Tuesday, July 7, 2015

FUN-MAZA-MASTI फागुन के दिन चार--180

  FUN-MAZA-MASTI

   फागुन के दिन चार--180

 गुड्डी और,… ग्लॉक













लालची मैं, गुड्डी के रैप से झांकते उभारों पे नजर लगा रहा था और मैंने गुड्डी की ही बात दुहरायी ,

" कोई कुछ देर पहले कह रहा था , पन्दरह मिनट में एक क्विकी हो सकती है। "

गुड्डी मुस्कराई और बोली , "आने दो नीचे से तेरे माल को ऊपर , क्विकी लांगी सब करवाउंगी। अबकी अगवाड़ा तेरे हवाले था पिछवाड़ा मेरे , अबकी तुझे पिछवाड़े का मजा चखा दूंगी ,खुश। तब तक वेटिंग वेटिंग कर। जंगबहादुर को बोलो थोड़ा रेस्ट कर लें "

बिचारे जंगबहादुर , कर्मठ , 'काम' को हरदम तत्पर , आॅलरेडी बॉक्सर में कुनमुना रहे थे। उन्हें रेस्ट से क्या मतलब।

और अब गुड्डी ने ज्ञान दिया ," तेरे माल को यही डर था और इसलिए साफ साफ मना कर गयी थी की जब तक वो नहीं लौटती , नो बदमाशी ,नो गडबड " और साथ में वो फोन पे आये मेसेज भी देख रही थी। एक मेसेज उसने तीन चार बार पढ़ा और फिर हुक्म और खबर दोनों सुना दिया,

" भाभी का मेसेज था , वो लोग सुबह जल्दी स्टार्ट करेंगे ७ बजे के पहले पहले और ९ बजे तक यहाँ पहुँच जाएंगे। इसका मतलब की हम अगर पैक अप रहें तो जल्दी , १२ बजे या उसके पहले ही निकल सकते हैं। रंजी सुबह अपने घर पहुँच के सामान अपने पैक कर लेगी तो उसे हम जाते हुए पिक अप कर लेंगे। सुबह ७-८ तक वो भी निकल जायेगी अपने घर के लिए। कोई सामान इस कमरे में तो नहीं छूटा है। "

उलटे मैंने उसे कैच कर लिया , ये पूछकर ,

" तुम चेक कर लो , तुमने कल सारे कैमरे वैमरे लगा रखे थे."

" उसका काम कल खत्म होगया , तेरे माल के उद्घाटन की मस्त सीडी बन गयी। अब बनारस की हीरोइन हो जायेगी , और इसलिए सारे कैमरे मैंने सुबह ही हटा दिए थे। आज का सारा खेल तमाशा आफ रिकार्ड है। " गुड्डी ने हँसते हुए जवाब दिया।

फिर बोली , एक बार सब ड्राअर चेक कर लेते हैं और इन खिलोनो के अलावा उन का भी सब सामान वापस कर लेते हैं। "

मैंने बहुत श्योर हो के बोला मेरा तो कुछ नहीं है लेकिन चाहो तो चेक कर लेते हैं।

गुड्डी सब ड्राअर चेक कर रही थी और ,अचानक एक सामान निकाल कर उसने दिखाया और पुछा ,

" और ये , और ये किसका है। "
मेरी तो जान सूख गयी गयी।

ये , यहाँ कैसे , मैंने तो बहुत सम्हालकर , … लेकिन था तो मेरा ही। और गुड्डी के आगे झूठ बोलने का तो सोच ही नहीं सकते।

" वो ,… असल में , …मेरा ही है , … लेकिन लगता है कल किसी सामान के साथ , अभी रख देता हूँ। " मैंने जुर्म का इकबाल किया।

गुड्डी के हाथों में मेरी ग्लॉक थी।

ग्लाक 19 जेन 4 . 

दुनिया की सबसे पॉपुलर हैंडगन्स में से एक।

और किसी के भी हाथ में तुरंत अड्जस्ट हो जाने वाली , उसका रफ टेक्स्चर ग्रिप बहुत स्ट्रांग कर देता है , चाहे पहली बार इस्तेमाल करने वाला हो या प्रोफेशनल , हैंडगन में गृप बहुत जरूरी चीज होती है। इसके हल्के वजन, स्लिम स्ट्रक्चर और छोटी साइज की वजह से ये कन्सील्ड वेपन की तरह आसानी से इस्तेमाल की जा सकती थी।

इसलिए मैं इसे रखता था।

और इसमें मैंने बहुत सी चीजें और लगा रखीं जैसे ट्रीजिकान एच डी नाइट साइट्स। इसके साथ साथ ट्राइटियम लैम्प्स अँधेरी रात में भी निशाना लगाने में मदद करते है।

लेकिन सबसे ख़ास बात ये थी की ,अपनी साइज की वजह से ये लेडीज गन की तरह से भी इस्तेमाल होती है क्योंकि पर्स में ये आसानी से आ जाती है।

और बस इसी चक्कर में मुझे डांट पड़ गयी।



" रीत के पास यही वाली है न " ग्लाक को घुमा के देखते गुड्डी ने पूछा।

" हाँ ये लेडीज गन है ," मेरे मुंह से निकलना था की मेरी मुसीबत हो गयी।


" ये तुम्हे लेडीज चीजें क्यों पसंद है ,कुछ गडबड लगता है मुझे। "

मुड़ के मेरी नाक पकड़ के वो बोली।

" नहीं नहीं ऐसा कुछ नहीं , असल में " मैं डिफेंड करने की कोशिश की लेकिन , गुड्डी के आगे,… "

" नहीं नहीं क्या , साल्ले , झूठे , भोंसड़ी के मैं शुरू से देख रही हूँ अभी तूने बोला था न लेडीज गन "


,गुड्डी अब अपने बनारसी और मेरे ससुराली अवतार में आ गयी थी , गालीमय रूप में , और फिर बारिश पूरी तेजी से चालू हो गयी।

" अब हो सकता है तेरी पसंद ही ऐसे हो बचपन से आदत लग गयी हो , बोल ये भी झूठ है की चंदा भाभी के नीचे के बाल साफ करने वाली क्रीम तूने अपने गाल में लथड़ लथड़ के पोती थी और ढाढ़ी के साथ अपनी मर्दानगी का झंडा भी साफ कर लिया था , बन गए थे चिकनी चमेली। बोलो बोलो ,तेरी बहन की ,..."

बात सच थी लेकिन अब ये कौन बोले की गुड्डी ने खुद मुझे चंदा भाभी की हेयर रिमूविंग क्रीम इम्पोर्टेड शेविंग क्रीम कह के मेरे पूरे चेहरे पे लगाई थी , और मेरी आँखे भी बंद करवा रखी थीं।

गुड्डी की अदालत में दूसरा चार्ज भी लग गया ,

" और उस के भी पहले रात में चंदा भाभी की साडी पहन के सोये थे , तुझे लड़कियों के कपडे पहनने का शौक है। चल यार है तो है अब ससुराल पहुंचना न , बनारस में , मेरे गाँव में तो बस करवा दूंगी इंतजाम। लेकिन कबूल करो , शर्माते क्यों हो , तेरी बहनें तो पूरे मुहल्ले में बाँटते नहीं शर्माती , तू ही लौंडिया स्टाइल शर्मा रहे हो। "

और इस बार भी गुड्डी से ये कौन कहे की उसने मुझे वापस नहीं जाने दिया था , मेरे कपडे ले उड़ी थी और मजबूरन मैंने साड़ी लुंगी की तरह पहनी थी , वो भी बस थोड़ी देर। उसके बाद तो चंदा भाभी की पाठशाला में ककहरा सिखने लग गया था।


गुड्डी के हमले चालु थे। अभियोग पक्ष की ओर से उसने अगला चार्ज पेश किया ,

"चलो , तुम कहोगे तुम्हारे पास कोई कपड़ा सोने के लिए नहीं था इसलिए भाभी की साड़ी उधार ले ली। लेकिन अगले दिन , गूंजा का बरमूडा वो भी पहनने का शौक तुम्हे चर्राया था।

मेरे तो कुछ समझ में नहीं आता वैसे तो तुम ठीक ठाक लगते हो लेकिन ,और उस दिन छत पर , रीत, दूबे भाभी सब गवाह हैं कैसे , साडी ब्लाउज पहनकर मटक रहे थे। "

मैं चुप का चुप। कौन कहे , होली में चंदा भाभी , दूबे भाभी , रीत , गुड्डी और साथ में संध्या भाभी भी। मैं अकेले द्रौपदी की तरह और वो पांच। बस उनकी मर्जी चली।

और जवाब गुड्डी ने ही फिर दिया ,

" चलो मान लिया ससुराल में थे , साली ,सलहज। लेकिन अपने मायके में , अपनी बहनों के सामने , ऐन होली के दिन , सिर्पफ साडी साया ब्लाउज ही नहीं पहना , पूरे मुहल्ले में चक्कर भी काटा। मेरे पास सारे फोटोग्राफ मौजूद हैं और तेरे फेसबुक पे पोस्ट भी करुँगी जानू। "

मेरी कुछ समझ में नहीं आ रहा था की गुड्डी ने हमले की धार और तेजी कर दी।

" अब मेरी समझ में आगया है ,तेरी सास हैं चाभी। जब तुम ससुराल में रहोगे ने ,बल्कि शादी के पहले भी तो आओगे न तो बस और आखिर दामाद की पसंद तो बिचारे ससुराल वालों को पूरी ही करनी पड़ती है तो बस मांग लेना , खोलकर। " वो दुष्ट बोली।

" क्या मांग लूंगा यार , पहेली क्यों बुझा रही हो " मैंने झुंझला के पुछा।

" अरे यार सिंपल , अपनी सास से कहना तेरे लिए बाजार से कुछ अच्छी ब्रा पैंटी खरीदवा देंगी। रूपा साफ्टलाइन चलेगी या कोई और फैंसी , अब बनारस में जो मिलेगी वही तो दिलवाएंगी बिचारी। "

"लेकिन ब्रा पैंटी क्यों " मैंने पूछा।

" सिम्पल यार तेरे को लड़कियों का सामान इस्तेमाल करने का शौक है अब देख ये लेडीज गन लटका के टहलने का शौक है तुझे , लड़कियों के कपडे पहनते हो मौका मिलते ही। तो फिर अब ब्रा पैंटी तो तुझे किसी और के नाप के आएँगी नहीं . फिर बाकी चीजें टाइट ढीली चलती है , ब्रा और पैंटी लेकिन एकदम फिटमफिट होनी चाहिए , आखिर शेप साइज तो उसी से पता चलता है।

पक्का न फिर मम्मी से क्या शरमाना। "

मेरी कुछ भी नहीं समझ में आ रहा था मैं क्या बोलूं इसलिए बात गुड्डी ने ही जारी रखी।

" अरे यार समझा कर , तेरी इस गोरी लचकीली देह पे साडी ब्लाउज बहुत जमेगा। अब साडी तू अपनी सास की पहन लेना , चंदा भाभी की साडी तो पहले ही पहन चुके हो वो मना थोड़े ही करेंगी। रही बात ब्लाउज की , वो भी टांक टूंक के री फिट करके मैं या मम्मी तेरे नाप की कर देंगे ,लेकिन ब्रा तो सही चाहिए न। तो बोल देना , खरीद देंगी।

सिगरा वाले मॉल से लेके गोदौलिया और मैदागिन तक उनकी बहुत जान पहचान है। और आप जाओगे तो फिटिंग रूम में जो सेल्स गर्ल हैं न , बस अपने हाथ से नाप नाप के एकदम सही साइज की दिलवाएंगी। "

मेरी कुछ समझ में नहीं आ रहा था बात का ट्रैक कैसे बदलूं।

गुड्डी खिंचाई मेरी कर रही थी लेकिन निगाह उसकी बार बार ग्लाक पे जा रही थी। हाथ में पकड़ के कभी वो उसे सहलाती तो कभी उसे ठीक से पकड़ने की कोशिश करती ,तो कभी जैसे निशाना साध रही हो।

मैंने। पेंच पकड़ ली

" चलाना सीखोगी। " मैंने पूछा।

" क्यों नहीं , आखिर रीत चला सकती है तो थोड़ा बहुत मैं भी सीख सकती हूँ ," ठसके से वो बोली।

तो असली बात ये थी लेकिन मैंने तुरंत ५०० ग्राम मस्का मारा ,

" अरे यार तुम तो अंखियो से गोली मारे टाइप बनारसी बाला हो , आँखे कटार ,जुबना बरछी की धार , तुझे बन्दुक पिस्तौल की क्या जरूरत " और ये कहते हुए मैंने हलके से उसके खड़े ,टाइट निपल दबा दिया।

वो मुस्कराई एकदम हंसी तो फँसी वाले अंदाज में , फिर बोली ,"सीधे से सीखा दो , वरना जो नीचे से बुलबुल आएगी न अभी , तड़पा दूंगी उसके लिए। "


और मैं तुरंत चालू हो गया , ग्लाक के बारे में , उसकी तारीफ ,अंग्रेजी में

The GLOCK 19, gen 4 weighs in at 23.65 ounces, and has a 4.02 inch barrel, with a trigger pull of approximately 5.5 lbs. The magazines (you get three of them) each hold 15 rounds of 9mm.

The trigger is what GLOCK calls the Safe Action Trigger — it has a little lever in the center of the trigger, and you can’t fire the gun until your finger is on the trigger. There are also several internal safeties as well, The sights have a white dot front polymer, and the rear is also polymer, except it has a “U” shape and it is very fast to pick-up. GLOCK 19 Gen 4 9mm handgun, and it is probably the best generation to date. It comes with 4 back straps, two for making the grip a bit thicker or bulkier, and two also extend the tang a bit.

गुड्डी जोर जोर से बहुत देर तक खिलखिलाती रही , फिर रुक के बोली ,

"तुम पक्के सेल्समैन लग रहे हो। अरे बेचने का इतना शौक है न तो जो तेरी बहिनिया कम माल है , अभी आएगी नीचे से , उसे बेचो न। बहुत नगदी मिलेगी। हजारों का तो सिर्फ उसके जुबना का दाम लग जाएगा।

अरे मुझे खरीदना नही है , सिर्फ जानना है कैसे चलाते हैं। सीधे से समझाओ वरना रात भर बैठ के तड़पना , हाथ न लगाने दूंगी उस बुलबुल को। और वैसे भी कल तेरे भैया भाभी आ जाएंगे। और उसके बाद बनारस , वहां तो आगे से ही उसकी बुकिंग है बस तुम देखते रहना और गिनते रहना , कितने पार उतरेंगे उसकी तलैया में। सिखाओ ,"

कोई रास्ता बचा नहीं था।  


गुड्डी और,… ट्रेनिंग



पहले मैंने उसे ग्लाक १९ जेन ४ केबारे में बताया ,बैरेल ४ इंच की , पूरी पिस्टल 7. 2 इंच की ,

लेकिन गुड्डी भी न , वो मेरे ठीक आगे खड़ी थी ,ग्लाक मेरे हाथ में थी। उसने पीछे हाथ बढ़ा के मेरे बॉक्सर शार्ट के ऊपर से तने तम्बू को जोर से दबाया , और खिलखिलाते बोली ,

" यार मेरी वाली पिस्टल तो तेरी ग्लाक से भी बड़ी है। और जोरदार भी, खैर चलो आगे बताओ। "

और मैंने फिर उसको एक एक पार्ट के बारे में बताना शुरू किया , ट्रिगर, साइट ,कैसे पकड़ते हैं। " और गुड्डी फिर चालु हो गयी बॉक्सर के ऊपर से दबा के बोली ,

" अपनी उस छिनार को समझाना कैसे पकड़ते है , वैसे भले सील तुमने खोली हो , लेकिन पकड़ने में उसकी प्रैक्टिस पुरानी है। कित्ते मोहल्ले वाले का उसने पकड़ा और कितनो से उसने अपना पकड़वाया , उसकी गिनती उसके पास भी नहीं है। "

गुड्डी की हरकतों और बातों से बचने का मेरे पास एक ही रास्ता था ,

मैंने उसे ग्लाक पकड़ा दी और बोला दोनों हाथो से पकड़ो। सही ग्रिप , सही स्टांस, हाथ की पोजीशन सारी बातें और साथ में कैसे दूसरे हाथ से पकड़ कर पिस्टल को एकदम स्टीडी पोजीशन में रखें।

दो चार बार की कोशिश के बाद उसने ग्रिप और स्टांस सीख लिया।मैंने पहले ही चेक कर लिया था की पिस्टल अनलोडेड है। उसकी मैगजीन बगल में रखी थी।
गुड्डी ट्रिगर दबाने के लिए बेताब थी , लेकिन मैंने कहा की पहले पकड़ना अच्छी तरह सीख लो , फिर दबाना सीखना।

इस डबल मीनिंग डायलाग का उस पर कोई असर नहीं हुआ , इसका मतलब वो बड़ी तल्लीनता से ध्यान लगा कर प्रैक्टिस कर रही थी।

ट्रिगर पकड़ना , उसपर कैसे प्रेशर बनाये अब मैंने ये समझाया। दो चार बार उसने प्रैक्टिस की लेकिन उसका ध्यान नाइट साइट्स की ओर गया , और बच्चों की तरह पूछ बैठी , ये क्या है।

मैंने ट्रीजिकान हाई डिफिनशन नाइट साइट्स के बारे में उसे समझाया और ये भी की कैसे बहुत कम रोशनी में ये निशाना सेट करने में मदद करती है।

लेकिन सबसे कठिन था मैं उसे निशाना क्या बताऊँ ?

हम लोग भाभी के कमरे में थे जो छत पर , पहली मंजिल पे था और अकेला कमरा। बाहर बड़ी खुली छत थी। एक बड़ी सी खुली खिड़की थी , जिससे फगुनाहट वाली हवा आ रही थी।

और वहां से एक बड़ा सा आम का पेड़ भी दिख रहा था , जिसकी डालें हमारी छत पर आलमोस्ट झुक जाती थी। आम के बौर से भरा ,रात की मस्ती से भरा वो भी झूम रहा था। लेकिन उसकी छाया में थोड़ा अँधेरा था और नाइट साइट के लिए वो परफेक्ट था।

कमरे से मुश्किल से १५-२० गज की दूरी पे।

और उस के ठीक नीचे छत की पैरापेट वाल थी , बहुत ऊँची नहीं करीब ४-५ फीट।

उसपर रंग जगह जगह उखड गया था और तरह तरह के शेप बन गए थे।


बस गुड्डी को मैंने वो समझाया और कहा की उसे १,२,३, नंबर मान ले।

फिर उसे फ्रंट सीट , रियर साइट और टारगेट कैसे मैच कराएं ये बताया।

गुड्डी भी , गुड्डी क्या कोई भी लड़की काम निकलने के बाद टाटा बाई बाई कर देती है।


गुड्डी ने यही किया , बोली अच्छा अब पांच मिनट तक मुझे डिस्टर्ब न करो , मुझे ट्राई करने दो।


कुछ देर तक मैं गुड्डी को देखता रहा , एकदम सीखने में परफेक्ट थी।

हर बार वो करेक्ट स्टांस लेती , दोनों हाथों को एकदम स्ट्रेट कर के बाएं हाथ का पूरा सपोर्ट और फिर फ्रंट साइट पर पूरा फोकस करती। जब फ्रंट साइट रियर साईट केबीच में होती , वो ट्रिगर दबा देती। इस पूरे काम में उसे १० से १५ सेकेण्ड लग रहा था और धीरे धीरे वो ज्यादा कॉन्फिडेंट लग रही थी।


मुझे लगा की अगर मैं उसे ज्यादा देखूंगा तो वो डिस्ट्रैक्ट हो जायेगी। और मैंने अपने फोन की ओर ध्यान लगाया।

ऊप्स शाम के बाद मैंने फोन देखा ही नहीं , गुड्डी और रंजी को देखने से फुरसत हो तब न।

५-६ मेसेज थे ,सब बनारस से। कार्लोस और फेलू दा के।
सब में एक ही बात थी , मैं कैसा हूँ।

सब ठीक है , कोई परेशानी तो नहीं।

अब उन लोगों को मैं क्या बताता की मैं रंजी और गुड्डी के साथ क्या मस्ती कर रहा हूँ।

फेलू दा को मैंने मेसज किया की मैं एकदम ठीक हूँ और कल दोपहर तक बनारस पहुँच रहा हूँ और शाम को उनसे मिलूंगा।

कार्लोस को भी मैंने बताया की मैं कल बनारस पहुँच रहा हूँ। लेकिन रंजी की मॉडलिंग सक्सेस में उनका महत्वपूर्ण हाथ था , इसलिए उन्हें रंजी के सेलेक्शन और बनारस में होनेवाले शूट के बारे में भी डिटेल में बताया।


मेसेज लिखने के दौरान मैं बीच बीच में गुड्डी को देख रहा था।

गजब की तल्लीनता दिखा रही थी और अब स्टांस लेने से साइट सेट करने और ट्रिगर दबाने के बीच का टाइम ५-७ सेकेण्ड रह गया था।


कहते है जवान होती लड़कियों की एड़ी में भी आँखे उग जाती है , और जवानी तो गुड्डी पे शिद्दत से आई थी।

जैसे ही मेसेज कर के मैंने अपना फोन बंद किया , निशाना लगाते लगाते ही उसने अगला हुक्म सूना दिया ,

मैं उसकी और रंजी की स्टेटस फेसबुक पे अपडेट कर दूँ। शाम से अपडेट नहीं हुयी है।

और मैं उस काम में लग गया।

लेकिन थोड़ी देर बाद गुड्डी का दूसरा फरमान जारी हो गया ,

" हे ये तो बताओ लोड कैसे करते हैं। "

और जब मैं गुड्डी के पास पहुंचा तो मुझे याद आया एक और जरूरी बात तो मैंने उसे बताई ही नहीं थी।

किसी आदमी पर किस जगह निशाना लगाया जाय। बुलेट प्लेसमेंट , बुलेट से ज्यादा महत्वपूर्ण है।

मैंने गुड्डी को समझाया की वो मान ले की सामने कोई आदमी है , तो सबसे ज्यादा बड़ी जगह जो निशाने के लिए अविलेबल है वो है उसका सीना , डायफ्राम से लेकर गले तक का हिस्सा। उसमें अगर वो एक डोम शेप ११X ७ इंच का टारगेट मान ले तो जितने वायटल पार्ट्स हैं वो वहीँ होंगे। दूसरा पार्ट है उसका सर , लेकिन वो एक छोटा हिस्सा है , ज्यादा मोबाइल है और उसपर निशाना लगाना थोड़ा कठिन है , लेकिन फिर भी अगर टारगेट नजदीक आ रहा है तो वहां पर भी टारगेट लगा सकते हैं।

गुड्डी ने ५-६ सवाल किये और सारे सही थे।
और थोड़ी देर उसने फिर खाली पिस्टल ले वो भी ट्राई किया और अगला सवाल दाग दिया ,

' पिस्टल लोड कैसे करते हैं। '

मुझे ये भी समझाना पड़ा।

बार बार मैं ये सोच रहा था रंजी आ जाय तो मेरे पिस्टल का इस्तेमाल शुरू हो और इस खुरपेंच से गुड्डी का पीछा छूटे।

लेकिन पता नहीं कैसे मेरे दिल की बात मुझसे पहले गुड्डी को मालूम हो जाती थी
( गुड्डी को बोलता तो वो बोलती ,सिम्पल। क्योंकि तेरा दिल मेरे पास है और बात उसकी सही भी थी।

और एक मिनट ग्लाक से ध्यान हटा के गुड्डी बोली ,

" अरे यार तेरी पिस्टल के आगे इस में मैं सिर्फ तेरी उस कमीनी ,छिनार , मोहल्ला चोद माल के चक्कर में फँसी हूँ। साल्ली , मेरे सारे गाँव वाले उस हरामिन की गांडमारे , मुझे कसम धरा के गयी है की जब तक वो लौटती नहीं है तो बस कोई गड़बड़ बात मैं सोच भी नहीं सकती , करने का तो सवाल है नहीं। "

" लेकिन रह कहाँ गयी वो उस का टाइम तो खत्म हो गया। " मैं भी झुंझला के बोला।

" तो जरा जा के देख न नीचे , किससे मरवा रही है वो। यार यहाँ बिचारा उसका तड़प रहा है। और हाँ जरा कुछ नीचे से खाने का भी सामान मिल जाय तो ले आना। कुछ नहीं हो तो अपनी झटपट सैंडविच ही बना लाना। तेरे माल की सैंडविच बनाने के चक्कर में शाम का सब कुछ खाया पिया पच गया। " गुड्डी ने समझाया।


और झटपट मैं सीढ़ियों से नीचे उत्तर गया।










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