Wednesday, December 15, 2010

कामुक-कहानियाँ-खेल खिलाड़ी का पार्ट--3



खेल खिलाड़ी का पार्ट--3

गतान्क से आगे..............
शख्स की मुस्कुराहट हल्की हो गयी थी मगर निगाहो का पैनापन वैसा ही था.दिव्या उनमे अपनी खूबसूरती की तारीफ सॉफ देख रही थी मगर कुच्छ और भी था उसके अलावा जिसे वो समझ नही पा रही थी.तभी उस इंसान ने इशारा किया कि वो पहले बैठे तो दोनो की नज़रो की डोर टूटी & दिव्या 1 सोफे पे बैठ गयी.

"प्रोफेसर,ये एसीपी दिव्या माथुर है."

"ओह..तो आप ही हैं जिनकी तारीफो के पुल मेरे दोस्त ने फोन पे बाँधे थे."

"हां..अरे 8 से उपर हो गया.दोस्त,पहले ज़रा ये देख लें फिर काम की बाते करेंगे?"

"ओके."

"दिव्या,तुम्हे जाने की जल्दी तो नही?"

"नो,सर.",जल्दी तो उसे थी,अजीत के आने की खबर सुनके वो थोड़ा परेशान हो गई थी & उस परेशानी को मिटाने के लिए उसने सोचा था कि घर जाके अपने बाथटब के गुनगुने पानी मे बैठेगी मगर अपने सीनियर अफ़सर की बात वो टाल नही सकती थी & फिर उसे इस शख्स के बारे मे जानने की उत्सुकता भी हो गयी थी.

"गुड.",वेर्मा साहब ने रिमोट उठा के टीवी ऑन किया,"..आज जसजीत प्रधान आने वाले चुनाव के लिए अपना कॅंपेन शुरू करने वाला है.",वो नाम सुनते ही दिव्या & प्रोफेसर की आँखे भी टीवी स्क्रीन से चिपक गयी.

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डेवाले राज्य की राजधानी थी & वाहा की सियासत का केन्द्र.4 महीनो मे राज्य की असेंब्ली के चुनाव होने वाले थे & उसके लिए सभी सियासी पार्टियो मे गहमा-गहमी शुरू हो गयी थी.वॉरेन रोड का इलाक़ा जहा कि लगभग सभी पार्टियो के दफ़्तर थे चुनाव के टिकेट की आस मे बैठे लोगो से भरने लगा था मगर कुच्छ ऐसे भी खुशनसीब थे जिन्हे उन लोगो की तरह वॉरेन रोड के दफ़्तरो के चक्कर नही लगाने पड़ते थे.ये वो लोग थे जिनकी जीत लगभग पक्की मानी जाती थी.

उन्ही मे से 1 इंसान था जसजीत प्रधान,जनहित पार्टी का डेवाले की डेवाले सेंट्रल सीट का एमएलए.पिच्छली 2 बार से उसने इस सीट से चुनाव जीता था.प्रधान 1 ईमानदार आदमी था.सियासत मे ऐसे लोगो की शायद कोई जगह नही मगर जसजीत इस नियम का अपवाद था.उसकी पार्टी अभी सत्ता मे थी & पिच्छले 3 सालो से वो मंत्री भी था मगर अभी तक उसका नाम किसी भी घोटाले या स्कॅंडल मे नही आया था.ज़्यादातर लोग उसकी बड़ी इज़्ज़त करते थे & उनका मानना था कि अब वक़्त आ गया है कि जसजीत प्रधान को बड़ी ज़िम्मेदारी सौंपी जाए जैसे कि राज्य के मुख्यमंत्री की.

मौजूदा मुख्यमंत्री को ये बात बिल्कुल भी अच्छी नही लगी थी लेकिन 1 तो जनता की पसंद उपर से जनहित पार्टी के हाइ कमॅंड का भी यही मानना था की ऐसे लोकप्रिया नेता को आगे लाना ही चाहिए.तो आज दुस्सेहरा मैदान,जहा डेवाले की लगभग हर बड़ी रॅली या फिर जलसा होता था,खचाखच भरा था,उन लोगो की भीड़ से जो अपने मनपसंद नेता को सुनना,देखना चाहते थे.हन,उस भीड़ मे ऐसे लोगो की तादाद ज़्यादा थी जो की खाने के पॅकेट,1 सारी या कमीज़ & 200 रुपयो के लालच मे आए थे मगर वो भी प्रधान को 1 अच्छा आदमी मानते थे.सभी को बस अब बेसब्री से प्रधान के बोलने का इंतेज़ार था.

"बहनो & भाइयो..",6 फिट लंबा 1 इंसान स्टेज पे आया & लाउडस्पिकर्स पे उसकी आवाज़ गूँजी.तालियो की गड़गड़ाहट से लोगो ने उसका इस्तेक़्बाल किया & उसने अपना भाषण शुरू किया.

"भाई,मानना पड़ेगा ये आदमी बोलता बहुत बढ़िया है.",वेर्मा साहब ने अपने दोस्त से कहा.

"हूँ.",प्रोफेसर गौर से प्रधान को सुन रहा था.

"क्या कहते हो प्रोफेसर?अगर इस बार जनहित जीते तो इसे मुख्यमंत्री बनाना चाहिए?"

"बिल्कुल पर्फेक्ट है ना CM की कुर्सी के लिए.",प्रोफेसर अपने सोफे पे अड़ के बैठ गया & मुस्कुराया,"..ये देखो.",उसने टीवी की ओर इशारा किया,"..42 साल का आदमी,6 फिट का कद,देखने मे हॅंडसम & वाहा देखो..",सन टीवी पे दिख रहे प्रधान के पीछे स्टेज पे बैठे बाकी लोगो की ओर इशारा किया,"..वाहा."

"कौन..अंजलि प्रधान?",दिव्या ने पुचछा.

"हां,उसकी बीवी.दोनो की अरेंज्ड मॅरेज हुई थी.अंजलि भी बड़े माने हुए परिवार से है & दोनो के परिवार वालो ने जब दोनो का रिश्ता तय किया तो दोनो ने उनकी मर्ज़ी पे कोई ऐतराज़ नही जताया.अब दोनो के 2 बच्चे हैं-1 आदर्श हिन्दुस्तानी परिवार.अब ऐसे आदमी को कौन अपना लीडर नही बनाना चाहेगा?"

"प्रोफेसर,माफ़ कीजिएगा..",दिव्या बोली,"..मगर आपकी बातो मे तारीफ नही मज़ाक की महक है."

"अच्छा!",प्रोफेसर ने हैरान होने का नाटक किया,"..आप भी प्रधान की फॅन लगती हैं?..& हो भी क्यू ना!प्रधान इतना हंडसॅम जो है,भाई!",उसने ठहाका लगाया.

"मैं फॅन नही हू..",दिव्या को बहुत ज़ोर का गुस्सा आया,"..लेकिन 1 अच्छे आदमी का मज़ाक क्यू उड़ाएँ भला?"

"दिव्या जी,वो 1 नेता है,पॉलिटीशियन..",प्रोफेसर अब संजीदा था,"..& मेरा मानना है कि नेताओ से बड़ी मतलबी क़ौम दुनिया मे दूसरी नही.तो अगर इस इंसान मे अच्छाइयाँ नज़र आती है तो वो केवल इसलिए क्यूकी ये उसका सत्ता पाने का रास्ता है."

"तो इसमे क्या बुराई है?अगर वो अच्छाई कर रहा है & इसमे उसका फयडा हो तो कौन सा पाप किया उसने?!!आख़िर इसमे आम आदमी का भी तो भला हो रहा है."

"मैं बस 1 बात कहूँगा,दिव्या जी..",प्रोफेसर अब बिल्कुल संजीदा था & दिव्या ने गौर किया की जब वो संजीदा होकर बोलता था तो उसकी भारी आवाज़ बड़ी दिलकश हो जाती थी..इतनी कि..उसने दिमाग़ से उस गुस्ताख ख़याल को निकाला,"..कि अच्छा होना & अच्छा होने का नाटक करना 2 बहुत अलग बाते हैं.कोई इंसान नाटक कितने दिन कर सकता है?आख़िर कभी ना कभी तो वो अपना असली रंग दिखाएगा.आपकी तरह मेरी भी यही ख्वाहिश है कि ये इंसान सचमुच दिल का अच्छा हो & हम सब का भला हो लेकिन क्या करू?ये कम्बख़्त नेता....इन्होने अपनी हर्कतो से हम सबका भरोसा खो दिया है."

डीसीपी वेर्मा मुस्कुराए & प्रधान को सुनने लगे.उस वक़्त प्रधान को सभी सुन रहे थे,वेर्मा साहब,प्रोफेसर & दिव्या जैसे लोग जोकि बस किनारे से ये खेल देख रहे थे & वो भी जिन्होने इस खेल मे दाँव लगाया हुआ था जिसमे से कुच्छ प्रधान के दुश्मन थे,कुच्छ दोस्त & कुच्छ....पता नही.

वॉरेन रोड के 1 छ्होर पे था लोक विकास पार्टी का दफ़्तर,वो पार्टी जिस से जनहित की सीधी टक्कर रहती थी.पार्टी ऑफीस इस वक़्त खाली था & बस उपरी मंज़िल के 1 कमरे मे कुच्छ लोग बैठे टीवी देख रहे थे.

"बात तो माननी पड़ेगी,भैया जी..",1 खड़ी के कुर्ते पाजामे मे बैठे बुज़ुर्ग नेता ने सामने के दीवान पे मसनद से टेक लगाके बैठे टीवी देखते शख्स से कहा,"..प्रधान लफ़ज़ो का जादूगर है & लोगो को बातो के जाल मे फँसा लेता है."

"हूँ.",कमरे मे उन दोनो के अलावा3 लोग और थे 2 मर्द & 1 औरत,"..लेकिन इसे हराना तो होगा ही इस बार नेता जी नही तो आगे जाके ये आदमी केवल राज्य के स्तर पे नही राष्ट्रिया स्तर पे भी हमे तकलीफ़ देगा."

"तो यहा से किस से खड़ा करेंगे इस बार,भैया जी?",इस सवाल से कमरे मे मौजूद सभी लोगो का ध्यान टीवी से हट गया.सभी जानते थे कि प्रधान के खिलाफ खड़ा होना & हारना 1 ही बात है & जिसे भी टिकेट मिला समझो उसका सियासी करियर चौपट हुआ & इस बात का फ़ैसला लेना था केवल भैया जी को.बाकी सभी सीट्स के लिए कमिटी बनी थी जो उमीदवारो का चुनाव करती मगर कुच्छ खास सीट्स जिनमे डेवाले की डेवाले सेंट्रल सीट के बारे मे सारा फ़ैसला बस भाय्या जी के हाथो मे था.और होता भी क्यू ना?भैया जी ही लोक विकास के सब कुच्छ थे,पार्टी की पहचान उन्ही से थी & पिच्छले चुनाव मे पार्टी की हार से वो खार भी खाए बैठे थे.

भैया जी यानी की एमएलए बलदेव काबरा,इस वक़्त असेंब्ली मे ऑपोसिशन का लीडर & राज्य का 1 कद्दावर नेता.कयि साल पहले की बात है जब वो 24 बरस के थे & दुनिया उन्हे केवल बलदेव के नाम से ही जानती थी.राज्य की प्राइवेट मिल्स के वर्कर्स & सरकारी कॉलेजस के टीचर्स को 3 महीने से तनख़्वाह नही मिली थी.बलदेव ने उन सबके लिए आवाज़ उठाई & उन लोगो ने उसे अपना भाई बना लिया.किसी मिल वर्कर ने उसे भैया जी कह के पुकारा था & उस दिन से उसका यही नाम पड़ गया.उस आंदोलन ने सरकार को झुकाया & बलदेव का नाम सियासत के गलियारो मे लिया जाने लगा.उसके बाद वो बलदेव ना रहा भाय्या जी बन गया.इंसानो के कंधो को सीढ़िया बनाके आज वो इस मुक़ाम पे पहुँचा था.

भैया जी अब काफ़ी बदल चुके थे.अब उनकी उम्र 54 बरस थी,सर के बाल सफेद हो चुके थे & जिन लोगो के लिए उन्होने ने उनके मालिको से लड़ाई की थी अब वो उन्ही मालिको के दोस्त बन चुके थे.हर महीने वो दोस्त उन्हे तोहफे देते जिन्हे भाय्या जी विदेश मे महफूज़ रख देते.अब भाय्या जी का मक़सद बस सत्ता,उस से मिलनी वाली ताक़त & दौलत थे & उनकी राह मे जनहित रोड़ा बनी हुई थी & उस रोड़े के पीछे खड़ा था जसजीत प्रधान.

"अभी कुच्छ तय नही किया है.अब इतने नाज़ुक मसले पे थोडा सोच-विचार तो करना ही होगा.",भैया जी मुस्कुराए & टीवी देखने लगे.ये इस आदमी की सबसे बड़ी ख़ासियत थी,ये बहुत कम बोलता था & जो बोलता था उसमे बहुत वज़न होता था.अभी भी उसने बड़ी सफाई से बात टाल दी थी.

"मैं अब चलती हू,भैया जी.नमस्कार!",कमरे की वो अकेली औरत उठ खड़ी हुई.

"ठीक है,राम्या जी.नमस्कार!",भैया जी मुस्कुआराए & फिर से टीवी देखने लगे.कमरे मे बैठे बाकी मर्द थोड़े मायूस हो गये.मायूसी की वजह भी थी,राम्या सेन थी ही इतनी खूबसूरत.38 साल की होने के बावजूद उसका बदन अभी भी बड़ा पूर्कशिष था.5'5" कद की राम्या का बदन वक़्त के साथ थोडा और भर गया था मगर 38 इंच की चूचियाँ & उतनी ही चौड़ी गंद अभी भी कसी-2 लगती थी & चलते वक़्त जब उसकी 32 इंच की कमर लचकति तो उसके बगल के माँस के हिस्से की थरथराहट देख शायद ही किसी मर्द का दिल उसे बाहो मे कसने का ना करता हो.

दिल ही दिल मे आह भर सभी 1 बार फिर जसजीत प्रधान की तक़रीर सुनने लगे.

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क्रमशः...........




KHEL KHILADI KA paart--3

gataank se aage..............
shakhs ki muskurahat halki ho gayi thi magar nigaho ka painapan vaisa hi tha.divya unme apni khubsurti ki tarif saaf dekh rahi thi magar kuchh aur bhi tha uske alawa jise vo samajh nahi pa rahi thi.tabhi us insan ne ishara kiya ki vo pehle baithe to dono ki nazro ki dor tuti & divya 1 sofe pe baith gayi.

"professor,ye ACP Divya Mathur hai."

"oh..to aap hi hain jinki tarifo ke pul mere dost ne fone pe bandhe the."

"haan..are 8 se upar ho gaya.dost,pehle zara ye dekh len fir kaam ki baate karenge?"

"ok."

"divya,tumhe jane ki jaldi to nahi?"

"no,sir.",jaldi to use thi,ajit ke aane ki khabar sunke vo thoda pareshan ho agyi thi & us pareshani ko mitane ke liye usne socha tha ki ghar jake apne bathtub ke gungune pani me baithegi magar apne senior afsar ki baat vo taal nahi sakti thi & fir use is shakhs ke bare me jaanane ki utsukta bhi ho gayi thi.

"good.",verma sahab ne remote utha ke tv on kiya,"..aaj Jasjit Pradhan aaane vale chunav ke liye apna campaign shuru karne vala hai.",vo naam sunte hi divya & professor ki aankhe bhi tv screen se chipak gayi.

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Devalay rajya ki rajdhani thi & vaha ki siyasat ka kendra.4 mahino me rajya ki assembly ke chunav hone vale the & uske liye sabhi siyasi partiyo me gehma-gehmi shuru ho gayi thi.Warren Road ka ilaka jaha ki lagbhag sabhi partiyo ke daftar the chunav ke ticket ki aas me baithe logo se bharne laga tha magar kuchh aise bhi khushnasib the jinhe un logo ki tarah warren road ke daftaro ke chakkar nahi lagane padte the.ye vo log the jinki jeet lagbhag pakki mani jati thi.

unhi me se 1 insan tha jasjit pradhan,Janhit Party ka devalay ki devalay central seat ka MLA.pichhli 2 baar se usne is seat se chunav jita tha.pradhan 1 imandar aadmi tha.siyasat me aise logo ki shayad koi jagah nahi magar jasjit is niyam ka apvad tha.uski party abhi satta me thi & pichhle 3 salo se vo mantri bhi tha magar abhi tak uska naam kisi bhi ghotale ya scandal me nahi aya tha.zyadatar log uski badi izzat karte the & unka maanana tha ki ab waqt aa gaya hai ki jasjit pradhan ko badi zimmedari saunpi jaye jaise ki rajya ke mukhyamantri ki.

maujooda mukhyamantri ko ye baat bilkul bhi achhi nahi lagi thi lekin 1 to janta ki pasand upar se janhit party ke high command ka bhi yehi maanana tha ki aise lokpriya neta ko aage lana hi chahiye.to aaj Dussehra maidan,jaha devalay ki lagbhag har badi rally ya fir jalsa hota tha,khachakhach bhara tha,un logo ki bheed se jo apne manpasand neta ko sunana,dekhna chahte the.haan,us bheed me aise logo ki taadad zyada thi jo ki khane ke packet,1 sari ya kamiz & 200 rupayo ke lalach me aye the magar vo bhi pradhan ko 1 achha aadmi mante the.sabhi ko bas ab besabri se pradhan ke bolne ka intezar tha.

"behno & bhaiyo..",6 ft lamba 1 insan stage pe aya & loudspeakers pe uski aavaz gunji.taliyo ki gadgadahat se logo ne uska isteqbal kiya & usne apna bhashan shuru kiya.

"bhai,maanana padega ye aadmi bolta bahut badhiya hai.",verma sahab ne apne dost se kaha.

"hun.",professor gaur se pradhan ko sun raha tha.

"kya kehte ho professor?agar is baar janhit jeete to ise mukhyamantri banana chahiye?"

"bilkul perfect hai na CM ki kursi ke liye.",professor apne sofe pe ad ke baith gaya & muskuraya,"..ye dekho.",usne tv ki or ishara kiya,"..42 saal ka aadmi,6 ft ka kad,dekhne me handsome & vaha dekho..",sune tv pe dikh rahe pradhan ke peechhe stage pe baithe baki logo ki or ishara kiya,"..vaha."

"kaun..Anjali Pradhan?",divya ne puchha.

"haan,uski biwi.dono ki arranged marriage hui thi.anjali bhi bade mane hue parivar se hai & dono ke parivar valo ne jab dono ka rishta tay kiya to dono ne unki marzi pe koi aitraz nahi jataya.ab dono ke 2 bachche hain-1 adarsh hindustani parivar.ab aise aadmi ko kaun apna leader nahi banana chahega?"

"professor,maaf kijiyega..",divya boli,"..magar aapki baato me tarif nahi mazak ki mahak hai."

"achha!",professor ne hairan hone ka natak kiya,"..aap bhi pradhan ki fan lagti hain?..& ho bhi kyu na!pradhan itna handsoome jo hai,bhai!",usne thahaka lagaya.

"main fan nahi hu..",divya ko bahut zor ka gussa aya,"..lekin 1 achhe aadmi ka mazak kyu udayen bhala?"

"divya ji,vo 1 neta hai,politician..",professor ab sanjida tha,"..& mera maanana hai ki netao se badi matlabi qaum duniya me dusri nahi.to agar is insan me achhaiyan nazar aati hai to vo kewal isliye kyuki ye uska satta pane ka rasta hai."

"to isme kya burai hai?agar vo achhai kar raha hai & isme uska fayda ho to kaun sa paap kiya usne?!!aakhir isme aam aadmi ka bhi to bhala ho raha hai."

"main bas 1 baat kahunga,divya ji..",professor ab bilkul sanjida tha & divya ne gaur kiya ki jab vo sanjida hokar bolta tha to uski bhari aavaz badi dilkash ho jati thi..itni ki..usne dimagh se us gustakh khayal ko nikala,"..ki achha hona & achha hone ka natak karna 2 bahut alag baate hain.koi insan natak kitne din kar sakta hai?aakhir kabhi na kabhi to vo apna asli rang dikhayega.aapki tarah meri bhi yahi khwahish hai ki ye insan sachmuch dil ka achha ho & hum sab ka bhala ho lekin kya karu?ye kambakht neta....inhone apni harkato se hum sabka bharosa kho diya hai."

DCP verma muskuraye & pradhan ko sunane lage.us waqt pradhan ko sabhi sun rahe the,verma sahab,professor & divya jaise log joki bas kinare se ye khel dekh rahe the & vo bhi jinhone is khel me danv lagaya hua tha jisme se kuchh pradhan ke dushman the,kuchh dost & kuchh....pata nahi.

warren road ke 1 chhor pe tha Lok Vikas Party ka daftar,vo party jis se janhit ki seedhi takkar rehti thi.party office is waqt khali tha & bas upri manzil ke 1 kamre me kuchh log baithe tv dekh rahe the.

"baat to maanani padegi,Bhaiya Ji..",1 khadi ke kurte pajame me baithe buzurg neta ne samne ke divan pe masnad se tek lagake baithe tv dekhte shakhs se kaha,"..pradhan lafzo ka jadugar hai & logo ko baato ke jaal me fansa leta hai."

"hun.",kamre me un dono ke alawa3 log aur the 2 mard & 1 aurat,"..lekin ise harana to hoga hi is baar neta ji nahi to aage jake ye admi keval rajya ke star pe nahi rashtriya star pe bhi hume taklif dega."

"to yaha se kis se khada karenge is baar,bhaiya ji?",is saval se kamre me maujood sabhi logo ka dhyan tv se hat gaya.sabhi jante the ki pradhan ke khilaf khada hona & haarna 1 hi baat hai & jise bhi ticket mila samjho uska siyasi career chaupat hua & is baat ka faisla lena tha keval bhaiya ji ko.baki sabhi seats ke liye committe bani thi jo umeedvaro ka chunav karti magar kuchh khas seats jinme devalay ki devalay central seat ke bare me sara faisla bas bhaiyya ji ke hatho me tha.aur hota bhi kyu na?bhaiya ji hi lok vikas ke sab kuchh the,party ki pehchan unhi se thi & pichhle chunav me party ki haar se vo khar bhi khaye baithe the.

bhaiya ji yani ki MLA Baldev kabra,is waqt assembly me opposition ka leader & rajya ka 1 kaddavar neta.kayi saal pehle ki baat hai jab vo 24 baras ke the & duniya unhe keval baldev ke naam se hi janti thi.rajya ki private mills ke workers & sarkari colleges ke teachers ko 3 mahine se tankhwah nahi mili thi.baldev ne un sabke liye aavaz uthayi & un logo ne sue apna bhai bana liya.kisi mill worker ne sue bhaiya ji keh ke pukara tha & us din se uska yehi naam pad gaya.us andolan ne sarkar ko jhukaya & baldev ka naam siyasat ke galiyaro me liya jane laga.uske baad vo baldev na raha bhaiyya ji ban gaya.insano ke kandho ko seedhiya banake aaj vo is muqam pe pahuncha tha.

bhaiya ji ab kafi badal chuke the.ab unki umra 54 baras thi,sar ke baal safed ho chuke the & jin logo ke liye unhone ne unke maliko se ladayi ki thi ab vo unhi maliko ke dost ban chuke the.har mahine vo dost unhe tohfe dete jinhe bhaiyya ji videsh me mehfuz rakh dete.ab bhaiyya ji ka maqsad bas satta,us se milni vali taqat & daulat the & unki raah me janhit roda bani hui thi & us rode ke peechhe khada tha jasjit pradhan.

"Abhi kuchh tay nahi kiya hai.ab itne nazuk masle pe thoda soch-vichar to karna hi hoga.",Bhaiya Ji muskuraye & tv dekhne lage.ye is aadmi ki sabse badi khasiyat thi,ye bahuty kam bolta tha & jo bolta tha usme bahut vazan hota tha.abhi bhi usne badi safai se baat taal di thi.

"main ab chalti hu,bhaiya ji.namaskar!",kamre ki vo akeli aurat uth khadi hui.

"thik hai,Ramya ji.namaskar!",bhaiya ji muskuaraye & fir se tv dekhne lage.kamre me baithe baki mard thode mayus ho gaye.mayusi ki vajah bhi thi,Ramya Sen thi hi itni khubsurat.38 saal ki hone ke bavjood uska badan abhi bhi bada purkashish tha.5'5" kad ki ramya ka badan waqt ke sath thoda aur bhar gaya tha magar 38 inch ki chhatiya & utni hi chaudi gand abhi bhi kasi-2 lagti thin & chalte waqt jab uski 32 inch ki kamar lachakti to uske bagal ke mans ke hisse ki thartharahat dekh shayad hi kisi mard ka dil use baaho me kasne ka na karta ho.

dil hi dil me aah bhar sabhi 1 baar fir Jasjit Pradhan ki taqrir sunane lage.

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kramashah...........






आपका दोस्त राज शर्मा साधू सा आलाप कर लेता हूँ ,मंदिर जाकर जाप भी कर लेता हूँ ..मानव से देव ना बन जाऊं कहीं,,,,बस यही सोचकर थोडा सा पाप भी कर लेता हूँआपका दोस्तराज शर्मा(¨`·.·´¨) Always`·.¸(¨`·.·´¨) Keep Loving &(¨`·.·´¨)¸.·´ Keep Smiling !`·.¸.·´ -- raj

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Posted By .....raj..... to Kamuk Kahaniyan.Com कामुक-कहानियाँ.ब्लॉगस्पोट.कॉम at 11/02/2010 03:30:00 AM


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