Tuesday, July 28, 2015

FUN-MAZA-MASTI रात की ड्यूटी

FUN-MAZA-MASTI

रात की ड्यूटी

मैं दिल्ली का रहने वाला हूँ।
मैं आपको अपनी दो साल पहले की आप बीती बता रहा हूँ।
बात उन दिनों की है जब मैं १२ वीं कक्षा में पढ़ रहा था। मेरे पड़ोस वाले घर में एक नया जोड़ा आया था जिनकी शादी को लगभग २ महीने ही हुए थे। जब मैंने उस औरत को देखा तो मेरे होश ही उड़ गए। वो एक परी के जैसी थी, वो बहुत सुंदर थी और गोरी भी थी मानो ऐसी कि अगर छू लो तो मैली हो जाए, और उसके स्तन बहुत मोटे थे जैसे कि फुटबॉल। जब वो चलती थी तो उसकी गांड को देख कर लण्ड कच्छा फाड़ने को हो जाता था। मैंने जिस दिन से उसे देखा, उसी दिन से मैं उसे चोदने की तरकीब सोचने लगा और उससे बातें करने की कोशिश करने लगा।
जब मैंने उससे थोड़ा मेल जोल बढ़ाया तो मुझे पता लगा कि उसके पति की रात की जॉब है, य़ानि वो रात में अकेली होती है। अब मैं उससे मिलने का बहाना ढूंढने लगा। तभी मेरे मन में ख्याल आया कि क्यों ना उससे कुछ मांगने के बहाने मिला जाये।
मुझे अचानक याद आया कि मुझे अपने प्रिंटर की शिकायत करनी है इसके लिए एम टी एन एल फ़ोन से एच पी सर्विस सेण्टर पर फ्री बात होती है और मेरे घर में एम टी एन एल फ़ोन नहीं है। इसलिए मैं फ़ोन के बहाने उसके घर गया और मैंने रात के आठ बजे उसकी दरवाजे की घंटी बजा दी क्योंकि मैंने पता लगा लिया था कि उसका पति शाम ७ बजे घर से निकल जाता है।
घंटी बजाते ही उसने दरवाजा खोला और बोली- अरे आप ? बोलिए कैसे आना हुआ ?
मैंने कहा- आपके घर में एम टी एन एल फ़ोन है?
उसने कहा- है !
मैंने कहा मेरा प्रिंटर ख़राब हो गया है, इसलिए मुझे उसकी शिकायत सर्विस सेण्टर पर करनी है, एम टी एन एल फ़ोन से कॉल मुफ्त है, यदि मैं अपने फ़ोन से कॉल करता हूँ तो बहुत पैसे लगते हैं।
उसने कहा- आप बैठ कर कॉल करो, मैं आपके लिए चाय बना कर लती हूँ।
उस समय वो क्रीम रंग की नाईटी पहने हुई थी जिसमें से उसके स्तन क़यामत ढा रहे थे, जिनको देख कर मेरी ऑंखें फटी की फटी रह गयी, मेरी कॉल पर बात चल ही रही थी कि वो चाय ले कर आई और उसने चाय सामने पड़ी मेज़ पर रखी तो मुझे उसके स्तनों के दर्शन साफ़ ढंग से हुए, जिनको देख कर मैं बेचैन हो गया और वो सामने पड़े सोफे पर बैठ गई।
उस समय मेरे दिमाग में यह योजना चल रही थी कि कहाँ से बात शुरू करूँ !
जैसे ही मैंने चाय का पहला घूँट पिया वो बोली कि मैं बिस्कुट लाना तो भूल ही गई और वो बिस्कुट लेने के लिए उठी और रसोई की तरफ जाने लगी। तब मैंने उसकी गांड देखी तो मेरा लंड काबू से बाहर हो गया। जब वो रसोई में गई तो मैंने उसका ख्याल लाकर मुठ्ठी मरना शुरू कर दिया। अचानक उसके पैरों की आहट सुन कर मैंने अपना लंड पैंट में डाल लिया, लेकिन लंड पूरे जोश में खड़ा था।
तभी उसने बिस्कुट मेरे सामने रखे तो वो अचानक भांप गई कि मैं कुछ कर रहा था क्योंकि उसकी नज़र ने मेरे लंड को पैंट में खड़ा देख लिया और मैं हांफ भी रहा था। मुझे लगा वो समझ चुकी है कि मैं मुठ मार रहा था क्योंकि उसके चेहरे के भाव ही कुछ ऐसे थे।
तभी मैंने अपने मन को शांत किया और अपने मन को कहा- साले एक दिन में औरत काबू होकर नहीं चुदती, उसके लिए औरत को समय देना जरुरी है।
तो मैंने सोचा कि पहले इससे दोस्ती करनी होगी। तभी मैं बोला- भाभी जी ! आप क्रीम रंग की नाईटी में बहुत अच्छी लग रही हैं !
उसने मुझे इसके लिए धन्यवाद कहा और हम दोनों बातें करने लगे। बात करते करते रात के १० बज गए, तभी मैंने कहा- भाभी जी मुझे अब घर जाना होगा !
भाभी बोली- थोड़ी देर और रुक जाओ ना ! तुम चले जाओगे तो मैं अकेली हो जाऊंगी, प्लीज़ थोडी देर और !
मैंने कहा- भाभी मेरी सुबह परीक्षा है।
भाभी बोली- किस चीज़ की?
मैंने कहा- फिजिकल एजूकेशन की, और मुझे घर जा कर पढ़ना है।
भाभी बोली- मेरे १२ कक्षा में फिजिकल एजूकेशन में ८०% नंबर आए थे, मैं तुम्हें पढ़ा देती हूँ। चलो पूछो- क्या पूछना है? तुम्हारे सारे प्रश्नों का मेरे पास उत्तर है।
मैं खुश हो गया और मैंने प्रश्न किया- लड़कियों की माहवारी कितने दिन बाद आती है?
उसने कहा- २० से ३० दिन के बाद ! और लेट भी हो सकती है, या जल्दी भी आ सकती है।
जैसे ही उसने बताया तो मैं शरमाने लगा !
उसने कहा- शरमाओ मत, पूछो ! जो मन में है !
उसने मेरा होंसला बढाया। तब मैंने पूछा- लड़कियों की चूत पर बाल कितनी उम्र में आते हैं और सम्भोग करते समय लड़कियों के साथ क्या किया जाये कि वो अत्यंत आनंद ले सकें !
भाभी थोड़ी सी हंसी, फ़िर बोली- तुम्हारे प्रश्न तो बड़े टेढ़े हैं पर मैं पीछे नहीं हटने वाली !
मैं समझ गया कि उसके मन में कुछ चल रहा है।
भाभी बोली- चलो, बेडरूम में चल कर पढ़ते हैं।
और हम दोनों बेडरूम में चले गए।उसने कहा- चलो अब बताती हूँ कि लड़कियों की चूत पर बाल कब आते हैं। लड़कियों की चूत पर बाल 12 से 14 साल की उम्र में आते हैं। दूसरी बात- तुमने पूछा था कि लड़कियों के साथ कैसे सम्भोग किया जाए कि वो परम आनन्द ले सकें।
तो इसे समझाने के लिय तो तुम्हें कुछ प्रैक्टीकल करना होगा।
मैं उसका मतलब समझ चुका था।
मैंने कहा- क्या प्रैक्टीकल?
उसने कहा- मुझे यह समझाने के लिए अपना कुछ दिखाना पड़ेगा।
मैंने कहा- दिखा दीजिए।
उसने कहा- डरोगे तो नहीं?
मैंने कहा- मैं कभी नहीं डरता हूँ, मैं पढ़ाई के लिए कुछ भी कर सकता हूँ।
तभी भाभी ने अपनी नाईटी उतार दी। वो अब एक पारदर्शी चड्डी और ब्रा में थी।
मैंने कहा- यह क्या कर रही हो?
उसने कहा- तुम्हें प्रैक्टिस से पढ़ा रही हूँ।
मेरा लण्ड तन गया था। अब वो मेरे पास आई और उसने मुझसे अपनी कच्छी और ब्रा उतारने को कहा।मैंने वैसा ही किया, उसकी कच्छी और ब्रा उतार दी। उसकी चिकनी चूत देख कर मेरे लौड़े में आग लग गई। अब मैं रुक नहीं पा रहा था। उसने मेरे खड़े लौड़े को पैन्ट में से ही भाम्प लिया।
मैं एकदम डरा हुआ था।
तभी वो बोली- अब क्या हुआ? पहले तो नाईटी में से मेरी गाण्ड देख कर मुट्ठ मार रहे थे। अब लण्ड खड़ा नहीं हो रहा क्या?
मैं चकित रह गया कि उसने मुझे मुट्ठ मारते देख लिया था। तभी उसने मेरे लण्ड पर अपना हाथ रख दिया और उससे खेलने लगी।
मेरे जोश के सागर में उफ़ान आने लगा। तभी उसने मेरी ज़िप खोल कर मेरा लण्ड अपने मुँह में ले लिया और लॉलीपोप की तरह चूसने लगी। अब मैं भी खुल गया। मैंने उसके स्तन दबाने शुरु कर दिए। वो भी अब जोश में आ गई थी।
तभी उसने मुझे उसकी चूत को चौड़ा करने के लिए कहा।
मैंने चूत के दोनों ओर हाथ लगाया और उसकी चूत को खोल कर चौड़ा कर दिया।
उसने मुझे बताया- अगर मर्द अपने लण्ड की रगड़ औरत की गुठली पर मारता है तो औरत परम आनन्द प्राप्त करती है।
तो मैंने कहा- आप अभी यह आनन्द प्राप्त करना चाह्ती हो?
उसने हंसते हुए कहा- इसके लिए तो इतने पापड़ बेले हैं। चल मादरचोद ! मुझे चोद अब !
अब वो एकदम नंगी होकर बेड पर अपनी टांगें फ़ैला कर लेट गई और कहने लगी- आ जा ! चोद दे मुझे ! चोद डाल !
ऐसा कहते हुए वो अपनी चूत की गुठली को अपन्ने हाथ से रगड़ रही थी।
वो एक बार फ़िर से बोली- चोद दो मुझे !
मैंने इतनी चिकनी चूत पहली बार देखी थी और यह मेरा चूत चोदने का पहला मौका था।
मैंने अपना खड़ा लण्ड उसकी चूत पर रखा और एक तेज़ धक्का दिया, मेरा पूरा लण्ड उसकी चूत में घुस गया।
वो चिल्ला पड़ी, बोली- आराम से डाल मादरचोद ! क्या मेरी चूत फ़ाड़ डालेगा !
मैंने मज़ाक में कहा- हाँ !
उसने कहा- तो देर क्यों लगा रहा है? फ़ाड़ दे चोद चोद कर !
अब मैंने धक्के लगाने शुरु कर दिए।
उसने मुझे कस कर पकड़ लिया और मैंने भी। कुछ देर में हम दोनों की सांसें बढ़ने लगी।
उसने कहा- तेज़ तेज़ चोद !
मैं समझ गया कि वो झड़ने वाली है। मैंने तेज़ तेज़ धक्के लगाए।
वो ' हाँ हाँ चोद और चोद ! जोर से चोद दे ! और तेज़ ! तेज़ ! ' कहती हुई झड़ गई।
उसके बाद मैं भी झड़ गया। हम दोनों ने एक दूसरे को गले लगाया और मैं अपने कपड़े पहन कर अपने घर आ गया।
अब जब भी उसका पति रात की ड्यूटी करता है तो मैं उसके साथ रात की ड्यूटी करता हूँ।

 

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