FUN-MAZA-MASTI
फागुन के दिन चार--96
गतांक से आगे ...........
" होने दो ना तुम्हे क्या ...जो उसके दुल्हे को अच्छा लगता है ...वो करेगा ..."
और उसकी इस बात पर मैंने बाइक एक पगडण्डी पे मोड़ दी ...
धड धडाते हुए नीचे ..
.दोनों और सरपत लगे हुए ..अब सडक भी दिखनी बंद हो गयी ...वो पगडण्डी इतने नीचे आ गयी थी ...फिर बस एक मेंड सी ...और वो जहाँ ख़तम हुयी ...वहां एक खूब घनी अमराई ...
आम के बौर की मस्त महक ..और बगल में गन्ने के खेत ...आदमी से कम से कम डेढ़ गुनी ऊँचाई के ...इतने घने की कोई दो चार फिट दूर भी हो तो दिखाई पड़ना तो दूर कोशिश करने पे भी पता ना चले
आम के पेड़ भी बहुत पुराने मोटे पेड़ , डालियाँ भी खूब मोटी मोटी ...एकदम कई तो जमीन के पास ...इतनी चौड़ी की कोई उसपे लेट भी ले ...हलकी हलकी मद मस्त फगुनाहट भरी पुरवाई बह रही थी ...
ऊपर से आम के बौरों की महक ...चांदनी ..पत्तों से छन छन कर बहुत झीनी झीनी आ रही थी ...और बादल का अगर कोई छोटा टुकड़ा भी चाँद से खिलवाड़ करने लगता ...तो बस काली चादर फैल जाती ..घटाटोप अन्धकार ...
बाइक की सारी लाइटें मैंने पहले ही बंद कर दीं थीं ...
और मैंने गुड्डी को इशारे से बाइक पे पीछे से आगे आने को कहा ...
और वह चपला तुरंत किसी बाइकर गर्ल की तरह ...आगे ..अपना सर थोडा पीछे झुकाए , दोनों मस्त जोबन ऊपर उभारे ...और अपनी लम्बी गोरी टाँगे मेरी टांगों में फंसाए ..छलकती चांदनी उसके उरोजों से खेल रही थी ...
कौन रुक सकता था मैं ...
और मैंने झुक के उसके होंठो से एक चुम्बन चुरा लिया ...लेकिन अगला चुम्बन हक़ से ...मैंने अपने दोनों बाइक की हैंडल पकडे हाथों का तकिया सा बना , उसके सर को सहारा दे रखा था
मेरे होंठ गुड्डी के रसीले गुलाबी होंठो से चिपके रस ले रहे थे ...और मेरी जीभ उसके मखमली मुंह में अन्दर घुसी , उसकी जीभ से खिलवाड़ कर रही थी , मुख रस ले रही थी ....
लेकिन जीभ एक बार रस लेने लगे तो कहाँ रुकती है ...अब मेरे हाथों ने गुड्डी की गुलाबी कुर्ती बस ऊपर उठा दो ...और दो दो चाँद एक साथ दिखने लगे ...आम के पत्ते से छन के बरसती चांदनी में ...फिर पहले तो मेरे लालची हाथ ने फिर मुंह ने ...एक एक अपने कब्जे में कर लिए ..
.
चाँद शर्मा गया या शायद कोई नटखट बादल हम दोनों की प्रेम लीला को देखने को बेताब था ...पूरा अँधेरा छा गया ...
लेकिन मेरी लिए गुड्डी के रूप की ज्योत्सना ही बहुत थी ...
मैं कभी उसके निपल चूसता तो कभी चून्चिया जोर से दबा देता , मसल देता ...जोबन का रस लेते लेते मैंने गुड्डी के कान में कहा ,
" ये बहनचोद ...चाँद भी ना ..ऐन मौके पे टार्च बंद कर दिया ..."
" ये बिचारे चाँद को क्यों गाली देते हो ..."खिलखिला के गुड्डी बोली।
" ऊप्स मैं तो भूल ही गया था ...की चाँद तेरे मामा है तो इनकी बहन चोदने का मतलब ..."
और गुड्डी ने मेरा मुंह बंद कर दिया ...मेरे सर को खींच के अपने सीने पे वो ले गयी और ...एक बार फिर उसका खड़ा उत्तेजित निपल मेरे मुंह में और गुड्डी का मस्त निपल मेरे मुंह में हो ...
तो बस सब कुछ भूल कर मैं बस उसे चूस रहा था , चुभला रहा था ...मेरी जीभ उसे नीचे से ऊपर तक लिक कर रही थी ...और उसका कुर्ती से खुला दूसरा जोबन मेरी मुट्ठी में कैद था ...
मैं हलके हलके दबा रहा था सहला रहा था ...
और गुड्डी मेरे कमेन्ट पे कमेन्ट कर रही थी
" मेरे मामा की बहन मतलब मेरी मम्मी ...सीधे सीधे क्यों नहीं बोलते अगर हिम्मत है तो ...
अगर मम्मी को पता चला गया ना तो ऐसी हाल चाल लेंगी तुम्हारी, तुम्हारी सारे मायके वालियों की ...गधे घोड़े तक से रिश्ता जोड़ देंगी ...परपराते फिरोगे ...और अगर उनको तुम्हारा इरादा कहीं पता चल गया ना ...
तो तुम भले भूल सुधार करो ...वो नहीं छोड़ने वाली बिना तेरी नथ उतारे ...तुम गों गों करते रहना ..ऐसी रगड़ाई करेंगी ना वो की ..."
सुन तो मैं सब रहा था लेकिन ना मेरी जवाब देने की हिम्मत थी ना औकात ...
और मेरा मुंह तो वैसे ही गुड्डी ने बंद कर रखा था ...अपने रसीले उरोजों से ..और अब मेरा दूसरा हाथ भी बिजी हो गया था ...गुड्डी की दोनों खुली जांघो के बीच , पाजामी के ऊपर से ...एकदम गीली ...इसका मतलब था वो भी पनिया गयी है ...
और मैंने पजामी के ऊपर से ही उसकी रामप्यारी को दबोच लिया बहोत जोर से फुदक रही थी ...लेकिन अब मेरी उंगलियाँ उसे दबा रही थीं रगड़ रही थीं ...और हथेली का बेस उसे घिस रहा था ....
मस्ती से गुड्डी की आँखे बंद हो रही थीं ..
लेकिन इससे ज्यादा ...उस बाइक पे घुप्प अँधेरे में मुश्किल था ...
लेकिन तब तक गुड्डी के मामा ..चन्दा मामा ने कुछ कृपा की ना जाने उन्हें अपनी भानजी पे दया आ गयी या होने वाले दामाद पर ....पूरी चांदनी एक साथ ....सारी अमराई दिख रही थी ..
और अगले पल हम एक आम के पेड़ की मोटी सी डाली पे बैठे थे ...
असल में डाली पे मैं बैठा था ...और गुड्डी मेरी गोद में ..उसकी दोनों टाँगे फैली मेरी कमर को लपेटे ...आमने सामने ...गुड्डी का एक हाथ मेरी पीठ को पकडे ...और मेरा एक हाथ उसकी कमर पे ...उसे अपनी ओर खींचे ...
हवा थोड़ी तेज हो गयी थी ...
कभी कभी कुछ आम के बौर झर कर, झरती चांदनी के साथ .हमारे ऊपर भी गिर रहे थे
गुड्डी की गुलाबी चिकन की कामदार कुर्ती उठी हुयी थी और उसके उभार कभी मेरे होंठो और कभी मेरे हाथों के बीच ...और वो मुझे फेस करती हुयी बैठी थी ...तो मेरे लिए बाकी काम भी आसान थे ..मेरा हाथ अब सीधे पजामी के अंदर ...उसकी रामप्यारी को प्यार से सहला रहा था , छेड़ रहा था ...और गुड्डी ...
तो गुड्डी थी ...उसने मेरे जंग बहादुर ...मेरे क्या अब वो तो उसके ज्यादा थे ..को आजाद कर दिया था ..और अपनी किशोर लम्बी गोरी उँगलियों से ...कभी दबाती , कभी आगे पीछे करती ..
मैंने गुड्डी के होंठो पे किस करते बोला
" सुन ...जानती है मेरा मन करता है ...बहुत दिनों से करता था ..."
"क्या ..."
" की ऐसी ..खुली हवा में ...बाग़ में ...बस तुम मेरी बांहों में हो और मैंने तुम्हे ..."
मेरी बात काट कर झट उसने ताना दिया ...
" आम के बाग़ में बारात में तो दस बार सोच रहे थे ..."
" मान तो गया ना मैं ..." उसके होंठो को चूमता बोला मैं ...
" और बोलो ...' अब उसकी आवाज हस्की हो गयी थी ...
" तुम मेरी बांहों में हो .मैं तुम्हे ऐसी खुली हवाओं में चूमता रहूँ ..."
"और .."
"तुम्हारे रसीले उरोजों का रस लेता रहूँ ...इन मस्त उभारों का सुख ..."
"और ...वो बहुत हलके से बोली ...उसकी सांसे लम्बी होती जा रही थीं ..
" तुम्हे खूब प्यार करूँ कच कचा कर ..."
"और ...वो मुझे चढ़ा रही थी उकसा रही थी ...उत्तेजना से उसेक उरोज पथरा गए थे
अब मुझसे भी नहीं रहा जा रहा था मेरी तरजनी की टिप सटाक से उसकी मस्त गीली कसी चूत में घुस गयी ...और मैंने उसे कस के भींचते कहा ..
" और मैं ..ऐसी खुली हवा में रात के अँधेरे में ...बाग़ में ...तुम्हे ...तुम्हे ...चोद दूँ ..हचक हचक के चोदू ...'
गुड्डी की जीभ की नोक मेरे कान में सुरसुरी कर रही थीं ...उसने जोर से अपने उभार मेरे सीने में दबाते हुए , कस के मेरे लंड को अपनी गोरी मुट्ठी में भींच लिया और ...बोली ...
" और ..."
" और चोदता रहूँ ...चोदता रहूँ ...रात भर ..."मैं बोला साथ में मेरी आधी उंगली अब उसकी गीली चुनमुनिया में अन्दर बाहर हो रही थी ...
सिर्फ पत्तों की सरसराहट , हम दोनों के दिल की धड़कन ...और चुम्बनों की आवाजें सुनाई पडी रही थी ...
चन्दा मामा ने टार्च बंद कर दी थी ...
शायद अपनी भांजी की काम क्रीडा से शर्मा गए थे ...या
बैटरी ख़तम हो गयी थी ...पता नहीं ...
पर घटाटोप अँधेरा था ...
और हम दोनों एक दूसरे को सिर्फ उँगलियों से , होंठो से और.. दिल से देख रहे थे ..
तभी
गुड्डी अचानक मेरे कान में फुसफुसाई ...हो जाएगा
एकदम एवमस्तु वाले अंदाज में ...
मेरे कुछ समझ में नहीं आया ...गुड्डी एकदम मेरे कान में अपने गरम होंठ सटा के बोल रही थी ..
हमारे गाँव वाले घर पे , एक ऐसी ही बाग़ है ...इसकी तिगुनी चौगुनी बड़ी बाग़ है ...आम की ...और इससे भी ज्यादा घनी ..दिन में मुश्किल से दिखता है ...और चारो ओर से घिरी ....परिंदा भी पर ना मार पाए ऐसी ..
मैं समझ गया ये उसी बाग़ की बात कर रही है ...जहाँ बारात टिकने वाली थी ...लेकिन फिर मेरी समझ में कुछ नहीं आया ...
" लेकिन बारात में कैसे ...हम और तुम ..."
" अरे तुम ना एक दम बुद्धू हो ...बारात की बात कौन कर रहा है ...और फिर शादी वाली रात से तो तुम हम लोगों के कब्जे में हो जाओगे ...कोहबर में ...फिर तेरी विदाई मेरे साथ ही होगी ...
तीन दिन बाद ...मैं सावन की बात कर रही थी ...
मैंने बोला था ना की हमारे यहाँ एक रस्म है की लड़की पहला सावन मायके में गुजारती है ...फिर लड़का आके उसे ले जाता है ...उसके पहले दोनों देवी की पूजा करने जाते हैं ..और मायके का मतलब गाँव ...तो मैं लम्बा तो नहीं जाउंगी लेकिन हफ्ते दस दिन मुझे जाना ही पड़ेगा ..उसी समय ..."
"हफ्ते दस दिन ..".मैं बोला और अचानक उदास हो गया .
" यार तेरे बिना पांच मिनट मन नहीं लगता ...दस दिन कैसे कटेंगे ..
गुड्डी ने मुझे कस के अपनी मृणाल बांहों में भींच लिया ...और बोली ...
" जानती हूँ मैं ...और मेरा कौन सा मन लगता है तेरे बिना ..लेकिन कोई रास्ता है क्या ..रसम तो निभानी होगी न और मै सिर्फ दस दिनों के लिए तो जाउंगी ...और फिर तुम थोडा जल्दी आ जाना ...गाँव में सावन गुजारना मेरे साथ ...फिर मुझे ले के आ जाना ..."
गुड्डी ना ...जहाँ कोई रास्ता ना दिखे उसकी बात रास्ता दिखा देती है ...और मुझे भी रास्ता सूझ गया
मैंने गुड्डी को किस करते हुए धीरे से बोला ..
" मान लो ...तुम्हे दस दिन बारह दिन ...जित्ते दिन भी रहना हो मैं छुट्टी ले लूँ ...तुम्हारे साथ चलूँ ...फिर तुम्हे विदा करा के ले आऊंगा ...जब भी साइत होगी ...लेकिन तुम्हारे घर वाले या मम्मी किसी को बुरा तो नहीं लगेगा "
गुड्डी ने मुझे बाहों में भींच लिया पूरे जोर से और पागलों की तरह चूमते बोली ...
" ये हुयी ना बात ....तुम एकदम ...और मम्मी को बुरा क्यों लगेगा ...वो तो ईत्ती खुश होंगी की ...और उन से ज्यादा खुश होंगी मेरी सहेलियां और कजिन्स ...वो मुझे तो पास फटकने नहीं देंगी ...
कहेंगी तुम तो रोज चिपकी रहती हो ...अब इत्ते दिन हमारा नंबर है " फिर अचानक वो सीरियस हो गयी ..." लेकिन तुम्हारा मजाक भी बनेगा ...कोई कहेगा ...जोरू का गुलाम है ...तो कोई बोलेगा ...बीबी के बिना एक मिनट नहीं रह सकता ..'
और अब मेरी बारी उसे बाहों में भींचने की थी
"सही तो है , बोलने दो ना ...इत्ती मुश्किल से तो मिली है ...और इतनी प्यारी ..सुन्दर ..
तो क्यों छोडू मैं एक मिनट के लिए ..और फिर जोरू का गुलाम हूँ तो किसी .को क्या ..."
और मैंने गुड्डी के गुलाब से गालों पर दस चुम्मी ले ली .
गुड्डी ने भी मुझे भींच लिया ....और लेकिन फिर थोडा अलग हट के बोली ...
" देखो तुम ना मुझे भुलवा देते हो ...मैं क्या बात कर रही थी ...गाँव के आम के बाग़ की ...तो उसी बाग़ की जानते हो सावन में उसी में झूला पड़ता है ...और रात को ..सारी लड़कियां ...भाभियाँ ...वहीँ झूला झूलती हैं ...और कोई मर्द ...बच्चा तक नहीं आ सकता ...
सिर्फ झूला ही नहीं ...सिर्फ लड़कियां होती हैं ..इसलिए बहुत धमाचौकड़ी होती है ...बस उसी बाग़ में .. सावन की रात में तो वैसे ही बादल छाये रहते हैं ...बस ...तुम्हारी चाहत ..."
उसकी बात काटते मैंने एक सवाल किया ..
" दो बातें ...एक बात ...एक तो तुम कह रही हो की उस बाग़ में सावन की रात में कोई मर्द नहीं घुस सकता ...दूसरे जब बाग़ में इतनी लडकियां औरतें होंगी तो हम दोनों ..."
गुड्डी ने पहले तो कच्चाक से मेरा गाल काटा ...फिर बोली ..
" हे देखो ...मर्द ..अरे तुम्हे मर्द कौन मानता है ...तुम तो मेरे 'वो' हो ...सारे गाँव के दामाद ...मेरी सारी कजिन्स , सहेलियों के जीजा , सारी भाभियों के नंदोई ...तुमसे कौन सी शरम ...इसीलिए तो कोहबर में बच्चियों से लेकर ..बड़ी औरतों तक सब तुम्हारी रगड़ाई ...
और फिर झूले पे तो तुम ना जाओ न तब भी सब तुम्हे पकड़ के ले जायेंगी ...और इतना बड़ा बाग़ है ...किसी कोने में ...वरना ...रात में ..झूला ख़तम होने के बाद ...
तुम्हारी गावं में इत्ति तो सालियाँ हैं ...लगा दूंगी किसी को चौकीदारी पे ....वो सब तुम मेरे छोड़ दो ...बस तुम अपनी बात पे कायम रहना ...जित्ते दिन मैं गाँव में रहूंगी ...उत्ते दिन तुम वहां रहोगे ...फिर देखना सावन में गाँव के मजे ..."
मैंने उसे चूम कर कहा ..पक्का ...तुम्हारे साथ जाऊँगा ...तुम्हारे साथ आऊंगा ...कितना रहना है तुम तय करना ..."
मेरी आँखों के सामने रिमझिम करती सावन बुंदिया , हरी धानी चुनर , झूला ...और सबसे बढ़कर ...सावन की रात में गुड्डी की देह में गुथे लिपटे ..अमराई में पुरवाई और फुहार का मजा ..
.और हम दोनों ने एक बार फिर कस के एक दूसरे को भींच लिया ...मेरी आधी घुसी उंगली ..गुड्डी की चुनमुनिया में गोल गोल घुमने लगी ...और उसकी मुट्ठी भी मेरे तन्नाये मस्त जंगबहादुर पे जोर जोर से चलने लगी ...फिर उसने मुझे चूम कर पुछा ...
" कभी पेड़ से तोड़ कर आम खाया है ...उस बाग़
में हर तरह के आम के पेड़ हैं , दसहरी , देसी , बनारसी लंगड़ा ..और उस समय सब लदालद रहते हैं ...बहोत मजा आता है मैं तो एकदम ऊपर तक चढ़ जाती थी ..." फिर लेकिन कुछ सोच के बोली ...
" लेकिन तुम्हे तो आम पसंद नहीं ...रहने दो ..." फिर मुस्करा के गुड्डी कुछ सोच के बोली
" लेकिन ...वहां तुम्हारी पसंद ना पूछेगा कौन ...कौन तुम्हारी मर्जी चलने वाली है ...सब तुम्हारी सालियों की मर्जी चलेगी ..जिस तरह से वो रखेंगी ...और उन से बचाने तो मैं भी नहीं आउंगी .."
खिलखिला के वो बोली
मैंने कहा नहीं पर सोचा ..." यार साल्लियों से बचना ...ही कौन चाहता है ."
लेकिन फिर कुछ सोच के मैंने बोला ..." और अगर मेरा मूड आ गया और मैंने कुछ कर दिया ...तो सालियाँ ...मुंह तो नहीं बनाएंगी ...ये समझ लो ..."
गुड्डी जोर से हंसी और बोली .." मुंह बनाएंगी ...अरे वो तो खुश हो जायेंगी ...और अगर तुम ने कुछ नहीं भी किया ...तो वो बिना किये वो तुम्हे नहीं छोड़ने वाली ...मेरे गाँव की लडकियां हैं कोई मजाक नहीं ..."
तभी गुड्डी के मामा ..मेरा मतलब चंदा मामा के टार्च में बैटरी आ गयी थी ...
और साथ में हवा भी तेज चलने लगी थी ...
और अब चांदनी में मैं कभी गुड्डी के रूप को , उसके गदराये गोरे जोबन को , चांदनी में लिपटी उसकी देह को निहारता ...तो कभी मेरे होंठ मेरी उंगलियाँ ..मेरे हाथ उनका रस लेते ...
अबी हमारी बातें बंद थीं लेकिन देह बोल रही थी ...चूम कर , आलिंगन से, मसल कर रगड़ कर ...फागुन के सारे रंग , सब रस से चांदनी से भीगे हम दोनों के देह में उतर आये थे
हवा अब और तेज हो गयी ...हम लोगो ने एक दूसरे को कस के अपनी बांहों में भींच रखा था ...
आम के पत्तों और आम्र मंजरियो के साथ ...पेड़ों पर आये एक दो छोटे टिकोरे भी गिरने लगे ..
और इसे देख के शरारत से गुड्डी ने मेरे कानों को चूम के , मुझसे हलकी आवाज में छेड़ कर के पुछा
" तुम्हे टिकोरे कैसे लगते है .."
मैं समझ गया था वो ये नहीं किसी और 'टिकोरों ' की बात कर रही थी ...मैंने भी उसके कान में मुंह लगाकर उससे तीन साल छोटी उस की बहन ( दूसरे नम्बर वाली ) का नाम ले कर, धीमे से कहा ..जैसे उसके हैं .
गुड्डी तो बस हँसते हँसते ...कहने लगी ...
"तभी तो मैं कहती हूँ ...तुम एकदम बुद्धू हो ...तुम से ज्यादा तो मेरे गाँव की लड़कियां जानती है ..खाली किताब पढने से और कम्पटीशन में आ जाने से थोड़े बुद्धि आ जाती है ...
अरे पगले ...उसके तो दो साल पहले टिकोरे रहे होंगे ...अब तो निम्बू के तरह के हैं और वो भी बड़े वाले साइज के ...हाँ छुटकी के ( उसकी सबसे छोटी बहन ) के जरूर टिकोरे के साइज के हैं ...
लेकिन वो भी बड़े टिकोरे ...अच्छा है तुम मेरे साथ गाँव में दस पन्दरह दिन रहोगे ...टिकोरे से लेकर पके आम तक का अंतर भी अच्छी तरह समझ लोगे और मन भर सबका , स्वाद भी ले लोगे ..."
तब तक गुड्डी के फोन पे मेसेज की घंटी आयी ...और हम तुरंत बाइक पे थे ...बाइक पे चलते चलते गुड्डी ने मेसेज दिया ...बस दस मिनट में पहुँच रहे हैं ...
पवन वेग से चलकर हम बारह मिनट में पहुँच गए ...
बस रास्ते में गुड्डी ने एक अर्ध विराम कराया ...एक की दूकान पे ...
वो बोली रंजी ने उसे दिखाया था की बहुत मस्त पान की दूकान है ..
और वहीँ गुड्डी ने वो मस्त तीन जोड़ीमीठे पान का आर्डर दिया ...एक जोड़ी एक जगह, दो जोड़ी एक जगह , ...चांदी के बरक में लिपटे ऊपर से गुलाब जल छिड़का ...
बाइक जैसे ही ले के मैं घर पहुंचा ..उस की हेड लाईट खराब हो गयी ...और साथ में चाँद भी गुप्प हो गया ...
मेरे मुंह से निकल पड़ा ..." ये चाँद साल्ला भी ..."
और एक जोर का मुक्का ...गुड्डी का मेरी पीठ पर पड़ा ...वो बोली ...
" फिर ..मेरे मामा को साल्ला बोल रहे हो मतलब ...मामा की बहन के साथ कौन सा रिश्ता जोड़ रहे हो .”
हम लोग घर में घुसे तो आलमोस्ट अँधेरा ... हालांकि अभी दस ही बजे रहे होंगे ..एकदम सोवता पड़ा हुआ था
..शीला भाभी के कमरे की बत्ती भी बंद हो चुकी थी , बस भाभी बरामदे में खड़ी उन दोनों का इन्तजार कर रही थीं
....
पान और गुड्डी ने डांट से बचा लिया
गुड्डी ने इशारा किया पान निकालने का ...और मैंने एक जोड़ी पान वाला पैकेट निकाला और भाभी को पेश कर दिया ...
भाभी ने पैकेट खोला ...चांदी के बर्क वाला पान , गुलाब जल की महक ...और मेरी ओर सवालिया निगाह से देखा
गनीमत थी ..गुड्डी ने मोर्चा सम्हाल लिया और बोली ... ये कह रहे थे , की होली की ... कह रहे थे ...हाँ ...होली की पूर्वसंध्या पर भाभी के लिए अच्छा सा पान ले लें ...
भाभी ने उसे मुंह में रख लिया और बोलीं .." अच्छा है और बेहतर भी ...ये तो पुरानी कोतवाली वाली दूकान का लग रहा है ...वहां तो बहुत भीड़ रहती है ...
गुड्डी को मौका मिल गया और उसने चौका मार दिया , जबर्दस्त बहाना ,
" आप ठीक कह रहीं है ...जबर्दस्त भीड़ और होली के चक्कर में थोड़ी और ही ज्यादा ...आप तो जानती ही हैं ..इनके बस का तो कुच्छ है नहीं ...मैं ही भीड़ में धंस के जा के बनवा के लायी , तब भी चालीस पैंतालिस मिनट लग गए ..कितने लोग घंटे दो घन्टे से इन्तजार कर रहे थे ...
भाभी ने उसकी ओर तारीफ की निगाह से देखा और हम दोनों से बोली ..
"सब लोग सो गए हैं ...कल होली के दिन जल्दी उठना पड़ेगा ....मैं भी बस तुम दोनों का वेट कर रही थी ...और फिर मुझे देख के मुस्करा के बोलीं ...
"तुम्हारे लिए कुछ गुड न्यूज थी ..."..
फिर गुड्डी से कहा ..
" तुम्हारे सुनने की नहीं है ...तुम अलग हट जाओ "
वो ना हटी न कान बंद किये सिर्फ बोली ...
" आप सुनाइये ना ...मुझे कुछ नहीं सुनाई दे रहा है
और भाभी ने सुनाना शुरू किया ,
" तेरे लिये गुड न्यूज है ...पहली गुड न्यूज ये है की ... तुमने पच्चीस तारीख बोली थी ना ...वो पंडित जी ने तुम्हारी और लड़की की कुंडली देख कर पक्की कर दी है ...बल्कि उनका कहना था की .. इस साल पन्दरह जून तक जो भी लगन है ....तुम दोनों की कुण्डली के हिसाब से ...पच्चीस मई सबसे बेस्ट है ...
और मैंने बैंड बाजा , बाराती सब का अरेंजमेंट पच्चीस मई के लिए पक्का कर दिया है .
दूसरी गुड न्यूज ये है की मैंने लड़की वालों से बात कर ली है ...लड़की की मां से ...और उन्हें सब बता दिया है की तुम्हे गाँव की तीन दिन की बारात , और बाकी सब चीजें मंजूर है ...
उन्होंने रिश्ता मंजूर कर लिया है ...तारीख भी ...
बाकी सब चीजों की भी तारीख तय हो गयी यी है तिलक बीस मई को है ...तुम अट्ठारह को यहाँ आ जाना ...शादी का मुहूर्त थोडा जल्दी का है ... रात में दस पच्चीस का ...और द्वार पूजा का साढ़े सात का है ...
इसलिए लड़की वालों ने कहा है की हम दोपहर को ही वहां पहुँच जाएँ ...लंच वहीँ पे ...करेंगे ...और बारात यहाँ से सुबह साढ़े नौ बजे ठीक निकल जायेगी ... तो अब सब पक्का हो गया है ...
लड़की की मम्मी ने तुम्हारे लिए कुच्छ अच्छी बातें कहीं है लेकिन छोडो ..."
लेकिन गुड्डी कहाँ छोड़ने वाली थी ...उसने पूछ लिया क्या कहा ...बताइये ना ..
भाभी ने उसे घूरकर देखा और बोलीं ," तुझे मना किया था ना सुनने को ..."
" मैं सुन कहाँ रही थी ...मैं तो सिर्फ पूछ रही हूँ ..." बड़ा भोला सा चेहरा बनाकर गुड्डी ने पूछा।
भाभी ने उसे अनसुना कर दिया और आगे बोलीं
बस एक बात लड़की का कालेज ..बीस जून से खुल जाएगा ...इसलिए ...पन्दरह जून को वो विदा के लिए बोल रहे हैं ...मैंने हाँ कर दी है ..अब पढने वाली लड़की के लिए तुमने हाँ कर दी थी तो कालेज तो जायेगी ही फिर तुम्हारी छुट्टी भी तो सत्रह तक ही है न ..."
मैंने और गुड्डी ने एक दूसरे को को देखते हुए आँखों आँखों में हाई फाइव किया ....
गुड्डी ने मुझे पहले ही बोल रखा था ...की बनारस में ट्रेनिंग में मैं उन्ही के साथ रहूँ ...फिर थोड़ी सी पेट पूजा ...कहीं भी कभी भी ....बिना नागा।
भाभी ने मुझे देख कर मुस्कराकर कहा ...
" देख तेरा कित्ता बड़ा काम करा दिया ..अब सत्ताइस मई की रात नौ बजे मेरी देवरानी तुम्हारे हवाले ...बस थोडा सा इन्तजार ..अच्छा अब चलूँ देर हो रही है ...
भाभी ने जैसे ही सीढ़ी का रुख किया ...गुड्डी ने फिर टोका ...
इन्हें बता दीजिये ना लड़की की मम्मी ने क्या कहा ...वरना सारी रात इनके पेट में उफान मचेगा ...
भाभी रुक गयी और मुड करमेरे पास आके कहा
उन्होंने कहा है की उस छिनार के जने,अपनी बहन के यार , गदहा चोदी ...के से कह देना ...
मेरी चाँद सी चकोरी ...इतनी आसानी से नहीं मिलेगी ...उस की जम के कोहबर में रगड़ाई होगी ..उसके बाद ही दुल्हन ले जाने को मिलेगी ...
मैंने देखा की गुड्डी मुंह भींचे मुस्करा रही थी ...
मैं क्या बोलता ...मैंने अपने कमरे की ओर मुडा ...तबतक भाभी को कुछ याद आया और गुड्डी के कंधे पे हाथ रख के वो बोलीं ...
" अरे यार तुम तो थी नहीं ..मैंने शीला भाभी से पराठे बनवा लिए थे ...कैसरोल में मेज पे रखे हैं ...हम लोगों ने खा लिया है तुम्ही लोगों के लिए है ..." फिर कुछ सोचके बोलीं ..." लेकिन खाओगी किस चीज से ..."
गुड्डी ने चारो ओर इधर उधर देखा फिर अचार की शीशी उठाती बोली ...
"आप चिंता मत करिए आम का अचार है ना ...बस इसी के साथ "
भाभी जोर से मुस्करायीं ...तुम इसे अच्छी तरह बर्बाद कर दोगी .
अरे बर्बाद तो ये पहले थे मैं अच्छी तरह सुधार दूंगी ...एक बार पक्की तरह से पकड़ में तो आ जाने दीजिये ..एक बार बनारस पहुँच तो जाने दीजिये इनको ..
भाभी ऊपर अपने कमरे में चली गयीं और गुड्डी सीधे मेरे कमरे में ...और स्टूल पर उसने अचार और पराठा रख दिया
मैं कंप्यूटर से जूझ रहा था।
बडौदा से मीनल , मुम्बई से एन पी की रिपोर्ट्स थीं।
बडौदा से जो आदमी ( जिसे हमने कोड नेम वाई दिया था ..) उसके पिछले तीन दिनों के सेटलाईट फोन से की गयी बात चीत को मेरे हैकर मित्रों ने डी कोड करके उसकी ट्रांस स्क्रिप्ट बना के भेजा था ...मैंने स्पीड रीडिंग की ...और इन डेवलेपमेंट को भी अपनी रिपोर्ट में डाल दिया।
रीत को मैंने बोला था की उन लोगों के उदयपुर चलने से पहले मैंने रिपोर्ट मेल कर दूंगा ...डी बी ने मुझे महाराजा एक्सप्रेस का कान्टेक्ट दिया था और उन का कम्युनिकेशन सिस्टम बहुत अच्छा था .
वो रीत के पहुँचने पर हार्ड और साफ्ट दोनों कापी दे देते ...
इसके बाद मैंने मीनल को बताया की रीत कल बडोदा पहुँच रही है ...हालंकि कल होली का दिन था ..लेकिन गुजरात में होली का रंग थोडा हल्का रहता है और दोपहर के बाद तो एकदम नहीं ..
.मीनल ने बोला की वो रीत से कान्टेक्ट कर लें ..इस तरह रिफायनरी के सिक्योरिटी हेड और रेलवे में सीनयर डिविजनल आपरेशन मैनेजर , जो मुझसे पांच साल हॉस्टल के सीनियर थे उनको भी रीत के बारे में बता दिया और हेल्प के लिए रिक्वेस्ट कर दिया ...
गुड्डी अलमारी में कुछ खटपट कर रही थी ...उसने मेरा शार्ट और नाईट शर्ट बेड पे रख दिया
" क्या ढूंढ रही हो ..." मैंने पुछा ...
" अपने पहनने के लिए कपडे ..." वो बोली
रोज तो वो फ्राक या टाप में रहती थी और आज बहुत ही ट्रेडिशनल कुर्ती और पजामी में थी ...
" मेरी अलमारी में तुम्हे मेरे कपडे ही मिलेंगे ...तुम्हारे कहाँ से आयेंगे ...हाँ ऐसा करो तुम मेरी शार्ट और शर्ट पहन लो ..."
मैंने उसे चिढ़ाया ...लेकिन गुड्डी के लिए कोई भी आईडिया देना खतरे से खाली नहीं रहता और वो बोली ...
" आइडिया तो अच्छा है तेरा ..." वो मुस्करा के बोली ..
और मैंने फिर भूल सुधार करने की कोशिश की ..." हे फिर मैं क्या पहनूंगा ..." मैं चीखा ...
लेकिन उससे भी ज्यादा जोर से ...मेरा मोबाइल चीखा ...एस एम् एस ...
रीत का था ...वो प्लेन में बैठ गयी थी ...एक बजने के पहले वो उदयपुर पहुँच जायेगी ...फिर वहां से ट्रेन से बड़ोदा ...
मैंने उसे मीनल , रिफाइनरी और रेलवे के नम्बर भेज दिए ...
फिर एक मेसेज ...मीनल का था ...वो दस ग्यारह के बीच रीत से मिलने वाली थी ...
और अब जब मैंने गुड्डी की ओर नजर डाली तो वो एक दम 'टाम ब्वाय ' लग रही थी शार्ट और शर्ट में ...
हे फिर मैं क्या पहनूंगा ...मैंने अपना सवाल दुहराया ...
" कुछ नहीं ...नंगे नंगे रहना ..." अपनी बड़ी बड़ी कजरारी आँखे नचा के वो शोख अदा से बोली ...फिर कहा ..
.
" शर्त बद लो ...वैसे भी आधे घंटे में तेरे कपडे उतर जायेंगे ...तो फिर क्यों इतना हल्ला मचा रहे हो ..."
बंदी की बात में तो दम था ...और इस प्रकरण पर कुछ और संवाद होता ...उसके पहले उसने नया आदेश दाग दिया ...
" मुझे थोडा काम है ...ज़रा ये गद्दा उतरवाकर जमीन पर बिछवा लो ..."
मुझे क्या ऐतराज हो सकता था ...मैं लैपटाप पे काम कर रहा था ...बजाय टेबल के गद्दे पे लेट के, बैठ के कर लेता ...
और दूसरी बात ...अगर गुड्डी बोले तो ऐतराज कर के भी आप क्या कर सकते हैं ...
फिर मैंने गुड्डी के साथ मिल कर बेड के दोनों गद्दे , एक के उपर एक कर के लगा दिए ..( आइडिया उसी का था ) और फिर उसने मुझे भगा दिया ...
एक बार फिर मैं कमप्यूटर पे बड़ोदा के डिटेल्ड मैप्स देख रहा था ....रेलवे स्टेशन ...यार्ड ..रिफायनरी , फर्टिलाइजर प्लांट ...केमिकल इंडस्ट्री क्ल्स्श्च्र ...
और दस मिनट में मेरी निगाह पड़ी तो नक्शा एकदम बदला लग रहा था ...गद्दों के ऊपर गुलाबी फ्रेश साटिन की बेड शीट ...चार तकिये और कुशन ...बगल में जमीन पे जो मैंने दारु की बोतले ले आया था वो ...और साथ में कोल्ड ड्रिंक्स की बड़ी बोतलें
साटिन बेड शीट देख कर कुछ कुछ करने का मन हो रहा था ...और दावतनामा कम डांट आ गयी ...
अब आ भी जाओ ..लैपटाप तो यहाँ भी ला सकते हो ...
और मैं लैपटाप लिए दिए उसके बगल में ...
कित्ती देर का काम और है ...उसने पूछा ...
मैं तो अब 'किसी और काम 'के बारे में सोच रहा था ...जंगबहादुर ने अंगडाई लेनी शुरू कर दी थी .
बस दस पंद्रह मिनट ..समेट रहा हूँ ...मैंने बोला ..
लेकिन वो बोली ...तुम अपना काम करो मैं अपना ...बहुत काम पड़ा है ...लेकिन पहला काम खाना ...पर तुम हाथ मत लगाना ...मैं अपने हाथ से खिला दूंगी ...और वैसे भी थाली प्लेट मैं कुछ लायी नहीं हूँ ...और फिर तुम्हारे हाथ में लगेगा ...तो एक तो अपना लैपी गन्दा करोगे और ..."
"और ...क्या " लैपटाप में एक साईट खोलता मैं बोला .
" और ...और मुझे भी तो उसी हाथ से तुम छूओगे ...इधर ...उधर .."
लजा के , मुस्करा के वो बोली .
वैसे भी अब मैं गुड्डी के हाथ से खाने का आदी हो गया था और मेरा भी काम जल्दी ख़तम होता तो ...रात जिस काम के लिए होती है मैं वो काम शुरू करता ...
और गुड्डी ने पहला कौर अपने होंठों से खिलाया ...और उसके बाद हाथ से ...
मेरी निगाहें मैप पे गडी थी मैंने बड़ोदा के आस पास का रेलवे मैप देख रहा था ...और साथ में रेलवे के बारे में बाकी इन्फो ...
गुड्डी मुझे भी खिला रही थी ...और खेल करते करते हुए खुद भी खा रही थी ...मुझे कौर देती ...और मैं मुंह खोलता तो वो गड़प कर जाती ...
दो तीन पराठे खाने के बाद कुछ लगा और मैंने पुछा ..." हे पराठे के साथ क्या है ..."
" तुमसे मतलब ...जो खिला रही हूँ चुपचाप खाओ ...बनारस आओगे ना तब तुम्हारी सारी आदते सुधारुङ्गि ." वो हड़का के बोली और एक बड़ा सा कौर और मेरे मुंह में ...
खाने के बाद मैंने उससे पुछा ..." हे अब तेरे हाथ कैसे साफ होंगे ..." मेरी निगाहें अभी भी स्क्रीन पे थीं ...
" तू किस मर्ज की दवा है ..."
वो बोली और सीधे उंगलिया मेरे मुंह में ...और तब मैंने नोटिस किया ...उसकी उँगलियों में आम के अचार का मसाला तेल ...लेकिन सिर्फ उंगलिया ही नहीं ..हथेली ...यहाँ तक की थोडा सा कलाई पे था ...
वो सब मैंने चाट चाट के साफ किया ...
और मिर्च लग गयी मुझे ...
गुड्डी आम के अचार की शीशी जो उसकी मम्मी ने बनाकर , बनारस से भेजी थी ...वो और पराठे का कैसरोल ले के बाहर जा रही थी ...
" हे पानी ...जरा पानी लाना ..." मैंने पीछे से गुड्डी को आवाज लगायी .
वो पूरे दस मिनट बाद वापस आई ...उसके एक हाथ में खाली ग्लास और दूसरे में दो आइस ट्रे थीं .
सिसकी लेते हालत खराब थी ...और उसने अनाउन्स कर दिया ...पानी नहीं मिला ...वो ग्लास ले आई है ...बर्फ भी है ...थोड़ी देर में जब बर्फ पिघल जायेगी तो वो पानी बन जाएगा ...और फिर मैं आराम से पी सकता हूँ ...
मैं इतना इंतजार करने की हालत में नहीं था ...मेरी निगाह कोल्ड ड्रिंक की बाटल्स पे पड़ी ...
और मेरी निगाहें ...गुड्डी नहीं समझती तो कौन समझता ...उसने तुरंत मना कर दिया ...
" नहीं ...कोल्ड ड्रिंक किसी खास काम के लिए हैं ...क्यों जल्दी मचा रहे हो ...पन्दरह बीस मिनट में बरफ गल जायेगी ना ..."
तभी मेरी निगाह बियर के कैन पे पड़ी ... पांच छ; लार्ज साइज के ...और गुड्डी फिर कुछ मना करती ...उसके पहले मैंने एक ग्लास में उसे उड़ेल लिया ...थोड़ी बर्फ डाली ...और जैसे वो मुंह में गया ...
मिर्च का इलाज तो हुआ मैंने ये भी समझ लिया की इसमें अल्कोहल कंटेंट भी जबर्दस्त है ...
मैंने एक बड़ी सिप अब ली ...
अब मेरा मौका था गुड्डी को तंग करने का ...
मैंने गुड्डी को अपनी बांहों में भींच लिया और अपने होंठ उसके होंठों से सटा दिए ...
कब तक वो होंठ बंद कर के रहती ...फिर तो मेरे मुंह की सारी बियर उसके मुंह में ...
वो मुंह बिचकाती रही लेकिन ...मैंने अब सीधे ग्लास से एक सिप उसे ...फिर तो
दस मिनट के अन्दर हम दोनों ने मिल के वो लार्ज कैन खाली कर दिया ...
और गुड्डी के पेट में आधे से ज्यादा ही गया होगा ...
और उसका असर गुड्डी की फरमाइश से लग गया ...
" हे जरा अपनी फेवरिट पिक्चरे तो लगाओ ...जो तुमने रंजी को दी हैं ..." लैप टाप की ओर इशारा करते बोली .
मैं समझ गया और ट्रिपल एक्स फोल्डर ...वो भी डागी पोजीशन वाली
...और अब मैंने गुड्डी के दोनों हाथ जोर से पकड़ लिए ...उसके सर के ऊपर कर के ...
वो पीठ के बल लेटी थी ...डरती सोचती अब मैं क्या करूँगा ...
मेरे मुंह ने आइस क्यूब पिघल रहा था ...जीभ खूब ठंडी हो गयी थी ...
और उस फ्रास्टी , ठिठुरती जीभ से मैंने उसके किशोर मस्त उभारों की परिक्रमा की ...और फिर एक लाइन सीधे निपल तक ...
मेरी ठंडी बर्फ सी सर्द जुबान ने जैसे उसके खड़े, कड़े निपल्स को फ्लिक किया ...वो मजे से सिहर उठी मस्ती से उसकी आँखे बंद हो गयी ...
मैं तेजी से उसे कभी लिक कर लेता कभी बार बार जल्दी जल्दी फ्लिक करता ...और फिर अचानक ...मैंने आइस क्यूब मुंह से थोडा बाहर निकाल के अपने होंठों में आधा फंसा के सीधे उसके गरम मस्त निपल पे ...
और गुड्डी एकदम उछल गयी ...उसकी कमर धनुष की तरह हो गयी ..लेकिन मेरे होंठ अभी भी बर्फ उसके निपल पर दबाये हुए थे
गुड्डी की जोश के मारे हालत ख़राब हो रही थी ...
लेकिन ये तो अभी शुरुआत थी ...मेरे एक हाथ ने एक और आइस क्यूब उठा लिया ...
और वो गुड्डी के दूसरे निपल पे ..पहले आइस क्यूब की ..एज ...निपल के चारो और लगाई, छुआइ ..और फिर सीधे टन्न कड़े निप्स पे ...
वो उचक रही थी , सिसक रही थी , सिहर रही थी , काँप रही थी ...मस्ती से ...
उसके एक निपल पे मेरे होंठ आइस क्यूब रगड़ रहे थे और दूसरे पे बायाँ हाथ ..दायें हाथ ने बीयर का एक कैन पकड़ा ...और गुड्डी के सिसकते मुंह में एक पतली सी धार ...आधा कैन उसके पेट में ...और फिर बूँद बूँद ...गुड्डी की गहरी ठुड्डी , उसके ठीक नीचे काले तिल पे ...लम्बी पतली गरदन ...और छाती की थाली में सजे दोनों मेरे मन मोदक पे ...टप टप ...
और मेरी जीभ ने गुड्डी के रसीले नशीले बीयर से गीले , अभीषक्त जोबन को भी चाटना शुरू किया ...
और गुड्डी मस्ती के नए शिखर पे पहुँच गयी ....
फिर थोडा बियर मेरे मुंह में ...और मुंह में लिए ...मेरे होंठ ...उसकी गहरी नाभी में ...
उके नाभि कूप में ..मेरी लम्बी जीभ ...आइस क्यूब ....मस्ती से गुड्डी की दोनों आँखे बंद हो गयी थी टाँगे पाने आप फैल गयी थी ...
उधर मेरे होंठ नाभि कूप का रस लेने में बीजी थे ...उधर एक हाथ ने आइस क्यूब से पहले तो उसके एक उरोज की परिक्रमा की फिर एक लाइन सी खीचते हुए ....कमर ...और मखमली खुली जांघ के उपरी भाग पे ..रस कूप के एकदम बगल से फिर ऊपर की ओर ...दूसरे उरोज तक
और इधर मेरे होंठ बर्फ से ठिठुर रहे थे ...जीभ भी ठण्ड से खुद बर्फ हो रही थी ...
उस ठिठुरती ठंडी जीभ को मैंने उसके भगोष्ठ के बाहरी ओर लगाया ...
और उसे जैसे ४ ४ ० वोल्ट का करंट लगा हो ...
लेकिन अभी तो ...और गले पल जैसे कोई बाज झपटे मैंने उसकी मक्खन मलाई चूत अपने होंठो के बीच भर ली और चूत जोर जोर से चूसने लगा ...
बस उसकी रस धार बहने को होती और मैं रुक जाता
चार पांच बार मैंने उसे तडपाया ...लेकिन आखिरी बार वो उठ गयी और धक्का देकर मेरे ऊपर ...
Tags = Future | Money | Finance | Loans | Banking | Stocks | Bullion | Gold | HiTech | Style | Fashion | WebHosting | Video | Movie | Reviews | Jokes | Bollywood | Tollywood | Kollywood | Health | Insurance | India | Games | College | News | Book | Career | Gossip | Camera | Baby | Politics | History | Music | Recipes | Colors | Yoga | Medical | Doctor | Software | Digital | Electronics | Mobile | Parenting | Pregnancy | Radio | Forex | Cinema | Science | Physics | Chemistry | HelpDesk | Tunes| Actress | Books | Glamour | Live | Cricket | Tennis | Sports | Campus | Mumbai | Pune | Kolkata | Chennai | Hyderabad | New Delhi | कामुकता | kamuk kahaniya | उत्तेजक | मराठी जोक्स | ट्रैनिंग | kali | rani ki | kali | boor | सच | | sexi haveli | sexi haveli ka such | सेक्सी हवेली का सच | मराठी सेक्स स्टोरी | हिंदी | bhut | gandi | कहानियाँ | छातियाँ | sexi kutiya | मस्त राम | chehre ki dekhbhal | khaniya hindi mein | चुटकले | चुटकले व्यस्कों के लिए | pajami kese banate hain | हवेली का सच | कामसुत्रा kahaniya | मराठी | मादक | कथा | सेक्सी नाईट | chachi | chachiyan | bhabhi | bhabhiyan | bahu | mami | mamiyan | tai | sexi | bua | bahan | maa | bharat | india | japan |funny animal video , funny video clips , extreme video , funny video , youtube funy video , funy cats video , funny stuff , funny commercial , funny games ebaums , hot videos ,Yahoo! Video , Very funy video , Bollywood Video ,
Free Funny Videos Online , Most funy video ,funny beby,funny man,funy women
bhatt_ank, xossip, exbii, कामुक कहानिया हिंदी कहानियाँ हिंदी सेक्सी कहानिया चुदाई की कहानियाँ उत्तेजक कहानिया ,रेप कहानिया ,सेक्सी कहानिया , कलयुग की सेक्सी कहानियाँ , मराठी सेक्स स्टोरीज , चूत की कहानिया , सेक्स स्लेव्स , Tags = कामुक कहानिया हिंदी कहानियाँ stories , kaamuk kahaaniya , हिंदी सेक्सी कहानिया चुदाई की कहानियाँ उत्तेजक कहानिया Future | Money | Finance | Loans | Banking | Stocks | Bullion | Gold | HiTech | Style | Fashion | WebHosting | Video | Movie | Reviews | Jokes | Bollywood | Tollywood | Kollywood | Health | Insurance | India | Games | College | News | Book | Career | Gossip | Camera | Baby | Politics | History | Music | Recipes | Colors | Yoga | Medical | Doctor | Software | Digital | Electronics | Mobile | Parenting | Pregnancy | Radio | Forex | Cinema | Science | Physics | Chemistry | HelpDesk | Tunes| Actress | Books | Glamour | Live | Cricket | Tennis | Sports | Campus | Mumbai | Pune | Kolkata | Chennai | Hyderabad | New Delhi | पेलने लगा | कामुकता | kamuk kahaniya | उत्तेजक | सेक्सी कहानी | कामुक कथा | सुपाड़ा |उत्तेजना | कामसुत्रा | मराठी जोक्स | सेक्सी कथा | गान्ड | ट्रैनिंग | हिन्दी सेक्स कहानियाँ | मराठी सेक्स | vasna ki kamuk kahaniyan | kamuk-kahaniyan.blogspot.com | सेक्स कथा | सेक्सी जोक्स | सेक्सी चुटकले | kali | rani ki | kali | boor | हिन्दी सेक्सी कहानी | पेलता | सेक्सी कहानियाँ | सच | सेक्स कहानी | हिन्दी सेक्स स्टोरी | bhikaran ki chudai | sexi haveli | sexi haveli ka such | सेक्सी हवेली का सच | मराठी सेक्स स्टोरी | हिंदी | bhut | gandi | कहानियाँ | चूत की कहानियाँ | मराठी सेक्स कथा | बकरी की चुदाई | adult kahaniya | bhikaran ko choda | छातियाँ | sexi kutiya | आँटी की चुदाई | एक सेक्सी कहानी | चुदाई जोक्स | मस्त राम | चुदाई की कहानियाँ | chehre ki dekhbhal | chudai | pehli bar chut merane ke khaniya hindi mein | चुटकले चुदाई के | चुटकले व्यस्कों के लिए | pajami kese banate hain | चूत मारो | मराठी रसभरी कथा | कहानियाँ sex ki | ढीली पड़ गयी | सेक्सी चुची | सेक्सी स्टोरीज | सेक्सीकहानी | गंदी कहानी | मराठी सेक्सी कथा | सेक्सी शायरी | हिंदी sexi कहानिया | चुदाइ की कहानी | lagwana hai | payal ne apni choot | haweli | ritu ki cudai hindhi me | संभोग कहानियाँ | haveli ki gand | apni chuchiyon ka size batao | kamuk | vasna | raj sharma | sexi haveli ka sach | sexyhaveli ka such | vasana ki kaumuk | www. भिगा बदन सेक्स.com | अडल्ट | story | अनोखी कहानियाँ | कहानियाँ | chudai | कामरस कहानी | कामसुत्रा ki kahiniya | चुदाइ का तरीका | चुदाई मराठी | देशी लण्ड | निशा की बूब्स | पूजा की चुदाइ | हिंदी chudai कहानियाँ | हिंदी सेक्स स्टोरी | हिंदी सेक्स स्टोरी | हवेली का सच | कामसुत्रा kahaniya | मराठी | मादक | कथा | सेक्सी नाईट | chachi | chachiyan | bhabhi | bhabhiyan | bahu | mami | mamiyan | tai | sexi | bua | bahan | maa | bhabhi ki chudai | chachi ki chudai | mami ki chudai | bahan ki chudai | bharat | india | japan |यौन, यौन-शोषण, यौनजीवन, यौन-शिक्षा, यौनाचार, यौनाकर्षण, यौनशिक्षा, यौनांग, यौनरोगों, यौनरोग, यौनिक, यौनोत्तेजना, aunty,stories,bhabhi,choot,chudai,nangi,stories,desi,aunty,bhabhi,erotic stories,chudai,chudai ki,hindi stories,urdu stories,bhabi,choot,desi stories,desi aunty,bhabhi ki,bhabhi chudai,desi story,story bhabhi,choot ki,chudai hindi,chudai kahani,chudai stories,bhabhi stories,chudai story,maa chudai,desi bhabhi,desi chudai,hindi bhabhi,aunty ki,aunty story,choot lund,chudai kahaniyan,aunty chudai,bahan chudai,behan chudai,bhabhi ko,hindi story chudai,sali chudai,urdu chudai,bhabhi ke,chudai ladki,chut chudai,desi kahani,beti chudai,bhabhi choda,bhai chudai,chachi chudai,desi choot,hindi kahani chudai,bhabhi ka,bhabi chudai,choot chudai,didi chudai,meri chudai,bhabhi choot,bhabhi kahani,biwi chudai,choot stories, desi chut,mast chudai,pehli chudai,bahen chudai,bhabhi boobs,bhabhi chut,bhabhi ke sath,desi ladki,hindi aunty,ma chudai,mummy chudai,nangi bhabhi,teacher chudai, bhabhi ne,bur chudai,choot kahani,desi bhabi,desi randi,lund chudai,lund stories, bhabhi bra,bhabhi doodh,choot story,chut stories,desi gaand,land choot,meri choot,nangi desi,randi chudai,bhabhi chudai stories,desi mast,hindi choot,mast stories,meri bhabhi,nangi chudai,suhagraat chudai,behan choot,kutte chudai,mast
bhabhi,nangi aunty,nangi choot,papa chudai,desi phudi,gaand chudai,sali stories, aunty choot,bhabhi gaand,bhabhi lund,chachi stories,chudai ka maza,mummy stories, aunty doodh,aunty gaand,bhabhi ke saath,choda stories,choot urdu,choti stories,desi aurat,desi doodh,desi maa,phudi stories,desi mami,doodh stories,garam bhabhi,garam chudai,nangi stories,pyasi bhabhi,randi bhabhi,bhai bhabhi,desi bhai,desi lun,gaand choot,garam aunty,aunty ke sath,bhabhi chod,desi larki,desi mummy,gaand stories,apni stories,bhabhi maa,choti bhabhi,desi chachi,desi choda,meri aunty,randi choot,aunty ke saath,desi biwi,desi sali,randi stories,chod stories,desi phuddi,pyasi aunty,desi chod,choti,randi,bahan,indiansexstories,kahani,mujhe,chachi,garam,desipapa,doodhwali,jawani,ladki,pehli,suhagraat,choda,nangi,behan,doodh,gaand,suhaag raat, aurat,chudi, phudi,larki,pyasi,bahen,saali,chodai,chodo,ke saath,nangi ladki,behen,desipapa stories,phuddi,desifantasy,teacher aunty,mami stories,mast aunty,choots,choti choot, garam choot,mari choot,pakistani choot,pyasi choot,mast choot,saali stories,choot ka maza,garam stories ,हिंदी कहानिया,ज़िप खोल,यौनोत्तेजना,मा बेटा,नगी,यौवन की प्या,एक फूल दो कलियां,घुसेड,ज़ोर ज़ोर,घुसाने की कोशिश,मौसी उसकी माँ,मस्ती कोठे की,पूनम कि रात,सहलाने लगे,लंबा और मोटा,भाई और बहन,अंकल की प्यास,अदला बदली काम,फाड़ देगा,कुवारी,देवर दीवाना,कमसीन,बहनों की अदला बदली,कोठे की मस्ती,raj sharma stories ,पेलने लगा ,चाचियाँ ,असली मजा ,तेल लगाया ,सहलाते हुए कहा ,पेन्टी ,तेरी बहन ,गन्दी कहानी,छोटी सी भूल,राज शर्मा ,चचेरी बहन ,आण्टी ,kamuk kahaniya ,सिसकने लगी ,कामासूत्र ,नहा रही थी ,घुसेड दिया ,garam stories.blogspot.com ,कामवाली ,लोवे स्टोरी याद आ रही है ,फूलने लगी ,रात की बाँहों ,बहू की कहानियों ,छोटी बहू ,बहनों की अदला ,चिकनी करवा दूँगा ,बाली उमर की प्यास ,काम वाली ,चूमा फिर,पेलता ,प्यास बुझाई ,झड़ गयी ,सहला रही थी ,mastani bhabhi,कसमसा रही थी ,सहलाने लग ,गन्दी गालियाँ ,कुंवारा बदन ,एक रात अचानक ,ममेरी बहन ,मराठी जोक्स ,ज़ोर लगाया ,मेरी प्यारी दीदी निशा ,पी गयी ,फाड़ दे ,मोटी थी ,मुठ मारने ,टाँगों के बीच ,कस के पकड़ ,भीगा बदन ,kamuk-kahaniyan.blogspot.com,लड़कियां आपस , blog ,हूक खोल ,कहानियाँ हिन्दी ,चूत ,जीजू ,kamuk kahaniyan ,स्कूल में मस्ती ,रसीले होठों ,लंड ,पेलो ,नंदोई ,पेटिकोट ,मालिश करवा ,रंडियों ,पापा को हरा दो ,लस्त हो गयी ,हचक कर ,ब्लाऊज ,होट होट प्यार हो गया ,पिशाब ,चूमा चाटी ,पेलने ,दबाना शुरु किया ,छातियाँ ,गदराई ,पति के तीन दोस्तों के नीचे लेटी,मैं और मेरी बुआ ,पुसी ,ननद ,बड़ा लंबा ,ब्लूफिल्म, सलहज ,बीवियों के शौहर ,लौडा ,मैं हूँ हसीना गजब की, कामासूत्र video ,ब्लाउज ,கூதி ,गरमा गयी ,बेड पर लेटे ,கசக்கிக் கொண்டு ,तड़प उठी ,फट गयी ,भोसडा ,hindisexistori.blogspot.com ,मुठ मार ,sambhog ,फूली हुई थी ,ब्रा पहनी
फागुन के दिन चार--96
गतांक से आगे ...........
" होने दो ना तुम्हे क्या ...जो उसके दुल्हे को अच्छा लगता है ...वो करेगा ..."
और उसकी इस बात पर मैंने बाइक एक पगडण्डी पे मोड़ दी ...
धड धडाते हुए नीचे ..
.दोनों और सरपत लगे हुए ..अब सडक भी दिखनी बंद हो गयी ...वो पगडण्डी इतने नीचे आ गयी थी ...फिर बस एक मेंड सी ...और वो जहाँ ख़तम हुयी ...वहां एक खूब घनी अमराई ...
आम के बौर की मस्त महक ..और बगल में गन्ने के खेत ...आदमी से कम से कम डेढ़ गुनी ऊँचाई के ...इतने घने की कोई दो चार फिट दूर भी हो तो दिखाई पड़ना तो दूर कोशिश करने पे भी पता ना चले
आम के पेड़ भी बहुत पुराने मोटे पेड़ , डालियाँ भी खूब मोटी मोटी ...एकदम कई तो जमीन के पास ...इतनी चौड़ी की कोई उसपे लेट भी ले ...हलकी हलकी मद मस्त फगुनाहट भरी पुरवाई बह रही थी ...
ऊपर से आम के बौरों की महक ...चांदनी ..पत्तों से छन छन कर बहुत झीनी झीनी आ रही थी ...और बादल का अगर कोई छोटा टुकड़ा भी चाँद से खिलवाड़ करने लगता ...तो बस काली चादर फैल जाती ..घटाटोप अन्धकार ...
बाइक की सारी लाइटें मैंने पहले ही बंद कर दीं थीं ...
और मैंने गुड्डी को इशारे से बाइक पे पीछे से आगे आने को कहा ...
और वह चपला तुरंत किसी बाइकर गर्ल की तरह ...आगे ..अपना सर थोडा पीछे झुकाए , दोनों मस्त जोबन ऊपर उभारे ...और अपनी लम्बी गोरी टाँगे मेरी टांगों में फंसाए ..छलकती चांदनी उसके उरोजों से खेल रही थी ...
कौन रुक सकता था मैं ...
और मैंने झुक के उसके होंठो से एक चुम्बन चुरा लिया ...लेकिन अगला चुम्बन हक़ से ...मैंने अपने दोनों बाइक की हैंडल पकडे हाथों का तकिया सा बना , उसके सर को सहारा दे रखा था
मेरे होंठ गुड्डी के रसीले गुलाबी होंठो से चिपके रस ले रहे थे ...और मेरी जीभ उसके मखमली मुंह में अन्दर घुसी , उसकी जीभ से खिलवाड़ कर रही थी , मुख रस ले रही थी ....
लेकिन जीभ एक बार रस लेने लगे तो कहाँ रुकती है ...अब मेरे हाथों ने गुड्डी की गुलाबी कुर्ती बस ऊपर उठा दो ...और दो दो चाँद एक साथ दिखने लगे ...आम के पत्ते से छन के बरसती चांदनी में ...फिर पहले तो मेरे लालची हाथ ने फिर मुंह ने ...एक एक अपने कब्जे में कर लिए ..
.
चाँद शर्मा गया या शायद कोई नटखट बादल हम दोनों की प्रेम लीला को देखने को बेताब था ...पूरा अँधेरा छा गया ...
लेकिन मेरी लिए गुड्डी के रूप की ज्योत्सना ही बहुत थी ...
मैं कभी उसके निपल चूसता तो कभी चून्चिया जोर से दबा देता , मसल देता ...जोबन का रस लेते लेते मैंने गुड्डी के कान में कहा ,
" ये बहनचोद ...चाँद भी ना ..ऐन मौके पे टार्च बंद कर दिया ..."
" ये बिचारे चाँद को क्यों गाली देते हो ..."खिलखिला के गुड्डी बोली।
" ऊप्स मैं तो भूल ही गया था ...की चाँद तेरे मामा है तो इनकी बहन चोदने का मतलब ..."
और गुड्डी ने मेरा मुंह बंद कर दिया ...मेरे सर को खींच के अपने सीने पे वो ले गयी और ...एक बार फिर उसका खड़ा उत्तेजित निपल मेरे मुंह में और गुड्डी का मस्त निपल मेरे मुंह में हो ...
तो बस सब कुछ भूल कर मैं बस उसे चूस रहा था , चुभला रहा था ...मेरी जीभ उसे नीचे से ऊपर तक लिक कर रही थी ...और उसका कुर्ती से खुला दूसरा जोबन मेरी मुट्ठी में कैद था ...
मैं हलके हलके दबा रहा था सहला रहा था ...
और गुड्डी मेरे कमेन्ट पे कमेन्ट कर रही थी
" मेरे मामा की बहन मतलब मेरी मम्मी ...सीधे सीधे क्यों नहीं बोलते अगर हिम्मत है तो ...
अगर मम्मी को पता चला गया ना तो ऐसी हाल चाल लेंगी तुम्हारी, तुम्हारी सारे मायके वालियों की ...गधे घोड़े तक से रिश्ता जोड़ देंगी ...परपराते फिरोगे ...और अगर उनको तुम्हारा इरादा कहीं पता चल गया ना ...
तो तुम भले भूल सुधार करो ...वो नहीं छोड़ने वाली बिना तेरी नथ उतारे ...तुम गों गों करते रहना ..ऐसी रगड़ाई करेंगी ना वो की ..."
सुन तो मैं सब रहा था लेकिन ना मेरी जवाब देने की हिम्मत थी ना औकात ...
और मेरा मुंह तो वैसे ही गुड्डी ने बंद कर रखा था ...अपने रसीले उरोजों से ..और अब मेरा दूसरा हाथ भी बिजी हो गया था ...गुड्डी की दोनों खुली जांघो के बीच , पाजामी के ऊपर से ...एकदम गीली ...इसका मतलब था वो भी पनिया गयी है ...
और मैंने पजामी के ऊपर से ही उसकी रामप्यारी को दबोच लिया बहोत जोर से फुदक रही थी ...लेकिन अब मेरी उंगलियाँ उसे दबा रही थीं रगड़ रही थीं ...और हथेली का बेस उसे घिस रहा था ....
मस्ती से गुड्डी की आँखे बंद हो रही थीं ..
लेकिन इससे ज्यादा ...उस बाइक पे घुप्प अँधेरे में मुश्किल था ...
लेकिन तब तक गुड्डी के मामा ..चन्दा मामा ने कुछ कृपा की ना जाने उन्हें अपनी भानजी पे दया आ गयी या होने वाले दामाद पर ....पूरी चांदनी एक साथ ....सारी अमराई दिख रही थी ..
और अगले पल हम एक आम के पेड़ की मोटी सी डाली पे बैठे थे ...
असल में डाली पे मैं बैठा था ...और गुड्डी मेरी गोद में ..उसकी दोनों टाँगे फैली मेरी कमर को लपेटे ...आमने सामने ...गुड्डी का एक हाथ मेरी पीठ को पकडे ...और मेरा एक हाथ उसकी कमर पे ...उसे अपनी ओर खींचे ...
हवा थोड़ी तेज हो गयी थी ...
कभी कभी कुछ आम के बौर झर कर, झरती चांदनी के साथ .हमारे ऊपर भी गिर रहे थे
गुड्डी की गुलाबी चिकन की कामदार कुर्ती उठी हुयी थी और उसके उभार कभी मेरे होंठो और कभी मेरे हाथों के बीच ...और वो मुझे फेस करती हुयी बैठी थी ...तो मेरे लिए बाकी काम भी आसान थे ..मेरा हाथ अब सीधे पजामी के अंदर ...उसकी रामप्यारी को प्यार से सहला रहा था , छेड़ रहा था ...और गुड्डी ...
तो गुड्डी थी ...उसने मेरे जंग बहादुर ...मेरे क्या अब वो तो उसके ज्यादा थे ..को आजाद कर दिया था ..और अपनी किशोर लम्बी गोरी उँगलियों से ...कभी दबाती , कभी आगे पीछे करती ..
मैंने गुड्डी के होंठो पे किस करते बोला
" सुन ...जानती है मेरा मन करता है ...बहुत दिनों से करता था ..."
"क्या ..."
" की ऐसी ..खुली हवा में ...बाग़ में ...बस तुम मेरी बांहों में हो और मैंने तुम्हे ..."
मेरी बात काट कर झट उसने ताना दिया ...
" आम के बाग़ में बारात में तो दस बार सोच रहे थे ..."
" मान तो गया ना मैं ..." उसके होंठो को चूमता बोला मैं ...
" और बोलो ...' अब उसकी आवाज हस्की हो गयी थी ...
" तुम मेरी बांहों में हो .मैं तुम्हे ऐसी खुली हवाओं में चूमता रहूँ ..."
"और .."
"तुम्हारे रसीले उरोजों का रस लेता रहूँ ...इन मस्त उभारों का सुख ..."
"और ...वो बहुत हलके से बोली ...उसकी सांसे लम्बी होती जा रही थीं ..
" तुम्हे खूब प्यार करूँ कच कचा कर ..."
"और ...वो मुझे चढ़ा रही थी उकसा रही थी ...उत्तेजना से उसेक उरोज पथरा गए थे
अब मुझसे भी नहीं रहा जा रहा था मेरी तरजनी की टिप सटाक से उसकी मस्त गीली कसी चूत में घुस गयी ...और मैंने उसे कस के भींचते कहा ..
" और मैं ..ऐसी खुली हवा में रात के अँधेरे में ...बाग़ में ...तुम्हे ...तुम्हे ...चोद दूँ ..हचक हचक के चोदू ...'
गुड्डी की जीभ की नोक मेरे कान में सुरसुरी कर रही थीं ...उसने जोर से अपने उभार मेरे सीने में दबाते हुए , कस के मेरे लंड को अपनी गोरी मुट्ठी में भींच लिया और ...बोली ...
" और ..."
" और चोदता रहूँ ...चोदता रहूँ ...रात भर ..."मैं बोला साथ में मेरी आधी उंगली अब उसकी गीली चुनमुनिया में अन्दर बाहर हो रही थी ...
सिर्फ पत्तों की सरसराहट , हम दोनों के दिल की धड़कन ...और चुम्बनों की आवाजें सुनाई पडी रही थी ...
चन्दा मामा ने टार्च बंद कर दी थी ...
शायद अपनी भांजी की काम क्रीडा से शर्मा गए थे ...या
बैटरी ख़तम हो गयी थी ...पता नहीं ...
पर घटाटोप अँधेरा था ...
और हम दोनों एक दूसरे को सिर्फ उँगलियों से , होंठो से और.. दिल से देख रहे थे ..
तभी
गुड्डी अचानक मेरे कान में फुसफुसाई ...हो जाएगा
एकदम एवमस्तु वाले अंदाज में ...
मेरे कुछ समझ में नहीं आया ...गुड्डी एकदम मेरे कान में अपने गरम होंठ सटा के बोल रही थी ..
हमारे गाँव वाले घर पे , एक ऐसी ही बाग़ है ...इसकी तिगुनी चौगुनी बड़ी बाग़ है ...आम की ...और इससे भी ज्यादा घनी ..दिन में मुश्किल से दिखता है ...और चारो ओर से घिरी ....परिंदा भी पर ना मार पाए ऐसी ..
मैं समझ गया ये उसी बाग़ की बात कर रही है ...जहाँ बारात टिकने वाली थी ...लेकिन फिर मेरी समझ में कुछ नहीं आया ...
" लेकिन बारात में कैसे ...हम और तुम ..."
" अरे तुम ना एक दम बुद्धू हो ...बारात की बात कौन कर रहा है ...और फिर शादी वाली रात से तो तुम हम लोगों के कब्जे में हो जाओगे ...कोहबर में ...फिर तेरी विदाई मेरे साथ ही होगी ...
तीन दिन बाद ...मैं सावन की बात कर रही थी ...
मैंने बोला था ना की हमारे यहाँ एक रस्म है की लड़की पहला सावन मायके में गुजारती है ...फिर लड़का आके उसे ले जाता है ...उसके पहले दोनों देवी की पूजा करने जाते हैं ..और मायके का मतलब गाँव ...तो मैं लम्बा तो नहीं जाउंगी लेकिन हफ्ते दस दिन मुझे जाना ही पड़ेगा ..उसी समय ..."
"हफ्ते दस दिन ..".मैं बोला और अचानक उदास हो गया .
" यार तेरे बिना पांच मिनट मन नहीं लगता ...दस दिन कैसे कटेंगे ..
गुड्डी ने मुझे कस के अपनी मृणाल बांहों में भींच लिया ...और बोली ...
" जानती हूँ मैं ...और मेरा कौन सा मन लगता है तेरे बिना ..लेकिन कोई रास्ता है क्या ..रसम तो निभानी होगी न और मै सिर्फ दस दिनों के लिए तो जाउंगी ...और फिर तुम थोडा जल्दी आ जाना ...गाँव में सावन गुजारना मेरे साथ ...फिर मुझे ले के आ जाना ..."
गुड्डी ना ...जहाँ कोई रास्ता ना दिखे उसकी बात रास्ता दिखा देती है ...और मुझे भी रास्ता सूझ गया
मैंने गुड्डी को किस करते हुए धीरे से बोला ..
" मान लो ...तुम्हे दस दिन बारह दिन ...जित्ते दिन भी रहना हो मैं छुट्टी ले लूँ ...तुम्हारे साथ चलूँ ...फिर तुम्हे विदा करा के ले आऊंगा ...जब भी साइत होगी ...लेकिन तुम्हारे घर वाले या मम्मी किसी को बुरा तो नहीं लगेगा "
गुड्डी ने मुझे बाहों में भींच लिया पूरे जोर से और पागलों की तरह चूमते बोली ...
" ये हुयी ना बात ....तुम एकदम ...और मम्मी को बुरा क्यों लगेगा ...वो तो ईत्ती खुश होंगी की ...और उन से ज्यादा खुश होंगी मेरी सहेलियां और कजिन्स ...वो मुझे तो पास फटकने नहीं देंगी ...
कहेंगी तुम तो रोज चिपकी रहती हो ...अब इत्ते दिन हमारा नंबर है " फिर अचानक वो सीरियस हो गयी ..." लेकिन तुम्हारा मजाक भी बनेगा ...कोई कहेगा ...जोरू का गुलाम है ...तो कोई बोलेगा ...बीबी के बिना एक मिनट नहीं रह सकता ..'
और अब मेरी बारी उसे बाहों में भींचने की थी
"सही तो है , बोलने दो ना ...इत्ती मुश्किल से तो मिली है ...और इतनी प्यारी ..सुन्दर ..
तो क्यों छोडू मैं एक मिनट के लिए ..और फिर जोरू का गुलाम हूँ तो किसी .को क्या ..."
और मैंने गुड्डी के गुलाब से गालों पर दस चुम्मी ले ली .
गुड्डी ने भी मुझे भींच लिया ....और लेकिन फिर थोडा अलग हट के बोली ...
" देखो तुम ना मुझे भुलवा देते हो ...मैं क्या बात कर रही थी ...गाँव के आम के बाग़ की ...तो उसी बाग़ की जानते हो सावन में उसी में झूला पड़ता है ...और रात को ..सारी लड़कियां ...भाभियाँ ...वहीँ झूला झूलती हैं ...और कोई मर्द ...बच्चा तक नहीं आ सकता ...
सिर्फ झूला ही नहीं ...सिर्फ लड़कियां होती हैं ..इसलिए बहुत धमाचौकड़ी होती है ...बस उसी बाग़ में .. सावन की रात में तो वैसे ही बादल छाये रहते हैं ...बस ...तुम्हारी चाहत ..."
उसकी बात काटते मैंने एक सवाल किया ..
" दो बातें ...एक बात ...एक तो तुम कह रही हो की उस बाग़ में सावन की रात में कोई मर्द नहीं घुस सकता ...दूसरे जब बाग़ में इतनी लडकियां औरतें होंगी तो हम दोनों ..."
गुड्डी ने पहले तो कच्चाक से मेरा गाल काटा ...फिर बोली ..
" हे देखो ...मर्द ..अरे तुम्हे मर्द कौन मानता है ...तुम तो मेरे 'वो' हो ...सारे गाँव के दामाद ...मेरी सारी कजिन्स , सहेलियों के जीजा , सारी भाभियों के नंदोई ...तुमसे कौन सी शरम ...इसीलिए तो कोहबर में बच्चियों से लेकर ..बड़ी औरतों तक सब तुम्हारी रगड़ाई ...
और फिर झूले पे तो तुम ना जाओ न तब भी सब तुम्हे पकड़ के ले जायेंगी ...और इतना बड़ा बाग़ है ...किसी कोने में ...वरना ...रात में ..झूला ख़तम होने के बाद ...
तुम्हारी गावं में इत्ति तो सालियाँ हैं ...लगा दूंगी किसी को चौकीदारी पे ....वो सब तुम मेरे छोड़ दो ...बस तुम अपनी बात पे कायम रहना ...जित्ते दिन मैं गाँव में रहूंगी ...उत्ते दिन तुम वहां रहोगे ...फिर देखना सावन में गाँव के मजे ..."
मैंने उसे चूम कर कहा ..पक्का ...तुम्हारे साथ जाऊँगा ...तुम्हारे साथ आऊंगा ...कितना रहना है तुम तय करना ..."
मेरी आँखों के सामने रिमझिम करती सावन बुंदिया , हरी धानी चुनर , झूला ...और सबसे बढ़कर ...सावन की रात में गुड्डी की देह में गुथे लिपटे ..अमराई में पुरवाई और फुहार का मजा ..
.और हम दोनों ने एक बार फिर कस के एक दूसरे को भींच लिया ...मेरी आधी घुसी उंगली ..गुड्डी की चुनमुनिया में गोल गोल घुमने लगी ...और उसकी मुट्ठी भी मेरे तन्नाये मस्त जंगबहादुर पे जोर जोर से चलने लगी ...फिर उसने मुझे चूम कर पुछा ...
" कभी पेड़ से तोड़ कर आम खाया है ...उस बाग़
में हर तरह के आम के पेड़ हैं , दसहरी , देसी , बनारसी लंगड़ा ..और उस समय सब लदालद रहते हैं ...बहोत मजा आता है मैं तो एकदम ऊपर तक चढ़ जाती थी ..." फिर लेकिन कुछ सोच के बोली ...
" लेकिन तुम्हे तो आम पसंद नहीं ...रहने दो ..." फिर मुस्करा के गुड्डी कुछ सोच के बोली
" लेकिन ...वहां तुम्हारी पसंद ना पूछेगा कौन ...कौन तुम्हारी मर्जी चलने वाली है ...सब तुम्हारी सालियों की मर्जी चलेगी ..जिस तरह से वो रखेंगी ...और उन से बचाने तो मैं भी नहीं आउंगी .."
खिलखिला के वो बोली
मैंने कहा नहीं पर सोचा ..." यार साल्लियों से बचना ...ही कौन चाहता है ."
लेकिन फिर कुछ सोच के मैंने बोला ..." और अगर मेरा मूड आ गया और मैंने कुछ कर दिया ...तो सालियाँ ...मुंह तो नहीं बनाएंगी ...ये समझ लो ..."
गुड्डी जोर से हंसी और बोली .." मुंह बनाएंगी ...अरे वो तो खुश हो जायेंगी ...और अगर तुम ने कुछ नहीं भी किया ...तो वो बिना किये वो तुम्हे नहीं छोड़ने वाली ...मेरे गाँव की लडकियां हैं कोई मजाक नहीं ..."
तभी गुड्डी के मामा ..मेरा मतलब चंदा मामा के टार्च में बैटरी आ गयी थी ...
और साथ में हवा भी तेज चलने लगी थी ...
और अब चांदनी में मैं कभी गुड्डी के रूप को , उसके गदराये गोरे जोबन को , चांदनी में लिपटी उसकी देह को निहारता ...तो कभी मेरे होंठ मेरी उंगलियाँ ..मेरे हाथ उनका रस लेते ...
अबी हमारी बातें बंद थीं लेकिन देह बोल रही थी ...चूम कर , आलिंगन से, मसल कर रगड़ कर ...फागुन के सारे रंग , सब रस से चांदनी से भीगे हम दोनों के देह में उतर आये थे
हवा अब और तेज हो गयी ...हम लोगो ने एक दूसरे को कस के अपनी बांहों में भींच रखा था ...
आम के पत्तों और आम्र मंजरियो के साथ ...पेड़ों पर आये एक दो छोटे टिकोरे भी गिरने लगे ..
और इसे देख के शरारत से गुड्डी ने मेरे कानों को चूम के , मुझसे हलकी आवाज में छेड़ कर के पुछा
" तुम्हे टिकोरे कैसे लगते है .."
मैं समझ गया था वो ये नहीं किसी और 'टिकोरों ' की बात कर रही थी ...मैंने भी उसके कान में मुंह लगाकर उससे तीन साल छोटी उस की बहन ( दूसरे नम्बर वाली ) का नाम ले कर, धीमे से कहा ..जैसे उसके हैं .
गुड्डी तो बस हँसते हँसते ...कहने लगी ...
"तभी तो मैं कहती हूँ ...तुम एकदम बुद्धू हो ...तुम से ज्यादा तो मेरे गाँव की लड़कियां जानती है ..खाली किताब पढने से और कम्पटीशन में आ जाने से थोड़े बुद्धि आ जाती है ...
अरे पगले ...उसके तो दो साल पहले टिकोरे रहे होंगे ...अब तो निम्बू के तरह के हैं और वो भी बड़े वाले साइज के ...हाँ छुटकी के ( उसकी सबसे छोटी बहन ) के जरूर टिकोरे के साइज के हैं ...
लेकिन वो भी बड़े टिकोरे ...अच्छा है तुम मेरे साथ गाँव में दस पन्दरह दिन रहोगे ...टिकोरे से लेकर पके आम तक का अंतर भी अच्छी तरह समझ लोगे और मन भर सबका , स्वाद भी ले लोगे ..."
तब तक गुड्डी के फोन पे मेसेज की घंटी आयी ...और हम तुरंत बाइक पे थे ...बाइक पे चलते चलते गुड्डी ने मेसेज दिया ...बस दस मिनट में पहुँच रहे हैं ...
पवन वेग से चलकर हम बारह मिनट में पहुँच गए ...
बस रास्ते में गुड्डी ने एक अर्ध विराम कराया ...एक की दूकान पे ...
वो बोली रंजी ने उसे दिखाया था की बहुत मस्त पान की दूकान है ..
और वहीँ गुड्डी ने वो मस्त तीन जोड़ीमीठे पान का आर्डर दिया ...एक जोड़ी एक जगह, दो जोड़ी एक जगह , ...चांदी के बरक में लिपटे ऊपर से गुलाब जल छिड़का ...
बाइक जैसे ही ले के मैं घर पहुंचा ..उस की हेड लाईट खराब हो गयी ...और साथ में चाँद भी गुप्प हो गया ...
मेरे मुंह से निकल पड़ा ..." ये चाँद साल्ला भी ..."
और एक जोर का मुक्का ...गुड्डी का मेरी पीठ पर पड़ा ...वो बोली ...
" फिर ..मेरे मामा को साल्ला बोल रहे हो मतलब ...मामा की बहन के साथ कौन सा रिश्ता जोड़ रहे हो .”
हम लोग घर में घुसे तो आलमोस्ट अँधेरा ... हालांकि अभी दस ही बजे रहे होंगे ..एकदम सोवता पड़ा हुआ था
..शीला भाभी के कमरे की बत्ती भी बंद हो चुकी थी , बस भाभी बरामदे में खड़ी उन दोनों का इन्तजार कर रही थीं
....
पान और गुड्डी ने डांट से बचा लिया
गुड्डी ने इशारा किया पान निकालने का ...और मैंने एक जोड़ी पान वाला पैकेट निकाला और भाभी को पेश कर दिया ...
भाभी ने पैकेट खोला ...चांदी के बर्क वाला पान , गुलाब जल की महक ...और मेरी ओर सवालिया निगाह से देखा
गनीमत थी ..गुड्डी ने मोर्चा सम्हाल लिया और बोली ... ये कह रहे थे , की होली की ... कह रहे थे ...हाँ ...होली की पूर्वसंध्या पर भाभी के लिए अच्छा सा पान ले लें ...
भाभी ने उसे मुंह में रख लिया और बोलीं .." अच्छा है और बेहतर भी ...ये तो पुरानी कोतवाली वाली दूकान का लग रहा है ...वहां तो बहुत भीड़ रहती है ...
गुड्डी को मौका मिल गया और उसने चौका मार दिया , जबर्दस्त बहाना ,
" आप ठीक कह रहीं है ...जबर्दस्त भीड़ और होली के चक्कर में थोड़ी और ही ज्यादा ...आप तो जानती ही हैं ..इनके बस का तो कुच्छ है नहीं ...मैं ही भीड़ में धंस के जा के बनवा के लायी , तब भी चालीस पैंतालिस मिनट लग गए ..कितने लोग घंटे दो घन्टे से इन्तजार कर रहे थे ...
भाभी ने उसकी ओर तारीफ की निगाह से देखा और हम दोनों से बोली ..
"सब लोग सो गए हैं ...कल होली के दिन जल्दी उठना पड़ेगा ....मैं भी बस तुम दोनों का वेट कर रही थी ...और फिर मुझे देख के मुस्करा के बोलीं ...
"तुम्हारे लिए कुछ गुड न्यूज थी ..."..
फिर गुड्डी से कहा ..
" तुम्हारे सुनने की नहीं है ...तुम अलग हट जाओ "
वो ना हटी न कान बंद किये सिर्फ बोली ...
" आप सुनाइये ना ...मुझे कुछ नहीं सुनाई दे रहा है
और भाभी ने सुनाना शुरू किया ,
" तेरे लिये गुड न्यूज है ...पहली गुड न्यूज ये है की ... तुमने पच्चीस तारीख बोली थी ना ...वो पंडित जी ने तुम्हारी और लड़की की कुंडली देख कर पक्की कर दी है ...बल्कि उनका कहना था की .. इस साल पन्दरह जून तक जो भी लगन है ....तुम दोनों की कुण्डली के हिसाब से ...पच्चीस मई सबसे बेस्ट है ...
और मैंने बैंड बाजा , बाराती सब का अरेंजमेंट पच्चीस मई के लिए पक्का कर दिया है .
दूसरी गुड न्यूज ये है की मैंने लड़की वालों से बात कर ली है ...लड़की की मां से ...और उन्हें सब बता दिया है की तुम्हे गाँव की तीन दिन की बारात , और बाकी सब चीजें मंजूर है ...
उन्होंने रिश्ता मंजूर कर लिया है ...तारीख भी ...
बाकी सब चीजों की भी तारीख तय हो गयी यी है तिलक बीस मई को है ...तुम अट्ठारह को यहाँ आ जाना ...शादी का मुहूर्त थोडा जल्दी का है ... रात में दस पच्चीस का ...और द्वार पूजा का साढ़े सात का है ...
इसलिए लड़की वालों ने कहा है की हम दोपहर को ही वहां पहुँच जाएँ ...लंच वहीँ पे ...करेंगे ...और बारात यहाँ से सुबह साढ़े नौ बजे ठीक निकल जायेगी ... तो अब सब पक्का हो गया है ...
लड़की की मम्मी ने तुम्हारे लिए कुच्छ अच्छी बातें कहीं है लेकिन छोडो ..."
लेकिन गुड्डी कहाँ छोड़ने वाली थी ...उसने पूछ लिया क्या कहा ...बताइये ना ..
भाभी ने उसे घूरकर देखा और बोलीं ," तुझे मना किया था ना सुनने को ..."
" मैं सुन कहाँ रही थी ...मैं तो सिर्फ पूछ रही हूँ ..." बड़ा भोला सा चेहरा बनाकर गुड्डी ने पूछा।
भाभी ने उसे अनसुना कर दिया और आगे बोलीं
बस एक बात लड़की का कालेज ..बीस जून से खुल जाएगा ...इसलिए ...पन्दरह जून को वो विदा के लिए बोल रहे हैं ...मैंने हाँ कर दी है ..अब पढने वाली लड़की के लिए तुमने हाँ कर दी थी तो कालेज तो जायेगी ही फिर तुम्हारी छुट्टी भी तो सत्रह तक ही है न ..."
मैंने और गुड्डी ने एक दूसरे को को देखते हुए आँखों आँखों में हाई फाइव किया ....
गुड्डी ने मुझे पहले ही बोल रखा था ...की बनारस में ट्रेनिंग में मैं उन्ही के साथ रहूँ ...फिर थोड़ी सी पेट पूजा ...कहीं भी कभी भी ....बिना नागा।
भाभी ने मुझे देख कर मुस्कराकर कहा ...
" देख तेरा कित्ता बड़ा काम करा दिया ..अब सत्ताइस मई की रात नौ बजे मेरी देवरानी तुम्हारे हवाले ...बस थोडा सा इन्तजार ..अच्छा अब चलूँ देर हो रही है ...
भाभी ने जैसे ही सीढ़ी का रुख किया ...गुड्डी ने फिर टोका ...
इन्हें बता दीजिये ना लड़की की मम्मी ने क्या कहा ...वरना सारी रात इनके पेट में उफान मचेगा ...
भाभी रुक गयी और मुड करमेरे पास आके कहा
उन्होंने कहा है की उस छिनार के जने,अपनी बहन के यार , गदहा चोदी ...के से कह देना ...
मेरी चाँद सी चकोरी ...इतनी आसानी से नहीं मिलेगी ...उस की जम के कोहबर में रगड़ाई होगी ..उसके बाद ही दुल्हन ले जाने को मिलेगी ...
मैंने देखा की गुड्डी मुंह भींचे मुस्करा रही थी ...
मैं क्या बोलता ...मैंने अपने कमरे की ओर मुडा ...तबतक भाभी को कुछ याद आया और गुड्डी के कंधे पे हाथ रख के वो बोलीं ...
" अरे यार तुम तो थी नहीं ..मैंने शीला भाभी से पराठे बनवा लिए थे ...कैसरोल में मेज पे रखे हैं ...हम लोगों ने खा लिया है तुम्ही लोगों के लिए है ..." फिर कुछ सोचके बोलीं ..." लेकिन खाओगी किस चीज से ..."
गुड्डी ने चारो ओर इधर उधर देखा फिर अचार की शीशी उठाती बोली ...
"आप चिंता मत करिए आम का अचार है ना ...बस इसी के साथ "
भाभी जोर से मुस्करायीं ...तुम इसे अच्छी तरह बर्बाद कर दोगी .
अरे बर्बाद तो ये पहले थे मैं अच्छी तरह सुधार दूंगी ...एक बार पक्की तरह से पकड़ में तो आ जाने दीजिये ..एक बार बनारस पहुँच तो जाने दीजिये इनको ..
भाभी ऊपर अपने कमरे में चली गयीं और गुड्डी सीधे मेरे कमरे में ...और स्टूल पर उसने अचार और पराठा रख दिया
मैं कंप्यूटर से जूझ रहा था।
बडौदा से मीनल , मुम्बई से एन पी की रिपोर्ट्स थीं।
बडौदा से जो आदमी ( जिसे हमने कोड नेम वाई दिया था ..) उसके पिछले तीन दिनों के सेटलाईट फोन से की गयी बात चीत को मेरे हैकर मित्रों ने डी कोड करके उसकी ट्रांस स्क्रिप्ट बना के भेजा था ...मैंने स्पीड रीडिंग की ...और इन डेवलेपमेंट को भी अपनी रिपोर्ट में डाल दिया।
रीत को मैंने बोला था की उन लोगों के उदयपुर चलने से पहले मैंने रिपोर्ट मेल कर दूंगा ...डी बी ने मुझे महाराजा एक्सप्रेस का कान्टेक्ट दिया था और उन का कम्युनिकेशन सिस्टम बहुत अच्छा था .
वो रीत के पहुँचने पर हार्ड और साफ्ट दोनों कापी दे देते ...
इसके बाद मैंने मीनल को बताया की रीत कल बडोदा पहुँच रही है ...हालंकि कल होली का दिन था ..लेकिन गुजरात में होली का रंग थोडा हल्का रहता है और दोपहर के बाद तो एकदम नहीं ..
.मीनल ने बोला की वो रीत से कान्टेक्ट कर लें ..इस तरह रिफायनरी के सिक्योरिटी हेड और रेलवे में सीनयर डिविजनल आपरेशन मैनेजर , जो मुझसे पांच साल हॉस्टल के सीनियर थे उनको भी रीत के बारे में बता दिया और हेल्प के लिए रिक्वेस्ट कर दिया ...
गुड्डी अलमारी में कुछ खटपट कर रही थी ...उसने मेरा शार्ट और नाईट शर्ट बेड पे रख दिया
" क्या ढूंढ रही हो ..." मैंने पुछा ...
" अपने पहनने के लिए कपडे ..." वो बोली
रोज तो वो फ्राक या टाप में रहती थी और आज बहुत ही ट्रेडिशनल कुर्ती और पजामी में थी ...
" मेरी अलमारी में तुम्हे मेरे कपडे ही मिलेंगे ...तुम्हारे कहाँ से आयेंगे ...हाँ ऐसा करो तुम मेरी शार्ट और शर्ट पहन लो ..."
मैंने उसे चिढ़ाया ...लेकिन गुड्डी के लिए कोई भी आईडिया देना खतरे से खाली नहीं रहता और वो बोली ...
" आइडिया तो अच्छा है तेरा ..." वो मुस्करा के बोली ..
और मैंने फिर भूल सुधार करने की कोशिश की ..." हे फिर मैं क्या पहनूंगा ..." मैं चीखा ...
लेकिन उससे भी ज्यादा जोर से ...मेरा मोबाइल चीखा ...एस एम् एस ...
रीत का था ...वो प्लेन में बैठ गयी थी ...एक बजने के पहले वो उदयपुर पहुँच जायेगी ...फिर वहां से ट्रेन से बड़ोदा ...
मैंने उसे मीनल , रिफाइनरी और रेलवे के नम्बर भेज दिए ...
फिर एक मेसेज ...मीनल का था ...वो दस ग्यारह के बीच रीत से मिलने वाली थी ...
और अब जब मैंने गुड्डी की ओर नजर डाली तो वो एक दम 'टाम ब्वाय ' लग रही थी शार्ट और शर्ट में ...
हे फिर मैं क्या पहनूंगा ...मैंने अपना सवाल दुहराया ...
" कुछ नहीं ...नंगे नंगे रहना ..." अपनी बड़ी बड़ी कजरारी आँखे नचा के वो शोख अदा से बोली ...फिर कहा ..
.
" शर्त बद लो ...वैसे भी आधे घंटे में तेरे कपडे उतर जायेंगे ...तो फिर क्यों इतना हल्ला मचा रहे हो ..."
बंदी की बात में तो दम था ...और इस प्रकरण पर कुछ और संवाद होता ...उसके पहले उसने नया आदेश दाग दिया ...
" मुझे थोडा काम है ...ज़रा ये गद्दा उतरवाकर जमीन पर बिछवा लो ..."
मुझे क्या ऐतराज हो सकता था ...मैं लैपटाप पे काम कर रहा था ...बजाय टेबल के गद्दे पे लेट के, बैठ के कर लेता ...
और दूसरी बात ...अगर गुड्डी बोले तो ऐतराज कर के भी आप क्या कर सकते हैं ...
फिर मैंने गुड्डी के साथ मिल कर बेड के दोनों गद्दे , एक के उपर एक कर के लगा दिए ..( आइडिया उसी का था ) और फिर उसने मुझे भगा दिया ...
एक बार फिर मैं कमप्यूटर पे बड़ोदा के डिटेल्ड मैप्स देख रहा था ....रेलवे स्टेशन ...यार्ड ..रिफायनरी , फर्टिलाइजर प्लांट ...केमिकल इंडस्ट्री क्ल्स्श्च्र ...
और दस मिनट में मेरी निगाह पड़ी तो नक्शा एकदम बदला लग रहा था ...गद्दों के ऊपर गुलाबी फ्रेश साटिन की बेड शीट ...चार तकिये और कुशन ...बगल में जमीन पे जो मैंने दारु की बोतले ले आया था वो ...और साथ में कोल्ड ड्रिंक्स की बड़ी बोतलें
साटिन बेड शीट देख कर कुछ कुछ करने का मन हो रहा था ...और दावतनामा कम डांट आ गयी ...
अब आ भी जाओ ..लैपटाप तो यहाँ भी ला सकते हो ...
और मैं लैपटाप लिए दिए उसके बगल में ...
कित्ती देर का काम और है ...उसने पूछा ...
मैं तो अब 'किसी और काम 'के बारे में सोच रहा था ...जंगबहादुर ने अंगडाई लेनी शुरू कर दी थी .
बस दस पंद्रह मिनट ..समेट रहा हूँ ...मैंने बोला ..
लेकिन वो बोली ...तुम अपना काम करो मैं अपना ...बहुत काम पड़ा है ...लेकिन पहला काम खाना ...पर तुम हाथ मत लगाना ...मैं अपने हाथ से खिला दूंगी ...और वैसे भी थाली प्लेट मैं कुछ लायी नहीं हूँ ...और फिर तुम्हारे हाथ में लगेगा ...तो एक तो अपना लैपी गन्दा करोगे और ..."
"और ...क्या " लैपटाप में एक साईट खोलता मैं बोला .
" और ...और मुझे भी तो उसी हाथ से तुम छूओगे ...इधर ...उधर .."
लजा के , मुस्करा के वो बोली .
वैसे भी अब मैं गुड्डी के हाथ से खाने का आदी हो गया था और मेरा भी काम जल्दी ख़तम होता तो ...रात जिस काम के लिए होती है मैं वो काम शुरू करता ...
और गुड्डी ने पहला कौर अपने होंठों से खिलाया ...और उसके बाद हाथ से ...
मेरी निगाहें मैप पे गडी थी मैंने बड़ोदा के आस पास का रेलवे मैप देख रहा था ...और साथ में रेलवे के बारे में बाकी इन्फो ...
गुड्डी मुझे भी खिला रही थी ...और खेल करते करते हुए खुद भी खा रही थी ...मुझे कौर देती ...और मैं मुंह खोलता तो वो गड़प कर जाती ...
दो तीन पराठे खाने के बाद कुछ लगा और मैंने पुछा ..." हे पराठे के साथ क्या है ..."
" तुमसे मतलब ...जो खिला रही हूँ चुपचाप खाओ ...बनारस आओगे ना तब तुम्हारी सारी आदते सुधारुङ्गि ." वो हड़का के बोली और एक बड़ा सा कौर और मेरे मुंह में ...
खाने के बाद मैंने उससे पुछा ..." हे अब तेरे हाथ कैसे साफ होंगे ..." मेरी निगाहें अभी भी स्क्रीन पे थीं ...
" तू किस मर्ज की दवा है ..."
वो बोली और सीधे उंगलिया मेरे मुंह में ...और तब मैंने नोटिस किया ...उसकी उँगलियों में आम के अचार का मसाला तेल ...लेकिन सिर्फ उंगलिया ही नहीं ..हथेली ...यहाँ तक की थोडा सा कलाई पे था ...
वो सब मैंने चाट चाट के साफ किया ...
और मिर्च लग गयी मुझे ...
गुड्डी आम के अचार की शीशी जो उसकी मम्मी ने बनाकर , बनारस से भेजी थी ...वो और पराठे का कैसरोल ले के बाहर जा रही थी ...
" हे पानी ...जरा पानी लाना ..." मैंने पीछे से गुड्डी को आवाज लगायी .
वो पूरे दस मिनट बाद वापस आई ...उसके एक हाथ में खाली ग्लास और दूसरे में दो आइस ट्रे थीं .
सिसकी लेते हालत खराब थी ...और उसने अनाउन्स कर दिया ...पानी नहीं मिला ...वो ग्लास ले आई है ...बर्फ भी है ...थोड़ी देर में जब बर्फ पिघल जायेगी तो वो पानी बन जाएगा ...और फिर मैं आराम से पी सकता हूँ ...
मैं इतना इंतजार करने की हालत में नहीं था ...मेरी निगाह कोल्ड ड्रिंक की बाटल्स पे पड़ी ...
और मेरी निगाहें ...गुड्डी नहीं समझती तो कौन समझता ...उसने तुरंत मना कर दिया ...
" नहीं ...कोल्ड ड्रिंक किसी खास काम के लिए हैं ...क्यों जल्दी मचा रहे हो ...पन्दरह बीस मिनट में बरफ गल जायेगी ना ..."
तभी मेरी निगाह बियर के कैन पे पड़ी ... पांच छ; लार्ज साइज के ...और गुड्डी फिर कुछ मना करती ...उसके पहले मैंने एक ग्लास में उसे उड़ेल लिया ...थोड़ी बर्फ डाली ...और जैसे वो मुंह में गया ...
मिर्च का इलाज तो हुआ मैंने ये भी समझ लिया की इसमें अल्कोहल कंटेंट भी जबर्दस्त है ...
मैंने एक बड़ी सिप अब ली ...
अब मेरा मौका था गुड्डी को तंग करने का ...
मैंने गुड्डी को अपनी बांहों में भींच लिया और अपने होंठ उसके होंठों से सटा दिए ...
कब तक वो होंठ बंद कर के रहती ...फिर तो मेरे मुंह की सारी बियर उसके मुंह में ...
वो मुंह बिचकाती रही लेकिन ...मैंने अब सीधे ग्लास से एक सिप उसे ...फिर तो
दस मिनट के अन्दर हम दोनों ने मिल के वो लार्ज कैन खाली कर दिया ...
और गुड्डी के पेट में आधे से ज्यादा ही गया होगा ...
और उसका असर गुड्डी की फरमाइश से लग गया ...
" हे जरा अपनी फेवरिट पिक्चरे तो लगाओ ...जो तुमने रंजी को दी हैं ..." लैप टाप की ओर इशारा करते बोली .
मैं समझ गया और ट्रिपल एक्स फोल्डर ...वो भी डागी पोजीशन वाली
...और अब मैंने गुड्डी के दोनों हाथ जोर से पकड़ लिए ...उसके सर के ऊपर कर के ...
वो पीठ के बल लेटी थी ...डरती सोचती अब मैं क्या करूँगा ...
मेरे मुंह ने आइस क्यूब पिघल रहा था ...जीभ खूब ठंडी हो गयी थी ...
और उस फ्रास्टी , ठिठुरती जीभ से मैंने उसके किशोर मस्त उभारों की परिक्रमा की ...और फिर एक लाइन सीधे निपल तक ...
मेरी ठंडी बर्फ सी सर्द जुबान ने जैसे उसके खड़े, कड़े निपल्स को फ्लिक किया ...वो मजे से सिहर उठी मस्ती से उसकी आँखे बंद हो गयी ...
मैं तेजी से उसे कभी लिक कर लेता कभी बार बार जल्दी जल्दी फ्लिक करता ...और फिर अचानक ...मैंने आइस क्यूब मुंह से थोडा बाहर निकाल के अपने होंठों में आधा फंसा के सीधे उसके गरम मस्त निपल पे ...
और गुड्डी एकदम उछल गयी ...उसकी कमर धनुष की तरह हो गयी ..लेकिन मेरे होंठ अभी भी बर्फ उसके निपल पर दबाये हुए थे
गुड्डी की जोश के मारे हालत ख़राब हो रही थी ...
लेकिन ये तो अभी शुरुआत थी ...मेरे एक हाथ ने एक और आइस क्यूब उठा लिया ...
और वो गुड्डी के दूसरे निपल पे ..पहले आइस क्यूब की ..एज ...निपल के चारो और लगाई, छुआइ ..और फिर सीधे टन्न कड़े निप्स पे ...
वो उचक रही थी , सिसक रही थी , सिहर रही थी , काँप रही थी ...मस्ती से ...
उसके एक निपल पे मेरे होंठ आइस क्यूब रगड़ रहे थे और दूसरे पे बायाँ हाथ ..दायें हाथ ने बीयर का एक कैन पकड़ा ...और गुड्डी के सिसकते मुंह में एक पतली सी धार ...आधा कैन उसके पेट में ...और फिर बूँद बूँद ...गुड्डी की गहरी ठुड्डी , उसके ठीक नीचे काले तिल पे ...लम्बी पतली गरदन ...और छाती की थाली में सजे दोनों मेरे मन मोदक पे ...टप टप ...
और मेरी जीभ ने गुड्डी के रसीले नशीले बीयर से गीले , अभीषक्त जोबन को भी चाटना शुरू किया ...
और गुड्डी मस्ती के नए शिखर पे पहुँच गयी ....
फिर थोडा बियर मेरे मुंह में ...और मुंह में लिए ...मेरे होंठ ...उसकी गहरी नाभी में ...
उके नाभि कूप में ..मेरी लम्बी जीभ ...आइस क्यूब ....मस्ती से गुड्डी की दोनों आँखे बंद हो गयी थी टाँगे पाने आप फैल गयी थी ...
उधर मेरे होंठ नाभि कूप का रस लेने में बीजी थे ...उधर एक हाथ ने आइस क्यूब से पहले तो उसके एक उरोज की परिक्रमा की फिर एक लाइन सी खीचते हुए ....कमर ...और मखमली खुली जांघ के उपरी भाग पे ..रस कूप के एकदम बगल से फिर ऊपर की ओर ...दूसरे उरोज तक
और इधर मेरे होंठ बर्फ से ठिठुर रहे थे ...जीभ भी ठण्ड से खुद बर्फ हो रही थी ...
उस ठिठुरती ठंडी जीभ को मैंने उसके भगोष्ठ के बाहरी ओर लगाया ...
और उसे जैसे ४ ४ ० वोल्ट का करंट लगा हो ...
लेकिन अभी तो ...और गले पल जैसे कोई बाज झपटे मैंने उसकी मक्खन मलाई चूत अपने होंठो के बीच भर ली और चूत जोर जोर से चूसने लगा ...
बस उसकी रस धार बहने को होती और मैं रुक जाता
चार पांच बार मैंने उसे तडपाया ...लेकिन आखिरी बार वो उठ गयी और धक्का देकर मेरे ऊपर ...
हजारों कहानियाँ हैं फन मज़ा मस्ती पर !


No comments:
Post a Comment