Tuesday, June 9, 2015

FUN-MAZA-MASTI दोस्त की बहन की भरी हुई जवानी

FUN-MAZA-MASTI

 दोस्त की बहन की भरी हुई जवानी

आज मैं आपको अपनी एक दोस्त की बहन की भरी हुई जवानी कहानी सुनाने जा रहा हूँ जो उम्र में ही बराबर २१ साल का ही था लगभग| दोस्तों उसकी बहन हमसे एक साल उम्र में छोटी थी पर दिखने में गजब माल थी और मानो ऐसा लगता था जैसे कोई सुन्दरी जन्नत से उतारकर आई थी | मेरा तो उसकी बहन पर जैसे दिल ही आ चूका था | मैंने एक दिन जब अपने दोस्त के घर पर गया तो पता चला की मेरा दोस्त अपने मान बाप के साथ किसी काम से घर के बहार गया उया था और वो उसकी बहन घर पर अकेली थी | मुझे लगा इससे अच्छा मौका मुझे कभी नहीं मिल सकता और मैंने झटपट उसकी बहन के साथ बातें शुरू कर डाली |
वो मुझसे पहली ही बार में ऐसे बोअत कर रही थी जैसे मुझे बरसों से जानती | उसने अपने सुन्दर बदन पर कुर्ती सलवार चढाई हुई थी जिसे मैं उतारने को बेताब था और तभी मैंने उसकी खूबसूरती की तारीफे करता हुआ उसके करीब जाने की कोशिश करने लगा | अब वो भी कहीं न कैन मेरे इरादों को समझ गयी थी और कामुक मुस्कान धीमी धीमी दे रही थी | मैंने भी जोश में उसकी बांक को पकड़े गुलाबी गाल तक पहुंचा और चूमने लगा | मैंने अब तक उसे अपनी बाहों में दबोच लिया था और उसके चुचों को अपने हाथों में भर लिया | मैंने होठों को चूसते हुए उसकी कुर्ती के अंदर हाथ डालने लगा |
वो कहीं न कहीं शर्मा रही थी पर मैं उसके लचीले बदन के सामने रुकने वाला नहीं था और  मैं उसकी कुर्ती के अंदर उसके चुचों को नंगा कर डाला और फिर उन्हें पीता हुआ दुदेले चुचों का मज़ा ले रहा था | मैंने उसे वहीँ सोफे पर सपाट लिटा डाला और उसकी नीचे उतार उसकी चुत को मसलते हुए गर्म किया | मैंने पलभर में उसकी चुत में ऊँगली अंदर करना चालू कर दिया था और तडप के मारे पगला चुकी थी | मैंने फटाक से अपने लंड को निकाल चुपके से उसकी चुत पर टिकाया और होले – हौले धक्का मारने शुरू कर दिया | वो तडपते हुए उसके चुचों को मसल रही थी और चुदाई से चींखें इससे भर रही थी |
मेरे अंदर अब भरी हुई हवस से दो गुना ज्यादा फुर्ती भर दी थी और मैंने ज़ोरों के धक्के दे रहा था | वो बस अपनी मम्मी को दर्द के मारे पुकार रही थी और मैं उसकी एक तान को पकडे हुए किसी विदेशी छोरे की तरह उसकी चुत को मार रहा था | उसकी चर्बी से भरी हुई जांघें एक दम खून से लथपथ हो चुकी थी और साथ वहीँ उसकी चुत की मलाई भी धीमी धीमी बह रही थी | मैं भी अपनी तन जवानी में झड़ने की सीमा पर पहुँच गया और समझदारी दिखाकर लंड को बहार निकाला और हस्तमैथुन करते हुए मैंने अपने सारे मुठ की फुव्वार उसके बदन पर यूँही छोड़ दी | वो बस अब किसी सडक पर पड़ी रंडी की तरह मुझे देख रही थी और मैंने उसे एक हवाई चुम्मी देकर वहाँ चला आया |

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