम साहित्य की फंडिंग भी वही करती थी दूसरी ओर उनकी ब्रा पैंटी, पैड ऐसे निजी चीजों की खरीददारी से ले कर उनके बैंक के लाकर तक का काम मेरे भरोसे था।

जब मेरे एक्साम चलते ...वो भी रात भर जगती और हर तीन घंटे में कभी दूध कभी चाय ...यु पी एस सी के एक्जाम में , सर्विस की प्रिफरेंस भी मैंने उन्ही से पूछ के भरी ...और जब मेरा सेलेकशन हुआ ...पहले अटेम्प्ट में ...तो सबसे पहले मैंने उन्हें ही बताया ...वो इतनी खुश हुयी उनसे बोला भी नहीं जा रहा था ...

फिर एक मिनट बाद वो अपने स्टाइल में लौटी और बोली ...

" अब झट से मेरे लिए एक देवरानी लाके दो ..."

" ना भाभी ..." मैंने सर हिला दिया।

" क्यों नौकरी तो मिल गयी अब छोकरी का नंबर है ..." वो हंसते हुए बोली।

मैंने भी हंस के जवाब दिया ..." अरे भाभी वही तो ...नौकरी मैं ले आया ...छोकरी आप ले आइये ..बस मेरी ..."
" मालुम है तेरी दो शर्ते ...वो मैं ध्यान रखूंगी ....लेकिन फिर मैं जो पसदं करुँगी ...नखड़ा मत बनाना ." वो हंसते हुए बोली।
" हिम्मत है मेरी ...आप का एकलौता देवर हूँ ..." और मैंने फोन रख दिया।

भाभी को मैंने दो बाते बतायी थीं ...बहोत पहले ..कुछ मजाक में कुछ सच्ची भाभी ने मुझसे बहोत पहले पूछा था ," हे तुम्हे कैसी लड़की पसन्द है ...वरना मैंने कुच्छ और ढूंढ दिया तो
बहूत ना नुकुर के बाद मैंने उन्हें बताया ,

" आप ये समझ लीजिये की ...जब वो दीवाल की ओर मुंह कर दीवाल से सट कर खड़ी हो ...तो जो पहली चीज दीवाल से लडे वो उसकी नाक ना हो ...."

" तो तुम्हारा मतलब है तुम्हे बहोत छोटी नाक वाली पसंद है,... नकपिच्ची .. ऐसा क्यों ...खैर ख्याल अपना अपना पसंद अपनी अपनी ..."
भाभी जिस तरह से हंस रही थीं ....ये साफ था उन्हें सब समझ में आ रहा था ...लेकिन मुझे चिढाने में उन्हें बहोत मजा आता था. मैं बहोत जोर से चीखा , " भाभी आप भी ना ...आप समझ के भी ..."

" साफ साफ बताओ ना ...नाक नहीं तो दीवाल से क्या लडेगा ...होंठ, ठुड्डी तो हो नहीं सकता " उन्होंने फिर छेड़ा।
मैंने मुस्करा कर कहा जब आप दीवाल से सट कर खड़ी होती हैं ...तो आपका दीवाल से क्या पहले टच करता है .

अब भाभी के चीखने की बारी थी।

तूऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊउम ....लेकिन फिर बात पलट कर बोलीं ( भाभी से जीत पाना बहोत मुश्किल होता है ),

" अच्छा तभी तुम अपनी उस ममेरी बहन कम माल , रंजी को तकते रहते हो . बहुत गदरा रहे हैं उभार उसके ...."
भाभी की बात गलत नहीं थी। रंजी उस समय 9थ में थी लेकिन देखने में इंटर कोर्स वाली लगती थी ..फिगर ऐसी थी उसकी।

लेकिन मेरा रोल माडल भाभी खुद थी ...और ये बात वो अच्छीतरह तरह जानती थीं।

तन्वंगी बदन, क्षीण कटी और उसके ऊपर दीर्घ खूब भरे भरे, उनके लो कट ब्लाउज से हरदम छलकते ..
शादी के एक साल बाद भी उनकी कमर 28 से ज्यादा नहीं थी और उभार 34 सी में मुश्किल से समाते थे ...

भाभी ने मेरी बात मान ली और बोलीं ..चलो तेरी बात सही है आज कल की ढूँढते रह जाओगे टाइप लड़कियों में क्या मजा ..मान गयी वो शर्त मैं अगली बताओ ...


" शादी जाड़े में होनी चाहिए,..." मैंने बोला।
" अच्छा ..दुष्ट,...बड़ा मजा आए रजैइया में ...इस लिए ..." भाभी हंसते आँख नचाते बोली।
" नहीं ..." मैंने भाभी को समझाया। " जाड़े की रातें लम्बी होती है ना इस लिए ..."
भाभी ने एक हाथ मारा मुझे और बोली , देवर जी बहूत प्लानिंग किये हो ...लेकिन अरे सबसे आसान मुझे पटा के रखो ना ..जाडा गर्मी बरसात ...रात कोई जरूरी है ...मैं दिन में जुगाड़ लगवा दूंगी तुम्हारा।

मैं वर्तमान में लौट आया।
गुड्डी भैया को खाना निकालने में लगी थी।

 " आज कल दो तीन दिन से खाना बहोत अच्छा मिल रहा है , क्या हो गया?" भैया ने भाभी की ओर मुड कर पूछा।

" वो जो तुम्हारे सामने खड़ी है , वही जिम्मेदार है उसके लिए ...अब किचेन मैंने उसके हवाले कर दिया है ..और सिर्फ अभी नहीं जब तक वो वो यहाँ रहेगी ...किचेन की मालकिन वो .." भाभी ने गुड्डी की ओर इशारा करके बोला.

भैया ने एक कौर सब्जी खायी और बोल पड़े वाह ...फिर कहा ..कल मूली के पराठे तुम्ही ने बनाए थे ना ...मैंने कहाँ कहाँ नही खाए है ..दिल्ली की पराठे वाली गली में भी इत्ते अच्छे नहीं बनते ....तुम्हे तो इनाम देना चाहिए।"

भाभी चढ़ गयी और गुड्डी से बोली ...

" मांग ले मुंह खोल के ...ये दोनों भाई बहूत कंजूस है ..." और फिर भैया से बोलीं ..." अरे इनाम देना है तो कुछ ऐसा दो जो जिंदगी भर इसके साथ रहे , इसके काम आये ..."

भाभी उकसा भैया को रही थीं लेकिन कनखियों से देख मेरी ओर रही थीं, बीच बीच में।

मैं सामने रखी थाली में देख रहा था और गडा जा रहा था मुझे मालूम था भाभी 'किस इनाम' की बात कर रही हैं , भले ही भैया के समझ में नहीं आ रहा था।

इसका मतलब शीला भाभी वाला तीर सीधे सीधे निशाने पर लगा।

भैया ने अचानक ट्रैक बदला। उनके दिमाग से वो मूली के पराठे उतर नहीं रहे थे। मेरी ओर देख के उन्होंने भाभी से पूछा ,
" और इसके लिए क्या बना था ...ये तो छूता नहीं ..."

भाभी ने सवाल के जवाब में गुड्डी से सवाल पूछा,

" क्यों इनके छोटे भैया ने कल कितने मूली के पराठे खाए थे ."

गुड्डी उस समय भाभी को खाना परस रही थी। मेरी ओर देख के हंसी रोकते वो बोली , चार मूली के पराठे ..और वो भी ख़तम हो गए थे इसलिए और नहीं खाए।"

भैया के हाथ से कौर गिरते गिरते बचा।

गुड्डी शीला भाभी के पास खाना निकाल रही और भाभी ने फिर भैया को चढ़ाया ..

"अब मान गए ना इसको बड़ा इनाम बनता है ना ".

लेकिन भैया अब गुड्डी के बनाए खाने में खो गए थे , खाते खाते बोले

" सच कहती हो ...अब तो ये जो मांगे देना पडेगा .."

शीला भाभी ने गुड्डी से फुसफुसाया, और मेरी ओर इशारा कर के बोला

" अच्छा मौका है मांग ले ना ...इस लड़के को ..."
लेकिन वह प्रकरण भाभी ने बंद किया , भैया से कह के ..".याद रखना , मुकर मत जाना।"

गुड्डी अब सब को ( सिवाय मेरे )खाना निकालने के बाद अपनी थाली में खाना निकाल रही थी की भाभी ने छेडा , " अरे गुड्डी , मेरे देवर को भूखा ही रखेगी क्या .."

अब द्विअर्थी डायलाग बोलने में गुड्डी को भी महारत हासिल हो गयी थी , खाना निकालते हुए वो आँख नचाकर , मुस्कराकर बोली,

" अरे ये कोई बच्चे थोड़े ही है , ले ले ना अपने से मैंने तो कभी मना नहीं किया , या कहिये की मैं खिला दूँ अपने हाथ से .."
और फिर एक बार अपना अधखाया कौर उसने मेरे मुंह में डाल दिया ...और मैंने चुपचाप खा लिया।

कल की बात और थी ..ये गुड्डी भी ना ...आज तो भैया भी थे, लेकिन गनीमत थी की वो खाना खाने में इतने मगन थे ...की उन्होंने कुछ देखा नहीं

लेकिन उन्हें सुनने से कौन रोक सकता था ..
गुड्डी ने मेरे कान के पास मुंह लगा के बोला,

" कैसा लगा करेला ....अच्छा था ना ...काटा तो नहीं जोर से ..."

और भैया के हाथ से फिर कौर गिरते गिरते बचा।

करेला और मैं कोई सोच नहीं सकता था ...

भाभी बस गुड्डी को देख के प्रशंसा भरी दृष्टि से मुस्करा रही थीं।

भैया ने एक बार मेरी थाली में निगाह डाली , मेरी लिए कुछ भी अलग नहीं और सब कुछ मेरी निगेटिव लिस्ट का ..और अब भाभी की ओर देख के मुस्करा दिए ..

भाभी कभी मेरी ओर देखतीं कभी गुड्डी की ओर ...फिर कुछ भैया के कान में वो बोलीं . और खाने में मगन उन्होंने बस सर हिला दिया.

भाभी ने एक बार मुझे देखा फिर भैया की ओर मुड के बोला ,

" मैं सोचती हूँ की अब मुझे अपनी देवरानी लानी ही चाहिए ...क्यों।"

भैया खाते हुए बिना रुके बोले ,

" तुम जानो , तुम्हारा देवर जाने ...बस मुझे बता देना लड़की कौन है ...मैं उसके घरवालों से बात कर लूंगा ...और बरात रिसेप्शन का इंतजाम कर दूंगा ...लेकिन तुम्हारी देवरानी का फैसला , तुम जानो तुम्हारा देवर जाने।"

अब मैं सहम गया। भैया ने हाथ खड़े कर दिए थे ...अब सिर्फ भाभी का सहारा था ...और हमारे यहाँ ज्यादातर फैसले खाने की टेबल पर ही होते थे ....

मैं सब देवी देवता मना रहा था ...लेकिन भाभी ने मेरी और देख के अनाउन्स किया ..

" देवरानी मेरी आएगी ..इससे इसका क्या मतलब ...और जून में कर देंगे .."

' जैसी तुम्हारी शादी हुयी थी गरमी में ...तीन दिन की शादी ...भात खिचड़ी ...कितना मजा आया था खूब गारी हुयी थी ..." शीला भाभी ने समर्थन किया।

" एकदम उसी तरह से ...अरे उसी आम के बाग़ में गांव में बारात टिकेगी , जहां आप की बारात टिकी थी ..." भाभी ने इरादा साफ किया ...

मेरी सांस में थोड़ी सांस आई ..गुड्डी और भाभी का गाँव तो एक ही है ...और उसी बाग़ का मतलब फैसला मैं जो मना रहा था ...वही ...लेकिन मुझे प्रोटेस्ट करना था , सो किया ...

" भाभी मैंने बोला था ना ...गर्मी में छुट्टी कहा मिलेगी मुझे फिर ..."

और जोर से डांट पड़ी भाभी की ...

"तुमसे कौन पूछ रहा है ...अरे एक हफ्ते की छुट्टी ले लेना या बिना छुट्टी के आ जाना ...4 दिन घर में रस्म होगी ...और तीन दिन की बरात ..दोपहर तक दुल्हन बिदा करा के ले आना , कंगन छुडवाई , पूजा सब शाम तक करा के तुहारी छूट्टी ..

उसी दिन शाम को ...शाम को ट्रेन है ना तुम्हारी बस ...अगले दिन पहुँच जाओगे नौकरी पे ..मेरी देवरानी मेरे हवाले कर देना , फिर तुम्हारा कोई काम नहीं। चाहे साल भर बाद आओ "

गुड्डी मुझे देख के मुस्करा रही थी ...

और मैं अपने बडबोलेपन पे अपने को कोस रहा था ...यानी बिना सुहागरात मनाये भाभी मुझे नौकरी पे भेजने को तैयार थीं।

मेरी हालत देख के भाभी ने मुझे कनखियों से देखा और जोर से मुस्कराई की अब बोलो बच्चू ...फिर भैया से बोलीं ,

तो अब पक्का , शादी गर्मी में होगी और बारात गाँव में ..." अबकी भैया एक पल के लिए रुके और बोले ,

"हाँ , समझ गया मैं यार तय हो गया ...बारात उसी आम के बाग़ में रुकेगी जहां मेरी बरात रुकी थी ...तुमने बोल दिया बस हो गया , और अचानक उन्हें कुछ याद और वो बोले ... लेकिन इसकी बरात ...आम के बाग़ में ...वो भी गर्मी में ..." उनकी निगाहे बस मुझ पर टिकी थीं।

आम मेरी निगेटिव लिस्ट में नहीं था वो मेरी चिढ में था। बचपन में तो कोई मेरे सामने नाम भी नहीं ले सकता था ...और अभी भी मेरा मन बड़ा ऐसा वैसा हो जाता था ...और खाने की तो बात ही नहीं ..

भाभी और गुड्डी ने बात सम्हाली, हमेशा की तरह .

और भाभी ने गुड्डी से इशारा किया , "वो जो आम का अचार तुम्हारी मम्मी ने भेजा था , वो दिया नहीं।"

"उफ्फ, मम्मी ने बोला था सब को खिलाना, इत्ते प्यार से उन्होंने भेजा था और मैं भी ना ...लीजिये ना ..." और सबसे पहले भैया को ..फिर बाकी लोगो को ( मेरे सिवाय ) और सबसे अंत में अपनी थाली में रखा।

भैया ने थोड़ा सा चखा और फिर उनके बिना बोले , उनका चेहरा उनकी आँखे सब बातें कह रही थीं। उन्होंने गुड्डी से पूछा ,

" तुम्हारी मम्मी ने बनाया है ना ...बहोत अच्छा बना है , थोड़ा और दो .." गुड्डी ने थोड़ा और दिया और बताया भी ,
" जी असल में मम्मी ने बताया था ...लेकिन बनाया मैं ही था ..."

अब तो भैया और,...

गुड्डी ने अचार जरा सा हाथ में ले के मेरी और ऐसे दिखाया मानो कह रही हो ...लोगे।

और मैं बुरी तरह घबडा गया ..और घबडाहट में मेरी हिचकियों का दौर चालू हो गया ...मेरे बगल में गुड्डी ही थी और पहले तो उसने मेरी पीठ सहलाई फिर गले पे थोड़ा सा मारा ..फिर बोली ..बस एक मिनट बस जरा सा सुखी रोटी का टुकड़ा खा लो ..अभी ठीक हो जाएगा।

मेरी तो मारे हिचकी के आँखे बंद थीं उस दुष्ट ने रोटी का एक बड़ा सा टुकड़ा बना लिया ...भाभी ध्यान से देख रही थीं। फिर उसमे उस आम के अचार का टुकड़ा लगा दिया बड़े प्यार से , फिर मेरे मुंह में डालते हुए बोली,

" खा लो बस हलके से कुचलना और गटक जाओ ...एक मिनट में हिचकी गायब।"

वास्तव में हिचकी गायब हो गयी ...लेकिन स्वाद थोड़ा अलग सा था ..जब मैंने सामने भाभी को मुस्कराते देखा तो समझ गया की कुछ तो गड़बड़ है ..

भैया उठ रहे थे ये बोल के की उनका कोई फोन ऊपर लैंड लाइन पे दो बजे आने वाला है ...और भाभी को उन्होंने हिदायत दे दी की वो भी खाना खा के ऊपर आ जायं ,कुछ जरुरी बात करनी है .."

और उनके हटते ही गुड्डी और शेर हो गयी ...और फिर तो थोड़ा सा अचार फिर उसने रोटी में लगा के बढ़ाया ...

सामने भाभी मुस्करा रही थीं ...

मैं नहीं खाता ना ...तुम तो जानती हो ...मैंने गुड्डी से कहा

पर वह दुष्ट बोली ...

हां मैं भी यही जानती थी लेकिन अभी तो खाया उस रोटी के साथ ...क्यों और वो भाभी की ओर देख रही थी ...
उन्होंने भी मुस्काते हुए हुंकारी भरी ..हाँ एकदम मेरे सामने ..

" तो फिर अब क्यों नखड़ा कर रहे हो लो ना , मैंने बनाया है ...और सीधे मेरे मुंह में ."

टेबल पर से उठते हुए ..भाभी कुछ बोलतीं ..शीला भाभी और गुड्डी एक साथ बोल पड़ीं ...आप जाइये हम लोग टेबल समेट देंगे ...और किचेन भी ..वरना ऊपर से दुबारा बुलावा आ जाएगा ...

और उसी समय बास्तव में ऊपर से आवाज आ गयी और भाभी लगभग दौड़ते हुए ऊपर ...

मैं अपने कमरे में और गुड्डी और शीला भाभी किचेन में ...

मैं अपने कमरे में पलंग पर लेटा घडी देख रहा रहा था ..1 मिनट 2 मिनट 5 मिनट ...पूरे 8 मिनट बाद 2.20 पर गुड्डी आई और कमरे में घुसते ही दरवाजा बंद कर दिया .


 और वो आके मेरे पास बैठ गयी। मेरे चेहरे को सहलाते बोली . गुस्सा हो क्या ...

बस यही परेशानी है मेरे चेहरे और आँखों के साथ ...हैं मेरे ...और तुरंत मेरे मन की चुगली गुड्डी से कर देते हैं।

मैं कुछ नहीं बोला।

अब उसने अपनी देह मेरी देह पे टिका दी और अपना गाल मेरे गाल से सटाकर बोली,

" जरा सा मजाक किया तो ...बुरा मान गए ...अरे यार, मान भी जाओ ना ...अच्छा कैसे मानोगे बोलो ना ".

मैं फिर कुछ नहीं बोला।

उसने मेरा हाथ खींच के खुद अपने उभारों पर रख लिया और मेरी नाक पकड़ के बोली ...मान जाइये मान जाइये अरे बात मेरे दिल की ...

मैं ने फिर भी कोई रिएक्शन नहीं दिया

और अब वो अलफ हो गयी ...मुझ से दूर हट के बैठ गयी और बोली ,

" अगर आप जरा से मेरे छेड़ने से इस तरह से नाराज हो जाते हैं , तो कैसे चलेगा ...मुझे तो आदत है।

इत्ती देर से मैं मना रही हूँ ...और ..मैंने क्या कर दिया ...ज़रा सा ...वो भी ..अगर मैं आप को नहीं पसंद हूँ ...तो बस एक रिक्वेस्ट है ...अभी चार बजे भाभी आएँगी ना ...तो आप साफ साफ उनसे कह दीजिये की आप को मैं नहीं पसंद हूँ ...मैं बहुत नान सीरियस हूँ ..या जो भी ...

प्लीज क्योंकि अगर एक बार उन्होने मेरे मम्मी पापा से बात कर ली और उन्होंने हाँ कर दी ...फिर आप ना बोलेंगे तो उन्हें बहोत शाक लगेगा। आप को तो कोई मिल जायेगी ...और मेरी क्या है ...मैं इन यादों के सहारे काम चला लुंगी ..."

और वो उठने लग गयी

अब तो मेरी लग गयी। काटो तो खून नहीं ...मैं भी कित बेवकूफ हूँ ...इत्ती प्यारी सी अच्छी सी लड़की ...मेरे लिए कुछ भी करने को तैयार ...खुद आके मुझे मना रही थी और मैं भी .....इत्ता नकचढ़ा ...जरा सी बात पे "

मैंने आगे बढ़ के उसकी कलाई पकड़ के खिंची अपनी ओर ...पर पहले तो एक उंगली से भी मैं बुलाऊं ...तो वो कच्चे धागे से बंधी शिंची चली आती थी पर अब ...

वो पूरी ताकत से कलाई छुडा रही थी ...और बोली ...

"प्लीज मुझे छोड़ दीजिये ...अच्छा नहीं लगता ...मैं यहाँ बैठूं और आप पता नहीं किस बात का बुरा मान जाएँ" ...
मेरे कुछ समझ में नहीं आ रहा था ...बात तो ये सही कह रही थी ...और आज जब लगा रहा था शायद भाभी भी मान जायं ...तो मेरे इक पल की बेवकूफी ने पूरी जिंदगी भर के लिए ..

मैंने उस की कलाई छोड़ दी और कान पकड़ लिए, अपने ...

कलाई छूटने पर भी वो नहीं गयी ..बस खड़े खड़े मुझे देखती रही ...और मैं कान पकडे ...बस उसकी ओर देखता रहा बिना कुछ बोले,

मेरे चेहरे और आँखों ने फिर मेरी चुगली की ...लेकिन अबकी मेरे फेवर में ...

और गुड्डी मेरे पास फिर बैठ गयी ..लेकिन थोड़ी दूर ...अब मैंने बोलना शुरू किया ..कुछ भी बिना समझे ...कान पकडे ...

"मैं बुद्धू हूँ , बेवकूफ हूँ ..मेरी बात का बुरा मत माना करो प्लीज ..अब आगे से मैं कभी गुस्सा नहीं होउंगा ...तुम बहोत अच्छी अच्छी हो आई लव यु सो मच ...मैं नहीं रह सकता तुम्हारे बिना प्लीज ..."

बिना रुके मैं बोले जा रहा था धारा प्रवाह

वो अब थोड़ा सा और पास आगयी बस थोडा सा ...उसकी देह मेरी देह से अभी भी टच नहीं कर रही थी ...

पहले तो बिना बोले ठसके से सीधे मेरी गोद में ही बैठती थी ..और आज ...गलती मेरी ही थी ...क्या जरुरत थी इतनी नक्शेबाजी की ...इत्ता भाव खाने की ..

लेकिन उसका चेहरा मेरे चेहरे के पास था ...

गुड्डी बोली ...कान छोडो ..कान छोडो ...तुरंत ...

और मैंने तुरंत कान छोड़ दिया

मेरी बाड़ी में ...कोई मेकेनिज्म थी जिसका रिमोट गुड्डी के पास था ...बिना सोचे समझे मेरी बाड़ी रिएक्ट करती थी ..

कान क्यों पकड़ा था ...गुड्डी ने पुछा ...

 मैं क्या बोलता ...बस मैं मना रहा था प्लीज किसी तरह ये मान जाय ...किसी तरह मान जाय आगे से ये गलती कभी नहीं करूंगा ...

उसने फिर पूछा क्या बोल रहे थे ...

" तुम बहोत अच्छी हो आई लव यू सो मच ..." मैंने बोला .
नहीं उसके पहले ...वो बोली ..

"मैं बहोत बेवकूफ हूँ बुद्धू हूँ ..."

अब वो थोडा सा मुस्करायी और अपनी देह मेरी देह पे टिका के मेरी नाक पकड़ के बोला ...

" वो तो तुम हो ...बेवकूफ भी बुध्दू भी ...और उस के बाद क्या बोल रहे थे ..." हलके से हंस के वो बोली।

" तुम बहोत अच्छी हो ...आई लव यु सो मच ..आई लव यु ..." मैंने हलके से बोला

" इतना वक्त लगा तुम्हे यह कहने में ..." वो फुसफुसा के बोली ...और आज मैंने अहसास किया की आज पहली बार मैंने उसे आई लव यू बोला था ..

और अब सारे बाँध टूट गए ...

मैंने उसे कस के बाहों में भीच लिया और उसके गालों को होठों को आँखों को चूमते हुए बोला ...आई लव यू आई लव यू ...

और अब उसने अलग होने की कोई कोशिश नहीं की ...थोड़ी देर बाद उसने अपना परी चेहरा थोड़ा सा उठाया , मेरी नाक पकड़ के पिंच किया और बोली , तुम्हारी सजा ये है की ...

मैं सजा सुनाये जाने का इन्तजार कर रहा था

और उसने सजा सूना दी ...मेरी नाक पकडे पकड़े ..

" तुम्हारी सजा ये है की तुम रोज सुबह से शाम तक मुझसे एक हजार बार बोलो की ...तुम बहोत अच्छी हो ...और सौ बार बोलोगे की आई लव यू ..."

ये सजा थी की इनाम ...मैंने उसे फिर अपनी बाहों में भींच लिया और उसके चेहरे पर चुम्बनों की बारिश ...बार मैं बोल रहा था ...तुम बहोत अच्छी हो बहोत अच्छी हो ...आई लव यु ...

8-10 मिनट के बाद उसने अपने को अलग किया और बोली ...

"तुम भी ना ...मेंने सुबह से शाम तक 1000 बार बोलने को कहा था ..अभी सब थोड़ी ...मैं गिन रही थी 428 बार तुम बोल चुके हो ..तुम बहोत अच्छी हो और 69 बार आई लव यू ...बाकी बाद में ..सजा तो हो गयी ...लेकिन अब मेरा एक हुक्म सुनो ध्यान से ..."

मैं भी उठ के बैठ गया था ...वो शोख बोली ..

" तुम कभी ...कभी भी ...गुस्सा नहीं करोगे ...गुस्सा होने का हक़ सिर्फ मेरा है ...और तुम्हारा काम मनाना है समझे "

मैंने एक बार फिर से कान पकड़ लिया और बोला " एकदम नहीं ...मेरी ग़लती थी ..अब कभी भी गुस्सा नहीं होउंगा .."

उसने अपने नाजुक हाथों से मेरे कान को छुडा दिया और शरारत से आँखे नचाते हुए मुस्करा के बोली

" ये तुम बार बार कान क्यों पकड़ लेते हो ...मैं हूँ ना तुम्हारा कान पकड़ने के लिए ..."

और उसने कान का पान बना के कस के पकड़ लिया और फिर पकडे पकडे बोली ..

" तुम्हारे सामने एक इत्ती अच्छी सी प्यारी सी लडकी बैठी है , बहोत चीजें है उसकी पकड़ने के लिए ...देख देख के ललचाते रहते हो , और सामने है तो ...बुद्धू लोगों के सींग पूँछ नहीं होती ..."

अब इससे ज्यादा क्या दावतनामा मिलता ..मैंने उसे तुरन्त भींच लिया और मेरे हाथ सीधे उसके उभारों पे ...

मेरी बेवकूफी की ये सबसे बड़ी मिसाल होती की अगर ये रसीले किशोर मस्त उभार मेरे हाथ से हमेशा के चले जाते। और अबकी मैंने उसके कुर्ते के बटन खोले और हाथ सीधे गुड्डी की गदराई चूंची पे ...

और गुड्डी भी पीछे नहीं रहने वाली थी उसने ना सिर्फ मेरे शार्ट में हाथ डाला बल्कि बेताब प्यासे लिंग को झट से निकाल के बाहर और उसे अने टीन मुट्ठी में दबाते सहलाते बोली , " ज़रा इसको हवा धुप तो दिखाओ ..."

और बस थोड़ी देर में हम दोनों की देह गुथम्गुथा ...बस ज़रा सा सांस ली तो मैंने बोला ,

" हे तूने तो मेरी जान ही निकाल ली थी .."

बस मछली की तरह फिसल कर मेरे बांह जाल से वो बाहर और मेरे सामने बैठ के मुस्कराते हुए बोली ,

" हे तेरी जान, दिल हैं क्या तेरे पास ...जो घबडा रहे थे ...वो मेरी मुट्ठी में हैं एक दम सेफ ...और दुसरे को क्या तुम्हे भी हाथ नहीं लगाने दूंगी ...अगले सात जनम तक चाहे लाख हाथ पैर पटक लो और चाहे जीत्ता भी चिढ लो, गुस्सा हो लो ...वो मेरा था मेरा है और मेरा रहेगा ."

उसने अपने दोनों पैरों के तलुओं से मेरे तन्नाये लिंग को दबा रखा था और मथनी की तरह चला रही थी ..साथ में उसके पायल के घुंघरू की आवाज भी रन झुन रन झुन कर रही थी। उस ओर इशारा करती वो बोली ...

" और हाँ इसे चाहे अपनी माँ बहनों जिस को देते रहो ...मुझे फर्क नहीं पड़ता।"

मैंने उसे खींच के फिर से लिटा दिया ...और अब मैं उसके पीछे से ...मेरा खूंटा सीधे उसके चूतडो की दरार के बीच धक्के मारते हुए ...और हाथ फिर से कुर्ते के अन्दर चूंची का रस लेते .मैंने कचाक से उसके रसीले गालों को काटा और उसके कान में मुंह लगा के पूछा ,

" हे तूझे क्या लगता है भाभी मान लेगी जो मैं चाहता हूँ ...तुझे अपनी देवरानी बनाने वाली बात ..."

गुड्डी ने एक पल सोचा फिर बोली ...

" मुझे 80% तो लगता है हाँ ...तूने गड़बड़ कर दी वरना मुझे 95% हाँ लग रही थी।"

"क्या ..." धीमे से मैं बोला।

" अरे वही , गरमी में गावं में आम के बाग़ में बरात के नाम पे जो तुम नखड़ा बनाने लगे ..की छुट्टी नहीं मिलेगी .." उसने मुझे हड़काते हुए बोला।

बात तो गुड्डी की सही थी। छुट्टी का जुगाड़ तो हो ही जाता ...

अब मैंने फिर उसी से पूछा ...

वो थोड़ी देर चुप रही फिर बोली ...

" भाभी जब 4 सवा 4 बजे नीचे उतरेंगी ना तो बस उनसे बोल देना अपनी गलती मान लेना की तुम्हे गर्मी में गाव में आम के बाग़ वाली बात बहोत पसंद है "

गुड्डी भी ना एकदम सही सजेशन देती है ...मारे खुशी के मैंने उसे मोड़ के अपनी ओर कर लिया।
अब हम दोनों के चेहरे आमने सामने थे ..

मैंने झट सेउसको चूम लिया, फिर सोच कर बोला जानती हो अगर भाभी ने मेरे मन की बात मान ली ...तो तेरे लिए लिए एक बड़ी मुसीबत की बात होगी .

" क्या " मुझे चूमते हुए वो बोली

".जून में भाभी वाली बात हो जाय तो मजा आ जाय , जुलाई में मेरी 22 वि बर्थडे है .." मैंने कहा।

" मालूम है ...आज तक कभी भूली हूँ तेरी बर्थ डे " मुझे चूमते बोली वो। उसका हाथ अब मेरे लिंग पे तेजी से चल रहा था।
" तो साल में 12 महीने माना हर महीने में 30 दिन ...और हर महीने में तेरी मासिक छुट्टी वाले 5 दिन काट दिए तो 25 दिन ...और हर रोज तीन बार ..."
मेरे गणित को रोक कर फिर कस कर चूमते वो बोली ..

" मालूम है मुझे , जब से तुम्हारे साथ बनारस से आई हूँ रोज तो हेट ट्रिक कर रहे हो "

मैंने जोड़ जारी रखा " 25 तियां 75 मल्तिप्लाइड बाई 12 ...और 50 साल में ...72 साल तक तो ये चालू ही रहेगा ..45,000 बार ...तेरी इसकी रगड़ाई होगी।"

मेरे हाथों ने उसके शलवार का नाड़ा खोल दिया था और अब उसकी चुन्मुनिया मेरी मुट्ठी में थी।

गुड्डी ने मुझे जोर से अपनी बाहों में भींच लिया और कस के किस कर के जोर से मेरे लिंग को दबा के बोली .

" और मेरा जवाब भी सुन लो ...अगर इस में से एक दिन भी नागा हुआ ...तो तुम्हारी माँ बहन सब एक कर दूंगी ...और जो तुम अपनी मायके वाली और मेरी ससुराल वाली छिनारों के साथ करोगे ना ...उनको मैं इसमे से हिस्सा नहीं बटाने दूंगी ..."

 और सरक कर वो नीचे चली गयी ...मेरा शार्ट घुटनों तक और लंड उस बांकी किशोरी की मुट्ठी में ...

आँख नचा के सर उठा के वो बोली, खाने के पहले इससे मैंने एक वायदा किया था ...वो मैं भूली नहीं हूँ ...और गप्प से सुपाडा गुड्डी के मुंह



गुड्डी के मस्त मूंह में क्या गर्मी थी और क्या नरमी ...

जंगबहादुर तो एकदम बौरा गए. गुड्डी की हर चीज में जादू है ...आँखों में , होंठों में जवानी के उभारों में,...और ये जादूगरनी बस हमेशा के लिए मेरे पास आ जाए मुझे अपना सतरंगी जादू दिखाने ...अब हर पल मैं यही मना रहा था ...

कुछ देर तो बस वो अपने होंठों से रस लुटाती रही , लूटती रही ,

फिर उसकी सांप की तरह बलखाती , लचीली जीभ ने अपना जादू दिखाना शुरू किया , कभी वो मेरे मस्त सुपाडे के चारों ओर लता की तरह लिपट कर बलखाती ललचाती उसे चाट लेती तो कभी बस सिर्फ जुबान की टिप, पी होल में सुरसुरी करती ...

मैंने ज़रा सी कमर उठाने की कोशिश की ...तो अपनी कजरारी, रतनारी बड़ी बड़ी सपनीली आँखों से उसने बरज दिया।

और अगले ही पल उसका मखमली मुंह ...सर झुकाकर , धीरे धीरे ...उसने आधे से ज्यादा मोटा लंड गडप लिया। सूत सूत कर मेरा लम्बा मोटा लंड उसके गुलाबी रसीले होंठो के बीच गायब हो गया, तीन चौथाई से भी ज्यादा ...अब कम से कम 6 इंच उसके मुंह में था।

उसका मुंह भरा हुआ , गाल पूरे फूले जैसे बर्स्ट कर रहे हों , आँखे बाहर निकली हुयी ...एक पल के लिए वो रुकी ...फिर अपनी बड़ी बड़ी मुस्कराती आँखों से मुझे देखा।

गुड्डी का मुंह तो भरा हुआ था ...लेकिन उसकी आँखे गा रही थी , ख़ुशी से ...मानो कह रही हो अभी तो बस शुरुआत है ...फिर धीमे धीमे उस के मीठे होंठ मेरे चर्म दंड पर सरकती , रगड़ती और साथ में उसका मुंह किसी वैक्यूम क्लीनर से भी तेज सक कर रहा था , बिना रुके ...

मेरी हालत खराब थी , तन की भी मन की भी। और मैंने उस के सुख में डूबे के चेहरे को देख रहा था ...वो ना सिर्फ मेरे लिए चूस रही था न सिर्फ अपने लिए ...बल्कि हमारे लिए

और हम दोनों सुख के सागर में डूबे ..जैसे कोई नदीदी लड़की कार्नेटो आइसक्रीम चूसे बस उसी मजे से वो चूस रही थी ...और हर बार मेरा लिंग ...थोड़ा और थोडा और ..उसके रसीले मुंह में जा रहा था ...और कुछ मिनटों में लगभग पूरा लंड ..उसके मुंह में ...अब मुझसे नहीं रहा गया।

उसके सर को मैंने थोड़ा प्यार से थोड़ा जोर से दबाया और हलके हलके ...अब पूरा लंड उस गोरी किशोरी के मुंह में समां गया था ...उसका गाल बहोत ही ज्यादा फुला हुआ था ..सुपाडा उसके सीधे गले से रगड़ रहा था ...कुछ देर वो वैसे चूसती रही ...फिर धीमे धीमे अपने थके गालों को राहत देने के लिए उसने लिंग बाहर निकाल लिया .

गुड्डी के रसीले गुलाबी होंठ और लालची जीभ अब मैदान में आ गए थे, मेरा मस्त खड़ा तन्नाया लंड, गुड्डी के मुख रस, थूक से लिथड़ा पुथडा, चमकता ...और गुड्डी कभी उसे कभी मेरे ख़ुशी से पागल चेहरे को देखती ...

और अबकी उस शोख ने मेरे लंड के बेस पे एक छोटा सा किस लिया ...बहोत छोटा सा फिर तो जैसे किसी बाग़ में हजारो तितलियाँ उड़ती पंख फडफडाती आजायें ..बस उसी तरह ...नीचे से ऊपर तक हजारों छोटे छोटे रसभरे चुम्बन ..वो होंठ कभी हलके से छु कर उड़ जाते तो कभी बस शरारत से रगड़ देते ...

और उसकी नाचती गाती आँखे भी बार बार मुझे देख के मुस्करा देतीं ..

और हाथ भी कबतक कंट्रोल रखते।

गुड्डी के मुलायम, लेकिन शैतान गोरे गोरे हाथ मेरे बाल्स को , हलके से पकड लेते कभी दबा देते कभी सहला देते ...उधर जब चुम्बनों की बारिश थोड़ी हलकी पड़ी ...तो कभी छोटे तो कभी लम्बे लिक्स ..सीधे बाल्स से लेकर सुपाड़े तक ...और फिर उस ने मैदान बदल दिया . अचानक पाला बदल कर उस के होंठो ने पहले मेरी एक बाल, को फिर दोनों को लेकर चूसने लगे।


हाथ भी कहाँ खाली बैठने वाले थे ...मेरा मूसल जैसा मोटा लंड उस किशोरी के एक मुट्ठी में तो समाने से रहा ...इसलिए दोनों हाथों से उसने उसे पकड़ लिया और फिर ऊपर नीचे ऊपर नीचे ...और गुड्डी की शरारती जीभ ने भी नीचे का रास्ता पकड़ा और कुछ देर तक तो वो बाल्स और पिछवाड़े की जगह पर लिक करती रही ...और फिर सीधे ...पिछवाड़े वाले छेद पे ...

मैं एकदम गिनगिना गया पगला गया ..

लेकिन गुड्डी को इससे क्या फरक पड़ता था ...वो अपने जीभ की टिप इस तरह रगड़ रही थी को जैसे कह रही की जो काम तुम आज रात को करने वाले हो ...मैंने अभी कर देती हूँ ...रियर एंट्री ..

और अबकी जब गुड्डी ने पलटा खाया ...

तो हम दोनों आमने सामने थे , करवट लिए ..लेकिन जंगबहादुर उसके मखमली मुंह की गिरफ्त में फिर से थे और अब एक बार फिर वो जोर लगाकर चूस रही थी , चाट रही थी , उसके दोनों गुलाबी शोख होंठ , लंड के ऊपर रगड खा रहे थे जोर जोर से ...और मैं अब दोनों हाथों से उस सारंग नयनी का सर पकड के हचक के चोद रहा था

मुख चोदन ...मुख चूसन साथ साथ चल रहा था ...

मैं भी आतुर वो भी आतुर ...और साथ में उसके नर्म हाथ कभी मेरे बाल्स सहला देते तो कभी पिछवाड़े के छेद को छेड़ देते ..

मैं आखिरी पड़ाव पर था ...और उसने भी अब एक धक्के में पूरा लंड गडप कर लिया और जोर जोर से चूसने लगी

गुड्डी की मस्ती भी पूरी शबाब पर थी। वो चूस रही थी चाट रही थी।उसके लम्बे नाखून मेरे पिछवाड़े स्क्रैच कर रहे थे और एक टिप फिर 'वहां' दबा रही थी , ठीक 'वहीँ' ...

" हे प्लीज निकाल लो बाहर ...अब मेरा कभी भी हो सकता है ...निकाल लो ना ..."

मैंने गुड्डी को वार्न किया।

उसने जोर से सर हिला दिया ...और बल्कि ,' वहां पीछे ' उंगली की टिप अन्दर पुश करने लगी और चूसने की रफ्तार भी बढ़ा दी।

" बस अब मेरा निकलने वाला है , हटा लो ...अब मैं बस "

मेरी बात का जवाब गुड्डी ने कस के मेरी कमर पकड किया और और अब उसके होंठ सीधे मेरे लंड के बेस पे थे। और वो बिना मेरी सुने चूसे जा रही थी।
एक पल के लिए उसने चेहरा ऊपर उठाया ...उसकी शैतान आँखे बार बार ना ना कह रही थीं ...हो जाने दो ना ..."
और फिर बाँध टूट गया ...
गुड्डी ने अभी भी अपना मुंह नहीं हटाया ...
मैं झरता रहा , गिरता रहा ...और जब मैं ...लगा की,...सब रुक गया है ...उस शोख ने ..उंगली की टिप अन्दर ...

और अबकी एक बार फिर से ...मैं सोच भी नहीं सकता था ...बूंद बूंद ...

कुछ देर हम वैसे ही पड़े रहे ...तभी मुझे भाभी की आवाज सुनाई पड़ी ..सीढी से उतरने की ...और फिर मंजू से कुछ बात करने की ..
मैं वैसे ही शिथिल पडा रहा ..अब मेरे अंदर कुछ ताकत नहीं बची थी।

गुड्डी उठी, उसने मेरा शार्ट ठीक किया ..दो बूंदे उसके कुर्ते पे छलक गयी थीं ..ठीक उसके निपल के ऊपर.

उंगली की टिप से लगा कर उसे उसने अपने गुलाबी गाल पे लपेट लिया। और मुझे देख के मुस्कराने लगी।

दरवाजे के पास खड़े होके वो मुझे देख रही थी।

उसका मुंह फुला हुआ था ...जैसे कोई ख़ुशी में फूल कर कुप्पा हो जाय ...कम से एक अंजुरी ...बल्कि ज्यादा ही गाढ़ी मलाई रही होगी।
उसने अपना मुंह खोल कर दिखाया ...पूरा सफेद मलाई से भरा।

फिर उसने मुंह बंद किया , मुस्काई , आँखे गोल गोल घुमाई। और अबकी जब मुंह खोला ...

तो सब उसके पेट के अन्दर ..सिर्फ एक दो बूंदे होंठ से चिपकी बची थीं।

मैंने भी उसे देख के मुस्कराया। और गुड्डी ने शरारती बच्चे की तरह जैसे वो बबल गम का बैलून बनाते है , मुंह से ...वैसा ही बैलून बनाया।

भाभी की आवाज पास आगई थी , शायद उन्होंने उसे देख भी लिया हो ..पर गुड्डी पे कोई असर नहीं था ...

वो मुझे चिढा रही थी , मुझे देख के मुस्करा रही थी ..फिर उसने 'वो' बैलून बर्स्ट किया ...और थोड़ी देर में बाहर से भाभी ..गुड्डी की बातों की आवाज सुनाई पड़ने लगी ...

मुझे लगा की कही भाभी अन्दर ना आ जाएँ और मैं बैठ कर कंप्यूटर खोल कर देखने लगा।

गुड्डी की हंसी , लग रहा था किसी ने फर्श पर मोती बिखेर दिए हों। गुड्डी और भाभी की बात करने की हलकी हलकी आवाजें आ रही थीं।

तभी मैंने देखा मेरे मोबाइल पर दो मेसेज आये थे ...एक रीत का और दूसरा डी बी का ..आब्विय्सली मैंने पहले रीत का खोला ..

मेसेज छोटा था बात बड़ी ..

शाम को बात करेंगे 5 बजे के आसपास ...लेकिन जरुर से ...मेहक ने एक मेल भेजा है ...ज़रा देख लेना/

मैं समझ गया रीत धर ली गयी है . आई बी वाले उसको डी ब्रीफिंग करने के लिए परेशान थे ...सुबह इसलिए सिद्दीकी उसे अपने साथ निकाल ले गया था और बजाय किसी प्रापर हास्पिटल के उसे दिया भाभी के पास रखा गया था , जिनके बारे में किसी को हवा भी नहीं होगी।

डी बी ने फिर उसे अच्छी तरह समझा दिया होगा की क्या कैसे बताना है ...और अब आई बी वाले उसके पास पहुँच गए होंगे इसलिए उसने ये मेसेज दिया होगा।

मैंने मेल खोला ..
मेहक की आई डी जरूर थी लेकिन मेल रीत का था।

और पहली लाइन से ही पता चल रहा था की रीत है ..

"मैंने मेल बोला तो तुमने वो वाला मेल तो नहीं समझा जो तेरी माल रंजी खोजती रहती है ..उससे बोलना की 4-5 तो पहले ही बुक कर दिए थे ..निराश ना हो अब मुझे फुरसत मिल गयी है तो 6-7 और बुक कर दूंगी उस के लिए। 10 दिन में बनारस से उतना कमा के जायेगी , जितना तुम महीने भर में नहीं कमाते हो ...

मजे का मजा और पैसे का पैसा ...और मैं कोई कमीशन भी नहीं ले रही ..हाँ तो ये बताओ ...तुम वहां सिर्फ कन्या बाजी ही कर रहे हो या कुछ काम धाम भी ..डी बी ने मुझे मुम्बई और बड़ोदा के बारे में बता दिया है। तुम ने अगर कोई रिपोर्ट बनायी हो तो इसी आई डी पर मेल कर देना।

मीटिंग शायद थोड़ी देर के लिए डिले कर दी गयी है। उसके आधे घंटे पहले मुझसे बात कर लेना ..रिपोर्ट पर कुछ मगज अस्त्र का प्रयोग मैं भी कर लुंगी ...फिर हम तुम डिस्कस कर लेंगे ...हमें वहा एक कामन स्टैंड लेना होगा। रिपोर्ट का इन्तजार करुँगी ...

और हाँ रंजी का बनारस आना पक्का है ना ...?"

फिर मैंने डीबी का मेसेज खोला ...

वही बात जो रीत ने कही थी मीटिंग अब पौने 6 बजे शुरू होगी। रा का जो एजेंट आना था ...डीबी ने उसका नाम भी लिखा था ...करण ...अभी आयरलैंड में था ...उसकी फ्लाईट थोड़ी लेट हो गयी थी। उसने सीमापार के बारे में काफी इन्फो जुटा रखी थी ...इसलिए वेट करना होगा।

रिपोर्ट दी तिहाई तो रेडी ही थी। मैंने 5-6 मिनट में कम्प्लीट कर मेहक के मेल आई डी पर रीत को मेल कर दिया।

और तबतक एक और मेसेज ...फेसबुक खोलो ना ...मैं आन लाइन हूँ ...

रंजी का,

रंजी फेसबुक की दीवानी थी ...उसका बस चले तो दिन रात ..फेसबुक पर ही बैठी रहे ..

मैंने खोल लिया ...वह चैटियाने के मूड में थी।

पहले तो मैंने उसकी स्टेटस देखी .." शाम को मैं 'कही' जाने वाली हूँ " करीब आधे घंटे पहले पोस्ट की थी उसने ...और 278 लोगो ने 'लाइक ' कर लिया था। मैंने उसकी फ्रेंड्स लिस्ट देखी ...728 और आधे करीब लड़के ...और इसमे से 25-30 ने तो 2-3 दिन के अन्दर ज्वाइन किया था ...जिसमे ज्यादातर बनारस के थे।

" हे किधर देख रहे हो ..." उसका मेसेज आया चैट पे आओ ना और मैं आ गया।

" तुम खुश हो जाओ मैंने तेरी बात मान ली , जो कहा था वही पहन के आ रही हूँ ." रंजी बोली।

" तो पहन लिया क्या ...दिखाओ ना ...और अन्दर क्या पहना है ..."

मैंने कई सवाल एक साथ पूछे ...और सौ सवालों का एक जवाब ..

" पिटोगे तुम ...वो भी बहोत जोर से ..." उसने तुरंत पोस्ट किया।

और एक स्माइली ...गुस्से वाली ...फिर अगला मेसेज भी उसी का आया

' अरे यार अभी नीचे बैठी हूँ ...सबके साथ ...जो तुम टेबलेट लाये थे ना उसी से कर रही हूँ ...मैंने फेसबुक पे पोस्ट भी कर दिया था ...अभी ऊपर जाउंगी बस 5 मिनट में ...तो चेंज करुँगी ..."

" फिर दिखाना ना ..." मैं छोड़ने वाला नहीं था।

" अरे अभी आधे पौन घंटे में पहुँच रही हूँ तुम्हारे पास ...तो देख लेना आँखे फाड़ फाड़ के"

अबकी मुस्कान वाली स्माइली साथ में थी।
मैंनेकिस वाली स्माइली चिपका दी तो उसने भी ...

... फिर उसने शिकायत लगाई ..".तुम फेस बुक पे आन लाइन नहीं होते करते क्या रहते हो .."

...मैं उसको कुछ भी जवाब दे सकता था ...मेरे पास बहूत काम हैं ...मुझे टाइम वेस्ट करने के 342 तरीके और आते हैं या ये मेरे धर्म के खिलाफ है ...

लेकिन जो लड़की हाट हो सेक्सी हो उसपे आप लाइन मार रहे हो और उस का अगवाड़ा और पिछवाडा दोनों सुपर मस्त हो ..उसे आप ऐसे जवाब नहीं दे सकते

मैंने बोला ...

"मैंने तो वहां एक मकान बनाने की भी कोशिश की थी परमानेंट रहने के लिए ..इंट सीमेंट का जुगाड़ कर लिया था ...लेकिन जब से वो थाणे में बिल्डिंग गिरी ना .. इल्लीगल बिल्डिंग की साल्ले परमीशन ही नहीं देते ..कहते हैं 2-3 महीने रुको , मामला ठंडा पड़ने दो ..."

उसका मेसेज आया ...कुछ रुककर ...तुम्हारी बात समझ में नहीं आती।

जिस तरह से रुक रुक कर उसका जवाब आ रहा था थे साफ था की वो कम से कम 7-8 लोगों से साथ चैट कर रही थी।

फिर वो खुद ही बोली ...अच्छा मैं ऊपर चल रही हूँ अपने कमरे में चेंज करने के लिए


मैंने तुरंत जवाब दिया ...मैं भी आऊं क्या .

उसका जवाब आया आओ ना लेकिन 10 मिनट बाद ...

और हम दोनों ने फोन रख दिया .

फेसबुक के लिए मैं अपना कंप्यूटर कभी इस्तेमाल नहीं करता। अगर कभी गलती से कर दिया तो , एसिड, फिनायल और भी बहुत सारी चीजों से उसे साफ करना पड़ता है ...पता नहीं उसकी कूकी कहाँ कहाँ जाकर झाँक के आये और मेरी चुगली करे ..चाहे वो मेरी नीली पीली फिल्मों का खजाना हो या दुष्टों की खोज का ...और अगली बार मैं मशीन खोलूं तो मेरे होम पेज पर विज्ञापन आये हाउ टू कैच अ टेररिस्ट ...


इसलिए मैं अपना नान सिक्योर फोन ही इस्तेमाल करता हूँ ...लेकिन उसके बाद उसमें भी कुछ सफाई करनी पड़ती है ..

बाहर भाभी और गुड्डी की खिलखिलाहट बढ़ गयी थी।
मेरे लिए खुद को रोकना बहोत मुश्किल हो रहा था , इसलिए मैं बाहर आगया।


मेरी आँखे कार्टून कैरेक्टर्स की तरह गोल गोल घुमने लगीं।
दोनों मुस्करा रही थीं। भाभी ने गुड्डी के कंधे पे सहेलियों की तरह हाथ रखा हुआ था।


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