Sunday, March 9, 2014

FUN-MAZA-MASTI फागुन के दिन चार--95

FUN-MAZA-MASTI

   फागुन के दिन चार--95
गतांक से आगे ...........


दूबे भाभी

दूबे भाभी ने गुलगुले बनाये दोनों के लिए ...करन ने खाते खाते ...झपट्टा मार कर एक रीत के हाथ से भी खा लिया और उसकी उंगली भी काट ली ...

रीत जोर से चिल्लाई ...भाभी ले लिया मेरा ...काट लिया।

दूबे भाभी दौड़ती आयीं और अपने अंदाज में झुक के उन्होंने पहले तो रीत की शलवार का नाडा , कुर्ता उठाकर चेक किया ...फिर ऊपर देखा, गाल सहलाया ,और हंसकर बोलीं

" सब पैकिंग तो दुरुस्त है कैसे ले लिया इसने ...झूठ मूठ मेरे सीधे साधे नंदोई को बदनाम करती हो ..और ले लेगा तो इसका हक़ है"

फिर वो करन से बोलीं ...
"अगर ये सीधे से ना लेने दे ...ना तो मुझे बुला लेना ...मैं हाथ पैर पकड़ लुंगी ..छोड़ना मत इसे ."

रीत हंसते हँसते दुहरी हो रही थी ..

" भाभी ...इसको देख के आज आपने भी पाला बदल लिया

" नंदोई और सलहज का रिश्ता ...ही स्पेशल होता है ..." दूबे भाभी हँसते हुए बोली।

" भाभी आपने एक दम सही बोला ...और देखिये मैंने एक पंडित को हाथ दिखाया था ...रीत के प्लेट के गुलगुले ख़तम करते करन बोला ...

"वो बोला की तुम्हारे हाथ में ..इसी साल ...एक सुन्दर सी गोरी सी बीबी है ...लेकिन थोड़ी नकचढ़ी ..और छ बच्चे हैं।"

रीत उछल गयी और बोली ..".ये मुझसे नहीं होने वाला है ..एक दो तक तो ठीक ...लेकिन छ .."

दूबे ने फिर अपने नंदोई यानी करन का साथ दिया ...वो रीत को हड़काती बोली ..

" तूझे क्या ...सारी सारी रात तो ये बेचारा मेहनत करेगा ...बस तुम पेट फुला लेना ...और नौ महीने बाद ..

केहाँ ...केहाँ,अगले साल फिर ...जहाँ बच्चा बाहर ...मर्द अन्दर ...और जब इसको मेहनत करने से कोई ऐतराज नहीं तो तुझे क्या ...

बस रात रात भर टांग उठाने की प्रैक्टिस शुरू कर दे ...तू वैसे भी इतना योग करती है ..जिम विम जाती है ...तो क्या दिक्कत होगी तुझे ."

रीत हंसते हँसते पागल हो रही थी ...बोली ...भाभी आपने तो बड़े दलबदलू नेताओं को भी मात कर दिया ...

लेकिन दूबे भाभी ...वो भी आज कितने दिन बाद इतनी खुश थीं .
अब उनका निशाना करन की ओर था

" भैया ...पंडितवा इहे साल बोला था ना ..."
रीत ने मुस्कराते हुए करन को घूरा ...

लेकिन वो महा सीरियस ..और दूबे भाभी से बोला ," हाँ भाभी ..."

"त ..फिर मई में लगन शुरू हो जायेगी ...मई जून में शहनाई ...बजा दो ...बन्ना बन्नी ..और ठीक नौ महीने बाद सोहर ..." दूबे भाभी ने पूरा प्रोग्राम बना दिया।

"हमारी तो आदत नहीं है बड़े लोगों की बात टालने की ...अब जो आप कह रही हैं तो ठीक ही है ...हाँ बस अपनी ननद को मनाना , समझाना आपकी जिम्मेदारी है .." बड़ी सीरियसली करन ने दूबे भाभी से बोला।

रीत बड़ी मुश्किल से अपनी मुस्कान दबा पा रही थी .

गनीमत थी की उसी समय डी बी का फोन आ गया वो उन लोगों का वेट कर रहे थे .
बना दिया।

".
डीबी के यहाँ समोसे और चाय के अलावा तीन बातें हुयीं ...

पहले तो उन्होंने संक्षेप में बनारस टेरर काण्ड के बारे में बताया , फिर बोला की डिटेल उसे रीत बता देगी।

फिर उन्होंने रीत से बोला की तुम करन के साथ दो -तीन जगह होलिका दहन देख लेना ..उनके हिसाब से अब कोई गड़बड़ तो नहीं होनी चाहिए ...फिर भी उन्होंने प्रिवेंटिव मेजर्स कर रखे हैं ... एक बार रीत अपनी निगाह से बस देख ले ...

और उसके बाद डी बी ने असली पत्ता खोला।

बडौदा के पुलिस कमिश्नर से उनकी बात हो गयी थी ...उन्हें किसी के आने से कोई ऐतराज नहीं है , लेकिन चूँकि स्टेट गवर्नमेंट का अप्रोच थोडा अलग है , इसलिए ट्रांसपोर्ट और अकोमोडेशन ...के लिए वो कुछ और इंतजाम कर लें।

और दूसरी बात उनके आने की बात एकदम सीक्रेट रहनी चाहिए . वो लोग वहां पहुँचने के बाद ही उन्हें कान्टेक्ट करें .
फिर उन्होंने एक फैक्स निकाल कर करन को बढ़ा दिया ...उसके बडौदा के लिए ..इंस्ट्रक्शन थे।

फिर उन्होंने बोला की उन लोगो ने तय किया है की सेन्ट्रल गवरन्मेंट के डिपार्टमेंट्स इस्तेमाल करेंगे .

एक बी एस एफ का प्लेन प्लेन आ रहा है ...वो साढ़े ग्यारह , बारह बजे रात में यहाँ से उदयपुर के लिए जायेगा।
उसके आगे के लिए रेलवे मिनिस्ट्री से बात हो रही है ...और वहां पर लाजिस्टिक अरेंजमेंट ,रेलवे , इन्डियन आयल कारपोरेशन के लोग करेंगे। उसके साथ डिफेंस मिनिस्ट्री ने बडौदा में एयर फोर्स और आर्मी को भी इंस्ट्रक्ट कर दिया है।

फिर उन्होंने रीत की देख कर कहा की ... मेरा एक सजेशन था ....आफ कोर्स अगर रीत एग्री करे ...की तुम रीत को भी साथ ले जाओ ...ये शुरू से इन्वाल्व रही है ...इसे पूरे प्लाट की जानकारी है ...और शी विल बी ग्रेट हेल्प ..

रीत ...तुरंत बोली ...मैंने तो पहले ही कहा था मैं तैयार हूँ ..

करन ने मुंह बनाया और फिर कहा अगर आप कह रहे हैं तो

तब तक एक और और फैक्स आया .
रेलवे और आई आर सी टी सी से ..
.
डी बी ने पढ़कर बोला , चलो अब तुम दोनों की इटिनरि पक्की हो गयी।

उदयपुर में महाराजा एक्सप्रेस है , लग्जरी ट्रेन ..दो बजे बजे में उदयपुर से छूटेगी ...उसमें प्रेसिडेंशियल सूट तुम दोनों के लिए बुक कर दिया है ... ट्रेन कल बडौदा दिन में दस बजे पहुँच जायेगी। तुम लोग रहने के लिए भी उसे इस्तेमाल कर सकते हो . उसमें एक्सीलेंट फैसलीटी हैं।

हाँ लेकिन उसमें तुम दोनों का कवर एक हनीमूनर का है ...जो फोटो जर्नलिस्ट हैं। उदयपुर में तुम्हे कैमरे भी मिल जायंगे और रेलवे की ओर से शूटिंग की परमिशन भी ... यू विल हैव टू बिहैव एकार्डिंगली .."

करन ने कस कर रीत का हाथ दबा दिया और उसकी ओर देख कर मुस्कराया ...रीत शर्मा गयी , उसने नजरें झुका ली ..लेकिन जवाब में और कस के करन का हाथ दबा दिया।

" अच्छा अब तुम लोग चलो ...पौने आठ हो रहा है , आठ बीस पर होलिका दहन का मुहूर्त है ...और तुम लोग टाइम पर फ्लाईट के लिए निकल जाना और ये फोल्डर ले लो ..इसमें आर्मी, एयर फोर्स के लिए लेटर और बाकी डिटेल्स हैं।"

वो लोग चेतगंज , गौदौलिया , लक्सा की होलिका में गए .. पूरा शहर होली की मस्ती में झूम रहा था ...

कहीं जोगीरा कहीं कबीर ...कहीं चौताल ...रीत और करन ने भी खूब मस्ती की ...भांग भी पी ...लेकिन अचानक रीत सीरियस हो गयी ..

करन ने पूछा क्या हुआ तो उसने बोला की अभी बारह घन्टे हुए होंगे की ...जब उन लोगो ने वो बाम्ब पकडे थे जो इन होलिकाओं में डाले जाने वाले थे ..सात आठ तो आर डी एक्स वाले थे और बाकी लोकल ...

अगर उन का प्लान कामयाब हो जाता तो ...मस्ती की जगह

क्यों हो जाता कामयाब ...मैं और तुम हैं ना ...करन ने रीत का हाथ दबा कर कहा और होली के हुडदंग में शामिल हो गया .

आज अवध में होरी रे रसिया ...अरे आज ...
होरी से रसिया , बरजोरी रे रसिया ...


पहले करन , फिर रीत भी साथ साथ गाने लगी ...

अरे केके हाथ पिचकारी और के के हाथ अबीर रे रसिया ...

वहां सब अबीर गुलाल उड़ा रहे थे ...रीत ने थोडा सा गुलाल ले के करन के गाल में लगा दिया ...और जब करन पीछे पड़ा तो वो भाग ली ..लेकिन करन ने उसे दबोच लिया ...और पूरी की पूरी प्लेट भर अबीर ...उस के ऊपर ...बाल,.. गाल ...सब लाल ...

लक्सा की होलिका से वो आगे ही निकले थे की वो ' स्पेशल' पान की दूकान पडी ...

रीत ने उसे चढ़ाया ...बनारस आये हो और पान ना खाए ...फिर बोली की ये स्पेशल पान बनाता है ...
करन ने दूकान वाले को पैसा पकडाया ...तो दूकान वाले ने पूछा स्ट्रांग ..
करन पे हलकी हलकी भांग चढ़ रही थी ..वो बोला नहीं सुपर स्ट्रांग ..

उसने फिर पूछा ...कितने का
करन बोला सब का ..

दुकानदार ने अपने हाथ में सौ के दो नोट देखे ...और ...फिर पान को ..और मदन मंजरी डाल के पलंगतोड़ पान को सुपर स्ट्रांग किया ...और एक दर्जन पान बाँध के दे दिए .

सामने ही नत्था हलवाई की दूकान थी ...करन बोला दूबे भाभी के लिए गुलाब जामुन ले लें ..

रीत खुश हो के बोली ...अरे नेकी और पूछ पूछ ...एकदम वो भी स्पेशल वाला ...
करन को क्या मालूम था ...स्पेशल मतलब भांग की डबल डोज ...एक किलो उसने ले लिया .

घर पहुँचते दस बज गए थे।
दूबे भाभी चार बार दरवाजे पे झाँक चुकीं थी

रीत तो दूबे भाभी से बोली

" भाभी हम लोगों को अभी जाना है ....बडौदा ...बस मैं सामान पैक कर के अभी आई ...बाकी आप को ये बता देंगे .."

आंधी तूफान की तरह अपने कमरे में चली गयी ...और अपनी अटैची ले कर लौटी तो देखा ,

करन ने भाभी को 'स्पेशल पान' और गुलाब जामुन का घूस देकर पटा लिया था ,
भाभी खाना लगा रहीं थी
और वो भाभी को मक्खन लगा रहा था .

भाभी रीत से बोलीं देख .. तेरे लिये तेरी फेवरिट ...दाल भरी पूड़ी बना रही हूँ ..गरम गरम खा ले


खाते समय ..जब भाभी ने करन की थाली में तीसरी पूड़ी डालने की कोशिश की ...तो वो उछल पड़ा ...
" नहीं भाभी दो से ज्यादा एकदम नहीं ...ज़रा भी जगह नहीं है "

भाभी ने बोला ..

" चार तो कम से कम खाना पडेगा ...इतनी सुन्दर , प्यारी सी ननद तुम्हारे साथ भेज रही हूँ
अरे चार पूड़ी नहीं खाओगे ...तो रात में आज चार बार चढ़ाई कैसे करोगे ...इसके ऊपर .."

करन ने भाभी के हाथ से तीसरी पूड़ी छीन कर अपनी थाली में डाल ली , फिर तिरछी निगाह से रीत की ओर देखते बोला .

" भाभी अगर ये बात है ...तो मैं तो कम से कम छ पूड़ी खाऊंगा ."

रीत ने मुस्कराते हुए करन को देखा ...और भाभी की ओर बनावटी गुस्से से देखती बोलीं ..." भाभी आप भी ना

करन की थाली में पांचवीं पूड़ी डालते , रीत की बात अनसुनी करते बोलीं ...

" और अगर ये जरा भी नखड़ा करे , ना नुकुर करे तो ...पूरी जबरदस्ती करने की छूट मेरी ओर से है ...और सुबह फोन करके ..मैं पूछूंगी की मेरी इस ननद के साथ कितनी बार ..."

रीत हँसे जा रही थी ...भाभी, नंदोई को देखते ही आपने पाला बदल लिया ...कितनी तेजी से ...

और खाने के बाद भाभी ने करन के लाख न न करने पर भी नत्था का वो डबल भांग के डोज वाला , गुलाब जामुन जबरदस्ती ...और अबकी रीत ने दूबे भाभी का पूरा साथ दिया ... अपने गोरे गोरे हाथों से ... करन के गाल दबाकर ...मुंह खुलवाने में ...

लेकिन करन ने हिसाब बराबर कर लिया ....रीत के मुंह में जबरदस्ती गुलाब जामुन डाल के ...अबकी भाभी ने रीत के दोनों हाथ पीछे पकड़ रखे थे ...

हाँ पान के लिए जब उसने मना किया तो उन्होंने दो जोड़ी पान रुमाल रुमाल में बाँध के ...रीत के पर्स में डाल दिए ...और बोला ..

" अब इसे खिलाने की जिम्मेदारी तुम्हारी ..."

मुंह में ठूंसा ...गुलाब जामुन ख़तम करती, मुस्कराती वो शैतान बोली ..

".एकदम भाभी ...आपकी ननद हूँ कोई मजाक नहीं ."
वो लोग निकलने लगे तो अचानक दूबे भाभी को कुछ याद आया .

रीत से वो बोलीं ...एक मिनट तू रूक ...

करन सामान लेकर बाहर निकल गया था .

वो जल्दी से लौट कर आयीं और कुछ रीत की मुट्ठी में पकड़ा दिया और बोला ...बस झट से इसे पर्स में रख ले,
तब तक करन की आई ..देर . हो रही है ..

और रीत और ...दूबे भाभी बाहर आ गयीं .

रीत कार में करन के बगल में बैठ गयी और कार चल दी .

दूबे भाभी और रीत का रिश्ता , ननद -भाभी का था .. उसी तरह खुल के मजाक , छेड़ छाड़ , मस्ती , दोस्ती ...लेकिन आज ..

उनकी निगाहें ...उसे बेटी की तरह विदा कर रही थीं ...

नम आँखे ...बार असीष रही थीं ,दुआ कर रही थीं ..

सदा सुहागन रहे ये ...

इन दोनों की जोड़ी इसी तरह हंसती खेलती बनी रहे ..

किसी की बुरी नजर न लगे ...
मेरी उमर लग जाय इसे ..

जब तक कार गली के मोड़ से ओझल नहीं हो गयी वो देखती रहीं , दुलराती रहीं ..
और रीत भी पीछे मुड के उन्ही को देख रही थी ...हाथ हिला रही थी।



शहर निकलने के बाद जब करन ड्राइवर से कुछ बात कर रहा था ..

रीत ने अपना पर्स खोल कर देखा ...भाभी ने चलते समय क्या उसकी मुट्ठी में पकडाया था ..

वह मुस्कराए बिना नहीं रह सकी ...वैसलीन की एक शीशी ...बड़ी सी .

ऐअर पोर्ट आ गया था

 फागुन के दिन चार की वापसी, कहानी फिर से अपनी राह पर

वीडियो कान्फ्रेनिग ख़तम हुए थोड़ी देर हो गयी थी। मैं बस कंप्यूटर को देखे जा रहा था ...और सोच रहा .

कितना खाली लग रहा था गुड्डी के बिना ...और कितनी देर हो गयी थी उसे गए ..दो घंटे से ऊपर पता नहीं रंजी के साथ क्या उत्पात मचा रही होगी ...डेंजरस काम्बिनेशन है दोनों का ..

मैंने कंप्यूटर बंद कर दिया ...तब तक भाभी की आवाज आई ...अरे एक घंटे के बाद होलिका जलने का समय हो जाएगा सबको उबटन लगाया की नहीं ...

( हमारे यहाँ परंपरा है की होलिका दहन में उबटन या बुकवा लगा कर ...जो निकलता है शरीर से , वो होलीका में जलाने वाली बाकी सामग्री के साथ जाता है , इसमें परिवार के सभी लोगो का ...और मान्यता ये है की इसके साथ जो भी पिछले वर्ष का मैल है, मलिन है तन का मन का सब होलिका के साथ जल जाता है

...ज्यादातर लोग ..अब उबटन लगवाना नहीं चाहते ...इसलिए बस पैर की उँगलियों में लगा कर इति श्री कर ली जाती है )

शीला भाभी ने भाभी से बोला की बस मैं बचा हूँ ...क्योंकि मैं कुछ काम कर रहा था ...कंप्यूटर पे।

भाभी ने शीला भाभी को ललकारा ...अरे वो अपना काम करता ...आप अपना काम करती ..

इतना काफी था ...भाभी एक बड़े से कटोरे में उबटन ले के आ धमकी ...और जमीन पे एक चटाई बिछा दी ..बोलीं आ जाओ ...भाभी अभी भी बाहर से पलीता लगा रही थीं ... सभी पैरों में लगाइयेगा

जब तक मैं कहूँ ....भाभी सिर्फ उंगली पे ही लगाइयेगा ... उन्होंने पूरा हथेली भर लेकर सीधे घुटने पर ...और वहां से नीचे तक लगाना शुरू कर दिया ...

" अरे भाभी आपने तो पूरा ही .."

जब मेरी बात काट कर खिलखिलाते , हुए उन्होंने बोला तो मैं उन्हें सुनता और देखता दोनों रह गया

शीला भाभी ने अपना आँचल कमर में लपेट लिया था , इसलिए अब बिना किसी रोक टोक के , उनके छत्तीस डी डी साइज के गुदाज , गदराये जोबन , चोली कट ब्लाउज से बाहर झाँक रहे थे , बल्कि निकलने को उतावले हो रहे थे .दोनों उभारों के बीच का क्लीवेज ...तो पूरा दिख ही रहा था ...

आलमोस्ट निप्स तक उभार भी दिख रहे थे .

और यही नहीं उबटन लगाने के लिए वो जिस तरह मेरे पैरों पे झुकी , थीं दोनों जोबन और छलक कर बाहर आ रहे थे ..साथ ही उन्होंने अपनी साडी भी उबटन लगने से खराब ना हो ...

इसलिए ..अपने घुटनों के ऊपर कर ली थी। उनकी गोरी , सख्त , कसी कसी मांसल पिंडलियाँ भी साफ दिख रही थीं ...और कभी वो ज्यादा झुकतीं तो ...चिकनी रसीली ...गुदाज जांघे भी उपर तक ...

और ये देख कर वही हुआ जो होना था ...मैंने तो किसी तरह अपने ऊपर कंट्रोल रखा ....लेकिन जंगबहादुर बौरा गए ...पूरे ९ ० डिग्री .

और ऊपर से शीला भाभी की बातें ...और उंगलियों का जादू ..खिलखिलाते हुए वो बोलीं ,

" लाला एतने दिन से तोहैं , समझा रहीं हूँ ...आधा तीहा में ना तो लड़की को मजा आता है ...और ना तुमको ..आयेगा ..एह्लिये ...तुम चाहे जो बोलो मैं तो पूरै लगाउंगी ."

फिर मुझे याद आया की शीला भाभी ने मेरा इतना बड़ा काम किया और मैंने इनसे एक बार भी थैंक्स नहीं किया ...अगर वो भाभी से गुड्डी के बारे में नहीं बोलतीं ...मेरी तो जुबान खुलती नहीं ...और भाभी कहीं इधर उधर रिश्ता तय कर देतीं तो ...कितनी मुश्किल होती ...

फिर उन्होंने सिर्फ भाभी से सिफारिश ही नहीं की ...बल्कि भाभी का इशारा मिलते ही हम दोनों लोगों को मंदिर ले गयीं ...कुंडली मिलवा दी ...और लगन भी निकलवा दी ...मैंने जैसे ही उनसे रिक्वेस्ट की ...दो घंटे के अन्दर सब कुछ पक्का

मैंने भी भाभी के अंदाज में बोला ,

" भाभी , आप बोलें और गलत ...इ कैसे हो सकता है ...फिर एह टाइम तो आप ऊपर हैं और हम नीचे ...आप लगा रही हैं और हम लगवा रहे हैं ..ता ...आधे जाएगा की पूरा इ तो आप ही तय करियेगा ..'

शीला भाभी अबकी पूरा खुलकर हंसी और मुझे छेड़ कर बोलीं ,

" लाला , तुम समझते ता हो लेकिन तनी देर से ...लेकिन ...मैं तो पूरा ही लगाउंगी और जहाँ मर्जी वहां लगाउंगी ... आगे भी और पीछे भी अब चाहे तुम सीधे से लगवा लो , चाहे जबरदस्ती ."


मैं फिर बोला ," भाभी ,आज आप हमारा बहुत बड़ा काम करा दीं। आप नहीं मदद करती तो बहुत मुस्किल था ...गुड्डी से ...अब हम ता मारे लिहाज के भाभी से बोलते नहीं ....और उ कहीं और अगर रिश्ते की बात कर लेतीं त केतना मुश्किल हो जाता। लेकिन इ सब आप का कमाल है .."

शीला भाभी तो ख़ुशी से फूल कर ...लेकिन बोलीं , " अरे लाला , देवर के काम अगर भौजाई नहीं आएगी तो कौन आएगा ...और ख़ास कर एह तरह के काम में ...और हम तो बोले उनसे की आप देवरानी , देवरानी करती हैं ,गोद में छोरा नगर ढिंढोरा ...अरे देवर के आपके पसंद है , घर गाँव की लड़की है ...

देखी सुनी ...सुन्दर , हर चीज में निपुण ...बस पक्का कर लीजिये ..मैं खुद जाके मंदिर से कुंडली , लगन की साइत सब पूछ के आउंगी ...फिर आप लड़की के माँ बाप से बात कर लीजिये ..अउर असली कमाल ता देवर जी तू किहे की बिना हिचके ..सब बात पहलवें मान गए ...

गरमी क बियाह , उहो गाँव में ...तीन दिन क बरात , उहो आम के बाग़ में .."

फिर दूसरे पैर पे उबटन लगाने लगीं।

मैंने हंस के कहा ," भाभी ..उ छोरी के लिए मैं गाँव क्या पताल में जाने को तैयार था ...नाक रगड़ने को तैयार था ..

शीला भाभी बोली ..." अरे कोहबर में देखना नाक क्या , बहुत चीज तुमसे रगड़वाउंगी ...लेकिन छोरी तुम बहुत अच्छी चुने है और साथ में बोनस

" बोनस मतलब ...भाभी ..."

शीला भाभी की उंगलिया ...अब गुरिल्ला सिपाहियों की तरह ..मेरे शार्ट के अन्दर भी उबटन लगाते घुस जा रही थी ...और मेरे बाल्स को अबकी उसने स्क्रैच कर दिया और वो हंस के बोलीं ...

" अरे लाला दो दो सालियाँ भी तो हैं तुम्हारी .."

" अरे भाभी, मैंने बहुत बुरा सा मुंह बनाया ,..कहाँ ...अभी बहुत छोटी हैं इससे तीन साल छोटी ...'

" यहीं तो तुम गड़बड़ा जाते हो ..अरे साल्ली साल्ली होती है ...चाहे छोटी हो चाहे बड़ी ...एक बात गाँठ बांध लो लड़कियां , लड़कों से जल्दी जवान होती हैं ...फिर छोटी हो तब भी ..रिश्ते के नाते खुल के मजाक वजाक शुरू कर देना ..

अपने हाथ से दबा दबा के नीम्बू से नारंगी तो बना सकते हो ...फिर कभी पकड़ा देना ...लेकिन तुम शर्माते बहुत हो ..देखना ...जिसको तुम छोटी कह रहे हो ना ...उससे तुम्हारी क्या दुर्गत करवाती
हूँ कोहबर में ...साली है ..उसी से गाली दिल्वाउंगी ...

भूल गए उस दिन खाने पे गुड्डी की गाली ...और गाँव में जो तुम्हारी सालियाँ सुनाएंगी ना ...चौगुनी मिर्च होगी उसमें .."

भाभी की बात में तो दम था लेकिन ..
" लेकिन भाभी .." मैंने बोला।

" अरे लेकन वेकिन कुछ नहीं भाभी ने समझाया ...

" अरे छुटकीयों के सामने ..जो बड़ी वाली हैं ..तुम्हारी चचेरी, ममेरी , मौसेरी सालियाँ ...उन के साथ खुल के खेलो ..मजे लो ...गोद में बैठा के दबाओ ...चुम्मा लो मजे लो ...बस देख देख के छुटकीयों के भी मिर्ची लगेगी ...और तुम उन सबों को बख्स भी दो ...वो तुम्हे नहीं छोड़ने वाली ...'


ये बात तो भाभी की सोलहो आना सही थी ...गुड्डी ने खुद मुझे कसम दिला दी थी की जो उसकी ममेरी , मौसेरी बहने हैं ..सबके साथ ...और कभी उन सब ने मजाक में शर्त लगा ली थी ...वो सब हम उमर थीं ...एक दो साल छोटी बड़ी ...बहने कम सहेलिया ज्यादा ...शर्त ये थी की ...

जिसकी शादी पहले होगी ..उसके हसबैंड के साथ वो सब ...अब चांस की बात ये थी की गुड्डी की शादी सबसे पहले हो रही थी ...और जैसे ही मेरी उन होने वाली सालियों को पता चलेगा ...गुड्डी के लिए मुसीबत

" अच्छा ये बताओ ...गुड्डी का पेट कब फुलाओगे ...पुराना जमाना होता तो जेठ में बियाह होता ...तो फागुन लगते लगते ...घर में केंहाँ -केंहाँ ...

शादी के दो महीने के अन्दर अगर दुल्हिन को उलटी न शुरू हो तो रोज दस बात सास सुनाएगी ...लेकिन कितना दिन दो साल - तीन साल ..." भाभी ने पूछ लिया

बात तो भाभी की सही थी ...मैंने गुड्डी से पूछा भी नहीं था ...लेकिन जो मैं सोचता था तो मैंने बोल दिया ...

" भाभी ...कम से कम तीन साल बाद ...'

अब भाभी ने अपना गणित दिखाया जो एकदम सही था ...

" तीन साल ...ना ..ता एक बात सुन लो ...आखिरी तीन चार महीने कौन काम देखेगा घर का ..और उसके बाद भी एक दो महीने तो ...कौन काम देखेगा ...

तुम्हारी कोई छोटी बहन तो है नहीं ...तुम्हारी सास अपने घर और बच्चों को छोड़ के तो आ नहीं सकती इतने दिन के लिए ...तो कौन आएगा ...' शीला भाभी ने फिर पुछा ...

अब इतना दूर तक तो मैंने सोचा नहीं ..कभी ...फिर भी दिमाग लगा कर बोला,...

" और कौन आएगा ...उसकी छोटी बहन को ही बुलायेंगे ...मौसी बनेगी तो कुछ मेहनत तो करनी होगी ...और जहाँ तक उसकी पढ़ायी का सवाल है ...तो उसका एडमिशन तो मैं कराई सकता हूँ ..." मैंने बोला।

"सही सोचा तुमने , छोटी बहन साथ रहेगी तो गुड्डी का भी मन बहला रहेगा ...और तुम उसके उपर सब जिम्मेदारी भी सौंप सकते हो ...और अगर उसका एडमिशन करा दोगे , फिर तो उसे लौटने की भी कोई चिंता नहीं रहेगी ...लेकिन एक बात तुम्हे मैं साफ साफ बता ...

केतनो पढाई किये हो इ ना मालुम होगा तुमको ...आखिरी चार महिना ...डाकटर ,मिड वाइफ तुमको पास फटकने भी नहीं देगा ...और बच्चा होवे के भी दो महीने के बाद तक ...यानी छ: महिना ..."

और अब भाभी की उंगलियाँ जाँघों पे उबटन लगाते लगाते सीधे शार्ट में घुस गयीं और उन्होंने मुट्ठी में जंगबहादुर को पकड़ लिया और ऊपर नीचे करते पूछने लगीं ...

" तो लाला ...छ: महिना इस का क्या करोगे ...

और एक बार इस को रोज हलवा पूड़ी की आदत लग जाय ता इतना लम्बा ...व्रत फिर क्या करोगे ...साधू सन्यासी तो बन नहीं सकते , और अगर कहीं बाहर इधर उधर मुंह मारा ..तो पकडे गए तो बदनामी और

..उसके अलावा भी तरह तरह की मुसीबत ...अच्छा छोडो ...तुम का कह रहे थे की तुम्हरी साली , गुड्डी से केतना छोट है?’

" तीन साल ..." मैंने जवाब दिया .

" अभी हम लोग केतना दिन आगे की बात कर रहे हैं ..जब गुड्डी पेट से… और डिलीवरी के पहले तोहें ...आपन साली के बुलावे के प्लान हौ .."

भाभी किसी वकील की तरह सवाल कर रही थी थी ...और मुझे जवाब देना ही था ..

" तीन साल के आसपास , भाभी ."

अब मैं पकड़ा गया .

" हूँ वो बोलीं ...त मतलब ओह समय का उमर होगा उसका ...उहै ना जो आज गुड्डी का है ...त अब दो महीने में तुम्हारा जब लगन हो जाएगा ...तो दिन रात कब्बडी होगी ...बिना नागा , और होनी भी चाहिए ...इस उमर में मजा ना लोगे तो कब लोगे ...ता अब सोच लो की आधा साल का उपवास करना है की साली के साथ मजा लेना है ..." एक बार फिर कस के जंगबहादुर को दबाते हुए उन्होंने पूछा .

जंगबहादुर , पूरी तरह तने , जोश में थे।

और मैंने बिना हिचकिचाए जवाब दे दिया ...भाभी साली के साथ मजा लेना है .

"यही बात तो मैं भी कह रही थी ..".वो बोलीं .

" और इस के लिए अबहीं से जरा उससे खुल के मजाक करना , गोदी में बैठाना , गाल पे हाथ फेरना थोडा बहोत मींजना ...अरे मर्द का हाथ पड़ने से जुबना पे उभार बहुत जल्द आता है . यही तो बोनस का फायदा ...है ".
और ये ज्ञान देने के साथ ही भाभी ने दोनों हाथों से प

कड़ कर मेरी शार्ट नीचे खींच दी ...और जंगबहादुर आजाद होकर कुतुबमीनार की तरह बाहर हो गए। और साथ ही शीला भाभी ने कटोरे का सारा बचा खुचा उबटन अपनी दोनों हथेलियों में ले के ...मेरे खड़े लिंग पे लगाना शुरू कर दिया ...

" अरे भाभी इ का ..इहाँ थोड़ी ...अरे छोडिये ना '

मैंने जोर लगाया लेकिन शीला भाभी की पकड़ से छूटना आसान है क्या ...

ऊपर से वो बोलीं ...

" एतना तो गौने का दुल्हिन ना शरमात ...लौंडियों को भी मात कर दिए हो लाला , लजाने में . तोहार तो कोहबर में रगड़ाई बहुत जरुरी है ...अरे इ जब होलिका में जाई ता होलिका माई आशीर्वाद दिहें ...की नए संवत में खूब नयी नयी , कसी कसी कच्ची चूत मिलेगी ..."

" अरे भाभी ..जो आप की मदद से एक मिल रही है मई में वो बहुत है ..." मुस्कराते हुए मैंने कहा .


दोनों से हाथों से लिंग पे उबटन , मथानी की तरह रगड़ते हुए वो बोली ...

अरे उ त परमानेंट है ...और साथ में साली , सलहज ...सावन में आओगे न ससुरारी , गावं में ..." वो बोली
.
" हाँ गुड्डी कह रही थी उन के यहाँ कोई रसम होती है ...लड़की शादी के बाद अपना पहला सावन गाँव में , मायके में मनाती है ...फिर लड़का ले आ के ले है ...कोई पूजा होती है वो दूल्हा -दुलहन साथ साथ करते हैं ...इसलिए मुझे भी एक हफ्ते के लिए आना होगा ..."

मैंने कबूल किया .

" तब दिलाउंगी मैं तुम्हे गाँव का मजा ...आखिर गाँव के दामाद हो ...गन्ने के खेत और अमराई का मजा ...डबल बेड भूल जाओगे .सारी लड़कियां तो तुम्हारी सालियाँ लगेंगी ...और उनकी भौजाई सलहज ...कली का भी मजा लेना ...और खेली खायी का भी '

वो बोली ...और तब तक उबटन का काम हो गया। और मैंने शार्ट ठीक किया.

जो लगाने के बाद गिरा था वो उन्होंने एक कागज में इकठ्ठा किया और निकल गयीं . ( यही होलिका में ड़ाला जाता था , बाकी और सामान के साथ .)

तब तक बाहर से गुड्डी की आवाज सुनाई पड़ी

गुड्डी , भाभी कुछ बात कर रही थीं ..और फिर शीला भाभी की भी आवाज आने लगी .


 गुड्डी , भाभी कुछ बात कर रही थीं ..और फिर शीला भाभी की भी आवाज आने लगी .

मैं अन्दर कमरे में उसका इन्तजार कर रहा ..कब आएगी कब आएगी ...
और वो आई और ...मेरे होश गायब हो गए ...

उनसे मिली नजर तो मेरे होश उड़ गए ...वाली हालत हुयी

स्लीवलेस स्ट्रिंग टाप , लो कट , आलमोस्ट शियर , और उसमे से उड़ने को बेचैन कबूतर , बहुत लो जींस ...और बीच में दिखती , मुट्ठी में आ जाय ...ऐसी गोरी कमर ...

जींस अल्ट्रा लो भी और कुछ एक्स्ट्रा टाईट भी ...सारे कटाव उभार दिखते ...


"कहाँ गायब हो गयी थी इतनी देर तक ," मैंने शिकायत भरे अंदाज में कहा।

" दो घन्टे मुश्किल से हुए हैं ...पहले तो तेरे उसे रंजी के यार दरजी के पास ...लेकिन यार क्या मस्त कटिंग करता है ..एकदम परफेक्ट फिट ...हाँ तो उसको ट्रायल दिया ...बहोत कसी चोली थी , खूब टाईट

मैंने बोला ...तो वो बोला ...ठीक है आधे घंटे में सही कर दूंगा ...
फिर सही किया उसने ...मैंने उत्सुकता वश पूछा गुड्डी से ..

"तुम लड़के लोग ना बस चोली का नाम सुन लो ...बस चालु हो जाते हो ...क्रम से बताने दो ना वरना मैं कनफुजिया जाउंगी ...वो बोली फिर आगे बताना शुरू किया ..

." हाँ तो ट्रायल के समय ही मेसेज आ गया था ..की फोटो शूट ...वो जींस वाला ...आधे घंटे के लिए पोस्टपोन हो गया है ...

फिर रंजी चालू हो गयी ...कुछ पुराने यारों को चारा डाला ...कुछ नयों को ललचाया ...और आधे घन्टे की मस्ती के बाद शूट पे ..करीब एक घंटा वहां लगा ...करीब 8 -1 0 फोटो फाइनल की है होली के अगले दिन वो लगा देंगे ...और सिगरा में , बनारस में भी शो रूम खुल रहा है ...रंजी की तो वहां भी लगायेंगे ...

अपने बनारस पहुँचने के पहले ही वो काफी पापुलर हो जायेगी ....हाँ तो ...वहां से लौट कर बाबीज टेलर्स ..चोली ली और ...यहाँ ...

नहीं साफ बताओ ना चोली का क्या किया उसने ...

गुड्डी बहोत जोर से हंसी ..बोली ..और टाईट कर दी ...और जब मैंने बोला ...तो वो हंस के बोला " हमारे यहाँ के लड़कों को टाईट ही अच्छी लगती है .

इस बात पर मैंने गुड्डी को कस के बांहों में भींचते हुए कहा ,

" सही तो कहा उसने ...हाँ टाईट को ढीला करने का काम जरूर हम कर देतें हैं ."

हाथों ने उसके नितम्बों को दबोच रखा था ...और उंगली सीधे टाईट जींस में से झांकती , गांड के दरारों में टहल रही थी।
गुड्डी भी कम नहीं थी , अपने उभार मेरे सीने पे रगडती बोली ,

" मालूम है तुम्हारा इरादा ...देखूंगी आज रात को ...लेकिन अपना वायदा मत भूलना "

और मेरे ऊँगली पिछवाड़े के दरार में धंस गयी ..उसे मेरे प्रोग्राम की याद दिलाते ..

मैंने उसको बोल रखा था ..की मैं होली के पहले वाली रात ...तेरे पिछवाड़े का मजा लूँगा तो वो हंस के बोली थी ..
" ले लेना यार दर्द तो बहोत होगा लेकिन सह लुंगी ...लेकिन मेरी भी एक शर्त है की मेरे पिछवाड़े की लेने के तीन दिन के अन्दर , तुझे रंजी के पिछवाड़े की भी ...लेनी होगी

नेकी और पूछ पूछ ...मैंने तुरंत हाँ कर दी। और गुड्डी वाही वादा दिला रही थी , और वायदे के साथ साथ मुझे रंजी का मस्त पिछवाड़ा याद आ गया ...गोर गदराये चूतड ...और जंगबहादुर तुरंत सैल्यूट देने लगे।

सीधे गुड्डी को दोनों जाँघों के बीच ..और गुड्डी ने और आग में हवा दी ...रंजी के फोटो शूट के स्नैप्स दिखा के ...
क्या जानमारू फोटुयें थीं ...कुछ ब्लैक एंड व्हाईट और कुछ लाईट ब्ल्यू ..दो चार कलर भी थीं ...
कल जब हम लोग गंगा डिपार्टमेनटल स्टोर गए थे वहां लेडिज फैशन की एक नयी गैलरी खुली थी ..और उसी में गर्ल्स टीन्स , जींस के एक एक शो रूम की भी शुरुआत होनी थी ...वो लेटेस्ट अल्ट्रा लो जींस रखने वाले थे ...वहीँ कल उन्होंने रंजी और गुड्डी को देखा ..और फोटो शूट के लिए बोला ...इसके पोस्टर वो अपने शाप में फूल साइज के लगाते ..
रंजी मान गयी और गुड्डी भी ...आज मुम्बई से उनका फैशन फोटोग्राफर आया था ...
रन्जी की पहली ही फोटो ...वो बेंड थी ..एक अल्ट्रा लो जींस में ...उसकी थांग साफ दिख रही थी , एकदम टाईट जींस में पूरे नितम्ब और दरार एकदम साफ ..कई फोटुयें गुड्डी और रंजी की साथ साथ थीं हग करती ...एक में तो गुड्डी ने कस के उसके बूब्स भींच रखे थे ....एक में रंजी बिलकुल निहुरी ...और गुड्डी उसके पीछे ...बिलकुल जैसे कोई लड़का उसकी ...मार रहा हो ...और एक में रंजी केयर लेसली खड़ी थी ..टाप आलमोस्ट खुला ...और जींस देह से चिपकी
सारे कटाव , उभार एकदम साफ दिख रहे थे और उसका चेहरा भी इतना सेन्सुअस दिख रहा था ...एक बार दूकान पे वो लाइफ साइज पोस्टर लग गए , तो ..रंजी तो पूरे शहर में ...

तबतक भाभी ने गुड्डी को आवाज लगाई ...वो बाहर निकली और पीछे पीछे मैं ...

भाभी गुड्डी को कुछ समझा रहीं थी ...ट्रेडिशनल कपडे ...जोड़े से ...बस ये दो शब्द मेरे पकड़ में आये।

गुड्डी बड़ी गंभीरता से एक एक बात सुन रही थी और सर हिला रही थी , फिर उसने भाभी से पुछा , शलवार सूट ...तो वो मुस्करा के बोलीं ..हाँ एकदम ...और मुड के मुझसे बोला ..होलिका में तुम चले जाना , गुड्डी के साथ और होलिका में डालने के लिए शीला भाभी ने सब सामान इकठ्ठा किया है ...उनसे ले लेना .

उन्होंने गुड्डी को कपडे के लिए बोला था तो मैंने भी पूछ लिया कपडे कौन से पहनूं ...

और भाभी ने गुड्डी की ओर इशारा किया ..अब मैं नहीं इससे पूछो ...और किचेन की ओर चली गयीं ..

गुड्डी मुझे खींच के कमरे में ले गयी और दरवाजा बंद कर सिटकिनी भी बंद कर दी

" हे सिटकिनी क्यों बंद कर दी ..." मैंने हैरान हो के पुछा।

आलमारी खोल के कपडे निकालती वो बोली ...

" क्यों क्या दरवाजा खुला रख के अपनी भौजाइयों के सामने कपड़ा बदलने का मन था ..."

मैं जो कुछ बोलने वाला था ...वो पलंग पे पड़े कपड़ों को देख के मुंह में ही रह गया ...
कुरता पाजामा ...वो भी बड़ा रंगीन किस्म का ...कढाई दार ...


" हे ..ये पहन के बाहर ...तुम्हे तो मालूम है मैं कुरता पजामा सिर्फ सोने के लिए पहनता हूँ ...और ये भी रंगीन ' मैंने कुछ बोलने की कोशिश की लेकिन उसने चुप करा दिया ...

" तुम यार नखड़ा बहुत करते हो ...एक बार बनारस में हम लोगों के साथ रहना शुरू कर दो ना ...तुम्हारी सारी आदते सुधार देंगे। और वहां होलिका में कोई तुम्हारी रंजी थोड़ी होगी जो तुम्हारा नाडा खोल देगी ..तुम उतारते हो या मैं उतारूँ तुम्हारे कपडे ...”

और मैंने चुपचाप उतारने शुरू कर दिए ...और उसने आलमारी से अपने कपडे निकालने शुरू आर दिए

...चिकन के काम की एक दुप्याजी , हाफ स्लीव की कुर्ती ...मैचिंग पजामी , एक पिंक ब्रा और पैंटी ...

अब मेरी बारी थी ...मैंने उसकी ब्रा पैंटी वापस अलमारी में डाल दी और बोला

" चल मैंने तेरी बात मान ली ...इत्ता तू भी मेरी ..."

" तू भी क्या याद करेगा किसी बनारस वाली से पाला पड़ा था ...और बिना ब्रा और पैंटी के कुर्ती , पजामी पहन ली ...और गले में एक चुन्नी भी ले ली ...लेकिन गले से एकदम चिपकी

आज बहुत दिन बाद मैंने बाइक यूज की की थी।

गुड्डी उछल कर बाइक पे मेरे पीछे बैठ गयी , और मुस्करा के बोली ...

अब मैं समझी ..तुम क्यों मुझे बिना ' कवच ' के ला रहे थे ...और अपना मतलब साफ करते हुए , उसने अपने किशोर ब्रा रहित उभार मेरी पीठ में गडा दिए और जैसे ये काफी नहीं था ...

उसका एक हाथ मेरी कमर को कस के पड़े हुए था और दूसरा हाथ मेरी जांघ सहला रहा था ...और धीरे धीरे जांघ के ऊपर ..

मैं क्यों मौका चूकता ब्रेक लगाने का ...लेकिन होलिका वाली जगह बहुत दूर नहीं थी ...इसलिए ...

लेकिन मैंने लांग टर्म इन्वेस्टमेंट कर लिया ये पूछ के ..हे होलिका के बाद लांग ड्राइव ..

.उसका जो हाथ जाघ के उपरी हिस्से में टहल रहा था ...सीधे जांघ के बीच पहुँच गया और ....उसने जोर से गपुच लिया ...साथ में अपने होंठ मेरे कान के पास रगड़ते बोली ..." नेकी और पूछ पूछ ..."


 हम लोग होलिका वाली जगह पे पहुँच गए थे ...और बाइक से उतरते ही गुड्डी का तुरंत 'रूपांतरण' हो गया

...चुन्नी सीधे सर पे ..सर ही नहीं बल्कि चेहरा भी थोडा ढंका ...

और हाथों में कुहनी तक भर भर के चूड़ियाँ , गाढ़ी नेल पालिश , लाल परांदा ..एकदम दुल्हन सी ...उसके हाथ में होलिका में डालने वाला सारा सामान था ..और मेरे साथ न सिर्फ सट के ...बल्कि ..

मेरे हाथों में हाथ ले के ..वो सामग्री ..डाली और मुझसे इशारा किया की मैं होलिका से मांग लूँ ...

मैंने हलके से बोला ..जल्दी से हमेशा के लिए ये लड़की ...गुड्डी ने उकसाया ...और भी कुछ मांग लो ...मैंने बोला ( मुझे शीला भाभी की बातें याद आ गयीं ) ...और मैंने बोला साथ में बोनस भी ...

गुड्डी जोर से मुस्कराई और कुछ कुछ बुदबुदाती रही ..

मैने देखा कई पति पत्नी ..जोड़े में होलिका के चारों ओर चक्कर काट रहे थे ...पांच चक्कर हमने भी काटे उनकी तरह ...

होलिका हो और गालियाँ ना हो ये हो नहीं सकता ...तो साथ में जोगीड़ा ..कबीर सब चल रहे थे ..

औरतें पूजा कर के एक ओर खड़ी थीं और आदमी दूसरी ओर ...

और होलिका की पूजा कर के ...गुड्डी उधर ही चली गयी ....मैंने देखा ..मिश्रायिन भाभी ...और उन्होंने गुड्डी को तुरंत अपने संरक्षण में ले लिया ...

मिश्रायिन भाभी ...मेरी भाभी की पक्की दोस्त, उनकी गाइड ...और मर्दमार और औरत मार दोनों ...

उम्र में भाभी से ६ -७ साल बड़ी ...तीस ..बत्तीस के आसपास ...दीर्घ स्तना ...और दीर्घ नितम्बा दोनों ...ऊपर अड़तीस डी डी और नीचे चालीस से कम क्या होगा ..होली में देवर और ननद दोनों उनसे कांपते

...लेकिन भाभी के चलते अब गुड्डी उनके कवर में थी ...


वरना होलिका जलाते समय जीतनी गाली गलौज ..आदमी कारते हैं ...उससे कम औरते नहीं ..बस यही है की वो आपस में और बहोत धीमी आवाज में मजाक करेंगी ..इधर उधर द्बायेंगी , चिकोटी काटेंगी ..और इसलिए गुड्डी थोड़ी सेफ थी ..

होलिका जली ..धूम धूम कर के ...

जोर से लोगों ने आवाज लगायी ...होलिका माई जर गयीं ...बुर चोदा इ कह गयीं ...

और भी बहुत कुछ ..

लेकिन मैं एस एम् एस देख रहा था

रीत का ...वो भी होलिका दहन में थी ...लक्सा में ...और करन उसके साथ था ..


हम दोनों बिना बोले बस यही सोच रहे थे की ये मौज मस्ती ...अगर आज सुबह ..रीत ने उन दुष्टों को ठिकाने ना लगाया होता ..वो बाम्ब का ढेर ना पकडा होता


रीत का मेसेज मैंने खोला ,

" वो करन के साथ बड़ोदा जा रही थी फ्लाईट से उदयपुर ...और वहां से किसी स्पेशल ट्रेन से बडोदा ...मैंने सारे पेपर उसे मेल कर दूँ ...ट्रेन में पहुँच के वो प्रिंट आउट रिपोर्ट की ले लेंगे ...

मैंने उसे कन्फर्म किया की मैंने आज रात में ग्यारह बजे तक लेटेस्ट रिपोर्ट भेज दूंगा , मीनल का कान्टेक्ट नंबर भी और मिनल को भी मेसेज कर दूंगा ..उससे मिलने के लिए ...

तब तक होलिका की लपटें थोड़ी धीमी पड़ने लगीं थी और गाने की आवाजें थोड़ी तेज ..और साथ में हल्ला भी

...कुछ लोग अबीर गुलाल भी उडा रहे थे ...और तब तक फिर लोगो ने होली के फेरे लेने शुरू कर दिए ..

.और साथ में जोर जोर से गालियाँ ...कहा जाता है की इस समय अगर गाली ना दो तो होलिका माई गुस्सा हो जाती हैं और फिर आपकी इच्छा पूरी नहीं होती ...

गुड्डी दौड़ के मेरे पास आ गयी और मेरे साथ साथ फेरे लेने लगी ...एक प्लेट में किसी ने अबीर गुलाल रखा था बस एक मुट्ठी उठा के सीधे मेरे चेहरे पे , बालों में और हंस के जोर से मुझसे बोली ...


तेरी रंजी के बुर में मेरे मर्द का लंड ..चोद चोद के उसको सचमुच की रंडी बना दो ...

इतना हल्ला था की सिर्फ बगल वाले की आवाज भी मुश्किल से सुनाई दे रही थी ...

मैंने भी उसी प्लेट से गुलाल उठा कर सीधे उसकी कुर्ती के अन्दर ...ब्रा तो थी नहीं ...अब चिकन की झलकती कुर्ती से अब गदराये मस्त जोबन साफ झलक रहे थे ..और मैंने साथ में उसके गाल मलते हुए कहा ...

" तेरे मर्द का लंड ...उसके सारे ससुराल वालियों की बुर में ..."

हम लोग होलिका का आखिरी चक्कर लगा रहे थे ...और गुड्डी ने मुड के कहा , हंसते हुए ..

.ठीक ...लेकिन अगर कोई ससुराल वाली बची देख लेना मैं अपने सब ससुराल वालियों का नंबर लगवा दूंगी


होलिका की आंच बहुत धीमे हो गयी थी कहीं कहीं लपटें उठ रही थी ...और कहीं कहीं अंगारे दमक रहे थे ...
गुड्डी ने मुझे उकसाया ...होलिका की गरम राख के लिए ...


( मान्यता थी की होलिका बुझने के पहले अगर जो सबसे पहले राख निकाल लेता है ...उस राख में कुछ जादुई गुण होते हैं ...टोना टोटका ...और भी बहुत कुछ ...)

अब लोग तो प्रेमिका के लिए आसमान से सितारे तोड़ने की बातें करते हैं ...तो ये तो सिर्फ राख है ...और मैंने अपने हाथों से दो मुट्ठी राख निकाल ली ..और गुड्डी तो गुड्डी थी ...उसने वो पैकेट जिसमें होलिका में डालने वाला सामान लायी सम्हाल कर रखा था ...बस उसी को मेरे सामने खोल दिया और मैंने राख उसमें ..रख दी
...
" थोडा सा और ..." वो सारंग नयनी बोली,और एक ओर इशारा किया ...उधर कुछ छोटी छोटी लकड़ियाँ बस बहुत हलके से जल रही थीं ...

अबकी बार जो मैंने दो मुट्ठी राख निकाली ...तो उसमें दो अधजली लकड़ियाँ भी आगई ...करीब एक बित्ते से थोड़ी ज्यादा लम्बी ..और दो तीन अंगुल मोटी ...

गुड्डी की आँखे तो चमक उठीं ...और उसने राख के साथ उसको भी सम्हाल के रख दिया ..

अब धीमे धीमे होलिका की लपट पूरी बुझ चुकी थी ..बस एक दो लपटें कही कहीं हवा के झोंके के साथ उठती थीं ...

गालियों , जोगीड़े का शोर पूरे जोर पे था ...
तभी लाईट चली गयी ...
मैंने गुड्डी को कस के बांहों में भींच लिया ..


हंगामा अपने पूरे जोर पे था ..बस एक दो लपटें और चौदहवीं के चाँद की रौशनी में बस हल्का हल्का दिख रहा था ...
गुड्डी ने चुन्नी से अपना सर अभी भी अच्छे से ढँक रखा था ...

मेरा एक हाथ उसके नितम्बो पे और दूसरा चिकन के गुलाबी कुर्ती से झांकते उभार पे ...
मैंने उसे हलके से चूम लिया और बोला ,

" तेरी और तेरी सारी मायके वालियों की चूत में , तेरे मर्द का लंड "

" एकदम ..हंस के वो बोली ...बिना नागा ...और मायके वालियों में मेरी सहेलियां भी ..."


तब तक मैंने देखा अँधेरे का फायदा उठाकर औरतों की टोली में ...मस्ती चालू हो गयी थी ..मिश्रायिन भाभी ने तो एक लड़की के ( गुड्डी से भी थोड़ी छोटी रही होगी ) के फ्राक में हाथ डाल के बस अभी उभरते उभार को कच कचा के दबाना शुरू कर दिया था ..तो उनकी एक सहेली ने एक लड़की के टाप में हाथ डाल दिया था ...

होलिका की आखिरी लपट भी बुझ गयी थी ..

( कहा जाता है की अगर आप होलिका माई से कही गयी बातें तभी पूरी होती है ...जब आप होलिका की आखिरी लपट देख कर जायं )
और मुझे लगा की कहीं औरतों के उस गोल में कोई गुड्डी पे ही न हमला बोल दे ... मैं ने गुड्डी को इशारा किया की हम लोग अँधेरे में बाहर निकला आये और हम सीधे बाइक पे ...

और दस मिनट में हमारी बाइक शहर के बाहरी भाग से निकल रही थी ...


" हे ये किधर आ रहे हो ..." गुड्डी ने पीछे से मुझे जोर से दबोचते पुछा .

" मेरी मर्जी ...मेरी दुल्हन है मैं चाहे जहाँ ले जाऊं ..."

और गुड्डी ने और कस के मुझे पीछे से भींच लिया ...उसके किशोर उभार बार बार मेरी पीठ पे रगड़ रहे थे ...और अब हम लोग जिस सडक पे थे वो पूरी तरह सूनसान थी ...बस दोनों ओर गेंहूँ की सुनहली बालें , गन्ने के घने खेत ...और आम के बाग़ ...थोड़े बहुत बादल चाँद से छेड़ खानी कर रहे थे ...

तेज हवा चल रही थी और सडक के दोनों ओर दूर दूर गावों में कहीं होलिका जलने की हलकी सो रौशनी दिखाई देती तो कहीं से होली के मस्त गानों की , चौताल और धमार की आवाज छन छन के आरही थी ...
गुड्डी ने मेरी बात का जवाब मेरे इयर लोबस पे एक हलके से किस से दिया ...

मैंने बाइक की रफ्तार और तेज कर दी ...और बोला ,

" मेरी दुल्हन , जानती हो बहुत सुन्दर सी ,बहुत प्यारी सी है ...खूब मीठी भी ...लेकिन दो महीने में उस बिचारी की बहुत दुर्दशा होने वाली है ...दिन रात ...बिना नागा ..."

और उसके मस्त उभारों ने मेरी बात का जवाब दिया मेरी पीठ पे जोर से रगड़ कर और साथ में उसके बदमाश हाथ ..सीधे बस मेरे जंगबहादुर के ऊपर ...पकड़ा , रगडा , दबा दिया ...और बोली ...

" होने दो ना तुम्हे क्या ...जो उसके दुल्हे को अच्छा लगता है ...वो करेगा ..."
और उसकी इस बात पर मैंने बाइक एक पगडण्डी पे मोड़ दी ...









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